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धर्मांतरण करो, मैरिज सर्टिफिकेट लो: मुस्लिम युवती से शादी करने वाले तरुण ने सरकारी बाबू साजिद पर लगाया आरोप, DM ने कहा- सबूत मिलने पर होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर खीरी जिले में मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले एक हिन्दू युवक ने सरकारी बाबू पर मैरिज सर्टिफिकेट देने के बदले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बनने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। इस सरकारी कर्मचारी का नाम मोहम्मद साजिद है। आरोप लगाने वाले युवक का नाम तरुण है। घटना शनिवार (22 जनवरी) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तरुण कई दिनों से स्पेशल मैरिज एक्ट में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए एडीएम आफिस (DM Office) के चक्कर लगा रहा था। युवक और युवती का कहना था कि वो दोनों बालिग हैं। दोनों ने आपसी सहमति से शादी करने का फैसला किया है। दोनों लखीमपुर खीरी के ही निवासी हैं। इसके बावजूद उनको शादी का प्रमाण पत्र देने के लिए काफी दिनों से दौड़ाया जा रहा है।

तरुण का आरोप है कि ADM कार्यालय में तैनात बाबू मोहम्मद साजिद ने उस पर रजिस्ट्रेशन के लिए धर्म परिवर्तन की शर्त रखी। इसी बात की शिकायत युवक ने लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी से की। इस शिकायत पर जिलाधिकारी ने फ़ौरन ADM और बाबू साजिद को तलब कर लिया।

बाबू साजिद ने धर्मान्तरण के दबाव वाले आरोपों को नकार दिया और रजिस्ट्रेशन में देरी की वजह LIU रिपोर्ट का न मिलना बताया। जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित औपचारिकताओं को जल्दी पूरी करने का आदेश दिया। इसके बाद घंटे भर में ही दोनों का प्रमाण-पत्र जारी हो गया।

ऑपइंडिया ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी IAS महेंद्र बहादुर सिंह से इस पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया, “शनिवार को मेरे पास शिकायत आई थी। मैंने तुरंत ही संबंधित अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। बाबू ने प्रमाण पत्र जारी होने में देरी का कारण LIU रिपोर्ट न मिलना बताया। मैंने फ़ौरन ही इस मामले के समाधान का आदेश दे दिया।”

जिलाधिकारी ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि आरोप लगाने वाले लड़के ने जो वीडियो दिखाई थी, उससे आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई है। यदि उसके पास कोई और वीडियो होगी या कोई और प्रमाण सामने आएँगे और उसमें आरोप साबित होते हैं तो संबंधित बाबू पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बाबू का LIU रिपोर्ट न मिलने का दावा सही है।

‘अल्लाह की कसम…घर में घुसकर मारूँगा’: सिद्धू के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा के खिलाफ FIR, पूर्व IPS ने हिन्दुओं को दी थी धमकी

पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab assembly polls) के बीच प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के सलाहकार पूर्व IPS अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा (Mohammad Mustafa) हिंदुओं को धमकी देने के मामले में मुसीबत में पड़ गए हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मुस्तफा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया गया है।

दरअसल, मुस्तफा की पत्नी मलेरकोटला से कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार हैं। वो उन्हीं के समर्थन में जनसभा को आयोजित कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने हिंदुओं को धमकी दी थी। उनके इस बयान के बाद बीजेपी समेत विपक्ष ने उनपर जमकर निशाना साधा है। बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुस्तफा के भाषण की वो क्लिप भी दिखाई। हालाँकि, हिंदुओं को टार्गेट करने के अपने बयान से मुकरते हुए मुस्तफा ने सफाई दी है कि उन्होंने केवल आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निसाना बनाया था। क्योंकि उन्होंने उनका पीछा कर उनके साथ दुर्व्यवहार किया था।

मोहम्मद मुस्तफा का बयान

नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार बने मोहम्मद मुस्तफा पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। वो डीजीपी जैसे अहम पद पर भी रह चुके हैं। 21 जनवरी 2022 को मुस्तफा के हिंदुओं को धमकी देने वाले भाषण की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसमें वो कहते हैं, “अल्लाह की कसम खाकर कहता हूँ कि इनका कोई जलसा नहीं होने दूँगा। मैं कौमी फौजी हूँ। मैं आरएसएस (RSS) का एजेंट नहीं हूँ, जो डर कर घर में घुस जाऊँगा। अगर इन्होंने दोबारा ऐसी हरकत की, तो खुदा की कसम इनके घर में घुसकर इन्हें मारूँगा। आज मैं इन्हें सिर्फ वॉर्निंग दे रहा हूँ। मैं वोटों के लिए नहीं लड़ रहा हूँ, मैं कौम के लिए लड़ रहा हूँ।”

पूर्व आईपीएस अधिकारी के इस बयान के बाद लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भड़क उठा था। इसी क्रम में एक यूजर ने कॉन्ग्रेस और नवजोत सिंह सिद्धू को टैग करते हुए लिखा था कि ये कॉन्ग्रेस का असली चेहरा है। नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा महोदय, अपनी ज़बान पर लगाम दे और अल्लाह को बदनाम मत कर, नहीं तो रामभक्त वानर सेना लंका दहन करने में देर नहीं लगाती। तेरे जैसे कौम के सिपाहियों को औकात पर लाना जानते हैं।

