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‘तू मुसलमान नहीं, काफिर है’: संभल में पत्थरबाजी का बीवी ने किया विरोध तो शौहर ने मारपीट कर दिया तीन तलाक, पुलिस की तारीफ पर भड़का

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महिला निदा जावेद को उसके शौहर एजाजुल आबेदीन ने तीन तलाक इसलिए दे दिया क्योंकि उसने संभल में हुई हिंसा को लेकर पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। शौहर ने महिला को ‘काफिर’, ‘मुसलमानों की दुश्मन’ कहते हुए घर से निकाल दिया।

निकाह के बाद से ही खफा रहता था आरोपित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता निदा जावेद ने बताया कि 2012 में उसका पहला निकाह हुआ था, जिससे तीन बच्चे हैं। 2021 में तलाक होने के बाद पड़ोस में रहने वाले एजाजुल आबेदीन से उसका रिश्ता जुड़ा। एजाजुल ने शादी का झांसा देकर गुरुग्राम बुलाया और उसके साथ रहना शुरू कर दिया। दबाव बढ़ने पर और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उसने निकाह किया। निकाह के बाद से ही एजाजुल उसे दहेज के लिए परेशान करने लगा। निदा ने बताया कि उसका शौहर अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़ता था, लेकिन जब उसने संभल हिंसा में पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया तो मामला बिगड़ गया।

पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया, तो दिया तीन तलाक

महिला ने बताया कि एक दिन घर में संभल हिंसा को लेकर बात हो रही थी। निदा ने कहा कि पुलिस ने पत्थरबाजों पर लाठी चलाकर सही किया। यह सुनते ही एजाजुल आग-बबूला हो गया और उसे मुसलमानों की दुश्मन कहते हुए तीन तलाक दे दिया। निदा ने आरोप लगाया कि एजाजुल ने उसे काफिर भी कहा और वीडियो देखने पर आपत्ति जताई। निदा के अनुसार, उसके जेठ ने भी उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की थी, जिसे लेकर वह पहले ही शिकायत दर्ज करा चुकी है।

पीड़िता ने एसएसपी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने कहा कि महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और मामले की जाँच जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पीड़ित महिला के अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है। चाहे वह किसी की आलोचना हो या समर्थन। अगर इस आधार पर किसी महिला को प्रताड़ित किया जाता है, तो यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

गायों की तस्करी से आहत होती है धार्मिक भावनाएँ, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा: जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट, शकील मोहम्मद पर PSA कार्रवाई को अम्मी ने दी थी चुनौती

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बेहद अहमद टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि गोवंश की तस्करी से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकता है। इसलिए यह सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा है। यह मामला गो-तस्करी से जुड़े एक व्यक्ति शकील मोहम्मद का है। कोर्ट ने उसे उसकी हिरासत को बरकरार रखा है और चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मोक्षा खजूरिया काज़मी ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति शकील मोहम्मद की गतिविधियाँ (पशु तस्करी) न केवल कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा करती हैं, बल्कि क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी खतरा पैदा करेंगी। कोर्ट ने हिरासत में लिए गए शकील मोहम्मद की हिरासत को न्यायसंगत बताया।

न्यायालय ने स्पष्ट किया, “गोजातीय पशुओं में गाय और बछड़े शामिल हैं और उनकी अवैध तस्करी को हमेशा एक समुदाय द्वारा वध के उद्देश्य से ही देखा जाता है। इसलिए ऐसे समुदाय के लोगों में यह भावना है कि यह गतिविधि उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती है।” अदालत ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ गोवंशीय पशुओं की अवैध तस्करी के कई एफआईआर दर्ज हैं।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से समुदाय के वर्तमान जीवन की गति भी बाधित होने की संभावना है। इससे न केवल कानून और व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी, बल्कि क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी खतरा पैदा होगा। बता दें कि शकील को मार्च 2024 में जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था।

शकील मोहम्मद की अम्मी ने विभिन्न आधारों पर उसकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। शकील की अम्मी ने याचिका में दावा किया है कि शकील को बिना सोचे-समझे हिरासत में लिया गया और प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों का उल्लंघन किया गया। इसमें उसे हिरासत में लिए जाने के खिलाफ अपना पक्ष रखने के उसके अधिकार के बारे में सूचित करना और उसकी अपनी भाषा में पढ़ना शामिल है।

इस मामले में सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि शकील मोहम्मद एक कट्टर और आदतन अपराधी है। वह चाकू घोंपने, दंगा करने और गोवंश की तस्करी समेत कई आपराधिक वारदातों में शामिल रहा है। वकील ने दलील दी कि शकील मोहम्मद शांतिप्रिय लोगों के बीच आतंक फैलाया है और उसकी असामाजिक गतिविधियाँ सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक हैं।

उसकी प्रिवेटिव डिटेंशन को लेकर न्यायालय ने आर कलावती बनाम तमिलनाडु राज्य (2006) में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना गया था कि प्रासंगिक कारक हिरासत में लिए गए व्यक्ति के कार्यों की प्रकृति नहीं है, बल्कि सामुदायिक जीवन या सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की उसकी क्षमता प्रासंगिक है।

