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मनसुख हिरेन को SUV में खुद ड्राइव कर ले गए सचिन वाजे, ऑटोप्सी की नहीं हुई वीडियो रिकॉर्डिंग : स्पाई कैमरे से हुआ खुलासा

मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मामले में निलंबित मुंबई पुलिस एपीआई सचिन वाजे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह ड्राइव करते हुए मनसुख हिरेन को क्राइम ब्रांच ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो 26 फरवरी का बताया जा रहा है। वीडियो में क्राइम ब्रांच के बाहर का फुटेज है, जिसमें वाजे और मनसुख हिरेन को उनके लैंड क्रूजर प्राडो में यूनिट में आते हुए देखा जा सकता है। बता दें कि यह वाहन एनआईए द्वारा जब्त कर लिया गया है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए ने गुरुवार (मार्च 18, 2021) को दो और लग्जरी कार जब्त कीं, जिन्हें मुंबई के निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे कथित तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि एक टोयोटा लैंड क्रूजर प्राडो कार ठाणे के साकेत क्षेत्र में वाजे के आवास के बाहर खड़ी मिली।

इसके अलावा एक मर्सिडीज कार भी जब्त की गई। केंद्रीय एजेंसी ने मर्सिडीज कार से 5 लाख रुपए की नकद राशि, कुछ कपड़े और एक कैश काउंटिंग की मशीन बरामद किया था, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इसका इस्तेमाल सचिन वाजे द्वारा किया जा रहा था। साथ ही वो नंबर प्लेट भी मिली है, जो एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियों पर थी। सूत्रों ने कहा है कि एनआईए दो और कारों की तलाश में है जो कथित तौर पर सचिन वाजे के कब्जे में थी। मामले में अब तक जब्त किए गए वाहनों की संख्या पाँच हो गई है जिनमें दो मर्सिडीज, एक स्कॉर्पियो, एक टोयोटा लैंड क्रूजर प्राडो और एक इनोवा कार शामिल है। वाहनों को कुंबाला हिल स्थित एनआईए कार्यालय लाया गया। 

इसके साथ ही टाइम्स नॉउ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऑटोप्सी अटेंडेंट ने मीडिया चैनल के स्पाई कैमरा पर ये स्वीकार किया कि हिरेन मनसुख की ऑटोप्सी की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई है। बता दें कि मनसुख हिरेन की हत्या अब एक हाई प्रोफाइल केस बन चुका है और ऐसे में ऑटोप्सी की वीडियो रिकॉर्डिंग न होना कई बड़े सवाल खड़े करते हैं।

पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा ये भी हुआ था कि एंटीलिया बम मामले में सीसीटीवी फुटेज हाथ लगी है। इसमें सचिन वाजे एक पीपीई किट या लूज फिटिंग कुर्ता जैसी चीज पहने नजर आ रहे हैं, जिसे कथित तौर पर बाद में जला दिया गया था।

बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मनसुख हिरेन की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि हिरेन को मारने के बाद शव को खाड़ी में फेंका गया। लो टाइड की वजह से शव बहा नहीं, अगर शव हाई टाइड में चला जाता तो मिलता ही नहीं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हिरेन के फेफड़ों में पानी नहीं है। अगर हिरेन की मौत पानी में डूबने से हुई होती तो फेफड़ों में पानी दिखता। इससे साफ है कि हिरेन की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनसुख हिरेन का गला घोटने की जानकारी सामने आई है। 

UP में भारी बहुमत से लौटेगी BJP: योगी सरकार के चार साल पूरे, सर्वे ने बताया वोटरों का मिजाज

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर आए एक सर्वे के मुताबिक राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में योगी सरकार बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटने में कामयाब रहेगी।

एबीपी-सी वोटर के इस सर्वे से यह बात भी सामने आई है कि प्रियंका गाँधी भी यूपी में कॉन्ग्रेस को संजीवनी देने में नाकाम रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सपा और मायावती की बसपा भी मुकाबले में नहीं दिख रही है।  

इस सर्वे में भाजपा को 41 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। सपा को 24 फीसदी और बसपा को 21 फीसदी वोट मिल सकते हैं। कॉन्ग्रेस को 6 फीसदी और अन्य को 8 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

