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‘तुम कमल फूल में वोट दिया है, तुमको गाँव से बेदखल करेंगे, मार कर फेंक देंगे’: झारखंड में INDI गठबंधन के जीतते ही इस्लामी गुंडागर्दी शुरू

झारखंड विधानसभा चुनावों INDI गठबंधन की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों को धमकी देने की घटनाएँ सामने आई है। साहिबगंज जिले में बीजेपी समर्थक एक मुस्लिम युवक को उसके ही बिरादरी के लोग गाँव से निकालने और हत्या की धमकी दे रहे हैं। वहीं मधुपुर में एक बीजेपी समर्थक के घर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। कथित तौर पर हमलावरों ने घर पर लगे भाजपा के झंडे को उखाड़कर उस पर पेशाब किया।

पहला मामला साहिबगंज जिले के रांगा थाना क्षेत्र की है। मोहम्मदपुर गाँव के इमाम मिर्जा ने रविवार (24 नवंबर 2024) को पुलिस में तहरीर दी। उन्होंने बताया है कि भाजपा को वोट देने के कारण रिजल्ट आने के बाद से गाँव के ही महबूब शेख, मजहरुल शेख, मुन्ना शेख, मुस्तफा शेख और आशिक शेख के साथ मोहब्बतपुर का शमीम शेख उसे मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं।

पीड़ित ने बताया कि उसको मौत की धमकियाँ मिल रही हैं। कथित तौर पर आरोपितों ने पीड़ित से कहा, “तुम कमल फूल में वोट दिया है, इसीलिए हम तुमको गाँव से बेदखल कर देंगे। तुमको जान से मार कर वैसी जगह में फेंक देंगे कि नामोनिशान मिट जाएगा। तू मेरा बाल भी नहीं बिगाड़ पाएगा। मुख्यमंत्री से लेकर थाना प्रभारी तक हमारे कब्जे में आ गया है।”

चुनाव में हार का सामना करने वाले भाजपा प्रत्याशी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि पीड़ित के घर पर पत्थरबाजी की भी गई है। 2 लोगों को को चोटें भी आई हैं। भाजपा नेता ने साहिबगंज पुलिस से माँग की है कि वे आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे। भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए कहा है कि पूरे प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ताओं को टारगेट किया जा रहा है।

भाजपा के झंडे पर किया पेशाब

दूसरा मामला झारखंड के ही मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मदनकट्टा इलाके का है। विधानसभा चुनावों में यहाँ से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी हफीजुल हसन ने जीत दर्ज की है। रविवार (24 नवंबर 2024) को उनकी जीत की ख़ुशी में मदनकट्टा इलाके में विजय जुलूस निकाला गया था। यह जुलूस जैसे ही भाजपा समर्थक संजय गुप्ता के घर से आगे से गुजरा, इसमें शामिल कुछ लोगों ने उपद्रव शुरू कर दिया।

आरोप है कि विजय जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने संजय गुप्ता के घर पर लगा भाजपा का झंडा उखाड़ कर फेंक दिया। बाद में इसी झंडे पर पेशाब भी किया। जब संजय गुप्ता ने इसका विरोध किया तो उनकी पिटाई की गई। गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी गई। इसमें से कुछ हरकतों का CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

संभल हिंसा के बाद अलर्ट पर UP पुलिस: मुजफ्फरनगर में कई छतों पर मिले पत्थर, अमेठी में ड्रोन से निगरानी

संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिम भीड़ की हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस अलर्ट पर है। कई जिलों में प्रशासन ने एहतियात बरतने शुरू कर दिए हैं। अमेठी और मुज़फ्फरनगर जिलों में छतों की ड्रोन से निगरानी करवाई गई है।

इस दौरान मुज़फ्फरनगर में कई छतों पर ईंट-पत्थर नजर आए। अमेठी में प्रशासन ने आगाह किया है कि अगर छतों पर अनावश्यक चीज पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मिश्रित इलाकों में फ्लैग मार्च कर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुज़फ्फरनगर जिले में पुलिस ने ड्रोन से मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में छतों की निगरानी करवाई। इसी दौरान 7 घरों की छतों पर ईंट-पत्थर नजर आए। प्रशासन ने तत्काल इसे हटवा दिया। ख़ुफ़िया विभाग को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। वह भी मिश्रित इलाकों में बने कुछ घरों की निगरानी में जुट गया है। इस दौरान भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पुलिस टीम की गश्त बढ़ा दी गई है।

पुलिस बल खालापार और न्याजपुरा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके पर भी नजर बनाए हुए है। पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की है। इस दौरान जिले में अमन चैन बनाए रखने पर जोर दिया गया।

वहीं अमेठी जिले में भी पुलिस बल ने संवेदनशील इलाकों में गश्त की है। इन्हौना और जायस जैसे मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में गश्त कर के पुलिस ने मकान मालिकों से छतों पर कोई भी ईंट-पत्थर न रखने की सख्त हिदायत दी है। अमेठी में भी ड्रोन से छतों की निगरानी करवाई जा रही है। प्रशासन की तरफ से यह भी साफ किया गया है कि चेतावनी के बावजूद जो निर्देशों को नहीं मानेगा उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी के साथ सोशल मीडिया पर भी पुलिस की पैनी नजर है।

