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आंध्र प्रदेश में लगातार हो रहे मंदिरों पर हमले: चंद्रबाबू नायडू ने उठाया CM रेड्डी की चुप्पी पर सवाल, कहा- वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर बढ़ रहे हमलों के मद्देनजर टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को प्रदेश के सीएम पर आरोप लगाया कि इतने मामले आने के बावजूद उन्होंने अभी तक एक भी मंदिर में जाने की ज़हमत नहीं उठाई। 

अपने पार्टी नेताओं को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम चाहे कोई भी धर्म का अनुसरण करता हो, मगर उसका फर्ज है कि वह हर धर्म के श्रद्धालुओं को समानता और न्याय दें। उन्होंने कहा कि ये आज की सरकार की जिम्मेदारी है वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में कई मंदिरों पर हमले के मामले सामने आए हैं। अभी हाल की घटना में उपद्रवियों ने मकापेटा गाँव में प्राचीन काशी विश्वेश्वरा स्वामी मंदिर में नंदी की प्रतिमा को तोड़ दिया था। इसके अलावा मंदिर से आभूषण और कई कीमती चीजें चोरी हुई थी। 

इसी तरह प्रदेश के पूर्वी गोदावरी इलाके में अंतर्वेदी एक तीर्थस्थल है। वहाँ कुछ समय पहले एक 62 साल पुरानी श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा की मूर्ति को जलाकर राख करने का मामला सामने आया था। अजीब बात यह थी जिस समय घटना हुई, उस दौरान सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे। इस घटना के उजागर होने के बाद कई हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने प्रदर्शन किया था और ईसाई मिशनरी ग्रुप्स पर आरोप लगाया था।

नेल्लोर में रथ पर जब हमला हुआ, तो पुलिस ने कहा कि यह काम मानसिक तौर पर अस्थिर इंसान ने किया है। जिस पर चिलकुर मंदिर के डॉ सीएस रंगाराजन ने कहा था कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में संयोजित रूप से हिंदू मंदिरों पर हमले हो रहे हैं।

यहाँ बता दें कि नेल्लोर के प्रसन्ना वेंकटेश्वर मंदिर में पिछली फरवरी को भी एक रथ जलाया गया था। उसी महीने, गुंटूर जिले के रोम्पीचर्ला गाँव में श्री वेणु गोपाल स्वामी मंदिर में देवताओं की मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था। इसके अलावा श्री गणेश की मूर्ति भी वहाँ से कथित तौर पर चोरी हो गई थी।

फिर जनवरी में ही, अज्ञात उपद्रवियों ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पीथापुरम शहर में हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियों को तोड़ दिया था। साथ ही उन्होंने उन बैनरों को भी जला दिया, जिन पर हिंदू देवताओं की तस्वीरें छपी थीं।

नायडू ने कल ऐसे ही मामलों का उल्लेख करते हुए वाईएसआरसी पर कई अन्य आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह पार्टी झूठों की और जालसाजों की है। उनके नेता ब्लैकमेल करने, बरगलाने में माहिर हैं। अपनी पार्टी को सेकुलर कहते हुए कहा जब तक उनकी पार्टी सत्ता में थी उन्होंने हर धार्मिक स्थल की रक्षा की। वहीं वाईएसआरसी सिर्फ़ टीडीपी के ख़िलाफ झूठी जानकारी के साथ अभियान चलाती रही।

नायडू ने इस बात का भी जिक्र किया कि यह शर्म की बात है वाईएसआरसी सांसद, टीडीपी को निशाना साधने के लिए संसद परिसर में बैठें हैं न कि प्रदेश की जनता के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने कभी अपने आंदोलनों में किसानों का मुद्दा नहीं उठाया न कभी केंद्र से सवाल किए। उन्होंने पूर्व मंत्री अत्चन्नािदु को 80 दिन तक जेल में डाले जाने पर सत्ता पक्ष की निंदा की। साथ ही कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने लेबर मिनिस्टर गुम्मानुर जयाराम के ख़िलाफ़ एक्शन नहीं लिया जबकि  ईएसआई स्कैम में उनकी संलिप्ता के पर्याप्त सबूत थे।

दीपिका पादुकोण के खिलाफ NCB जुटा रही सबूत, जल्द भेजा जा सकता है समन: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के ख़िलाफ़ सबूत जुटा कर एक ओर जहाँ नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उन्हें जल्द समन भेजने की तैयारी में जुटी है, वहीं उनकी टैलेंट मैनेजर करिश्मा प्रकाश से इस मामले में पूछताछ जारी है। उनके अलावा सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह, सिमोन खंबाता को भी इस हफ्ते तक एनसीबी द्वारा समन भेजे जाने के पूरे-पूरे आसार हैं।

दीपिका का नाम ड्रग मामले में पड़ताल के दौरान इसी हफ्ते सामने आया है। इस बीच उनकी व्हॉट्सएप की एक बातचीत भी वायरल हो चुकी है। उस चैट को लेकर दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण उसमें किसी k नाम के शख्स से कथित तौर पर हैश की माँग कर रही हैं। अब यह ‘k’ कौन है? इसी को लेकर कयास लगाए गए हैं कि वह करिश्मा प्रकाश हैं, उनकी मैनजर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2017 को हुई यह बातचीत इस प्रकार है:

10:03AM (+91-992——-) D(D मतलब दीपिका माना जा रहा है):K..तुम्हारे पास माल है?
10:05 AM (+91-961——-) ‘K’: मेरे पास है लेकिन घर पर है। मैं बांद्रा में हूँ।10:05, K: मैं अमित से पूछ सकती हूँ अगर आपको चाहिए।
10:07, दीपिका:हाँ!! प्लीज
10:08, K: अमित के पास है, वो इसे ला रहा है।
10:12, दीपिका: हैश न?
10:12, दीपिका: वीड नहीं।
10:14, K: आप कोको किस समय आ रहे हो?
10:15: दीपिका: 11:30/12:00
10:15: दीपिका: शाल किस समय तक है वहाँ?
K: मुझे लगता है कि उसने 11:30 तक कहा है क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और जाना है

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पैसों की हेरफेर के दौरान कुछ चैट्स को खंगाला था, उसी के बाद उन्हें ड्रग एंगल के सबूत मिले, जिसे उन्होंने एनसीबी को भेज दिया। एनसीबी ने मामला संभालते ही सारी पड़ताल की और करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया। इमें रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती का नाम भी पूरी पड़ताल में शामिल है।

बता दें कि ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती 8 सितंबर को गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद से वे मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रिया पर आरोप है कि वे सुशांत के लिए ड्रग्स का प्रबंध करती थीं। दावा है कि रिया ने करीब 25 बॉलीवुड सेलेब्स का नाम एनसीबी के सामने लिया है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: जिसे बताया हेट स्पीच, वो अनुवाद ही गलत… मधु किश्वर ने दायर की हस्तक्षेप याचिका

सुदर्शन टीवी के शो ‘यूपीएससी जिहाद’ का मामला इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में गरमाया हुआ है। ऐसे में मधु पूर्णिमा किश्वर ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर पर भी दी है। 

उन्होंने बताया है कि कोर्ट में उनके बयान का गलत अनुवाद करके उसे हेट स्पीच के सबूत की तरह पेश किया गया। उनकी याचिका बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट पर भी आधारित है। यह याचिका कोर्ट में वकील रवि शर्मा की ओर से डाली गई है। 

