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हाथरस ‘गैंगरेप’ में लिबरल गिरोह ‘जाति’ क्यों ढूँढ रहा है? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras ‘gangrape’ case

हाथरस से बहुत दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि लड़की के साथ गैंगरेप हुआ, जीभ काट दी गई, आँखें निकाल दी गई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई। हालाँकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया। इस बीच मौकापरस्त पत्रकार और नेता मामले को स्पिन देते हुए आरोपित की ‘जाति’ निकाल कर सामने ला रहे हैं कि वो उच्च जाति का होने की वजह से पुलिस ने रेप से इनकार किया। 

लड़की को छेड़ना भी जघन्य अपराध की श्रेणी में आना चाहिए। दुर्भाग्य से हम ऐसे समाज में रह रहे हैं, जहाँ ये घटनाएँ काफी आम हो चुकी है और कई बार फैसला आरोपितों के पक्ष में जाता है या फिर उसके खिलाफ साक्ष्य नहीं होते हैं। सजा बहुत कम केस में मिलती है। इन सबके कारण ऐसा होने लगा है कि जब तक पीड़िता के साथ भयावह क्रूरता न हो, हमारी संवेदना नहीं जगती।

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1959 के एकतरफा तरीके से परिभाषित LAC कभी स्वीकार नहीं: भारत ने चीन को दिया दो टूक जवाब

लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर गतिरोध बरकरार है। चीन ने एक बार फिर एलएसी के मसले पर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। लेकिन भारत ने पलटवार करते हुए चीन से सख्त अंदाज में कह दिया है कि बार-बार भटकाने की मंशा सफल नहीं होगी।

दरअसल, चीन एक बार फिर एलएसी को तय करने में 1959 के एकतरफा समझौते का हवाला दे रहा है, लेकिन भारत ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार (सितंबर 29, 2020) को भारत-चीन सीमा विवाद के मुद्दे पर कहा, “हमने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की स्थिति पर चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के हवाले से एक रिपोर्ट देखी है। भारत ने तथाकथित एकतरफा परिभाषित 1959 एलएसी को कभी स्वीकार नहीं किया। स्थिति आज भी वही, यह अच्छी तरह से सबको पता है, चीन के लोगों को भी।”

विदेश मंत्रालय की तरफ कहा गया है, “1993 के बाद ऐसे कई समझौते हुए जिसका मकसद अंतिम समझौते तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बनाए रखना था। 1996 में सैन्य क्षेत्र में विश्वास निर्माण उपायों (सीबीएम) पर समझौते, सीबीएम के कार्यान्वयन पर प्रोटोकॉल सहित विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के तहत 2005 भारत-चीन सीमा प्रश्न के निपटारे के लिए राजनीतिक पैरामीटर और मार्गदर्शक सिद्धांत पर समझौता, भारत और चीन दोनों ने एलएसी के संरेखण की एक आम समझ तक पहुँचने के लिए एलएसी के स्पष्टीकरण और पुष्टि के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “दोनों पक्ष 2003 तक एलएसी को स्पष्ट करने और पुष्टि करने की कवायद में लगे थे, लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि चीन ने इच्छा नहीं दिखाई। इसलिए, अब चीन इस बात पर अड़ा है कि केवल एक एलएसी उनके द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के विपरीत है। हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष पूरी ईमानदारी और विश्वासपूर्वक सभी समझौतों और समझ का पालन करेगा और एलएसी की एकतरफा व्याख्या को आगे बढ़ाने से बचना चाहिए।”

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी 1959 में चीन की ओर से एलएसी की एकतरफा दी गई परिभाषा को स्वीकार नहीं किया। 1993, 1996 और 2005 में चीन के साथ दो पक्षीय बातचीत में सहमति बनी थी कि एलएससी पर दोनों देशों के बीच जिन बिंदुओं पर गतिरोध है उसे बातचीत के रास्ते सुलझाते रहेंगे और किसी तरह की एकतरफा कार्रवाई से बचेंगे। भारत ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में चीन का इस तरह का बयान आपत्तिजनक है और दोनों देशों के बीच आपसी सहमति का घोर उल्लंघन भी है।

बता दें कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि भारत ने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की स्‍थापना अवैध तरीके से की है। वे इतने पर ही नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा कि भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हम 7 नवंबर 1959 को बताई गई सीमा को एलएसी मानते हैं।

‘उसे अल्लाह ने चुना था’: शार्ली एब्दो के पूर्व कार्यालय के बाहर हमला करने वाले आतंकी को PAK ने बनाया हीरो, जताई खुशी

फ्रांस की व्यंग्य मैग्जीन ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने दफ्तर के बाहर शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को 4 लोगों पर चाकू से हमला हुआ था। यह हमला पाकिस्तानी ‘आतंकी’ अली हसन उर्फ जहीर हसन महमूद ने किया था। इस हमले में 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पड़ताल में मालूम चला था कि हमलावर हसन पंजाब प्रांत के मंदी बहाउद्दीन का रहने वाला है। जिसकी गिरफ्तारी पेरिस पुलिस कर चुकी है।

