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ढाँचों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बनाया जो कानून, उसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: बोले विष्णु शंकर जैन- मंदिरों पर मोहम्मद बिन कासिम के हमलों से पहले की स्थिति बहाल हो

हिन्दू हितों के लिए काम करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि 1991 में लाया गया प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट असंवैधानिक है। उन्होंने कहा है कि इसमें मंदिरों और बाकी धार्मिक स्थलों की जोस्थिति को तय करने वाली जो तारीख रखी गई है, वह गलत है। जैन ने इस कानून को नागरिक अधिकारों का हनन बताया है।

वकील विष्णु शंकर ने इस मामले में हिन्दू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से माँग की है कि इस कानून को असंवैधानिक घोषित किया जाए। इस संबंध में गुरुवार (5 दिसम्बर, 2024) को हुई सुनवाई के बाद उन्होंने इसकी कमियाँ भी गिनवाई हैं।

विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से कहा, “हमने प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 की संवैधानिक मान्यता को चुनौती दी है। हमारा कहना है कि इस एक्ट का जो मतलब जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द बता रहा है, वह असंवैधानिक है। दूसरी सबसे जरूरी बात यह है कि इस एक्ट में कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 क्यों है, यह तारीख 712 ईस्वी क्यों नहीं है?”

जैन ने आगे कहा, “जब मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में मंदिरों में तोड़ा था, वही तारीख कट ऑफ होनी चाहिए। कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 होनी ही नहीं चाहिए। यह असंवैधानिक है। संसद को ऐसा क़ानून बनाने की कोई शक्ति नहीं है जो लोगों को अदालत जाने से रोकता है। यह संविधान के मूल ढाँचे और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।”

गौरतलब है कि प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट को लेकर 6 याचिकाएँ दायर की गई हैं। हिन्दू पक्ष की इनकी तरफ से विष्णु शंकर जैन बहस कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यों वाली बेंच कर रही है। कानून के समर्थन में जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द भी सुप्रीम कोर्ट में है।

क्या है 1991 का प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट?

पूजास्थल अधिनियम, 1991 या फिर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट, 1991 पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार 1991 में लेकर आई थी। इस कानून के जरिए किसी भी धार्मिक स्थल की प्रकृति यानी वह मस्जिद है मंदिर या फिर चर्च-गुरुद्वारा, यह निर्धारित करने को लेकर नियम बनाए गए हैं।

इस कानून के अनुसार, देश के आजाद होने के दिन यानी 15 अगस्त, 1947 को जिस धार्मिक स्थल की स्थिति जैसी थी, वैसी ही रहेगी। यानि इस दिन यदि कोई स्थान मस्जिद था तो वह मस्जिद रहेगा। कानून में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल का स्वरुप बदलने की कोशिश करेगा तो उसकी 3 वर्ष तक का कारावास हो सकता है।

इसी कानून में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी धार्मिक स्थल के स्वरुप के बदलने को लेकर याचिका कोर्ट में लगाएगा तो वह भी नहीं मानी जाएगी। यानि कोई भी व्यक्ति किसी मस्जिद के मंदिर होने का दावा नहीं कर सकता या फिर किसी मंदिर के मस्जिद होने का दावा नहीं किया जा सकता।

कानून में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि यह स्पष्ट तौर पर साबित हो जाए कि इतिहास में किसी धार्मिक स्थल की प्रकृति में बदलाव किए गए थे तो भी उसका स्वरुप नहीं बदला जाएगा। यानी यह सिद्ध भी हो जाए कि किसी मंदिर को इतिहास में तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी तो भी उसे अब दोबारा मंदिर में नहीं बदला जा सकता।

कुल मिलाकर यह कानून कहता है कि 1947 के पहले जिस भी धार्मिक स्थल में जो कुछ बदलाव हो गए या फिर उस दिन जैसे थे, वह वैसे ही रहेंगे। उनके ऊपर अब कोई दावा नहीं किया जा सकेगा। इसी कानून में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

इस कानून में कई छूट भी दी गई हैं। यह कानून कहता है कि यदि किसी धार्मिक स्थल में बदलाव 15 अगस्त, 1947 के बाद हुए हैं तो ऐसे में कानूनी लड़ाई हो सकती है। इसके अलावा ASI द्वारा संरक्षित स्मारकों को लेकर भी इसमें छूट दी गई है।

विरोध क्यों हो रहा, क्या कहा विरोध में?

