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संसद की धक्का-मुक्की थाने तक पहुँची, जानिए राहुल गाँधी के खिलाफ किन धाराओं में शिकायत; दोषी होने पर कितनी हो सकती है सजा: BJP के 2 सांसद अस्पताल में, महिला MP से भी बदसलूकी

संसद के बाहर गुरुवार (19 दिसंबर 2024) को हुई धक्का-मुक्की का मामला अब थाने पहुँच गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गाँधी द्वारा की गई बदसलूकी के खिलाफ पार्लियमेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर शिकायत दी है।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस संबंध में खुद बताया कि उन्होंने राहुल गाँधी के खिलाफ मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 109, 115, 117, 125, 131 और 351 के तहत दर्ज कराया।

धाराओं में अधिकतम सजा

  • इनमें से धारा 109 तो हत्या के प्रयास की धारा है। ये धारा किसी व्यक्ति पर तब लगाई जाती है जब वो किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास करता है। अगर घटना में दूसरे व्यक्ति को चोट नहीं आती तो दोषी को 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है और अगर चोट आई है तो दोषी को आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है।
  • इसी प्रकार धारा 115 स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने से जुड़ी है। अगर कोई व्यक्ति इस धारा के तहत दोषी पाया जाता है तो बीएनएस की धारा के तहत उसे 1 साल की सजा हो सकती है। साथ ही 15000 रुपए जुर्माना भी लग सकता है।
  • इसी प्रकार धारा 117 भी स्वेच्छा से गभीर चोट पहुँचाने से संबंधित है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और स्वेच्छा (यानि अपनी खुद की इच्छा) से किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी चोट (Injury) पहुंचाता है जिससे गंभीर शारीरिक नुकसान होता है, तो यह अपराध धारा 117 के अंतर्गत आता है। इस अपराध की सजा 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक होती है।
  • धारा 125 और 351, आपराधिक धमकी से संबंधित है। यब तब लागू होती है जब कोई किसी अन्य व्यक्ति को धमकी देकर उसे डराता है। इस धारा के तहत अधिकतम सजा 2 साल की और साथ में जुर्माना हो सकता है।
  • इसी प्रकार धारा 131 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ विद्रोह करने का प्रयास करता है। इस धारा की अधिकतम सजा आजीवन कारावास हो सकती है।

कॉन्ग्रेस ने भी दी शिकायत

बता दें कि संसद में धक्का-मुक्की के कारण भाजपा के दो सांसदों के घायल होने से और महिला सांसद से अभद्रता मामले में भाजपा पार्टी ने राहुल गाँधी के थाने में शिकायत दी। उनकी इस शिकायत के बाद कॉन्ग्रेस ने भी बीजेपी के खिलाफ काउंटर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत को लेकर दिग्विजय सिंह और प्रमोद तिवारी ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जो चोट लगी है उसे लेकर ही कॉन्ग्रेस ने ये शिकायत दी है, वो चाहते हैं कि ये केस एससी-एसटी एक्ट में दर्ज हो क्योंकि खड़गे एक दलित हैं।

पहले पंखा आएगा, फिर बिजली आएगी… ऊर्जा क्षेत्र को अडानी ग्रुप ने नए कैंपेन से दी रफ्तार, दिखाया ‘ग्रीन एनर्जी’ से कैसे बदल रहा ग्रामीण भारत

भारत के प्रमुख व्यावसायिक कंपनी अडानी समूह ने 19 दिसंबर 2024 को शुरू किए गए अपने कैंपेन ‘हम करके दिखाते हैं’ का नया वर्जन लॉन्च किया। यह कैंपेन लाखों भारतीयों के जीवन में अडानी समूह की परियोजनाओं द्वारा लाए गए सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। इसके साथ ही यह स्वच्छ ऊर्जा के प्रति अडानी समूह की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

अडानी समूह की ग्रीन एनर्जी के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करने वाली शॉर्ट फिल्म ‘पहले पंखा फिर बिजली’ एक बेहद भावनात्मक फिल्म है। इस विज्ञापन को ऑगिल्वी इंडिया द्वारा बनाया गया है। इसमें एक छोटे लड़के की कहानी बताई गई है, जो दिल को छू लेती है। यह छोटा बच्चा तमाम बाधाओं और उपहास के बावजूद यह मानता है कि एक पंखा उसके गाँव में बिजली ला सकता है।

एक दिन उस बच्चे का अटूट विश्वास उस समय हकीकत में बदल जाता है, जब वह देखता है कि अडानी के एक पवन चक्की जनरेटर को अपने गाँव में स्वच्छ ऊर्जा लाते हुए देखता है। इस शॉर्ट फिल्म की कहानी न केवल मानवीय विश्वास की शक्ति को उजागर करती है, बल्कि सभी के लिए एक उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए अडानी समूह की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

इसको लेकर अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया है। अपने पोस्ट में गौतम अडानी ने लिखा, “हमारे कामों में हमारे द्वारा किए गए वादे निहित हैं। वादे सिर्फ़ बुनियादी ढाँचे के बारे में नहीं हैं, बल्कि उम्मीद, प्रगति और एक उज्ज्वल कल के बारे में हैं। बदलाव की बयार यहाँ है। हम करके दिखाते हैं! #HKKDH #PehlePankhaPhirBijli“

यह विज्ञापन फिल्म तो बस शुरुआत है। दरअसल, अडानी समूह सभी को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने की आकांक्षा रखता है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के निदेशक प्रणव अडानी ने कहा, “यह कैंपेन वास्तव में अडानी समूह की मूल भावना को दर्शाता है। हालाँकि हमें आकार, गति और पैमाने के लिए पहचाना जाता है, लेकिन इस पहल की खासियत इसका दिलों को छूने वाले एहसास हैं।”

प्रणव अडानी ने आगे कहा, “यह दिखाता है कि कैसे हमारा इन्फ्रास्ट्रक्चर लाखों भारतीयों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनता है। यह अभियान हमारे बिजनेस के साथ उसकी मानवीय कहानियों को सामने लाकर गहरे भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास करता है। हमारा लक्ष्य लाखों भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।”

