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मंदिर बचाने के लिए मुस्लिमों ने बनाई ह्यूमन चेन- लिबरलों ने खूब गढ़ा नैरेटिव, पर बच नहीं पाए बेंगलुरु के इस्लामी दंगाई: इकरामुद्दीन, आतिफ और सैयद को 7 साल की सजा

बेंगलुरु की एक विशेष NIA अदालत ने अगस्त, 2020 में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ के दंगे पर सजा सुनाई है। बेंगलुरु की अदालत ने इस्लामी भीड़ के पुलिस थाने पर हमले के मामले में यह सजा सुनाई है। इस दंगे में इस्लामी भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक के घर पर हमला बोला था और पुलिस थानों को भी जला दिया था। इस हमले में प्रतिबंधित संगठन PFI और उसकी राजनीतिक विंग SDPI के लोगों के शामिल होने के सबूत NIA को मिले थे। दंगे के बाद लिबरल-वामपंथी गैंग मुस्लिमों की ‘ह्यूमन चेन’ वाला नैरेटिव चलाया था।

NIA कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?

बेंगलुरु की एक विशेष NIA अदालत ने सैयद इकरामुद्दीन उर्फ सैयद नवीद, सैयद आतिफ और मोहम्मद आतिफ को सजा सुनाई है। उन्हें 7 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है। उन्होंने इस मामले में आरोप तय किए जाने के दौरान ही इस्लामी भीड़ वाले दंगे में शामिल होना कबूल कर लिया था।

इन तीनों को NIA कोर्ट ने UAPA, कर्नाटक सम्पत्ति एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई है। NIA कोर्ट को सरकारी वकील प्रसन्ना ने जनता में विश्वास वापस पैदा करने वाला बताया है।

उन्होंने कहा, “यह फैसला पुलिस बलों में जनता का विश्वास बहाल करता है और साथ ही PFI को गैरकानूनी घोषित करने के केंद्र के फैसले को वैध ठहराता है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पर हमले जनता का विश्वास डिगाते हैं।

उन्हें जहाँ इस मामले में सजा सुना दी गई है, बाकी आरोपितों के खिलाफ अभी मुकदमा चालू होना है। इस मामले में 199 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था जबकि 180 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए थे। इनके खिलाफ अभी आरोप तय करके मुकदमा चालू किया जाना है और बहस होनी है।

इस्लामी भीड़ ने थाने-कॉन्ग्रेस MLA के घर पर किया था हमला

11 अगस्त 2020 की रात पूर्वी बेंगलुरु में दंगे और आगजनी का भीषण नज़ारा देखने को मिला था। केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। 1000 से भी अधिक की इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया था और तोड़फोड़ शुरू कर दी थी।

इस्लामी भीड़ का कहना था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया है। उन्होंने आसपास कड़ी हिन्दुओं की कई गाड़ियाँ जला दी थीं। घटों तक यह दंगा फसाद चलता रहा था। उन्होंने विधायक की बहन के घर भी हमला किया था। इसके अलावा DJ हल्ली और HJ हल्ली पुलिस थानों को भी आग लगा दी थी।

इस मामले में बाद में हुई जाँच में सामने आया था कि इस्लामी भीड़ का यह दंगा पूर्व प्रायोजित था। पता चला था कि PFI से जुड़े मुजम्मिल पाशा और SDPI के लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जाँच NIA को सौंपी गई थी, इसमें सामने आया था कि दंगा करने को पैसा भी बांटा गया था। तीन दंगाई मारे भी गए थे।

लिबरल-वामपंथी गैंग चला रहा था ‘ह्यूमन चेन’ वाली थ्योरी

जहाँ एक ओर इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ आधे बेंगलुरु को जलाने पर तुली हुई थी तो वहीं लिबरल-वामपंथी गैंग इस दौरान उसे बचाने को अलग ही थ्योरी गढ़ रहा था। इस दौरान उन्होंने एक वीडियो वायरल किया था जिसमें एक मुस्लिम भीड़ एक मंदिर के बाहर खड़ी थी।

लिबरलों का दावा था कि यह मुस्लिम इस मंदिर को मानव शृंखला बना कर दंगाइयों से बचा रहे थे। इस वीडियो को राजदीप सरदेसाई जैसे लिबरल पत्रकारों से लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं तक ने खूब प्रसारित किया था। हालाँकि, बाद में यह भी सामने आया था कि इस वीडियो को संभवतः स्क्रिप्ट करके बनाया गया था क्योंकि इसे जल्दी अपलोड किया जाना था।

42 साल बाद एक साथ खुले मंदिर-गुरुद्वारा के द्वार, एकसाथ गूँजेगी ‘गुरुवाणी’ और ‘जय श्रीराम’: 1984 के दंगों में जड़ा गया था ताला, CM योगी और दोनो पक्षों की सुलह लाई रंग

वाराणसी के जगतगंज इलाके में एक धार्मिक स्थल पिछले 42 वर्सों से विवाद के चलते बंद पड़ा था। इसे अब दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह स्थल जहाँ एक ओर से सिखों के पवित्र गुरुद्वारे के रूप में जाना जाता है और दूसरी ओर से हिंदू समुदाय के लिए बड़े हनुमान मंदिर के रूप में श्रद्धा का केंद्र रहा है।

1984 के दंगों के दौरान इस जगह को प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप नारायण सिंह की मध्यस्थता और दोनों पक्षों की सहमति के बाद अब इसे फिर से खोल दिया गया है। सोमवार (21 जुलाई 2025) को परिसर के दरवाजे पर लगे जंग लगे ताले हटने के बाद सिख और हिंदू समुदाय के लोगों में खुशी की लहर है।

फोटो साभार – हिंदुस्तान

मंदिर और गुरुद्वारे का इतिहास

रिपोर्ट के अनुसार, इस जगह का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व दोनों समुदायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुसार, सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर करीब दो सौ साल पहले जब काशी आए थे, तब वे नीचीबाग क्षेत्र (जहाँ वर्तमान में गुरुद्वारा है) में रुके थे।

वे अपने अनुयायियों से मिलने के लिए कई बार जगतगंज भी आए थे। इसलिए यह भूमि सिख समुदाय के लिए पूजनीय मानी जाती है। समय के साथ यहाँ एक गुरुद्वारा भी स्थापित हुआ। वहीं हिंदू समुदाय द्वारा यहाँ श्री बड़े हनुमान मंदिर की स्थापना की गई थी। दोनों धार्मिक स्थल कई सालों से अस्तित्व में रहे और लोगों की आस्था का केंद्र बने रहे।

क्यों बंद किया गया था धार्मिक स्थल?

