उत्तरप्रदेश के मेरठ से एक बार फिर कथिततौर पर लव जिहाद का मामला सामने आया है। इस बार घटना भावनपुर के लाड़पुरा इलाके की है। यहाँ एक मुस्लिम लड़के ने एक दलित युवती को पहले झूठी पहचान बताकर प्रेमजाल में फँसाया और जब पोल खुली तो लड़की के घर से उसे जबरन उठाकर उससे निकाह करने की कोशिश की।
हालाँकि, मौके पर मौजूद परिवार ने उस वक्त विरोध करके लड़की को छुड़वा लिया और बाद में उन्होंने भावनपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई को समुदाय विशेष का युवक अपने साथियों के साथ दलित युवती को घर से उठाने पहुँचा था। जहाँ परिवार के लोगों ने मामले का विरोध करके लड़की को बचा लिया और बाद में युवती के पिता की तरफ से भावनपुर थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर युवक को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपित युवक का नाम रिपोर्ट में सुहेल बताया गया है। मामले में एफआईआर हो गई है। युवती के परिजनों ने बताया कि आरोपित सुहेल पिछले 6 माह से उनकी बेटी से नाम बदलकर मोबाइल पर इंटरनेट कॉल से बातचीत करता था।
उसने युवती को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया था। लेकिन जब युवती को सुहेल की असलियत के बारे में पता चला तो उन्होंने थाने में तहरीर दी। इसके बाद उनसे समझौता करवा लिया गया। फिर 31 जुलाई को वह कुछ साथियों के साथ घर पहुँच गया और लड़की का धर्म परिवर्तन कराने की धमकी देने लगा।
रिपोर्ट के मुताबिक युवती के माता-पिता का कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन पुलिस ने इस मामले को मामूली धाराओं में दर्ज किया है।
ऑपइंडिया ने इस संबंध में भावनपुर थाने में बात करने की कोशिश की। मगर, कॉल रिसीव न होने के कारण कोई जवाब नहीं मिल पाया। आगे हमें जैसे ही इस मामले पर जानकारी मिलेगी हम अपनी रिपोर्ट अपडेट करेंगे।
गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले मेरठ के परतारपुर इलाके में एक लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। जब एक माँ-बेटी का शव जमीन से बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने शमशाद को गिरफ्तार किया था।
शमशाद पर आरोप था कि उसने पहले प्रिया नाम की महिला को फँसाया और फिर झूठ बोलकर शादी की। जब हकीकत खुली तो वह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा और एक दिन आपसी बहस में उसे और उसकी बेटी को मौत के घाट उतार दिया।
अयोध्या का भव्य, दिव्य और अलौकिक राम मंदिर कैसा होगा, इसे आप 8 आधिकारिक तस्वीरों के माध्यम से समझ सकते हैं जिसे ट्रस्ट द्वारा जारी किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन तस्वीरों को आधिकारिक रूप से जारी करते हुए कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर विश्व में भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण होगा। इसके आंतरिक और बाह्य स्वरूप के कुछ और चित्र यहाँ देखें:
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने आश्वासन दिया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर भव्यता और दिव्यता की अद्वितीय कृति के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा। बता दें कि ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर होगा। 5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ ही इसके निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। ऊपर की तस्वीरों में आप इस मॉडल को बारीकी से देख सकते हैं।
सीएम योगी ने कहा है कि इस पावन घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए पीढ़ियाँ ख़त्म हो गईं। राम के नाम में आस्था रखने वालों ने 5 शताब्दी तक इस अवसर की प्रतीक्षा की। तमाम कठिनाइयों के बावजूद राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों ने हार नहीं मानी। उसका ही परिणाम है कि राम मंदिर बहुत जल्द आकार लेने वाला है। करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे प्रबल प्रतीक उनके सामने होगा।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम का एक वनवास सदियों पहले ख़त्म हुआ था और दूसरा अब ख़त्म हुआ है। इसके बाद वह अपनी जन्मभूमि स्थित सिंहासन पर विराजमान होंगे। इस पूरे अभियान और संघर्ष में कुछ नाम ऐसे थे जिनके उल्लेख के बिना पूरा विषय अधूरा है। 1989 में जब राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतीकात्मक तौर पर भूमि पूजन हुआ। तब पहला फावड़ा किसी और ने नहीं बल्कि खुद महंत श्री अवेद्यनाथ ने चलाया था।
