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मोहम्मद साहब ने 12 साल की बच्ची का महीने भर किया रेप, खुद है 2 बच्चों का अब्बा: बिहार से किडनैप कर कलकत्ता-विशाखापटनम-राँची में की हैवानियत, देता था नशे का डोज

बिहार के नवादा में पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान मोहम्मद साहब के तौर पर हुई है। वह पीड़िता के घर के पड़ोस में रहता था और खुद दो बच्चों का अब्बा भी है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल अक्तूबर माह में मोहम्मद साहब ने भदौनी राजा नगर मोहल्ले से 12 साल की बच्ची को किडनैप किया, उसके बाद उसे कलकत्ता, विशाखापटनम और राँची ले जाकर उसका महीने भर रेप करता रहा।

इस दौरान बच्ची को बेसुध रखने के लिए उसने उसे कई बार नशीले पदार्थ दिए और आखिर में 3 दिसंबर को बच्ची को सद्भावना चौक पर छोड़ फरार हो गया।

पीड़िता के पिता ने अब इस घटना की शिकायत पुलिस में दी है। उन्होंने बताया कि 12 साल की बेटी 27 अक्तूबर की देर शाम राशन की दुकान से कुछ खरीदने गई थी। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटी तो खूब खोजबीन हुई और आखिर में नगर थाना में सूचना दी गई।

महीने भर बाद बच्ची 3 दिसंबर को घर लौटी। उसकी स्थिति ऐसी थी कि हर कोई हैरान रह गया। पूछताछ करने पर पता चला कि पड़ोस में रहने वाले मोहम्मद साहब ने उसके साथ हैवानियत की और किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

इस पूरे मामले में उक्त मीडिया रिपोर्ट बताती है कि अभी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार न्याय की माँग को लेकर एसपी डीएम से गुहार लगा रहा है।

गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में बिहार के नवादा में तीन साल की बच्ची से रेप की घटना प्रकाश में आई थी। घटना नारदीगंज थाना की थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि आरोपित बच्ची को रात में सोते समय उठाकर ले गया था और उसके बाद उसने दुष्कर्म करके उसे खून से लथपथ अवस्था में फेंक दिया था।

भाजपा छोड़ो… वरना मौत: नक्सलियों ने की 2 पूर्व सरपंचों की हत्या, पत्नी के सामने उठा ले गए, बेटी ने की जिंदा छोड़ने की अपील… फिर भी नहीं पिघले

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों की बर्बरता एक बार फिर सामने आई है। बीजेपी से जुड़े होने के आरोप में नक्सलियों ने दो पूर्व सरपंचों की हत्या कर दी। भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के बिर्याभूमि गाँव से सुकलु फरसा और नैमेड़ थाना क्षेत्र के मुरगा बाजार से सुखराम अवलम का अपहरण कर उन्हें मौत के घाट उतारा गया।

धमकी भरे पर्चे में बीजेपी समर्थकों को चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुकलु फरसा के शव के पास नक्सलियों द्वारा छोड़े गए पर्चे में साफ लिखा था कि उन्होंने कई बार बीजेपी से दूरी बनाने की चेतावनी दी थी, लेकिन फरसा ने इसे नजरअंदाज कर दिया। नक्सलियों ने फरसा पर बीजेपी के समर्थन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पार्टी से अलग रहने के लिए तीन बार चेताया गया था। पर्चे में साफ संदेश दिया गया कि बीजेपी से जुड़े लोग या तो पार्टी छोड़ दें या मरने के लिए तैयार रहें।

अंतिम संस्कार से लौटते समय पत्नी के सामने किया था अगवा

माओवादियों ने बिरयाभूमि गाँव के पूर्व सरपंच सुकलु फरसा का अपहरण नक्सलियों ने बीते 3 दिसंबर को उनके भतीजी के अंतिम संस्कार से लौटते वक्त आदवाड़ा इलाके से उनकी पत्नी के सामने किया था। वहीं, गडेर ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सुखराम का नक्सलियों ने मुर्गा बाजार से अपहरण किया था। दोनों ही पूर्व सरपंच की हत्या की जिम्मेदारी नक्सलियों के भैरमगढ़ एरिया कमेटी ने ली है।

परिजनों की अपील के बाद भी ले ली जान

अपहरण के बाद सुकलु फरसा की बेटी यामिनी ने सोशल मीडिया पर भावुक अपील करते हुए अपने पिता की रिहाई की गुहार लगाई। लेकिन नक्सलियों ने न सिर्फ इस अपील को अनसुना किया, बल्कि फरसा की हत्या कर शव को गाँव के पास फेंक दिया। घटनास्थल पर गंगालूर एरिया कमेटी के नाम से पर्चा बरामद हुआ।