बताते चलें कि 24 नवंबर को संभल जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए टीम पहुँची तो मुस्लिम भीड़ ने ईंट-पत्थरों से पुलिस पर हमले किए। इस दौरान हिंसा प्रभावित इलाके की सड़के पत्थर से पट गई थी। करीब 4 ट्रॉली पत्थर प्रशासन ने उठवाए थे। पत्थरबाजी की चपेट में आ कर कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिसमें से एक कांस्टबेल की हालत गंभीर है।

बुशरा बीवी के सामने पाकिस्तान सरकार बेबस, देखते ही गोली मारने के आदेश से भी नहीं डरे इमरान खान के समर्थक: इस्लामाबाद फौज के हवाले, फिर भी D चौक में घुसे

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की माँग ने हालात बेकाबू कर दिए हैं। राजधानी इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें जारी हैं। इन घटनाओं में अब तक 6 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं। हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सेना बुलाकर उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है। वहीं, प्रदर्शनकारी डी-चौक तक पहुँच गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों की गाड़ियाँ तोड़ीं और बैरिकेड्स हटा दिए। इस बीच इमरान खान की वाइफ बुशरा बीबी पीटीआई समर्थकों का नेतृत्व करते हुए इस्लामाबाद के डी-चौक तक पहुँच चुकी हैं, तो इस्लामाबाद के अलावा पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में भी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। PTI ने 3,500 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का आरोप लगाया है। इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का कहना है कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सुरक्षाबलों ने गोलीबारी की, जिसमें दो कार्यकर्ताओं की मौत हो गई और कई घायल हुए।

बताया जा रहा है कि खैबर पख्तूनख्वा से प्रदर्शनकारी डी-चौक की ओर बढ़ रहे हैं जो राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद जैसी प्रमुख इमारतों के पास है. प्रदर्शनकारियों ने शिपिंग कंटेनरों और बैरिकेड्स को भारी मशीनरी की मदद से हटा दिया।

बता दें कि 72 वर्षीय इमरान खान ने 24 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिसमें उन्होंने जनादेश की चोरी, लोगों की अवैध गिरफ्तारी और 26वाँ संविधान संशोधन पारित होने की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि इस संशोधन ने ‘तानाशाही शासन’ को मजबूत किया है। उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने जनता से ‘गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने’ के लिए मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है।

इस्लामाबाद में बवाल जारी (फोटो साभार: डॉन)

इस प्रदर्शन का नेतृत्व इमरान खान की वाइफ बुशरा बीबी और खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर कर रहे हैं। बुशरा बीबी ने वीडियो संदेश में समर्थकों से जुटने की अपील की।

डी-चौक क्यों है खास?

इस्लामाबाद का डी-चौक देश की महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के पास स्थित है। इसे प्रदर्शनकारियों ने संघर्ष का मुख्य केंद्र बना दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुरक्षाबलों पर हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।

सुरभि बोल नहीं सकती, सुन नहीं सकती तो साइन लैंग्वेज से ईसाई बनाने की थी तैयारी, पीड़ित परिवार ने ट्रेन से छुड़ाई बेटी

कोटा की एक लड़की को ईसाइयत के यहोवा विटनेस संप्रदाय वालों ने धर्मांतरित करने की कोशिश की। लड़की मूकबधिर है। लड़की को भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर परिवार वालों ने पुलिस की सहायता से बरामद किया। परिवार ने आरोप लगाया कि लड़की को धर्मांतरण के लिए इंदौर से दिल्ली ले जाया जा रहा था। परिवार ने लड़की के ब्रेनवाश का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में पुलिस के आईजी को भी शिकायत दी है। इस मामले में दो अन्य लड़कियों से पूछताछ की है, जो धर्मांतरण की आरोपित बताई गई हैं।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, कोटा निवासी 23 वर्षीय सुरभि मेहता जयपुर में रहती है। यहाँ रह कर वह पढ़ाई करती है। सुरभि बोल और सुन नहीं सकती है। जयपुर में ही वह यहोवा के साक्षी (Jehova’s Witness) वालों के अनुयायियों के सम्पर्क में आई।

परिवार ने आरोप लगाया कि वह सुरभि को भी धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने लगे। उसे बताने लगे कि अगर सुरभि ईसाइयत में धर्मांतरित हो जाती है तो अगले जन्म में उसकी सुनने-बोलने की क्षमता आ जाएगी। परिवार ने आरोप लगाया कि यह मिशनरी संगठन ऐसे ही हिन्दू मूक बधिर बच्चे निशाने पर लेता है।

परिवार ने बताया कि उनकी लड़की ने उन्हें बताया 19 नवम्बर, 2024 को उनकी बेटी बिना बताए इंदौर चली गई थी। परिवार ने जब जानकारी ली तो पता चला कि वह इनके एक सम्मेलन में शामिल है। यहीं से सुरभि को दिल्ली ले जाने की कोशिश की गई।

