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बनारस के लोगों ने राजदीप का मुँह किया बंद, कहा, ‘कॉन्ग्रेस का कोई एक काम बता दो’

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का चुनाव प्रचार जारी है। इस चरण में प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी वाली वाराणसी पर भी 19 मई को चुनाव होना है। ऐसे में कई पत्रकार बनारस में डेरा डाले हुए हैं। इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई वाराणसी में प्रियंका गाँधी का रोड शो कवर करने गए थे, ऐसे में उन्होंने जब बनारस की नब्ज़ टटोली तो माहौल ‘मोदीमय’ दिखा। हालाँकि, उन्होंने अपने तरीके से कई जगह ट्विस्ट देने की कोशिश की, पर घूम-फिरकर माहौल ‘आएगा तो मोदी ही’ टाइप रहा।

वाराणसी से ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान, राजदीप दशाश्वमेध घाट, काशी की राजनीतिक धुरी अस्सी पर पप्पू चाय के पॉपुलर अड्डे से लेकर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के विश्वनाथ मंदिर पहुँचते हैं। बनारस के लोगों को कई बार अपनी तरफ से याद दिलाने की कोशिश करते हैं कि कभी बनारस कॉन्ग्रेस का गढ़ हुआ करता था। क्या आप चाहते हैं कि प्रियंका यहाँ से चुनाव लड़े जबकि उन्हें ठीक से पता है न वह लड़ेंगी और न ही अब संभव है। यहाँ तक कि यह भी पूछ लिया कि क्या आप उसे वोट देना चाहेंगे जो पार्टी और नेता रोजगार देने के ‘वादे’ कर रही है। लगभग एक ही सवाल बार-बार दोहराया गया कि आखिर मोदी ने ऐसा क्या कर दिया बनारस में? कितना बदला है बनारस? अपनी मस्ती और हाज़िरजवाबी के लिए जाना जाने वाले बनारस ने भी जम कर उनकी फिरकी ली और अपना मन भी उड़ेल कर रख दिया जो उनके लिए और कॉन्ग्रेस के लिए अच्छी ख़बर नहीं है, पर जो है सो है।

सबसे मजेदार वाकया अस्सी पर पप्पू की चाय के दुकान का है। शायद राजदीप ने वहाँ इंट्री यह सोचकर की थी कि यहाँ उन्हें मोदी विरोध की लहर दिखाई दे जाए, पर मामला उल्टा हो गया। राजदीप ने जैसे ही पूछा कि आखिर पिछले पाँच सालों में बनारस में ऐसा क्या हुआ? क्या मोदी राज में बनारस में कोई डेवलपमेंट हुआ? लोगों ने BHU से लेकर बुद्ध की प्रथम प्रवचन स्थली सारनाथ तक शानदार रोड के साथ, हेरिटेज लाइट, तारों के जंजाल से मुक्ति, रामनगर-सामने घाट पुल से लेकर, महात्मा गाँधी और मालवीय जी ने कभी कहा था कि जहाँ स्वयं काशी विश्वनाथ विराजमान है उस गली में भी इतना कूड़ा-करकट की याद दिलाते हुए विश्वनाथ हेरिटेज कॉरिडोर से लेकर बनारस की गली और घाटों तक की बढ़िया सफाई व्यवस्था की चर्चा कर डाली। राजदीप को बता दिया कि बनारस में अब महामना को समर्पित अपना विश्वस्तरीय कैंसर हॉस्पिटल भी मरीजों की सेवा के लिए तैयार है।

फिर भी राजदीप ने उनकी तरफ गूगली फेंकी कि जितना काम नहीं हो रहा है उससे ज़्यादा प्रचार हो रहा है। जैसे अभी जो कुछ गिनाया गया वह काम नहीं बल्कि कुछ और हो क्योंकि अभी तक कहीं भी किसी ने कॉन्ग्रेस का नाम तक नहीं लिया था। ‘कमलापति त्रिपाठी के समय कॉन्ग्रेस का गढ़ रहा है बनारस’ कि जैसे ही उन्होंने याद दिलाकर इन उपलब्धियों को कमतर साबित करने की कोशिश की तो किसी ने उन्हीं से पूछ लिया कि आप तो वरिष्ठ पत्रकार हैं आप ही बता दीजिए कोई एक काम जो बनारस में कॉन्ग्रेस ने किया हो? थोड़ी देर के लिए राजदीप गच्चा खा गए कि अब करे तो करें क्या! आगे इस पर डिटेल में बात होगी।