नक्सलियों द्वारा फेंका गया पर्चा (फोटो साभार: ETV Bharat)

बीते 3 सालों में बीजेपी से जुड़े 10 लोगों की हत्याएँ

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते तीन सालों में अब तक 10 ऐसी हत्याएँ नक्सली कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने मरने वालों पर बीजेपी से जुड़े होने के आरोप लगाए थे। इन ताजी हत्याओं के बाद से इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है, और लोग माओवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं, बीजापुर जिले के एडिशनल एसपी चंद्रकांत गवर्ना ने घटना की पुष्टि की और बताया कि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

जिन ‘बंगबंधु’ ने बांग्लादेश बनाया, उनको ही नोटों से यूनुस सरकार ने हटाया: पहले राष्ट्रपति के दफ्तर से हटाई थी फोटो, कैंसिल कर दी थी उनके नाम की छुट्टियाँ

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट कर्ट करके आई मोहम्मद यूनुस सरकार राष्ट्रपिता मुजीबुर रहमान की निशानियों को मिटाने में जुटी हुई है। इस्लामी कट्टरपंथ और पाकिस्तान की विचारधारा पर चलते हुए अब यूनुस सरकार ने बांग्लादेश की करेंसी पर से भी बंगबंधु की फोटो हटाने का फैसला कर लिया है। उनकी जगह पर जुलाई में हुए तख्तापलट की तस्वीरें नोटों पर छापी जाएँगी। इससे पहले मुजीबुर रहमान का इतिहास मिटाने के लिए और कई कारस्तानियाँ यूनुस सरकार कर चुकी है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, देश की सेंट्रल बैंक ने नए नोटों की छपाई चालू कर दी है। सेंट्रल बैंक 100, 200, 500 और 1000 टका के नोटों की छपाई कर रही है। इनकी छपाई बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आदेश पर हो रही है।

इन नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो नहीं होगी। इनसे यह हटा दी गई है। इनकी जगह पर जुलाई-अगस्त में हुए इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन की तस्वीरों को इन नोटों पर लगाई जाएँगी। इसके अलावा इन नोटों पर बांग्लादेश की मस्जिदों और बाकी धार्मिक स्थलों की फोटो इन पर छापी जाएगी।

यह नोट अगले 6 महीने के भीतर बाजार में आएँगे। पहले बड़े नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो हटाई जा रही है, इसके बाद सभी प्रकार की करेंसी नोट पर यही नीति लागू की जाएगी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 29 सितम्बर, 2024 को इन नोटों की डिजाइन बदलने को लेकर सेंट्रल बैंक को कहा था, जिनकी डिजाइन अब फाइनल हो गई है।

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने मुजीबुर रहमान की स्मृतियाँ मिटाने का प्रयास किया है। इससे पहले यूनुस सरकार के एक मंत्री (एडवाइजर) महफूज आलम ने राष्ट्रपति के दफ्तर बांग्ला भवन के दरबार हॉल से मुजीबुर रहमान की फोटो हटा दी थी।

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने सत्ता में आते ही 8 छुट्टियों को भी रद्द कर दिया था। यह छुट्टियाँ बंगबंधु की हत्या की तारीख और बाकी घटनाओं से जुड़ी हुई थीं। यहाँ तक कि बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से जुड़ी फोटो भी हटा दी गईं थी। यूनुस सरकार में शामिल एडवाइजर मुजीबुर रहमान को ‘फासिस्ट’ बता चुके हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में मुजीबुर रहमान के साथ वही बर्ताव किया जा रहा है जो पाकिस्तान में किया जाता रहा है। पाकिस्तानी मुजीबुर रहमान से घृणा करते आए हैं, वह उन्हें पाकिस्तान तोड़ने का दोषी मानते हैं। बांग्लादेश में अब तक मुजीबुर रहमान को करोड़ों बंगालियों को मुक्ति दिलाने वाले नायक माना जाता रहा है। इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के सहारे सत्ता में आई यूनुस की अंतरिम सरकार इन सब चीजों को मिटाना चाहती है।

बोला था न उलटा-सीधा सवाल नहीं करेंगे… अवध ओझा ने बीच में छोड़ा BBC का इंटरव्यू, AAP पदाधिकारियों ने बंद करवाया कैमरा: सर सर… करता ही रह गया रिपोर्टर

मीडिया की एक वामपंथी दुकान है ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन, यानी की BBC। एक मास्टर साहब हैं अवध ओझा, जो संघ लोक सेवा आयोग यानी की UPSC की प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग देते हैं। एक राजनीतिक दल है आम आदमी पार्टी, यानी की AAP। वैसे हैं तो तीनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे पर कभी-कभी ‘हित’ देख एक-दूसरे की दुकान बंद कराने की भी कोशिश कर लेते हैं।

