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FIR करवाने की जगह ट्ववीट क्यों किया? मोहम्मद जुबैर से हाई कोर्ट का सीधा सवाल, कहा- पोस्ट से लग रहा अशांति पैदा करने की थी कोशिश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक एवं कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि यति नरसिंहानंद के भाषण को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के बजाय सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर क्यों पोस्ट किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जुबैर के ट्वीट देखकर लगता है कि वे अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल, जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। खंडपीठ ने पूछा कि मोहम्मद जुबैर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने के अपराध के लिए मामला क्यों दर्ज किया गया है। कोर्ट ने 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि यह व्यक्ति (यति नरसिंहानंद) अजीब व्यवहार कर रहा है तो क्या आप पुलिस के पास जाने के बजाय और भी अजीब व्यवहार करेंगे? क्या आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है? मैं आपके आचरण को देखूँगा। यदि आपको उसका (यति) भाषण, चेहरा पसंद नहीं है तो आपको उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।”

दरअसल, जुबैर ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताते हुए ट्वीट किया था। इसको लेकर जुबैर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नरसिंहानंद के समर्थकों द्वारा दायर मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा की माँग करते हुए मोहम्मद जुबैर ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई हुई।

दरअसल, यति नरसिंहानंद ने 29 सितंबर को एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी। जुबैर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें उसने इस भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताया था। इसके बाद यति नरसिंहानंद फाउंडेशन की महासचिव उदिता त्यागी ने जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

त्यागी ने डासना देवी मंडी में हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए जुबैर, अरशद मदनी और असदुद्दीन ओवैसी को दोषी ठहराते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। गाजियाबाद पुलिस ने इसके बाद जुबैर पर बीएनएस की धारा 196 (धार्मिक आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 228 (झूठे सबूत गढ़ना), 299 (धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 356 (3) (मानहानि) और 351 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए। इसके बाद बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध भी जोड़ा गया।

इसके बाद जुबैर ने एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से बचने की माँग की। अपनी याचिका में जुबैर ने कहा है कि उसने यति नरसिंहानंद की बार-बार की सांप्रदायिक टिप्पणियों और महिलाओं और वरिष्ठ राजनेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों को उजागर करने के लिए एक्स पर पोस्ट किया था।

घर में सब कुछ पर 5 महीने का बिजली बिल 0, सपा सांसद जिया उर्रहमान बर्क की मुश्किलें बढ़ी: संभल हिंसा की FIR रद्द करवाने हाई कोर्ट पहुँचे, कहा- गिरफ्तारी पर रोक लगे

यूपी के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर्रहमान बर्क इन दिनों दो अलग-अलग मामलों में कानूनी शिकंजे में घिर गए हैं। पहली मुश्किल संभल हिंसा से जुड़ी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, अब इस मामले में वो अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुँचे हैं और एफआईआर रद्द करने की माँग की है। तो दूसरी परेशानी उनके घर के बिजली कनेक्शन में कथित गड़बड़ी को लेकर है।

हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा मामले में जिया उर्रहमान बर्क ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अर्जी देकर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई है। अपनी याचिका में बर्क ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग की है। बर्क ने दलील दी कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो यह अपूरणीय क्षति साबित होगी।

बता दें कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में भड़की हिंसा के मामले में सांसद जिया उर्रहमान बर्क को पुलिस ने नामजद आरोपित बनाया है। हिंसा के दौरान पत्थरबाजी, तोड़फोड़, आगजनी और फायरिंग की घटनाएँ हुईं, जिनमें पाँच लोगों की मौत हो गई थी और सीओ समेत 19 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

पुलिस का आरोप है कि सपा सांसद और स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया। इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए सांसद बर्क ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया है।

बिजली चोरी मामले में भी हो सकती है कार्रवाई

हिंसा के आरोपों से घिरे सांसद अब बिजली चोरी के शक के दायरे में भी आ गए हैं। बिजली विभाग की जाँच में उनके आवास का पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगाया गया। जाँच में पाया गया कि पिछले पाँच महीनों का बिजली बिल शून्य था, जबकि उनके घर में एसी और कूलर जैसे कई बिजली उपकरण मौजूद हैं।

संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि अप्रैल से नवंबर तक सांसद के घर में बिजली खपत के आँकड़े असामान्य पाए गए। जुलाई से नवंबर तक एक भी यूनिट बिजली खर्च नहीं हुई, जबकि जून में केवल 13 यूनिट और अप्रैल में 35 यूनिट की खपत दर्ज की गई।

बहरहाल, बिजली विभाग ने मीटर की गड़बड़ी की जाँच शुरू कर दी है। अगर जाँच में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। वहीं, सपा सांसद जिया उर्रहमान बर्क ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बिजली का बिल नियमित रूप से जमा किया गया है और जाँच में पूरा सहयोग किया जाएगा। अगर कोई नोटिस मिलता है, तो वह कानून का सहारा लेंगे।

उनके पिता ममलुकु उर्रहमान बर्क ने भी बिजली चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मोहल्ले में हर घर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, और यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पुलिस शहर छोड़ दे, तो हालात और बेहतर हो सकते हैं।

फिलहाल दोनों ही मामलों की जाँच चल रही है। संभल हिंसा मामले में हाई कोर्ट में सांसद की याचिका पर सुनवाई होगी, जबकि बिजली विभाग की जाँच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज होगी या नहीं।

बांग्लादेश को हिंदुत्व पसंद नहीं, हम इसके खिलाफ: अंतरिम सरकार के एडवाइजर ने उगला जहर, शेख हसीना की पार्टी के 400+ नेताओं की अब तक हत्या

