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‘श्रीलंका में भी भाजपा, पार्टी का हो रहा अंतरराष्ट्रीय विस्तार’: श्रीलंका BJP को लेकर हो रहे दावों का फैक्टचेक

सोशल मीडिया पर ‘श्रीलंका BJP’ को लेकर ये दावा वायरल हो रहा है कि यह भारत की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ही ब्रांच है। लोग दावा कर रहे हैं कि भाजपा ने अब अंतरराष्ट्रीय विस्तार शुरू कर दिया है और इसी क्रम में श्रीलंका में भी BJP की ब्रांच खुली है। साथ में एक टीवी स्क्रीन की तस्वीर भी वायरल हो रही है, जिसमें ‘श्रीलंका BJP’ के नेता बोलते हुए दिख रहे हैं। आइए, जानते हैं क्या है सच्चाई।

दरअसल, ये तस्वीर श्रीलंका के होटल कारोबारी वेलुसामी मुथुस्वामी की है, जिन्होंने इस पार्टी की स्थापना की है। वो भारतीय मूल के ही हैं। उन्होंने जिस राजनीतिक पार्टी की स्थापना की है, उसका नाम है – ‘लंकाई भारतीय जनता काट्ची (LBJK)’, जो श्रीलंका के लोगों के समाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करने का दावा करती है। खासकर युद्ध से पीड़ित रहे उत्तरी और पूर्वी इलाकों में इसकी सक्रियता होगी।

शनिवार (मार्च 6, 2021) को उत्तरी श्रीलंका के जाफना में उन्होंने इसका ऐलान किया। उन्होंने बताया कि रेडियो जर्नलिस्ट एम इंद्रजीत को पार्टी का महासचिव बनाया गया है। कारोबारी वी दिलन इसके कोषाध्यक्ष होंगे। इसी पार्टी का अंग्रेजी नाम ‘Sri Lanka Bharathiya Janatha Party (SLBJP)’ है, जो BJP से मिलता-जुलता है। इसीलिए, लोग इसे भारत की सत्ताधारी पार्टी का एक्सटेंशन बता रहे हैं।

श्रीलंका में नई राजनीतिक पार्टी का गठन

उन्होंने SLBJP को सभी समुदायों और धर्मों की पार्टी बताते हुए कहा कि ये एक धर्मनिरपेक्ष दल होगा। उन्होंने दावा किया कि वो समाज के निचले तबकों की सुरक्षा के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भारतीय मूल के तमिल लोगों की शिक्षा-दीक्षा के कार्य में सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का भारत की BJP से कोई सम्बन्ध नहीं है, लेकिन वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हैं और उनकी विकासवादी सोच के अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।

‘रेडियो पाकिस्तान’ ने भी ये अफवाह फैलाई थी कि भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह श्रीलंका और नेपाल की सरकारों पर प्रभाव डालने के लिए वहाँ अपनी राजनीतिक पार्टियों का गठन कर सकते हैं। चीनी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के हवाले उड़ाई गई थी। लेकिन, साफ़ है कि ये पार्टी अलग है, भले ही इसके संस्थापक पीएम मोदी के फैन हों। श्रीलंका में भारतीय जनता पार्टी की कोई ब्रांच नहीं खुली है।

‘ठकबाजी गीता’: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने FIR रद्द की, नहीं माना धार्मिक भावनाओं का अपमान

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने हिंदू भावनाओं को आहत करने के एक मामले के आरोपित को बड़ी राहत दी है। उस पर फेसबुक पोस्ट में भगवद्गीता का अपमान कर हिंदुओं की धार्मिक भावना को आहत करने को लेकर एफआईआर दर्ज कराई की गई थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार चीफ जस्टिस अकील कुरैशी की सिंगल बेंच ने यह फैसला दिया। अदालत ने कहा कि धर्म का गैर इरादतन अपमान आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध नहीं है। चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा, “धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है। यह केवल अपमान या अपमान की कोशिश के उन कृत्यों को दंडित करता है, जिन्हें विशेष वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे के साथ किया गया है।”