वैसे ऐसे पत्रकारों की समस्या और एकमात्र उपलब्धि यही रही है कि मोदी विरोध से ही ये तथाकथित बड़े पत्रकार बने हैं और ऊपर से ‘पक्षकार’ होने के बावजूद भी ‘निष्पक्षता’ का चोला ओढ़ लिया। खैर, अब इन्हें ठीक से पता है कि कॉन्ग्रेस सत्ता में वापस आ नहीं रही तो ये जाएँ तो जाएँ कहाँ? यहाँ मामला उल्टा पड़ता देख बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के छात्रों से बीजेपी विरोध का माहौल बनाना चाहा, शुरूआती स्तर पर बात बनती नज़र आई तो आँखों में चमक दिखी लेकिन जल्द ही सब अरमान बनारसी झोंके में बह गए, जब वहाँ के छात्रों ने न सिर्फ बनारस बल्कि सम्पूर्ण पूर्वांचल के विकास की तस्वीर साझा कर दी। वहाँ किसी को राहुल और प्रियंका से कोई उम्मीद नज़र नहीं आई। शुरूआती थोड़े से असंतोष के साथ मेजोरिटी में छात्र भी मोदी मय ही नज़र आए तो राजदीप ने वहाँ भी ट्विस्ट देना चाहा कि क्या देश में मोदी के नाम पर ध्रुवीकरण नहीं हो रहा है?

छात्रों ने उनके इस सवाल को मोदी-मोदी के नारों के साथ हवा में उड़ा दिया और ये साफ बता दिया कि वर्तमान में जहाँ एक तरफ परिवारवाद हावी है और राहुल के बाद उनका भांजा अगला पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए तैयार किया जा रहा है, वहाँ बीजेपी एक बढ़िया विकल्प है। परिवर्तन की बात करने वाले राहुल पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया या किसी अन्य को पार्टी अध्यक्ष बना के दिखाएँ, फिर देश की बात करें। राजदीप का मामला BHU में भी नहीं जमा। सारा एजेंडा धरा का धरा रह गया।

चलिए वापस लौटते हैं पप्पू की दुकान पर, बनारस में ग्राउंड रिपोर्टिंग करते वक़्त राजदीप ने जो अभी तक मोदी के खिलाफ न जाने कितने नेगेटिव कमेंट कर खुद को सुर्ख़ियों में रखा। बनारस में भी बार-बार कॉन्ग्रेस से तुलना कर मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करवाने की पुरजोर कोशिश की, पर बनारस ने बता दिया कि कैसे मोदी ने मात्र पाँच सालों में कॉन्ग्रेस के पचास सालों से ज़्यादा बनारस में विकास किया। चाहे वह मामला साफ-सफाई का हो, चौड़ी सड़कों का, अंडरग्राउंड पावर केबल का, गंगा की साफ-सफाई का हो, जाम से मुक्ति के लिए फ्लाईओवर के जाल का या बेहतर और ज़्यादा उन्नत हॉस्पिटल का…. लेकिन सरदेसाई ने इन सबको नकारते हुए उन्हें प्रोवोक किया ताकि कोई तो मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करे जिसे ये मोदी विरोधी लहर के रूप में काशी का मूड बताकर प्रोजेक्ट कर सकें।

