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IPL से चाइनीज स्पॉन्सर को हटाओ, BCCI नहीं माने तो पूरे टूर्नामेंट का करो बायकॉट: RSS से जुड़ी संस्था की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सम्बद्ध संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने IPL प्रबंधन से कहा है कि वो चाइनीज स्पॉन्सर के साथ अगला सीजन आयोजित कराने को लेकर पुनर्विचार करे। इसके लिए संस्था ने BCCI से अनुरोध किया है।

लद्दाख में भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच चाइनीज कम्पनी Vivo द्वारा IPL आयोजित कराने को लेकर लोग विरोध जता रहे हैं। IPL-13 को यूएई में आयोजित किया जाना है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इसे भारत में आयोजित नहीं किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि Vivo ने 2017 में BCCI के साथ 2199 करोड़ रुपए का करार किया था, जो 5 साल के लिए हुआ था। चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किए जाने के लिए लगातार अभियान चला रहे स्वदेशी जागरण मंच ने तो यहाँ तक कहा कि अगर BCCI इस निर्णय को वापस नहीं लेता है तो लोगों को IPL का ही बॉयकॉट करना चाहिए।

संस्था ने इसे देश की वर्तमान भावनाओं के विपरीत बताया। संस्था के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि ये सिर्फ उनकी माँग नहीं है बल्कि पूरा देश लद्दाख में हुई घटना के बाद ऐसा ही चाहता है। महाजन ने BCCI को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया चीन का बॉयकॉट कर रही है, IPL उसे शरण दे रहा है।

उन्होंने कहा कि BCCI को समझना चाहिए कि राष्ट्र से ऊपर कुछ भी नहीं है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा कि ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दोहरे रवैये को दिखाता है।

हालाँकि, BCCI ने इस संबंध में कुछ जवाब नहीं दिया है। बता दें कि IPL-13 कब आयोजन 19 सितंबर से लेकर 10 नवंबर तक किया जाना है। शाम में होने वाले मैच 7:30 PM से शुरू होगा।

10 नवंबर को फाइनल मैच होगा। सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए दो मैचों के बीच पर्याप्त गैप भी दिया गया है। मैच में दर्शकों की उपस्थिति के विषय में UAE से बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी फ्रेंचाइजियों को वीजा की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दे दी गई है।

इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन को लेकर और सख्त हो गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चाइनीज सोशल मीडिया ऐप TikTok को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 15 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है। ट्रम्प ने कहा कि अगर दिए गए डेडलाइन तक किसी अमेरिकी कंपनी ने TikTok को नहीं खरीदा तो उसका प्रतिबंधित होना तय है।

‘खुदा करे ये मर जाए… इस बार अमित शाह मरना चाहिए… सब दुआ करो’ – शाहीन बाग वाली रिजवी का जहरीला वीडियो

अमित शाह के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एक निश्चित तबका खुलकर उन्हें बद्दुआएँ दे रहा है। इसी क्रम में ऐमन रिजवी नाम की महिला ने भी अपनी हालिया वीडियो में देश के गृह मंत्री के लिए जमकर जहर उगला है। 

ऐमन रिजवी (Aiman Rizvi) की यह पूरी वीडियो भारत न्यूज 91 नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड है। इस वीडियो में हम सुन सकते हैं कि मोदी सरकार के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करते हुए वह अमित शाह की मृत्यु के लिए दुआ कर रही है और अन्य लोगों से भी ऐसा करने को कह रही है। 

वीडियो में ऐमन रिजवी गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भी कर रही है। वीडियो में हम देख सकते हैं कि वह अमित शाह को ‘टकलू शाह’ कहती है और उनके कोरोना पॉजिटिव होने के तार मरकज से जोड़कर पूछती है कि क्या इसके तार मरकज से हैं या ये मरकज में घुसपैठ करता था?

ऐमन कहती है, “पूरा देश बर्बाद हो रहा है। लेकिन अमित शाह 5 महीने से पता नहीं कौन सी गुफा में घुसा हुआ है। अब मालूम चला है कि उसे कोरोना हो गया।” अपनी बात को आगे रखते हुए वह कहती है कि कोरोना महामारी जैसा कुछ भारत में तो क्या पूरी दुनिया में नहीं है। उसका मानना है कि किसी भी मुद्दे से बरगलाने के लिए भाजपा सरकार कोई नया ‘स्कैंडल’ लेकर आ जाती है और जनता से सहानुभूति इकट्ठा कर लेती है।

इसके बाद वीडियो में लुकमान की मॉब लिंचिंग पर झूठ फैलाते हुए ऐमन कहती है कि समुदाय के

एक नौजवान का बर्बरता से कत्ल कर दिया गया। जबकि हकीकत ये है कि लुकमान जिंदा है और उसकी स्थिति भी फिलहाल स्थिर है। इसके अलावा उसके साथ जो बर्बरता हुई, उस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

लुकमान मामले में एफआईआर दर्ज हो गई है। लेकिन बिन इन तथ्यों को जाने ऐमन अपनी वीडियो में खुलकर नफरत फैला रही है। रिजवी की शिकायत है कि जो पुलिस मजहबी कॉलोनी में कोई मास्क न लगाए तो उसे मारने के लिए आ जाती है, वही पुलिस लुकमान के मामले में कुछ करने को तैयार नहीं है।