सुरभि के परिजनों ने पुलिस में सूचना दी कि उनकी बेटी का कोई पता नहीं लग रहा है। इसके बाद पुलिस ने सुरभि को भीलवाड़ा स्टेशन से इंदौर-दिल्ली एक्सप्रेस से बरामद किया। सुरभि के दो और लड़कियाँ पकड़ी गईं। इसने पुलिस ने पूछताछ की और फिर छोड़ दिया।

सुरभि के परिजनों ने शिकायत में बताया है कि उनकी लड़की इस कदर ब्रेनवाश है कि वह अपने मंदिर नहीं जाती और कई बार समझाने पर भी यहोवा विटनेस वालों के सम्पर्क में रहती है। वर्तमान में सुरभि अपने परिजनों के साथ सुरक्षित है। ऑपइंडिया के पास इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत है।

मामले में परिवार का सहयोग कर बजरंग दल के योगेश रेनेवाल ने ऑपइंडिया से बताया, “यहोवा वालों ने एक मित्र के माध्यम से लड़की से सम्पर्क किया। इसके बाद उसे ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से इशारों की भाषा से ईसाइयत की तरफ आकर्षित किया। उसके मूकबधिर होने का फायदा उठाते हुए उसे अगले जन्म में बोलने का लालच दिया और धर्मांतरण का दबाव डाला।”

गौरतलब है कि यहोवा विटनेस ईसाइयत का ही एक हिस्सा है। इसके मानने वाले जीसस में विश्वास नहीं करते है। यह 19वीं शताब्दी के अंत में अमेरिका में शुरू हुआ था। इसके अलग विश्वास हैं। इसके विश्वास का केंद्र यहोवा नाम का भगवान है। इनको लगता है कि दुनिया का अंत आने वाला है।

इस संप्रदाय का नाम अक्टूबर, 2023 केरल से सामने आया था। डोमिनिक मार्टिन ने यहोवा विटनेस की एक सभा में धमाका किया था। उसने यहोवा विटनेस वालों पर आरोप लगाया था कि यह राष्ट्रविरोधी बातें करते हैं। मार्टिन ने एक वीडियो में बताया, “6 साल पहले उसे लगा कि यह संस्था गलत रास्ते पर है। उनकी शिक्षाएँ राष्ट्र विरोधी हैं। मैंने उनसे कई बार इसे सही करने के लिए कहा। लेकिन वह ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थे।”

आगे उसने कहा, “किसी मजहब में आस्था रखने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन यह लोग बताते हैं कि बाकी पूरी दुनिया के लोग खत्म होंगे और यह अपना जीवन जीते रहेंगे। हमें ऐसे समूह के साथ क्या करना चाहिए जो कि 850 करोड़ लोगों के बारे में यह सोचता है। मुझे और कोई रास्ता नहीं सूझा और चूँकि मैं इस विचारधारा से वाकिफ हूँ इसलिए मैंने जवाब देने का निर्णय लिया।”

लाइव के दौरान मार्टिन ने कहा था, “इस राष्ट्र में रहते हुए भी यह लोग देश के लोगों को वेश्या और शापित बता कर अपमानित करते हैं। यह अपने लोगों को समझाते हैं कि बाकी लोगों के साथ हाथ मत मिलाओ और खाना मत खाओ। मुझे लगा कि यह गलत विचारधारा है।”

‘आप चुनाव जीते तो EVM सही, आप हारे तो हुई छेड़छाड़’: सुप्रीम कोर्ट ने सिस्टम बदलने से किया इनकार, अब बैलेट पेपर के लिए कॉन्ग्रेस चलाएगी देशव्यापी अभियान

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (26 नवंबर 2024) को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें चुनावों में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की जगह पुराने पेपर बैलेट सिस्टम को फिर से लागू करने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता ईसाई प्रचारक डॉ. केए पॉल ने याचिका में यह दलील दी थी कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है, जिससे लोकतंत्र को खतरा है। वहीं, इस बीच कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने फिर से बैलेट पेपर का राग अलापा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने याचिका को सुनवाई के योग्य ही नहीं पाया। जस्टिस नाथ ने याचिकाकर्ता पॉल से पूछा, “आपको यह अद्भुत विचार कहाँ से मिला?” इस पर पॉल ने कहा, “मैं अभी लॉस एंजेल्स से एक ग्लोबल पीस समिट से लौट रहा हूँ। हमारे साथ रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस अधिकारी और जज हैं जो मेरा समर्थन कर रहे हैं।”

कोर्ट ने पॉल की दलील को हल्के अंदाज में लिया और कहा कि नेताओं जैसे चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगनमोहन रेड्डी केवल हारने पर ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हैं, लेकिन जीतने पर ऐसा कुछ नहीं कहते। जस्टिस नाथ ने कहा, “जब नेता हारते हैं तो ईवीएम को दोष देते हैं, लेकिन जब वे जीतते हैं तो कुछ नहीं बोलते। यह अदालत इस तरह के तर्कों को स्वीकार नहीं कर सकती।”

याचिकाकर्ता डॉ. पॉल ने तर्क दिया कि भारत को अमेरिका जैसे देशों के रास्ते पर चलना चाहिए, जहाँ फिजिकल बैलेट सिस्टम का उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि 197 में से 180 देशों में पेपर बैलेट का उपयोग होता है। उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा है। यहाँ तक कि एलन मस्क ने भी ईवीएम पर सवाल उठाए हैं।”