शिवसेना ने मंगलवार (अगस्त 04, 2020) को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर पूरा देश उत्साहित है और इससे बड़ा स्वर्णिम अवसर कुछ नहीं हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा है कि देश में COVID-19 संकट व्याप्त है, लेकिन यह भगवान शिव के आशीर्वाद से गायब हो जाएगा। हालाँकि, बुधवार (अगस्त 05, 2020) को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आयोजित होने वाले इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कमी खलेगी क्योंकि वो कोरोना संक्रमण के कारण इसमें शामिल नहीं हो पाएँगे।
गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (अगस्त 02, 2020) को कहा कि कोरोना के प्रारंभिक लक्षण दिखने के बाद उनका कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक है और वह डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
अपने मुखपत्र में शिवसेना ने कहा कि वह उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। इसके अलावा, शिवसेना ने इशारा करते हुए कहा है कि हालाँकि, शाह आइसोलेशन में हैं, फिर भी राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार पर संकट मंडरा रहा है।
मराठी दैनिक सामना ने कहा कि गहलोत के पास खुश होने का कोई कारण नहीं है कि शाह आइसोलेशन में हैं क्योंकि भाजपा नेता जहाँ कहीं भी हों, वो ‘राजनीतिक सर्जरी’ करना जानते हैं।
इसमें कहा गया है कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और राम मंदिर निर्माण अभियान से जुड़े प्रमुख नेता मुरली मनोहर जोशी दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्रीराम मंदिर निर्माण की लड़ाई के इस इस मधुर अंत के गवाह बनेंगे।
दरअसल, आडवाणी और जोशी को सलाह दी गई है कि वे अपनी उम्र और अयोध्या में COVID-19 के प्रकोप को देखते हुए समारोह में न जाएँ। शिवसेना ने कहा कि अभियान से जुड़ी एक अन्य नेता उमा भारती, COVID -19 के डर से इस समारोह में शामिल नहीं होंगी, और सरयू के तट से समारोह देखेंगी। शिवसेना ने इस लेख में कहा है कि लेकिन भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कुछ नहीं होगा।
गौरतलब है कि कल 05, अगस्त को होने जा रहे अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन की भव्य तैयारियाँ चल रही हैं। राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में 5 अगस्त को हिस्सा लेने जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन घंटे तक अयोध्या में रहेंगे। सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर पीएम मोदी दिल्ली से वह विशेष विमान के जरिए अयोध्या के लिए रवाना होंगे।
सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाने के आरोप में पूर्वी त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व CPIM सांसद जितेंद्र चौधरी और CPIM सोशल मीडिया पेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पूर्व सांसद ने त्रिपुरा के एडीसी मुख्यालय में होजागिरी की एक त्रिपुरा लड़की की टूटी हुई मूर्ति की तस्वीर पोस्ट की थी और दावा किया था कि मूर्ति को कुछ बदमाशों ने तोड़ दिया था।
त्रिपुरा पुलिस ने सीपीआईएम नेता के दावे का खंडन करते हुए अपने फेसबुक पेज में कहा कि सोशल मीडिया पर टूटी हुई मूर्ति के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इस अफवाह के जरिए दो समुदायों के बीच विवाद पैदा करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने बताया कि यह मूर्ति भारी बारिश और तूफान के कारण नीचे गिर गई। उस समय एक पुलिस पार्टी भी वहाँ मौजूद थी जब वह नीचे गिर गई थी। राधापुर पुलिस स्टेशन की डायरी में इस संबंध में रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है।
पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही फैलाएँ। इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस तरह समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
FIR दर्ज होने के बाद जितेंद्र चौधरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार त्रिपुरा की संस्कृति को बर्बाद कर रही है और विरोध करने वालों पर केस दर्ज कर रही है।
चौधरी ने कहा, “यह अफसोस की बात है कि कोई भी लेनिन, कार्ल मार्क्स, यहाँ तक कि रवींद्रनाथ टैगोर, महाराजा बीर बिक्रम भी इस शासन के तहत सुरक्षित नहीं है और जो कोई भी आवाज़ उठाना चाहते हैं, उन्हें या तो मौखिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है या फिर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।”
सीपीआईएम नेता जितेंद्र चौधरी ने कहा, “1 अगस्त को होजागिरी की एक महिला की मूर्ति को तोड़ दिया गया। इसके बाद मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के एक वर्ग का कहना था कि यह रात में कुछ बदमाशों द्वारा किया गया था। मैंने पूछा था कि इस तरह की घटनाएँ क्यों हो रही हैं। ”
उन्होंने आगे कहा, “होजागिरी हमारे राज्य का प्रतीक है, इस तरह के कृत्य हमारी संस्कृति पर हमले हैं। त्रिपुरा ने इस तरह के असहिष्णु व्यवहार को कभी नहीं अपनाया लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आई है, स्थिति बदल गई है।”
पूर्व सांसद ने त्रिपुरा को राजनीतिक प्रयोगों की एक प्रयोगशाला बनाने के लिए सत्ताधारी सरकार पर निशाना साधा, जिसे बाद में “हिंदू राष्ट्र” में लागू किया जाएगा।
आगे जितेंद्र चौधरी ने कहा, “लोगों को चुप कराने, समृद्ध संस्कृति पर हमले शुरू करने, हमारे अधिकारों का उल्लंघन करने, पुलिस को अपनी इच्छा के अनुसार इस्तेमाल करने और हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य पर नजर रखने के लिए झूठे मामलों में FIR दर्ज कराने जैसे प्रयोगों के लिए त्रिपुरा को प्रयोगशाला के तौर पर चुना है। हालाँकि, मैं अपना केस लड़ूँगा क्योंकि संविधान सभी के लिए समान है।”
अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। खबर है कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।
संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।
क्लेरियन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम समूह इमामनेट ने दावा किया कि वह लोग न्यूयॉर्क के मेयर पर, न्यूयॉर्क के सिटी काउंसिल पर, गवर्नर पर, सीनेटर और सभासदों पर दबाव बना रहे थे कि वह हिंदू समुदाय के लोगों को टाइम्स स्कॉयर के बिलबोर्ड्स पर राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीर न दिखाने दें।
इमामनेट के अध्यक्ष डॉ शईक उबैद ने बताया कि ऐड कंपनी ने भूमिपूजन समारोह के विज्ञापन को बिल्डिंग पर दिखाने से मना कर दिया है- ये बहुलवाद, मानवाधिकार, और कानून नियमों की जीत है।
इसके बाद डॉ उबैद ने अमेरिका में दक्षिणपंथी हिंदू विचारधारा के उदय के परिणामों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि विज्ञापन विवाद ने उन्हें प्रभावशाली अमेरिकियों को विहिप और बजरंग दल के साथ मोर्चे पर तैनात भारत के आरएसएस के बारे में शिक्षित करने का अवसर दिया है।
मुस्लिम समूह की ओर से आए बयान के अनुसार ब्रांडेड सिटीज के डेनिस लेवाइन ने इस फैसले की पुष्टि की है। साथ ही बताया कि कंपनी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि ब्रांडेड सिटीज व नैस्डैक बाबरी मस्जिद के विध्वंस का विरोध करते हैं और कभी भी किसी भी वर्चस्ववादी समूहों को अपने विज्ञापन चलाने की अनुमति नहीं देंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई थी कि 5 अगस्त के ऐतिहासिक मौके पर यादगार बनाने के लिए न्यूयॉर्क में कोशिशें की जा रही हैं जिसके चलते 5 अगस्त को वहाँ की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी।
अमेरिका-भारत सार्वजनिक मामलों की समिति के अध्यक्ष जगदीश सेव्हानी ने इस मामले में बताया था कि 5 अगस्त को न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक क्षण मनाने की व्यवस्था की जा रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे।
