उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने प्रयागराज महाकुंभ में नकली नोटों को खपाने की एक साजिश का पर्दाफाश किया है। मोहम्मद सुलेमान अंसारी और इदरीश की गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा हुआ है। दोनों को 1.97 लाख रुपए मूल्य के नकली नोटों के साथ 19 नवंबर 2024 को वाराणसी के सारनाथ से गिरफ्तार किया गया।
इनके साथी जाकिर की तलाश की जा रही है। वही इस रैकेट का सरगना बताया जा रहा है। सुलेमान और इदरीश को जाकिर ही नकली नोट देता था। फिर दोनों उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी सप्लाई करते। जाकिर पश्चिम बंगाल के मालदा का रहने वाला है। पूछताछ में पता चला है कि उसे बांग्लादेश से नकली भारतीय करेंसी की सप्लाई मिल रही थी।
सुलेमान और इदरीश बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले हैं। सुलेमान मालदा में पंक्चर बनाता था। इसी दौरान वह जाकिर के संपर्क में आया। सुलेमान को इससे पहले बिहार पुलिस ने भी एक बार 2 लाख रुपयों के नकली नोट के साथ पकड़ा था। इसके बाद वह करीब 6 महीने तक हाजीपुर जेल में बंद भी रहा था।
सुलेमान और इदरीश की गिरफ्तारी के बाद सारनाथ थाने में ATS इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी ने मामला दर्ज कराया है। इसकी प्रति ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसके अनुसार ATS को काफी समय से उत्तर प्रदेश में नकली नोटों की तस्करी की सूचना मिल रही थी। इसमें मालदा के जाकिर और वैशाली के मोहम्मद सुलेमान की संलिप्तता की की भी सूचना थी।
19 नवंबर को एटीएस को सूचना मिली की कुछ लोग पश्चिम बंगाल से नकली नोटों की खेप ले कर वाराणसी में ट्रेन से उतरे हैं। पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की। इसी दौरान दो लोग फरीदपुर बाइपास पर पिट्ठू बैग के साथ खड़े दिखे। पुलिस को देखते ही दोनों भागने लगे। पकड़े जाने के बाद पूछताछ में एक ने अपना नाम मोहम्मद सुलेमान अंसारी (67) बताया। उसके पास से मोबाइल फोन, पैन कार्ड, नकद और रेल टिकट बरामद हुआ। वहीं दूसरे ने अपना नाम इदरीश बताया। उसके पास से भी रेल टिकट और मोबाइल फोन बरामद किया गया।
तलाशी के दौरान इनके पास से 500-500 के नकली नोटों की गड्डियाँ बरामद हुईं। दोनों ने बताया कि 2 दिन पहले वे वैशाली से मालदा गए थे। यहीं जाकिर ने उन्हें करीब दो लाख मूल्य के नकली नोट दिए थे। 30 हजार रुपये मूल्य के असली नोट के बदले इन्हें 1 लाख रुपए मूल्य के नकली नोट मिलते थे।
पूछताछ में इन्होंने बताया कि नकली नोट मिलने के बाद वे अलग-अलग वाहनों से पश्चिम बंगाल से लौटे। वे ये नोट वाराणसी में खपाने वाले थे। इसके बाद जो नोट बच जाते उन्हें दोनों अगले साल जनवरी में प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में खपाते। गिरफ्तारी से पहले दोनों रास्ते में चायपानी और छोटी-मोटी खरीदारी के लिए नकली नोट का इस्तेमाल भी कर चुके थे।
पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा के सोनामुखी ग्रामीण अस्पताल में एक ह्रदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक नवजात को एक आवारा कुत्ता उठा ले गया। नवजात को एक महिला ने अस्पताल के शौचालय में जन्म दिया था क्योंकि अस्पताल वालों ने उसे भर्ती नहीं किया था। बताया गया कि बच्चे का जन्म समय से पहले हो रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि घटना सोमवार (18 नवंबर, 2024) को हुई। पीड़ित महिला कथित तौर पर कोचडीही गाँव की रहने वाली है। उसका नाम प्रिया रॉय बताया जा रहा है। वह भर्ती होने का इंतजार कर रही थी, इसी दौरान शौचालय में उसने नवजात को जन्म दिया।
प्रिया को पेट में तेज दर्द के कारण अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद उससे यूरिन सैंपल माँगा गया। लेकिन जैसे ही वह शौचालय में दाखिल हुई, उसे तेज दर्द हुई और उसने यहीं के फर्श पर अविकसित बच्चे को जन्म दे दिया। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि इसके बाद उन्होंने तुरंत अस्पताल के कर्मचारियों से संपर्क किया, लेकिन कर्मचारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।
परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बार-बार कहने के बावजूद प्रिया की देखभाल करने के लिए कोई नहीं आया। नवजात को भी शौचालय में अकेला छोड़ दिया गया। जब तक परिवार के सदस्य वापस लौटते, तब तक उन्होंने देखा कि बच्चा गायब है। उन्होंने देखा कि एक आवारा कुत्ता बच्चे को उठाकर ले जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि देखने वालों ने पुष्टि की कि घटना के बाद भी अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते मौजूद थे।
अस्पताल ने किया लीपापोती का प्रयास
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए पीड़ित माँ को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। बिष्णुपुर जिले की डिप्टी CMOH मीनाक्षी मैती ने दावा किया कि प्रारंभिक जाँच में परिवार के आरोपों को नकारने की कोशिश की। जिसमें गर्भावस्था की गर्भकालीन आयु भी शामिल है।
उन्होंने आगे दावा किया कि परिवार द्वारा उनके दावे का समर्थन करने के लिए प्रदान की गई एक तस्वीर ‘गढ़ी हुई’ थी। डॉक्टर ने दावा किया कि परिवार ने प्रिया की गर्भावस्था के समय के बारे में सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने यह भी दावा किया परिवार का दिया हुआ फोटो झूठा है। हालाँकि, प्रिया के परिवार ने यह दावे नकारे और कहा कि अस्पताल ने रिकॉर्ड में गड़बड़ी की है।
इस घटना के बाद कथित तौर परिवार और अस्पताल के कर्मचारियों के बीच विवाद भी हुआ। इसके बाद सोनामुखी पुलिस मामले की जाँच करने के लिए पहुंची। बिष्णुपुर जिले के प्रतिनिधियों, जिनमें दो डिप्टी CMOH शामिल थे, ने भी मौके पर जाँच की और सबूत जुटाए।
भाजपा ने ममता सरकार पर बोला हमला
भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक पोस्ट शेयर करते हुए पीड़ित की आपबीती बताई। उन्होंने बताया कि कैसे आवारा कुत्ता कथित तौर पर समय से पहले जन्मे बच्चे को उठा ले गया। उन्होंने इस घटना को इस घटना को भयावह और दिल दहला देने वाला बताया है। मालवीय ने पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी की आलोचना की।
A horrifying incident has emerged from Sonamukhi, West Bengal.