न्यायालय ने पाया कि शकील की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की संभावना थी। इसलिए उसकी निवारक हिरासत को बरकरार रखा। न्यायालय ने याचिका में लगाए गए इस आरोप में भी कोई दम नहीं पाया कि उसे हिरासत में रखने में प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों का उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने पाया कि हिरासत आदेश शकील को हिंदी/डोगरी में पढ़कर सुनाया गया था, जिसे वह समझ गया।

पैंटी, पायजामा, चप्पल, अंडरवियर… सब पर छाप दी भगवान गणेश की फोटो, वॉलमार्ट ने ऑनलाइन बिक्री के लिए डाले: हिंदुओं के विरोध के बाद हटाए प्रोडक्ट

अमेरिकी रिटेल कारोबारी कंपनी वॉलमार्ट शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) को उस समय विवादों में घिर गई, जब यह पता चला कि वॉलमार्ट ने भगवान गणेश की छवि वाले अंडरवियर और चप्पल जैसे उत्पाद बेचने शुरू किए।

यह मामला तब उजागर हुआ जब ‘तत्वम-असि’ नाम के एक लोकप्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने इस पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने लिखा, “यह अस्वीकार्य है। आप हमारे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान नहीं कर सकते।”

‘गणेश ब्लेसिंग्स कलेक्शन’ के नाम पर अपमान

तस्वीरों में दिख रहा है कि वॉलमार्ट ने ‘सेलेस्शियल गणेश ब्लेसिंग्स कलेक्शन’ के तहत टॉप्स, पैंट्स, शॉर्ट्स, बिकिनी, चप्पल, मोज़े और अन्य कपड़ों पर भगवान गणेश की छवि का उपयोग किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉलमार्ट कम से कम 70 प्रकार के अंडरवियर, बॉक्सर, थोंग और ब्रा पर भगवान गणेश का चित्र छापकर बेच रहा था।

भगवान गणेश की छवि का अंडरवियर और चप्पल जैसे उत्पादों पर उपयोग हिंदू समुदाय के लिए अत्यधिक आक्रोश का कारण बना। सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने इसे हिंदू भावनाओं का मजाक उड़ाने वाला कदम बताया।

हिंदू कार्यकर्ता राजन ज़ेड ने वॉलमार्ट से अपील करते हुए कहा, “किसी भी धर्म के प्रतीकों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह संवेदनशीलता और सम्मान का मामला है।”

ब्रिटेन स्थित हिंदू संगठन ‘इनसाइट यूके’ ने ट्वीट किया, “हिंदू समुदाय इस कृत्य से चिंतित है। यह हिंदू देवी-देवताओं, हमारी भावनाओं और हमारी परंपराओं के प्रति सम्मान की पूर्ण कमी को दर्शाता है।”

हिंदू संगठनों ने वॉलमार्ट के इस कदम की कड़ी आलोचना की। हिंदू जागृति संगठन ने बयान जारी किया, “श्री गणेश, जो हिंदू धर्म में अत्यधिक पूजनीय हैं, उनकी छवि को अंडरवियर, बॉक्सर, मोजे और चप्पल पर दिखाना न केवल अपमानजनक है बल्कि पूरे विश्व के हिंदुओं के लिए अस्वीकार्य है।”

अमेरिका स्थित हिंदू एडवोकेसी फ़ोरम (HAF) ने सीधे वॉलमार्ट प्रबंधन से संपर्क किया और हिंदू छवियों के अनुचित उपयोग को रोकने की माँग की। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए वॉलमार्ट से माफ़ी माँगने की भी माँग की।

हिंदू समुदाय और संगठनों के विरोध के बाद, वॉलमार्ट ने अपने ‘सेलेस्शियल गणेश ब्लेसिंग्स कलेक्शन’ को हटा दिया। हालाँकि, स्विमसूट्स जैसे कुछ उत्पाद अब भी उपलब्ध बताए जा रहे हैं।

पहले भी कई कंपनियाँ कर चुकी हैं बदमाशी

यह पहली बार नहीं है जब किसी कंपनी ने हिंदू देवी-देवताओं का इस प्रकार दुरुपयोग किया हो। अप्रैल 2022 में, ‘सहारा रे स्विम’ नामक कपड़ों के ब्रांड ने अपने स्विमवियर कलेक्शन में हिंदू देवी-देवताओं की छवियों का उपयोग कर विवाद खड़ा कर दिया था। यह ब्रांड सहारा रे नामक एक युवा सर्फर और ‘ओनली फैंस’ मॉडल का है।

मई 2019 में, अमेज़न पर हिंदू देवी-देवताओं की छवि वाले फर्श की चटाई और टॉयलेट कवर बेचे जाने की खबर आई थी। इसे लेकर भी हिंदू समुदाय ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

अक्टूबर 2018 में, न्यूयॉर्क के ‘हाउस ऑफ यस’ नामक नाइटक्लब में दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों को चिपकाने का मामला सामने आया। भारतवंशी अंकिता मिश्रा ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, “दीवारों पर भगवान गणेश, सरस्वती, काली और शिव जैसे हिंदू देवी-देवताओं की छवियाँ लगी हुई थीं। यह चुप्पी की कीमत है। जब तक आवाज़ नहीं उठाई जाएगी, इस प्रकार का कृत्य बार-बार होगा।”