ऐसी ही एक ताजा कोशिश में AAP के पदाधिकारियों ने BBC का इंटरव्यू बीच में ही रुकवा दिया। कैमरा बंद करवा दिया। रिपोर्टर सर सर… कर अवध ओझा की मनुहार करता रह गया पर सर यह कहकर इंटरव्यू छोड़ गए कि पार्टी लाइन डिसाइड करेगी।

अवध ओझा ताजा-ताजा आपिए बने हैं। दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ से प्रभावित होकर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में AAP का पट्टा पहना है। आप में शामिल होने से पहले UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के ‘ओझा सर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हुआ करते थे। कहते हैं कि बीजेपी से टिकट न मिलने पर उनका मन राहुल गाँधी के लिए भी डोला। कथित तौर पर बीएसपी ने उनको टिकट भी दे दिया था। पर आखिरकार राजनीति की पाठशाला में उन्हें ठौर AAP में आकर मिला है।

इसके बाद से वे लगातार इंटरव्यू देकर अपने पुराने बयानों पर सफाई दे रहे हैं। बता रहे हैं कि क्यों वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। वगैरह, वगैरह। इसी क्रम में उनका एक इंटरव्यू बीबीसी के लिए अंशुल सिंह ने लिया है। बीबीसी न्यूज हिंदी के यूट्यूब पर जारी किया गया यह इंटरव्यू 8 मिनट का 31 सेकेंड का है।

शुरुआत में इंटरव्यू सही चल रहा है। अरविंद केजरीवाल को श्रीकृष्ण बताने से लेकर दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP की फिर से जीत की भविष्यवाणी तक अवध ओझा करते हैं। अचानक से 7 मिनट 45 सेकेंड पर पीछे से कुछ आवाज सुनाई पड़ती है। बीबीसी का रिपोर्टर पीछे मुड़ता है। एक शख्स यह कहते हुए वीडियो में सुनाई पड़ता है कि आपको मैंने बोला था न कि उलटा सीधा सवाल नहीं करने के लिए। जवाब में बीबीसी का रिपोर्टर भी हाँ कहता है।

इसके बाद बीबीसी का रिपोर्टर कहता है- नहीं सर से नॉर्मल सवाल ही कर रहे हैं। वह अवध ओझा से भी पूछता है कि सर ऐसा कोई आब्जेक्शनल सवाल आपसे क्या किया? इस पूरी बातचीत के दौरान मुंडी हिलाते रहे अवध ओझा अचानक से कहते हैं कि देखो पार्टी लाइन डिसाइड करेगी, ये तो ये लोग डिसाइड करेंगे। इतना कहकर वे माइक निकाल देते हैं और बीबीसी का कैमरा बंद हो जाता है।

इसके बाद बीबीसी ने यूट्यूब चैनल पर जो वीडियो जारी किया है उस पर लिखा आता है आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने इसके बाद यह इंटरव्यू जारी नहीं रहने दिया और रिकॉर्डिंग रुकवा दी। इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।

इस इंटरव्यू में बीबीसी का रिपोर्टर सबसे पहले अवध ओझा से पूछता है कि कोचिंग देते-देते वे राजनीति में कैसे आ गए? दूसरे सवाल में पूछा जाता है कि आपकी विचारधारा क्या है? फिर पूछा जाता है कि आपने AAP ही क्यों चुनी, जबकि आप बीजेपी और कॉन्ग्रेस से टिकट माँग रहे थे। दावा है कि बीएसपी ने आपको टिकट दे भी दिया था? इसके बाद अवध ओझा से उनके उस वीडियो को लेकर सवाल किया जाता है जिसमें उन्होंने सिसोदिया और केजरीवाल के शराब घोटाले में जेल जाने को लेकर टिप्पणी की थी? फिर ओझा को केजरीवाल के उस पुराने बयान के बारे में पूछा जाता है जिसमें वह आरोप लगने पर इस्तीफे की माँग करते थे।

इसके बाद बीबीसी का रिपोर्टर पूछता है कि पहले आप मोदी और राहुल गाँधी की तारीफ करते थे। आप में शामिल होने के बाद भी क्या आप इसे जारी रखेंगे? यही वो सवाल है जिसका जवाब अवध ओझा दे रहे थे जब पीछे से आकर किसी व्यक्ति ने इस इंटरव्यू को बंद करवा दिया।

