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चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार का ग्लोबल टाइम्स ने किया बचाव

दिल्ली पुलिस ने 14 सितंबर को स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को भारत की सीमा रणनीति और भारतीय सेना की तैनाती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी चीनी खुफिया एजेंसियों को साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके बाद, मामले में चीनी एजेंट किंग शी और उसके नेपाली सहयोगी शेर सिंह को गिरफ्तार किया गया। राजीव शर्मा चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (समाचार पत्र) के लिए स्तम्भ भी लिखा करता था।

अब ग्लोबल टाइम्स उसके बचाव में सामने आया है। उसके प्रधान संपादक हू ज़िजिन ने लिखा,“मुझे लगता है कि इस मामले को ग्लोबल टाइम्स से सार्वजनिक रूप से जोड़ना और ध्यान आकर्षित करने के लिए सनसनी पैदा करना भारतीय पक्ष के लिए बहुत अनुचित है। वे स्पष्ट रूप से चीनी मीडिया आउटलेट के लिए सम्मान दिखाने में विफल रहे हैं और ऐसा करना भारत सरकार के लिए विशेष रूप से अनुचित है।”

Hu Xijin comes out in defence of Rajeev Sharma

यह दावा करते हुए कि राजीव शर्मा को ग्लोबल टाइम्स के साथ जोड़ने से सरकारी मीडिया के खिलाफ एक ‘नकारात्मक एसोसिएशन’ बनेगा, हू जिजिन ने कहा, “ग्लोबल टाइम्स ने चीन-भारत सीमा तनाव पर कई रिपोर्ट और विचार प्रकाशित किए हैं। मुझे पता है कि कुछ भारतीय हमसे नाखुश हैं। वे हमारी खुली आलोचना कर सकते हैं या हमारे साथ बहस कर सकते हैं, लेकिन इस तरह की क्षुद्रता दिखाना निरर्थक है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के कारण शर्मा के ग्लोबल टाइम्स के साथ लिंक को इस तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

इसके अलावा कुछ भारतीय पत्रकार भी शर्मा के समर्थन में सामने आए हैं। NDTV ‘जर्नलिस्ट’ अरविंद गुणसेकर ने तर्क दिया कि राजीव शर्मा की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ थी।

Arvind Gunasekar defends Rajeev Sharma

एनडीटीवी के समाचार एंकर गार्गी रावत ने कहा कि राजीव शर्मा को कठोर’ (‘draconian’) ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।

Gargi Rawat on Rajeev Sharma’s arrest

दिल्‍ली पुलिस के स्‍पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि शर्मा बार-बार जगह बदल कर चीनी खुफिया अधिकारियों मुलाकात कर रहा था। खासकर 2016 से 2018 के बीच देश के बाहर अलग-अलग जगहों पर उसने चीन के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात कर खुफिया दस्‍तावेज और अहम जानकारी दी।

दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि चीनियों को गोपनीय सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपए मिले थे। शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे। चीनी खुफिया अधिकारियों ने पत्रकार को ज्‍यादा से ज्‍यादा खुफिया जानकारी मुहैया कराने को कहा था। इसके बदले उसे पैसे के साथ लग्‍जरी हॉलीडे पैकेज का भी ऑफर दिया गया था।

इन खुफिया जानकारी में आर्मी से जुड़ी जानकारी, डिफेंस सिस्‍टम से जुड़ी, भारत की विदेश नीति के साथ दलाई लामा के बारे में भी जानकारी माँगी गई थी। काम के बदले पेमेंट करने के लिए चीनियों ने नेपाल के कुछ लोगों के साथ मिल कर शेल कंपनी बना रखी थी। इसी से पैसा भारत में ट्रांसफर होता था।

राजीव शर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी सेना के मूवमेन्ट्स, रक्षा अधिग्रहण, दलाई लामा, विदेश नीति आदि से संबंधित थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के अनुसार, राजीव शर्मा ने खुलासा किया था कि उसने डोकलाम, गलवान घाटी, भारत-भूटान-चीन, भारतीय-म्यांमार सैन्य सहयोग, भारत-चीन सीमा मुद्दे और अन्य संबंधित मुद्दों पर जानकारी प्रदान की थी।

रूम या वैन बंद होते ही दिखाने लगते हैं गुप्तांग: कंगना बोलीं- जो पायल ने कहा वह कई बड़े हीरो ने किया

