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राजस्थान में हर दिन 16 रेप, लक्षद्वीप में 0; 94% मामलों में जान-पहचान के ही होते हैं बलात्कार आरोपित

हाथरस मामले के बाद महिला सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई मामले इस बीच अन्य प्रदेशों से भी सामने आए हैं। हालाँकि, देश में इस घृणित अपराध पर वास्तविक स्थिति क्या है? इसे बिना आँकड़ों के नहीं समझा जा सकता और न ही एक मामले से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कौन सी सरकार महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में सबसे ज्यादा विफल है।

हाल ही में राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) ने अपनी वेबसाइट ncrb.gov.in पर आँकड़ों सहित ‘भारत में अपराध’ शीर्षक के साथ रिपोर्ट जारी की है। इसमें महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराधों को राज्यवार कई श्रेणियों में बाँटा गया है।

आइए NCRB के आँकड़ों से समझने की कोशिश करें कि पिछले साल किन राज्यों में सबसे अधिक रेप की घटनाएँ हुईं। NCRB द्वारा जारी की गई सूची बताती है कि साल 2019 में भारत में रेप के 30,641 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें रेप पीड़िताओं की संख्या 30868 है। रिपोर्ट बताती है कि 94% केसों में पीड़िता के साथ बलात्कार करने के आरोपित उनके जान-पहचान के थे।

सूची के मुताबिक सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएँ राजस्थान में सामने आई थीं। वहाँ पिछले साल 5997 मामले दर्ज किए गए। यानी प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो प्रदेश में हर दिन 16 रेप की घटना हुईं। सूची, रेप पीड़िताओं की संख्या भी प्रदेश में 6051 बताती है। इतना ही नहीं प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध की दर 15.9 है।

वहीं हाथरस, बलरामपुर आदि मामलों के बाद से चर्चा में आ रहे उत्तर प्रदेश में 2019 में 3065 मामले दर्ज किए गए और पीड़िताओं की संख्या 3131 रही। यानी प्रतिदिन औसत वहाँ करीब 8 मामले रिकॉर्ड हुए। हालाँकि प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर यदि अपराध के आँकड़े देखें तो दर 2.8 है। साथ ही सूची में उत्तर प्रदेश का स्थान कुल 36 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में 24वाँ है।

तीसरे नंबर पर मध्यप्रदेश है। यहाँ कुल 2485 मामले रिकॉर्ड किए गए। पीड़िताओं की संख्या 2490 दर्ज की गई और प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से अपराध की दर 11.1 रही। प्रतिदिन औसत प्रदेश में 6.8 थी।

महाराष्ट्र 2299 रेप के मामलों के साथ चौथे नंबर पर आता है। यहाँ रेप पीड़िताओं की संख्या 2305 है। प्रतिदिन औसतन 6 रेप हुए और प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध का दर 3.9 रहा।

इसके बाद सूची के अनुसार केरल में 2023 मामले आए। इसी तरह असम में  1773, हरियाणा में 1480, झारखंड में 1416 और ओडिशा में 1382 मामले सामने आए। देश की राजधानी दिल्ली में 1253 रेप के मामले दर्ज किए गए। सिक्किम में यह संख्या 11, पुडुचेरी में 10, नागालैंड में 8 और दादर नगर हवेली तथा लक्षद्वीप में 0 मामले सामने आए।

हाथरस केस: CM योगी ने SP सहित क​ई अफसरों को किया सस्पेंड; पुलिस सहित सबका होगा नॉर्को और पॉलीग्राफ टेस्ट

हाथरस मामले में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर समेत कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। योगी सरकार ने यह कार्रवाई प्राथमिक जाँच के आधार पर की है।

एएनआई ने मुख्यमंत्री कार्यालय के हवाले से बताया है, “हाथरस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर समेत अन्य अधिकारियों को प्राथमिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।”

यह भी बताया गया है कि इस मामले से जुड़े कई लोगों का नॉर्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवाया जाएगा। इनमें शिकायतकर्ता, आरोपित और पुलिसकर्मी शामिल हैं।

गौरतलब है कि हाथरस मामले में लगातार योगी सरकार की मंशा को लेकर विपक्ष सवाल खड़ा कर रहा था। हालाँकि, इस कार्रवाई से पहले सीएम योगी ने पीड़ित परिवार के साथ अपनी संवेदना प्रकट करते हुए उनको 25 लाख रुपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस में बीते दिन के पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की है। जिला व पुलिस प्रशासन की भूमिका के बारे में पूरा ब्योरा माँगा गया है।

इस बीच हाथरस कांड पर सीएम योगी ने शुक्रवार ने ट्वीट करके कहा, “उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुँचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है। इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। यह हमारा संकल्प है-वचन है।”

गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस पीड़िता के दम तोड़ने के बाद से यह पूरा मामला गरमाया हुआ है। विपक्ष भी इस मौके का फायदा उठाकर अपनी राजनीति कर रहा है। कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत कई विरोधी दल इस केस को लेकर योगी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।

बता दें कि हाथरस मामले में मृतका के साथ कथित तौर पर दो हफ्ते पहले बलात्कार हुआ था। इसके बाद उसके साथ घटना के वक्त हुई मारपीट में कई गंभीर चोटें आई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। फिर उसके अंतिम संस्कार को लेकर यूपी पुलिस पर सवाल उठे। हालाँकि बाद में यह साफ किया गया कि दाह संस्कार के समय मृतका के पिता वहाँ मौजूद थे। 

उत्तर प्रदेश: राजकुमार बन आसिफ ने नेहा से की शादी, सच्चाई उजागर होने पर मारी गोली

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले की हिंदू लड़की नेहा की 25 सितंबर (शुक्रवार) को उसके पति आसिफ ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। नेहा की हत्या ने परिवार वालों को गहरे सदमे में छोड़ दिया है। छोटी बहन की मौत ने भाई को अंदर ही अंदर तोड़ दिया है। वहीं घर वालों के खिलाफ जा कर शादी करने की वजह से नाराज भाई ने कहा, “नेहा मेरे लिए उस दिन मर गई थी जब वह उस लड़के से शादी करने के लिए हमारी मर्जी के खिलाफ गई थी, देखो उसने (आसिफ) क्या किया, उसने उसे मार डाला।”

मृतक के भाई से मिलने वाले एक बजरंग दल के कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि नेहा का परिवार उसकी मौत से बेहद दुखी है। पूरा घर निराशा में डूब हुआ है। एक्टिविस्ट विवेक मिश्रा ने हमें बताया कि नेहा के भाई ने इस मामले में मीडिया से बात करने से भी इनकार कर दिया है। वह सिर्फ यही कहते हैं कि, “मैंने उसके साथ सभी संबंध तोड़ दिए थे, मैं उसके बारे में बात नहीं करना चाहता।” विवेक मिश्रा ने पुष्टि की कि नेहा के माता-पिता की मृत्यु बहुत पहले हो गई थी और उसके आशीष और राज दो भाई हैं।

कथित तौर पर यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना उत्तर प्रदेश में चल रहे लव जिहाद रैकेट से जुड़ा है। बदायूँ पुलिस ने 27 सितंबर (रविवार) को आरोपित आसिफ को गिरफ्तार किया था। उसके अगले ही दिन पुलिस ने उसके साथी तौफीक उर्फ ​​बबलू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

एसओ सुधाकर पांडे के मुताबिक, आसिफ ने अपने दोस्त तौफीक उर्फ ​​बबलू की हत्या की योजना बनाने में मदद ली थी। आसिफ ने अपना जुर्म कबूलते हुए बताया था कि अपनी पत्नी नेहा से छुटकारा पाने और साले को हत्या में फँसाने के लिए उसने यह षड्यंत्र रचा था।

गौरतलब है कि बदायूँ के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के निवासी आसिफ ने डेढ़ साल पहले दिल्ली में नेहा से मिला था। जहाँ वह काम करता था। उसने एक हिंदू के रूप में नेहा से अपना परिचय दिया था और अपना नाम राजकुमार बताया था। दोनों में प्यार हो गया और उन्होंने एक-दूसरे से शादी करने का फैसला किया। नेहा का भाई शादी के पक्ष में नहीं था, लेकिन नेहा ने अपने परिवार की इच्छाओं के खिलाफ आसिफ उर्फ ​​राजकुमार से शादी कर ली।

कुछ दिनों के बाद नेहा के सामने जब आसिफ की पहचान सामने आई तो दोनों के बीच विवाद होने लगे थे। इसके बाद आसिफ ने उसकी हत्या करने का मन बना लिया। इसके लिए बाकायदा उसने प्लानिंग भी की। प्लानिंग के तहत आसिफ पहले नेहा को अपने साथ बदायूँ ले गया और योजनानुसार मौका देखकर उसे गोली मार दी। नेहा को मौत के घाट उतारने के बाद उसे अस्पताल ले गया, जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस पूछताछ में उसने हत्या का पूरा आरोप नेहा के भाई पर लगा दिया। उसने पुलिस से कहा कि नेहा का भाई रवि उनकी शादी से खुश नहीं था, इसलिए उसने अपनी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में आए दिन लव जिहाद के मामले सामने आ रहे है। इसका मुख्य गढ़ कानपुर उभरकर सामने आया है। जहाँ लड़के हिंदू नाम रख कर भोली-भाली हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बनाते है और फिर जबरन उनसे इस्लाम धर्म कबूल करवाते है। पिछले 2 महीनों में हमने लगभग ऐसे 20 मामलों की रिपोर्ट की है।