बीबीसी द्वारा जारी किए गए इंटरव्यू में उस व्यक्ति का चेहरा नहीं दिखता जो पीछे से रिपोर्टर को हड़का रहा है और आगे इंटरव्यू नहीं होने देता है। लेकिन इस पूरे इंटरव्यू से यह तो साफ है कि आम आदमी पार्टी के नेता जो इंटरव्यू देते हैं वह असल में ‘फिक्स’ रहता है। रिपोर्टरों को पहले ही बता दिया जाता है कि वे किस तरह का सवाल करेंगे। किस तरह के सवाल नहीं करने हैं।

ढाँचों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बनाया जो कानून, उसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: बोले विष्णु शंकर जैन- मंदिरों पर मोहम्मद बिन कासिम के हमलों से पहले की स्थिति बहाल हो

हिन्दू हितों के लिए काम करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि 1991 में लाया गया प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट असंवैधानिक है। उन्होंने कहा है कि इसमें मंदिरों और बाकी धार्मिक स्थलों की जोस्थिति को तय करने वाली जो तारीख रखी गई है, वह गलत है। जैन ने इस कानून को नागरिक अधिकारों का हनन बताया है।

वकील विष्णु शंकर ने इस मामले में हिन्दू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से माँग की है कि इस कानून को असंवैधानिक घोषित किया जाए। इस संबंध में गुरुवार (5 दिसम्बर, 2024) को हुई सुनवाई के बाद उन्होंने इसकी कमियाँ भी गिनवाई हैं।

विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से कहा, “हमने प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 की संवैधानिक मान्यता को चुनौती दी है। हमारा कहना है कि इस एक्ट का जो मतलब जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द बता रहा है, वह असंवैधानिक है। दूसरी सबसे जरूरी बात यह है कि इस एक्ट में कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 क्यों है, यह तारीख 712 ईस्वी क्यों नहीं है?”

जैन ने आगे कहा, “जब मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में मंदिरों में तोड़ा था, वही तारीख कट ऑफ होनी चाहिए। कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 होनी ही नहीं चाहिए। यह असंवैधानिक है। संसद को ऐसा क़ानून बनाने की कोई शक्ति नहीं है जो लोगों को अदालत जाने से रोकता है। यह संविधान के मूल ढाँचे और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।”

गौरतलब है कि प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट को लेकर 6 याचिकाएँ दायर की गई हैं। हिन्दू पक्ष की इनकी तरफ से विष्णु शंकर जैन बहस कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यों वाली बेंच कर रही है। कानून के समर्थन में जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द भी सुप्रीम कोर्ट में है।

क्या है 1991 का प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट?

पूजास्थल अधिनियम, 1991 या फिर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट, 1991 पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार 1991 में लेकर आई थी। इस कानून के जरिए किसी भी धार्मिक स्थल की प्रकृति यानी वह मस्जिद है मंदिर या फिर चर्च-गुरुद्वारा, यह निर्धारित करने को लेकर नियम बनाए गए हैं।

इस कानून के अनुसार, देश के आजाद होने के दिन यानी 15 अगस्त, 1947 को जिस धार्मिक स्थल की स्थिति जैसी थी, वैसी ही रहेगी। यानि इस दिन यदि कोई स्थान मस्जिद था तो वह मस्जिद रहेगा। कानून में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल का स्वरुप बदलने की कोशिश करेगा तो उसकी 3 वर्ष तक का कारावास हो सकता है।

इसी कानून में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी धार्मिक स्थल के स्वरुप के बदलने को लेकर याचिका कोर्ट में लगाएगा तो वह भी नहीं मानी जाएगी। यानि कोई भी व्यक्ति किसी मस्जिद के मंदिर होने का दावा नहीं कर सकता या फिर किसी मंदिर के मस्जिद होने का दावा नहीं किया जा सकता।

कानून में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि यह स्पष्ट तौर पर साबित हो जाए कि इतिहास में किसी धार्मिक स्थल की प्रकृति में बदलाव किए गए थे तो भी उसका स्वरुप नहीं बदला जाएगा। यानी यह सिद्ध भी हो जाए कि किसी मंदिर को इतिहास में तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी तो भी उसे अब दोबारा मंदिर में नहीं बदला जा सकता।

कुल मिलाकर यह कानून कहता है कि 1947 के पहले जिस भी धार्मिक स्थल में जो कुछ बदलाव हो गए या फिर उस दिन जैसे थे, वह वैसे ही रहेंगे। उनके ऊपर अब कोई दावा नहीं किया जा सकेगा। इसी कानून में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

इस कानून में कई छूट भी दी गई हैं। यह कानून कहता है कि यदि किसी धार्मिक स्थल में बदलाव 15 अगस्त, 1947 के बाद हुए हैं तो ऐसे में कानूनी लड़ाई हो सकती है। इसके अलावा ASI द्वारा संरक्षित स्मारकों को लेकर भी इसमें छूट दी गई है।

विरोध क्यों हो रहा, क्या कहा विरोध में?

