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चर्च के झगड़े में हाई कोर्ट जज को SC की फटकार – ‘आप भी भारत का हिस्सा, हमारा निर्णय सब पर लागू’

केरल हाई कोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध फैसला सुनाने पर SC के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मालंकारा चर्च में अंतिम संस्कार के मामले में जस्टिस अरुण मिश्रा ऑर्थोडॉक्स ईसाई धड़े के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई, 2017 के फैसले के बावजूद हाई कोर्ट द्वारा यथास्थिति बरकरार रखने (यानी ऑर्थोडॉक्स धड़े के विरोधी जैकोबाइट धड़े को भी वहाँ अधिकार देने) के आदेश के बारे में बोल रहे थे। 1934 के मालंकारा चर्च संविधान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई, 2017 को ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट ईसाईयों के बीच विवाद में व्यवस्था दी थी कि उपरोक्त चर्च संविधान ऑर्थोडॉक्स धड़े को चर्चों का प्रशासन करने का अधिकार देता है।

वर्चस्व के लिए आपस में लड़ रहे ईसाई धड़े

दरअसल मामला यह है कि ऑर्थोडॉक्स धड़े ने एक सिविल सूट दायर कर एर्नाकुलम (केरल) चर्च पर अपना एकाधिपत्य स्थापित करने और किसी अन्य के इसमें हस्तक्षेप को रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने की माँग की थी। इसके निचली अदालत में ख़ारिज होने पर ऑर्थोडॉक्स धड़ा उच्च न्यायालय गया, जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ यथास्थिति बनाए रखने (यानी ऑर्थोडॉक्स धड़े के अतिरिक्त जैकोबाइट धड़े को भी वहाँ अधिकार देने) का अंतरिम आदेश तीन हफ्ते के लिए जारी कर दिया। इसी के विरुद्ध ऑर्थोडॉक्स धड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया

“न्यायिक अनुशासनहीनता की अति है”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को न्यायिक अनुशासनहीनता की अति बताते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा, जो इस केस को सुप्रीम कोर्ट में सुनने वाली बेंच का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत का ही अंग हैं (अतः सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके लिए भी बाध्यकारी है।)

‘दिल्ली मेट्रो को बर्बाद करने पर क्यों तुले हुए हैं’ – SC ने केजरीवाल सरकार से पूछा सीधा सवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से महिलाओं को दिल्ली मेट्रो में फ्री सवारी के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (सितंबर 6, 2019) को तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ लुभावने वादे और दूसरी तरफ नुकसान के दावे यह साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दिल्ली मेट्रो में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वो मुफ्त सौगात क्यों बाँट रही है। इससे तो दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को घाटा हो सकता है। कोर्ट ने केजरीवाल से पूछा कि क्यों वो दिल्ली मेट्रो को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने याचिकाकर्ता एमसी मेहता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “जनता के पैसे का सही इस्तेमाल करना चाहिए और लोगों को मुफ्त सौगात देने से बचना चाहिए।” साथ ही केजरीवाल सरकार को चेताया है कि कोर्ट शक्तिहीन नहीं है और इस पर रोक लगा सकती है।

कोर्ट ने कहा कि एक तरफ वे (दिल्ली सरकार) मुफ्त सवारियाँ कराने जा रही है और दूसरी तरफ वह कोर्ट से चाहती है कि केन्द्र सरकार को निर्देश दे कि 50 फीसदी ऑपरेशनल नुकसान की वे भी भरपाई करे। जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा कि कोर्ट सभी तरह की मुफ्त चीजों को रोक देगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से कहा,- “यहाँ आप नुकसान की बात कर रहे हैं और लागत साझा करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। आप जनता के पैसों को संभाल रहे हैं। कोर्ट फंड के सही तरीके से इस्तेमाल का आदेश देने को लेकर अधिकारविहीन नहीं है। ऐसे में खुद ऐसा नहीं करना चाहिए कि दिवालियापन की नौबत आ जाए।”