डॉ. पॉल ने अपनी याचिका में कई और सुधारों की माँग की, जिनमें शामिल थे:
1- पैसे या शराब बाँटने पर प्रत्याशियों की 5 साल की अयोग्यता।
2- मतदाता शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत।
3- राजनीतिक दलों की फंडिंग की जांच के लिए एक तंत्र।
4- चुनाव संबंधी हिंसा रोकने के लिए नीतिगत ढांचा।
पॉल ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि चुनावी सुधारों के लिए एक व्यापक नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि 18 राजनीतिक दलों ने उनका समर्थन किया है और चुनाव आयोग (ECI) ने 9000 करोड़ रुपये की जब्ती की घोषणा की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से नहीं लिया और याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस नाथ ने कहा, “भारत को अन्य देशों की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। हर देश का अपना सिस्टम होता है।”

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए संसद और निर्वाचन आयोग ही उचित मंच हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के तर्क कानूनी रूप से ठोस नहीं थे और केवल अनुमान और अटकलों पर आधारित थे। यह फैसला इस बात को दोहराता है कि भारत का चुनावी ढांचा ईवीएम पर भरोसा करता है और इसके खिलाफ सबूतों के अभाव में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने गाया बैलेट पेपर का राग

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग खारिज कर दी है, तो दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग को लेकर पूरे देश में आंदोलन करने की बात कही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद खड़गे ने कहा है कि बैलेट पेपर से ही चुनाव कराने चाहिए। इसके लिए वो सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर चर्चा करेंगे।

‘छीन लो हथियार, जला कर मार डालो, कोई भी बच न पाए’: संभल में पुलिस का कत्लेआम करने को जुटी थी मुस्लिम भीड़, हिंसा से पहले तोड़ डाले थे CCTV कैमरे

उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इसको लेकर दर्ज एफआईआर से भीड़ के खतरनाक इरादों के बारे में पता चलता है। ऑपइंडिया के पास मौजूद एक एफआईआर से पता चलता है कि उपद्रवियों ने पुलिस से उनके हथियार छीनने की कोशिश की। इलाके में लगे CCTV कैमरों को तोड़ डाला।

वहीं आज तक ने एक एफआईआर के हवाले से बताया है कि हिंसा से पहले भीड़ चिल्लाकर कह रही थी कि सारे पुलिस वालों के हथियार छीन लो। सबको आग लगाकर मार डालो। कोई बचकर नहीं जाए।

गौरतलब है कि 24 नवंबर को जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए टीम पहुँची थी। यह सर्वे कोर्ट के आदेश पर हुआ है। इसी दौरान भीड़ ने पत्थरबाजी, आगजनी और फायरिंग की थी। हमले में 2 दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना को लेकर दर्ज एक एफआईआर में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और इसी पार्टी के विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल को भी आरोपित किया गया है।

हथियार छीन कर आग लगा दो पुलिसवालों को

आज तक के मुताबिक एक पुलिसकर्मी की FIR में हिंसा के समय मस्जिद के आसपास 800 से 900 के बीच भीड़ की मौजूदगी का जिक्र है। सुबह 8:45 के आसपास जुटी इस भीड़ ने पहले नारेबाजी की। पुलिसकर्मी समझाने का प्रयास ही कर रहे थे तभी भीड़ ने मस्जिद में सर्वे नहीं होने देने का एलान कर दिया। इसी भीड़ में से आवाज आई, “हसन, अजीम, सलीम, रिहान, हैदर, वसीम, अयान… पुलिस वालों से सारे हथियार कारतूस छीन लो। इनको आग लगाकर मार डालो। कोई भी बचकर ना जाने पाए।” इसके बाद पुलिसकर्मियों की हत्या के इरादे से भीड़ ने फायरिंग शुरू कर दी।

यह केस सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने कोतवाली नगर थाने में दर्ज करवाया है। संजीव कुमार एकता चौकी इंचार्ज हैं। यह संभल हिंसा में पुलिस की तरफ से दर्ज पहली FIR है।

सब इंस्पेक्टर शाह फैसल से हथियार छीनने की कोशिश

सब इंस्पेक्टर शाह फैसल की तरफ से दर्ज कराई गई FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। यह एफआईआर संभल के नखासा थाने में दर्ज करवाई गई है। इसमें फैसल ने बताया है कि जामा मस्जिद के पास भीड़ इकट्ठा होने की सूचना मिलने के बाद वे 24 नवंबर की दोपहर करीब 12:35 पर अपनी टीम के साथ नखासा चौक पहुँचे। उन्होंने देखा कि करीब 150 उपद्रवियों की भीड़ ने चौराहों पर लगे CCTV कैमरे तोड़ दिए थे।

उन्होंने बताया है कि पुलिस को देखते ही भीड़ हमलावर हो गई। जान से मार डालने की नीयत से लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की लेकिन वह शांत नहीं हुई। भीड़ ने सब इंस्पेक्टर शाह फैसल की बुलेट मोटरसाइकिल सहित एक सरकारी बाइक को आग लगा दी। भीड़ में से कुछ उपद्रवी उनकी पिस्टल भी छीनने लगे।

