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5 दिन में 14 सिम: सुशांत सिंह राजपूत केस में ट्विस्ट, बिहार के IPS ऑफिसर को मुंबई में जबरन किया क्वारंटाइन

सुशांत सिंह आत्महत्या की जाँच करने मुंबई पहुँचे पटना के एसपी विनय तिवारी को बीएमसी के अधिकारियों ने 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया है। विनय तिवारी रविवार रात मुंबई पहुँचे थे। वहीं एसआईटी को इस मामले में यह पता चला कि 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे।

सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच करने गए बिहार पुलिस के अधिकारियों के लिए सुराग इकट्ठा करना काफी मुश्किल हो रहा है। इसकी वजह बताई जा रही है कि मुंबई पुलिस सही तरह से उनका सहयोग नहीं कर रही है।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने देर रात ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और एसपी विनय तिवारी के हाथ पर लगी क्वारंटीन की मोहर की तस्वीर शेयर की। विनय तिवारी को मुंबई में 15 अगस्त तक क्वारंटीन रहना होगा।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने ट्वीट में लिखा, “आज आईपीएस ऑफिसर विनय तिवारी पुलिस टीम को लीड करने के लिए आधिकारिक ड्यूटी पर पटना से मुंबई पहुँचे थे, लेकिन रविवार रात 11 बजे बीएमसी अधिकारियों ने उन्हें जबरन क्वारंटीन कर दिया। उन्हें आईपीएस मेस में रहने की सुविधा नहीं दी गई। वह गोरेगांव के एक गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं।”

5 दिन के अंदर सुशांत ने बदले 14 सिम

सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह द्वारा दर्ज किए गए एफआईआर के बाद जाँच के लिए मुंबई पहुँची बिहार पुलिस को कई अहम सबूत मिले हैं। एसआईटी को जाँच के दौरान इस बात की जानकारी हुई है कि आत्महत्या से पहले 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को इस बात की भी आशंका है कि सुशांत सिंह को अपनी पूर्व मैनेजर दिशा सलियन की आत्महत्या के पीछे का कारण पता चल गया था। जिसकी वजह से उन्होंने कुछ दिनों के भीतर इतने सिम बदले थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दिशा ने आत्महत्या करने से पहले सुशांत को फ़ोन कर कई बातों का खुलासा किया था। इसी वजह से सुशांत को कुछ लोग फ़ोन पर धमकी देने लग गए थे। जिसके चलते सुशांत को इतने सिम बदलने पड़े।

वहीं पुलिस का मानना है कि सुशांत ने अपने रूम पार्टनर सिद्धार्थ पिठानी से भी दिशा की मौत को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए थे। जाँच टीम ने यह भी कहा कि वे सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियन के परिवार से पूछताछ करेंगे, जिन्होंने सुशांत की मौत से कुछ दिन पहले आत्महत्या कर ली थी।

एसआईटी को यह भी शक है कि इस मामले में सोची समझी साजिश के तहत घटना के बाद बांद्रा सोसाइटी समेत सुशांत के फ्लैट में लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज गायब किया गया। शायद यही वजह है कि पटना एसआईटी को अब तक फुटेज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सबूत नहीं मिल सके हैं।

सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई के बांद्रा में अपने घर पर फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले की जाँच पहले से ही मुंबई पुलिस कर रही है और अब तक कई लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जिनमें सुशांत के फैमिली, करीबी और बॉलिवुड के कई बड़े नाम शामिल हैं।

अंग्रेजों की करेंसी पर भी अब दिखेंगे महात्मा गाँधी, वहाँ की मुद्रा में छपने वाले पहले (अश्वेत) व्यक्ति बने बापू

महात्मा गाँधी दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति (अश्वेत) बनने वाले हैं, जो ब्रिटिश मुद्रा में नज़र आएँगे। ब्रिटिश राज कोष विभाग ने इस ऐतिहासिक कदम का ऐलान शनिवार के दिन किया। वह भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को वहाँ की मुद्रा में प्रकाशित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ब्रिटिश सरकार ने यह फैसला वंचित वर्ग के लिए किए गए बापू के योगदान को देखते हुए लिया। 

