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संघी पायल घोष ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया – जया बच्चन

अमीर खुसरो ने कभी किसी जमाने, जब समय प्रगतिशील नहीं था, जब कविता का मतलब क्रांति और लिबरल का मतलब भ्रान्ति नहीं होता था, तब एक बड़ी ही सुंदर पंक्ति लिखी थी –

“बहुत कठिन है डगर पनघट की..”

समय बदला और अमीर खुसरो अपनी पंक्तियों में फेरबदल करने को विवश हैं। अब ये पंक्तियाँ कुछ ऐसी हैं –

“बहुत कठिन है डगर फेमिनिज्म की…”

अमीर खुसरो ने अपनी ऐतिहासिक पंक्तियों में यह बड़ा बदलाव हर आए दिन किसी न किसी ‘स्मैश पैट्रिआर्कि’ गिरोह के प्रगतिशील – नारीवादी, उदारवादी, लाहौरवादी और लहसुनवादी के यौन उत्पीड़न का आरोपित निकल जाने पर किया है। इस बार अमीर खुसरो को बॉलीवुड के एक प्रगतिशील निर्देशक अनुराग कश्यप पर लगे #मीटू (MeToo) के आरोपों ने दर्द दिया है।

दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर MeToo के आरोप लगाए हैं और खुलासा किया है कि अनुराग कश्यप ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। लेकिन जिनके ‘-इज़्म’ ऑड-ईवन की तर्ज पर काम करते हैं, वह इस यौन शोषण का साल तलाश रहे हैं। विनोद कापरी जैसे ‘फेमिनाजियों’ ने अनुराग कश्यप द्वारा किए गए इस यौन उत्पीड़न का साल तलाश लिया है और कहा है कि वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है।

वाकई? सिर्फ इस वजह से कि इस बार इस मुहीम के कारण आपके गिरोह का कोई सदस्य कटघरे में है, आप यह आरोप लगाने वाले का बैकग्राउंड चेक कर इस घटना का साल तलाशने लगते हैं?

इसी बात पर एक संघी कवि ने बेहद सुन्दर कविता लिख डाली है –

“वो स्मैश पैट्रिआर्कि वाले मोलेस्टर निकल आएँ तो आह तक नहीं होती,
मैं लिख दूँ ‘उसका’ नाम भी, तो मच जाता है हंगामा।”

विनोद कापरी से भी बड़ा बयान, इस घटना में सबसे बड़ा बयान ‘थाली में छेद’ का नारा देने वाली जया बच्चन ने दिया है। जया बच्चन का कहना है कि अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पायल घोष ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया है।

हालाँकि, जब जया बच्चन को यह याद दिलाया गया कि वो ये डायलॉग कुछ ही दिन पहले बोल चुकी हैं तो उनके अमिताबचन ने फ़ौरन ट्विटर पर यह कहते हुए माफ़ी माँग ली कि माफ़ करें यह डायलॉग संख्या पहले वाली ही रिपीट हुई है। वहीं, जया बच्चन ने भी खुलासा किया है कि वो एक ही डायलॉग पढ़ने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें नए डायलॉग की लिस्ट अभी तक पेंगुइन मंत्रालय द्वारा ‘वॉट्सप’ नहीं की गई है।

फैक्ट चेकर्स का एक सचल दस्ता अभी इन तथ्यों की भी जाँच में निकल पड़ा है कि वास्तव में जया बच्चन ने यह बयान दिया है या नहीं? इसलिए इस बात की पुष्टि के लिए उनके फैक्ट चेक का इन्तजार करें।

खैर, हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाकर चलने वाले अनुराग कश्यप के साथ यह सब लगा रहता है। अनुराग कश्यप की कॉलर ट्यून पर भो ‘अब तो आदत सी है मुझको जलील होने में..’ गाना लगा है। लेकिन तापसी बेफिटिंग पन्नू, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर इत्यादि, जिनकी दुकान ही नारीवाद का झंडा उठाकर और बेरोजगारी की ढपली बजाकर चल रही है, वह पायल घोष को अभी रिग्रेसिव, संघी, बीजेपी आईटी सेल, अंधभक्त या काफिर कह डाले, तब जाकर शायद बॉलीवुड और इसके लिबरलपने में इंसान की आस्था स्थापित हो सकेगी।

सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई है कि अनुराग कश्यप ने अभी पूरे ‘स्मैश पैट्रिआर्कि’ गिरोह को व्हिप जारी किया है कि वह इस पूरे प्रकरण पर चुप रहे और मोदी-विरोध में दैनिक 25 ट्वीट के टारगेट को बढ़ाकर अब 50 ट्वीट करना शुरू कर दे। कश्यप का कहना है कि जीवन में यही सब कर के बदलाव आया था और आगे भी आएगा।

अनुराग कश्यप पर #मीटू के आरोप लगते ही अब महिलाओं का ही चरित्र चित्रण करने वाले इस नारीवादी गैंग ने एक और बात साबित कर दी है, वो ये कि जिस प्रकार से पुलिस की लाठी के किसी नास्तिक वामपंथी के पृष्ठभाग पर पड़ते ही सबसे पहले उसका मजहब बाहर निकल आता है, ठीक उसी प्रकार से, यौन उत्पीड़न में घिरते ही नारीवादियों के भीतर का वो ‘पुरुष’ बाहर निकल आता है, जिससे लड़ने के लिए इन्होने ‘स्मैश पैट्रिआर्की’ गिरोह ज्वाइन किया था। यानी, अनुराग कश्यप जैसा फेमिनिस्ट जब खुद किसी महिला का उत्पीड़न करता है, उसे तब जाकर पता चलता है कि वह जिस मर्द के खिलाफ नारीवादी बना था, वो मर्द वह खुद ही था।