बता दें, मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद एक ओर जहाँ ब्रांडेड सिटीज की ओर से यह फैसला आया है। वहीं ट्विटर पर कट्टरपंथी इसे अपनी जीत मान रहे हैं। आतिश तासिर जैसे लोग इस खबर की पुष्टि पूछते हुए लिख रहे हैं, “क्या यह सच है? कोई बता सकता है क्या? अगर हाँ, तो यह बहुत बड़ी जीत है। हिंदुत्व के दुष्ट नाजी प्रेरित पंथ का न्यूयॉर्क में कोई स्थान नहीं है। “
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन में मंदिर की नींव रखने के साथ ही हो जाएगी। इसी क्रम में अब कॉन्ग्रेस नेता भी एक-एक कर के रामभक्त बनते जा रहे हैं। इसमें नया नाम प्रियंका गाँधी का जुड़ा है, जिन्हें राज्य में पार्टी के पुनरुद्धार की कमान सौंपी गई है। प्रियंका गाँधी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने के स्वागत किया है।
प्रियंका गाँधी ने कहा कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। बता दें कि कॉन्ग्रेस पर अक्सर आरोप लगते हैं कि उसने सत्ता में रहते राम के अस्तित्व को नकार दिया था।
इतना ही नहीं, प्रियंका गाँधी ने तो यहाँ तक कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सीता की गाथा हज़ारों वर्षों से भारत की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रही हैं। उन्होंने नीति, कर्तव्यपरायणता, धर्म, प्रेम, पराक्रम, सेवा और उदात्तता का प्रेरणास्रोत रामायण को ही करार दिया। उन्होंने राम ही नहीं बल्कि श्रीहरि के अन्य रूपों का भी गुणगान किया।
उन्होंने यहाँ तक कहा कि भगवान राम का चरित्र युगों-युगो से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने शबरी, सुग्रीव, वाल्मीकि, भास, कम्बन, कबीर, तुलसीदास, रैदास और वारिस अली शाह का जिक्र करते हुए कहा कि राम सबके हैं, सबके दाता हैं। मैथिलीशरण गुप्त और महाप्राण निराला जैसे कवियों का जिक्र करते हुए प्रियंका गाँधी ने राम के लिए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्यों को याद किया।
सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं।
भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 4, 2020
जहाँ एक तरफ दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन सरीखे कॉन्ग्रेस नेता बुधवार को होने वाले अयोध्या भूमिपूजन का विरोध करते हुए मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं, प्रियंका ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि रामलला का ये कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व, सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम बनेगा। प्रियंका गाँधी ने कहा कि चारों दिशाओं में रामकथा अनगिनत रूपों में लोकप्रिय होती आ रही है।
बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ आज 4 अगस्त के दिन एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इतना ही नहीं, इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में अब तक कई एंगल हमारे सामने आ चुके है। ताजा खुलासा रिपब्लिक टीवी की डिबेट में हुआ है। इस डिबेट में बिहार डीजीपी के अलावा सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन के प्रशांत भी शामिल रहे।
प्रशांत ने बताया कि उन्हें सुशांत की मैनेजर दिशा के एक मित्र का फोन आया था। फोन पर उन्होंने कहा, “मैं दिशा का मित्र बात कर रहा हूँ। मैं बहुत दुखी हूँ कि मैं कोई एक्शन नहीं ले पा रहा हूँ। आप लोग इस पर बहुत काम कर रहे हैं और शायद मैं आपकी कुछ सहायता कर सकूँ। लेकिन मैं चाहता हूँ मेरा नाम इसमें न आए। क्यूँकि मैं मुंबई में रहता हूँ और इन सब चीजों से डरता हूँ।”
प्रशांत दिशा के मित्र के हवाले से बताते हैं कि दिशा 8 जून को एक पार्टी में गई थी। वहाँ बॉलीवुड के कई कलाकार और कुछ नेता-मंत्री भी शामिल थे। उस पार्टी में दिशा के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद दिशा ने समय निकालकर सुशांत को फोन किया। जहाँ सुशांत ने सब बातें सुनकर उन्हें जल्द से जल्द वहाँ से निकलने को बोला और कहा कि तुम निकलो फिर कुछ एक्शन लेते हैं।