कोर्ट ने इस योजना को दिल्ली मेट्रो के लिए लाभदायक न बताते हुए कहा, “डीएमआरसी का वार्षिक राजस्व 6000 और 7000 करोड़ के बीच है। पिछले साल इसका घाटा 100 करोड़ था। अब यदि मुफ्त सौगात दिए जाते हैं, तो प्रति वर्ष 1500 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष नुकसान होगा और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अपने दीर्घकालिक ऋण दायित्वों का भुगतान समय पर नहीं कर सकता है, इसके विस्तार में बाधा आएगी और इसकी सुविधाओं और रखरखाव में कमी आएगी।”

गौरतलब है कि इस साल जून में केजरीवाल ने इस बात का ऐलान किया था कि उनकी सरकार एक प्रस्ताव पर काम कर रही है ताकि महिलाओं को दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों, क्लस्टर बसों और दिल्ली मेट्रो में मुफ्त की सवारी कराई जा सके।

पुरी में सदियों पुराने मठों पर लगातार चल रहा राज्य सरकार का बुलडोजर, कोई नहीं आवाज़ उठाने वाला

ओडिशा में मंदिरों, मठों और हिन्दू धार्मिक स्थलों पर नवीन पटनायक सरकार की बुरी नाराज़ है। जिस तरह से ऐसे स्थलों को ढहाया जा रहा है, अगर ऐसा किसी अन्य मज़हब के साथ किया जाता तो अब तक दुनिया भर के मीडिया संस्थान इस खबर को छाप चुके होते। ओडिशा का पुरी सिर्फ़ विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता है, अपितु यहाँ देश के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई मठ हैं। बीजद सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपयों के नए प्रोजेक्ट का ऐलान किया है, जिसके तहत पुरी को एक ‘वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। लेकिन, इसके लिए मठों को ढहाया जा रहा है।

यह कितना अजीब है कि वर्ल्ड हेरिटेज बनाने के लिए शहर के हेरिटेज को ही मिटाया जा रहा है। जगन्नाथ मंदिर केवल एक मंदिर ही नहीं रहा है बल्कि कई धार्मिक स्थलों की एक बड़ी संरचना का यह मुख्य बिंदु है। उस संरचना को मिटा कर मंदिर को विकसित करना क्या संभव है? राज्य सरकार की इस योजना में सड़कों का चौड़ीकरण किया जाना है। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता किए जाएँगे। लेकिन, इनकी क़ीमत चुका रहे हैं वे साधु-सन्यासी जो सालों से इन मठों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों का सञ्चालन करते रहे हैं। इन्हें परेशान किया जा रहा ताकि ये उन स्थलों को ढाहने की इजाजत दे दें।

आदि शंकराचार्य ने पुरी में गोवर्धन मठ स्थापित किया था। ठीक इसी तरह चैतन्य महाप्रभु ने गम्भीरा मठ के प्रांगण में आराधना करते हुए वर्षों बीता दिए थे। रामानुजाचार्य ने एमार मठ की स्थापना की थी। उड़िया वैष्णव सम्प्रदाय से लेकर रामानंदी संप्रदाय तक के संतों ने वहाँ मठ स्थापित किए। ब्रिटिश राज ने भी इन मठों को जगन्नाथ मंदिर की संपत्ति से पृथक माना था। श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से अपने-अपने सम्प्रदायों के लिए मठ बनाने हेतु संपत्ति दान दी की थी। सरकार ने श्री जगन्नाथ टेम्पल एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA) का गठन कर मंदिर के सञ्चालन पर एक तरह से कब्ज़ा किया और फिर इन मठों के भी बुरे दिन शुरू हो गए।

एसजेटीए ने इन मठों को जगन्नाथ मंदिर की संपत्ति बता कर ढाहना शुरू कर दिया। सरकार का कहना है कि इन मठों के बिल्डिंग सुरक्षित नहीं हैं और इसीलिए इन्हें हटाना ज़रूरी है। लांगुली मठ 300 वर्ष पुराना था। इसे रैपिड एक्शन फाॅर्स और पुलिस की मौजूदगी में ढाह दिया गया। 900 वर्ष पूर्व निर्मित एमार मठ को भी नहीं बख्शा गया। इसके प्रांगण में एक सदी पुराना रघुनन्दन पुस्तकालय स्थित है। इसकी मूर्तियों और पुस्तकों को कहीं और शिफ्ट कर दिया गया। हेरिटेज संरचनाओं की तो रक्षा की जानी चाहिए। लेकिन क्या ऐसा करने से उस स्थल का ऐतिहासिक महत्त्व चला नहीं जाएगा?

