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22 विपक्षी पार्टियों को चुनाव आयोग का झटका, VVPAT मिलान में नहीं होगा कोई बदलाव

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल के आँकड़ों से डरी-सहमी असंतुष्ट विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाए जाने को लेकर बुधवार को चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला दिया। चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों को उस माँग को खरिज कर दिया जिसमें वोटों की गिनती से पहले वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग की गई थी। चुनाव आयोग ने कहा कि वीवीपैट के मिलान की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। हर विधानसभा की 5 वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान होगा।

ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कॉन्ग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग से यह आग्रह किया था कि मतगणना से पहले चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान की माँग की थी।

बता दें कि विपक्षी नेताओं की बैठक में कॉन्ग्रेस से अहमद पटेल, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद और अभिषेक मनु सिंघवी, माकपा से सीताराम येचुरी, तृणमूल से डेरेक ओब्रायन, तेदेपा से चंद्रबाबू नायडू, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, सपा से रामगोपाल यादव, बसपा से सतीश चंद्र मिश्रा एवं दानिश अली, द्रमुक से कनिमोई, राजद से मनोज झा, राकांपा से प्रफुल्ल पटेल एवं माजिद मेमन और कई अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए थे। जिनकी माँग को चुनाव आयोग ने ख़ारिज कर दिया।

इससे पहले मंगलवार को चुनाव आयोग ने मतदान के बाद ईवीएम को मतगणना स्थलों तक पहुँचाने में गड़बड़ी और उनके दुरुपयोग को लेकर विभिन्न इलाकों से मिली शिकायतों को शुरुआती जाँच के आधार पर गलत बताते हुए कहा था कि मतदान में प्रयोग की गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनें ‘स्ट्रांग रूम’ में पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इस बीच चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित मुख्यालय में ईवीएम संबंधी शिकायतों के तत्काल निस्तारण के लिए एक कंट्रोल रूम ने भी मंगलवार से काम करना शुरु कर दिया।

आयोग द्वारा जारी बयान के मुताबिक, निर्वाचन सदन से संचालित कंट्रोल रूम चुनाव परिणाम आने तक 24 घंटे कार्यरत रहेगा। इसके जरिए ईवीएम की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले, चुनाव आयोग ने मतदान में इस्तेमाल की गई मशीनें, 23 मई को हो रही मतगणना से पहले नई मशीनों से बदलने के आरोपों और शिकायतों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताकर खारिज कर दिया था।

BREAKING: IAF-राफेल की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में सेंध की कोशिश, पेरिस की वारदात

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रविवार रात को भारतीय वायुसेना के राफ़ेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में घुसपैठ की केशिश की गई है। यह कोशिश पेरिस के इलाक़े में हुई जिस पर भारतीय रक्षा मंत्रालय अपनी नजर रखे हुए है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, एक भारतीय टीम जिसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन रैंक के अफ़सर कर रहे हैं, वो भारतीय वायु सेना के लिए निर्माणाधीन 36 राफ़ेल जेट के प्रोडक्शन और भारतीय लोगों की ट्रेनिंग की देख-रेख कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय को इसकी जानकारी दे दी गई है।

‘चौकीदार’ बने सपा-बसपा के कार्यकर्ता, टेंट लगा कर और दूरबीन लेकर कर रहे हैं रतजगा

भाजपा नेताओं ने जब से अपने नाम के आगे चौकीदार लगाना शुरू किया है, तब से इस शब्द के चर्चे चारों तरफ हैं। ट्विटर पर ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने नाम में चौकीदार लगाने के बाद लाखों भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने नाम में चौकीदार शब्द जोड़ लिया। लेकिन ख़बरों के मुताबिक, असली चौकीदारी तो सपा और बसपा के कार्यकर्ता कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सातवें और अंतिम चरण के मतदान के बाद चुनाव संपन्न हुए। उसके बाद ईवीएम को वज्रगृहों (Strongrooms) में रखा जाता है। ईवीएम बदलने से लेकर उसमें छेड़छाड़ करने तक की कई अफवाहों के बाद यूपी महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने चौकीदार का काम अपने ज़िम्मे ले लिया है और वे ईवीएम वज्रगृहों के आसपास मंडरा रहे हैं।

