Home Blog Page 538

बिजली की तारें, जमाल संस का बोर्ड, अवैध निर्माण… अब वाराणसी के मुस्लिम बहुल इलाके में मिला 40 साल से बंद मंदिर, भीतर मलबा और मिट्टी: हिंदू संगठन ने CM योगी को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के संभल के बाद अब वाराणसी के मदनपुरा इलाके में 40 साल से बंद पड़ा एक मंदिर सामने आया है, जिसे फिर से खोलने की माँग उठ रही है। इस मंदिर की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली, जिसके बाद सनातन रक्षक दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और मंदिर को खुलवाने की कवायद तेज हो गई। बताया जा रहा है कि यह मंदिर करीब 150-250 साल पुराना है और इसके अंदर मलबा भरा हुआ है। इस मंदिर के बारे में स्कंद पुराण के काशीखंड में जिक्र है, साथ ही सिद्धतीर्थ कूप का भी जिक्र है, जो इस मंदिर के पास है।

कैसे सामने आया मंदिर का मामला

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी सामने आई कि वाराणसी के मुस्लिम बहुल इलाके मदनपुरा में एक बंद मंदिर है। सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा को जब इस बारे में पता चला तो वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुँचे।

मंदिर को देखने पर पाया गया कि इसमें मलबा और मिट्टी भरी हुई है और लंबे समय से पूजा-अर्चना बंद है। इस मंदिर के अंदर मलबे में देव-विग्रह भी दबे हो सकते हैं। इस मंदिर के आसपास भयंकर तरीके से अतिक्रमण हुआ है। बिजली के तार लटके हैं। घरों के छज्जे मंदिर की दीवार से सटे हुए हैं। ये मंदिर करीब 40 फिट ऊँचा है और बीते 40 साल से बंद है। वहीं, मंदिर से सटे घर के गेट पर जमाल सन्स का बोर्ड भी लगा हुआ है।

मंदिर से सटाकर बने घर पर जमाल सन्स का बोर्ड, तारों के फैले जाल और अतिक्रमण को बयाँ करती तस्वीर (फोटो साभार: भास्कर)

सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा, “यह मंदिर सनातन संस्कृति का प्रतीक है और इसे खोलने की पहल पूरी तरह शांतिपूर्ण है। हमने प्रशासन को इसकी जानकारी दी है और उनका पूरा सहयोग मिल रहा है। जल्द ही मंदिर की सफाई कराई जाएगी और पारंपरिक पूजा-अर्चना शुरू होगी। यह किसी प्रकार के विवाद का मुद्दा नहीं है बल्कि सनातन धर्म के गौरव की पुनः स्थापना का प्रयास है।”

अजय शर्मा का कहना है कि यह मंदिर भगवान शिव का हो सकता है। उन्होंने बताया कि नगर निगम और प्रशासन से इस मंदिर के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि इसे फिर से खोलकर साफ-सफाई के बाद पूजा-अर्चना शुरू की जा सके। उन्होंने मेयर और स्थानीय विधायकों से भी इस बारे में बातचीत की है। इस बारे में सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा गया है।

क्या कर रही है पुलिस और प्रशासन?

मंदिर खुलवाने की माँग के बाद पुलिस और प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। दशाश्वमेध थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि यह मंदिर काफी समय से बंद है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात है। स्थानीय लोगों से बातचीत की जा रही है ताकि मंदिर को खोलने को लेकर किसी प्रकार का विवाद ना हो।

डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने कहा कि मंदिर सार्वजनिक स्थल पर है, और इसे फिर से खोलने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की जा रही है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाएगा।

स्कंद पुराण के काशीखंड में मंदिर का जिक्र

मदनपुरा में मिले इस मंदिर का जिक्र स्कंद महापुराण के चौथे खंड ‘काशीखंड‘ में आता है। काशीखंड में काशी की महिमा, उसके आधिदैविक स्वरूप और प्राचीन मंदिरों का विस्तार से वर्णन है। इसमें 100 अध्याय और 11,000 से अधिक श्लोक हैं, जो काशी के तत्कालीन भूगोल, परंपराओं, देवी-देवताओं और मंदिरों की कहानियों पर प्रकाश डालते हैं।

काशीखंड में ‘सिद्धतीर्थ कूप’ का भी उल्लेख है, जिसका अर्थ है एक ऐसा पवित्र कुआँ, जो सिद्धि प्राप्त करने का स्थान माना गया है। मंदिर के पास में ही सिद्धतीर्थ कूप भी है। स्कंद पुराण का काशीखंड वाराणसी की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को सिद्ध करता है। शिवजी के महत्व और काशी में उनके वास की कहानियाँ इस ग्रंथ में दी गई हैं।

‘ला इलाहा इल्लल्लाह = अल्लाह के अलावा कोई दूसरा भगवान नहीं’: जामिया मिलिया इस्लामिया में फिर लगा नारा, प्रदर्शन करने वाले वामपंथी+कॉन्ग्रेसी छात्र