प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलट होने के बाद बांग्लादेश में उनकी पार्टी आवामी लीग के 400 से अधिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। बांग्लादेश सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी आवामी लीग का दावा है कि इस साल जुलाई से लेकर अभी तक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा इन हत्याओं को अंजाम दिया गया है। वहीं, हसीना के तख्ता पलट के चेहरा रहे छात्र नेता ने कहा कि बांग्लादेश की नई सरकार के भारत के हिंदुत्व के खिलाफ है।

आवामी लीग ने अपने पार्टी के ऐसे 394 नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की सूची जारी की है, जिनकी हत्या कर दी गई। पार्टी का कहना है कि यह शुरुआती सूची है और आने वाले समय में उन लोगों के नामों वाली ऐसी और सूची जारी की जाएँगी, जिनकी हत्या कर दी गई है। जानकारों के अनुसार, बांग्लादेश में अराजकता के बाद से आवामी लीग के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई।

हत्या जमात-ए-इस्लामी द्वारा बांग्लादेश में विपक्ष पर हमला करने के लिए अपनाई गई एक खास शैली है। जमात की छात्र शाखा छात्र शिबिर ऐसी हत्याओं के लिए पूरे मुल्क में कुख्यात है। इस साल 5 अगस्त को बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद आवामी लीग के लिए नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का बहुत ही व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया गया है। उसी दिन उनकी पार्टी के 29 नेताओं एवं उनके परिवार के लोगों की हत्या कर दी गई।

बांग्लादेश को भारत का हिंदुत्व पसंद नहीं

शेख हसीना सरकार के खिलाफ छात्रों के विद्रोह का प्रमुख चेहरा रहे 26 वर्षीय आसिफ महमूद का कहना है कि बांग्लादेश के लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं। मोहम्मद यूसुफ के नेतृत्व वाली सरकार में सलाहकार की भूमिका निभा रहे आसिफ महमूद ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि भारत के कई नेता बांग्लादेश के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।

महमूद ने कहा, “हमारे लोग भारत से नाराज हैं, क्योंकि भारत शेख हसीना की मदद कर रहा है। शेख हसीना वहाँ रहकर स्पीच दे रही हैं। अगर भारत उन्हें वापस भेजता है तो इससे बांग्लादेश के साथ उसके रिश्ते सुधरेंगे।” महमूद ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर होने वाले हमलों को राजनीतिक मसला बताया।

हिंदुत्व को लेकर आसिफ महमूद ने कहा, “BJP भारत में सरकार चला रही है। उसका हिंदू घोषणापत्र है, जिसके हम लोग खिलाफ हैं। बांग्लादेश के लोगों को हिंदुत्व पसंद नहीं है। साल 2019 में भारत में CAA-NRC एक्ट पास हुआ। हमने इसका विरोध किया। भारत से बड़ी संख्या में प्रवासी बांग्लादेश वापस आ सकते हैं। ये पॉलिसी मुस्लिमों के खिलाफ है। इससे हमें खतरा महसूस हो रहा है।”

बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों ‘बैन भाजपा’ के पोस्टर को लेकर आसिफ ने कहा, “हम उन लोगों के खिलाफ हैं, जो शेख हसीना सरकार के साथ थे। यही भारत के लिए नफरत की वजह है। इसीलिए बांग्लादेश के लोग इंडियन प्रोडक्ट बैन करने की माँग कर रहे हैं।” महमूद ने माना कि शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद आवामी लीग के 10 हजार लोगों को कैद किया गया है।

‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारा नहीं मानने और वहाँ की नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाने की तैयारी को लेकर महमूद ने कहा कि बांग्लादेश ने 1947, 1971 और 1990 में लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि देश का कोई एक राष्ट्रपिता नहीं हो सकता। आजादी की जंग में कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास मौलाना हामिद खान वसानी, हुसैन सुहरावर्दी और जोगेन मंडल जैसे कई संस्थापक पिता हैं।”


अंबेडकर पर कॉन्ग्रेसी ‘राजनीति’ की PM मोदी ने निकाली हवा, गिनाए पापः कहा- पंडित नेहरू ने दो-दो बार बाबा साहेब को चुनाव में हरवाया, विरासत मिटाने को चली गंदी चाल

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित ने कॉन्ग्रेस को ऐसा आईना दिखाया कि कॉन्ग्रेसी उनके भाषण का एक छोटा सा क्लिप काटकर सरकार और भाजपा को बदनाम करने लगे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस सोचती है कि झूठ बोलकर उसके कुकर्मों, खासतौर से डॉक्टर आंबेडकर के प्रति उनके अपमान को छुपाया जा सकता है, तो वे गलत सोच रही है।

पीएम मोदी ने X के अपने सोशल मीडिया पोस्ट में गाँधी परिवार और पंडित नेहरू पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने बार-बार देखा है कि कैसे एक वंश के नेतृत्व वाली एक पार्टी ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की विरासत को मिटाने और एससी/एसटी समुदायों को अपमानित करने के लिए हरसंभव गंदी चाल चली है। उन्होंने कहा कि उनके पास कॉन्ग्रेस के पापों की सूची है।

उस सूची को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “डॉक्टर अंबेडकर के प्रति कॉन्ग्रेस के पापों की सूची में ये शामिल हैं: उन्हें (अंबेडकर को) एक बार नहीं बल्कि दो बार चुनाव में हराना। पंडित नेहरू द्वारा उनके खिलाफ प्रचार करना और उनकी हार को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाना। उन्हें भारत रत्न देने से इनकार करना। संसद के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र को सम्मान का स्थान नहीं देना।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन वे इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि एससी/एसटी समुदायों के खिलाफ सबसे भयानक नरसंहार उनके शासन में ही हुए हैं। कॉन्ग्रेस सालों तक सत्ता में रही, लेकिन एससी और एसटी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया।

पीएम मोदी ने कहा, “संसद में गृह मंत्री अमित शाह जी ने डॉक्टर अंबेडकर का अपमान करने और एससी/एसटी समुदायों की अनदेखी करने के कॉन्ग्रेस के काले इतिहास को उजागर किया। उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से वे स्पष्ट रूप से स्तब्ध और स्तब्ध हैं। यही कारण है कि वे अब नाटकबाजी में लिप्त हैं! दुख की बात है कि उनके लिए, लोग सच्चाई जानते हैं!”