व्यावसायिक लाभ के लिए हिंदुओं की भावनाओं को पहुँचाई जा रही ठेस

वॉलमार्ट द्वारा भगवान गणेश की छवि वाले उत्पाद बेचने की घटना हिंदू समुदाय के लिए गहरी संवेदनाओं को आहत करने वाली है। यह मामला न केवल धार्मिक असंवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह से व्यावसायिक लाभ के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया जाता है। हिंदू संगठनों के विरोध और वॉलमार्ट द्वारा इन उत्पादों को हटाने के बाद भी, यह घटना धार्मिक भावनाओं के प्रति वैश्विक जागरूकता की कमी को उजागर करती है।

रात के अँधेरे में फूँक दिया ढाका का इस्कॉन मंदिर, देवी-देवताओं की प्रतिमा में लगाई आग: बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने जबरन बंद करवाया था सेंटर

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों की जारी हिंसा के बीच राजधानी ढाका के नमहट्टा इलाके में स्थित इस्कॉन मंदिर पर हमले का मामला सामने आया है। शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) की देर रात इस मंदिर में आग लगा दी गई, जिससे श्री लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति और अन्य धार्मिक वस्त्र पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने मंदिर पर हमला कर की आगजनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई, जब आधी रात के बाद 2 से 3 बजे के बीच मंदिर के पीछे के टिन के छत को उठाकर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इस मंदिर का संचालन करने वाले इस्कॉन पर बैन की माँग को ढाका हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस मंदिर को जबरन बंद करवा दिया था। इस मंदिर पर हमले से पहले भी हिंदू प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा चुका है।

इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “श्री लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति और मंदिर की सभी वस्तुएँ पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं। यह हमला बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को दर्शाता है।” उन्होंने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

ताजे मामले से पहले इस मंदिर को जबरन बंद करा दिया गया था और अब इसे जला दिया गया। इस्कॉन के कोलकाता शाखा के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उपद्रवियों को मंदिर का बोर्ड हटाते देखा जा सकता है।

इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की माँग खारिज

हाल ही में ढाका हाई कोर्ट ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की माँग को ठुकरा दिया था। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है। कट्टरपंथी संगठनों ने इस्कॉन पर ईशनिंदा और देशद्रोह के आरोप लगाकर प्रतिबंध की माँग की थी। इसी कड़ी में इस्कॉन के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और बढ़ गई। कट्टरपंथियों ने कई हिंदू घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। स्थानीय हिंदुओं का आरोप है कि पुलिस और सेना भी कट्टरपंथियों के पक्ष में खड़ी नजर आती है।

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा नई बात नहीं है। कट्टरपंथी ताकतें लगातार धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही हैं। सरकार की निष्क्रियता और पुलिस प्रशासन की अनदेखी के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत सरकार को इन घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए और बांग्लादेश सरकार पर दबाव डालकर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

क्या है हिंदूफोबिया ट्रैकर, कैसे करता है काम, हिंदू विरोधी घृणा अपराध की कैसे कर सकते हैं रिपोर्ट: ‘गविष्टि फाउंडेशन’ के प्लेटफॉर्म के बारे में जानिए सब कुछ

देश-विदेश में हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों की घटनाओं को एकत्र कर उनके दस्तावेजीकरण करने के लिए ‘हिंदूफोबिया ट्रैकर’ लॉन्च किया गया है। हिंदू विरोधी हेट ट्रैकर को ‘गविष्टि फाउंडेशन‘ नामक एक एनजीओ द्वारा लॉन्च किया गया है। इस NGO के प्रमुख राहुल रौशन और नूपुर जे शर्मा हैं। बता दें कि राहुल रौशन ऑपइंडिया के भी CEO हैं, जबकि नुपूर जे शर्मा ऑपइंडिया की प्रधान संपादक हैं।

हिंदूफोबिया ट्रैकर का लक्ष्य हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का दस्तावेजीकरण करना, हिंदुओं के उत्पीड़न के बारे में जागरूकता पैदा करना, शोधपत्र जारी करना और हिंदुओं के मानवाधिकारों की वकालत करना है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों को पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि हिंदुओं के उत्पीड़न को प्रभावी ढंग से दर्शाकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।

दरअसल, हिंदूफोबिया ट्रैकर ने हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का एक डेटाबेस प्रकाशित किया है। इस डेटाबेस में प्रत्येक मामले के लिए एक स्पष्टीकरण दिया गया है कि किस तरह से संबंधित मामला धार्मिक दुश्मनी से प्रेरित घृणा अपराध है। ट्रैकर ने इन अपराधों को 8 प्राथमिक श्रेणियों में विभाजित किया है।

  1. रिलेशनशिप में रहने वाले महिला के साथ घृणा अपराध एवं यौन अपराध
  2. ऐसा हमला जिसमें मौत नहीं हुई
  3. हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर हमला
  4. हिंदू प्रथाओं पर रोक/प्रतिबंध
  5. हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच
  6. जबरन धर्मांतरण
  7. गैर-हिंदू महिलाओं के साथ संबंध रखने के कारण हिंदू पुरुषों पर हमला
  8. ऐसे हमले जिनमें मौत हो गई

ऊपर दिए गए इन सभी कैटेगरी को अंतर्राष्ट्रीय नियमों और मानकों तथा निर्धारित मापदंडों का उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक परिभाषित किया गया है। इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अपराधों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मामला धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराध है या नहीं।