Under the so-called ‘world-class’ leadership of Health Minister Mamata Banerjee, a pregnant woman was forced to give birth in a toilet, after enduring prolonged labor pain, without receiving any medical attention.… pic.twitter.com/tCIpEPic6J
उन्होंने लिखा, “पश्चिम बंगाल के सोनामुखी से एक भयावह घटना सामने आई है। ममता बनर्जी की तथाकथित ‘विश्वस्तरीय’ सुविधाओं में, एक गर्भवती महिला को लंबे समय तक प्रसव पीड़ा सहने के बाद बिना किसी सहायता के शौचालय में बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा। दुखद बात यह है कि जन्म के बाद, अस्पताल में खुलेआम घूमने वाले एक कुत्ते ने नवजात शिशु को छीन लिया और भाग गया। यह भयावह और हृदय विदारक है।”
उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए बुधवार (20 नवंबर, 2024) को मतदान जारी है। ये सीटें फूलपुर, गाजियाबाद, मझवां, खैर, मीरापुर, सीसामऊ, कटेहरी, करहल और कुंदरकी हैं। इन्हीं में से मतदान के दौरान मुज़फ्फरनगर की मीरापुर सीट पर पथराव की खबर आई है। हिंसा का आरोप समाजवादी पार्टी (SP) की प्रत्याशी सुम्बुल राणा के समर्थकों पर लगा है। वहीं मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा के सपा प्रत्याशी हाजी रिज़वान भी मतदान के दौरान पुलिस से भिड़ गए। उन्होंने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड हटाने का प्रयास किया।
मुजफ्फरनगर की मीरापुर से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व सांसद कादिर राणा की बहू सुम्बुल राणा सपा के टिकट से चुनावी मैदान में हैं। मतदान शुरू होते ही ककरौली इलाके में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने वोटिंग में धांधली का आरोप लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद नारेबाजी भी शुरू हो गई। अधिकारियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और नारा लगा रहे लोगों को समझाने की कोशिश की।
— GK News Live युवा जोश, नई सोंच शहर से गांव तक (@GkNewsLive1) November 20, 2024
प्रशासन के प्रयासों का सपा समर्थकों पर कोई असर नहीं पड़ा। थोड़ी ही देर में सुम्बुल राणा के समर्थक मारपीट पर उतारू हो गए। उन्होंने पुलिस पर पथराव करना चालू कर दिया। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की। इस हिंसा के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हिंसा करने वाली भीड़ में उन नाबालिग बच्चों को भी देखा जा सकता है जिनके सम्भवतः अभी वोटर कार्ड भी नहीं बने हैं। कुछ अन्य वीडियो में हमलावरों को घरों की आड़ ले कर पथराव करते देखा जा सकता है।
यूपी के मुजफ्फरनगर में मीरापुर क्षेत्र के ककरौली मे मतदान के दौरान पथराव
भीड़ ने किया हंगामा और पथराव पुलिस ने लोगों को दौड़ाया
मीरापुर में हिंसा के बाद NDA गठबंधन की प्रत्याशी मिथिलेश पाल ने सपा पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने हिंसा के बाद कहा कि बाहर से दंगा करने के लिए लोग बुलाए गए हैं और यह असलहा लेकर आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को मस्जिदों और मदरसों में रोका गया है।
कुंदरकी में पुलिस से भिड़े सपा प्रत्याशी
मुरादाबाद के कुंदरकी में भी बवाल हुआ। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हाजी रिज़वान पुलिस से भिड़ते नजर आए। सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड को देख कर हाजी रिज़वान भड़क उठे। वह मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों पर चीखने-चिल्लाने लगे। पुलिस के समझाने के बावजूद रिज़वान जबरन बैरिकेड को अपने हाथों से हटाने लगे। मौके पर महिला पुलिसकर्मी भी तैनात थीं। हाजी के समर्थक भी पुलिस से पूछ रहे थे कि उनको किसी का पहचान पत्र चेक करने का अधिकार किसने दिया।
मुरादाबाद : कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में सपा कैंडिडेट हाजी रिजवान ने अपने समर्थकों के साथ मतदान केंद्र पर पहुंच कर पुलिस पर मतदाताओं का पहचान पत्र चेक करने का आरोप लगाया। भीखनपुर कुलवाड़ा के बूथ संख्या 362,363 के पास का बताया जा रहा है वीडियो। @moradabadpolice#Moradabad… pic.twitter.com/Ty9k6lwe7r