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में एक बार फिर से नारेबाजी की घटना सामने आई है। ये नारेबाजी सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों की 5वीं बरसी के एक दिन बाद कैंपस में सुनाई पड़ी। 15 दिसंबर 2019 को भी इसी तरह की पहले नारेबाजी हुई थी उसके बाद कैंपस में प्रदर्शन और बाद में हिंसा देखी गई थी।

ऑर्गनाइजर की पत्रकार सुभुही विश्वकर्मा के अकॉउंट से शेयर की गई वीडियोज में देख सकते हैं कि एक बार फिर से वहाँ- “तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह और हम क्या चाहते? आजादी” जैसे नारे सुनाई पड़े।

पत्रकार ने पूछा कि क्या ऐसी नारेबाजी एक केंद्र द्वारा फंड दिए जा रहे इंस्टीट्यूट में होनी चाहिए? उन्होंने बताया कि ये प्रदर्शनकारी छात्र AISA और NSUI के हैं। क्या इसे देख समझा जाए कि आगे कोई ‘शाहीन बाग’ भी होगा।

ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (15 दिसंबर 2024) को प्रशासन ने रखरखाव का हवाला देते हुए कक्षाएँ निलंबित कर दी थीं और दोपहर 1 बजे से कैंटीन व लाइब्रेरी भी बंद थी। मगर छात्र ये सूचना पाकर प्रशासन पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का इल्जाम लगाने लगे।

कुछ वीडियोज भी सामने आई हैं जिसमें ‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’ जैसे नारे लगाते हुए भी छात्रों को दिखाया गया है। इसके अलावा AISA की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है जिसमें कहा गया, “15 दिसंबर 2019 को दिल्ली पुलिस ने हमारे साथियों को घायल कर दिया था, कैंपस में तोड़फोड़ की थी, हमारे साथ आतंकियों जैसा व्यवहार किया था और अब हमें उस भयावह दिन को याद करने से भी रोका जा रहा है।”

इन वीडियो को देखने के बाद आम लोग माँग करने लगे हैं कि अगर सरकार द्वारा दिए फंड से चल रहे संस्थान में यही सब होना है तो इस संस्थान को ही बंद कर दिया जाना चाहिए।

प्रियंका-राहुल के वायनाड में जनजातीय युवक को मुस्लिम कार वाले ने 500 मीटर तक घसीटा, ऑटोरिक्शा में बुजुर्ग महिला का शव: गाँधी परिवार फिर भी चुप, रोने-धोने का नाटक सेलेक्टिव क्यों?

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी की हालिया लोकसभा सीट वायनाड, अब उनकी बहन की लोकसभा सीट है। भाई के बाद बहन को वायनाड ने संसद भेजा है, लेकिन उसी वायनाड की हालत खराब है। जनजातीय लोगों पर अत्याचार हो रहा है और प्रशासन भी उनकी अनदेखी कर रही है। वायनाड से हाल ही में दो दर्दनाक घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्होंने प्रशासन और राजनीति दोनों की पोल खोल दी है। पहली घटना में 76 वर्षीय चूंडम्मा का शव एंबुलेंस न मिलने की वजह से ऑटोरिक्शा में ले जाया गया। शव का कुछ हिस्सा ऑटोरिक्शा से बाहर लटकता दिखा, जो प्रशासन की बदइंतजामी का शर्मनाक उदाहरण है। दूसरी घटना में 49 वर्षीय जनजातीय युवक माथन को मुस्लिम युवकों के ग्रुप ने कार से आधे किलोमीटर तक घसीटा, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं।

जनजातीय बुजुर्ग महिला के शव को ऑटोरिक्शा में ले गए परिजन

पहली खबर में वॉयनाड की 76 वर्षीय वृद्ध महिला चूंडम्मा के शव को अंतिम संस्कार के लिए ऑटोरिक्शा पर ले जाना पड़ा। घटना सोमवार (16 दिसंबर 2024) को तब हुई जब चूंडम्मा का निधन उनके घर पर हुआ और परिवार ने शव को श्मशान ले जाने के लिए जनजातीय विकास विभाग से एंबुलेंस माँगा, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। मजबूर होकर परिजनों ने ऑटोरिक्शा बुलाया और शव को उसमें ले जाया गया। शव को एक चादर में लपेटा गया था और अंतिम यात्रा में शव का कुछ हिस्सा ऑटोरिक्शा से बाहर लटकता हुआ दिखाई दिया।

इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तथा समाचार चैनलों पर तेजी से वायरल हो गए। इसके बाद कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जनजातीय विकास विभाग के दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया। कॉन्ग्रेस ने प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, अधिकारियों ने इस घटना के लिए स्थानीय पदाधिकारी को दोषी ठहराया, जिन्होंने समय पर विभाग को एंबुलेंस की आवश्यकता के बारे में सूचित नहीं किया। उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है। वैसे, ये इलाका केरल सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्री ओ आर केलू का है, जिन्हें इस घटना से कोई फर्क नहीं पड़ा।