उन्होंने पिस्टल तो बचा ली लेकिन भीड़ ने मैगजीन और 9 mm के 10 कारतूस छीन लिए। इसके बाद पुलिस को हालात पर काबू पाने के लिए प्लास्टिक पैलेट और टीयर गैस का प्रयोग करना पड़ा।

शाह फैसल ने एफआईआर में गुलबुद्दीन हिकमतयार, सुल्तान आरिफ, हसन, मुन्ना, फैजान और समद को नामजद किया है। साथ ही 150 से 200 अज्ञात हमलावरों का भी जिक्र है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 109 (1), 121 (1), 324 (5), 326 (g), 309 (4), 223 और 132 के साथ सर्वजनिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के सेक्शन 2/3 व आपराधिक कानून संसोधन अधिनियम के सेक्शन 7 के तहत यह FIR दर्ज की गई है।

मंदिर चलाते हैं जो कॉलेज, वहाँ केवल हिंदुओं की होगी बहाली: मद्रास हाई कोर्ट, तमिलनाडु सरकार ने कहा- ये संस्थान धार्मिक… सुहैल ने दायर की थी याचिका

मद्रास हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) अधिनियम के तहत मंदिरों द्वारा स्थापित और संचालित कॉलेजों में केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को ही नियुक्त किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना संवैधानिक रूप से अनुचित नहीं है क्योंकि यह संस्थान मंदिरों के धन से संचालित होते हैं और यह धार्मिक संस्थानों की श्रेणी में आते हैं।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला चेन्नई के अरुलमिगु कपालेश्वर आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज की नियुक्तियों से जुड़ा है। 37 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ए. सुहैल ने इस कॉलेज में ऑफिस असिस्टेंट पद के लिए आवेदन करने की कोशिश की, लेकिन नियुक्ति के लिए केवल हिंदू उम्मीदवारों को पात्र मानने वाले नोटिफिकेशन के कारण उन्हें इंटरव्यू में शामिल होने का मौका नहीं मिला। सुहैल ने अपनी याचिका में कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 16(1) और 16(2) का उल्लंघन है, जो धर्म के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को रोकता है। सुहैल ने यह भी तर्क दिया कि यह कॉलेज एक शैक्षणिक संस्थान है, धार्मिक नहीं, इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

हाई कोर्ट का बैड़ा फैसला

जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने सुहैल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह कॉलेज पूरी तरह से मंदिर के फंड से चलाया जाता है और इसलिए इसे हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम की धारा 10 के तहत धार्मिक संस्थान माना जाएगा। उन्होंने कहा, “धारा 10 के अनुसार, ऐसे संस्थानों में केवल हिंदू धर्म का पालन करने वाले लोगों की नियुक्ति की जा सकती है।”

मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 16(5) के तहत आता है, जो धार्मिक संस्थानों को उनके धर्म के आधार पर नियुक्ति करने की छूट देता है। जस्टिस ने यह भी कहा कि चूँकि यह कॉलेज स्वयं वित्तपोषित है और सरकारी सहायता नहीं लेता, इसलिए इसे ‘स्टेट’ की परिभाषा में नहीं रखा जा सकता।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के बयान का रखा था तर्क

सुहैल ने अपनी याचिका में यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘हिंदू’ कोई धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर किसी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन ‘हिंदू’ है और कौन नहीं। सुहैल ने यह भी दावा किया कि HR&CE अधिनियम केवल मंदिरों और मठों जैसे धार्मिक संस्थानों पर लागू होता है, न कि किसी शैक्षणिक संस्थान पर। हालाँकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया।

तमिलनाडु सरकार ने भी रखा था अपना पक्ष

इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने अक्टूबर 2021 में हाई कोर्ट को बताया था कि मंदिर फंड से संचालित किसी भी कॉलेज या संस्थान में केवल हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकती है। राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि HR&CE अधिनियम गैर-हिंदुओं की नियुक्ति की अनुमति नहीं देता।

इस मामले में जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा कि मंदिर फंड से संचालित कॉलेज को एक धार्मिक संस्थान माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16(1) और 16(2) समान अवसर और गैर-भेदभाव की बात करते हैं, लेकिन अनुच्छेद 16(5) धार्मिक संस्थानों को धर्म के आधार पर नियुक्ति की छूट देता है।

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल HR&CE अधिनियम के तहत मंदिरों की स्वायत्तता को बरकरार रखता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में उनके धार्मिक सिद्धांतों का पालन हो। इस फैसले ने संवैधानिक प्रावधानों और धार्मिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

लड़की को डेट पर ले जाओ, पर अब्बा/अम्मी/भाई भी होंगे साथ… मजहबी जोड़े कर सकेंगे ‘हलाल मुस्लिम डेट’, मुंबई में होने वाले इस्लामी कार्निवल के बारे में जानिए सब कुछ