सपा प्रत्याशी का दावा है कि उन्होंने 70 साल की उम्र में पहली बार ऐसा बैरिकेड देखा है। यह बहस कुंदरकी के भीखनपुर कुलवाड़ा के बूथ संख्या 362,363 के पास हुई है। बाकी सीटों पर हिंसा या तनातनी की कोई सूचना नहीं आई है। यूपी उपचुनाव के नतीजे 23 नवम्बर, 2024 को आएगा।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान जारी है। इस बीच विपक्ष ने भाजपा नेता विनोद तावड़े पर लोगों को पैसे बाँटने का आरोप लगाया है। वहीं, महाविकास आघाड़ी (MVA) के शरद पवार वाली एनसीपी की नेता सुप्रिया सुले पर बिटकॉइन घोटाले का पैसे इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। इस बीच इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक बार फिर पक्षपाती रुख अपनाते हुए ट्विट किया है।
दरअसल, महाराष्ट्र के पालघर में मंगलवार (19 नवंबर 2024) को बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े पर मतदाताओं को पैसे बाँटने का आरोप लगाया। इसके बाद राजदीप सरदेसाई ने इसको लेकर ताबड़तोड़ कई ट्वीट कर दिए। हालाँकि, यह मामला जाँच का विषय है, फिर वे अपनी राजनीतिक झुकाव को प्रदर्शित करने में नहीं चुके।
राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट में लिखा, “बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को विरार के एक होटल में बीवीए विधायक ने घेरा। उन पर 5 करोड़ रुपए कैश बैग रखने का आरोप है। साथ ही उनके पास एक डायरी भी है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं, जिन्हें पैसे दिए गए। बीजेपी और बीवीए कार्यकर्ताओं में झड़प। यदि वोट ‘खरीदे’ जाते हैं तो चुनाव कैसे स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं? क्या @ECISVEEP एक बार फिर जाँच एवं कार्रवाई करेगा या चुप रहेगा?”
HUGE: a day before Maharashtra goes to polls, major controversy.. BJP national general secretary Vinod Tawde trapped and gheraoed by a BVA MLA in a hotel in Virar, accused of having a Rs 5 crores cash bag with a diary of people to whom money given is reportedly mentioned. BJP… pic.twitter.com/lyChkwJHdZ
इस घटना से अति उत्साहित राजदीप ने अगला ट्वीट किया, “ब्रेकिंग: महाराष्ट्र में कैश फॉर वोट मामले में कुल तीन एफआईआर दर्ज। बीजेपी प्रत्याशी दो एफआईआर में नामज़द। एक एफआईआर में विनोद तावड़े का नाम है। एक एफआईआर में बीवीए का भी नाम है। कुल 9 लाख 53 हजार 900 रुपए नकद मिले। कुल तीन एफआईआर दर्ज की गई है।”
Breaking: Total three FIR filed in Maharashtra cash for votes matter. BJP candidate named in two FIRs. Vinod Tawde named in one FIR. BVA also named in one FIR. Total cash found 9 lakhs 53 thousand 900 rupees. 9,53,900 total cash seized by election officials. Total three FIRs…
राजदीप सरदेसाई विनोद तावड़े से जुड़े पल-पल की खबर दे रहे थे। अब कोई भी ये सोच सकता है कि राजदीप सरदेसाई एक पत्रकार हैं और अगर अपने ट्वीट में इसे बता रहे हैं तो गड़बड़ क्या है। गड़बड़ है। जिस वक्त तावड़े पर आरोप लगा, उसी समय शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले पर भी बिटकॉइन घोटाले के पैसे का इस्तेमाल विधानसभा चुनावों में करने का आरोप लगा। भाजपा ने इस मुद्दे को उठाया भी।
हालाँकि, राजदीप सरदेसाई ने सुप्रिया सुले पर लगे आरोपों पर एक भी ट्वीट नहीं किया। सुप्रिया सुले पर आरोप लगाने वाले सेवानिवृत IPS अधिकारी हैं। सुले की बातचीत का एक ऑडियो भी सामने आया है। इस ऑडियो को लेकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि इसमें आवाज सुप्रिया सुले की ही है और वे उस आवाज को पहचान गए हैं।
इतना सब कुछ होने के बाद भी शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ लगे आरोपों पर राजदीप सरदेसाई ने एक भी ट्वीट नहीं किया। अब सवाल मन में उठेगा कि इसके पीछे क्या वजह हो सकती है। इसके पीछे शरद पवार और राजदीप सरदेसाई के पिता के बीच का रिश्ता है। शरद पवार का राजदीप के पिता पर एक अहसान है, जिसका बदला वे आज भी चुका रहे हैं।
? In October 93, Rajdeep Sardesai's father was arrested for huge money laundering. The CM of Maharashtra was Sharad Pawar. So the case just disappeared.