ऑगिल्वी इंडिया के चीफ एडवाइजर पीयूष पांडे ने कहा, “यह फिल्म उपभोक्ताओं को मिलने वाले एक महत्वपूर्ण लाभ की एक भावुक कहानी को दर्शाती है। यह अदाणी रिन्यूएबल्स की तकनीकी विशेषज्ञता का दिखावा नहीं है, बल्कि अदाणी के ‘ह्यूमन-फर्स्ट’ दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।”

BJP नेता ने महाकाल के किए दर्शन, कॉन्ग्रेस की पत्रकार ने पूछा- स्वर्ण मंदिर कब जाओगेः हिंदू घृणा पर मृणाल पांडे को नेटिजन्स ने घेरा, कहा- मंदिर और गुरुद्वारा दोनों सनातन का हिस्सा

कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने हाल में सोशल मीडिया पर अपनी हिंदू घृणा का प्रमाण एक बार फिर दिया। उन्होंने भाजपा के सिख नेता तजिंदर सिंह बग्गा की हिंदू मंदिर में फोटो देख अपनी घृणा दिखाई और सनातन धर्म के साथ सिख नेता का भी मजाक उड़ाया।

मृणाल पांडे का ट्वीट

दरअसल, तजिंदर बग्गा ने महाकाल बाबा के दर्शन की तस्वीर साझा की थी। उन्होंने कैप्शन में लिखा था कि उन्होंने श्रुतिका अर्जुन के लिए महाकाल मंदिर में प्रार्थना की। इसी फोटो पर मृणाल पांडे ने कमेंट करते हुए कहा, “स्वर्ण मंदिर में भी मत्था टेका काके , कि सनातनै से काम चला रहे हो?”

अपने ट्वीट के जरिए मृणाल पांडे ने सिख और हिंदू धर्म के बीच साफ तौर पर फर्क दिखाने की कोशिश की। इसके बाद कई लोगों ने मृणाल पांडे को लताड़ लगाई। किसी ने कहा, ” जो महिला अपनी बेटी का निकाह एक मुस्लिम से किया है वह इस बात पर चिंतित है कि एक सिख सनातनी क्यों है। गजब दोगलापन है।”

एक यूजर ने कहा, “मंदिर और गुरुद्वारा दोनों सनातन का ही हिस्सा है। हर सिख गुरु शिव और शक्ति को पूजता था। तुम जैसे फर्जी इतिहासकार 10 जनपथ वालों के निर्देश पर हिंदू धर्म और सनातन को कमजोर करने के लिए झूठ फैलाते हो। तुमको क्या दिक्कत है अगर कोई सिख मंदिर जाए तो?

बता दें कि कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ की पूर्व संपादकीय सलाहकार पांडे इस तरह के हास्यास्पद और भड़काऊ बयान देने के लिए बदनाम हैं। एक दफा उन्होंने कफील खान की मथुरा जेल से जमानत वाली खबर पर उनकी तुलना श्रीकृष्ण से कर दी थी

यह सनातनी आस्था का ही महाकुंभ नहीं, अर्थव्यवस्था को भी देता है गतिः आयोजन पर जितना खर्च करते थे अंग्रेज, उससे अधिक आता था राजस्व… इस बार ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी बढ़ावा

इस बार प्रयागराज में आयोजित होने वाला महाकुंभ न सिर्फ परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण होगा, बल्कि अपने आप में हर तरह से अद्वितीय भी होगा। महाकुंभ प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक धर्म, संस्कृति और परंपरा के साथ-साथ समाजिकता और व्यवसाय का एक बड़ा मंच रहा है। महाकुंभ में दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से राज्य सरकार को आर्थिक लाभ मिलेगा।

ब्रिटिश सरकार भी कुंभ के सफल आयोजन के लिए हमेशा प्रयासरत रहती थी। अंग्रेजों के लिए यह भले धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ना हो, लेकिन उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। सन 1906 तक महाकुंभ के आयोजन में ब्रिटिश भारत की सरकार जितना खर्च करती थी, उससे अधिक इस मेले से उसे राजस्व मिल जाता था।

इसको देखते हुए प्रयागराज महाकुंभ 2025 की तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साल 2022 में ही शुरू कर दी थी। उनकी अध्यक्षता में साल 2022 में ही महाकुंभ 2025 को लेकर पहली बैठक आयोजित की गई थी। उस दौरान सीएम योगी ने प्रयागराज के कई दौरे भी किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन को लेकर बेहद दिलचस्पी दिखाई।

यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ आयोजन की तैयारियों का खुद जायजा लेने के लिए प्रयागराज पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी ने महाकुंभ आयोजन से जुड़ी कई परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण/अनावरण/उद्घाटन भी किया। इस तरह इस आयोजन को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए पीएम मोदी और सीएम योगी जीन-जान से लगे हैं।

महाकुंभ नगरी के लिए विशेष परियोजनाएँ

इस बार के महाकुंभ में 45 करोड़ लोगों के पहुँचने की आशा है। इससे स्थानीय रोजगार, व्यापार, क्षेत्रीय हस्तशिल्प एवं कला के साथ-साथ पर्यटन एवं समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। कुंभ के कारण सरकार क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे को हर तरह से विकसित करती है, जिससे अंतत: नागरिकों को लाभ मिलता है और व्यापार को सुगम बनाता है।

महाकुंभ के लिए राज्य की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 500 से अधिक परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 6,382 करोड़ रुपए है। इनमें सड़कों का चौड़ीकरण, पेयजल की पाइपलाइन बिछाना, नई बसें चलाना आदि के साथ-साथ अन्य तरह की बुनियादी ढाँचे का विकास शामिल है।

इस महाकुंभ नगरी को बसाने के लिए 50 हजार से अधिक श्रमिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जहाँ जरूरी हुआ, वहाँ पुल बनाए गए। जहाँ पुल बनाना संभव नहीं था, वहाँ स्टील के फोर लेन अस्थायी ब्रिज बनाए गए। जहाँ जरूरी हुआ, वहाँ रेलवे पुल तक बनाए गए। इतना ही नहीं, प्रयागराज पहुँचने वाली सारी सड़कों का चौड़ीकरण एवं उनका सौंदर्यीकरण किया गया।