पीएम मोदी ने कहा, हम जो कुछ भी हैं, “हम जो कुछ भी हैं, वह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की वजह से ही है! हमारी सरकार ने पिछले एक दशक में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के सपने को पूरा करने के लिए अथक प्रयास किया है। किसी भी क्षेत्र को लें – चाहे वह 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकालना हो, एससी/एसटी एक्ट को मजबूत करना हो, हमारी सरकार के प्रमुख कार्यक्रम जैसे स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और बहुत कुछ, इनमें से प्रत्येक ने गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के जीवन को छुआ है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारी सरकार ने डॉ. अंबेडकर से जुड़े पाँच प्रतिष्ठित स्थानों- पंचतीर्थ को विकसित करने के लिए काम किया है। कई दशकों से चैत्य भूमि के लिए भूमि का मुद्दा लंबित था। हमारी सरकार ने न केवल इस मुद्दे को सुलझाया, बल्कि मैं वहाँ प्रार्थना करने भी गया हूँ।हमने दिल्ली में 26, अलीपुर रोड को भी विकसित किया है, जहाँ डॉक्टर अंबेडकर ने अपने अंतिम वर्ष बिताए थे। लंदन में जिस घर में वे रहते थे, उसे भी सरकार ने अधिग्रहित कर लिया है। जब डॉ. अंबेडकर की बात आती है तो हमारा सम्मान और श्रद्धा सर्वोच्च है।”

बता दें कि देश की संसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के क्लिप के एक हिस्से को काटकर कॉन्ग्रेसी और विरोधी दल सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस ऐसा कर रही है। अपनी चिढ़ ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं द्वारा दरबारी पत्रकारों ने अमित शाह के भाषण के हिस्से को शेयर करके सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया।

कॉन्ग्रेस ने X अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “‘अभी एक फैशन हो गया है- अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर.. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’ अमित शाह ने बेहद घृणित बात की है। इस बात से जाहिर होता है कि BJP और RSS के नेताओं के मन में बाबा साहेब अंबेडकर जी को लेकर बहुत नफरत है। नफरत ऐसी कि उनके नाम तक से इनको चिढ़ है।”

कॉन्ग्रेस ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “ये वही लोग हैं जिनके पूर्वज बाबा साहेब के पुतले फूँकते थे, जो ख़ुद बाबा साहेब के दिए संविधान को बदलने की बात करते थे। जब जनता ने इन्हें सबक सिखाया तो अब इन्हें बाबा साहेब का नाम लेने वालों से चिढ़ हो गई है। शर्मनाक! अमित शाह को इसके लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।”

अमित शाह के भाषण के जिस हिस्से को विरोधियों द्वारा साझा किया जा रहा है, वह सही, लेकिन उसका संदर्भ क्या है उसे विरोधी छिपा गए। इससे अमित शाह का बयान एकतरफा दिखने लगा, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। अमित शाह ने अंबेडकर के साथ कॉन्ग्रेस के नेताओं के दुर्व्यवहार को उन्होंने उजागर किया था।

अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था, “अभी यह फैशन चल गया है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर……. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों का स्वर्ग मिल जाता। हमें आनंद है कि ये अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है ये मैं बताता हूँ।” इसके बाद अमित शाह कॉन्ग्रेस और पंडित नेहरू की पोल खोलकर रख देते हैं।

अमित शाह ने आगे कहा था, “अंबेडकर जी ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया? अंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के साथ हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूँ। सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूँ और आर्टिकल 370 से मैं असहमत हूँ। इसलिए वे छोड़ना चाहते थे। उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ और नजरअंदाज किए जाने के कारण इस्तीफा दे दिया।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा था, “श्री बीसी रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे लोग मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा। तो उनको नेहरू जी ने जवाब में लिखा- राजाजी के जाने से थोड़ा-बहुत नुकसान तो होगा, लेकिन अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होगा।” अमित शाह ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस जिसका विरोध करती रही है, उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है। अंबेडकर जी मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं, इसलिए आप अंबेडकर अंबेडकर कर रहे हो।”

मणिपुर में कुकी आतंकी इस्तेमाल कर रहे SpaceX का स्टारलिंक? हाई स्पीड इंरनेट डिवाइस मिलने से उठे सवाल, मस्क बोले- भारत में उनकी कंपनी की सेवा नहीं

हिंसाग्रस्त मणिपुर में सुरक्षा बलों ने कुकी विद्रोहियों वाले इम्फाल पूर्वी जिले से स्टारलिंक इंटरनेट डिवाइस, स्नाइपर राइफल, पिस्तौल, ग्रेनेड और अन्य हथियार बरामद किए हैं। अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक दुनिया की पहली सैटेलाइट है जो लाइसेंस मिलने के बाद दुनिया में कहीं भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करती है।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 13 दिसंबर को चुराचाँदपुर, चंदेल, इम्फाल पूर्व और कांगपोकपी सहित कई जिलों में एक अभियान चलाया गया था। इसी दौरान यह बरामदगी की गई है। भारत में विद्रोहियों द्वारा स्टारलिंक के उपयोग को लेकर एक सवाल के जवाब में मस्क ने कहा कि ये आरोप ‘झूठे’ हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत में स्टारलिंक उपग्रह बीम बंद’ हैं।

इम्फाल पूर्वी जिले के केराओ खुनौ में सुरक्षा बलों को एक स्टारलिंक राउटर और एंटीना जब्त मिला। यह सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF)/पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा इस्तेमाल किए जा रहा था। एक 20-मीटर FTP केबल, एक सैटेलाइट राउटर और एक सैटेलाइट इंटरनेट एंटीना बरामद किया गया। इससे जाहिर है कि कुकी विद्रोहियों को कहीं बाहर से सहायता मिल रही है।