अपने ट्विटर पर मधु पूर्णिमा किश्वर लिखती हैं, “सुदर्शन टीवी के शो यूपीएससी जिहाद में डिबेट के दौरान मेरी टिप्पणी के छोटे से हिस्सा का बेहूदा अनुवाद करके, कोर्ट में हेटस्पीच के सबूत के तौर पर पेश किए जाने के बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 15 सितंबर को ‘यूपीएससी जिहाद’ शो के टेलीकास्ट के बाद वकील फिरोज इकबाल खान ने मधु पूर्णिमा किश्वर और शांतनु गुप्ता की टिप्पणी का हवाला दिया था। इसके बाद कोर्ट ने बिंदास बोल शो के शेष एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी।

इकबाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि किश्वर ने शो में कहा, “कोर्ट ने खुद ही अपने ऊपर सवाल खड़ा कर लिया है। उन्हें लगता है कि गज़वा-ए-हिंद के मिशन को पूरा करना उनका अधिकार है। वे इसे अपना अधिकार मानते हैं। वे समझते हैं कि पूरे राष्ट्र को कन्वर्ट किया जाना चाहिए। वे घुसपैठ करके सार्वजनिक कार्यालयों पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने पहले दिन से शिक्षा मंत्रालय में घुसपैठ की है।”

अपनी ‘हस्तक्षेप याचिका’ में किश्वर ने कहा है कि उन्हें सुरेश चव्हाणके को दिए अपने बयान पर पूरा भरोसा है और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किश्वर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सुदर्शन टीवी के शो में सरकार को बायपास करने की कोशिश है, क्योंकि सरकार ही फ्री स्पीच पॉलिसी निर्धारित करने के लिए फाइनल अथॉरिटी है।

इस पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता ने याचिकाकर्ता पर यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके (किश्वर के) बयानों को गलत तरह से पेश किया। इस आवेदन में उन्होंने लिखा कि वह सेकुलरिज्म में विश्वास करती हैं। उनका कहना है कि हर इंसान की जन्मजात स्वतंत्रता वास्तव में अपना रास्ता और उद्देश्य खोजने की होती है।

गौरतलब है कि इससे पहले सुदर्शन न्यूज केस में ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।

‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया था, “सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”

यहाँ बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी, महेश जेठमलानी और अधिवक्ता गौतम भाटिया और शाहरुख आलम भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए उपस्थित हो चुके हैं। अब इस मामले को आज यानी 23 सितंबर को दोपहर 2 बजे उठाया जाएगा।

गौरतलब है सुदर्शन न्यूज के ‘बिंदास बोल’ शो पर 15 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रथम दृष्टया अवलोकन करने के बाद शो के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा ​​और केएम जोसेफ की एक पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा होस्ट किया गया शो ‘बिंदास बोल’ सिविल सेवाओं में समुदाय विशेष के प्रवेश को सांप्रदायिक रूप दे रहा था।

वहीं, जामिया छात्रों की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट शादान फरासत ने कहा था, “यह सुनिश्चित करना राज्य की सकारात्मक ज़िम्मेदारी है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से निकले अधिकारों का एक नागरिक के ‌लिए उल्लंघन न हो। अगर उनका उल्लंघन किया जाता है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट चुपचाप देखता रहेगा?” उन्होंने तर्क दिया था कि ‘हेट स्पीच’ कानून मौजूदा मामले में लागू होता है, शो की भाषा और भंगिमा के कारण शेष कड़ियों की टेलीकास्टिंग पर रोक लगाने के लिए ठोस मामला बनाता है।

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा अपने बेबाक बोल के लिए जाने जाते हैं। टीवी स्टूडियो में वो राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारों को भी आइना दिखाने से नहीं चूकते। फिर से उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ पर ही एक बहस में हिस्सा लेते हुए अर्बन नक्सलियों के लॉजिक का जवाब दिया।

बॉलीवुड में ड्रग्स नेटवर्क में एक के बाद एक फ़िल्मी हस्तियों के नाम सामने आ रहे हैं और बहस में NCB की कार्रवाई पर चर्चा हो रही थी, जिसमें संबित पात्रा और मेघना पंत भी हिस्सा ले रहे थे।

इस बार ‘अर्बन नक्सलियों’ ने अजीबोगरीब लॉजिक दिया कि हिन्दुओं के भगवान लोग भी तो ड्रग्स लेते हैं। साथ ही वामपंथियों ने भगवान शिव के ड्रग्स लेने की बात करते हुए न सिर्फ हिन्दुओं को नीचा दिखाने की कोशिश की, बल्कि ड्रग्स लेने वाले बॉलीवुड सेलेब्स का भी बचाव किया। साथ ही लॉजिक था कि किसी की प्राइवेट ज़िंदगी को क्यों निशाना बनाया जाए, अगर वो आनंद के लिए ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वामपंथियों ने इसे ‘प्राइवेसी में छापेमारी’ करार दिया था। इसके जवाब में संबित पात्रा ने पूछा कि आखिर अर्बन इलीट लोग इस तरह के गँवार लॉजिक लेकर कैसे आ जाते हैं? ‘इंडिया टुडे’ में राहुल कँवल के शो में लेखिका मेघना पंत ये लॉजिक लेकर आईं। उनका कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

संबित पात्रा ने कहा कि मेघना पंत जैसे लोगों की ‘क्लासिकल हिपोक्रिसी’ ये है कि वो हिन्दू धर्म छोड़ कर किसी अन्य मजहब के देवी-देवताओं के बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि एक तो इन्होंने भगवान शिव को ड्रग्स की चर्चा में घसीट लिया, ऊपर से इनकी मुस्कराहट देखिए। उन्होंने कहा कि ऐसे तथाकथित ‘हाई एन्ड एलीट्स’ के साथ यही समस्या है, जो ड्रग्स के ‘एन्ड यूजर’ वाला बहाना देते हैं।

संबित पात्रा का जवाब 8:20 के बाद (वीडियो साभार: इंडिया टुडे)

संबित पात्रा ने कहा कि हमारे देश में जो चीज गैर-क़ानूनी है, वो गैर-कानूनी है। जैसे- हत्या। उन्होंने कहा कि किसी ने ‘प्राइवेट’ में किसी की हत्या कर दी तो क्या उसे इसीलिए छोड़ दिया जाएगा क्योंकि ये उसकी प्राइवेट लाइफ है? उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की हत्या/आत्महत्या की बात करते हुए कहा कि इसके जो भी दोषी हैं, उन्हें सिर्फ इसीलिए नहीं छोड़ दिया जा सकता है क्योंकि ये उन्होंने अपनी ‘प्राइवेट लाइफ’ में किया।

संबित पात्रा ने कहा कि जब एन्ड यूजर्स से पूछताछ होगी, वो नाम उगलेंगे – तभी तो बड़े ड्रग्स माफिया को पकड़ा जा सकेगा, उन पर शिकंजा कसा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अगर ड्रग्स के एन्ड यूजर हैं तो फिर उनका कोई न कोई स्रोत होगा और इस तरह से पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा। उनके इस जवाब के बाद मेघना पंत बगले झाँकने लगीं। वहीं शो का संचालन कर रहे पत्रकार राहुल कँवल ने भी इस जवाब की तारीफ की।