इस खबर के सोशल मीडिया पर आने के बाद से पाकिस्तान के कई अकॉउंट्स और यूट्यूब चैनल्स के जरिए हसन को सराहा जा रहा है। साथ ही उसे हीरो की तरह पेश करने की कोशिश चल रही है। पाकिस्तान का ‘नया पाकिस्तान’ नामक चैनल ने इस घटना पर आतंकी की एक वीडियो शेयर की है।

इस वीडियो में कट्टरपंथी की बात सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह पैगंबर पर दोबारा कार्टून प्रकाशित की जाने वाली बात से नाराज था। वह वीडियो में कहता है, “अगर मैं भावुक लग रहा हूँ, तो मैं समझाता हूँ। यहाँ फ्रांस में पैगंबर का कैरिकेचर बनाए जा रहे हैं। इसलिए आज सितंबर 25 को मैं इसका विरोध करने जा रहा हूँ। “

आगे चैनल की वीडियो में देख सकते हैं कि उनका रिपोर्टर आतंकी के पिता को मुबारकबाद देते हुए कहता है कि उनके बेटे यानी जहीर से अल्लाह ने बहुत बड़ा काम लिया है। इसके अलावा आतंकी के परिवार को भी पूरे हमले पर गर्व करते देखा जा सकता है।

चैनल से बात करते हुए हसन के पिता इस हमले को बहादुरी का कारनामा कहते हैं। वह बताते हैं, “मुझे सुनकर बहुत अच्छा लगा। पैगंबर का सम्मान बचाने के लिए मैं अपनी जिंदगी और अपने पाँचों बेटों की कुर्बानी देने को तैयार हूँ।”

आगे वीडियो में चैनल के रिपोर्टर को आतंकी के पिता को हिम्मत देते देखा जा सकता है। वह उन्हें हौसला देते हुए कहता है कि आज उनके बेटे पर यानी उस पाकिस्तानी आतंकी पर पूरे पाकिस्तान को गर्व है। इस पर हसन के अब्बू कहते हैं, “मेरे बेटे का कलेजा फौलाद का है।”

आतंकी की अम्मी भी अपने बेटे के अपराध को जायज ठहराती है। इस बातचीत से यह भी पता चलता है कि हसन सुन्नी उलेमा इलियास कादरी से प्रेरित था और 5 बार नमाज भी पढ़ता था। पिता कहता है कि आतंकी हसन ने उन लोगों को हमले से पहले कॉल किया था और कहा था कि पैगंबर के काम के लिए उसे चुना गया है।

वीडियो में आतंकी के अपराध को सही बताने के लिए उसके पिता कुछ अन्य लोगों के साथ मिल कर नारे लगाते हुए कहते हैं, “रसूल के गुलाम हैं और गुलामिया रसूल में मौत भी कबूल है।”

गौरतलब है कि साल 2015 के बाद 25 सितंबर 2020 को फ्रांस के रिचर्ड लेनोरो मेट्रो स्टेशन के पास घटी घटना को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। एक यूजर लिखता है, “अल्हमदुल्लिाह, पंजाब प्रांत के मंडी बहाउद्दीन का एक युवक जहीर हसन महमूद ने ईशनिंदा करने वाले कुत्तों के दफ्तर के सामने 4 लोगों को मारकर घायल किया।” इसके बाद वह ऐसे लोगों का सिर धड़ से अलग करने की बात भी कहता है।

एक पाकिस्तानी इस आतंकी हमले पर आतंकवादी को बधाई देता है। साथ ही कहता है कि इसे ही इमानी जज्बा कहा जाता है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शार्ली एब्दो मैग्जीन के दफ्तर पर साल 2015 में हमला हुआ था। यह हमला पैगंबर का एक कार्टून छापने के कारण हुआ था। इस घटना के करीब 5 साल बाद मैग्जीन ने दोबारा उस कार्टून को हाल में पब्लिश करने का फैसला किया, जिसके कारण विश्व भर के मुस्लिमों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया और कई जगहों से हिंसा की घटना भी सामने आई।

LAC पर चीन के साथ टकराव के बीच अमेरिका से खरीदे जाएँगे 30 गार्जियन ड्रोन: ₹22,000 करोड़ होगी कीमत

चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव के बीच भारत बड़ा फैसला लिया है। चीनी ड्रोन सिस्टम को टक्कर देने के लिए भारत ने अपने ड्रोन सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए तीन बड़े फैसले लिए गए हैं। दरअसल, अब भारत को लगने लगा है कि निगरानी वाले सी गार्जियन ड्रोन की जगह पास में हथियारबंद ड्रोन होने चाहिए।