जनजातीय व्यक्ति को कार से लटकाकर आधे किमी दूर तक घसीटा

वहीं, वायनाड के मंनथवडी क्षेत्र में रविवार (15 दिसंबर 2024) को एक अन्य घटना हुई, जहाँ 49 वर्षीय जनजातीय व्यक्ति माथन को कार से आधे किलोमीटर तक घसीटा गया। हमलावरों ने माथन पर उस समय हमला किया जब वह अपने भाई वीनू के साथ एक दुकान पर सामान खरीदने गए थे। आरोपितों की पहचान मोहम्मद अर्शिद, अभिराम, विष्णु और नावील कमार के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार (मारुति सेलेरियो, KL 52 H 8733) को जब्त कर लिया है। ये कार मलप्पुरम जिले के कुट्टीपुरम निवासी मोहम्मद रियास के नाम पर है।

हमलावरों ने पहले पत्थरबाजी की और फिर माथन को कार से बाँधकर घसीटा। माथन के पैर और हाथों पर गहरे जख्म हुए हैं। उनका इलाज वायनाड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके पैरों का मांस पूरी तरह से उधड़ चुका है और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

बीजेपी ने उठाए सेलेक्टिव अप्रोच पर सवाल

इन दोनों घटनाओं को लेकर बीजेपी के केरल अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने वायनाड की स्थिति और कॉन्ग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट किया, “केरल के नकली बौद्धिक उत्तर भारत की घटनाओं पर शोर मचाते हैं, लेकिन वायनाड के मंथवडी में एक जनजातीय युवक को कार से घसीटे जाने की घटना पर चुप्पी साध लेते हैं। यह सेलेक्टिव गुस्सा क्यों? क्या यह इसलिए है क्योंकि यह घटना आपके नैरेटिव को सूट नहीं करती?” उन्होंने प्रियंका के साथ ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी मेंशन किया।

उन्होंने साफ तौर पर प्रियंका गाँधी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर निशाना साधते हुए पूछा कि इन संवेदनशील घटनाओं पर आखिर क्यों चुप्पी साध ली गई है। सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस और वामपंथी सरकार वायनाड के जनजातीय समाज के मुद्दों को अनदेखा कर रही हैं।

राहुल और प्रियंका का सेलेक्टिव अप्रोच कितना सही?

प्रियंका गाँधी वाड्रा के लोकसभा क्षेत्र वायनाड की ये दोनों घटनाएँ केरल की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। एक ओर चूंडम्मा का शव ऑटोरिक्शा पर ले जाना सरकार और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही का उदाहरण है। दूसरी ओर, माथन के साथ हुई बर्बरता यह दिखाती है कि किस प्रकार जनजातीय समुदाय आज भी शोषण और हिंसा का शिकार हो रहे हैं।

यह विडंबना है कि वायनाड जैसे संसदीय क्षेत्र, जहाँ कभी राहुल गाँधी सांसद थे और अब उनकी बहन प्रियंका गाँधी प्रतिनिधित्व कर रही हैं, वहाँ जनजातीय समुदाय के लोग इस प्रकार के अपमानजनक हालात झेलने को मजबूर हैं। कॉन्ग्रेस द्वारा पहली घटना पर प्रदर्शन करना और दूसरी घटना पर चुप्पी साध लेना वोटबैंक की राजनीति को स्पष्ट करता है। अगर देखें, तो जहाँ आपके राजनीतिक फायदे की बात होती है, तो कहीं आप पैदल (किसान आंदोलन, ट्रैफिक) जाने को भी तैयार हो जाते हैं। तो कहीं महीनों बाद किसी मुद्दे को जिंदा करने के लिए हाथरस पहुँच जाते हैं। लेकिन जिस जगह से अब आपकी बहन आपकी जगह सांसद चुनी जा चुकी हैं, तब आप (राहुल-प्रियंका) इतनी बड़ी घटनाओं पर भी चुप्पी साध लेते हैं।

वैसे, वायनाड के जनजातीय समुदाय की उपेक्षा कोई नई बात नहीं है। वर्षों से उनकी समस्याएँ चाहे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, शिक्षा में पिछड़ापन हो, या फिर प्रशासनिक उपेक्षा – इनका समाधान करने के बजाए राजनीतिक पार्टियाँ खासकर केरल में बारी-बारी से सत्ता सुख भोग रहीं कॉन्ग्रेस और लेफ्ट पार्टियाँ सिर्फ चुनावों के समय सक्रिय दिखाई देती हैं। माथन के साथ हुई घटना में आरोपियों का मुस्लिम होना और कॉन्ग्रेस का इस मुद्दे पर मौन रहना सवाल खड़े करता है कि क्या ये फायदा देखकर मुँह खोलने वाली राजनीति नहीं है?