इससे पहले संबित पात्रा ने इसी चैनल पर बताया था कि आखिर राजदीप सरदेसाई ने रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू क्यों लिया। उन्होंने कहा था कि ये सब इसीलिए किया गया, क्योंकि इसके पीछे एक खास एजेंडा था। उन्होंने कहा था कि वो किसी का नाम नहीं लेंगे, लेकिन 13 दिसंबर 2001 को एक रिपोर्टर ने क्या किया था, वो ये बताना चाहेंगे। उन्होंने याद दिलाया था कि कैसे एक पत्रकार (सरदेसाई) ने संसद भवन पर हुए हमले को अपनी ज़िंदगी का ‘बेस्ट डे’ बताया था।

राजनीति में आएँगे ‘रॉबिनहुड बिहार के’? संस्कृत से UPSC क्लियर करने वाले गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में भी दिया था इस्तीफा

माफिया अपराधी माँगे दुआ भगवान से.. चोर घूसखोर काँपे इनके नाम से..
हिल जाए इलाका इनकी एक दहाड़ से.. डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय रॉबिनहुड बिहार के..
यारों के यार हैं ये जनता के हीरो.. इनका काम सबसे मस्त है..
हर गली मोहल्ले में चर्चा है यारों कि इंसान जबरदस्त है
मसीहा गरीब के हैं बक्सर गंगा पार के
डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय रॉबिनहुड बिहार के..

ये पंक्तियाँ हैं बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पर बने गाने ‘रॉबिनहुड बिहार के’ का, जिसे दीपक ठाकुर ने लिखा, गाया और कम्पोज किया है। गुप्तेश्वर पांडेय का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है क्योंकि वो अक्सर लाइमलाइट में रहे हैं और अपने कामकाज के सख्त तरीके को लेकर मीडिया की चर्चा में रहते हैं। उनके बयान भी अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं। ऐसे में अब उनके इस्तीफे को लेकर चर्चा हो रही है।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है, जिसे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने स्वीकार भी कर लिया। गुप्तेश्वर पांडेय ने जानकारी दी है कि वो बुधवार (सितम्बर 23, 2020) की शाम अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लाइव आकर जनता के समक्ष अपनी बात रखेंगे। ध्यान देने वाली बात है कि बिहार में 2 महीने में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। वो 5 महीने में ही रिटायर होने वाले थे।

गृह विभाग ने मंगलवार की रात ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी। हाल ही में बक्सर के जदयू जिलाध्यक्ष के साथ उनकी तस्वीर वायरल हुई थी, जिसके बाद उनके राजनीति में आकर चुनाव लड़ने की सम्भावना जताई जा रही है। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले मुजफ्फरपुर के जोनल आईजी भी रहे हैं। एसपी, रेंज डीआईजी, एडीजी मुख्यालय और डीजी बीएमपी सहित कई पदों पर उन्होंने अपनी सेवाएँ दी हैं।

हालाँकि, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए कम से कम 3 महीने पहले आवेदन देने का नियम है लेकिन गुप्तेश्वर पांडेय की वरिष्ठता को देखते हुए बिहार सरकार ने उनके लिए नरमी बरती। केएस द्विवेदी के रिटायर होने के बाद उन्हें फ़रवरी 2019 में बिहार के डीजीपी का कार्यभार सौंपा गया था। जानने वाली बात ये है कि 11 वर्ष पहले 2009 में भी उन्होंने आईजी रहते वीआरएस ले लिया था। तब भी उनके राजनीति में आने की चर्चा हुई थी।

लेकिन, उन्होंने बाद में फिर से अपना वीआरएस वापस ले लिया था। अब उनके बाद बिहार में एसके सिंघल को डीजीपी का प्रभार सौंपा गया है। फ़िलहाल वो डीजी होमगार्ड के पद पर कार्यरत हैं। एसके सिंघल लम्बे समय से मुख्यालय में तैनात थे, जिसके बाद उन्हें डीजी के रूप में पदोन्नति मिली। इसके साथ ही बिहार में 3 आईपीएस अधिकारियों को इधर से उधर किया गया। सिंघल को पुलिस महकमे के चुस्त-दुरुस्त अधिकारियों में से एक में रखा जाता है।

जहाँ तक गुप्तेश्वर पांडेय की बात है, पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद उनका चयन आईआरएस के लिए हुआ था लेकिन वो अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसके बाद वो आईपीएस बनने में सफल रहे। उन्होंने 31 वर्षों तक पुलिस विभाग को अपनी सेवाएँ दीं। बिहार को लेकर उनके अनुभव का अंदाज़ा इसी से लगा लीजिए कि वो राज्य के 26 जिलों में किसी न किसी पद पर कार्यरत रहे हैं।

हालाँकि, गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले भी कहते रहे हैं कि अगर लोगों को लगेगा कि उन्हें नेता बनना चाहिए तो वो राजनीति में भी आएँगे ही। उनका जन्म 1961 में बक्सर के ही गेरुआ गाँव में हुआ था, जो सड़क, अस्पताल, बिजली और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कटा हुआ था। गुप्तेश्वर पांडेय खुद कहते हैं कि उन्होंने गंजी-बनियान पहन कर स्कूलिंग की है और उन्हें इंटर तक हिंदी बोलना भी नहीं आता था, वो भोजपुरी बोलते थे।

गुप्तेश्वर पांडेय के एक भाई किसान हैं और एक भाई मीडिया में हैं। एक बात रोचक है कि उन्होंने संस्कृत में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एमए का सेशन लेट होने के कारण वो यूपीएससी की तैयारी में लग गए। गुप्तेश्वर पांडेय खुद स्वीकारते रहे हैं कि उनके खानदान में कभी कोई उनसे पहले स्कूल ही नहीं गया। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हस्ताक्षर करने आता था। उनके पिता को पता तक नहीं था कि बेटा कहाँ पढ़ रहा है – वो साधु थे।

गुप्तेश्वर पांडेय ने ‘लल्लनटॉप’ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने एक औसत विद्यार्थी को आईएएस बनते देखा, जिसके बाद उन्हें भी तैयारी करने का मोटिवेशन मिला। जब गुप्तेश्वर पांडेय बेगूसराय में आए थे, तब माफिया अशोक सम्राट की वहाँ तूती बोलती थी और उसे ही वहाँ का अघोषित सरकार माना जाता था। तरह-तरह के कारखानों के माध्यम से वो अपना साम्राज्य चलाता था। गुप्तेश्वर पांडेय ने उन लोगों को जेल में डालना शुरू किया, जिन पर दर्जनों केस दर्ज थे।

दीपक ठाकुर का गाना ‘रॉबिनहुड बिहार के’ (वीडियो साभार: DT Production)

42 मुठभेड़ और 400 से अधिक अपराधियों को जेल भेज कर वो चर्चा में आए। यूपीएससी में संस्कृत को अपना विषय चुनने वाले गुप्तेश्वर पांडेय बिहार को लेकर खासे चिंतित रहे हैं और यहाँ विकास के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। सुशांत सिंह राजपूत मामले में उन्होंने जिस तरह से पीड़ित परिवार का साथ दिया और केस को सीबीआई तक भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उस दौरान उनकी सक्रियता सभी ने देखी।

