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गैंगस्टर और AAP विधायक नरेश बालियान के बीच बातचीत का भाजपा ने जारी किया ऑडियो: बिल्डर से वसूली करके हवाला के जरिए बाँटने की बात, BJP बोली- ऐसे 3 क्लिप और हैं

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली के उत्तम नगर से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक नरेश बालियान का एक ऑडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें वह किसी गैंगस्टर से बात कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि बालियान का गैंगस्टर से संबंध है और वो वसूली गैंग चलाते हैं। पार्टी ने विधायक पर पैसों की लेनदेन का भी आरोप लगाते हुए बालियान पर कार्रवाई की माँग की है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “AAP के नरेश बालियान या एक्टॉर्शनिस्ट MLA एक गैंगेस्टर से बात कर रहे हैं। इनका व्यवहार ऐसा है, जैसे एक माता से 2 भाई हों। ऑडियो में कहा जा रहा है कि बिल्डर को धमकाकर उससे मिले पैसे को हवाला का फैसला बाँट लेंगे। अराजक पार्टी को ये समझना होगा कि जनता ने इसलिए नहीं चुना कि आप कभी मदिरा घोटाला करें या एक्सटॉर्शन रैकेट चलाएँ।”

भाजपा ने ऑडियो क्लिप जारी करते हुए लिखा है, “ये हैं आप के ‘कट्टर ईमानदार’… आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बालियान एक गैंगस्टर से बातचीत कर रहे हैं। गैंगस्टर पूछता है कि आप नेता ने उसके खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज कराई है। बालियान जवाब देते हैं कि गैंगस्टर और उसके गुंडे उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। गैंगस्टर जवाब देता है कि वह बालियान की कोई रिकॉर्डिंग वायरल कर देगा।”

गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP को गैंगस्टर और वसूली वाली पार्टी बताते हुए कहा कि ‘कट्टर बेईमान AAP’ अब ‘कट्टर गुंडों’ की पार्टी बन गई है। इस पार्टी का सबसे बड़ा समर्थक गैंगस्टर हैं, जो खुलेआम वसूली करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की मंजूरी से ये वसूली दिल्ली सरकार के MLA करवाते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास इस तरह के तीन ऑडियो क्लिप हैं।

ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने नरेश बालियान पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी को इस मामले की पूरी जाँच करनी चाहिए। जो सबूत मिले हैं, उसके आधार पर विधायक के फरार होने से पहले उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की जनता ने जिन्हें चुना है, वे राष्ट्रीय राजधानी की जनता को लूट रहे हैं।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि इसके तार रोहिंग्या और बांग्लादेशियों से भी जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक जो खेल खेल रहे हैं, वो दिल्ली के लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली को अपराधियों और भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना दिया है।

 

जान लेने की नीयत से मारा पत्थर: संभल हिंसा मामले में अब डिप्टी कलेक्टर की FIR ने खोली इस्लामी भीड़ की मंशा, 800-900 हमलावरों पर केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर) को मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा के बाद इलाके के हालात अब सामान्य हो चले हैं। बाजारों में दोबारा हलचल है, जनजीवन पटरी पर आ गया है। पुलिस भी फरार चल रहे दंगाइयों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही हैं। इस बीच हिंसा में घायल डिप्टी कलेक्टर द्वारा दी गई तहरीर सामने आई है। डिप्टी कलेक्टर ने शिकायत में बताया है कि उस दिन हिंसक भीड़ उनको घेर कर मार डालना चाहती थी।

यह तहरीर संभल जिला मुख्यालय में तैनात डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू द्वारा दी गई है। रविवार को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि वो सर्वे टीम की सुरक्षा के मद्देनगर 24 नवंबर को अपने अर्दली व सुरक्षाकर्मी होमगार्ड जवान के साथ जामा मस्जिद पर मौजूद थे। सुबह के करीब 9:10 के आसपास 800 से 900 हमलावरों की एक भीड़ मस्जिद के पास जमा होने लगी। इस भीड़ के पास घातक हथियार मौजूद थे।

शिकायत के अनुसार, यह भीड़ किसी भी हालत में चल रहे सर्वे को रोकने पर आमादा थी। भीड़ में कोई भी अधिकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं था। वह समझाने के लिए आगे बढ़े पुलिस बल पर हमलावर हो गई। ईंट और पत्थरों की बौछार होने लगी। हिंसक भीड़ की हरकतों की वजह से स्थानीय निवासी सहम गए। डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू के मुताबिक भीड़ में से कुछ हमलावरों ने उनको टारगेट पर ले लिया था।

शिकायत में आगे बताया गया है कि भीड़ में शामिल किसी हमलावर ने डिप्टी कलेक्टर की हत्या के मकसद से उनको निशाना बनाकर पत्थर मारे। इस पथराव में रमेश बाबू गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके बाएँ पैर और बाएँ हाथ की कोहनी में घाव हो गया। डिप्टी कलेक्टर ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर के आधार पर पुलिस ने 800 से 900 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 221, 132, 121 (1) , 121 (2), 109 (1), 125 और 223 (b) के साथ आपराधिक कानून संसोधन अधिनियम 1932 की धारा 7 के तहत दर्ज हुई है। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। घायल SDM का इलाज चल रहा है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