कानपुर पुलिस ने इन मामलों की जाँच के लिए 8 सदस्यीय विशेष दल का भी गठन किया है। हाल ही में SIT को इन सब के पीछे पाकिस्तानी संगठन का भी पता चला है जो मुस्लिम लड़कों को लव जिहाद के लिए फंड देने में मदद करते है।

दलित महिला के यौन उत्पीड़न में सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खान पर मामला दर्ज, धर्म परिवर्तन के लिए डाल रहा था दबाव

उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष तनवीर खान समेत 4 अन्य लोगों को लूटपाट और दलित महिला के यौन शोषण के मामले में मामला दर्ज किया गया है। सपा नेता समेत अन्य पर यह मामला हिंदू युवा वाहिनी के प्रदर्शन के बाद दर्ज किया गया। संगठन ने पुलिस थाने और एसएसपी दफ्तर के बाहर धरना दिया था।

पीड़िता के भाई के अनुसार, खान ने उनकी बहन पर अपने एक 38 वर्षीय रिश्तेदार से जबरन शादी करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि इस मामले को आईपीसी की धारा 354, 379, 504, 506 के अलावा एससी/एसटी एक्ट की उपयुक्त धाराओं में दर्ज किया गया है। आरोपितों में दुर्गेश सक्सेना, कफील अहमद, वैशाली सक्सेना और तनवीर खान का नाम शामिल है।

गौरतलब है कि यह यौन उत्पीड़न का मामला उस समय सामने आया है जब विपक्ष लगातार हाथरस मामले पर राजनीति करने में लगा है। सपा नेता अखिलेश यादव भी अपनी राजनीति साधने के लिए इस पर लगातार बयान दे रहे हैं।

वह लगातार योगी सरकार और पुलिस प्रशासन की आलोचना करते हुए ट्वीट कर रहे हैं। उन्होंने हाल में उन सपा कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किए जाने पर भी अपना गुस्सा व्यक्त किया था, जो हाथरस में धारा 144 लागू होने के बावजूद गाँव की ओर आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने कुछ दिन पहले हाथरस घटना पर अपना दुख जताते हुए ट्वीट में कहा था कि असंवेदनशील सत्ता से अब कोई उम्मीद नहीं बची है।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ अखिलेश यादव लगातार हाथरस केस पर अपनी संवेदनशीलता प्रकट कर रहे हैं। वहीं तनवीर खान के मामले में उन्होंने अब तक कुछ नहीं कहा है। इन दोनों मामलों से ही अंदाजा लगा सकते हैं महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों पर अखिलेश यादव कितने चिंतित हैं। उनका यह दोहरा रवैया देखकर किसी को भी हैरानी होगी कि राजनैतिक जरूरतों के लिए कैसे कोई अपनी नैतिकता से समझौता कर लेता है।

बीजेपी MLA को उड़ाने की घटना में 33 माओवादी थे शामिल, NIA ने दाखिल की चार्जशीट; 6 गिरफ्तार-22 फरार

छत्तीसगढ़ में पिछले साल नक्सली हमले में मारे गए बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की हत्या के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के 33 कैडरों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। आईपीसी, यूएपीए, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की कई धाराओं के तहत जगदलपुर की एक विशेष एनआईए अदालत में आरोप-पत्र दायर किया गया।

एनआईए के प्रवक्ता के अनुसार, 33 में से छह आरोपित- मडका राम ताती, भीम राम ताती, लिंगे ताती, लक्ष्मण जायसवाल, रमेश कुमार कश्यप और हरिपाल सिंह चौहान छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा के रहने वाले हैं, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। 5 आरोपितों की मौत हो चुकी है। शेष 22 फरार हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपितों ने कथित रूप से नक्सलियों को आश्रय, भोजन, लॉजिस्टिक सहायता, बिजली के तार और स्टील के कंटेनर प्रदान किए थे।

पिछले साल अप्रैल 2019 में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के चार सुरक्षाकर्मियों के साथ भाजपा विधायक मांडवी की आईईडी विस्फोट में हत्या कर दी थी। इसके अलावा हमलावरों ने बलिदानी सीएएफ कर्मियों के हथियार और गोला-बारूद भी लूट लिए थे। इस घटना को लेकर एनआईए द्वारा 17 मई 2019 को मामला दर्ज किया गया था। लेकिन छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कानूनी मुद्दों के कारण 17 मार्च 2020 से पहले इसकी जाँच शुरू नहीं हो पाई थी।

एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, मंडावी की हत्या का फैसला दिसंबर 2018 में पश्चिम बस्तर में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) की स्तर की बैठक में लिया गया था। दूसरी बार DKSZC के सदस्य और दर्भा डिवीजन के प्रभारी गिरी रेड्डी की अध्यक्षता में दक्षिण बस्तर के गोदरदास वन क्षेत्र में फरवरी 2019 के अंत में आयोजित एक अन्य बैठक में मांडवी के साथ-साथ अन्य राजनीतिक नेताओं और पुलिसकर्मियों की हत्या का निर्णय लिया गया। यह साजिश चुनावों को बाधित करने के उद्देश्य से टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) के तहत रचा गया था।

दर्भा डिवीजन समिति के सचिव बड़ा देव को TCOC के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया था। श्यामगिरि गाँव में वार्षिक मेले के अवसर को हमले के लिए चुना गया था, क्योंकि माओवादी नेताओं को पता था कि कि प्रमुख राजनीतिक नेता इसमें भाग लेंगे।

सीपीआई (माओवादी) के कैडर ने श्यामगिरी गाँव के पास नकुलनार-बचेली मार्ग पर आईईडी लगाया। एनआईए अधिकारी के अनुसार, इस साजिश में उनके महासचिव नामबाला केशव राव सहित सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी थी।

‘कहीं मत जाना, अब प्रियंका गाँधी आएँगी’: हाथरस केस में कुछ और ऑडियो आए सामने, ₹25 लाख पर भी बात

हाथरस मामले में लीक हुई ऑडियो ने मीडिया और कई राजनेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर कोई इस केस के बहाने सिर्फ़ अपनी छवि चमकाने में जुटा है। इससे पहले हमने इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडे और मृतका के भाई संदीप के बीच बातचीत की लीक ऑडियो पर रिपोर्ट की थी। अब कुछ और ऑडियो सामने आए हैं।

इस ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है। वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएँ, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गाँधी उनके घर आने वाली हैं।

इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता है:

“अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है -वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

बातचीत की शुरुआत में ही संदीप इस व्यक्ति को कहता है कि एसआईटी उनके घर आई हुई और कोई ‘संजय भैया’, संदीप के पिता और दो अन्य लोग कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उनके पास बैठे हैं। फिर वह आदमी संदीप से कहता है, “ठीक है, कहीं मत जाना। अब प्रियंका गाँधी आएँगी और उन्हें बताना कि तुम पर दबाव बनाया गया है और तुम इसका वीडियो बनाना चाहते हो।”

इस मामले में एक अन्य बातचीत की रिकॉर्डिंग भी इस बीच सामने आई है। यह ऑडियो किसी ग्रामीण महिला और संदीप के बीच की है। इसमें मृतका के भाई को समझाया जा रहा है कि वह 25 लाख रुपए के मुआवजे पर किसी कीमत पर फैसला न करे और 50 लाख तक के मुआवजे पर निष्कर्ष तक पहुँचे। ऑडियो में सुना जा सकता है कि महिला कहती है कि कुछ राजनेता इस मामले में फैसला न करने के लिए कह रहे हैं। बातचीत के दौरान किसी ‘राहुल’, मनीष सिसोदिया और बरखा दत्त का नाम भी सामने आता है।

गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस पीड़िता के दम तोड़ने के बाद से यह पूरा मामला गरमाया हुआ है। दरअसल, मृतका के साथ कथित तौर पर दो हफ्ते पहले बलात्कार हुआ था। इसके बाद उसके साथ घटना के वक्त हुई मारपीट में कई गंभीर चोटें आई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। फिर उसके अंतिम संस्कार को लेकर यूपी पुलिस पर सवाल उठे। हालाँकि बाद में यह साफ किया गया कि दाह संस्कार के समय मृतका के पिता वहाँ मौजूद थे। 

एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि जिन फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, वे भी प्राप्त हो गई हैं। एडीजी ने कहा था कि एफएसएल रिपोर्ट में ‘बलात्कार’ का कोई सबूत नहीं मिला। उन्होंने निष्कर्ष पर बात करते हुए कहा था मृतका पर कोई यौन हमला नहीं हुआ था, और मौत का कारण गला घोंटने और रीढ़ की चोट थी।

बता दें कि एक ओर जहाँ पूरा देश इस मामले पर इंसाफ की गुहार लगा रहा है, वहीं इस केस में अब भी कई पहलुओं से राज उठना बाकी है। मगर कुछ राजनेता इस केस के जरिए अपनी राजनीति करने में जुटे हैं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर भी मुख्यधारा मीडिया अपना अजेंडा चलाने के लिए कई झूठ फैला रहा है। एसआईटी को पूरे मामले की जाँच भी सौंप दी गई है।

केरल मॉडल पर किताब लिखने वाले ध्रुव राठी और चालीसा पढ़ने वाले रवीश अब क्या कहेंगे जब 144 लग गया है?

