रुझानों के आने के साथ ही बेगूसराय में हिंसक झड़प की खबर आ रही हैं। बिगड़ते माहौल को देखकर वहाँ भारी संख्या में सुरक्षाबल की तैनाती की गई है। गौरतलब है यहाँ सीपीआई के उम्मीदवार कन्हैया कुमार, भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह के बीच सबकी नजरें टिकी हुई है। अभी तक गिरिराज सिंह की भारी मतों से बढ़त उनकी जीत को और भी पुख्ता कर रही है।
लेकिन, इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी और लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर पत्थरबाजी की है। सीपीआई के कार्यालय के बाहर नाराज़ कार्यकर्ताओं ने भीड़ लगा रखी है। हालाँकि आजतक द्वारा पोस्ट की गई वीडियो देख सकते हैं कि पुलिस वहाँ मौजूद है लेकिन माहौल पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।
बेगूसराय में कन्हैया कुमार के समर्थकों ने पथराव किया गिरि राज सिंह bjp के 2 लाख वोट से आगे चल रहे है
— ☠️ʜɪᴛʟᴇʀ☠️︻テ╦═─────✴️ (@TheHitlerGyan) May 23, 2019
चुनावी माहौल में इस तरह की खबरें अभी तक केवल पश्चिम बंगाल से सुनने-देखने को मिलीं थी, लेकिन रुझान आने के बाद अब ये दृश्य सीपीआई के कार्यालय के बाहर भी देखने को मिल रहा है। बता दें भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह यहाँ कन्हैया कुमार से 2 लाख वोट से आगे चल रहे हैं।
इस लोकसभा चुनाव में सबसे रोचक बात ये रही कि चुनाव जीतने से ज्यादा सर फुटव्वल प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवारों के बीच देखने को मिली। इसका सबसे पहला कारण तो महागठबंधन जैसे संक्रामक रोगों की उत्पत्ति थी और दूसरा कारण ‘कनविनिएंट वामपंथन’ और किराए पर उपलब्ध प्रदर्शनकारी शेहला रशीद के ‘मन की बात’ है। चुनाव के रुझान अब लगभग यही बता रहे हैं कि लोकप्रिय नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हुए देखना चाहते हैं।
इसी रुझान के साथ, तमाम EVM हैकिंग से लेकर डर के माहौल के बीच अन्य कई प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के अरमानों का शीघ्रपतन देखने को मिला है। इस प्रकार बड़े ही दुःख के साथ यह सूचित करना पड़ रहा है कि देश ने एकसाथ आज लगभग 22 प्रधानमंत्री खो दिए हैं। हालाँकि, जो लोग अभी तक नेहरू-इंदिरा को ही अपना प्रधानमंत्री मानते आए हैं, वो अभी भी उन 22 चेहरों में अपना प्रधानमंत्री तलाशने के लिए स्वतंत्र हैं।
एक नजर उन सभी चेहरों पर जो ‘लगभग’ प्रधानमंत्री बनते-बनते रह जाएँगे
1 – गठबंधन भिक्षु सर अरविन्द केजरीवाल
पिछले 1 साल से गठबंधन की भीख माँग रहे अरविन्द केजरीवाल को कोई और प्रधानमंत्री बनते देखना चाहे या न चाहे लेकिन बलात्कार पीड़ितों के नाम पर चंदा इकठ्ठा कर के अकेले डकार जाने वाली हायब्रिड वामपंथ की डोमेस्टिक विचारक शेहला रशीद उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहती थीं। हैरानी की बात ये है कि ये मन की बात उन्होंने 4 महीनों तक पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर जमकर कूटे गए और बेगूसराय सीट से फिलहाल ‘लगभग’ एक लाख वोटों से पीछे चल रहे कम्युनिस्ट कामरेड नेता कन्हैया कुमार के लिए चुनाव प्रचार करते वक़्त कभी नहीं रखी। हालाँकि, रोडशो के दौरान लप्पड़ खाकर चंदा जुटाने में शायद वो जरूर कामयाब रहे होंगे, लेकिन प्रधानमंत्री तो वो नहीं बन रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल का ये डर कि नरेंद्र मोदी उनकी हत्या करवा देंगे, हो सकता है अभी लम्बे समय तक चलता रहे।
लगभग प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक चित्र