फिल्मकार अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री पायल घोष ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। इसके बाद से कई लोग अनुराग का समर्थन कर रहे हैं तो कंगना रनौत जैसे कुछ अभिनेत्री लगातार इस मसले पर मुखर हैं। कंगना ने ट्वीट कर कहा है कि पायल ने जो कुछ कहा है वैसा उनके साथ कई बड़े हीरो ने किया है।

कंगना ने एक ट्वीट में कहा, “जो पायल घोष कह रही हैं, कई बड़े हीरो ने मेरे साथ ऐसा किया है। जैसे कि रूम या वैन बंद होते ही अपने गुप्तांग दिखाना या किसी पार्टी में डांस करते हुए मुँह में जीभ को ले जाना। काम के लिए घर पर आना और फिर जबरदस्ती करना।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है, “बॉलीवुड यौन शिकारियों से भरा है जो फेक और डमी मैरिज भी करते हैं। वे अपेक्षा करते हैं कि एक नई हॉट लड़की हर दिन उन्हें खुश करें। वे युवा कमजोर पुरुषों के साथ भी ऐसा ही करते हैं। मैंने अपने मैटर को अपने तरीके से सुलझा लिया था। मुझे मीटू की जरूरत नहीं थी, लेकिन कई लड़कियों को इसकी जरूरत है।”

कंगना ने कहा कि बॉलीवुड में ‘मीटू’ इसलिए असफल रहा, क्योंकि रेपिस्ट और उत्पीड़न करने वाले लिबरल्स थे। पायल को भी अपमानित कर अन्य महिलाओं की तरह चुप कराया जाएगा। लेकिन मैं उनका समर्थन करती हूँ।

एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना ने लिखा, “जहाँ तक मुझे मालूम है, अनुराग ने स्वीकार किया है कि वह कई शादी के बावजूद भी कभी भी मनॉगमस नहीं रहे। जो उन्होंने पायल के साथ किया, वह बॉलीवुड में आम बात है। बाहर से आकर स्ट्रगल करने वाली लड़कियों से सेक्स वर्कर्स की तरह व्यवहार करना उनके लिए नेचुरल है।”

कंगना ने आगे लिखा, “अनुराग ऐसा बहुत कुछ करने में सक्षम है, जो पायल घोष ने बताया है। उसने अपने सभी पार्टनर्स के साथ धोखा किया। स्वयं स्वीकार किया कि वह कभी भी मनॉगमस नहीं रहा है। फैंटम फिल्म में कई MeToo अभियुक्त थे। मैंने उन पीड़ितों का भी समर्थन किया तो लिबरल्स ने मुझे बदनाम करने का अभियान शुरू कर दिया।”

पायल घोष का अनुराग कश्यप पर यौनशोषण का आरोप

गौरतलब है कि 19 सितंबर 2020 को पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। आरोप लगाते हुए उन्होंने लिखा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार-कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की।”

‘UPSC Jihad’ पर सुप्रीम कोर्ट में सुदर्शन न्यूज का हलफनामा, NDTV के ‘हिंदू आतंक’ और ‘भगवा आतंक’ का दिया हवाला

रविवार (सितंबर 20, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में सुदर्शन न्यूज ने कहा कि चैनल अपने “बिंदास बोल” शो के “यूपीएससी जिहाद” कार्यक्रम के शेष एपिसोड प्रसारित करते हुए कानूनों का कड़ाई से पालन करेगा। चैनल की तरफ से यह भी कहा गया है कि वह सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रोग्राम कोड का पालन करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चैनल की तरफ से हलफनामा प्रस्तुत किया गया था।

इसके साथ ही, सुदर्शन न्यूज ने हलफनामे में NDTV द्वारा ‘हिंदू आतंकवाद’ पर प्रसारित कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। चैनल ने बताया कि कैसे NDTV ने अपने कार्यक्रमों में हिंदू संतों की काल्पनिक छवि का इस्तेमाल किया था।

सुदर्शन टीवी ने ‘हिंदू आतंक’ पर NDTV के कार्यक्रम का उल्लेख किया

बता दें कि NDTV ने 2008 और 2010 में ‘हिंदू टेरर’ पर दो कार्यक्रमों का प्रसारण किया था। सुदर्शन न्यूज ने हलफनामे में इन कार्यक्रमों का हवाला दिया और कहा कि इन पर अधिकारियों और सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान नहीं गया। हलफनामे में दोनों कार्यक्रम के लिंक थे और इस पर आपत्ति जताई गई कि कैसे चैनल ने हिंदू प्रतीकों और संतों को कहानियों में दिखाया। बरखा दत्त ने दोनों कार्यक्रमों की मेजबानी की थी।