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। जगतगंज में स्थित यह स्थल गुरुद्वारा और मंदिर दोनों के लिए एक स्थान था।

इसलिए प्रशासन ने किसी भी सांप्रदायिक तनाव या टकराव को रोकने के उद्देश्य से इस स्थल को सील कर दिया। उस समय मंदिर और गुरुद्वारा दोनों का पूरा तरह से निर्माण नहीं हुआ था। जिले में बढ़ते तनाव को देखते हुए, प्रशासन ने इस जगह को पूरी तरह बंद कर दिया ताकि कोई हादसा न हो।

विवाद कैसे बढ़ा और क्या-क्या हुआ?

समय बीतने के साथ, इस जमीन के मालिक हक और कब्जे को लेकर दोनों समुदायों के बीच विवाद गहराता चला गया। जिसके बाद मंदिर प्रबंध समिति और गुरुद्वारा प्रबंध समिति, दोनों ने ही उस जगह को लेकर अपना-अपना दावा किया।

यह विवाद लोकल कोर्ट में पहुँच गया, जहाँ यह मामला कई दशकों तक लंबित रहा। तीन हजार से साढ़े तीन हजार वर्गफीट भूमि को लेकर चल रहे इस विवाद में समय-समय पर अस्थायी निर्माण होते रहे, जिससे विवाद बढ़ता गया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। इस दौरान धार्मिक भावनाएँ भी गहराती रहीं, जिससे विवाद बढ़ता  गया।

लगभग दो महीने पहले स्वतंत्रता सेनानी बाबू जगत सिंह के वंशज और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप नारायण सिंह ने एक बार फिर दोनों पक्षों को सुलह के लिए तैयार किया। इसके बाद दोनो पक्षों में कई बार बातचीत भी हुई।

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह प्रक्रिया और तेज हुई। आखिरकार श्री बड़े हनुमान मंदिर समिति के व्यवस्थापक श्याम नारायण पांडे और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार करन सिंह सभरवाल के बीच सहमति बनी। दोनों ने यह तय किया कि भूमि को बराबर-बराबर बाँट दिया जाएगा और दोनों समुदाय अपनी-अपनी आस्था के अनुसार गुरुद्वारा और मंदिर का निर्माण करेंगे।

वाराणसी की गंगा-जमुनी तहजीब एक बार फिर दुनिया के सामने एक आदर्श बनकर उभरी है, जहाँ इस ऐतिहासिक समझौते के बाद दोनों पक्षों ने अदालत में सुलहनामा दाखिल किया और जिला प्रशासन से जगह को फिर से खोलने की अनुमति माँगी।

जिसके बाद वाराणसी के अतिरिक्त नगर मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार की निगरानी में आवश्यक जाँच-पड़ताल पूरी हुई। सोमवार (21 जुलाई 2025) को ताले तोड़े गए और जगह को दोनों समुदायों के लिए खोल दिया गया।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह अहलूवालिया ने इसे सिख समुदाय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि जल्द ही यहाँ भव्य गुरुद्वारा बनेगा, जहाँ दुनिया भर से सिख श्रद्धालु दर्शन के लिए आएँगे। वहीं मंदिर समिति भी इस जगह पर बड़े हनुमान जी के भव्य मंदिर के निर्माण की तैयारी में है।

₹3000 करोड़ का लेन-देन, 35 जगहों पर तलाशी, 25 लोगों से पूछताछ…अनिल अंबानी से जुड़ी 50 कंपनियों पर ED ने मारा छापा, सीबीआई की शिकायत पर एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार (23 जुलाई 2025) को अनिल अंबानी से जुड़ी कई कंपनियों पर छापेमारी की है। ईडी ने अनिल अंबानी की कंपनियों और यस बैंक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ये एक्शन लिया है।

जानकारी के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुंबई और दिल्ली में ईडी अधिकारियों ने कथित तौर पर मामले से जुड़ी 50 से ज्यादा कंपनियों पर छापे मारे और उनके रिकॉर्ड की भी जाँच की। यह छापेमारी केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई FIR के बाद की गई है।

दरअसल, मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला CBI की FIR, राष्ट्रीय आवास बैंक, सेबी, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा साझा की गई रिपोर्टों से सामने आया है।

इस दौरान 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ भी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की ओर से लगभग 35 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। एजेंसी की शुरुआती जाँच में बैंकों, शेयरधारकों, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को धोखा देकर पैसो की हेराफेरी करने का खुलासा हुआ है।

जाँच में पता चला है कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से लगभग 3000 करोड़ रुपये के लोन का अवैध रूप से गलत इस्तेमाल किया गया था। वहीं लोन मंजूरी से पहले यस बैंक के प्रमोटरों की कंपनियों को धनराशि मिली थी। यस बैंक के प्रमोटर समेत बैंक अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले की भी आशंका जताई गई है।

ईडी द्वारा की जा रही इस कार्रवाई के बाद अनिंल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रा के शेयर पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। दोनों कंपनियों के शेयरों में 5-5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, रिलायंस पावर के शेयर 5 फीसदी की गिरावट के साथ 59.77 रुपये के स्तर पर और रिलायंस इन्फ्रा के शेयर लगभग 5 फीसदी की गिरावट के साथ 360 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं।

जो खुली सीमा मणिपुर में हिंसा की जिम्मेदार, जिससे ड्रग्स तस्करी का बना अड्डा; उसकी बाड़बंदी का क्यों विरोध कर रहे नागा-कुकी संगठन: ₹20000 करोड़ खर्च कर म्यांमार सीमा को सील कर रही भारत सरकार

देश की सीमा की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत ने म्यांमार के साथ लगने वाली 1,643 किलोमीटर लंबी खुली और असुरक्षित सीमा पर बाड़ (फेंसिंग) लगाने का बड़ा फैसला लिया है। यह काम बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा अगले दस सालों में कई चरणों में पूरा किया जाएगा।

इस परियोजना में लगभग 20,000 करोड़ सिर्फ बाड़ लगाने पर खर्च होंगे। इसके अलावा 11,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से 60 से अधिक बॉर्डर सड़कों का निर्माण भी किया जाएगा। इस परियोजना के तहत 1,500 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी, जिसमें से 300 किलोमीटर हिस्से में इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी होगी।

इसका मुख्य उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करना और खासतौर पर पूर्वोत्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करना है। यह कदम मणिपुर में लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा को देखते हुए उठाया गया है। कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हालात सामान्य नहीं हुए हैं।

हिंसा के कारण राज्य में अब तक 60,000 से अधिक लोग आंतरिक रूप से बेघर हो चुके हैं। वहीं, राज्य से लगभग 6,000 हथियार लूटे गए, जिनमें से आधे से भी कम अब तक बरामद हो पाए हैं। इसके अलावा, फरवरी 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद वहाँ सेना और विद्रोही गुटों के बीच चल रही लड़ाई के कारण 31,000 से अधिक लोग सीमा पार करके भारत में शरण ले चुके हैं।

म्यांमार में जारी अस्थिरता के कारण भारत-म्यांमार सीमा पर हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। हाल के छह-सात महीनों में सीमा पर करीब 1,125 करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि तस्करी, मानव तस्करी और सशस्त्र घुसपैठ के मामलों में तेजी आई है।