2 – PM IN WAITING, डिम्पलधारी, चिरयुवा, अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी
नेहरू के बाद एकमात्र लाखों-करोड़ों लोगों की एकमात्र पसंद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को और 5 साल PM पद का सबसे योग्य उम्मीदवार बनने का सौभाग्य प्राप्त होने वाला है। उन्होंने रवीश कुमार को दिए गए गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष इंटरव्यू में यह भी माना था कि 23 मई को जो भी नतीजे आएँगे, वो उसको ही मानेंगे। अब देखना ये है कि वो जनता के इस निर्णय को सर आँखों पर बिठाते हैं या फिरसे 5 साल तक जनता को जेब में एक ओर से हाथ डालकर दूसरी तरफ से निकालने और आलू से सोना बनाने का चमत्कार करते हुए नजर आते हैं। जो भी हो, जनता में चाहे राहुल गाँधी की लहर ना हो, लेकिन यह शत प्रतिशत तय है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच में राहुल गाँधी का क्रेज पूरा है।
‘बेटा सत्ता जहर है और सुन, आएगा तो मोदी ही’ (PM in waiting का प्रतीकात्मक चित्र )
3 – टोंटीचोर अध्यक्ष अखिलेश यादव
अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी टोंटी, चिलम और पकौड़ों के स्वाद में इतना उलझे रहे कि उन्हें चुनाव में पूरी ताकत झोंकने का मौका ही नहीं मिल पाया। नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव ने पहले ही कह दिया था कि उनकी आस्था नरेंद्र मोदी हैं, शायद यही बुजुर्गों का आशीर्वाद युवा अध्यक्ष जी को मिल नहीं पाया। हालाँकि, कुछ लोग तो ये भी कयास लगा रहे हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान आखिरी समय पर कठिन सवाल पूछने की चॉइस रखने वाला एक निष्पक्ष पत्रकार का साया उनके प्राइवेट चॉपर में घुस आया था। वो निष्पक्ष पत्रकार कौन था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
टोंटी के साथ अध्यक्ष जी
4 – बहन मायावती
बसपा प्रमुख मायावती ने एग्जिट पोल के बाद तक भी मोदी विरोधियों को दिलासा दिया कि मोदी लहर कुछ नहीं होती है ये सब उनके मन का वहम है। NDTV जैसी निष्पक्ष मीडिया गिरोह को तो कल शाम को ये भी कहते देखा गया कि क्या भाजपा प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती को अपना समर्थन देगी क्योंकि वो PM बनना चाहती हैं। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि मायावती को गेस्ट हाउस प्रकरण के बाद भी समाजवादी पार्टी के साथ मंच पर बैठना पड़ा और उन्हें प्रधानमंत्री भी नहीं बनाया जा रहा है।
उन्नत भारत की दुखद तस्वीर
5 – ममता बनर्जी
सबसे पहले तो ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री ना बन पाने की हार्दिक ‘जय श्री राम’। जिस तरह से TMC के गुंडों ने चुनाव के पहले से लेकर चुनाव के दौरान भी गुंडागिर्दी के द्वारा मतदाताओं से लेकर भाजपा तक को आतंकित कर के रखा, उससे ममता बनर्जी के सपनों के लोकतंत्र की झलक अवश्य मिलती है। पश्चिम बंगाल में TMC के गुंडों द्वारा RSS कार्यकर्ताओं की हत्या से लेकर हिन्दुओं पर किए जा रहे अत्याचार के सामने नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार जनता का विश्वास जीतते रहना लोकतंत्र की सबसे बड़ी हत्या ही है। खैर, जो भी है, जय श्री राम।
तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी
6 – के चंद्रशेखर राव यानी, केसीआर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘तुच्छ’ बताने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) भी इस लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के अग्रणी उम्मीदवारों में से एक थे। भले ही देश में ग़ैर-भाजपा और ग़ैर-कॉन्ग्रेसी फ्रंट बनाने का सपना देखने वाले केसीआर शायद अकेले नेता होंगे। इसके लिए उन्होंने वर्तमान समय में भारत के एकमात्र वामपंथी मुख्यमंत्री पी. विजयन तक से बातचीत का रास्ता अपनाया। लेकिन, रुझान बता रहा है कि जनता का मूड इस समय सिर्फ ‘राइट‘ ही है।