सोशल मीडिया साइट X पर एमिनेंट इंटेलेक्चुअल नाम के एक हैंडल ने इसको लेकर खुलासा किया है। दरअसल, अक्टूबर 1993 में राजदीप सरदेसाई के पिता को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार थे। आखिरकार यह मामला पूरी तरह से गायब हो गया। शायद यही वजह है कि राजदीप सरदेसाई शरद पवार के प्रति आज भी कृतज्ञ हैं।
राजदीप सरदेसाई के पिता दिलीप सरदेसाई एक क्रिकेटर थे। 20 अक्टूबर 1993 को एक खबर आई कि दिलीप सरदेसाई और पुणे के व्यवसायी जयंत विट्टलदास को 6.89 मिलियन अमेरिकी डॉलर (आज के विनिमय दर के हिसाब से लगभग 58 करोड़ रुपए) के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार करके 29 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह गिरफ्तारी विट्टलदास के यहाँ इनकम टैक्स की रेड के बाद हुई।
इस केस का क्या हुआ, किसी तो पता नहीं। कहा जाता है कि शरद पवार की कृपा से दिलीप सरदेसाई इसमें से बेदाग निकल गए। शायद यही कारण है कि शरद पवार की उस कृपा का फल राजदीप सरदेसाई आज भी दे रहे हैं। सुप्रिया सुले पर इतना बड़ा आरोप लगने के बावजूद भी उन्होंने सुले को लेकर एक भी ट्वीट नहीं किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ मुलाक़ात की। इन नेताओं के अलावा पीएम मोदी एक ऐसे व्यक्ति से मिले, जिनका जन्म तो ब्राजील में हुआ लेकिन अब वह भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुँचा रहे हैं। पीएम मोदी ने रियो में आचार्य जोनास मैसेट्टी से मुलाक़ात की। आचार्य मैसेट्टी का जिक्र पीएम मोदी इससे पहले एक बार मन की बात में भी कर चुके हैं। आचार्य मैसेट्टी योग और गीता से दुनिया को परिचित करवा रहे हैं।
Met Jonas Masetti and his team. I had mentioned him during one of the #MannKiBaat programmes for his passion towards Vedanta and the Gita. His team presented glimpses of the Ramayan in Sanskrit. It is commendable how Indian culture is making an impact all over the world. pic.twitter.com/4Voy0OKt9X
पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी से मिल कर लिखा, “जोनास मैसेट्टी और उनकी टीम से मुलाकात हुई। मैंने मन की बात कार्यक्रम के दौरान वेदान्त और गीता के प्रति उनकी श्रृद्धा का जिक्र किया था। उनकी टीम ने संस्कृत में रामायण की झलकियाँ प्रस्तुत कीं। यह सराहनीय है कि कैसे भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रही है।”
कौन हैं जोनास मैसेट्टी?
जोनास मैसेट्टी मूल रूप से ब्राजील के रहने वाले हैं। उन्होंने ब्राजील में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह योग और वेदों की तरफ आने से पहले स्टॉक मार्केट में काम करते थे। जोनास मैसेट्टी भारत आने से पहले काफी समृद्ध थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पास पश्चिमी देशों में हर आदमी को जिन चीजों की जरूरत होती है, वह सब कुछ उनके पास था। जोनास मैसेट्टी अपने इस जीवन से खुश नहीं थे। वह कुछ सालों पहले भारत आ गए थे, इसके बाद से वह सनातन से प्रभावित हो गए।
क्यों चुना सनातन का रास्ता?
जोनस मैसेट्टी ने जागरण को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वह पश्चिमी देशों के जीवन से प्रसन्न नहीं थे और उनका मन नहीं लगता था। ऐसे में वह वेदान्त की तरफ मुड़ गए। वह भारत आए और तमिलनाडु के कोयम्बटूर में आचार्य दयानंद सरस्वती के आश्रम में वेदान्त पढ़ने लगे। यहाँ मैसेट्टी को आचार्य का दर्जा मिला। सनातन से प्रभावित होने के बाद विश्व विद्या नाम का एक संस्थान खोला और सनातन का प्रचार करने लगे। इसकी स्थापना उन्होंने ब्राजील की राजधानी रियो के पास के स्थान में की थी।
अब कर रहे संस्कृति का प्रचार
जोनास मैसेट्टी भारतीय संस्कृति में ढलने के बाद आचार्य विश्वनाथ हो गए हैं। मैसेट्टी अब वेदान्त की शिक्षा विदेशों में देते हैं। वह विदेशी छात्रों को योग और गीता पढ़ाते हैं। वह रामायण आदि की कहानियाँ भी लोगों को बताते हैं। उन्हें आयुर्वेद के बारे में भी समझाते हैं। मैसेट्टी ब्राजीम में अपने आश्रम में कई छात्रों को सनातन की धार्मिक शिक्षा देते हैं। वह और उनके साथी रामायण का मंचन भी करते हैं और झांकियों के जरिए लोगों को हिन्दू धर्म के विषय में समझाते हैं।
पीएम मोदी ने भी मैसेट्टी का किया था जिक्र
पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी का जिक्र 2020 में मन की बात में किया था। पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी जैसे लोगों को ‘भारत का सांस्कृतिक राजदूत’ करार दिया था। पीएम मोदी ने उनको लेकर कहा,”भारत की संस्कृति और शास्त्र, हमेशा से ही पूरी दुनिया के लिए आकर्षण के केंद्र रहे हैं। कई लोग तो इनकी खोज में भारत आए और हमेशा के लिए यहीं के होकर रह गए, तो कई लोग वापस अपने देश जाकर इस संस्कृति के संवाहक बन गए। मुझे ‘जोनास मैसेट्टी’ के काम के बारे में जानने का मौका मिला, जिन्हें ‘विश्वनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है।”
The culture of India is gaining popularity all over the world.