प्रयागराज को दिया आकर्षक लुक

प्रयागराज में आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए शहर को विशेष रूप देने की कोशिश की गई है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शहर दीवारों और प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने के लिए अलग से 60 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसमें शहर के प्रमुख दीवारों पर स्ट्रीट आर्ट, चौराहों पर म्यूरल्स (भित्ति चित्र), विभिन्न शैली की मूर्तियाँ (स्कल्पचर), लैंड स्केपिंग, ट्रैफिक साइन, ग्रीन बेल्ट और हॉर्टिकल्चर आदि का काम शामिल हैं।

शहर की दिवारों धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के विभिन्न प्रतीकों को अंकित किया जाएगा। इन पर इस तरह के चित्र बनाएँगे, जैसे वह उनसे संवाद कर रही हो। इस प्राचीन नगरी के बारे में उन्हें बता रही हो। उनका आधुनिकता के बीच धार्मिकता एवं सांस्कृतिक संगम में स्वागत कर रही हों। इस तरह शहर के लगभग 10 लाख वर्गफीट में इनका चित्रण होगा।

स्थानीय लोगों को रोजगार

एक अनुमान के मुताबिक, इस बार के महाकुंभ से 45,000 परिवारों को रोजगार मिलेगा। महाकुंभ में 25,000 श्रमिकों को लगाया गया है। महाकुंभ के लिए कौशल विकास के तहत 45,000 हजार परिवारों को ट्रेनिंग दी गई है। राज्य सरकार ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए शहर में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट फैसिलिटी की सुविधा विकसित की है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में पर्यटन नीति बनाई थी, जिसमें 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। ये प्रशिक्षित सेवा प्रदाता इस महाकुंभ में अपनी बड़ी भूमिका निभाएँगे और रोजगार पाएँगे। इनमें पर्यावरण के अनुकूल कुल्हड़, पत्तल-दोने आदि जैसे स्वरोजगार की महती भूमिका सामने आएगी। इससे लघु उद्योगों को बड़े पैमाने पर फायदा होगा।

यूपी का पर्यटन विभाग टूर गाइड, ड्राइवर, नाविक, स्ट्रीट वेंडर सहित कई प्रकार के सेवा प्रदाताओं को हर तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। यूपी पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को लुभाने एवं नाविकों को आय बढ़ाने के लिए 2,000 से अधिक नावकों को प्रशिक्षित किया है। इसमें श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार-कुशलता से लेकर उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने तक की बात शामिल है।

इतना ही नहीं, कुंभ के दौरान भोजन की पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्थानीय महिलाएँ मिट्टी के चूल्हे भी बेच रही हैं। इस तरह महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हर सेवा प्रदाता एवं लघु उद्योगों से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, ताकि इस महाकुंभ में आने वाले लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ मेहमान नवाजी का अपूर्व आनंद प्राप्त हो।

महाकुंभ के ‘टेंट सिटी’ में राजसी ठाट-बाट

महाकुंभ में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट के अलावा, राज्य सरकार ने कुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए 2,000 से अधिक स्वीस कॉटेज शैली में टेंट स्थापित किया है। इसके लिए लग्जरी टेंट सिटी स्थापित की जा रही है। इन्हें उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (UPSTDC) बना रहा है। UPSTDC इस सिटी की स्थापना 6 साझेदारों के साथ मिलकर कर रहा है।

टेंट सिटी में कई तरह के ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। इन ब्लॉक्स में आगमन, कुंभ कैंप इंडिया, ऋषिकुल कुंभ कॉटेज, कुंभ विलेज, कुंभ कैनवास, कुंभ एरा आदि प्रमुख हैं। इन टेंट्स में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत फाइव स्टार होटल वाली सुविधाएँ मिलेंगी। यह सुपर डिलक्स, टेंट विला, महाराजा, स्वीस कॉटेज और डॉर्मेटरी फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।

वोकल फॉर लोकल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के जरिए यूपी के स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने की रूप-रेखा बनाई है। सरकार ने इसके लिए पीएम मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपना मूल मंत्र बनाया है। इस दौरान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ यानी हर जिले के एक बड़े उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा।

बनारस की साड़ी, मुरादाबाद के पीतल का सामान, गोरखपुर का टेराकोटा, बाँदा के शजर पत्थर से बने उत्पाद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रसिद्धि एवं बढ़ावा मिलने का अनुमान है। इसके कारण इन जिलों के संबंधित उत्पादों का कारोबार बढ़ने की उम्मीद भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल को बड़े पैमाने पर प्रमोट किया था और यूपी सरकार ने इसमें नया मानक स्थापित किया है।

75 देशों सहित 45 करोड़ आएँगे पर्यटक

प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 में दुनिया भर के 75 से अधिक देशों से 45 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इनमें श्रद्धालु से लेकर पत्रकार एवं शोधार्थी तक शामिल हैं। यूरोप से ही लगभग 4 लाख पर्यटक सिर्फ महाकुंभ को देखने के लिए आ सकते हैं। यूरोप के कई देशों के टूर ऑपरेटरों ने यूपी पर्यटन विभाग से संपर्क किया है।

संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत आदि जैसे मुस्लिम देशों के पर्यटक भी महाकुंभ देखने के लिए प्रयागराज में होटल बुक करवा रहे हैं। इस तरह विदेशी पर्यटकों के आने से भारत को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ब्रांड यूपी की दुनिया भर में पहचान भी मिलेगी।

बताते चलें कि साल 2019 के महाकुंभ में 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया था। इनमें 25 लाख विदेशी पर्यटक थे। इस बार यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हुए अभूतपूर्व सुधार के स्वागत एवं विश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है।