बता दें कि म्यांमार पहले से ही इस तरह के उपकरणों का उपयोग करता आ रहा है। सिग्नल इंटेलिजेंस के अनुसार, म्यांमार में ऐसे कई ठिकाने हैं जहाँ दुनिया भर के लोगों को ठगने के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराधियों द्वारा स्टारलिंक सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग किया जाता है। स्टारलिंक इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे भारत के पड़ोसी देशों में काम कर रहा है।

यह पहली बार नहीं है कि भारतीय क्षेत्र में स्टारलिंक उपकरण पाए गए थे। नवंबर में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास भारतीय जलक्षेत्र में म्यांमार के एक जहाज को जब्त किया गया था। यह जहाज 6 टन से अधिक मेथ की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। इनके पास से अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों के अलावा, सुरक्षा बलों को ड्रग तस्करों के पास से उन्नत जीपीएस उपकरणों के साथ एक स्पेसएक्स स्टारलिंक डिवाइस भी मिली थी।

भारतीय सेना और असम राइफल्स की संयुक्त कार्रवाई में एक एके-47 राइफल, एक स्नाइपर राइफल, एक म्यांमार निर्मित 0.22 पिस्तौल, म्यांमार निर्मित पाँच 9 मिमी पिस्तौल, म्यांमार निर्मित एक 7.65 मिमी पिस्तौल, एक .303 बोल्ट-एक्शन राइफल, दो .303 सिंगल-बोल्ट स्नाइपर राइफल, एक 9 मिमी कार्बाइन मशीन गन (सीएमजी), पाँच फैक्टरी निर्मित 12 मिमी सिंगल बैरल राइफल, एक .22 राइफल, एक 12 मिमी शॉटगन, तीन स्थानीय रूप से निर्मित मोर्टार, एक सिंगल बैरल बंदूक, एक 5.56 मिमी एमए 4 असॉल्ट राइफल, एक एमए-1 (एमके-आई) असॉल्ट राइफल, एक एयर गन, ग्रेनेड और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया।

दरअसल, सुरक्षा बल 56 वर्षीय मैतेई शख्स लैशराम कमलबाबू सिंह की तलाश कर रहे थे। वे 25 नवंबर से कांगपोकपी जिले से लापता हो गए थे। सेना और असम राइफल्स के कम से कम 2,000 जवानों ने उनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी की। सेना ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में ट्रैकर कुत्तों, ड्रोन और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान यह जखीरा मिला।

मुस्लिम बढ़ते गए तो भगवान की मूर्तियों के साथ पलायन को मजबूर हुए हिंदू, मुजफ्फरनगर में खंडहर बना शिव मंदिरः संभल में मिला एक और प्राचीन कुआँ

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में एक शिव मंदिर मिला है। ये शिव मंदिर 1970 में बना था, लेकिन कभी हिंदू बाहुल्य रहे इस इलाके में मुस्लिमों की संख्या बढ़ती गई और हिंदुओं को पलायन करना पड़ा और मंदिर पूरी तरह से खहंडर बन गया। अब फिर से इस शिव मंदिर पर प्रशासन की नजर पड़ी है। वहीं, संभल में एक और प्राचीन कुआँ मिला है, जिसकी खुदाई शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि ये कुआँ भी पौराणिक महत्व का है।

मुजफ्फरनगर में शिव मंदिर की दुर्दशा, हिंदुओं ने किया था पलायन

मुजफ्फरनगर जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र में मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले में 54 साल पहले एक शिव मंदिर की स्थापना हुई थी। उस समय यह क्षेत्र हिंदू बाहुल्य था, लेकिन बाद में जब 90 के दशक में अयोध्या राम मंदिर का आंदोलन तेज होने के बाद यहाँ की परिस्थितियाँ बदल गईं। दंगों और बढ़ती मुस्लिम आबादी के चलते हिंदू समाज के लोग इस इलाके से पलायन कर गए। इसके साथ ही, इस मंदिर से भगवान शिव की मूर्ति और अन्य धार्मिक प्रतीक भी हटा लिए गए। अब यह मंदिर खंडहर बन चुका है।

इस शिव मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए इलाके से पलायन कर चुके परिवार के सदस्य भाजपा नेता सुधीर खटीक ने कहा कि 1970 में मंदिर की स्थापना हुई थी। यहाँ नियमित पूजा-अर्चना होती थी, लेकिन 1990 के बाद जब मुस्लिम आबादी बढ़ी, तो हालात बदलने लगे। मोहल्ले में मीट की दुकानें खुलने लगीं और सांप्रदायिक माहौल बिगड़ गया। ऐसे में हिंदू परिवारों ने मंदिर की मूर्तियाँ हटा दीं और दूसरी जगह स्थापित कर लीं।

आज मंदिर पर आसपास के लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। किसी ने छज्जे बढ़ा लिए, तो किसी ने पार्किंग बना ली। सुधीर खटीक का कहना है कि सरकार को इस मंदिर की पुनर्स्थापना करनी चाहिए। उनका मानना है कि धर्म और संस्कृति की सुरक्षा ही राष्ट्र की सुरक्षा का आधार है।

संभल में प्राचीन कुओं की खोज जारी, एक और कुआँ मिला

संभल जिले में हाल ही में एक और प्राचीन कुआँ मिला है। जामा मस्जिद के पास मोहल्ला टंकी में मिले इस कुएँ के साथ ही अब तक संभल जिले में आधा दर्जन से अधिक प्राचीन कुओं की खुदाई हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका प्राचीन जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने और उनके सौंदर्यीकरण पर काम कर रहे हैं।

संभल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण तिवारी ने बताया कि ये कुएँ जल संरक्षण और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अब तक 10 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। उनका कहना है कि इन जल स्त्रोतों को रिचार्ज करने और धार्मिक कार्यक्रमों के पुनः आयोजन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