एमार मठ पुरी शहर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। 12वीं सदी में स्थापित इस मठ की देखरेख का काम गोविंदाचार्य के शिष्य और फिर उनके वंशज करते आ रहे थे। जगन्नाथ मंदिर के आध्यात्मिक रक्षक एमार मठ के आचार्य ही रहे हैं। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि रथयात्रा के दौरान रथों के निर्माण के लिए लड़कियाँ भी यही देता है। इलाक़े के कई सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा एमार मठ बालभोग के दौरान ज़रूरी फूलों की सप्लाई भी करता है।

यहाँ तक कि एमार मठ की देखरेख करने वाले साधु-संत इस्लामिक आक्रांताओं के आतंक के दौर में भी वहाँ से नहीं हिले। जिन्होंने क्रूर इस्लामिक साम्राजयवाद के सामने सर नहीं झुकाया, आज राज्य सरकार उनसे सब कुछ छीन रही है। बाद में गजपति साम्राज्य की पुनर्स्थापना के दौरान एमार मठ को टैक्स से राहत प्रदान की गई थी। मठ के पास सन 1800 में 60,000 एकड़ ज़मीन थी। जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद बहुत प्रसिद्ध है। लेकिन, क्या आपको पता है कि ब्रिटिश राज के दौरान एक समय ऐसा भी आया था जब अंग्रेजों ने अकाल का हवाला देकर अन्न की सप्लाई करने से मना कर दिया था।

तब एमार मठ न सिर्फ़ जगन्नाथ मंदिर बल्कि समूचे पुरी के लिए आगे आया था और उसने साढ़े 7 महीने तक पूरे इलाक़े का पेट भरा था। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि मठ के भीतर स्थित लाइब्रेरी का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 25 करोड़ रुपए सैंक्शन किए गए हैं। ताम्रपत्रों पर लिखे गए सैकड़ों वर्ष पुरानी पुस्तकों को डिजिटलाइज किए जाने की योजना बनाई जा रही है। बड़ा अखाड़ा मठ के महंत हरिनारायण दास ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि मठ ढहाए जा रहे हैं और जनता चुपचाप तमाशा देख रही है। मठ संस्कृति को बर्बाद किए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा दृश्य देख कर दुःख होता है।

यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस नेता भी ओडिशा सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय विधायक सुरेश राउत ने कहा कि हिन्दू धर्म की प्राचीन परम्पराओं को खंडित किया जाना निंदनीय है। इससे हज़ारों लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ा है जो पूरी तरह मठ पर आश्रित थे। कई लोगों की रोजी-रोटी पर भी अब सवालिया निशान लग गया है। सरकार ने अपने निर्णय से पहले स्थानीय लोगों से बातचीत कर के उनकी राय भी नहीं ली। इसी तरह बड़ा अखाड़ा मठ को 600 वर्ष पूर्व स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य आक्रांताओं से जगन्नाथ मंदिर को बचाना था।

राज्य सरकार को यह समझना पड़ेगा कि केवल श्रीमंदिर ही सब कुछ नहीं है बल्कि ये जो सारे मठ हैं, वो सभी इसका हिस्सा हैं। श्रीमंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए उसी के हाथ-पाँव काटना कहाँ तक उचित है? मंदिर की रक्षा के लिए जो भी केंद्र स्थापित किए गए थे, कालांतर में उन्हें ही अखाड़ों के नाम से जाना गया। ये मंदिर की पहचान का एक हिस्सा हैं। इन्हे नुकसान पहुँचा कर मंदिर के सौंदर्यीकरण या फिर शहर को वर्ल्ड हेरिटेज बनाना बेमानी है।

