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‘ड्रामा क्वीन’ की बायोपिक बनाना चाहते हैं जावेद अख्तर, राखी सावंत के दावे पर गीतकार ने लगाई मुहर

अक्सर विवादों में रहने वाली ‘ड्रामा क्वीन’ राखी सावंत हाल ही में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 14’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया साथ ही खूब हंगामा भी मचाया। वह टॉप 5 फाइनलिस्ट में शामिल हुईं। हालाँकि, राखी सावंत ने आगे न खेलते हुए 14 लाख की रकम लेकर बिग बॉस के घर से बाहर निकलने में ही भलाई समझी। अब बिग बॉस के घर से बाहर आने के बाद एक तरफ कहा जा रहा है कि वह कैंसर से जूझ रही अपनी माँ का इलाज करवा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने खुद के बायोपिक का जिक्र कर भी लोगों को चौका दिया है।

राखी सावंत को चर्चा में रहना खूब आता है अब इसके लिए चाहे कोई विवाद खड़ा करना पड़े या फिर चाहे अभिनव शुक्ला संग उनकी हालिया फ्लर्टिंग हो या फिर जूली का भूत, राखी ने हर तरह से खुद को खबरों में बनाए रखने का जरिया ढूँढ लेती हैं। अब हाल ही में उन्होंने एक दावा करके लोगों को चौंका दिया कि मशहूर गीतकार जावेद अख्तर उनकी बायोपिक बनाना चाहते हैं। पहले तो राखी के इस दावे पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन अब जावेद अख्तर ने खुद राखी के दावे पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है।

राखी सावंत के दावे को सच बताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि वह सच में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं। जावेद अख्तर राखी सावंत की जिंदगी पर स्क्रिप्ट लिखना चाहते हैं और उन पर फिल्म बनाने की ख्वाहिश भी रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जावेद अख्तर ने SpoltboyE से बात करते हुए इस बात की पुष्टि करते हुए कहा- “यह सच है कि मैं उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहता हूँ कुछ चार-पाँच साल पहले हम एक ही फ्लाइट में सफर कर रहे थे। तब उसने मुझे अपने बचपन के बारे में बताया था और तभी मैंने सोचा था कि मैं एक दिन उसकी जिंदगी पर एक स्क्रिप्ट जरूर लिखूँगा।”

राखी सावंत का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर काफी चर्चा चलने लगी कि जावेद अख्तर क्या वास्तव में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं? जिसका जवाब देकर जावेद अख्तर ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है।

जावेद अख्तर ने किया था राखी सावंत को कॉल

गौरतलब है कि हाल ही में राखी सावंत ने India TV.com से बात करते हुए यह दावा किया था कि गीतकार और लेखक जावेद अख्तर उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में राखी को फोन भी किया था और एक मीटिंग फिक्स करने की भी बात कही थी। जिसमें वह उनकी बायोपिक पर चर्चा करेंगे। हालाँकि राखी ने कहा, “मैं उस समय उनसे मिल नहीं पाई थी। मेरी जिंदगी बहुत विवादों से भरी रही है पता नहीं लोग इसे देखना चाहेंगे या नहीं।”

कौन निभाएगा राखी सावंत का किरदार

हालाँकि, जावेद अख्तर का इशारा तो राखी के रोल के लिए खुद उन्हीं के तरफ है लेकिन कलाकार के मुद्दे पर राखी सावंत का कहना है कि उनकी बायोपिक में उनका किरदार आलिया भट्ट निभा सकती हैं। इसके बाद उन्होंने आगे यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनकी भूमिका कौन सी अभिनेत्री निभाने वाली है। आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण या करीना कपूर खान यह कोई भी कर सकती हैं, क्योंकि सभी उनकी फेवरेट हैं।

नंदीग्राम में ममता और शुभेंदु के बीच महामुकाबला: बीजेपी ने पहले और दूसरे फेज के लिए 57 कैंडिडेट्स के नामों का किया ऐलान

पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 57 सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी है। नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी को टिकट दिया गया है। जबकि मोइना से अशोक डिंडा चुनाव लड़ेंगे। 

8 फेज में होगा पश्चिम बंगाल का चुनाव

पश्चिम बंगाल की 294 विधान सभा सीटों पर 8 चरणों में चुनाव होगा। पहला चरण- 27 मार्च, दूसरा चरण- 1 अप्रैल, तीसरा चरण- 6 अप्रैल, चौथा चरण- 10 अप्रैल, पाँचवा चरण- 17 अप्रैल, छठा चरण- 22 अप्रैल, सातवाँ चरण- 26 अप्रैल और आठवाँ चरण- 29 अप्रैल को होगा। 