इसके 1 घंटे बाद संदीप का कॉल सुशांत को गया। सुशांत को उन्होंने बताया कि उनकी एक्स मैनेजर ने सुसाइड कर ली है। इस पर हैरानी जताते हुए सुशांत कहते हैं कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि दिशा ने सोचा ही नहीं था कि उसे सुसाइड करना है। जिसे सुनकर संदीप को यह मालूम चल गया कि सुशांत को सारी बातें मालूम हैं। फिर संदीप ने अपने सभी लोगों से डिस्कस किया।
प्रशांत कहते हैं कि दिशा के दोस्त ने उनसे कहा कि रिया का अगले दिन सुशांत से झगड़ा भी हुआ। सुशांत अपनी बातें रिया को समझाना चाहते थे। लेकिन रिया उनकी बातों को सुनना नहीं चाह रही थी, चूँकि शायद रिया का भाई भी उस 8 जून की पार्टी में शामिल था। इस नोंक झोंक के बाद ही दोनों अलग हुए।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के इस पूरे मामले में जहाँ रिया चक्रवर्ती पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं बिहार पुलिस की सक्रियता ने मुंबई पुलिस को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
इसी बीच बिहार सरकार भी सुशांत के पिता के कहने पर उनको इंसाफ दिलाने के लिए आगे आई है। जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया है कि बिहार सरकार सुशांत मामले में सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश करेगी। उनके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा है कि वह सुशांत मामले में सीबीआई जाँच की सिफारिश करेंगे।
उधर, महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत मामले में किसी भी प्रकार के कागज बिहार पुलिस को देने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में ये केस नहीं आता। मुंबई पुलिस अपनी जाँच कर रही है। हम इस केस को किसी और जाँच एजेंसी को नहीं सौंपेंगे।
Bihar Government recommends CBI investigation in Sushant Singh Rajput death case: JDU Spokesperson Sanjay Singh pic.twitter.com/MZd6YW37Jw
अगर मंदिर बन नहीं रहा होता और हम मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में लिखने बैठ जाते, तो उसे पढ़ता कौन? राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण शुरू होने के बहाने, हमें अपने मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में बात करने का मौका भी मिल जाता है। ऐसा नहीं है कि इनके बारे में पढ़ा नहीं जाता या बताया नहीं जाता। हाँ ये जरूर है कि आम आदमी की पहुँच से इस जानकारी को दूर रखा गया है।
भारत में मंदिरों का निर्माण 2300 साल से अधिक पुराना है। इतना समय मिलेगा तो जाहिर कि ये काफी विकसित शास्त्र के रूप में बनकर तैयार हो गया होगा। शुरुआती दौर में मंदिर के लिए देवगृह, देवस्थान, देवालय जैसे शब्द प्रयुक्त होते थे। मंदिर निर्माण की जो तीन विशिष्ट शैलियाँ हैं- नागर, द्रविड़ और बेसर, उनका विकास अलग अलग क्षेत्रों में हुआ।
भारत की विविधता का ये धोती या साड़ी जैसा ही उदाहरण है। धोती अलग अलग तरीके से पहनी जाती है, महाराष्ट्र के साड़ी पहनने के तरीके और बंगाल वाले में काफी अंतर है। इस विविधता को स्वीकार करते हुए भी मूल में एक होना सनातन का लक्षण है। हम “वन साइज फिट्स ऑल” की जबरदस्ती के समर्थक तो कभी रहे नहीं ना?
उत्तरी से लेकर मध्य भारत तक के नगरों में जिस प्रकार के मंदिर बनते थे, उन्हें नगर शब्द के आधार पर ही नागर शैली का नाम दिया गया। द्रविड़ शैली नर्मदा के निचले हिस्से से दक्षिणी भारत तक अधिक प्रसिद्ध है और बेसर इन दोनों शैलियों का मिला जुला रूप है।
अगर भारत में तीर्थों पर या मंदिरों के आस-पास विदेशों (और अब भारत) में प्रचलित “हेरिटेज वॉक” जैसा कुछ ज्यादा चलता तो इन मंदिर निर्माण शैलियों के बारे में जानकारी आम होती। अफ़सोस कि कक्षा के बाहर, वैकल्पिक पद्धतियों से शिक्षा देने की नीति भारत में कभी शुरू नहीं हुई और ऐसी सभी जानकारी आईएएस/यूपीएससी की तैयारी करने वालों तक सिमटी रही।
सोशल मीडिया के दौर और इंटरनेट से फैलती सूचनाओं के दौर ने इसे थोड़ा बदला है, वरना मंदिर निर्माण की किताबें भी बहुत महंगी होती हैं और अधिकतर आम लोगों की पहुँच से बाहर ही होंगी। मंदिर निर्माण पर चर्चा एक तो करीब 70 साल पहले हुई होगी, जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। अब भी यदा-कदा उस पर बात होती रहती है।