इस मामले में अदालत ने माना कि आरोपित ने इरादतन या दुर्भावनापूर्ण इरादे से कुछ नहीं किया था। अदालत ने कहा, “बिना इरादे या लापरवाही से या बिना जाने-बूझे या दुर्भावनापूर्ण इरादे के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने या धर्म का अपमान करने का कृत्य उक्त धारा के भीतर नहीं आएगा।”

फैसले में धारा 295 ए का उल्लेख करते हुए कहा गया है, “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से भारत के किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को शब्दों से, या तो बोले हुए या लिखे हुए, या संकेतों से या दृश्य प्रतिनिधित्व या अन्यथा, आहत करता है, उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करता है या अपमान करने का प्रयास करता है तो तीन साल तक कारावास या जुर्माना या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।”

इस दौरान हाई कोर्ट ने रामजी लाल मोदी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया।

आरोपित ने पिछले साल दर्ज एफआईआर को रद्द करने की गुहार हाई कोर्ट से लगाई थी। उसने अदालत में कहा कि उसके पोस्ट को शिकायतकर्ता ने गलत संदर्भों में पेश किया, जबकि उसका इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। साथ ही उसने कहा कि उसकी पोस्ट बंगाली में थी, जिसका शिकायतकर्ता ने गलत मतलब निकाला।

अतिरिक्त लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पोस्ट के जरिए पवित्र किताब के बारे में अपमानजनक टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का स्पष्ट इरादा प्रदर्शित किया गया था। साथ ही यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने अन्य पोस्टों में भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने की प्रवृत्ति दिखाई है।

लेकिन चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले को पिछले पोस्टों की पृष्ठभूमि में नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही कहा कि उसका पोस्ट वह अर्थ नहीं व्यक्त करता, जैसा शिकायतकर्ता बताना चाहता।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपित ने पवित्र धार्मिक किताब को ‘ठकबाजी गीता (Thakbaji Gita)’ बताकर फेसबुक पर पोस्ट किया। इसको लेकर आरोपित ने अदालत में दलील दी कि उसके पोस्ट का वास्तव में अर्थ था कि ‘गीता एक कड़ाही है, जिसमें ठगों को भूना जाता है’।

PM मोदी की रैली में मिथुन चक्रवर्ती का भी होगा संबोधन, शुभेंदु ने कहा- TMC आई तो बंगाल बन जाएगा कश्मीर

नंदीग्राम से भाजपा द्वारा शुभेंदु अधिकारी को चुनावी मैदान में उतारने के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है, क्योंकि वहाँ उनका सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से होगा। रविवार (मार्च 7, 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी विधानसभा चुनाव के आलोक में पहली रैली होगी। कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में रैली होनी है। वरिष्ठ अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पुष्टि की है कि वो इस रैली में उपस्थित रहेंगे।

मीडिया में ये भी अटकलें हैं कि BCCI अध्यक्ष सौरभ गांगुली भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। 356 हिंदी और बंगाली फिल्मों में काम कर चुके मिथन चक्रवर्ती बंगाल में बड़ा प्रभाव रखते हैं। 1989 में एक ऐसा समय आया था, जब एक ही साल में बतौर लीड अभिनेता उनकी 19 फ़िल्में आई थीं, जो आज भी एक रिकॉर्ड है। वो TMC से राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। ऐसी में भाजपा को उनके पार्टी में शामिल होने का फायदा मिल सकता है।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी शनिवार देर रात कोलकाता के बेलगाचिया में उनसे मुलाकात की। विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी राष्ट्र भक्ति और गरीबों के प्रति प्रेम की कहानियाँ सुन कर मन गदगद हो गया। मिथुन चक्रवर्ती पीएम मोदी की रैली में उनसे पहले एक भाषण भी देंगे। लेकिन उनके चुनाव लड़ने को लेकर कुछ साफ़ नहीं है। पिछले कुछ महीनों में उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं था।