कश्मीरी पंडित महिलाओं से नहीं छीन सकते ‘विस्थापित’ का दर्जा: हाई कोर्ट का फैसला, Non-Migrants से शादी के कारण नौकरी देने से इनकार कर रहा था जम्मू-कश्मीर प्रशासन

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने घाटी में 1989 से शुरू हुए आतंकवादी हमलों से बचने के लिए पलायन करने वाली हिंदू महिलाओं के मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा कारणों से घाटी से पलायन करने वाली कोई कश्मीरी पंडित महिला अगर किसी गैर-विस्थापित (Non-Migrant) से शादी करती है, तो भी उसका विस्थापित (Migrant) दर्जा खत्म नहीं होगा।

बता दें कि 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हुए नरसंहार एवं हमलों के कारण हजारों की संख्या में कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद समय-समय पर सरकार ने उनके लिए कई तरह के कार्यक्रम शुरू किए। साल 2009 में जम्मू-कश्मीर ने घाटी छोड़ने वाले ‘प्रवासियों’ के लिए विशेष नौकरियों की घोषणा की थी, ताकि वे कश्मीर में वापस लौट सकें।

इस मामले में दो कश्मीरी पंडित महिलाओं ने इस योजना के तहत नौकरी के लिए आवेदन किया था। यह आवेदन राज्य के आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग में कानूनी सहायकों के पद के लिए था। इन दोनों महिलाओं को चुन लिया गया, लेकिन अंतिम चयन सूची से उनका नाम हटा दिया गया। इसके लिए तर्क दिया गया कि दोनों महिलाओं ने गैर-प्रवासियों से शादी की थी।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि महिलाओं ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था कि शादी के कारण उनकी विस्थापित वाली स्थिति बदल गई है। हालाँकि, महिलाओं ने कहा कि विस्थापित के रूप में उनकी स्थिति बरकरार रहनी चाहिए। दोनों महिलाओं ने सरकार के निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी। CAT ने राज्य सरकार को दोनों महिलाओं को नियुक्त करने के लिए कहा।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने CAT के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की। CAT के फैसले को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि शादी करने से महिलाओं के विस्थापित दर्जे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। विवाह की स्थिति का खुलासा नहीं करने का तर्क कोई महत्व नहीं रखता है, क्योंकि नौकरी के विज्ञापन नोटिस में इस आधार पर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रावधान नहीं था।

गैर-विस्थापित से शादी के बाद विस्थापित का दर्जा खत्म होने या बरकरार रहने को लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने सुनवाई की। खंडपीठ ने 11 नवंबर को दिए अपने फैसले में कहा, “यहाँ प्रतिवादी महिलाएँ हैं और उन्हें बिना किसी गलती के कश्मीर घाटी में अपना मूल निवास स्थान छोड़ना पड़ा था।”

कोर्ट ने कहा, “उनसे (कश्मीरी महिलाओं से) यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे केवल विस्थापित के रूप में कश्मीर घाटी में नौकरी पाने के लिए अविवाहित रहेंगी। विस्थापन के कारण हर कश्मीरी महिला को कश्मीरी जीवनसाथी नहीं मिल पाया होगा। ऐसी स्थिति में यह मान लेना कि महिला विस्थापित के रूप में अपना दर्जा खो देगी, यह घोर भेदभावपूर्ण और न्याय की अवधारणा के विरुद्ध होगा।”

कोर्ट ने कहा कि यह भेदभाव और बढ़ जाता है, क्योंकि एक पुरुष अगर गैर-विस्थापित से विवाह करता है तो वह विस्थापित बना रहता है। खंडपीठ ने कहा, “ऐसी स्थिति केवल मानव जाति में व्याप्त पितृसत्ता के कारण उत्पन्न हुई है। राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के तहत रोजगार से संबंधित मामलों में ऐसा भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” अदालत ने दोनों महिलाओं को चार हफ्ते में नियुक्त करने के लिए कहा।

बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसा रोहिंग्या मुस्लिम, बंगाल में निकाह कर बनाए फर्जी दस्तावेज: ज्ञानवापी समेत वाराणसी के 4 जगहों पर की रेकी, ATS ने दबोचा

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को वाराणसी से म्यांमार के रोहिंग्या घुसपैठिए मोहम्मद अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया। यह व्यक्ति न केवल भारत में घुसपैठ करवाने में शामिल था, बल्कि वाराणसी में ज्ञानवापी सहित चार मस्जिदों की रेकी कर चुका था। अब्दुल्ला ने भारतीय पहचान के लिए फर्जी दस्तावेज बनवा रखे थे, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर कार्ड शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्दुल्ला पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले के दुर्गबनकटी इलाके में रह रहा था। गुरुवार (28 नवंबर 2024) को वह ट्रेन से वाराणसी पहुँचा और शहर में विभिन्न स्थानों पर घूमता रहा। उसने वक्फ बोर्ड के मामलों पर जानकारी जुटाने के लिए यूपी कॉलेज का दौरा किया और दालमंडी समेत तीन मस्जिदों का निरीक्षण किया। शुक्रवार को वह ज्ञानवापी पहुँचा और वहाँ के लोगों से संपर्क साधने की कोशिश करने लगा।