90 के दशक में जब राम-जन्मभूमि मंदिर का निर्माण फिर से करवाने का आंदोलन जोर पर था, करीब-करीब तभी से एक मंदिर का प्रारूप सा सबने देख रखा है। ये तीन शिखरों वाला मंदिर था और जैसा ये दिखता था, करीब-करीब वही “नागर” शैली है। इसके वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा एक ऐसे परिवार से आते हैं, जो करीब 15 पीढ़ियों से मंदिर निर्माण से जुड़ा है।
अपने पिता के साथ मिलकर इन्होंने ही सोमनाथ मंदिर का नक्शा भी बनाया था। अगर आपने दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर देखा है, तो वो भी इनका ही बनाया हुआ है। पिछले वाले नक़्शे से अब का नक्शा थोड़ा अलग है, लेकिन है ये भी नागर शैली ही। ये मंदिर उँचाई में 8 भागों में बाँटे गए हैं – मूल (आधार), गर्भगृह मसरक (नींव और दीवारों के बीच का भाग), जंघा (दीवार), कपोत, शिखर, गल, आमलक और कुंभ (शूल सहित कलश)।
मंदिर निर्माण में मुख्यत: पत्थर का प्रयोग होता रहा है, किंतु ईंटों के भी प्रचुर प्रयोग मिल जाते हैं। मौर्य काल में काष्ठ मंदिरों के भी साक्ष्य हैं। पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी के मंडपों का प्रयोग अधिक देखने को मिलता है।
नेपाल के काठमांडू का नामकरण ही काष्ठ मंडप शब्द से हुआ है। समतल क्षेत्र के मंदिरों में पत्थरों का प्रयोग अधिक है। नागर शैली के मंदिरों के 8 प्रमुख अंगों में से अधिष्ठान वो मूल आधार होता है, जिस पर सम्पूर्ण भवन खड़ा किया जाता है। शिखर मंदिर का शीर्ष भाग अथवा गर्भगृह का ऊपरी भाग, कलश शिखर का शीर्षभाग होता है, जो कलश ही या कलश जैसा होता है।
ताजमहल का ऊपरी भाग देख लें, तो वहाँ भी कलश की संरचना नजर आ जाएगी। आमलक शिखर के ऊपरी हिस्से पर कलश के ठीक नीचे का वर्तुलाकार (थाली-चकरी जैसा) भाग होता है। इसके नीचे ग्रीवा होती है जो शिखर से ढलान के जैसी दिखती है।
कपोत किसी द्वार, खिड़की, दीवार या स्तंभ का ऊपरी छत से जुड़े भाग को कहते हैं। फिर आता है मसूरक जो कि नींव और दीवारों के बीच का भाग होता है, जंघा विशेषकर गर्भगृह की दीवारों को कहते हैं। इनके अलावा भी कई अलग-अलग भागों के नाम होते हैं, जैसे अधिष्ठान का ऊपरी प्लेटफॉर्म जगती कहलाता है।
मूल मंदिर के शिखर के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर मंडप भी बनते हैं। ये भी क्रमश: घटती ऊँचाई व विस्तार के साथ महामंडप, मंडप, अर्धमंडप कहलाते हैं। द्वार व स्तंभ भी स्वरूप के हिसाब से अलग-अलग नाम वाले होते हैं, जैसे तोरण द्वार।
शिखर में जुड़ने वाले उपशिखर उरुशृंग कहे जाते हैं। शिखर को विमान भी कहा जाता है। मंदिर के विभिन्न स्थानों पर गवाक्ष भी दिख सकते हैं। अगर बहुत गौर से देखा जाए तो नागर शैली में वर्गाकार (स्क्वायर) क्षेत्र पर निर्माण होता है और द्रविड़ शैली में आयताकार (रेक्टेंगल)।
इस आधार पर जन्मभूमि मंदिर को नागर कहें या द्रविड़, या बेसर, ये सोचना पड़ेगा। नागर शैली में गर्भगृह के सामने मंडप होता है, द्रविड़ में मंडप का वहीं होना आवश्यक नहीं और मंडप पर शिखर भी नहीं होता। इस आधार पर जन्मस्थान मंदिर नागर होगा। द्वार के लिए नागर शैली के मंदिरों में तोरण द्वार होते हैं और द्रविड़ में गोपुरम होता है। द्रविड़ शैली में मंदिर परिसर में ही जलाशय (जिसे कल्याणी या पुष्करणी कहते हैं) आवश्यक होता है, नागर शैली में ये आवश्यक नहीं है।
जैसी बहसें हाल में मंदिर निर्माण के शुरू होने के मुहूर्त को लेकर छिड़ी हुई दिखी, वैसी बहसें कभी स्थापत्य या वास्तु पर नहीं दिखीं। संभवतः इसका एक कारण ये होगा कि शिक्षा नीति बनाने वालों ने 70 साल तक स्थापत्य से जुड़ी भारतीय जानकारी को छुपाकर रखा होगा। इसके बाहर आने पर वैज्ञानिक गणना जैसी चीज़ों में भारतीय कितने सक्षम थे, इस पर भी बात करनी पड़ती, जो कि उनके बनाए नैरेटिव पर फिट नहीं आती थी।
अपर गंगा कनाल (हरिद्वार से कानपुर) का निर्माण 1842 में आरम्भ हुआ व 1854 में पूरा हो गया। 1858 तक भारत पर राज ईस्ट इंडिया कम्पनी का था, ब्रिटेन का नहीं। एक ट्रेडिंग कम्पनी क्यूँ इतना इन्वेस्ट करेगी?
