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सबरीमाला मंदिर में किसी को नहीं मिले VIP ट्रिटमेंट, हीरो दिलीप के दौरे में तीर्थयात्रियों को रोकने से उनके पूजा का अधिकार हुआ बाधित: केरल हाई कोर्ट

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर 2024) को कहा कि सबरीमाला मंदिर के सोपानम में तीर्थयात्रियों की बेरोक-टोक की आवाजाही के उसके निर्देश का अभिनेता दिलीप के दौरे में खुला उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि दिलीप के कारण अन्य तीर्थयात्रियों को 7 मिनट से अधिक समय तक भगवान का दर्शन नहीं हो पाया। इससे तीर्थयात्रियों के पूजा करने के अधिकार पर असर पड़ा।

न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने कहा कि तीर्थयात्रियों में कम उम्र के बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और विकलांग व्यक्ति भी शामिल थे। खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए सबरीमाला के मुख्य पुलिस समन्वयक को निर्देश दिया कि किसी भी तीर्थयात्री को अभिनेता के मामले की तरह लंबे समय तक सोपानम के सामने खड़े रहने की अनुमति न दी जाए, जिससे दूसरों को परेशानी हो।

खुली अदालत में जजों ने इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज को देखते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की, “हमने वह वीडियो देखा है। बहुत बहुत बहुत बहुत गंभीर है। तीर्थयात्रियों को लगभग रोक दिया गया है। यह दो मिनट का सवाल नहीं है… वह व्यक्ति (दिलीप) सामने है… आप देख सकते हैं कि यह गार्ड रोकने के लिए अपना हाथ रख रहा है।”

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सोपानम के सामने पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को ड्यूटी पर तैनात देवस्वोम गार्ड ने रात 10:58:10 बजे दक्षिणी तरफ से रोक दिया था। सिने अभिनेता दिलीप ने रात 10:58:24 बजे दक्षिणी तरफ से सोपानम की अगली पंक्ति में प्रवेश किया और वह रात 11:05:45 बजे तक वहीं रहे।”

कोर्ट ने कहा, “तीसरे वीडियो में दिख रहा है कि उत्तरी तरफ से पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को दूसरे देवस्वोम गार्ड ने रात 10:51:38 बजे रोक दिया था। सिने अभिनेता के चले जाने तक पहली पंक्ति में खड़े किसी भी तीर्थयात्री को सोपानम के दक्षिणी तरफ जाने की अनुमति नहीं थी।” जस्टिस नरेन्द्रन ने कहा कि ऐसे विशेषाधिकार उन लोगों को भी नहीं दिए जाते, जिन्हें वीआईपी दर्शन की अनुमति है।

खंडपीठ ने कहा, “यहाँ तक ​​कि जिन अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत (वीआईपी दर्शन की) अनुमति दी गई है, वे भी वहाँ काफी समय तक रुके रहते हैं। इससे अन्य लोगों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है।” कोर्ट ने संबंधित पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, दिलीप ने 5 दिसंबर को सबरीमाला मंदिर में दर्शन किया था। इस दौरान अन्य तीर्थयात्रियों को रोक दिया गया था। इसके अगले दिन खबरें आईं कि फिल्म अभिनेता को दिए गए ‘VIP’ ट्रीटमेंट से मंदिर में अन्य तीर्थयात्रियों को काफी असुविधा हुई। इसके बाद 6 दिसंबर को कोर्ट ने TDB को अभिनेता की यात्रा के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी।

उस समय न्यायालय ने टीडीबी को यह भी चेतावनी दी थी कि वह इस बात पर विचार करेगा कि अभिनेता को वीआईपी सुविधा देने के कारण तीर्थयात्रियों की पूजा में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए या नहीं। हालाँकि, बाद में केरल पुलिस ने कहा कि अभिनेता को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई थी।

स्कूल में छात्र बोला ‘राधे-राधे’ तो मुस्लिम टीचर हबीब शाह खान ने की पिटाई: परिजनों की शिकायत पर मिशनरी स्कूल के मैनेजमेंट ने करा दिया समझौता, पुलिस बोली- संज्ञेय अपराध नहीं

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में सातवीं कक्षा के छात्र की टीचर हबीब शाह खान ने सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी, क्योंकि छात्र ने बस से उतरते समय अभिवादन में ‘राधे-राधे’ बोला था। छात्र के राधे-राधे बोलते ही टीचर हबीब शाह खान गुस्से में भर गया और कहा, ‘अभी निकालता हूँ तेरा राधे-राधे।’ इसके बाद उसने छात्र की पिटाई कर दी। इस मामले की शिकायत परिजनों ने स्कूल मैनेजमेंट से की, तो मिशनरी स्कूल के मैनेजमेंट ने भी मामले को टरका दिया। इसके बाद पीड़ित छात्र के पिता ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर, एमपी और जिला शिक्षा अधिकारी से भी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला नरसिंहपुर जिले के क्रिश्चियन मिशनरी द्वारा संचालित चावरा देवी विद्यापीठ स्कूल का है। यहाँ मंगलवार (10 दिसंबर 2024) को बच्चों की परीक्षा थी। सातवीं कक्षा का पीड़ित छात्र भी स्कूल बस से स्कूल पहुँचा और बस से नीचे उतरते समय उसे धक्का लग गया। हड़बड़ी में बच्चे ने टीचर हबीब शाह खान को सामने देख ‘राधे-राधे’ बोल दिया। बस, फिर क्या था? उसकी शामत आ गई। टीचर ने उसकी पिटाई की और ‘अभी निकालता हूँ तेरा राधे-राधे’ कह कर उसे काफी अपमानित भी किया। बच्चे ने किसी तरह से परीक्षा दी और घर पर आकर शिकायत की।