प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट का विरोध कोई नई बात नहीं है। इस कानून के पास किए जाने के समय ही इसका विरोध भाजपा ने किया था। हिन्दू संगठनों ने तब भी इसको लेकर आपत्ति जताई थी। अब इस कानून के खिलाफ लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है।

इस कानून को हिन्दुओं की तरफ से सुब्रमण्यम स्वामी, अश्विनी उपाध्याय और बाकी संगठनों ने चुनौती दी है। वहीं मुस्लिमों की तरफ से आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ने याचिका दायर की है। इस मामले में नई याचिका ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी ने दायर की है। उसका कहना है कि वह भी प्रभावित है।

मुस्लिम चाहते हैं कि इस कानून के खिलाफ दायर की गई याचिकाएँ खारिज कर दी जाएँ और कानून को पूरी तरह से लागू किया जाए। उनका कहना है कि कानून के तहत अब किसी भी मुस्लिम मजहबी स्थल पर दावा नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून के जरिए उन सभी धार्मिक स्थलों को कानूनी मान्यता दे दी गई जिनका स्वरुप 1947 से पहले बदल दिया गया था। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून की धारा 2,3 और 4 को रद्द कर दिया जाए। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि कानून के चलते उन धार्मिक स्थलों को भी वह वापस नहीं ले सकते, जिनको आक्रांताओं ने तोड़ा था।

हिन्दू पक्ष ने इस कानून को संसद में पास किए जाने का भी विरोध किया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यह ऐसा कानून है जो लोगों को न्यायालय के दरवाजे खटखटाने से रोकता है ऐसे में यह असंवैधानिक है। हिन्दू पक्ष ने इसके अलावा कानून की संवैधानिकता पर भी प्रश्न उठाए हैं।

साइबर फ्रॉड से बचाने को पंकज त्रिपाठी ने बनाया ‘मूर्ख नहीं हूँ’ Video , AAP ने उसमें भी कर दिया ‘फर्जीवाड़ा’: पकड़े जाने पर पोस्ट डिलीट, नेटिजन्स बोले- एक्टर करें मानहानि का केस

दिल्ली विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया पर भारी फजीहत हुई है। उनके आधिकारिक हैंडल से अभिनेता पंकज त्रिपाठी की एक एडिटिड वीडियो शेयर की गई जिसमें AI की मदद से ऐसा दिखाया गया है कि पंकज त्रिपाठी दिल्ली की जनता को बीजेपी के खिलाफ वोट करने को कह रहे हैं।

जब यूजर्स ने इसे देखा तो तुरंत वो AAP के फर्जीवाड़े को पहचान गए और अभिनेता से अपील की गई कि पार्टी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। विवाद बढ़ता देख AAP के मुख्य हैंडल से वीडियो को हटा लिया गया है, लेकिन अन्य जगह ये अब भी मौजूद है।

पंकज त्रिपाठी के नाम पर आप ने फैलाया झूठ

फर्जी वीडियो में देख सकते हैं कि पंकज त्रिपाठी को कहते दिखाया जाता है- “हम मूँगफली बेचते हैं, अपनी अक्ल नहीं। मैसेज देखिए भाजपा वालों ने भेजा है। कहते हैं वोट करो, हम विकास करेंगे। हमें मालूम नहीं है क्या। इधर हम वोट करेंगे उधर सरकारी पैसा गायब। मूँगफली वाला हूँ मूर्ख नहीं हूँ। यदि भाजपा के लोग लालच दें तो कहो-मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

अब अगर पंकज त्रिपाठी की असली वीडियो को देखें तो पता चलेगा कि वो हकीकत में ऑनलाइन फ्रॉड के विरुद्ध जागरुकता फैला रहे हैं जिसे AAP ने प्रोपगेंडा बनाकर साझा किया। वह असली वीडियो में कहते हैं- “हम मूँगफली बेचते हैं अपनी अक्ल नहीं। ये मैसेज देखिए। कहते हैं- लॉटरी लगी है, लिंक क्लिक करके यूपीआई पिन डालिए पैसा मिलेगा। हमको मालूम नहीं है क्या, इधर यूपीआई पिन डाला, उधर पैसा गया। याद रहे यूपीआई कहता है कि अगर कोई लालच दे तो कहो- मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

पंकज त्रिपाठी का असली एड देखने वाले यूजर्स ने AAP के इस फर्जीवाड़े को पहचानने में जरा देर नहीं लगाई और पंकज त्रिपाठी को टैग करके कहा कि वो मानहानि का केस करें। वहीं भाजपा ने भी आप की इस हरकत का पलटवार करते हुए कहा कि AAP की राजनीति झूठ, धोखा और फर्जीवाड़े पर आधारित है।

इस पूरे विवाद के बाद AAP ने अपने मुख्य हैंडल से इस वीडियो को हटा लिया जबकि AAP के यूपी पेज पर ये वीडियो खबर लिखने तक भी थी।

अयोध्या, संभल, बांग्लादेश… सबका DNA एक: CM योगी ने इस्लामी कट्टरपंथ के खतरे को लेकर चेताया, कहा- हिंदुओं को बाँटकर कटवाने हो रही तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आक्रान्ता बाबर के एक कमांडर ने अयोध्या और संभल में मंदिर तुड़वाए थे। CM योगी ने कहा कि अब बांग्लादेश में वही काम हो रहा है और इन सभी का DNA एक ही है। उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू पहले एक रहते तो विदेशी आक्रान्ता सफल नहीं होते।