हिंदूफोबिया शब्द पिछले कुछ सालों में विकसित हुआ है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर नकारात्मक भावनाओं, दृष्टिकोणों और कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करना शामिल है, जिसके कारण हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराध भी हुए हैं। हिंदूफोबिया ट्रैकर ने हिंदूफोबिया शब्द की एक कार्यशील परिभाषा जारी की है।

हिंदूफोबिया कोई भी ऐसी कार्रवाई और/या भाषण, लिखित या मौखिक (शैक्षणिक, संस्थागत, राजनीतिक और/या यादृच्छिक), हिंसा और/या भेदभावपूर्ण कार्रवाई/रवैया है, जो हिंदुओं (सनातन धर्म और/या हिंदुओं के विभिन्न संप्रदायों और/या धार्मिक पंथ के तहत विभिन्न पंथों का पालन करने वाले लोग), व्यक्तियों, लोगों के समूह, उनके विश्वास (हिंदू धर्म), उनकी संस्कृतियों, परंपराओं, पूजा के रूपों और विधियों, धर्मग्रंथों, सिद्धांतों और सभ्यतागत मूल्यों और विश्वासों के खिलाफ नफरत, भय, पूर्वाग्रह, दुश्मनी, शत्रुता और/या पूर्वाग्रह से पैदा होता है।

हिंदूफोबिया व्यक्तियों और/या उनकी संपत्ति के प्रति, समग्र रूप से हिंदू समुदाय के प्रति, हिंदू संस्थाओं, हिंदू धार्मिक सुविधाओं (मंदिरों और अस्थायी धार्मिक संरचनाओं सहित), हिंदू आस्था के प्रतीकों, हिंदुओं की मूल और सभ्यतागत भूमि के प्रति निर्देशित हो सकता है, जिसे धार्मिक पूर्वाग्रह, शत्रुता और घृणा के कारण हो सकता है।

हिंदूफोबिया में भाषण, लेखन या व्यवहार में किसी भी प्रकार का संचार शामिल है जो हिंदुओं, हिंदू धर्म, हिंदुओं की धार्मिक पहचान के तत्वों के संदर्भ में व्यक्तिगत रूप से या धार्मिक, जातीय समूह के रूप में अपमानजनक, भेदभावपूर्ण या हिंसक भाषा का प्रयोग करता है, जो पूर्वाग्रह, पक्षपात और/या धार्मिक और/या सांस्कृतिक दुश्मनी से उपजा है, जो अमानवीयकरण, कलंक, बलि का बकरा बनाने, रूढ़िबद्धता, हिंसा के लिए आह्वान और कई मामलों में हिंसा को जन्म देता है।

हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा में अक्सर ऐतिहासिक और/या चल रहे उत्पीड़न का खंडन और/या मजाक उड़ाना, धर्मग्रंथों को तोड़ना, प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष हिंसा को बढ़ावा देना और/या आह्वान करना, लक्षित और निर्देशित हिंसा का समर्थन, वैचारिक व्यंजना का उपयोग करके हिंदुओं के वर्गों के उन्मूलन का आह्वान करना, हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से लक्षित घृणा अपराधों के अपराधियों का महिमामंडन करना, हिंदुओं के व्यक्तियों या समूहों के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग, धार्मिक पहचान और/या विचारों के आधार पर डोक्सिंग, हिंदुओं के समूहों और/या संप्रदायों का व्यंग्यात्मक चित्रण करना ताकि उनके कलंक/अमानवीयकरण/बड़ी हिंसा को वैध बनाया जा सके, प्रतीकों और/या आस्था के प्रतिनिधियों का मजाक उड़ाना और/या उन्हें बदनाम करना शामिल हैं।

अपने रिलीज के दौरान हिंदूफोबिया ट्रैकर ने डेटाबेस में 1 जनवरी 2023 से हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित 1,314 घृणा अपराधों को शामिल किया है। ट्रैकर ने 191 ‘अनिर्धारित मामलों’ (ऐसे अपराध जिनके बारे में संदेह है कि वे घृणा अपराध हैं, लेकिन धार्मिक कोण साबित नहीं हुई है) का भी दस्तावेजीकरण किया है। इसके अलावा, 589 मामलों को लंबित समीक्षा के रूप में टैग किया है।

यह डेटाबेस पूर्ण नहीं है और इस पर लगातार काम चल रहा है। इसका उद्देश्य है कि जहाँ तक संभव हो सके इसमें अधिक-से-अधिक धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि यह जमीनी हकीकत का सटीक प्रतिनिधित्व कर सके। यह डेटाबेस सार्वजनिक जाँच के लिए उपलब्ध है, जिसमें लोगों के लिए विवाद उठाने और डेटाबेस में जोड़ने के लिए घृणा अपराध भेजेने का प्रावधान है।

यहाँ बताया गया है कि इस पोर्टल का उपयोग डेटाबेस तक पहुँचने के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों को डेसाबेस में शामिल कराने के लिए यहाँ कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति कोई भी अपराध हेट क्राइम है या नहीं, इसकी भी जाँच के लिए लोग हमारी टीम को भेज सकते हैं।