केसीआर कह रहे हैं कि गई भैंस पानी में
7 – चंद्रबाबू नायडू
आंध्र प्रदेश के CM (फिलहाल) चंद्र बाबू नायडू इनकम टैक्स की रेड के बाद ‘सेव इंडिया, सेव डेमोक्रेसी, की राह पकड़ने के बाद ‘गंभीर परिणामों’ की भी चेतावनी देते हुए देखे गए। एक समय पर ऐसा लग रहा था कि अगर मोदी विरोधी दल सत्ता में आता है, तो चंद्रबाबू नायडू प्रमुख भूमिका में नजर आएँगे, लेकिन उनकी पार्टी लोकसभा और विधानसभा दोनों ही में बुरी तरह से पिटी है। ईवीएम के मुद्दे पर विपक्ष की आवाज बुलंद करने वाले आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू राज्य के विधानसभा चुनावों में भी बुरी तरह पिछड़ने के बाद मुख्यमंत्री पद भी गँवा बैठे। 175 सीटों में से 152 सीटों पर वाईएसआरसीपी (YSRCP) के साथ, जगन मोहन रेड्डी राज्य अगले सीएम बनने के लिए तैयार हैं।
चुनावी रुझान जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं देश के कुछ घरों और कार्यालयों में ‘पाकिस्तान’ जैसा माहौल होता जा रहा है। अभी तक जनता के बीच ‘हेट पॉलिटिक्स’ का बाजा बजाकर भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने की गुहार लगाने वाले अब अपने घर के केबल, डीटीएच की तारों को बेदर्दी से उखाड़ रहे हैं। उन्हें यकीन नहीं हो पा रहा है कि ‘सेकुलर’ नागरिक के घर में लगी एलईडी इतने कट्टर रुझान कैसे दिखा सकती है।
एनडीटीवी जैसे न्यूज चैनल्स के लिए अपने विशेष दर्शकों को समझा पाना बहुत मुश्किल हो रहा है कि अभी तक परिणाम नहीं आए हैं, इसलिए वो आखिरी समय तक उम्मीद न खोएँ और प्रियंका गाँधी की बात मानकर मतगणना केंद्र के बाहर शाम तक अड़े रहें। माहौल किसी भी हालात में शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। स्थितियाँ बिगड़ती जा रही है, इसे कुछ लोग ‘तथाकथित सेकुलरों’ पर खतरे की तरह देख रहे हैं।
हालाँकि, देश में ऐसी गंभीर स्थिति 2014 में भी आई थी, उस समय उदार होकर लोगों ने अपनी विचारधारा की गाइडलाइन अनुरूप संयम बरत लिया था और 2019 में जनता खुलकर लोगों को बरगलाने की जमीनी कोशिशों में जुट गए थे। लेकिन, अब अपने इरादों में खुद को ‘नाकाम’ होता देख, ये लोग अपना आपा खो चुके हैं और पाकिस्तान से प्रेम-भाव की बात करते-करते उन्हीं के दिखाए ‘हिंसक’ मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं।
गुप्त सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों को पहले अंदाजा था कि उनका कोई भी ‘न्याय’ ‘पूर्ण राज्यों’ को भाजपा की ‘कट्टरता’ से मुक्त नहीं करवा सकता है। उन्होंने पहले ही अपने घरों में स्पेशली ‘अमेजन’ से हथौड़े और खुरपे मँगवा लिए थे, ताकि परिणाम वाले दिन टीवी से लेकर उस हर उपकरण को तोड़ सकें जिसमें देश भगवा होता दिखेगा, लेकिन प्रियंका के ऑडियो जारी होने के बाद उस पैकेट को खोला नहीं गया था। ऐसे में अब जब स्थिति हाथ से बाहर होती जा रही है, महागठबंधन की गाँठ केवल ‘बुआ-बबुआ’ तक सीमित नजर आ रही है, तो ’10 डे रिप्लेसमेंट गारंटी’ जैसा कोई विकल्प नहीं शेष है। अमेजन के पैकेट फट चुके हैं, गोरिल्ला ग्लास वाली एलईडी टीवी और मोबाइल पर लोग मिलकर हथौड़े चला रहे हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर की तरह हमारे देश में भी कुछ लोग अपनी टीवी लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। पुरानी एलईडी का कचूमर उनके गुस्से को शाँत नहीं कर रहा है और वो शोरूम से नई एलईडी खरीद-खरीद कर उस पर ताबड़तोड़ बेरहमों की तरह वार कर रहे हैं। ईवीएम से पूरी तरह ये लोग विश्वास खो चुके है और दोबारा नेहरू-इंदिरा युग में जाने की बातें अपनी चरम पर है।