जाहिर है लोग आपसी सूझ-बूझ से इतने बड़े निर्माण आराम से कर सकते थे। इनके बारे में चर्चा, शिक्षा के सबके लिए नहीं होने, सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित होने, के दावे की भी पोल खोल देता। भारत का सबसे पहला इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहर की देखभाल और मरम्मत करने वालों के लिए बनाए जाने के नाम पर ही बनवाया गया था।
कहने का मतलब ये है कि आँखें खोलकर आपको देखना होगा। अपने आस पास देखना और सवाल पूछना भी हमें ही शुरू करना होगा। जन्मभूमि मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक घटना ही नहीं है। ये संस्कृति का पुनः जागरण है।
इसके बनने से इतनी दिक्कत इसलिए भी है क्योंकि विदेशियों की फेंकी हुई बोटियों पर पलने वाले कुत्तों की दशकों की मेहनत पर ये एक झटके में पानी फेर देता है। बाकी अपनी आँखों से शेखुलरिज्म का टिन का चश्मा उतारिए तो शायद नजर आए। निर्माण में ढाई साल तो कम से कम लगेंगे ही, इतने वक्त में भी काफी कुछ बदल सकता है।
(इंटरनेट से साभार ली गई तस्वीर में एक, इस्लामिक आक्रमण में तोड़ दिए गए हिस्सा हम्पी के हजार राम मंदिर के अवशेषों का है, जिसे 1970 में लिया गया था और दूसरा हिस्सा उसके पुनः निर्माण के बाद का है। नागर थी, द्रविड़ या बेसर, ये आप खुद तय कर लें।)
आज जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ रामभक्त और हनुमान भक्त बन गए हैं और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रामायण से जुड़े पर्यटन स्थलों को विकसित करने की बातें कर रहे हैं, हमें विनायक दामोदर सावरकर का एक बयान याद करने की ज़रूरत है। सावरकर ने तब कहा था कि उन्होंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को न सिर्फ शरीर पर बल्कि कोट पर जनेऊ पहन कर संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए बाध्य कर दिया।
सावरकर ने यह बात तत्कालीन राजनीति के संदर्भ में कही थी लेकिन ये आज भी प्रभावी है। महाराष्ट्र के सावरकर स्मारक के अध्यक्ष और वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने ‘विश्वास न्यूज़’ से बात करते हुए उनके इस बयान की पुष्टि की। उन्होंने जुलाई 10, 1943 को अविभाजित भारत के सिंध प्रान्त में मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महासभा के गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेसी दुष्प्रचार को जवाब देते हुए ये बातें कहीं थीं।
उनके इस बयान का जिक्र 10 वॉल्यूम वाले ‘समग्र सावरकर’ के वॉल्यूम-8 (ऐतिहासिक निवेदन) में पृष्ठ संख्या 485-89 पर भी है। यहाँ सावरकर लिखते हैं:
“परंतु यह टिप्पणी मन:पूर्वक की जाती तो मुझे प्रसन्नता होती। क्योंकि हिंदुओं पर यदि अत्यंत घिनौना, हीन आरोप करना हो तो वह ‘पाकिस्तानानुकूल’ और लीग को अथवा ‘मुस्लिमों’ को संतुष्ट करने के लिए हिंदू हित का घात करनेवाला यह है, यह बात सीखने के लिए मैंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को अंत में बाध्य किया। जैसा मैं बार-बार कहता था, उनके अनुसार कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को केवल शरीर पर नहीं, कोट पर जनेऊ पहनकर हिंदू संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करना पड़ा!”