बच्चे के परिजन अगले दिन यानी बुधवार (11 दिसंबर 2024) को स्कूल पहुँचे। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट से टीचर की शिकायत की, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट ने उन्हें टरका दिया। इस मामले में परिजनों ने अब कलेक्टर, एमपी और जिला शिक्षा अधिकारी से भी शिकायत की है।

मीडिया ने स्कूल के प्रिंसिपल से जब संपर्क किया, तो प्रिंसिपल बाबू जोन ने बताया कि मामले की जानकारी होते ही उन्होंने छात्र के परिजन और टीचर को बुलाकर दोनों की बात सुनीं। इसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों के बीच में आपसी समझौता कराया। प्रिंसिपल की समझाइश के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। प्रिसिंपल के मुताबिक, मामले में सुलह हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से अब किसी तरह की शिकायत नहीं है। वहीं छात्रों के परिजनों द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराने पर स्कूल प्रबंधन ने कहा कि वह उसे वापस ले लेंगे।

वहीं, नरसिंहपुर जिले की एसपी मृगाकी डेका ने कहा है कि ये मामला गैर संज्ञेय अपराध में आता है। ये आपसी विवाद है, जिसे सुलझा लिया गया है। हालाँकि रिपब्लिक भारत ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आरोपित टीचर हबीब शाह खान को स्कूल मैनेजमेंट ने 5 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया है और आगे जाँच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

बता दें कि चावरा देवी विद्यापीठ का संचालन भोपाल स्थित सीएमआई सेंट पॉल सोसायटी यानी मिशनरी मिशन द्वारा किया जाता है। इस स्कूल के प्रिंसिपल का नाम बाबू जॉन है। हालाँकि मिशनरी स्कूल में मुस्लिम टीचर द्वारा इस हरकत को लेकर स्थानीय लोगों में भी गुस्सा है।

इस्लामी आतंक के लिए मदरसा और मौलाना: जैश-ए-मोहम्मद की टेरर फंडिंग मामले में कश्मीर से बंगाल तक 19 ठिकानों पर छापेमारी, NIA ने कई मौलानाओं को दबोचा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी साजिश और फंडिंग के मामले में राजस्थान, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में 19 जगहों पर छापेमारी की। एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, सीडी और हार्ड डिस्क समेत कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।

NIA के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी शेख सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी के करीबी सहयोगियों के परिसरों पर यह छापेमारी की गई है। अयूबी को उसकी आतंकी भूमिका के कारण गिरफ्तार किया गया था। अयूबी को इस साल अक्टूबर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी जमात संगठन में भर्ती करने एवं उन्हें कट्टरपंथी बनाने के आरोप में हिरासत में लिया था।

एजेंसी ने बताया कि छापेमारी असम के ग्वालपाड़ा, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, मुंबई और अमरावती, उत्तर प्रदेश के झाँसी, बरेली, देवबंद और सहारनपुर, बिहार के सीतामढ़ी, पश्चिम बंगाल के हुगली, जम्मू-कश्मीर के बारामूला, रियासी, बडगाम और अनंतनाग, राजस्थान के डूंगरपुर और गुजरात के मेहसाणा में की गई है। इस दौरान कुछ जरूरी दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जाँच की जा रही है।

इस मामले में राजस्थान के डूंगरपुर स्थित मोहम्मद सलमान नाम के एक मौलाना के घर में छापेमारी की है। इस दौरान एजेंसी ने मौलाना से करीब 7 घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद उसे अपने साथ ले गई। एजेंसी को आतंकी साजिश के बारे में इनपुट मिली थी। मौलाना सलमान गुजरात के हिलोन का रहने वाला है। वह गलियाकोट में एक दरगाह के मदरसे में पढ़ाता है।

डूंगरपुर की एसपी मोनिका सेन ने बताया कि NIA की टीम गुरुवार (12 दिसंबर 2024) की सुबह करीब 4 बजे डूंगरपुर आई। इसके बाद चितरी थाना क्षेत्र में गलियाकोट स्थित मौलाना सलमान के घर पहुँचकर छापेमारी की। छापेमारी के साथ ही मौलाना से पूछताछ भी शुरू की गई। इसके बाद टीम मौलाना को साथ लेकर चितरी थाने पहुँची और उससे पूछताछ की।

वहीं, महाराष्ट्र में छापेमारी के दौरान NIA ने अमरावती, भिवंडी और संभाजीनगर से एक-एक शख्स को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। ये तीनों आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी एजेंसियों के संपर्क में थे। NIA पता करेगी कि उनके संपर्क में होने का इनका मकसद क्या था। उनके संपर्क में और कितने लोग हैं, इसकी भी जानकारी जुटाएगी।

NIA ने बिहार के सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाना क्षेत्र के बाजपट्टी गोट में छापेमारी की। यहाँ से भी एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। उसके यहाँ टीम ने लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन चलाया है और उससे लगभग 5 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान बिहार पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