‘जिप, लिंग, योनि’ मामले में अनुराग कश्यप ने किए 4 ट्वीट, राजनीति घुसा किया पायल घोष से खुद का बचाव

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष ने फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप पर 19 सितंबर 2020 को यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। पायल घोष के मुताबिक़ अनुराग उन्हें यह कह कर शारीरिक संबंध का दबाव बनाते थे कि फिल्म इंडस्ट्री में यह सब आम बात है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इंसाफ की गुहार लगाई थी। मामला सुर्ख़ियों में आने के बाद अनुराग कश्यप ने भी इस पर अपना पक्ष रखा है। 

अनुराग कश्यप ने 20 सितंबर की देर रात इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए सफाई पेश की। अनुराग ने अपने ट्वीट में लिखा, “क्या बात है, इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में। चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते-कराते इतना झूठ बोल गए कि औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके, सब बेबुनियाद हैं।” 

इसके बाद अनुराग कश्यप ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा “बाक़ी मुझ पर आरोप लगाते-लगाते, मेरे कलाकारों और बच्चन परिवार को संग में घसीटना तो मतलब नहले पर चौका भी नहीं मार पाए। मैडम दो शादियाँ की हैं, अगर वो जुर्म है तो मंज़ूर है और बहुत प्रेम किया है, वो भी क़बूलता हूँ। चाहे मेरी पहली पत्नी हों, या दूसरी पत्नी हों या कोई भी प्रेमिका या वो बहुत सारी अभिनेत्रियाँ, जिनके साथ मैंने काम किया है, या वो पूरी लड़कियों और औरतों की टीम, जो हमेशा मेरे साथ काम करती आई हैं, या वो सारी औरतें, जिनसे मैं मिला बस, अकेले में या जनता के बीच।” 

इसके बाद अपने ट्वीट में इस मुद्दे पर सफाई देते हुए अनुराग कश्यप ने लिखा, “मैं इस तरह का व्यवहार ना तो कभी करता हूँ, ना तो कभी किसी क़ीमत पर बर्दाश्त करता हूँ। बाक़ी जो भी होता है, देखते हैं। आपके वीडियो में ही दिख जाता है कितना सच है कितना नहीं, बाक़ी आपको बस दुआ और प्यार। आपकी अंग्रेज़ी का जवाब हिंदी में देने के लिए माफ़ी।”

अपने अंतिम ट्वीट में अनुराग ने लिखा “अभी तो बहुत आक्रमण होने वाले हैं। यह बस शुरुआत है। बहुत फ़ोन आ चुके हैं, कि नहीं मत बोल और चुप हो जा। यह भी पता है कि पता नहीं कहाँ-कहाँ से तीर छोड़े जाने वाले हैं। इंतज़ार है।”

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब अनुराग कश्यप का नाम किसी विवाद में सामने आया हो। इसके पहले भी अनुराग का ज़िक्र दो ऐसे मामलों में हो चुका है। अक्टूबर 2018 के दौरान फिल्म निर्माता और क्वीन फिल्म के निर्देशक विकास बहल पर फैंटम फिल्म्स की पूर्व कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद अनुराग कश्यप ने अदालत का निर्णय आने के पहले ही विकास बहल के विरुद्ध सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी शुरू कर दी थी। उन्होंने महिला कर्मचारी के आरोपों को सही बता कर उनका समर्थन किया था। 

जिसके बाद विकास बहल ने अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी पर बॉम्बे उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। दूसरी घटना साल 2014 की है, जब अनुराग कश्यप यौन शोषण के आरोपित ‘तहलका’ के संपादक का बचाव करने लगे थे। अनुराग ने फेसबुक पर तरुण तेजपाल के समर्थन में लिखा था “मैंने सीसीटीवी फुटेज देखी है और उसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा वह लड़की (पीड़िता) तरुण तेजपाल के बारे में कह रही है।”   

वहीं पायल घोष ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा था, “अनुराग कश्यप ने खुद का इस्तेमाल करके मुझे पर बेहद बुरी तरह दबाव बनाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी मेरा आपसे अनुरोध है कि इस आदमी पर कार्रवाई कीजिए और जिससे दुनिया को पता चले कि इस रचनात्मक इंसान के पीछे कितना बड़ा राक्षस छुपा हुआ है। मुझे पता है यह इंसान मुझे नुकसान पहुँचा सकता है, मेरी सुरक्षा खतरे में है, कृपया मदद करिए।” 

पायल घोष के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने भी रीट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, पायल आप इस घटना की पूरी जानकारी NCW को विस्तार से भेजें।  

19 सितंबर 2020 को पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगाए। आरोप लगाते हुए उन्होंने लिखा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की। उन्होंने मुझसे इस तरह बात की जैसे फिल्म इंडस्ट्री में शारीरिक संबंध बनाना गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि हुमा कुरैशी, ऋचा चड्डा और मही गिल जैसी अभिनेत्रियाँ हमेशा उनसे फोन पर संपर्क में रहती हैं।” आगे अनुराग कश्यप, पायल घोष से कहता है, “जब भी मैं उन्हें बुलाता हूँ, वह दौड़कर आती हैं और मेरा c**k (penis) चूसती हैं।” 

‘बिचौलिया’ मदर इंडिया का लाला नहीं… अब वो कंट्रोल करता है पूरा मार्केट: कृषि विधेयक इनका फन कुचलने के लिए

“अजी नाम में क्या रखा है?” क्या फर्क पड़ता है अगर आपको पता ना हो कि जो सुन्दर सी गोल-मटोल दिखने वाली गोभी आप लाकर सब्जी पकाते हैं, उसे आम किसान “स्नो-बॉल” नाम से जानता है? आखिर क्या फर्क पड़ेगा अगर सिर्फ टमाटर की कीमत बढ़ने पर हल्ला मचाया जाए और ये ना बताएँ कि ये समर किंग था, पूसा की कोई नस्ल या जीटी-2?