अब भारत मिसाइल लेकर उड़नेवाले ड्रोन के लिए अमेरिका से बात करेगा। वहीं इजरायल से लिए गए ड्रोन सिस्टम को अपग्रेड करवाया जाएगा। इतना ही नहीं डीआरडीओ भी ड्रोन बनाने की शुरुआत करेगा। दरअसल, भारत को ऐसा लगा कि चीनी ड्रोन सिस्टम को टक्कर देने के लिए अपने ड्रोन सिस्टम में ये बदलाव जरूरी हैं।

भारत, अमेरिका से 30 MQ-9B गार्जियन ड्रोन खरीदेगा। जल्‍द ही इस ड्रोन से जुड़ा खरीद प्रस्‍ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा खरीद परिषद में पेश किया जाने वाला है। बताया जा रहा है कॉन्ट्रैक्‍ट साइन होने के कुछ समय के अंदर ही छ: ड्रोन भारत को मिल जाएँगे। यह 2.5 टन तक के हथियार लेकर 40 हजार फीट तक उड़ सकता है। इसमें चाहे तो एयर-टु-एयर मिसाइल या लेजर गाइडेड बम भी रखे जा सकते हैं।

करीब 30 बिलियन यानी करीब 22,000 करोड़ की लागत से यह डील होने वाली है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय में हुई कई मीटिंग्‍स के बाद छ: मध्‍यम ऊँचाई वाले ड्रोन की खरीद को मंजूरी मिली है। शुरुआत में जो छ: ड्रोन भारत को मिलेंगे उनमें से दो थलसेना, दो वायुसेना और दो नौसेना के लिए होंगे। इसलिए इनकी खरीद को प्राथमिकता दी जा रही है। इस तरफ इशारा भी मिला है कि इन ड्रोन की खरीद की लिए इमरजेंसी जताई गई है। 

6 ड्रोन की कीमत 600 मिलियन डॉलर यानी 4,400 करोड़ रुपए होगी। अगले कुछ माह में ये ड्रोन भारत को मिल जाएँगे। बाकी बचे 24 में से आठ ड्रोन अगले तीन सालों तक भारत को मिलेंगे। यह डील पिछले तीन सालों से अटकी है। साल 2017 में 22 सी गार्डियन की डील हुई थी। इसके बाद इसे साल 2018 में तीनों सेनाओं के लिए ड्रोन खरीद डील में बदल दिया गया।

दूसरी तरफ भारत इजरायल से बात करेगा। दरअसल, भारत ने इजरायल से मध्यम ऊंचाई वाले Heron ड्रोन खरीदे थे। भारत चाहता है कि अब इजरायल इन्हें अपग्रेड करके इनसे कम्यूनिकेशन के लिए सेटलाइट लिंक्स जोड़े। इससे हाथ के हाथ जानकारी मिलती रहेंगी। इतना ही नहीं भारत का डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) भी मध्यम रेंज वाले ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम पर काम करेगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों खबर आई कि भारत की तरफ से चीन की किसी भी गुस्‍ताखी का जवाब देने के लिए ब्रह्मोस और निर्भय क्रूज मिसाइल के अलावा जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को भी तैनात कर दिया है। 

इससे पहले खबर आई थी कि भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लद्दाख के चुमार-डेमचोक क्षेत्र में टैंक और बख्तरबंद वाहनों को तैनात किया है। सेना ने BMP-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ T-90 और T-72 टैंकों की तैनाती की है। अंधेरे में मार करने में सक्षम इन टैंकों की खासियत यह है कि इन्हें माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में संचालित किया जा सकता है।

हाथरस ‘गैंगरेप’ पीड़िता ने तोड़ा दम: पुलिस ने सोशल मीडिया पर आँख फोड़ने, जीभ काटने का किया खंडन

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही 19 वर्षीय हाथरस सामूहिक बलात्कार पीड़िता ने मंगलवार (सितंबर 29, 2020) सुबह गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया। उसे एक दिन पहले अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से दिल्ली रेफर किया गया था।

घटना के बारे में बात करते हुए पीड़ित परिवार ने माँग की है कि आरोपितों को मृत्युदंड मिलना चाहिए। आज सुबह 6 बजे पीड़िता की मृत्यु के बारे में परिवार को सूचित किया गया। पीड़िता के भाई ने कहा, “हम उसके लिए न्याय चाहते हैं। आरोपितों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्हें फाँसी दी जानी चाहिए।”

फास्ट ट्रैक ट्रायल

हाथरस पुलिस ने शनिवार (सितंबर 19, 2020) को इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया। हाथरस एएसपी प्रकाश कुमार ने कहा, “आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था। फिर बाद में उन पर धारा 376 डी के तहत सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया गया।” उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में की जाएगी।