उधर, उत्तर प्रदेश के झाँसी में मदरसा टीचर मुफ्ती खालिद के घर पर छापेमारी की गई। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। जब टीम ने मुफ्ती खालिद को ले जाने की कोशिश की तो स्थानीय मुस्लिमों ने एजेंसी की टीम को घेर लिया। टीम के साथ धक्का-मुक्की करके मौलाना छुड़ा लिया और उसे नजदीक के फातिमा मस्जिद में ले जाकर छिपा दिया।

इसके बाद NIA ने आसपास के इलाकों से भारी पुलिस बल को बुलाया और फिर मौलाना को अपने साथ ले गई। मौलाना को वहाँ से लेकर जाने में पुलिस, यूपी एटीएस और एनआईए की टीम को 3 घंटे का समय लग गया। कहा जाता है कि इस दौरान पुलिस और एआईए की टीम पर 200 लोगों की भीड़ ने हमला भी किया।

वहीं, खालिद को छुड़ाने के लिए उसके समर्थकों द्वारा पुलिस के साथ की गई धक्का-मुक्की के मामले में पुलिस ने 110 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन सभी पर पुलिस टीम पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में महिलाओं को भी आरोपित बनाया गया है। मुफ्ती खालिद शहर काजी साबिर अंसारी का भतीजा है।

पाकिस्तान के लिए टीपू सुल्तान ‘हीरो’… क्योंकि उसने जलाए 8000+ मंदिर, 200+ ब्राह्मण परिवारों का किया नरंसहार: पाकिस्तानी सोच वाले अपने यहाँ भी?

पाकिस्तान के लिए टीपू सुल्तान किसी सुपरहीरो से कम नहीं है। यही वजह है उन्होंने अपने एक युद्धपोत को भी टीपू का नाम दिया हुआ है। हाल में इस युद्धपोत और टीपू के नाम की चर्चा फिर सुर्खियों में इतिहासकार विक्रम संपत की किताब के चलते शुरू हुई। विक्रम संपत ने अपनी किताब में टीपू से जुड़े किस्सों की पोल खोली है। वहीं इस किताब पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे और क्यों पाकिस्तान और इमरान खान टीपू के मुरीद हैं।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति कैसा था इसका अंदाजा इससे लगाना चाहिए कि उसके समर्थक कौन हैं और क्यों उसे मानते हैं। उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के एक वाकये को बताते हुए कहा कि पाक फौज ने उस समय ‘ऑपरेशन सोमनाथ’ चलाया था। यह नाम गजनी के सोमनाथ मंदिर पर हमले की याद दिलाता है। विक्रम कहते हैं कि शायद ऑपरेशन का नाम ऐसा रखने से उनका मकसद सोमनाथ पर हमला ही था।

स्मिता प्रकाश के पॉडकास्ट में बात करते हुए विक्रम संपत ने जानकारी दी कि पाकिस्तान ऐसे नामों के जरिए खुद को मध्यकालीन इतिहास से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि अपने जहाजों का नाम भी मुगल शासकों के नाम पर रखा है। जैसे पीएनएस बाबर, पीएनएस जहाँगीर, पीएनएस शाहजहाँ, पीएनएस औरंगजेब और पीएनएस टीपू सुल्तान। विक्रम संपत कहते हैं कि इस तरह के नामकरण से पाकिस्तान अपने मध्यकालीन इतिहास से जुड़ने की कोशिश कर रहा है। वहीं टीपू सुल्तान को उन्होंने इसलिए चुना है ताकि विदेशी ताकतों को संदेश दे सकें कि उनका वो युद्धपोत उनका वैसा ही हाल करेगा जैसा टीपू सुल्तान ने किया था।

गौरतलब है कि टीपू सुल्तान 1782 से 1799 तक मैसूर में शासक था। उसने अंग्रेजों से लड़ाइयाँ लड़ीं, लेकिन दूसरी ओर हिंदुओं पर अत्याचार भी किए। इतिहासकारों का बताना है कि टीपू ने अपने शासन काल में हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनवाया। इसके अलावा “द मैसूर गजेटियर” में उल्लेख किया गया है कि टीपू ने हजारों मंदिरों को नष्ट किया और बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया।

पिछले साल टीपू सुल्तान के डार्क साइड को दिखाने के लिए एक फिल्म की घोषणा भी हुई थी। ये घोषणा ‘Eros International’ द्वारा की गई थी। अनाउंसमेंट वीडियो में दिखाया गया था कि कैसे क्रूर टीपू ने 8000 मंदिरों और 27 चर्चों को ध्वस्त किया। इसके अलावा कि 40 लाख हिन्दुओं को इस्लाम अपना कर मुस्लिम बनने को मजबूर किया गया, उन्हें गोमांस खिलाया गया। 1 लाख से भी अधिक हिन्दुओं को जेल में ठूँस दिया गया। फिल्म में कालीकट में 200 ब्राह्मण परिवारों का नरसंहार का जिक्र भी था और वीडियो में बताया गया था कि सन् 1783 से ये ‘जिहाद’ शुरू किया गया था। वीडियो में मंदिरों को जलते हुए भी दिखाया गया था।

यही इतिहास देखते हुए पाकिस्तान ने टीपू को अपना हीरो माना हुआ है और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान तो अपनी तुलना भी टीपू सुल्तान से करते रहे हैं। शायद इस तुलना की वजह यही है कि जैसा हाल टीपू सुल्तान के समय में हिंदुओं का था और वैसे ही पाकिस्तान में इस समय में है। तकनीकी रूप से बात करें तो पाकिस्तान का पीएनएस टीपू सुल्तान (DDG-185) पाकिस्तान की नौसेना का एक महत्वपूर्ण युद्धपोत है। इस जहाज को यारो शिपबिल्डर्स, ग्लासगो, स्कॉटलैंड में डिजाइन और निर्मित किया गया था और इसे 1978 में रॉयल नेवी में कमीशन किया गया था। यह जहाज पहले ब्रिटिश रॉयल नेवी का एचएमएस एवेंजर था।