वेबसाइट के होमपेज पर एक हेट क्राइम मैप है, जहाँ डेटाबेस में दर्ज प्रत्येक अपराध को एक एम्बेडेड गूगल मैप पर अपराध के स्थान पर चिह्नित किया गया है। अपराध की श्रेणी के आधार पर विभिन्न प्रतीकों द्वारा मानचित्र पर हेट क्राइम को दर्शाया गया है। प्रत्येक प्रतीक एक बटन जैसा है, जिसे क्लिक करने पर मानचित्र के बाईं ओर अपराध का सारांश खुलता है। यहाँ अपराध से संबंधित लिंक खुलता है।

मैप पर भारत के नक्शा को फोकस किया गया है, जहाँ घृणा अपराधों को अंजाम दिया गया है। हालाँकि, इस मैप को जूम इन और जूम आउट करने पर दुनिया के अन्य कोनों में हिंदुओं के प्रति हुए घृणा अपराधों को देखा जा सकता है। इसका विवरण जानने के लिए पूर्व की ही भाँति बटन पर क्लिक करना होगा, जहाँ उसका विवरण एवं घटना के से संबंधित डिटेल के बारे में लिंक को देखा जा सकता है।

वेबसाइट के होमपेज को नीचे स्क्रॉल करने पर डेटाबेस में दर्ज किए गए घृणा अपराधों के बारे में बुनियादी आँकड़े देखे जा सकते हैं। इसे चार्ट के रूप में डेटा का विजुअल प्रतिनिधित्व शामिल किया गया है। उसके नीचे होमपेज पर हिंदूफोबिया ट्रैकर और घृणा अपराध डेटाबेस के बारे में विभिन्न महत्वपूर्ण लेखों के लिंक दिए गए हैं।

हिंदूफोबिया डेटाबेस को वेबसाइट के सबसे ऊपर बने नेविगेशन बार पर ‘हेट क्राइम डेटाबेस’ पर क्लिक करके एक्सेस किया जा सकता है। यह विभिन्न श्रेणियों के तहत दर्ज अपराधों की लाइव संख्या प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, यहाँ डेटाबेस में दर्ज हर अपराध को सूचीबद्ध करने वाला एक टेबल भी दिखाई देता है।

यूजर ड्रॉप-डाउन लिस्ट में से उस कैटेगरी को सेलेक्ट करके उससे संबंधित हेट क्राइम को देख सकते हैं। पेज पर दिए गए सर्च बॉक्स में कीवर्ड टाइप करके हिंदू विरोधी घृणा अपराधों को भी खोजा जा सकता है। इसके अलावा, किसी विशेष अवधि के दौरान हुए अपराधों को तारीख से भी चुनकर पढ़ा जा सकता है।

नीचे फ़िल्टर करके घृणा अपराधों को को प्रदर्शित करती है। इस टेबल की प्रत्येक पंक्ति पर क्लिक करके किसी विशेष अपराध का पूरा विवरण देखा जा सकता है। यह विवरण ब्राउज़र में एक नए टैब पर खुलता है, जो केस के सारांश को दिखाता है। इसमें यह भी बताया गया रहता है कि इस केस को घृणा अपराध के रूप में क्यों सूचीबद्ध किया गया है।

प्रत्येक पृष्ठ पर एक विकल्प होता है जो यूजर को अपराध से संबंधित अतिरिक्त जानकारी प्रस्तुत करने या उसके बारे में विवाद उठाने की अनुमति देता है। इस उद्देश्य के लिए कोई भी व्यक्ति ‘अतिरिक्त जानकारी सबमिट करें/विवाद उठाएँ’ लिखे बटन पर क्लिक कर सकता है। इसे दबाने पर एक नया पेज खुलता है और वहाँ सहायक दस्तावेजों के साथ आवश्यक जानकारी पेश की जा सकती है।

इस डेटाबेस में मौजूद हर मामले को एक विशिष्ट केस आईडी दी गई है, जो पेज के सबसे ऊपर दिखाई देती है। इसके अलावा, अतिरिक्त जानकारी या विवाद प्रस्तुत करते समय इस केस आईडी को प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसके अलावा, मेन पेज के टॉप पर ‘अनडिसाइडेड केसेज’ को क्लिक करने पर घृणा अपराध डेटाबेस जैसा ही एक पेज खुलता है।

अनडिसाइडेड केसेज में दर्ज अपराधों को देखने और अतिरिक्त जानकारी या विवाद प्रस्तुत करने के लिए ठीक वैसा ही विकल्प है, जो पहले बताया जा चुका है। इन मामलों को घृणा अपराध के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, क्योंकि इससे संबंधित आवश्यक जानकारी- जैसे कि हमलावरों की पहचान, हमले का मकसद आदि उपलब्ध नहीं है।

यूजर सबसे ऊपर दिए गए ‘रिपोर्ट हेट क्राइम’ ऑप्शन पर क्लिक करके हेट क्राइम से जुड़े ऐसे मामलों को हमें भेज सकते हैं, जो हिंदूफोबिया ट्रैकर के डेटाबेस में अब तक शामिल नहीं हुए हैं। इस विकल्प पर क्लिक करने से एक फ़ॉर्म खुलता है, जहाँ अपराध का विवरण प्रस्तुत किया जा सकता है, सहायक दस्तावेज़ अपलोड किए जा सकते हैं और अपराध के लिए प्रासंगिक श्रेणियों का चयन किया जा सकता है।