इसी के चलते भारत सरकार सीमा पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रेजीम (FMR) को खत्म करने की योजना पर काम कर रही है। FMR के तहत भारत और म्यांमार के सीमावर्ती लोग बिना वीजा के 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के देश में जा सकते थे।

इसे लेकर मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के सीमावर्ती समुदायों ने इस योजना का विरोध किया है। कुकी समुदायों के प्रमुख संगठनों का कहना है कि ये दोनों कदम उनकी पारंपरिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

विरोध करने वालों का मानना है कि फेंसिंग से उन समुदायों को नुकसान होगा जिनके पारिवारिक, जातीय और सांस्कृतिक रिश्ते सीमा के दोनों ओर बसे लोगों से जुड़े हैं। इससे आपसी व्यापार, संपर्क और सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। हालाँकि सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस फेंसिंग का मकसद आम नागरिकों की आवाजाही रोकना या रिश्ते तोड़ना नहीं है।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत बाड़ पर बायोमेट्रिक सिस्टम से लैस गेट लगाए जाएँगे, जिससे स्थानीय लोग तय प्रक्रिया के तहत आ-जा सकें। ये गेट स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत कर स्थापित किए जाएँगे, ताकि सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंध दोनों बने रहें।

भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का मुख्य उद्देश्य हथियारबंद समूहों की आवाजाही पर रोक लगाना, हथियारों, ड्रग्स, मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ को रोकना है। एक सरकारी सूत्र के अनुसार, मणिपुर के मोरेह इलाके में 10 किलोमीटर लंबी बाड़ का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

इसे सुरक्षा बढ़ाने और व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम बताया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह पहल वैध व्यापार गतिविधियों को भी आसान बनाएगी और इससे स्थानीय लोगों को तो आर्थिक लाभ मिलेगा ही साथ ही अवैध व्यापार पर भी रोक लगेगी।

हालाँकि इस परियोजना का नागा संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। मणिपुर के कई प्रमुख नागा संगठन जैसे यूनाइटेड नागा काउंसिल, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, नागा वूमेन यूनियन और नागा पीपल्स मूवमेंट फॉर ह्यूमन राइट्स साउथ ने राज्यपाल के माध्यम इसके खिलाफ गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को एक याचिका सौंपी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि इस सीमा बाड़बंदी को तुरंत रोका जाए और FMR को 20 दिनों के भीतर फिर से लागू किया जाए।

इन नागा संगठनों ने इस फैसले के विरोध में कई तरह के आंदोलन शुरू किए हैं। इसमें नागा-बहुल इलाकों में सरकारी दफ्तरों का घेराव और जिला स्तर पर रैलियाँ शामिल हैं। वे FMR को खत्म करने और सीमा पर बाड़ लगाने के खिलाफ कड़ा विरोध जता रहे हैं।

इससे पहले भी इस सीमा क्षेत्र में तनाव देखने को मिला है। जुलाई 2023 में हथियारबंद उग्रवादियों ने कुछ इमारतों को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया। लेकिन इसके कुछ समय बाद कुकी उग्रवादी वहाँ पहुँचे और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

यह घटना लूटपाट और आगजनी से जुड़ी थी, जिसमें कई निजी घरों को जला दिया गया था। एक पत्रकार का घर भी आग के हवाले कर दिया गया था। ऐसा बताया गया कि यह इलाका कथित तौर पर उन मैतेई (Meitei) समुदाय के लोगों को दिया गया था जो पहले हुई हिंसा की वजह से वहाँ से भाग गए थे।

ऐसा संदेह है कि यह हमला पड़ोसी देश म्यांमार (पहले बर्मा) से किया गया था। मामले की जाँच शुरू की गई और 4 से 5 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 700 से ज्यादा अवैध प्रवासी म्यांमार से भारत में घुसे हैं। असम राइफल्स ने चंदेल और मणिपुर पुलिस को इसकी जानकारी दी है।

वरिष्ठ पत्रकार वासबीर हुसैन ने जानकारी देते हुए बताया कि मणिपुर सरकार ने असम राइफल्स को इन 718 नए अवैध प्रवासियों को वापस भेजने (Deport) का आदेश दिया है। उन्होंने आगे बताया, “मोरेह के दूसरी तरफ़ बर्मा का तामू शहर है जो भारत-म्यांमार मैत्री पुल से जुड़ा है और जहाँ भारतीय और म्यांमार के लोग लगभग 10 से 20 किलोमीटर की दूरी से आ-जा सकते हैं। इसके लिए किसी दस्तावेज़ की ज़रूरत नहीं है। बस गेट पर एंट्री करनी होती है। आपको तामू के अंदर जाने और वापस आने की इजाज़त है। सीमावर्ती शहर की यही स्थिति है।”

बता दें कि मोरेह मणिपुर का एक सीमावर्ती शहर है, वहाँ कुकी और मैतेई समुदाय के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में तमिल, मलयाली, हिंदू, बौद्ध भी रहते हैं। हाल ही में हुई हिंसा की पहली लहर में मीतैई समुदाय पर हमले हुए, जिससे उन्हें शहर छोड़कर इंफाल घाटी के राहत शिविरों में जाना पड़ा। इसके साथ ही म्यांमार से लगी कुछ पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाएँ खासकर मिजोरम, अब ड्रग्स की तस्करी के लिए एक बड़े रास्ते के रूप में उभर रही हैं।

मिजोरम के जरिए याबा टैबलेट्स (यह मेथामफेटामिन या मेथ नामक नशीली दवा होती है) और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों तक पहुँचाई जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन नशीली दवाओं की तस्करी से म्यांमार के कुछ आतंकी गुटों को भी फायदा पहुँच रहा है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए, मिजोरम की कई स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) ने म्यांमार के साथ लगी सीमा पर एक लंबी बाड़ लगाने की माँग की है। दरअसल फरवरी से मार्च 2025 के बीच ड्रग्स की 1,36,526 अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.1 करोड़ रुपये) की खेप जब्त की गई थी, जिससे इस खतरे की गंभीरता और बढ़ गई है।

मूल रुप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में चंद्रानी दास ने लिखी है। इसे सौम्या सिंह ने अनुवाद किया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

16 साल के स्टूडेंट से सेक्स करने वाली टीचर को जज सबीना मलिक ने दी जमानत, कहा- सहमति से बने संबंध: पीड़ित ने बताया था- दवा खिला-खिलाकर बनाती थी संबंध

मुंबई की 17 वर्षीय छात्र का शारीरिक शोषण करने वाली 40 साल की महिला टीचर को जमानत दे दी गई है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। इसके सबूत भी कोर्ट को मिले हैं। पीड़ित छात्र ने इस जमानत का विरोध किया है।