वो गीत-संगीत में भी खासी रूचि रखते हैं। कुछ ही महीनों पहले उनके गाए गाने का एक एल्बम भी आया था। हाल ही में एक गाने के वीडियो में वो दिखे थे, जो उनके ही ऊपर था। अब देखना ये है कि गुप्तेश्वर पांडेय राजनीति में अगर आते हैं तो, वैसी ही धाक जमा पाएँगे या नहीं – जैसी उन्होंने पुलिस सेवा में जमाई है! कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार का करीबी होने के कारण वो जदयू में शामिल हों।

पूनम पांडे का पति है सैम अहमद, 11 दिन पहले ही दोनों ने की शादी… अब मोलेस्टेशन, मारपीट करने में गिरफ्तार

हाल ही में गुपचुप तरीके से शादी करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री पूनम पांडे के पति सैम अहमद बॉम्बे को पुलिस ने गोवा में कल (सितंबर 22, 2020) गिरफ्तार कर लिया। उनके ख़िलाफ़ पूनम ने मोलेस्टेशन, धमकी देने और मारपीट करने का आरोप लगाया था।

पुलिस में दर्ज श‍िकायत के मुताबिक, दक्ष‍िण गोवा के कानाकोना गाँव में पूनम पांडे किसी फिल्‍म की शूटिंग कर रही थीं। यह घटना तभी हुई। कानाकोना पुलिस थाने के इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम चव्‍हाण के अनुसार, पूनम ने अपनी श‍िकायत में कहा है कि सोमवार (सितंबर 21, 2020) की रात उनके पति सैम अहमद ने उन्‍हें मोलेस्‍ट किया और मारपीट की। इतना ही नहीं, पूनम ने यह भी कहा कि सैम अहमद बॉम्‍बे ने उन्‍हें अंजाम भुगतने की भी धमकी दी है।

पूनम की शिकायत के बाद उनके पति सैम अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि दक्षिण गोवा एसपी पंकज कुमार सिंह ने की है। उन्होंने बताया कि अभिनेत्री को प्रताड़ित, मारपीट और मारने की धमकी देने के लिए पुलिस ने सैम अहमद बॉम्बे को गिरफ्तार किया है। उनका अब मेडिकल टेस्‍ट होना है, जिसके बाद सैम को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

यहाँ बता दें कि अभी पिछले हफ्ते ही पूनम अपने पति के साथ हनीमून मनाने गईं थीं। इस दौरान पूनम अपने पति सैम बॉम्बे के साथ बेहद सिंपल नजर आईं थीं। उनकी माँग में सिंदूर था, हाथों में चूड़ा था और उन्होंने गले में मंगलसूत्र भी पहन रखा था।

उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री के 46 वर्षीय पति सैम अहमद पेशे से एक फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनका घर दुबई में है। उनके एक प्रोडक्शन हाउस का नाम बॉम्बे मैटिनी फिल्म्स भी है।

वहीं, पूनम पांडे कानपुर से हैं। उन्होंने साल 2013 में फिल्म नशा से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद से वह अपने बोल्ड फोटोशूट के कारण अक्सर चर्चा में रहीं। उन्होंने कई तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। सैम अहमद बॉम्बे के साथ उनका रिलेशन करीब तीन साल पुराना है। बीती 27 जुलाई को दोनों ने सगाई की थी और 10 सितंबर को सोशल मीडिया पर खबर दी थी कि उन्होंने शादी कर ली है।

हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर एक ऐसे लेखक थे, जो गद्य और पद्य – दोनों ही विधाओं में समान रूप से पारंगत थे। विद्रोह और क्रांति हो या फिर श्रृंगार और प्रेम, उन्होंने कविता की हर विधा में साहित्य रचे और अपनी कुशलता दिखाई। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को इतिहास का अच्छा ज्ञान था और द्वापर युग से उनका लगाव इतना था कि उन्होंने खुद स्वीकारा है कि वो समसामयिक समस्याओं के समाधान के लिए दौड़े-दौड़े हमेशा वहीं चले जाते हैं।

बेगूसराय के सिमरिया में जन्मे दिनकर संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू – हिंदी के अलावा इन चार भाषाओं के भी जानकार थे। मुजफ्फरपुर कॉलेज में बतौर हिंदी विभागाध्यक्ष और भागलपुर कॉलेज में बतौर उपकुलपति काम करने के बाद उन्होंने भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में सेवाएँ दीं। स्वाधीनता के बाद वो बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष रहे। 12 वर्षों तक सांसद रहे। फिर वो भागलपुर यूनिवर्सिटी में वो बतौर कुलपति लौटे।

यहाँ हम उन रामधारी सिंह दिनकर की बात करेंगे, जो राज्यसभा सांसद थे और जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सत्ता से सवाल पूछने और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों पर ऊँगली उठाने में कभी झिझक महसूस नहीं की। भारत-चीन युद्ध इतिहास का एक ऐसा ही प्रसंग है, जब नेहरू के मन से ये भ्रम मिट गया था कि अब अहिंसा का युग आ गया है और भारत को हथियारों व सेना की ज़रूरत ही नहीं है।

फ़रवरी 21, 1963 में राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है। उन्होंने बताया था कि गाँधी की अहिंसा मात्र अहिंसा ही नहीं थी बल्कि उसमें आग थी, क़ुर्बानी का तेज था और आहुति-धर्म की ज्वाला थी।

उन्होंने कहा था कि हम अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे, लेकिन साथ ही हम हथियारों से लैस होकर भी चलेंगे, ताकि हम उन भेड़ियों से अपनी प्राण-रक्षा कर सकें, जो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं।

ऐसा नहीं है कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने ये बात सिर्फ संसद में ही कही थी, बल्कि उनकी कविताओं में भी ये भाव दिखता है। शांति और अहिंसा की उन्होंने हमेशा प्रशंसा की है लेकिन साथ ही खुद की रक्षा के लिए, आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए और राष्ट्र के लिए हथियार उठाने के भी उन्होंने प्रेरित किया है।

उन्होंने ये स्वीकार करने में हिचक महसूस नहीं की कि भारत ने आज़ादी के बाद 15 वर्षों तक इस व्यावहारिक-धर्म की उपेक्षा की। ‘कुरुक्षेत्र’ की ये पंक्तियाँ देखिए, जो उनके संसद में कही गई बातों से एकदम मिलती-जुलती है:

छीनता हो सत्व कोई, और तू
त्याग-तप के काम ले यह पाप है।
पुण्य है विच्छिन्न कर देना उसे
बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ हो।
बद्ध, विदलित और साधनहीन को
है उचित अवलम्ब अपनी आह का;
गिड़गिड़ाकर किन्तु, माँगे भीख क्यों
वह पुरुष, जिसकी भुजा में शक्ति हो?
युद्ध को तुम निन्द्य कहते हो, मगर,
जब तलक हैं उठ रहीं चिनगारियाँ
भिन्न स्वर्थों के कुलिश-संघर्ष की,
युद्ध तब तक विश्व में अनिवार्य है।

रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में भीष्म के शब्दों में आज के सत्ताधीशों को शासन करने का तरीका सिखाया है और शत्रु से निपटने का गुर बताया है। भला इसके लिए उन्हें शरशैया पर पड़े भारतवर्ष के उस बूढ़े महावीर से अच्छा कौन मिलता, जिसने महाभारत जैसे पूरे युद्ध को देखा हो, उसमें हिस्सा लिया हो और कुरुवंश की कई पीढ़ियों को अपना मार्गदर्शन दिया हो। कुरुक्षेत्र में दिनकर शांति की वकालत करते हैं लेकिन ऐसी परिस्थितियों की भी बात करते हैं, जब युद्ध को टाला ही नहीं जा सके।