मुंबई मिरर की खबर से स्क्रीनशॉट

महिला की मानें तो वैसे तो पूरे विश्व में कोरोना महामारी जैसा कुछ है ही नहीं। लेकिन अगर, वाकई में कोरोना जैसा कुछ है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। उसे कहते सुना जा सकता है, “मैं 6 महीने से बोल रही हूँ। कोरोना का सिर्फ़ ड्रामा चल रहा है। कोई कोरोना नही है और अगर कोरोना है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। आप दुआ करें कि अगर वाकई इसे (अमित शाह) कोरोना हुआ है तो आप सब दुआ करें कि या खुदा ये मर जाए। हम कोरोना पर 1% तभी यकीन करेंगे जब अमित शाह मर जाएगा।”

ऐमन के अनुसार, कोरोना अगर भाजपा समर्थक या फिर उसके आईटी सेल में से किसी को भी होता है, तो वो बच जाता है। जबकि समुदाय विशेष से या दलित अगर आम बीमारी से भी पीड़ित हो रहा है तो वह मर रहा है। इसलिए ये समझना चाहिए कि यह सारा ड्रामा केवल लोगों का दिमाग डायवर्ट करने के लिए चल रहा है।

अपनी वीडियो में यह महिला संबित पात्रा के लिए ‘गोबर पात्रा’ और अमिताभ बच्चन को भाजपा के आईटी सेल व आरएसएस का एम्बेसडर बताते हुए कहती है:

“इन दोनों को कोरोना किया, लेकिन ये मरे नहीं। फिर जी न्यूज वालों को भी किया गया लेकिन वहाँ भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को किया, उसे भी कुछ नहीं हुआ। दिल्ली के इनके चाटुकार सीएम केजरीवाल को भी कुछ नहीं हुआ, वो भी हनीमून मनाकर वापस आ गया। अब इन्होंने सोचा कि किसको कोरोना करें? अगर यह नरेंद्र मोदी को करते तो वो 5 अगस्त को शिलान्यास में कैसे जा पाता। इसलिए इन्होंने बड़ी स्ट्रैटेजी प्लॉन की और कहा- टकलू हम तुझे कर देते हैं। तू तो वैसे भी गुफा में पड़ा हुआ है। ताकि लोग लुकमान को भूल जाएँ, गुजरात को भूल जाएँ, महाराष्ट्र को भूल जाएँ।”

वीडियो में आगे यह महिला यूपी सीएम के लिए भी घृणा व्यक्त करती है। ऐमन उनके लिए न केवल टकलू नंबर-2 जैसे शब्द का इस्तेमाल करती है, बल्कि उन्हें आतंकवादी भी कहती है। महिला बोलती है कि यह सब मिलकर आपको बावला बना रहे हैं।

ऐमन रिजवी के अनुसार इन लोगों ने आरएसएस के दफ्तर में बैठकर मीटिंग की है, तब जाकर निर्णय हुआ कि इस बार नंबर किसका आएगा। भाजपा नेताओं को अय्याश करार देते हुए ऐमन कहती है कि कोरोना के बहाने उन्हें लग्जरी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उन्हें हनीमून पर भेजा जा रहा है और कहा जा रहा है कि तुम पहले ही अय्याश हो और अय्याशी करो।

भारतीय मीडिया को रखैल मीडिया कहते हुए ऐमन रिजवी ने वीडियो में राफेल के आने पर मनाई जा रही खुशी पर भी आपत्ति जताई। वह कहती है कि जहाँ से राफेल आया है, उसकी दुनिया में कोई औकात नहीं है। लेकिन ‘चिंदी चोर’ मोदी 5 खरीद कर ले आता है तो पूरी दुनिया भारत से काँपने लगती है?

महिला चीन नेपाल और भूटान का जिक्र करते हुए कहती है कि अभी इन देशों के साथ विवाद खत्म नहीं हुए हैं। लेकिन भाजपा हर रोज कोरोना वायरस का चूर्ण लेकर आ जाती है और बताती रहती है कि आज इसको हुआ, आज उसको हुआ। वह पूछती है कि अगर कोरोना हो रहा है तो आखिर इनके नेता मरते क्यों नहीं हैं। 

वे दर्शकों से कहती है,

“दुआ करो ये मर जाए। हम भी दुआ कर रहे हैं कि ये पाप हमारे सिरों से हट जाए। क्योंकि ये आतंकवादी तड़ीपार है। ये वही तड़ीपार है, जिसने गोधरा ट्रेन करवाया और कारसेवकों को मरवाया। फिर उसी के नाम पर पूरा गुजरात जलवाया। सोहराब का एनकाउंटर करवाया। इशरत जहाँ का एनकाउंटर करवाया। ये वही तड़ीपार है, जिसके कारण आईपीएस संजीव भट्ट जेल में हैं। खुदा से दुआ करो। अल्लाह पाक इस पर बद्दुआएँ लग जाए। ये तड़ीपार मर जाए। चाहे इसे कोरोना न हो। लेकिन कोई ऐसी मौलिक बीमारी हो जाए कि ये उठे न।”

गौरतलब है कि ऐमन के अलावा गृहमंत्री के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी मौत की कामना कर रहे हैं। इनमें से एक कॉन्ग्रेस आईटी सेल के सचिव आनंद प्रसाद भी हैं, जिन्हें हाल ही में पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार किया और कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।