34000 रुपए कटा ट्रैफिक पुलिस का चालान, सरकारी कर्मी होने पर लगा दोगुना जुर्माना

झारखंड की राजधानी राँची में शुक्रवार को नए ट्रैफिक नियम का खामियाजा खुद ट्रैफिक पुलिस को भुगतना पड़ा। एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 34000 रुपए का चालान कटने की घटना सामने आई है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने गश्त के दौरान देखा कि एक शख्स बिना हेलमेट के जा रहा है, जिसके बाद उन्हें पकड़ा गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्स्टेबल राकेश कुमार अपने दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ट्रैफिक) रामेश्वर राय के साथ बाइक पर जा रहे थे। दोनों को प्लाजा चौक पर रोका गया। नियमों का उलंघन करते हुए पकड़े जाने पर उन पर सामान्य जुर्माने के मुकाबले में दोगुना जुर्माना लगाया गया क्योंकि नए कानून के मुताबिक अगर खुद पुलिसकर्मी इस तरह की गलतियाँ करते हुए पाए जाते हैं, तो उन पर डबल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कॉन्स्टेबल राकेश कुमार के साथ पीछे बैठे ASI रामेश्वर राय ने हेलमेट नहीं लगाया था। ट्रैफिक एसपी ने दाेनाें काे शुक्रवार काे ऑफिस बुलाया। राकेश से बाइक के कागजात माँगे। लेकिन राकेश कुमार के पास न ताे ड्राइविंग लाइसेंस था, न पाॅल्यूशन और न ही इंश्याेरेंस। इसके लिए उन पर कुल 17 हजार रूपए का चालान बनता था क्योंकि राकेश ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत हैं, इसलिए दोगुनी राशि का चालान कटा।

ऐसी पहली रिपोर्ट सामने आई है जब एक ट्रैफिक पुलिस को नए नियम लागू होने के बाद का जुर्माना किया गया है। राँची के ट्रैफिक सुपरिटेंडेट ऑफ पुलिस (एसपी) अजीत पीटर डुंगडुंग ने कहा- “दोनों को उस वक्त पकड़ा गया, जब वे दोनों रात बाइक पर वापस अपने घर लौट रहे थे।”

कॉन्ग्रेस राज में कानून-व्यवस्था चौपट: एमपी में वर्दी वाले गुंडे, राजस्थान में गुंडों के डर से भागे पुलिसवाले

बीते साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद दोनों राज्यों में कानून-व्यवस्था की हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। सत्ताधारी दल के नेता कुर्सी बचाने के लिए आपस में लड़ रहे हैं। इसका फायदा उठाकर पुलिस वाले और गुंडे दोनों बेकाबू हो रहे हैं।

ताजा घटना में मध्य प्रदेश में पुलिस वाले ने वर्दी का धौंस दिखा आरएसएस के एक प्रचारक को पीट दिया तो राजस्थान में एके-47 लहारते हुए बदमाश आए और हवालात में बंद अपने साथी को छुड़ाकर ले गए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को राजस्थान पुलिस ने शुक्रवार को पकड़ा था। हरियाणा के खरौली गॉंव का रहने वाला गुर्जर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती सहित कई मामलों में वांछित है। उसे अलवर की बहरोड़ पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया। लेकिन, गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही उसके करीब 15 साथी तीन कार में सवार होकर आए। एके-47 लहराते और फायरिंग करते थाने में घुसे। हवालात तोड़ पपला को लेकर चले गए।

फायरिंग के डर से पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। लॉकअप की चाबी नहीं मिलने पर बदमाशों ने ताला तोड़ दिया। भागते समय बदमाशों की जब कार रास्ते में खराब हो गई तो हथियार के बल पर एक स्कार्पियो छीन ली। पपला डॉक्टर गैंग का कुख्यात शूटर है। इससे पहले 8 सितंबर 2017 को भी महेंद्रगढ़ कोर्ट में पेशी के वक्त साथियों ने पुलिस पर फायरिंग कर उसे छुड़ा लिया था।

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक थाना प्रभारी ने आरएसएस के नगर प्रचारक गोविंद ठाकुर के साथ मारपीट की। रिपोर्टों के मुताबिक ठाकुर एक कॉलेज के पास कुछ छात्रों से बात कर रहे थे। इसी दौरान गश्त पर निकले थाना प्रभारी अनिल काकड़े से किसी मसले पर उनकी बहस हो गई।