संसद में जब वो हथियारों से लैस होने की बात करते हैं तो ‘कुरुक्षेत्र’ में भीष्म पितामह के मुँह से भी यही कहलवाते हैं कि अपनी तरफ बढ़ रहे हाथ को विछिन्न कर देना पुण्य है, इसमें कोई पाप नहीं है। जिसकी भुजा में शक्ति है, उसे भला गिड़गिड़ा कर भीख माँगने की क्या आवश्यकता है? अगर कोई आपके साथ हिंसा कर रहा हो और आप त्याग-तप से ही काम चलाते रहें तो ये पाप है, ये ठीक नहीं है।

आज जब भारत-चीन का तनाव चरम पर है, हमें रामधारी सिंह दिनकर के इस भाषण को ज़रूर पढ़ना चाहिए। बल्कि आज सरकार पर सवाल उठा रहे विपक्ष को भी इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बड़े ही आसान तरीके से समझा दिया कि भारत ने क्या गलतियाँ कीं। दिनकर ने कहा कि दुनिया भर के देश अपने खाने के दाँत अलग और दिखाने के दाँत अलग रखते हैं लेकिन हमने सिधाई में आकर अपने दिखाने के दाँत को ही असली मान लिया।

रामधारी सिंह दिनकर ने तब के सत्ताधीशों को समझाया कि जो बातें हम नहीं समझ सके, उन्हें चीन ने हमारी आँखों में उँगली डाल कर समझा दिया। आखिर रामधारी सिंह दिनकर ने क्यों कहा था कि महात्मा गाँधी, सम्राट अशोक और तथागत बुद्ध, ये सभी इस देश के रक्षक नहीं है, बल्कि ये सब तो खुद रक्षणीय हैं। दिनकर इन तीनों को देश की शोभा, संस्कार, गौरव और अभिमान तो मानते थे लेकिन उनका कहना था कि इस संस्कार की रक्षा तभी होगी, जब गुरु गोविन्द सिंह, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई और भगत सिंह जैसे बटालियन हर वक़्त तैयार रहें।

दिनकर मानते थे कि हमारी सीमा पर हमें खतरा है लेकिन वो ये भी कहते थे कि खतरा हमारे प्रजातंत्र और जीवन-पद्धति पर भी है। उन्होंने सरकार से कहा था कि शारीरिक बल और बाहुबल की रक्षा के लिए हमने कुछ नहीं किया। उनका जोर था कि दंड, कुश्ती, बैठक और गदका, तलवार, पट्टा, भाल इत्यादि का युवाओं और बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाए। विश्व शांति की वो पैरवी करते थे लेकिन कहते थे कि ये किसी एक देश की जिम्मेदारी थोड़े है।

दिनकर को इस बात से दिक्कत थी कि जब नेता लोग विश्व शांति पर बोलने लगते हैं तो वो ऐसी बातें बोल जाते हैं, जो कवियों और संतों को बोलनी चाहिए। रामधारी सिंह दिनकर ने अपने उस ऐतिहासिक भाषण में कहा था कि अहिंसा और शांति बड़े ही श्रेष्ठ गुण हैं, लेकिन शरीर के आभाव में ये दुर्गति को प्राप्त होती है। तभी तो उन्होंने कहा था कि जिसके हाथ में बन्दूक नहीं है, वो शांति का समर्थ रक्षक सिद्ध नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा था:

“एक और बीमारी जो हमारे देश में पनप रही है, वो है अंतरराष्ट्रीयता की अति आराधना की बीमारी। जिसके भीतर राष्ट्रीयता नहीं है, वो अंतरराष्ट्रीय भी नहीं हो सकता। धरती की दो गतियाँ हैं। पृथ्वी अपनी धुरी के चारों ओर घूमती है, जो मनुष्य के राष्ट्रीय भाव का द्योतक है। पृथ्वी सूर्य के भी चारों भी परिक्रमा करती है, ये मनुष्य के अंतरराष्ट्रीय भाव का पर्याय है। जिस दिन ये पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमना बंद कर दे, उस दिन उसका सूर्य के चारों ओर घूमना भी अपने-आप बंद हो जाएगा। जिस व्यक्ति ने अपनी राष्ट्रीयता को तिलांजलि दे दी, उसकी अंतरराष्ट्रीयता छूछी है। देश को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो ये कहते फिरते हैं कि वो राष्ट्रीयता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीयता के प्रहरी हैं। मैं उस विचारधारा का भी समर्थन नहीं करता, जो कहता है कि चीन के आक्रमण से जो व्यथित हैं, वो प्रतिक्रियागामी है और जो अपमान पीकर जीन के लिए तैयार है, वो प्रगतिशील है।”

तो ये थी रामधारी सिंह दिनकर की राष्ट्रवाद को लेकर सोच। उनके कहने का मतलब था कि जो अपने देश का नहीं हुआ, वो विश्व का कैसे हो सकता है? पृथ्वी का उदाहरण देकर उन्होंने इसे भली-भाँति समझाया। आज जब अरुंधति रॉय जैसे लोग और उनके अनुयायी खुद को ‘वैश्विक नागरिक’ साबित करने की होड़ में भारत को हर मंच से भला-बुरा कहते हैं, आज दिनकर होते तो ऐसे लोगों को ज़रूर देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताते।

रामधारी सिंह दिनकर के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ (वीडियो साभार: RSTV)

उनका सीधा मानना था कि अपमान पीकर जीने की बात करने वाले जो कथित ‘प्रगतिशील’ हैं, वो चीन की करतूतों पर पर्दा डालना चाहते हैं। आज भी कॉन्ग्रेस और वामपंथी दल हैं, जो अपने बयानों में चीन की निंदा करना तो दूर की बात, अपने सरकार और सेना के बयानों तक का साथ नहीं देते। दिनकर कहते थे कि ऐसे लोग भारत को उसी हालत में ले जाना चाहते हैं, जो चीन के साथ फिर से भाई-भाई का नाता बैठा लें। ये तंज नेहरू पर था।

उनका कहना था कि जब बात देश की रक्षा की हो तो कैसी विचारधारा? कैसा दक्षिणपंथ और कैसा वामपंथ? आपकी विचारधारा दाएँ की हो या बाएँ की, देश की सेवा करने की तो इन दोनों को ही ज़रूरत है न? आज जब भारत-चीन तनाव के बीच ऐसी शक्तियाँ फिर से प्रबल होने की कोशिश में लगी हैं, याद कीजिए – शांति और अहिंसा के लिए भी बन्दूक रखना ज़रूरी है वरना भेड़िये तो अकारण राह चलते साधुओं पर भी झपट्टा मारते हैं।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को ट्विटर पर KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक अनिर्बान ब्लाह पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।

शर्लिन चोपड़ा एक घटना का वर्णन करते हुए बताती है कि वह ए-लिस्टर्स के लिए टैलेंट एजेंसी के रूप में अपने करियर को मैनेज करने में मदद करने के लिए अनिर्बान से पूछने गई थी। उन्होंने उससे पूछा कि क्या वह उन्हें अच्छी क्वालिटी वाली फिल्में दिलाने में मदद कर सकते हैं। इसके बाद वह कहती हैं, “उसने मुझे ऊपर-नीचे देखा। मैंने उनसे पूछा, क्या हुआ सर, क्या मैं अच्छी तरह से तैयार नहीं हूँ?’ उन्होंने कहा, नहीं, नहीं। फिर उसने पूछा- क्या आपके स्तन (breast) असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?”