प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट का विरोध कोई नई बात नहीं है। इस कानून के पास किए जाने के समय ही इसका विरोध भाजपा ने किया था। हिन्दू संगठनों ने तब भी इसको लेकर आपत्ति जताई थी। अब इस कानून के खिलाफ लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है।

इस कानून को हिन्दुओं की तरफ से सुब्रमण्यम स्वामी, अश्विनी उपाध्याय और बाकी संगठनों ने चुनौती दी है। वहीं मुस्लिमों की तरफ से आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ने याचिका दायर की है। इस मामले में नई याचिका ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी ने दायर की है। उसका कहना है कि वह भी प्रभावित है।

मुस्लिम चाहते हैं कि इस कानून के खिलाफ दायर की गई याचिकाएँ खारिज कर दी जाएँ और कानून को पूरी तरह से लागू किया जाए। उनका कहना है कि कानून के तहत अब किसी भी मुस्लिम मजहबी स्थल पर दावा नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून के जरिए उन सभी धार्मिक स्थलों को कानूनी मान्यता दे दी गई जिनका स्वरुप 1947 से पहले बदल दिया गया था। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून की धारा 2,3 और 4 को रद्द कर दिया जाए। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि कानून के चलते उन धार्मिक स्थलों को भी वह वापस नहीं ले सकते, जिनको आक्रांताओं ने तोड़ा था।

हिन्दू पक्ष ने इस कानून को संसद में पास किए जाने का भी विरोध किया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यह ऐसा कानून है जो लोगों को न्यायालय के दरवाजे खटखटाने से रोकता है ऐसे में यह असंवैधानिक है। हिन्दू पक्ष ने इसके अलावा कानून की संवैधानिकता पर भी प्रश्न उठाए हैं।

साइबर फ्रॉड से बचाने को पंकज त्रिपाठी ने बनाया ‘मूर्ख नहीं हूँ’ Video , AAP ने उसमें भी कर दिया ‘फर्जीवाड़ा’: पकड़े जाने पर पोस्ट डिलीट, नेटिजन्स बोले- एक्टर करें मानहानि का केस

दिल्ली विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया पर भारी फजीहत हुई है। उनके आधिकारिक हैंडल से अभिनेता पंकज त्रिपाठी की एक एडिटिड वीडियो शेयर की गई जिसमें AI की मदद से ऐसा दिखाया गया है कि पंकज त्रिपाठी दिल्ली की जनता को बीजेपी के खिलाफ वोट करने को कह रहे हैं।

जब यूजर्स ने इसे देखा तो तुरंत वो AAP के फर्जीवाड़े को पहचान गए और अभिनेता से अपील की गई कि पार्टी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। विवाद बढ़ता देख AAP के मुख्य हैंडल से वीडियो को हटा लिया गया है, लेकिन अन्य जगह ये अब भी मौजूद है।

पंकज त्रिपाठी के नाम पर आप ने फैलाया झूठ

फर्जी वीडियो में देख सकते हैं कि पंकज त्रिपाठी को कहते दिखाया जाता है- “हम मूँगफली बेचते हैं, अपनी अक्ल नहीं। मैसेज देखिए भाजपा वालों ने भेजा है। कहते हैं वोट करो, हम विकास करेंगे। हमें मालूम नहीं है क्या। इधर हम वोट करेंगे उधर सरकारी पैसा गायब। मूँगफली वाला हूँ मूर्ख नहीं हूँ। यदि भाजपा के लोग लालच दें तो कहो-मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

अब अगर पंकज त्रिपाठी की असली वीडियो को देखें तो पता चलेगा कि वो हकीकत में ऑनलाइन फ्रॉड के विरुद्ध जागरुकता फैला रहे हैं जिसे AAP ने प्रोपगेंडा बनाकर साझा किया। वह असली वीडियो में कहते हैं- “हम मूँगफली बेचते हैं अपनी अक्ल नहीं। ये मैसेज देखिए। कहते हैं- लॉटरी लगी है, लिंक क्लिक करके यूपीआई पिन डालिए पैसा मिलेगा। हमको मालूम नहीं है क्या, इधर यूपीआई पिन डाला, उधर पैसा गया। याद रहे यूपीआई कहता है कि अगर कोई लालच दे तो कहो- मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

पंकज त्रिपाठी का असली एड देखने वाले यूजर्स ने AAP के इस फर्जीवाड़े को पहचानने में जरा देर नहीं लगाई और पंकज त्रिपाठी को टैग करके कहा कि वो मानहानि का केस करें। वहीं भाजपा ने भी आप की इस हरकत का पलटवार करते हुए कहा कि AAP की राजनीति झूठ, धोखा और फर्जीवाड़े पर आधारित है।

