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सिमी का पूर्व अध्यक्ष शाहिद बद्र आजमगढ़ से गिरफ्तार, देशद्रोह सहित भड़काऊ भाषण के कई आरोप

देशद्रोह के मामले में एक मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष शाहिद बद्र को गिरफ्तार करके गुजरात पुलिस ने आज बड़ी सफलता हासिल की है। जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले गुजरात की भुज अदालत ने शाहिद बद्र के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया था। जिसमें वह पेश नहीं हुआ था, इसके बाद ही शाहिद को गुजरात पुलिस ने यूपी के आजमगढ़ से गिरफ्तार किया।

हालाँकि, शाहिद का इस गिरफ्तारी पर कहना है, “मैं सिमी का अध्यक्ष रहा हूँ। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मैं केस लड़ा रहा हूँ। मेरे खिलाफ जो भी केस चल रहे हैं, मैं उनमें पेश होता रहा हूँ, मुझे नहीं मालूम कब वारंट जारी किया गया था।” वहीं शाहिद के घरवालों का भी ये कहना है कि उनको इस वारंट के बारे जानकारी नहीं थी। क्योंकि जब से सिमी पर प्रतिबंध लगा है तब से उनके (शाहिद) नाम पर कोई गतिविधि नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि आजमगढ़ के एसपी पंकज पांडेय ने इस बारे में बात करते हुए मीडिया को बताया है कि शाहिद आजमगढ़ निवासी हैं और उनको गुजरात पुलिस ने आईपीसी की धारा 353 / 143 ,147 के तहत दर्ज मुकदमें में गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक गुजरात में वर्ष 2001 में दर्ज भड़काऊ भाषण के एक मामले में गुजरात की भुज व कच्छ पुलिस को शाहिद बद्र की तलाश थी। इसके अलावा बताया जा रहा है कि शाहिद के ख़िलाफ़ 2012 में भी भुज में मामला दर्ज हुआ था और पुलिस का यह भी कहना है कि आजमगढ़ में उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं।

गौरतलब है कि जिस संगठन का शाहिद पूर्व अध्यक्ष रहा है, उस सिमी को भारत में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण 2002 में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन फिर 6 अगस्त 2008 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस प्रतिबंध को हटा दिया गया था। लेकिन शाहिद इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ कोर्ट में केस लड़ रहा है।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में छिड़ा घमासान: चार कोनों पर सूरमा, सुलह के लिए बीच में कूद रहीं सोनिया

कहने को कॉन्ग्रेस आज भी सबसे बड़ा विपक्षी दल है, लेकिन उसके सीधे नियंत्रण में आने वाले इकलौते बड़े राज्य मध्य प्रदेश में वह अंदरूनी कलह और असंतुष्टि ही नहीं, लगभग खुले विद्रोह से जूझ रहा है। उसके चार बड़े क्षत्रप आपस में भिड़े पड़े हैं, और वयोवृद्ध-अस्वस्थ अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गाँधी को बीच-बचाव के लिए कूदना पड़ रहा है।

संगठन सिरमौरी के लिए भिड़े कमलनाथ-सिंधिया

अपने आप को इस कार्यकाल के पहले ही दिन से भाजपा से बड़ा ‘गौभक्त’ साबित करने में जुटे मुख्यमंत्री कमलनाथ एक साथ सरकार और संगठन की कुर्सी पर काबिज रहना चाहते हैं। वहीं बताया जा रहा है कि उनके प्रतिद्वंद्वी, गुना के पूर्व सांसद और राजघराने के वारिस ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी चाहते हैं।

यह रेस इसलिए है क्योंकि न केवल इससे संगठन पर पकड़ मज़बूत रख कर आलाकमान की नज़रों में चढ़ना आसान होगा, बल्कि बहुत सम्भव है कि प्रदेश अध्यक्ष सरकार के बीच में ही विधायकों का पाला बदलवा कर खुद को या अपने किसी चहेते को मुख्यमंत्री बनवा सकता है। विधानसभा चुनावों में पसीना बहाने के बाद भी मुख्यमंत्री पद से हाथ धोने वाले सिंधिया जहाँ इस ‘सुपरपावर’ को तख्तापलट के लिए चाहेंगे, वहीं कमलनाथ की नज़र इसी स्थिति को रोकने पर है।