‘काशी मोक्ष की नगरी ही नहीं, जीवनदायिनी भी’: चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित ब्रिटिश नागरिक पहुँचा विश्वनाथ के द्वार, 13000 km की यात्रा

यूनाइटेड किंगडम (UK) के ब्रिस्टल में रहने वाले ल्यूक ग्रेनफिल शॉ मात्र 24 साल के हैं। इस छोटी-सी उम्र में चौथे स्टेज का कैंसर डिटेक्ट होने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी का ध्येय ही बदल दिया है। अब वे इस दुनिया को छोड़ने से पहले हजारों लोगों को मौत के मुँह से बाहर निकालने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। अब वाराणसी में कालभैरव के द्वार पर पहुँचे हैं।

ल्यूक ग्रेनफिल शॉ दुनिया भर में घूम-घूम कर कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए फंड जुटाने का काम कर रहे हैं, ताकि उनका इलाज किया जा सके। उन्होंने इस यात्रा में 3 लाख पाउंड (लगभग 3 करोड़ रुपए) फंड इकट्‌ठा करने का लक्ष्य रखा है और वे ब्रिस्टल से बीजिंग तक की लगभग 13,000 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से कर रहे हैं और उनका साथ दे रही हैं उनकी माँ।

काशी को लेकर ल्यूक ने एक उम्मीद जाहिर की। दैनिक भास्कर को बताया, “काशी होगी मोक्ष सिटी, लेकिन हम तो जीवन जीने और जीवनदान करने की उम्मीद से यहाँ पर आए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने वाराणसी की आध्यात्मिक शक्ति के बारे में काफी सुना है। इसलिए मैं यहाँ बाबा काशी विश्वनाथ और गंगा मैया से इस नेक कार्य के लिए आशीर्वाद माँगने आया हूँ। यह शहर मोक्ष ही नहीं जीवनदायिनी भी है।”

यात्रा के लिए साइकिल को क्यों चुनने के सवाल पर ल्यूक ने बताया, “वह फिट रहकर अपने ऊपर आए संकट को कुछ दिन तक टाल सकते हैं। अंत तक साइकिलिंग करके रोग को हराने की कोशिश करूँगा। मेरी माँ हर पल मेरे साथ हैं।”

अपनी यात्रा को लेकर ल्यूक ने बताया कि वाराणसी के बाद वे बांग्लादेश होते हुए चीन के बीजिंग जाएँगे और वहीं अपनी यात्रा का समापन करेंगे। इस दौरान साइकिल से शुरू हुई उनकी यात्रा 30 देशों से गुजर कर पूरी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वह यूके के ब्रिस्टल से निकले तो रास्ते में नीदरलैंड, स्वीट्जरलैंड, आस्ट्रिया, हंगरी, सर्बिया और काला सागर पार करके टर्की, जार्जिया, मध्य एशिया और पाकिस्तान भी गए। ल्यूक ने कहा कि भारत के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया।

MP में ‘लव जिहाद’ : गलत ID से हिंदू लड़की के साथ था अकरम, होटल में हिंदू संगठन ने पकड़ा

मध्य प्रदेश के खंडवा में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के आरोप में हिंदू संगठनों ने एक दूसरे समुदाय के युवक को हिंदू समुदाय की युवती के साथ हॉलिडे-इन होटल में पकड़ा। युवक होटल में लड़की की गलत पहचान दिखाकर उसके साथ वहाँ रुका हुआ था। इसी दौरान हिंदू संगठनों को इसकी भनक लगी। उन्होंने वहाँ पहुँच युवक-युवती दोनों को पकड़ा और लव जिहाद के आरोप में दोनों को अपने साथ लेकर थाने गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस थाने में हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने इस केस को लव जिहाद संबंधी मामले में दर्ज करने को कहा। हालाँकि जब लड़की से पूछताछ हुई तो उसने कहा कि वो अपनी मर्जी से होटल आई थी और दोनों लोग बालिग हैं। पुलिस की पूछताछ में संगठन का शक सच सामने आया और लड़की-लड़का अलग-अलग समुदाय के निकले। लड़के का नाम खबरों में अकरम बताया जा रहा है।

संगठन ने दावा किया कि लड़की पर दबाव बनाया गया है इसलिए वह गलत बयान दे रही है। मगर पुलिस ने कहा कि दबाव जैसी स्थिति उन्हें नहीं लगी, क्योंकि लड़की सबके सामने बयान दे रही थी। इसके अलावा वह MBA है, उसे कोई बहला-फुसला कर होटल नहीं लेकर आया। पुलिस के मुताबिक, दोनों शाम 6 बजे से होटल की तलाश में थे लेकिन सबको इनका मामला संदिग्ध लगा इसलिए किसी ने इन्हें जगह नहीं दी। बाद में हॉलिडे-इन ने इन्हें कमरा दिया।