सोशल मीडिया के हर कोने में एक ऐसी पढ़ी-लिखी लिबरल जमात मौजूद है जो नतीजों के पहले दावे ठोंक देती है। जिन दावों में न तो तथ्य और होते हैं और न ही तर्क। सिर्फ समझ होती है जिसका दायरा जनता की कल्पना से कहीं ज़्यादा है। यहाँ तक कि कोरोना वायरस जैसे गंभीर मुद्दे भी इन लिबरल्स की लिबिर-लिबिर से अछूते नहीं रहे हैं।

ध्रुव राठी और रवीश कुमार के दावों का पुलिंदा हमेशा भारी रहता है। कोरोना पर भी यही दिखा। सिर्फ इन्हीं दोनों ने नहीं, स्वीडन के महामारी विशेषज्ञ (epidemiologist) एंडर्स टेंगेल ने भी कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को लेकर कुछ विचित्र दावे किए थे। 

यूट्यूब के स्वघोषित ‘हर विषय के विशेषज्ञ’ ध्रुव लाठी (सॉरी राठी) ने केरल में कोरोना वायरस के हालात को लेकर एक वीडियो बनाया था। 14 मई 2020 को साझा किए गए इस वीडियो में 13 मिनट तक केरल की तारीफों के पुल बाँधे और उसी पुल पर खुद ही दौड़ भी लगाई। इसे वीडियो का शीर्षक था- How Kerala defeated Coronavirus। यानी कैसे केरल ने कोरोना वायरस को हराया? राठी जैसे सार्वभौमिक जानकार इतने पर ही थमे नहीं और केरल के कोरोना वायरस मॉडल पर एक किताब तक लिख डाली। 

इस अतुलनीय पुस्तक का शीर्षक भी वही था जो ऊपर अंग्रेज़ी भाषा में लिखा है। लेकिन यह बात 5 महीने पुरानी हैं। केरल में अभी के हालात पूरी तरह अलग हैं। कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए राज्य में धारा 144 लगा दी गई है। गुरुवार को केरल में 8135 मरीज सामने आए और इसके साथ वहाँ कुल मरीजों की संख्या लगभग 2 लाख हो चुकी है। मुख्यमंत्री पी. विजयन ने खुद इस बात की जानकारी दी है कि वहाँ स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन इस तरह के तमाम तथ्यों और तर्कों के इतर ध्रुव लाठी (सॉरी राठी) ने पहले ही किताब लिख दी थी। 

पत्रकारों के तथाकथित महानायक राजा रबिश कुमार (सॉरी रवीश) ने भी केरल की प्रशंसा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। भले-मानुष का कहना था कि केरल ने ऐसा मॉडल पेश किया है, जिससे देश के अन्य राज्यों को ही नहीं, बल्कि दुनिया को भी सीखने की ज़रूरत है। रवीश कुमार केरल के कोरोना वायरस मॉडल पर इतने भावुक हुए कि आधे घंटे तक उस पर बकते रहे, बिना यह सोचे कि आने वाले समय में उनका आकलन और उनके दावे किस कदर फुर्र हो जाएँगे।

रवीश कुमार का अनुमान केवल केरल तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने न्यूज़ीलैंड और स्वीडन को लेकर भी दावे किए थे। उनके मुताबिक़ दुनिया के हर देश को इन दो देशों से सीखना चाहिए, लेकिन कुछ ही समय में हालात बदल गए। एक बार फिर रवीश कुमार की बातें ‘बकैती मात्र’ सिद्ध हुई। जैसे ही उन्होंने न्यूज़ीलैंड पर प्राइम टाइम किया उसके बाद से अब तक न्यूज़ीलैंड को 2 बार लॉकडाउन करना पड़ा है। स्वीडन ने भी शुरुआत में लॉकडाउन को लेकर गंभीर रवैया न रखने को लेकर आगामी महीनों में महँगी कीमत चुकाई।  

वैसे भी स्वीडन की आबादी सिर्फ 1.2 करोड़ है। उसकी तुलना कई गुना ज्यादा आबादी वाले भारत से करना यह बताता कि रिपोर्ट रचयिता किस कदर एजेंडाग्रस्त है। स्वीडन ही नहीं बल्कि न्यूज़ीलैंड की ही बात करें तो दोनों देशों के बुनियादी ढाँचे में ज़मीन-आसमान का फर्क है। आम जनता से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक और नीतियों से लेकर अर्थव्यवस्था तक, भारत और न्यूज़ीलैंड के हालातों में तुलना के आधार खोजने पर भी नहीं मिलते हैं।

व्यावहारिकता को ज़रा भी समझने वाला व्यक्ति ऐसी कल्पना करने से हज़ार दफा सोचेगा। लेकिन रवीश कुमार कई पुरस्कार जीत चुके हैं। उनकी बात अलग है इसलिए उनके दावे आसमान से गिरते हैं, जिसे उनके प्रशंसक दौड़ कर कैच कर लेते हैं।