कमलनाथ लोकसभा चुनावों तक प्रदेश अध्यक्ष थे, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था। लेकिन वह अपने खास और जनजातीय समाज के नेता गृह मंत्री बाला बच्चन को प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनाना चाहते थे। वहीं सिंधिया का ज़ोर इस पद को अपने कैम्प में करने पर इतना ज़्यादा था कि इस माँग के बाकायदा इश्तिहार भी अख़बारों में छपने लगे, और पोस्टर भी प्रदेश की दीवारों पर लगने लगे। फ़िलहाल तो राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी अध्यक्ष के चुनाव पहले होने का हवाला देकर कमलनाथ को ही सेवा-विस्तार दे दिया गया है, लेकिन यह युक्ति कब तक सिंधिया को काबू रख पाएगी, यह देखने लायक होगा।

दिग्विजय पर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने का आरोप

दूसरी ओर पूर्व मंत्री उमंग सिंघर ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर पर्दे के पीछे से प्रदेश सरकार के सूत्र अपने हाथ में रखने का आरोप लगाया है। पलट कर प्रदेश कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने सिंघर पर भाजपा एजेंट होने का आरोप लगाया और छवि धूमिल करने के लिए उनके निलंबन की माँग की है

गौरतलब है कि पिछले साल जीते विधानसभा चुनावों के बाद दिग्विजय सिंह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। लेकिन उनके विरोध में उनकी हिन्दू-विरोधी छवि और यह बात गई कि उनका पिछला कार्यकाल इतना बुरा था कि भाजपा अगले तीन चुनाव उनके कार्यकाल की याद दिलाकर जीतती रही।

फ़िलहाल एक ओर दिग्विजय सिंह ने सिंघर के साथ किसी सीधे संघर्ष से इंकार तो किया है, लेकिन दूसरी ओर अनुशासनहीनता पार्टी में बर्दाश्त न होने की बात भी उसी साँस में कह डाली। इसके अलावा सिंधिया ने यहाँ भी कूदते हुए कमलनाथ को नसीहत दी कि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्हें इन दोनों नेताओं के बीच सुलह के लिए कोशिश करनी चाहिए।

आजिज सोनिया ने मंगाई रिपोर्ट

इन सबके बीच अंतरिम अध्यक्षा और स्वास्थ्य कारणों से पूर्णकालिक अध्यक्ष का पद छोड़ने वालीं सोनिया गाँधी ने भोपाल के बवाल पर पूरी रिपोर्ट मंगाई है। साथ ही सभी गुटों को मामले सुलझाने और एक-दूसरे के खिलाफ मीडिया में बयान न देने की भी हिदायत दी है।

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय समिति में प्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया ने The Week को बताया कि वे अगले हफ्ते भोपाल में होंगे, और उस दौरे के बाद आलाकमान को रिपोर्ट जाएगी। उन्होंने सिंघर समेत कई नेताओं से पहले ही व्यक्तिगत रूप से बात कर चुकने की भी The Week को पुष्टि की।

चिदंबरम के तिहाड़ जेल जाने पर कपिल सिब्बल को सताने लगी ‘मौलिक अधिकारों’ की चिंता

INX मीडिया घोटाले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के तिहाड़ जाने के बाद कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल किया है कि अब आखिर हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।

कपिल सिब्बल ने ट्वीट करते हुए आज सुबह लिखा, “हमारी मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा कौन करेगा? सरकार? सीबीआई? ईडी? या आयकर अधिकारी? या अदालतें? अगर अदालतें मान लेंगी कि ईडी और सीबीआई सही बोल रही हैं तो वह दिन दूर नहीं जब भगवती से वेंकटाचलिया युग में निर्मित आजादी के स्तंभ ढह जाएँगे।”

हालाँकि, उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाँ आई हैं। जिसमें यूजर्स ने उन्हें जवाब देते हुए बहुत खरी-खोटी सुनाई हैं। एक यूजर ने सिब्बल को जवाब देते हुए लिखता है कि अब भ्रष्टाचार का समय खत्म हो चुका हैं। अब जेल भ्रष्टाचारियों का इंतजार कर रही हैं।

वहीं, दूसरा उनसे पलटकर सवाल करता नजर आया कि जब उनकी पार्टी सत्ता में थी तब उन्होंने ऐसे सवाल क्यों नहीं किए? क्या तब ये उचित नहीं था?