हमेशा से शांति अमन चाहने वाले विशेष गिरोह के लोगों द्वारा देश में टेलीविजनों पर इतने ‘निर्मम’ वार होंगे, ऐसा कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। लेकिन भाजपा के कारण ऐसा हो रहा है। परिणाम आने से पहले ही देश में हिंसा का माहौल देखने को मिल रहा है। इसलिए ये बेहद गंभीर मामला है इसे दरकिनार नहीं किया जा सकता। मुमकिन है अपने दर्शकों और पाठकों को ‘न्याय’ देने के लिए लिबरल गिरोह इसपर प्राइम टाइम और स्पेशल रिपोर्ट करें। और पूरी संभावना है कि इन हिंसक घटनाओं को भावी विपक्ष भी अपना अगला मुद्दा बनाए। बता दें जगह-जगह से टूटी-फूटी टेलीवीजनों का डाटा कलेक्ट होना शुरू हो चुका है।
सभी फोटो तीखी मिर्ची सेल से सत्यापित, सॉल्ट न्यूज कभी नहीं कर पाएगाइनका सत्यापन
लोकसभा निर्वाचन 2019 के रुझान और नतीजे सामने आ रहे हैं जिनमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता हुआ दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा को अप्रत्याशित रूप से 16-17 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं।
इसी बीच खबर आई है कि रुझानों पर अपनी राय रखते हुए तृणमूल के चंदन मित्रा ने बयान दिया है कि भाजपा की स्थिति बंगाल में इतनी मजबूत होती जा रही है कि भविष्य में उसकी सरकार बन सकती है। चंदन मित्रा ने भाजपा को ‘गवर्नमेंट-इन-वेटिंग’ कहा है।
बंगाल में ताजा रुझान मिलने तक 42 में से जहाँ 23 सीटों पर तृणमूल आगे है, वहीं 17 पर भाजपा के प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। अभी यह कहना कठिन है कि कौन किस सीट पर जीतेगा लेकिन यदि 17 सीटों पर भाजपा की बढ़त जीत में तब्दील हो जाती है तो आने वाले दिनों में बंगाल में भाजपा राज की उम्मीद दिखाई देती है।
लोकसभा चुनाव की मतगणना चल रही है। इस रुझान में एनडीए 300 से अधिक सीटें जीतती दिख रही है तो वहीं, यूपीए 100 सीटों पर सिमटती दिख रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश के अमरोहा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सचिन चौधरी ने ऐलान करते हुए कहा कि अगर उनके संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर की जीत होती है, तो वो अपना बाल मुंडवाकर गंजे हो जाएँगे और अगले 5 साल तक बाल ही नहीं रखेंगे।
सचिन चौधरी ने आज (मई 22, 2019) कलेक्ट्रेट में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले तो एग्जिट पोल पर सवाल उठाए और भाजपा के पक्ष में अधिक से अधिक सीटों का एग्जिट पोल दिखाने वाले चैनलों को मोदी के हाथों बिका हुआ बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो एग्जिट पोल दिखाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। भाजपा 200 का आँकड़ा भी नहीं छू पाएगी। भाजपा इस वक्त बौखलाई हुई है, इसीलिए वो एग्जिट पोल को अपने पक्ष में दिखाने के लिए सेटिंग कर रही है, ताकि छोटे-मोटे दल उनके साथ खड़े हो सकें।
पत्रकारों और एग्जिट पोल पर सवाल उठाने के साथ ही सचिन ने यह भी कहा कि जो भी चैनल वाले बीजेपी के पक्ष में एग्जिट पोल दिखा रहे हैं, उन्होंने मोदी से पैसे ले रखे हैं और वो लोग ये जानते हैं कि अब आगे उनका चैनल नहीं चलने वाला है, क्योंकि नतीजा सामने आने के बाद इन चैनलों को कोई नहीं देखेगा। इसके अलावा उन्होंने और भी कई भद्दे आरोप लगाए।