सर्वे के मुताबिक बीजेपी के हिस्से 284-294, एसपी को 54-64, बीएसपी को 33-43 सीटें मिल सकती हैं। कॉन्ग्रेस के खाते में 1-7 सीटें आने का अनुमान है और अन्य को 10 से 16 सीटें मिल सकती हैं। गौरतलब है कि ​उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं। एबीपी न्यूज के मुताबिक सर्वे के दौरान अलग-अलग विधानसभा सीटों पर 15 हजार 747 लोगों से बात की गई।

इसी सर्वे के मुताबिक यदि उत्तराखंड में अभी चुनाव हुए तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है। 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा के लिए भी अगले साल चुनाव होंगे। सर्वे के अनुसार चुनाव होने पर बीजेपी को 24-30 और कॉन्ग्रेस को 32 से 38 सीटें मिल सकती हैं। शेष सीटें बसपा, आप और अन्य को मिलने का अनुमान लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि इस राज्य में बीजेपी ने हाल ही में त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया है।

वहीं पश्चिम बंगाल को लेकर इस सर्वे में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को बढ़त दिखाई गई है। 294 सदस्यीय विधानसभा में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को 154 से 162 मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं बीजेपी 98 से 106 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। सर्वे बताता है कि टीएमसी को बंगाल में 43 फीसदी वोट मिलेंगे। बीजेपी 37.5 फीसदी वोट पाएगी और लेफ्ट-कॉन्ग्रेस का गठबंधन को 12 फीसदी वोट मिलेंगे।

राज्य में आठ चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर प्रचार जोरों पर है। पहले चरण की सीटों पर 27 मार्च को वोट पड़ेंगे। गुरुवार को पुरुलिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लोकसभा चुनावों में हाफ हुई टीएमसी, इन चुनावों में साफ हो जाएगी।

सऊदी अरब में हिंदू को दफनाया, इंडियन काउंसलेट को बताया तक नहीं: अस्थियों के लिए हाई कोर्ट में विधवा ने लगाई है गुहार

इस साल 24 जनवरी को सऊदी अरब में प्रवासी भारतीय संजीव कुमार का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। उन्हें दफना दिया गया। अस्थियाँ वापस लाने के लिए उनकी पत्नी अंजू शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है।

शुरुआत में मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि अनुवादक की चूक की वजह से ऐसा हुआ था। लेकिन अब पता चला है कि भारतीय काउंसलेट से न तो इस बारे में पूछा गया था और न ही कोई जानकारी दी गई थी।

हाई कोर्ट में गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने केस की सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारी से कहा कि आज ही दिल्ली में सउदी अरब दूतावास में संपर्क करके मृतक की अस्थियाँ लाने के लिए कार्य शुरू करें और 24 मार्च तक इस संबंध में हुई कार्रवाई पर कोर्ट को बताएँ। अदालत ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह मामले की संवेदनशीलता को समझकर इस पर एक्शन ले।

बता दें कि पिछली सुनवाई पर हाई कोर्ट ने इस मामले में विदेश मंत्रालय से जवाब माँगा था। विदेश मंत्रालय की तरफ से काउंसलर पासपोर्ट वीजा डिविजन (सीपीडी) के निदेशक ने हाई कोर्ट को बताया कि इस संबंध में सऊदी में भारतीय दूतावास और सऊदी सरकार के संबंधित विभाग से पत्राचार किया गया है। मृतक का शव गैर मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

उन्होंने बताया कि भारतीय काउंसलेट से मृतक संजीव कुमार को दफन करने से पहले न तो पूछा गया था और न ही इस बारे में सूचित किया गया था। यह नियमित प्रोटोकॉल के खिलाफ है। सऊदी अरब में भारतीय दूतावास द्वारा संजीव कुमार की मौत के बाद उनको लेकर कोई अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया था।

उनके अनुसार, मृतक के मृत्यु प्रमाण-पत्र में धर्म का उल्लेख नहीं था। उन्हें सिर्फ़ भारतीय के रूप में पहचाना गया और एक गैर मुस्लिम कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। निदेशक ने कहा कि कुमार को यदि गैर मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया गया मतलब उन्हें पता होगा कि वह मुस्लिम नहीं थे।