देसाई ने आखिरी पैतरें के रूप में अभी तक कही हर बात को नकारते हुए फिर बड़ी धूर्तता के साथ पूछा यह सब तो ठीक है पर जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। प्रचार पर ध्यान ज़्यादा रहा मोदी जी का, जमीन पर कम। क्या आप चाहते हैं कि मोदी प्रचार कम और काम ज़्यादा करें? इस पर पप्पू की दुकान पर ही एक व्यक्ति ने बहुत झन्नाटेदार जवाब दिया कि आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे सचिन ने अपने जीवन में 100 सेंचुरी ही मारा तो आगे क्या? छोड़िए, राजदीप जी आप बड़े पत्रकार हैं पहले भी कई बार बनारस आ चुके हैं। मैं तो बनारस में मोदी जी का 50 काम गिना दूँगा। आप बताइए कि कॉन्ग्रेस ने क्या किया है बनारस के लिए कोई एक उपलब्धि बता दीजिए।

सरदेसाई पर इस तरह से सीधा अटैक करने के बाद, कॉन्ग्रेस के लिए तमाम तरह से जीवन भर पैडलिंग करने के बावजूद, राजदीप के पास ऐसा एक भी काम नहीं था कॉन्ग्रेस का जिसे वो बनारस की जनता को गिना सकें। वहाँ बैठे बनारसियों ने उन्हें पानी पीला दिया और दुकान पर बैठे लोगों ने इस सन्नाटे को चीरने के लिए माहौल मोदी मय कर दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि बनारस किसी के भड़कावे में नहीं आने वाला, वह विकास के साथ है, मोदी के साथ है। इस जवाब के साथ मामला बनता न देख सरदेसाई का काफिला कहीं और निकल लिया मोदी विरोध की संजीवनी तलाश करने।

BJP नेता ने गाँधी को कहा ‘पाकिस्तान का राष्ट्रपिता’, पार्टी ने किया सस्पेंड

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बताने पर भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के प्रवक्ता और मीडिया सेल के प्रमुख अनिल सौमित्र को सभी पदों से सस्पेंड कर दिया है और साथ ही उन्हें सात दिनों के अंदर जवाब देने के लिए भी कहा है। दरअसल, सौमित्र ने अपने फेसबुक पोस्ट में विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, “महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता थे, लेकिन पाकिस्तान राष्ट्र के। भारत राष्ट्र में तो उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए। कुछ लायक तो कुछ नालायक।”

इसके साथ ही अनिल सौमित्र अपने पोस्ट में लिखते हैं कि कॉन्ग्रेस ने महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता बताया। राष्ट्र का कोई पिता नहीं होता, पुत्र होता है। चर्च में फादर होते हैं, कॉन्ग्रेस ने उसका हिंदी रुपांतरण कर पिता कर दिया। सौमित्र ने आगे लिखा कि हम गाँधी जी के विचारों को बढ़ाने वाले लोग हैं। संघ के स्वयंसेवक के रुप में हम प्रतिदिन उनका नाम लेते हैं।

बता दें कि, इससे पहले भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था। इस बयान से उपजे विवाद पर अमित शाह ने कहा कि इस तरह के बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ये भी कहा कि हालाँकि इन तीनों नेताओं ने बयान वापस लेते हुए माफी माँग ली है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीनों नेताओं को नोटिस भेजकर 10 दिनों के अंदर जवाब माँगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़े शब्दों में प्रज्ञा के बयान की निंदा की है। पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही प्रज्ञा ने माफी माँग ली है, लेकिन वो कभी उन्हें दिल से माफ नहीं कर पाएँगे।

BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पत्रकारिता के ‘नाराज फूफा’ गायब

आम चुनाव के नतीजों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मीडिया के सामने आए हैं। शुक्रवार (17 मई, 2019) को नई दिल्ली स्थित (भारतीय जनता पार्टी) मुख्यायल में पार्टी चीफ अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में अमित शाह ने कहा कि संगठन के आकार पर हमने मोदी जी के कामों को नीचे तक पहुँचाने का लगातार प्रयास किया। 2006 में हमारे पास छह सरकारें थीं, पर आज 19 सरकारें हैं। शाह ने यह भी बताया कि मोदी सरकार पाँच साल में लगभग 133 योजनाएँ लेकर आई।