महात्मा गाँधी भारतीय मुद्राओं (नोट और सिक्कों) में साल 1987 से लगातार नज़र आ रहे हैं, हालाँकि 1969 में पहली बार उन्हें 100 रुपए के संस्मरणीय नोट पर छापा गया था। अब वह ऐसे पहले (अश्वेत) व्यक्ति बनने वाले हैं जो ब्रिटिश मुद्रा में नज़र आएँगे।

ब्रिटेन की रॉयल मिंट एडवाईज़री कमिटी इस मामले में काम शुरू कर चुकी है। इस मामले में चांसलर ऋषि सूनक ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने BAME अभियान (ब्लैक, एशियन एंड माइनॉरिटी एथिनिक) को समर्थन दिया। साथ ही माँग उठाई कि ऐसे लोगों ने ब्रिटेन के लिए बहुत योगदान दिया है। ऐसे योगदानों का सम्मान और उल्लेख किया जाना चाहिए। 

पूर्व कंज़रवेटिव दावेदार ज़ेहरा ज़ैदी “We Too Built Britain” नाम के अभियान की मुखिया हैं। इस अभियान से जुड़े लोगों ने भी माँग उठाई थी कि ब्रिटिश मुद्रा में महात्मा गाँधी और उन जैसे कई लोगों को जगह दी जानी चाहिए। ज़ेहरा ज़ैदी को लिखे पत्र में ऋषि सूनक ने कई अहम बातें लिखीं। उन्होंने लिखा:

“एशियाई, श्वेत और अन्य जातीय अल्पसंख्यक समुदायों ने यूनाइटेड किंगडम के साझा इतिहास में उल्लेखनीय किरदार निभाया है। जिसे किसी भी सूरत में भुलाया नहीं जा सकता है।”

इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा, “इस देश (यूके) के लिए तमाम जातीय अल्पसंख्यक समुदायों ने लंबी लड़ाई लड़ी है। इस देश की नींव तैयार करने में न जाने कितने लोगों की जानें गई हैं और उनका ज़िक्र बहुत कम मिलता है। हमने अपने बच्चों को हमेशा यही सिखाया है कि बीमारी की देखभाल करनी चाहिए और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। नतीजतन हमारे लोगों ने अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से अच्छा व्यवसाय शुरू किया है। जिससे बहुत से नौकरियाँ पैदा हुई हैं और देश का विकास हुआ है।”

रॉयल मिंट एडवाईज़री कमिटी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र संस्था है। जो चांसलर को सिक्कों के आकार और संरचना का सुझाव देती है। ऋषि सूनक ने इस संस्था के प्रमुख को लिखे पत्र में भी कुछ अहम बातें लिखी।

ऋषि सूनक ने लिखा, “मैं यह पत्र रॉयल एडवाईज़री कमिटी की पीठ के मुखिया लार्ड वॉलडेग्रेव को लिख रहा हूँ। इसे वह एशियाई, अश्वेत और जातीय अल्पसंख्यकों का देश के लिए किया गया योगदान समझें। उनका योगदान सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है बल्कि उन्होंने ब्रिटेन के वर्तमान और भविष्य के लिए भी योगदान दिया है।”   

गहलोत की आरक्षण राजनीति: राजस्थान में अब न्यायिक सेवा में गुर्जर समेत 5 जातियों को 5% रिजर्वेशन

राजस्थान में जारी सियासी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दाँव खेला है। सरकार ने राज्य की न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन किया है। जिसके बाद राज्य के गुर्जरों सहित अति पिछड़ा वर्ग को 5 फ़ीसदी तक आरक्षण मिलने वाला है। इस फैसले को लेकर मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। 

राजस्थान सरकार की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक़ राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 में संशोधन किया गया है। जिसके बाद 1 फ़ीसदी आरक्षण के स्थान पर 5 फ़ीसदी तक आरक्षण मिलेगा। अति पिछड़े वर्ग से आने वाले लोग काफी समय से न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन की माँग कर रहे थे। अब उन्हें इसका लाभ मिलना शुरू होगा। 

इस संशोधन के तहत कई जाति वर्ग के लोगों को लाभ मिलेगा। इसमें गुर्जर, रायका-रैबारी, गडिया-लुआर, बंजारा और गडरिया जैसी कई जातियाँ शामिल हैं। इस फैसले के बाद अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को अधिक संख्या में न्यायिक सेवा का हिस्सा बनने का मौक़ा मिलेगा। राज्य की न्यायिक सेवा में महिलाओं की बात करें तो उन्हें 50 फ़ीसदी आरक्षण मिल रहा है। इस फैसले के बाद प्रदेश की न्यायिक सेवा में आरक्षण बढ़ कर कुल 55 फ़ीसदी तक हो चुका है। 