स्वीडन के महामारी विशेषज्ञ (epidemiologist) एंडर्स टेंगेल ने भी इतने संवेदनशील मुद्दे पर अपने अद्भुत तर्कशास्त्र का प्रदर्शन किया था। जब कोरोना वायरस से भय के चलते दुनिया के तमाम देशों ने लॉकडाउन का फैसला लिया तब उन्होंने एक बयान दिया था। अपने बयान में उन्होंने कहा था, “हालात देख कर ऐसा लगता है कि दुनिया पागल हो चुकी है और हमने जितने मुद्दों पर बात की थी वह सब कुछ भुलाया जा चुका है।” एंडर्स के मुताबिक़ दुनिया के जितने देशों ने लॉकडाउन लागू किया है वह सब के सब पगला चुके हैं। एंडर्स यहीं नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने कहा कि जैसे दवाओं के साइडइफेक्ट्स होते हैं, वैसे ही लॉकडाउन के भी नकारात्मक परिणाम होंगे।

कुछ समय बाद जब स्वीडन में हालात बदतर हुए तब उन्हें अपने दावे में गंभीरता का स्तर नज़र आ गया (थी ही नहीं तो नज़र कैसे आती)। तब उन्होंने कहा कि स्वीडन को कोरोना वायरस का सामना दूसरी रणनीतियों के आधार पर करना था। उन्होंने स्वीकार किया कि देश में बहुत से लोगों की मौत हुई है और इससे पता लगता है, स्वीडन कोरोना वायरस से लड़ाई में सफल साबित नहीं हुआ।

यह तो कुछ नाम हैं, ऐसे कई और नाम हैं जिन्होंने जज्बातों में आकर दावों का लंबा बिल फाड़ा था और अंत में गाल बजाते मिले। बुद्धिजीवियों के साथ यह समस्या हमेशा से रही है और न जाने कब तक रहेगी, उन्हें अपने दावे परम सत्य लगते हैं, लेकिन जनता ऐसी बातों को सुनती और पेट पकड़कर हँसती है।

गोवा का स्पेशल विला: शूटिंग के नाम पर बुकिंग, बॉलीवुड स्टार करते हैं डिटॉक्स ताकि ड्रग्स का पता न चले

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच शुरू होने के बाद बॉलीवुड का जो ड्रग्स कनेक्शन सामने आया है उसके तार अब गोवा से भी जुड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बॉलीवुड के कई ए ग्रेड सितारे गोवा डिटॉक्स के लिए जाते हैं, ताकि जाँच होने पर ड्रग्स सेवन का पता नहीं चले।

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बॉलीवुड स्टार्स शूटिंग या छुट्टियों के नाम पर गोवा में स्पेशल विला बुक करते हैं। लेकिन असल में वहाँ वे डिटॉक्स करते हैं। रिपब्लिक टीवी को ऐसे ही एक ‘स्पेशल विला’ के केयरटेकर ने बताया, “सेलिब्रिटीज एजेंट के साथ आते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ये सुरक्षित रहेगा और उन्हें ज्यादा पर्सनल स्पेस मिलेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले बॉलीवुड इनसाइडर के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दीपिका पादुकोण बॉडी डिटॉक्स करने गोवा गईं थी। इस इनसाइडर ने रिपब्लिक टीवी से कहा था, “मैं कुछ दिन पहले गोवा में पार्टी में थी। मुझे पता चला कि दीपिका भी वहाँ पहुँची है और उसे एक होटल में क्वारंटाइन के लिए ले जाया गया। मेरे एक करीबी दोस्त ने बाद में खुलासा किया कि अभिनेत्री होटल में वास्तव में ‘बॉडी डिटॉक्स’ कर रही थी।”

साथ ही इनसाइडर यह भी कहा था कि बांद्रा में रहने वाले एक ‘बड़े’ निर्देशक और निर्माता अक्सर इन ड्रग पार्टियों के आयोजन के लिए अपना मुंबई विला देते हैं। राजनेता भी इन पार्टियों में शामिल होते हैं और वहाँ ड्रग्स सप्लाइ के लिए एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

गौरतलब है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ड्र्रग्स से जुड़े मामले में दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह जैसी अभिनेत्रियों से पूछताछ कर चुकी हैं। रिया चकवर्ती सहित कई गिरफ्तार भी किए गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बॉलीवुड के कई बड़े अभिनेता भी एजेंसी की रडार पर हैं।