BJP से नहीं है लव जिहादी ताबिश असगर का लेना-देना: भाजपा ने पत्र में किया साफ, कहा- अगर धोखाधड़ी से बना सदस्य तो निष्कासित करते हैं

नोएडा में हिंदू लड़की से खुद की पहचान छिपाकर सनातनी तरीके से शादी कर लव जिहाद करने वाले ताबिश असगर को बीजेपी ने पार्टी से निकाल दिया है। वो खुद को बीजेपी नेता बताता था। हालाँकि अमरोहा बीजेपी ने कहा है कि ‘ऐसे लोगों से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। यदि किसी धोखा-धड़ी से ये लोग पार्टी के सदस्य बन गए हों, तो इन्हें निष्कासित किया जाता है।’

अमरोहा बीजेपी द्वारा जारी निष्कासन पत्र

बता दें कि नोएडा में 3 दिसंबर 2024 को हिंदू युवती ने शिकायत दर्ज कराई कि ताबिश असगर नाम के व्यक्ति ने अपनी पहचान छिपाई और उसके साथ लव जिहाद किया। युवती ने शिकायत में कहा था कि 4 साल पहले सोशल मीडिया पर विशाल राणा नाम के युवक से परिचय हुआ, उसने हिंदू खुद को राजपूत बताया और प्रेमजाल में फंसा लिया। यही नहीं, 20 दिसंबर 2021 को पीड़िता के साथ विशाल राणा की सगाई भी हो घई। 22 फरवरी 2024 को दोनों की गाजियाबाद में हिंदू विधि-विधान से शादी भी हो गई, जिसमें पीड़िता के परिजन और तमाम रिश्तेदार मौजूद रहे।

लेकिन शादी के बाद विशाल उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ले गया और कोर्ट मैरिज की बात करने लगा। तब जाकर पता चला कि जिसे वो विशाल राणा समझ रही थी, वो तो ताबिश असगर है। उसकी मंगनी में शामिल हुआ वासू राणा असल में वसीम है। इसके बाद उसने डरा कर युवती का मुँह बंद करा दिया। यही नहीं, फरवरी 2024 में उसने पीड़िता का गर्भपात भी करा दिया था। इस बीच वो लगातार युवती पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाता रहा। यही नहीं, उसने पीड़ित युवको को धोखे में रखकर लव मैरिज के नाम पर लिव-इन-रिलेशनशिप के फर्जी कागजात भी बनवा लिए थे। बहरहाल, पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

ये मामला सुर्खियों में आया, तो पता चला कि वो बीजेपी का सदस्य है। हालाँकि अब बीजेपी ने साफ कर दिया है कि उसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। अगर किसी तरह की धोखा-धड़ी कर वो बीजेपी से जुड़ भी गया हो, तो उसे निष्कासित किया जाता है। बीजेपी ने ताबिश समेत 6 लोगों को पार्टी से निकाला है। ये सभी अमरोहा के नौगाँवा सादात विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं।

बांग्लादेश में तलवार के दम पर हिंदुओं का हो रहा धर्मांतरण: ISKCON के एक और संत ने उठाई यूनुस सरकार के खिलाफ आवाज, महिलाओं में कट्टरपंथी ‘जमात’ का डर बसा

कोलकाता इस्कॉन के एक संत राधारमण दास का कहना है कि बांग्लादेश में लोगों को तलवार की नोक पर मुस्लिम बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में वर्तमान में सत्ता में मौजूद कट्टरपंथियों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। बता दें कि बांग्लादेश में ISKCON के एक संत चिन्मय दास को गिरफ्तार किया गया है।

राधारमण दास ने इंडिया टुडे से कहा, “हमें रिपोर्ट मिली है कि बांग्लादेश में धर्म परिवर्तन के लिए लोगों धमकाया जा रहा है। धर्म बदलने से इनकार करने पर उन्हें धमकाया जा रहा है और तलवारें दिखाई जा रही हैं।” उन्होंने एक लड़की के बारे में भी बताया, जो धमकी और उत्पीड़न से तंग आकर बांग्लादेश से भारत भाग आई थी। वह लड़की नदी पार करके भारत में घुस आई थी।

दास ने बताया, “एक लड़की नदी पार करके भारत भाग आई। उसे और उसके परिवार को धमकाया गया था। हम उसे भारत सरकार से नागरिकता देने और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “चिन्मय दास की अदालती कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है।” बता दें कि चिन्मय दास को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

बांग्लादेश की सरकार ने चिन्मय दास पर बांग्लादेश का झंडा जलाने का आरोप लगाते हुए देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश के अधिकारियों ने इस्कॉन के कई बैंक खातों को सीज कर दिया है और उसके पदाधिकारियों को निशाना बनाया है। अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार की घटनाएँ लगातार आ रही हैं।

