अफ्रीका महाद्वीप के देश मोरक्को (Morocco) में हाल ही में फ्रांस (France) की एक 79 वर्षीय महिला पर्यटक की एक मुस्लिम युवक ने तेज धार वाले हथियार से हत्या (Murder) कर दी थी। अब इस मामले में मोरक्को की पुलिस ने 15 जनवरी 20221 को 31 साल के मुस्लिम हमलावर (Muslim Attacker) को गिरफ्तार किया। ये घटना टिजनिट शहर में हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोरक्को की पुलिस ने शुरुआती जाँच में पाया है कि फ्रेंच महिला की हत्या करने वाला 31 वर्षीय आरोपित मेंटल पेशेंट है। इस मामले में क्षेत्रीय निगरानी महानिदेशालय (डीजीएसएन) की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि आरोपित व्यक्ति को स्थानीय अधिकारियों के अनुरोध पर 25 सितंबर से 25 अक्टूबर तक तिज़निट के ‘हसन आई अस्पताल’ के मनोरोग विभाग में भर्ती कराया गया था।
जाँच टीम में शामिल एक सूत्र के मुताबिक, दक्षिणी मोरक्को के गेल्मिम में जब आऱोपित के घर की तलाशी ली गई तो वहाँ से पुलिस को आरोपित को मनोचिकित्सक की दवाइयाँ भी बरामद हुई हैं। आरोप पर आरोप है कि उसने फ्रेंच महिला के अलावा अगादिर के एक कैफे में बेल्जियम के एक नागरिक सहित दो अन्य पर्यटकों की हत्या की कोशिश की थी। CCTV फुटेज में वो फ्रेंच महिला को चाकू घोंपते दिखा था।
आतंकवाद के एंगल से जाँच शुरू
इस मामले में मोरक्को की एक कोर्ट ने गुरुवार (20 जनवरी 2022) को आरोपित मुस्लिम व्यक्ति के मनोरोग मूल्यांकन करने का आदेश दिया है। इस बीच तीन देशों के अधिकारियों ने फ्रेंच महिला की हत्या के मामले की जाँच आतंकवाद के एंगल से शुरू कर दी है। मोरक्को के सरकारी अभियोजन ने ‘संभावित आतंकवादी एंगल’ की जाँच के लिए पुलिस के एंटी टेररिस्ट स्क्वाड को जिम्मा सौंप दिया है।
इसी तरह से फ्रांस के पेरिस में फ्रेंच एंटी टेररिज्म अभियोजक ने बुधवार को दक्षिणी मोरक्को में फ्रांसीसी पर्यटक की हत्या के मामले की जाँच ‘आतंकवादी एंगल’ जाँच की घोषणा की। वहीं बल्जियम के संघीय लोक अभियोजक के कार्यालय ने गुरुवार को कहा कि वह मोरक्को में बेल्जियम के एक पर्यटक की हत्या के प्रयास में एक संभावित आतंकवादी लिंक के मामले की जाँच करेगा।
इस्लामी प्रोपगेंडे के नाम पर देश के मुसलमानों को भड़काने वाली राणा अय्यूब को सऊदी से भी लताड़ लगनी शुरू हो गई है। राणा ने हर बार की तरह इस बार भी अपना एजेंडा फैलाने के लिए ट्वीट किया जिसमें उन्होंने सऊदी को ‘खून का प्यासा’ कहा। इस ट्वीट के बाद नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। इसी बीच सऊदी से राणा को कई संदेश आए और राणा पर तंज कसते हुए उन्हें आतंकियों का साथ देने वाली ‘रद्दी’ लड़की तक कहा गया। कमाल की बात ये है कि लोगों का गुस्सा देखते हुए अय्यूब ने कमेंट सेक्शन को बंद किया हुआ है मगर लोग इस ट्वीट को रीट्वीट कर-करके उन्हें झूठा कह रहे हैं।
बता दें कि सऊदी अरब और उनके गठबंधन की सेना द्वारा यमन के हूती विद्रोहियों पर हुई एयरस्ट्राइस से आहत राणा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “खून के प्यासे सऊदी को रोकने वाला कोई नहीं है। ये वो लोग हैं जो खुद को इस्लाम का रखवाला कहते हैं। एक मुसलमान होने के नाते मुझे शर्म आती है कि ये दरिंदे पवित्र मस्जिद के रखवाले हैं। इस नरसंहार पर दुनिया चुप नहीं रह सकती #YemenUnderAttack”
Yemen is bleeding and there is nobody to stop the bloodthirsty Saudis. These are people who call themselves the custodians of Islam. As a Muslim I am ashamed that these savages are guardians of the holy mosque. The world CANNOT stay silent thru this genocide #YemenUnderAttack
इस ट्वीट पर Gassan नाम के ब्लू टिक ट्विटर यूजर ने राणा के ट्वीट को ‘झूठी खबर’ कहा और मुस्लिम भाईचारे के नाम पर ऐसे झूठ फैलाने का मजाक उड़ाया। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि सऊदी अरब ने 10 से अधिक देशों के गठबंधन के रूप में, यमन की वैध सरकार के सीधे अनुरोध के जवाब पर ये कार्रवाई की है। यूजर ने बताया कि वो वैध चीज को समर्थन दे रहे हैं लेकिन अय्यूब आतंकियों का साथ दे रही हैं।