मुंबई में आगामी दिनों में एक ‘इस्लामी कार्निवल’ होने जा रहा है। इसमें ‘हलाल’ डेट पर जाया जा सकेगा। इस हलाल डेट में लड़की के घरवाले साथ होंगे। इसे अलावा मुस्लिम कार्निवल में इस्लामी फैशन को भी दिखाया जा सकेगा। इस कार्निवल में मुस्लिम इन्फ्लुएंसर भी आएँगे। इसका प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से हो रहा है। इसको लेकर सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दो हिजाबी लडकियाँ इस ‘हलाल डेट’ कार्यक्रम का प्रचार कर रही है।

लडकियाँ वीडियो में बताती हैं कि अगर आप मुस्लिम हैं और आपको ये नहीं पता कि भारत का पहला ‘मॉडेस्ट’ अवार्ड शो और फैशन शो आ रहा है, तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। इसके बाद वह बताती है कि इस कार्यक्रम का नाम ‘सलाम रमजान 3.0’ है और इसे कई संस्थान मिल कर ला रहे हैं।

दोनों लड़कियाँ बताती हैं कि यहाँ एंट्री फ्री है। इसके बाद यह हलाल डेट का जिक्र करती हैं। लडकियाँ बताती हैं कि अगर आप एक अविवाहित मुस्लिम हैं, तो आपके लिए हम ‘हलाल मुस्लिम डेट’ भी आयोजित कर रहे हैं। लडकियाँ बताती हैं कि यहाँ मुस्लिम लड़का और लड़की एक दूसरे के साथ समय बिता सकेंगे लेकिन इस दौरान लड़की के परिजन मौजूद रहेंगे।

लड़कियों ने कहा कि इस दौरान लड़कियों के ‘मेहरम’ या ‘वली’ की मौजूदगी में मुलाक़ात होगी। यानि डेट तो होगी लेकिन उसमें ‘हलाल’ या ‘हराम’ का ध्यान रखा जाएगा। हलाल उस तरीके को कहा जाता है जो इस्लाम में जायज हो जबकि हराम की अनुमति नहीं होती।

‘हलाल डेट’ का अर्थ है कि इसकी इस्लाम में अनुमति है। इस अनुमति का आधार मेहरम हो होना है। मेहरम परिवार के उस शख्स को कहते हैं, जिसके साथ कोई महिला शादी नहीं कर सकती। वहीं इसी दौरान ‘वली’ का जिक्र किया गया, इसका अर्थ किसी अभिभावक से है।

इस कार्यक्रम को 21-23 फरवरी, 2025 में मुंबई में मिल्लत ग्राउंड, अँधेरी में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को कई संस्थान मिलकर आयोजित कर रहे हैं। इनमें से एक संस्थान इस्लामोपिडिया है और इसके अलावा हीना दाऊद का इवेंट मैनेजिंग कम्पनी कर रही है। इसमें ‘हलाल डेट’ के अलावा और भी कई इवेंट होने हैं।

डेटिंग यानी अविवाहित लड़के-लड़कियों के मिलने या साथ समय बिताने को लेकर लगातार बहस होती आई है। कई इस्लामी विद्वान इसे गलत या हराम करार देते हैं। हालाँकि, ‘हलाल डेट’ का कांसेप्ट भी लाया गया है।

हूर ब्रांड पैकेट पर लिखा ‘भैंस का मांस’, पुलिस ने पकड़ा तो निकला 185000 किलो गोमांस: पश्चिम बंगाल में काटे 8000 गाय, नोएडा में लाकर किया स्टोर

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 9 नवंबर 2024 को ग्रेटर नोएडा में गोमांस की बड़ी खेप बरामद की थी। इससे एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसमें गाय पश्चिम बंगाल में काटी जाती थी। कंटेनर के जरिए नोएडा लाई जाती थी। यहाँ के एक कोल्ड स्टोरेज में इसे स्टोर किया जाता था। फिर कथित तौर पर दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में इसकी सप्लाई की जाती थी।

पुलिस ने 185 टन गोमांस बरामद किए जाने की बात कही है। लेकिन गो रक्षा हिंदू दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेद नागर का दावा है कि करीब 250 टन गोमांस पकड़ी गई थी। उनका यह भी कहना है कि कंटेनर से गोमांस की सप्लाई की सूचना उन्हें ही मेवात के गोरक्षक दलों से मिली थी।

लोनी से भाजपा MLA नन्द किशोर गुर्जर का कहना है कि पकड़ी गई गोमांस की खेप से लगता है कि कम से कम 8 हजार गायों को काटा गया होगा। उन्होंने लखनऊ में बैठे 2 बड़े अधिकारियों के इसमें संलिप्त होने का भी दावा किया है। हालाँकि इनके नाम नहीं बताए हैं। इस मामले में पुलिस ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। कोल्ड स्टोरेज पर बुलडोजर चलाने और आरोपितों पर NSA लगाने की भी माँग हो रही है।

हरियाणा नंबर की गाड़ी से सप्लाई

घटना नोएडा के दादरी की थाना क्षेत्र है। गोरक्षा संगठन के सदस्यों को पश्चिम बंगाल से गोमांस आने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर संगठन के सदस्य जमा हुए। एक ट्रक जिसका नंबर HR 38 AE 9185 था को रोक कर तलाशी ली गई तो उसमें मांस मिला। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर माँस के सैम्पल लिए और जाँच के लिए भेजा। जाँच में यह गोमांस पाया गया।