स्पेशल POCSO कोर्ट की जज सबीना ए मलिक ने जमानत याचिका सुनते हुए कहा, “पीड़ित की उम्र 17 साल से ज्यादा है। उधर, आरोपित टीचर ने भी स्कूल से इस्तीफा दे दिया है, इसीलिए टीचर और छात्र का रिश्ते का प्रभाव भी कम हो गया है।” जज ने आगे कहा कि मुकदमा शुरू होने में समय लगेगा और आरोपित को जेल में रखने से कोई फायदा नहीं है।

उधर, पीड़ित छात्र के वकील ने टीचर की जमानत का छात्र के मानसिक उत्पीड़न का कारण देते हुए विरोध किया। पीड़ित के वकील ने कहा कि अगर टीचर को जमानत मिलती है तो वह दोबारा से छात्र का शोषण शुरू कर देगी। इसके अलावा सबूतों से भी छेड़छाड़ कर सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे में टीचर की जमानत के लिए कुछ शर्तें रखी जा सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने टीचर की जमानत के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोपित टीचर पीड़ित छात्र या किसी भी गवाह से ना ही मिल सकती है और ना ही किसी भी तरीके से संपर्क या धमकाने की कोशिश करेगी। जज ने कहा कि अगर इनमें से किसी भी शर्तों का उल्लंघन होता है तो जमानत तुंरत रद्द कर दी जाएगी।

क्या था मामला?

महाराष्ट्र के मुंबई के प्रतिष्ठित स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाली महिला टीचर पर अपने ही छात्र के शारीरिक शोषण का आरोप लगा था। बताया गया कि 1 साल तक महिला टीचर ने 17 साल के छात्र संग संबंध रखा। छात्र को होटल में ले जाकर शराब पीने का भी दबाव बनाया। इससे तंग आकर छात्र डिप्रेशन में चला गया।

इसके बाद छात्र के माता-पिता ने स्कूल बदलवा दिया। लेकिन महिला टीचर ने दोबारा से छात्र से संपर्क बनाए। इस पर माता-पिता ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया था। मामला सामने आने के बाद महिला टीचर ने भी स्कूल से इस्तीफा दे दिया। महिला टीचर को 29 जून 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया था। टीचर पर POCSO एक्ट में मामला दर्ज किया गया था।

तहव्वुर राणा ने आतंकी टारगेट फिक्स करने को 2 साल तक चलाया था मुंबई में फर्जी ऑफिस, 2005 से चालू कर दिया था 26/11 हमले पर काम: NIA की चार्जशीट में खुलासा

एनआईए ने 26/11 मुंबई हमले को लेकर बुधवार (23 जुलाई 2025) को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पूरक चार्जशीट दायर की है। इसमें तहव्वुर राणा को हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। 2008 में मुंबई में हुए इस हमले में 170 लोगों की मौत हुई थी।

एनआईए के पूरक चार्जशीट में क्या है?

एनआईए के मुताबिक राणा 2005 से आपराधिक साजिश में न सिर्फ शामिल था, बल्कि मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता था।

चार्जशीट के अनुसार, तहव्वुर राणा ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली को मुंबई में मदद की। इतना ही नहीं तहव्वुर राणा ने भारत के खिलाफ ‘युद्ध छेड़ने’ के लिए पाकिस्तान के आतंकियों के साथ मिल कर आपराधिक साजिश रची। उसका मकसद भारत की एकता और सुरक्षा को कमजोर करना और लोगों में दहशत फैलाना था।

मुंबई में खोला था कॉर्पोरेट ऑफिस

मुंबई हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए तहव्वुर राणा ने मुंबई के ताड़देव एसी मार्केट में आप्रवासी कानून केन्द्र कार्यालय खोला। यहाँ कोई काम नहीं होता था बल्कि इससे आतंकी हेडली को मदद दी जाती थी। ये ऑफिस करीब 2 साल तक चला। एजेंसी का कहना है कि इस कार्यालय का इस्तेमाल डेविड कोलमैन हेडली ने हमले का टारगेट फिक्स करने के लिए किया।

इसमें आगे कहा गया है, “कार्यालय दो साल से ज्यादा समय तक अभियुक्त डेविड कोलमैन हेडली (ए-1) को दी गई वित्तीय और रसद सहायता के कारण संचालित रहा। इसका संचालन अभियुक्त तहव्वुर हुसैन राणा (ए-2) ने किया था।”

एजेंसी ने पुलिस हिरासत के दौरान अभियुक्तों ने जो खुलासे किए हैं, उसकी पुष्टि के लिए अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया है और पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध (एमएलएआर) भी जारी किया है। एनआईए का मानना है कि माँगी गई जानकारी सबूतों और दावों की पुष्टि करेगी।

तहव्वुर राणा को भारत लाने के बाद जाँच में तेजी

लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद तहव्वुर राणा को 2025 की शुरुआत में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद उसका स्थानांतरण संभव हुआ। कोर्ट ने स्थानांतरण रोकने की अपील को खारिज कर दिया और मुकदमे का सामना करने के लिए भारत भेजा।

राणा को विशेष एनआईए अदालत ने 10 अप्रैल, 2025 को हिरासत में लिया था। अधिकारी उसकी गिरफ्तारी को मुंबई आतंकी हमले को लेकर की गई साजिशों की जाँच में काफी अहम मानते हैं।

राणा पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, हत्या और आतंकवाद, जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ये आरोप भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 121 (युद्ध छेड़ना), 302 (हत्या), 468 और 471 (जालसाजी) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16 और 18 के तहत दर्ज किए गए हैं।

हाथ में तिरंगा, जुबाँ पर ‘मोदी-मोदी’… ब्रिटेन में प्रधानमंत्री को देख झूमे भारतीय प्रवासी: UK के साथ करेंगे ट्रेड डील, हर साल ₹3 लाख करोड़ का बढ़ेगा व्यापार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन की दो दिवसीय दौरे पर लंदन पहुँचे हैं। 23–24 जुलाई 2025 को इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा,व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों के लिहाज से रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है।

गुरुवार (24 जुलाई 2025) को लंदन पहुँचने के बाद पीएम मोदी का स्वागत भारतीय समुदाय ने किया। इस दौरान लोगों को हाथों में तिरंगा था और बच्चे सांस्कृतिक परिधानों में नजर आ रहे थे। पीएम अपने लोगों से मिले तो हर तरफ ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूँजने लगे। ब्रिटेन में भारतीय मूल के लगभग 1.8 मिलियन (18 लाख) प्रवासी भारतीय रहते हैं।

पीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भारतीयों के द्वारा किए स्वागत को ‘वास्तव में हृदयस्पर्शी’ कहा। उन्होंने कई तस्वीरें भी पोस्ट की।

पीएम मोदी ने लिखा, “यूके में भारतीय समुदाय के गर्मजोशी भरे स्वागत से अभिभूत हूँ। भारत के विकास में उनका लगाव और जुनून वाकई प्रेरणादायक है।”

दोनों देशों के मुखिया आज करेंगे साइन

इस यात्रा का केंद्र बिंदु भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड डील या मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है। केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। पीएम मोदी इस पर हस्ताक्षर कर मूर्त रूप देने के लिहाज से ही लंदन पहुँचे हैं।