शहर की ऐतिहासिक पहचान के अनुसार, संभल में 52 सराय, 68 तीर्थ, और 19 कूप (कुएँ) हुआ करते थे। इनकी खोज और पुनर्स्थापना से क्षेत्र की धरोहर को नया जीवन मिलेगा। यह पहल ‘कैच द रेन’ और जल संरक्षण अभियानों के तहत चल रही है।

मुजफ्फरनगर के शिव मंदिर और संभल के प्राचीन कुओं की कहानी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की दुर्दशा को सामने लाती है।

बच्चों के सूसू-पॉटी वाले डायपर, पैगंबर मुहम्मद का नाम और वायरल वीडियो: बिल्ली का कार्टून और अरबी में पैगंबर पर पहले भी बवाल – जानिए क्या है पूरा मामला

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि डायपर बनाने वाली एक कंपनी के डायपर पर मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद का नाम लिखा हुआ है। वीडियो को वायरल करते हुए डायपर बनाने वाली कंपनी पेंपर्स को बॉयकाट करने की बात भी कही जा रही है। यह वीडियो फेसबुक, इंस्टग्राम से लेकर यूट्यूब तक पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि पेंपर्स के डायपर के अंदर मुहम्मद का नाम लिखा हुआ है। इस वीडियो को शेयर करते हुए इरा अरमान मलिक नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “वायरल वीडियो भोपाल का बताया जा रहा है, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति ने डायपर बनाने वाली कंपनी का डायपर खोला और उस पर प्यारे ‘मुहम्मद साहब’ का नाम लिखा हुआ पाया। उसकी पहचान का पता लगाया जा रहा है।सभी मुस्लिम दुकानदार भाइयों को इस कंपनी के उत्पाद बेचना बंद कर देना चाहिए। अपने शहर में इस कंपनी के वितरक से शिकायत करें।”

इनफॉर्म्ड डॉट इन नाम के इंस्टा हैंडल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भोपाल से वायरल हुए एक वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया है कि उसे एक खास कंपनी द्वारा बनाए गए डायपर के अंदर ‘मुहम्मद साहब’ लिखा हुआ मिला है। अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं। इस बीच, वॉलमार्ट की भगवान गणेश की तस्वीरों वाले अंडरगारमेंट बेचने के लिए आलोचना की गई है। ये घटनाएँ बताती हैं कि कैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं के साथ खेल रही हैं, जो सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक है।”

इस वीडियो को इंस्टाग्राम की तरह फेसबुक पर भी वायरल किया जा रहा है।

मौलाना सलीम अशरफ कासमी नाम के एक फेसबुक हैंडल ने वीडियो को शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “लेडीज ग्रुप में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। कंपनी के डायपर का हर हिंदुस्तानी मुसलमान बहिष्कार करे और इस कंपनी के खिलाफ हर जिले में मुक़दमा दर्ज करें नबी की तौहीन का।”

वहीं, न्यूज नाऊ नाम के यूट्यूब चैनल ने लगभग दो महीना पहले इसे शेयर किया था। उसने लिखा, “पैंपर्स ने मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की।”

साल 2018 में भी हुआ था वायरल

इसी तरह का वीडियो साल 2018 में भी वायरल हुआ था। उस समय इससे जुड़ी खबरें मीडिया में भी सामने आई थीं। उस साल फरवरी में हैदराबाद के कुछ मुस्लिमों ने बेबी डायपर ब्रांड पैम्पर्स पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि मुस्लिमों के पैंगम्बर मोहम्मद का इसमें अपमान किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डायपर पर बिल्ली की नाक, मुँह, मूँछ और बाईं आँख की छवि अरबी में पैगम्बर मोहम्मद की वर्तनी की तरह है।

इस घटना के बाद कई जगहों पर पैंपर्स के डायपर जलाकर विरोध प्रदर्शन किए गए थे। उस दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति ने कहा था कि उसने बाजार से डायपर लाकर उसकी जाँच की तो यह बात सही पाई गई। बाद में कुछ लोग पैम्पर्स के कुछ पैकेट जमीन पर रखकर उन्हें आग लगाते नजर आए। जब डायपर जल रहे होते हैं तो एक व्यक्ति ‘मूसा, मूसा, जाकिर मूसा’ का नारा लगाता हुआ सुनाई दे रहा था।

तब मुस्लिम प्रोपेगेंडा वेबसाइट मिल्ली गजट ने क्लिप शेयर करते हुए लिखा था, “पैम्पर्स को एक फतवे का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक मुस्लिम समूह ने दावा किया है कि उन्होंने नैपी ब्रांड के कार्टून बिल्ली शुभंकर की मूंछों में “मोहम्मद” शब्द देखा है।”

उस साल ‘सच न्यूज’ नाम के एक यूट्यूब चैनल ने भी इस खबर को साझा किया था।

इसको लेकर हैदराबाद के दबीरपुरा पुलिस स्टेशन में कई मुस्लिमों ने शिकायत भी दर्ज कराई थी। दरसगाह जिहाद-ओ-शहादत (डीजेएस) ने दावा किया था कि डायपर पर बनी बिल्ली की कार्टून उर्दू और अरबी में ‘मोहम्मद’ के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द से मिलती जुलती है।

उन्होंने 20 फरवरी 2018 में दबीरपुरा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया था, “नंगी आंखों से भी पहचाना जा सकता है कि इस पर पैगंबर का नाम उर्दू/अरबी में लिखा हुआ है।” शिकायत में पैंपर्स बनाने वाली कंपनी पर मुस्लिमों की भावनाओं को जानबूझकर आहत करने का आरोप लगाया था।