फर्क पड़ता है। नाम के मामले में स्पष्ट ना हों तो सबसे पहला फर्क तो ये पड़ता है कि कैश क्रॉप और फ़ूड क्रॉप में आप फर्क ही नहीं करते। अगर कोई किसान टमाटर, भिन्डी या किसी दूसरी सब्जी की खेती कर रहा है तो वो उसे खाने के लिए नहीं बेचने के लिए उपजा रहा है। केले की खेती, या दूसरे फलों के मामले में भी ऐसा ही होगा।

नाम सिर्फ एक शब्द है और उसके पीछे भाव छुपे होते हैं। जैसे कि “किसान” कहते ही आपके दिमाग में अगर हल चलाते, पुरानी सी धोती-बनियान पहने किसी पुरुष की छवि उभरती है तो एक बार उसके बारे में भी सोचिए। भारत में करीब 42 प्रतिशत किसान महिलाएँ हैं।

खेती के काम का करीब 80 प्रतिशत काम, जिसमें बुवाई से कटनी तक शामिल है, वो महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसके बाद भी अगर पुरुष की छवि ही उभरती है तो निश्चित रूप से ये नाम की ही महिमा है, जो “किसान” शब्द को पुरुषवाचक मानती है।

किसान बोता है, किसान काटता है तो सही होगा, लेकिन नाम के व्याकरण की वजह से किसान काटती है, बोती है, गलत बता दिया जाएगा।

अगर आप नाम के मामले में स्पष्ट नहीं थे और सभी को “अन्नदाता” ही मानते रहे हैं तो आप किसान को भी व्यवसायी की तरह सोचने नहीं कहते। वो काम तो बेचने का कर रहा है मगर सोचेगा किसान की तरह तो नुकसान होना तय है। इसके ठीक उलट अगर खाद्यान्न, सब्जियों-फलों के ग्राहक होने के बाद भी आप नाम की महत्ता को नहीं समझते तो आप किसान और बिचौलिए की भूमिका से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।

कभी सोचा है कि बाजार में अचानक कोई चीज़ कम कैसे हो जाती है? अगर इतने सारे अलग-अलग किसान कोई उपज बेच रहे हों, तो एक साथ ही सब बेचना बंद कर देते हैं क्या? अगर बेचना बंद भी कर देते हैं तो ये फसल आखिर जमा कहाँ होती है?

यूपीए-2 की सरकार के दौर में फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एफ़सीआई) ने 2013 में पब्लिक-प्राइवेट मॉडल पर वेयरहाउस (गोदाम) बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस मॉडल पर देश भर में कई गोदाम बने, जहाँ स्क्वायर फीट के हिसाब से किराया वसूला जाता है।

इन्हें बनाने में भी सरकार बहादुर ने पचास फीसदी की सब्सिडी दी थी। इनमें एमएसपी पर खरीदा गया अन्न जमा होता है। जाहिर है कि फायदे का सौदा है, तभी इतनी बड़ी जमीनों को घेरकर विशालकाय वेयरहाउस बने हुए हैं।

उत्तरी भारत में देखेंगे तो पंजाब, हरियाणा और उत्तर-प्रदेश में ऐसे कई गोदाम बने हुए दिखेंगे। बिहार में भी कटिहार और बक्सर में गेहूँ के लिए ऐसे गोदाम बनाने की अनुमति मिली थी।

वैसे बिहार में भी अनाज की उपज कोई कम नहीं है लेकिन यहाँ शू-शासन था और वो बड़े नामों को यहाँ त्वरित गति से व्यापार शुरू करने के लिए आमंत्रित करने में असफल रही। सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को एक बार में हलाल करने के बदले रोज-रोज अंडे बेचना ज्यादा समझदारी का काम है, ये संभवतः यहाँ के राजनेताओं को समझ में नहीं आया।

वापस मुद्दे पर आते हुए सोचिए कि अब अगर सरकार को एमएसपी पर अनाज बेचा ही ना गया हो, इसे सीधे बाजार में बेच दिया गया हो तो भला इन वेयरहाउस-गोदामों में रखा क्या जाएगा? मतलब एमएसपी पर अनाज खरीदा जाए तब तो यहाँ जमा होगा ना? खाली पड़े गोदामों से किराया भी नहीं मिलेगा। यानी सिर्फ एक नीति में बदलाव से ऐसे वेयरहाउस चलाने वालों का धंधा ही मंदा पड़ जाएगा!

हो सकता है कि अब कुछ लोगों को लगे कि भला एक गोदाम में अनाज कम ही आने लगा तो कितने का नुकसान होगा? बड़ा व्यापारी जिसने इतनी जमीन खरीदी हो, वो इतना नुकसान तो झेल ही लेगा ना?

इसे समझने के लिए हम चलते हैं एक सुखबीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड पर। ये कंपनी बायोमास एनर्जी, सोलर एनर्जी, राइस मिल, राइस बार्न ऑइल जैसी चीज़ों के अलावा वेयरहाउस भी चलाती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में मिलाकर इनके कम से कम 29 वेयरहाउस हैं। कंपनी के नाम से अगर आप अंदाजा लगा रहे हैं कि कोई केन्द्रीय मंत्री क्यों इस्तीफा दे रहा होगा/होगी, तो इसे केवल अंदाजा मानें।

फ़िलहाल मुद्दा ये है कि जब “बिचौलिया” कहा जाता है तो आपको क्या लगता है? ये आढ़त पर बैठकर दिन का सौ-पचास कमा लेने वाले की बात हो रही है? वो आदमी अक्सर किसानों का परिचित, कोई रिश्तेदार, घर के शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में आने-जाने वाला व्यक्ति होता है। उसके दो-चार पैसे कमाने से भला किसान और ग्राहक का कितना नुकसान हो जाएगा?