ATS को उसके संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर अलर्ट किया गया। टीम ने उसे वाराणसी कैंट स्टेशन से गिरफ्तार किया, जब वह पश्चिम बंगाल लौटने के लिए ट्रेन पकड़ने वाला था। म्यांमार निवासी इस रोहिंग्या का नाम मोहम्मद अब्दुल्ला अपनी कौम और म्यांमार के अन्य घुसपैठियों को बांग्लादेश के भारत सीमा पार करवाने में मदद भी करता था। मोहम्मद अब्दुल्ला ने अब्दुल सलाम मंडल नाम से भारतीय पहचान पत्र भी बनवा रखे थे। इन पहचान पत्रों में आधार, पैन और वोटर कार्ड भी शामिल हैं।

पूछताछ में अब्दुल्ला ने कबूला कि वह बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसपैठ करवाने में मदद करता है। उसने बताया कि वह म्यांमार के अकयाब जिले के मांगडू का निवासी है। फिलहाल के तौर पर उसने अपना घर पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जनपद स्थित दुर्गबनकटी में बनवा लिया है। अब्दुल्ला तमाम फर्जी कागजातों के सहारे साल 2018 से मेदनीपुर में रह रहा था। यहाँ उसे असद भी कहा जाने लगा। इसी दौरान उसने निकाह भी किया था। अब ATS मोहम्मद अब्दुल्ला की बीवी की भी जानकारी खंगाल रही है।

ATS ने उसके पास से मोबाइल फोन, तीन मेमोरी कार्ड, अब्दुस सलाम मंडल के नाम का आधार, वोटर और पैन कार् के साथ यूएनएचसीआर (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी) का कार्ड और 1070 रुपए कैश बरामद किए हैं। मोहम्मद अब्दुल्ला के ऊपर ATS के थाना लखनऊ में पहले भी केस दर्ज है। यह केस सहारनपुर के देवबंद से गिरफ्तार घुसपैठियों के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में दर्ज हुआ था। इस केस के अन्य आरोपित अबू सलेह मंडल, अब्दुल्ला गाजी और शेख नजीबुल हक हैं।

BJP घृणा में ‘न्यूज 24’ इतना अंधा कि बार बार अपना ही थूका चाट रहा: GDP गिरने से लेकर मुस्लिम आरक्षण तक पर किया गुमराह, हेराफेरी पकड़ी गई तो ट्वीट किया डिलीट

फेक न्यूज फैलाकर लोगों को गुमराह करने के आरोपों को लगातार झेलने वाले न्यूज 24 चैनल आदतों से बाज नहीं आ रहा है। पिछले कुछ समय में न्यूज 24 के कई बड़े झूठ पकड़े जा चुके हैं। शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को न्यूज 24 ने एक बार फिर से झूठ बेचने की कोशिश की और अपने ऑफिसियल एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट शेयर किया कि भारत की जीडीपी में गिरावट आई है।

इससे पहले, वो अप्रैल 2024 में बीजेपी नेता और हैदराबाद से पार्टी की प्रत्याशी रहीं डॉ माधवी लता के बारे में फेक न्यूज फैला चुका है, जिसमें उसे माफी भी माँगनी पड़ी थी। दोंनों ही मामलों में चैनल ने ट्वीट डिलीट कर भले ही माफी माँग ली हो, लेकिन इससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।

GDP पर देश को गुमराह करने वाला ट्वीट

News24 ने शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को एक ट्वीट किया जिसमें दावा किया गया कि वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी 5.4% गिर गई। ट्वीट में लिखा गया, “दूसरी तिमाही में देश की GDP में गिरावट, 5.4% कम हुई।”

न्यूज24 का भ्रामक ट्वीट, जिसके बाद में डिलीट कर दिया गया।

हकीकत में यह दावा पूरी तरह गलत था। भारत की जीडीपी में गिरावट नहीं हुई, बल्कि जीडीपी वृद्धि दर 5.4% थी। यह पिछले 7 तिमाहियों में सबसे धीमी वृद्धि दर जरूर है, लेकिन कुल जीडीपी घटने का कोई सवाल नहीं था।

भारत वर्तमान में दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इसके बावजूद, News24 ने गलत जानकारी फैलाते हुए दर्शकों को गुमराह किया। जब सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना हुई, तो चैनल ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया।

एक यूजर लाला ने X (ट्विटर) पर लिखा, “News24 फिर से फेक न्यूज फैक्ट्री बनता जा रहा है।”

मुस्लिम आरक्षण पर भी फैलाया था फेक न्यूज

बता दें कि News24 ने 21 अप्रैल 2024 को भाजपा नेता माधवी लता के नाम से एक पोस्ट किया था, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने सभी मुसलमानों के लिए आरक्षण की माँग की है। पोस्ट में लिखा था, “अरब, सैयद और शिया मुसलमानों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। हम सभी मुसलमानों के लिए आरक्षण की माँग कर रहे हैं।”

इस ट्वीट के लिए न्यूज24 ने माँगी थी माफी

इस दावे को माधवी लता ने तुरंत खारिज किया और इसे झूठा बताया। उन्होंने कहा, “मैंने कभी ऐसा कोई बयान नहीं दिया। यह निराशाजनक है कि एक राष्ट्रीय मीडिया चैनल मेरे नाम पर झूठ फैलाए।”

भाजपा नेता की नाराजगी के बाद News24 ने अपना ट्वीट डिलीट कर इसे ‘मानवीय भूल’ बताया। चैनल ने माफी माँगते हुए कहा, “यह ट्वीट मानवीय भूल का परिणाम था और इसे हटा दिया गया है। इसके लिए हम क्षमा चाहते हैं।”

सोशल मीडिया पर न्यूज 24 के खिलाफ गुस्सा

इन दोनों घटनाओं के बाद News24 की जमकर आलोचना हुई। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने चैनल पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप लगाया।

एक यूजर ने लिखा, “हर दिन News24 फेक न्यूज फैलाओ, फिर डिलीट करो और माफी माँग लो। यह इनका रोज का काम हो गया है।”

दूसरे ने लिखा, “एक न्यूज चैनल होने के नाते क्या आप इस तरह की गलती कर सकते हैं? क्या आप बिना जाँचे-परखे खबरें पोस्ट करते हैं?”