पुलिस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, “आरोपित संदीप को 19 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद संदीप के अलावा तीन अन्य आरोपितों लवकुश, रवि और राम कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। बाद में उन तीनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़ित परिवार को एससी / एसटी अधिनियम के तहत 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।”

हाथरस पुलिस ने सोशल मीडिया रिपोर्टों का किया खंडन

जघन्य कृत्य के कुछ दिनों बाद, सोशल मीडिया पर सामूहिक बलात्कार की क्रूरता की भयावहता का वर्णन वाली कई रिपोर्टें सामने आई। जिसमें दावा किया गया कि अपराधियों ने लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, उसकी जीभ काट दी और आँखें भी फोड़ दी। हालाँकि, हाथरस पुलिस ने आज (सितंबर 29, 2020) एक बयान में इन आरोपों से इनकार किया।

हाथरस पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा, “सोशल मीडिया के माध्यम से यह असत्य खबर सार्वजनिक रुप से फैलाई जा रही है कि थाना चन्दपा क्षेत्रान्तर्गत दुर्भाग्यपूर्ण घटित घटना में मृतिका की जीभ काटी गई, आँख फोड़ी गई तथा रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई थी। हाथरस पुलिस इस असत्य एवं भ्रामक खबर का खंडन करती है।”

बयान में आगे कहा गया है, “सच्चाई यह है कि मेडिकल रिपोर्ट में जीभ काटने व आँख फोड़ने का कोई उल्लेख नहीं है। रीढ़ की हड्डी भी तोड़ी नहीं गई, बल्कि गला दबाने के कारण रीढ़ की हड्डी ठीक से काम नहीं कर रही है एवं गर्दन दबाने पर दाँतों के बीच में जीभ के आ जाने के कारण चोट का निशान है।” 

आईजी पीयूष मोर्डिया ने मामले पर जानकारी देते हुए कहा, “14 सितंबर को 10:30 बजे पीड़िता के भाई सत्येंद्र ने एक लिखित तहरीर दी। उसने कहा कि जब उसकी बहन बाजरे के खेत में घास काट रही थी तो संदीप नाम के एक लड़के ने गला दबाकर उसे जान से मारने का प्रयास किया। सत्येंद्र की लिखित तहरीर पर तुरंत FIR दर्ज की गई और पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।”

आईजी आगे कहते हैं, “कुछ दिन बाद जब पीड़िता का बयान लिया गया तो उसने बताया कि उसके साथ छेड़खानी भी किया गया था। हमारे पूछने के बावजूद उसने अन्य कोई आरोप नहीं लगाया। उसने तीन और युवकों का भी नाम बताया, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। जैसे-जैसे और नाम सामने आएँगे, उसे गिरफ्तार किया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की बात सामने नहीं आई है। फिलहाल चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।”

हाथरस गैंगरेप

गौरतलब 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब युवकों के एक समूह ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। शायद घसीटने की वजह से ही उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी।

दुष्कर्म का विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि इसी दौरान पीड़िता की जीभ दाँत के बीच में आ गई और कट गई।

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चन्दपा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को मामले में ‘तुरंत कार्रवाई करने में उनकी विफलता’ के कारण जिला पुलिस लाइनों में ट्रांसफर कर दिया गया है। हाथरस एएसपी प्रकाश कुमार ने पुष्टि की है कि शव का पोस्टमॉर्टम करने के बाद उसे गाँव लाया जाएगा।

मेरा साथ देने पर पड़ोसियों को मिली घर तोड़ने की धमकी, BMC ने भेजा नोटिस: कंगना रनौत

अभिनेत्री कंगना रनौत ने आज बीएमसी को लेकर फिर एक ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने मुंबई में अपने पड़ोसियों के घरों को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि बीएमसी ने उनके पड़ोसियों को धमकाया है और नोटिस भी भेज दिया है।

कंगना लिखती हैं, “आज बीएमसी ने मेरे पड़ोसियों को नोटिस भेजा है। बीएमसी ने उन्हें धमकाया है कि वह मुझे सामाजिक तौर पर आइसोलेट कर दें। उन लोगों से कहा गया है कि अगर उन्होंने मेरा समर्थन किया तो उनके घरों को भी तोड़ दिया जाएगा। मेरे पड़ोसियों ने महाराष्ट्र सरकार के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोला इसलिए कृपया उन्हें छोड़ दें।”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना रनौत ने यूट्यूबर साहिल चौधरी की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, “मुंबई में यह क्या गुंडाराज चल रहा है? कोई भी दुनिया के सबसे अयोग्य मुख्यमंत्री और उसकी टीम पर सवाल नहीं उठा सकता? ये हमारे साथ क्या करेंगे? हमारे घर तोड़ेंगे और मार डालेंगे? कॉन्ग्रेस पार्टी इसके लिए जवाबदेह है?”