CM योगी ने कहा है कि विदेशी आक्रांताओं के ही जीन वाले लोग आज समाज को जाति में बाँट रहे हैं। CM योगी ने कहा कि बाँटने वालों ने दुनिया के कई देशों में अपनी सम्पत्तियाँ खरीदी हुई हैं और संकट के समय वह वहाँ भाग जाएँगे। उन्होंने लोगों से एकता की अपील की है।

CM योगी ने यह बयान अयोध्या के श्री राम कथा पार्क में ’43वां रामायण मेला’ का शुभारम्भ करते हुए दिया है। यहाँ वह बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को पहुँचे हुए थे। उन्होंने इस दौरान कई धार्मिक मुद्दों और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन और उनके आदर्शों की चर्चा की।

उन्होंने यहाँ कहा, “भगवान राम ने पूरे समाज और सबको जोड़ा था। ये जोड़ने के कार्य को हमने अगर महत्व दिया होता, सामाजिक विद्वेष को आगे बढ़ाने की नीति को अगर सफल नहीं होने देते तो यह देश कभी गुलाम नहीं होता। हमारे तीर्थ अपवित्र नहीं होते।” CM योगी के इस वक्तव्य को आप 33 मिनट से 37 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

CM योगी ने कहा, “चंद मुट्ठी भर आक्रांता आकर भारत को पददलित करने का दुस्साहस नहीं कर पाते। भारत के वीर योद्धा उन्हें रौंद डालते। लेकिन आपसी एकता में बाधा पैदा करने वाले लोग सफल रहे। उन्हीं के जींस वाले लोग आज जाति में तोड़ कर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।”

उन्होंने इसके बाद बांग्लादेश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई। CM योगी कहा, “दुश्मन बगल के देश में किस प्रकार का कृत्य कर रहे हैं। अगर किसी को ग़लतफ़हमी तो याद रखना कि किस प्रकार बाबर के एक सिपाहसालार ने जो कृत्य अयोध्या में किया था, संभल में किया था और जो काम बांग्लादेश में हो रहा है, तीनों की प्रकृति और DNA एक जैसा है।”

CM योगी ने चेताया कि बांग्लादेश की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर कोई मानता है कि जो बांग्लादेश में हो रहा है, तो यहाँ भी बाँटने वाले तत्व उनके लिए बेंट बन कर पहले से खड़े हैं। वह सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं।”

अयोध्या में CM योगी ने इसके बाद बाँटने वालों के विषय में भी बताया। CM योगी बोले, “आपको बाँट कर के कटवाने की पूरी तैयारी है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने विदेशों में जमीन ले रखी है। फिर यहाँ लोग कटते रहेंगे।” CM योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है।

लड़कियों के नाम पर अल्लाह और कुरान की दुहाई बेकार: अफगानिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई पर बैन, क्रिकेटर राशिद खान और मोहम्मद नबी लगा रहे गुहार

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर आए दिन नई रोक लग रही है। हाल में सामने आया कि वहाँ महिलाओं को मेडिसिन से जुड़ी पढ़ाई नहीं करने दी जाएगी। इस फैसले के बाद कई लोगों ने तालिबान सरकार से अनुरोध किया कि वो इस प्रतिबंध पर पुनर्विचार करें। इन लोगों में अफगानिस्तान के स्टार क्रिकेटर राशिद खान और मोहम्मद नबी भी शामिल हैं।

राशिद खान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि वह तालिबानी सरकार के इस फैसले से बहुत दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में तालीम का महत्व सभी के लिए है, और कुरान भी तालीम लेने की आवश्यकता पर जोर देता है।

राशिद ने अपने संदेश में लिखा कि इस निर्णय के प्रभाव से न केवल औरतों के भविष्य पर पड़ेगा, बल्कि समाज के समग्र विकास पर भी इसका गहरा असर होगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवरों की सख्त जरूरत है, खासकर महिला डॉक्टरों और नर्सों की, क्योंकि यह महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल और गरिमा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है। राशिद ने तालिबान से अपील की कि वे अपने फैसले पर पुनर्विचार करें ताकि लड़कियाँ तालीम ले सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।

राशिद के बाद मोहम्मद नबी ने भी राशिद खान के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि तालिबान का यह फैसला बेहद अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस्लाम हमेशा सभी लोगों के लिए शिक्षा के महत्व को मान्यता देता है और मुस्लिम इतिहास में कई प्रेरणादायक महिलाएँ हैं जिन्होंने ज्ञान के माध्यम से समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने तालिबानी सरकार से गुहार लगाई है कि वे कुछ बिंदुओं पर विचार करें और लड़कियों को पढ़ाई करने दें ताकि वे एक बेहतर अफगानिस्तान का निर्माण कर सकें।

