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केक, कमल बर्फी और लड्डू के साथ मनाया जाएगा BJP कार्यालय में जश्न

रुझान आने के साथ ही चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ़ होती जा रही हैं। खबरों के मुताबिक देश में एक बार फिर से मोदी सरकार आने वाली है। इसके अलावा भाजपा भी लंबे समय से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। यही कारण है कि नतीजे आने से पहले ही भाजपा ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए कुछ खास तैयारियाँ की हैं।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक पार्टी के सह प्रभारी नीलकांत बख्शी ने बताया कि पंत मार्ग स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय के अंदर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगवाई गई है। जीत को सेलीब्रेट करने के लिए बंगाली मार्केट की मशहूर बंगाली पेस्ट्री शॉप से खास केक और लड्डू बनवाए जा रहे है। 7 किलो का बड़ा केक बनने का ऑर्डर दिया गया है।

खबर के मुताबिक परिणाम घोषित होने के बाद मनोज तिवारी इस 7 किलो के केक को लेकर पार्टी के मुख्यालय पहुँचेंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस केक को काटेंगे। इसके अलावा इसी तरह के 4-5 किलो के 9 केक और बनवाए जा रहे हैं। इन्हें भी प्रदेश के कार्यालय में काटा जाएगा।

पार्टी प्रवक्ता प्रवीण कुमार के अनुसार चांदनी चौक की मशहूर स्वीट शॉप से विशेष प्रकार की 50 किलो कमल बर्फी बनाने का ऑर्डर भी दिया गया है। इस बर्फी की खासियत होगी कि इसका आकार पार्टी के चुनाव चिह्न कमल फूल की तरह होगा। इसका रंग केसरिया और हरा रंग होगा। इस मिठाई को चांदनी चौक के व्यापारियों के बीच बाँटा जाएगा।

वोटों की गिनती से पहले कॉन्ग्रेस ने की थी EVM, गाँधी और अम्बेदकर की पूजा

आज (गुरुवार 23 मई, 2019) को लोकसभा निर्वाचन के वोटों की गिनती शुरू होने से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने EVM, गाँधी और अम्बेदकर की पूजा की। रिपब्लिक के हवाले से खबर है कि राहुल गाँधी के घर में निर्वाचन जीतने के लिए हवन किया गया।

हवन में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा, उनका सुपुत्र रेहान, सोनिया गाँधी उपस्थित रहे। सभी ने भारतीय संविधान के पिता कहे जाने वाले बाबासाहेब भीमराव अम्बेदकर के चित्र और ईवीएम के चित्र की पूजा की और प्रार्थना की कि इस हवन के द्वारा हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे ईवीएम पर कृपा बरसाएँ ताकि उसका स्वास्थ्य ठीक रहे, उसकी लंबी आयु हो।

हवन में कथित रूप से चाय के एक कंटेनर से राफेल जेट भी बनाया गया था। राहुल गाँधी के घर के बाहर पर्चे भी बाँटे गए जिनपर यह लिखा था कि प्रियंका गाँधी ‘ब्रह्मास्त्र’ हैं।    

मोदी ने गुजरात में लोगों को मरने दिया: Pak मीडिया में प्रोपेगेंडा वेबसाइट Scroll का लेख

‘स्क्रॉल’ की पत्रकार का लेख पाकिस्तानी मीडिया ने उठाया है। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी पक्ष ने कुलभूषण जाधव के विरुद्ध दलीलें देने के लिए ‘द क्विंट’ के लेख का ज़िक्र किया था। इन दोनों पोर्टलों को पाकिस्तान से प्रेम है या नहीं लेकिन पाकिस्तान को इनसे ज़रूर प्रेम है। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान ‘डॉन’ को स्क्रॉल का लेख इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया। आइए देखते हैं कि इस लेख में ऐसा क्या था कि पाकिस्तान को इतना अच्छा लगा। दरअसल, सीधे देखने पर पता चलता है कि मोदी के जीतने के पाँच कारण गिनाए गए हैं और यह एक पॉजिटिव विश्लेषण लगता है, लेकिन जैसे ही आप अन्दर उन कारणों को पढ़ना शुरू करते हैं, आपको पता चल जाता है कि इस लेख का उद्देश्य क्या है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि लेख की शुरुआत गुजरात दंगे से की गई है।