इसके बाद उन्हें थाने लाया गया। यहाँ पुलिसवालों ने न केवल उनकी पिटाई की बल्कि कपड़े भी फाड़ दिए। घटना की जानकारी मिलने के बाद बीजेपी के स्थानीय विधायक संदीप जायसवाल, महापौर शशांक श्रीवास्तव और कार्यकर्ता धाने पहुॅंचकर धरने पर बैठ गए। इसके बाद ठाकुर की शिकायत पर काकड़े को लाइन हाजिर कर दिया गया।

उइगरों का मुद्दा UN में: चीन को ऐसे घेरेगा अमेरिका

अमेरिका और चीन के मध्य विभिन्न मसलों को लेकर चल रही जंग के बीच अब दोनों देशों के बीच एक अन्य मसले पर भी ठन सकती है। दरअसल, अमेरिका ने चीन के उइगुर मुस्लिमों के लिए यूएन की जनरल असेंबली में समर्थन हासिल करने की घोषणा की है। इस कदम से अमेरिका एक बार फिर से चीन को घेरने की कोशिश करेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने इसकी जानकारी दी।

पॉम्पियो ने कहा कि सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाली यूएन की जेनरल एसेंबली में इस बात को रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कई और सभाएँ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन सभाओं में वो बाकी देशों से इस मामले में संपर्क करेंगे और समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वो चीन को इस अमानवीय कृत्य को रोकने में अन्य देशों से मदद माँगेंगे। 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन में उइगुर मुस्लिमों को सामूहिक रूप से कैद में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उइगरों के साथ बर्ताव कर रहा है, वह दुनिया पर बदतरीन धब्बा है। उन्होंने इस मसले को चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा से इतर बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें अब तक कुछ सफलता मिली है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है और यह प्रक्रिया अभी भी चल रहा है।

पॉम्पियो ने कहा कि यूँ तो चीन के साथ उनकी बहुत सारी चुनौतियाँ हैं, लेकिन फिलहाल वो उइगुर मुस्लिमों की आजादी चाहते हैं, उन लोगों को मौलिक अधिकार दिलाना चाहते हैं, जिससे वो लोग वंचित हैं। साथ ही उन्होंने उन चीनी दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि शिविर धार्मिक चरमपंथ से प्रभावित लोगों को शिक्षित करने और बचाने के लिए लगाए गए थे।

गौरतलब है कि चीन ने व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों को उइगरों के किसी भी दुर्व्यवहार से लगातार इनकार किया है, जो कहते हैं कि यह चरमपंथ और हिंसा का मुकाबला करने में बेहद सफल रहा है। हाल ही के वर्षों में बीजिंग द्वारा इस्लामवादियों और चरमपंथियों पर लगाए गए आरोप के बाद झिंजियांग में फैली अशांति में सैकड़ों लोग मारे गए। अधिकार समूहों और निर्वासन का कहना है कि हिंसा उइगुर लोगों के चीन के दमन के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।

NDTV के पत्रकार की टुच्चागिरी: चंद्रयान-2 के ISRO से संपर्क टूटने के बाद वैज्ञानिकों पर चिल्लाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरा देश जहाँ मून मिशन चंद्रयान-2 के लिए इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों पर गर्व कर रहा है, वहीं एनडीटीवी का एक पत्रकार अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के इसरो से संपर्क टूटने की वजह से पहले से ही हताश वैज्ञानिकों पर चिल्लाकर पत्रकार महोदय ने साबित कर दिया कि पूरे मिशन की 95% सफलता उसके लिए मायने नहीं रखती।

वायरल हुए वीडियो में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने आए वैज्ञानिकों पर एक पत्रकार को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है। पत्रकार वैज्ञानिकों पर चिल्लाते हुए कहता है कि यह एक परंपरा है कि जब कुछ गलत होता है, तो इसरो प्रमुख मीडिया के साथ बातचीत करते हैं, तो फिर वो इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद क्यों नहीं हैं? इतना ही नहीं, उस पत्रकार ने प्रेस ब्रीफिंग के लिए आए वैज्ञानिकों को जूनियर तक कह डाला। उसने कहा कि इसरो प्रमुख को मीडिया से बात करनी चाहिए थी, न कि किसी जूनियर को भेजना चाहिए था।

वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि पत्रकार के इस तरह के अशिष्ट और असभ्य सवाल से मीडिया को ब्रीफ करने आए वैज्ञानिक काफी दुखी और असहज हो जाते हैं। वीडियो में पत्रकार का चेहरा नहीं दिख रहा है, लेकिन बाद में पता चलता है कि इस तरह का अशिष्ट सवाल करने वाला कोई और नहीं बल्कि एनडीटीवी का पत्रकार पल्लव बागला है। 

हालाँकि, पल्लव बागला ने देश की जनता का मूड और मामले को बढ़ता देख माफी माँग ली है। मगर, लोगों ने पल्लव के वैज्ञानिकों के साथ किए गए व्यवहार के लिए खूब खिंचाई की है। लोगों ने तो पल्लव बागला के इसरो चीफ के सिवन के साथ चंद्रयान 2 को लेकर किए गए इंटरव्यू को भी शेयर किया है।

इस वीडियो में आप इसके सवाल का स्तर देखकर हैरान रह जाएँगे! दरअसल, पल्लव बागला इसरो चीफ से पूछता है कि चंद्रयान -2 के साथ कितने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जा रहा है? बागला के इस तरह के स्तरहीन सवाल पर के सिवन ने बेहद ही धैर्यपूर्वक तरीके से समझाया कि यह एक स्वचालित और मानव रहित मिशन है। इसमें किसी भी अंतरिक्ष यात्री को नहीं भेजा जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। मगर इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि चंद्रयान-2 मिशन 5 फीसदी ही फेल हुआ है। पीएम मोदी ने भी वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि देश को उन पर गर्व है। उन्होंने इसे देश की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। भविष्य में सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करें। एक वीडियो में पीएम मोदी इसरो चीफ के सिवन को गले लगाते हुए उनकी हिम्मत बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

#IndiaFailed जिसने भी लिखा, उसे #ProudIndian से मिला करारा वाला जबाव

नून-टिमाटर वाले देश के लोग भी कल रात जाग रहे थे। भूखे पेट भला नींद आए भी तो कैसे! उसी देश का एक मंत्री है – वो भी विज्ञान व तकनीक मंत्री। नाम है फवाद चौधरी। कल रात जब चंद्रयान-2 के लैंडर से संपर्क टूट गया तो उसने एक तंज भरा ट्वीट किया। उसने लिखा – आऊ… जो काम आता नहीं, पंगा नहीं लेते ना… डियर इंडिया। इसके बाद भूखे पेट नींद न आने की बीमारी से ग्रसित पाकिस्तानियों ने #IndiaFailed के साथ ट्वीट करना शुरू कर दिया।

और यहीं वो गलती कर गया। उसे ये याद रखना चाहिए था कि चाहे युद्ध का मैदान हो या साइंस-टेक्नॉलजी… हमने हमेशा तुम्हारी बजाई है। इसलिए सोशल मीडिया पर भी बजाएँगे, और क्या खूब बजाया गया भाई साब! पत्रकारिता और संपादकीय नीति का सम्मान करते हुए नीचे सिर्फ वही ट्वीट लगा सकने में सक्षम हूँ, जिसमें गालियाँ नहीं हैं। वैसे पाठकगण इन ट्वीट को देख कर अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तानियों के कान से खून बह रहा होगा या मवाद!

पाकिस्तानियों के नून-टिमाटर से सहानुभूति रखने वाले कुछ छिछोरे (मतलब लिबरपंथी) भारतीय भी कल रात खुश थे। लेकिन ये अपनी मौत खुद मरेंगे (राजनीतिक रूप से तो लगभग मर ही चुके हैं, सामाजिक छीछालेदर भी समय-समय पर हो ही जाता है) इसलिए इन पर की-बोर्ड क्या ही पीटना!