बता दें कि तालिबान के सत्ता में वापसी के बाद से महिलाओं पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके है। पहले तालिबान ने छठी कक्षा के बाद लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा बंद की। फिर जो महिलाएँ विश्वविद्यालय जा रही थीं, उनपर भी प्रतिबंध लगा दिया।

7 साल की बच्ची से रेप किया, पत्थर से सिर कुचलकर लाश रेलवे लाइन पर फेंका… हाई कोर्ट ने मौत की सजा उम्र कैद में बदल दी, कहा- पिछड़ी जाति से है, सुधर सकता है

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक शख्स की फांसी की सजा को खत्म कर दिया है। उसे एक 7 वर्षीय बच्ची का रेप और हत्या करने के मामले में यह सजा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि फांसी की सजा पाने वाला शख्स पिछड़ी जाति (OBC) से ताल्लुक रखता है, इसलिए उसके सुधरने की संभावना को नकारा नहीं जा सकताखत्म

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 26 नवम्बर, 2024 को रेप और हत्या के दोषी दीपक बघेल के मामले में यह फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने इसी के साथ निचली अदालत के फैसले को बदल दिया और फांसी पर अपनी सहमति देने से मना कर दिया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है कि दोषी का सुधार या पुनर्वास नहीं किया जा सकता है क्योंकि अपराध के समय उसकी उम्र लगभग 29 साल थी और वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का व्यक्ति है, इस प्रकार वह पिछड़े समुदाय से जुड़ा है और उसके सुधार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।”

हाई कोर्ट ने बच्ची की हत्या और रेप को गंभीर में भी गंभीरतम अपराध नहीं माना। हाई कोर्ट ने कहा कि मामले के सबूतों और घटनाओं को देख कर नहीं लगता कि यह ऐसा मामला है जिसमें फांसी की सजा दी जाए। कोर्ट ने कहा है कि आजीवन कारावास की सजा इस मामले में न्याय के लिए काफी होगी। हाई कोर्ट ने दीपक बघेल की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और उस पर लगाया गया ₹20,000 का जुर्माना बरकरार रखा है।

क्या था मामला?

यह मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव का है। यहाँ 2021 में दीपक बघेल नाम के एक शख्स अपने पास की एक 7 वर्षीय बच्ची को झांकी दिखाने के बहाने से ले गया था। वह उसके भाई को भी ले गया था। उसने बाद में उसके भाई को झांकी में ही छोड़ दिया जबकि बच्ची को सूनसान जगह ले गया।

यहाँ उसने जबरदस्ती बच्ची के साथ रेप किया। इसके बाद उसने बच्ची के सर पर एक भारी पत्थर मार कर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उसने बच्ची के शव को ट्रेन की पटरियों पर फेंक दिया। इसके कारण उसका शव क्षत-विक्षत हो गया। बच्ची का रेप-हत्या करने के दीपक बघेल अपने घर से भाग गया।

बच्ची का शव मिलने के बाद उसके पिता ने एक FIR दर्ज करवाई थी। दीपक बघेल को इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके घर से पुलिस को बच्ची का ब्रेसलेट और उसकी खून लगी शर्ट मिली थी। हालाँकि, पुलिस से उसने पूछताछ में खुद के निर्दोष होने की बात कही और आरोप लगाया कि उसे फंसाया गया है।

पुलिस ने अपनी जाँच के बाद उसके खिलाफ अपहरण, रेप, हत्या और POCSO एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया था। निचली अदालत में अधिकांश आरोप सही पाए आगे और यहाँ उसे मौत की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही उस पर ₹20000 का जुर्माना लगाया गया।

निचली अदालत में जज ने इस मामले को गंभीर में भी गंभीरतम अपराध पाया और मौत की सजा को सही ठहराया। निचली अदालत ने इसके बाद मौत की सजा को अनुमति देने का मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेजा था। इसी के साथ मौत की सजा समेत बाकी सजाओं के खिलाफ दीपक बघेल ने भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ सुना। हाई कोर्ट के सामने दीपक बघेल ने दावा किया कि वह निर्दोष है और पुलिस इस मामले में सही सबूत नहीं पेश नहीं कर सकी है। दीपक बघेल ने जेल में अपने अच्छे आचरण के चलते फांसी की सजा हटाने की माँग भी की। हाई कोर्ट ने उसकी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया लेकिन मौत की सजा को सही नहीं माना।

जिस दिन माँ-बाप की शादी की सालगिरह उस दिन ही उनका गला काट डाला, बहन को भी नहीं छोड़ा… मॉर्निंग वॉक से लौट रची ट्रिपल मर्डर की कहानी, ताले से खुली

दक्षिण दिल्ली के नेब सराय इलाके का देवली गाँव। इसी गाँव के एक घर में 4 दिसंबर 2024 की सुबह तीन लाश मिली। तीनों हत्या गला काट कर की गई थी। जिनकी हत्या की गई वे थे- 51 साल के राजेश कुमार, उनकी 46 वर्षीय पत्नी कोमल और 23 साल की बेटी कविता। पुलिस को हत्या की सूचना राजेश के ही 20 साल के बेटे अर्जुन ने दी, जिसका कहना था कि वह घटना के समय मॉर्निंग वॉक पर गया था।