One such effort is by @JonasMasetti, who is based in Brazil and popularises Vedanta as well as the Gita among people there.
पीएम मोदी ने आगे बताया, “जोनास ब्राजील में लोगों को वेदांत और गीता सिखाते हैं। वे विश्वविद्या नाम की एक संस्था चलाते हैं, जो रियो डी जेनेरियो से घंटे भर की दूरी पर पेट्रोपोलिस के पहाड़ों में स्थित है। जोनास ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, स्टॉक मार्केट में अपनी कंपनी में काम किया, बाद में उनका रुझान भारतीय संस्कृति और खासकर वेदान्त की तरफ हो गया। स्टॉक से लेकर के धार्मिकता तक वास्तव में उनकी एक लंबी यात्रा है।”
उत्तर प्रदेश के संभल स्थित जामा मस्जिद का मंगलवार (19 नवंबर 2024) की शाम को कलेक्टर की उपस्थिति में सर्वे हुआ। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में वीडियोग्राफी भी की गई। दरअसल, जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए हिंदू पक्ष ने कोर्ट में एक वाद दायर किया था। इसके बाद कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त करते हुए पूरे परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया।
कोर्ट का आदेश मिलते ही एवोकेट कमिश्नर रमेश राघव की निगरानी में डीएम डॉक्टर राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई पुलिस फोर्स के साथ पहुँचे। एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव ने बताया कि मंगलवार को मुख्य हॉल और अन्य हॉल की वीडियोग्राफी कराई गई है। बाकी हिस्सों की भी वीडियोग्राफी कराई जा सकती है। यह रिपोर्ट 29 नवंबर 2024 तक कोर्ट में पेश किया जाएगा।
Lightning speed, NO DELAY: After Court order in the evening, Court commissioner along with Heavy UP Police Force and authorities have reached Sambhal Jama Maszid for Survey https://t.co/jSfQv9vT7Hpic.twitter.com/v2yMbwEl3P
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद में सर्वे किया गया है। अभी आगे भी होना है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के अंदर सिर्फ फोटोग्राफर और कैमरामैन ही गए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहे। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग आसपास की छतों पर आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गया। हालात को संभालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दौरान मंदिर का दावा करने वाले कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज को मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद में घुसने से रोक दिया। बाद में प्रशासन ने महंत को वहाँ से हटा दिया। इस मस्जिद का सर्वे करने का आदेश सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की कोर्ट ने दोपहर में दिया था और शाम को सर्वे का काम शुरू कर दिया गया। सर्वे लगभग दो घंटे तक हुआ। चार महीने पहले ASI ने भी यहाँ सर्वे किया था।
हिंदू पक्ष द्वारा 95 पेज के वाद में दावा किया गया है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनवाया गया है और मस्जिद समिति इसका अनाधिकृत उपयोग कर रही है। हिंदू पक्ष का दावा है कि आक्रमणकारी बाबर ने 1529 में इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों और हिन्दू आस्था के आधार पर यह याचिका दाखिल की है।
विष्णु शंकर जैन ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, पुरातत्व विभाग (ASI), संभल के जिलाधिकारी और जामा मस्जिद कमेटी को पक्षकार बनाया है। उन्होंने कहा कि यह विवादित ढाँचा ASI द्वारा संरक्षित स्थल है। उन्होंने दावा किया है कि हरिहर मंदिर को वर्तमान समय में गलत ढंग से मस्जिद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा दाखिल एक याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में जामा मस्जिद के नाम से पहचाने जाने वाला यह स्थल पहले एक हिन्दू मंदिर था, जिसे आक्रमणकारी बाबर ने 1529 में तोड़कर मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। इस याचिका में कोर्ट से मस्जिद का सर्वेक्षण कराए जाने की माँग की गई थी, जिसे मंगलवार (19 नवंबर 2024) को संभल की जिला अदालत ने स्वीकार कर लिया और एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वे के आदेश दिए।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर कोर्ट के फैसले को साझा करते हुए बताया कि उनके द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश जारी किया है। याचिका में उन्होंने दावा किया है कि यह स्थल प्राचीन काल में हरिहर मंदिर के नाम से जाना जाता था। विष्णु शंकर ने कहा कि साल 1529 में बाबर ने उस स्थान को तोड़ कर मस्जिद बनवाई थी। इसी पोस्ट में उन्होंने हिन्दुओं की आस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मान्यता है कि उस स्थान पर भविष्य में कल्कि भगवान अवतार लेंगे।
Today the Hon’ble Civil Court sambhal on my petition has directed survey by advocate commissioner in alleged jami masjid in sambhal which was known as hari har mandir. Babur partly demolished this place in 1529. It is believed that kalki avatar is to happen at sambhal.