इस दौरान रिटायर्ड पुलिस अधिकारी विवेक दुबे और एमके दास को ऑब्जर्वर बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में 2016 में 77,413 चुनाव केंद्र थे, जबकि इस बार 1,01,916 चुनाव केंद्र होंगे। 2 मई को रिजल्ट आएगा।

इससे पहले कल (शुक्रवार) तृणमूल कॉन्ग्रेस ने 291 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की। साथ ही कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और आइएसएफ गठबंधन ने भी 60 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था। 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनावी मैदान में होंगी। ऐसे में बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को भी नंदीग्राम से टिकट देकर मुकाबले को दिलचस्प कर दिया है। शुभेंदु ने यहाँ से सीएम ममता को चुनाव हराने का दावा किया है। 

कल तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कुल 291 उम्मीदवारों की लिस्ट में 50 महिला उम्मीदवारों को मौका दिया। इनके अलावा 42 मुस्लिम उम्मीदवार, 79 SC उम्मीदवार और 17 ST उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। क्रिकेटर मनोज तिवारी को शिबपुर से टिकट मिला है, जबकि अभिनेत्री कंचन मलिक को उत्तरपाड़ा से मौका मिला है। 

‘केजरीवाल सरकार ने स्कूल बनाने के लिए दान की गई जमीन अस्वीकारा’: छात्रों के हित में भूस्वामी पहुँचे हाईकोर्ट

दिल्ली में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ पर तीन भाई-बहनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भाई-बहनों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार स्कूल बनाने के लिए उनके द्वारा दान की गई भूमि को स्वीकार नहीं कर रही है। वे पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली के AAP सरकार को, एक उच्च माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूल के निर्माण के लिए करावल नगर में 5,000 वर्ग गज की करोड़ों की अपनी निजी जमीन के एक टुकड़े को हस्तांतरित करने के इच्छुक हैं। 

2012 से, भूस्वामी अधिकारियों को उस पर एक सरकारी स्कूल बनाने के उद्देश्य से सरकार को भूमि के स्वामित्व को हस्तांतरित करने के लिए कह रहे हैं, हालाँकि, अधिकारी देरी कर रहे हैं। भाई-बहन ने इस मामले को सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। बता दें कि भाई-बहन इस जमीन के असली मालिक मनसा राम के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। मनसा राम की 2009 में मृत्यु हो गई थी।

अब, मनसा राम के दो बेटों और बेटी द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह सरकारी स्कूल बनाने के लिए भूमि के हस्तांतरण के लिए परिवार के अनुरोध पर शीघ्र निर्णय ले।

न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका को एक असामान्य मामला बताया और कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एक ‘अनोखी प्रार्थना’ के साथ संपर्क किया है जहाँ वे अपनी निजी भूमि को ‘सामाजिक उद्देश्य के लिए’ सरकार को देना चाहते हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार को इस मामले में ‘शीघ्र निर्णय’ लेने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि चूँकि याचिकाकर्ता एक अनोखी प्रार्थना के साथ आए हैं, जहाँ वे एक निजी भूमि पर सरकार को अपना अधिकार देना चाहते हैं, इसलिए अधिकारी इस याचिका पर शीघ्रता से विचार करेंगे।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत को सूचित किया कि उनके क्लाइंट्स ने दिल्ली में AAP सरकार को जून 2019 में राज्य को भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित करने के लिए एक अनुरोध पत्र भेजा था, लेकिन दुर्भाग्य से अधिकारियों ने कोई नोटिस नहीं लिया। पिछले डेढ़ साल से इस मामले को लेकर बैठे हैं।

अग्रवाल ने अदालत को यह भी बताया कि यह जमीन तब से खाली पड़ी है, जिसकी वजह से इलाके के असामाजिक तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता भूमि का स्वामित्व बिना शर्त केजरीवाल सरकार को हस्तांतरित करना चाहते हैं।

इस संबंध में AAP सरकार से आखिरी बार जून 2019 में अनुरोध किया गया था

1976 में, मनसा राम ने करावल नगर में 2,000 वर्ग गज भूमि पर आलोक पुंज माध्यमिक विद्यालय बनाया था। 1995 से, यह 100% सरकारी अनुदान पर चल रहा था। हालाँकि, भवन की खराब स्थिति के कारण, 2018 में उच्च न्यायालय ने छात्रों को किसी अन्य भवन में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

मनसा राम के बच्चों द्वारा दायर याचिका के अनुसार, सितंबर 2018 से उस जमीन पर कोई गतिविधि नहीं हुई है जहाँ स्कूल मूल रूप से स्थित है, जिसके कारण असामाजिक तत्वों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