गौरतलब है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कस्टडी में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और गुरुवार की रात ही पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। जिसके बाद सुबह कपिल सिब्बल ने अपनी ये प्रतिक्रिया दी।

यहाँ बता दें कि तिहाड़ जाने से पहले चिदंबरम ने अदालत से कहा था कि वह जेड-श्रेणी की सुरक्षा के साथ जेल में रहना चाहते हैं, जहाँ पर एक बिस्तर दवाई की सुविधा, बाथरूम और वेस्टर्न टॉयलेट भी हो। अदालत द्वारा उनके इस निवेदन को स्वीकार कर लिया गया था और उन्हें उनके मुताबिक जेल में रहने की अनुमति दी गई थी

सलमान खान के ख़िलाफ़ पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में कोर्ट ने दिए जाँच के आदेश

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान पर पत्रकार से बदसलूकी करने के आरोप में मुंबई की एक कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ पुलिस को जाँच के आदेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन पर इसी साल अप्रैल में एक पत्रकार से कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा था। जिसके बाद जून महीने में पत्रकार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने की माँग की थी।

अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए अंधेरी के मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने डीएन नगर पुलिस को सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड्स के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं और मामले की जाँच करने को कहा है। जानकारी के अनुसार इस साल के अप्रैल महीने में हुई इस घटना में पत्रकार ने सलमान खान को साईकिल चलाते देख उनकी वीडियो बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद ये घटना घटी।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि पुलिस सलमान खान और उनके 2 बॉडीगार्ड्स के ख़िलाफ़ एक पत्रकार से मारपीट व बदसलूकी करने के आरोप की जाँच करें और 14 अक्टूबर तक कोर्ट में जाँच रिपोर्ट पेश करे।

गौरतलब है कि जिस पत्रकार ने बॉलीवुड के भाईजान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है, उसका नाम अशोक पांडेय हैं। अशोक ने अंधेरी के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट आर आर खान की अदालत में आईपीसी की धारा 323 (चोट पहुँचाने), 392 (लूटपाट) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत ‘शिकायत’ दर्ज कराई थी।

अशोक ने अपनी शिकायत में बताया था कि 24 अप्रैल की सुबह सलमान साईकिल चला रहे थे और उनके 2 अंगरक्षक भी उनके साथ मौजूद थे। इस दौरान वह भी वहाँ कार से गुजरे। सलमान को देखकर उन्होंने बॉडीगार्ड्स की सहमति से उनकी वीडियो बनानी शुरू की। लेकिन सलमान को यह चीज पसंद नहीं आई और उनके बॉडीगार्ड उनके(अशोक) के पास आकर उनसे मारपीट करने लगे। पत्रकार का आरोप है कि इस दौरान उसका फोन भी छीन लिया गया। और जब उसने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने भी एफआईआर नहीं लिखी, जिस कारण उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

शेहला रशीद के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज, सेना पर लगाए थे झूठे आरोप

JNU की पूर्व छात्र नेता से शाह फैसल की पार्टी से नेतागिरी की आगाज करने वाली शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप है।

बता दें कि शेहला ने भारतीय सेना पर रात में कश्‍मीर के लोगों के घरों में घुसने, गैर-कानूनी रूप से लड़कों को उठाने, घरों में छानबीन करने, चावलों में तेल मिलाने, शोपियाँ में कश्‍मीरी लड़कों को बंधक बनाकर दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे। शेहला ने जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाने को लेकर 18 अगस्‍त को ट्वीट कर इन आरोपों को लगाया था। शेहला के सेना पर लगाए ऐसे कई आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर काफी हंगामा हुआ था। शेहला इससे पहले भी कई फेक न्यूज़ फैलाने सहित सेना पर कई आरोप लगा चुकी हैं।

शेहला ने अपने एक दूसरे ट्वीट्स में लिखा, “लोग कह रहे हैं कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के पास क़ानून व्यवस्था का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें शक्तिहीन कर दिया गया है। सब कुछ अर्धसैनिक बलों के हाथों में है। सीआरपीएफ के जवान की शिक़ायत पर एक SHO का ट्रांसफर कर दिया गया था। SHO डंडे के साथ दिखे उनके पास सर्विस रिवाल्वर नहीं देखी गई।”

यहाँ तक कि भारतीय सेना ने भी शेहला के इन आरोपों को बेबुनियाद और मनगढंत बताया था। भारतीय सेना के बयान के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद पर फर्जी खबरें पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ गिरफ्तारी की माँग भी की थी।