विश्वसनीयता पर उठते सवाल

इन दोनों मामलों ने News24 की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह स्पष्ट है कि चैनल की ओर से बार-बार ‘मानवीय भूल’ का बहाना बनाकर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। मीडिया का काम जनता को सही और सटीक जानकारी देना है। लेकिन बार-बार ऐसी गलतियाँ दिखाती हैं कि News24 जैसी संस्थाओं को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत है। वरना, दर्शकों का विश्वास खोने का खतरा हमेशा बना रहेगा।

‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए संभल में पुलिस पर टूटी इस्लामी भीड़, हिंसा में 14 साल के लड़के से लेकर 72 साल का मोहम्मद तक शामिल: FIR से खुलासा, खून-खराबे की मंशा से जुटे थे उपद्रवी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर 2024) को मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था। यह हमला उस समय किया गया था जब कोर्ट के आदेश पर एक टीम जामा मस्जिद का सर्वे करने गई थी। हमले में 2 दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे और भीड़ में शामिल 5 लोगों की संदिग्ध हालातों में मौत भी हुई थी।

पुलिस घटना के बाद से आरोपितों का पता लगाने में जुटी थी। अब इसी जाँच के क्रम में सामने आया है कि घटना वाले दिन हिंसक भीड़ अल्लाहु अकबर का नारा लगाते हुए आगे बढ़ी थी और आरोपितों के पास तमंचे और कारतूस भी थे। पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ इन हथियारों को बरामद कर लिया है। आरोपितों की उम्र 14 से 72 वर्ष के बीच है।

इस हिंसा की विस्तृत FIR SHO संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर ने दर्ज करवाई है। रविवार को दी गई अपनी तहरीर में SHO ने बताया कि 24 नवंबर को वो अपने हमराह पुलिसकर्मियों के साथ संभल की जामा मस्जिद पर ड्यूटी दे रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एहतियातन पुलिसकर्मी कारतूस, टीयर गैस सेल और अन्य दंगा निरोधक उपकरणों से लैस थे। तभी अचानक ही मस्जिद की तरफ 800 से 900 लोगों की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी।

अल्लाहु अकबर चिल्ला रही थी भीड़

इंस्पेक्टर संभल कोतवाली का दावा है कि भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगा रही थी। इस भीड़ को आगे बढ़ कर कुछ पुलिसकर्मियों ने रोकना चाहा। इन्हें समझाने की बहुत कोशिश की गई। पुलिस ने बताया कि मस्जिद को किसी भी तरह का नुकसान नहीं किया जा रहा। हालाँकि भीड़ में से कोई बी यह दलील सुनने को तैयार नहीं था। सुबह 8:45 पर भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और मस्जिद से महज 100 मीटर की दूरी तक पहुँच गई।

भीड़ ने सुरक्षा पंक्ति बनाकर खड़े पुलिसकर्मियों को पीटना शुरू कर दिया। उनमें से कई के हथियारों को लूट लिया गया। हमले में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं। हालात गंभीर होता देखकर अतिरिक्त फ़ोर्स की माँग की गई। कुछ पुलिस वालों को अपने घायल सिपाहियों के इलाज की जिम्मेदारी पर लगा दिया गया। खुद SHO ने भीड़ से लूटे गए हथियारों को वापस करने की अपील की। हालाँकि बदले में उन पर भी पत्थरबाजी शुरू कर दी गई।

सिपाही से ले कर SDM तक, किसी को नहीं छोड़ा

पत्थरबाजी में कोतवाली संभल के साथ कैलादेवी, रजपुरा और कुढ़फतेहगढ़ के भी SHO घायल हो गए। भीड़ द्वारा हिंसा जारी रही और इसकी चपेट में SDM रमेश बाबू भी आ गए। कुछ ही देर में हिंसक भीड़ ने DSP अनुज चौधरी और SP संभल के PRO (जनसम्पर्क अधिकारी) को भी मार कर घायल कर दिया। सर्वे टीम तक पहुँचने पर आमादा हिंसक भीड़ को रोकने में रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के कांस्टेबल सोनू सहित उत्तर प्रदेश पुलिस के कई अन्य जवानों को भी चोटें आईं।

तहरीर में आगे बताया गया है कि चोटिल होने के बावजूद भीड़ को निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला दिया गया। साथ ही उन्हें न मानने पर बल प्रयोग की चेतावनी भी मिली। इस बात पर भीड़ ने अपनी हिंसा तेज कर दी। पुलिस पर पत्थरों के साथ गोलियों की भी बौछार कर दी गई। सार्वजनिक सम्पत्तियों में भी तोड़फोड़ शुरू हो गई। इसी दौरान एक संरक्षित दीवार को भी तोड़ दिया गया और टायरों को जला कर आगजनी शुरू कर दी गई।