शर्लिन ने तब कहा कि उसने अनिर्बान से पूछा कि क्या वह शादीशुदा है। उन्होंने अनिर्बान से कहा, “क्या आप अपनी पत्नी को नहीं छूते हैं। अपनी पत्नी के स्तनों को स्पर्श करो। तुम जान जाओगे। चाहे वे असली हों या नकली।” शर्लिन चोपड़ा का कहना है कि इतना कहने के बाद भी अनिर्बान ने उनसे पूछा कि क्या ये ‘असली’ हैं।

शर्लिन आगे कहती है, “मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।”

उन्होंने कहा कि यह अस्वीकार्य व्यवहार है। वो कहती हैं, “आप इस तरह एक महिला से बात नहीं कर सकते। अगर कोई भी लड़की आपको या आपके निजी अंगों को छूती है तो आप इसे पसंद कर रहे होंगे। पर एक महिला को यह पसंद नहीं है। खासकर तब जब वह एक टैलेंट मैनेजर के पास जा रही हो। वह इसे क्यों पसंद करेगी? क्या आपके पास दिमाग नहीं है? स्तनों के आकार के साथ टैलेंट का क्या लेना-देना है? ”

शर्लिन ने आगे कहा, “चाहे यह असली हो या नकली, इससे क्या फर्क पड़ता है? जब मैंने इस तरह की चीजों का अनुभव किया, तो मैंने महसूस किया कि इस इंडस्ट्री में कई लोग शालीनता के मुखौटे पहने हुए हैं, लेकिन वो काफी अभद्र व्यवहार करते हैं।”

अनिर्बान ब्लाह #MeToo का आरोपित

2018 में, अनिर्बान दास ब्लाह को #MeToo के आरोपों के बाद KWAN से पद छोड़ने के लिए कहा गया था। चार महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अभिनेत्री मीरा उमर ने कहा था कि 2016 में जब वह अभिनेत्री बनने के लिए मुंबई आई थीं, तो उन्होंने KWAN के अनिर्बान से मुलाकात की। अपनी पहली मुलाकात के बाद, उसे अच्छा नहीं महसूस हुआ था। ब्लाह ने उसे फिर से बुलाया और उससे निजी तौर पर मिलने का अनुरोध किया।

उमर ने कहा कि उसने उसे अपने जुहू अपार्टमेंट में बुलाया। कुछ बातचीत करने के बाद वह उससे अनुचित सवाल पूछ शुरू कर दिया, जिसके बाद उसने वहाँ से जाने का फैसला किया, लेकिन अनिर्बान ने उसे जबरदस्ती चूमने की कोशिश की। हालाँकि, जल्द ही उसका कैब आ गया और वह वहाँ से निकल गई।

सुप्रीम कोर्ट में ‘हिन्दू आतंक’ का हवाला दिए जाने से बौखलाए NDTV के पत्रकार ने केंद्र पर लगाया ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप

NDTV ‘जर्नलिस्ट’ श्रीनिवासन जैन ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को सुदर्शन न्यूज़ के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘कथित’ निष्क्रियता पर अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए ट्विटर पर अपना पक्ष रखा। आतंकवादी हमले को ‘छोटा-मोटा’ हमला करार देने वाले पत्रकार ने केंद्र पर किसी भी कीमत पर ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप लगाया।

सुदर्शन न्यूज द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘हिंदू आतंक’ पर NDTV शो का हवाला दिए जाने की वजह से श्रीनिवासन जैन भड़के हुए थे। एनडीटीवी के पत्रकार ने केंद्र पर हमला करते हुए ट्वीट किया कि सुदर्शन टीवी की रक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी सीमाएँ पार कर दी।

उन्होंने लिखा, “सॉलिसिटर जनरल ने प्रेस फ्रीडम की खोज करते हुए किसने क्या किया तकनीक (जो हिंदू आतंक पर दिखाया गया है?) को फर्जी बताया कि कोर्ट पहले डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करे।”

जैन ने आगे आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के लिए मीडिया में अपने लोगों का बचाव करना आम बात है। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्षता और कानून के शासन के लिए कभी-कभार अपना बलिदान देती है, बशर्ते कि अपराध ‘बहुत शर्मनाक’ हो।

श्रीनिवासन जैन ने ट्वीट किया, “अपने लोगों’ की सुरक्षा के लिए सभी दल / सरकार अपने रास्ते से भटक गई है। लेकिन कभी-कभी निष्पक्षता और कानून के शासन के पालन के लिबास को बनाए रखने के लिए, आप कार्रवाई की अनुमति देते हैं, खासकर यदि अपराध बहुत ही बुरा हो।”

NDTV के पत्रकार आगे कहा कि केंद्र तो निष्पक्ष या कानून का पालन करने का नाटक भी नहीं करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकार ‘अपने लोगों’ की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी, भले ही वह कानून के शासन को बर्बाद कर दे।

उन्होंने कपिल मिश्रा, सुदर्शन टीवी और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का नाम लिया, जिन्होंने कथित तौर पर जेएनयू पर हमला किया था, उन लोगों की सूची में जिनके अपराध ‘गंभीर’ थे। लेकिन इस शासन ने, बार-बार, ‘अपने लोगों’ की रक्षा के लिए पूरी जोर लगा दी, चाहे इससे कानून पर कितना भी बुरा प्रभाव क्यों न पड़े।

श्रीनिवासन जैन ने आतंकी हमला को बताया ‘छोटा-मोटा’

गौरतलब है कि NDTV पर अपने एक शो के दौरान, श्रीनिवासन जैन ने अपने मोदी विरोधी नैरेटिव को फैलाने के लिए एक आतंकवादी हमले को कम दिखाने कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इशरत जहाँ जैसे आतंकवादियों को एक मुठभेड़ के दौरान गुजरात पुलिस ने गोली मार दी थी। पत्रकार का कहना था कि आतंकी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मारने के लिए नहीं, बल्कि ‘छोटा-मोटा’ बम विस्फोट करने के लिए आए थे।

निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने NDTV के पत्रकार की खिंचाई की

हाल ही में एनडीटीवी पर निवेशक और व्यापारी राकेश झुनझुनवाला ने इंटरव्यू के दौरान ‘पत्रकार’ श्रीनिवासन जैन को नैतिक मीडिया रिपोर्टिंग का सबक सिखाया। राकेश झुनझुनवाला ने जोर देते हुए कहा, “मैं पीएम मोदी का प्रशंसक हूँ – यह एक जाना-माना तथ्य है। एक भारतीय के रूप में, मुझे अपने राजनीतिक विकल्पों पर अधिकार है, लेकिन, मैं आपको पूर्वाग्रह से ग्रसित पाता हूँ। मुझे लगता है कि NDTV सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित है।” हालाँकि श्रीनिवासन ने अपने चैनल पर लगे आरोपों को खारिज करने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई मतलब नहीं था।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने माँगा तलाक