बता दें कि पहले मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा था कि अनुवादक की गलती से ये सारी चीजें हुईं। लेकिन अब कोर्ट में इंडियन कांउसलेट का कहना है कि आधिकारिक अनुवादक द्वारा संजीव कुमार के मृत्यु प्रमाण-पत्र का अनुवाद नहीं किया गया था।

उन्होंने बताया कि 25 फरवरी को उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली थी। लेकिन उन्होंने कोई अनापत्ति पत्र जारी नहीं किया। बाद में जब पता चला तो उन्होंने तुरंत सऊदी अरब के क्षेत्र के साथ मिलकर बात की। इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठकें भी बुलाई गई थी।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब में हिंदू के अंतिम संस्कार का यह मामला कुछ दिन पहले चर्चा में आया था जब हिमाचल प्रदेश के ऊना की रहने वाली अंजू शर्मा ने अधिवक्ता सौरभ चंद के माध्यम से याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में अंजू ने उनके पति के शव की अस्थियों को भारत लाने के संबंध में निर्देश देने की माँग की थी। अंजू की 3 बेटियाँ हैं। उनके पति संजीव बीते 23 साल से सउदी अरब में ट्रक चालक का काम करते थे। तीन साल से वह भारत नहीं आ सके थे।

सचिन वाजे से जुड़े दो और लक्ज़री SUV को NIA ने किया जब्त, एक शिवसेना नेता का: एंटीलिया-मनसुख केस में आया नया मोड़

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एंटीलिया के सामने विस्फोटक से लदी कार खड़ी करने के मामले में दो और लक्जरी कारों को जब्त कर लिया, जिन पर एपीआई सचिन वाजे से जुड़े होने का संदेह है। इससे अब मामले में जब्त वाहनों की संख्या 5 हो गई है, और रिपोर्ट के अनुसार ऐसा कहा जा रहा है कि एनआईए दो और लग्जरी कारों की तलाश में है।

आज एनआईए इसी मामले मुंबई के अपने कार्यालय में दो और लक्जरी एसयूवी लेकर आई। कारों में से एक काले रंग की लक्जरी एसयूवी, एक मर्सिडीज बेंज एमएल 250 सीडीआई है। उसके बाद, एजेंसी दूसरी एसयूवी, एक सफेद टोयोटा लैंड क्रूजर प्राडो जीआरजे 120 आर लेकर आई।

मर्सिडीज बेंज एमएल 250 सीडीआई

पंजीकरण संख्या MH43AR8697 के साथ मर्सिडीज कार नवी मुंबई में वाशी आरटीओ में नर्मदा ऑफशोर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से पंजीकृत है, जबकि पंजीकरण संख्या MH02CC101 के साथ प्राडो मुंबई के बोरीवली में पंजीकृत है, और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसके मालिक विजयकुमार गणपत भोसले हैं। हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये कारें किस तरह से उनसे संबंधित हैं। क्या सचिन वाजे का कारों के मालिकों के साथ कोई संबंध है या दूसरा कोई मामला है।

सफेद टोयोटा लैंड क्रूजर प्राडो जीआरजे 120

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विजयकुमार गणपत भोंसले शिवसेना नेता हैं और उन्होंने 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के अपने हलफनामे में, टोयोटा प्राडो एसयूवी को इसी नंबर के साथ सूचीबद्ध किया था कि उनके पास यह मोटर वाहन हैं। उन्होंने उस समय वाहन की मौजूदा कीमत 38 लाख रुपए बताई थी।

2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भोसले का हलफनामा

गौरतलब है कि एंटीलिया के बाहर मिली स्कॉर्पियो का नंबर प्लेट एक ऐसी ब्लैक मर्सिडीज से मिला है, जिसे मंगलवार (मार्च 16, 2021) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की टीम ने मुंबई क्राइम ब्रांच के ऑफिस के नजदीक क्रॉफर्ड बाजार क्षेत्र से बरामद किया। कथित तौर पर कार से कई और चीजें भी मिली है।