LOC पर राइफलधारी महिलाएँ, पहली बार कर रहीं भारत-पाक सीमा की सुरक्षा: देखें वायरल हुआ Video

भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहली बार भारतीय सेना की राइफलधारी महिलाओं को तैनात किया गया है। लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) पर पहली बार इन महिलाओं को तैनात किया गया, जिसे देश और भारतीय सेना के लिए गर्व की बात बताई जा रही है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि इस रक्षाबंधन वो इन महिलाओं को देख कर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। वीडियो में महिलाएँ राइफल के साथ सीमा पर तैनात दिख रही हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि इसमें दिख रही महिलाएँ असम राइफल्स की हैं। ये दावा लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने किया, जिन्होंने असम राइफल्स को एक तगड़ी फोर्स करार दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने बतौर मेजर जनरल असम राइफल्स की एक बटालियन को कमांड किया था। उन्होंने कहा कि अब इस पैरा मिलिट्री फोर्स ने महिलाओं को मौका दिया है। बता दें कि असम राइफल्स देश की सबसे पुरानी पैरा मिलिट्री फोर्स है।

बता दें कि हाल ही में भारतीय सेना ने महिलाओं के लिए वैकेंसी भी जारी की है। जनरल ड्यूटी के पदों पर महिलाओं के लिए वैकेंसी जारी की गई है। कुल 99 पदों के लिए सेना ने वैकेंसी निकाली है। इसके लिए 10वीं तक की परीक्षा पास होने की एलिजिबिलिटी रखी गई है।

बता दें कि जुलाई 2019 में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए औपचारिक आदेश जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को एक याचिका पर सुनवाई के बाद भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन व कमांड पोस्ट दिए जाने का आदेश दिया था और सरकार को इस फैसले पर अमल के लिए तीन माह का समय दिया था।

‘क्यों बताई मुहूर्त की तारीख? क्यों हो रहे शामिल?’ – राम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त बताने वाले को मौत की धमकी

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले इस पूरे कार्यक्रम की एक तरह से नींव रखने वाले पुजारी को मौत की धमकी मिली है। यह पुजारी हैं कर्नाटक के विजयेंद्र। पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी इसलिए महत्वपूर्ण है और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है क्योंकि यही वो पुजारी हैं, जिन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त बताया था।

नीचे के वीडियो में 5 मिनट 20 सेकंड के बाद से पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी का जिक्र।

कर्नाटक के पुजारी विजयेंद्र ने ही राम मंदिर भूमि पूजन के लिए 29 जुलाई, 31 जुलाई, 3 अगस्त और 5 अगस्त का मुहूर्त निकाला था। बाद में सबकी सहमति से 5 अगस्त को इस शुभ कार्य के लिए दिन फाइनल किया गया। अब इन्हीं पुजारी विजयेंद्र को कर्नाटक में फोन पर जान से मारने की धमकी मिल रही है।

कर्नाटक के बेलगावी स्थित तिलकवाड़ी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। वहाँ की पुलिस ने बताया कि 75 वर्ष के पुजारी विजयेंद्र को फोन पर धमकी मिली है। इस पूरे मामले पर पुजारी विजयेंद्र ने कहा:

“फोन करने वालों ने नाम नहीं बताया। वो धमकी दे रहे थे। कहा कि मुहूर्त की तारीख क्यों बताई? इसमें शामिल क्यों हो रहे हो? मैंने कहा कि आयोजकों ने मुझसे इसके लिए आग्रह किया था और मैंने धर्म का पालन किया। कई जगहों से, कई बार फोन आ रहे हैं। लेकिन मैं इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।”

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक पुलिस ने पुजारी विजयेंद्र के घर पर कुछ पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है। पुलिस के अनुसार कॉल करने वाले ने पुजारी विजयेंद्र से मुहूर्त के समय को वापस लेने को कहा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुजारी विजयेंद्र पिछले कई सालों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इस साल फरवरी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर भूमि पूजन के लिए मुहूर्त निकालने के लिए उनसे संपर्क किया था।

‘इंशाअल्लाह, न कभी भूलेंगे, न माफ करेंगे’: भूमि पूजन से पहले जामिया वाली लदीदा ने दिखाई नफरत

बरखा दत्त की जामिया मिलिया वाली जिहादन ‘हीरोइन’ लदीदा फरजाना याद है? उसने अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से पहले वह तस्वीर अपलोड की है, जिसमें कारसेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को इस्लामी अत्याचार के प्रतीक विवादित ढॉंचे को ध्वस्त कर दिया था।

हिंदू मंदिर का ध्वंस कर बनाए गए बाबरी ढाँचे को धराशायी करने वाली तस्वीर को शेयर करते हुए लदीदा ने लिखा, “इंशा अल्लाह, न कभी भूलेंगे, न माफ करेंगे।” भूमि पूजन से कुछ दिनों पहले आए लदीदा के इस पोस्ट को उत्तेजक माना जा सकता है, क्योंकि ये वही लदीदा है जिसके जिहाद के ऐलान पर दिल्ली में दंगे हुए थे।