नाराज फूफा कहीं नजर नहीं आ रहे

देखने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की प्रबल इच्छा रखकर महागठबंधन की रैली से लेकर चार्टर प्लेन में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ घूमने वाले NDTV के वरिष्ठ पत्रकार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। विगत 4-5 सालों में देखने को मिला है कि अक्सर यह पत्रकार, शादी-बरात में नाराज फूफा की तरह ही मीडिया और प्राइम टाइम में नजर आते रहे हैं।

यह भी संभव है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय वो किसी ट्रांसलेटर से अपने किसी फेसबुक पोस्ट का अनुवाद करवाने में व्यस्त हों या फिर किसी आम वाले के पास बैठकर आम की विभिन्न किस्मों पर चर्चा कर रहे हों। आखिरी बार पत्रकारिता का यह नाराज फूफा बेगूसराय में कम्युनिस्ट कामरेड कन्हैया कुमार से एक कठिन सवाल पूछते देखे गए थे। यह कठिन सवाल था, “आप शादी कब करेंगे?”

खुद को ज़रूरत से ज़्यादा गंभीरता से लेने वाले गिरोह विशेष के पत्रकार को ऐसा तो नहीं लगा कि BJP कार्यालय में जाना उनके आदर्शों के खिलाफ है और अब यह कसम खा रखी हो कि जब तक मोदी रेंगते हुए उनके निजी आवास पर नहीं आएँगे वो कठिन सवाल पूछेंगे ही नहीं।

ग्रीन कार्ड और वीजा नीति में बड़ा बदलाव: ट्रंप के इस प्रस्ताव से पहुँचेगा कुशल कर्मियों को फायदा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने योग्यता पर आधारित आव्रजन प्रणाली पेश की है। ट्रंप की इस पेशकश से ग्रीन कार्ड और स्थायी वैध निवास का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय समेत विदेशी पेशेवरों एवं कुशल श्रमिकों को लाभ पहुँचेगा।

इस पेशकश के अनुसार परिवार के बजाए योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि इस प्रस्ताव को कानूनी मंजूरी मिल जाती है तो योग्य लोगों के लिए अमेरिका का वीजा प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ट्रंप के प्रस्ताव के मुताबिक शिक्षित, किसी भी कौशल (स्किल) के साथ अंग्रेजी बोलने में माहिर, जॉब ऑफर और अमेरिकी संस्कृति अपनाने वालों को तरजीह दी जाएगी।

ट्रंप ने कहा है कि अभी अमेरिकी आव्रजन कानून प्रतिभाशाली लोगों के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अधिकतर ग्रीन कार्ड कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलता है जो कम पैसे लेते हैं।

बता दें अमेरिका हर वर्ष 10 लाख से ज्यादा ग्रीन कार्ड जारी करता है जो विदेशियों को कानूनी रूप से स्थाई निवास का अधिकार है। इसमें 1, 40,000 ग्रीन कार्ड रोजगार पर दिए जाते हैं, बाकी पारिवारिक रिश्ते, शरणार्थी और लॉटरी के आधार पर दिए जाते हैं।

ट्रंप के नए प्रस्ताव से पिछले आँकड़े पूरी तरह पलट जाएँगे। इस प्रस्ताव में कुशल कर्मियों के लिए आरक्षण को करीब 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 57 प्रतिशत करने की बात की गई है। ट्रंप का कहना है कि उनका ये कदम अमेरिका को दूसरे देशों के साथ खड़ा करेगा और वैश्विक रूप से प्रतिद्वंदी बनाएगा।

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मैं वीरभद्र जी से गले मिलता हूँ क्योंकि उन्हें एक्सपीरियंस है: राहुल गाँधी

लोकसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोटबंदी से लेकर तमाम मुद्दों पर घेरा। 2019 लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के तहत 19 मई को मतदान होना है। जिसके चलते नेताओं के बयानों का सिलसिला भी आखिरी चरण पर और तेज होता जा रहा है।

राहुल ने पीएम मोदी पर नोटबंदी के फैसले में किसी को साथ न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था। राहुल गाँधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनको समझ ही नहीं है, वायुसेना के लोगों को वह अपना ज्ञान दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि यदि केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार आती है, तो अभी 22 लाख सरकारी नौकरियाँ खाली हैं, वह लोगों के हवाले हो जाएँगी।

‘मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया’

राहुल ने पीएम मोदी के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू पर तंज कसते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी का टीवी पर इंटरव्यू होता है, उन्हें सवाल दिए जाते हैं, पढ़कर जवाब देते हैं। लोग कहते हैं कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है लेकिन नरेंद्र मोदी कहते हैं कि मैं आम के पेड़ पर चढ़कर खाता हूँ। मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया। कौन सी दुनिया में हैं पीएम मोदी?”