नोट: पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है। इस्लाम में सूअर हराम है। इसलिए जिन ट्वीट में पाकिस्तानियों को सूअर की तरह दिखाया गया है, ऑपइंडिया की संपादकीय नीति के तहत हम उसकी कड़ी निंदा करते हैं।

पूर्व IAS ऑफिसर को 5 साल की कैद: रखता था अवैध विदेशी हथियार, जमा की थी अकूत संपत्ति

सीबीआई कोर्ट ने मुकदमा दर्ज होने के 32 साल बाद 81 वर्षीय पूर्व आईएएस ऑफिसर को 5 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही इस पूर्व अफसर पर 1.5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया नाम के पूर्व आईएएस अधिकारी के सरकारी आवास पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले की छापेमारी में बड़ी संख्या में हथियार व कारतूस बरामद किए गए थे। सीबीआई ने इस मामले में 31 अगस्त 1987 को एफआईआर दर्ज की थी। उस समय अहलूवालिया नागालैंड में श्रम और रोजगार सचिव और आयुक्त के पद पर तैनात था।

नौकरशाह सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने उसके दिल्ली और कोहिमा स्थित आवासोंं पर छापेमारी की थी। इस दौरान सीबीआई ने उसके आवास से एक कारबाइन समेत 5 बंदूक, एक विदेशी राइफल व 328 कारतूस बरामद किए थे।

जाँच एजेंसी ने मामले की जाँच 5 साल में पूरी कर ली थी और 10 अप्रैल 1992 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। अदालती लड़ाई के चलते आरोप तय होने में 18 साल लग गए और 10 फरवरी 2010 को उसके खिलाफ आरोप तय हो पाए।

मामले में दोषी अहलूवालिया 3 मई 1964 को आपातकालीन कमीशन अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल हुआ था। इसके बाद उसने 1971 में भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइन की और उसे नागालैंड कैडर मिला था। अपनी सेवा के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने के चलते यह अधिकारी सीबीआई के निशाने पर आया था। उस समय इसके पास दिल्ली, ग्वालियर और चंडीगढ़ के पॉश इलाकों में कई संपत्ति और एक वातानुकूलित सिनेमा घर भी पाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि हथियारों की बरामदगी में सीबीआई ने उसके खिलाफ एक अलग मामला दर्ज किया था।

राउज एवेन्यू अदालत के एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने शुक्रवार (सितंबर 6, 2019) को सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया को 5 साल की कैद और डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। सीबीआई के मुताबिक यह सबसे लंबा चलने वाला मुकदमा रहा है।

यह वीडियो बताता है कि हम सफल हुए हैं… हम कामयाब होते रहेंगे!

एक किसान हल-बैल लेकर खेत पर जाता है। दिन भर मेहनत करता है। पूरा खेत फिर भी नहीं जोत पाता है। शाम को वापस घर आता है। रात में खाता है, आराम करता है और सुबह फिर से खेत की ओर चल देता है। एक दिन उसकी मेहनत रंग लाती है। उसकी मेहनत को देख प्रकृति भी मेघ के रूप में उस पर मेहरबान होती है। फिर खेत में फसल लहलहाते हैं और उससे न सिर्फ किसान का घर चलता है बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था भी पटरी पर दौड़ती है।

जरा सोचिए, इस मेहनत के बावजूद भी अगर बारिश न हो और किसान निराश हो जाए तो क्या होगा! रोने लग जाए तो क्या होगा? और जरा सोचिए, उस रोते हुए किसान को अगर एक मजबूत कंधा मिल जाए, जो उसे ढाढस बँधाए तो क्या होगा? दूसरे उदाहरण वाला किसान संबल पाकर पहले से ज्यादा उत्साह के साथ मेहनत में जुट जाएगा जबकि पहले वाला हतोत्साहित होकर टूट जाएगा।

चंद्रयान-2 में पूरे भारतवर्ष को जो 5% विफलता देखने को मिली है, वह दूसरे किसान की ही कहानी है। और इस ‘किसान’ को ढाढस देने आया कौन! देश का मुखिया खुद। इसरो चीफ के सिवन जब टूट रहे थे, तो उनके कंधों पर शाबासी की थपकी मिली किससे – खुद पीएम से। जब पीएम मोदी ने रोते हुए सिवन को गले लगाया तो उसमें यह संदेश छिपा था कि देश को आपकी सफलता पर गर्व है, जबकि आपकी विफलता पर वो आपके साथ और भी मजबूती के साथ खड़ा है।