दोनों देशों के बीच होने वाले इस समझौते में हर साल 25.5 अरब पाउंड यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा इस समझौते के चलते हजारों नौकरियाँ निकलेंगी और अर्थव्यवस्था में बढ़त दर्ज होगी।

यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर गुरुवार को पीएम मोदी की मेजबानी करेंगे। इसी दौरान FTA के समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। इस दौरान लगभग 6 अरब पाउंड (627 अरब रुपए) के निवेश और निर्यात पर सौदे की घोषणा भी की गई है। अपनी यात्रा में पीएम मोदी किंग चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करेंगें।

कई चीजें होंगी सस्ती

FTA समझौते के बाद दोनों देशों को कई सेक्टर में लाभ मिलेगा। इसके तहत ब्रिटेन को शराब और अन्य मादक पेय में सस्ती दरों का लाभ मिलेगा। इसके अलावा दोनों देशों में कुछ चीजें सस्ती दरों पर मुहैया होने के आसार हैं। इसमें कपड़ा, रत्न, आभूषण, चमड़ा, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट से जुड़ा सामान, आईटी और अन्य व्यावसायिक सेवाओं में जगह, फार्मास्युटिकल्स और सर्जिकल उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण, चाय, मसाले और समुद्री उत्पाद, केमिकल और उससे जुड़े सामान, ग्रीन एनर्जी और अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के सेक्टर शामिल हैं।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 के बाद लंदन की यह तीसरी यात्रा है। उनकी पहली यात्रा नवंबर 2015 में राजकीय दौरा थी तो वहीं दूसरी यात्रा अप्रैल 2018 में CHOGM सम्मेलन के दौरान की थी। इस बार का दौरा व्यापार समझौता (FTA) पर केंद्रित है। लंदन के बाद पीएम मोदी 25 और 26 जुलाई 2025 को मालदीव के राजकीय दौरे पर होंगे।

गाजियाबाद की कोठी में जो चला रहा था ‘फर्जी दूतावास’, उसके ससुर 26 साल तक रह चुके हैं युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष: लंदन-दुबई के हथियार डीलरों से भी चंद्रास्वामी के ‘शागिर्द’ का कनेक्शन

दिल्ली से 23 किलोमीटर दूर गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन का कनेक्शन लंदन और दुबई में हथियार डीलरों से भी मिले हैं। भारत से पहले वह दुबई और लंदन में लोगों को नौकरी का झाँसा देकर ठगता था। बाद में भारत आकर यहाँ अपनी फर्जी एम्बेसी खोल ली। अभी वह खुद को वेस्ट आर्कटिका का राजदूत बताता था।

कौन है हर्षवर्धन ?

हर्षवर्धन जैन MBA है, जिसने लंदन और गाजियाबाद से पढ़ाई पूरी की है। उसके पिता राजस्थान के बांसवाड़ा और काकरोली में इंदिरा मार्बल्स और जेडी मार्बल्स के नाम से माइन के मालिक थे। हर्षवर्धन भी पिता के साथ काम किया करता था। इन माइन्स से लंदन में भी उत्पाद एक्सपोर्ट किया जाता था। इसीलिए हर्षवर्धन के लंदन में भी अच्छे संपर्क हैं। लेकिन पिता के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हर्षवर्धन जैन का कॉन्ग्रेस के साथ पुराना संबंध था। उसके ससुर आनंद जैन 1976 से 2000 तक कॉन्ग्रेस युवा विंग के अध्यक्ष थे, जिनके यहाँ विवादस्पद चंद्रास्वामी का आना-जाना था। बाकी साल 2000 में दोनों की मुलाकात लंदन में भी हुई थी। चंद्रस्वामी ने ही उसकी मुलाकात दुबई के हथियार डीलर अदनान खरगोशी और एहसान अली सैयद से करवाई। इसके बाद तीनों ने मिलकर लंदन में कंपनियाँ खोलकर ठगी करने लगे।

फिर साल 2006 में हर्षवर्धन अपने चचेरे भाई के पास दुबई चला गया, जहाँ हैदराबाद के शफीक और दुबई के इब्राहिम अली बन शारमा के साथ मिलकर ठगी की कंपनियाँ खोली। यहाँ भी तीनों ने मिलकर लोगों को नौकरियों का झाँसा देकर मोटी रकम वसूली।

साल 2011 में हर्षवर्धन वापस भारत लौट आया। फिर फर्जी दूतावास खोलने के काम में जुट गया। जाँच एजेंसी के मुताबिक पहले हर्षववर्धन सेबोर्गा माइक्रोनेशन नाम की कंपनी का एडवाइजर बना। इसके बाद वो पौलबिया लोडोनिया माइक्रोनेशन और अब वेस्ट आर्कटिका जैसे फर्जी देशों का राजदूत बन कर घूमता था।

5 साल पहले किराए पर ली आलीशान कोठी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 साल पहले गाजियाबाद के कविनगर जैसी पॉश कॉलोनी में कोठी किराए पर ली। यह कोठी सुनील अनूप सिंह नाम के शख्स की थी। इस 1 हजार मीटर वाली कोठी में एक दर्जन से ज्यादा कमरे हैं। इनमें से दो कमरों में हर्षवर्धन ने फर्जी दूतावास खोल रखा था। बाकी कमरों में उसकी पत्नी और 8 वर्षीय बेटा रहता था।

इसके अलावा हर्षवर्धन की आपराधिक हिस्ट्री भी खंगाली गई है। साल 2011 में हर्षवर्धन के पास सैटेलाइन फोन पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जाँच में यह भी सामने आया कि हर्षवर्धन सऊदी हथियार डीलर अदनान खशोगी का भी करीबी था।

जानें पूरा मामला

गाजियाबाद के कविनगर के आलीशान कोठी में फर्जी दूतावास चलाया जा रहा था। यहाँ हर्षवर्धन नाम का व्यक्ति खुद को वेस्ट आर्कटिका, सबोरगा, पोल्विया और लोडोनिया जैसे देशों का राजदूत बताता था। जबकि इन देशों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। उसका असली काम सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को विदेशों में नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करना था।

23 जुलाई 2025 को UP STF की नोएडा टीम ने हर्षवर्धन की कोठी पर छापेमारी की। उसके पास से 4 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियाँ, 12 फर्जी पासपोर्ट और विदेश मंत्रालय की नकली मुहरे बरामद की गई हैं। डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी चार लग्जरी गाड़ियाँ, दो पैनकार्ड, कई देशों और कंपनियों के 34 मुहरें, दो प्रेस कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा 44.7 लाख रुपए नगद और कई फॉरेन कंरसी भी उसके पास से बरामद हुईं।