रिपोर्ट किए जा रहे अपराध के लिए सहायक साक्ष्य के रूप में अख़बार की कतरनें, टीवी न्यूज़ रिपोर्ट की वीडियो क्लिप, एफ़आईआर कॉपी आदि जैसी अधिक जानकारी वाले फोटो, वीडियो या पीडीएफ़ फ़ाइल अपलोड की जा सकती हैं। नए हिंदू हेट क्राइम को भेजते समय यूजर्स को अपना नाम और ईमेल आईडी देना आवश्यक है।

ऐसे मामले सबमिट किए जाने के बाद हिंदूफ़ोबिया ट्रैकर की टीम मामले की समीक्षा करेगी और बताए गए मापदंडों के आधार पर वह हेट क्राइम में शामिल किए जाने योग्य होने पर डेटाबेस में जोड़ेगी। फिलहाल, ट्रैकर जनवरी 2023 या उसके बाद के मामलों का दस्तावेजीकरण कर रहा है। हालाँकि, जल्द ही डेटाबेस का विस्तार किया जाएगा।

‘नमाज के बाद मंदिर दिखना हराम, इससे आहत होंगे बांग्लादेशी मुस्लिम’: मनसा मंदिर का काम रोकने असम में घुस गए BGB के जवान, BSF की सख्ती के बाद वापस लौटे

असम के श्रीभूमि जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बांग्लादेशी सीमा रक्षक बल (बीजीबी) के जवानों द्वारा एक हिंदू मंदिर के जीर्णोद्धार को रोकने की घटना ने गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि इस्लामी कट्टरपंथ की जड़ें और बांग्लादेशी मानसिकता की हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति को भी उजागर किया।

बांग्लादेशियों ने मंदिर को बताया इस्लाम के लिए ‘हराम’

कुशियारा नदी के किनारे स्थित हिंदू समुदाय के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मनसा मंदिर को असम सरकार द्वारा 3 लाख रुपये की धनराशि से पुनर्निर्मित किया जा रहा था। गुरुवार (5 दिसंबर 2024) को बीजीबी के जवान ज़ाकिंगंज सीमा चौकी से तेज़ स्पीडबोट के जरिए भारतीय क्षेत्र में घुस आए और मंदिर निर्माण कार्य को रोकने की धमकी दी। उनका तर्क था कि मंदिर की उपस्थिति बांग्लादेशी मुसलमानों को ‘आहत’ कर सकती है और इससे वहाँ हिंसा भड़क सकती है।

बीजीबी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि मस्जिद से नमाज के बाद मंदिर दिखना ‘हराम’ है और उनके मजहब के खिलाफ है। उन्होंने स्थानीय हिंदुओं और मजदूरों को डरा-धमकाकर काम बंद करने को कहा।

बीएसएफ की सख्ती से वापस लौटे बांग्लादेशी फौजी

घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मौके पर पहुँचा और स्थिति को संभाला। बीएसएफ ने बीजीबी को सख्ती से जवाब देते हुए कहा कि उन्हें भारतीय क्षेत्र में घुसने और भारतीय नागरिकों को धमकाने का कोई अधिकार नहीं है। बीएसएफ ने स्पष्ट किया कि मंदिर का पुनर्निर्माण जारी रहेगा और यह पूरी तरह भारतीय क्षेत्र में हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और बीएसएफ की मजबूती के चलते बीजीबी के जवान पीछे हट गए।

बांग्लादेश ने किया अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

बीजीबी का भारतीय सीमा में प्रवेश और हथियार लेकर धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सीमा प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन है। इन प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी सीमा रक्षक बल को दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करने से पहले अनुमति लेनी होती है, और वे हथियार नहीं ले जा सकते।

घटना के बाद स्थानीय हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया और ‘बांग्लादेश मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। उन्होंने बीजीबी की इस हरकत को भारतीय आत्मसम्मान और हिंदू संस्कृति पर हमला बताया। बीएसएफ ने मंदिर निर्माण कार्य को सुरक्षा प्रदान की और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

इस घटना से साफ हो गया है कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरता सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ की सरकारी एजेंसियाँ और सुरक्षा बल भी इससे प्रभावित हो चुके हैं। बांग्लादेशी मुस्लिमों की भावनाओं को हिंदू धर्मस्थलों के खिलाफ हथियार बनाना, वहाँ की कट्टर मानसिकता की गंभीरता को दर्शाता है। यह भारत के लिए एक चेतावनी भी है कि सीमा पार से कट्टरपंथी मानसिकता के हमले सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेंगे। भारत को अपने सीमा क्षेत्रों और हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।

बाबा नागार्जुन के गाँव से निकली राम विवाह झाँकी को कट्टरपंथियों ने मस्जिद के पास रोका, पथराव और मारपीट में कई घायल: दंगाइयों की पहचान में जुटी दरभंगा पुलिस

बिहार के दरभंगा जिले में राम विवाह की झाँकी पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव कर दिया है। झाँकी जैसे ही एक मस्जिद के पास पहुँची, उसके बाद शोभायात्रा में शामिल लोगों पर ईंट और पत्थर फेंकने जाने लगे। इससे अफतरा-तफरी मच गई। इस घटना में कई लोगों को चोटें आई हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