याचिका में तीन भाई-बहनों, अनूप सिंह, सतीश कुमार और अनूपी ने कहा कि जमीन के हस्तांतरण के लिए उनके अनुरोध पर केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता स्कूल में नामांकित हजारों छात्रों की शिक्षा को प्रभावित कर रही है और जो लोग सरकारी स्कूल में प्रवेश लेना चाहते हैं।

विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ईसाई NGO ‘Persecution Relief’ के खिलाफ NCPCR करेगी कार्रवाई

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बताया कि भारत की छवि खराब करने के लिए ‘Persecution Relief’ नाम के ईसाई NGO के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करते हुए कहा, “बाल संरक्षण क़ानूनों के दुरुपयोग की झूठी रिपोर्ट प्रकाशित एवं 150 देशों में वितरित कर दुनिया भर में भारत का अपमान करके मेरे देश की छवि खराब करने के कुत्सित प्रयास का माकूल जवाब दिया जाएगा। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह इस तरह के मामले में बहुत सख्त हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “उल्लेखनीय है कि पर्सिक्युसन रिलीफ़ नामक संस्था की भोपाल से प्रकाशित उक्त रिपोर्ट को अमेरिकन कमीशन USCIRF ने संज्ञान में लिया था, जिससे देश की छवि खराब हुई थी। मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन की निर्देश द्वारा प्रस्तुत जाँच रिपोर्ट में उक्त संस्था के सभी आरोप झूठे पाए गए हैं।”

‘Persecution Relief’ ने ‘धार्मिक कट्टरपंथियों’ के रूप में भारतीयों को दिखाने की कोशिश की

इससे पहले, कानूनी अधिकार संरक्षण मंच (LRPF) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हत्या और आत्महत्या की घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने के लिए ‘Persecution Relief’ पर कार्रवाई करने को कहा था। क्रिश्चियन एनजीओ ने यूएस-आधारित फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन क्रिश्चियन ऑर्गेनाइजेशन (FIACONA) के साथ हाथ मिलाया था और इसकी रिपोर्ट को वार्षिक अमेरिकी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) रिपोर्ट में शामिल किया गया था।

बता दें कि 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के कार्यान्वयन के बाद भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश’ की सूची में रखा गया था। ‘Persecution Relief’ ने भारत में अपराध की घटनाओं के बारे में भी जानकारी एकत्र की और इसे विभिन्न अमेरिकी ईसाई धर्म प्रचारक संगठनों के साथ साझा किया। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने घटनाओं को सांप्रदायिक ट्विस्ट दे दिया और भारतीयों को ‘धार्मिक कट्टरपंथी’ करार दिया। स्वराज्य से बात करते हुए, ‘Persecution Relief’ ने दावा किया कि उनका उद्देश्य ईसाई समुदाय के खिलाफ ‘हेट क्राइमों’ के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।

हालाँकि, LRPF के कार्यकारी अध्यक्ष एएस संतोष ने जोर देकर कहा कि मुख्यधारा के मीडिया और पुलिस अधिकारियों ने ‘Persecution Relief’ की 8 ऐसी घटनाओं में सांप्रदायिक एंगल को खारिज कर दिया, जिसमें ईसाई एनजीओ ने ‘धार्मिक एंगल’ का आरोप लगाया था। सबसे विचित्र उदाहरण राजस्थान में करंट लगने से मरने वाले एक पादरी का था। इस मामले को भी ‘ईसाई उत्पीड़न’ के एक उदाहरण के रूप में उल्लेखित किया गया था। अपने बचाव में, ‘Persecution Relief’ के संस्थापक ने कहा, “मेरा सताए गए ईसाई भाइयों और बहनों के लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करने और एकजुट होकर आवाज उठाने के अलावा दूसरा कोई एजेंडा नहीं है।”

‘एक बेटा तो चला गया, कोर्ट-कचहरी में फँसेंगे तो वो बाकियों को भी मार देंगे’: बंगाल पुलिस की क्रूरता के शिकार एक परिवार का दर्द

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा आम बात है। इसी तरह की एक घटना बैरकपुर थाना क्षेत्र के भाटपाड़ा में जून 25, 2019 को भी हुई थी, जब रिलायंस जूट मिल पर कुछ गुंडों ने बम फेंके थे। पुलिस ने उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, जिसमें रामबाबू साव नामक एक व्यक्ति की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। यानी, पुलिस ने बिना कुछ किसी को बताए गोलीबारी की और युद्ध की स्थिति बनाते हुए नियम-कायदों का पालन नहीं किया।

ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती ने मृतक रामबाबू साव की माँ के साथ बातचीत की, जिन्होंने बताया कि जब उन्हें अपने बेटे को गोली लगने की खबर मिली, तब दिन के साढ़े 10 बज रहे थे और वो रोटी बना रही थीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने बेटे से पूछा था कि वो रोटी खाएगा, तो उसने आराम से बनाने को कहा था और साथ ही घूम कर जल्द आने की बात कही थी। लेकिन, लौटी तो सिर्फ उनकी लाश।

रामबाबू साव कि उम्र 18 वर्ष के करीब थी। जून महीने में ही 12 तारीख को उनका जन्मदिन था। पाँचवीं के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी और एक दुकान में बैठ कर कमाते थे। रामबाबू की चाची ने बताया कि वो अपने बच्चे को लेकर स्कूल गई थीं, तभी रामबाबू ने कहा कि वो कचौड़ी लेकर आ रहे हैं, जिसके बाद सीधा खबर आई कि दंगा हो गया है और उसे गोली लगी है। जब चाची वहाँ गई तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

रामबाबू को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ये सब कुछ दंगों के बीच ही हो रहा था। उन्होंने बताया कि उन्हें अस्पताल में रामबाबू के मृत होने की बात कही गई। मृतक की चाची का कहना है कि दंगा न तो हिन्दू-मुस्लिम का था और न ही दो पक्षों का, बम फेंकने के बाद ये शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि रामबाबू पार्टी-पॉलिटिक्स में नहीं रहता था। उन्होंने बताया कि केस कहाँ तक पहुँचा है, उन्हें नहीं पता। कभी कोर्ट में भी उन्हें नहीं बुलाया गया।

चाची ने बताया कि नेताओं ने आकर 10 लाख रुपए देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ममता सरकार की तरफ से कुछ नहीं आया। हाँ, भाजपा नेताओं ने उन्हें 4.5 लाख रुपए दिए हैं। जबकि TMC वाले देखने और समाचार लेने तक नहीं आए – ऐसा परिजनों का कहना है। पीड़ित परिवार दशकों से उसी इलाके में बसा हुआ है। परिजनों का सोचना है कि वो कोर्ट-कचहरी के झमेले में नहीं पड़ते हैं, नहीं तो वो दूसरे को गोली मार देंगे।

मृतक रामबाबू के परिवार से ऑपइंडिया ने की बातची

‘40 साल के मोहम्मद इंतजार से नाबालिग हिंदू का हो रहा था निकाह’: दिल्ली पुलिस ने हिंदू संगठनों के आरोपों को नकारा

दिल्ली के अमन विहार का वार्ड संख्या 41। यहाँ एक शादी को लेकर हुए बवाल का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एक नाबालिग हिंदू लड़की का धर्मांतरण कर निकाह 40 साल के मोहम्मद इंतजार हुसैन से करावाया जा रहा था। वे दिल्ली पुलिस पर सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि दोनों बालिग हैं।

घटना शुक्रवार (मार्च 5, 2021) की है। निकाह कार्यक्रम में पहुँच कर हिन्दू संगठनों ने इस कृत्य का विरोध किया। हंगामे के बाद इलाके में पुलिस तैनात कर दी गई है। धारा-144 लागू कर बैरिकेडिंग कर दी गई है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने विभिन्न पक्षों से बात की। मोहम्मद इंतजार के परिवार ने इस मामले में मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता विशाल सिंह चंदेल ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि लड़की की आयु 17 वर्ष है और वह 7वीं कक्षा में पढ़ती है। उसकी शादी 40 साल के एक व्यक्ति से कराई जा रही है।

ऑपइंडिया को विशाल ने बताया पीड़ित लड़की एक पब्लिक स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की की उम्र आखिर 18 वर्ष कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि उनके पास ये भी जानकारी है कि लड़की का फर्जी आधार कार्ड रुपए देकर कहाँ से बनवाया गया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस इसी फर्जी आधार कार्ड को देख कर लड़की को बालिग़ बता रही।

उन्होंने कहा कि उनके मन में मुस्लिमों के खिलाफ कोई पूर्वाग्रह नहीं है। इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताते हुए कहा कि एक हिन्दू बहुल क्षेत्र में टेंट लगा कर और डीजे बजा कर सार्वजनिक तौर पर निकाह पढ़ा गया। उन्होंने इस्लामी धर्मांतरण का भी दावा करते हुए इसे हिन्दू समाज के मुँह पर तमाचा बताया। उन्होंने पूछा कि जब ये सब हो रहा था तो इलाके के हिन्दू कहाँ थे?