इस पूरे विवाद के बाद AAP ने अपने मुख्य हैंडल से इस वीडियो को हटा लिया जबकि AAP के यूपी पेज पर ये वीडियो खबर लिखने तक भी थी।

अयोध्या, संभल, बांग्लादेश… सबका DNA एक: CM योगी ने इस्लामी कट्टरपंथ के खतरे को लेकर चेताया, कहा- हिंदुओं को बाँटकर कटवाने हो रही तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आक्रान्ता बाबर के एक कमांडर ने अयोध्या और संभल में मंदिर तुड़वाए थे। CM योगी ने कहा कि अब बांग्लादेश में वही काम हो रहा है और इन सभी का DNA एक ही है। उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू पहले एक रहते तो विदेशी आक्रान्ता सफल नहीं होते।

CM योगी ने कहा है कि विदेशी आक्रांताओं के ही जीन वाले लोग आज समाज को जाति में बाँट रहे हैं। CM योगी ने कहा कि बाँटने वालों ने दुनिया के कई देशों में अपनी सम्पत्तियाँ खरीदी हुई हैं और संकट के समय वह वहाँ भाग जाएँगे। उन्होंने लोगों से एकता की अपील की है।

CM योगी ने यह बयान अयोध्या के श्री राम कथा पार्क में ’43वां रामायण मेला’ का शुभारम्भ करते हुए दिया है। यहाँ वह बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को पहुँचे हुए थे। उन्होंने इस दौरान कई धार्मिक मुद्दों और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन और उनके आदर्शों की चर्चा की।

उन्होंने यहाँ कहा, “भगवान राम ने पूरे समाज और सबको जोड़ा था। ये जोड़ने के कार्य को हमने अगर महत्व दिया होता, सामाजिक विद्वेष को आगे बढ़ाने की नीति को अगर सफल नहीं होने देते तो यह देश कभी गुलाम नहीं होता। हमारे तीर्थ अपवित्र नहीं होते।” CM योगी के इस वक्तव्य को आप 33 मिनट से 37 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

CM योगी ने कहा, “चंद मुट्ठी भर आक्रांता आकर भारत को पददलित करने का दुस्साहस नहीं कर पाते। भारत के वीर योद्धा उन्हें रौंद डालते। लेकिन आपसी एकता में बाधा पैदा करने वाले लोग सफल रहे। उन्हीं के जींस वाले लोग आज जाति में तोड़ कर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।”

उन्होंने इसके बाद बांग्लादेश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई। CM योगी कहा, “दुश्मन बगल के देश में किस प्रकार का कृत्य कर रहे हैं। अगर किसी को ग़लतफ़हमी तो याद रखना कि किस प्रकार बाबर के एक सिपाहसालार ने जो कृत्य अयोध्या में किया था, संभल में किया था और जो काम बांग्लादेश में हो रहा है, तीनों की प्रकृति और DNA एक जैसा है।”

CM योगी ने चेताया कि बांग्लादेश की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर कोई मानता है कि जो बांग्लादेश में हो रहा है, तो यहाँ भी बाँटने वाले तत्व उनके लिए बेंट बन कर पहले से खड़े हैं। वह सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं।”

अयोध्या में CM योगी ने इसके बाद बाँटने वालों के विषय में भी बताया। CM योगी बोले, “आपको बाँट कर के कटवाने की पूरी तैयारी है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने विदेशों में जमीन ले रखी है। फिर यहाँ लोग कटते रहेंगे।” CM योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है।

लड़कियों के नाम पर अल्लाह और कुरान की दुहाई बेकार: अफगानिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई पर बैन, क्रिकेटर राशिद खान और मोहम्मद नबी लगा रहे गुहार

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर आए दिन नई रोक लग रही है। हाल में सामने आया कि वहाँ महिलाओं को मेडिसिन से जुड़ी पढ़ाई नहीं करने दी जाएगी। इस फैसले के बाद कई लोगों ने तालिबान सरकार से अनुरोध किया कि वो इस प्रतिबंध पर पुनर्विचार करें। इन लोगों में अफगानिस्तान के स्टार क्रिकेटर राशिद खान और मोहम्मद नबी भी शामिल हैं।

राशिद खान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि वह तालिबानी सरकार के इस फैसले से बहुत दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में तालीम का महत्व सभी के लिए है, और कुरान भी तालीम लेने की आवश्यकता पर जोर देता है।