लदीदा फरजाना के द्वार अपलोड किया गया फेसबुक पोस्ट

नवंबर 2019 में शीर्ष अदालत ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद उन्हें उक्त स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण करने की अनुमति मिली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब 5 अगस्त को भूमि पूजन का आयोजन किया गया है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह से पहले, लदीदा की टिप्पणी शीर्ष अदालत और हिंदुओं के लिए उसकी नफरत ही दिखाती है।

सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने के बाद इस तरह का ट्वीट करना उसका कोर्ट के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। यही नहीं, उसका पिछला फेसबुक पोस्ट कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथ के प्रति उसकी निष्ठा और हिंदुओं के प्रति उसकी घृणा को दर्शाता है।

बता दें कि लदीदा फरजाना ने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध के दौरान ‘जिहाद’ का आह्वान किया था, जिसके बाद यह विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया था। लदीदा ने अपने एक पोस्ट में खुले तौर पर ’जिहाद’ का आह्वान किया था और कहा था कि लोगों को “हमारे जिहाद के बारे में सीखना चाहिए।”

उसने ‘ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मद रसूलुल्लाह’ के साथ अपने पोस्ट को समाप्त किया। जिसका मतलब था, “अल्लाह के सिवाय पूजा के योग्य कोई ईश्वर नहीं है और मुहम्मद उसका दूत है।” अप्रैल 2018 से उसकी एक अन्य पोस्ट में वह भारत को ‘मिडिल फिंगर’ दिखाते हुए देश का अपमान करती हुई नजर आई थी।

लदीदा के जिहाद के आह्वान के बाद भारत के कई हिस्सों, विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हिंसा भड़क गई थी, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने उग्र होकर दंगे को अंजाम दिया। इस दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया, उनकी संपत्तियों को जलाया गया, क्योंकि उनका मानना था कि सीएए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ था।

इसके अलावा लदीदा फरजाना ने मोपला नरसंहार के दोषियों का भी गुणगान किया, जिसमें हिंदुओं की नृशंस हत्या कर दी गई थी।

दिसंबर 2019 में हिंसा ने दिल्ली के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था। विशेष समुदाय के लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध के बहाने देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़काया और अराजकता फैलाई।

सीएए के पारित होने के बाद देश फैली हिंसा ने इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों, विदेशी-वित्त पोषित गैर सरकारी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों का एक गठजोड़ देखा, जो माओवादियों और शहरी नक्सलियों से बड़े पैमाने पर जुड़े हुए थे और नए अधिनियम को रद्द करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।

संदिग्ध समूहों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों के संघ ने खुलासा किया कि यह खिलाफत आंदोलन का नया संस्करण था- खिलाफत 2.0।

लदीदा के कट्टरपंथी सोशल मीडिया पोस्टों के बावजूद, सेकुलर मीडिया ने उसका महिमामंडन किया था। इसमें विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त का विशेष योगदान था, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के विरोध का नेतृत्व करने के लिए उसे  ‘shero’ कहा था।

इससे पहले जब लदीदा ने जिहाद के लिए आह्वान किया था, तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़की थी। अब जब एक बार फिर से राम मंदिर भूमि पूजन से पहले कट्टरपंथी इस्लामी जहर उगलने लगती है, तो यह निश्चित रूप से संदिग्ध है।

मुंबई पुलिस को फरवरी में बताया था बेटे की जान खतरे में, पर कोई कारवाई नहीं की: सुशांत के पिता

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने फरवरी में मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बेटे की जान को खतरा है। बॉलीवुड अभिनेता का परिवार शुरू से ही कहता रहा है कि उन्हें उसकी कथित आत्महत्या के पीछे धोखाधड़ी का संदेह है।

वीडियो में सुशांत सिंह राजपूत के पिता कह रहे हैं, “25 फरवरी को मैंने बांद्रा पुलिस को आगाह किया था कि मेरे बेटे की जान को खतरा है। 14 जून को जब मेरे बेटे की जान चली गई तो हमने 25 फरवरी में नामित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा परन्तु 40 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।”

वो आगे कहते हैं, “इसके बाद मैंने पटना जाकर थाने में FIR दर्ज की। पटना पुलिस तुरंत एक्शन में आई। परंतु मुजरिम अब भाग रहे हैं, हम सभी को चाहिए कि पटना पुलिस की मदद करें।”

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी आईपीएस विनय तिवारी को कथित तौर पर बीएमसी अधिकारियों द्वारा रविवार (अगस्त 2, 2020) को मुंबई पहुँचने पर क्वारंटाइन के लिए भेज दिया गया। तिवारी सुशांत सिंह राजपूत मामले में पुलिस टीम का नेतृत्व करने के लिए मुंबई पहुँचे हैं। इतना ही नहीं, तिवारी के अनुरोध करने पर भी उन्हें IPS मेस में आवास प्रदान नहीं किया गया। अधिकारी वर्तमान में गोरेगाँव के एक गेस्ट हाउस में रह रहे हैं।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने ट्वीट में लिखा, “आईपीएस ऑफिसर विनय तिवारी पुलिस टीम को लीड करने के लिए आधिकारिक ड्यूटी पर पटना से मुंबई पहुँचे थे, लेकिन रविवार रात 11 बजे बीएमसी अधिकारियों ने उन्हें जबरन क्वारंटाइन कर दिया। उन्हें आईपीएस मेस में रहने की सुविधा नहीं दी गई। वह गोरेगाँव के एक गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं।”