अगर हम कुल पर्यटकों की बात करें तो पिछले साल यानी 2023 में कुल 48 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। इनमें घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के पर्यटक शामिल हैं। यह आँकड़ा साल 2022 की अपेक्षा 50 प्रतिशत अधिक था। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2028 में यह आँकड़ा 85 करोड़ पहुँच जाएगी। इस लिहाज से अगले साल के महाकुंभ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रयागराज से अन्य धार्मिक स्थलों तक चलेंगी विशेष ट्रेनें

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु विंध्याचल, अयोध्या, वाराणसी, वृंदावन, मथुरा जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी जा सकते हैं। महाकुंभ यात्रा के दौरान ही तीर्थयात्री इन तीर्थों की भी यात्रा कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने धार्मिक कॉरीडोर बनाया है। इनमें वाराणसी का जलमार्ग से लेकर विशेष ट्रेनें चलाने तक की विशेष व्यवस्था की गई है।

प्रयागराज महाकुंभ को वाराणसी से सीधे जोड़ने के लिए रेलवे ने वाराणसी कैंट से प्रयागराज के बीच 34 ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ऐसी ही विशेष ट्रेन प्रयागराज से अयोध्या, प्रयागराज से विंध्याचल और प्रयागराज से मथुरा-वृंदावन के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है।

इन शहरों के लिए ‘फास्ट रिंग मेमू’ सेवा शुरू की गई है। यह फास्ट रिंग मेमू सेवा प्रयागराज से अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज आएगी। इसी तरह से दूसरी ट्रेन प्रयागराज से वाराणसी, फिर अयोध्या और फिर प्रयागराज आएगी। मुख्य स्नान पर्वों को छोड़कर यह सेवा सभी दिन शुरू रहेगी।

राहुल गाँधी ने संसद में दिखाया ‘जोर’, ICU में BJP के 2 सांसद: डॉक्टर ने बताया- सिर में चोट, गहरा घाव, काफी खून बहा… कॉन्ग्रेस नेता ने धक्का-मुक्की कबूली

संसद के बाहर प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भाजपा नेताओं से धक्का-मुक्की में आज (19 दिसंबर 2024) दो भाजपा नेता चोटिल हो गए। इनमें एक 70 वर्षीय प्रताप सारंगी हैं और दूसरे 56 साल के मुकेश राजपूत हैं। दोनों सांसदों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहाँ डॉक्टरों ने उनकी स्थिति देखते हुए उन्हें आईसीयू में शिफ्त कर दिया।

अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार ओडिशा से आने वाले बीजेपी एमपी प्रताप सारंगी को सिर में गंभीर चोट आई है। उनके सिर पर गहरा घाव था और अस्पताल पहुँचने तक उनका काफी खून बह चुका था। डॉक्टरों ने उनकी चोट पर टांके लगाए हैं। मुकेश राजपूत भी इस घटना में घायल हुए हैं और उनकी स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है।

इस घटना की बाबत केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया, “घटना में दो नेता घायल हुए हैं। 4-5 अन्य नेताओं ने भी चोट आने की शिकायत की है… मकर द्वार पर कॉन्ग्रेस नेता रोज प्रदर्शन कर रहे थे। कभी प्ले कार्ड लेकर आ जाते थे कभी कुछ। आज पहली बार एनडीए के साथियों ने प्रदर्शन किया। उनको (विपक्षियों को) लगा ये तो उनकी जागीर है। लेकिन हर सांसद को प्रदर्शन का अधिकार है। हमने किया तो वो धक्का-मुक्की करते हुए आए। भीड़ को चीरते हुए आए जबकि आने-जाने का पूरा रास्ता था।”

अर्जुन मेघवाल ने कहा, “राहुल गाँधी LOP भी हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। वह दोबारा सारंगी जी को देखने भी नहीं गए। उन्होंने हमेशा बीआर अंबेडकर के साथ अन्याय किया है। उन्होंने हमेशा उनका अपमान किया। हम अस्पताल से रिपोर्ट आ जाने के बाद एक्शन लेंगे।”

बता दें कि संसद में हुई इस घटना को लेकर जहाँ राहुल गाँधी ने अपने जोर दिखाने की बात को कबूला है तो वहीं सांसदों को लगी चोट मामले आरएमएल के एमएस डॉ अजय शुक्ला का भी बयान आया है। उन्होंने बताया है कि वो लोग जाँच के बाद दोनों नेताओं को स्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। शुरुआती जाँच हो गई है। दोनों के सिर पर चोटें आई हैं। उन्हें आईसीयू में एडमिट किया गया है। प्रताप सारंगी के सिर से बहुत खून बह गया है और उनके सिर पर गहरा कट भी है। उन्हें टाँके लगा दिए गए हैं। वहीं मुकेश राजपूत अचेत अवस्था में थे। अभी उन्हें होश आ गया है, लेकिन बेचैनी है। उनका बीपी बहुत बढ़ गया है।

संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर बिजली चोरी की FIR: मीटर रीडिंग लेने आए अधिकारियों को परिजनों ने धमकाया, कहा- सपा सरकार आने पर तुम्हें और तुम्हारे परिवार को देख लूँगा

उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर पर बिजली विभाग ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) की सुबह तलाशी ली। इस दौरान बर्क के घरवालों ने बिजली के मीटर की जाँच करने से टीम को रोका और जूनियर इंजनीनियर को धमकी भी दी। इसके बाद धमकी देने का FIR की जा रही है। टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस, रैपिड ऐक्शन फोर्स और PAC के जवान भी मौजूद थे।

यूपी बिजली विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर डीके गुप्ता ने बताया, “दो JE और दो एसडीओ सहित पाँच लोगों की टीम सुबह उनके (जियाउर्रहमान बर्क) घर गई थी। वे (परिवार के सदस्य) बिजली की चेकिंग नहीं करने दे रहे थे, लेकिन फिर जूनियर इंजीनियर (जेई) ने ताला खोल दिया। उन्होंने जेई को भी धमकी दी, इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही है।”