हलफनामे में कहा गया है,“17.09.2008 को एनडीटीवी ने ‘Hindu Terror: Myth or fact?’ शीर्षक से एक कार्यक्रम प्रसारित किया था, जिसकी एंकरिंग बरखा दत्त ने की थी। इस कार्यक्रम में प्रोग्राम के कैप्शन के ठीक बगल में एक हिंदू संत को ‘तिलक’ और ‘चिलम’ के साथ दिखाया गया था। इसके साथ ही संत के हाथ में त्रिशूल भी दिखाया गया था, जो हिंदुओं के सबसे पवित्र प्रतीकों में से एक है और हिंदुओं के देवता भगवान शिव से जुड़ा हुआ है।”

हलफनामा में आगे 26 अगस्त 2010 को एनडीटीवी द्वारा प्रसारित एक अन्य कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है। इस कार्यक्रम को भी बरखा दत्त ने ही होस्ट किया था और इसका शीर्षक “Is ‘Saffron Terror’ real?” दिया गया था। सुदर्शन न्यूज ने बताया कि उक्त एनडीटीवी कार्यक्रम में भगवा रंग के कपड़ों में एक हिंदू सांस्कृतिक सभा दिखाई गई।

NDTV के कार्यक्रमों का उल्लेख महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में समुदाय विशेष वालों को चित्रित करने के लिए हरे रंग की टी-शर्ट, दाढ़ी और टोपी के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने कहा कि चैनल पूरे समुदाय को रूढ़िबद्ध करने की कोशिश कर रहा है।

अदालत ने आँकड़े या इन्फोग्राफिक्स दिखाते हुए समुदाय विशेष के पात्रों की पृष्ठभूमि में आग की लपटों के उपयोग पर भी आपत्ति जताई। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके से उन परिवर्तनों के बारे में सवाल किया था जो यह सुनिश्चित कर सके कि चित्रण एक विशेष समुदाय पर हमला नहीं करता है।

अपने हलफनामे में चैनल ने फिर से उल्लेख किया कि यह किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। चैनल सिविल सेवाओं में किसी भी समुदाय से किसी भी योग्य उम्मीदवार के प्रवेश का विरोध नहीं करता है। अदालत ने निषेधाज्ञा आदेश जारी किया था और सुनवाई समाप्त होने तक चैनल को शेष एपिसोड प्रसारित करने से रोक दिया था।

चव्हाणके ने अपने हलफनामे में अदालत से अनुरोध किया कि सभी मानदंडों का पालन करने के उनके आश्वासन पर उन्हें शेष एपिसोड को प्रसारित करने की अनुमति दी जाए। मामले में सुनवाई सोमवार (सितंबर 21, 2020) को जारी रहेगी।

नेपाल की जमीनों पर कब्जा कर चीन ने खड़ी की 8 इमारतें, अधिकारी हैरान; ओली ने साध रखी है चुप्पी

चीन एक तरफ नेपाल के साथ तेजी से अपनी दोस्ती मजबूत कर रहा है। दूसरी तरफ अपना विस्तारवादी चरित्र दिखाते हुए नेपाल के इलाकों पर अतिक्रमण कर इमारतों का निर्माण भी कर रहा है।

खबर हब की एक रिपोर्ट के अनुसार, हुमला के लापचा-लिमी क्षेत्र की हालिया तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने क्षेत्र में अब तक आठ इमारतें बना ली हैं। बावजूद इसके भारतीय इलाकों पर दावा ठोकने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने अपनी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण पर चुप्पी साध रखी है।

हुमला के सहायक मुख्य जिला अधिकारी दलबहादुर हमाल इस क्षेत्र की हाल की तस्वीरों को देखकर हैरान रह गए और मामले की जाँच शुरू की है। स्थानीय नेपाली लोगों ने चीनी सेना के हाथों हुए उत्पीड़न की शिकायत भी की है। नेपाली जिला के अधिकारियों ने 30 अगस्त से 9 सितंबर तक क्षेत्र का निरीक्षण किया था।

IFE न्यूज नेटवर्क के सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन ने पीएम ओली को इस मामले की खबर देते हुए चिंता जाहिर की, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। स्थानीय लोगों को डर है कि नेपाली प्रशासन ने गुप्त सौदा करते हुए क्षेत्र में चीनी सेना को इसके लिए अनुमति दी है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इमारतें दूर से दिखाई देती हैं। हालाँकि, पीएलए सैनिकों की भारी उपस्थिति के कारण जिले के अधिकारियों को करीब से देखने का मौका नहीं मिला।