जारी है पुलिस का प्रताड़ना

बांग्लादेश में पुलिस का प्रताड़ना जारी है। वहाँ हाल ही में चटगाँव में हिंदुओं पर किए हमले को कई चिह्न आज भी दिख रहे हैं। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मंदिरों में आज भी भगवान की प्रतिमा टूटी हुई नजर आ रही है। वहीं, दंगा फैलाने का आरोप लगाकर कई हिंदू युवकों को पुलिस टाँगकर थाने ले गई, जो आज तक घर नहीं लौटे।

इन्हीं में से एक चटगाँव के मेथोरपट्टी में रहने वालीं सुमी के बेटे अमन दास हैं। उन्हें 27 नवंबर की रात सेना के जवान घर से पकड़कर ले गए थे और उसे आज तक नहीं छोड़ा है। सुमी कहती हैं, “हम कोतवाली जाते हैं तो बच्चों से मिलने नहीं दिया जाता। आज 15 दिन हो गए।” न्याय नहीं मिलने की आशंका देखते हुए सुमी कहती हैं, “पुलिस हमें गोली मार दे। हम परेशान हो गए हैं।”

एक अन्य हिंदू महिला रेशमा कहती हैं कि अब घर से बाहर निकलने से डर लगता है। वो कहती हैं, “हमें डर लगता है कि जमात (बांग्लादेश का कट्टरपंथी संगठन) के लोग घर में ना घुस जाएँ। हमारे बच्चों पर हमला न कर दें। सरकार भी हमारी कोई मदद नही कर रही।” वहीं, आसमां नाम की एक हिंदू महिला कहती है, “हमारे लोग जहाँ जाते हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।”

तेलंगाना थल्ली की साड़ी का रंग किया हरा, सिर से मुकुट भी हटाया : कॉन्ग्रेस बदल रही राज्य की देवी की पहचान या कर रही हिंदू संस्कृति से किनारा?

तेलंगाना राज्य आंदोलन के दौरान संघर्ष की प्रमुख पहचान मानी जाने वाली ‘तेलंगाना थल्ली’ को कॉन्ग्रेस की रेवंत रेड्डी सरकार ने बदल दिया। तेलंगाना थल्ली की सचिवालय में नई मूर्ति लगाई गई जिसमें पहले की तुलना में कई बदलाव थे। पहले की मूर्ति जहाँ तेलंगाना की हिन्दू संस्कृति और त्यौहारों से मेल खाने वाली थी तो वहीं नई मूर्ति में कई निशानियों को बदल दिया गया है। कॉन्ग्रेस के सरकार के इस कदम के चलते काफी लोग नाराज हैं। उन्होंने इसे तेलंगाना की पहचान मिटाने का प्रयास बताया है।

कौन हैं ‘तेलंगाना थल्ली’?

तेलंगाना यानी तेलुगु बोलने वालों का राज्य और थल्ली का मलतब माँ। यानि तेलंगाना थल्ली का मलतब राज्य की माँ हैं। तेलंगाना थल्ली को सबसे पहले 2003 में सामने लाया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि 2003 में सबसे पहले तेलंगाना थल्ली की परिकल्पना की गई थी। तब तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन तेजी पर था।

निर्मल जिले के रहने वाले एक कलाकार ने तेलंगाना थल्ली की कल्पना की थी। तेलंगाना राज्य के लिए लड़ाई के दौरान आंदोलनकारियों ने अपनी पहचान के अलग निशान बनाने चालू कर दिए थे। 2003 में लाई गई तेलंगाना थल्ली की छवि में जिन देवी की कल्पना की गई थी, उन्होंने एक गुलाबी रंग की रेशम की साड़ी पहनी हुई थी।

गुलाबी रंग भी तेलंगाना राज्य आंदोलन के साथ जुड़ा रहा है। थल्ली के एक हाथ में मक्के की एक बाली थी। उनके हाथ में एक बर्तन है, जिसमें फूल रखे हैं। दरअसल, यह फूलों वाला बर्तन तेलंगाना के एक त्यौहार से संबंध रखता है। इसे बथुकम्मा त्यौहार कहते हैं।

यह त्यौहार तेलंगाना में नवरात्रि के साथ ही मनाया जाता है, जिसमें शक्ति और प्रकृति की पूजा की जाती है। इसी त्यौहार के दौरान, फूलों की पूजा भी होती है। तेलंगाना थल्ली के सर पर मुकुट भी दिखाया गया है। उनके कमर से लेकर शरीर के बाकी अंग पर भी कई सोने के जेवर हैं।

कुल मिलाकर, इन तेलंगाना थल्ली को एक हिन्दू देवी के तौर पर दिखाया गया था। तेलंगाना थल्ली को राज्य बनने के बाद एक प्रमुख पहचान के तौर पर जानी जाती थीं।

कॉन्ग्रेस सरकार ने क्या बदला?