सीनियर इंजीनियर डीके गुप्ता ने आगे बताया, “(जियाउर्रहमान बर्क के घर) कुल 16.5 किलोवाट का लोड दर्ज किया गया। 2 किलोवाट के दो कनेक्शन थे। इनमें से एक जियाउर्रहमान बर्क के नाम पर और दूसरा उनके दादा (शफीकुर रहमान बर्क) के नाम पर है। जियाउर रहमान बर्क के खिलाफ बिजली चोरी को लेकर एफआईआर दर्ज की जा रही है। मीटर की एमआरआई भी कराई गई है।”

शिकायत की कॉपी (साभार: आजतक)

कहा जा रहा है कि सांसद जियाउर्रहमान के अब्बू ममलूक रहमान बर्क ने बिजली विभाग के अधिकारियों को धमकाते हुए कहा, “हमारी सरकार आएगी तो हम देख लेंगे।” इसके बाद बिजली विभाग ने जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ धमकी देने की FIR दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। वहीं, बिजली चोरी के मामले में एक FIR पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है। बर्क के खिलाफ एंटी पावर थेफ्ट की धारा 135 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

FIR की कॉपी (साभार: आजतक)

दरअसल, सांसद जियाउर्रहमान के घर में बिजली के दो मीटर लगे हैं। इन मीटरों में टेम्परिंग यानी छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं। यही कारण है कि बीते एक साल में उनके घर में बिजली के मीटर की रीडिंग जीरो रही। इसके बाद कुछ दिन पहले ही बिजली विभाग ने सांसद जियाउर्रहमान के घर के पुराने मीटर को जब्त करके जाँच के लिए भेज दिया था और उसकी जगह पर नई और स्मार्ट मीटर लगाए थे।

रिपोर्ट के अनुसार सपा सांसद के दो मंजिला घर में 83 बल्ब, 19 पंखे और 3 एसी चलाए जा रहे थे। गीजर से लेकर माइक्रोवेव तक अन्य आधुनिक उपकरण का भी इस्तेमाल हो रहा था। बिजली विभाग ने बताया है कि इस घर में 16,480 वॉट के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन कई महीनों से बिल शून्य आ रहा था।

मैं यह सोचकर वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था कि स्पीडबोट से स्टंट कर रहे… जो बच गए उन्होंने बताया मुंबई के समंदर में क्यों मची चीख-पुकार: 13 मौतें-115 का रेस्क्यू, नौसेना चालक पर FIR

मुंबई में 18 दिसंबर को एक दुखद घटना घटी। बुधवार (18 दिसंबर 2024) की शाम गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा केव के बीच चलने वाली एक फेरी नौका को नेवी की स्पीड बोट ने टक्कर मार दी। घटना में 13 लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है वहीं 115 से ज्यादा लोग रेस्क्यू किए जा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि घटना शाम 3:55 की है। उस समय में ‘नीलकमल’ नाम की नाव गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा केव की ओर जा रही थी। इसी दौरान नेवी की स्पीड बोट से इस नाव की टक्कर हुई और नाव पलटने से चारों ओर हल्ला मच गया। भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। उन्होंने हेलीकॉप्टर की मदद से रेक्यू शुरू किया।

घटना के संबंध में नौसेना ने अपनी ओर बयान जारी कर बताया कि 18 दिसंबर की शाम को नौसेना का पोत इंजन परीक्षण के लिए जा रहा था, लेकिन तभी शाम चार बजे इसने नियंत्रण खो दिया और करंजा के पास यह ‘नीलकमल’ नामक नौका से टकरा गया और नौका में सवार लोग डूबने लगे।

जानकारी के अनुसार, नेवी की स्पीड बोट टकराने से जो बोट बलटी उसमें 80 लोगों के बैठने की क्षमता थी लेकिन उसमें जरूरत से ज्यादा लोगों को बैठाया गया था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने इस घटना को देखने के बाद कहा कि उन्होंने कभी ऐसा भयावह दृश्य नहीं देखा था। इतनी अफरा-तफरी और बच्ची की चीख-चिल्लाहट कभी नहीं सुनी थी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे की जानकारी देते हुए कहा कि मुंबई के बुचर द्वीप पर दोपहर बाद करीब 3:55 बजे ‘नीलकमल’ नाम की नाव हादसे का शिकार हो गई। हादसे में 99 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है और 13 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में 10 नागरिक और तीन नौसेना के जवान हैं। घटना में दो लोग लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं, जिन्हें नौसेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह भी सूचना दी कि 11 क्राफ्ट और 4 हेलीकॉप्टर की मदद से नौसेना, तटरक्षक और पुलिस ने बचाव अभियान चलाया गया है। मुंबई पुलिस के अनुसार, मृतकों में सात पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं।

बता दें कि इस घटना के बाद सीएम ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को पाँच लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। साथ ही न्याय के लिए नौसेना बोट के ड्राइवर और इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों के खिलाफ दक्षिण मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं सुरक्षा लिहाज से बुधवार को पुलिस ने गेटवे ऑफ इंडिया पर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है और नौका सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

इस घटना के चश्मदीद व राजस्थान के निवासी श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने घटना से पहले नेवी बोट के स्टंट की वीडियो बनाई थी। उन्होंने कहा कि उन लोगों को लग रहा था कि कोई स्टंट चल रहा है, लेकिन फिर बोट आकर नाव से टकरा गई।

वहीं 25 वर्षीय गौतम गुप्ता ने भी बताया कि घटना से पहले वो वीडियो बना रहे थे उन्हें लगा था कि स्पीडबोट कोई स्टंट कर रही है, लेकिन तभी उसने अपनी फेरी को टक्कर मार दी। वह कहते हैं, “हम विश्वास ही नहीं कर पाए, हमें झटका लगा और स्पीडबोट में से एक यात्री हवा में उछला और जाकर नौका के डेक पर जा लगा। उसका शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। “

दुनिया के लिए अबूझ, पर हमारे पुराणों में दर्ज है सब कुछः जानिए क्या है महाकुंभ का खगोलीय महत्व, कितनी प्राचीन यह सनातनी परंपरा; क्यों है यह भारत के ‘आदर्श समाज’ का आधार