इंडिया टुडे के अनुसार, NIA के आईजी अनिल शुक्ला ने बताया है कि ये बरामद की गई मर्सिडीज सचिन वाजे इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें से 5 लाख के करीब कैश निकला है। इसके अलावा कुछ कपड़े, पेट्रोल, डीजल और काउंटिंग मशीन भी मिली है। साथ ही वो नंबर प्लेट भी मिली है, जो एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियों पर थी।

पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा ये भी हुआ है कि एंटीलिया बम मामले में सीसीटीवी फुटेज हाथ लगी है। इसमें सचिन एक पीपीई किट या लूज फिटिंग कुर्ता जैसी चीज पहने नजर आ रहे हैं, जिसे कथित तौर पर बाद में जला दिया गया था।

बता दें कि कल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मनसुख हिरेन की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि हिरेन को मारने के बाद शव को खाड़ी में फेंका गया। लो टाइड की वजह से शव बहा नहीं, अगर शव हाई टाइड में चला जाता तो मिलता ही नहीं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हिरेन के फेफड़ों में पानी नहीं है। अगर हिरेन की मौत पानी में डूबने से हुई होती तो फेफड़ों में पानी दिखता। इससे साफ है कि हिरेन की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनसुख हिरेन का गला घोटने की जानकारी सामने आई है। 

शिवसेना के नेताओं के साथ नजर आता था वाजे

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सचिन वाजे मनसुख हिरेन को जानते थे। उन्होंने कहा कि वाजे मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और शिवसेना के मंत्रियों के साथ नजर आते थे। उन्होंने दावा किया कि वाजे को वसूली के लिए लाया गया था और साजिश के तहत वाजे ने ही मनसुख से पूछताछ की थी। उन्होंने माँग की कि इस मामले की जाँच एटीएस को नहीं करनी चाहिए बल्कि एनआईए के हाथ में दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह और सचिन वाजे बहुत छोटे लोग हैं। इसकी जाँच होनी चाहिए कि इनके पीछे कौन लोग हैं।

वाजे और परमबीर छोटे लोग, इनके पीछे कौन…

फडणवीस ने कहा कि ये पूरा मामला अकेले सचिन वाजे के बस की बात नहीं थी। सचिन वाजे और परमबीर सिंह जैसे लोग बहुत छोटे हैं। उन्होंने कहा कि इनके पीछे कौन लोग हैं कौन इन्हें नियंत्रित कर रहे हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि शिवसेना ने सचिन वाजे के लिए दबाव बनाया। मनसुख हिरेन की वाजे से लगातार बातचीत हुई थी। सचिन वाजे वसूली के लिए बदनाम था। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री सचिन वाजे का बचाव क्यों कर रहे हैं। मुंबई में अपराध का राजनीतिकरण हुआ। 

श्रीलंका में जहाँ बंदी बनाकर रखीं गई थी माता सीता, वहाँ का पत्थर भी अयोध्या के राम मंदिर में लगेगा

अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर में सीता एलिया के एक पत्थर का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सीता एलिया श्रीलंका में है। मान्यता है कि माता सीता को रावण ने यहीं बंदी बनाकर रखा था।

इस पत्थर को श्रीलंका के हाई कमिश्नर मिलिंडा मोरागोड़ा द्वारा भारत लाए जाने की उम्मीद है। बता दें कि माता सीता को सीता एलिया की एक वाटिका में रखा गया था, जिसे अशोक वाटिका कहते हैं।

जानकारी के मुताबिक वेरांगटोक से सीता माता को जहाँ ले जाया गया था, उस स्थान का नाम गुरुलपोटा है। इसे अब ‘सीतोकोटुवा’ नाम से जाना जाता है। यह स्थान भी महियांगना के पास है। कहते हैं कि एलिया पर्वतीय क्षेत्र की एक गुफा में सीता माता को रखा गया था, इसलिए इसे ‘सीता एलिया’ नाम से जाना जाता है। यहाँ सीता माता के नाम पर एक मंदिर भी है। यह मंदिर सीता अम्मन कोविले नाम से प्रसिद्ध है।