जहाँ अब तक तेलंगाना थल्ली धनधान्य और संस्कृति को दर्शाने वाली देवी के तौर पर दिखती थीं वहीं नई लगाई गई मूर्ति में कई पुराने फीचर गायब हैं। नई मूर्ति में साड़ी का रंग बदल कर हरा कर दिया गया है। उनके अधिकांश जेवर भी मूर्ति पर से हटा दिए गए हैं।

उनके बाएँ हाथ की मक्के की बाली को दाएँ हाथ में दे दिया गया है और इसमें दिखने वाला बथुकम्मा का बर्तन भी गायब है। यानि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई नई डिजाइन में तेलंगाना के बड़े हिन्दू त्यौहार के लिए कोई जगह नहीं है। सबसे हास्यास्पद है कि उनके सर पर दिखने वाला मुकुट भी हटा दिया गया है। नई मूर्ति में चूड़ियों का रंग भी बदल कर हरा कर दिया गया है।

उनका जो एक हाथ खाली है, वह कॉन्ग्रेस के निशान की मुद्रा की तरह दिखता है। इसके अलावा तेलंगाना थल्ली के चेहरे में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। इस मूर्ति को सोमवार (9 दिसम्बर , 2024) को तेलंगाना सचिवालय के बाहर लगाया गया है। इस प्रतिमा का अनावरण कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया रेवंत रेड्डी ने किया है।

मूर्ति का अनावरण उस दिन किया गया, जिस दिन कॉन्ग्रेस की मुखिया सोनिया गाँधी का जन्मदिन था। गौर करने वाली बात यह है कि कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी को ही तेलंगाना की माँ बताते आए हैं। इसके पीछे तर्क है कि कॉन्ग्रेस सरकार में ही तेलंगाना राज्य बना था और सोनिया गाँधी ने इसको लेकर काफी प्रयास किए थे।

क्या संस्कृति से किनारा करने की कोशिश?

तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार का थल्ली की मूर्ति का डिजाइन बदलना राज्य की भव्य हिन्दू विरासत से किनारा करने के एक प्रयास के तौर पर देखा गया है। इसके पीछे तर्क भी दिए गए हैं। ऐसा दावा करने वालों ने प्रश्न उठाया है कि आखिर साड़ी का रंग का हरा करना क्या सेक्युलरिज्म से सम्बन्धित है।

इसी के साथ ही उनके हाथ से जो हिन्दू त्यौहार से सम्बन्धित बर्तन हटाया गया, वह भी संस्कृति छोड़ने के प्रयास के तौर पर देखा गया है। नई मूर्ति में कोई भी ऐसी सांस्कृतिक पहचान नहीं जोड़ी गई है। देवी के मुकुट को हटाना भी उनके गौरव को कम करने के तौर पर देखा गया है। हिन्दू परंपरा में अधिकांश देवियों के सर पर मुकुट रहता है।

संभवत: कॉन्ग्रेस सरकार शायद इसी हिन्दू पहचान से दूरी बनाना चाहती हो। वहीं उनके हाथ को खाली करके उसे कॉन्ग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजे की तरह दिखाने को लेकर भी चिंता जताई गई है। तेलंगाना थल्ली का रूप बदलने को लेकर राजनीतिक लड़ाई भी चालू हो गई है। कॉन्ग्रेस का दावा है कि यह तेलंगाना की एक सामान्य महिला को प्रदर्शित करती हैं। राज्य की विपक्षी पार्टियों ने कॉन्ग्रेस सरकार के इस कदम पर प्रश्न उठाए हैं।

BRS ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को तेलंगाना की संस्कृति का अपमान बताया है। BRS नेता के कविता ने कहा, “यह प्रतिमा दशकों से हमारे संघर्ष, बलिदान और पहचान का प्रतीक रही है। इसे केवल सरकारी आदेश के आधार पर नहीं बदला जा सकता। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, जिनकी तेलंगाना आंदोलन में कोई भूमिका नहीं है और जो ऐतिहासिक रूप से एकीकृत आंध्र प्रदेश का समर्थन करते आए हैं, वे मनमाने ढंग से इस मूर्ति को अपनी सोच से नहीं बदल सकते।”

राम मंदिर मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट का: पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने रिटायर्ड जज नरीमन की ‘संविधान का मजाक’ टिप्पणी को नकारा, बताया देश के नागरिक को आलोचना का अधिकार

अयोध्या फैसले पर सवाल उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रोहिंगटन नरीमन को लेकर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बयान दिया है। चंद्रचूड़ ने कहा कि अयोध्या के राममंदिर के फैसले पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं, उनमें से कई लोग 1000 पन्ने के फैसले का एक पन्ना भी नहीं पढ़े होंगे। दरअसल, नरीमन ने फैसले को ‘न्याय का मजाक’ और ‘सेक्युलरिज्म का उल्लंघन’ बताया था।

टाइम्स नेटवर्क के इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, मैं फैसले का एक पक्ष था। इसलिए यह मेरे काम का हिस्सा नहीं है कि मैं इस फैसले का बचाव करूँ या आलोचना करूँ।” उन्होंने कहा, “कोई जज किसी फैसले में पार्टी होता है। वह फैसला सार्वजनिक संपत्ति बन जाता है और उस पर दूसरे लोग ही बात करेंगे।”

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “जस्टिस नरीमन ने फैसले की आलोचना की है। इसका मतलब है कि भारत में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत अभी जिंदा है, क्योंकि धर्मनिरपेक्षता का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत अंतरात्मा की स्वतंत्रता है। जस्टिस नरीमन जो कर रहे हैं, वह अपनी अंतरात्मा से कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नागरिकों के पास चर्चा करने, आलोचना करने और टिप्पणी करने का अधिकार है।

इस कॉन्क्लेव में बोलते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “मैं अपने फैसले का बचाव नहीं कर सकता। हमने पाँच जजों के जरिए अपनी बात रखी है और हर तर्क को पेश किया है। ऐसे में हर न्यायाधीश इस फैसले का हिस्सा है। यह निर्णय लेने का काम सामूहिक है और हम अपने हर शब्द पर अडिग हैं। अदालतें वर्तमान मुद्दों पर फैसला लेती है। वो उन मुद्दों पर फैसला लेते हैं, जो देश के सामने हैं।”

जस्टिस नरीमन के आरोपों पर उन्होंने आगे कहा, “यह एक धारणा है और इस तरह की कई धारणाएँ होंगी। नागरिकों के पास चर्चा करने, टिप्पणी करने, आलोचना करने का अधिकार है। लोकतंत्र में यह सब संवाद की प्रक्रिया है। यह जस्टिस नरीमन का नजरिया है और हर कोई इस नजरिये का सम्मान करता है, लेकिन यह नजरिया सत्य के एकाधिकार को नहीं दर्शाता। अंतिम शब्द सुप्रीम कोर्ट होगा।”

क्या कहा था जस्टिस नरीमन ने?

