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बिहार चुनाव: जब 6% के लिए ब्राह्मण-सवर्ण का मुद्दा उछल सकता है तो 15% SC वोटर के लिए क्या कुछ नहीं हो सकता

बिहार में होने वाले चुनावों की आँच से क्या-क्या जल सकता है? बिहार के चुनावी आग की गर्मी इतनी तेज होती है कि बिहार से दिल्ली तक कुछ भी सुलग सकता है। अगर संभावनाओं की बात करें तो इससे किसी ‘दलित’ का झोंपड़ा जल सकता है और इलाके के तथाकथित सवर्णों पर आग लगाने का इल्जाम भी थोपा जा सकता है।

हाँ, ऐसी घटनाओं की जाँच होगी, अदालतें सच-झूठ का फैसला भी करेंगी, लेकिन तबतक तो चुनाव भी बीत गए होंगे, और चुनावों को कई साल भी हो गए होंगे। एक अदद नैरेटिव गढ़ने के लिए 3-4 वर्ष तो काफी हैं।

चुनावों पर नजर रखने वाले खुलकर स्वीकारने से हिचकिचाएँगे, लेकिन अगर राजनीति की प्रयोगशाला की बात चली ही है तो आइए देखें कि बिहार में जाति की राजनीति करने के लिए कैसे-कैसे प्रपंच रचाए जा सकते हैं।

बिहार में जाति की राजनीति इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यहाँ ओबीसी और अनुसूचित जातियों/जनजातियों का मत प्रतिशत काफी ज्यादा है। अलग-अलग जातियों के मत-प्रतिशत के अनुमान के लिए टेबल देखें –

जाति आबादी (%) ध्यान देने योग्य:

  • ओबीसी/ईबीसी 46%
  • यादव 12%
  • कुर्मी 4%
  • कुशवाहा (कोएरी) 7%
  • (आर्थिक रूप से पिछड़े 28% जिसमें 3.2% तेली भी आएँगे)
  • महादलित* / दलित (अनुसूचित जातियाँ) 15% इस श्रेणी में चमार 5%, दुसाध/पासवान 5%, और मुसहर 1.8% समुदाय आते हैं।
  • मुस्लिम 16.9% (इसमें सुरजापूरी, अंसारी, पसमांदा, अहमदिया जैसे कई समुदाय आते हैं, लेकिन टिकट अधिकतर शेखों को मिलते रहे हैं।)
  • तथाकथित अगड़ी जातियाँ 19%
  • भूमिहार 6%
  • ब्राह्मण 5.5%
  • राजपूत 5.5%
  • कायस्थ 2%
  • अनुसूचित जनजातियाँ 1.3%
  • अन्य 0.4% सिक्ख, जैन, और इसाई इत्यादि

राजनीति की प्रयोगशाला में 12 अक्टूबर से 5 नवंबर 2015 के बीच मतदान होने थे। बाद के चरण ऐसे इलाकों के थे, जहाँ पर सेक्युलर वोट (जय मीम + जय भीम) महत्वपूर्ण हो जाते। 5वें चरण में (5 नवंबर) अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार जैसे वो इलाके थे जिसपर से इस बार भी ओवैसी की पार्टी उतरने वाली है। यहाँ अनुसूचित जातियों के समुदायों का वोट करना बहुत महत्वपूर्ण होता।

ऐसे ही दौर में 21 अक्टूबर को दिल्ली से 40 किलोमीटर दूर फरीदाबाद से एक दिल दहला देने वाली खबर आने लगी। अनुसूचित जातियों के समुदायों ने सड़क जाम कर रखा था। फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर ने कहा कि ये गाँवों में जारी जातियों के आपसी वैमनस्य का मामला लगता है जिसमें पिछले वर्ष भी तीन लोगों की जान गई थी।

जितेन्द्र नाम के जिस व्यक्ति के घर में आग लगी थी, उसने बताना शुरू किया कि उसे पहले भी गाँव ना लौटने की धमकियाँ मिली थीं। उस रात उसे पेट्रोल की बू आई तो उसने अपनी पत्नी को जगाने की कोशिश की। जबतक पति-पत्नी समझ पाते कि क्या हो रहा है, घर में आग लगा दी गई थी। पति-पत्नी तो जैसे तैसे निकले मगर उनके दो छोटे बच्चे उसी आग में जलकर मर गए। 2 वर्ष की बच्ची और 9 महीने के बच्चे को जलाकर मार देने की इस घटना पर देश भर में हंगामा मचा दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चाएँ हुईं और कहा गया कि कैसे भारत में हिन्दुओं की अगड़ी जातियाँ हाशिए पर के वर्ग यानि दलितों के खून की प्यासी हैं। बड़े नेता जितेन्द्र से मिलने पहुँचे, मुआवजों की घोषणा हुई। बिहार में उस दौर में मतदान जारी था, तो जाहिर है कि उसपर भी इसका असर हुआ ही होगा।