दूसरी ओर, अब करणी सेना के नेता सुरजीत सिंह राठौर ने भी मौत से एक दिन पहले सुशांत और रिया के साथ होने का दावा किया है। सुरजीत ने कहा, “जब मैं 15 जून को कूपर अस्पताल गया था, तो सूरज सिंह ने मुझे बताया था कि रिया चक्रवर्ती 13 जून की रात सुशांत के आवास पर थी और शायद किसी लड़ाई की वजह से तभी चली गई थी। सूरज सिंह सब कुछ कोऑर्डिनेट कर रहे थे और उन्होंने रिया को बुलाया था और मुझे उनसे और संदीप से मिलवाया था। मैं उनमें से किसी को भी नहीं जानता।”

इससे पहले मुंबई बीजेपी के महासचिव विवेकानंद गुप्ता ने रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था, “13 जून की देर रात को एक पार्टी के बाद सुशांत रिया को छोड़ने उनके अपार्टमेंट में आए थे। इसकी जानकारी उन्हें एक चश्मदीद ने दी है।” उन्होंने चश्मदीद की बातों का जिक्र करते हुए बताया 13 और 14 की दरम्यानी रात की यह घटना है। सुशांत सिंह राजपूत रात के 2 या 3 बजे के आसपास रिया को छोड़ने उसके फ्लैट तक गए थे। फिर 14 की सुबह वे मृत मिले। इसलिए यह कहना कि 8 जून को छोड़ दिया था, यह गुमराह करने की बात है क्योंकि चश्मदीद ने उन्हें साथ में देखा है।”

हाथरस के राजनीतिक अखाड़े में राहुल की तरह TMC नेता भी जमीन पर सुरक्षित लुढ़कते हुए आए नजर, लगाया- धक्का मुक्की का आरोप

हाथरस मामले में राजनीति तेज हो चुकी है। ज्यादातर विपक्षी इस मामले में अपनी राजनीति को चमकाने के लिए कूद रहे है। जहाँ एक तरफ धारा 144 लागू होने के बावजूद राहुल गाँधी जबरदस्ती कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के काफिले के साथ पीड़िता के परिवार से मिलने निकले, और इस कवायद में वह गिर भी गए। वहीं इस घटना के एक दिन बाद टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने भी राहुल की हरकतों को अपने अंदाज में दोहराया।

दरअसल, डेरेक भी आज मृतक हाथरस पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए जा रहे थे। जिस दौरान पुलिस ने उन्हें जब आगे बढ़ने से रोका तो वह खुद ही गिरते नजर आए।

सोशल मीडिया पर इस वक़्त 29 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे न्यूज़ एजेंसी एएनआइ द्वारा साझा किया गया है। इस वायरल वीडियो में आप देख सकते है कि किस तरह टीएमसी महिला नेता और अधिकारी के बीच हो रही बहस में डेरेक ओ ब्रायन महिला को हटाते हुए बीच में खुद घुसते है और अधिकारियों से बहस करते-करते खुद ही लुढ़कते-लुढ़कते गिर जाते है।

गौरतलब है कि धारा 144 अभी भी लागू होने के बावजूद, राहुल और प्रियंका गाँधी से प्रेरणा लेते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में शुक्रवार को हाथरस पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे जिस दौरान उन्हें यूपी पुलिस द्वारा रोका गया।

इस मामले में ANI ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक अन्य TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार के हवाले से कहा, “उन्हें जमीन पर धकेल दिया गया। शायद वह घायल भी है। उन पर हमला किया गया। वे यह कैसे कर सकते हैं?”

टीएमसी ने अपने बयान में कहा, “दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की यात्रा करने वाले तृणमूल सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को उप्र पुलिस ने हाथरस में प्रवेश करने से रोक दिया है।” टीएमसी ने बयान में आगे कहा, “वे पीड़िता के परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त करने और अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए अलग-अलग यात्रा कर रहे थे। इस समय हम हाथरस में पीड़िता के घर से सिर्फ 1.5 किलोमीटर दूर हैं।”

उल्लेखनीय है कि इसी तरह कल कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भी गिरते हुए नजर आए थे। वायरल वीडियो में यह साफतौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह अपने आप ही राहुल गाँधी पलटते हुए नीचे गिरते है, जिसके बाद वहाँ मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें उठाते हुए नजर आते है।

हालाँकि, राहुल गाँधी के वायरल वीडियो को देखते वक्त ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह सुरक्षित जगह देखने के बाद घास के ऊपर खुद ही गिर गए थे। वहीं इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी उनके जमकर मजे लिए। यहाँ तक कि राहुल गाँधी को लेकर तरह- तरह के मिम्स भी कल से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है।

हाथरस केस: इंडिया टुडे की पत्रकार का लम्बा ऑडियो लीक, पीड़िता के भाई से कहलवाना चाहती है ‘प्रशासन डाल रही दबाव’