इसके अलावा उन्होंने पायल घोष और अनुराग कश्यप मामले को चौधरी की गिरफ्तारी से जोड़ते हुए कहा, “महाराष्ट्र सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए जाने पर कोई व्यक्ति अचानक साहिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देता है, जो कि लोकतांत्रिक अधिकार है और साहिल को तुरंत जेल भेज दिया जाता है लेकिन पायल घोष ने अनुराग कश्यप के खिलाफ कई दिन पहले रेप का मामला दर्ज कराया है लेकिन वह आराम से घूम रहे हैं। क्या है यह सब कॉन्ग्रेस पार्टी?”

बता दें कि कुछ दिन पहले बीएमसी ने महाराष्ट्र सरकार से चल रही अभिनेत्री की तकरार के बीच में उनके कार्यालय पर बुलडोजर चलवाकर कार्रवाई की थी। इसके बाद कंगना ने वीडियो जारी करके कहा था:

“उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है, तूने फिल्म माफिया के साथ मिल कर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है। आज मेरा घर टूटा है। कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है। याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता। मुझे लगता है तुमने मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है। क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पे क्या बीती होगी, लेकिन आज मैंने महसूस किया है। “

‘बॉलीवुड के नकली अंग्रेज, जिनके रोम-रोम में बसा है इटली वाला रोम’ – सनातन धर्म की रक्षा के लिए अर्नब गोस्वामी का हल्ला बोल

2014 में नरेंद्र मोदी को देश के प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के बाद से मुख्यधारा के मीडिया का परिदृश्य काफी बदल गया है। जो चीजें पहले खामोश थी, अब उन्हें और ज्यादा खामोश नहीं किया जा सकता। डिजिटल मीडिया के आगमन के साथ ही आम जनता के सांस्कृतिक मुद्दों को मुख्यधारा की आवाज मिल गई। ऐसे में एक ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें लोगों ने सिर-आँखों पर बिठा रखा है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की।

अर्नब गोस्वामी बॉलीवुड में ड्रग रैकेट के खिलाफ अभियान में सबसे आगे रहे हैं। जबकि अन्य उनकी आलोचना में। जहाँ अन्य लोगों ने ड्रग एडिक्ट एक्टर्स के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करने का प्रयास किया, वहीं अर्नब गोस्वामी ने उनके लिए ‘पुड़िया गैंग’, ‘पुड़िया वाले’, ‘आफीमची’ और ऐसे ही कई अन्य शब्दों का इस्तेमाल किया।

इस तरह, संपूर्ण बॉलीवुड ड्रग रैकेट पर पूरे प्रकरण के दौरान, फिल्म इंडस्ट्री के प्रभाव के सांस्कृतिक पहलू को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है। सच कहा जाए, तो मुख्यधारा के मीडिया में बॉलीवुड के प्रतिकूल सांस्कृतिक प्रभाव पर कभी चर्चा नहीं हुई। शीर्ष पत्रकारों और फिल्म उद्योग के सांस्कृतिक मूल्य काफी हद तक समान थे। लेकिन अब वह बदलती दिख रही है, और इसमें मुख्य भूमिका निभाने वाले शख्स अपनी पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली भारतीय पत्रकार हैं: अर्नब गोस्वामी।

कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि वह सिर्फ और सिर्फ टीआरपी के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह काफी हद तक सही हो सकता है। लेकिन राजदीप सरदेसाई भी रेटिंग के लिए ऐसा कर सकते थे। राहुल कंवल या बरखा दत्त या और कोई ऐसा कर सकता था लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। वास्तव में, अर्नब गोस्वामी एकमात्र ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने सांस्कृतिक युद्ध (cultural war) पर प्रकाश डाला है, जिसे अब तक अनदेखा किया गया है।

शनिवार (सितंबर 26, 2020) की रात बहस के दौरान अर्नब गोस्वामी ने गरजते हुए कहा, “आज, मैं बॉलीवुड के नकली अँग्रेज़ को बताना चाहता हूँ, भारतीय सिनेमा छोड़ दो। हमारी संस्कृति और परंपराओं पर बॉलीवुड का प्रभाव बढ़ रहा है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि देश की अगली पीढ़ी पर इसका प्रभाव बढ़ता ही जाए। जिस तरह से वे बोलते हैं, जिस तरह से वे चलते हैं, जिस तरह से वे कपड़े पहनते हैं, उसी तरीके की नकल की जा रही है।”

उन्होंने कहा, “हमारी मानसिकता कहाँ जा रही है? पश्चिम के नालों में बहने वाले गंदा पानी को यहाँ के कुछ लोग इसे गंगाजल मानते हैं। वे अपने माथे पर पश्चिम की गंदगी तिलक के रूप में लगा रहे हैं। यह हमारी सनातन संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ है। भारतीय संस्कृति का सार सनातन धर्म है लेकिन वे इसके महत्व को नहीं पहचानते हैं। क्योंकि इनके रोम-रोम में इटली वाला रोम बसा है और हमारे रोम-रोम में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम बसे हैं।”