प्रयागराज महाकुंभ 2025 की शुरुआत माघ मेले (13 जनवरी 2024) के साथ हो जाएगी। प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का सबसे बड़ा उत्सव होगा, जो माघ महीने में प्रारंभ होकर लगभग दो महीनों तक चलेगा। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु यहाँ डुबकी लगाएँगे। इस समय महाकुंभ की तैयारियाँ जोरों पर हैं, जिसमें नए घाटों का निर्माण, यातायात और सुरक्षा प्रबंधन, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, साथ ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुंभ का यह दिव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता, और सहिष्णुता की अद्वितीय मिसाल भी पेश करता है। हम इस लेख में जानेंगे, महाकुंभ से जुड़ी खास बातें…

महाकुंभ का पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भ

महाकुंभ मेला भारतीय संस्कृति का ऐसा पवित्र उत्सव है, जिसकी गूंज प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक युग तक सुनाई देती है। महाकुंभ मेला इतिहास, धर्म, दर्शन और समाज के अद्वितीय समागम को दर्शाता है। यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय दर्शन, परंपरा और खगोलीय विज्ञान का अद्भुत संगम भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश की बूंदें हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक के पवित्र स्थलों पर गिरीं। यही कारण है कि इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है। इस मेले का इतिहास इतना पुराना है कि इसकी उत्पत्ति का समय स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है।

महाकुंभ का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत में समुद्र मंथन की कथा को विस्तार से बताया गया है। इस कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र का मंथन किया। मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ, जिसमें अमृत की बूंदें चार स्थानों पर गिरीं।

विष्णु पुराण में यह भी उल्लेख है कि जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है और सूर्य मेष राशि में होता है, तो हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है। इसी प्रकार, जब सूर्य और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो नासिक में कुंभ लगता है। उज्जैन में कुंभ तब होता है जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है। प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और गुरु मेष राशि में होता है। इस खगोलीय गणना का सटीक पालन आज भी किया जाता है।

इतिहासकार मानते हैं कि कुंभ मेला सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुराना है। तो कुछ इतिहासकारों के अनुसार कुंभ मेले का आयोजन गुप्त काल (तीसरी से पाँचवीं सदी) में सुव्यवस्थित रूप में शुरू हुआ। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी 629-645 ईस्वी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रयागराज के कुंभ मेले का वर्णन किया है। उन्होंने इसे एक विशाल और भव्य आयोजन बताया, जिसमें असंख्य साधु, विद्वान और श्रद्धालु सम्मिलित होते थे। आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के तहत कुंभ का स्वरूप गुप्त काल से शुरु हुआ और शंकराचार्य ने इसे धर्म और समाज को जोड़ने का माध्यम बनाया।

धर्माचार्य मानते हैं कि कुंभ मेला अनादि है। यह किसी एक घटना से प्रारंभ नहीं हुआ बल्कि मानव सभ्यता के साथ इसकी परंपरा विकसित हुई। यह आयोजन मानवता की धरोहर है, जिसमें धर्म, संस्कृति और समाज का अद्भुत समागम होता है।

कुंभ मेले का खगोलीय महत्व

कुंभ मेला खगोलीय घटनाओं पर आधारित है। नवग्रहों में से सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शनि की स्थिति इस आयोजन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अमृत की रक्षा में इन ग्रहों की भूमिका को पुराणों में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। कुंभ मेले का आयोजन हर तीन वर्षों के अंतराल पर होता है, जो चार पवित्र स्थलों—हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से आयोजित होता है। 12 वर्षों के चक्र के बाद यह मेला अपने पहले स्थान पर लौटता है।

प्रयागराज का कुंभ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है। कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है, जबकि 6 साल में अर्धकुंभ और हर 144 साल में महाकुंभ का आयोजन होता है। हर 144 साल आयोजित होने वाले महाकुंभ को देवताओं और मनुष्यों के संयुक्त पर्व के रूप में देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं के एक दिन के बराबर होता है। इसी गणना के आधार पर 144 वर्षों के अंतराल को महाकुंभ के रूप में मनाया जाता है।

दुनिया के लिए अबूझ पहेली है महाकुंभ

महाकुंभ न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में एक अद्वितीय आयोजन है। पश्चिमी धर्मों में सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं का महत्व अधिक है, लेकिन वहाँ किसी दार्शनिक या आध्यात्मिक घटना की इस प्रकार की मान्यता नहीं है। कुंभ मेले का खगोलीय आधार और इसका आध्यात्मिक महत्व पश्चिमी विचारधारा के लिए अबूझ पहेली है।

यह मेला सनातन धर्म की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें सत्य की खोज को प्राथमिकता दी जाती है। यहाँ कोई किसी पर अपनी मान्यता थोपता नहीं, बल्कि सभी को अपनी-अपनी साधना पद्धति में विश्वास करने का अधिकार है। यह विविधता का सम्मान और सहिष्णुता का अद्भुत उदाहरण है।

कुंभ मेला आज केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है। विदेशी पत्रकार, श्रद्धालु, और पर्यटक भी इसमें भाग लेते हैं। उनके लिए यह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का परिचय है। पश्चिमी दृष्टिकोण से यह मेला ब्रह्मांड और जीवन की गूढ़ अवधारणाओं को समझने का प्रयास है। विदेशी लेखक और पत्रकार इस मेले को ‘विश्व का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण आयोजन’ कहते हैं। उनका मानना है कि कुंभ मेला भारतीय दर्शन और अध्यात्म की व्यापकता को दर्शाता है।

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महाकुंभ में संतों का मेला, गृहस्थों के लिए भी स्वर्णिम अवसर

कुंभ मेला संतों, तपस्वियों और गृहस्थों के बीच का एक सेतु है। कुंभ मेला संतों और गृहस्थों दोनों के लिए एक अद्वितीय अवसर है। यह साधना, ज्ञान, और आस्था का केंद्र है, जहाँ गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग तपस्वियों के सत्संग से धर्म का मर्म समझते हैं। कुंभ में संत समाज का महत्वपूर्ण योगदान है, जहाँ वे अपने ज्ञान और अनुभव को जनसामान्य के साथ साझा करते हैं। संतों के सत्संग और प्रवचन से लोगों को आत्मज्ञान प्राप्त होता है।