इस दौरान जब सचिन चौधरी से पूछा गया कि अगर यहाँ से बीजेपी जीत जाती है तो क्या वो चुनाव लड़ना छोड़ देंगे? सचिन ने इसका जवाब देते हुए जोश में आकर कहा कि चुनाव लड़ना तो नहीं छोडेंगे, लेकिन अगर अमरोहा सीट से भाजपा प्रत्याशी जीत जाता है तो वो अपने बाल मुंडवा लेंगे और 5 साल तक गंजे रहेंगे।
दिग्विजय सिंह हार रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति का सिरमौर रहा यह नेता आज हार रहा है, बुरी तरह हार रहा है। पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही एक साध्वी ने पुराने नेता को चित कर दिया। राजनीति के सारे दाँव-पेंच जानने वाले और गाँधी परिवार के वफ़ादार नेता का राजनीतिक सूर्यास्त हो चुका है। 1993 से 2003 तक अखंड मध्य प्रदेश (छत्तीसगढ़ के गठन से पहले उन्होंने दो चुनाव जीते) के मुख्यमंत्री रहे दिग्गी राजा का राजनीतिक करियर आज अपने अंतिम दौर में है। ये सब महज अनुमान नहीं है बल्कि सच्चाई है। इस सच्चाई को धरातल पर उतारने में उनके अपनों का ही हाथ है, परायों का नहीं। अगर ऐसा नहीं होता, तो क्या दिग्गी राजा को कोई सेफ सीट खोज कर नहीं लड़ाया जाता?
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिख नरसंहार के आरोपित रहे कमलनाथ ने अपने सामने सबसे बड़े काँटे को इस तरह से हटाया, जिससे साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटा। दरअसल दिग्विजय सिंह ने भले ही 2003 में राज्य में उमा भारती के हाथों करारी हार के बाद चुनाव लड़ना बंद कर दिया, लेकिन वह राजनीति में सक्रिय थे। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी में उनका दखल उतना ही था, जितना पहले हुआ करता था। कारण? इसका कारण है गाँधी परिवार का वफ़ादार होना। जैसे गुजरात कॉन्ग्रेस में अहमद पटेल का दखल है, वैसे ही मध्य प्रदेश में दिग्गी राजा का स्थान था। सवाल यह है कि इतने बड़े नेता को, जो 2 दशक बाद चुनावी राजनीति में लौटा हो, इतनी कठिन सीट क्यों दी गई?
राष्ट्रीय राजनीति में पाँव जमाने को आतुर दिग्विजय ने दिल्ली का रुख तो किया था लेकिन उनके पीठ पीछे कमलनाथ ने उनका सिंहासन हथिया लिया, उनके स्थान को भर दिया। इसके बाद राज्य में ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में एक और राजनीतिक घराने के प्रतिनिधि के उदय ने ज़रूर कमलनाथ को परेशान किया लेकिन गाँधी परिवार से वफ़ादारी के मामले में कमलनाथ के सामने वह कहीं नहीं ठहरते। कमलनाथ ने पहले भी कहा था कि दिग्विजय बहुत बड़े नेता हैं और उन्हें उसी सीट से चुनाव लड़ना चाहिए, जो सबसे कठिन सीट हो। चूँकि पहले भोपाल से भाजपा के शिवराज सिंह चौहान के लड़ने आसार थे, इसीलिए कमलनाथ को उम्मीद थी कि दिग्गी हारेंगे ही।
दिग्विजय सिंह को अपनों ने लूटा। उन्हें कमलनाथ ने बड़ी चालाकी से बेइज्जत होने के लिए भोपाल से लड़वा दिया। उन्हें सबसे बड़ा नेता और सबसे कठिन सीट वाली बातों से ऐसा बहला लिया गया, जिससे कथित हिन्दू आतंकवाद की बात करने वाले एक हिंदुत्ववादी नेत्री से ही हार गए। इस बात को समझने के लिए चलना पड़ेगा थोड़ा पीछे। चुनाव से पहले और उसके दौरान कैसे कमलनाथ ने अपने बेटे की जीत सुनिश्चित करने के लिए सारा जोर लगा दिया लेकिन दिग्विजय सिंह को एक ऐसे चक्रव्यूह में फँसा दिया, जिससे वो शायद ही कभी उबर पाएँ। अब कमलनाथ के सामने न सिंधिया हैं और न दिग्गी, उनके बेटे अगर चुनाव जीतते हैं तो उनका भविष्य भी ठीक है।