गहलोत सरकार के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। सचिन पायलट की बगावत के बाद गहलोत सरकार के प्रति राजस्थान के गुर्जर समाज की नाराज़गी बढ़ी थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी नाराज़गी कम करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह कदम उठाया है। इसके राजस्थान में जारी राजनीतिक उठा पटक के बीच गुर्जर समाज के लोगों ने अशोक गहलोत के खिलाफ़ प्रदर्शन भी किया था । राज्य के कई क्षेत्रों में उनके पुतले भी जलाए थे। 

साल 2007 से साल 2009 के बीच हुए गुर्जर आरक्षण आन्दोलन में लगभग 68 से 70 लोगों की मृत्यु हुई थी। इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में सरकार संपत्ति का भी काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद वसुंधरा राजे की सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण दिलवाया था। सरकार के उस कदम पर उच्च न्यायालय ने साल 2011 में रोक लगा दी थी। जिसके चलते एक बार फिर राज्य में आन्दोलन शुरू हुआ। फिर अशोक गहलोत ने साल 2019 में विधानसभा के भीतर विधेयक पारित कराया। इसके पारित होने के बाद गुर्जर समाज सहित 5 अति पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिया गया।   

इसके अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिड्डियों के मामले में भी केंद्र सरकार से माँग उठाई है। उनके मुताबिक़, “सालों बाद इतने बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। टिड्डियों को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर देना चाहिए। कुछ ज़िलों को छोड़ कर बाकी हर जगह के हालात बदतर हैं। यह साल भयावह है और इसके सम्बन्ध में मैंने प्रधानमंत्री मोदी को भी पत्र लिखा है। मैंने उनसे यह माँग की है कि टिड्डियों को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया जाए।”

केरल सोना तस्करी मामले PFI वाला मो. अली गिरफ्तार, प्रोफेसर के हाथ काटने में भी रहा है वो आरोपित

केरल के सोना तस्करी मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा कदम उठाया है। काफी दिनों से चल रहे इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 6 अलग-अलग स्थानों पर खोजबीन जारी है।

गिरफ्तार किए गए 6 लोगों में एक मोहम्मद अली नाम का व्यक्ति भी है। नाम से आम आरोपितों की तरह यह भी एक आरोपित है। लेकिन थोड़ा सर्च करने पर आप पाएँगे कि यह वही मोहम्मद अली है, जो 2010 में केरल में हाथ काटने के प्रकरण का भी आरोपित रह चुका है।

तब अली पर आरोप लगा था कि उसने प्रोफेसर टीजे जोसेफ का दाहिना हाथ काट डाला था। क्यों? क्योंकि प्रोफेसर ने पैगंबर पर सवाल उठाए थे। हालाँकि साल 2015 में वह इस मामले से बरी हो गया था। इतना ही नहीं मोहम्मद अली पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का सदस्य भी है।

सोना तस्करी मामले से संबंधित गिरफ्तारी में तिरुवनंतपुरम स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास में मौजूद राजनयिक भी मददगार साबित हुए। इस मामले में अभी तक एनआईए ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक़ एनआईए ने 2 अगस्त के दिन कुल 6 अलग-अलग जगहों पर छापे मारी अभियान चलाया। इसमें एर्नाकुलम में जलाल एएम तथा राबिन्स हमीद के घर और मालापुरम में रमीज़ केटी, मोहम्मद शफी, सईद अलवी और अब्दु पीटी के घर शामिल हैं।

एनआईए के प्रवक्ता ने भी इस मामले पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई के दिन रमीज़ केटी के अलावा दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें एर्नाकुलम का जलाल एएम और मालापुरम का सईद अल्वी शामिल है। 

इसके अलावा NIA ने बताया कि 31 जुलाई के दिन भी इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें मालापुरम के मोहम्मद शफी पी और अब्दुल पीटी शामिल हैं। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि इसके बाद 1 अगस्त के दिन दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। यह दोनों भी एर्नाकुलम के ही रहने वाले मोहम्मद अली इब्राहिम और मोहम्मद अली शामिल हैं। 