यह केस फिलहाल दो राज्यों के पुलिस विभागों के बीच झगड़े में बदलता नजर आ रहा है। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया है। मुंबई पुलिस से अभी कई जरूरी कागजात और सीसीटीवी फुटेज की माँग की गई है, लेकिन ये सब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

DGP ने अपने एक बयान में रिया से जाँच में शामिल होने का आग्रह किया। रिया का फिलहाल कोई अता-पता नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय ने एक चैनल से कहा कि अगर रिया खुद को दोषी नहीं मानती हैं तो फिर वह पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें और सामने आकर अपना बयान दर्ज कराएँ।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा: फैजल फारुख की बेल के लिए बीवी ने बनाए फर्जी सर्टिफिकेट

दिल्ली पुलिस ने राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख, उसकी पत्नी, डॉक्टर और वकील के खिलाफ फर्जी दस्तावेज जमा करने का केस दर्ज किया गया है। फर्जी दस्तावेज इस साल फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जमानत पाने के लिए जमा किए गए थे।

एक हफ्ते पहले, दिल्ली के दंगों के मुख्य आरोपित फैजल फारुख ने फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर जमानत पाने की कोशिश की थी। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर को दिल्ली मेडिकल काउंसिल की तरफ से पहले भी इस तरह के जाली दस्तावेज बनाने के कारण निलंबित किया गया था।

डॉक्टर ने फैजल की पत्नी के नाम से एक फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनाया था, जिसमें लिखा गया था कि cyst निकालने के लिए उनका ऑपरेशन करना जरूरी है। फैजल ने अपने आवेदन में कहा कि उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। दिल्ली दंगे में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अदालत उसकी जमानत याचिका दो बार रद्द कर चुकी है।

जब फैजल ने अदालत में जमानत याचिका को मेडिकल प्रमाण-पत्र और कुछ दस्तावेजों के साथ “बेहद जरूरी मामला” के रूप में प्रस्तुत किया, तो अदालत ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से दस्तावेजों की वैधता की जाँच करने के लिए कहा।

जब जाँच अधिकारियों ने सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. गजेंद्र नायर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने मामले में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गाँव रोड स्थित उसके नर्सिंग होम का दौरा किया। वहाँ उन्हें पता चला कि फैजल की पत्नी के नाम पर नर्सिंग होम में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।

पुलिस ने अपनी जाँच रिपोर्ट में यह भी कहा कि उसकी पत्नी दिल्ली के यमुना विहार में रहती है। यह जगह नर्सिंग होम जगह से बहुत दूर है और दिल्ली में बहुत बेहतर और सस्ती मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने डॉक्टर के बारे में और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि उनके लाइसेंस को पिछले साल दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने निलंबित कर दिया था।

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पूर्व में दो बार डॉ. गजेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की थी। पहली बार उन्हें 6 महीने का निलंबन और दूसरी बार एक साल के लिए निलंबित किया गया था। वर्तमान में, वह एक निलंबित लाइसेंस पर काम कर रहा था। उसके निलंबन की अवधि नवंबर 2020 में समाप्त होगी।

जब क्राइम ब्रांच ने डॉ. गजेंद्र नायर ने पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि जमानत दिलाने में मदद करने के लिए वो पहले भी कई लोगों का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बना चुका है।

डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने फैजल की पत्नी को कभी देखा भी नहीं है। एक ब्रोकर बुर्का पहने महिला के साथ आया और उससे महिला के पति की जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा। फिलहाल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में शामिल सभी के खिलाफ विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान फैजल फारुख के राजधानी स्कूल का इस्तेमाल अटैक बेस की तौर पर किया गया था। स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इस ठीक बगल में स्थित स्कूल तबाह हो गया था।

राजधानी पब्लिक स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था। स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।

‘आज देख लेंगे हिंदुओं को… शाहरुख भाई वो रहा हिंदू, मारो साले को’: राजधानी स्कूल वाले फैजल फारुख पर चार्जशीट

24 और 25 फरवरी को हिंदू विरोधी दंगों के दौरान देश की राजधानी पूरी तरह दहल उठी थी। 53 लोगों ने अपनी जान गँवाई और सैकड़ों लोग घायल हुए। दो दिनों तक चले दिल्ली दंगों के मामले में स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस ने कई चार्जशीट तैयार की है। चाँद बाग़ दंगों के दौरान हिंसा से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रो में रहा। इसके अलावा शिव विहार ऐसा इलाक़ा था जहाँ के हालात दंगों के वक्त बदतर थे। 

शिव विहार तिराहा तीन पुलिस थानों के अंतर्गत आता है। करावल नगर, दयालपुर और गोकुलपुरी। शिव विहार तिराहे की एक सड़क मुस्तफाबाद की तरफ जाती है जो कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। दूसरी सड़क शिव विहार और बाबू नगर की तरफ जाती है, जहाँ मिली-जुली आबादी रहती है। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी ज़्यादा है, वहाँ भी मुस्लिमों के घर बने हुए हैं। शिव विहार तिराहे पर हुई हिंसा हिंदुओं के लिए भयावह थी।