कुछ संत ऐसे भी होते हैं, जो अपने साधना स्थलों से बाहर नहीं आते, लेकिन कुंभ के अवसर पर दर्शन देते हैं। श्रद्धालु इन संतों से जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझते हैं और धर्म का मर्म जानते हैं। यह आयोजन साधना परंपरा, गृहस्थ परंपरा और कुंभ शास्त्र की त्रिवेणी है। कुंभ मेला इस दृष्टि से अनूठा है कि यहाँ समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ मिलते हैं।

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महाकुंभ नगरी में कथा और प्रवचन की परंपरा ने समाज को सदियों से दिशा दी है। कथा और प्रवचन कठिन ज्ञान को सरल भाषा में आम जन तक पहुँचाने का माध्यम हैं। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों द्वारा आयोजित कथाएँ श्रद्धालुओं को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाती हैं। धार्मिक कथावाचक मानते हैं कि ये कथाएँ समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित करती हैं। अखाड़ों के प्रतिनिधि कहते हैं कि कथा और प्रवचन जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझाने का माध्यम हैं। समाजशास्त्री इसे भारतीय समाज की सामूहिक चेतना को जागृत करने का साधन मानते हैं। श्रद्धालु कहते हैं कि इन प्रवचनों से उन्हें जीवन को नई दृष्टि और ऊर्जा मिलती है।

महाकुंभ में राज्य सत्ता, समाज सत्ता और धर्म सत्ता का समागम

कुंभ मेले में धर्मांतरण, किसी विशेष पूजा पद्धति या विचारधारा को थोपने का कोई स्थान नहीं है। यहाँ हर व्यक्ति को अपनी आस्था और पूजा पद्धति के साथ आने और उसे प्रकट करने की स्वतंत्रता है। यह विविधता में एकता की भारतीय परंपरा का जीवंत उदाहरण है।

कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। यह राज्य सत्ता, समाज सत्ता, और धर्म सत्ता का अद्वितीय संगम भी है। कुंभ मेला भारतीय समाज की उस विलक्षणता को दर्शाता है, जहाँ राज्य सत्ता, समाज सत्ता और धर्म सत्ता तीनों एक-दूसरे के सहयोग से काम करती हैं। यहाँ धर्माचार्य, आध्यात्मिक गुरु और प्रशासन मिलकर मेले को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हैं। यह आयोजन एक आदर्श समाज की नींव रखने का प्रतीक है।

महाकुंभ भारतीय संस्कृति, धर्म और समाज का ऐसा संगम है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को एकता और सहिष्णुता का संदेश देता है। यह आयोजन पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से अनमोल है। महाकुंभ भारतीय समाज की सहअस्तित्व की भावना और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। यह न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि एक ऐसा मंच भी है, जहाँ मानवता, ज्ञान और चेतना का मिलन होता है।

‘BJP स्वप्न में भी नहीं कर सकती बाबा साहेब का अपमान’: अमित शाह ने बताया अंबेडकर से कितनी घृणा करती है कॉन्ग्रेस, कहा- मेरा पूरा बयान जनता के सामने रखें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को लेकर कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाए गए झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश पेश किया, क्योंकि बीजेपी के वक्ताओं ने कहा कि कॉन्ग्रेस आंबेडकर विरोधी और संविधान विरोधी है। कॉन्ग्रेस ने सावरकर का भी अपमान किया।

अमित शाह ने कहा कि पिछले सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा में संविधान के 75 साल पूरा होने के मौके पर संविधान की रचना, संविधान निर्माताओं के योगदान और संविधान के आदर्शों पर एक गौरवमयी चर्चा का आयोजन हुआ। इस चर्चा में 75 साल की देश की गौरवमयी यात्रा, विकास यात्रा और उपलब्धियों की भी चर्चा होनी थी।

उन्होंने कहा कि संसद जैसे देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक फोरम में जब चर्चा होती है, तब इसमें बात तथ्य और सत्य के आधार पर होनी चाहिए। कॉन्ग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कल मंगलवार (17 दिसंबर) को कॉन्ग्रेस ने जिस तरह से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखने का प्रयास किया है, इसकी वे कड़ी निंदा करते हैं।

गृह मंत्री ने कहा, “ये इसलिए हुआ क्योंकि भाजपा के वक्ताओं ने संविधान पर, संविधान की रचना के मूल्यों पर और जब-जब कॉन्ग्रेस या भाजपा का शासन रहा, तब शासन ने संविधान के मूल्यों का किस तरह से मूल्यांकन, संरक्षण और संवर्धन किया, इस पर तथ्यों और अनेक उदाहरण के साथ भाजपा के वक्ताओं ने विषय रखे। इससे तय हो गया कि कॉन्ग्रेस अंबेडकर जी की विरोधी पार्टी है, कॉन्ग्रेस आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी पार्टी है।”

कॉन्ग्रेस पर वीर सावरकर का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस ने सावरकर जी का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान के मूल्यों की धज्जियाँ उड़ा दी। नारी सम्मान को भी वर्षों तक दरकिनार किया। न्यायपालिका का हमेशा अपमान किया। सेना के शहीदों का अपमान किया और भारत की भूमि तक को संविधान तोड़कर दूसरे देशों को देने की हिमाकत कॉन्ग्रेस के शासन में हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “कल से कॉन्ग्रेस ने फिर एक बार अपनी पुरानी पद्धति को अपनाकर, बातों को तोड़-मरोड़कर और सत्य को असत्य के कपड़े पहनाकर समाज में भ्राँति फैलाने का एक कुत्सित प्रयास किया है। संसद में चर्चा के दौरान ये सिद्ध हो गया कि बाबा साहेब अंबेडकर का कॉन्ग्रेस ने किस तरह से पुरजोर विरोध किया था। बाबा साहेब के न रहने के बाद भी किस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने उन्हें हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया।”