उधर शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान के बिना हमारा भारत एक इस्लामी मुल्क बन गया होता। उन्होंने कहा कि अगर मुखर्जी नहीं होते तो हम बांग्लादेश में रह रहे होते। बेहला के मुचिपारा में आयोजित रैली में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अगर TMC तीसरी बार सत्ता में आ जाती है तो वो बंगाल को कश्मीर बना देगी।

इसी दौरान ममता बनर्जी ने भी आज सिलीगुड़ी में मोर्चा सँभाला है। वे रसोई गैस के बढ़े हुए दामों के खिलाफ यहाँ पैदल मार्च निकालने वाली हैं। ममता बनर्जी ने अब तक कई पदयात्राएँ की हैं। TMC ने 291 और भाजपा ने 57 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कॉन्ग्रेस और वामपंथियों ने मौलाना अब्बास सिद्दीकी की ISF के साथ गठबंधन किया है। मौलाना के फुरफुरा शरीफ के लिए तृणमूल सरकार ने भी खजाना खोला है।

उधर तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ आकर कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गोहत्या को समाप्त कर देगी।” उन्होंने आरोप लगाया, “पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में गोहत्या हो रही है। हर कोई गोमांस खाता है, जिसमें मुसलमान और अन्य शामिल हैं। गोमांस को वोट से क्या मिला? यह कोशिश हिंदू मानसिकता को आगे बढ़ाने की है।” 

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त की राजधानी कराची में एक व्यक्ति की मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई। आरोप है कि उसने कुरान का अपमान किया। पुलिस अधिकारियों के सामने ही इस्लामी भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगा उसे मारने की कोशिश की। साउथ एशिया मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (SAMRI) के अनुसार, कराची की गारमेंट्स फैक्ट्री में घुसी भीड़ उक्त व्यक्ति को बाहर खींच कर ले आई।

उक्त व्यक्ति का कहना है कि उसने कुरान का अपमान नहीं किया है, बल्कि मौलानाओं से कुछ सवाल पूछे क्योंकि वे पैसे लेकर समस्याओं के समाधान का झूठा दावा करते हैं। जेबी गारमेंट्स नामक फैक्ट्री के बाहर हुए इस वारदात का वीडियो भी वायरल हो गया। इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह भीतर आक्रोशित इस्लामी भीड़ घुस रही है, ताकि उस व्यक्ति की हत्या की जा सके।

इस्लामी भीड़ इसके साथ ही ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगा रही थी। हालाँकि, इस हमले में वो व्यक्ति तो किसी तरह बच गया लेकिन उसे गहरी चोटें आईं। पुलिस उसे बचाने में अक्षम रही, जबकि वहाँ कई पुलिसकर्मी और रेंजर्स उपस्थित थे। इस घटना के कई अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग इस कट्टरता का विरोध कर रहे हैं।

पीड़ित ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर कहा कि उसके परिवार में कुछ समस्याएँ आ गई थीं, जिसके बाद उसने एक मौलाना से समाधान के लिए संपर्क किया था। उसका कहना है कि मौलाना ने पैसे तो ले लिए लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उसके एक दोस्त ने उससे उसकी बीवी के बारे में पूछा था, जिसके उत्तर में उसने बताया था कि मौलाना से संपर्क करने के बावजूद उसकी बीवी ने उससे 7 महीनों से संपर्क नहीं किया है।

इस पर उसके दोस्त ने बताया कि वह एक अन्य मौलाना को जानता है, जो उसकी मदद कर सकता है। इस पर इस व्यक्ति ने कहा कि मौलाना लोग पैसे ले लेते हैं और बाद में कहते हैं कि उसे भूल जाओ। उसने कहा कि वह नए मौलाना को दोगुनी धनराशि देने के लिए तैयार है, लेकिन काम हो जाने के बाद ही। उसने पूछा कि इसमें कुरान के प्रति क्या आपत्तिजनक हो गया? उसने कुरान का नाम तक नहीं लिया था।