पुलिस का मानना है कि भीड़ की इन करतूतों से शांति व्यवस्था भंग हो गई थी और आम लोगों के मन में आतंक का माहौल बन गया था। तमाम दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए और लोगों ने अपने घरों की खिड़कियाँ बंद कर दीं। बल प्रयोग के तौर पर पुलिस ने भीड़ पर वाटर कैनन से पानी की बौछार की लेकिन उपद्रवी टस से मस नहीं हुए और पथराव जारी रहा। तभी जिले के DM ने हल्का बल प्रयोग करने का आदेश दिया।

दंगाइयों में 14 वर्षीय नाबालिग से 72 साल का का बुजुर्ग तक

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए रबर बुलेट और आँसू गैस के गोले छोड़े। बदले में हमलावरों ने पत्थरबाजी के साथ गोलियाँ बरसानी जारी रखीं। इसी दौरान पुलिस ने हमला कर रहे 21 उपद्रवियों को गिरफ्तार भी किया। इन पकड़े गए लोगों में 19 साल के मोहम्मद शादाब और इतनी ही उम्र के मोहम्मद रिहान शामिल हैं। ये दोनों आरोपित संभल की जामा मस्जिद के आसपास मौजूद बाजारों के निवासी हैं। पकड़े गए तीसरे आरोपित का नाम गुलफाम है।

पुलिस की कार्रवाई में पकड़ा गया चौथा आरोपित अमान है। पाँचवे आरोपित का नाम मोहम्मद सलीम है। 30 वर्षीय मोहम्मद सलीम की तलाशी में 5 प्लास्टिक पैलेट बरामद हुई। माना जा रहा है कि इसे पुलिस से लूटा गया था। 19 साल के छठवें आरोपित का नाम मोहम्मद समीर है। पकड़ा गया सातवाँ आरोपित 37 साल का याकूब है जिसके पास से 12 बोर का एक तमंचा और उसकी नली में फँसा एक कारतूस बरामद हुआ है।

दबोचा गया 8वाँ आरोपित 19 वर्षीय सलमान है। 9वें आरोपित 30 साल के रिहान अली के पास से पुलिस से लूटी गई 2 रबर बुलेट मिली है। 10वाँ आरोपित 72 साल का बुजुर्ग मोहम्मद बाबू है। 22 साल का 11वाँ आरोपित मोहम्मद हैदर है जिसकी तलाशी के दौरान उसके पास पुलिस से लूटा गया 3 ब्लैंक कारतूस बरामद हुआ है। 12वाँ आरोपित 22 वर्षीय यामीन है। यामीन के पास से पुलिस को 12 बोर के 2 कारतूस मिले हैं। 13वाँ आरोपित 30 साल का सलीम है।

पुलिस द्वारा दबोचे गए 14वें आरोपित 32 वर्षीय आफ़ताब के पास से एक तमंचा व 2 कारतूस मिले हैं। इसमें से एक कारतूस आफताब ने तमंचे में लोड कर रखा था। 15वें आरोपित की पहचान 58 वर्षीय बुजुर्ग मोहम्मद नदीम के तौर पर हुई है। 16वें और 17वें आरोपितों की पहचान क्रमशः 22 वर्षीय फ़िरोज़ और इसी उम्र के फरदीन के तौर पर हुई है। गिरफ्तार हुआ 18वाँ आरोपित 25 वर्षीय मोहम्मद तहजीब है जिसके पास से .315 बोर का एक तमंचा और 2 कारतूस बरामद हुए हैं। इसमें से एक कारतूस तमंचे में लोड था।

बताते चलें कि संभल हिंसा में मारे गए अधिकतर लोगों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में .315 बोर की ही गोली लगना पाया गया है। गिरफ्तार हुआ 19वाँ आरोपित 46 साल का नईम है। इन सभी के अलावा पकड़े गए दंगा आरोपितों में 2 नाबालिग भी शामिल हैं। इनमें से एक की उम्र 16 वर्ष जबकि दूसरे की महज 14 साल है।

पुलिसकर्मी ही नहीं उनके वाहन भी टारगेट पर

गौरतलब है कि हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस वालों की 3 प्राइवेट कारों को भी जलाकर निशाना बनाया। इसके साथ सुरक्षा बलों की 4 निजी बाईकों को भी आग के हवाले कर दिया गया। ये सभी पुलिसकर्मी अलग-अलग थानाक्षेत्रों से इमरजेंसी ड्यूटी पर जामा मस्जिद क्षेत्र में भेजे गए थे। सरकारी गाड़ियों में भी आगजनी का प्रयास किया गया। पत्थरबाजी करके DSP की गाड़ी का शीशा तोड़ डाला गया। उपद्रवियों का इतना खौफ था कि उनके खिलाफ डर से कोई स्थानीय व्यक्ति गवाही देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

पुलिस ने 24 नवंबर को ही इन सभी 21 आरोपितों को शाम 5:10 पर आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 109 (1), 125 (a), 125 (b), 221, 132, 121 (1), 121 (2), 324 (4), 223 (b), 326 (f) और 317 (3) के साथ आपराधिक कानून संसोधन 1932 की धारा 7 व सार्वजानिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के सेक्शन 3/4 के तहत कार्रवाई की गई है। इन सभी पर आर्म्स एक्ट की धारा 7/3/4 भी लगाई गई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है। CCTV फुटेज व अन्य माध्यमों से अन्य हमलावरों की तलाश की जा रही है। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बीते शुक्रवार (29 नवंबर) की जुमे की नमाज़ अदा की गई है। घायल पुलिसकर्मियों का इलाज चल रहा है।