कमलनाथ चालाक हैं। उन्होंने बड़ी चालाकी से पार्टी के राष्ट्रीय आलाकमान पर दबाव डाल कर उन्हें प्रदेश से बाहर भेज दिया। सर्वविदित है, कमलनाथ और सिंधिया, दोनों ही एमपी में सीएम पद के दावेदार थे और राहुल गाँधी ने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से पहले दोनों के साथ फोटो डालकर यह जताने की कोशिश की थी कि पार्टी में सब ठीक है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि राज्य में सत्ता के 2 केंद्र न हो जाएँ, इसे देखते हुए सिंधिया को बाहर रखा जा रहा है। बीच में यह भी ख़बर आई थी कि कमलनाथ चाहते हैं कि दिग्विजय अगर चुनावी राजनीति में वापसी करते हैं तो वह राज्य की सबसे कठिन सीट चुनें और फलस्वरूप उन्हें भोपाल से लड़ाया गया जहाँ पिछले 8 चुनावों या यूँ कहें 30 सालों से भाजपा का कब्ज़ा है। साध्वी प्रज्ञा के आने से यहाँ मुक़ाबला और रोचक हो गया।
कमलनाथ चालाक हैं। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में हाल ही में साध्वी प्रज्ञा ने तंज कसा था कि वह सिर्फ़ छिंदवाड़ा के मुख्यमंत्री हो कर रह गए हैं। एक तरह से उनकी बात बहुत हद तक सही है क्योंकि छिंदवाड़ा से कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ चुनाव लड़ रहे हैं और आपको बता दें कि कमलनाथ ने चुनाव प्रचार ख़त्म होने के अंतिम 2 दिन छिंदवाड़ा में गुज़ारे ताकि अपने बेटे की जीत सुनिश्चित कर सकें। कमलनाथ ने बड़ी चालाकी से अपने बेटे के लिए तो ख़ूब मेहनत कि लेकिन दिग्विजय सिंह कि हार के लिए परदे के पीछे से ऐसा चक्रव्यूह रचा, जिससे वह मध्य प्रदेश के एकछत्र शासक बन जाएँ।
उत्तर प्रदेश में बड़ी हार के बाद सिंधिया का क़द कम होना तय है और दिग्विजय की हार के बाद वह अप्रासंगिक हो ही जाएँगे। ऐसे में, कमलनाथ की बल्ले-बल्ले है। नकुल नाथ अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं और पिता कमलनाथ का सारा ध्यान अपने बेटे की जीत सुनिश्चित करने पर है। छिंदवाड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 40 वर्षों से यहाँ कमलनाथ सांसद हैं। बीच में एक वर्ष के लिए भाजपा ने यहाँ जीत दर्ज की थी और एक वर्ष उनकी पत्नी अलका नाथ सांसद रही थीं। दरअसल, कमलनाथ चाहते नहीं थे कि राज्य में सत्ता के तीन केंद्र बनें और आलाकमान ने उनकी इस चाहत में उनका पूरा साथ दिया, या फिर उन्होंने अपनी बात मनवाई।
सेंसेक्स की तेज़ रफ़्तार पीएम मोदी के जीत का स्वागत करती नज़र आ रही है। शुरूआती रूझानों में बीजेपी को बहुमत मिलते देख सेंसेक्स 40,000 के लेवल को पार कर गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब सेंसेक्स ने 40,000 के लेवल को पार किया है, वहीं निफ़्टी पहली बार 12,000 के लेवल को पार कर चुका और बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप में 1 फ़ीसदी की बढ़त हुई है। सेंसेक्स में 600 अंकों से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है, इससे बाज़ार में ख़ुशी की लहर देखी जा रही है।
Sensex up by more than 600 points as early trends show a return to power of NDA Government pic.twitter.com/GpIQ7Agjir
कल (22 मई) सेंसेक्स 140 अंको की बढ़त के साथ 39,110 और निफ़्टी क़रीब 20 अंको की बढ़त के साथ 11,737 के स्तर पर बंद हुआ था।
बता दें कि बीते रविवार (19 मई) को एग्जिट पोल के नतीजे आए थे। इनमें मोदी सरकार की वापसी की उम्मीद जताई गई थी। इसके बाद सोमवार को सेंसेक्स 1421 की बढ़त के साथ 39,352 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 421 अंक मज़बूत होकर 11,828 के स्तर पर रहा। निफ्टी में यह एक दिन में अंकों के हिसाब से दूसरी सबसे बड़ी तेजी थी। वहीं, सेंसेक्स 10 साल के उच्चतम स्तर की बढ़त पर बंद हुआ था। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी सरकार की वापसी के संकेतों के बाद बाज़ार ने पिछले 10 वर्षों की लंबी छलांग लगाई।