राजेश मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गाँव खेड़ी तलवाना के निवासी थे। हत्या की यह वारदात जिस इलाके की है वह सघन बस्ती वाला क्षेत्र है। मकान एक-दूसरे से सटे हैं। बावजूद किसी ने मरने वालों की चीख नहीं सुनी। पुलिस ने पाया कि घर का कोई सामान भी गायब नहीं है। पड़ोसियों ने बताया कि राजेश का किसी से कोई विवाद नहीं था। घर में हत्यारों के साथ संघर्ष के भी कोई निशान नहीं थे, जबकि राजेश सेना से रिटायर थे। एनएसजी में भी रह चुके थे। फिलहाल सिक्योरिटी अफसर का काम कर रहे थे। वहीं उनकी बेटी जूडो में ब्लैक बेल्ट थी।

आसपास के सीसीटीवी खँगाले गए तो कोई बाहर से घर में घुसता भी नहीं दिखा। मेन गेट पर जो ताला गला था उसे भी तोड़ा नहीं गया था।ऐसे में पुलिस यह समझ नहीं पा रही थी कि मेन गेट पर ताला लगे होने के बाद भी कोई कैसे बाहर से आकर हत्या कर सकता है और फिर फरार हो सकता। पुलिस को अर्जुन की कहानी पर शक हुआ। उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने तीनों हत्या कबूल कर ली।

रिपोर्टों के अनुसार अर्जुन ने पुलिस को बताया कि उसे बॉक्सिंग करना पसंद था। लेकिन पिता पढ़ाई नहीं करने को लेकर टोकते रहते थे। हाल ही में सबके सामने उसकी पिटाई भी कर दी थी। उसे यह भी लगता था कि माँ-बाप उसकी बहन कविता को अधिक प्यार करते हैं। उसे लगता था कि वे सारी संपत्ति भी उसकी बहन के नाम कर देंगे। इसी नफरत में उसने तीनों की हत्या करने का प्लान बनाया।

उसने जिस धारदार चाकू से तीनों हत्या की वह उसके पिता की ही थी। इसे अर्जुन ने छिपाकर रखा था। वह काफी समय से हत्या की प्लानिंग कर रहा था। 4 दिसंबर को उसके माता-पिता की शादी की 27वीं सालगिरह थी, इसलिए हत्या के लिए यही दिन चुना।

अपनी प्लानिंग के अनुसार 4 दिसंबर को उसने एक-एक कर तीनों की हत्या कर दी। सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर सो रही बहन का गला रेता। फिर ऊपर की मंजिल पर सो रहे पिता का गला काटा। उनके सिर पर भी चाकू से वार किए। उसकी मां बाथरूम में थी। जैसे ही वह बाहर निकली उनके गले पर भी चाकू से वार कर दिया। तीनों हत्या करने के बाद वह आराम से टहलने निकल गया। फिर एक घंटे बाद लौटकर घटना को अलग रंग देने में जुट गया।

पड़ोसियों को चीख नहीं सुनाई दे इसलिए उसने सबके गले पर झटके से वार किया। खून रोकने के लिए गर्दन पर चाकू मारते ही वह कपड़े से दबा देता था। उल्लेखनीय है कि राजेश के गले में चुन्नी लिपटी हुई थी, जबकि कोमल और कविता का शव कंबल से ढका हुआ मिला था।

जब मारे जा रहे थे हिंदू, तब गरिया रही थी RSS को, बता रही थी हिंदुत्व प्रोपेगेंडा… जब खुद का घर जला दिया इस्लामी कट्टरपंथियों ने तो चिल्ला रही बाप-बाप: मिलिए वामपंथी प्राप्ति तापोशी से

बांग्लादेश की एक हिन्दू युवती ने शेख हसीना के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों का साथ दिया। उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ भी जहर उगला और हिन्दुओं के बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों को भारत का एजेंडा बताया। हिन्दुओं के खिलाफ बोलने पर उसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने खूब सराहा, यहाँ तक कि इस्लामी प्रोपेगेंडा फ़ैलाने वाले चैनल अल जजीरा ने भी उसको जगह दी। अब उसके घर पर ही इस्लामी कट्टरपन्थियों ने हमला बोल दिया है। इसके बाद उसने सरकार की खिलाफत चालू कर दी है।

इस युवती का नाम प्राप्ति तापोशी है। वह बांग्लादेश के जहाँगीरनगर विश्वविद्यालय की छात्रा है। वह लगातार विरोध प्रदर्शन और जलसों में शामिल होती रहती है। उसने लगातार हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगला है और बांग्लादेश में होने वाली हिन्दू विरोधी हिंसा को नकारा है।