इस स्थान की इतनी मान्यता होने के कारण लोग वहाँ से आने वाले पत्थर की खबर जानकर खुश हैं। विक्रांत नाम के सोशल मीडिया यूजर ने कहा है कि राम मंदिर सिर्फ मंदिर नहीं है। यह एक सभ्यता से जुड़ाव है।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर की बुनियाद की खुदाई का काम खत्म हो गया है। वहाँ पूजा-पाठ के बाद अब नींव भराई का काम चल रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले की रामसेतु पर पूजा की तस्वीरें सामने आई थी। महाशिवरात्रि पर हुई पूजा के बाद भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट कर बताया था कि उच्चायुक्त गोपाल बागले ने रामसेतु पर प्रार्थना की, जो भारत और श्रीलंका को सदियों से जोड़े हुए है। उन्होंने भारत और श्रीलंका के लोगों के बीच मजबूत संबंधों की बहाली को लेकर प्रार्थना की।

श्री जगन्नाथ मंदिर की 35000 एकड़ जमीन बेचे जाने पर आया प्रशासन का स्पष्टीकरण, रिपोर्ट्स को बताया- भ्रामक और विकृत

श्री जगन्नाथपुरी मंदिर की 35000 एकड़ जमीन से जुड़ी खबर वायरल होने के बाद मंदिर प्रशासन ने सामने आकर स्पष्टीकरण दिया है। प्रशासन ने बताया है कि मंदिर की भूमि बेचे जाने की खबरें पूर्ण रूप से फर्जी और प्रेरित हैं। इन्हें मीडिया में गलत तरह से रिपोर्ट किया गया।

पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर कार्यालय (SJTA) ने इस संबंध में लगातार ट्वीट शेयर किए हैं। इसमें उन्होंने बताया कि मंदिर की जो जमीन लंबे समय से अलग-अलग लोगों के कब्जे में हैं, उसको लेकर साल 2003 में ‘एकीकृत नीति’ बनाई गई थी। अब उसी के अनुसार मंदिर कमेटी द्वारा जमीन का निपटान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एकीकृत नीति का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की जमीन की रक्षा करना था। अब तक 2001 से 2010 तक, 291 एकड़ भूमि का निपटान किया गया और 2011 से 2021 तक 96 एकड़ एकड़ भूमि का निपटान किया गया है। जमीन का उपयोग जनता के लाभ के लिए जैसे स्कूलों, मेडिकल कॉलेज, सड़कों आदि के रूप में किया गया।

SJTA ने कहा कि जगन्नाथ महाप्रभु की 35,000 एकड़ जमीन को बेचने की रिपोर्टिंग पूरी तरह से गलत और प्रेरित है। हम ओडिशा के लोगों और भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों से ऐसी रिपोर्टिंग से गुमराह न होने का आग्रह करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार और अन्य को सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि के आवंटन के बारे में निर्णय जगन्नाथ मंदिर समिति द्वारा लिया जाता रहा है।  

बता दें कि मंदिर प्रशासन की यह प्रतिक्रिया उन खबरों के जवाब में आई है जिसमें दावे किए जा रहे थे कि मंदिर 35000 एकड़ जमीन बेची जा रही है। दरअसल, मंगलवार को कानून मंत्री प्रताप जेना ने इस मामले पर बयान दिया था। उन्होंने बताया था कि पूर्व राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी और जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति से स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार ने मंदिर की 35,272 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा था कि भगवान जगन्नाथ के नाम पर 24 जिलों में 60,426 एकड़ जमीन की पहचान की गई है, ये जमीनें पूरे राज्य में फैली हैं। इनमें करीब 395 एकड़ बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में है। इन जमीनों में से अबतक मंदिर प्रशासन द्वारा 34,876 एकड़ जमीन पर सफलतापूर्वक दावा किया जा चुका है, इनके फंड मंदिर में जमा करवाए जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि इस खबर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही हिंदुओं मंदिर और उनपर सरकार के नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई थी। मंदिर से जुड़ी इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि जिन लोगों ने 30 साल से अधिक समय से मंदिर की जमीन का अतिक्रमण किया है, वे रुपए देकर भूमि पर कब्जा कर सकते हैं। 30 साल से कम और 20 साल से ज्यादा रहने वाले लोग 9 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से ले सकते हैं। ऐसे ही 20 से भी कम लेकिन 12 साल से ज्यादा रहने वालों को 15 लाख रुपए देकर जमीन का अधिकार मिल जाएगा।