नवंबर 2020 में पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने ईशनिंदा पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ईशनिंदा अस्वीकार्य और असहनीय है।” इसके जवाब में यूएन वॉच ने अपने ट्वीट में लिखा था, “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आपकी (पाकिस्तान) की मौजूदगी ही असहनीय है।”

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

कुछ दिन पहले मुंबई में मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी एक एसयूवी खड़ी मिली थी। यह कार जिस मनसुख हिरेन की बताई जा रही थी, वह शुक्रवार (5 मार्च 2021) को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। इस मामले में ‘संयोगों’ पर सवाल उठ रहे हैं और हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। लेकिन, यह अंबानी से जुड़ा पहला मामला नहीं जब केस की महत्वपूर्ण कड़ी की संदिग्ध मौत हुई हो। 2009 में हेलिकॉप्टर टेक्नीशियन भरत बोर्गे की संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। यह मामला अनिल अंबानी से जुड़ा था।

इस बीच मिडडे ने मनसुख के भाई विनोद हिरेन के हवाले से एक सनसनीखेज दावा किया है। इसके मुताबिक हत्या कर मनसुख को पानी में फेंका गया था। विनोद का दावा है यह बात उन्हें खुद पुलिस ने बताई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने डूबने को मौत का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा था कि पानी में फेंके जाने से पहले ही उन्हें मार डाला गया था।

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि परिजनों ने मनसुख का शव लेने से इनकार कर दिया है। इसके मुताबिक परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार करते हुए ऑटोप्सी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि हिरेन की मौत कैसे हुई। इसके बाद DCP (जोन 1) ने दावा किया कि उन्होंने परिजनों के घर जाकर रिपोर्ट में बताए गए मौत के कारण के बारे में समझाया है। मनसुख हिरेन गाड़ियों के पार्ट-पुर्जों की दुकान चलाते थे।

शुक्रवार को जब हिरेन की सुसाइड की खबरें सामने आई थी तो उनकी पत्नी विमला ने इसे खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके पति को क्राइम ब्रांच के किसी अधिकारी तावड़े का फोन आया था। उससे मिलने के लिए ही वे घर से निकले थे। उनके अनुसार जाँच के सिलसिले में यह मुलाकात घोड़बंदर में होनी थी। एंटीलिया के बाहर मिले कार को लेकर परिजनों का कहना है कि वह चोरी हो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।

ये भी पता चला है कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा कि कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

एक और बात याद करने लायक है कि आज से 12 वर्ष पहले मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी के मामले में भी इसी तरह के ‘संयोग’ देखने को मिले थे। तब लगभग $15 बिलियन की संपत्ति के मालिक अनिल अंबानी भारत के शीर्ष कारोबारियों में गिने जाते थे। हालाँकि, अब उनकी संपत्ति इससे 10 गुना कम होकर $1.5 बिलियन रह गई है। तब उनका हैलिकॉप्टर क्रैश कराने की साजिश रची गई थी। उस मामले में भी जो व्यक्ति मुख्य कड़ी था, उसकी मौत हो गई थी।

अप्रैल 2009 में इस साजिश का खुलासा हुआ था। अनिल अंबानी की कंपनी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के कुछ ही दिनों बाद हेलिकॉप्टर के टेक्नीशियन भरत बोर्गे की ट्रेन से कट कर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हैलिकॉप्टर की देखरेख के लिए तैनात 2 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। मौत से पहले उक्त टेक्नीशियन ने एक पत्र लिखा था। साजिश का खुलासा होता, उससे पहले उसकी मौत हो गई।