दरअसल, विवाह पंचमी के मौके पर नगर थाना क्षेत्र के बाजितपुर एवं तरौनी गाँव में हर साल की भाँति इस बार भी भगवान राम के विवाह की झाँकी निकाली जा रही थी। यह झाँकी तरौनी गाँव से बाजितपुर की तरफ जा रही है। झाँकी बाजितपुर जाने के दौरान एक मस्जिद के पास पहुँची तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने इस पर आपत्ति जताई और झाँकी में शामिल लोगों से बहस करने लगे।

कुछ ही देर में मस्जिद और आसपास से पथराव शुरू हो गया। कुछ दंगाई लाठी और डंडे लेकर आए और झाँकी में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीओ, सिटी एसपी, डीएसपी आदि अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और हालात को किसी तरह सँभाला। बता दें कि तरौनी प्रसिद्ध कवि नागार्जुन का गाँव है।

कहा जा रहा है कि दरभंगा के बाजितपुर में जिस जगह विवाह पंचमी के जुलूस को रोककर लोगों के साथ मारपीट की गई है, वह कोई नई परंपरा नहीं है। लोगों का कहना है कि पिछले बीस साल से भी अधिक समय से राम विवाह की बारात इस रास्ते से निकाली जा रही है। लोगों का कहना है कि इससे पहले ऐसा उपद्रव कभी नहीं हुआ। इस बार मस्जिद के पास जुलूस पहुँचते ही पथराव कर दिया गया।

इस घटना को लेकर सिटी एसपी अशोक कुमार ने कहा कि इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि किस मकसद से हालात को बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि घटना की जाँच की जा रही है। उसके बाद इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए इलाके की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।

4 kg सोना लेकर रमजान में हत्या: काला जादू करने वाली ‘जिन्न’ शमीमा के चक्कर में मरा NRI गफूर, ‘सोना डबल करो’ स्कीम में गई जान

केरल के कासरगोड में खुद को जिन्न बताने वाली शमीमा नाम की महिला ने 4 किलो सोने के लिए एक NRI व्यापारी की हत्या कर दी थी। उसका गैंग लोगों को काले जादू के नाम पर ठगता था। पुलिस ने लगभग 20 महीने के बाद NRI की हत्या का खुलासा किया है। पुलिस ने शमीमा समेत 4 को इस हत्याकांड में अब गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड के पोचक्क्ड में रहने वाले NRI गफूर की 13 अप्रैल, 2023 को मौत हो गई थी। इसके बाद अगले दिन उनकी लाश घर के भीतर मिली थी। परिजनों ने इसे प्राकृतिक मौत माना था और गफूर को दफना दिया था। मृतक गफूर एक NRI था और उसके UAE में 4 सुपर मार्केट हैं।

गफूर की मौत को परिजनों ने रमजान में होने के कारण और भी शक नहीं जताया। गफूर के परिजनों को इसके बाद याद आया था कि उन्होंने बेटियों समेत सभी परिजनों से सोना उधार लिया था। यह सोना घरवालों ने ढूँढा तो नहीं मिला। इसके बाद परिजनों को शक हुआ और उन्होंने अपने ही गाँव में रहने वाली जिन्न शमीमा पर चोरी का शक जताया।

इसके बाद उन्होंने हत्या का अंदेशा जताते हुए FIR करवाई। पुलिस ने इसके बाद कब्र से लाश निकलवा कर गफूर का पोस्टमार्टम करवाया तो उनके कान के पीछे एक चोट निशान मिला। इसके बाद पक्का हुआ कि उनकी हत्या हुई थी। गफूर के घर वालों का पूरा शक शमीमा की तरफ ही था लेकिन पुलिस इस मामले में सबूत नहीं ढूँढ पा रही थी।

इसके लगभग एक वर्ष बाद एक पुलिस अफसर ने इस मामले में गंभीरता से जाँच चालू की। पुलिस ने शमीमा और उसके गैंग के बारे में पता किया। पुलिस को मालूम हुआ कि शमीमा गैंग ने कासरगोड के अलग-अलग हिस्सों में सोना बेचा था। उन्होंने गफूर और शमीमा की व्हाट्सएप चैट भी देखी।

इसमें पता चला कि गफूर ने शमीमा को ₹10 लाख और सोना दोनों दिए थे। इसके बाद पुलिस ने और भी जाँच की तो पता चला कि शमीमा ने गफूर को उसका सोना दोगुना करने का लालच दिया था। शमीमा ने बताया था कि वह काले जादू से ऐसा कर सकती है।

गफूर ने उसको सभी परिजनों से सोना माँग कर दे दिया था। इसके बाद जब गफूर ने अपना सोना वापस माँगा तो शमीमा ने उसकी हत्या करने की ठान ली। शमीमा ने अपने गैंग के उबैस, असनीफा और आयशा के साथ मिलकर एक रात को काला जादू करने का ढोंग किया और दीवाल में सर लड़ा कर गफूर की हत्या कर दी।

शमीमा इसके बाद सुबह उनके घर भी मौजूद रही। पुलिस ने अब इन चारों को हत्या और सबूत मिटाने समेत बाकी मामले का मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। यह पहले भी कुछ अपराधों में पकड़ी जा चुकी है। शमीमा से उसके गाँव के लोग भी काफी डरते हैं।