दिल्ली से निकाले गए तो मेवात में बनाया ठिकाना, नूँह के मुस्लिम रोहिंग्या घुसपैठियों को दे रहे पनाह: रिपोर्ट

हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोग रोहिंग्या घुसपैठियों को आश्रय दे रहे हैं। यह एक मुस्लिम बहुल इलाका है। साथ ही यह इलाका पशुओं की तस्करी सहित विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों के लिए भी पहचान रखता है।

बताया जाता है कि दिल्ली से बाहर किए गए ज्यादातर रोहिंग्या ने हरियाणा में पनाह ली है।विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हरियाणा में रोहिंग्याओं की मौजूदगी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या को तुरंत रिहा करने और उन्हें प्रत्यर्पित करने से रोकने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से याचिका दायर की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा सरकार राज्य में बसे अवैध रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के प्रयास कर रही है। सरकार इनके दस्तावेजों की पड़ताल की योजना बना रही है। हालाँकि इस प्रक्रिया में थोड़ा वक्त लग सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 600-700 रोहिंग्या परिवार राज्य में बसे हैं। करीब 2 हजार रोहिंग्या के अकेले मेवात जिले में होने की बात कही जा रही है। लेकिन, विहिप का मानना है कि ये संख्या वास्तविकता से काफी काम है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का दावा है कि यह संख्या लाखों में हैं। हरियाणा में रहने वाले ज्यादातर रोहिंग्या कथित तौर पर मेवात (नूँह), फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल और यमुना नगर जिलों में बसे हैं। राज्य के अन्य जिलों में भी रोहिंग्या हैं, लेकिन उनकी पहचान करना मुश्किल है क्योंकि इनमें से ज्यादातर ने फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनवा रखे हैं।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में सख्ती के बाद रोहिंग्याओं के पंजाब की तरफ जाने की भी खबरें आई थीं। जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि विहिप 2008 से ही देश से रोहिंग्या मुस्लिमों को निकाले जाने को लेकर प्रयास कर रहा है। उस समय दिल्ली से निकाले जाने के बाद ये रोहिंग्या हरियाणा और उत्तर प्रदेश चले गए और वहाँ अपनी बस्तियाँ बसा ली। अब इन्हें मेवात में मुस्लिमों द्वारा पनाह दी जा रही है।

2008 में रोहिंग्या चाहते थे कि भारत में स्थायी तौर पर रहने के लिए उन्हें रिफ्यूजी का दर्जा दिया जाए। इसको लेकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। उस समय बंसल ने केंद्र सरकार को 40 पन्नों का पत्र लिखकर इन्हें रिफ्यूजी का दर्जा नहीं देने का आग्रह किया था। साथ ही इससे होने वाले खतरों को लेकर भी आगाह किया था। विहिप के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा था कि इनके विभिन्न देशों के आतंकी संगठनों से संपर्क होने की भी आशंका है।

रिपोर्ट में बंसल के हवाले से बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने देश में रहने वाले रोहिंग्या की संख्या 40 हजार के करीब बताई है, लेकिन असल संख्या लाखों में हो सकती है। कथित तौर पर ज्यादातार रोहिंग्या हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं।

हरियाणा सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) का समर्थन किया था और राज्य में इसे लागू करने की सोच रही है। इसके लिए राज्य सरकार परिवारों के परिचय पत्र और उनका डाटा तैयार करने की दिशा में काम भी कर रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी एनआरसी का समर्थन करते हुए कहा था कि कानून किसी बाहरी को देश में रहने की इजाजत नहीं देता है। उन्हें अवैध प्रवासियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

बंगाल में फिर हुई BJP कार्यकर्ता की हत्या, पेड़ से लटका मिला शव: पार्टी ने कहा- ये प्रजातंत्र की हत्या, जनता देगी जवाब

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हिंसा का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। राज्य में आज (मार्च 18, 2021) एक और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की लाश पेड़ से झूलती मिली। मृतक की पहचान विकास नस्कर के रूप में हुई। वह दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दक्षिण के निवासी थे।