विशाल सिंह चंदेल ने कहा, “पीड़ित परिवार को पुलिस-प्रशासन ने इसीलिए हटाया है, ताकि हम हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता उनसे मिल न सकें। पुलिस के आला अधिकारियों ने हमें थाने बुलाया था, जहाँ हमारी उनके साथ बैठक हुई। बैठक में उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की जाँच होगी और स्कूल आईडी कार्ड की जाँच कराएँगे। लेकिन अब तक दिल्ली पुलिस ने कोई जाँच नहीं की और सहयोग करने की बजाए उल्टा बैरिकेडिंग कर दी है।”

वहीं ‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पुलिस ने इसे छावनी में क्यों तब्दील कर दिया है? क्या हिन्दू समाज आतंकवादी है? क्या हिन्दू समाज पत्थरबाजी करता है? हम तो एक सभ्य समाज हैं, जो किसी से लड़ते-झगड़ते नहीं।” वहीं एक विहिप पदाधिकारी ने कहा, “मैंने लड़की के पिता से बात कर कहा था कि अगर उन पर कोई दबाव है तो हमारा संगठन उनके साथ है और हम आपका अब तक का पूरा खर्च वापस कर इसी टेंट में किसी हिन्दू लड़के से आपकी बेटी की शादी कराएँगे।”

उक्त विहिप पदाधिकारी ने आगे कहा कि उस लड़की के नाम पर हम एक 15 लाख रुपए का प्लॉट देने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मोहम्मद इंतजार तो चप्पल तक एक बेढंगी पहन कर आया था, ऐसे में वो क्या उस लड़की की देखभाल करेगा? उन्होंने कहा कि उक्त परिवार लड़की को रोटी तक नहीं खिला सकता। एक स्थानीय व्यक्ति का भी दावा है कि उक्त मुस्लिम परिवार गरीब है और उसकी वित्तीय स्थिति खराब है।

उन्होंने इसमें माइंडवॉश की आशंका जताई। उसने लड़की के चाची के हवाले से बताया कि कोई भी रिश्तेदार इसके लिए राजी नहीं था। पड़ोसियों का कहना है कि इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई बात है। स्थानीय लोगों का दावा है कि लड़की नाबालिग है। ‘बजरंग दल’ के कई कार्यकर्ता अब भी इलाके में हैं। उन्होंने कहा कि शादी के समय उपस्थित परिवार के रिश्तेदार खुश नहीं थे।

‘बजरंग दल’ के विभागीय संयोजक सतीश गुप्ता ने कहा कि लड़की के परिवार को कहाँ शिफ्ट किया गया है, ये बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि DCP ने इस मामले में कानूनी जाँच का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब इस मामले में बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। इस पूरे मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ‘हिन्दू मोहल्ले में लव जिहाद’ की बात करते हुए रिश्तेदारों से बात की जा रही थी।

‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मामले को रफा-दफा करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने पूरे इलाके में छावनी में तब्दील कर दिया गया है। विशाल चंदेल ने तो कहा कि उन्होंने हिन्दू बहुल इलाके में इतनी धूमधाम से ‘लव जिहाद’ वाली पहली घटना देखी है। साथ ही उन्होंने लड़की का जाली सर्टिफिकेट बनवाने का भी आरोप लगाया।

यह इलाका किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऑपइंडिया ने यहाँ के पूर्व विधायक व भाजपा नेता अनिल झा से बात की। उन्होंने कहा कि ‘लव जिहाद’ के तहत ये शादी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वे अभी-अभी दिल्ली पहुँचे हैं और मामले पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये तो पूरा पैसे के लेनदेन का मामला है। लड़की के परिवार वालों को पैसे दिए गए हैं। हम ये शादी इस तरह से नहीं होने देंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा इस्लामी धर्मांतरण के खिलाफ है।

हमने किराड़ी के वर्तमान विधायक और AAP नेता ऋतुराज झा से भी संपर्क किया। लेकिन उन्होंने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे फोन पर कोई बयान नहीं देते हैं और दफ्तर में आने पर ही इस बाबत कुछ बोल पाएँगे। वहीं DCP प्रमोद कुमार मिश्रा ने पुलिस पर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा कि इस मामले में अफवाहें चल रही हैं, जबकि और लड़का और लड़की दोनों ही बालिग़ हैं।

चना बेचने का वीडियो वायरल होने के बाद योगी सरकार ने 98 वर्षीय ‘आत्मनिर्भर’ बुजुर्ग को किया सम्मानित