जब “बिचौलिया” कहा जाता है, तो छोटी मछलियों की नहीं, बड़े किलर शार्क की बात हो रही होती है। ये एक इशारे पर दर्जनों वेयरहाउस से आपूर्ति धीमी करवा कर, कई-कई राज्यों में कीमतें बढ़ा सकते हैं। खरीद के मौसम में इनके वेयरहाउस के दरवाजे खुलेंगे तो फसल की कीमतें औंधे मुँह जमीन पर आ गिरेंगी और मजबूर किसान को औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेचनी होगी।

कृषि आधारित पत्रकारिता में “एवरीबॉडी लव्स ए गुड ड्राउट” वाले पी साईनाथ के बाद कोई नाम सुनाई नहीं देता। हिन्दी पत्रकारिता में कृषि सम्बन्धी ख़बरों पर जोर और भी कम है। सोशल मीडिया पर लोग मजाक उड़ाने के लिए कहते हैं “अगला कार्यक्रम कृषि-दर्शन है, जिसमें हम गोबर से खाद बनाना सिखाएँगे”।

ऐसी स्थिति में अगर कृषि पर नीतियाँ आती हैं तो लोगों का घबराना स्वाभाविक है। बाकी बस सही नाम और शब्दों का मतलब सीखिए तो जो बदलाव आ रहे हैं, उन्हें समझना उतना मुश्किल भी नहीं है। फिर अख़बार, टीवी और दूसरी मीडिया में किस विषय पर चर्चा होगी, ये इस पर भी निर्भर है कि आप सवाल क्या पूछते हैं। दबाव बढ़ाइए, जवाब भी आएगा।

बेंगलुरु दंगों में चुनकर हिंदुओं को किया गया था टारगेट, स्थानीय लोगों को थी इसकी पूरी जानकारी: फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में खुलासा

इंडिपेंडेंट फैक्ट फाइंडिंग समिति ने बेंगलुरू के डीजे हल्ली और केजी हल्ली क्षेत्रों में घातक दंगों का शिकार होने के बावजूद बच निकले कुछ हिंदू लोगों की गवाही से यह पता लगाया है कि बेंगलुरु में हुए दंगे पूर्व नियोजित थे, जिसमें जानबूझकर कर हिंदुओं और उनके घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सौंपी गई है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में, बचे हुए लोगों में से एक का दावा है कि उन्हें उर्दू में चेतावनी देते हुए कहा गया था कि वे अपने घरों के अंदर चले जाएँ वरना वे मारे जाएँगे। दंगे में सही सलामत बचे व्यक्ति का कहना है कि दंगों के दौरान, दूसरे मजहब वालों की किसी भी कार जिसमें चाँद या HKGN (हज़रत ख्वाजा ग़रीब नवाज़) का प्रतीक लगा था, उसपर हमला नहीं किया गया। हमला करने से पहले दंगाइयों ने सड़क पर खड़ी कारों के कवर तक को उठाकर यह पता लगाने की कोशिश की थी कि कार किसकी थी।

उन्होंने कहा, “दंगाइयों ने खासकर उस जगह हमला किया था जहाँ सीसीटीवी नहीं लगे थे। इसका साफतौर यह मतलब हुआ कि दंगों में स्थानीय लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से पता था कि सीसीटीवी कहाँ-कहाँ लगे है। दंगाइयों ने पहले से यह सुनिश्चित किया था कि केवल दूसरे धर्म वालों को ही निशाना बनाना है। मजहब विशेष वालों की गाड़ियों को छोड़कर, दूसरे धर्म से संबंधित सभी वाहनों पर हमला किया गया और क्षतिग्रस्त किया गया था।”

उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि, उसने खुद देखा था कि सड़क के पास के कई घर ऐसे भी थे जिनपर हमला नहीं किया गया था, क्योंकि वे सभी खास मजहब वालों के घर थे।

गवाह ने कहा, “दंगाई उर्दू भाषा में सड़क पर चिल्ला रहे थे और सभी को अपने-अपने घरों में वापस जाने या परिणाम भुगतने के लिए कह रहे थे। उन्होंने हमें उर्दू में हिंसा के बारे में चेतावनी दी और कहा कि हमें अंदर जाना चाहिए वरना हमे मार दिया जाएगा। उन्होंने पुष्टि की कि वहाँ मौजूद लोग भाजपा या कॉन्ग्रेस से जुड़े नहीं थे।”

वहीं दूसरे गवाह ने बताया, “बेंगलुरु में हुए दंगों के दिन हमले वाले स्थान पर समुदाय विशेष का एक भी वाहन नहीं रखा गया था। वहीं सड़क पर भी उस दिन मजहब विशेष वाले किसी को आते-जाते नहीं देखा। साथ ही समुदाय विशेष के कोई भी आदमी, घर या वाहन क्षतिग्रस्त नहीं हुए। उनके वाहनों को जानबूझकर उस रात वहाँ नहीं खड़ा किया गया था।”

इन बातों से इस बात का अंदाजा होता है कि गवाहों ने आखिर ऐसा क्यों सोचा की दंगों के दौरान सिर्फ उन्हें ही टारगेट किया गया था।

एक व्यक्ति ने गवाही दी कि कैसे दंगाइयों ने उनके घरों पर हमला करने से पहले सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरों को नष्ट कर दिया। यह पूछे जाने पर कि उन्हें क्यों लगता है कि उन्हें निशाना बनाया गया था, जिस पर चश्मदीदों का कहना है कि उनके घर को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि कोरोना वायरस के शुरुआती चरण में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए दीपक जलाया था।