लेकिन अब प्राप्ति ने फेसबुक पर अपने घर इस्लामी कट्टरपंथियों की लूट को लेकर एक पोस्ट लिखा है। फेसबुक ट्रांसलेशन के अनुसार, प्राप्ति ने लिखा, ” सुनामगंज में कल रात मेरे घर और हिन्दुओं पर हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की गई… अभी तक पुलिस की ओर से मारपीट और लूटपाट के आरोप में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। कितने घरों और दुकानों में लूटपाट हुई है, इस बारे में भी सरकार ने साफ़ कोई जानकारी नहीं दी है। प्रशासन कह रहा है कि यहाँ कुछ नहीं हुआ।”

प्राप्ति ने दावा किया कि अगर ऐसा ही माहौल रहा तो हिंदुत्ववादियों की ‘अफवाहें’ और जोर पकड़ेंगी। उसने पुलिस और प्रशासन को सबसे बड़ा दोषी ठहराया। गौरतलब है कि सुनामगंज में लगातार हिन्दू विरोधी हिंसा हो रही है। इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक हिन्दू युवक आकाश दास की एक सोशल मीडिया पोस्ट को ईशनिंदा बता कर हिन्दुओं को निशाना बनाया है। 100 से अधिक हिन्दू घरों और साथ ही में मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई है। इस कारण से 200 हिन्दू यहाँ से भागने को मजबूर हो गए हैं।

प्राप्ति तापोशी अपने घर पर हुए हमले के बाद भले ही पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रही हो लेकिन इससे पहले वह बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार को नकार रही थी। वह इसे आरएसएस और भारत का एजेंडा बता रही थी। उसका कहना था कि हिन्दुओं को राजनीतिक लाभ के लिए मोहरा बनाया जा रहा है और उन्हें हिंदुत्व के एजेंडे में धकेला जा रहा है। इसको लेकर उसने जोर-शोर से सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थीं।

प्राप्ति सिर्फ हिन्दू और आरएसएस को ही नहीं गालियाँ देती बल्कि वह BSF के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। उसका आरोप था कि BSF ने बांग्लादेश और भारत की सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या की है। उसने इस संबंध में एक रैली भी निकाली थी।

यही नहीं उसने पीएम मोदी को लेकर भी अभद्र कार्टून साझा किए थे और भारत पर बांग्लादेश में बाढ़ लाने का आरोप जड़ा था। उसका आरोप था कि भारत ने बाँध के दरवाजे खोल दिए जिसके कारण यह बाढ़ आ गई। हालाँकि, यह पूरी तरह झूठ था।

भारत और हिन्दू विरोधी एजेंडा को बढ़ाने के चलते उसे अल जजीरा ने भी जगह दी थी। प्राप्ति तापोशी को बांग्लादेश की एक्सपर्ट के रूप में अल जजीरा ने बुलाया था। अल जजीरा लगातार भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा करता रहा है।

इके पहले उसने बांग्लादेश में छात्रों के सहारे किए गए इस्लामी कट्टरपंथियों को भी खूब समर्थन दिया था। वह हमास का भी समर्थन करती है। वह इजरायल के खिलाफ हमास और बाकी समूहों की जंग ‘इंतिफादा’ की भी समर्थन है। हालाँकि, उसको अब तक लगता था कि इस्लामी कट्टरपंथियों के कहर से वह बचेगी। लेकिन अब जब उसके गृह नगर सुनामगंज में इस्लामी भीड़ आई तो उसको भी नहीं बख्शा।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्तापलट के बाद से लगातर हिन्दू निशाने पर हैं। बांग्लादेश में इस्लामी भीड़ कहीं ईशनिंदा के बहाने तो कहीं आवामी लीग का समर्थक होने के बहाने हिन्दुओं पर हमला कर रही है। हिन्दुओं की इस प्रताड़ना में यूनुस सरकार पूरा साथ दे रही है।

हिन्दुओं पर प्रताड़ना के खिलाफ बोलने वाले संत चिन्मय कृष्ण दास को भी बांग्लादेश में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके वकील पर भी जानलेवा हमला हुआ। स्थितियाँ इतनी खराब हैं कि इस्कॉन ने बांग्लादेश में हिन्दुओं को तिलक और तुलसी माला छोड़ने को कहा है। बांग्लादेश में हिन्दुओं के घरों को जलाया और लूटा जा रहा है। बांग्लादेश इस सब हिंसा को नजरअंदाज कर रहा है।

200+ हिंदू परिवार घर छोड़ भागने पर मजबूर, 20 मंदिरों में तोड़फोड़: बांग्लादेश के सुनामगंज में बरसा इस्लामी भीड़ का कहर, फेसबुक पोस्ट पर किया दंगा

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार थमे नहीं हैं। हाल में वहाँ सुनामगंज जिले में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के घरों और मंदिरों को निशाना बनाया। इस बार उन्होंने एक हिंदू युवक के पोस्ट को आधार बनाकर हिंसा को अंजाम दिया और कई हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की।