बता दें कि इस पूरे मामले में हिंदू संगठनों ने होटल के मालिक पर भी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने सवाल पूछा है कि आखिर लड़की को गलत पहचान के साथ कैसे रोका गया। पुलिस ने इस मामले के संबंध में कहा है कि जब तक जाँच पूरी नहीं होती तब तक वह इस मामले में कार्रवाई नहीं करेंगे। जाँच के बाद होटल मालिक के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने मामले की जानकारी लड़की के घरवालों को दे दी है। लेकिन न्यूज 18 की रिपोर्ट बताती है कि पुलिस ने इस केस को प्राइवेसी का मामला कहा है। साथ ही ये भी बोला है कि लड़की के परिजन को वो लोग नहीं बुलाएँगे। बदनामी के डर से अगर कोई कुछ गलत कदम उठा ले तो फिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

खंडवा में लव जिहाद: अरबाज ने विशाल बन किया 10वीं की लड़की से गैंगरेप

उल्लेखनीय है कि खंडवा में लव जिहाद का मामला इस समय गरमाया हुआ है। पिछले दिनों हिंदू नाम बताकर 10वीं की छात्रा से दोस्ती कर उसका गैंगरेप करने के मामले में पुलिस ने विशाल उर्फ अरबाज पर मामला दर्ज किया था। बुधवार को ये मामला हरसूद पुलिस ने दर्ज किया। इस मामले में अरबाज का साथी सादिक पकड़ा जा चुका है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पीड़िता ने बताया है कि उसके साथ अरबाज और उसके साथी ने गैंगरेप करने के बाद धर्मांतरण का दबाव भी बनाया था। उसकी मानें तो अरबाज ने ऑनलाइन दोस्ती के दौरान पहले अपना नाम विशाल बताया था। हालाँकि बाद में पता चला कि वो अरबाज है ।

कानून व्यवस्था से लेकर कोरोना प्रबंधन तक: ‘नीति अध्ययन’ बताएगा योगी सरकार ने कैसे बनाया नया यूपी, 9 अध्यायों में समझिए 5 साल

सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है।

इन्हीं शब्दों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने जीवन और नीति क्रियान्वयन का सार बना लिया है। लोक-कल्याण के संकल्प की शक्ति के बूते आज उत्तर प्रदेश के सपने साकार हो रहे है। ‘होप’ रिर्सच फांऊंडेशन द्वारा शोध उपरान्त लिखी गई किताब ‘नीति अध्ययन’ इसी दिशा में किया गया महत्वपूर्ण या कहें कि मील का पत्थर साबित होगी। यह किताब जल्द ही बाजार में सम्मानित पाठक गणों के समक्ष उपलब्ध होगी। इस पुस्तक के लेखकों के विशद अध्ययन ,जिसने यह स्थापित किया है कि पिछले 5 वर्षों में नए भारत के नए उत्तर प्रदेश का सृजन हुआ है, का विमर्श शुरू करने हेतु स्वागत है।

भारतीय जनता पार्टी तथा उसके शीर्ष राज्य नेतृत्व के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि पार्टी अभी सेवा भाव तथा सुफल प्रयासों के सन्दर्भ में प्रदेशवासियों के हृदय में एक विशिष्ट जगह बना चुकी है। 240 पेज वाली इस किताब में 9 अध्याय है जिसे अकादमिक जगत के मूर्धन्य विद्वानों ने कलमबद्ध किया है एवं यह बताया है कि कैसे नव उत्तर प्रदेश का सृजन हुआ है। इस पुस्तक में बहुमायामी विश्लेषण किया गया है तथा उन सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं को विषयवार बताया गया है जिन्होंने प्रदेश में सुशासन को नव जीवन प्रदान किया है।

पहला अध्याय दिग्विजय सिंह द्वारा लिखा गया है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण नीतियों तथा उसकी प्रासंगिकता का सविस्तार उल्लेख किया गया है। दूसरा अध्याय संगीता केशरी द्वारा लिखा गया है और इस अध्याय में प्रदेश में बदली हुई कानून व्यवस्था का स्थूल विवेचन कर यह बताने का प्रयास किया गया है कि कैसे योगी की नीतियों ने प्रदेश को मुक्त बनाने का काम किया है। तीसरा अध्याय अमोल कुमार द्वारा कलमबद्ध किया गया है, जिसमें निवेश तथा नवाचार सन्दर्भों का विस्तार से उल्लेख है।

चतुर्थ अध्याय अभिषेक कुमार द्वारा लिखित है जिसमें प्रदेश शासन के द्वारा शुरू किए गए नवीन स्वास्थ्य योजनाओं तथा इनके क्रियान्वयन का बिन्दुवार विश्लेषण है। पाँचवाँ अध्याय कोरोना प्रबंधन तथा इसकी दिशा में किए गये कार्यों का दर्पण हैं जिसने मानवता के ऊपर विपदा समान इस महामारी को संभालने में प्रदेश सरकार के बेहतरीन प्रयासों का मानचित्रण किया है। इस अध्याय को डा० विशाल मिश्रा ने लिखा है जिनके सार्वजनिक जीवन तथा शैक्षणिक विद्वता का प्रभाव इस लेख में मोती की तरह चमकता हुआ दिखता है।