हालाँकि, 6 साल बाद इसी तरह का एक वीडियो क्यों वायरल हो रहा है, इसके पीछे की वजह सामने नहीं आई है। इसको लेकर ना ही किसी तरह न्यूज सामने आई है और ना ही इससे संबंधित किसी तरह की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद अक्टूबर 2024 से ही इस कंपनी के डायपर के विरोध में वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।

₹20 करोड़ की संपत्ति, बेटी को नमाज पढ़ते देख हिंदू बाप को हुआ ब्रेन हेमरेज… फराज अतर के बार-बार रेप, इस्लामी ट्यूशन और धर्मांतरण से तंग आकर बेटी भी आग लगा कर मरी

गाजियाबाद में बीते 11 दिसंबर को आत्मदाह करने वाली एक युवती के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। युवती के पिता ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया है कि दिल्ली के शाहदरा निवासी फराज अतर ने उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसाकर बार-बार दुष्कर्म किया और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। फराज द्वारा शादी के नाम पर रखी गई शर्त और धोखे से आहत होकर उनकी बेटी ने खुद को आग लगाकर जान दे दी।

करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए रचा पूरा खेल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कविनगर थानाक्षेत्र के निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने समय में एक सफल कारोबारी थे और उनकी करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति उनकी 30 वर्षीय बेटी के नाम थी। बुजुर्ग के अनुसार, फराज ने संपत्ति पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसाया। उसने खुद को अविवाहित बताते हुए शादी का झांसा दिया और बेटी का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण किया।

बुजुर्ग ने बताया कि फराज ने कर्ज में डूबा होने की बात कहकर उनकी बेटी से लाखों रुपये ऐंठ लिए। कुछ समय बाद युवती का व्यवहार बदलने लगा। 14 नवंबर को जब बुजुर्ग अपनी बेटी के कमरे में गए, तो उन्होंने उसे इस्लाम मजहब से संबंधित गतिविधियाँ (नमाज पढ़ते हुए) करते हुए देखा। यह देखकर बुजुर्ग को गहरा आघात पहुँचा और उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। इसके बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

आईसीयू में ‘शादी का प्रस्ताव’

शिकायत में बुजुर्ग ने यह भी बताया कि 15 नवंबर को जब वह आईसीयू में भर्ती थे, तब फराज अतर उनकी बेटी के साथ अस्पताल पहुँचा। उसने उनके सामने बेटी का हाथ माँगते हुए शादी का प्रस्ताव रखा। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि फराज ने उनकी गंभीर स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें शादी के लिए हाँ करने पर मजबूर कर दिया।

इतना ही नहीं, फराज ने भाई कासिफ के कहने पर उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर कराए, जिसमें लिखा था कि बेटी की दूसरे धर्म के युवक से शादी पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। फराज ने भाई को सुप्रीम कोर्ट का वकील बताकर अपनी बात मनवाई और बुजुर्ग को बेटी की कसम देकर यह निर्देश दिया कि वह किसी अन्य परिजन को इस बारे में न बताएँ।

मतांतरण के लिए ‘ट्यूशन’ लगवाया

बुजुर्ग के अनुसार, उनकी बेटी ने उन्हें बताया था कि फराज ने न सिर्फ उसकी संपत्ति हथियाने की कोशिश की बल्कि उसका धर्म परिवर्तन कराने के लिए भी दबाव बनाया। उसने युवती को दूसरे धर्म के रीति-रिवाज और धार्मिक किताबें पढ़ने के लिए मजबूर किया। फराज ने एक विशेष ट्यूशन लगवाकर युवती को धर्मांतरण की प्रक्रिया से गुजरने को बाध्य किया।

पीड़ित पिता ने यह भी आरोप लगाया कि फराज ने उनकी बेटी को नशे की लत लगा दी। मंकी डस्ट जैसे घातक नशे का इस्तेमाल कर वह उसे बेसुध करता और फिर दुष्कर्म करता।

संपत्ति के नाम पर शादी की शर्त

24 नवंबर को फराज ने युवती और उसके पिता को कौशांबी के एक होटल में बुलाया और अपने परिवार के सदस्यों से मिलवाया। होटल का पूरा खर्च युवती से ही दिलवाया गया। इस मुलाकात के बाद युवती ने शादी के दस्तावेज तैयार करवाए, लेकिन फराज ने शादी की तारीख टालने का बहाना बनाना शुरू कर दिया।

10 दिसंबर को युवती ने अपने पिता को बताया कि फराज ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जब तक संपत्ति उसके नाम नहीं होती, वह शादी नहीं करेगा। इस बात से आहत युवती ने 11 दिसंबर को अपने चंद्रपुरी स्थित घर में खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली।

डीसीपी सिटी राजेश कुमार के अनुसार, “शाहदरा निवासी फराज अतर, उसके भाई कासिफ, माँ माहे तलत, बहन सना समेत अन्य के खिलाफ दुष्कर्म, धर्मांतरण, आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।”

बुजुर्ग पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की माँग की है। उनका कहना है कि फराज और उसके परिवार ने उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी और अंत में उसे अपनी जान गँवाने के लिए मजबूर कर दिया।

‘अमित शाह को अंबेडकर से नफरत, संसद में की घृणित बात’: ‘खतना’ वीडियो वायरल कर रहे कॉन्ग्रेसी नेता और दलाल पत्रकार: नेहरू ने बाबा साहेब को किया था जलील, यह है वीडियो की सच्चाई

देश की संसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के क्लिप के एक हिस्से को काटकर कॉन्ग्रेसी और विरोधी दल सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस ऐसा कर रही है। जब-जब कॉन्ग्रेस मुद्दाविहीन होती है तो इसी तरह के फेक न्यूज फैलाकर सरकार को बदनाम करने का प्रयास करती है। ये काम सिर्फ कॉन्ग्रेसी या विपक्षी नेता ही नहीं, बल्कि कुछ दरबारी पत्रकार भी बखूबी करते हैं।