हाथरस की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हालाँकि इस मामले में अब भी कई पहलुओं से राज उठना बाकी है। मगर कुछ राजनेता इस केस के जरिए अपनी राजनीति करने में जुटे हैं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर भी मुख्यधारा मीडिया अपना अजेंडा चलाने के लिए कई झूठ फैला रहा है और इसी बीच एसआईटी को पूरे मामले की जाँच भी सौंप दी गई हैं।

अब, ताजा जानकारी के अनुसार, इंडिया टुडे की पत्रकार और मृतका के भाई की फोन पर बातचीत वायरल हुई है। इस ऑडियो को ऑपइंडिया ने भी एक्सेस किया। इसमें सुना जा रहा है कि इंडिया टुडे पत्रकार तनुश्री मृतका के भाई संदीप को ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही हैं, जिसमें लड़की के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

बातचीत को सुनकर यह साफ पता चलता है कि तनुश्री पीड़िता के भाई से एक निश्चित बयान दिलवाने का प्रयास कर रही हैं और संदीप की दबी आवाज सुनकर लग रहा है जैसे वह ऐसा नहीं करना चाहते। संदीप इस ऑडियो में पहले दबाव की बात कहते हैं। मगर बाद में कहते हैं कि उनके पिता इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि उन पर दबाव बनाया गया या नहीं।

इसके बाद तनुश्री, संदीप से कहती हैं कि उसे कहीं से पता चला है कि परिवार पर ही बहन की मौत का इल्जाम लगाने का प्रयास किया जा रहा है। ये इस बातचीत का ऐसा हिस्सा है जिसे सुन कर लगता है कि ये सवाल खुद ही गढ़े गए, क्योंकि अभी तक कहीं भी मीडिया में ऐसी बात निकल कर सामने नहीं आई है। इससे पता चलता है कि पॉलिटिकल अजेंडा चलाने के लिए कैसे परिवार की स्थिति का फायदा उठाया गया।

कुल मिलाकर इस बातचीत का मकसद सिर्फ़ मृतका के पिता का वीडियो निकलवाना था, जिसमें पिता किसी भी तरह बस यही बोल दें कि उनपर दबाव बनवाकर बयान दिलवाया गया कि वह संतुष्ट हैं।

उन्हें ऑडियो में कहते सुना जा सकता है, “संदीप, प्लीज मेरे लिए एक चीज कर दो। मैं तुमसे वादा करती हूँ कि जब तक तुम्हारे परिवार को इंसाफ नहीं मिल जाता मैं यहाँ से हिलूँगी भी नहीं… संदीप एक वीडियो अपने पिता की बनाओ जिसमें वो कहें- हाँ, मुझ पर ऐसा बयान जारी करने का बहुत प्रेशर था कि मैं संतुष्ट हूँ। मैं जाँच चाहता हूँ क्योंकि हमारी बेटी मरी है और हमें न उसे देखने का मौका मिला और न उसके अंतिम संस्कार का।”

वे आगे कहती हैं, ”सिर्फ 5 मिनट लगेंगे। जल्दी से वीडियो बनाओ और सिर्फ़ मुझे भेज दो।” इस बातचीत में तनुश्री बार-बार संदीप को एसआईटी के ख़िलाफ़ भड़काती है। मगर, लड़की का भाई कहता है कि जाँच टीम सिर्फ़ उसे जरूरी सवाल कर रही थी और फिर वह चली गई।

पूरी बातचीत को सुनिए। मृतका का भाई वीडियो बनाने में अनिच्छुक नजर आता है और हिचकिचाता है। मगर तनुश्री उसे यह कहकर समझाती हैं कि वो भी उनकी बहन हैं।

इस मामले में एक अन्य ऑडियो भी सामने आई है। यह ग्रामीणों और संदीप के बीच की है। इसमें मृतका के भाई को सलाह दी जाती है कि उसे 25 लाख रुपए नहीं स्वीकारने चाहिए। इस बातचीत में महिला का कहना है कि कुछ राजनेता कह रहे हैं कि ‘फैसला’ नहीं होना चाहिए। बता दें कि इस बातचीत में, किसी राहुल, मनीष सिसोदिया और बरखा दत्त का नाम भी आता है।

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब तनुश्री का नाम ऐसे किसी मामले में सामने आया हो। सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान, उन्होंने जेएनयू में एक वामपंथी छात्र के साथ कान में फुसफुसाकर बातचीत करते देखा गया था। उस वीडियो को देखककर ऐसा लग रहा था जैसे वह उसे कैमरे पर बोलने की कोचिंग दे रही हैं। वीडियो में, पत्रकार को स्पष्ट रूप से छात्र से चर्चा करते देखा गया था। हालाँकि फुसफुसाने के कारण उनकी बात कैमरे व माइक में सुनाई नहीं पड़ी थी।

बता दें कि हाथरस मामले से जुड़े ऑडियो को लेकर हमने तनुश्री से बात करने की कोशिश की। मगर उनका जवाब आना अभी बाकी है।