“परंतु इन नेताओं के नेता बंदीशाला से मुक्त होने पर हिंदुस्थान के बँटवारे के करारनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए और कॉन्ग्रेस की आधी-अधूरी राष्ट्रीयता की वेदी पर हिंदू हित की बलि चढ़ाने जब लीग के शिविर में जाऍंगे तब ये लोग उनका आदर-सत्कार कैसे करेंगे-यह विचार मेरे मन में आने पर उन लोगों पर दया आती है। (चार वर्षों के पश्चात जून 1947 में ऐसा ही घटा।)”
कुछ ही दिनों पहले कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) के दिन एक वीडियो संदेश जारी किया था। उसमें उन्होंने कहा कि देशवासियों को लम्बे समय से इसकी अपेक्षा और आकांक्षा थी। मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है। इस वीडियो में कमलनाथ के पीछे भगवान हनुमान की तस्वीर भी नजर आ रही थी।
सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं।
भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 4, 2020
कमलनाथ के पीछे-पीछे आज यानी 4 अगस्त को मनीष तिवारी और फिर प्रियंका गाँधी ने भी राम मंदिर को लेकर ट्वीट किया। बताना जरूरी इसलिए है क्योंकि यही वो पार्टी है, जो अब तक भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार रही थी। इसी पार्टी के वकील सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के खिलाफ दलील दे रहे थे।
भगवान रामचन्द्र जी महाराज के भूमी पूजन के शुभ अफसर पर सब वैष्णव जनो और महनुभवों को कोटी कोटी बधाई pic.twitter.com/R00cfIWwu0
हाल ही में कमलनाथ ने भोपाल में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराने का आह्वान किया। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को दिखावा बताया। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना था कि “कॉन्ग्रेस ने हमेशा राम के अस्तित्व को खारिज है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी सोमवार (अगस्त 3, 2020) को दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपित व्यक्ति को रविवार (अगस्त 2, 2020) रात उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसकी पहचान बेंगलुरू के राममूर्ति नगर निवासी आनंद प्रसाद के रूप में हुई। वह कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के आईटी सेल का सचिव है।
सोशल मीडिया पर भी हम देख सकते हैं कि आनंद प्रसाद की तस्वीर राहुल गाँधी के साथ है। साथ ही उन्होंने अपने नाम के साथ KPCC और सोशल मीडिया भी लिखा हुआ है। इसके अलावा फेसबुक प्रोफाइल से भी आनंद के KPCC से जुड़े होने के प्रमाण मिलते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर जो आपत्तिजनक व अपमानजनक ट्वीट किए थे, उसी के जवाब में KPCC के अधिकारी का रिप्लाई आया था।
साभार: NA Haris का ट्विटर
इतना ही नहीं, इस रिप्लाई में आनंद ने भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था। जिसके बाद उनके खिलाफ़ आईपीसी की 505/C, 505/1/B और 153-A समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।
Anand Prasad was arrested last night because of his tweet against Amit Shah. On the directive of Sri @DKShivkumar I went & spoke to him regarding the issue. We dont accept this type of hate messaging. pic.twitter.com/bW51bFZQtU
इस बीच, प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं करने की अपील की और कहा कि यह पार्टी की संस्कृति नहीं है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कॉन्ग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जो भाईचारे और मानवता का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
I appeal to Congress workers not to make defamatory statements against any political leader, on matters of health and other issues on social media platforms.
It is not in our culture to wish bad for others. Congress is a party that exemplifies brotherhood and humanity.
गौरतलब है कि रविवार को अमित शाह की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इसकी जानकारी भी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी थी।
उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएँ।”
अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव आने से लिबरलों और कट्टरपंथी इस्लामी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। सोशल मीडिया पर किसी ने इसे अमित शाह की अंतिम रात बताते हुए उनके मौत की दुआ माँगी तो कई ने इसे सबसे अच्छा ‘ईदी’ बताया था।
एक यूजर ने लिखा, “सहायक पुजारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। राम मंदिर के पास तैनात 16 पुलिसकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए और अब अमित शाह कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वो प्लान करते हैं, मगर अल्लाह बेस्ट प्लानर है।” वहीं एक अन्य ने लिखा, “अल्लाह को जल्दी प्यारे हो जाओ।”