24 फरवरी की दोपहर में जिस पहले व्यक्ति का शव मिला था, वह था दिलबर नेगी। उसके हाथ-पैर काट दिए गए थे और राजधानी स्कूल के सामने स्थित अनिल स्वीट्स में उसका शरीर जला दिया गया था।    

हिंसा के दौरान भयावह नज़ारा सामने आया शिव विहार चौराहे स्थित राजधानी स्कूल की छत से। इस स्कूल के मालिक का नाम है फैजल फारुख। इस स्कूल की छत से इस्लामी भीड़ ने गोलियाँ चलाई, एसिड की बोतलें फेंकी और पत्थर भी चलाए। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जो पहली चार्जशीट दायर की गई थी, उसका संबंध राजधानी स्कूल में हुई हिंसा की घटनाओं और 24-25 फरवरी के दिन हुई घटनाओं से भी था। इस मामले में यतेन्द्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी जो की डीआरपी स्कूल के मालिक हैं। डीआरपी स्कूल, राजधानी स्कूल के ठीक बगल में स्थित था। 

डीआरपी स्कूल का मालिक एक हिंदू व्यक्ति था। राजधानी स्कूल की छत पर मौजूद भीड़ ने डीआरपी स्कूल को काफी नुकसान पहुँचाया था। उस दिन पुलिस कंट्रोल रूम को जितने भी फोन किए गए थे, उसमें ज़्यादातर डीआरपी स्कूल से धर्मेश शर्मा ने ही किए थे। पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में डीआरपी स्कूल के गार्ड का बयान भी दर्ज है। इससे दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ़ रची गई साज़िश का खुलासा होता है।

गार्ड ने अपने बयान में कहा, “जैसे ही वह डीआरपी स्कूल का मुख्य द्वार बंद करने गया तभी उसने देखा राजधानी स्कूल के सामने भारी संख्या में मुस्लिम लोग खड़े थे। उनके साथ राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख भी था। फैज़ल उस वक्त अपनी दो पहिया गाड़ी पर बैठा था। उसने राजधानी स्कूल के गार्ड (जो खुद हिन्दू था और उसकी पहचान छुपाई गई है) से कहा कि मुस्लिमों को स्कूल में दाखिल होने दिया जाए।”   

इसके बाद डीआरपी स्कूल के गार्ड ने जो कहा वह हैरान कर देने वाला था। उसने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” इसके बाद फैज़ल के साथ मौजूद मुस्लिमों की भीड़ कई तरह के हथियारों के साथ डीआरपी स्कूल में दाखिल हुई। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों ने उसकी तरफ देखा और एक ने चीखते हुए कहा “शाहरुख भाई वह रहा हिंदू, मारो साले को।” इसी तरह एक और चश्मदीद ने (उसकी पहचान भी इस रिपोर्ट में छुपाई जा रही है) अपना बयान दर्ज कराया था। 

उसने भी गार्ड के बयान से अलग कुछ नहीं बताया, दोनों ने लगभग एक घटनाक्रम ही बताया। उसने बयान में कहा कि उसने 24 फरवरी की दोपहर 2 बजे के आसपास फैज़ल को उसके कई मुस्लिम साथियों के साथ राजधानी स्कूल के सामने देखा। इसके बाद फैज़ल के साथियों ने राजधानी स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही। इसके अलावा चश्मदीद ने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” एक चश्मदीद ने फैज़ल के उस ड्राइवर की भी पहचान की जिसने दंगों के दौरान डीआरपी स्कूल को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी।

हिंदुओं के खिलाफ़ लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल किए गए राजधानी स्कूल के हिंदू गार्ड ने भी घटनास्थल पर कई मुस्लिमों के साथ फैजल की मौजूदगी की पुष्टि की थी। उसने कई बार स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही थी। जैसे ही गार्ड ने मुस्लिम भीड़ को आते हुए देखा और अपने परिवार वालों के साथ वहाँ से भाग निकला।

दंगों के दूसरे दिन जब फैज़ल उस हिन्दू गार्ड से मिला तब उसने गार्ड से कहा कि दंगाई उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। लेकिन उस वक्त हिंदू गार्ड पर अपनी जान बचाने का डर हावी थी। जिसके कारण वह स्कूल गया ही नहीं। उसने चार्जशीट में इस बात का भी ज़िक्र है कि कैसे उसने सीसीटीवी फुटेज देख कर दंगाइयों को पहचाना। 

चार्जशीट के मुताबिक़ एक खबरी की जानकारी के आधार पर पुलिस ने शाहरुख को पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के दौरान उसने दंगों में फैज़ल के शामिल होने की बात कबूल की। इसके अलावा उसने दंगों में खुद भी शामिल होने की बात स्वीकार की थी। सबसे रोचक बात यह थी कि उसने फैज़ल की पहचान उस वक्त की जब पुलिस उससे दूसरे मामले में पूछताछ कर रही थी। शाहरुख ने पुलिस की पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि फैज़ल उससे एक बात हमेशा कहता था, अगर सीएए और एनआरसी लागू हो गया तो सारे मुस्लिम देश के बाहर कर दिए जाएँगे।  

शाहरुख का कहना था कि फैज़ल ने उससे कह दिया था कि वह अपनी कौम के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहे। शाहरुख के मुताबिक़ फैज़ल ने उसे हिंदुओं को ख़त्म करने के लिए 5 हज़ार रुपए दिए थे। उसने यह भी बताया कि फैज़ल के देवबंद से संबंध बहुत अच्छे थे और वह अक्सर वहाँ जाता रहता था।