छठा अध्याय पुनः संगीता केशरी द्वारा लिखित है जिसमे शिक्षा व्यवस्था इसकी लक्षित कार्यप्रणाली और दूरगामी प्रभाव को बताया गया है। सातवाँ अध्याय सत्यम द्वारा लिखित है जिसमें डिजिटल क्रांति तथा इसके माध्यम से आई क्रांति एवं जनमानस के ऊपर इसके प्रभावो का विशद अध्ययन किया गया है। आठवाँ अध्याय विजय दीक्षित ने कौशल विकास के सन्दर्भ में लिखा है तथा स्पष्ट रूप से यह रेखांकित करने का प्रयास किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वपूर्ण प्रयास से कैसे रोजगार की दिशा और दशा दोनों बदली है।

नवम एवं अंतिम अध्याय डॉ० रितु शर्मा द्वारा लिखित है। प्रदेश सरकार की वरीयता में प्रथम, महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के सन्दर्भ में शुरू किए गए नवीन योजनाओं को रेखांरित किया गया है तथा यह बताने का प्रयास किया गया है कि मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने कैसे अब तक उपेक्षित इस वर्ग का कायाकल्प कर दिया है।

(लेखक अभिषेक कुमार इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र (दिल्ली) साहित्य समूह सह-प्रमुख, सक्षम दिल्ली प्रांत कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रांत मीडिया प्रभारी है)

कोरबा में व्यापारियों ने गैर-हिंदुओं का किया बहिष्कार, हिंदू राष्ट्र की बात की: Video को छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया धार्मिक उन्माद, FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कोरबा (Korba) में कुछ व्यापारियों द्वारा अपने यहाँ सिर्फ हिंदुओं को नौकरी पर रखने की बात कहने के कारण उन पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार में पुलिस का कहना है कि इस का बात का शपथ लेते लोगों का एक वीडियो सामने आया है और इसी आधार पर कार्रवाई की गई है।

प्रदेश के बांकीमोगरा थाना क्षेत्र में कुछ व्यापारियों ने सामूहिक रूप से इस बात का निर्णय लिया कि वे अपने यहाँ गैर-हिंदुओं को काम पर नहीं रखेंगे। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि व्यापारी अग्नि को साक्षी मानकर शपथ ले रहे हैं कि वे अपने प्रतिष्ठानों और घरों में सिर्फ हिंदुओं को ही नौकरी देंगे। इस दौरान उन्होंने देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की भी बात कही। इस बात को पुलिस ने धार्मिक उन्माद फैलाने वाला माना है।

कोरबा पुलिस ने ट्वीट किया, “ट्विटर पर वीडियो पोस्ट किया गया है, जिसमें बाकीमोगरा के प्रमोद अग्रवाल सहित कुछ लोग एकत्रित होकर शपथ लेते हुए सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाली भाषा पाए जाने से मामले में आरोपी प्रमोद अग्रवाल व अन्य के विरुद्ध धारा153ए भादवी के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।”

इस वीडियो को सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर शनिवार (22 जनवरी 2022) को शेयर किया गया है। रात में बनाए गए इस वीडियो में कुछ लोग आग जलाकर उसके चारों तरफ गोला बनाकर खड़े हैं। इसमें एक व्यक्ति स्पीकर के माध्यम से बाकी लोगों को भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने, हिंदुओं को हर तरह से सामाजिक एवं आर्थिक मदद देने के साथ-साथ उनको ही काम देने की शपथ दिला रहा था। वीडियो के अंत में लोग ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए भी दिखाई दे रहे थे।

 इस मामले में पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है और इस संबंध में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। राज्य के सरगुजा से 5 जनवरी 2022 को इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें लोग मुस्लिमों के यहाँ काम नहीं करने और अपनी संपत्ति (खेत या अन्य) किराए पर उन्हें नहीं देने और ना ही उन्हें बेचने की शपथ खा रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि बगल के गाँव के मुस्लिम उनके साथ मारपीट करते हैं।

नेहरू ने नेताजी पर द्वीप का नाम रखने का प्रस्ताव ठुकरा दिया, संसद में कॉन्ग्रेस ने बोस को बताया था ‘आतंकी’: PM मोदी दे रहे सम्मान

आमतौर पर महात्मा गाँधी और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बीच तनाव और तल्खी भरे रिश्तों की चर्चा की जाती है। महात्मा गाँधी के सम्पूर्ण वांग्मय में नेताजी का सर्वप्रथम उल्लेख 1921 में आता है और आखिरी जिक्र उन्होंने अपनी मृत्यु से मात्र एक सप्ताह पहले सुभाष बाबू के जन्मदिन, यानी 23 जनवरी, 1948 को किया था। उस दिन एक प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, “सुभाष बाबू बड़े देश-प्रेमी थे। उन्होंने देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी।”

मुद्दा सिर्फ महात्मा गाँधी और नेताजी के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों का नहीं है, बल्कि यह एक सीख है। खासकर उन लोगों के लिए, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद महात्मा गाँधी के बताए रास्ते पर न सिर्फ चलने का निर्णय लिया बल्कि उसकी सार्वजनिक कसमें भी खाई थीं। एक नेता जो नेताजी के निधन के बाद सार्वजनिक मंच पर सहजता से उन्हें याद करता है और सभी तरह की कड़वाहट को दरकिनार कर उनकी तारीफ में कम-से-कम चार शब्द तो कहता है! तो क्या उनके अनुयायियों को भी इसी परंपरा को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए था?

दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ। जब स्वतंत्रता के कुछ ही सालों के बाद देश की पहली लोकसभा का गठन हुआ तो वास्तविकता भी सामने आ गई। लोकसभा में 2 अगस्त, 1952 को कोल्हापुर-सतारा से निर्दलीय निर्वाचित सदस्य हनुमंतराव बालासाहेब खर्ड़ेकर ने एक सवाल पूछा था, “स्वतंत्रता का मंदिर कैसे बना है?” इसमें निश्चित रूप से गाँधी या नेहरू के रूप में गुंबद है। वे मार्गदर्शक, और प्रकाश-स्तंभ हैं, लेकिन स्वतंत्रता के मंदिर में दीवारें और स्तंभ भी होने चाहिए। अतः, दादाभाई नौरोजी, तिलक से लेकर सुभाष बोस तक, जैसे सभी स्तंभों को हमारे दोस्त भूल गए हैं।”

यह कोई साधारण बात नहीं थी कि मात्र चार सालों के अंतराल में ही तत्कालीन सरकारों पर क्रांतिकारियों अथवा स्वतंत्रता सेनानियों को भुला देने के आरोप लगने शुरू हो गए थे। ऐसा भी नहीं है कि नेहरू सरकार को समय-समय पर याद नहीं दिलाया गया हो। कुछ ही महीनों बाद, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 19 फरवरी 1953 को अंडमान द्वीप का नाम परिवर्तित कर उसे सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर ‘सुभाष-द्वीप’ रखने का सुझाव पेश किया, जिसे नेहरू सरकार ने एकदम अनदेखा कर दिया।

फिर 24 अप्रैल, 1953 को तालासेरी (तेलिचेरी) से लोकसभा सदस्य पी.एन. दामोदरन ने शिक्षा मंत्री से प्रश्न किया कि क्या स्वतंत्रता लेखन के इतिहास में सुभाष चन्द्र बोस और INA को शामिल किया जाएगा? सरकार की तरफ से इस प्रश्न का उत्तर के.डी. मालवीय द्वारा टालमटोल कर दिया गया। यह सिर्फ कुछ गिने-चुने मौके नहीं थे, बल्कि दर्जनों बार ऐसा हुआ कि देशभर से सुभाष चन्द्र बोस सहित अन्य क्रांतिकारियों को सम्मान देने के प्रस्ताव पेश किए गए लेकिन हर बार तत्कालीन सरकारों की तरफ से ‘जानबूझकर’ उदासीनता ही दिखाई गयी।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ पर नजर डालें तो क्रांतिकारियों की अनदेखी का प्रमुख कारण व्यक्तिगत एवं पक्षपाती ही ज्यादा नजर आता है। उस पुस्तक में उन्होंने सुभाष बाबू के कॉन्ग्रेस अध्यक्षीय कार्यकाल को मात्र आधे पन्ने में समेट कर बहुत ही नकारात्मक रूप से पेश किया है। जबकि अन्य कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष विशेषकर अबुल कलम आजाद की दर्जनों बार तारीफ की गई है। जब इस पक्षपात को लेकर संविधान सभा के सदस्य, हरि विष्णु कामथ ने जवाहरलाल नेहरू से शिकायत की तो उन्होंने माफी माँगते हुए कहा कि पुस्तक के अगले संस्करण में वे इस गलती को ठीक करेंगे।

हालाँकि, न तो पुस्तक में और न ही सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कभी इस गलती को ठीक किया। प्रधानमंत्री नेहरू की मृत्यु के बाद नेताजी को सम्मान दिलाने की कवायद ने दुबारा जोर पकड़ा। इस बार 3 दिसंबर, 1965 को हरि विष्णु कामथ ने ही लोकसभा सदस्य के नाते एक सविधान (संशोधन) अधिनियम पेश किया, जिसके अंतर्गत उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम ‘शहीद एवं स्वराज द्वीप समूह’ रखने का प्रस्ताव रखा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर द्वीप का नाम सुभाष द्वीप भी किया जाता है तो भी कोई आपत्ति नहीं है।

इसी चर्चा के दौरान मधु लिमये ने कहा, “राष्ट्रपति भवन के सामने एक बड़ा चौड़ा राज पथ है। उसी राज पथ के एक कोने पर आज भी पंचम जॉर्ज की मूर्ति कायम है। यह कितनी शर्मनाक चीज है। अगर वहाँ पर सुभाष बाबू के नाम से प्रतिष्ठापना की जाती तो मैं कहता कि वाकई यह हमारे प्रजासत्तात्मक राज्य की राजधानी है, गुलामबाद नहीं है। लेकिन जब तक पंचम जॉर्ज की मूर्ति रहेगी और नेताजी सुभाष जैसे नेताओं की इज्जत नहीं की जाएगी तब तक मुझे कहना पड़ेगा कि आज भी हम गुलामबाद में रहते है और लोकसभा भी गुलामाबाद में बँटती है।”

हंगामा मचने के बाद पंचम जॉर्ज की मूर्ति को तो वहाँ से हटा दिया गया लेकिन नेताजी की मूर्ति वहाँ स्थापित नहीं की गई। एक के बाद एक कई दशक बीतते चले गए लेकिन किसी सरकार ने उस स्थान की सुध नहीं ली। अतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उस स्थान पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करना सुभाष बाबू के प्रति वह उचित सम्मान है जिसकी कई सालों से राह देखी जा रही थी। यही नहीं, इस बात का भी परिचायक है कि भारत अब सदियों पुरानी गुलामी की मानसिकता से बाहर आ रहा है।