नेपाल की मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि घटना के बारे में जानने के बाद, नेपाल के गृह मंत्रालय (MoHA) ने मामले को नेपाल के विदेश मंत्रालय को फॉरवर्ड कर दिया है। खबर हब ने निगरानी टीम के एक सदस्य के हवाले से कहा, “हम दूर से इमारतों को देख सकते थे। हमने चीन द्वारा वहाँ बनाई जा रही 1 इमारत के बारे में अफवाहें सुनी थीं, लेकिन निरीक्षण के बाद वहाँ ऐसी 8 बिल्डिंग्स पाई गई हैं।”

बता दें मामले की आगे की जाँच के लिए, सीडीओ चिरंजीवी गिरि और चार सुरक्षा निकायों के प्रमुख की एक टीम एक सप्ताह के लिए लापचा का दौरा करेगी।

गौरतलब है कि ऐसे वक़्त में भी नेपाल के कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री केपी ओली भारतीय भूमि पर विचित्र दावे करने में व्यस्त हैं। कुछ दिनों पहले नेपाल ने आधिकारिक बयानों में कहा था कि नैनीताल, देहरादून, लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा सहित भारतीय क्षेत्र उसका हिस्सा हैं। जून में ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने नेपाल में 10 से अधिक स्थानों पर कब्जा कर लिया है।

झारखंड: दलित नाबालिग को इरशाद अंसारी ने अगवा किया, पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी

झारखंड के गुमला शहर के लक्ष्मण नगर से एक 15 वर्षीय दलित लड़की के अपहरण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इरशाद अंसारी नाम के युवक ने निक़ाह के इरादे से 10 दिन पहले लड़की को अगवा कर लिया। शिकायत करने पर इरशाद के भाई अब्दुल अंसारी ने पीड़िता के पिता को जाति सूचक गालियाँ और जान से मारने की धमकी दी।

प्रभात खबर की रिपोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के पिता ने इसे लव जिहाद का मामला बताते हुए गुमला थाने में तहरीर दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि उनकी लड़की 10 सितंबर के सुबह 9 बजे से लापता है।

पिता ने बताया कि काफी खोजबीन के बावजूद जब लड़की का पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बेटी के अपहरण के पीछे इरशाद अंसारी का हाथ बताया है। उन्होंने बताया कि मामले की लिखित शिकायत करने के बाद इरशाद के चचेरे भाई ने उन्हें जातिसूचक गालियाँ देते हुए घर के सभी लोगों को जान से मारने की धमकी दी है। इतना ही नहीं बेटी को खोजने पर उन्हें फोन पर भी इसी तरह की धमकी दी गई।

पिता के मुताबिक, 10 दिन से लापता उनकी लड़की को लेकर थाने की तरफ से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके बाद परिजनों ने गुमला के पुलिस अधीक्षक एचपी जनार्दन के संज्ञान में मामले को लाते हुए उन्हें शिकायत पत्र सौंपा है।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग ने जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। विहिप ने कहा है कि गुमला जिला की हिंदू लड़कियों के साथ आए दिन ऐसी घटना घटित हो रही है। समुदाय विशेष के युवक हिंदू नाम रख कर लड़कियों को शिकार बना रहे है। अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई पूरे झारखंड में लव जिहाद और धर्मांतरण के विरोध में आंदोलन किया जाएगा।

क्या MSP खत्म कर रही है सरकार? PM मोदी ने राहुल गाँधी के दुष्प्रचार का किया फैक्टचेक

राज्यसभा में कृषि बिल के होने के साथ ही कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने दुष्प्रचार के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। इसी कड़ी में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सरकार पर हमला करने और गलत सूचना फैलाने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। बता दें कि राहुल गाँधी फिलहाल अपनी माँ सोनिया गाँधी के साथ संसद के मानसून सत्र से नदारद हैं। सोनिया गाँधी रायबरेली की सांसद होने के साथ ही कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष भी हैं।

राहुल गाँधी ने सरकार पर ‘किसान विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि अगर APMC मार्केट को खत्म कर दिया जाता है तो किसानों को MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) कैसे मिलेगा। उन्होंने सवाल किया कि सरकार MSP की गारंटी क्यों नहीं दे रही है। साथ ही उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा कि मोदी जी किसानों को पूँजीपतियों का ‘ग़ुलाम’ बना रहे हैं, जिसे देश कभी सफल नहीं होने देगा।

तथ्यों को सामने लाने और फैलाए जा रहे फर्जी खबरों का खंडन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अन्य मंत्रियों ने भी सोशल मीडिया का सहारा लिया।