अभी तक की जाँच के दौरान एनआईए को यह पता चला कि यह सभी षड्यंत्र में शामिल थे। यह तिरुवनंतपुरम में रमीज केटी से तस्करी किया गया सोना लेने गए थे। इसके बाद उनकी योजना इस सोने को जलाल एएम की मदद से बाँटने की थी।

एनआईए के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि तलाशी के दौरान उन्हें दो हार्ड डिस्क, एक टैबलेट कंप्यूटर, 8 मोबाइल फोन, 6 सिम कार्ड, 1 डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और कुल 5 डीवीडी बरामद हुई। इतनी चीज़ों के अतिरिक्त बैंक पासबुक, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पहचान पत्र समेत कई अहम दस्तावेज़ भी बरामद किए गए। मामले में अभी तक मुख्य आरोपति सरिता पीएस, स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।     

ख़बरों की मानें तो खाड़ी देशों से केरल में सोना की तस्करी किए जाने के मामले में भले सबकी नज़र आरोपित स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर पर है। लेकिन NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान कर चल रहा है। ये मामला डिप्लोमेटिक बैगेज में सोना तस्करी का है। 

इसके पहले एनआईए ने प्रमुख संदिग्ध स्वप्‍ना सुरेश सहित चार लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की थी। जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरित, स्वप्‍ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिशनरेट, कोचीन द्वारा 14।82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

‘राम का अस्तित्व रामायण की वजह से’: कॉन्ग्रेस MP ने ‘राम’ को बताया काल्पनिक, पात्रा ने कहा- यही दावा करके देखिए ‘अल्लाह’ के लिए

कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का काम किया है। इसी क्रम में, कॉन्ग्रेस नेता केतकर ने भी आज (2 अगस्त, 2020) ज़ी न्यूज़ पर अयोध्या और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर हो रही एक चर्चा के दौरान ऐसी ही एक अभद्र टिप्पणी की है।

कॉन्ग्रेस एमपी कुमार केतकर ने न केवल श्री राम के ऐतिहासिक अस्तित्व को नकारा बल्कि यह भी कहा कि हिंदू देवी-देवता साहित्य की रचना है।

कुमार केतकर ने भगवान श्री राम के अस्तित्व पर किया सवाल

लगभग 19 मिनट की चर्चा में, एंकर ने केतकर से पूछा कि क्या वह या कॉन्ग्रेस पार्टी अब भगवान राम के अस्तित्व में विश्वास करते हैं। अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने जवाब दिया, “रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालाँकि, इस निष्कर्ष पर पहुँचना अभी बाकी है कि राम इतिहास या साहित्य की रचना है या नहीं। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।”

भगवान राम के अस्तित्व पर केतकर के विचित्र रुख के बारे में सवाल किए जाने पर, उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा भगवान राम के बारे में पिछले महीने किए गए निराधार दावों के बारे में बताते हुए अपनी टिप्पणियों को सही ठहराने की कोशिश की।

बता दें, भानुभक्त की जयंती के उपलक्ष्य में हुए एक कार्यक्रम के दौरान, नेपाल के प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि भारत ने अपने यहाँ एक ‘नकली अयोध्या’ बनाई है। नेपाली पीएम के अनुसार, अयोध्या नेपाल में बीरगंज का एक गाँव है। इसी फर्जी दावे पर निष्कर्ष निकालते हुए केतकर ने चर्चा के दौरान कहा, “कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है (श्री राम के अस्तित्व का) और इसीलिए नेपाल के पीएम ने भी दावा किया कि अयोध्या नेपाल में स्थित है।”

संबित पात्रा ने केतकर को अल्लाह के खिलाफ बोलने के लिए ललकारा

वहीं हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने पर भाजपा नेता सांबित पात्रा ने कॉन्ग्रेसी नेता की जमकर आलोचना की। उन्होंने केतकर के विवादित बयान का मुँहतोड़ जवाब देते हुए कहा, “कुछ इसी अंदाज में क्या आप अल्लाह के अस्तित्व को नकारने का साहस कर सकते है। ये कॉन्ग्रेस का आदमी क्या कहना चाहता है? वह पूछ रहा है कि भगवान राम इतिहास या साहित्य की रचना हैं?”

संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस नेता कुमार केतकर को धर्मनिरपेक्षता और फ्री स्पीच का आईना दिखाते हुए कहा, “ये हमें राम के अस्तित्व के सबूत दिखाने को कह रहे है। अगर आपने अल्लाह के बारे में एक भी बात कही होती, तो अब तक आपका सर कट चुका होता। आभारी रहें कि आप एक हिंदू हैं, वरना आपके पास ऐसा कुछ कहने का दुस्साहस नहीं होता।”

कॉन्ग्रेस का हमेशा राम के अस्तित्व को नकारते हुए इसका विरोध करना

गौरतलब है कि 2007 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने एक हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया था, “वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस प्राचीन भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसमें दर्शाए गए पात्रों और घटनाओं के अस्तित्व को साबित करने के लिए इसे ऐतिहासिक सबूत नहीं माना जा सकता है।”

बता दें कि यह हलफनामा यूपीए सरकार द्वारा सेतुसमुद्रम परियोजना को रद्द करने की माँग को लेकर दायर किया गया था। इसका परियोजना का मकसद राम सेतु को नुकसान पहुँचाना था।

वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने अयोध्या में विवादित स्थल पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए राम जन्मभूमि का मुकदमा लड़ा था।

उन्होंने इस मुकदमे में कई दावपेंच खेले और शीर्ष अदालत से 2019 के चुनावों तक राम जन्मभूमि मामले में निर्णय में देरी करने के लिए कहा। एक अन्य प्रख्यात कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी पहले दावा किया था कि कोई भी ‘अच्छा हिंदू’ बाबरी स्थल पर राम मंदिर नहीं चाहेगा। थरूर ने भी कहा था कि दिल में राम मंदिर होना चाहिए।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल DAWN के स्क्रीन पर लहराया तिरंगा, चैनल ने किया हैक होने का दावा

पाकिस्तान के प्रमुख टीवी समाचार चैनल डॉन पर अचानक तिरंगा लहराने से लोग अचंभित हो गए। बताया जा रहा है कि इस न्यूज चैनल पर हैकर्स ने हमला किया था। इस घटना का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

रविवार दोपहर चैनल पर फहराया तिरंगा

रविवार दोपहर 3.30 के आस-पास पाकिस्तान के डॉन न्यूज चैनल पर विज्ञापन का प्रसारण हो रहा था। उसी दौरान टेलिविजन की स्क्रीन पर अचानक तिरंगा लहराने लगा। जिस पर हैप्पी इंडिपेंडेंस डे का मैसेज भी लिखा हुआ था।

डॉन न्यूज ने यह कहा

डॉन न्यूज ने बयान जारी कर कहा कि रविवार (अगस्त 2, 2020) को डॉन न्यूज हमेशा की तरह प्रसारित हो रहा था। अचानक भारतीय ध्वज और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट स्क्रीन पर चल रहे विज्ञापन पर दिखाई दिया जो कुछ समय के लिए रहा और फिर गायब हो गया। हम इसकी जाँच कर रहे हैं।

डॉन ने दिया जाँच का आदेश

हालाँकि, अभी तक यह नहीं बताया गया है कि पाकिस्तानी चैनल पर यह वीडियो कितने समय तक प्रसारित होता रहा। इस बीच डॉन न्यूज ने उर्दू में ट्वीट कर रहा है कि डॉन प्रशासन ने मामले की तत्काल जाँच के आदेश दिए हैं।

डॉन ने लिखा कि डॉन न्यूज अपनी स्क्रीन पर भारतीय झंडे और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट के अचानक प्रसारण की जाँच कर रहा है। एजेंसी इस मामले की जाँच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचते ही अपने दर्शकों को सूचित करेगी।

गौरतलब है कि भारतीय हैकर्स पहले भी ऐसे प्रयास कर चुके हैं, जिसमें उन्हें बहुत सफलता मिली है। 2016 में, भारत के एक हैकर ने बाल्टिस्तान के कृषि विभाग की वेबसाइट को हैक किया था और पाकिस्तानी हैकरों को चेतावनी दी थी, “अगर हम आप पर हमला शुरू करते हैं, तो यह सर्जिकल स्ट्राइक से ज्यादा खतरनाक होगा।” कुछ भारतीय हैकरों ने अतीत में पाकिस्तान से संवेदनशील जानकारी निकालने का भी दावा किया है।