फर्जी दूतावास से मिली 4 लग्जरी गाड़ियों में से 3 एक्सपायर

हर्षवर्धन की कोठी से चार लग्जरी गाड़ियाँ STF ने हिरासत में ली हैं। गाड़ियों की जाँच में पता लगा कि मर्सिडीज 19 साल पुरानी है तो 2 हुंडई सोनाटा कार 16 और 17 साल पुरानी हैं। इनकी फिटनेस भी खत्म हो चुकी है। जबकि हुंडई गेट्ज 5 साल पुरानी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ACP कविनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि चारों गाड़ियों में से तीन एक्सपायर हो चुकी हैं। असली नंबर प्लेट न होने के चलते पुलिस चेकिंग में पकड़ी नहीं गईं। हर लग्जरी गाड़ियों पर विदेशी झंडे और नंबर प्लेट से पुलिस भी धोखा खा गई।

इसके अलावा हर्षवर्धन ने पूछताछ में बताया कि मर्सिडीज उसके ससुर के नाम पर है, जो कि उसे गिफ्ट में मिली है। जबकि एक हुंडई सोनाटा उसकी पत्नी डिंपल जैन के नाम पर है और दूसरी उनके साले के नाम पर है। केवल हुंडई गेट्ज ही हर्षवर्धन के नाम पर है।

ताकि रोहिंग्याओं पर रखी जाए सख्ती से नजर… बंगाल में IB ने निकाली 4987 भर्ती: बंगाली समेत ये भाषा जानने वाले करें अप्लाई, जानें किसे मिलेगी वरीयता

पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या घुसपैठ को रोकने के लिए भारत के इंटेलिजेंस ब्यूरो ने सिक्योरिटी असिस्टेंट पद पर भर्ती निकाली है। चयनित युवाओं को कोलकाता में आईबी के सब्सिडियरी ब्यूरो (SIB) में तैनात किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से आईबी ने करीब पाँच हजार (कुल 4987) रिक्तियों के लिए आवेदन माँगा हैं। ये सभी भर्तियाँ राज्य स्तर यानी सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) में की जाएँगी।

इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शनिवार (26 जुलाई 2025) से शुरू होगी। आवेदनकर्ता ऑनलाइन माध्यम से ऑफिशियल वेबसाइट www.mha.gov.in पर जाकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। वहीं फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 17 अगस्त 2025 है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भर्ती के लिए उन स्थानीय युवकों से आवदेन की माँग की गई है, जिन्हें अपने क्षेत्र की भाषा की बेहतर समझ हो। जम्मू कश्मीर और लेह-लद्दाख के अतिरिक्त त्रिवेंद्रम और जयपुर से लेकर कोलकाता और अगरतला तक आईबी के कुल 37 एसआईबी के लिए भर्ती निकाली गई है।

कोलकाता के लिए आईबी ने रोहिंग्या भाषा जानने और समझने वाले युवकों से भी आवेदन करने के लिए कहा गया है। सूचना के अनुसार, कोलकाता के लिए आईबी को कुल 298 सिक्योरिटी असिस्टेंट की आवश्यकता है और इसके लिए आवेदन करने वाले को बंगाली, नेपाली, भूटानी, उर्दू, संथली, सिलहटी या फिर रोहिंग्या भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।

इस भर्ती में जिन उम्मीदवारों का चयन होगा, उन्हें पे लेवल 3 के अनुसार 21700- 69100 रुपए प्रतिमाह के साथ केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले अन्य भत्ते दिए जाएँगे।

बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल की सीमा में बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ होती सरकार की बड़ी समस्या बन गई थी, ऐसे में और अधिक चौकसी की आवश्यकता थी। इसी के तहत आईबी को उन पर नजर रखने के साथ ही पूछताछ करने के लिए रोहिंग्या भाषा को जानने वाले अधिकारियों की जरूरत है।

यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (UNHCR) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 18 महीने में करीब 1.50 लाख रोहिंग्या म्यांमार से विस्थापित होकर बांग्लादेश पहुँचे हैं। वहीं बांग्लादेश में पहले से ही करीब 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी हैं। बांग्लादेश की लगभग हर मामले में बुरी स्थिति के चलते ये शरणार्थी अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में घुसपैठ कर भारत की सीमा में चले आते हैं।

जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए गोवा की सरकार बनाएगी कानून, बोले CM सावंत- UP की तरह सख्त होंगे प्रावधान: 12 राज्यों में पहले ही हो चुकी है पहल, फिर भी हिंदू खतरे में

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सख्त कानून की जरूरत है। उन्होंने यह घोषणा सोमवार (21 जुलाई 2025) को विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान की। उससे पहले BJP  के प्रमेन्द्र शेट और आम आदमी पार्टी के क्रूज सिल्वा ने इस मुद्दे को उठाया था।

चर्चा के दौरान कुछ विधायकों ने राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर आँकड़े देने की माँग की। उन्होंने एसबी कृष्णा के मामले की ओर ध्यान दिलाया, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोवा में दो लड़कियों के अपहरण के शक में हिरासत में लिया था।

बताया गया कि आयशा उर्फ निक्की का असली नाम एसबी कृष्णा है, जिसने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया। उस पर दो महिलाओं को निकाह के लिए जबरन धर्मांतरण करवाने और यूपी से ले जाने का आरोप है।

यह मामला तब सामने आया जब कई राज्यों में एक्टिव धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी एसडीपीआई के नाम आए।

मुख्यमंत्री सावंत ने कहा, “उत्तर प्रदेश में जो कानून है, उसमें जबरन धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं है। कई राज्यों ने ऐसे कानून बना लिए हैं। मैं मानता हूँ कि हमें भी ऐसा कानून लाना चाहिए, ताकि जबरन धर्मांतरण को रोका जा सके।” उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायकों की तरफ देखते हुए कहा, “आप सभी को भी इसमें हमारा साथ देना चाहिए।”

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में कहा कि राज्य में अलग-अलग धर्मों के लोगों की शादियाँ हो रही हैं और यह उनके मर्जी से हो रहा है, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोवा में ‘लव जिहाद’ के मामले भी सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोग कहते हैं कि लव जिहाद नहीं होता, लेकिन अगर आप चाहें तो मैं ऐसे मामलों का विवरण दे सकता हूँ। आप कह सकते हैं कि युवक-युवतियाँ बालिग हैं और प्रेम में हैं, लेकिन जब किसी को निशाना बनाकर ये सब किया जा रहा हो, तब हमें ध्यान देना ही पड़ेगा।”

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध उन लोगों के लिए है जो पैसे दे कर, लालच देकर या जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “गोवा की गंगा-जमुनी तहजीब कभी नहीं टूटी है और ना ही टूटनी चाहिए। लेकिन लालच देकर धर्म परिवर्तन गलत है।”

इस चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक क्रूज सिल्वा ने इस मामले की गहराई से जाँच कराने की माँग की। उन्होंने राज्य की पुलिस और कानून-व्यवस्था से पूछा कि ऐसे कितने संदिग्ध लोग गोवा में रह रहे हैं। क्रूज सिल्वा ने कहा, “गोवा एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। देश-विदेश से लोग यहाँ आते हैं।

हाल ही में सेंट फ्रांसिस जेवियर का समारोह ओल्ड गोवा में हुआ, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। लेकिन उसी समय ISIS से संबंधित एक महिला को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है, वह ओल्ड गोवा में ही रह रही थी।”

उन्होंने सवाल उठाया, “जब यूपी पुलिस उसे पकड़ सकती है, तो फिर गोवा पुलिस और क्राइम ब्राँच को उसकी कोई जानकारी क्यों नहीं थी?”