‘चीन का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो’

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि हिमाचल में चीन से सेब लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “क्या हिंदुस्तान का सेब मेड इन इंडिया नहीं है, मेड इन चाइना है क्या, जो सेब उगाते हैं उनका नरेंद्र मोदी ने कितना कर्जा माफ किया? वह तो कहते हैं कि चाइना का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो।”

‘मोदी जी ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था, मुझे SPG ने बताया’

राहुल गाँधी ने कहा, “आरबीआई ने देश की अर्थव्यवस्था को रास्ता दिखाया, 70 साल से देश को चला रहा है। उनसे नहीं पूछा लेकिन पीएम मोदी ने नोटबंदी कर दी। पता नहीं आपको मालूम है या नहीं, नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट को नोटबंदी के समय रेसकोर्स रोड में ताले में बंद कर दिया था। सच्चाई है, एसपीजी वाले मेरी भी सिक्योरिटी करते हैं, इन्होंने मुझे बताया।”

‘वीरभद्र जी को एक्सपीरियंस है’

अनुभव के विषय पर राहुल गाँधी ने कहा कि सुषमा स्वराज जी, अरुण जेटली जी से वो लड़ते हैं क्योंकि उन्हें अनुभव है। इसके बाद उन्होंने मंच पर बैठे हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि वो वीरभद्र सिंह के भी गले मिलते हैं, चाहे तो आप उनसे पूछ सकते हैं। ऐसा करने के पीछे उन्होंने कारण बताते हुए कहा, “क्योंकि वीरभद्र जी को अनुभव (Experience) है, इसलिए मैं उनसे गले मिलता हूँ।”

गाँधी या गोडसे पर बयान देने वालों को मैं मन से माफ़ नहीं कर पाऊँगा: PM मोदी

महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान के बाद भोपाल सीट से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर विवादों में घिरती जा रही हैं। उनके इस बयान पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से नाराज़ नज़र आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साध्वी के इस बयान पर कड़ी निंदा व्यक्त की। उन्होंने सख़्त लहज़े का इस्तेमाल करते हुए कहा, “गाँधी जी या गोडसे के बारे में जो बयान दिए गए वो बहुत वह ख़राब हैं।” इसके आगे उन्होंने कहा, “ये अलग बात है कि उन्होंने माफ़ी माँग ली, लेकिन मैं उन्हें मन से कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

बता दें कि पीएम मोदी ने भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्मीदवारी को अपना समर्थन दिया था। लेकिन साध्वी के बयान के चलते बीजेपी को बैकफुट पर आना पड़ा। वहीं, विपक्ष ने इस मामले पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब भोपाल सीट पर चुनाव हो जाने के बाद दु:ख व्यक्त करने से क्या लाभ, इसके लिए उन्हें पहले सोचना चाहिए था।

इससे पहले, रविवार (मई 19, 2019) को होने वाले आखिरी चरण के मतदान से पहले भाजपा नेताओं की तरफ से गोडसे पर दिए गए बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया है और साथ ही नोटिस भी भेजा है। इन नेताओं में भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील का नाम शामिल है। इन तीनों नेताओं ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से ये जानकारी दी है कि नेताओं के बयानों को अनुशासन समिति के पास भेजा गया और उन्हें दस दिन दिनों के भीतर जवाब देना है। इस मामले में उन्होंने शुक्रवार (मई 17, 2019) को तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि विगत 2 दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आए हैं, वो उनके निजी बयान हैं, उन बयानों से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है।