2014 में चुनावी नतीजों वाले भी दिन भी हुआ था इज़ाफ़ा
वहीं, अगर साल 2014 के चुनावी नतीजों वाले दिन की बात करें बात करें तो शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,470 अंकों की जबरदस्त उछाल के साथ 25,375 के स्तर पर पहुँच गया था। हालाँकि, बाद में बिकवाली की वजह से मार्केट की चाल सुस्त पड़ गई और सेंसेक्स 23,873.16 के स्तर पर पहुँच गया था। दिन में कारोबार के अंत में निवेशकों की पूंजी में 1 लाख करोड़ का ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ था और यह 80.64 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया था।
2004 में, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी के दूसरे कार्यकाल की उम्मीद नज़र आ रही थी, उस दौरान भी बाज़ारों में बढ़त देखी गई थी, लेकिन परिणाम सामने आने के तुरंत बाद ही बाज़ार में गिरावट आ गई थी।
लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना जारी है। मतों की गिनती के साथ ही अब स्थिति लगभग साफ हो चुकी है। बीजेपी प्रचण्ड बहुमत से सत्ता बनाए रखने में सफल रही है। लोकसभा चुनाव के बाद हुए एग्जिट पोल्स में लगभग सभी ने भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर दिखाया था। और अब विपक्ष की तमाम दलीलों के बाद भी पिक्चर स्पष्ट है।
परिणाम से उत्साहित भाजपा नेताओं ने पार्टी की जीत सुनिश्चित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर भव्य स्वागत के लिए 20,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को स्वागत और जीत का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया है। इसके आलावा पार्टी मुख्यालय में भी भव्य जश्न की तैयारी की गई है।
इसके आलावा इस बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी के ममता के गढ़ में सेंध लगाने पर भी ज़बरदस्त उत्साह का माहौल है।
बता दें कि पार्टी ने सभी विजेता प्रत्याशियों को 25 मई तक दिल्ली में उपस्थित होने के लिए भी कहा है। लगभग सभी मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल्स में भाजपा नीत राजग गठबंधन को 542 लोकसभा सीटों में से 300 से अधिक सीटों पर जीत हासिल होने का अनुमान लगाया गया था। कुछ एग्जिट पोल में 350 से भी अधिक सीटों का अनुमान लगाया गया था। और बीजेपी इस लक्ष्य के करीब पहुँचती जा रही है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मीटिंग में कहा था कि भाजपा दूसरी बार सरकार बनाएगी, वह भी पूर्ण बहुमत के साथ। भाजपा को यह जीत उसके बीते पाँच सालों के विकास कार्यों के बदौलत हासिल हुई है।
आज जब जीत का आँकड़ा धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। बीजेपी की धमाकेदार इंट्री हो रही है। लेकिन सबसे मजेदार दौर देखने को मिला जब EVM राग छेड़कर महागठबंधन से लेकर लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने हार के प्रति वो कितने आश्वस्त हैं, इसका परिचय दिया।
लोकसभा चुनाव के लिए डाले गए वोटों की गिनती जारी है। इस दौरान किसी तरह का कोई उपद्रव न हो, इसके लिए पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस मुख्यालय ने बिहार के सभी जिलों के एसपी को अलर्ट भेजा है। इसके साथ ही बुधवार (मई 22, 2019) को एडीजी कुंदन कृष्णन ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के हिंसा भड़काने वाले विवादास्पद बयान की जाँच हो रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस कुशवाहा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी और अगर इस बयान से किसी तरह की हिंसा हुई, तो इसके जिम्मेदार उपेंद्र कुशवाहा होंगे।