जबरन धर्मांतरण कराने वाले रैकेट का पर्दाफाश

‘मिशन अस्मिता’ के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ने अवैध धर्मांतरण के मामले में छह राज्यों के दस लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दस लोगों में से छह पहले हिंदू थे, जिनमें कृष्णा नाम का व्यक्ति भी शामिल है। ये लोग युवकों और युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे।

इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान था, जिसे दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से यूपी एटीएस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मिलकर पकड़ा है। जाँच एजेंसियों ने पाया है कि इस नेटवर्क का कनेक्शन आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) से है। धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग होने का भी पता चला।

इस नेटवर्क में शामिल आरोपी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रहे थे, जैसे- पैसे की लेन-देन, कानूनी सलाह देना, नए फोन और सिम कार्ड मुहैया कराना, युवाओं को प्रेम-जाल (लव जिहाद) में फँसाना और धर्म परिवर्तन में मदद करना।

भारत के राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून

भारत के बारह राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन को गैरकानूनी माना गया है। इन राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

इन राज्यों में ‘धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ के तहत ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो किसी भी व्यक्ति को बलपूर्वक, धोखे से, लालच देकर या मानसिक दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराने से रोकते हैं। अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है और साथ ही उसे जेल की सजा भी हो सकती है।

अरुणाचल प्रदेश

46 साल बाद अरुणाचल प्रदेश सरकार ने 1978 में बने ‘धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’  को लागू करने का फैसला किया है। यह फैसला तब लिया गया जब गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सितंबर 2024 में राज्य सरकार को 6 महीनों के अंदर इस कानून के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया। इस फैसले का कुछ ईसाई संगठनों ने विरोध किया है।

यह कानून अक्टूबर 1978 में पास हुआ था। इसका उद्देश्य था कि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती, लालच या धोखे से एक धर्म से दूसरे धर्म में बदलने से रोका जाए और साथ ही स्थानीय परंपराओं और विश्वासों की रक्षा की जाए। इस कानून के अनुसार, यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे अधिकतम दो साल की जेल और 10,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार एक सख्त कानून लाने जा रही है, जिसका नाम ‘छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ होगा। इस कानून का मकसद जनजातियों और संभवतः अन्य लोगों के धर्म परिवर्तन को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई जनजाति धर्म बदलता है, तो उसे Scheduled Tribe की सूची से हटाना चाहिए, ताकि धर्मांतरण पर लगाम लगाई जा सके।

इस कानून के तहत जबरन, धोखे से या लालच देकर महिलाओं, बच्चों और जनजातियों का धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर उसे कम से कम 2 साल से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है और 25,000 रुपए या उससे ज्यादा का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अगर कोई गैरकानूनी तरीके से सामूहिक धर्मांतरण कराता है, तो उसे 3 से 10 साल की सजा और 50,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

गुजरात

गुजरात सरकार ने 2021 में धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन विधेयक पेश किया, जिसका मकसद जबरन धर्म परिवर्तन और धोखे से की गई शादी के जरिए धर्म बदलवाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए किसी से शादी करता है ताकि उसका धर्म बदला जा सके, तो ऐसी शादी को गैरकानूनी माना जाएगा।

इसके अलावा, किसी को शादी के लिए मजबूर करना, धोखा देना, बहलाना-फुसलाना, या फिर धर्म परिवर्तन के इरादे से किसी की शादी करवाने में मदद करना या सलाह देना, ये सब अपराध की श्रेणी में आएँगे और सभी दोषियों को समान रूप से सजा दी जाएगी।

अगर कोई इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे 3 से 5 साल की जेल और कम से कम 2 लाख का जुर्माना देना होगा। लेकिन अगर पीड़ित महिला अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से है, तो सजा और भी सख्त होगी और 4 से 7 साल की जेल और 3 लाख तक का जुर्माना लगेगा।

अगर कोई संस्था इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और दोषियों को 3 से 10 साल तक की जेल और 5 लाख का जुर्माना हो सकता है।

इस कानून के तहत ऐसे सभी अपराध गैर-जमानती (non-bailable) हैं, यानी बिना अदालत की अनुमति के जमानत नहीं मिलेगी।

हरियाणा

हरियाणा सरकार ने 2022 में एक कानून पास किया है जिसका नाम है हरियाणा धर्मांतरण की रोकथाम विधेयक 2022। इस कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी और का धर्म झूठ बोलकर, दबाव डालकर, जबरदस्ती, लालच देकर, धोखे से या शादी के जरिए बदलवाने की कोशिश करता है, तो उसे 1 से 5 साल तक की जेल और कम से कम 1 लाख जुर्माना हो सकता है।

अगर यह धर्मांतरण किसी नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति के साथ होता है, तो सजा और भी सख्त होगी और कम से कम 4 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और 3 लाख या उससे ज्यादा जुर्माना लगेगा। साथ ही अगर कोई शादी सिर्फ धर्म बदलवाने के मकसद से की गई है, तो ऐसी शादी को गैरकानूनी और अमान्य माना जाएगा।

हालाँकि, अगर कोई व्यक्ति अपने पहले वाले धर्म में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा और इस कानून के तहत उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 का मकसद राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े 2019 के कानून में बदलाव करना है। यह कानून पहले 2006 में लाया गया था, लेकिन 2012 में हाई कोर्ट ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए रोक दिया था। इसके बाद 2019 में नया कानून आया और 2022 में इसे और सख्त किया गया।

इस संशोधन में कहा गया है कि अगर कोई जबरन, धोखे से या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे अब 7 की बजाय 10 साल तक की जेल हो सकती है। अगर कोई अपना धर्म छिपाकर किसी और धर्म के व्यक्ति से शादी करता है, तो उसे कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही जुर्माना भी ₹50,000 से बढ़ाकर 1 लाख तक किया गया है।

अगर कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 साल की जेल और ₹50,000 तक जुर्माना देना होगा। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद भी अपने पुराने धर्म की सुविधाओं का लाभ लेता है, तो यह भी अपराध माना जाएगा, जिसकी सजा 2 से 5 साल तक की जेल और ₹50,000 से 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

झारखंड

झारखंड में 2017 में बना ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ ये कहता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी और का जबरदस्ती, धोखे से या लालच देकर धर्म बदलवाने की कोशिश करता है, तो वो गैरकानूनी है। ऐसा करने पर उसे तीन साल तक की जेल हो सकती है और साथ ही ₹50,000 तक का जुर्माना भी लग सकता है।