एक अन्य सऊदी ट्विटर यूजर ने राणा से पूछा कि क्या वाकई राणा को इसलिए शर्म आ रही है क्योंकि सऊदी वाले अपने आपको बचा रहे हैं।
इतना ही नहीं, राणा के ट्वीट का भहिष्कार जो भारतीयों द्वारा किया जा रहा है उसकी सराहना भी सऊदी में देखने को मिल रही है। @il99t आईडी वाले सऊदी यूजर ने कहा, “भारतीयों ने इस लड़की को जवाब दे दिया है और इसे (प्रोपगेंडे) को बढ़ाने से मना कर दिया है। धन्यवाद। ये केवल एक रद्दी लड़की है। आप लोग ईमानदार हैं। “
अन्य यूजर ने सच्चाई बताते हुए राणा के लिए लिखा, “तुम झूठी और धोखेबाज हो। हूथी विद्रोहियों के ख़िलाफ यमन के राष्ट्रपति के अनुरोध पर सऊदी अरब एक गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। सऊदी दो पवित्र मस्जिदों की सेवा में है और अपने देश की रक्षा कर रहे हैं। ये बड़ा आसान है झूठ बोलना और अन्याय का दाव करना।” इसके अलावा लोग राणा को अपना कमेंट सेक्शन खोलने को कह रहे हैं ताकि बताया जा सके कि इस पूरे मामले पर कैसे सऊदी के लोग और यमन के लोग सोचते हैं।
गौरतलब है कि यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) ने 17 जनवरी 2022 को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबुधाबी पर ड्रोन अटैक किया था। इसमें 2 भारतीय समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से सऊदी अरब और उनके गठबंधन की सेना की कार्रवाई चालू है। कुछ दिन पहले हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) का कमांडर अब्दुल्ला कासिम अल जुनैद सऊदी की कार्रवाई में मारा गया था। कमांडर के साथ-साथ हूती विद्रोहियों के कई सीनियर रैंक अधिकारी भी मारे गए थे। इसके अलावा हाल की एयरस्ट्राइक में यमन में 70 लोगों के मरने की खबर है और बताया जा रहा है कि ये एयरस्ट्राइक ऐसी थी कि इससे पूरे देश का इंटरनेट ठप्प हो गया है।
कर्नाटक (Karnataka) के कोलार जिले से चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के करीब 20 मुस्लिम छात्र स्कूल क्लास में नमाज (Namaz) अदा करते देखे गए। कहा जा रहा है कि इन छात्रों को शुक्रवार (21 जनवरी 2022) को स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने इजाजत दी थी। लेकिन मुस्लिम छात्रों के स्कूल की कक्षा में नमाज करने की भनक एक हिंदू संगठन को लगी तो उन्होंने इसका जमकर विरोध किया, जिसके बाद इसे बंद किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले के सामने आने के बाद सियासी बवाल खड़ा हो गया है। विरोध के बीच कोलार जिले के कलेक्टर उमेश कुमार ने मुलबगल सोमेश्वर पलाया बाले चंगप्पा सरकारी कन्नड़ मॉडल हायर प्राइमरी स्कूल के कामकाज की जाँच कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। इसके लिए डिप्टी डायरेक्टर ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन रेवाना सिद्दप्पा को स्कूल का दौरा कर मामले की जाँच करने और उसी के आधार पर एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।
नमाजी छात्र बोले- प्रिंसिपल ने दी थी इजाजत
सूत्रों के मुताबिक, स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रों को नमाज के लिए बाहर जाने से रोकने के लिए उन्हें कक्षा में ही नमाज की इजाजत दे दी थी। एक छात्र ने बताया, “हम दो महीने पहले स्कूल के फिर से खुलने के बाद से ऐसा कर रहे हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ने हमें इसकी इजाजत दी थी।”
हालाँकि, इस मामले में जब प्रदर्शन करने वाले हिंदू संगठनों ने स्कूल की प्रिंसिपल उमा देवी से बात की तो उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता। मैंने नहीं किया है। छात्रों ने खुद किया। जब यह हुआ तब मैं यहाँ नहीं थी। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने फोन किया और कहा कि यह स्कूल में हो रहा है और मैंने जल्दी ही इस पर एक्शन लिया।”