अमित शाह ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी माँगी है। फिर भी सार्वजनिक जीवन तथा भारतीय जनता पार्टी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है।

अपने तीसरे ट्वीट में शाह ने लिखा है कि अनुशासन समिति तीनों नेताओं से जवाब माँगकर उसकी एक रिपोर्ट 10 दिन के अंदर पार्टी को दे, इस तरह की सूचना दी गई है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने विवादित बयान देते हुए महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वो देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। हालाँकि प्रज्ञा ने अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी माँग ली है। वहीं, अनंत हेगड़ ने भी अपने ट्वीट के लिए माफी माँगते हुए कहा कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने कहा कि गाँधी के हत्यारे के लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती।

बता दें कि, इससे पहले हेगड़े के ट्विटर अकाउंट से ट्वीट हुआ था कि गोडसे के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है और माफी माँगने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही नलिन कतील ने भी अपने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तुलना गोडसे से करते हुए ट्वीट किया था, “गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा लेकिन राजीव गाँधी ने 17000 को मारा। अब आप खुद तय कर लो कि कौन ज्यादा क्रूर है।” नेताओं के माफी माँगने के बाद भी पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। गौरतलब है कि कमल के हासन के द्वारा गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताने के बाद से ही इस पर सियासी बवाल मचा हुआ है।

मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपितों को कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य, NIA कोर्ट ने दिया आदेश

मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपियों के ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई है। दरअसल, कोर्ट की यह नाराज़गी आरोपितों के कोर्ट में उपस्थित न होने के लिए थी। पिछले काफ़ी समय से आरोपित कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहे हैं इसलिए कोर्ट ने सभी आरोपितों को सुनवाई के दौरान सप्ताह में एक बार कोर्ट रूम में हाज़िरी लगाने का निर्देश दिया है। इनमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के अलावा अन्य मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के नाम शामिल हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 20 मई को होगी।

ख़बर के अनुसार, पिछले साल सितंबर में कर्नल पुरोहित पर आरोप तय करने पर स्टे की माँग ख़ारिज कर दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की बेंच ने मालेगाँव ब्लास्ट मामले की SIT से जाँच कराने की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि वो अपनी इस याचिका को ट्रायल कोर्ट में ही दाखिल करें।

जानकारी के अनुसार, इससे पहले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा चुनाव लड़ने के ख़िलाफ़ भी एनआईए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया था। इस याचिका पर कोर्ट ने फ़ैसला लिया था कि वर्तमान में किसी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की ताक़त हमारे पास नहीं है। किसे चुनाव लड़ना है और किसे नहीं, इस बात का निर्णय निर्वाचन आयोग करेगा। ऐसी सूरत में मालेगाँव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती, इसलिए कोर्ट इस याचिका को ख़ारिज करती है।

बता दें कि 29 सितंबर 2008 में मालेगाँव की एक मस्जिद में एक मोटरसाइकल में धमाका हुआ था। इस दौरान क़रीब 6 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

अमेरीका ने 52 पाकिस्तानियों को देश से निकाल फेंका, 3 अफसरों का वीसा भी कैंसिल

अमेरिका में ट्रंप सरकार ने उन लोगों के ख़िलाफ़ मुहिम शुरू की है जो लोग वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद अमेरिका में रह रहे हैं। इसके तहत 52 पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा गया है जो निर्धारित अवधि से ज्यादा समय से वहाँ रह रहे थे। अमेरिका ने 52 पाकिस्तानी प्रवासियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस्लामाबाद पहुँचा दिया है। मीडिया खबरों के अनुसार 53 पाकिस्तानी नागरिकों को देश वापस आना था, लेकिन बुधवार (मई 15, 2019) को सिर्फ़ 52 नागरिक ही देश पहुँचे क्योंकि एक शख्स एयरपोर्ट पर ही बीमार हो गया था।