शेहला के खिलाफ आईपीसी की धारा 124-A के तहत देशद्रोह, 153A के तहत धर्म भाषा के आधार पर नफ़रत फैलाना, 153 में उपद्रव कराने के आशय से कोई काम करना, 504 के तहत शांति भंग करने के आशय से कोई काम करना और 505 के तहत अफवाह फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। अब इस मामले में दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल शेहला रशीद से पूछताछ करेगी।


शेहला रशीद फिलहाल आईएएस से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थापित होने की कोशिश कर रही हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे

कॉन्ग्रेसी विचारधारा के शिक्षकों को मिलेगी प्राइम पोस्टिंग: गहलोत सरकार ने खुलेआम किया ऐलान

राजस्थान में गहलोत सरकार ने गुरुवार (सितंबर 5, 2019) को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को भी भाजपा और कॉन्ग्रेस का बताकर दो गुटों में विभाजित कर दिया। ये विभाजन राज्य के शिक्षा मंत्री राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा द्वारा किया गया। उन्होंने खुलेआम इस बात का ऐलान सबके सामने किया कि अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा वाले शिक्षकों को प्राइम पोस्टिंग से हटाया जाएगा और कॉन्ग्रेस का समर्थन करने वाले शिक्षकों को न्याय दिलवाया जाएगा।

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी कार्यालय में गुरुवार को आयोजित शिक्षक पुरस्कार वितरण समारोह में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के शासन काल में राजनीतिक आधार पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उन्हें स्थानांतरण करके दूर भेजा गया, उनसे दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी राज में यह निश्चित था कि जो व्यक्ति RSS से है, वह तो जयपुर और डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पर रहेगा और जो कॉन्ग्रेस का कार्यकर्ता है वह 100 या फिर 500 किलोमीटर दूर जाएगा। इसलिए अब वह कॉन्ग्रेस समर्थित शिक्षकों को जल्द से जल्द 100 फीसदी न्याय दिलवाएँगे।

शिक्षा मंत्री के इस ऐलान के बाद वहाँ मौजूद शिक्षकों ने जिंदाबाद के नारे लगाए और शिक्षा मंत्री ने सबको संबोधित करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का स्पष्ट रूप से ये कहना है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को राजनीतिक आधार पर बहुत प्रताड़ित किया गया है। उनको न्याय मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं की ट्रांसफर पोस्टिंग का अच्छे से ख्याल रखा जाए।

गौरतलब है कि राजस्थान में गहलोत सरकार के आने के बाद से जो स्थिति बनी है, वो किसी से छिपी नहीं है। कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासन तक की हालत चरमराई हुई है। दलित से लेकर महिला और किसान तक उनकी राजनीतिक लड़ाइयों के कारण प्रताड़ित हो रहे हैं। ऐसे में अब उन्होंने शिक्षकों को दो हिस्सों में बाँटकर राज्य की शिक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठा दिया है।

राजस्थान में गहलोत सरकार आने के बाद वहाँ की क्या हालत है, इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।- न दलित सुरक्षित न महिला, राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार बनते ही चौपट हुई कानून-व्यवस्था

केजरीवाल जी… मेरा इस्तीफा स्वीकार करो क्योंकि AAP अब खास आदमी पार्टी बन गई है

अलका लांबा ने आज (6 सितंबर 2019) आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली के चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा और उनकी पूर्व की राजनीतिक पार्टी AAP में काफी दिनों से नहीं बन रही थी। इसी हफ्ते वो सोनिया गाँधी से भी मिलने गई थीं। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि वो कभी भी AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे सकती हैं।

अलका लांबा ने ट्विटर पर लिखा, “AAP को गुड बाय कहने का समय आ गया है। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 6 साल के सफर में काफी कुछ सीखने को मिला।”

दिल्ली के चांदनी चौक इलाके की विधायक अलका लांबा ने बाद में एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल को संबोधित करके लिखा, “अरविंद केजरीवाल जी, आपके प्रवक्ताओं ने आपकी इच्छा के अनुसार पूरे अहंकार के साथ मुझसे कहा था कि पार्टी ट्विटर पर भी मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेगी। इसलिए कृपया “आम आदमी पार्टी”, जो अब “ख़ास आदमी पार्टी” बन चुकी है, की प्राथमिक सदस्यता से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।”