चुनावों के बीतने के बाद किसी ने इस घटना का जिक्र करने की जरुरत नहीं समझी। मगर मामला अदालत में था तो चल ही रहा था। इस मामले की सीबीआई जाँच भी हुई थी और करनाल, दिल्ली और हैदराबाद की अलग अलग फॉरेंसिक लेबोरेटरी से साक्ष्यों की जाँच भी की गई।

पता चला कि घर पर बाहर से पेट्रोल डालकर आग लगाईं ही नहीं गई थी! आग घर के अन्दर से लगी थी। किसी आपसी विवाद में पति-पत्नी में आपस में धक्का-मुक्की हुई और घर में आग लग गई जिसका इल्जाम उन्होंने पड़ोस के राजपूतों पर ये कहते हुए लगा दिया था कि उन्होंने अक्टूबर 2014 में हुई तीन राजपूतों की हत्या का बदला लिया है।

जाहिर है जब ये हुआ तो उसे उतनी शिद्दत से पहले पन्ने पर जगह देने की अख़बारों को या मीडिया को कोई जरूरत नहीं लगी। खबर दलितों का घर जलाया जाना था, उनके मासूम बच्चों की मौत थी! पूरी कहानी फर्जी थी और उसके लिए 11 बेक़सूर लोगों को जेल में फेंक दिया गया था, ये खबर क्यों होती? चुनाव को बीते काफी समय हो चुका था, इसलिए किसी ने छोटे अख़बारों में आई 2019 की इस खबर पर ध्यान भी नहीं दिया। इस मामले का फैसला आने से अब तक में एक साल बीत चुका है और हरियाणा में ही नहीं बल्कि यूपी में भी भाजपा की सरकार है।

जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक कुख्यात को पुलिस द्वारा मार गिराए जाने पर ब्राह्मण बनाम राजपूत कार्ड भी खेला गया है। अब जैसे-जैसे हाथरस मामले में फोरेंसिक और मेडिकल प्रमाण सामने आने लगे हैं, वैसे-वैसे इस मामले में भी पता चलने लगा है कि जिसे ये लोग सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या का मामला बता रहे थे, उसमें कोई बलत्कार तो हुआ ही नहीं था! जिन लोगों पर मिलकर हत्या करने का अभियोग लगाया जा रहा था और एफआईआर भी करवा दी गई, वो मौके पर मौजूद भी नहीं थे। लेकिन इस पूरे वाकए में ये जरूर हुआ है कि जाति की राजनीति चमकाने वालों को मौका मिल गया है।

बाकी अगर राजनीति की प्रयोगशाला में चुनाव छोटी बात लगती हो तो देखिए कि करीब 6% ब्राह्मण-राजपूत वोट के लिए यूपी के गैंगस्टर और सुशांत सिंह राजपूत का मामला कैसे उछाला जाता है। अब अंदाजा लगाइए कि करीब 15% अनुसूचित जातियों के वोट के लिए कैसी आग लगाईं जा सकती है!

26 साल में छोटन शुक्ला पर 20 मिनट तक गोलियाँ बरसाने वाले नहीं मिले, रिएक्शन में DM की हुई थी लिंचिंग

बिहार में 26 साल पहले हुए कौशलेन्द्र शुक्ला उर्फ़ छोटन शुक्ला हत्याकांड की जाँच पुलिस ने बंद कर दी है। शुक्ला के साथ उनके चार और समर्थक भी मारे गए थे। सीजेएम कोर्ट में दाखिल फाइनल रिपोर्ट में पुलिस ने कहा है कि अब तक की जॉंच से यह बात सामने आई है कि छोटन शुक्ला की गोली मारकर हत्या की गई थी। लेकिन, हत्या करने वालों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिला है। ऐसे में वरीय अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जाँच बंद करने का फैसला किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में सबूत मिलने पर दोबारा जाँच शुरू की जा सकती है।

छोटन शुक्ला समेत 5 लोगों की हत्या 4 दिसंबर 1994 की रात मुजफ्फरपुर में कर दी गई थी। इसकी प्रतिक्रिया में उनकी शवयात्रा में शामिल भीड़ ने एक युवा डीएम की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यहाँ तक कि जिस बृज बिहारी प्रसाद पर छोटन शुक्ला की हत्या करवाने का आरोप लगा था, कुछ साल बाद उनकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, उन शूटरों का पुलिस पता नहीं लगा सकी जिन्होंने पुलिस की वर्दी में छोटन शुक्ला की गाड़ी पर गोलियाँ बरसाई थी। इस मामले में उस वक्त भी पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगे थे।