दरअसल, राज्यसभा में संविधान पर बहस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार (17 दिसंबर 2024) को डॉक्टर भीरामराव अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लिया था। अपने लगभग 90 मिनट के स्पीच में अमित शाह ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं को अंबेडकर के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं कॉन्ग्रेस द्वारा की गई हरकतों को देश के सामने रखा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस चिढ़ गई।

अपनी चिढ़ ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं द्वारा दरबारी पत्रकारों ने अमित शाह के भाषण के हिस्से को शेयर करके सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस ने X अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “‘अभी एक फैशन हो गया है- अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर.. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’ अमित शाह ने बेहद घृणित बात की है।”

कॉन्ग्रेस ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “इस बात से जाहिर होता है कि BJP और RSS के नेताओं के मन में बाबा साहेब अंबेडकर जी को लेकर बहुत नफरत है। नफरत ऐसी कि उनके नाम तक से इनको चिढ़ है। ये वही लोग हैं जिनके पूर्वज बाबा साहेब के पुतले फूँकते थे, जो ख़ुद बाबा साहेब के दिए संविधान को बदलने की बात करते थे। जब जनता ने इन्हें सबक सिखाया तो अब इन्हें बाबा साहेब का नाम लेने वालों से चिढ़ हो गई है। शर्मनाक! अमित शाह को इसके लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।”

यही बात कॉन्ग्रेस के नेता जयराम और सुप्रिया श्रीनेत सहित तमाम नेताओं ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर की है। इन नेता ने सिर्फ अमित शाह को ही नहीं, बल्कि बाबा साहेब के नाम पर भाजपा और RSS को भी बदनाम करने की कोशिश की है। रणविजय सिंह, ममता त्रिपाठी आदि कई कथित पत्रकारों ने भी अमित शाह के भाषण के आधे-अधूरे क्लिप को वायरल किया।

डॉक्टर लक्ष्मण यादव नाम के एक कथित बुद्धिजीवी ने इस अधूरे क्लिप को वायरल करते हुए लिखा, “अमित शाह को अगर गोडसे, गोलवलकर, सावरकर से फुरसत मिल गई होती और अंबेडकर को पढ़ लिए होते, अंबेडकर को जान लिए होते, अम्बेडकर की भारतीय समाज में मौजूदगी और अहमियत देख लिए होते, तो शायद ऐसा कभी न बोलते।”

उन्होंने आगे लिखा, “डॉ. अंबेडकर ने करोड़ों वंचितों, शोषितों, मजलूमों, महिलाओं को उस जगह से निकाला है, जो नरक से बदतर जीवन जीने को मजबूर थे. उनके लिए स्वर्ग और स्वर दोनों दिया है बाबा साहब ने।”

दरअसल, ये सारा फेक न्यूज एक षडयंत्र के तहत वायरल किया जा रहा है, ताकि अमित शाह, भाजपा और संघ को दलित-वंचित विरोधी साबित किया जा सके। वहीं, कॉन्ग्रेस के नेता अपने पूर्वजों की करतूतों को छिपाने और वर्तमान परिस्थितियों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए अब फेक न्यूज जैसे गैर-कानूनी काम करने लगे हैं।

अमित शाह के भाषण के जिस हिस्से को विरोधियों द्वारा साझा किया जा रहा है, वह सही, लेकिन उसका संदर्भ क्या है उसे विरोधी छिपा गए। इससे अमित शाह का बयान एकतरफा दिखने लगा, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। अमित शाह ने अंबेडकर के साथ कॉन्ग्रेस के नेताओं के दुर्व्यवहार को उन्होंने उजागर किया था।

अमित शाह ने अपने भाषण में कहा, “अभी यह फैशन चल गया है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर……. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों का स्वर्ग मिल जाता। हमें आनंद है कि ये अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है ये मैं बताता हूँ।” इसके बाद अमित शाह कॉन्ग्रेस और पंडित नेहरू की पोल खोलकर रख देते हैं।

अमित शाह ने आगे कहा, “अंबेडकर जी ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया? अंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के साथ हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूँ। सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूँ और आर्टिकल 370 से मैं असहमत हूँ। इसलिए वे छोड़ना चाहते थे। उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ और नजरअंदाज किए जाने के कारण इस्तीफा दे दिया।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे बताया, “श्री बीसी रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे लोग मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा। तो उनको नेहरू जी ने जवाब में लिखा- राजाजी के जाने से थोड़ा-बहुत नुकसान तो होगा, लेकिन अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होगा।” अमित शाह ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस जिसका विरोध करती रही है, उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है। अंबेडकर जी मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं, इसलिए आप अंबेडकर अंबेडकर कर रहे हो।”

इस तरह, केंद्रीय मंत्री अमित शाह के पूरे भाषण को सुना जाए तो वो साफ तौर पर बता रहे हैं कि जिस अंबेडकर का नाम अब कॉन्ग्रेस जप रही है, उन्हीं अंबेडकर को उसने कितना जलील किया है। हालाँकि, अपने राजनीतिक फायदे के लिए कन्ग्रेस, उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत और उनके दरबारी पत्रकार आधे-अधूरे क्लिप को चलाकर फेक न्यूज फैला रहे हैं।

जिसने मार डाला 58 भारतीय लोगों को… उस आंतकी के जनाजे में शामिल मुस्लिम भीड़ के साथ कई विधायक-नेता-एक्टर: अनहोनी से बचने के लिए तैनात रहे 2000+ पुलिसकर्मी