कहा जा रहा है कि 3 दिसंबर 2024 को 21 साल के हिंदू युवक ने अपने फेसबुक पोस्ट में हेफज़ात-ए-इस्लाम के नेता मावलाना मुफ्ती मामुनुल हक की आलोचना की थी। इसी को ईशनिंदा बताकर हजारों कट्टरपंथी इकट्ठा हुए और स्थानीय हिंदुओं के घरों और दुकानों पर धावा बोल दिया।

इस क्रम में 3 दिसंबर की रात को बांग्लादेश के सुनामगंज इलाके के दोराबाजार में इस्लामी भीड़ ने 130 घरों और 20 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की। अब घटना के बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। फेसबुक पोस्ट करने वाले युवक का नाम आकाश दास पता चला है। पुलिस पता लगा रही है कि आखिर हमले कहाँ-कहाँ हुए। फिलहाल स्थिति को संभालने के लिए मोंगलागाँव में भारी पुलिस बल और सेना को तैनात किया गया है।

दोवाराबाजार पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी जाहिदुल हक ने बताया कि जब स्थानीय लोगों ने फेसबुक पोस्ट से नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया, तो उन्होंने आकाश दास को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार इसके बाद भीड़ ने पुलिस टीम पर भी हमला किया और उसे छीनने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति और कई अन्य हिंदू लोगों के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की।

इस घटना को लेकर सुनामगंज कस्बे में केंद्रीय लोकनाथ मंदिर के महासचिव खोकन रॉय ने कहा, “भीड़ ने लोकनाथ मंदिर में भी तोड़फोड़ की और 15 लाख टका से अधिक मूल्य के कीमती सामान चुरा लिए। उन्होंने लगभग 100 घरों में भी तोड़फोड़ की। उपजिला पूजा उद्जन परिषद के अध्यक्ष गुरु डे के घर और पारिवारिक मंदिर में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने कई स्वर्ण आभूषण की दुकानों और हिंदुओं की दुकानों में भी लूटपाट की।”

गौरतलब है कि सुनामगंज की इस घटना के बाद हिंदू सवाल कर रहे हैं कि आखिर अगर गलती एक इंसान ने की थी तो उन सबको इसके लिए क्यों भुगतान करना पड़ा? वहीं पुलिस ने इस घटना को लेकर संदेह जताया है कि ये घटना संभवत: सुनियोजित थी।

बता दें कि बीते कुछ दिनों में बांग्लादेश में कई जगह हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं, लेकिन फिर भी बांग्लादेशी मीडिया जगह-जगह ये बता रहा है कि अंतरिम सरकार के आने के बाद हिंदू पूरी तरह सुरक्षित हैं। यूनुस सरकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने दावा किया कि भारतीय मीडिया बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने के बारे में झूठी बातें फैला रहा है जबकि हकीकत में यहाँ ऐसा कुछ नहीं है।

ये बयान उस बीच सामने आए हैं जब चटगाँव में हिंदू मंदिर पर हमला हुआ। इस्कॉन प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार करके उनपर देशद्रोह लगा दिया गया है, वकील रमेन रॉय पर हमला हुआ है। वहीं मीडिया रिपोर्ट दावा करती हैं कि ऐसी स्थिति के कारण हाल ही में वहाँ से 200 से अधिक हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं।

गोमांस खाने पर साथ आए कॉन्ग्रेसी सांसद गोगोई और AIDUF विधायक रफीकुल इस्लाम: हिमंता सरकार के गोमांस खाने पर सार्वजनिक बैन के लिए कहा – ‘ये RSS का एजेंडा’

असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के सार्वजनिक जगहों पर गोमांस परोसे जाने के बैन पर कॉन्ग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF गुस्सा हो गई है। कॉन्ग्रेस की तरफ से असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई ने गोमांस पर बैन की आलोचना का जिम्मा संभाला है।

असम सरकार के इस फैसले को लेकर AIUDF के विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा, “मैं समझता हूँ इसका ज्यादा महत्व नहीं है। भाजपा ने गोवा और नार्थईस्ट में बीफ पर बैन नहीं जबकि सब जगह उनकी सरकार है, वहाँ लोग बीफ खाते और खिलाते हैं… किसके घर में क्या पकेगा, कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा यह कैबिनेट का विषय नहीं है।”

रफीकुल इस्लाम ने इस मामले में कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा है। गोमांस के सार्वजनिक खाए जाने पर जाने पर बैन से नाराज कॉन्ग्रेस के एक विधायक शेरमन अली ने आरोप लगा दिया कि असम सरकार आरएसएस के एजेंडे पर चल रही है। उन्होंने इसे संविधान पर हमला बता दिया। वहीं कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे झारखंड के चुनाव से जोड़ दिया।