माना जाता है कि छोटन शुक्ला की हत्या लालू यादव और आनंद मोहन के बीच छिड़ी जंग की वजह से हुई थी। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर, जो उस समय राज्य के चर्चित क्राइम रिपोर्टर हुआ करते थे, ने लाइव सिटीज के एक वीडियो में सिलसिलेवार तरीके से बताया है कि इस हत्याकांड की बिसात कैसे बिछी थी।

बकौल ज्ञानेश्वर, 1995 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे। आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपा) ने छोटन शुक्ला को के​सरिया से चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया था। शुक्ला भी प्रचार में लगे थे। 4 दिसंबर 1994 की रात भी शुक्ला के​सरिया से ही लौट रहे थे, जब उन्हें उनके घर के करीब ही गोलियों से भून दिया गया था।

ज्ञानेश्वर के मुताबिक छोटन शुक्ला खुली जीप में घूमा करते थे। उस दिन केसरिया से लौटते वक्त उन्होंने अपनी जीप बीपीपा के ही एक नेता के घर पर छोड़ दी और उनके एंबेसडर से मुजफ्फरपुर अपने घर लौट रहे थे। रात के करीब 9 बजे जैसे ही गाड़ी संजय सिनेमा के पास पहुँची, पुलिस की वर्दी में खड़े अपराधियों ने कार को रोका। इससे पहले कि छोटन शुक्ला बाहर निकलते या कुछ पूछ पाते उन अपराधियों ने एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। करीब 20 मिनट तक गोलियाँ बरसाई गई।

बताया जाता है कि उसके बाद जब स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची तो कार में सवार लोगों को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया। जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कार में छोटन शुक्ला के साथ अन्य जो भी लोग सवार थे उनका कोई आपराधिक अतीत नहीं था। वे बीपीपा के सामान्य कार्यकर्ता थे।

छोटन शुक्ला की हत्या के अगले दिन 5 दिसंबर को उनकी शव यात्रा निकली। इसमें उनका समर्थकों का भारी जुटान था। खुद आनंद मोहन भी पहुँचे थे। इसी दौरान गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया भीड़ में फँस गए। भीड़ ने कृष्णैया को गाड़ी से खींच कर बाहर निकाला और पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। तब के अखबारों में छपा कि भीड़ को इशारा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि आनंद मोहन ही थे।

इस मामले में आनंद मोहन को मृत्युदंड भी सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया। यह भी कहा जाता है कि हमला सुनियोजित नहीं था। भीड़ प्रशासन के रवैए से आक्रोशित थी और कृष्णैया का दुर्भाग्य था कि वे उसमें फँस गए। जबकि इस मामले से उनका दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं था।

छोटन शुक्ला की हत्या के पीछे बाहुबली नेता बृज बिहारी प्रसाद का नाम आया था, जिन्हें लालू की सरपरस्ती भी हासिल थी। 13 जून 1998 को बृज बिहारी प्रसाद भी पटना के IGIMS में भून दिए गए।

बाद के वक्त में छोटन शुक्ला की जगह उसके भाई मुन्ना शुक्ला ने ली। छोटन शुक्ला भले विधायक बनने से पहले मार डाले गए थे पर मुन्ना शुक्ला और उनकी पत्नी, दोनों विधानसभा पहुँचे। लेकिन, यह सब कुछ जिस छोटन शुक्ला की हत्या से शुरू हुआ, उसके ही हत्यारों का पुलिस सुराग तक नहीं लगा पाई!

योगी सरकार ने दी दुर्गा पूजा पंडाल सजाने की अनुमति, होंगे धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम: कोरोना गाइडलाइंस जारी

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुपालन के साथ दुर्गा पूजा आयोजन की अनुमति दे दी है। दुर्गा पूजा पंडाल अब खुले में धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें कोविड के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा, जैसे सामाजिक दूरी का पालन करना और मास्क पहनना अनिवार्य होगा।

यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह व सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि 15 अक्टूबर से सभी धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति दे दी गई है और इसमें 100 तक की संख्या का प्रतिबंध भी हटाया गया है। हालाँकि, इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और बचाव के प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा। अगर दुर्गा पूजा बंद स्थान, हाल या कमरे में है तो उसकी कुल क्षमता के 50% जो कि अधिकतम 200 व्यक्तियों तक हो सकते हैं। पूजा के दौरान पंडाल में लोगों को कोरोना से बचाव के लिए फेस मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना, थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर साथ में रखना बेहद जरूरी है।