साल 1998 में कोयंबटूर में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इन धमाकों में 58 लोगों की जान चली गई थी, तो 231 लोग घायल हो गए थे। इन धमाकों के पीछे अल-उम्मा नाम के कट्टरपंथी संगठन का नाम आया था, जिसे बैन कर दिया गया। इसी संगठन का मुखिया था एस ए बाशा, जो उन सीरियल ब्लास्ट के मुख्य कर्ता-धर्ताओं में से एक था। उसे उम्रकैद की सजा मिली थी। एसए बाशा दुर्दांत आतंकियों में था, जिसने 2003 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जान से मारने की धमकी थी। एसए बाशा की सोमनार (16 दिसंबर 2024) को अस्पताल में मौत हो गई थी, और अगले दिन (17 दिसंबर 2024) उसे दफनाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एस ए बाशा नाम के आतंकी को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग पहुँचे। उसे किसी ‘हीरो’ की तरह विदाई दी गई, जबकि उसने तमिलनाडु को कई बार आतंकी हमलों का दर्द दिया। उसकी आखिरी विदाई के लिए पूरे कोयंबटूर में 2000 पुलिसवालों और 200 आरएएफ जवानों की तैनाती की गई। इतनी भारी सुरक्षा में उसका विदाई जुलूस निकाला गया और किसी ‘शहीद’ जैसी विदाई दी गई।

आतंकी एसए बाशा की अंतिम यात्रा पर वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “कोयंबटूर, तमिलनाडु में इस्लामी आतंकी एस.ए. बाशा की शवयात्रा निकाली जा रही है। ये वही आतंकी है जो 1998 कोयंबटूर धमाकों का मास्टरमाइंड था, जिसमें 58 भारतीयों की जान गई थी। ये पाकिस्तान या बांग्लादेश में नहीं, बल्कि भारत में हो रहा है। न कोई ‘शांतिप्रिय’ इसे लेकर आवाज उठा रहा है, न ‘धर्मनिरपेक्षता’ का झंडा लहराने वाले कुछ कह रहे हैं। ‘संवैधानिकता’ के ठेकेदार तो संविधान के नाम पर अपनी राजनीति में व्यस्त हैं!”

हैरानी की बात नहीं है कि इस्लामिक कट्टरपंथी धड़ों, राजनीतिक पार्टियों के नेता उसकी अंतिम यात्रा में पहुँचे। यही नहीं, खुद को तमिलियन नेशनल कहने वाली पार्टी के सबसे बड़े नेता सीमान ने तो यहाँ तक कह दिया कि डीएमके सरकार को एसए बाशा को पहले ही रिहा कर देना था, जोकि डीएमके सरकार के हाथ में था। ऐसा न करने के लिए डीएमके सरकार की आलोचना भी की गई।

हालाँकि बाशा को पैरोल देकर अस्पताल में रखने वाले इन्हीं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि जब मुख्यमंत्री थे, तब बाशा के साथी आतंकवादी को जेल में मालिक तक की सुविधा दी जाती थी। आईए, अब बताते हैं कि कौन से बड़े नेता इस आतंकवादी की आखिरी यात्रा में पहुँचे, जो उसके दक्षिण उक्कड़म स्थित रोज गार्डन वाले घर से शुरू होकर फ्लावर मार्केट स्थित हैदर अली टीपू सुल्तान सुन्नथ जमात मस्जिद तक गई।

1- एनटीके नेता सीमान- सीमान तमिल एक्टर हैं और नाम तमिलार काची नाम की राजनीतिक पार्टी चलाते हैं। वो तमिल पहचान, भाषा, स्वायत्तता की बात करते हैं। तमिल ईलम जैसे बैन आउटफिट के समर्थक भी हैं। उन्होंने डीएमके सरकार को ये कहते हुए बयान दिया है कि आतंकवादी एसए बाशा को पहले ही डीएमके सरकार जेल से निकाल सकती थी।

2- कोंगु इलैगनार पेरावई पार्टी के अध्यक्ष यू थानियारसु। इनकी पार्टी तमिलनाडु के अंदर भी क्षेत्रीय पार्टी है और AIADMK-DMK के बीच झूलती रहती है। थानियारसु AIADMK के टिकट पर 2 बार विधायक भी रहे हैं।

3- वीसीके के उप महासचिव वन्नी अरासु: VCK यानी विदुथलाई चिरुथैगल काची, इस पार्टी को दलित पैंथर्स पार्टी या दलित पैंथर्स इयक्कम यानी आंदोलन भी कहा जाता है। कहने को ये पार्टी दलित और तमिल राष्ट्रवाद की बात कहती है, लेकिन पार्टी के उप महासचिव वन्नी अरासु आतंकवादी को अंतिम विदाई देने पहुँचे।

4- मणिथानेया मक्कल काची के महासचिव और मन्नापरई विधायक पी अब्दुल समद: स्थानीय विधायक पी अब्दुल समद, एसए बाशा का करीबी रहा है। अल-उम्मा के बैन होने के बाद इसके जुड़े सदस्यों ने कट्टरपंथी संगठन की जगह एमकेके पहले टीएनएमएमके और फिर नाम से इस्लामी पार्टी बनाई। ये पार्टी AIADMK के बाद DMK के साथ गठबंधन में है और इस पार्टी के 2 विधायक हैं।

इस पार्टी का अध्यक्ष एम एच जवाहिरुद्दीन है। जवाहरुद्दीन सिमी का सदस्य भी रहा है और एसए बाशा का बेहद करीबी भी। वो राज्य में 25 से ज्यादा इस्लामिक ट्रस्ट, सोसायटी चलाता है और मजहबी दान के नाम पर एंबुलेस सेवा भी देता है।

इन नेताओं के अलावा कई छोटे-बड़े छुटभैय्ये नेता भी एसए बाशा जैसे दोषी पाए गए और उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकवादी को आखिरी विदाई देने पहुँचे। खास बात ये है कि तमिलनाडु में इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ाने वालों में से एक रहे बाशा की आखिरी यात्रा निकालने की योजना का बीजेपी ने विरोध किया था, लेकिन डीएमके सरकार ने आतंकवादी की न सिर्फ शान से विदाई यात्रा निकाली, बल्कि ‘हीरो’ की तरह विदाई देने जनाजे में उमड़ी भीड़ को मैनेज करने के लिए 2000-2200 जवानों की सेवाएँ भी उपलब्ध कराई।