सरकार के दबाव के चलते कामथ द्वारा विधेयक वापस ले लिया गया लेकिन 17 नवम्बर, 1972 को इस सम्बन्ध में एक अन्य संविधान (संशोधन) विधेयक पेश किया गया। कांग्रेस के सदस्य बिनॉय कृष्णा दासचौधरी ने उक्त विधेयक पेश करते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम ‘शहीद एवं स्वराज द्वीप समूह’ रखने का प्रस्ताव रखा। विधेयक पर 1 दिसंबर 1972 को विस्तृत चर्चा के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के सदस्य झारखंडे राय ने कहा, “मैं एक बात और कहना चाहता हूँ। यह इस सरकार (प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी) के ऊपर मेरा दूसरा आरोप है। पता नहीं क्यों पिछले पच्चीस सालों से इन लोगों ने क्रांतिकारी या दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों का वह सम्मान नहीं किया जो करना चाहिए था।”

जब चर्चा आगे बढ़ी तो कॉन्ग्रेस (आई) के सदस्य राम गोपाल रेड्डी ने सुभाष चन्द्र बोस, श्री अरविन्द और विनायक दामोदर सावरकर को ‘आतंकवादी’ कहकर संबोधित कर दिया। उनके इस अपमानजनक शब्दों को लेकर विरोध हुआ तो रेड्डी ने कहा था, “मुझे उन्हें आतंकवादी कहने में कोई आपत्ति नहीं है।” इससे बड़ी क्या विडम्बना होगी कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों को सम्मान देना तो दूर, अब संसद के अंदर ही उन्हें आतंकवादी तक कहा जाने लगा था।

केंद्र सरकार द्वारा लगातार उपेक्षा और अपमान के बावजूद भी नेताजी को सम्मान दिलाने के प्रयासों में कभी ठहराव देखने को नही मिलता है। साल 1996-1997 में एक ‘अंडमान और निकोबार द्वीप विधेयक’ लोकसभा में पेश किया गया। इस दौरान भी द्वीप समूह के नाम को परिवर्तित करने की पेशकश की गयी लेकिन यह सपना यहाँ भी पूरा नहीं हो सका। आखिरकार, साल 2018 में जाकर वह दिन आया जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों का नामांकरण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वीप, शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप किया। इस प्रकार उन्होंने तमाम दिवंगत लोकसभा सदस्यों की माँग को पूरा करने के साथ-साथ उस सपने को साकार किया जिसकी शुरुआत स्वयं नेताजी ने की थी।

सूरत की सोसाइटी में खड़ी हो गई ‘मस्जिद’, होने लगा नमाज: ‘वक्फ’ के नाम पर संपत्ति ट्रांसफर का खेल, किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं

सोशल मीडिया पर शनिवार (22 जनवरी, 2022) को एक वीडियो खासा वायरल हुआ, जिसके आधार पर आरोप लगाया गया कि ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने गुजरात के सूरत के मोरा गाँव स्थित एक ‘मस्जिद’ में नमाज को रोक दिया और हंगामा किया। इसके बाद सूरत के कॉन्ग्रेस पार्षद असलम साइकिलवाला का एक फेसबुक पोस्ट आया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उक्त ‘शिव शक्ति सोसाइटी’ के भीतर बनी संरचना जिसमें नमाज हो रही थी, वो वक्फ बोर्ड की संपत्ति है।

उन्होंने उसे एक मस्जिद/मदरसा भी बताया। जिस जगह पर नमाज हो रही थी, वो चारुयसी तालुका के कंथा क्षेत्र में हजीरा के पास स्थित है। असलम ने दावा किया कि ‘गुजरात वक्फ बोर्ड’ की संपत्ति होने के कारण ये मस्जिद/मदरसा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण ये मुस्लिमों के लिए एक पवित्र स्थल है। उन्होंने दावा किया कि इच्छापुर पुलिस थाने में ये सहमति बनी थी कि कोरोना दिशानिर्देशों के कारण इस जगह पर मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की अनुमति मिलेगी।

अब इस सोसाइटी में रहने वाले और आपसास के सभी मुस्लिम यहाँ आकर नमाज पढ़ते हैं। इस फेसबुक पोस्ट में बताया गया है कि शनिवार को ही PI और PSI की मौजूदगी में एक बैठक हुई, जिसमें मोरा गाँव् के कई प्रतिष्ठित लोग मौजूद थे। इसमें मौलाना फैयाज लटूरी, असलम साइकिलवाला, खुर्शीद सैयद और मकदूर रँगूनी जैसे कई मुस्लिम नेता भी मौजूद थे। एक वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि कोविड-19 के खतरे से उबरने के बाद लोगों की एक बैठक होगी, जिसमें ये तय किया जाएगा कि बाहरियों को यहाँ नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या नहीं।

जनवरी 2022 की शुरुआत में गाँधीनगर की संस्था ‘एकता एज लक्ष्य’ ने 33 जिलों के कलक्टरों एवं प्रमुखों को एक पत्र लिख कर आग्रह किया कि वक्फ बोर्ड को भंग किया जाए। संस्था ने आरोप लगाया था कि वक्फ बोर्ड अवध रूप से सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट संपत्तियों को अपने कब्जे में ले रहा है। इसके लिए ‘वक्फ एक्ट, 1995’ के नियम-कानूनों का उल्लंघन किया जाता है। पत्र में लिखा था कि भारतीय सशस्त्र बलों और रेलवे के आल्वा वक्फ बोर्ड के पास ही सबसे ज्यादा संपत्ति है।

इस एक्ट में हिन्दुओं के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है। इसमें आरोप लगाया गया था कि इसमें सिर्फ एक ही समुदाय के लिए सारे प्रावधान हैं, इसीलिए ये देश के संविधान की सेक्युलर विचारधारा के विरुद्ध है। इसमें लिखा गया था कि संविधान के खिलाफ कोई नियम-कानून नहीं हो सकता और वक्फ बोर्ड को गैर-इस्लामी समुदायों की भावनाओं की कोई फ़िक्र नहीं है। इसमें भेदभाव वाली नीति है। इसमें आरोप लगाया गया था कि वक्फ बोर्ड के पास असीमित शक्तियाँ हैं, जिनका दुरुपयोग कर के आम आदमी को परेशान किया जाता है।

इसमें बताया गया था कि जुलाई 2020 तक वक्फ बोर्ड के पास 6,59,877 अचल संपत्तियाँ हैं। इनका क्षेत्रफल 8 लाख हेक्टेयर है, जिन पर बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है। इसमें लिखा था, “इस तरह अवैध तरीके से संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना ‘लैंड जिहाद’ का हिस्सा है। ये देशव्यापी साजिश है, इसीलिए भेदभाव वाले नियम-कानून को बदला जाना चाहिए। सेक्युलर राष्ट्र में इसकी कोई जरूरत नहीं।” सूरत और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों को वक्फ बोर्ड्स को ट्रांसफर किए जाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं।

‘वक्फ’ का अर्थ ही है कि किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति को इस्लामी कार्यों के लिए दान करना इस्लाम के कानून के हिसाब से पुण्य का कार्य माना जाता है। ये एक प्रकार की ‘इस्लामी चैरिटी’ है। इसके अनुसार बोर्ड के साथ रजिस्टर्ड संपत्ति ‘वक्फ’ हो जाती है, अगर व्यक्ति की मौत भी हो जाए तो। इसी तरह ताज़ा मामले में भी ‘शिव शक्ति सोसाइटी’ के कुछ प्लॉट्स मुस्लिमों को बेचे गए थे। इनमें से एक प्लॉट पर एक संरचना खड़ी कर दी गई और उस पर नमाज होने लगी।

2020 में कोरोना संक्रमण आपदा की पहली लहर के दौरान ही एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी संपत्ति को वक्फ के नाम रजिस्टर कर दिया। इसे मस्जिद/मदरसा के रूप में रजिस्टर कर के यहाँ नमाज पढ़ा जाने लगा। लोगों ने वक्फ के नियमों को एकतरफा बताया है। कोई भी अपनी संपत्ति को ‘वक्फ’ बता कर इसे इस रूप में रजिस्टर कर सकता है। कोई पड़ोसी इसमें कुछ नहीं कर सकता। शहरी क्षेत्रों में ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट’ के कारण जागरूकता भी है, लेकिन गाँवों में लोग कुछ समझ नहीं पाते।

इस सम्बन्ध में एक वकील ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए बताया, “वक्फ में संपत्ति को रजिस्टर करने के लिए किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है। ये एकतरफा फैसला होता है। सामान्यतः सोसाइटी के अध्यक्ष या कमिटी की अनुमति चाहिए होती है,अगर आप अपनी संपत्ति ट्रांसफर कर रहे हैं तो। इससे अवैध करारों से बचा जा सकता है। लेकिन, कल को आपका मुस्लिम पड़ोसी अपने घर को वक्फ से रजिस्टर कर के इसे मस्जिद घोषित कर दे और वहाँ नमाज के लिए जमावड़ा लगने लगे, तो आप कुछ नहीं कर सकते।”

गणतंत्र दिवस पर पुलवामा जैसा अटैक कर सकते हैं आतंकी: खुफिया अलर्ट जारी, कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का सहयोगी पकड़ा गया

तीन दिन बाद गणतंत्र दिवस (Republic day) है, जिसमें आतंकी हमले का साया मंडरा रहा है। खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है कि गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी पुलवामा जैसा हमला कर सकते हैं। वो सुरक्षा बलों के रास्तों में आई़ईडी (IED) लगा सकते हैं या फिर उन पर फिदायीन हमला कर सकते हैं। एजेंसियों ने आतंकियों की मूवमेंट को ट्रेस कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया विभाग ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में तीन संदिग्ध लोगों की मूवमेंट को 18-19 जनवरी 2022 की रात को ट्रेस किया था। अब इंटेलीजेंस एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि ट्रेस किए गए तीनों लोग आतंकी हो सकते हैं, जो कि सुरक्षाबलों के ट्रैक पर आईईडी प्लांट कर वारदात को अंजाम दे सकते हैं।