बिहार के बेगूसराय में रहने वाली एक हिंदू महिला ने बजरंग दल से मदद की गुहार लगाई है। महिला का कहना है कि अब उसे अपने पति आफ़ताब आलम से डर लगने लगा है। उसका पति आफ़ताब उसको रोज शराब पीकर मारता था और उसे सड़क पर ही भद्दी-भद्दी गालियाँ देता था। इसके अलावा उसके अन्य महिलाओं से भी शारीरिक संबंध हैं। कुछ दिन पहले महिला ने अपनी जान को खतरा देखते हुए उससे अलग होने की ठानी लेकिन आफ़ताब उसे नर्क से मुक्ति देने को तैयार नहीं है। वह बार-बार डायवोर्स से मना कर देता है और घर आकर धमकी भी देता है।

अब पूजा नामक ( पीड़िता का बदला हुआ नाम) महिला ने बेगूसराय में बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज से मदद माँगी है। उन्होंने बजरंग दल को लिखे पत्र में बताया है कि शादी से पहले उन्हें नहीं पता था कि उनके पति आफ़ताब को शराब की लत है, लेकिन धीरे-धीरे जब वह साथ रहने लगीं तो उन्हें यह सब पता चला। महिला ने बताया कि इसके बाद से उनका पति नशे में धुत होकर उन्हें मारता और गाली गलौच करता। पीड़िता ने बजरंग दल को ऐसे सबूत भी पेश किए हैं जिनमें आरोपित के संबंध दूसरी औरतों से साफ देखे जा सकते हैं।

बजरंग दल से महिला ने माँगी मदद

अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों की बाबत हिंदू महिला ने 14 सितंबर 2020 को पुलिस में एफआईआर भी करवाई। अपनी एफआईआर में उन्होंने बताया कि साल 2006 में आफ़ताब ने उन्हें बहला-फुसला कर फँसाया था। इसके बाद उनका शारीरिक शोषण हुआ। हालाँकि तब उन्होंने आफ़ताब पर दबाव बनाकर 24 मार्च 2006 को कोर्ट मैरिज कर ली। इसके बाद उनकी दो बेटियाँ हुईं। आज उनमें एक की उम्र 8 साल है और दूसरी की 6 साल है।

महिला ने एफआईआर में बताया कि जब शादी के बाद वह अपने ससुराल गईं, तो वहाँ उनके साथ गाली गलौच हुई और उन्हें प्रताड़िता भी किया गया। काफी समय तक उन्होंने वहाँ गुजर बसर किया। फिर, साल 2008 में परेशान होकर दूसरे इलाके में किराए पर रहने लगी, लेकिन वहाँ भी आफ़ताब के घर वाले पहुँच जाते और बोलते कि हिंदू की औलाद हरामी होती है। 

पीड़िता ने शिकायत में कहा कि इसके बाद उनके पति में उग्रता आने लगी। धीरे-धीरे उनके साथ व उनके बच्चों के साथ जानवरों की तरह मारपीट भी आम हो गई। इस बीच आरोपित के नाजायज संबंध दूसरी महिलाओं से हो चुके थे। वे कहती हैं कि शुरुआत में तो आफ़ताब बाहर जाकर महिला से संबंध बनाता था, लेकिन कुछ समय बाद वह पड़ोस की महिला को रात में घर ही बुलाने लगा।

दूसरी महिला के साथ आफ़ताब की तस्वीर

जब उन्होंने ने इसकी शिकायत अपने ससुराल वालों से की तो सबने उन्हें जवाब दिया, “मर्द है मुँह मारेगा, तुम खाओ पड़ी रहो।” इसके बाद उनके ससुराल वालों ने महिला पर उन्हीं के इलाके में जमीन लेने का दबाव बनाया। बार-बार उन्हें सुनाया जाता रहा, “तुम्हारे बाप ने कुछ नहीं दिया कहो…. में जमीन बिक रही है, उसे खरीदने के लिए पैसा दें।”

एफआईआऱ

पीड़िता के पिता ने जब अपनी बेटी की हालत जानी, तो उन्होंने उसकी खुशी के लिए 1 5,00,000 रुपए आफ़ताब को दिया और जमीन खरीदी गई। आज पूजा उसी जमीन पर घर बनवाकर रहती हैं। मगर, उनकी शिकायत है कि उन्हें अब भी आफ़ताब और उसके घरवाले तंग करते हैं।

पूजा के अनुसार, उन्होंने काफी समय तक अपने बच्चों के लिए काफी कुछ झेला है। उनके पति आफ़ताब ने न केवल उनको प्रताड़ित करते हुए उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया बल्कि उनके घर को शराबखाने में बदल  दिया। साथ ही कई दोस्तों को घर पर लाने लगा। ये सब उनके सामने और उनके बच्चों के सामने अश्लील हरकत करते थे।

महिला का कहना है कि आफ़ताब के दोस्तों की बुरी निगाह से उन्होंने हमेशा अपनी दोनों बेटियों को बचाया। मगर, कई बार ऐसा भी वक्त आया जब आफ़ताब ने अपनी बीवी को ही अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने को बोल दिया।

जी हाँ। महिला अपनी एफआईआर में इस बात का जिक्र किया है। उन्होंने अपने बयान में लिखा, “कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।”

दूसरी महिला के साथ आफ्ताब आलम

पूजा की मानें तो 19 अगस्त को पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी के बाद उनके पति आफ़ताब को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से जब से वह छूट कर आया तो महिला के साथ रोजाना मारपीट करने लगा। इस बीच उसके ससुराल वाले उसे और उसके बच्चों को धमकी भी देने लगे। उन्होंने पीड़िता और बच्चों से कहा कि घर छोड़ कर निकल जाओ वरना सभी को हलाल करके लाश लापता कर देंगे।

ऑपइंडिया से पीड़िता की बातचीत और आफ़ताब का सच

गौरतलब है कि पूजा का मामला जब ऑपइंडिया के संज्ञान में आया तो हमने उनकी आपबीती जानने के लिए उनसे संपर्क किया। पूजा ने हमसे बात करते हुए कई ऐसी बातें बताईं जिनका उल्लेख एफआईआर में बहुत हद तक सीमित नजर आता है मगर पीड़िता से पता चलता है कि साल 2006 से साल 2020 तक में उसने क्या-क्या झेला।

पीएम मोदी से घृणा के चलते आफ़ताब करता था पूजा को प्रताड़ित

पूजा के अनुसार, उसकी शादी 14 साल पहले हुई थी। उसके बाद से ही उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। अभी जब एनआरसी और सीएए का मुद्दा उठा, तो उसे लेकर भी आफ़ताब ने पूजा को ही उलटा सीधा बोलना शुरू कर दिया।

पूजा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी भी फैसले पर आफ़ताब उसको उलटा- सीधा सुनाता था। राम मंदिर के फैसले पर भी उन्हें आहत करने का प्रयास आफ़ताब ने किया था। इतने के बावजूद उन्होंने कोशिश की कि रिश्ते को निभा लें मगर अभी हाल की घटना है कि उसने रोड पर ही शराब पीकर उन्हें ‘रं%’ कहना शुरू कर दिया। साथ ही पीड़िता के भूमिहार होने के कारण उस पर जातिसूचक टिप्पणी की।

महिला के मुताबिक वो बहुत बार डॉयवोर्स की बात कह चुकी है लेकिन आफ़ताब उसे छोड़ने को तैयार नहीं है और कहता है, “तुम कैसे ले लोगी डायवोर्स, हम नहीं देंगे।” पूजा बताती हैं कि आफ़ताब ने कई बार उन पर पिस्तौल तानी है। इसलिए अब उन्हें अपनी जान का खतरा सताता है। वह कहती हैं कि उन्हें अब किसी भी कीमत पर अपने पति के साथ नहीं रहना बस वह तलाक चाहती हैं।