अर्नब गोस्वामी ने आगे कहा, “हमारी दृष्टि अयोध्या, काशी, सनातन संस्कृति के मथुरा से प्रेरित है। लेकिन उनका नाम रोम और पेरिस से लिया गया है। इसीलिए वे सनातन धर्म के अपमान को एक उपलब्धि मानते हैं। जो लोग भारत आकर अश्लीलता फैलाते हैं, ड्रग्स का सेवन करते हैं, वे विदेश में भी ऐसा ही करने का साहस नहीं जुटा सकते हैं।”

यह सब काफी अभूतपूर्व है। कुछ साल पहले, यह किसी के लिए भी अकल्पनीय रहा होगा कि मुख्यधारा का मीडिया चैनल प्राइम टाइम के दौरान इस तरह के विचारों को प्रसारित करेगा। और इस तरह से अपनी बात रखना किसी के बस की बात नहीं थी। वह इस समय अपने मन की बात कहने वाले सबसे लोकप्रिय पत्रकार हैं। अर्नब गोस्वामी यहीं नहीं रुके।

उन्होंने कहा, “वे ड्रग्स को उच्च वर्गीय समाज का एक सांस्कृतिक पहचान मानते हैं। धिक्कार है तुम्हारे उच्च समाज के तरीकों को, जिसको ना ही अपने देश और ना ही अपनी परंपरा पर अभिमान है। वो जीते जी मृतक समान है। हमें सनातन धर्म को स्वीकार करना होगा और पश्चिमी संस्कृति को दूर करना होगा।”

इस बहस में कुछ ऐसा हुआ, जो पहले कभी नहीं हुआ था। मुकेश खन्ना ‘शक्तिमान’ ने उन विज्ञापनों के खिलाफ बात की जो परिवार की संस्था के विनाश को बढ़ावा देते हैं। दो साधुओं को भी अपनी राय साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था और अर्नब गोस्वामी उनके साथ काफी श्रद्धा से पेश आए।

बहस के दौरान जब एक पैनलिस्ट ने साधु को रोकने के लिए अशिष्टता का परिचय दिया तो अर्नब गोस्वामी ने उन्हें डाँटते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। साधुओं ने निहित स्वार्थों द्वारा हमारी संस्कृति के खिलाफ युद्ध पर बात की और फिल्मों में अपराधियों के महिमामंडन का भी विरोध किया। यह भी सुझाव दिया गया कि साधुओं को सेंसर बोर्ड में जगह दी जाए और एडिटर-इन-चीफ ने इस पर अपनी सहमति व्यक्त की।

शनिवार के शो में एक निश्चित बदलाव को दर्शाया गया था। अर्नब गोस्वामी ने अपने शो पर कुछ समय सनातन धर्म को समर्पित किया। उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद देते हुए कहा, “आदि शक्ति माँ कामाख्या, देवी जगदंबा, ईष्टदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश” उनके आशीर्वाद के लिए जिसके परिणामस्वरूप रिपब्लिक भारत कुछ महीनों में ही देश का शीर्ष हिंदी चैनल बन गया है।”

यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि यह इस तथ्य को उजागर करता है कि अब मुख्यधारा के मीडिया में अर्नब गोस्वामी और अन्य के बीच का अंतर केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक भी है। और जैसा कि किसी बुद्धिमान व्यक्ति ने एक बार कहा था कि राजनीति में संस्कृति का ह्रास हो रहा है। 

1000 वर्ष बाद पूरा होगा राजा भोज का स्वप्न, ‘उत्तर के सोमनाथ’ मंदिर का निर्माण कार्य पूरा करवाएगी मोदी सरकार

मध्य प्रदेश के रायसेन में बेतवा नदी के किनारे भोजपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर का पुराना वैभव फिर से लौट कर आने वाला है क्योंकि केंद्र सरकार ने इसके बचे हुए निर्माण-कार्य को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजा भोज ने इस्लामी आक्रांता महमूद गजनवी से बदला लेने के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया था। विजय के बाद इस मंदिर का निर्माण हुआ। भोपाल से भोजपुर की दूरी 32 किलोमीटर है।

‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित संजय पोखरियाल की खबर के अनुसार, आज से 1000 वर्ष पूर्व जब राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, तब इसका गुम्बद और कुछ अन्य हिस्से का निर्माण बचा रह गया था। शायद राजा के निधन के कारण ऐसा हुआ था। अब केंद्र सरकार इस बचे-खुचे निर्माण को उसी रूप में पूरा करने जा रही है, जैसा प्रांगण के पाषाणखण्डों पर उकेरे गए मूल नक़्शे में दिख रहा है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देखरेख में अब इस मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। इस शिवालय को भोजपुर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जिसे लोग ‘उत्तर का सोमनाथ’ कहते हैं। इसे लाल पत्थरों से तराशा गया है। 21.5 फीट ऊँचा और 17.8 फीट परिधि वाला ये शिवलिंग सबसे विशाल है। चबूतरे पर स्थित शिवलिंग के पास पुजारी भी सीढ़ी लगा कर जाते हैं।