गौरतलब है कि कर्नाटक में इस तरह की लगातार दो घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। हाल ही में कर्नाटक के ही उडुपी जिले में मुस्लिम छात्राएं कॉलेज की क्लास में हिजाब (Hijab) पहनने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। जबकि स्कूल के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि क्लास के अंदर हिजाब पर रोक एकरूपता को बनाए रखने के लिए लगाई गई है।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में इटावा के सैफई गाँव में हर साल एक आयोजन होता है। इसका नाम है – ‘सैफई महोत्सव’। ये मुलायम सिंह यादव का पैतृक गाँव है। उनके बड़े से परिवार के दर्जनों सदस्य अलग-अलग पदों पर विराजमान रहे हैं, ऐसे में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में इसमें राजनीति और सिनेमा का गठजोड़ देखने को मिलता था। सरकारी रुपए पानी की तरह बहाए जाते थे और कोई टोकने वाला नहीं होता था। अभिनेता सलमान खान से लेकर संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद तक इसमें शिरकत कर चुके हैं।
अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद सैफई में उतर आता था पूरा बॉलीवुड
2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार बनी, उसके बाद इस महोत्सव को लेकर पूरा सरकारी महकमा ही तैयारी में लगा रहता था। दिसंबर 2012 में जब इसका आयोजन हुआ, तो इसमें गायक कैलाश खेर की प्रस्तुति से लेकर मुनव्वर राना जैसे शायरों के भी कार्यक्रम हुए। पाकिस्तान से कॉमेडियन इरफ़ान अली हसन को बुलाया गया था। कपिल शर्मा ने भी कॉमेडी की प्रस्तुति दी थी। गायिका सपना मुखर्जी के कार्यक्रम हुए। श्यामक डावर की टीम ने डांस की रंगारंग प्रस्तुतियाँ दी थीं।
इन सबके अलावा बॉलीवुड के गायक शान को भी बुलाया गया था। मशहूर अभिनेता हृतिक रौशन भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे हृतिक रौशन की प्रस्तुति के बाद उन्हें अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। ‘सैफई महोत्सव’ का कार्यक्रम 14 दिनों तक चलता है, ऐसे में रोज करोड़ों रुपए फूँक दिए जाते हैं। 2007-2012 तक जब मायावती की सरकार थी, तब इस महोत्सव का रंग ज़रूर फीका पड़ गया था।
इसी तरह 2013 में भी इस कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। उस साल तो हद ही हो गई, जब मुजफ्फरनगर में बच्चे ठंड से मर रहे थे और इधर सैफई में पूरी की पूरी सरकार नाच-गान का आनंद लेने में व्यस्त थी। लड़कियाँ नाच रही थीं, कपिल शर्मा हँसा रहे थे और प्रदेश के नेता-मंत्री मजे ले रहे थे। मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे, लेकिन लेकिन यहाँ राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भुला दिया गया था। शाहपुर गाँव के राहत शिविरों ने लोग और तमाम NGO गुहार लगाते रह गए, लेकिन सपा के तत्कालीन सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और तब मुख्यमंत्री रहे उनके बेटे अखिलेश सैफई में मनोरंजन करते रहे।
उन राहत शिविरों में बच्चों की मौत हो रही थी, लेकिन इसे अफवाह बताते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि भाजपा के लोग उनकी पार्टी की सरकार की छवि बदनाम करने के लिए अफवाह फैला रहे हैं। राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव ने तो यहाँ तक कह डाला था कि ठंड से तो कोई मरता ही नहीं है। इस कार्यक्रम को ‘ग्रामीण संस्कृति को बचाने’ के नाम पर चलाया जाता रहा है। इसी क्रम में कव्वाली से लेकर राजू श्रीवास्तव की कॉमेडी, साइकिल मैराथन और बच्चों की गान प्रस्तुति के अलावा कुश्ती दंगल भी हुआ था।
जनवरी 2014 में जब ये महोत्सव आगे बढ़ा, तो उसके साथ ही समाजवादी पार्टी की गुंडागिरी भी परवान चढ़ी। सैफई में होने वाले महोत्सव में हंगामा होने पर परिस्थिति थोड़ी विपरीत दिखी थी। यहाँ ग्रामीणों ने ही पुलिसवालों को पीट दिया था। दरअसल, हंगामा भड़कने पर पुलिसकर्मियों ने परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए थोड़ी सख्ती दिखाई। उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि अखिलेश की सरकार में जनता पुलिस पर हावी हो जाएगी।