‘राहुल भाई आप भी आइए, सवालों का जवाब दीजिए’: राहुल कंवल ने भरे मंच से बताया कितने सालों से राहुल गाँधी की प्रतीक्षा कर रहा इंडिया टुडे, कॉन्ग्रेस ने किया ब्लैकलिस्ट

कॉन्ग्रेस पार्टी ने रविवार (15 दिसंबर 2024) को इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी को कॉन्ग्रेस ने “अपमानजनक” बताया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस और मीडिया के बीच खटास को उजागर किया।

सोशल मीडिया पर किया बैन का ऐलान

कॉन्ग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा प्रेस की आज़ादी और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करती है। लेकिन ऐसे लोग जो प्रेस कार्ड लेकर किसी राजनीतिक पार्टी के ट्रोल की तरह काम करते हैं, उनके साथ संवाद करना ज़रूरी नहीं। राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया गया है। कॉन्क्लेव में उन्होंने खुद को ‘चाणक्य’ समझने वाले नेता की वाहवाही की, जिन्होंने विपक्ष के नेता के खिलाफ बेबुनियाद बातें कहीं। राहुल कंवल को माफ करने का मौका दिया गया था, लेकिन वे बार-बार वही गलती दोहरा रहे हैं। वो पत्रकारिता के नाम पर क्या कर रहे हैं, वो हमारी समझ से परे है।”

पवन खेड़ा ने एक अन्य पोस्ट में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा—गृह मंत्री का राहुल गाँधी के खिलाफ गटर स्तरीय बातें करना या कंवल का सस्ती लोकप्रियता के लिए उनका साथ देना? क्या कंवल में हिम्मत है कि वे शाह से मोदी की पत्नी या स्नूपगेट पर सवाल पूछ सकें? क्या यही है इंडिया टुडे कॉन्क्लेव, श्रीमान अरुण पुरी?”

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने राहुल कंवल पर निशाना साधा हो। खेड़ा ने सितंबर में बताया था कि एक विवादास्पद डिबेट के बाद कंवल ने कॉन्ग्रेस नेताओं से माफी माँगी थी। हालाँकि, इस बार पार्टी का रुख सख्त है।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में क्या हुआ?
गृह मंत्री अमित शाह के साथ इंटरव्यू में राहुल कंवल ने लोकसभा चुनाव, हालिया विधानसभा चुनाव, और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल किए। अमित शाह ने राहुल गाँधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “राहुल गाँधी हार में भी अहंकारी बन जाते हैं। वह हमेशा विदेशी स्रोतों पर भरोसा करते हैं। भारत में न्यायपालिका, सतर्कता संस्थाएँ और लोकतांत्रिक तंत्र मौजूद हैं, लेकिन वह अपनी आलोचनाओं के लिए विदेशी रिपोर्ट्स का सहारा लेते हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस की ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर स्थिति का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “जब कॉन्ग्रेस जीतती है, ईवीएम सही होती है। लेकिन हारते ही ईवीएम खराब हो जाती है। ये उनकी हार स्वीकार न करने की प्रवृत्ति को दिखाता है।”

कंवल ने बातचीत में जोड़ा कि राहुल गाँधी लगातार इंडिया टुडे के मंचों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमने राहुल गाँधी को 20 सालों से आमंत्रित किया है। लेकिन वह कभी नहीं आते। ऐसा लगता है मानो वह सवालों से एलर्जी रखते हैं।” उन्होंने कहा, “राहुल भाई आप भी आइए, सवालों के जवाब दीजिए।”

पत्रकारों से कॉन्ग्रेस के टकराव का इतिहास पुराना

कॉन्ग्रेस का पत्रकारों से टकराव नया नहीं है। सितंबर 2023 में I.N.D.I. गठबंधन ने 14 टीवी एंकरों की सूची जारी कर उनके शो का बहिष्कार किया था। कॉन्ग्रेस ने इन एंकरों पर पक्षपातपूर्ण खबरें फैलाने का आरोप लगाया था। यही नहीं, नवंबर में राहुल गाँधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज़18 के पत्रकार को ‘बीजेपी एजेंट’ कहा, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस पर बीजेपी के आरोपों से जुड़े सवाल पूछे। पत्रकार को कॉन्ग्रेस समर्थकों से विरोध झेलना पड़ा।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जिस हवन कुंड के पास होता था कीर्तन, आज वहीं हाथ-पैर धो रहे मुस्लिम: संभल के ‘हरिहर मंदिर’ में शफीकुर्रहमान बर्क ने बंद करवाया था हिंदुओं का प्रवेश

संभल के मुस्लिम जिसे ‘जामा मस्जिद’ कहते हैं, उसके सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद स्थानीय हिंदुओं ने बताया था कि यह जगह ‘हरिहर मंदिर’ ही है। कुआँ पूजन, शादी-ब्याह, पूजा-पाठ सब कुछ यहाँ होता था। लेकिन बाद में इस मंदिर में हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