वहीं पंडाल सजाने की अनुमति मिलने पर जानकीपुरम इलाके में एक दुर्गा पूजा समिति के सदस्य आनंद बनर्जी ने कहा, “हमने गुरुवार की पूरी रात दुर्गा पूजा समारोहों की योजना तैयार करने में बिताई, क्योंकि हमारे पास 15 दिनों से भी कम समय है। हम दुर्गा पूजा समारोह आयोजित करने की अनुमति देने के लिए मुख्यमंत्री के आभारी हैं।” यहीं नहीं और भी कई दुर्गा पूजा पंडाल कमेटी ने योगी सरकार को धन्यवाद दिया है।

गौरतलब है कि अनलॉक 5 में सरकार की तरफ से कई प्रकार की छूट दी गई है। कंटेनमेंट जोन के बाहर सभी सामाजिक, शैक्षिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक कार्यक्रमों एवं अन्य सामूहिक गतिविधियों को अधिकतम 100 व्यक्तियों के लिए शुरू किए जाने की अनुमति पूर्व में ही दी जा चुकी है।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन

सिनेमा/थिएटर/मल्टीप्लेक्स में उनकी बैठक क्षमता से 50% तक दर्शक को आने की अनुमति होगी। इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।

बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) एग्जिबिशंस लगाई जा सकेंगी। इनके लिए वाणिज्य विभाग एसओपी जारी करेगा। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग होने वाले स्विमिंग पूल को खोलने की अनुमति होगी, जिनके लिए खेल मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।

अम्‍यूजमेंट पार्क और इसी तरह के स्थानों को खोलने की भी अनुमति होगी और इन सभी के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।

स्कूल, कॉलेज, शिक्षा संस्थान और कोचिंग संस्थान को चरणबद्ध तरीके से खोलने के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को फ्लेक्जिबिलिटी दी गई है और वे स्थितियों को देखते हुए 15 अक्टूबर 2020 के बाद इन्‍हें फिर से खोलने के लिए निर्णय ले सकेंगे। हालाँकि, इसके लिए सरकारें स्कूलों/संस्थान प्रबंधनों के साथ परामर्श करेंगी और दी गई शर्तों का पालन करेंगी।

ऑनलाइन एजुकेशन/डिस्टेंस लर्निंग जारी रहेगा और इसे लगातार प्रोत्साहित किया जाएगा।

जो स्कूल ऑनलाइन क्‍लासेस चला रहे हैं और उनके कुछ छात्र शारीरिक रूप से स्‍कूल में उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन ही पढ़ना चाहते हैं तो उन्‍हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी।

छात्रों की स्‍कूलों में उपस्थिति अभिभावकों की लिखित सहमति से ही लागू होगी। इनके लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली SOP के आधार पर स्‍थानीय जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी SOP तैयार करेंगे।

राजस्थान: अस्पताल में लड़की का नग्न शव, कॉन्ग्रेस MLA बोले- प्रेम प्रसंग का मामला; परिजनों का रेप का आरोप

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रदेश के बांसवाड़ा जिले के खमेरा थानांतर्गत एक अस्पताल में नग्न अवस्था में एक लड़की का शव मिला है। इसकी जानकारी टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में दी गई है।

पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 302(हत्या), 366 (अपहरण) और 372 (वेश्यावृत्ति के लिए नाबालिग बच्चों को बेचना) में मामला दर्ज किया है। परिवार के बार-बार अपील करने के बावजूद कथित तौर पर अभी तक मृतका का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। टाइम्स नाऊ के अनुसार, घटनास्थल से फरार होने से पहले आरोपित ने पीड़िता को अस्पताल में छोड़ा था।

परिवार का दावा है कि उनकी लड़की का बलात्कार किया गया और जहर देकर मारा गया। लेकिन, तब भी पुलिस ने इस मामले में आरोपित के ख़िलाफ़ रेप की धारा नहीं लगाई। इसी बीच घटोल के कॉन्ग्रेस एमएलए हरेंद्र निनामा ने लड़की पर हुए अत्याचारों को तुच्छ बताने के प्रयास में पूरे घटनाक्रम को प्रेम-प्रसंग से जोड़ दिया।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि किसी कॉन्ग्रेस नेता ने रेप के मामले को ‘छोटा’ बताने का प्रयास किया हो। इससे पहले जब दो नाबालिग लड़कियों की खबर बारां से सामने आई थी, जिन्हें कोटा,जयपुर, अजमेर ले जाकर 3 दिनों तक रेप किया गया, तब भी प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्विटर पर यह दावा कर दिया था कि नाबालिगों के साथ जबरदस्ती नहीं हुई और वह अपनी मर्जी से लड़कों के पास गई थी।

राजस्थान के सीएम ने ट्वीट कर बताया था कि लड़कियों ने सीआरपीसी सेक्शन 164 के बयान में मजिस्ट्रेट के सामने खुद स्वीकार किया है कि उन्हें लड़कों द्वारा मजबूर नहीं किया गया था। इसके अलावा सीएम ने उन लड़कों के भी नाबालिग होने का दावा अपने ट्वीट में किया।