Fact Check: डॉ. आयशा के नाम से खूब शेयर हुई यह फेक तस्वीर, औंधे मुँह गिरा वामपंथियों का मुस्लिम विक्टिम प्रपंच

कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों और इससे हो रही मौतों की खबर के बीच रविवार (अगस्त 2, 2020) को एक ऐसी खबर और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसे देखकर लोग भावुक हो गए। वायरल हुई खबर में बताया कि ये युवा डॉक्‍टर आयशा की आखिरी फोटो है। इतना ही नहीं उनके व्यवहार को लेकर बताया जाने लगा कि वह बेहद जिंदादिल थीं और हाल ही में डॉक्‍टर बनी थीं।

“Dr Aisha” getting hooked on to the ventilator. Image Source: Twitter

खबरों में बताया गया कि उनको कोरोना वायरस संक्रमण ने जकड़ लिया। वह अस्‍पताल में भर्ती हुईं। इलाज चला, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के चलते ईद के दिन उनकी मौत हो गई। ये खबर ट्विटर पर खूब शेयर हुई, लोग ट्वीट के जरिए डॉ आयशा को श्रद्धांजलि देने लगे। ट्विटर पर डॉ आयशा ट्रेंड करने लगा।

लेकिन अब मालूम हुआ है कि वायरल हो रही ये खबर और तस्वीर झूठी है। एक ट्वीट में, ‘डॉ आयशा’ ने दावा किया कि वह वेंटिलेटर पर थी। हालाँकि, Google पर क्विक सर्च से पता चला कि उसने जो तस्वीर शेयर की थी, वह वास्तव में dental anaesthesia था।

यूजर्स ने यह भी खुलासा किया कि जिस व्यक्ति की तस्वीर शेयर की गई थी, वह संभवत: ‘आयशा’ नहीं थी। ‘आयशा’ ने अपने ट्विटर प्रोफाइल की जानकारी के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में रहने का दावा किया था। अस्पताल के बेड-शीट पर लोगो ने संकेत दिया कि तस्वीर में लड़की तेलंगाना के एक अस्पताल में थी।

यह सब स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि युवा डॉक्टर की मृत्यु की खबर लगभग निश्चित रूप से फर्जी थी। अकाउंट द्वारा साझा की गई एक और तस्वीर लगभग एक पुष्टि के रूप में कार्य करती है कि पूरी कहानी मनगढ़ंत थी।

तस्वीर, जहाँ दावा करता है कि परिवार डॉक्टर की मौत का दुःख मना रहा है, वहीं अस्पताल में डॉक्टर को उसके परिवार के सदस्यों के साथ बैठे और मुस्कुराते हुए दिखाता है।

कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों को मास्क, पीपीई, दस्ताने और अन्य पर्याप्त सावधानियों के बिना अपने परिवार के साथ घुलने-मिलने की अनुमति नहीं है।

साझा की गई तस्वीर में, न तो परिवार और न ही कथित डॉक्टर ने ऐसा कुछ भी पहना था, जिसे संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा के रूप में समझा जा सकता है। किसी भी अस्पताल में ऐसे आचरण की अनुमति नहीं है जो कोरोना वायरस रोगियों का इलाज करता है। इसलिए, स्पष्ट रूप से, पूरी बात एक विस्तृत झूठ है।

अक्सर फर्जी खबर फैलाने वाले ‘पत्रकार’ भी इस मुहिम में शामिल थे। उन्होंने सच को जानने की तनिक भी कोशिश नहीं की। ट्विटर पर कई सत्यापित हैंडल थे जो ऐसी काल्पनिक कहानी को फैलाने में मदद करते हैं।

Nidhi Razdan upset over death of ‘Dr Aisha’

इनमें एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान भी शामिल थीं। बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और कहा कि यह अकाउंट फर्जी है।

Source: Twitter

पेशेवर फर्जी न्यूज पेडलर राणा अय्यूब ने डॉ आयशा की मौत पर भी शोक व्यक्त किया।

Source: News18

News18, वास्तव में, उस पर एक पूरी कहानी चलाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉ. आयशा हाल ही में डॉक्टर बनी थीं और बेहद खुश थीं। हालाँकि, वह वुहान कोरोनावायरस से संक्रमित हो गई और उसने ईद पर सुसाइड कर लिया। उन्होंने उसे ‘कोरोना योद्धा’ भी करार दिया।

नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा के प्रचारक DU प्रोफेसर हनी बाबू के घर पर NIA की छापेमारी, मिले अहम दस्तावेज

चर्चित भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले की जाँच के संबंध में रविवार (2 अगस्त, 2020) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी की। एनआईए की टीम सेक्टर 78 स्थित हाइड पार्क सोसायटी में सुबह करीब 7 बजे ही पहुँच गई । टीम की यह छापेमारी तकरीबन एक घंटे तक चली है।

बता दें कि, 54 वर्षीय हनी बाबू यलगार परिषद हिंसा मामले में 4 अगस्त तक की एनआईए हिरासत में हैं। हनी बाबू को एनआईए ने 28 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हनी बाबू के घर से कई अहम दस्तावेज को कब्जे में लिया है। एनआईए के मुताबिक, जाँच के दौरान पता चला कि है हनी बाबू नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। हनी बाबू पर दूसरे आरोपितों के साथ भीमा-कोरेगाँव हिंसा में भी शामिल होने का आरोप है।

गौरतलब है कि भीमा कोरेगाँव यलगार परिषद मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर हनी बाबू एमटी पुत्र कुन्हु मोहम्मद को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को बुधवार को मुंबई में NIA की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। NIA के प्रवक्ता ने बताया कि प्रोफेसर हनी बाबू उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं। वह डीयू के इंग्लिश डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

हनी बाबू को मुंबई में एनआईए की विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। एनआईए ने इस साल जनवरी में इस मामले की जाँच शुरू की थी और इसके बाद 14 अप्रैल को आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नौलखा को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में पुणे पुलिस और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी भी की थी। यह छापेमारी भी प्रोफेसर सिंह के नक्सलियों से सम्बन्ध को लेकर की गई थी।

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और ‘द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। साईबाबा के प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई से सम्बन्ध सामने आए थे।

क्या है मामला

31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यहाँ कुछ बुद्धिजिवियों द्वारा भड़काऊ भाषणों देने के बाद अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगाँव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा भड़क गई थी। इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ ही करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था। इस मामले में अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 लोगों को आरोपित बनाया गया था।

जाने किस तरह से किया गया था अस्थाई राम मंदिर का निर्माण, 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद का वो पल

राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही, वैसे-वैसे बाबरी मस्जिद के विवादित ढाँचे को ढहाए जाने के आसपास के संस्मरण सामने आ रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी रामलला के अस्थायी मंदिर की है जिसे 1992 में विध्वंस के बाद बनाया गया था।

भूमिपूजन की तैयारियों के बीच इस समय लोग उन कारसेवकों को याद कर रहें हैं जिन्होंने रामलला को विराजमान करने के लिए अपने प्राणों को भी दाँव पर लगा दिया था। उन्हीं कारसेवकों में से एक है बाबा सत्यनारायण मौर्य। जो उस वक्त मौजूद थे जब श्री राम का अस्थाई मंदिर बनाया गया था। हाल ही में प्रकाशित एक वीडियो में, उन्होंने संक्षेप में कहानी सुनाई कि हमारे पास मंदिर बनाने के लिए सोचने तक का समय नहीं था। हमने किसी तरह जल्दी-जल्दी अस्थाई मंदिर का निर्माण किया क्योंकि पुलिस मंदिर परिसर में उन्हें पकड़ने के लिए प्रवेश कर चुकी थी।

बाबा सत्यनारायण मौर्य को लोग बाबा के नाम से जानते है। उन्होंने कहा, “7 दिसंबर को, जैसे ही उन्हें पता चला कि पुलिस कुछ ही घंटों में विध्वंस स्थल पर पहुँच रही है, हमारे पास सोचने का बिल्कुल भी समय नहीं था। यदि हम उस समय स्थल पर एक अस्थाई मंदिर का निर्माण नहीं करते, तो अभी भी वह विवादित भूमि होती, न कि राम मंदिर का स्थान। भगवान राम ने हमें रास्ता दिखाया, और हमने बैनर बनाने के लिए अपने साथ लाए कपड़ों का ही उपयोग करके एक छोटा सा अस्थाई मंदिर बनाया।” राम मंदिर के निर्माण से पहले रामलला को हाल ही में योगी आदित्यनाथ द्वारा स्थानांतरित किए जाने तक अस्थाई मंदिर उसी संरचना में रहा।