संभल जिला प्रशासन की एक इंटरनल रिपोर्ट से पता चलता है कि 1978 के दंगों की आड़ में इस मंदिर में हिंदुओं का प्रवेश बंद किया गया था। इसके पीछे शफीकुर्रहमान बर्क था, जो संभल से समाजवादी पार्टी का सांसद रहा है। इस समय उसका पोता संभल का सपा सांसद है और सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर उसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट से पता चलता है कि इस मंदिर परिसर की जिस हवन कुंड के पास कभी कीर्तन हुआ करता था, अब वहाँ मुस्लिम हाथ-पैर धोते हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है, “इसी दंगे की आड़ लेकर शफीकुर्रहमान बर्क ने जामा मस्जिद/हरिहर मंदिर में जाने से हिंदुओं को प्रतिबंधित कर दिया। इससे पहले हिंदू इस परिसर के मध्य में बने हवन कुंड के चारों ओर कीर्तन करते थे। आज इस हवन कुंड का प्रयोग वजू के लिए किया जा रहा है।”

1978 के दंगों में किस तरह हिंदुओं का कत्लेआम किया गया था, इसके बारे में हम पिछली रिपोर्ट में बता चुके हैं। हम बता चुके हैं इन दंगों में जिस कारोबारी बनवारी लाल गोयल की मुस्लिम दंगाइयों ने हाथ-पैर और गला काटकर हत्या कर दी थी, उनके परिवार पर भी शफीकुर्रहमान बर्क ने दबाव डाला था और आखिर में वह परिवार संभल छोड़कर ही चला गया।

दुकान जले हिंदुओं के, पर बर्क ने ज्यादा मुआवजा मुस्लिमों को दिलवाया

1978 के दंगों में शफीकुर्रहमान बर्क ने इतने ही कारनामे नहीं किए। इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम दंगाइयों ने पूरी सब्जी मंडी जला दी। हिंदुओं के करीब 40 दुकानों में आगजनी और लूटमार की। लेकिन शफीकुर्रहमान बर्क के दबाव में हिंदुओं से अधिक मुस्लिमों को मुआवजा मिला, जबकि उनकी दुकानों को कोई नुकसान नहीं हुआ था।

प्रशासन ने यह रिपोर्ट संभल में हुए दंगों पर तैयार की है। इससे पता चलता है कि दंगों के कारण संभल में धीरे-धीरे हिंदुओं की आबादी कम होती जा रही है। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

गौरतलब है कि हालिया हिंसा के बाद बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए बताया था कि जिसे मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, वह कभी हरि मंदिर ही था। उन्होंने बताया था कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने शफीकुर्रहमान बर्क के दबाव में 2012 में इसे पूरी तरह जामा मस्जिद में बदलवा दिया था। उससे पहले हिंदू इस जगह पर पूजा-पाठ के लिए जाते थे। उन्होंने इस जगह पर धार्मिक कार्यक्रमों की कुछ तस्वीर भी साझा की थी।

इस जगह पर बदलाव की बात आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने कोर्ट को भी बताई थी। बताया गया था कि 1920 में इसे ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया। लेकिन मुस्लिमों ने इसमें अवैध निर्माण किए। यहाँ तक कि एएसआई की टीम को भी प्रवेश से रोका गया।

‘बिस्मिल्लाह बोलूँगा और योगी की कुर्बानी दे दूँगा’: UP के CM को कैमरे पर दी धमकी, बोला- हमारी दीदी (ममता बनर्जी) बंगाल में अच्छा काम कर रही हैं

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर खबर इंडिया नामक यूट्यूब चैनल पर 13 दिसंबर 2024 को पब्लिश किए गए एक वीडियो में पश्चिम बंगाल से आए मुस्लिम प्रवासी मजदूरों से बातचीत की गई। इस बातचीत में एक मजदूर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया और धमकी देते हुए कहा, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और योगी की कुर्बानी दे दूँगा।” यही नहीं, उसने सीएम योगी पर लगातार अभद्र टिप्पणियाँ की।

सीएम योगी को दी कुर्बानी की धमकी

प्रवासी मजदूर ने अपनी नाराजगी योगी सरकार की नीतियों पर जाहिर की। उसने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, अवैध मस्जिदों और मजारों पर कार्रवाई, और लाउडस्पीकर व अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसने को लेकर नाराजगी जताई। प्रवासी मजदूर ने कहा, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और कुर्बानी दे दूँगा योगी की” और यह कहते हुए उसने हाथों से कुर्बानी देने का इशारा भी किया।

उसने आगे कहा, “खुलेआम भैंस का गोश्त काट रहे हैं हम लोग। खुलेआम अजान चल रहा है। जाओ योगी… सु#$@र के जने के पास.. जो मस्जिद से माइक उतारता है। उसकी अम्मी ने शादी किया है, मुसलमान से… बोलता है मुसलमानों को भगाओ यहाँ से.. सामने आएगा तो बिल्मिल्लाह बोलके #$% दूँगा।”

ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा

मजदूर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की और कहा, “हमारी दीदी बंगाल में अच्छा काम कर रही हैं। हम चाहते हैं कि 2029 में वह प्रधानमंत्री बनें।” हालाँकि, कुछ मजदूरों ने ममता सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, “अगर बंगाल में रोजगार होता, तो हम दिल्ली क्यों आते?” एक मजदूर ने आगे कहा, “बंगाल में 28 जिले हैं, लेकिन बड़ी कंपनियां नहीं हैं। रोजगार के लिए हमें 1400 किलोमीटर चलकर दिल्ली आना पड़ता है।”

आप से अधिक कॉन्ग्रेस को दी प्राथमिकता

मजदूरों ने कॉन्ग्रेस को आम आदमी पार्टी और बीजेपी से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि “राहुल गाँधी एक अच्छे नेता हैं, और कॉन्ग्रेस ही देश में शांति और एकता ला सकती है।” हालाँकि, अप्रवासी मजबूदों ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली-पानी योजनाओं की तारीफ की, लेकिन उन्होंने राहुल गाँधी को बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में अधिक मजबूत बताया।

यह बातचीत यह दिखाती है कि चुनाव से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ को धमकी और ममता बनर्जी की प्रशंसा प्रवासी मजदूरों के राजनीतिक झुकाव को उजागर करती है।

ट्रेनों को पटरी से उतारने की तालीम दे रहे हैं मदरसे, NIA और ATS की जाँच से खुलासा: कई वीडियोज मिले, मौलवी से भी पूछताछ

ट्रेन को पटरी से उतारने की बहुत सी साजिशों की खबरें आने के बीच एक नया खुलासा हुआ है। खुलासे से पता चलता है कि ट्रेन को डीरेल करने की कोशिशों में मदरसे अपनी भूमिका खास तौर पर निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और उत्तर प्रदेश एटीएस ने झांसी और कानपुर में ट्रेन डीरेल की कोशिश के बाद इस मामले में जाँच की थी और पाया था कि मदरसों में न केवल छात्रों के भीतर ट्रेन को डीरेल करने के लिए कट्टरपंथी बनाया जाता है बल्कि उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जाती है

ये ट्रेनिंग ऑनलाइन मोड में दी जाती है। जाँच टीम ने ऐसे तमाम वीडियोज पाए हैं जिसमें इस्लामी कट्टरपंथी युवाओं को भड़काते हुए दिख रहे हैं और उन्हें ये भी बता रहे हैं कि ये काम किया कैसे जाता है।

एक मुफ्ती खालिद नदवी नाम के मदरसा टीचर से इसी मामले में पूछताछ भी हुई। गुरुवार को जाँच टीम ने नदवी के घर छापा मारा और कई घंटे उससे सवाल पूछे। लेकिन, जब उसे हिरासत में लिया गया वैसे ही वहाँ मुस्लिम भीड़ आई और उन्होंने नदवी को छुड़ाने का प्रयास किया

इस भीड़ में तमाम महिलाएँ थीं जो मस्जिद से ऐलान के बाद वहाँ इकट्ठा हुई थीं। हालाँकि बाद में पुलिस बल ने मामले को संभालते हुए नदवी को हिरासत में लिया और साइबर सेल थाने में जे जाकर पूछताछ की। इस दौरान नदवी का लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य आइटम भी सीज कर लिए गए। वहीं बाद में 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जो हिरासत के दौरान मौलवी को छुड़ाने आए थे।

गौरतलब है कि बीते 3 महीनों में ट्रेन को पटरी से उतारने का तमाम मामले सामने आए हैं। कभी साबरमती एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया, कभी कालिंदी एक्स्प्रेस को। यहाँ वंदे भारत पर पत्थर तक फेंके गए। कभी पटरी पर सिलेंडर मिला तो कभी आइरन की रॉड। अगर सही समय पर ट्रेन रोक इसे न हटाया जाता तो कोई भी बड़ी दुर्घटना घटी जा सकती थी।

बनवारी लाल के लिए ‘भाई’ थे मुस्लिम… फिर भी पहले पैर काटा, फिर हाथ और आखिर में गला: संभल में जब 24 हिंदुओं को दंगाइयों ने एक साथ फूँक दिया

संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

संभल के खग्गूसराय मोहल्ले में एक ऐसा मंदिर मिला है जिसे 1978 के दंगों के बाद गायब कर दिया गया था। संभल में दंगों को लेकर प्रशासन ने एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार की है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इससे पता चलता है कि 1978 में संभल में सबसे बड़ा दंगा हुआ था। इसी दंगे के बाद खग्गूसराय में रहने वाले करीब 100 हिंदू परिवार इस इलाके को छोड़कर चले गए।

हिंदू शिक्षक की बेटी से बलात्कार, पत्नी को किया किडनैप

यह दंगा होली के बाद 29 मार्च से शुरू हुआ था। इसमें करीब 184 लोगों की हत्या की गई थी। करीब 30 दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था। इसी दंगे के दौरान संभल के जाने माने कारोबारी बनवारी लाल गोयल की तड़पा-तड़पाकर हत्या की गई थी। इसी दंगे के दौरान एक हिंदू शिक्षक की बेटी और पत्नी को मंजर शफी ने उठा लिया था। इस दंगे को भड़काने के पीछे भी शफी की बड़ी भूमिका थी। हिंदू शिक्षक की बेटी को बलात्कार के बाद छोड़ा गया। उनकी पत्नी को हिंदुओं ने बचा लिया था। आज न तो इस शिक्षक और न ही बनवारी लाल गोयल का परिवार संभल में रहता है।

गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर 24 हिंदुओं को जलाया

दंगे भड़कने के बाद बनवारी लाल गोयल ने कई हिंदू दुकानदारों को अपने साले मुरारी लाल की कोठी में छिप जाने को कहा था। मुस्लिम आढ़तियों ने इसकी सूचना दंगाइयों को दी। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने ट्रैक्टर लगाकर मुरारी लाल की कोठी का गेट तोड़ दिया। यहाँ 24 हिंदुओं की हत्या कर उन्हें गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर मुस्लिम दंगाइयों ने जला दिया। हालात इतने बदतर थे कि अधिकतर हिंदुओं ने कपड़ों के पुतले बनाकर बृजघाट पर अपनों का अंतिम संस्कार किया था।

दैनिक भास्कर ने संभल के इतिहास के जानकार 58 साल के संजय शंखधर के हवाले से भी इस घटना के बारे में बताया है। शंखधर के अनुार इस दंगे से पहले संभल में हिंदुओं की आबादी 35% थी, अब करीब 20 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा, “1978 का दंगा संभल का सबसे बड़ा दंगा है। लाला मुरारी लाल की कोठी में दंगे से बचने के लिए कई लोग छिपे थे। इसका पता चलते ही दंगाइयों ने उनकी कोठी पर हमला कर दिया। जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। इनमें 24 हिंदू थे।”

बनवारी लाल बोले गोली मार दो, पर दंगाइयों ने काट-काटकर मारा

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट बताती है कि दंगे भड़कने की सूचना मिलने पर बनवारी लाल गोयल प्रभावित इलाके में जाने लगे। उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें रोका। लेकिन वे यह कहते हुए दंगा प्रभावित इलाके में चले गए,

सारे मुस्लिम मेरे मित्र और भाई जैसे हैं। सब मेरे साथ काम करते हैं। मुझे कुछ नहीं होगा।

लेकिन बनवारी लाल गोयल को मुस्लिम दंगाइयों ने पकड़ लिया। उनसे कहा कि तुम इन पैरों से पैसे लेने आए हो और उनके पैर काट दिए। फिर कहा कि तुम इन हाथों से पैसे लेने आए हो और हाथ भी काट दिए। इसके बाद गर्दन काट कर उनकी हत्या कर दी गई। इस दौरान मुस्लिम दंगाइयों के सामने बनवारी लाल गिड़गिड़ाते रहे कि मुझे काटो मत, गोली मार दो। पर किसी ने नहीं सुनी। इस घटना को हरद्वारी लाल शर्मा और सुभाष चंद्र रस्तोगी ने अपनी आँखों से देखा था। इस कत्लेआम के दौरान दोनों ने एक ड्रम में छिपकर अपनी जान बचाई थी। हाई स्कूल में पढ़ने वाले हरद्वारी लाल के सगे भाई को भी मुस्लिम दंगाइयों ने चाकू से गोदकर इसी दौरान मार डाला था।

शर्मा और रस्तोगी भी इस कत्लेआम के गवाह थे। इरफान, वाजिद, जाहिद, मंजर, शाहिद, कामिल, अच्छन जैसे नाम आरोपित थे। लेकिन 2010 में यह केस बंद करना पड़ा, क्योंकि गवाह ही हाजिर नहीं हुए। जज ने यह टिप्पणी करते हुए केस बंद किया कि मैं सोच भी नहीं सकता कि इनलोगों (आरोपितों) को फाँसी नहीं हो रही है।

गवाहों पर किस तरह का दबाव रहा होगा इसे इस बात से समझा जा सकता है कि बनवारी लाल के बेटे विनीत गोयल के कारोबारी साझेदार रहे प्रदीप अग्रवाल के भाई की वसीम ने गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही धमकी दी कि यदि उसके खिलाफ किसी ने एफआईआर करवाई तो उसकी भी हत्या कर दी जाएगी। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार बनवारी लाल के परिवार पर डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क की ओर से भी दबाव डाला गया था। बर्क संभल से समाजवादी पार्टी से सांसद रहे हैं। फिलहाल उनके पोते जियाउर्रहमान बर्क इस सीट से सपा के सांसद हैं। जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा में जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। 1995 के आसपास बनवारी लाल गोयल के परिवार ने संभल ही छोड़ दिया।

संभल में 46 साल बाद मिला जो मंदिर, उसके कुएँ की खुदाई में निकली देवी-देवताओं की खंडित मूर्ति: लोग दर्शन के लिए उमड़े, प्रशासन करवाएगा जाँच