गोमांस पर बैन को लेकर गोगोई ने कहा, “झारखंड में भाजपा को करारी शिकस्त दिलाने के बाद असम के मुख्यमंत्री अपने फेल्यर को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। झारखंड की समझदार जनता की तरह असम की जनता भी अगले चुनाव में असम के भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार, कुशासन और उनके द्वारा अर्जित बेहिसाब संपत्ति की सजा देगी।”

गौरतलब है कि असम कैबिनेट ने बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को राज्य के भीतर रेस्टोरेंट और होटल में गोमांस परोसे जाने पर बैन लगा दिया। सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इसे नहीं खाया जा सकेगा। यह फैसला हाल ही में भाजपा और कॉन्ग्रेस नेताओं के बीच गोमांस को लेकर चली जुबानी जंग के बाद सामने आया है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कॉन्ग्रेस को चुनौती देते हुए कहा था कि वह समर्थन दे तो उनकी सरकार राज्य में पूर्ण रूप से गोमांस पर पाबंदी लगा देगी। असल में सामागुरी में बीजेपी की जीत के बाद कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन ने गोमांस बाँटने के आरोप लगाए थे। कहा था कि इसी कारण बीजेपी को इस सीट पर जीत मिली है।

रकीबुल हुसैन पिछले लगभग ढाई दशक से सामागुरी से विधायक थे। लोकसभा चुनाव में वे धुबरी से सांसद बन गए थे। इसके बाद उपचुनावों में इस सीट से कॉन्ग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को मैदान में उतारा था। लेकिन करीब 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट को कॉन्ग्रेस बचा नहीं सकी।

रकीबुल हुसैन के आरोपों पर मुख्यमंत्री सरमा ने पूछा था कि क्या कॉन्ग्रेस अब तक गोमांस बाँट कर सामागुरी में जीत रही थी? उन्होंने कहा था, क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है। अगर ऐसा है तो क्या कॉन्ग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

साथ ही उन्होंने कहा था कि वे राज्य में गोमांस पर बैन लगाने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा सहमत हों। उन्होंने कहा कि अगर रिपुन बोरा सहमत हों तो अगली विधानसभा की बैठक में ही गोमांस पर बैन लगा दिया जाएगा।

असम की BJP सरकार ने गोमांस पर लगाया प्रतिबंध: बोले CM सरमा- रेस्टोरेंट-होटल में नहीं परोसा जाएगा, सावर्जनिक जगहों/कार्यक्रमों में नहीं खा सकेंगे

असम की बीजेपी सरकार ने गोमांस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 दिसंबर 2024 को इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब राज्य के रेस्तरां और होटलों में गोमांस परोसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि गोहत्या को रोकने के लिए हम तीन साल पहले कानून लाए थे। इससे गोहत्या रोकने में काफी कामयाबी मिली है। अब यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के होटल, रेस्तरा और सार्वजनिक जगहों पर गोमांस खाने और परोसने पर पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि पहले यह मंदिर के 5 किलोमीटर के दायरे में गोमांस खाने पर प्रतिबंध लगा गया था। लेकिन अब इसे पूरे राज्य में लागू कर इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।

असम सरकार ने गोमांस को प्रतिबंधित करने का यह फैसला ऐसे समय में किया है जब सामागुरी उपचुनाव के नतीजों के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच जुबानी तकरार चल रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कॉन्ग्रेस को चुनौती देते हुए कहा था कि वह समर्थन दे तो उनकी सरकार राज्य में पूर्ण रूप से गोमांस पर पाबंदी लगा देगी।

असल में सामागुरी में बीजेपी की जीत के बाद कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन ने गोमांस बाँटने के आरोप लगाए थे। कहा था कि इसी कारण बीजेपी को इस सीट पर जीत मिली है। रकीबुल हुसैन पिछले लगभग ढाई दशक से सामागुरी से विधायक थे। लोकसभा चुनाव में वे धुबरी से सांसद बन गए थे। इसके बाद उपचुनावों में इस सीट से कॉन्ग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को मैदान में उतारा था। लेकिन करीब 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट को कॉन्ग्रेस बचा नहीं सकी।

रकीबुल हुसैन के आरोपों पर मुख्यमंत्री सरमा ने पूछा था कि क्या कॉन्ग्रेस अब तक गोमांस बाँट कर सामागुरी में जीत रही थी? उन्होंने कहा था, क्या सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीती जा सकती है। अगर ऐसा है तो क्या कॉन्ग्रेस अब तक सामागुरी सीट गोमांस बाँट कर जीत रही थी? कॉन्ग्रेस नेता रकीबुल हुसैन सामागुरी सीट को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उन्हें पता होगा।

साथ ही उन्होंने कहा था कि वे राज्य में गोमांस पर बैन लगाने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा सहमत हों। उन्होंने कहा कि अगर रिपुन बोरा सहमत हों तो अगली विधानसभा की बैठक में ही गोमांस पर बैन लगा दिया जाएगा।