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं पहले भी कह चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ। MSP की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहाँ अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।”

पीएम मोदी ने कहा कि बदलते समय के साथ किसानों को अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए तकनीक की भी जरूरत है। अब इन बिलों के पास होने से हमारे किसानों की पहुँच भविष्य की टेक्नोलॉजी तक आसान होगी। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम सामने आएँगे। यह एक स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “दशकों तक हमारे किसान भाई-बहन कई प्रकार के बंधनों में जकड़े हुए थे और उन्हें बिचौलियों का सामना करना पड़ता था। संसद में पारित विधेयकों से अन्नदाताओं को इन सबसे आजादी मिली है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को बल मिलेगा और उनकी समृद्धि सुनिश्चित होगी।”

बता दें कि रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को उच्च सदन ने ध्वनिमत से पास कर दिया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। 

राज्यसभा में ध्‍वनिमत से पारित होने से पहले इन विधेयकों पर सदन में खूब हंगामा हुआ। नारेबाजी करते हुए सांसद वेल तक पहुँच गए। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। विपक्ष ने इसे ‘काला दिन’ बताया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह ‘लोकतंत्र की हत्‍या’ है। डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

HW न्यूज नेटवर्क: राजस्व से 11 गुना ज्यादा खर्च, विनोद दुआ को ‘रोजगार’ देने पर चर्चा में रहा था

HW न्यूज नेटवर्क के मालिक थियो कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पर 16 सितंबर, 2020 को आयकर विभाग द्वारा छापा मारा गया। HW न्यूज़ के अनुसार, छापेमारी 50 घंटे से अधिक समय तक चली और पत्रकारों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे।

बता दें, एचडब्ल्यू न्यूज़ एक छोटा-सा डिजिटल न्यूज़ आउटफिट है, जो कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार विनोद दुआ को नियुक्त करने के लिए जाना जाता है। दुआ पर फिल्म निर्माता निष्ठा जैन का पीछा करने और यौन उत्पीड़न करने का आरोप भी है।

किस वजह से छापा मारा गया और इसका क्या परिणाम निकला अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन थियो कनेक्ट के वित्तीय हालात पर गौर करने से संदेह पैदा होता है। कंपनी कोई अच्छा-खासा प्रदर्शन नहीं कर रही है, लेकिन अभी भी आसानी से फंड जुटाने में सक्षम है।

कंपनी के डायरेक्टर गणेश जगताप और सिद्धान्त जगताप हैं। कंपनी का पेड-अप कैपिटल 5 लाख रुपए है। सुजीत नायर कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। मूल रूप से इसके मालिक नायर ही थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे गणेश जगताप को बेच दिया। विनोद दुआ इस डिजिटल समाचार नेटवर्क के कंसल्टिंग एडिटर हैं। साथ ही वे नेटवर्क पर ‘द विनोद दुआ शो’ नामक एक कार्यक्रम चलाते हैं।

ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस की गई कंपनी के फाइनेंसियल स्टेटमेंट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 में इसका रेवेन्यू 54 लाख रुपए था, जो वर्ष 2018-19 में 28 लाख रुपए हो गया। बता दें 2017- 18 में कंपनी को 1.98 करोड़ रुपए के नुकसान हुआ था। वहीं कंपनी को वर्ष 2018- 19 में 2.95 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

Finances of Theo Connect (amounts in Rs)

वर्ष 2018-19 में कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 28 लाख रुपए था, लेकिन इसके खर्च 3.23 करोड़ रुपए थे। इसका मतलब है कि खर्च रेवेन्यू से ग्यारह गुना अधिक था। अगर कोई यह भी मानता है कि स्टार्टअप के प्रारंभिक वर्षों के दौरान रेवेन्यू, खर्चों से मेल नहीं खा सकता है, तब तो यह अधिक चिंताजनक तथ्य है कि थियो कनेक्ट का प्रमुख फंड स्रोत इक्विटी नहीं, बल्कि कर्ज है।

वर्ष 2018-19 में कंपनी ने 3.09 करोड़ रुपए के अनसेक्योर्ड लोन का प्रबंध किया। 1.87 करोड़ रुपए के मौजूदा ऋण के साथ, वर्ष के अंत में कंपनी का कुल ऋण 4.96 करोड़ रुपए रहा, जो 54 लाख रुपए के रेवेन्यू से बहुत अधिक है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस तरह के खराब वित्तीय प्रदर्शन वाली कंपनी ₹ 3 करोड़ से अधिक के खर्चों का प्रबंधन कैसे करती है, और यहाँ तक ​​कि अनसेक्योर्ड लोन का प्रबंधन भी करती है। ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी का पूरा खर्च अनसेक्योर्ड लोन से भुगतान किया गया है, क्योंकि कंपनी का रेवेन्यू काफी कम है।

एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि 3.09 करोड़ रुपए का यह अनसेक्योर्ड लोन, ड्रीम TAG रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से आया है। थियो कनेक्ट और इस कंपनी के डायरेक्टर्स एक ही हैं। वर्ष 2018-19 में ड्रीम टीएजी का राजस्व 34.85 लाख रुपए से गिरकर 94 हजार रुपए था। कंपनी ने उस वर्ष 35.78 लाख रुपए के घाटे की जानकारी दी थी। इसलिए यह एक रहस्य है कि कंपनी ने अनसेक्योर्ड लोन कैसे दिया, जब उसके खुद के वित्तीय हालात ठीक नहीं थे।

गणेश जगताप महाराष्ट्र के एक नौकरशाह और राज्य के एक उपमुख्यमंत्री के प्रेस सचिव रहे हैं। उनकी दूसरी कंपनी ड्रीम TAG रियल्टी मुंबई स्थित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी है।

अब यह एक रहस्य है कि कैसे HW न्यूज़ नेटवर्क खर्चों के साथ काम कर रहा है, जो इसके रेवेन्यू का लगभग 11 गुना है। इसके अलावा ऐसी स्थिति में भी वह अनसेक्योर्ड लोन का प्रबंध कर लेता है। इनकम टैक्स विभाग के छापे से हो सकता है इस संदिग्ध धन के स्रोतों का पता चले।

माही, ऋचा, हुमा… 200 से भी ज्यादा लड़कियों से मेरे संबंध रहे हैं: पायल घोष का दावा- अनुराग कश्यप ने खुद बताया था

फिल्मकार अनुराग कश्यप पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली अभिनेत्री पायल घोष ने मीडिया के साथ आपबीती साझा की है। उन्होंने कहा है कि अनुराग ने उन्हें आपत्तिजनक वीड‍ियो दिखाए थे। साथ ही दावा किया है कि अनुराग के 200 से ज्यादा लड़कियों से संबंध थे और अब यह संख्या 500 से ज्यादा हो सकती है।

पायल ने न्यूज नेशन को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह वाकया साल 2014-15 के बाद का है। उस वक़्त अनुराग कश्यप ‘बॉम्बे वैलवेट’ की शूटिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अनुराग ने मुझे बताया था कि 200 से अधिक लड़कियों के साथ उनका अच्छा सम्बन्ध रहा है। अनुराग ने मुझे कहा था कि 200 से अधिक लड़कियों के साथ उन्होंने अच्छा टाइम बिताया है।” बकौल पायल अब उनके संबंध 500 के करीब लड़कियों के साथ हो सकते हैं।

पायल ने इंटरव्यू में कहा, “मैं पहली बार उनके ऑफिस में अपने मैनेजर के साथ मिलने गई थी। इसके बाद एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया। उन्होंने मुझे खाना परोसकर खिलाया और पूछा कि तुम क्या बनना चाहती हो, एक्ट्रेस या स्टार। उनकी बातें सुनकर किसी भी लड़की को ऐसा लगता कि उसे किसी का सपोर्ट मिल गया है।”

पायल ने आगे कहा, “इसके बाद अनुराग ने मुझे अगले दिन फिर बुलाया और अपने कम्प्यूटर रूम दिखाया। फिर एक अलग कमरे में ले गए। जहाँ, वीडियो कैसेट्स वगैरह दिखाए। इसके बाद उन्होंने कुछ आपत्तिजनक फिल्म चला दी, जिससे मैं असहज महसूस करने लगी। इसके बाद अनुराग ने कुछ उन एक्ट्रेस के नाम बताए, जिन्हें उन्होंने लॉन्च किया था। अनुराग ने मुझसे कहा कि ये सभी मेरे साथ अच्छे से और कूल रहती हैं। इस दौरान उन्होंने माही गिल, ऋचा चड्ढा और हुमा कुरैशी के नाम लिए। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि उनके साथ 200 से भी ज्यादा लड़कियों के संबंध रहे हैं। ये बात वे बहुत गर्व के साथ बोल रहे थे।”