डॉक्टर अंबेडकर पर कॉन्ग्रेस की पुरानी नीति को लेकर अमित शाह ने कहा, “जहाँ तक भारत रत्न देने का सवाल है, कॉन्ग्रेस के नेताओं ने कई बार खुद ही अपने आप को भारत रत्न दिए हैं। 1955 में नेहरू जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया, 1971 में इंदिरा जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया। बाबा साहेब को भारत रत्न 1990 में तब मिला, जब कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं थी और भाजपा के समर्थन वाली सरकार थी। 1990 तक कॉन्ग्रेस बाबा साहेब को भारत रत्न न मिले, इसके लिए प्रयास करती रही। यहाँ तक कि बाबा साहेब की 100वीं जयंती को मनाने की मनाही कर दी गई।”

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस जब तक सत्ता में रही, तब बाबा साहेब अंबेडकर का कोई स्मारक नहीं बना। जहाँ-जहाँ विपक्ष की सरकारें आती गईं, स्मारक बनते गए। भाजपा की सरकारों ने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने बाबा साहेब के जीवन से संबंधित पंचतीर्थ का विकास किया। मध्य प्रदेश में महू, लंदन में बाब साहेब के स्मारक, नागपुर में दीक्षाभूमि, दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक और महाराष्ट्र के मुंबई में चैत्यभूमि का विकास करने का काम भाजपा की सरकारों ने किया।

अमित शाह ने कहा कि राज्यसभा में उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने पीएम नरेन्द्र मोदी के बयानों को एडिट करके सार्वजनिक किया था। उस समय चुनाव चल रहे थे और उनके बयान को AI का उपयोग करके संपादित किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं मीडिया से भी अनुरोध करना चाहता हूँ कि वह मेरा पूरा बयान जनता के सामने रखें। मैं उस पार्टी से हूँ जो अंबेडकर जी का कभी अपमान नहीं कर सकती।”

उन्होंने कहा, “पहले जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अंबेडकर जी के सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया है। जब भी भारतीय जनता पार्टी सत्ता में रही, हमने अंबेडकर जी के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरक्षण को मजबूत करने का काम किया है। हम जानते हैं कि देश के संविधान को समावेशी बनाने में, दलितों, आदिवासियों, वंचितों, गरीबों को न्याय दिलाने में और देश में लोकतंत्र की नींव को गहरा करने में बाबा साहेब का बहुत बड़ा योगदान है।”

अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी अपील की। उन्होंने कहा कि खड़गे जी को कॉन्ग्रेस के इस कुत्सित प्रयास का समर्थन नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मुझे बहुत दुख है कि राहुल गाँधी के दबाव में आप भी इसमें शामिल हो गए हैं।”

अलीगढ़ के मुस्लिम बहुल इलाके में भी मिला बंद मंदिर, मिट्टी-मलबे में दबा था शिवलिंग: हिंदुवादी कार्यकर्ताओं ने की साफ-सफाई, कहा- ऐसे 15 और मंदिर मुक्त कराने हैं

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के मुस्लिम बाहुल सराय रहमान में बुधवार (18 दिसंबर 2024) को 50 साल से अधिक पुराना एक शिव मंदिर मिला है। यह मंदिर सालों से बंद पड़ा था। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण इस तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जाता था। जब करणी सेना और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली तो वे इलाके में पहुँचे और इसे खोले जाने को लेकर हंगामा करने लगे।

यह मंदिर बन्ना देवी थाना क्षेत्र के सराय रहमान इलाके में है। इसकी सूचना स्थानीय थाना को लगी तो पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची और लोगों को शांत कराया। करणी सेना ने मंदिर को खोले जाने की माँग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा है। अखिल भारतीय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सालों से इस मंदिर पर कब्जा करके रखा गया था और यहाँ पूजा-अर्चना नहीं हो रही है।

पुलिस ने आश्वासन दिया कि मंदिर को सुरक्षा दी जाएगी और यहाँ पूजा पाठ को भी नहीं रोका जाएगा। करणी सेना का कहना है कि मंदिर के अंदर की मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। कई मूर्तियाँ तोड़ दी गई हैं। हिंदू संगठनों इसकी जाँच और मंदिर को सुरक्षा की माँग की। बन्नादेवी थाना के प्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि मंदिर को खुलवा करके उसकी साफ-सफाई कराई गई है।

ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने आगे बताया कि करणी सेना ने महानगर में करीब 15 ऐसे मंदिरों को चिह्नित किया है, जिन पर मुस्लिम समुदाय का कब्जा है। उन्होंने कहा कि इन मंदिरों को जल्दी ही मुक्त कराया जाएगा। वहीं, अलीगढ़ एसपी सिटी मृगांक पाठक ने बताया कि मंदिर पर अवैध कब्जे की शिकायत मिली है। इस संबंध में जाँच कराई जाएगी और दोषियों पर कानून अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मंदिर खुलवाने के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे विश्व हिंदू परिषद के अलीगढ़ जिला प्रचार प्रमुख प्रतीक रघुवंशी ने कहा कि सम्भल के बाद अलीगढ़ के सराय रहमान स्थित मन्दिर को कब्जा मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि मन्दिर की मूर्तियों को पहले ही तोड़ दी गई थी और शिवलिंग को दबा दिया गया था।

उन्होंने कहा कि हिंदू संगठन के लोगों को इस बारे में पता चला तो मन्दिर के पास से मलबा हटाया गया और वहाँ मन्दिर में शिवलिंग मिला है। रघुवंशी ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने मलबे को हटाकर मन्दिर की साफ-सफाई की गई। उन्होंने कहा कि मंदिर के बाहर ईंटों से भरे कट्टे रखे हुए थे। साफ-सफाई करने के बाद यहाँ विधिवत पूजा-पाठ कराया गया।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले हिंदू परिवार भी रहा करते थे, लेकिन वे समय के साथ यहाँ से घर-बार बेचकर चले गए। इसके बाद इस मंदिर पर मुस्लिम समुदाय का कब्जा हो गया। लोगों का यह भी कहना है कि हिंदू समुदाय के लोग अपने साथ मूर्ति आदि लेकर भी चले गए थे।