कॉन्ग्रेस सरकार में देश के सॉलिसिटर जनरल रहे और बाद में सुप्रीम कोर्ट में जज बने रोहिंटन नरीमन ने एक लेक्चर के दौरान राम मंदिर पर दिए गए फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने इसे ‘न्याय का मजाक’, सेक्युलरिज्म का उल्लंघन करने वाला फैसला करार दिया। उन्होंने हिन्दुओं को कानून के खिलाफ रहने वाला बताया, मस्जिदों के खिलाफ याचिका डालने को दैत्य के सर की तरह बताया।

रोहिंटन नरीमन ने यह टिप्पणी अहमदी फाउंडेशन द्वारा आयोजित जस्टिस AM अहमदी मेमोरियल लेक्चर में की थी। ‘धर्मनिरपेक्षता और भारतीय संविधान’ विषय पर बोलते हुए रोहिंटन नरीमन ने कहा कि यह पूरा मसला 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की राम मंदिर बनाने की माँग को ‘तानाशाही’ और ‘अत्याचारी’ माँग से चालू हुआ था।

उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा समेत भाजपा और VHP के नेताओं को बरी किए जाने पर दुख जताया और उस जज को लानतें भेजी, जिसने यह फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा कि उस जज को यूपी में एक पद दिया गया, जिसने इन नेताओं को बरी किया था। 

नरीमन का कहना था कि अब 1991 का कानून सख्ती से लागू कर दिया जाए, जिसके तहत कोई भी हिन्दू इतिहास में अपने धार्मिक स्थल के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटा सकता है। उन्होंने कहा था कि तभी भारत के लोग सहिष्णु हो पाएँगे। 

शादीशुदा हिंदू महिला के घर में घुसा असलम अंसारी, हत्या करके फरार हुआ: मुरादाबाद पुलिस ने एनकाउंटर के बाद दबोचा, पैर में गोली मारी

मुरादाबाद में गुरुवार (12 दिसंबर 2024) की सुबह कटघर थाना इलाके के बलदेवपुरी में कोहराम मच गया, जब एक 45 वर्षीय महिला भूवी प्रजापति की हत्या की खबर सामने आई। हत्यारे का नाम असलम अंसारी उर्फ असलम खान है, जो बुधवार (11 दिसंबर 2024) की रात उससे मिलने उसके घर में आया था। घटना के समय भूरी का पति एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। सुबह भूरी मृत मिली थी, तो असलम खान फरार हो गया था। हालाँकि शाम होते-होते तक पुलिस ने असलम की घेरेबंदी की और मुठभेड़ के बाद असलम खान को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।

क्या था पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असलम और भंवरी उर्फ भूरी प्रजापति में करीब 1 साल से संपर्क था। भूरी के तीन बच्चे भी हैं। बुधवार की रात को भूरी ने अपने पति को शादी-समारोह में भेज दिया और सुबह आने को कहा। भूरी ने अपने तीनों बच्चों को नीचे के कमरे में बंद कर दिया और फर्स्ट फ्लोर पर अपने आशिक असलम अंसारी के साथ चली गई। यहाँ असलम अंसारी ने भूरी की हत्या कर दी और फरार हो गया। बच्चे सुबह के समय दरवाजा पीटते और शोर मचाते रहे। पड़ोसी पहुँचे, तो दरवाजा खुला और फिर भूरी का शव बरामद हुआ।

एनकाउंटर के दौरान पैर में लगी गोली

इस मामले में शुरुआती जाँच में ही महिला की गला दबाकर हत्या की बात सामने आई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस पर मुहर भी लग गई। इस बीच पुलिस ने जाँच शुरू की और असलम की तलाश तेज की। उसे पकड़ने के लिए 2 टीमें बनीं, जहाँ रफातपुरा फ्लाईओवर के पास एनकाउंटर के बाद वो पुलिस की गिरफ्त में आ गया। असलम के पैर में गोली लगी है। उसके पास से बरामद तमंचा व बाइक कब्जे में ले ली।

SP सिटी ने बताया कि मृतका के पति की तहरीर के आधार पर असलम नाम के युवक को नामजद करते हुए FIR दर्ज की गई है। बच्चों ने भी अपने बयान में बताया है कि घर में असलम अंसारी ही आया था। बताया जा रहा है कि भंवरी उर्फ भूरी फलों-सब्जियों की रेहड़ी लगाती थी और असलम के साथ वो बीते 1 साल से संपर्क में थी।

18 साल के डी गुकेश वर्ल्ड चैंपियन: भारतीय की जीत पर बिलबिलाया गोरी चमड़ी वाला क्रेमनिक, उसी के देश वाले चेस-स्टार ने की बोलती बंद