जिसे मुस्लिम कहते हैं संभल की जामा मस्जिद, उस हरि मंदिर में सपा सरकार ने बंद करवाई थी पूजा: बीजेपी MLA ने दिखाए मैप-फोटो, ASI ने भी माना इमारत में बार-बार हुए बदलाव

उत्तर प्रदेश स्थित संभल के जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के मेरठ सर्किल में पुरातत्वविद अधीक्षक विनोद सिंह रावत ने एक हलफनामे दायर किया है। इस हलफनामे में कहा गया है कि ASI अधिकारियों को निरीक्षण के लिए मस्जिद में जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके साथ ही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति ने मस्जिद के अंदर कई हस्तक्षेप एवं बदलाव किए हैं।

हलफनामे में कहा गया है कि ASI की एक टीम ने विवादित मस्जिद का साल 1998 में और फिर जून 2024 में निरीक्षण किया था। पत्रकार राहुल शिवशंकर द्वारा सोशल मीडिया साइट X पर शेयर किए गए हलफनामे की कॉपी में कहा गया है, “एएसआई के लिए भी स्थिति बहुत कठिन है। ASI के अधिकारियों को भी निरीक्षण के लिए स्मारक में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी।”

हलफनामे में आगे कहा गया है, “हालाँकि, जिला प्रशासन के सहयोग से ASI ने समय-समय पर स्मारक (जामा मस्जिद) का निरीक्षण किया। ASI की एक टीम ने साल 1998 में स्मारक का निरीक्षण किया था। एएसआई टीम द्वारा स्मारक का सबसे हालिया निरीक्षण 25 जून, 2024 को किया गया था। निरीक्षण नोट की एक प्रति भी अनुलग्नक-I के रूप में संलग्न है।”

विनोद सिंह रावत ने आगे कहा है कि संभल के जामा मस्जिद प्रबंधन समिति ने विवादित मस्जिद में कई तरह के हस्तक्षेप और बदलाव किए हैं। मस्जिद प्रबंधन समिति ने ASI टीम को निरीक्षण करने से रोक दिया है। इस तरह ASI को मस्जिद की वर्तमान स्थिति के बारे में पता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ASI के पास इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं है कि मस्जिद में कोई अतिरिक्त निर्माण किया गया था या नहीं।

हलफनामे में आगे लिखा है, “अनुच्छेद 32 और 33 के जवाब में यह प्रस्तुत किया गया है कि स्मारक से जुड़ी मस्जिद प्रबंधन समिति ने स्मारक में विभिन्न हस्तक्षेप, परिवर्धन, संशोधन आदि किए हैं। जून 2024 के महीने में ASI के अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण में स्मारक में किए गए कुछ हस्तक्षेपों को दर्ज किया गया है। उक्त निरीक्षण नोट की एक प्रति कृपया अनुलग्नक-I में देखी जा सकती है।”

इसमें आगे कहा गया है कि ASI टीम को इसके नियमित निरीक्षण से रोक दिया गया है। विनोद सिंह रावत ने अपने हलफनामे में यह भी बताया है कि इस मस्जिद में जब भी किसी आधुनिक हस्तक्षेप या बदलाव की गतिविधि देखी गई तो स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और इसके जिम्मेदार लोगों एवं संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

इस तरह जामा मस्जिद की वर्तमान स्थिति और उसमें किए गए बदलाव के बारे में ASI को जानकारी नहीं है। इस मामले में यह हलफनामा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 22 दिसंबर 1920 को अधिनियम की धारा 3(3) के तहत संयुक्त प्रांत सरकार ने अधिसूचना जारी करके विवादित स्थल को संरक्षित स्मारक घोषित किया था।

सपा सरकार से पहले हरिहर मंदिर में होती थी पूजा-अर्चना

वहीं, देवरिया से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने सोशल मीडिया साइट X पर जामा मस्जिद का पुराना नक्शा और कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इनमें कुछ महिलाओं को पूजा करते हुए देखा जा सकता है। त्रिपाठी का कहना है कि साल 2012 की सपा सरकार से पहले जामा मस्जिद में पूजा और शादी-विवाह होते थे।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “इसकी (पूजा-अर्चना और शादी-विवाह की) पुरानी तस्वीरें भी हैं। सपा सरकार में MP शफीकुर्रहमान बर्क़ के दबाव में पूजा-अर्चना रूकवा दी गई। हरि मंदिर को पूरी तौर पर जामा मस्जिद में तब्दील कर दिया गया। सरकारी गजट से लेकर तमाम लेखों में यहाँ हिंदू मंदिर का ज़िक्र है। यही वजह है कि आज कुछ लोगों को सर्वे से डर लगता है!”