पीड़िता बताती हैं कि जब पिछली बार आफ़ताब जेल से छूट कर आया तो उसने अपनी उनके ऊपर झूठा इल्जाम लगा दिया। जेल से छूटकर आफ़ताब ने पूजा से कहा, “तुमने सब करवाया है। तुम्हारी वजह से ही सब हुआ है। तुमको जान से मार देंगे।” तब जाकर पीड़िता ने कहा कि अब उसे और उसके बच्चों को आफ़ताब के साथ नहीं रहना है। उन्हें उससे डर लगने लगा है।

कोर्ट मैरिज से पहले आफ़ताब करता था शोषण

शादी से पहले की घटना साझा करते हुए हुए पूजा कहती हैं कि उनकी मर्जी के बिना भी उनसे संबंध बनाए गए। इसके लिए आफ़ताब पूजा को अपने दोस्त के घर भी लेकर गया। महिला कहती है कि इतना सब होने के बावजूद जब आफ़ताब ने शादी को लेकर टाल मटोल शुरू की, तो उन्होंने इसे लेकर उस पर दबाव बनाया। कोर्ट मैरिज के बाद आफ्ताब ने घर पर पीना शुरू कर दिया। बाद में बच्चियों को परेशान करने लगा। वह जानबूझकर पीने के बाद उनसे राजनीति और धर्म आदि पर बात करता था ताकि उन्हें परेशानी हो।

ईंट पत्थर, पिस्तौल सबसे किया गया पीड़िता पर हमला

अपनी हालिया एफआईआर के बारे में बताते हुए पूजा कहती हैं कि एक दिन जब सड़क पर पीने के बाद उसने बहुत हल्ला शुरू कर दिया, गाली देकर उन्हें मारनेलगा और घर से निकालने की धमकी देने लगा, तब पूजा ने बच्चों को घर में अंदर करके गेट किसी तरह बंद कर लिया। जिसके बाद वह ईंट पत्थर घर में फेंकने लगा, जब उनसे भी कुछ नहीं हुआ तो बालकनी में चढ़ने की कोशिश भी की।

पूजा को यही सब देखकर एहसास हुआ कि वह सच में उन्हें मार डालेगा। इसी को सोचते हुए उन्होंने इस पूरे केस पर कानूनी कार्रवाई के लिए आवाज उठाई। अब वह सोच चुकी हैं कि किसी कीमत पर आफ़ताब को दूसरा मौका नहीं देना है।

नाजायज संबंधों को बरकरार रखने के लिए पूजा को भेजा देहरादून, विरोध पर चप्पल से भी मारा गया

पूजा के अनुसार, जब उनकी छोटी बेटी हुई, तब भी उनके पति ने पड़ोस की महिला से संबंध बनाए हुए थे। जब महिला ने विरोध किया तो उसे कहा गया कि वह अपने मायके चली जाए सब ठीक हो जाएगा। महिला ने ऐसा करने से मना कर दिया। फिर उसने पूजा को व उसकी बेटियों को देहरादून भेज दिया। साथ ही खरीददारी के लिए 1 लाख रुपए तक दे दिए।

पूजा वहाँ जाकर कुछ दिन रही, जब मन नहीं माना तो उसने वापस लौटने की इच्छा जताई। इस पर उससे कहा गया, “उत्तराखंड में सुंदर-सुंदर लड़के होते हैं, तुम्हें कोई अच्छा नहीं लगा क्या?” इसके बाद आफ़ताब ने अपने कंपनी स्टाफ जिसके साथ पूजा को देहरादून भेजा था उससे कहा कि उसे दूसरे लड़कों से मिलवा दो।

पूजा बताती हैं कि घर लौटने के बाद उन्हें उसके अवैध संबंधों के बारे में कई बातें पता चलीं और उन्होंने उसका फोन चेक करना शुरू कर दिया। एक दिन ऐसे में जब नशे में धुत होकर उसने अपना फोन का लॉक खुला छोड़ा, तो गूगल ड्राइव में दूसरी महिलाओं के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें उन्हें दिख गईं। जब महिला ने इनका विरोध किया और सवाल पूछे तो आफ़ताब ने अपनी गलती मानने की बजाय लड़की के भाई के सामने उसे चप्पल से मारा और घर से भागने को बोला। 

कुछ दिन बाद महिला उसे बिन बताए अपने घर चली गईं। लेकिन इसने दोबारा उन्हें वापस बुलवा लिया और घर लाकर फिर पीटा। महिला का कहना है कि कुछ दिन पहले आफ़ताब ने एक 16 साल की लड़की को फँसाने के लिए 1500 रुपए मदद के नाम पर भी भिजवाए थे ताकि वह उसके जाल में फँस जाए। मगर, लड़की के माँ-बाप ने इसे बहुत डाँटा और बात बहुत ज्यादा बढ़ गई।

पीड़िता के करीब आने की करता था कोशिश

पीड़िता के अनुसार, आरोपित पति उसे अक्सर कहता था कि तुम्हारा समय खत्म हो गया और फिर खुद ही आकर छूने लगता था। इसका वह विरोध भी करती थी, लेकिन आफ़ताब पास आता था, साथ ही ये भी कहता था, “ऐसा मत समझना तुम में कुछ खास बात हैं, मेरे पास बहुत हैं।”

पूजा की माँग बस यही है कि वो तलाक लेना चाहती है। इसके लिए वह वकील से बात भी कर रही है, लेकिन, आफ़ताब तलाक से मना कर रहा है और जोर देकर कहता है कि तलाक नहीं देगा। वहीं पीड़िता का कहना है कि वह किसी कीमत पर साथ नहीं रह सकती। इन सबसे बड़ी वाली बेटी पर असर पड़ रहा, वह डिप्रेशन में जा रही है।

अलमारी में छिपाकर रखने पड़ते थे भगवान

पूजा की मानें तो जब उसकी कोर्ट मैरिज हुई थी तब आफ़ताब ने उसे निकाह का जिक्र किया था। हालाँकि, तब महिला ने कह दिया कि बात सिर्फ़ कोर्ट मैरिज की हुई थी, इसलिए वह धर्म परिवर्तन नहीं करेगी। लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह सारी बातें होनी शुरू हो गई। आफ़ताब ने घर में भगवान रखने से मना कर दिया मगर अपनी आस्था के चलते महिला अलमारी में भगवान को रख कर पूजा करती थी। वह कहती हैं कि अब अलग होने के बाद वह विचार कर रही हैं कि भगवान के लिए मंदिर बनवाएँ।

बजरंग दल से क्या सोचकर माँगी मदद?

बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वारज से संपर्क करने की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह पूरा मामला अपने हाथ से जाता दिख रहा था। वह लगातार गेट पर आता था, उनसे गाली गलौच करता था, उनकी जाति धर्म को उल्टा बोलता है। इसलिए किसी परिचित ने ही इस नारकीय जीवन से निकलने के लिए उन्हें शुभम से मदद लेने की सलाह दी। उसके बाद उन्होंने संपर्क किया और अब उन्हें विश्वास है कि उनकी मदद की जाएगी। बता दें, पूजा ने इस संबंध में महिला आयोग में अपनी शिकायत करवाई थी। उन्हें यह भी डर है कि उनके नाम से कई फेसबुक आईडी चलाई जा रही हैं।