इस लेख में किसी भेरू लाल नामक व्यक्ति के हवाले से लिखा गया है कि मोदी ने गुजरात में दंगे होने दिए और कुछ नहीं किया। भेरू लाल के हवाले से लिखा गया है कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूसरे समुदाय के लोगों को मरने दिया। भेरू लाल को उदयपुर का एक भील आदिवासी बताया गया है। इस लेख में स्क्रॉल की पत्रकार सुप्रिया शर्मा ने मोदी की जीत का पहला कारण उनकी लोकप्रियता को बताया है। लेकिन, अगर सब कुछ सीधा रहता तो पाकिस्तानी मीडिया ने इस लेख को नहीं उठाया होता। इसमें दावा किया गया है, “मेट्रो सिटी के इलीट लोग मोदी के बेअदबी भरे भाषणों से नाराज़गी जताते हैं।” इलीट वर्ग के हवाले से मोदी के भाषण में नाटकीयता, विचलन और अशुद्धियाँ होने का दावा किया गया है।

इस लेख में दावा किया गया है कि ‘वोटर ऐसा समझते हैं‘ कि मोदी का एयर स्ट्राइक का ‘दावा’ सही है और और इसीलिए वे मोदी से ख़ुश हैं। इस लेख में कहीं भी एयर स्ट्राइक सच में हुआ, इसकी चर्चा नहीं की गई है और इसे मोदी का दावा बताया गया है। तीसरा कारण विकास बताया गया है। लेकिन, इसमें भी नियम एवं शर्तें लगाई गई हैं। मोदी ने विकास किया, ये लिखने के बजाए लिखा गया है कि मोदी ने विकास के आईडिया में मतदाताओं को निवेशित रखा। दलितों और आदिवासियों में मोदी सरकार के प्रति गुस्सा होने का दावा किया गया है। सुप्रिया शर्मा द्वारा लिखे गए इस लेख में एक और गंभीर दावा किया गया है।

अजीब सा चुनावी विश्लेषण करते हुए पाकिस्तानी मीडिया द्वारा प्रकाशित किए गए स्क्रॉल के इस लेख में सुप्रिया शर्मा का दावा है कि जिस तरह 2014 में भाजपा को बिना समुदाय विशेष के समर्थन के पूर्ण बहुमत मिला, 2019 की जीत में दलितों और आदिवासियों के मतों की कोई महत्ता नहीं रह जाएगी। शर्मा ने भेरू लाल से अजीब प्रोपगंडा वाला सवाल पूछा कि वो समुदाय विशेष से घृणा क्यों करते हैं? भेरू लाल को राजपूतों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात भी कही गई है। पाँचवे कारण के अंतर्गत इस लेख में लिखा गया, “मीडिया ने सरकार के बहुसंख्यकवादी प्रकृति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।” पाकिस्तानी मीडिया के इस ‘स्क्रॉल प्रेम’ का कारण अब आप समझ चुके होंगे।

नीचे से लीड कर रहे हैं प्रकाश राज, मतदान केंद्र छोड़ कर भागे

प्रकाश राज मतदान केंद्र छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं। प्रकाश राज ने बंगलोर सेंट्रल से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ताज़ा मतगणना में वो शीर्ष 10 में भी नहीं हैं। प्रकाश राज को अभी तक की मतगणना के अनुसार 12,000 से भी कम मत प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पहले राउंड के आँकड़े जारी होने के तुरंत बाद मैदान छोड़ दिया।

अगर बंगलोर सेंट्रल संसदीय क्षेत्र की बात करें तो कॉन्ग्रेस के रिजवान अरशद सबसे आगे चल रहे हैं और भाजपा के पीसी मोहन दूसरे स्थान पर हैं। दोनों के बीच लगभग 24,000 मतों का फासला है। नीचे देखें, किस उम्मीदवार को अब तक कितने वोट मिले हैं।

प्रकाश राज के लिए अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी प्रचार किया था। वह अपनी जीत के प्रति इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र की बजाए दिल्ली और बेगूसराय में प्रचार शुरू कर दिया था। कन्हैया कुमार और अरविन्द केजरीवाल के लिए उन्होंने चुनाव प्रचार किया था। फिलहाल मतगणना केंद्र से वह भाग खड़े हुए हैं।

कॉन्ग्रेस-जेडी(S) गठबंधन एक भूल: रोशन बेग के बाद एक और कर्नाटक कॉन्ग्रेस MLA ने किया विद्रोह