मंदिर-घर-संपत्ति सबको इस्लामी कट्टरपंथी बना रहे निशाना, पर मुस्लिमों से ही पूछकर वॉयस ऑफ अमेरिका ने हिंदुओं को बताया सुरक्षित: अब इसी सर्वे को दिखा प्रोपेगेंडा कर रही बांग्लादेशी मीडिया

बांग्लादेश में एक तरफ हिंदुओं के खिलाफ हिंसा खत्म होने का नाम नहीं ले रही, चुन-चुनकर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, हिंदू नेताओं पर ईशनिंदा के केस लगाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ बांग्लादेश का मीडिया दुनिया के सामने अलग माहौल बनाने में लगा है जहाँ ये बताया जा रहा है कि मुहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेशी अल्पसंख्यक अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

नीचे कुछ बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट की हेडलाइन देख सकते हैं। इनमें वॉयस ऑफ अमेरिका के सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया है कि सर्वे बता रहा है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

हेडलाइन से बिलकुल ऐसा लग रहा है मानो इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से ही पूछा गया होगा कि उन्हें बांग्लादेश में सुरक्षित लगता है या नहीं। लेकिन खबर के अंदर देखने पर पता चलेगा कि ये सर्वे का निष्कर्ष भी बांग्लादेश की बहुसंख्यक आबादी यानी मुस्लिमों से पूछकर दिया गया है।

ढाका ट्रिब्यून हो या डेली स्टार, सबने अपनी रपोर्ट में वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि, बांग्लादेश में अधिकांश लोग मानते हैं कि अंतरिम सरकार धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को पिछले अवामी लीग सरकार की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।

दिलचस्प बात ये है कि अक्टूबर के अंत में किए गए इस सर्वे में 1,000 लोगों ने भाग लिया था, जिनमें से 92.7% मुस्लिम ही थे। सोचिए, अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में मुस्लिमों से पूछा गया कि अल्पसंख्यक उनके देश में कैसा महसूस करते हैं।

नतीजे आए कि 64.1% का मानना है कि वर्तमान अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को बढ़ा रही है। इसके विपरीत, केवल 15.3% उत्तरदाताओं ने कहा कि स्थिति पहले से खराब हुई है, जबकि 17.9% ने महसूस किया कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। सर्वेक्षण में शामिल मुसलमानों का केवल 13.9% हिस्सा मानता है कि यूनुस सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा स्थिति खराब हुई है। इसके विपरीत, गैर-मुसलमानों में से 33.9% ने कहा कि स्थिति पहले से खराब हो गई है।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में एक तरफ मीडिया ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ जैसे सर्वेक्षणों के नतीजों के जरिए प्रोपगेंडा रच रहा है और दूसरी तरफ हिंदू अपने हालातों पर रोते-बिलखते दिख रहे हैं। उनकी आवाज उठाने को कोई नहीं है। ये जिस युनूस सरकार के राज में अल्पसंख्यकों के साथ इंसाफ की बातें मुस्लिम कर रहे हैं उसी सरकार के आने के बाद हिंदुओं के साथ बांग्लादेश में तमाम घटनाएँ हुईं।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने न केवल उनके घरों को जलाया, उनके सामानों को लूटा बल्कि उनकी महिलाओं से बदसलूकी की, उनके देवी-देवताओं का अपमान किया और कई जगह हत्या जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया गया। इतने से जब मन नहीं भरा तो हिंदुओं को रैली करता देख भी कट्टरपंथी भड़क गए। उन्होंने कुछ दिन पहले ही बांग्लादेशी झंडे के अपमान का आरोप लगाकर हिंदू नेता कृष्ण दास को गिरफ्तार करवा दिया। फिर उनपर ईशनिंदा का आरोप लगाया और उन्हें देशद्रोह के इल्जाम में जेल में डाल दिया।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति इतनी बदतर है कि सोशल मीडिया पर हिंदुओं की तमाम वीडियो है जिसमें वो रो रोकर मदद माँगने को मजबूर हैं। युनूस सरकार के आने के बाद भी कई हिंदू महिलाओं की रोती-बिलखती वीडियोज सामने आईं थी। बड़े-बड़े कलाकार इसलिए निशाना बनाए गए क्योंकि वो हिंदू थे। उनके घरों को तबाह कर दिया गया, उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। और, जब बात उन्हें इंसाफ देने की आई तो युनूस सरकार ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वो छात्र आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। इतने पर भी मीडिया ये फैला रहा है कि युनूस सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षित माहौल दे रही है

जुमे की नमाज के बाद चटगाँव में 3 मंदिरों पर हमला, मूर्तियों को तोड़ा: हिंदुओं की दुकानों को भी फूँका, पीड़ितों को बचाने नहीं आई बांग्लादेश की पुलिस-फौज

प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं का नरसंहार जारी है। हत्या और बलात्कार की घटनाएँ बढ़ गई हैं। मंदिरों का विध्वंस किया जा रहा है। जिहादी एवं चरमपंथियों द्वारा दिए जा रहे इस कृत्य को मोहम्मद यूनुस की सरकार और सेना का समर्थन प्राप्त है। जुमे की नमाज के बाद हिंसक इस्लामी फिर ने हिंदुओं और मंदिरों को निशाना है।

हिंसक इस्लामी भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को बांग्लादेश के चटगाँव स्थित तीन हिंदू मंदिरों पर हमला कर दिया और उसमें तोड़फोड़ की। इस्लामी चरमपंथियों ने हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने प्रतिमा को खंडित करके टुकड़ों को इधर-उधर फेंक दिया। वहीं, हिंदुओं पर हमले किए गए। इसके कारण लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