मीडिया से बातचीत में विष्णु शंकर जैन ने बाबर को एक क्रूर आक्रमणकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों और हिन्दू आस्थाओं के आधार पर यह याचिका दाखिल की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, पुरातत्व विभाग (ASI), संभल के जिलाधिकारी और जामा मस्जिद कमेटी को इस मामले में पक्षकार बनाया है। याचिकाकर्ता ने मस्जिद के तौर पर इस स्थान के उपयोग पर आपत्ति जताई है, क्योंकि यह ASI द्वारा संरक्षित स्थल है। उनका दावा है कि हरिहर मंदिर को वर्तमान समय में गलत ढंग से मस्जिद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
याचिका में उन्होंने कोर्ट से माँग की कि भारतीय सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 26 के नियम 9 और 10 के तहत एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर विवादित स्थल का सर्वे कराया जाए। कोर्ट ने उनकी इस माँग को स्वीकार करते हुए सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर दिया है।
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वह अदालत के इस आदेश का जल्द से जल्द पालन सुनिश्चित करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे। उन्होंने याचिका में यह भी आग्रह किया है कि विवादित स्थल को मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यह स्थल हिन्दू आस्था और इतिहास से जुड़ा हुआ है और इसका उपयोग किसी धार्मिक विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए।
इस फैसले के बाद से यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। अब सर्वेक्षण की प्रक्रिया और इसके परिणाम इस विवाद को आगे किस दिशा में ले जाएँगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद युनुस सरकार पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत करने की कवायद कर रही है। इसी कड़ी में 1971 बाद पहली बार कोई जहाज सामान लेकर पाकिस्तान के किसी बंदरगाह से सीधा बांग्लादेश पहुँचा है। इस घटना से भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश रिश्तों में नए आयाम उभर आए हैं। पाकिस्तान से सीधा पहुँचने वाले सामानों ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। भारत को शक है कि अब पाकिस्तान इस रास्ते से बांग्लादेश में हथियार या ड्रग्स पहुँचाने की कोशिश कर सकता है।
कब पहुँचा जहाज, क्या लेकर आया?
दुबई की फीडर लाइंस DMCC कंपनी का जहाज युआन जियाँग फा झान कराची से सामान लेकर चला और 11 नवंबर को बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह पहुँचा। चटगाँव बंदरगाह पर आए इस जहाज ने 370 कंटेनर उतारे। इनमें से 297 कंटेनर पाकिस्तान से आए थे जबकि बाक़ी दुबई से आए हुए थे।
पाकिस्तान से आए इस जहाज में 115 कंटेनर में सोडा एश, 46 कंटेनर में डोलोमाइट, 35 कंटेनर में लाइमस्टोन, 24 कंटेनर में केमिकल और 42 कंटेनर में प्याज था। इसके अलावा बाकी सामान भी इस जहाज पर लोड था, जिसे चटगाँव में उतार दिया गया। इसके बाद यह जहाज 12 नवंबर को रवाना ही इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गया।
पाकिस्तान से जहाज का बांग्लादेश पहुँचना बड़ी घटना क्यों?
1971 के बाद पहली बार कोई जहाज कराची से सामान लेकर बिना रास्ते में कहीं रुके बांग्लादेश के बंदरगाह पहुँचा। इससे पहले पाकिस्तान से जहाज चल कर सीधा बांग्लादेश नहीं जाते थे। पाकिस्तान से बांग्लादेश जाने वाला सामान या तो पहले सिंगापुर या फिर श्रीलंका के कोलम्बो बंदरगाह पर जाता था। इसके बाद इसे दूसरे जहाजों में डाल कर बांग्लादेश ले जाया जाता था।
दोनों देशों के बीच समुद्री रूट नहीं होने के पीछे 1971 के पहले का इतिहास है। बांग्लादेश के आजाद होने के पहले पाकिस्तान ने बंगालियों पर काफी अत्याचार किया था। पाक फ़ौज ने हजारों महिलाओं का रेप किया था और पुरुषों को मार दिया था। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में खटास के चलते ही समुद्री लिंक नहीं स्थापित हुआ था।
बांग्लादेश में स्थित पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इसे एक बड़ा कदम बताया है। पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने कहा है कि आगे इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा जो सहयोग में सहायक होगा। बांग्लादेश में पाकिस्तानी सामान पहुँचने की यह घटना एक हालिया फैसले के बाद हुई है।
बांग्लादेश की युनुस सरकार ने हाल ही में पाकिस्तान से आने वाले सामानों की अनिवार्य चेकिंग की शर्त हटा ली थी। यह रोक शेख हसीना के कार्यकाल में लगाई गई थी ताकि पाकिस्तान से कोई भी ड्रग या हथियार जैसा सामान बांग्लादेश के भीतर ना पहुँच पाए।
वर्तमान में पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच व्यापार $1 बिलियन से भी कम है। यह समुद्री लिंक बनने से दोनों के बीच व्यापार बढ़ने के कयास हैं। हालाँकि, इस व्यापार में बांग्लादेश का ही पलड़ा भारी रहने वाला है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच समुद्री लिंक चिंता का कारण क्यों?