राशिद ने अपने संदेश में लिखा कि इस निर्णय के प्रभाव से न केवल औरतों के भविष्य पर पड़ेगा, बल्कि समाज के समग्र विकास पर भी इसका गहरा असर होगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवरों की सख्त जरूरत है, खासकर महिला डॉक्टरों और नर्सों की, क्योंकि यह महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल और गरिमा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है। राशिद ने तालिबान से अपील की कि वे अपने फैसले पर पुनर्विचार करें ताकि लड़कियाँ तालीम ले सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।

राशिद के बाद मोहम्मद नबी ने भी राशिद खान के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि तालिबान का यह फैसला बेहद अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस्लाम हमेशा सभी लोगों के लिए शिक्षा के महत्व को मान्यता देता है और मुस्लिम इतिहास में कई प्रेरणादायक महिलाएँ हैं जिन्होंने ज्ञान के माध्यम से समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने तालिबानी सरकार से गुहार लगाई है कि वे कुछ बिंदुओं पर विचार करें और लड़कियों को पढ़ाई करने दें ताकि वे एक बेहतर अफगानिस्तान का निर्माण कर सकें।

बता दें कि तालिबान के सत्ता में वापसी के बाद से महिलाओं पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके है। पहले तालिबान ने छठी कक्षा के बाद लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा बंद की। फिर जो महिलाएँ विश्वविद्यालय जा रही थीं, उनपर भी प्रतिबंध लगा दिया।

7 साल की बच्ची से रेप किया, पत्थर से सिर कुचलकर लाश रेलवे लाइन पर फेंका… हाई कोर्ट ने मौत की सजा उम्र कैद में बदल दी, कहा- पिछड़ी जाति से है, सुधर सकता है

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक शख्स की फांसी की सजा को खत्म कर दिया है। उसे एक 7 वर्षीय बच्ची का रेप और हत्या करने के मामले में यह सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि फांसी की सजा पाने वाला शख्स पिछड़ी जाति (OBC) से ताल्लुक रखता है, इसलिए उसके सुधरने की संभावना को नकारा नहीं जा सकताखत्म

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 26 नवम्बर, 2024 को रेप और हत्या के दोषी दीपक बघेल के मामले में यह फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने इसी के साथ निचली अदालत के फैसले को बदल दिया और फांसी पर अपनी सहमति देने से मना कर दिया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है कि दोषी का सुधार या पुनर्वास नहीं किया जा सकता है क्योंकि अपराध के समय उसकी उम्र लगभग 29 साल थी और वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का व्यक्ति है, इस प्रकार वह पिछड़े समुदाय से जुड़ा है और उसके सुधार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।”

हाई कोर्ट ने बच्ची की हत्या और रेप को गंभीर में भी गंभीरतम अपराध नहीं माना। हाई कोर्ट ने कहा कि मामले के सबूतों और घटनाओं को देख कर नहीं लगता कि यह ऐसा मामला है जिसमें फांसी की सजा दी जाए। कोर्ट ने कहा है कि आजीवन कारावास की सजा इस मामले में न्याय के लिए काफी होगी। हाई कोर्ट ने दीपक बघेल की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और उस पर लगाया गया ₹20,000 का जुर्माना बरकरार रखा है।

क्या था मामला?

यह मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव का है। यहाँ 2021 में दीपक बघेल नाम के एक शख्स अपने पास की एक 7 वर्षीय बच्ची को झांकी दिखाने के बहाने से ले गया था। वह उसके भाई को भी ले गया था। उसने बाद में उसके भाई को झांकी में ही छोड़ दिया जबकि बच्ची को सूनसान जगह ले गया।

यहाँ उसने जबरदस्ती बच्ची के साथ रेप किया। इसके बाद उसने बच्ची के सर पर एक भारी पत्थर मार कर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उसने बच्ची के शव को ट्रेन की पटरियों पर फेंक दिया। इसके कारण उसका शव क्षत-विक्षत हो गया। बच्ची का रेप-हत्या करने के दीपक बघेल अपने घर से भाग गया।

बच्ची का शव मिलने के बाद उसके पिता ने एक FIR दर्ज करवाई थी। दीपक बघेल को इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके घर से पुलिस को बच्ची का ब्रेसलेट और उसकी खून लगी शर्ट मिली थी। हालाँकि, पुलिस से उसने पूछताछ में खुद के निर्दोष होने की बात कही और आरोप लगाया कि उसे फंसाया गया है।

पुलिस ने अपनी जाँच के बाद उसके खिलाफ अपहरण, रेप, हत्या और POCSO एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया था। निचली अदालत में अधिकांश आरोप सही पाए आगे और यहाँ उसे मौत की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही उस पर ₹20000 का जुर्माना लगाया गया।