उत्तर प्रदेश के संभल के खग्गू सराय में शिव मंदिर के पट खोले जाने के बाद अब उस मंदिर के पास स्थित एक कुएँ की खुदाई की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक प्रशासन ने 15-20 फीट तक मंदिर की खुदाई कर ली है और इतनी ही गहराई में उन्हें देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमाएँ मिलनी लगी हैं।

सामने आई तस्वीरों को देख लगता है कि ये 7 से 8 इंच लंबी मूर्तियाँ माता पार्वती, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की हैं। कुएँ से इन तीन मूर्तियों के निकलने के बाद स्थल पर एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र अनुज चौधरी भी मौके पर पहुँचे और उन्होंने खुदाई में निकली मूर्तियाँ देखीं। अब इन प्रतिमाओं को आगे जाँच के लिए भेजा जाएगा।

बता दें कि इन तीन मूर्तियों के मिलने की खबर के बाद एक तरफ जहाँ लोग इन प्रतिमाओं को देखने के लिए उमड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ये अनुमान भी लगाए जा रहे हैं कि 46 साल पहले मंदिर को बंद करने से पहले मंदिर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करके इस कुएँ में डाला गया होगा और बाद में मंदिर बंद करके कुएँ को पाट दिया गया होगा।

अब प्रशासन पूरे मामले की जाँच में जुटा है। इस बीच संभल में 46 साल बाद खुले मंदिर के ऊपर लोगों ने प्राचीन संभलेश्वर महादेव मंदिर का नाम लिख दिया है। इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर भी हर-हर महादेव लिखा हुआ है। लोग इस मंदिर में स्थापित मूर्तियों की पूजा-अर्चना और जल अर्पित करने के लिए आतुर हैं ,लेकिन पुलिस लगातार स्थिति संभालते हुए निगरानी बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक संभल बॉर्डर पर पुलिस ने भारी नाकेबंदी की हुई है। किसी गाड़ी को संभल में बिना चेकिंग के एंट्री नहीं दी जा रही है। हालातों को देखते हुए पुलिस ने सतर्कता बढ़ाई है। ये सब उस समय हो रहा है जब संभल में बीते दिनों हिंसा के बाद बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शिव मंदिर मिला, हर ओर इसकी कवरेज हुई और लोगों में उत्सुकता बढ़ी। पुलिस को इसी बीच खुफिया जानकारी मिली कि कुछ लोग बाहर से संभल में प्रवेश करने की फिराक में हैं। ऐसे में पुलिस लगातार सतर्क है। वहीं 4 दशक से बंद पड़े मंदिर की कार्बन डेटिंग कराने की बात चल रही है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने एएसआई को पत्र भी लिखा है।

ममेरे भाई से चल रहा था अफेयर, दुल्हन ने शादी के 4 दिन बाद ही मरवा डाला पति: गुजरात पुलिस ने 4 को दबोचा, सख्ती से पूछताछ में कबूला सच

गुजरात के गांधीनगर में एक पत्नी द्वारा अपने पति की हत्या कराए जाने का मामला सामने आया है। महिला का अपने ममेरे भाई से अफेयर था। वह अपनी शादी कहीं और कराए जाने से खुश नहीं थी। आरोपित महिला की शादी को महज 4 दिन ही हुए थे। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए महिला, उसके प्रेमी सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (14 दिसंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 1 हफ्ते पहले गांधीनगर की रहने वाली पायल की शादी अहमदाबाद के भाविक से हुई थी। शादी के 4 दिनों के बाद शनिवार (14 दिसंबर) को भाविक अपनी पत्नी को लेने एक्टिवा से उसके घर जा रहा था। तभी रास्ते में एक कार ने भाविक की एक्टिवा को टक्कर मार दी। भाविक जमीन में गिर पड़ा तो कार सवारों ने उसे अंदर खींच लिया। गाड़ी में बिठा कर भाविक का गला दबा दिया गया। बाद में इन सभी ने शव को नर्मदा नहर में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।

भाविक जब बहुत देर तक घर नहीं पहुँचा तो उसके परिजन परेशान हो उठे। उनका फोन भी बंद आ रहा था। तलाश करने के दौरान भाविक की स्कूटी रास्ते में पड़ी मिली। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की तो शक की सुई भाविक की पत्नी पायल की तरफ गई। पायल से पूछताछ की गई तो शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह किया। थोड़ी ही देर के सवाल जवाब में तो टूट गई और सच उगल दिया।

पायल ने पुलिस को बताया कि उनका अपने ममेरे भाई कल्पेश से लम्बे समय से अफेयर चल रहा था। इन दोनों की मर्जी के खिलाफ पायल की शादी भाविक से करवा दी गई। इसी बात से नाराज होकर पायल और कल्पेश ने मिल कर भाविक को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया था। पायल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कल्पेश को भी पकड़ा। कल्पेश ने अपने साथ इस अपराध में दो अन्य लोगों को भी शामिल बताया। उन दोनों को भी दबोच लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।