कर्नाटक में चिक्कबल्लापुरा से कॉन्ग्रेस विधायक के. सुधाकर ने अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ़ बिगुल फूँकने का काम किया है। उन्होंने पार्टी के ख़िलाफ़ जाते हुए जनता दल (सेक्युलर) के साथ हुए गठबंधन को एक ऐतिहासिक गड़बड़ी करार दिया और कहा कि गठबंधन के कारण कॉन्ग्रेस पार्टी कई निर्वाचन क्षेत्रों में हार सकती है।

कॉन्ग्रेस विधायक ने द न्यूज़ को बताया, “जेडी (एस) के साथ गठबंधन करना हमारे लिए ऐतिहासिक गड़बड़ी है। यह हमें महँगी पड़ेगी और इसका नतीजा आप 23 मई को देखेंगे। अगर कॉन्ग्रेस विपक्ष में होती, तो हम 50% से अधिक वोट शेयर जीत लेते। हम इस बार दक्षिणी कर्नाटक में तटीय और मराठा क्षेत्र में भी हार जाएँगे। ग़ौरतलब है कि हम हार जाएँगे।”

उन्होंने कहा कि जेडी (एस) के साथ गठबंधन एक ‘अपवित्र गठबंधन’ था और कॉन्ग्रेस ने केवल 37 विधायकों के साथ पार्टी को सब कुछ दे दिया। उन्होंने गठबंधन को नैतिक रूप से ग़लत बताया।

सुधाकर ने एक्जिट पोल के बाद ईवीएम में छेड़छाड़ के मुद्दे को उठाने पर भी सवाल उठाया। अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए उन्होंने ट्विटर का सहारा लिया और लिखा कि वह इस उलझन में हैं कि एग्जिट पोल की बातचीत में ईवीएम मुद्दे को क्यों लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे मतदान के अंत में मतदाताओं की भावना को दर्शाते हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि एग्जिट पोल का ईवीएम से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि वे मतदान के दिन आयोजित किए जाते हैं। सुधाकर ने कहा, “मैंने केवल एग्जिट पोल के बारे में ही बात की है। इस पर कुछ लोगों का राय अलग हो सकती है। एग्जिट पोल के बारे में उन्होंने कहा, “कभी-कभी वे सही भविष्यवाणी करते हैं और वे ग़लत हो जाते हैं, इसलिए आप इसके लिए ईवीएम को कैसे दोष दे सकते हैं?”

इससे पहले, कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रोशन बेग ने कर्नाटक राज्य विधानसभा में विभागों को बेचने का आरोप लगाकर विवाद खड़ा कर दिया था। एग्जिट पोल के बाद बेग ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल को ‘मसखरा’ कहा था और राज्य में पार्टी के संभावित भविष्य के लिए ‘सिद्धारमैया के अहंकार’ और पार्टी अध्यक्ष गुंडू राव के ‘फ्लॉप शो’ को दोषी ठहराया था।

बेग को कॉन्ग्रेस-जद (एस) गठबंधन के ख़िलाफ़ उनके बयानों के लिए कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति (KPCC) द्वारा कारण बताओ नोटिस दिया गया था। हालाँकि, उन्होंने यह कहते हुए नोटिस पढ़ने से इनकार कर दिया था कि यह उन लोगों के आदेश पर भेजा गया था जिनकी अक्षमताओं पर उन्होंने प्रकाश डाला था।

नींद से जागे ‘उपन्यासकार’ रामचंद्र गुहा, कहा अब तो कॉन्ग्रेस में वंशवाद ख़त्म करो

जैसा कि लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने यह अंदेशा जताया था कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बन सकती है। कई तथाकथित बुद्धिजीवियों ने विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच हो रहे मुक़ाबले पर तीखी टिप्पणियाँ की थी। योगेंद्र यादव ने कहा था कि कॉन्ग्रेस को मर जाना चाहिए। स्वयंभू विद्वान, फिक्शन राइटर और ‘उपन्यासकार’, और अपनी कल्पना को इतिहास के रूप में लिखने एवं नेहरू के प्रति निष्ठा रखने वाले रामचंद्र गुहा ने अब कॉन्ग्रेस पार्टी को गाँधी वंश से मुक्त होने के लिए कहा है।