अलका लांबा ने इस साल अगस्त की शुरुआत में ही कहा था कि वो AAP से इस्तीफा देने का फैसला कर चुकी हैं। तब उन्होंने यह भी बताया था कि आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में वह स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगी। हालाँकि सोनिया गाँधी से उनके आवास पर मुलाकात के बाद ऐसा होगा, इसकी कम ही गुंजाइश है। फिर भी एक मँझे हुए नेता की तरह उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मतलब लांबा का राजनीतिक ऊँट किसी भी करवट बैठ सकता है। नीचे के दो ट्वीट से आपको अंदाजा लग जाएगा कि कॉन्ग्रेस हो या बीजेपी, उनके लिए दोनों पार्टियों में अपना भविष्य दिख रहा है।

इस्तीफा देने वाले मुद्दे पर तब AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने अलका लांबा को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वह और उनकी पार्टी उनका (अलका) इस्तीफा ट्विटर पर भी स्वीकार करने के लिए तैयार है।

आपको बता दें कि AAP और अलका लांबा के बीच इस खटास की शुरुआत लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद हुई। चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद लांबा ने AAP की कड़ी आलोचना की थी। तब उन्होंने पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जवाबदेही भी माँगी थी। इसके बाद उन्हें AAP सदस्यों के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया गया था।

हॉस्टल में शराब पीकर केयरटेकर करता था बच्चियों से बदसलूकी, टीचर भी नहीं लेते थे एक्शन

बिहार के जहानाबाद झिले से एक शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बोर्डिंग में रहने वाली लड़कियों ने हॉस्टल के केयरटेकर पर शराब पीकर उन्हें धमकाने और मारपीट करने का आरोप लगाया है

लड़कियों का कहना है कि उनके हॉस्टल का केयरटेकर हॉस्टल में शराब पीता था और उनसे दुर्व्यव्हार करता था। इसके अलावा बच्चियों ने बताया है कि एक बार तो वह लेट होने पर एक बच्ची की पिटाई भी कर चुका है।

पुलिस ने मामले की सूचना मिलते ही केस को दर्ज कर लिया है और जिले के डीएम नवीन कुमार ने भी बताया है कि एनजीओ की ओर से काम करने वाले केयरटेकर पर हॉस्टल में शराब पीकर लड़कियों से बदसलूकी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में जाँच शुरू हो गई है और सरकार को एनजीओ के खिलाफ पत्र भी लिखा गया है।

डीएम के मुताबिक अब वहाँ कुछ सुरक्षा नियम भी बनाए गए हैं। जिसके तहते सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए एक दीवार का निर्माण किया जाएगा और सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएँगे। और सिर्फ़ महिला कर्मचारियों को ही हॉस्टल में रहने की अनुमति दी जाएगी

जानकारी के मुताबिक इस मामले के संबंध में एसपी को पत्र भी लिखा गया है और कहा गया कि हॉस्टल के पास पुलिस फोर्स बढ़ाई जाए।

गौरतलब है कि इस मामले के संबंध में एक बच्ची के मुताबिक उसने केयरटेकर की शिकायत अपने टीचर से भी की थी लेकिन टीचर ने एक्शन लेने की बजाए बच्ची को धमका दिया कि अगर वह केयरटेकर की शिकायत करती है तो उसके हॉस्टल से निकाल दिया जाएगा और उसके बाद उसके माता- पिता भी कुछ नहीं कर पाएँगे।

वहीं, दूसरी छात्रा की मानें तो वो बताती है कि केयरटेकर मेस में शराब पीता था। ऐसे में जब एक दिन एक लड़की को खाने के लिए देरी हो गई तो उसने मेस में लंच माँगा, लेकिन केयरटेकर ने गुस्से में उसकी पिटाई कर दी और खाना देने से भी मना कर दिया।

बम बनाने के सामान के साथ अब्दुल व निजामुद्दीन गिरफ्तार, पावरफूल बम बनाने का वीडियो भी लैपटॉप में

कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स टीम ने उत्तर दिनाजपुर से बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) के 2 आतंकियों, जिनके नाम अब्दुल बारी (28 साल) और निजामुद्दीन खान (19 साल) को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद इन दोनों से पूछताछ हुई और फिर इन दोनों के घरों की तलाशी ली गई। तलाशी में जो चीजें बरामद हुई, उनसे पता चला कि ये लोग किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार एसटीएफ को निजामुद्दीन के ठिकाने से एक लैपटॉप, चार्जर, एक मोबाइल फोन, वायर कटर, टेबल घड़ी, ग्लू स्टिक, कैपेसिटर, छोटे आकार का एलइडी बल्ब, डेटोनेटर और हेक्सा ब्लेड मिला है। जबकि घर से थोड़ी दूर स्थित इनके दूसके ठिकाने से पुलिस को सिमकार्ड के अलावा एक लैपटॉप और एक चार्जर भी बरामद हुआ हैं। लैपटॉप में High caliber explosive (तीव्र क्षमता वाला विस्फोटक) बनाने संबंधी वीडियो अपलोड था।

अब इसे देखकर कयास लगाए जा रहे हैं कि ये आतंकी अपने नए ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए इन चीजों से विस्फोटक बनाने की तैयारी कर रहे थे। एसटीएफ के ज्वायंट सीपी शुभांकर सिन्हा सरकार ने बयान जारी करते हुए बताया है कि जेएमबी के इन संदिग्ध आतंकियों से कई सवालों के जवाब जानने के लिए लगातार पूछताछ की जा रही है। जैसे- इन चीजों से क्या करने वाले थे, उनकी क्या मंसूबे थे? वह कहाँ से वह इन चीजों को लाते थे? इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग करके वह कितना घातक विस्फोटक बनाने की तैयारी में थे?

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले एसटीएफ की टीम ने अबुल काशेम को कोलकाता के नारकेलडांगा से गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ के दौरान ही इन दोनों संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने गुप्त अभियान चलाकर इन दोनों को गिरफ्तार किया और इनके खतरनाक मंसूबों के बारे में पता लगाने में जुट गई।

अखबार वाले मन्नूलाल वैष्णव ने माँगे बकाया 300 रुपए, रफीक खान ने कुल्हाड़ी से काट डाला

घर-घर अखबार पहुँचा कर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले मन्नूलाल वैष्णव को यह नहीं पता था कि एक दिन इन्हीं अखबारों में उनकी हत्या की खबर छपेगी! हत्या वो भी उस रफीक खान (इंसान या हैवान!) के द्वारा जो इन्हीं के लाए अखबारों को पढ़ता जरूर था लेकिन पैसे देने के नाम पर नजरें चढ़ाता था।

1 नंबर जिसकी टीशर्ट पर लिखा है, वही है हत्यारा रफीक, दाहिनी ओर की फोटो- थाना प्रभारी को किया गया सस्पेंड

जयपुर के 50 साल के न्यूजपेपर हॉकर (वो आदमी जो हर सुबह हमारे-आपके यहाँ अखबार पहुँचाता है) मन्नूलाल वैष्णव को रफीक ने मार डाला। कुल्हाड़ी से काट डाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मन्नूलाल 5 सितंबर 2019 को सबके घरों में अखबार पहुँचा कर रफीक खान के पास गए। बहुत समय से अपने बकाये 300 रुपए (मात्र 300 रुपए) को लेकर उन्होंने उससे पूछा कि भाई, हिसाब कर दो। लेकिन रफीक ने जवाब दिया – कुल्हाड़ी से। वो पागलों की तरह कुल्हाड़ी से वार करता रहा। हालाँकि बाइक पर बैठे मन्नुलाल कुल्हाड़ी के पहले ही वार से बेसुध होकर गिर पड़े थे, फिर भी वो वार करता रहा।

यह घटना जयपुर के खोनागोरियान थाना क्षेत्र में घटी। हत्यारे रफीक खान को वहाँ मौजूद लोगों ने पकड़ लिया और उसकी धुनाई कर दी। इसके बाद लोगों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मरने वाला हिंदू जबकि हत्यारा दूसरे मजहब से है, ऐसे में स्थानीय लोगों में आक्रोश तुरंत फैल गया। उन्होंने स्थानीय थाने के सामने सड़क पर जाम लगा दिया। इस दौरान वहाँ के पूर्व विधायक कैलाशचंद्र वर्मा और अन्य भाजपा नेता भी पहुँच गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के बड़े अधिकारी भी संबंधित थाने पहुँचे। स्थिति को कंट्रोल में रखने के लिए पुलिस का अतिरिक्त जत्था इलाके में तैनात कर दिया गया है। बता दें कि विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गुरुवार (5 सितंबर 2019) को पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया था। इस मामले को ठीक ढंग से कंट्रोल नहीं करने के कारण थाना SHO को सस्पेंड कर दिया गया है।