बता दें कि प्रदेश सीएम का बयान ऐसे मामले में सामने आया था, जहाँ दोनों पीड़ित बहनों ने कथित तौर पर कैमरे पर स्वीकार किया था कि दोनों लड़कों ने उनका अपहरण कर लिया था और उन्हें नशीली दवा देकर उनका कई दिनों तक बलात्कार किया।

हैदराबाद: फिरोज खान के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ANI के पत्रकार पर किया हमला, देखें Video

तेलंगाना में फिरोज खान के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ANI के पत्रकार पर हमला किया। यह घटना तब हुई जब हाथरस केस में विरोध दर्ज कराने के लिए कॉन्ग्रेस कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद के टैंक बंद इलाके में रैली निकाली थी।

कथित तौर पर, रैली के लिए कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और पार्टी के वरिष्ठ नेता आंबेडकर की प्रतिमा के पास इकट्ठे हुए थे। प्रदर्शन के दौरान तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के प्रमुख उत्तम कुमार रेड्डी भी मौजूद थे। रैली की शुरुआत गाँधी भवन से हुई, लेकिन पहले से परमिशन नहीं लेने की वजह से उन्हें रोक दिया गया।

उसी दौरान एएनआई के एक पत्रकार अब्दुल बशीर ने कॉन्ग्रेस नेताओं की बाइट लेने की कोशिश की। इसी दौरान कॉन्ग्रेस के प्रमुख नेता फिरोज़ खान से उनकी बहस हो गई। बहस इस कदर बढ़ गया कि फिरोज़ और उनके कई समर्थक पत्रकार से हाथापाई पर उतर आए। घटनास्थल पर मौजूद अन्य पत्रकारों और पुलिसकर्मियों ने किसी तरह रिपोर्टर को उनसे बचाया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से फिरोज़ खान को पत्रकार पर हमला करते देखा जा सकता है। फिरोज़ खान से झड़प होते ही अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी आगे आ गए और उन लोगों ने भी ANI के रिपोर्टर को लात-घूँसों से मारा। इतना ही नहीं जब पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित पत्रकार को बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी कॉन्ग्रेस के गुंडों ने धक्का-मुक्की की।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर अपनी दादागिरी दिखाने के लिए गुंडागर्दी का सहारा लिया है। हाल ही में कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्रीय समाचार पत्र, भूमिकल समचार के संपादक कमल शुक्ला को भी कॉन्ग्रेस के गुंडों ने सड़क पर घसीटते हुए पीटा था। उन पर धारदार हथियार से हमला भी किया गया था। यह घटना छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कांकेर पुलिस स्टेशन से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हुई थी। शुक्ला ने अपने बयान में कहा था कि कुछ लोगों के एक समूह ने पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते ही उनको घेर लिया था। उनको पीटा गया और धारदार हथियार से हमला किया गया।

चीनी माल पर सख्ती से एक्सपोर्ट सेक्टर में 5.27% का उछाल, रेलवे के राजस्व में भी 13.54% का इजाफा

देश में कोरोना महामारी के प्रकोप के बावजूद कई सेक्टर्स में धीरे-धीरे रिकवरी होनी शुरू हो गई है। इनमें से एक निर्यात (एक्सपोर्ट) का क्षेत्र भी है। पिछले साल के मुकाबले इस क्षेत्र में सालाना आधार पर 5.27% की वृद्धि हुई है। इसकी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी है।

उन्होंने गुरुवार (अक्टूबर 1, 2020) को बताया कि लगातार 6 महीने की गिरावट के बाद देश का निर्यात, सितंबर महीने में सालाना आधार पर 5.27 प्रतिशत बढ़कर 27.4 अरब डॉलर रहा। उन्होंने इसे अर्थव्यवस्था में तेज गति से होने वाली रिकवरी के संकेत कहा। 

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड… भारतीय माल का निर्यात पिछले साल की तुलना में इस साल सितंबर में 5.27% बढ़ा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की तेजी से रिकवरी करने का एक और संकेत है, क्योंकि इसने कोविड पूर्व के स्तर के पैरामीटर को पार किया है।” 

बता दें कि सितंबर 2019 में 26.02 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था। मगर, कोविड-19 महामारी और इसके कारण वैश्विक स्तर पर माँग में कमी से इस साल मार्च से ही निर्यात में गिरावट जारी थी। पेट्रोलियम, चर्म उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात में गिरावट देखने को मिल रही थी।