भारत के डी गुकेश महज 18 साल में ही शतरंज की दुनिया के नए बादशाह बन गए हैं। उन्होंने चैंपियन का ताज पहनने के लिए वर्ल्ड चैंपियन चीनी खिलाड़ी डिंग लिरेन को 7.5-6.5 से हराया। आखिरी बाजी एक समय ड्रा के लिए बढ़ रही थी, तभी डिंग लिरेन ने ऐसी गलती कर दी, जो शायद ही कोई बड़ा खिलाड़ी करता। उनकी इस गलती पर तुरंत ही डी गुकेश ने शिकंजा कस लिया और उन्हें हार के लिए मजबूर कर दिया। इसी के साथ डी गुकेश शतरंज की दुनिया के 18वें बादशाह बन गए। वो सबसे कम उम्र के शतरंज चैंपियन हैं और विश्वनाथन आनंद के बाद चैंपियन बनने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी भी।

बेहद कड़े मुकाबले में मिली जीत

डी गुकेश और डिंग लिरेन के बीच चैंपियन बनने की जंग 17 दिनों से चल रही थी, जो 14वें राउंड पर जाकर थमी। 13 राउंड तक दोनों खिलाड़ी 6.5-6.5 से बराबर थे, जिसमें दोनों ही खिलाड़ियों ने 2-2 राउंड जीते थे, तो बाकी के 9 मुकाबले ड्रॉ रहे थे। लिरेन ने पहली बाजी जीत कर बढ़त बनाई थी, तो गुकेश ने तीसरी बाजी में जीत हासिल की। 11वी बाजी गुकेश ने जीतकर बढ़त बनाई तो 12वीं बाजी में लिरेन ने जीत दर्ज कर बराबरी पाई और फिर 14वीं और आखिरी बाजी में गुकेश ने जीत दर्ज की। आखिरी बाजी 4 घंटे और 58 चालों तक चली, जो क्लासिकल शतरंज की मिसाल कहा जाएगा। हालाँकि आखिर में लिरेन ने घोड़ों को बदलने की जो गलती की, उसके बाद की तीसरी ही चाल में गुकेश ने उन्हें पराजय झेलने को मजबूर कर दिया।

वर्ल्ड चैंपियन रहे व्लादिमीर क्रेमनिक ने उठाई उंगली

दरअसल, शतरंज के मुकाबलों में छोटी-छोटी गलतियाँ अक्सर भारी पड़ जाती हैं। आखिरी बाजी में लिरेन की गलती ने उनसे वर्ल्ड चैंपियन का खिताब छीन लिया। अब इस चाल को व्लादिमीर क्रेमनिक (चैंपियन 2000-2007) ने बचकानी करार दिया है, साथ ही हैरानी जताई है कि इस सबसे छोटी गलती की वजह से लिरेन को हार झेलनी पड़ी। उन्होंने इसे ‘शतरंज का अंत’ तक करार दे दिया।

हालाँकि क्रेमनिक के दावों पर तुरंत ही सवाल भी उठ गए। लोगों ने उनके दूसरे ट्वीट पर कम्यूनिटी नोट भी जोड़ दिए। जिसमें बताया गया कि 1892 का फाइनल मुकाबला भी ऐसी ही एक गलती की वजह से हुआ था, जिसमें सिर्फ 2 मूव में ही मिखाइल चिगोरिन को हार झेलनी पड़ी थी।

बहरहाल, क्रेमनिक के दावों के तुरंत बाद ही 15 साल तक वर्ल्ड चैंपियन रहे गैरी कास्परोव (चैंपियन 1985-2000) सामने आए। उन्होंने डी गुकेश की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गुकेश ने बेहद कम उम्र में ही सभी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। वो पूरी तरह से तैयार थे। रही बात गलतियों की, तो उन्होंने साल 2014 के मैच की ओर ध्यान दिलाया, जब दुनिया के 2 सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों मैग्नन कार्लसन (चैंपियन-2013-23) और विश्ननाथन विश्ननाथन (चैंपियन-2007-2013) के मैच में 2-2 गलतियाँ हुईं थी।

11 साल की उम्र में देखा सपना, 18 में कर लिया पूरा

डी गुकेश ने महज 11 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना देखा और 7 साल में ही पूरा भी कर लिया। दरअसल, 11 साल की उम्र में उन्होंने सबसे युवा विश्व चैंपियन बनने का सपना देखा था। गुकेश जब सिर्फ 11 साल 6 महीने के थे, तब चेस बेस इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो बड़े होकर सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बनना चाहेंगे। उन्होंने इसे सच साबित कर दिया है।

शतरंज विवादों का भी रहा है खेल

बता दें कि FIDE शतरंज चैंपियनशिप का आयोजन कराता है। कभी चैंपियनशिप को लेकर विवाद भी हुए थे। एक समय ऐसा भी था, जब 2 खिलाड़ी खुद को विश्व चैंपियन बताते थे। हालाँकि 2006 से ये विवाद किसी तरह खत्म हुए हैं। ये वही दौर था, जब क्रामनिक खुद को क्लासिक चैंपियन बताते थे। फिडे की लड़ाई के समय वो खुद को क्लासिकल चैंपियन बताते थे, यूनिफिकेशन के बाद उन्हें साल 2007 में विश्वनाथन आंनद ने हराया। एक भारतीय से लगातार हार का बदला अब वो डी-गुकेश पर उंगली उठाकर ले रहे हैं।