गुहा ने कहा कि नया भारत निचले पायदान पर कम सामंती है और शीर्ष पर अधिक अधिनायकवादी। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात अस्वीकार्य लगती है कि पाँचवीं पीढ़ी के राजवंश को भारत की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने के लिए केवल इस बात पर ग़ौर किया गया कि वो किसका बेटा और पोता है।

गुहा ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को ज़िंदा रहने के लिए अपनी राजवंश की छवि को ख़त्म करना पड़ेगा। यहाँ तक ​​कि कॉन्ग्रेस के निष्ठावान राजदीप सरदेसाई ने भी एग्जिट पोल के आंकड़ों के बाद ईवीएम फ़र्जीवाड़े की झूठी ख़बर उठाने के लिए विपक्षी नेताओं की खिंचाई की थी।

राजदीप ने तर्क दिया था कि विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और विशुद्ध रूप से राजनीतिक कारणों से बनाए गए हैं। वाराणसी को वीवीआईपी निर्वाचन क्षेत्र में बदलने के लिए पीएम मोदी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि घाटों की अधिकता, शहर की सड़कों में सुधार, चौड़ी सड़कों और वाराणसी में बिजली की बाधित आपूर्ति का श्रेय पीएम मोदी को दिया जाना चाहिए।

कामरा और ट्रोल राठी जैसों के घटे दाम, कॉन्ग्रेस ने ‘न्याय’ से 5 रुपया/चुटकुला देने का किया वादा

चुनाव के नतीजों के साथ ही देशभर  कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ मतदाताओं ने जो अ’न्याय’ किया है, उसके रुझान आने शुरू हो चुके हैं। इस रुझान से भले ही निष्पक्ष पत्रकार और राहुल गाँधी असंतुष्ट हों, लेकिन देश का एक वर्ग ऐसा भी है जिसकी खुशियाँ छुपाए नहीं छुप रही है। ये वो लोग हैं जिन्हें कॉन्ग्रेस ने पिछले 5 साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सस्ते, घटिया और निहायत ही वाहियात चुटकुले बनाने के लिए रोजगार दिया था।

सूत्रों के मुताबिक़ 5 साल रोजगार की कमी का रोना रोने वाले कुणाल कामरा और स्टूडियो में निष्पक्ष पत्रकार जिस तरह से कॉमेडियंस बनकर उभरे हैं, उनके लिए आने वाले 5 साल में भी कॉमेडी करने के भरपूर अवसर आने वाले हैं। कॉन्ग्रेस का कहना है कि वो विपक्ष में रहकर भी लोगों को रोजगार देना चाहती है और वो अपने इस कार्य को पूरा कर के रहेगी। हालाँकि, आँकड़ों में बात कर के अपनी विश्वसनीय साबित करने वाले NDTV और BBC के ट्रोल पत्रकार और लिबरल गिरोह के कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने कॉन्ग्रेस को बताया कि उनके ऐसा करने से रोजगार का क्रेडिट भी मोदी सरकार को ही जाएगा और इस कारण उन्हें मोदी सरकार के दौरान बेरोजगारी के झूठे आँकड़ों को फैक्ट बनाकर बताने में परेशानी होगी।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा है कि इन लोगों ने लगातार कॉन्ग्रेस पार्टी की मदद की है, और कॉन्ग्रेस का यह फ़र्ज़ है कि कम पार्टी फण्ड के बावजूद, राहुल गाँधी के कुछ विदेशी यात्राओं के पैसे बचा कर हर सस्ते कॉमेडियन को प्रति चुटकुला 5 रुपए सीधे उनके खाते में डाल दिए जाएँगे।

राहुल गाँधी ने किया कॉमेडियंस से प्रत्यक्ष रूप से कॉमेडी करने का वायदा

देखा जाए तो देश में कॉन्ग्रेस ही अकेली पार्टी है, जिसने कुणाल कामरा जैसों की कॉमेडी में गंभीरता तलाश ली थी। लेकिन राहुल गाँधी के होते हुए भी कॉन्ग्रेस को सस्ते कॉमेडियंस आउटसोर्स करने पड़े ये बात चौंका देने वाली थी। गोदी मीडिया ने जब राहुल गाँधी से इस बारे में सवाल किया, तो उनका जवाब था, “देखिए भाई साहब, मैं फ्रेंक्ली कहता हूँ, आप लिख के ले लीजिए, मैं कॉमेडियंस के साथ पूरा न्याय करूँगा। मैं नहीं चाहता था कि  देश के और किसी कॉमेडियन को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौक़ा ना मिले इसलिए मैं खुलकर सामने नहीं आया। लेकिन, अब जब कुणाल कामरा जैसे लोग कॉमेडी कर के बहुमत नहीं दिला पा रहे हैं, तो मुझे अब ये जिम्मेदारी अपने हाथों में लेनी ही होगी। मैं ये मजा पूरे देशवासियों को देना चाहता हूँ।”

देश में सबसे पहले कौन लेकर आया था कॉमेडी?