बाजार के जानकार व निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा, “यह उम्मीद के अनुरूप है। इसका कारण यह है कि चीन विरोधी धारणा से काफी ऑर्डर मिले हैं।” उन्होंने कहा कि अगर भारत वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस), जोखिम निर्यात और आरओडीटीईपी (निर्यात उत्पादों पर शुल्कों तथा करों में छूट) से जुड़े मसलों का समाधान हो जाता है तो निर्यातक और अच्छा कर सकते हैं।

वहीं, सितंबर महीने के आँकड़े पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (TPCI) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि निर्यात रिकवरी के रास्ते पर है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार अब खुल रहा है और खरीदारों ने ऑर्डर देने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा, “खाद्य एवं कृषि क्षेत्र का निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा, क्योंकि इनका प्रदर्शन खराब दौर में भी बेहतर रहा।”

भारतीय रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि

इसी प्रकार रेलवे क्षेत्र में भी प्रगति के नए आयाम देखने को मिल रहे हैं। निर्यात क्षेत्र में सालाना आधार पर वृद्धि के साथ ही भारतीय रेलवे में भी उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। सितंबर में रेलवे के राजस्व में 13.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके मतलब साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर है।

रेलवे के अनुसार माल ढुलाई इस महीने में 15.35 प्रतिशत बढ़कर 10.212 करोड़ टन रहा जो एक साल पहले इसी महीने में 8.853 करोड़ टन था। पिछले साल रेलवे को सितंबर माह में 8,176.29 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं इस साल रेलवे ने माल ढुलाई से 9,896.86 करोड़ रुपए कमाए। इसका मतलब साफ है कि इस बार भारतीय रेलवे को माल ढुलाई में पिछले साल के मुकाबले 1,180.57 करोड़ रुपए का फायदा हुआ और 13.54%की वृद्धि हुई। 

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा, “इन चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद, भारतीय रेलवे ने व्यवसाय विकास के लिए कई पहल की हैं और माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए अनेक शुरुआत की हैं, जिसका परिणाम सितंबर महीने में आया है।”

हरियाणा में 6 मुस्लिम परिवारों के 35 लोगों ने की घर वापसी, कहा- हमारे पूर्वज हिन्दू थे, दबाव बना कर उन्हें कराया गया था इस्लाम कबूल

हरियाणा में 6 मुस्लिम परिवारों के कुल 35 सदस्यों ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया या जिसे घर वापसी कहना ज़्यादा बेहतर होगा। धमतान साहिब गाँव के लगभग 35 लोगों ने सनातन पद्धति और रीति-रिवाज़ों से अपने पूर्वजों की ओर लौट आए। मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है कि घर वापसी करने वाले लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। 

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ इन लोगों ने कहा कि सदियों पहले उनकी पीढ़ियों पर दबाव बना कर उन्हें इस्लाम कबूल कराया गया था। उनके तौर तरीके और गतिविधियाँ हिन्दू रीति रिवाज़ों पर आधारित थीं, अंततः उन्होंने अपने मूल धर्म की ओर वापस लौटने का फैसला लिया। कुछ ही महीनों पहले हरियाणा के ही धानोदा गाँव में भी कई मुस्लिम परिवारों की घर वापसी हुई थी। 

वहीं दूसरी तरफ गाँव के लोगों और हिन्दू परिवारों ने इस कदम का समर्थन किया है और ख़ुशी भी जाहिर की है। मुस्लिम परिवारों की घर वापसी के दौरान वहाँ पर यज्ञ और हवन का आयोजन भी कराया गया था, इस हवन में नज़ीर के कुल 5 परिवार और जंगा के परिवार ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया। सभी 35 लोग इस हवन में शामिल हुए और उन्होंने अंत में जनेऊ भी धारण किया। 

दलजीत, राजेश, सादिक, जंगा, सतवीर समेत कई अन्य लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन का निर्णय लिया है। ऐसा करने के लिए उन पर किसी ने दबाव नहीं बनाया था। गाँव वालों का यहाँ तक कहना था कि इन लोगों के परिवार हिन्दू रीति रिवाज़ों का ही पालन करते थे, त्यौहार भी धूम धाम से मनाते थे और अपने बच्चों के हिन्दू नाम ही रखा करते थे। परिवारों ने इस बात की जानकारी दी क्योंकि सदियों पहले उनके पूर्वज हिन्दू ही थे, उनकी परम्पराएं भी हिन्दू तौर तरीकों पर आधारित थीं। 

इसके अलावा यह होली, दिवाली और नवरात्र जैसे त्यौहार भी मनाते थे। इन परिवारों के बीच सबसे बड़ा मुस्लिम पहलू यही था कि ये मरने वालों को दफ़न करते थे। घर वापसी के बाद सभी परिवारों ने घोषणा कर दी है कि उनके यहाँ मरने वालों का अंतिम संस्कार हिन्दू पद्धति के आधार पर होगा। इस मुद्दे पर बात करते हुए एडीएम नरवना संजय बिश्नोई ने भी जानकारी दी। 