भाजपा की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, “विकास नस्कर की हत्या हुई है। वह बूथ नंबर 57 का बीजेपी का कार्यकर्ता थे।” भाजपा का कहना है कि यह केवल एक युवक की हत्या नहीं है, ये प्रजातंत्र की हत्या है। बंगाल की जनता इसका जवाब देगी।

मालूम हो कि एक तरफ सोनारपुर में विकास पर हमला हुआ, दूसरी ओर नंदीग्राम से बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को जहाँ सोनाचूड़ा रोड शो में शामिल होना था, वहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए और एक बीजेपी कार्यकर्ता के सिर पर लाठी से प्रहार किया गया।

इससे पूर्व भाटपाड़ा के जगदाल इलाके में बुधवार को अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय ‘मजदूर भवन’ को निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में करीब 15 जगहों पर टीएमसी कैडरों ने बम फेंके। सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया गया।

बंगाल के बाद असम में PM मोदी ने भरी हुंकार

उल्लेखनीय है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के बढ़ते आतंक को बंगाल में देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुलिया में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि इन चुनावों में टीएमसी साफ हो जाएगी। 

वहीं असम में रैली के दौरान अपनी बात रखते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने इस बात पर गौर करवाया कि जैसे आज बंगाल में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट साथ हैं। वहीं केरल में दोनों के बीच कुश्ती चल रही है। उन्होंने पूछा कि असम में भी कॉन्ग्रेस किसके भरोसे हैं? उन्हीं लोगों के, जिनसे स्थानीय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता दशकों से लड़ रहे हैं। अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने असम में हुए विकास कार्यों, वहाँ की संस्कृति पर बात की। साथ ही 5 सालों में हुए कार्यों के बारे में बताया।

होटल चाँद में अनवर और इब्राहिम बना रहे थे थूक वाली तंदूरी रोटी, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद के बाद थूक लगाकर रोटी बनाने का मामला अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आया है। सोशल मीडिया पर फिर एक वीडियो वायरल होना शुरू हुई है जिसमें दो युवक थूक कर तंदूरी रोटियाँ बना रहे हैं। 

वीडियो में नजर आने वाले दोनों युवकों की पहचान सबी अनवर और इब्राहिम के तौर पर हुई है। दोनों पश्चिमी दिल्ली में चलती सड़क के किनारे तंदूरी रोटी बनाते हुए उस पर थूक रहे हैं। पुलिस ने इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 269/270/272/273/34 के तहत ख्याला थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी प्रशांत किशोर ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी ट्विटर से मिली थी और उन्होंने इस पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस से मामले की पुष्टि करवाई। पड़ताल में पता चला कि ये वीडियो ख्याला इलाके में स्थित होटल चाँद की है। आमिर नाम का व्यक्ति वह होटल चलाता है।

डीसीपी ने बताया कि इस होटल में दो लड़के काम करते हैं- सबी अनवर और इब्राहिम। दोनों किशनगंज बिहार से आते हैं। सफेद बनियान में नजर आने वाला इब्राहिम है। वही वीडियो में रोटी पर थूकते भी दिख रहा है। दोनों के विरुद्ध आईपीसी की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। साथ ही होटल चलाने वाले के विरुद्ध भी एक्शन लिया गया है।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में थूक कर रोटी बनाए जाने की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। पकड़े गए आरोपित नौशाद ने खुलासा किया था कि वो पिछले 10-15 वर्षों से विभिन्न शादी समारोहों में इस तरह की हरकत कर रहा था। 

उसके बाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से रोटी बनाते समय तंदूर में थूक लगाने का वीडियो सामने आया था। पुलिस ने वीडियो की जाँच में आरोपित की पहचान मोहसिन के तौर पर की थी। बात बढ़ने पर वह मुरादनगर स्थित अपने घर से फरार हो गया था। हालाँकि बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

मुंबई के नए CP हेमंत नागराले की भी विवादों से यारी: टॉर्चर करने, अप्राकृतिक सेक्स और आय से अधिक संपत्ति जैसे लग चुके हैं आरोप