इसका 66 फ़ीट ऊँचा प्रवेशद्वार सभी मंदिरों में सबसे ऊँचा माना जाता है। ऊँचे स्तम्भों पर खड़े इस मंदिर की दीवारों पर काफी अच्छी चित्रकारी की गई है। बताया गया है कि इसका शिखर कई प्रयासों के बावजूद पूर्ण नहीं हो सका क्योंकि शिखर इतना भारी हो जाता कि मंदिर उसका भार नहीं सह पाता। भवन से शिखर के भारी होने की सम्भावना के कारण ही इसका निर्माण-कार्य रुका रह गया था, जो अब पूरा होगा।

धार के महान परमार राजा भोज (1000-1053 ईसवी) ने जब सोमनाथ मंदिर में महमूद गजनवी द्वारा तोड़फोड़ की घटना के बारे में सुना तो उन्होंने क्षुब्ध होकर उस पर हमला बोल दिया। भगवान शिव के अपमान से क्रुद्ध राजा भोज के हमले के बाद महमूद गजनवी तो रेगिस्तान में भाग खड़ा हुआ लेकिन उसके बेटे सालार मसूद को मौत के घाट उतार दिया गया। सोमनाथ का बदला लेने के बाद राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।

ड्रग्स सिंडिकेट की एक्टिव मेंबर… तस्करी, डिलीवरी से लेकर घर में स्टोरेज तक: रिया के खिलाफ कोर्ट में NCB

ड्रग्स मामले में गिरफ्तार हुई रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका पर आज (सितंबर 29, 2020) बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान एनसीबी ने भी हाईकोर्ट में अपना हलफनामा पेश किया।

एनसीबी ने रिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि रिया चक्रवर्ती ने ही सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदे। साथ ही हलफनामे में यह साफ कहा गया कि रिया और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती ड्रग सिंडिकेट के एक्टिव मेंबर हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस हलफनामे में एनसीबी ने बताया कि अभिनेत्री के वॉट्सऐप चैट, मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड डिस्क से निकाले गए रिकॉर्ड बताते हैं कि वह ना केवल लगातार इसका सौदा करती थीं, बल्कि इस अवैध कारोबार को फाइनेंस भी करती थीं।

एजेंसी ने कोर्ट में रिया की याचिका पर कहा, “यदि पूरे परिदृश्य को देखें तो मौजूदा आवदेक (रिया चक्रवर्ती) ने यह जानते हुए कि सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स ले रहे हैं, उन्होंने इसे प्रश्रय दिया। मौजूदा आवेदक ने उपने घर में ड्रग्स को स्टोर किया और सुशांत सिंह राजपूत को भी देती रहीं।”

एनसीबी का दावा है कि उनके पास रिया के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि अभिनेत्री ड्रग तस्करी में शामिल थीं और ड्रग की डिलीवरी करती थीं। इसके अलावा वह ड्रग के लिए पेमेंट भी क्रेडिट कार्ड, कैश और पेमेंट गेटवे के जरिए करती थीं।

रिया और शौविक पर मामला दर्ज

बता दें कि एजेंसी ने कुछ समय पहले एनडीपीएस की धारा 27ए के कहत रिया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। इसके बाद रिया और उनके भाई ने इस मामले में उपरोक्त धारा लगाने का विरोध किया।

वहीं, उनके वकील सतीष मनशिंगे ने दलील पेश की कि उनके मुवक्किल के मामले में यह धाराएँ नहीं लगाई जा सकतीं, क्योंकि उन्होंने कभी-कभार ही मादक पदार्थ खरीदे और उनका सेवन भी सुशांत सिंह राजपूत ने ही किया।

मानशिंदे का कहना था कि एनसीबी ने इस मामले में अब तक केवल 59 ग्राम मादक पदार्थ बरामद किए हैं और यह मात्रा इतनी नहीं है कि माना जा सके कि मादक पदार्थों का कारोबार चल रहा था।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ रिया के वकील की दलीलें हैं, वहीं दूसरी ओर एनसीबी का हलफनामा है। इसमें यह बात साफ लिखी है कि रिया हाई सोसायटी पर्सनैलिटी के लिए ड्रग डिलीवरी से जुड़ी थीं और वह ड्रग सिंडिकेट की एक सक्रिय सदस्य हैं। उन्हें इसी केस में एनसीबी ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था और मुंबई की भायखला जेल में रखा हुआ था। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 6 अक्टूबर को पूरी होगी।