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधा समुद्री लिंक बनने के बाद भारत कई कारणों से चिंतित है। पहला कारण तो यह है कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को दिखाता है। यह भारत के हित में नहीं है। पाकिस्तान हमेशा से ही बांग्लादेश के सहारे भारत को घेरने की योजना बनाता रहा है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी बांग्लादेश के भीतर कट्टरपंथ फैलाने और फिर यहाँ से आतंकी भारत में भेजने की योजना भी बनाती रही है, ऐसे में भारत की सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ती हैं। इसके अलावा दूसरी चिंता ड्रग्स और हथियारों को लेकर है।
बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह का इस्तेमाल पाकिस्तान ड्रग्स और हथियार भेजने में कर सकता है। पाकिस्तान लगातार सीमापार और समुद्री रास्ते से भारत में हथियार और ड्रग्स भेजने की कोशिश करता रहा है। हालाँकि, इसमें उसको अधिक सफलता नहीं मिली है।
वह बांग्लादेश की भारत के साथ खुली सीमा का इस्तेमाल इस काम के लिए कर सकता है। ऐसे में भारत की चिंताएँ और बढ़ गई हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को भी बांग्लादेश में लंगर डालने का मौका अब मिल सकता है। यह भारत की सामरिक चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देगा।
गुजरात के वडोदरा में सोमवार (18 नवंबर 2024) को एक दलित युवक तपन परमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई।मृतक भारतीय जनता पार्टी के पूर्व पार्षद रमेश परमार का 27 वर्षीय बेटा था। यह घटना वडोदरा के सर सयाजीराव जनरल अस्पताल (SSG अस्पताल) में हुई। दावा किया जा रहा है कि हत्या के वक्त पुलिस मौके पर मौजूद थी। इस मामले में मुख्य आरोपित बाबर पठान और उसके साथियों महबूब, वसीम, और अन्य पर हत्या का आरोप है। हमले में तपन के एक साथी मितेश राजपूत भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना वडोदरा के मेहतावाड़ी क्षेत्र में हुई। सोमवार को तपन परमार अपने दोस्त मितेश राजपूत के साथ SSG अस्पताल गए थे, जहाँ उनके साथी विक्रम का इलाज चल रहा था। विक्रम की मेडिकल जाँच के बाद तपन और मितेश कैंटीन में बैठे थे। उसी समय इलाके के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बाबर पठान अपने साथियों के साथ वहाँ पहुँचा। बाबर ने तपन और मितेश से बहस शुरू कर दी, जो जल्दी ही हिंसक झगड़े में बदल गई।
बताया जा रहा है कि नोकझोंक के दौरान बाबर पठान के 2 साथियों ने मितेश राजपूत को पकड़ लिया। इसी दौरान बाबर ने धारदार हथियार निकालकर तपन पर हमला किया। मितेश किसी तरह खुद को छुड़ाकर भागने में सफल हुआ, लेकिन जब वह लौटा तो तपन खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। तपन को तुरंत इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमलावर वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए।
हत्या की खबर से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मेहतावाड़ी पुलिस थाने के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। मृतक के पिता रमेश परमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में मारा गया और आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। मौके पर तमाम उच्चाधिकारी भी पहुँचे और नाराज लोगों को समझा-बुझाकर शाँत किया।
#WATCH | Gujarat: People gathered at the Police Station in Maheta Wadi area of Vadodara yesterday and agitated over the murder of a former BJP councillor's son, Tapan by an alleged history sheeter, Babar. Tapan had gone to meet his friend who was at a hospital for treatment… pic.twitter.com/y91EcUSbfH
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जाँच शुरू की। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें बाबर पठान और अन्य आरोपितों की पहचान हुई। फुटेज में एक महिला, शबनम मंसूरी भी नजर आई, जो आरोपित वसीम की बीवी है। घटनास्थल पर बाबर के हाथ में धारदार हथियार साफ देखा गया। पुलिस ने मुख्य आरोपित बाबर पठान सहित पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, घटना की पृष्ठभूमि नागरवाड़ा इलाके में हिन्दू और मुस्लिम युवकों के बीच हुए झगड़े से जुड़ी है। इस झगड़े में एक पक्ष से वसीम और दूसरे पक्ष से धर्मेश व विक्रम घायल हुए थे। विवाद के बाद दोनों पक्षों को मेडिकल जाँच के लिए SSG अस्पताल लाया गया था। तपन इस विवाद का हिस्सा नहीं था, वह केवल अपने दोस्त के साथ अस्पताल आया था। इसी दौरान बाबर ने उस पर हमला कर दिया।
गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस हत्याकांड के बाद पुलिस न बाबर पठान सहित कुल 5 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मुख्य आरोपित बाबर पठान पहले भी असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (PASA) के तहत जेल जा चुका है।
1993 में उत्तर प्रदेश के देवबंद में पुलिस पर ग्रेनेड अटैक हुआ। कुछ महीनों बाद इस मामले में एक आतंकी की गिरफ्तारी हुई। 1994 में इस आतंकी को जमानत भी मिल गई। इसके बाद 17 नवंबर 2024 को श्रीनगर से जब यह आतंकी फिर पकड़ा गया तो पता चला कि नाम, वेशभूषा और जगह बदलकर वह करीब 30 साल से सबको चकमा दे रहा था।