सर्वाइवर ने याद किया कि उस दिन एक घर ऐसा भी था जिसने उस दिन दीया नहीं जलाया था। जिसपर उन्होंने उसके खिलाफ मामला भी दर्ज कराया था। उसका कहना है कि संभवतः उसी परिवार ने ही किसी को उस घटना के बारे में सूचित किया होगा, इसलिए उसके घर पर हमला हुआ।

इस बीच, चौथे व्यक्ति ने पुष्टि की कि जो इलाका हमले की चपेट में आया था, वह मुख्यतः दूसरे धर्म का इलाका था। जिसमें ज्यादातर तमिल, कन्नड़, अधिकतम हिंदू रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि दंगाई ज्यादातर अपने होश में नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि उनमें से अधिकांश नशे में थे और ड्रग्स का सेवन किया था।

मूल रूप से इन सभी प्रमाणों से पता चलता है कि बेंगलुरु में हमले पूर्व नियोजित, सुव्यवस्थित और विशेष तौर पर हिंदुओं को टारगेट करने के लिए किए गए थे।

गौरतलब है इससे पहले फैक्ट फाइंडिंग समिति ने भी यही कहा था कि दंगे पूर्व नियोजित और संगठित थे और विशेष रूप से क्षेत्र के कुछ हिंदुओं को लक्षित करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि दंगा इस साल की शुरुआत में दिल्ली और हाल ही में स्वीडन में हुई हिंसा का एक बड़ा उदाहरण है। फैक्ट फाइंडिंग समिति ने यह भी पता लगाया कि स्थानीय आबादी दंगों में सक्रिय रूप से शामिल थी और इसके बारे में उन्हें पहले से पता भी था। समिति ने यह भी कहा कि एसडीपीआई और पीएफआई घटना की योजना बनाने और उसे अमल कराने में शामिल थे।

समिति ने पीएफआई और एसडीपीआई की गतिविधियों की निगरानी के अलावा यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार को राज्य में मजहबी उग्रवाद के स्रोत का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए। यह भी राय दी कि राज्य के प्रमुख शहरों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का अध्ययन किया जाना चाहिए और दंगों में अवैध आप्रवासियों की भूमिका की जाँच की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि बेंगलुरु के डीजे हल्ली इलाके में 11 अगस्त को उपद्रवियों ने कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाया था। इस दौरान विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फ़ूंक दी गई। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

अभिनेत्री पायल घोष ने दावा किया है कि फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप द्वारा उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। उन्होंने बताया कि अनुराग कश्यप ने उन्हें सहज करने के लिए उनसे कहा था कि इंडस्ट्री में फिल्म निर्माताओं और अभिनेत्रियों के बीच शारीरिक संबंध आम बात है। पायल घोष ने आगे कहा कि ऐसा आदमी अब महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए बोल रहा है, वह एक ‘f***ing hypocrite’ है।

पायल घोष ने कहा, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की। उन्होंने मुझसे इस तरह बात की जैसे फिल्म इंडस्ट्री में शारीरिक संबंध बनाना गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि हुमा कुरैशी, ऋचा चड्डा और मही गिल जैसी अभिनेत्रियाँ हमेशा उनसे फोन पर संपर्क में रहती हैं।” आगे अनुराग कश्यप, पायल घोष से कहता है, “जब भी मैं उन्हें बुलाता हूँ, वह दौड़कर आती है और मेरा c**k (penis) चूसती  है।”

पायल घोष ने कहा कि वह पूरी बात से असहज थीं और यह कहकर भागने में सफल रहीं कि वह वापस आ जाएँगी और फिर उसके साथ अच्छा वक्त बिताएँगी, लेकिन फिलहाल वह उससे दूर जाना चाहती हैं। पायल घोष ने कहा कि जो कुछ भी हुआ, उस पर जब तक उन्होंने काबू नहीं पा लिया, अनुराग कश्यप ने उन्हें स्पष्ट रूप से हमेशा यही बताने की कोशिश की कि शारीरिक संबंध बनाना बहुत ही सामान्य बात है।

आगे पायल घोष ने कहा, “अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।” इसके बाद वो लोग दूसरे कमरे में गए, जहाँ पर कथित तौर पर यह घटना हुई।

अनुराग कश्यप ने अभी आरोपों का जवाब नहीं दिया है। उनकी तरफ से प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। पायल घोष ने ये आरोप एबीएन तेलुगु को दिए साक्षात्कार में लगाए। इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर भी इस इंटरव्यू को शेयर करते हुए पीएम मोदी से फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप के खिलाफ कार्रवाई की अपील की। पायल घोष ने हाल ही में कहा था कि वह सुशांत सिंह राजपूत की जिम की दोस्त थी और उनके लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि उन्होंने आत्महत्या कर ली।

कानपुर लव जिहाद: मुख्तार से राहुल विश्वकर्मा बन हिंदू लड़की को फँसाया, पहले भी एक और हिंदू लड़की को बना चुका है बेगम

लव जिहादियों का अड्डा बन चुके कानपुर से लव जिहाद का एक और चौकाने वाला मामला सामने आया है। मामला कानपुर स्थित नौबस्ता का है। जहाँ मुख्तार अहमद से राहुल विश्वकर्मा बने युवक ने हिंदू लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाया और उसे अपने झाँसे में लेते हुए जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवा लिया। बाद में मरियम फातिमा बना कर कोर्ट मैरिज कर ली।

रिपोर्ट के अनुसार, मछलिययाँ में रहने वाले 32 साल के मुख्तार अहमद ने हिंदू लड़की से राहुल बन कर दोस्ती की थी। 22 वर्षीय लड़की आवास विकास में रहने वाली है। साथ ही वह पॉलिटेक्निक की छात्रा है। दोस्ती के बाद मुख्तार ने लड़की को झूठे दावे करते हुए अपने प्यार में फँसा लिया और उसे धर्म के प्रति बरगलाने लगा। अहमद ने लड़की का ब्रेनवाश किया और बिना किसी की जानकारी के 17 अप्रैल 2019 को कोर्ट मैरिज कर ली। जिसके बाद यह बात सबसे छिपाते हुए दोनों अपने-अपने घर रहने लगे गए।