उन्होंने कहा कि फ़िलहाल उन्हें इस तरह की घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद उनका कहना था कि परिवारों के पास इस बात की आज़ादी है कि वह जिस धर्म को चाहें उसे स्वीकार करें। इस दौरान इकलौती महत्वपूर्ण बात यही कि ऐसा उन्होंने अपनी मर्ज़ी से किया हो न कि किसी के दबाव में आकर।  

हाथरस केस: पीड़िता और माँ के सबसे पहले बयानों का स्पष्ट वीडियो सामने आया, गला दबाने की बात

उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित बुलगढ़ी ग्राम में हुई घटना को लेकर सोशल मीडिया से लेकर मुख्पयधारा की मीडिया में कई प्रकार की बातें चल रही हैं। एक ओर जहाँ राजनीतिक दल इस घटना का राजनीतिकरण करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं तो वहीं इस सब उठा-पटक के बीच शायद तथ्य बहुत पीछे छूटते भी नजर आ रहे हैं।

घटना के वक्त मौके पर मौजूद लोगों से लेकर, अस्पताल में पीड़िता के पहले बयान, लड़की के भाई द्वारा स्वयं लिखित पहली तहरीर के बाद अब घटना के फौरन बाद मृतका की माँ का दिया गया सबसे पहला बयान सामने आया है। इन वीडियो को शेयर करने वालों का दावा है कि मृतका की माँ ने घटना के बाद जो सबसे पहले बयान दिए थे, उनमें कहीं भी बलात्कार का जिक्र नहीं था।

ट्विटर पर मृतका की माँ का एक वीडियो शेयर करते हुए ऋषि बागरी ने लिखा है – “यूपी को बदनाम करने की साज़िश रचने वालों को एक्सपोज़ करने वाला वीडियो, घटना के तत्काल बाद माँ का असली बयान।”

इस वीडियो में मृतका की माँ कहते सुनी जा सकती हैं – “आज तो कुछ बात ही नहीं थी, हम घास काट रहे थे। अब पीछे से कोई आ जाएगा तो हमें कैसे पता चलेगा? यही बात है, और कोई बात नहीं है। छोरा… पीछे से ही आ गया और बाजरे में खींच कर ले गया। संदीप नाम था उसका। गाँव का ही लड़का है, ठाकुरों का। रस्सी से उसने गर्दन ‘काट’ दी। मैं तो देख भी नहीं पाई, मारा-मारी हो रही थी।”

इस वीडियो में पीछे पीड़िता लेटी हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में लड़की ने जो कहा वो भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है लेकिन लड़की ने भी संदीप का नाम स्पष्ट रूप से लिया है और किसी का नाम वह नहीं बोल रही, न ही माँ ने किसी और का नाम लिया। घटना के समय पीड़िता की माँ कुछ ही दूर पर थी।

बताया जा रहा है किये वीडियो इस घटना के फ़ौरन बाद के हैं जब तक कि यह मुद्दा सनसनी नहीं बना था। वहीं, शुरुआत के ही एक अन्य वीडियो में, पीड़िता की माँ का बयान था, “अकेला लड़का था संदीप जिसने मारा, पुरानी रंजिश चल रही थी!”

एक अन्य वीडियो में पीड़िता की माँ का कहना है कि हम तो (पीड़िता भी साथ में ) घास लेने गए थे, वहीं मारपीट हो गई, मैं कुछ दूर पे थी। पीड़िता की माँ आगे कहती हैं, “अकेला लड़का था संदीप जिसने मारा, पुरानी रंजिश चल रही थी!”

इस ट्वीट में पीड़िता की माँ का बयान सुन सकते हैं –

पीड़िता का वीडियो उनकी माँ के बयान के बाद बनाया गया था, जिसमें वह अपनी पूरी जीभ भी दिखा रही हैं और गला दबाने की बात कह रही हैं।

घटना के कुछ देर बाद रिकॉर्ड किए गए वीडियो में पीड़िता और उनकी माँ ने बलात्कार की बात नहीं कही है। इसमें उन्होंने मुख्य अभियुक्त का नाम लिया है और हत्या के प्रयास की बात की है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का कहना है कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ बलात्कार नहीं हुआ, बल्कि मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं।

घटना के फ़ौरन बाद पीड़िता और उनकी माँ के बयान को आप इन वीडियो में देख सकते हैं –

हाथरस कांड

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ की अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई। उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। इस मामले ने देशव्यापी आक्रोश देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना मंगलवार रात लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने बाद में कहा था कि दाह संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता मौजूद थे।