उत्तर प्रदेश सरकार ने विजय पाल सिंह के नाम के 98 वर्षीय व्यक्ति को ‘आत्मनिर्भर’ होने के लिए सम्मानित किया। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बूढ़े बाबा की वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे बाबा उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 98 साल है। हैरानी की बात ये है कि 98 की उम्र में भी ये बाबा आत्मनिर्भर हैं और अपनी दो वक्त की रोटी के लिए खुद मेहनत करते हैं। 

बाबा का नाम विजयपाल सिंह है, जो किसी मजबूरी की वजह से नहीं बल्कि अपनी मर्जी से गाँव के बाहर चने बेचते हैं। विजयपाल के पास चने खरीदने गए एक ग्राहक ने उनके साथ बातचीत करते हुए वीडियो बनाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

बाबा ने ग्राहक को बताया कि उनके दो बेटे हैं और दोनों अच्छा-खासा पैसा कमाते हैं। उन्होंने कहा कि वे बिल्कुल फिट हैं, लिहाजा वे परिवार के किसी भी सदस्य पर बोझ नहीं बनना चाहते हैं और अपने दम पर कुछ काम करके पैसा कमाना चाहते हैं। बाबा ने बताया कि उन्हें घर पर खाली बैठे रहना बिल्कुल पसंद नहीं है, यही वजह है कि वे गाँव के बाहर चने बेचते हैं। ग्राहक द्वारा बनाई गई बाबा की ये वीडियो सोशल मीडिया पर इस कदर वायरल हुई कि खुद सीएम ऑफिस ने इस मामले में संज्ञान लिया और डीएम को जरूरी निर्देश दिए।

सीएम योगी के निर्देश पर रायबरेली के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने विजयपाल सिंह जी को अपने कार्यालय में आमंत्रित किया। जिलाधिकारी ने बाबा को 11 हजार रुपए नकद, शॉल, सहारे वाली लाठी और शौचालय का स्वीकृति पत्र और फूलों का गुलदस्ता प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। जिलाधिकारी वैभव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर विजयपाल सिंह जी को सम्मानित करते हुए एक वीडियो भी शेयर की है। 

वैभव श्रीवास्तव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”विकास खण्ड हरचंदपुर, ग्राम पंचायत कण्डौरा निवासी 98 वर्षीय बुजुर्ग विजयपाल सिंह जी के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर कार्यालय में आमंत्रित कर शॉल, छड़ी और 11 हजार रुपए नकद देकर सम्मानित किया और शौचालय का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया।”

उन्‍होंने कहा कि बाबा की जो भी अन्य मदद होगी, वो की जाएगी। बाबा हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बाबा किसी मजबूरी में चने की दुकान नहीं लगाते हैं, बल्कि वो ऐसा इसलिए करते हैं कि आत्मनिर्भर बने रहें, जो एक अच्छा संदेश है।

मनसुख हिरेन का शव लेने से परिजनों का इनकार, कहा- पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो, मौत का कारण बताएँ: रिपोर्ट

मनसुख हिरेन का शव लेने से परिजनों ने इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद ही वे शव लेंगे। मनसुख हिरेन उस एसयूवी कार के मालिक थे, जो विस्फोटक के साथ पिछले दिनों मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के बाहर मुंबई में खड़ी मिली थी। शुक्रवार (5 मार्च 2021) को उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।

न्यूज 18 लोकमत की एक रिपोर्ट के अनुसार परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार करते हुए ऑटोप्सी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि हिरेन की मौत कैसे हुई। उनका कहना है कि माँग पूरी होने पर ही वे शव लेंगे। हिरेन के बड़े भाई विनोद मनसुख और उनकी पत्नी विमला शव नहीं लेने पर अड़े हुए हैं।

रिश्तेदारों ने हिरेन द्वारा लिखे एक पत्र की ओर भी इशारा किया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर एंटीलिया मामले में मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया था। परिजनों ने हिरेन के आत्महत्या करने के दावों को भी नकार दिया। उनके अनुसार, हिरेन की आर्थित स्थिति अच्छी थी और वे एक शानदार तैराक भी थे। परि​जन उनकी मौत के पीछे साजिश का आरोप लगा रहे हैं।

शुक्रवार को जब हिरेन की सुसाइड की खबरें सामने आई थी तो उनकी पत्नी विमला ने इसे खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके पति को क्राइम ब्रांच के किसी अधिकारी तावड़े का फोन आया था। उससे मिलने के लिए ही वे घर से निकले थे। उनके अनुसार जाँच के सिलसिले में यह मुलाकात घोड़बंदर में होनी थी। एंटीलिया के बाहर मिले कार को लेकर परिजनों का कहना है कि वह चोरी हो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।