लेकिन अगर धर्म बदलने वाला व्यक्ति कोई महिला है, नाबालिग है, या अनुसूचित जाति या जनजाति से आता है, तो सजा और जुर्माना और भी ज्यादा कठोर हो जाता है।

इतना ही नहीं अगर कोई अपनी मर्जी से भी धर्म बदलना चाहता है, तो उसे पहले जिला उपायुक्त यानी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से लिखित मंजूरी लेनी होगी। बिना मंजूरी के धर्म बदलना इस कानून के तहत अपराध माना जाएगा।

कर्नाटक

कर्नाटक सरकार ने 2022 में एक कानून बनाया था जिसे ‘धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण अधिनियम’ कहा गया। इसका मकसद था लोगों को जबरन, धोखे से, लालच देकर या शादी का झाँसा देकर धर्म परिवर्तन करवाने से बचाना। इस कानून के तहत अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल और ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता था।

लेकिन अगर धर्म परिवर्तन किसी महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साथ किया गया हो, तो सजा दस साल तक बढ़ सकती थी। हालाँकि 2023 में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस कानून को खत्म करने का फैसला कर लिया।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 2021 में ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ लागू किया गया था, जिसका मकसद था धोखे, जबरदस्ती, लालच या झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन को रोकना, खासतौर पर शादी के बहाने धर्म बदलवाने की घटनाओं पर लगाम लगाना। इस कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सिर्फ धर्म परिवर्तन के मकसद से शादी करता है, तो ऐसी शादी को अवैध माना जाएगा।

इस तरह का अपराध गंभीर (cognisable) होगा, उसे जमानत नहीं मिलेगी, और केस सीधे सेशंस कोर्ट में चलेगा। अगर कोई कानून तोड़ता है, तो उसे 1 से 5 साल की जेल और कम से कम ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है। लेकिन अगर पीड़ित महिला है, नाबालिग है, अनुसूचित जाति या जनजाति से है, तो सजा और कड़ी होगी 2 से 10 साल तक की जेल और ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है।

अगर कोई धर्म छुपाकर धोखे से शादी करता है, तो उसे 3 से 10 साल की सजा और कम से कम ₹50,000 का जुर्माना भुगतना होगा। वहीं अगर कोई एक साथ कई लोगों का धर्म बदलवाता है (mass conversion), तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल और 1 लाख का जुर्माना हो सकता है।

इसके साथ ही कानून में कुछ प्रावधान स्कूलों, चर्चों और मदरसों को लेकर भी हैं। अगर कोई संस्थान जबरन धर्म परिवर्तन में शामिल पाया जाता है या उसका समर्थन करता है, तो सरकार उसकी मदद रोक सकती है और दी गई जमीन भी वापस ले सकती है।

ओडिशा

यह भारत में धर्मांतरण को लेकर बना पहला कानून था, जिसे ओडिशा सरकार ने 1967 में लागू किया था और इसे ‘ओडिशा धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1967’ कहा गया। इस कानून के तहत कोई भी व्यक्ति जबरदस्ती, लालच देकर या धोखे से किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता।

अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे एक साल की जेल, ₹5000 का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। अगर धर्म परिवर्तन किसी महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति का हो, तो सजा दोगुनी हो जाती है।

इसके अलावा, कोई भी धर्म परिवर्तन करने से पहले इसकी जानकारी सरकार को देनी जरूरी होती है। 1989 में बने नियमों के अनुसार, जो भी धर्म परिवर्तन करवा रहा है (जैसे पंडित, मौलवी या पादरी), उसे कम से कम 15 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित में बताना होता है कि कौन, कब, कहाँ और  किसका धर्म बदल रहा है।

राजस्थान

राजस्थान धर्मांतरण निषेध विधेयक 2025 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अगर अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को इसकी लिखित सूचना देनी होगी। इसके बाद मजिस्ट्रेट यह जाँच करेगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ है या किसी दबाव, लालच या जबरदस्ती के कारण। अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि धर्म परिवर्तन जबरदस्ती नहीं हुआ है, तब ही उसे मंजूरी दी जाएगी।

वहीं अगर कोई व्यक्ति किसी को जबरदस्ती, धोखे से या लालच देकर धर्म बदलवाता है, तो उसे 2 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। विशेष रूप से अगर महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों को जबरन धर्म बदलवाया जाता है, तो दोषी को ₹25,000 का जुर्माना भी देना होगा।

वहीं अगर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया गया है, तो दोषी को 3 से 10 साल तक की सजा और ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

उत्तराखंड

उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2018 के अनुसार, जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना एक गैर-जमानती अपराध है। इस तरह के मामलों में दोषी पाए जाने पर 1 साल से 5 साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन अगर पीड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से है, तो कम से कम 2 साल की सजा अनिवार्य है।

अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम एक महीने पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक शपथपत्र (affidavit) देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि धर्म परिवर्तन उसकी स्वेच्छा से हो रहा है।

अगर यह नियमों का उल्लंघन करके धर्म परिवर्तन किया गया है, तो सरकार ऐसे धर्म परिवर्तन को अवैध घोषित कर सकती है। इसके अलावा शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने की स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनानी होगी, यानी एक महीना पहले शपथ पत्र देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने धर्म का अवैध रूपांतरण रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2024 पेश किया है। सरकार का कहना है कि पहले लागू 2021 का कानून इस तरह के मामलों को रोकने में पर्याप्त नहीं था। पहले अवैध धर्मांतरण के लिए अधिकतम सजा 10 साल की जेल और 50,000 जुर्माना थी, लेकिन अब संशोधन के बाद सजा को और सख्त कर दिया गया है।

अब अवैध धर्मांतरण करने पर 3 से 10 साल की जेल हो सकती है। अगर एक साथ कई लोगों का धर्मांतरण (mass conversion) किया गया या विदेशी फंडिंग से धर्म बदलवाया गया, तो 7 से 14 साल की सजा दी जाएगी।

अगर जबरदस्ती, धोखे, शादी या शादी का वादा करके धर्म परिवर्तन कराया गया है और इससे किसी की जान या संपत्ति को खतरा हुआ, तो आरोपित को 20 साल से लेकर उम्रकैद (life imprisonment) तक की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं अगर धर्मांतरण के मामले में महिला, नाबालिग या तस्करी के शिकार व्यक्ति शामिल हैं, तो भी सजा 20 साल से उम्रकैद तक दी जाएगी।

अब गोवा की बारी

राज्यों की लंबी फेहरिस्त में अब गोवा भी शामिल होने वाला है। जिन राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून बने हैं। वहाँ बीजेपी के शासन के दौरान ही ये हो पाया। गोवा में भी मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अगुवाई वाली सरकार लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त है और इसको लेकर कानून लाने की तैयारी कर रही है।