पाकिस्तानी नागरिक जब इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे तब उनकी सुरक्षा में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी तैनात थे। विमान से उतरते ही नागरिकों को पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया। इससे पहले मंगलवार (मई 14, 2019) को पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की विदेश मामले संबंधी स्थाई समिति को सूचित किया था कि अमेरिकी अधिकारियों ने आव्रजन कानूनों के उल्लंघन, आपराधिक आचरण और अन्य गंभीर आरोपों के आधार पर पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत लेकर मुकदमा चलाया है।

पाक विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानियों को उनके देश भेजने को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद हुआ। इसके कारण अमेरिका ने तीन वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों को वीसा देने से मना कर दिया है। इनमें एक अतिरिक्त सचिव, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव और पासपोर्ट महानिदेशक भी शामिल हैं।

’23 मई को कॉन्ग्रेस की शोक सभा’, सोनिया गाँधी को ‘272’ जुगाड़ता देख बॉलीवुड प्रोड्यूसर ने किया कटाक्ष

पूरे देश में इस समय लोकसभा चुनाव जारी हैं। अब तक 6 चरणों में मतदान हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के विपक्ष में खड़ी पार्टियों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। अभी सातवें चरण के मतदान 19 मई को होने बाकी हैं, लेकिन बीजेपी के विरोध में उतरी पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने ‘मिशन 272’ के लिए गठबंधन की दिशा में काम करना शुरू भी कर दिया है।

23 मई को चुनाव के नतीजे आ जाएँगे। इस बीच एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर फिल्म के को-प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने सोनिया गाँधी को लेकर ट्विटर पर तंज कसा है।

बॉलीवुड प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट को रीट्वीट करते हुए कटाक्ष किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी ने लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी 272 के आँकड़े के लिए काम करना शुरू कर दिया है। अशोक पंडित ने इसे लेकर ट्वीट किया है, “23 मई को महाठगबंधन की शोक सभा का आयोजन किया जाएगा।”

यही नहीं, एक अन्य ट्वीट में अशोक पंडित ने सोनिया गाँधी की जोड़तोड़ की इस कवायद को ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने‘ भी बताया है।


मोदी PM पद के लिए अनफिट हैं, मैं बनूँगी प्रधानमंत्री: बसपा सुप्रीमो मायावती

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण और नतीजों की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे देश के अगले प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए दावेदारी भी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की है। मायावती ने एक बयान देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री पद का सपना देख रही मायावती ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अनफिट बताया।

मायावती ने एक बयान देते हुए कहा था कि जहाँ तक विकास की बात है, बहुजन समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश का चेहरा बदल दिया है और लखनऊ का भी सुंदरीकरण हुआ है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि लोगों के कल्याण और देश की विकास को देखते हुए बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रधानमंत्री बनने के लिए फिट है, जबकि नरेंद्र मोदी अनफिट हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी उपलब्धियों का बखान किया और कहा कि 4 बार मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी छवि काफी साफ-सुथरी रही है। मायावती का कहना है कि उन्होंने कानून व्यवस्था बनाते हुए लोगों के हित के लिए काम किया है।

बता दें कि, मायावती के प्रधानमंत्री पद के दावेदार रुप में एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समर्थन किया था, तो वहीं प्रधानमंत्री बनने की प्रबल इच्छा रखने वाली मायावती को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पद के लिए अयोग्य बताया। वैसे, मायावती ने पीएम बनने वाली इच्छा का संकेत उसी समय दे दिया था, जब वो गठबंधन प्रत्याशी रितेश पांडेय के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने के लिए अंबेडकरनगर पहुँची थी। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलता है, तो वो उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

वहीं, पिछले दिनों तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) अध्यक्ष केसीआर राव ने विपक्ष से कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो वो ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं, मगर साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रख दी है। केसीआर राव ने विपक्ष के सामने यह शर्त रखी है कि अगर वो उन्हें सरकार में उप-प्रधानमंत्री बनाएँगे, तभी वो उनका समर्थन करेंगे। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि वो 21 मई को विपक्ष की पार्टी मीटिंग में तभी शामिल होंगे, जब उन्हें इस बात का पूरा भरोसा दिलाया जाएगा कि गठबंधन सरकार में उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद दिया जाएगा।