यह भी कहा जा रहा है कि मनसुख हिरेन के शव की जाँच के दौरान उनके मुँह से 5 रुमाल भी निकले हैं। रुमाल वाले मामले में मुंबई पुलिस का कहना है कि ये रुमाल चेहरे से बँधे हुए मिले थे। वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि अंबानी के घर के बाहर मिले कार के मालिक का नाम सैम पीटर न्यूटन है, मनसुख का तो उस पर कब्ज़ा भर था।

इस मामले में संयोगों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। हिरेन के कथित सुसाइड की खबर आने से कुछ घंटों पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एंटीलिया मामले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था कि एंटीलिया के बाहर मिले कार का ​मालिक एक नंबर के संपर्क में था जो मुंबई पुलिस के अधिकारी और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ सचिन वाजे के नाम पर था। फडणवीस ने यह भी बताया था कि एक नहीं बल्कि दो कारें थीं- एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा और दावा किया कि दोनों कारें ठाणे से आई थीं और उसी रास्ते से चलकर लोकेशन तक पहुँची थीं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जबकि इनोवा इसे छोड़कर आगे बढ़ गई थी।

फडणवीस ने कहा था कि यह संयोग नहीं हो सकता कि कार ठाणे से चोरी हुई, उसने ठाणे का रूट फॉलो किया और मामले के जाँच अधिकारी भी ठाणे में रहते हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर पहुँचने वाले वाजे पहले पुलिस अधिकारी थे। उन्हें जाँच अधिकारी (IO) भी बनाया गया। तीन दिन बाद उन्हें हटा दिया गया। मैं यह नहीं समझ पा रहा कि उन्हें आईओ से क्यों हटाया गया और वे कैसे स्थानीय पुलिस से पहले मौके पर पहुँच गए थे।

राकेश टिकैत से सवाल पूछने पर ‘किसानों’ ने युवती को धमकाया, किसी ने नाम पूछा तो किसी ने छीन ली माइक: देखें वीडियो

नए कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार का विरोध करने के लिए धनसा राजमार्ग पर डेरा डाले तथाकथित किसानों ने एक युवा महिला के सवाल करने पर इस कदर तिलमिला गए कि कोई उसका नाम पूछने लगा तो किसी ने माइक ही छीन ली। इतना ही नहीं, गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में हुए दंगों में आरोपित राकेश टिकैत से सवाल करने पर उन्हें धमकाया भी।

शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को राकेश टिकैत ने हरियाणा-दिल्ली सीमा के साथ धनसा विरोध स्थल का दौरा किया था, जहाँ केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी पिछले तीन महीनों से डेरा डाले हुए हैं। टिकैत के विरोध स्थल पर दिखाई देते ही एक युवा महिला, जो कथित तौर पर एक छात्र कार्यकर्ता है, ने किसान नेता के विरोध प्रदर्शन, नाकाबंदी और गणतंत्र दिवस के दौरान हुए दंगों जैसे मुद्दों पर सवाल किया।

वायरल वीडियो में युवती को धनसा बॉर्डर पर किसान विरोध पर बोलते हुए देखा जा सकता है। युवती के बगल में तथाकथित किसान नेता खड़े हैं। इस दौरान युवती ने राकेश टिकैत से किसानों के विरोध प्रदर्शन के भविष्य के बारे में पूछा और कथित किसान विरोध प्रदर्शनों के समाधान के लिए किसान नेताओं से सवाल किया।

युवा लड़की ने राकेश टिकैत और मंच पर मौजूद अन्य ‘किसान नेताओं’ से सवाल किया, “मैं राकेश टिकैत से अपेक्षित समाधान चाहती हूँ जो विरोध प्रदर्शनों से निकलने वाला है। इन विरोधों का हल ढूँढा जाना चाहिए ताकि युवाओं और किसानों दोनों को नुकसान न हो। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस समस्या का समाधान क्या है? आपने कहा है कि जब तक सरकार आपकी माँगों पर सहमत नहीं होती आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मैं पूछना चाहती हूँ कि अगर सरकार और किसान दोनों इस पर चर्चा के लिए सहमत नहीं होते हैं तो क्या होगा? समाधान क्या होगा? सभी लोग इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं।”

गणतंत्र दिवस के दंगों में उनकी भूमिका के लिए राकेश टिकैत से सवाल करते हुए युवा लड़की ने उनसे पूछा कि 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा की जिम्मेदारी कौन लेगा। मुझे नहीं पता कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन इस तरह की हिंसा हमारे समाज को प्रभावित करेगी।