मस्जिद के विध्वंस से पहले, रामलला की मूर्ति को मस्जिद के भीतर बीच गुंबद के नीचे रखा गया था। रामलला की मूर्ति को 1949 में दिसंबर की रात को कुछ भक्तों द्वारा रखा गया था। जिसके बाद सरकार द्वारा सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए मस्जिद को बंद कर दिया गया था। इससे पहले, स्थल पर हिंदू और दूसरे मजहब वाले, दोनों पूजा करते थे। क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने 1859 में बाड़ लगाकर साइट को दो भागों में विभाजित कर दिया था।

मस्जिद सहित भीतरी जमीन दूसरे समुदाय को दी गई थी, जबकि हिंदुओं को बाहरी जमीन का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। 1992 में मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद, अस्थाई मंदिर (जो मूल रूप से एक तम्बू था) को रामलला की मूर्ति रखने के लिए बनाया गया था।

रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे

राम मंदिर आंदोलन के दौरान बाबा ने एक आवश्यक भूमिका निभाई। आपको जानकर कर खुशी होगी कि बाबा ने ही “रामलला हम आएँगे, मंदिर वही बनाएँगे” वाला प्रसिद्ध नारा दिया था, जो आज भी राम भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

पिछले 28 सालों में जब भी राम मंदिर को लेकर चर्चा हुई उस समय इस नारे का जरूर इस्तेमाल किया गया। बाबा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब चैनल पर राम मंदिर आंदोलन के कई दुर्लभ वीडियो और तस्वीरें साझा की है। जिन्हें लोग आज भी देख कर आंदोलन के दिनों को याद करते है।

राममंदिर भूमिपूजन

उल्लेखनीय है कि, 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन होगा। इस समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी, कोठारी ब्रदर्स की बहन और कई अन्य प्रमुख नेता और संत अयोध्या में मौजूद रहेंगे।

पीएम मोदी 22.6 किलोग्राम के चाँदी की ईंट से मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास करेंगे। 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। अदालत ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके साथ ही भारत सरकार को मंदिर निर्माण के लिए समर्थन देने का आदेश भी दिया था। अदालत के दिशानिर्देशों के अनुसार फरवरी 2020 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता को बताया फर्जी: लोकसभा स्पीकर से की इसकी शिकायत

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को घेरते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि, सोनिया गाँधी ने 17वीं लोकसभा ‘Who’s Who’ प्रकाशन के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत बताया है। स्वामी ने यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत उन्होंने लोकसभा स्पीकर से भी की है।

गौरतलब है कि आज (2 अगस्त, 2020) भाजपा सांसद ने सोनिया गाँधी के शैक्षणिक योग्यता को गलत बताते हुए एक ट्वीट किया है। इसके अलावा उन्होंने इस संदर्भ में लोकसभा स्पीकर को भी एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सोनिया गाँधी ने गलत कहा है कि 1965 में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी भाषा में प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। सोनिया के इस फर्जी दावे का जिक्र मैंने 20 साल से पहले भी किया था। मैंने उस वक्त कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाए थे।

उन्होंने लिखा, “तब जस्टिस बालकृष्णन के नेतृत्व वाली चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मसले पर सुनवाई की थी। यह आग्रह किया गया था कि सोनिया गाँधी इस झूठी जानकारी को फिर से प्रस्तुत नहीं करेगी। मैंने भी इस मामले में बड़ा दिल रखते हुए सजा की माँग नहीं की। इस आधार पर मैं सहमत था कि इस मामले का निपटारा हो जाए।

स्वामी ने स्पीकर से इस मामले को लोकसभा की आचार समिति को भेजे जाने का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें सबूत पेश करने में खुशी होगी ताकि उन्हें (सोनिया) उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में इस जानबूझकर और बार-बार बोल जाने वाले झूठे के लिए दंडित किया जा सके।

राज्यसभा सांसद ने स्पीकर से 15वीं और 16वीं लोकसभा के लिए ‘Who’s Who’ के अंतर को खोजने के लिए सोनिया गाँधी की पिछली फाइलिंग की तुलना करने का आग्रह भी किया।

इसके अलावा, स्वामी ने ट्विटर पर अपने द्वारा किए गए दावे को सही ठहराने के लिए कुछ डॉक्युमेंट्स की तस्वीरें भी सबूत के तौर पर साझा किए।