देश में सबसे पहले कॉमेडी को किसने जन्म दिया था के सवाल पर राहुल गाँधी ने बताया, “ऑफ़कोर्स राजीव गाँधी ने”

जब कॉन्ग्रेस को नरेंद्र मोदी को हराने के लिए वास्तव में अपनी मेहनत और ऊर्जा मुद्दों पर लगानी थी, तब वो सस्ते कॉमेडियंस का गंभीरता से लेते हुए उन्हें 100 प्रतिशत रोजगार की गेरेंटी देती रही। कॉमेडी के नाम पर खुद कॉमेडी AIB जैसों के पतन का सबसे बड़ा फायदा कुणाल कामरा को हुआ। कॉन्ग्रेस ने कुणाल कामरा को अपनी पार्टी का प्रवक्ता बनाकर उन्हीं के जैसे दूसरे ऐसे कॉमेडियंस को उम्मीद दी, जो सोशल मीडिया पर दिन-रात मोदी समर्थकों को भक्त बताते नजर आते हैं।


मोदी जीत भी गए तो भारत बँटा हुआ ही रहेगा: The Wire ने उगला जहर

प्रोपगंडा वेबसाइट ‘द वायर’ ने लोकसभा चुनाव में राजग की जीत की भनक मिलते ही अलग ही सुर में रोना शुरू कर दिया है। वायर का कहना है कि लोकसभा चुनाव में जिसकी भी जीत हो, भारत तो बँटा हुआ ही रहेगा। वायर का यह लेख आज ही आया है और इसे जवाहर सरकार ने लिखा है। जैसा कि हम जानते हैं, मीडिया के एक गिरोह विशेष का अंतिम रोना यही होता है- “तो क्या हो गया, ऐसा होगा-वैसा होगा”। अब जब राजग यूपीए को कड़ी पटखनी देता हुआ नज़र आ रहा है, इनका अंतिम दाँव यही है कि मोदी के जीतने के बावजूद सब कुछ वैसा ही रहेगा, जैसा नैरेटिव ये बनाना चाहते हैं। जवाहर सरकार ने वायर में कहा है कि भारत 1947 से लेकर 2014 तक सहिष्णु था और लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं को अपनाए हुए था।

जवाहर का मानना है कि चाहे कोई भी पार्टी जीते (एग्जिट पोल्स के अनुसार साफ़ था कि राजग की जीत हो रही है), भारतीय व्यवस्था में पिछले पाँच वर्षों में जो व्यवहार और विचार भर दिए गए हैं, जबरन डाल दिए गए हैं, उसे पलटना मुश्किल है। उनका मानना है कि नई सरकार कितनी भी तेज़ी से प्रयास कर ले, अगर ऐसा है भी तो हिंदुत्व और दक्षिणपंथ की तरफ जो झुकाव पैदा कर दिया गया है, वो नहीं बदलेगा। हालाँकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि अगर ऐसा है भी तो हिंदुत्व और दक्षिणपंथ ग़लत क्यों है, इसमें क्या बुराई है? उनके अनुसार, घृणा अब वास्तविक है। हिन्दुओं के एक बड़े धड़े पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार ने लिखा है कि वे मुस्लिमों को शक्तिहीन बनाना चाहते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगले कुछ वर्षों में भारत पर वैष्णव शाकाहार थोप दिया जाएगा। हालाँकि, इसके लिए उन्होंने कोई बैकग्राउंड नहीं दिया। रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के भाजपा में शामिल होने को लेकर भी इस लेख में नाराज़गी जताई गई है। कहा गया है कि सैन्य अधिकारी समझते हैं कि एक ही पार्टी उनके लिए काम कर रही है और उनका भाजपा में शामिल होना अशुभ है। साथ ही जवाहर सरकार ने वायर के लिए लिखे लेख में सोशल मीडिया पर भी सरकार का साथ देने का आरोप लगाया। इसमें लिखा गया है कि अल्ट्रा-नेशनलिज्म अभी जाने वाला नहीं है, चाहे इसके लिए कितने भी प्रयास कर लिए जाएँ।