अनिल अंबानी के हेलिकॉप्टर के पेट्रोल टैंक (फ्यूल टैंक) में पत्थर और रेत मिली थी। इससे उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर का इंजन बंद हो सकता था। उनका हैलिकॉप्टर क्रैश कराने की कोशिश थी। बता दें कि अनिल अंबानी के हेलिकॉप्टर की देखरेख का जिम्मा एयरवर्क्स इंजीनियरिंग को दिया गया था। पुलिस ने टेक्नीशियन की मौत को एक्सीडेंट करार दिया था। उसके पत्र के कंटेंट्स को लेकर भी कुछ खास साफ़ नहीं हुआ था।

जम्मू-कश्मीर: ‘होल्डिंग सेंटर’ भेजे गए 155 रोहिंग्या, पुलिस ने कहा- सभी घुसपैठियों का होगा प्रत्यर्पण

जम्मू-कश्मीर में 155 ऐसे रोहिंग्या मिले हैं, जो म्यांमार में अपनी सज़ा से बच कर यहाँ रह रहे थे। उन सभी को ‘होल्डिंग सेंटर’ भेज दिया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को ये कार्रवाई की। पुलिस ने फॉरेनर्स एक्ट के अनुच्छेद-3(2)e के तहत ये कार्रवाई की। साथ ही पासपोर्ट एक्ट के अनुच्छेद-3 के तहत प्रवासियों के पास पुष्ट ट्रैवल दस्तावेज होने चाहिए, जो उनके पास नहीं थे।

इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (जम्मू जोन) ने कहा कि मार्च 5, 2021 को गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन का पालन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों को होल्डिंग सेंटर में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई नियम-कायदों के तहत की गई है। उन्होंने ये भी बताया कि ऐसे अन्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करने की कोशिशें भी जारी हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के बायोमेट्री व अन्य डिटेल्स जुटाए जा रहे हैं।

उन्हें होल्डिंग सेंटर में भेजे जाने के बाद उनकी राष्ट्रीयता की पहचान की जाएगी। जब पहचान हो जाएगी कि ये किस देश के नागरिक हैं, इसके बाद उन्हें वहाँ प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। MA स्टेडियम में रोहिंग्या मुस्लिमों के वेरिफिकेशन का कार्य चल रहा है। एक बुर्कानशीं महिला ने बताया कि उससे उसका नाम और माता-पिता के बारे में पूछा गया। एक अन्य रोहिंग्या मुस्लिम ने बताया कि पुलिस ने पूरे परिवार को MA स्टेडियम में बुलाया है।

पुलिस ने उन सभी के UNHCR कार्ड्स के डिटेल्स भी लिए और साथ ही कोरोना वायरस टेस्टिंग भी कराई। MA स्टेडियम में कुल 200 रोहिंग्या मुस्लिमों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था। हालाँकि, इस प्रक्रिया में मीडिया को अनुमति नहीं दी है। उन रोहिंग्या मुस्लिमों के अंगूठे की छाप भी ली गई। एक रोहिंग्या मुस्लिम ने कहा कि वो 12 वर्षों से यहाँ है और अब तक ऐसे 50 वेरिफिकेशन प्रक्रिया में शामिल हो चुका है।

भाजपा ने इसे रोहिंग्या मुस्लिमों के प्रत्यर्पण की शुरुआत बताया है। पार्टी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अनिल गुप्ता ने कहा कि अब एक लंबा इंतजार ख़त्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि इन सभी को संभवतः एक कैम्प में शिफ्ट किया जाएगा। इससे पहले PDP-BJP सरकार के दौरान ही इन रोहिंग्या मुस्लिमों के आँकड़े जुटा लिए गए थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व ख़ुफ़िया एजेंसियाँ पहले से ही उन्हें लेकर सतर्क हैं।