जैसे ही युवा लड़की ने गणतंत्र दिवस के दंगों के बारे में टिकैत से सवाल किया, मंच पर मौजूद किसान नेताओं ने माइक छीन लिया। गुस्साए ‘किसान नेताओं’ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।। एक किसान नेता को उसका नाम भी पूछते हुए देखा जा सकता है, जिस पर युवा लड़की ने बहादुरी से जवाब दिया। वीडियो में आप देख सकते हैं कि माइक छीन लिए जाने के बाद भी युवती अपना संबोधन जारी रखती है।

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दौरान दंगे

इस साल गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। बड़े पैमाने पर किसानों ने दिल्ली में प्रवेश किया था और इस दौरान हिंसा भड़क गया था, जिसमें लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हुए। उन दंगाइयों में से कई, ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किले पर पहुँचे और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते हुए लाल किले के गुंबद पर धार्मिक और कथित तौर पर खालिस्तानी झंडे फहराए

पुलिस ने गणतंत्र दिवस की हिंसा के संबंध में अब तक 38 FIR दर्ज की हैं और 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कथित ’किसान नेताओं’ सहित 44 लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था, जिनके बारे में मानना था कि उन्होंने दंगाइयों को हिंसा में लिप्त होने के लिए उकसाया था।

नड्डा के सामने BJP के हुए दिनेश त्रिवेदी: बम हमले में 6 पार्टी कार्यकर्ता घायल, TMC पर आरोप

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को चुनाव होना है। इस दौरान एक तरफ जहाँ राज्य में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ राजनेताओं का तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने का सिलसिला जारी है। 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में लगातार सियासी उलटफेर हो रहे हैं। इस बीच टीएमसी के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने को स्वर्णिम पल बताते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि बीजेपी जनता के परिवार जैसी है। यहाँ पार्टी की सेवा के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए काम होता है।

वहीं खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (मार्च 5, 2021) देर रात दक्षिण 24 परगना जिले के रामपुर गाँव में एक कथित बम विस्फोट में 6 भाजपा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जब वो लोग एक शादी से वापस आ रहे थे तो टीमएमसी कार्यकर्ताओं ने उन पर बम फेंका। बताया जा रहा है कि घायलों को इलाज के लिए कैनिंग उपखंड अस्पताल लाया गया। घायल 6 में से दो की हालत बेहद गंभीर है।

जब भाजपा कार्यकर्ता देर रात एक शादी समारोह में भाग लेकर वापस लौट रहे थे, तभी यह घटना घटी। सड़क पर बम फेंका गया, जिसमें 6 लोग घायल हो गए। स्थानीय भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि हमले के पीछे टीएमसी कार्यकर्ता थे। हालाँकि, टीएमसी नेताओं ने आरोप से इनकार किया है और आरोप लगाते हुए कहा कि यह विस्फोट बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा बम बनाने के दौरान हुई। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा भाजपा कार्यकर्ता की माँ की पिटाई

गौरतलब है कि पिछले महीने गोपाल मजूमदार नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता की बुजुर्ग माँ को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से पीटा था। उन पर और उनकी माँ पर बंदूक के पिछले भाग का इस्तेमाल करते हुए हमला किया गया और इतना पीटा गया कि दोनों के चेहरे सहित शरीर के कई अंगों पर गहरी चोट आई है। निमता पुलिस थाने में इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता ने 3 TMC गुंडों पर हिंसा का आरोप लगाया था।

गोपाल मजूमदार ने कहा कि तीनों उनके घर में घुस गए और मारपीट शुरू कर दी थी। आरोप है कि उन्होंने पहले घर में घुस कर अपशब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और पूछने लगे कि भाजपा में उक्त कार्यकर्ता की क्या भूमिका है।

पीड़ित ने बताया कि कुछ गुंडे घर के बाहर भी खड़े थे, जिन्हें वो पहचान नहीं पाए। उन्होंने बताया कि गुंडों ने उनकी माँ को धक्का देकर गिरा दिया और मारपीट के बाद घर से निकल कर चले गए। पीड़ित ने बताया, “मैं भाजपा की मंडल कमिटी का सदस्य हूँ। सबसे पहले तो उन्होंने हाथों का इस्तेमाल करके मुझे मारा, फिर रिवॉल्वर के हुड का इस्तेमाल करके मेरे सिर पर जोरदार वार किया। जब मैं जमीन पर गिर गया तो उन्होंने मुझे लात-घूसों से मारना शुरू कर दिया।”