सोशल मीडिया पर कुछ तथाकथित लिबरल और सेक्युलर लोगों द्वारा केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ लगातार जहर उगले जाने का समर्थन करते हुए जवाहर सरकार ने लिखा कि ऐसे लोगों की प्रशंसा होनी चाहिए क्योंकि वे इस इस तानाशाही के विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं। जो लोग निष्पक्ष हैं, उनकी भी इस लेख में कड़ी आलोचना की गई है और कहा गया है कि वे फासिस्ट से भी बदतर लोग हैं। सरकार की कश्मीर नीति की आलोचना करते हुए जवाहर सरकार ने दावा किया है कि मोदी सरकार के अंतर्गत आतंकी घटनाओं में काफ़ी इजाफा हुआ है। मुस्लिम आक्रान्ताओं का बचाव करते हुए कहा गया है कि सभी बौद्ध मठों को मुस्लिमों ने नहीं तोड़ा। कुल मिलाकर इस लेख में बिना किसी तर्क, सबूत और बैकग्राउंड के ऐसे कई कन्क्लूजन निकाले गए हैं।

विवेक ओबरॉय को मिली जान से मारने की धमकी, PM मोदी की बायोपिक में लीड रोल बना ‘कारण’

भाजपा के स्टार प्रचारक और बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबरॉय को फोन पर जान से मारने की धमकियाँ मिली हैं। इसका कारण उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक में लीड रोल निभाना माना जा रहा है।

मीडिया खबरों के मुताबिक इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार (मई 22, 2019) को दी। उन्होंने बताया कि उन्हें विवेक ओबरॉय की जान को खतरा होने की खुफिया सूचनाएँ मिली थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

खबर के अनुसार, बुधवार को ही उनकी सुरक्षा में 2 निजी सुरक्षा अधिकारी तैनात किए गए। साथ ही उनके स्थानीय आवास के बाहर एक वाहन भी खड़ा किया गया। विवेक को ये सुरक्षा मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन और सिक्योरिटी ब्रांच द्वारा उपलब्ध कराई गई है।

गौरतलब है प्रधानमंत्री की बायोपिक में लीड रोल निभाने के कारण विवेक ओबरॉय पिछले दिनों चर्चा का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में उन्हें ऐश्नर्या पर मीम शेयर करने के कारण चारों ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच महिला आयोग ने उनके ख़िलाफ़ एक्शन भी लिया और उन्हें अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा।


हिंदुओं ने दिया मोदी को वोट, हिंसा और नफरत ही अब भारत का भविष्य: स्वरा भास्कर

हाल ही में आए एग्जिट पोल पर तीन दिनों से जो झाग निकले हैं लिबटार्ड गिरोह के नुमाइंदों के मुँह से, वो एक दर्शनीय घटना थी। अब लोकसभा चुनावों के नतीजे सामने आने लगे हैं, तो इसमें इस गिरोह के कई सदस्यों के विष-फुंकार से लेकर मिर्गी के दौरों की सारी अपडेट यहाँ दी जाएगी।

23 मिनट के भीतर स्वरा भास्कर की ‘घर वापसी’

कॉन्ग्रेस को अब मीडिया में भी ‘गठबंधन साथियों’ की कमी पड़ेगी क्या?

इस आक्रोश को जितना दबाओगे, जितना नीचा दिखाओगे, जितनी खिल्ली उड़ाओगे, उतना यह उबलेगा! और तुम्हारी गंदी राजनीति को लावे की तरह लील लेगा।

उम्मीद पर दुनिया कायम है!

लगे रहो!

ये वाला एंगल ट्राई कर लीजियेगा अगली बार… देखिएगा क्या नतीजा होता है!

आपके चिरयुवा नेता के आगे आपको कैप्टन नहीं दिखे?

क्रिकेट में अगर कोई पैसा एक टीम पर लगाए और फील्डिंग दूसरी टीम से करे तो वह भ्रष्टाचारी होता है! मीडिया में ऐसे लोगों को क्या कहेंगे?

कल तक मजाक में कहते थे, आज सच में लगता है ये लोग भाजपा के स्लीपर सेल हैं!