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के नरवाल की एक मस्जिद में मौलवी बनकर रहने वाले रोहिंग्या और उसके साथी को पकड़ा गया था। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया गया था। वहीं, उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने उन्नाव से रोहिंग्या भाइयों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये दोनों भारत में अवैध तरीके से रोहिंग्या की एंट्री करवाते थे। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) में उनका पंजीकरण करा कर देश के अलग-अलग शहरों में उनके रहने और रोजगार की व्यवस्था करते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराते थे।

CM योगी से मिला किसानों का प्रतिनिधिमंडल, कहा- कृष‍ि कानूनों पर भड़का रहे लोग, आंदोलन से आवागमन बाधित होने की शिकायत

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने किसानों के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाते हुए शनिवार (मार्च 6, 2021) को दावा किया कि नए कृषि कानून उनकी आय दोगुनी करने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं और इससे कृषकों की आय में निरंतर वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने यहाँ पाँच कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा किसानों को ध्यान में रखकर नीतियाँ बनाई हैं।

शनिवार को जारी एक सरकारी बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसान राज्य सरकार की प्राथमिकता हैं और प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की खुशहाली के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। उन्‍होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों से जुड़े कार्यक्रमों और योजनाओं को पूरी गंभीरता से लागू कर रही है और इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत देश में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानून किसान हितैषी हैं। यह कानून किसानों को सशक्त करने का प्रयास हैं। इन कानूनों का सबसे ज्यादा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इसलिए वे इन कानूनों का समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।

किसानों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि कुछ लोग किसान आन्दोलन के माध्यम से किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे आवागमन बाधित होता है और लोगों को असुविधा होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी समस्या का समाधान मिल बैठकर संवाद के जरिए किया जा सकता है।

वहीं शनिवार को एक समारोह में बोलते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “किसानों का अहित कर अपने राजनीतिक मंसूबे को पूरा करना ठीक नहीं है। देश में लंबे समय से कृषि क्षेत्र में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे कानून बनाकर पूरा किया गया।” इसके साथ ही विपक्षी दलों पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अपना स्थान है। लेकिन मतभेद और विरोध देश को क्षति पहुँचाने की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए।

पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में हो रही गोहत्या, कोई नहीं रोक सकता: ममता के मंत्री सिद्दीकुल्लाह का दावा

तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक सिद्दीकुल्ला चौधरी ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को हिंदू भावनाओं का मजाक उड़ाते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया। टीवी 9 भारतवर्ष के मुताबिक उन्होंने पश्चिम बंगाल में गोहत्या के मुद्दे पर धमकी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में गोहत्या को कोई नहीं रोक सकता।

आगामी राज्य विधान सभा चुनावों से पहले उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ आकर कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गोहत्या को समाप्त कर देगी।” उन्होंने आरोप लगाया, “पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में गोहत्या हो रही है। हर कोई गोमांस खाता है, जिसमें मुसलमान और अन्य शामिल हैं। गोमांस को वोट से क्या मिला? यह कोशिश हिंदू मानसिकता को आगे बढ़ाने की है।” 

यह पूछे जाने पर कि क्या वो गोहत्या का समर्थन करते हैं, चौधरी ने दावा किया कि 5-स्टार रेस्टॉरेंट और विदेशी पर्यटकों के बीच भारत में गोमांस खाना आम है। उन्होंने कहा, “अगर गोमांस पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो बंगालियों को 100% गुस्सा आएगा। यदि हम इसे नहीं खाते हैं, तो हम इसे कहाँ रखेंगे? फिर हमें जबरदस्ती खाना खिलाना होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ज्यादातर बीफ निर्यातक हिंदू मारवाड़ी हैं, मुसलमान नहीं।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले में पीएम मोदी का हाथ है

इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल हुई है। Tv9 Bharatvarsh के रिपोर्टर द्वारा सूचित किए जाने पर कि निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया था, फिर भी उन्होंने न्यायपालिका की अखंडता पर सवाल उठाए।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने टिप्पणी की, “पीएम का पद सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है। पीएम मोदी कॉलेजियम के गठन, जजों की नियुक्ति और उनके ट्रांसफर में शामिल हैं… मुसलमान मोदी को वोट नहीं देंगे। बाबरी मस्जिद का मुद्दा और राम मंदिर निर्माण स्थल पर मुसलमानों को मोदी के लिए वोट देने से पहले 10 बार सोचना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है। हम सच बोलने से नहीं डरते। बाबरी अभी भी एक मुद्दा है।”

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति है जिसने सितंबर 2018 में कहा था कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा। वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष भी हैं। ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था, “हमारे लिए हमारा पवित्र ग्रंथ, कुरान शरीफ सर्वोच्च है और यदि कोई संवैधानिक प्रावधान या कोई कानून कुरान का खंडन करता है, तो हमारा धर्मग्रंथ प्रबल होगा, कानून या संविधान नहीं। बीजेपी धर्म कार्ड खेल रही है और संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। अध्यादेश का मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोई भी इसका पालन नहीं करेगा, लेकिन धर्म और पवित्र पुस्तक का पालन करेगा”

‘फेक न्यूज फैक्ट्री’ कॉन्ग्रेस का पैतरा फेल: असम में BJP को बदनाम करने के लिए शेयर किया झारखंड के मॉकड्रिल का पुराना वीडियो

असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक होने वाले 15 वें पंचवार्षिकी विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है, राजनीतिक क्षेत्र में फर्जी खबरों को फैलाने और राज्य में भाजपा सरकार की नकारात्मक छवि बनाने के लिए जोरदार प्रयास हो रहा है। कॉन्ग्रेस को एक बार फिर से ऐसा ही करते हुए धरा गया है।

असम कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर 4 मार्च को एक वीडियो शेयर किया जिसमें दो पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को दो गोलियाँ लगने के बाद उन्हें गिरते हुए देखा गया। असम कॉन्ग्रेस ने वीडियो को शेयर करते हुए असमिया में कैप्शन दिया, जिसका अनुवाद है, “प्रिय मतदाताओं, यह असम में चुनावी मौसम है। क्या आपने तय किया है कि 2021 के चुनाव में किसे वोट देना है? वोट डालने से पहले नीचे दिए गए वीडियो को एक बार देखें और तय करें कि किसे वोट देना है।”

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, असम कॉन्ग्रेस अनिवार्य रूप से राज्य सरकार के खिलाफ जनता को भड़काना चाहती थी, और ऐसा करने के लिए उसने 2017 के वीडियो को असम पुलिस के खिलाफ कथित ज्यादती दिखाने के लिए 2019 के वीडियो के रूप में जारी किया, जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया था।

हालाँकि, बीजेपी नेता और असम के वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट और टाइम्स नॉउ की खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसका 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था। कॉन्ग्रेस को फेक न्यूज की फैक्ट्री कहते हुए बीजेपी के मंत्री ने लिखा, “वीडियो में 2 मिनट पर देखें, किस तरह से झारखंड के मॉक ड्रिल को असम पुलिस द्वारा शूटिंग बताया जा रहा है।”

क्या है वीडियो की सच्चाई

मोदी सरकार को बदनाम करने की जल्दबाजी में, असम कॉन्ग्रेस शायद अपना होमवर्क करना भूल गई। 2019 में  Times Now और  India TV सहित विभिन्न मीडिया एजेंसियों ने इस वीडियो का पहले ही फैक्ट चेक कर दिया था। यह फर्जी वीडियो प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक द्वारा भी दिसंबर 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था।

आश्चर्य की बात यह है कि हालाँकि इस वीडियो का 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस ने न केवल इसे फिर से शेयर किया, बल्कि बेशर्मी से वही फर्जी दावे भी किए, जो उस समय किया गया था।