चार्जशीट में इस बात भी भी ज़िक्र है कि राजधानी स्कूल के नज़दीक से जितने हथियार मिले थे उन्हें एक दिन में जमा नहीं किया जा सकता था। इतना ही नहीं फैज़ल अपने इलाके का नेता था, क्योंकि वह अमीर था और उसके पास संसाधन मौजूद थे। ऐसे लगभग हर मौकों पर वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए योजना तैयार करता था। राजधानी स्कूल की इमारत बड़ी थी, इसलिए इसका इस्तेमाल हिंदुओं पर हमला करने के लिए किया गया। 

चार्जशीट में यह लिखा है कि सीसीटीवी फुटेज में यह साफ नज़र आया कि जिस वक्त राजधानी और डीआरपी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिवावक उन्हें लेने आए, उस वक्त रास्ते पूरी तरह खाली थे। पूरी सड़क पर सन्नाटा पसरा था। इसका मतलब साफ़ था कि दंगे पूरी तरह सुनियोजित थे। दंगों के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को फैज़ल ने दंगाइयों में 2 हज़ार रुपए बाँटे। हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उन लोगों की तारीफ़ भी की।

पूछताछ के दौरान फैजल फारुख ने खुद यह बात स्वीकार की कि सीएए और एनआरसी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ थे। इसलिए वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जारी विरोध-प्रदर्शन का सक्रिय रूप से हिस्सा बना रहा। चार्जशीट के मुताबिक़ उसने तमाम मौलवियों, पिंजरा तोड़, जेसीसी और इस्लामी आतंकी समूह पीएफआई के सदस्यों की बैठक की बात भी स्वीकार की। वह हर तरह की मदद और सहयोग के लिए पूरी तरह आश्वस्त था।

फैज़ल जेसीसी के माध्यम से सफूरा ज़रगर के संपर्क में भी था। जब सफूरा को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तब उसे बहुत सहानुभूति भी मिली। उस वक्त वह गर्भवती भी थी। इसके अलावा पिंजरा तोड़ के माध्यम से दिव्यांगना और नताशा नरवाल से फैज़ल मिला। अंत में उसकी मुलाक़ात पीएफआई दिल्ली के मुखिया मोहम्मद इलियास से भी हुई। 

चार्जशीट के मुताबिक़ फैज़ल दंगों से एक दिन पहले 23 फरवरी की तारीख को देवबंद उत्तर प्रदेश गया था। वह सुबह 7 बजे दिल्ली से निकला था और रात 8 बजे वापस आ गया था। देवबंद इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़ माना जाता रहा है। साथ ही दारुल-उल-देवबंद का घर भी माना जाता है जहाँ से सुन्नी देवबंद इस्लामिक आन्दोलन की शुरुआत हुई थी। देश में कुछ भी इस्लाम विरोधी होने पर यहीं से ही फ़तवा भी जारी किया जाता है।

पुलिस का संदेह इस बात पर भी है कि फैज़ल का संबंध मरकज़ और तबलीगी जमात से भी हो सकता है। चार्जशीट पढ़ने के दौरान ऑपइंडिया को 13 ऐसे कॉल्स और मैसेज मिले जो फैज़ल और अब्दुल अलीम के बीच किए गए थे। अब्दुल अलीम मौलाना साद का करीबी रहा है। फिलहाल दिल्ली पुलिस इन पहलुओं की जाँच करने में जुटी हुई है। 

पुलिस ने चार्जशीट में शिव विहार तिराहे में हिंदुओं के साथ हुई हिंसा की 6 घटनाओं का मुख्य रूप से ज़िक्र किया है, 

  • 24 फरवरी के दिन दिलबर नेगी का लगभग पूरा जला हुआ शरीर बरामद होना
  • 24 फरवरी के दिन राहुल सोलंकी का गोली से घायल होना
  • 25 फरवरी के दिन एसएसबी के जवानों पर एसिड फेंका गया
  • 25 फरवरी के दिन शाम के 4:30 बजे वीर भान के सिर में गोली लगना। उस वक्त वह अपने दो पहिया वाहन से गुज़र रहा था
  • 25 फरवरी के दिन शाम के 5 बजे दिनेश के सिर में गोली लगना
  • 25 फरवरी के दिन ही रात के लगभग 10 बजे, आलोक के सिर में पत्थर की वजह से चोट लगी

दिल्ली दंगों के मामले में यह पहली ऐसी चार्जशीट जो दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर की गई थी। इसके जरिए ज़रिये तमाम तरह की जानकारी सामने आई है। यह बात खुद में कितनी हैरान कर देने वाली है कि कैसे महीनों पहले इन दंगों की योजना तैयार की गई। इसके बाद 24 और 25 फरवरी के दिन देश की राजधानी में इन दंगों को अंजाम दिया गया। इन दंगों की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।

4-5 अगस्त को घरों में दीप जलाएँ, अखंड रामायण पाठ करें, मंदिर के लिए बलिदान हुए पूर्वजों को याद करें: CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (अगस्त 3, 2020) को अयोध्या का दौरा कर 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 500 सालों बाद यह ऐतिहासिक क्षण आया है।