पायल ने आगे कहा, “ वे मुझे भी मनाने की कोशिश कर रहे थे तो मैंने उससे विनती की कि सर मैं आपसे बाद में मिलती हूँ, आज मुझे जाना पड़ेगा। उसके बाद फिर धीरे-धीरे मैंने उनसे बात करना बंद कर दिया। मैं उन्हें ट्विटर पर फॉलो करती थी, फिर वो भी छोड़ दिया।” पायल घोष का कहना है कि अब उन्हें अपनी जान का डर सता रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे डर है इन लोगों से। ये लोग मुझे किसी भी तरह नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसीलिए मैं सुरक्षा की माँग करूँगी।”

पायल ने कहा है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं और जब उन्होंने अनुराग कश्यप के खिलाफ #MeToo के साथ ट्वीट किया तो उनके परिवार वालों ने उन्हें शांत रहने के लिए कहा। पायल कहती हैं, “जो भी लोग दिखावा कर रहे हैं कि वो महिलाओं का बेहद सम्मान करते हैं और उनकी इज्जत की परवाह करते हैं, ये ही वो लोग हैं जो वास्तव में औरतों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। बॉलीवुड में लॉबी चलती है और कोई मेरी मदद के लिए आगे नहीं आया। मेरी कुछ दोस्तों और परिवारजनों के अलावा किसी ने मुझे कॉल नहीं किया, लेकिन मैं किसी से कुछ उम्मीद नहीं करती।”

पायल के आरोपों के बाद महिला आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा, “कल रात मैंने पायल घोष का ट्वीट देखा। उन्होंने अनुराग कश्यप पर 2015 में यौन शोषण करने का आरोप लगाया। उनके जवाब में मैंने कहा कि वो मुझे पहले शिकायत भेजें फिर हम इस मामले को देखेंगे।”

इससे पहले पायल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट कर लिखा था,“अनुराग कश्यप ने मेरे साथ जबरदस्ती की और बहुत बुरा बर्ताव किया है। इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। देश को पता चले कि इस क्रिएटिव आदमी के पीछे एक राक्षस है। मुझे पता है यह मुझे नुकसान पहुँचा सकता है और मेरी सुरक्षा खतरे में है। प्लीज मेरी मदद कीजिए।” हालाँकि अनुराग कश्यप ने सारे आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। वहीं तापसी पन्नू ने अनुराग कश्यप का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्होंने अनुराग जैसा स्त्रीवादी (फेमिनिस्ट) नहीं देखा है।

तिहाड़ से निकल नहीं पाएगा शहाबुद्दीन, 14 दिन का माँगा था पैरोल; 4 साल पहले जेल से निकलते ही दिखाया था काफिला

बिहार के सीवान से सांसद रहा बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन तिहाड़ जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। अपने पिता की मौत का हवाला दे उसने पैरोल माँगी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसे स्वीकृति नहीं दी गई है।

शनिवार (19 सितंबर 2020) रात राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के पिता का निधन हो गया। उसके बाद उसने पैरोल की अर्जी दाखिल की थी। शहाबुद्दीन के पिता शेख मोहम्मद बसीबुल्लाह की तबीयत पिछले कुछ समय से काफी ज़्यादा खराब थी। उन्होंने 90 साल की उम्र में अंतिम साँस ली। यह जानकारी मिलने के बाद राजद के तमाम नेता और कार्यकर्ता पूर्व सांसद के गाँव प्रतापपुर पहुँचे। 

पूर्व सांसद के वकीलों ने शनिवार देर रात से ही उन्हें रिहा कराने के प्रयास शुरू कर दिए थे ताकि वे अपने पिता के जनाज़े को कंधा दे सकें। आवेदन के तहत शहाबुद्दीन ने जेल प्रशासन से 2 हफ्ते की पैरोल पर बाहर जाने की अनुमति माँगी थी। 

साल 2017 के फरवरी महीने में सर्वोच्च न्यायालय ने शहाबुद्दीन को दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया था। दरअसल अदालत में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं जिसमें शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने की माँग की गई थी। इन याचिकाओं पर सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था

इसके पहले शहाबुद्दीन की बिहार के भागलपुर जेल से हुई रिहाई ने सुर्खियाँ बटोरी थीं। साल 2016 के सितंबर महीने में उसे भागलपुर जेल से रिहा किया गया था। शहाबुद्दीन की रिहाई की ख़बर सामने आते ही तमाम समर्थक और कार्यकर्ता जेल के बाहर जमा हो गए थे।  

शहाबुद्दीन के जेल से निकलते ही सैकड़ों गाड़ियों का काफ़िला उसके साथ चल पड़ा था। ख़बरों की मानें तो उस काफ़िले में लगभग 1300 गाड़ियाँ मौजूद थीं और यह सभी गाड़ियाँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिना टोल दिए आगे बढ़ गई थीं। इस घटना के बाद काफी विवाद हुआ था।      

उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त 2004 को सीवान के प्रतापपुर में व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद के दो बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का अपहरण किया गया था। इनमें से दो भाइयों को तेज़ाब से नहला कर जान से मार दिया गया था और तीसरा भाई राजीव उनके चंगुल से भागने में कामयाब हुआ था। इसके बाद मृतकों की माँ और भाई राजीव ने बयान दिया था जिसके आधार पर मुफस्सिल थाने में शहाबुद्दीन के विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया था। इस घटना में शहाबुद्दीन को मुख्य आरोपित बनाया गया था। इस मामले में विशेष अदालत ने शहाबुद्दीन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। हाई कोर्ट से भी इस मामले में शहाबुद्दीन को राहत नहीं मिल पाई थी।

LAC पर चीन के साथ तनातनी के बीच 3 हफ्तों में 6 नई चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने जमाया डेरा

चीन के साथ तनाव के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र की 6 चोटियों पर बीते 3 हफ्तों में पहुँच बना ली है। ये चोटियाँ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) वाले क्षेत्र में आती हैं। सूत्रों के मुताबिक इन चोटियों पर चीन की सेना की नजर थी, लेकिन उससे पहले ही भारतीय सेना ने इन पर नियंत्रण कर लिया है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि भारतीय सेना के जवानों ने 29 अगस्त और सितम्बर के दूसरे सप्ताह के बीच छ: नई चोटियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इनमें मागर हिल, गुरुंग हिल, रेसेहेन ला, रेजांग ला और मोकपारी के साथ ही फिंगर 4 के पास स्थित ऊँचाई वाली चोटी शामिल है। फिंगर 4 वही जगह है, जहाँ चीन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी।

अधिकारी ने बताया कि ऊँचाई पर स्थिति इन चोटियों का रणनीतिक महत्व है। यही वजह है कि चीन की भी नजर इन पर थी और वह इन पर अपना कब्जा जमाना चाहता था, लेकिन भारतीय सेना ने चीन से पहले ही इन चोटियों पर नियंत्रण हासिल कर इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर ली है। ये जगहें खाली पड़ी थीं और चीन की इन पर नजर थी।

भारत और चीन के बीच मई से शुरू हुए सीमा गतिरोध के बाद भारतीय सैनिकों को चीन की सेना (पीएलए) ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक जाने से रोक रखा था, लेकिन अब भारत ने फिंगर 4 के नजदीकी इलाक़ों में कब्जा जमा लिया है। 

जानकारी के मुताबिक चीनी सेना की ऊँचाई वाले क्षेत्रों पर कब्जे की कोशिश को नाकाम करते हुए पैंगोग झील के उत्तरी तट से दक्षिणी किनारे तक कम से कम तीन मौकों पर गोलियाँ चलाई गईं। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप चोटियाँ वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी हिस्से की तरफ हैं, जबकि भारतीय सेना द्वारा कब्जा की गई चोटियाँ एलएसी के भारतीय हिस्से में हैं। 

बता दें कि भारतीय सेना द्वारा ऊँचाई पर स्थिति मजबूत कर लेने के बाद चीन ने हथियार बंद ब्रिगेड की 3000 अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया है। इनमें रेजांग ला और रेचेन ला चोटी के पास चीन की पैदल सेना और बख्तरबंद सैनिक शामिल हैं। वहीं चीनी सेना की ‘मोल्दो गैरीसन’ भी पिछले कुछ सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय हो गई है।

एलएसी पर चीन की आक्रामक गतिविधि के बाद से भारतीय बल आपस में कोऑर्डिनेशन के साथ काम कर रहे हैं। भारतीय पक्ष की चौकसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समय एलएसी पर होने वाले सभी ऑपरेशन एनएसए अजित डोवाल, सीडीएस बिपिन रावत और सेनाध्यक्ष जनरल मुकुंद नरवणे की अगुवाई में किए जा रहे हैं। 

भारत और चीन के बीच बीते दिनों पैंगोंग त्सो झील, नॉर्थ सब सेक्टर और लद्दाख के चुशुल क्षेत्र में संघर्ष हुए हैं। वहीं जून में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद भारत ने हथियारों के उपयोग न करने के नियम में भी बदलाव किया है। इससे पहले एलएसी पर दोनों पक्ष किसी भी स्थिति में गोली न चलाने के नियम का लंबे समय से पालन कर रहे थे लेकिन गलवान में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सेना की करतूत के बाद भारतीय पक्ष ने इस नियम में बदलाव किया है।