निचली अदालत में जज ने इस मामले को गंभीर में भी गंभीरतम अपराध पाया और मौत की सजा को सही ठहराया। निचली अदालत ने इसके बाद मौत की सजा को अनुमति देने का मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेजा था। इसी के साथ मौत की सजा समेत बाकी सजाओं के खिलाफ दीपक बघेल ने भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ सुना। हाई कोर्ट के सामने दीपक बघेल ने दावा किया कि वह निर्दोष है और पुलिस इस मामले में सही सबूत नहीं पेश नहीं कर सकी है। दीपक बघेल ने जेल में अपने अच्छे आचरण के चलते फांसी की सजा हटाने की माँग भी की। हाई कोर्ट ने उसकी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया लेकिन मौत की सजा को सही नहीं माना।

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दक्षिण दिल्ली के नेब सराय इलाके का देवली गाँव। इसी गाँव के एक घर में 4 दिसंबर 2024 की सुबह तीन लाश मिली। तीनों हत्या गला काट कर की गई थी। जिनकी हत्या की गई वे थे- 51 साल के राजेश कुमार, उनकी 46 वर्षीय पत्नी कोमल और 23 साल की बेटी कविता। पुलिस को हत्या की सूचना राजेश के ही 20 साल के बेटे अर्जुन ने दी, जिसका कहना था कि वह घटना के समय मॉर्निंग वॉक पर गया था।

राजेश मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गाँव खेड़ी तलवाना के निवासी थे। हत्या की यह वारदात जिस इलाके की है वह सघन बस्ती वाला क्षेत्र है। मकान एक-दूसरे से सटे हैं। बावजूद किसी ने मरने वालों की चीख नहीं सुनी। पुलिस ने पाया कि घर का कोई सामान भी गायब नहीं है। पड़ोसियों ने बताया कि राजेश का किसी से कोई विवाद नहीं था। घर में हत्यारों के साथ संघर्ष के भी कोई निशान नहीं थे, जबकि राजेश सेना से रिटायर थे। एनएसजी में भी रह चुके थे। फिलहाल सिक्योरिटी अफसर का काम कर रहे थे। वहीं उनकी बेटी जूडो में ब्लैक बेल्ट थी।

आसपास के सीसीटीवी खँगाले गए तो कोई बाहर से घर में घुसता भी नहीं दिखा। मेन गेट पर जो ताला गला था उसे भी तोड़ा नहीं गया था।ऐसे में पुलिस यह समझ नहीं पा रही थी कि मेन गेट पर ताला लगे होने के बाद भी कोई कैसे बाहर से आकर हत्या कर सकता है और फिर फरार हो सकता। पुलिस को अर्जुन की कहानी पर शक हुआ। उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने तीनों हत्या कबूल कर ली।

रिपोर्टों के अनुसार अर्जुन ने पुलिस को बताया कि उसे बॉक्सिंग करना पसंद था। लेकिन पिता पढ़ाई नहीं करने को लेकर टोकते रहते थे। हाल ही में सबके सामने उसकी पिटाई भी कर दी थी। उसे यह भी लगता था कि माँ-बाप उसकी बहन कविता को अधिक प्यार करते हैं। उसे लगता था कि वे सारी संपत्ति भी उसकी बहन के नाम कर देंगे। इसी नफरत में उसने तीनों की हत्या करने का प्लान बनाया।

उसने जिस धारदार चाकू से तीनों हत्या की वह उसके पिता की ही थी। इसे अर्जुन ने छिपाकर रखा था। वह काफी समय से हत्या की प्लानिंग कर रहा था। 4 दिसंबर को उसके माता-पिता की शादी की 27वीं सालगिरह थी, इसलिए हत्या के लिए यही दिन चुना।

अपनी प्लानिंग के अनुसार 4 दिसंबर को उसने एक-एक कर तीनों की हत्या कर दी। सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर सो रही बहन का गला रेता। फिर ऊपर की मंजिल पर सो रहे पिता का गला काटा। उनके सिर पर भी चाकू से वार किए। उसकी मां बाथरूम में थी। जैसे ही वह बाहर निकली उनके गले पर भी चाकू से वार कर दिया। तीनों हत्या करने के बाद वह आराम से टहलने निकल गया। फिर एक घंटे बाद लौटकर घटना को अलग रंग देने में जुट गया।

पड़ोसियों को चीख नहीं सुनाई दे इसलिए उसने सबके गले पर झटके से वार किया। खून रोकने के लिए गर्दन पर चाकू मारते ही वह कपड़े से दबा देता था। उल्लेखनीय है कि राजेश के गले में चुन्नी लिपटी हुई थी, जबकि कोमल और कविता का शव कंबल से ढका हुआ मिला था।