इस ट्रक को शिव शंकर चला रहा था जो UP के एटा जिला का निवासी है। ट्रक का खलासी भी इसी जिले का सचिन था। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में इन्होंने बताया है कि वे मांस पश्चिम बंगाल से ला रहे थे। इसे थोक भाव में हबीबर मुल्ला से खरीदा गया था। इन्होंने बताया कि वे ट्रक SPJ कोल्ड स्टोरेज में ले जा रहे थे जो गौतम बुद्ध नगर जिले के नगला किरानी गाँव में है।

अब तक 9 गिरफ्तार, कोल्ड स्टोरेज सील

ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है। केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 के तहत दर्ज किया गया है। कोल्ड स्टोरेज के मालिक पूरन जोशी, डायरेक्टर मोहम्मद खुर्शिदुन नबी और मैनेजर अक्षय सक्सेना को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। कोल्ड स्टोर और ट्रक सीज कर लिया गया है। 23 नवंबर को पुलिस ने इस तस्करी में शामिल दिल्ली निवासी सलीमुद्दीन अंसारी को भी दबोच लिया।

जाँच के दौरान अविनाश कुमार, राकेश सिंह और शोएब हकानी की भी मिलीभगत का पता चला। ये तीनों टोरो प्राइमरी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कम्पनी में स्टाफ हैं। इस कम्पनी पर कोल्ड स्टोरेज में रखे गए गोमांस की खरीद-फरोख्त का आरोप है। रविवार (24 नवंबर 2024) को पुलिस ने शोएब, अविनाश और राकेश को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस केस में BNS 325 के साथ 318 (4) 61 (2) और 3/8 गौवध अधिनियम की वृद्धि की गई है।

नोएडा पुलिस के अनुसार कुल 185 टन गोमांस बरामद हुआ है। इसमें से 153 टन कोल्ड स्टोरेज के चैंबर नंबर 5 में रखा गया था। शेष गोमांस पश्चिम बंगाल से आए कंटेनर से बरामद हुआ था। पुलिस ने बरामद गोमांस की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए बताई है। यह मांस बोनलेस था। बोनलेस मांस उस हिस्से से काट कर निकाला जाता है जिसमें हड्डी नहीं होती। इसके सैम्पल सुरक्षित रख कर बाकी मांस को नियमानुसार नष्ट कर दिया गया है।

‘हूर’ ब्रांड, पैकेट पर लिखा था भैंस का मीट

बरामद गोमांस की पैकिंग काले और पीले रंग के पैकेटों में की गई थी। पैकेटों पर ब्रांड का नाम ‘हूर’ लिखा हुआ था। साथ ही अंग्रेजी और अरबी में ‘FROZEN BONELESS BUFFALO MEAT’ लिखा हुआ था। बताया गया था कि पैकेट हलाल सर्टिफाइड हैं। मांस निकलने के लिए पशु को पूरे इस्लामिक तौर तरीकों से काटा गया है। पैकिंग करने वाले का नाम ‘मुराद कर्बला फ़ूड’ प्रिंट दर्ज था। मांस को जिस पॉलीथिन में रोल किया गया था उस पर भी अरबी भाषा में तमाम शब्द लिखे हुए थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए गोरक्षक वेद नागर ने बताया कि उनको गोमांस आने की सूचना मेवात के गोरक्षा दलों से मिली थी। उनके अनुसार यह भारत में गोमांस की सबसे बड़ी बरामदगी है।

उन्होंने गो तस्करी में शामिल लोगों को राजनैतिक संरक्षण मिलने की भी बात कही है। आरोपितों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट के तहत एक्शन की माँग की है। प्रशासनिक कार्रवाई में ढिलाई होने पर हिन्दू महापंचायत का भी एलान किया है।

प्रशासनिक कार्रवाई में ढिलाई होने पर हिन्दू महापंचायत का भी एलान किया है। एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए नागर ने कहा कि यदि प्रशासन कोल्ड स्टोरेज पर बुलडोजर नहीं चलाएगा तो स्थानीय निवासी ही इसे ध्वस्त कर देंगे। उन्होंने आशंका जताई है कि कोल्ड स्टोरेज का मालिक पूरन जोशी धर्म परिवर्तन कर चुका है।

काटे गए 8 हजार से अधिक गोवंश: बीजेपी MLA

लोनी से भाजपा MLA नन्द किशोर गुर्जर ने दादरी को प्राचीन समय से गोरक्षकों का क्षेत्र बताते हुए इतनी बड़ी मात्रा में गोमांस की बरामदगी को सभी के लिए डूब मरने जैसी स्थिति बताया है। उन्होंने इस मामले में स्थानीय पुलिस पर लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया है।

बीजेपी विधायक का कहना है कि कुछ अधिकारी सही मंशा से काम नहीं कर रहे। उन्होंने 8000 गायों के काटे जाने का अनुमान लगाया है। कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे।

MLA गुर्जर का दावा है कि लखनऊ में बैठे 2 बड़े अधिकारी पूरे प्रदेश में गायों को कटवा कर उसका पैसा रख रहे हैं। उन्होंने इन दोनों अधिकरियों पर निचले स्टाफ के ऊपर दबाव डालने और सरकार की छवि बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की CBI जाँच की माँग की है।