ताहिर ने युवती को बनाया बंधक और 3 महीने तक करता रहा दुष्कर्म: चंगुल से छूटने के बाद महिला ने पुलिस को बताई आपबीती

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में ताहिर नाम के कपड़ा व्यापारी ने एक युवती को 3 महीने तक बंधक बना कर अपने फ़्लैट में रखा। इस अवधि के दौरान आरोपित ने युवती के साथ दुष्कर्म और अत्याचार किया। किसी तरह युवती उस व्यक्ति के चंगुल से छूटी और फिर उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित ताहिर के विरुद्ध मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भोपाल स्थित नदीम प्रेस रोड कोतवाली में आरोपित ताहिर की फैशन अड्डा नाम से कपड़ों की दुकान चलाता था। एक दिन पीड़िता उस युवक की दुकान पर ख़रीददारी करने पहुँची थी तभी ताहिर ने उसे बहला फुसला कर अपने झाँसे में ले लिया। इसके बाद वह युवती को भोपाल के रेतघाट तलैया स्थित अपने फ़्लैट लेकर गया। जहाँ उसने युवती को बंधक बना लिया। इसके बाद उसने लगातार 3 महीनों तक युवती का शारीरिक शोषण किया और उसे यातनाएँ दी। शोषण और अत्याचार का यह सिलसिला जुलाई महीने से लगातार चल रहा था।  

इस मुद्दे पर बात करते हुए तलैया थाना के थाना प्रभारी डीपी सिंह ने भी कई जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपित ताहिर फैशन अड्डा नाम से कपड़ों की दुकान चलाता था। युवती को बंधक बनाने के बाद ताहिर ने उस पर शादी का दबाव भी बनाया था लेकिन पीड़िता ने उसकी यह बात स्वीकार नहीं की। पीड़िता ने कई बार वहाँ से भागने का प्रयास किया लेकिन ताहिर फ़्लैट बंद करके जाता था इसलिए युवती कहीं जाने में असमर्थ थी। 

कई प्रयासों के बाद वह आरोपित के चंगुल से छूट कर आई और सीधे परिजनों के पास गई। उसने अपने परिजनों से पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद उसने आरोपित ताहिर के विरूद्ध मामला भी दर्ज कराया। इसके बाद थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि कि पुलिस ने ताहिर के विरुद्ध दंड संहिता की धारा 376 (2), 366, 344, 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपित को भोपाल के इब्राहिमपुरा इलाके से गिरफ्तार किया था।    

मुख्य सलाहकार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पहली महिला मेलानिया ट्रंप कोरोना पॉजिटिव, ट्वीट कर दी जानकारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। उनके अलावा अमेरिका की पहली महिला (उनकी पत्नी) मेलानिया ट्रंप भी कोरोना वायरस से प्रभावित पाई गई हैं। उन्होंने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा, “आज मैं और @FLOTUS कोविड 19 पॉजिटिव पाए गए हैं। हम बहुत जल्द अपनी क्वारंटाइन अवधि शुरू करेंगे और बचाव के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएँगे।” 

इसके कुछ ही घंटों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “हॉप हिक्स, जो बिना आराम किए लगातार घंटों काम करता है वह कोरोना वायरस से प्रभावित है, भयावह! देश की पहली महिला और मैं हमारी जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। इस दौरान हम अपनी क्वारंटाइन अवधि की तैयारियाँ शुरू करने वाले हैं।” साथ ही उन्होंने देश के लोगों को पूरी सावधानी बरतने का निवेदन भी किया था।   

हॉप हिक्स अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उच्च सलाहकार हैं। गुरूवार (1 अक्टूबर 2020) को लक्षण नज़र आने के बाद उन्होंने अपनी कोरोना वायरस जाँच कराई थी। जाँच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद से ट्रंप और उनके साथ मौजूद अन्य अधिकारियों ने अपनी कोरोना जाँच करवाई थी। इसके अलावा हॉप हिक्स राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लगातार ‘एयर फ़ोर्स वन’ में यात्रा करते हैं। इतना ही नहीं हाल ही में हुए राष्ट्रपति डिबेट और क्लेवलैंड में भी वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ मौजूद थे। इस दौरान कई अन्य दिग्गज अधिकारी भी शामिल हुए थे।

वाइट हाउस की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने साथ मौजूद रहने वाले हर छोटे – बड़े अधिकारी और कर्मचारी के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हैं। इसके अलावा वह देश के लोगों का भी पूरा ध्यान रखते हैं, उनके मुताबिक़ कोरोना वायरस महामारी के संबंध में जारी किए गए हर दिशा निर्देश का पालन बेहद ज़रूरी है। ताकि इस महामारी के प्रभाव को कम से कम किया जा सके।