इसके अलावा उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए चार और पाँच अगस्त को अपने घर में मिट्टी के दीए जलाएँ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि साधु-संत मंदिरों को सजाएँ, दीपोत्सव के आयोजन के साथ अखंड रामायण का पाठ करें। उन्होंने कहा कि उन लोगों को जरूर याद करें जिन्होंने राम मंदिर के लिये स्वयं का बलिदान कर दिया।

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या के साथ-साथ देश और दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा जब प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में लगभग 500 वर्षों की इस परीक्षा के परिणाम के साथ भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। इसके महत्व को समझते हुए, यहाँ अयोध्या में कार्यों का अवलोकन करने के लिए मैं स्वयं आया हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “व्यवस्था आदि देखने, निरीक्षण करने के लिए हम यहाँ आए हैं, कहीं भी कोई कोताही न बरती जाए, हम लोगों ने इसके लिए पूरी तत्परता के साथ तैयारी की है। कोविड-19 के प्रोटोकॉल को मजबूती से लागू करने पर प्रशासन का मुख्य फोकस है।”

इस बीच अयोध्या जंक्शन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। अयोध्या रेलवे स्टेशन के विकास का पहला फेज अगले वर्ष जून तक पूरा कर लेने का दावा रेलवे की ओर से किया गया है। एक अधिकारी का कहना है, “लॉकडाउन के कारण काम धीमा हो गया था। अंतिम परिणाम निश्चित रूप से बहुत सुंदर होगा।” उन्होंने भगवान राम की एक तस्वीर की ओर इशारा करते हुए बताया कि चार लोगों ने 7 दिनों के अंदर इस पेंटिंग को बनाया है।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भूमि पूजन के लिए भेजे जा रहे निमंत्रण को लेकर कहा, “हमने इकबाल अंसारी और पद्म श्री मोहम्मद शरीफ को शिलान्यास समारोह में आमंत्रित किया है।”

बता दें कि साइकिल मिस्त्री से लावारिस लाशों के मसीहा बने मोहम्मद शरीफ को समाजसेवा के क्षेत्र में पद्मश्री से विभूषित किया गया है। उन्होंने बिना भेदभाव किए करीब 3 हजार हिन्दू और 2 हजार से अधिक मुस्लिम लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर समाज सेवा की एक बड़ी मिसाल पेश की है। 

शरीफ अब तक एक कब्रिस्तान के पास विषम परिस्थितियों में रह रहे थे। मगर आसरा आवास योजना के अंतर्गत अब उन्हें घर भी मिल गया है। आवास मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्हें चिरकाल तक स्वस्थ रहने का आशीर्वाद दिया था।

22 साल के बलिदानी बेटे मोहसिन खान को बकरीद के दिन अंतिम विदाई, हाल ही में हुई थी सगाई

वीर सपूतों की धरती झुंझुनूं का एक और बेटा भारत माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। बलिदानी मोहसिन खान राजस्थान के झुंझुनूं जिले के कोलिंडा गाँव के रहने वाले थे। 22 वर्षीय मोहसिन खान को बकरीद के दिन 1 अगस्त 2020 को अंतिम विदाई दी गई।

भारतीय सेना की 16 ग्रेनिडियर के सिपाही मोहसिन खान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में तैनात थे। शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को पेट्रोलिंग के दौरान सरहद पार से हुई गोलीबारी में वे वीरगति को प्राप्त हो गए थे। शनिवार (अगस्त 1, 2020) शाम को बलिदानी मोहसिन खान का पार्थिव शरीर कोलिंडा गाँव पहुँचा। बेटे को तिरंगे में लिप​टा देखकर हर किसी की आँखें नम हो गई। मां बलकेश बानो, दादा सन्नू खान समेत परिवार के अन्य का सदस्य रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

शाम को कोलिंडा के ​कब्रिस्तान में नमाज अदा कर मोहसिन के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर परवेज अहमद हुसैन, सांसद नरेन्द्र खींचड़, प्रधान अलसीसर गिरधारी लाल खींचड़, सुशीला सीगड़ा, जिला परिषद सदस्य प्यारे लाल ढूकिया आदि ने बलिदानी की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए। इस दौरान तिरंगे को शहीद के पिता सूबेदार सरवर अली खान को सौंपा गया। जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। 

परिजनों ने बताया कि मोहसिन खान की हाल ही में कोलाली गाँव निवासी युवती से रिश्ता तय हुआ था। कुछ दिनों पहले ही उनकी सगाई हुई थी। एक महीने के अवकाश के बाद महीने भर पहले ही वो ड्यूटी पर लौटे थे। चार भाई-बहनों में सबसे छोटे शहीद मोहसिन के परिवार से कई सदस्य सेना में हैं। पिता सरवर खान सेना से सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं। भाई अमजद अली 14 ग्रेनेडियर में है। अभी ज्वाइनिंग मिलनी बाकी है। इनके अलावा चाचा और ताऊ भी सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।

बलिदानी के चचेरे भाई नवाब अली ने बताया कि ईद उलजुहा पर्व की रौनक हर चेहरे से गायब हो गई। ईद के पहले दिन ही गाँव को अपने लाडले की शहादत की जानकारी मिल चुकी थी। शनिवार को दिन भर गाँव में मातम छाया रहा।