वहीं शादी के बाद लड़की को हाल ही में पता चला कि जिस मुख्तार के प्यार में आकर उसने अपने परिजनों को बिना बताए शादी की थी वह पहले से ही शादीशुदा है और उसके बच्चें भी है। इतना ही नहीं मुख्तार की पहली पत्नी भी दूसरे समुदाय की है। यह सच्चाई जानने के बाद युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इतने महीनों से बात करने के बावजूद मुख्तार ने उसे शादी और बच्चे की भनक भी नहीं लगने दी।

पीड़िता के पिता ने घटना की जानकारी पुलिस को देते हुए आरोपित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। पिता ने अपनी शिकायत में बताया कि कुछ हफ़्तो पहले उन्होंने अपनी बेटी को फोन पर किसी से लड़ते हुए देखा। जिसके बाद पिता ने बेटी का फोन छीन कर उससे पूछताछ की। जिसपर लड़की ने बताया कि कुछ महीनों पहले उसने राहुल नाम के शख्स से शादी कर ली थी और वह उसी से बात करती है। यह सुनते ही परिजनों के होश उड़ गए। राहुल का असली नाम जानने के बावजूद युवती ने घरवालों को उसका असली नाम नहीं बताया उस वक्त।

फोन जब्त होने और परिजनों के सख्ती की वजह से युवती लड़के से न बात कर पाई न ही मिल पाई। जिसके एक हफ्ते बाद मुख्तार खुद लड़की के घर पहुँच गया। मुख्तार ने कहा कि वह उसकी पत्नी है और वो उसे अब घर ले जाना चाहता है। जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए परिजनों ने जब अपनी लड़की को बचाने की कोशिश की तो वह धक्का मुक्की पर उतर आया और जबरन उसे साथ ले जाने लगा।

मामले को बिगड़ता देख पीड़िता के पिता ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस की पूछताछ में जब युवक ने अपना असली नाम मुख्तार अहमद बताया तो स्वजनों को और बड़ा धक्का लगा। जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मुख्तार ने उससे राहुल बनकर दोस्ती की थी। उसने इस तरह से मुझे अपने काबू में कर लिया था कि वह जो कहता मैं करती चली जाती। उसने फिर परिजनों से अपने मरियम फातिमा बनने को लेकर भी खुलासा किया।

लड़की ने बताया मुख्तार ने निक़ाह करते समय बीवी बच्चों की बात उससे नहीं बताई थी। उसने बाद में बताया कि वह शादीशुदा है और उसके बच्चे भी है। लेकिन पहली बीवी से उसने तलाक ले लिया है और वह उसके साथ नहीं रहती। पिता ने मामले में पुलिस वालों से अनुरोध किया कि उन्हें उनकी बेटी वापस चाहिए। धोखाधड़ी से इस शादी को अंजाम दिया गया है। इसके अलावा पिता ने आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की है।

गौरतलब है कि कानपुर में लव जिहाद के मामलों की जाँच एसआईटी द्वारा की जा रही है। वहीं इस मामले को भी एसआईटी को सौंप दिया गया है। परिजनों की शिकायत पर मामले की जाँच और पीड़िता से पूछताछ की जा रही है।

अलवर: भांजे के साथ बाइक से जा रही विवाहिता से गैंगरेप, वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित आसम, साहूद सहित 5 गिरफ्तार

राजस्थान के अलवर जिले में एक बार फिर शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। एक विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद वीडियो वायरल करने का मामला दर्ज हुआ है। 45 साल की एक महिला ने 6 लोगों पर अपने साथ गैंगरेप करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि इन बदमाशों ने उनके भांजे के सामने ही उनके साथ इस घिनौनी कृत्य को अंजाम दिया। इतना ही नहीं महिला का आरोप है कि सभी बदमाशों ने जबरन उनके भांजे से भी उनका रेप करवाया। 

मामला 14 सितंबर का है, जब तिजारा थाना क्षेत्र में एक गाँव की पहाड़ियों की तरफ से अपने भांजे के साथ बाइक पर वापिस अपने घर लौट रही विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसका वीडियो बनाया गया और इससे भी शर्मनाक बदमाशों ने विवाहिता के भांजे को नग्न कर उससे जबरदस्ती महिला के साथ दुष्कर्म कराने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस मामले मुख्य आरोपित सहित दो को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक नाबालिग आरोपित को हिरासत में लिया गया है।

डीएसपी कुशाल सिंह ने बताया, “पुलिस ने दो आरोपितों आसम मेओ और साहूद मेओ को गिरफ्तार किया और एक 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाकी आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें हरियाणा भेजी गई हैं।”

विवाहित महिला अपने भांजे के साथ रिश्तेदारी में हरियाणा के कंसोली गाँव में पैसे देने गई थी। दोपहर बाद वह अपने रिश्तेदार को 10 हजार रुपए देकर वापस लौट रही थी। तभी बाइक सवार विवाहिता ओर उसके भांजे को तिजारा क्षेत्र के अंडरका गाँव की पहाड़ियों के पास 5-6 बदमाशों ने घेर लिया।

फिर बदमाशों ने विवाहिता के भांजे को बंधक बनाकर आसम नाम के आरोपित ने दुष्कर्म किया और अन्य बदमाशों ने वीडियो बनाई और छेड़खानी की। इतना ही नहीं, बदमाशों ने विवाहिता के भांजे को नग्न कर उससे भी दुष्कर्म करवाने का प्रयास किया और वीडियो बनाई ताकि वह इस घटना के बारे में किसी को बता नहीं सके।