मैं उसे मार देना चाहती थी, लेकिन 9 साल की थी, कुछ कर नहीं सकी… जिस देविका रोतावन की गवाही से अजमल कसाब को हुई फाँसी, वह बोली- 26/11 मत भूलना देशवासियों

“मैं उसे मारना चाहती थी, लेकिन मैं सिर्फ 9 साल की थी। कोर्ट में उसे पहचानने के अलावा मैं कुछ नहीं कर सकी।” ये शब्द हैं 26/11 मुंबई हमले की पीड़िता देविका रोतावन के, जिन्होंने महज नौ साल की उम्र में आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देकर उसे फांसी तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। 2008 के इस खौफनाक आतंकी हमले ने न सिर्फ देश को दहला दिया, बल्कि एक बच्ची के साहस और जज्बे की ऐसी कहानी भी लिखी, जो आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का प्रतीक बन गई।

26/11/2008 – यह तारीख भारतीय इतिहास के सबसे काले दिनों में गिनी जाती है। उस रात पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के 10 आतंकवादियों ने मुंबई में तबाही मचाई थी। चार दिनों तक चले इस आतंकवादी हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें 18 सुरक्षा कर्मी भी शामिल थे। 300 से अधिक लोग घायल हुए।

देविका को याद है वो खौफनाक आतंकी हमला

देविका अब 25 साल की हो चुकी हैं। हमले की 16वीं बरसी पर उन्होंने उस खौफनाक रात को याद करते हुए कहा, “16 साल हो गए, लेकिन मैं अब भी सब कुछ याद कर सकती हूँ। मैं क्या कर रही थी, कहाँ जा रही थी, और कैसे हमला हुआ।” देविका अपने पिता और भाई के साथ पुणे जाने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुँची थीं। उसी समय, अचानक गोलियों और धमाकों की आवाजें गूँज उठीं।

देविका ने याद करते हुए कहा, “हम बान्द्रा से CSMT पहुँचे ही थे कि एक धमाका हुआ और फिर गोलियों की बौछार शुरू हो गई। हर तरफ चीख-पुकार थी। लोग घायल हो रहे थे।” इस हमले में देविका के पैर में गोली लगी। उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया और फिर जे.जे. अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ। शारीरिक घाव तो कुछ समय में भर गए, लेकिन मानसिक घाव आज भी ताजा हैं।

आतंकवादी कसाब के खिलाफ गवाही रही बेहद अहम

घटना के बाद जब मुंबई क्राइम ब्रांच ने देविका के परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने अजमल कसाब के खिलाफ अदालत में गवाही देने का फैसला किया। कसाब इस हमले का इकलौता जीवित पकड़ा गया आतंकवादी था। देविका ने बताया, “मेरे पिता और मैंने आतंकवादियों को देखा था। मैं कसाब को पहचान सकती थी। मैंने अदालत में उसकी पहचान की। मैं उसे मारना चाहती थी, लेकिन नौ साल की थी, कुछ कर नहीं सकी।” देविका की गवाही ने कसाब के खिलाफ सबूतों को मजबूत किया। इसके बाद, कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई।

26/11 मुंबई हमले से 2 साल पहले ही देविका की माँ का निधन हो चुका था। इस कठिन समय में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने की ठानी। देविका ने कहा, “आतंकवाद को खत्म करना जरूरी है। समाज में गलत कामों के खिलाफ बोलना चाहिए। आतंकवाद की शुरुआत पाकिस्तान से होती है, इसे रोकना चाहिए।” हालाँकि, इस संघर्ष में उनके परिवार को सामाजिक रूप से आईसोलेशन भी झेलना पड़ा। देविका ने कहा, “हमें शादी या किसी भी पारिवारिक समारोह में नहीं बुलाया जाता था। लेकिन अब लोग फिर से बुलाने लगे हैं।”

60 घंटे तक आतंकियों ने मचाई थी मुंबई में तबाही

26/11 का हमला न केवल निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वाला था, बल्कि इसने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। 60 घंटे तक चले इस हमले में आतंकवादियों ने ताजमहल पैलेस होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस जैसे स्थानों पर लोगों को बंधक बनाया। सुरक्षा बलों ने नौ आतंकवादियों को मार गिराया और अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा। कसाब का पकड़ा जाना और उसकी फांसी भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों का महत्वपूर्ण मोड़ बना। इस हमले के बाद भारत ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की दिशा में कदम उठाए।

देविका ने देशवासियों से अपील की है कि वे उस खौफनाक रात को न भूलें और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहें। देविका ने कहा, “आतंकवाद खत्म होना चाहिए। लोगों को पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए और उस रात को याद रखना चाहिए।”

देविका रोतावन आज भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। उनकी कहानी न केवल उनके साहस की मिसाल है, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता का प्रतीक भी है। 26/11 के हमले ने भले ही देश को गहरा जख्म दिया हो, लेकिन देविका जैसी बहादुर लड़कियों ने यह साबित कर दिया कि आतंक के खिलाफ जीत इंसानियत की होती है।