उन लोगों ने ही उलटा पुलिस को पीटना शुरू कर दिया। पुलिस ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन मुख्यमंत्री का गाँव होने की वजह से उनके हाथ भी बँधे थे। तत्कालीन सरकार ने इस महोत्सव पर 300 करोड़ रुपए फूँक दिए। खूब नाच-गाने हुए। सभी सरकारी अधिकारियों ने इसका लुत्फ उठाया। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को भी प्रोग्राम में शिरकत करने के लिए बुलाया गया था। उधर मुलायम सिंह यादव कहते फिर रहे थे कि राहत शिविरों में एक भी दंगा पीड़ित नहीं हैं, सब घर लौट चुके हैं।
जब सैफई महोत्सव पर फूँक डाले गए थे ₹334 करोड़ रुपए
2014 में हुए ‘सैफई महोत्सव’ पर 334 करोड़ रुपए फूँक दिए गए थे। 1000 से भी अधिक VVIP अतिथियों के रहने-खाने वगैरह की व्यवस्था की जाती थी, वो भी सरकारी खर्चे पर। सिर्फ ‘बॉलीवुड नाईट’ पर ही 100 करोड़ रुपए उड़ा दिए गए थे। 400 से अधिक सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को इसमें लगाया जाता था। सिर्फ एक उस महोत्सव में लगभग 85 बार हैलीकॉप्टर्स वहाँ उतरे और 9 हवाई जहाज से अतिथि बुलाए गए। रणवीर सिंह और मल्लिका शेहरावत भी इस महोत्सव का हिस्सा बनी थीं।
इसी तरह दिसंबर 2015 में इस आयोजन का उद्घाटन मुलायम सिंह यादव ने किया था। मुलायम सिंह यादव के भतीजे के नाम पर ‘रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव’ के उस 18वें संस्करण में गजल गायन से लेकर भव्य आतिशबाजी तक की व्यवस्था की गई थी। लीजा हेडेन, हृतिक रौशन और रणवीर सिंह पहुँचे थे। बोमन ईरानी, हुमा कुरैशी, गायक अरिजीत सिंह, परिणीति चोपड़ा, जैकलीन फर्नांडिस, सुशांत सिंह, वाणी कपूर, ऋचा चड्ढा और लोरिन डिसूजा जैसी हस्तियों ने इसमें भाग लिया था।
इसी तरह 2016 के आयोजन में भी रणवीर सिंह के अलावा करीना कपूर और सोनम कपूर जैसी अभिनेत्रियाँ पहुँची थीं। सैफ अली खान और उनकी पत्नी करीना कपूर को ‘शाही भोजन’ का आनंद उठाते हुए देखा गया था। गायक अंकित तिवारी के कार्यक्रम हुए। अर्जुन कपूर के साथ लोग थिरके। सोनाक्षी सिन्हा और मीका सिंह जैसे कलाकार भी मंच पर मौजूद थे। रणवीर सिंह तो मुएलएम सिंह यादव के पाँव पर ही लोट गए थे। उस दौरान भी भीड़ ने कुर्सियाँ फेंकी थीं और पुलिसकर्मियों से हाथापाई की थी।
जावेद अली, एली अवराम, करिश्मा तन्ना, सुनील ग्रोवर, अशरफ अली और उदय सिंह गौरी जैसे कलाकारों और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को नचाते रणवीर सिंह देखती हुई भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। नेहा शर्मा और रोशनी चोपड़ा भी उस कार्यक्रम में आई थीं। 2017 में समाजवादी पार्टी के प्रथम परिवार में कलह की वजह से आयोजन नहीं हो पाया। इस साल सरकार भी बदल गई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस तरह के फालतू सरकारी खर्चों से कोसों दूर हैं।
बता दें कि 1997 में शुरू हुआ ये महोत्सव जिनके नाम पर हैं, वो रणवीर सिंह यादव का 2002 में निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी स्मृति में इसे आयोजन किया जाने लगा। उनके बेटे तेज प्रताप सिंह यादव इस पूरे कार्यक्रम का कारभार देखते हैं, जो मैनपुरी से 2014 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में सांसद बने थे। ये सीट मुलायम सिंह यादव की ही रही है। उनकी शादी लालू यादव की बेटी राजलक्ष्मी यादव से हुई है। अब ‘सैफई महोत्सव’ का आयोजन नहीं होता और भाजपा की सरकार ऐसे आयोजनों में पैसे खर्च भी नहीं करती।
हरिद्वार की धर्म संसद में कथित हेट स्पीच के बाद वामपंथियों ने बड़ा बखेड़ा खड़ा करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रूख किया था, लेकिन अब मुस्लिमों नेताओं और मौलवियों के हिंदू विरोधी (Anti hindu speech) बयानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में दो दक्षिणपंथी संगठनों हिंदू सेना और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुस्लिमों के नफरत भरे बयानों से बचाने की गुहार लगाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में मुस्लिमों नेताओं को हेट स्पीच के लिए गिरफ्तार करने की माँग की है। इसमें AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अमानतुल्ला खान और वारिस पठान जैसे कई के खिलाफ हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी के आरोप में गिरफ्तारी की माँग की गई है।