आरोपितों ने इसका वीडियो भी बनाया और हरियाणा के गाँवों में सोशल मीडिया पर इसे वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद महिला ने तुरंत शिकायत नहीं दर्ज कराई थी। लेकिन जब इसका वीडियो वायरल हुआ तब उन्होंने इस बात की जानकारी अपने पति को दी और फिर उनके सहयोग से 17 सितंबर को केस दर्ज कराया है।

बाद में दो अन्य आरोपितों को भी शनिवार (सितंबर 19, 2020) को गिरफ्तार किया गया। अलवर के एसपी रामूर्ती जोशी ने कहा, “हमने अब 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अब केवल एक और व्यक्ति को पकड़ा जाना बाकी है। हम यह भी जाँच रहे हैं कि अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर कैसे वायरल किया गया।” प्रारंभिक पूछताछ के बाद, दोषियों ने पुष्टि की है कि धूता उर्फ आसम मेव मुख्य आरोपित है, जिसने पहले महिला का बलात्कार किया था और पीड़ित के भांजे को भी मजबूर किया और अश्लील वीडियो बनाया था।

‘सभी संघियों को जेल में डालेंगे’: कॉन्ग्रेस समर्थक और AAP ट्रोल मोना अम्बेगाँवकर ने जारी किया ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ का एजेंडा

कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी की फुलटाइम ट्रोल और पार्ट टाइम अभिनेत्री मोना अम्बेगाँवकर ने ट्विटर पर एक सूची बनाई है। यह सूची इस बात को लेकर बनाई गई है कि अगर भविष्य में उन्हें भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलेगा, तो वो क्या-क्या करेंगी। 

मोना अम्बेगाँवकर को अभिनेत्री के रूप में पहचाना जाना पसंद है। वह कहती हैं कि सबसे पहले वह सत्ता के हर पद से हर उस शख्स को बाहर निकालेंगी, जिनके पास संघी प्रभाव हो सकते हैं। मोना का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाएँगी और अगले पीएम बनने का मौका मिलने पर सभी संघियों को जेल में डाल देगी।

The wishes of Mona Ambegaonkar

मोना अम्बेगाँवकर ने यह बातें वामपंथी कार्टेल के एक अन्य स्थायी सदस्य मेघनाद के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा था। बता दें कि मेघनाद वामपंथी वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री के एक स्तंभकार हैं। इन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ट्विटर पर पूछा था, “यदि आप भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो आप पहली चीज क्या करेंगे?”

यह एक निर्विवाद तथ्य है कि जो चीज इन तथाकथित वामपंथी ‘उदारवादियों’ को एक साथ बाँधती है, वह है मोदी और उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के लिए उनकी नफरत। और चूँकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी हैं और राष्ट्रीय नीति पर प्रभाव रखते हैं, इसलिए यह संगठन और इससे जुड़े लोग भी लिबरलों के निशाने पर रहते हैं।

शायद यही कारण है कि कॉन्ग्रेस और AAP की हमदर्द मोना अम्बेगाँवकर ने फर्जी खबरों को फैलाने के लिए वामपंथी गिरोह में शामिल हो गई कि कंगना रनौत बिहार चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करेंगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि कंगना रनौत प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करती हैं और काफी मुखर हैं। इससे पहले भी, इस वामपंथी कार्टेल के दोनों स्थायी सदस्य- मोना और मेघनाद इंडिगो उड़ानों पर अर्नब गोस्वामी के प्रति प्रोपेगेंडिस्ट कुणाल कामरा के बुरे व्यवहार का समर्थन करने के लिए ब्रिगेड में शामिल हुए थे।

तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 2019 आम चुनाव प्रचार के दौरान सत्ता में आने के बाद आरएसएस पर संभावित कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए थे। उन्होंने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड नामक एक आतंकवादी संगठन से की थी, जिसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई चल रही है।

इस सबसे पता चलता है कि लिबरलों को उन लोगों पर नकेल कसने में कोई परहेज नहीं है जिन्हें वे अपनी सत्ता के लिए खतरा मानते हैं। वे पहले गालियों का एक अभियान चलाते हैं और फिर जब इसके लिए जमीन तैयार होने के बाद उपयुक्त अवसर पैदा होता है, तो राजनीतिक विरोधियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है। आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी यही किया था। इसलिए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ‘संघियों’ पर क्रूर हमले की आशंका एक स्थायी संभावना बनी हुई है।

अतीक अहमद के फरार चल रहे भाई अशरफ को जिस घर से पुलिस ने किया था गिरफ्तार, उसे योगी सरकार ने किया जमींदोज

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार हर दिन बाहुबालियों और माफियों द्वारा हथियाए करोड़ो की अवैध संपत्तियों को कुर्क और ध्वस्त करने का काम कर रही है। इसी कड़ी में शनिवार (19 सितंबर, 2020) को प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने अतीक अहमद के भाई अशरफ के साले मोहम्मद जैद के कौशांबी स्थित करोड़ों के आलीशान बिल्डिंग पर भी सरकारी बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, तीन साल से फरार चल रहे अतीक के भाई अशरफ को तीन जुलाई को क्राइम ब्रांच और पुलिस ने उसके ससुराल में इसी मकान से गिरफ्तार किया था। करोड़ों की लागत से बना तीन मंजिला मकान ध्वस्त करने के लिए आधा दर्जन बुलडोजर व जेसीबी मशीनें दोपहर से गरजने लगी थी। तकरीबन पाँच घंटे तक यूपी प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण का कार्य किया गया। विकास प्राधिकरण के जोनल अधिकारी शत शुक्ला के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई है।