जैसा चल रहा है, वैसा ही चलेगा… आपको दिक्कत है तो 2024 में यही प्रोपेगैंडा आजमा लीजिएगा!

काश, आतंकवाद सच में आपके लिए मुद्दा होता, मन बहलाने का साधन नहीं…

स्वरा जी, अब बस “ये गलियाँ, ये चौबारा…” गा दीजिए!!

रेवती जी, पुरुषार्थ का अर्थ समझने ये किस के पास चली गईं आप?

स्वरा भास्कर आख़िरकार बिल से बाहर आईं, और 2024 में भाजपा की जीत के लिए कैम्पेनिंग शुरू कर दी।

रवीश जी का दिल है, कि मानता नहीं… टिंग-रिंग…

इन दोनों का रिटायरमेंट प्लान

ये बताइए, नेहरू जीत रहे हैं या हार रहे हैं?

इनके नाम का अपभ्रंश जिसने भी बनाया, सही बनाया!

आप पाँच साल भी वहीं रह जाएँ तो भी देश को कुछ फर्क नहीं पड़ना!

आप पहले आतिश तासीर को समझाइए! लड़का अभी पूरी तरह हाथ से नहीं निकला है…

ये कन्फ्यूज्ड टाइप के लिबरल हैं- वैचारिक रूप से नहीं, इस बात में कि गुलाटी मारने में ज्यादा फायदा है, या वफ़ादारी दिखाए जाने में…

प्रिय कारवाँ वालों, सारा जहर आज ही उगल लोगे तो पाँच साल क्या करोगे?

आपको किसी ने रोका था साध्वी के खिलाफ चुनाव लड़ने से?

इतनी तेजी से तो केजरीवाल और मुलायम ने भी यू-टर्न नहीं मारे थे…

एनडीटीवी का लोगो भी भगवा होने वाला है क्या?

समझ नहीं आता इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी जा सकती है!!

न्यू यॉर्क टाइम्स की अक्ल अभी भी ठिकाने नहीं आई:

बेरोजगारी का दुःख निखिल वागले से बेहतर तो बरखा दत्त भी नहीं जानतीं! भौत हार्ड, भाई…

मतलब बालाकोट और सर्जिकल स्ट्राइक के श्रेय मोदी को देना गलत, और ऑपरेशनल चूक मोदी की साजिश? वाह हरतोष जी, वाह!

राणा जी को कोई ‘a while’ का मतलब समझाओ! इतना लम्बा while कौन से शब्दकोश से आ रहा है?

राणा जी हमें माफ़ करना, पर गलती थारे से भी हुई थी!

स्वाति चतुर्वेदी से और दुःख बर्दाश्त नहीं होता। लेकिन ये कमबख्त न्यूज़ वाले हैं कि परिणाम के अलावा कुछ दिखा ही नहीं रहे! कृषि दर्शन कहाँ है?

तहसीन पूनावाला ‘The Monk Who Became Chief Minister’ के लेखक शांतनु गुप्ता को ज्ञान दे रहे थे कि भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी EVM हैक कर ली थी, इसी से उसे प्रतिशत मिला। शांतनु ने पूछा कि भाजपा ने ‘हैकिंग’ के बल पर खुद को केवल प्रतिशत ही दिया, सीटें नहीं?

स्वाति जी, आप एनडीटीवी पर न भी लिखतीं तो भी यह दीवार पर लिखी इबारत थी।

मतलब भाड़े की प्रोटेस्टर कम्युनिस्टों में पाँच साल से ‘अल तकिया’ कर बैठीं थीं? या फिर इस्लाम और कम्युनिज्म में अंतर ही नहीं है?

वैसे भी ये दिल्ली में “आवारा” बन क्रांति करती हैं, और कश्मीर पहुँचते ही चीनी के बोरे लपेट लेती हैं।

मतलब ‘मुस्लिम होने का अहसास ‘मोदी के आने से ज्यादा होता है, चीनी का बोरा ओढ़ लेने से कम ?

ये मैडम शेखर गुप्ता, राहुल कँवल, स्वाति चतुर्वेदी, करुणा नंदी जैसे ‘लिबरलों’ द्वारा फॉलो की जाती हैं। मोदी से पाँच साल ट्विटर पर वह किसे-किसे फॉलो करते हैं, इस पर इस्तीफा माँगने वाले इन लोगों के इस्तीफे माँगेंगे?

नतीजे आने से पहले ही स्पष्टीकरण शुरू: