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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह ढाँचा केस में गलत रिपोर्टिंग ‘कोर्ट की अवमानना’: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मीडिया को दी सख्त चेतावनी, कहा- कोर्ट की पवित्रता बनाए रखें

जज राममनोहर नारायण मिश्रा ने कहा कि इस मामले में किसी भी आदेश या कार्यवाही की कोई भी गैर-जिम्मेदाराना या गलत रिपोर्टिंग न्यायालय की अवमानना ​​मानी जाएगी। जज मिश्रा ने कहा, "न्यायालय उम्मीद करता है कि मीडियाकर्मी इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय उचित संयम बरतेंगे और इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखेंगे।"

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह ढाँचा विवाद मामले में सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही की गैर-जिम्मेदाराना या किसी भी तरह की गलत रिपोर्टिंग कोर्ट की अवमानना है। कोर्ट ने मामले की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया से संयम बरतने के लिए कहा।

मामले की सुनवाई कर रहे जज राममनोहर नारायण मिश्रा ने कहा कि इस मामले में किसी भी आदेश या कार्यवाही की कोई भी गैर-जिम्मेदाराना या गलत रिपोर्टिंग न्यायालय की अवमानना ​​मानी जाएगी। जज मिश्रा ने कहा, “न्यायालय उम्मीद करता है कि मीडियाकर्मी इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय उचित संयम बरतेंगे और इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखेंगे।”

दरअसल, केस नंबर 18 से जुड़े एक वकील ने कोर्ट में आवेदन देकर इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया द्वारा गलत रिपोर्टिंग का आरोप लगाया था। इसके साथ ही कोर्ट से इसको निर्देश देने की माँग की गई थी। अन्य पक्षों ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी। बता दें कि इस केस से जुड़े कई मामलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

इससे संबंधित मूल मुकदमे में मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर इसकी जमीन को श्रीकृष्ण जन्मभूमि भूमि को लौटाने की माँग की गई है। मूल मुकदमे में कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़कर उस जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद को बनाया गया है। यह मामला मथुरा के सिविल कोर्ट में लंबित था, लेकिन साल मई 2023 में हाई कोर्ट ने इस मामले को अपने हाथों में ले लिया।

इस साल जनवरी में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर उनकी सुनवाई शुरू की थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इन सभी मुकदमों को एक साथ सुनवाई करने का विरोध किया था। इस साल अक्टूबर में हाई कोर्ट ने मुकदमों को एकीकृत करने के अपने निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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