RSS से जुड़े ब्राह्मण ने दिया था अंग्रेजों का साथ, एक मुस्लिम वकील लड़ा था भगत सिंह के पक्ष में – Fact Check

शहीद भगत सिंह को लेकर वामपंथियों और कॉन्ग्रेस आईटी सेल द्वारा कई तरह के फर्जी दावे, दुष्प्रचार और फेक न्यूज़ कई मौकों पर फैलाई गई हैं। इस बार यह दिन शहीद भगत सिंह की जयंती का तय किया गया और इसी बहाने भगत सिंह और आरएसएस को लेकर कुछ फेक न्यूज़ चलाई गईं।

‘RSS के ब्राह्मण ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भगत सिंह को दिलाई थी फाँसी’

सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक में कई ग्राफिक पोस्टर्स और ‘फ़ॉर्वर्डेड’ संदेशों में यह दावा किया जाता है कि भगत सिंह को फ़ाँसी दिलाने के लिए अंग्रेजों की ओर से जिस ‘ब्राह्मण’ वकील ने मुकदमा लड़ा था, उनका नाम राय बहादुर सूर्यनारायण शर्मा था और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक हेडगेवार के घनिष्ट मित्र और आरएसएस के सदस्य भी थे।

‘ब्राह्मण’ राय बहादुर सूर्यनारायण सिंह के नाम पर ट्विटर पर यह संदेश कई लोगों ने बड़े स्तर पर शेयर किया है। इन संदेशों का पहला उद्देश्य यह साबित करना है कि सरदार भगत सिंह का केस एक ‘मुस्लिम’ वकील ने लड़ा था, जबकि एक ब्राह्मण वकील, आरएसएस से जुड़ा व्यक्ति, कथित तौर पर ब्रिटिश सरकार की ओर से यह केस लड़ रहा था और भगत सिंह को फाँसी दिलाना चाहता था।

इन दावों को इन स्क्रीनशॉट्स में देख सकते हैं –

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ भी झूठे दावों के पोस्टर्स से भरी हुई हैं

क्या है वास्तविकता

इन तमाम संदेशों में पहला झूठ और भ्रामक दावा सरदार भगत सिंह के वकील को लेकर किया गया है। वास्तव में आसिफ अली ने सरदार भगत सिंह नहीं बल्कि बटुकेश्वर दत्त के वकील की भूमिका निभाई थी। जबकि सरदार भगत सिंह ने अपना केस एक कानूनी सलाहकार की मदद से स्वयं ही लड़ा था।

भगत सिंह द्वारा लिखी गई और 1929-1930 की अवधि के दौरान जेल अधिकारियों या विशेष न्यायाधिकरण या पंजाब उच्च न्यायालय को भेजे गए पत्रों और याचिकाओं में, भगत सिंह ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के मुकदमों के दौरान अभियुक्तों को किसी भी बचाव से इनकार करते हुए उन्हें फ़ाँसी देने की माँग की थी।

सरदार भगत सिंह पर कई किताबें लिखने वाले प्रोफेसर मालविंदरजीत सिंह वारिच ने भी इस दावे का खंडन करते हुए कहा था कि सत्यनारायण शर्मा नाम का कोई वकील भगत सिंह के खिलाफ अंग्रेजों के लिए पेश नहीं हुआ था।

क्विंट में प्रकाशित रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

‘अंडरस्टैंडिंग भगत सिंह’ और ‘भगत सिंह और उनके साथियां के दस्तावेज़’ लिखने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चमन लाल ने भी इस बात को स्पष्ट रूप से लिखा है कि भगत सिंह के मामले में अंग्रेजों की ओर से कोई भी भारतीय काउंसल नहीं थे और यह एक झूठा दावा है, जो लम्बे समय से चला आ रहा है।

उल्लेखनीय है कि सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने अप्रैल 08, 1929 को अपना विरोध प्रकट करने के लिए केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका था। उन्होंने अपनी माँगों को स्पष्ट करने के लिए कुछ हस्तलिखित पत्र भी फेंके थे।

यह एक कम तीव्रता वाला बम था, जो विधान सभा के किसी भी सदस्य को मारने या चोट पहुँचाने के लिए नहीं था। जैसे ही विस्फोट हुआ, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त वहाँ खड़े हो गए और बाद में खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

निष्कर्ष

आसिफ अली ने नहीं बल्कि, भगत सिंह ने अपना केस स्वयं ही एक कानूनी सलाहकार की मदद से मिलकर लड़ा था। आसिफ अली बटुलेश्वर दत्त के वकील थे। भगत सिंह के खिलाफ भारत का कोई भी व्यक्ति ब्रिटिश सरकार की ओर से वकील नहीं था और ‘ब्राह्मण, आरएसएस वाले सत्यनारायण शर्मा’ का भगत सिंह के खिलाफ केस लड़ना झूठा दावा है।