जबकि सच्चाई यह है कि असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर असम पुलिस द्वारा गोली चलाने का जो वीडियो कॉन्ग्रेस ने जारी किया, वह वास्तव में नवंबर 2017 में झारखंड पुलिस द्वारा की गई एक मॉक ड्रिल का पुराना वीडियो है।

‘ड्रामा क्वीन’ की बायोपिक बनाना चाहते हैं जावेद अख्तर, राखी सावंत के दावे पर गीतकार ने लगाई मुहर

अक्सर विवादों में रहने वाली ‘ड्रामा क्वीन’ राखी सावंत हाल ही में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 14’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया साथ ही खूब हंगामा भी मचाया। वह टॉप 5 फाइनलिस्ट में शामिल हुईं। हालाँकि, राखी सावंत ने आगे न खेलते हुए 14 लाख की रकम लेकर बिग बॉस के घर से बाहर निकलने में ही भलाई समझी। अब बिग बॉस के घर से बाहर आने के बाद एक तरफ कहा जा रहा है कि वह कैंसर से जूझ रही अपनी माँ का इलाज करवा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने खुद के बायोपिक का जिक्र कर भी लोगों को चौका दिया है।

राखी सावंत को चर्चा में रहना खूब आता है अब इसके लिए चाहे कोई विवाद खड़ा करना पड़े या फिर चाहे अभिनव शुक्ला संग उनकी हालिया फ्लर्टिंग हो या फिर जूली का भूत, राखी ने हर तरह से खुद को खबरों में बनाए रखने का जरिया ढूँढ लेती हैं। अब हाल ही में उन्होंने एक दावा करके लोगों को चौंका दिया कि मशहूर गीतकार जावेद अख्तर उनकी बायोपिक बनाना चाहते हैं। पहले तो राखी के इस दावे पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन अब जावेद अख्तर ने खुद राखी के दावे पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है।

राखी सावंत के दावे को सच बताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि वह सच में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं। जावेद अख्तर राखी सावंत की जिंदगी पर स्क्रिप्ट लिखना चाहते हैं और उन पर फिल्म बनाने की ख्वाहिश भी रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जावेद अख्तर ने SpoltboyE से बात करते हुए इस बात की पुष्टि करते हुए कहा- “यह सच है कि मैं उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहता हूँ कुछ चार-पाँच साल पहले हम एक ही फ्लाइट में सफर कर रहे थे। तब उसने मुझे अपने बचपन के बारे में बताया था और तभी मैंने सोचा था कि मैं एक दिन उसकी जिंदगी पर एक स्क्रिप्ट जरूर लिखूँगा।”

राखी सावंत का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर काफी चर्चा चलने लगी कि जावेद अख्तर क्या वास्तव में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं? जिसका जवाब देकर जावेद अख्तर ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है।

जावेद अख्तर ने किया था राखी सावंत को कॉल

गौरतलब है कि हाल ही में राखी सावंत ने India TV.com से बात करते हुए यह दावा किया था कि गीतकार और लेखक जावेद अख्तर उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में राखी को फोन भी किया था और एक मीटिंग फिक्स करने की भी बात कही थी। जिसमें वह उनकी बायोपिक पर चर्चा करेंगे। हालाँकि राखी ने कहा, “मैं उस समय उनसे मिल नहीं पाई थी। मेरी जिंदगी बहुत विवादों से भरी रही है पता नहीं लोग इसे देखना चाहेंगे या नहीं।”

कौन निभाएगा राखी सावंत का किरदार

हालाँकि, जावेद अख्तर का इशारा तो राखी के रोल के लिए खुद उन्हीं के तरफ है लेकिन कलाकार के मुद्दे पर राखी सावंत का कहना है कि उनकी बायोपिक में उनका किरदार आलिया भट्ट निभा सकती हैं। इसके बाद उन्होंने आगे यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनकी भूमिका कौन सी अभिनेत्री निभाने वाली है। आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण या करीना कपूर खान यह कोई भी कर सकती हैं, क्योंकि सभी उनकी फेवरेट हैं।