महाराष्ट्र में जब से महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी है, मुंबई पुलिस लगातार विवादों में है। एंटीलिया केस में सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए उससे राज्य सरकार और मुंबई पुलिस दोनों की जमकर किरकिरी हुई। डैमेज कंट्रोल के मकसद से परमबीर सिंह को हटा दिया गया। उनकी जगह हेमंत नागराले को मुंबई का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया।

पदभार सँभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए नागराले ने कहा था कि मुंबई पुलिस कठिन दौर से गुजर रही है। लेकिन, रिकॉर्ड बताते हैं कि परमबीर सिंह की तरह ही नागराले भी विवादित रहे हैं।

नागराले 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। मुंबई का पुलिस कमिश्नर बनाए जाने से पहले वे महानिदेशक (तकनीकी और कानूनी) थे। वे मूल रूप से महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती गाँव के रहने वाले हैं। विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। पहले इसे विश्वेश्वरैया रिजनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नागपुर के नाम से जाना जाता था। उन्होंने मुंबई के जमनलाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से मॉस्टर आफ फाइनेंस की पढ़ाई की है।

अकादमिक शिक्षा पूरी होने के बाद नागराले सिविल सेवाओं की परीक्षा में शामिल हुए और आईपीएस बने। 1998 में डेपुटेशन पर सीबीआई (CBI) में जाने से पहले पुलिस में विभिन्न भूमिकाओं का निवर्हन किया। वे सीबीआई में मार्च 1998 से सितंबर 2002 तक रहे।

सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई केस की तफ्तीश की। इनमें 130 करोड़ रुपए का बैंक ऑफ इंडिया केस, जिसमें केतन पारिख संलिप्त था और 1800 करोड़ रुपए का माधवपुरा को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम, जिसे हर्षद मेहता स्कैम के नाम से भी जाना जाता है, प्रमुख हैं। अपने लंबे करियर के दौरान नागराले को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल, विशेष सेवा पदक सहित कई पुरस्कार मिले हैं। वे जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में कई मेडल भी जीत चुके हैं।

26/11 हमलों के वक्त नागराले MSEDCL में डेपुटेशन पर थे। बचाव अभियान के जरिए बंधकों को सुरक्षित जगह पहुँचाना और घायलों को अस्पताल ले जाना उनकी जिम्मेदारी थी। रिपोर्टों के मुताबिक हमले के वक्त नागराले ताज होटल में दाखिल हुए थे और घायलों को बाहर लाए थे। इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने आरडीएक्स से भरा एक बैग भी बरामद किया था। उनके पूर्ववर्ती परमबीर सिंह सहित कुछ और अधिकारियों पर इसी दौरान लापरवाही बरतने के आरोप रहे हैं।

अब बात नागराले से जुड़े विवादों की। ऐसा ही एक मामला कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा है। इस संबंध में नागराले की पूर्व पत्नी प्रतिमा ने शिकायत की थी। 1990 में शादी करने के बाद दोनों का फरवरी 2009 में तलाक हो गया था। इसके बाद प्रतिमा ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर नागराले पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया।

प्रतिमा का आरोप था कि नागराले ने उनके नाम से तीन बैंक खाते खोल रखे हैं, जिससे बेनामी लेन-देन की गई। यह भी आरोप लगाया कि नागराले ने कई करोड़ की 12 संपत्ति राज्य के चार जिलों में उनके या अपने नाम से खरीदी है। बचाव में नागराले ने कहा था कि बदले की नीयत से शिकायत की गई है। उन्होंने कहा था कि संपत्ति और बैंक खाते की जानकारी प्रतिमा के इनकम टैक्स रिटर्न्स में है, लिहाजा इसे राज्य सरकार के सामने घोषित किए जाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी दलीलें खारिज करते हुए राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो से इस मामले की जाँच को कहा था।

इसके अलावा पत्नी ने नागराले पर शारीरिक और मानसिक यातना देने के भी आरोप लगाए गए थे। तलाक से पहले 2008 में प्रतिमा ने उनके खिलाफ शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर करने की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिमा के आरोपों के जवाब में नागराले ने कोर्ट को बताया था कि वह एक मानसिक अवसाद से पीड़ित है और इसकी वजह से उन पर झूठे आरोप लगा रही है।