ADG(HQ)K Krishnan on RLSP’s Upendra Kushwaha&independent candidate Ramchandra Yadav: EC has taken cognizance of both matters. MCC still in place. As far as U Kushwaha is concerned, in case of any incident onus will be on him only if he would’ve directly instigated someone. #Biharpic.twitter.com/uvzWJV6TMe
गौरतलब है कि एग्जिट पोल सामने आने के बाद महागठबंधन में बौखलाहट चरम पर दिखा। रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार (मई 21, 2019) को पटना में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बयान देते हुए कहा था कि बूथ लूट के बाद रिजल्ट लूट की तैयारी है। अगर ऐसा हुआ, तो सड़कों पर खून बह सकता है। उन्होंने आम जनता व अपने नेताओं से अपील करते हुए कहा कि रिजल्ट लूट को रोकने के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठा लें। उनके इस बयान पर एक तरफ जहाँ राजनीतिक महकमे में बवाल मचा हुआ है, तो वहीं अब पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया है।
जानकारी के मुताबिक, कुशवाहा के इस विवादित बयान के समर्थन में उतरे भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने हथियार लहराते हुए यहाँ तक कह दिया था कि वो लोकतंत्र को बचाने के लिए गोली चलाने को तैयार हैं। उन्हें बस महागठबंधन के नेता के आदेश का इंतजार है। पुलिस ने इस मामले पर भी संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है और रामचंद्र के कैमूर स्थित आवास पर छापा मारा। इस दौरान रामचंद्र द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लहराए गए हथियार को बरामद कर लिया गया, लेकिन वो घर पर नहीं मिले।
इस मामले में एडीजी कृष्णन ने कहा कि उनके पास बंदूक का लाइसेंस है या नहीं, इसके जाँच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उसका हथियार अवैध पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा और हथियार जब्त करने के साथ ही लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
रुझान आने के साथ ही चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ़ होती जा रही हैं। खबरों के मुताबिक देश में एक बार फिर से मोदी सरकार आने वाली है। इसके अलावा भाजपा भी लंबे समय से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। यही कारण है कि नतीजे आने से पहले ही भाजपा ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए कुछ खास तैयारियाँ की हैं।
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक पार्टी के सह प्रभारी नीलकांत बख्शी ने बताया कि पंत मार्ग स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय के अंदर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगवाई गई है। जीत को सेलीब्रेट करने के लिए बंगाली मार्केट की मशहूर बंगाली पेस्ट्री शॉप से खास केक और लड्डू बनवाए जा रहे है। 7 किलो का बड़ा केक बनने का ऑर्डर दिया गया है।
खबर के मुताबिक परिणाम घोषित होने के बाद मनोज तिवारी इस 7 किलो के केक को लेकर पार्टी के मुख्यालय पहुँचेंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस केक को काटेंगे। इसके अलावा इसी तरह के 4-5 किलो के 9 केक और बनवाए जा रहे हैं। इन्हें भी प्रदेश के कार्यालय में काटा जाएगा।
पार्टी प्रवक्ता प्रवीण कुमार के अनुसार चांदनी चौक की मशहूर स्वीट शॉप से विशेष प्रकार की 50 किलो कमल बर्फी बनाने का ऑर्डर भी दिया गया है। इस बर्फी की खासियत होगी कि इसका आकार पार्टी के चुनाव चिह्न कमल फूल की तरह होगा। इसका रंग केसरिया और हरा रंग होगा। इस मिठाई को चांदनी चौक के व्यापारियों के बीच बाँटा जाएगा।