जबकि, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अपनी याचिका में माँग की है कि अगर सुप्रीम कोर्ट मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच की जाँच कर रहा है तो उसे हिंदुओं के खिलाफ नफरत भरे भाषणों की भी जाँच करनी चाहिए। हिंदू संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से हिंदुओं और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर दिए गए नफरती बयानबाजी की जाँच के लिए एसआईटी के गठन करने की माँग की है। संगठन ने इस मामले की जाँच के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है।
हेट स्पीच की तैयार की लिस्ट
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन ने एक लिस्ट बनाई है, जिसमें मुस्लिम नेताओं, मौलवियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ की गई बयानबाजी का जिक्र किया गया है। याचिका में AIMIM के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी और वारिस पठान के हिंदुओं के खिलाफ दिए गए भाषणों को भी शामिल किया गया है। जिसमें साल 2013 में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया था और हिंदुओं को धमकाते हुए कहा था, “हम (मुसलमान) 25 करोड़ हैं और तुम (हिन्दू) 100 करोड़ हो। पुलिस को 15 मिनट के लिए हटा दें और परिणाम देखें।”
इसी तरह से पश्चिम बंगाल के एक मौलवी के भाषणों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें वो कहता है, ”अगर रोहिंग्याओं को निर्वासित किया गया तो वे लाखों लोगों को जान से मार देंगे।” हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए कहा है कि मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ बयानों से हिंदू अशांत और डरे हुए हैं। इस तरह के बयान मुस्लिम लीग की यादों को ताजा करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश का विभाजन हुआ था।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से तीन तलाक का एक हैरान करने वाला मामला आया है। खबर है कि वहाँ एक मुस्लिम महिला ने थाने में उसके शौहर के विरुद्ध शिकायत दी। महिला ने बताया कि उसके शौहर ने इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उसने देह व्यापार में घुसने से और ऑर्केस्ट्रा में नाचने से मना कर दिया था।
अब पीड़िता ने पुलिस थाने में इस संबंध में अपने शौहर नसीम अहमद, उसकी अम्मी और दो बहनों के ख़िलाफ़ शिकायत दी है। पुलिस के मुताबिक महिला ने बताया कि साल 2007 में उसका निकाह जौनपुर जिले के मुंगरा बादशाहपुर इलाके में रहने वाले नसीम अहमद से हुआ था। इसके बाद दोनों के 3 बच्चे हुए- 2 बेटे और 1 बेटी। महिला का आरोप है कि साल 2015 में नसीम और उसके घरवालों ने उसके अब्बा से 2 लाख रुपए माँगे थे जबकि उसके अब्बा एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।
नसीम पर आरोप है कि वो अपनी बीवी से ऑर्केस्ट्रा शो में डांस करने के लिए दबाव बनाता था और उसे देह व्यापार में ढकेलने के लिए मजबूर करता था। महिला ने बताया कि ससुराल वालों के अत्याचार से बचाने के लिए उसकी अम्मी ने ससुराल में 5000 रुपए देने शुरू कर दिए थे ताकि उसे किसी तरह मजबूर न किया जाए।
बावजूद इतनी कोशिशों के नसीम के घरवालों ने अगस्त 2021 में महिला को घर से निकाल दिया। वह बार-बार अपने शौहर से घर बुलाने को कहती रही। लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल में जब उसने फोन किया तो उसे तलाक-तलाक-तलाक कहकर रिश्ता तोड़ दिया गया।
देहरादून में तीन तलाक
बता दें कि कुछ दिन पहले देहरादून से एक तीन तलाक का मामला प्रकाश में आया था। उस समय बीवी ने आरोप लगाया था कि शौहर दहेज के लिए उसे आए दिन ताने मारता था। उसकी शक्ल सूरत पर नकारात्मक कमेंट करता था। विरोध करने पर दूसरी निकाह की धमकी देता था। आरोप था कि शौहर ने उससे अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। फिर तीन तलाक दे घर से निकाल दिया। पीड़िता का कहना था कि मई 2021 में उसकी सास की मौत के बाद प्रताड़ना और अधिक बढ़ गई। पटेल नगर के इंस्पेक्टर देवेंद्र चौहान के अनुसार महिला की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। आरोपित शौहर पर तीन तलाक देने और अप्राकृतिक संबध बनाकर कर उत्पीड़न की भी धाराएँ लगाई गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (23 जनवरी, 2022) को दिल्ली के इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की भव्य होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया। कुछ ही महीनों बाद यहाँ नेताजी की ग्रेनाइट की एक भव्य मूर्ति स्थापित की जाएगी। उनकी जयंती के अवसर पर सम्बोधन देते हुए पीएम मोदी ने नेताजी को ‘भारत माँ का वीर सपूत’ बताते हुए उनकी 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था और इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, इनसे बनी स्थितियों से निपटने का जिम्मा कृषि मंत्रालय के पास था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चल रहा था।
पीएम मोदी ने कहा कि 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। उन्होंने बताया कि कैसे हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया और उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में ‘Gujarat State Disaster Management Act’ बनाया गया। उन्होंने जानकारी दी कि आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना।
प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया की बाद में केंद्र सरकार ने गुजरात के कानून से सबक लेते हुए 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। पीएम मोदी ने कहा कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं और कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।
पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने संयुक्त सैन्य अभ्यास बहुत देखा है। लेकिन, भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए संयुक्त ड्रिल की परंपरा शुरू की है। नेताजी कहते थे- ‘कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके।’ आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के 100वें साल से पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है।”
पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा, लेकिन ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी, लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। पीएम मोदी ने इस पर ख़ुशी जताई कि आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है।
उन्होंने कहा, “ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस कार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढियाँ, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है। मैं 21 अक्टूबर, 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, अविस्मरणीय है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं पाती थी। उन्होंने संकल्प लिया कि हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेस वे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेस वे विमान उतरने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है।
ताइवान सरकार (Taiwan Government) ने भारतीय शोधकर्ताओं और इतिहासकारों को उनके यहाँ आकर महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) के बारे में रिसर्च करने का निमंत्रण दिया है। इसके लिए ताइवान सरकार ने अपने राष्ट्रीय अभिलेखागार को खोलने का फैसला किया है। दिल्ली में ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र (ताइवानी दूतावास) के उप-प्रतिनिधि मुमिन चेन ने शनिवार (22 जनवरी 2022) को फिक्की द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125वें जन्मदिन समारोह में कहा कि नेताजी का 1930 और 40 के दशक में ताइवान पर बहुत प्रभाव रहा है।
कार्यक्रम के दौरान चेन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का ताइवान से जोड़ते हुए वहाँ पर इसके लिए किए गए प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। उस दौरान ताइवान जापान के कब्जे में था। भारत-ताइवान ऐतिहासिक जुड़ाव पर प्रकाश डालते हुए मुमिन चेन कहते हैं कि 1940 के दशक से ‘भारत और नेताजी के साथ, हमारे ऐतिहासिक संबंध’ हैं, जो कि संभवत: ताइवान के लोगों को नहीं पता था।
चीन के पूर्व राष्ट्रपति चियांग काई-शेक ने अपनी डायरी में नेताजी को लेकर लिखा था। उन्होंने नेताजी को लेकर सहानुभूति जताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के लिए जापानी लड़ाई में सहयोग करने का निर्णय समझ में आता है। साल 1975 तक चियांग ने ताइवान पर शासन किया था, उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना का पुरजोर विरोध करने के लिए जाना जाता है।
ये जानते हुए भी कि नेताजी ने ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाने के लिए जापान से मदद माँगी थी। चेन ने कहा, “1945 से पहले ताइवान जापान का उपनिनेश था, इसलिए नेताजी 1943 में ताइवान आए और फिर दूसरी बार 1945 में ताइवान आए थे।”
ताइवानी राजनयिक ने कहा कि अध्ययन के लिए ताइवान के राष्ट्रीय अभिलेखागार और कम्युनिकेशन के दूसरे माध्यम खुले हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान में कई ऐसे युवा इतिहासकार हैं, जो दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत का अध्ययन करने में रुचि रखते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “ताइवान में नेताजी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर बहुत सारे ऐतिहासिक दस्तावेज अभी भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम भारतीय विद्वान जानते हैं।” भारत-ताइवान के द्विपक्षीय संबंधों पर भी मुमिन चेन ने बात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के जरिए इंडो-पैसिफिक के सामान्य इतिहास की फिर से जाँच और फिर से खोज की आवश्यकता पर बल दिया।
बता दें कि नेताजी की मौत के रहस्य पर विवाद लगातार जारी है। अगस्त 1945 में विमान दुर्घटना के बाद नेताजी को ताइपे के सैन्य अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं।
आज (23 जनवरी को) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती है और इसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हुए उन्हें उन्हें याद किया जा रहा है। नेताजी की जयंती के साथ ही गणतंत्र दिवस समारोह की आधिकारिक शुरुआत भी हो गई। नेताजी की जयंती पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया।
नेता जी की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जनवरी को की थी। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने लिखा था, “जब तक नेताजी की भव्य प्रतिमा बनकर तैयार नहीं हो जाती, तब तक उस स्थान पर उनकी एक होलोग्राम प्रतिमा वहाँ लगाई जाएगी। मैं 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर इस होलोग्राम प्रतिमा का लोकार्पण करूँगा।”
Till the grand statue of Netaji Bose is completed, a hologram statue of his would be present at the same place. I will unveil the hologram statue on 23rd January, Netaji’s birth anniversary. pic.twitter.com/jsxFJwEkSJ
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ग्रेनाइट की प्रतिमा की ऊँचाई 28 फिट और चौड़ाई 6 फिट होगी। यह प्रतिमा उसी जगह स्थापित की जाएगी, जहाँ 1968 में हटाई गई किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक नेताजी सुभाष की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 के सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार प्रदान करेंगे। इन इनामों में किसी संस्थान को 51 लाख रुपए और व्यक्ति को 5 लाख रुपए और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। साथ ही नेताजी की जयंती को हर साल ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
India gratefully pays homage to Netaji Subhas Chandra Bose on his 125th birth anniversary. The daring steps that he took to fulfil his fierce commitment to the idea of a free India — Azad Hind — make him a national icon. His ideals and sacrifice will forever inspire every Indian.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नेताजी को याद करते हुए लिखा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर भारत कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धांजलि देता है। उनके आदर्श और बलिदान हर भारतीय को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।”
नेताजी बोस की 125वीं जयंती पर इंडिया गेट पर उनकी प्रतिमा
महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाने के लिए और साल भर चलने वाले समारोह के हिस्से के रूप में सरकार ने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक भव्य प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया है। ग्रेनाइट से बनी यह प्रतिमा हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के अपार योगदान को ध्यान में रखते हुए सही मायनों में एक उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी, और इसके साथ ही यह प्रतिमा नेताजी के प्रति देश के ऋणी होने का प्रतीक भी होगी।
प्रतिमा का काम पूरा होने तक नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा ठीक उसी स्थान पर लगाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (23 जनवरी, 2022) को सायं लगभग 6 बजे इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया। इस होलोग्राम प्रतिमा को 30,000 लुमेन 4के प्रोजेक्टर द्वारा संचालित किया जाएगा। एक अदृश्य, हाई गेन, 90% पारदर्शी होलोग्राफिक स्क्रीन इस तरह से लगाई गई है कि यह आगंतुकों को नजर नहीं आ रही है। होलोग्राम का सटीक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए उस पर नेताजी की थ्रीडी तस्वीर लगाई जाएगी। होलोग्राम प्रतिमा 28 फीट ऊँची और 6 फीट चौड़ी है।
सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार
इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2022 के लिए ‘सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार’ भी अलंकरण समारोह में प्रदान किए। समारोह के दौरान कुल मिलाकर सात पुरस्कार प्रदान किए गए। केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत में विभिन्न लोगों और संगठनों द्वारा प्रदान किए गए अमूल्य योगदान एवं नि:स्वार्थ सेवा की सराहना और सम्मानित करने के लिए वार्षिक सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार की शुरुआत की है।
हर साल 23 जनवरी को इस पुरस्कार की घोषणा की जाती है। इस पुरस्कार के तहत किसी संस्था को 51 लाख रुपये का नकद पुरस्कार एवं एक प्रमाण पत्र और किसी व्यक्ति को 5 लाख रुपए एवं एक प्रमाण पत्र दिया जाता है। प्रधानमंत्री स्वतंत्रता सेनानियों को उचित तरीके से सम्मानित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। इन प्रयासों के तहत विशेष रूप से ध्यान महान स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर रहा है। इस संबंध में कई कदम उठाए गए हैं जिनमें यह घोषणा भी शामिल है कि हर साल उनकी जयंती ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। इसी उत्कृष्ट भावना को ध्यान में रखते हुए गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत एक दिन पहले यानी 23 जनवरी से की जाएगी।
गुजरात के देवभूमि द्वारका में फ़क़ीरममद हुसैन सुंभालिया पर अपनी ही नाबालिग बेटी के रेप का आरोप लगा है। हुसैन पर यह भी आरोप है कि उसने अपनी बेटी को अपने साथ निकाह करने का दबाव बनाया। पीड़िता नाबालिग है जिसकी उम्र 12 साल बताई जा रही है।
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के आरोपित अब्बा ने यह कृत्य नशे में धुत कर कर किया। आरोपित इस से पहले भी अपनी बेटी पर खुद से निकाह करने का दबाव बना चुका है। साथ ही फ़क़ीरममद हुसैन पहले भी कई बार अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म कर चुका है। बच्ची की माँ ने इसकी शिकायत वादीनगर थाने में की है।
पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। फ़क़ीरममद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर पॉक्सो एक्ट की धारा 8, 12 और 18 के साथ सेक्शन 354 (K) (1) और 506 (2) IPC के तहत कार्रवाई की गई है। खंभालिया DYSP नीलम गोस्वामी ने न्यूज़ 18 को बताया, “इस घटना से देवभूमि क्षेत्र में सभी लोग हैरत में हैं। मामले की जाँच की जा रही है।”