यह कहानी है आतंकी नजीर अहमद उर्फ मुस्तफा बानी उर्फ जावेद इकबाल की। फरारी के दौरान ही उसने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव भी लड़ लिया। आम आदमी पार्टी (AAP) की स्टार प्रचारकों की सूची में भी शामिल हो गया। एक रिपोर्ट की माने तो हाल ही में संपन्न हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में वह आप का उम्मीदवार बनते-बनते रह गया था।
नजीर अहमद ने लगातार बदले नाम
ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया है कि नजीर अहमद वानी लगातार अपना नाम बदलता रहा है। देवबंद में दर्ज मुकदमे में उसका नाम नजीर अहमद है। लेकिन वह सहारनपुर में मुश्ताक अहमद के नाम से रहता था। ग्रेनेड अटैक उसने फरारी मुस्तफा नाम से काटी थी। इसी मामले में जमानत मिलते ही वह कश्मीर वापस लौट गया। फिर अपना नाम जावेद इकबाल वानी रख लिया।
नाम के साथ उसने अपने पते भी बदले। पहले नजीर अहमद का पता जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले में पड़ने वाले इंजक शरीफाबाद हुआ करता था। यह पता पारिमपुरा थाना क्षेत्र में पड़ता है। जमानत के बाद कश्मीर लौट कर वह बड़गाम जिले के ही सोईबुध कस्बे के पास गाँव हाकर मुल्ला में रहने लगा। पुलिस सूत्र बताते हैं कि जिस थाना क्षेत्र का नजीर अहमद वानी निवासी है, वहाँ से लगभग 50 एक्टिव आतंकी अलग-अलग समय में निकल चुके हैं।
देवबंद अटैक में जमानत के बाद निकाह
देवबंद में UP पुलिस पर ग्रेनेड अटैक के समय नजीर अहमद की उम्र 20 वर्ष थी। वह अविवाहित था। जमानत के बाद कश्मीर लौटते ही उसने सबरीना नाजिर से निकाह कर लिया। उसके 3 बच्चे हैं। इनके नाम मकीत, सादात और सुगरा हैं। साल 2019 में उसने वैगन आर कार खरीदी थी। सरकारी दस्तावेजों में वह खुद को और अपनी बीवी को कारोबारी बताता था।
उमर अब्दुल्ला के खिलाफ लड़ा चुनाव
नजीर अहमद वानी ने 2024 का जम्मू कश्मीर का विधानसभा चुनाव भी लड़ा है। उसने बड़गाम सीट से उमर अब्दुल्ला के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसे विधानसभा चुनाव में केवल 1583 वोट मिले थे। इसी सीट पर NOTA को 1757 वोट मिले हैं। इससे पहले उसने नगर पालिका का भी चुनाव लड़ा था। लेकिन इसमें भी उसे हार मिली थी।
स्क्रीनशॉट -चुनाव आयोग की वेबसाइट
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसने AAP से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट माँगा था। लेकिन अंतिम समय में पार्टी को उसके आतंकवादी होने का पता चल गया, जिसके कारण टिकट नहीं मिला। इस दावे की पुष्टि के लिए हमने आप की जम्मू-कश्मीर ईकाई के नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।
इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि नजीर ने साल 1989 से 1991 के बीच पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और अफगानिस्तान में आतंकवाद की ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग पूरा होने के बाद वह 1991 में देवबंद आया और पहचान छिपाकर रहने लगा। इस दौरान उसने टोपी बेचने का धंधा भी किया।
चुनावी हलफनामे में नहीं दी देवबंद अटैक की जानकारी
विधानसभा चुनाव के लिए नजीर अहमद ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसमें देवबंद के ग्रेनेड अटैक को लेकर जानकारी नहीं दी है। केवल एक केस का जिक्र किया है जो उसके खिलाफ जनवरी 2023 में बड़गाम जिले में दर्ज हुआ था। केस में IPC की धारा 341 और 506 के तहत कार्रवाई की गई थी।
केस डिटेल
बताते चलें कि साल 1993 में नजीर अहमद वानी पर पुलिसकर्मियों सहित आम नागरिकों पर ग्रेनेड फेंकने की घटना पर IPC की धारा 307 व विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था। 1994 में उसकी गिरफ्तारी के बाद उस पर फर्जी दस्तावेज प्रयोग करने के अपराध में IPC की धारा 467, 468 व 471 के तहत एक और FIR दर्ज हुई थी। इन दोनों मुकदमों में नजीर अहमद करीब 30 वर्षों से पेश नहीं हो रहा था।
दैनिक जागरण ने बड़गाम के जिला एसएसपी निखिल बोरकार के हवाले से बताया है कि नजीर अहमद के खिलाफ कश्मीर के किसी हिस्से में कोई आतंकी मामला दर्ज नहीं है। उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला है।
AAP ने बनाया स्टार प्रचारक
नजीर अहमद फेसबुक पर वानी जावेद इकबाल के नाम से सक्रिय है। इस प्रोफाइल को खंगालने पर आम आदमी पार्टी से उसके जुड़ाव की पुष्टि होती है। आप के दिल्ली मुख्यालय से जारी एक आधिकारिक पत्र में उसका नाम कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए शीर्ष 40 स्टार प्रचारकों की सूची में दर्ज है। यह पत्र 24 अगस्त 2024 को आप के नोडल पर्सन बिपुल डे ने जारी किया था। इसमें 38वें नंबर पर जावेद इकबाल नाम का जिक्र है।
पत्र की प्रतियाँ नई दिल्ली और जम्मू कश्मीर चुनाव आयोग को भी प्रेषित की गई थी। नजीर ने इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए पार्टी को धन्यवाद भी दिया है। इस पत्र और जावेद इकबाल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए भी हमने AAP की जम्मू-कश्मीर ईकाई से संपर्क करने के कई प्रयास किए हैं। उनका पक्ष आने पर हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।
नजीर अहमद के खिलाफ 20 मई 2024 को सहारनपुर की एक अदालत ने स्थायी वारंट जारी किया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 17 नवंबर 2024 को यूपी एटीएस ने उसे श्रीनगर से दबोच लिया। एक रिपोर्ट में सहारनपुर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सागर जैन के हवाले से बताया गया है कि नजीर अपनी पहचान बदलकर इतने समय तक बचता रहा था।