अशरफ के साले जैद ने करोड़ों की लागत से कौशाम्बी जिले के पूरा मुफ्ती थाना अन्तर्गत सल्लाहपुर चौकी क्षेत्र के हटवा गाँव में 600 वर्ग मीटर भूमि पर दो मंजिला आलीशान बिल्डिंग का निर्माण करवाया था। अधिकारियों का कहना है कि दो मंजिला मकान बनाने के पूर्व विकास प्राधिकरण से इसका नक्शा नहीं पास कराया गया था। इतना ही नहीं भूमाफिया के रिश्तेदार जैद ने बिल्डिंग से सटी 800 वर्ग मीटर जमीन पर भी अवैध कब्जा किया था।

बता दें तीन साल से फरार अशरफ अक्सर छिपते-छिपाते अपने ससुराल के इसी घर मे आता-जाता रहता था। मुखबिरों द्वारा कई बार पुलिस को इसकी जानकारी दी गई थी। लेकिन पुलिस के पहुँचने से पहले ही वह फरार हो जाता था। अशरफ 1 लाख इनामी था। पुलिस ने उसे तीन जुलाई को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया था। अशरफ के ससुराल वालों पर भी जमीन के धंधे में अवैध रुप से पैसे कमाने और अपराध से सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप है।

उत्तरप्रदेश में योगी सरकार के रवैये को देखते हुए सारे अपराधियों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो चुकी है। माफियों में इस बात का डर पैदा हो चुका है कि कब प्रशासन द्वारा उनपर कार्रवाई की जाए इसका कोई पता नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी प्रशासन ने करोड़ों रुपए की लागत वाले अतीक के कोल्ड स्टोरेज को भी छः जेसीबी मशीनें लगाकर जमींदोज कर दिया था। यह कोल्ड स्टोरेज अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन के नाम पर झूंसी के कटका में स्थित था। जिसे अब ध्वस्त कर दिया गया।

अब तक अतीक की कुल 200 करोड़ की संपत्ति को या तो जब्त या ध्वस्त किया जा चुका है। इतना ही नहीं उसके करीबियों के भी अवैध संपत्तियों को बख्शा नहीं जा रहा है।

नेटफ्लिक्स: काबुलीवाला में हिंदू बच्ची से पढ़वाया नमाज, ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर रवींद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी से छेड़छाड़

इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने इन दिनों दर्शकों को रिझाने के लिए अपने मनोरंजन का काम छोड़ लोगों के बीच प्रोपेगैंडा फैलाने पर ज्यादा ध्यान देने लग गई है। आए दिन अलग-अलग सीरीज के जरिए हिंदू धर्म का अपमान और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर तुलनात्मक रूप से इस्लाम धर्म का महिमामंडन किया जा रहा है।

इसी तरह के हिंदू धर्म के प्रति अपमान को लक्षित कर एक चर्चित साइट नेटफ्लिक्स में अनुराग बसु द्वारा रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला पर आधारित एक वेब सीरीज में दिखाया गया है। हालाँकि, यह सीरीज नेटफ्लिक्स का ओरिजनल कंटेंट नहीं लग रहा है। इसे पहले Epic On पर उपलब्ध कराया गया था। लेकिन लोगों की नजर इसपर नेटफ्लिक्स पर आने के बाद पड़ी।

सीरीज की कहानी के एक दृश्य में (मिनी) नाम की एक लड़की नमाज अदा करते हुए दिखाई देती है क्योंकि उसका दोस्त काबुलीवाला कुछ दिनों के लिए उससे मिलने नहीं आया था। सीन में छोटी बच्ची को काबुलीवाले के अल्लाह से प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है। ताकि उसका दोस्त जल्द ही उससे मिलने आए।

इसमें यह बात ध्यान देने वाली है कि टैगोर की मूल कहानी (जिसके आधार पर यह शो बनाया गया है) में नमाज अदा करने वाली हिंदू लड़की के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया है। शो के निर्माताओं ने इसे अपने प्रोपेगेंडा के अनुसार डाला है। इस दृश्य में राजनीतिक एजेंडे के अलावा, मूल कहानी के बिलकुल अलग इस तरह के कथानक को दिखाने के लिए कोई अन्य औचित्य नजर नहीं आ रहा है।

गौरतलब है कि प्रोपेगेंडा हमेशा मनोरंजन उद्योग का एक अभिन्न अंग रहा है। आधुनिक प्रोपेगैंडा के जनक एडवर्ड बर्नेज़ ने एक बार टिप्पणी की थी, “अमेरिकन मोशन पिक्चर आज दुनिया में प्रोपेगेंडा का सबसे बड़ा अचेतन वाहक है।” हालाँकि, यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग भी प्रोपेगैंडा का एक अचेतन वाहक है।

जिस तरह रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी में नमाज़ अदा करने वाली हिंदू बच्ची को चित्रित कर दिया गया वैसे ही नेटफ्लिक्स पर जल्द ही रिलीज़ होने वाली फिल्मों में से एक में फर्जी ब्राह्मण विरोधी कोटेशन का आविष्कार किया गया है। और इसका श्रेय इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति को दिया गया है।

वहीं नेटफ्लिक्स पर Ghoul और Leela जैसे शो भी उपलब्ध है, जिसमें हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं पर खुले तौर पर निशाना साधा गया है। सांप्रदायिक सौहार्द की खातिर, हिंदू समुदाय की भावनाओं को अक्सर रौंदने की अनुमति दे दी जाती है। लेकिन पारस्परिक सहिष्णुता को दिखाते हुए अन्य धर्मो के खिलाफ शायद ही कोई शो कभी नेटफ्लिक्स आदि पर आते हैं। हिंदू समुदाय को उपदेश जारी करना और एक पक्षीय सहिष्णुता का प्रचार प्रसार करना मनोरंजन उद्योग की एक खास विशेषता बन चुकी है।