शुक्रवार को चटगाँव के कोतवाली पुलिस स्टेशन इलाके में स्थित हिंदुओं के दुकानों को आग लगा दी गई। कुछ लोगों के मकानों में भी आग लगाने की बात सामने आ रही है। शांतानेश्वरी मातृ मंदिर, शनि मंदिर और शांतनेश्वरी कालीबाड़ी मंदिर को निशाना बनाया गया। हमले के दौरान हिंदुओं ने सेना और पुलिस से मदद माँगी, लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की गई।

शांतिनेश्वरी मंदिर प्रबंधन समिति के स्थायी सदस्य तपन दास ने स्थानीय बीडीन्यूज24 को बताया, “जुमा (शुक्रवार) की नमाज के बाद सैकड़ों लोगों का एक जुलूस आया। उन्होंने हिंदू विरोधी और इस्कॉन विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। हमलावरों ने मंदिर पर हमला कर कर दिया और ईंट-पत्थर फेंके। उन्होंने शनि मंदिर और काली मंदिर में तोड़फोड़ की और दुकानों को निशाना बनाया।”

जिन इलाकों में हमला किया गया है, वे हिंदू बहुल हैं। यहाँ की 90 प्रतिशत आबादी हिंदू है। सत्ता पलटने के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा से डरकर समुदाय के कई लोग इलाका छोड़कर चले गए हैं। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश में अब तक 200 से अधिक हिंदू मंदिरों निशाना बनाते हुए देवी-देवताओं को अपवित्र किया गया है।

यही वो चटगाँव है, जहाँ ISCKON के संत चिन्मय कृष्णदास और उनके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद अल्पसंख्यक समुदाय ने यहाँ विरोध प्रदर्शन किए थे। दरअसल, यूनुस सरकार को समर्थन दे रहीं बांग्लादेश की इस्लामी पार्टियों ने ISKCON को बैन करवाने के लिए जोर लगा दिया है। वे ISKCON को ‘कट्टरपंथी संगठन’ बता रही हैं।

बांग्लादेश की कट्टरपंथी सरकार ने चिन्मय कृृष्णदास की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश सरकार ने चिन्मय कृष्णदास सहित उनकी धार्मिक संस्था से जुड़े 17 लोगों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों से लेन-देन पर 30 दिन के लिए रोक लगाने का आदेश दिया गया है। इस्लामी मुल्क में हिंदू संत पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। 

MCD अस्पतालों में 31% पद खाली, केवल 36% स्वास्थ्य बजट का इस्तेमाल: AAP के ‘दिल्ली मॉडल’ से मरीजों की हालत बदतर, नहीं मिल पा रहा इलाज

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘दिल्ली में स्वास्थ्य मुद्दों की स्थिति 2024’ नामक इस रिपोर्ट को 28 नवंबर को प्रजा फाउंडेशन द्वारा जारी किया गया। इसमें बताया गया है कि 2023-24 में MCD के अस्पतालों और डिस्पेंसरी में स्वीकृत पदों में से 31% पद खाली रहे, जबकि 2022-23 के स्वास्थ्य बजट का केवल 36% उपयोग किया गया।

दिल्ली सरकार के साल 2022-23 के बाद 2023-24 में स्वास्थ्य बजट में 16% की बढ़ोतरी हुई और 2024-25 में यह 12% और बढ़ाया गया। लेकिन बजट का उपयोग प्रभावी नहीं हो पाया। 2023-24 के बजट के उपयोग का डेटा भी उपलब्ध नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे रिसर्च के दौरान MCD और राज्य सरकार के कई अस्पतालों ने महीनों का डेटा पूरा नहीं दिया। प्रजा फाउंडेशन के शोध प्रबंधक श्रेयस चोरगी ने बताया कि दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए डेटा संग्रह प्रणाली कमजोर है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन केंद्र, राज्य और MCD में विभाजित है, जिससे डेटा संग्रह और विश्लेषण में बाधाएं आती हैं। एक केंद्रीकृत स्वास्थ्य सूचना प्रणाली आवश्यक है।” प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, MCD और राज्य सरकार द्वारा संचालित कई अस्पतालों और डिस्पेंसरी ने रिसर्च के दौरान कई महीनों का डेटा ही जमा नहीं किया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में स्वास्थ्य सेवा का प्रबंधन केंद्रीय, राज्य और नगर निगम प्रशासन के बीच बंटा हुआ है, जिससे डेटा संग्रह और विश्लेषण कठिन हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य जानकारी को एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर एकत्र करना जरूरी है।

रिपोर्ट में 2014 से 2023 तक के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें संचारी रोगों के चलते 1,59,129 मौतें हुई हैं, तो सांस की बीमारियों के चलते 88,159 मौतें हुई हैं। वहीं, हाइपरटेंशन से 43,487 मौतें तो टीबी से 35,800 लोगों की जान गई है। इस बीच, डेंगू से मौत के मामले में 627% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2014 में 74 थी और 2023 में बढ़कर 538 हो गई। हाइपरटेंशन से मौत के मामलों में 109% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2014 में 1,962 थी और 2023 में 4,102 तक पहुँच गई। वहीं, हृदय रोग से मौत के मामले 66% बढ़े।

AAP के ‘दिल्ली मॉडल’ के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों की तकलीफें और बढ़ती बीमारियाँ दिखाती हैं कि बजट और संसाधन पर्याप्त होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर नहीं हो पा रही हैं। खाली पदों और बजट का उपयोग न हो पाना दिल्ली के निवासियों के लिए चिंता का विषय है।