अनाथ दलित किशोर को बना दिया मुस्लिम, नौकरी के नाम पर कराया खतना, नया नाम रखा- नूर मोहम्मद: UP पुलिस ने 2 को दबोचा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 15 वर्षीय दलित किशोर का धर्म परिवर्तन कर उसे मुस्लिम बनाने का मामला सामने आया है। आरोपितों ने किशोर की मजबूरी और अनाथ होने का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपितों मुर्शिद और रियासत अली को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रेस्टोरेंट का मालिक अभी फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले किशोर को मुर्शिद और उसके अब्बू रियासत अली बाराबंकी लेकर आए। उन्होंने उसे नौकरी देने का वादा किया और अपने साथ रखकर बाराबंकी के अफीका रेस्टोरेंट में काम पर लगवा दिया। रेस्टोरेंट के मालिक ने जब जाना कि लड़का अनाथ है, तो उसका ऑपरेशन (खतना) करवाकर नाम बदलकर ‘नूर मोहम्मद’ रख दिया।

घटना का खुलासा तब हुआ जब बजरंग दल के जिला संयोजक विनय सिंह राजपूत को इसकी जानकारी मिली। विनय सिंह ने किशोर से रेस्टोरेंट में बातचीत की और धर्म परिवर्तन की पुष्टि होने पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मुर्शिद, रियासत अली और रेस्टोरेंट मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

किशोर ने पुलिस को सुनाई आपबीती

पीड़ित किशोर ने बताया कि वह मूलरूप से आजमगढ़ के अतरौलिया का रहने वाला है। उसके पिता ने माँ को छोड़कर मुस्लिम महिला से विवाह कर लिया था। उसके पिता की हत्या हो गई और सौतेली माँ ने सारी संपत्ति हड़प कर उसे भगा दिया। आजमगढ़ में उसे देवा का रहने वाला कबाड़ का काम करने वाला मुर्शिद मिला, जिसने कई साल तक अपने साथ रखा फिर उसे देवा स्थित घर ले आया। बाद में उसे रेस्टोरेंट में काम पर लगा दिया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया।

शहर कोतवाल आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि यह मामला हिंदू किशोर के खतना और धर्मांतरण का है। बजरंग दल की शिकायत पर धर्मांतरण अधिनियम और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार आरोपितों की तलाश में है और मामले की गहराई से जाँच कर रही है। श्रम विभाग ने भी बाल श्रम अधिनियम के तहत जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है, जहाँ एक अनाथ दलित किशोर को मजबूरी का शिकार बनाया गया। रेस्टोरेंट मालिक और अन्य आरोपितों की हरकत ने न केवल कानून को चुनौती दी, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुँचाई है।

‘उस स्कूल के नाम में इंदिरा, मैं नहीं जाऊँगा’: महाराष्ट्र के नए सीएम ने 1975 में ही चालू किया था ‘विद्रोह’, जानें देवेन्द्र फडणवीस की कहानी

महाराष्ट्र में महायुति की नई सरकार ने शपथ ले ली है। देवेन्द्र फडणवीस राज्य 5 वर्षों के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर लौटे हैं। देवेन्द्र फडणवीस अब तक महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सफ़र को लेकर कई सारी कहानियाँ सामने आई हैं। इन कहानियों में एक कहानी ऐसी भी है जो उनके बचपन की है।

देवेन्द्र फडणवीस के विषय में बताया जाता है कि उन्होंने 6 वर्ष की ही उम्र में विद्रोही स्वभाव दिखाना चालू कर दिया था। देवेन्द्र फडणवीस 1975 में इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। वह तब मात्र 6 वर्ष के थे। उनके पिता गंगाधर फडणवीस तब जनसंघ के नेता थे।

1975 में ही देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लागू कर दिया था। इस आपातकाल में कॉन्ग्रेस के अलावा सभी पार्टियों के नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था। इसी कड़ी में जनसंघ के भी काफी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

देवेन्द्र फडणवीस के पिता गंगाधर राव को भी तब गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। उन्हें तब गिरफ्तार किया गया जब वह आपातकाल विरोधी एक रैली का नेतृत्व कर रहे थे। इस बात से बालक देवेन्द्र को काफी गुस्सा आया था। उन्होंने तब अपने स्कूल जाने से मना कर दिया था।

उन्होंने इसका कारण बताया था कि उस स्कूल के नाम में इंदिरा है। देवेन्द्र ने बताया था कि उस व्यक्ति के नाम के ऊपर रखे गए स्कूल में नहीं जा सकते जिसने उनके पिता को जेल में डाला। बताया जाता है कि इसके बाद उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाया गया था। देवेन्द्र के पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे।

देवेन्द्र फडनवीस राम मंदिर आन्दोलन में भी शामिल रहे थे। उन्होंने वकालत की पढ़ाई की है। उन्होंने MBA भी किया है। वह आगे की पढ़ाई करने के लिए जर्मनी गए थे। वह नागपुर के सबसे युवा मेयर भी बने थे। इसके बाद वह मात्र 44 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2019 में भी उनके नेतृत्व में NDA ने दुबारा जीत हासिल की थी।

तब शिवसेना के अलग होने की वजह से भाजपा की सरकार नहीं बन पाई थी। 2022 में इसके बाद शिवसेना टूटने के बाद वह सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए। 2024 में उनके नेतृत्व में पार्टी फिर जीती और वह अब मुख्यमंत्री बने हैं।