इंटेलीजेंस अलर्ट में फिदायीन हमले की भी आशंका व्यक्त की गई है। साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है। हालाँकि, लगातार मिल रहे सिक्योरिटी इनपुट्स के बाद कश्मीर से दिल्ली तक सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है।

जैश ए मोहम्मद का सहयोगी गिरफ्तार

खुफिया अलर्ट के बीच शनिवार (22 जनवरी 2022) को सुरक्षा बलों ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक सहयोगी को गिरफ्तार किया है। उमर फारुक भट नाम का यह आतंकी अवंतीपोरा जिले के रेंजीपोरा का रहने वाला है। उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड समेत कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, उमर फारुक भट आतंकियों के रहने-खाने, हथियारों का आवागमन और ठिकानों को बदलने में उनकी मदद करता था। इससे पहले गुरुवार को भी जम्मू-कश्मीर के बडगाम में लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया गया था। उसका नाम जहांगीर अहमद नाइकू था और वह शोपियाँ का रहने वाला था। उसके पास से एक पिस्टल, दो मैगजीन और 16 कारतूस बरामद किए गए थे। उससे पहले लश्कर के दो आतंकियों को शोपियाँ के किलबाल इलाके में एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था।

राजस्थान में नाबालिगों से बलात्कार: कहीं स्कूल जाती लड़की को दिन दहाड़े उठाया, तो कहीं ‘बुरी आत्मा’ उतारने के बहाने हुआ रेप

राजस्थान में नाबालिग लड़कियों के साथ होती वारदातें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं पर स्कूल जाती लड़की को उठाकर उसका रेप किया जा रहा है तो कहीं पर किसी अन्य बहाने से नाबालिगों को निशाना बनाया जा रहा है। अभी हाल में राजस्थान से ही दो घटनाएँ प्रकाश में आई हैं जब एक नाबालिग का दिन दहाड़े दो लड़कों ने अपहरण कर उसका गैंगरेप किया और दूसरी घटना आई है जब एक ढोंगी ने झाड़-फूँक के बहाने नाबालिग की अस्मत लूटी।

स्कूल जाती लड़की से गैंगरेप

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहली घटना नागौर जिले के मारोठ थाना क्षेत्र की है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार की सुबह उनकी बेटी स्कूल जाने के लिए निकली थी तभी दो लड़कों ने उसका बाइक से पीछा किया। बाद में उसे मौका देख बेहोश कर मार्केट ले गए और वहीं दोनों ने नाबालिग का दुष्कर्म किया।

शिकायत के अनुसार, स्कूल के लिए सुबह की निकली लड़की जब शाम तक घर नहीं पहुँची तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। इसी दौरान किसी ने घरवालों को बताया कि पड़ोसी गाँव के दो लड़के शंकर लाल और ओम प्रकाश लड़की को उठाकर गाँव के बाहर ले गए। पिता का आरोप है कि दोनों आरोपितों ने इस दौरान पीड़िता की अश्लील वीडियो-तस्वीरें खींचीं और उसे छोड़ने से पहले धमकाया कि अगर उसने मुँह खोला तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

इसके बाद दोनों लड़कों ने नाबालिग को भैसलाना छोड़ा और वहाँ से फरार हो गए। नाबालिग की अवस्था देख किसी ने पीड़िता के पिता को इसकी जानकारी दी तो पिता और ताऊ जाकर उसे घर लाए। शुक्रवार शाम इस संबंध में थाने में शिकायत दी गई और पुलिस ने मामले को आईपीसी की धारा 363, 342, 376(2), 376(3), 376(डी ए), और पोक्सो एक्ट की धाराओं में दर्ज किया।

बुरी आत्मा उतारने के बहाने लड़की से रेप

दूसरा मामला राजस्थान के झालावाड़ का है जहाँ एक 45 साल के शख्स ने एक नाबालिग को बुरी आत्मा के प्रभाव से छुड़ाने के नाम पर उसके साथ बलात्कार किया। आरोप है कि आरोपित रघुवीर मेघवाल ने पहले लड़की के घरवालों को कुछ सामग्री लेने के लिए बाहर भेजा और बाद में नाबालिग से बलात्कार किया।

जब माता-पिता घर लौटे तो बच्ची की हालत नाजुक थी। बहुत पूछने पर आरोपित ने गुनाह नहीं कबूला। लेकिन बाद में लड़की ने अपने माता-पिता को सारी बात बताई और इस वारदात के मद्देनजर शिकायत दर्ज की गई। शुक्रवार को आरोपित गिरफ्तार हुआ। अब वह न्यायिक हिरासत में है।

राजस्थान में दुष्कर्म की कई और घटनाएँ

उल्लेखनीय है कि इन हालिया मामलों के अलावा राजस्थान में आए दिन महिलाओं से छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाएँ घटित होती हैं। पिछले दिनों मूक बधिर लड़की के साथ अलवर में गैंगरेप हुआ था और अभी कुछ दिन पहले उदयपुर के झाडोल थाना क्षेत्र में एक आदिवासी महिला के साथ कथित गैंगरेप की घटना घटी थी। उससे पूर्व कैथवाड़ा की एक घटना ने सबको झकझोर दिया था जब लड़की ने गैंगरेप से तंग आकर सुसाइड कर ली थी और बाद में सुसाइड नोट से पता चला था कि उसके ऊपर जीते जी क्या गुजर रही थी।