वज्रगृहों के आसपास सपा-बसपा कार्यकर्तागण टेंट बना कर पहरेदारी कर रहे हैं। उनके पास दूरबीन भी है, जिससे वह वहाँ आने-जाने वालों पर दूर से ही नज़र रख रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, मेरठ में ऐसे ही एक वज्रगृह के पास तनाव का माहौल है। यहाँ दो टेंट बनाए गए हैं और सपा-बसपा समर्थक 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट बना कर वज्रगृह की चौकीदारी का ज़िम्मा संभाल रहे हैं (आधिकारिक या सरकारी तौर पर नहीं)। उन्हें डर है कि ईवीएम को बदला जा सकता है और इनमें गड़बड़ियाँ की जा सकती हैं, इसीलिए ये चौकन्ने हैं।

बसपा जिलाध्यक्ष सुभाष प्रधान ने TOI को बताया कि उन्होंने 11 अप्रैल को पोलिंग ख़त्म होने के कुछ ही घंटों बाद वहाँ टेंट स्थापित किया और तभी से वे निगरानी पर लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि निगरानी दल के मुख्य समूह में महागठबंधन में शामिल तीनों दलों (सपा, बसपा, रालोद) के 18 कार्यकर्ता शामिल हैं। उन्हें पास दिया गया है, जिसके कारण वे ईवीएम वज्रगृह के पास लगे बैरिकेड्स के पास जा सकते हैं। टेंट्स के भीतर बैठने व आराम करने के लिए गद्दियाँ रखी गई हैं। गर्मी के कारण कूलर भी लगाया गया है। टेंट में चुनाव को लेकर लगातार चर्चाएँ चल रही हैं।

अव्वल तो यह कि इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। अगर उन्हें आसपास कुछ भी ‘संदिग्ध’ दिखता है तो वे स्थानीय सीनियर पार्टी नेताओं को सूचित करते हैं, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों से शिकायत की जाती है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर के रात में भी आसपास की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है। ये टेंट्स ईवीएम वज्रगृहों से 200 मीटर की दूरी पर हैं, इसीलिए दूरबीन का प्रयोग किया जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों में ईवीएम को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। लोग ईवीएम से भरी गाड़ियों के वीडियो पोस्ट कर दावा कर रहे हैं कि भाजपा ईवीएम बदल रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने ऐसे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि ईवीएम को लेकर सारी जानकारियाँ प्रत्याशियों को पहले ही दे दी जाती हैं, अतः ये संभव नहीं है।

बरखा दत्त का दु:ख : ‘मेनस्ट्रीम मीडिया अब चुनावों को प्रभावित नहीं कर पाएगा’

अनुभवी पत्रकार बरखा दत्त ने कॉन्ग्रेस मीडिया पैनलिस्ट शमा मोहम्मद के साथ अपनी हालिया बातचीत में इस बात पर अपना ग़़ुस्सा और पीड़ा व्यक्त की कि मुख्यधारा का मीडिया अब चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल समर्थित HTN तिरंगा टीवी पर शमा मोहम्मद और AAP नेता योगेंद्र यादव के साथ बातचीत करते हुए, बरखा ने कहा कि चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने में सक्षम होने के मामले में मीडिया बिल्कुल अप्रासंगिक हो रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मीडिया के साथ जुड़ने के लिए सभी राजनेताओं ने चीखने-चिल्लाने के लिए अपने स्वयं के तंत्र को विकसित कर लिया है। मैं आपसे वादा करती हूँ कि यह कहने पर एक पत्रकार के रूप में मुझे ख़ुशी नहीं होगी। लेकिन मेरा मानना ​​है कि मुख्यधारा का मीडिया आज इस देश में एक मतदाता के वोट को प्रभावित करने में सक्षम होने के लिए पूरी तरह से अप्रासंगिकता की ओर बढ़ रहा है।” अपनी बात को दोहराते हुए बरखा ने कहा, “मैं सचमुच इस पर विश्वास करती हूँ।”

‘मतदाताओं पर प्रभाव’ के अलावा, राजनेताओं को प्रभावित करने और उनकी पैरवी करने का भी आरोप पत्रकारों पर है।

जुलाई 2009 में, लीक हुए ऑडियो टेप, जिन्हें ‘राडिया टेप्स’ के नाम से जाना जाता है, उससे पता चला था कि नैरेटिव कैसे सेट किया जाता है। बरखा दत्त और नीरा राडिया के बीच हुई बातचीत के टेप के अनुसार, राडिया केंद्रीय आईटी और संचार मंत्री के पद पर दयानिधि मारन की फिर से नियुक्ति के ख़िलाफ़ पैरवी कर रही थीं और बरखा ने सक्रिय रूप से गतिरोध समाप्त करने और केंद्र में सरकार बनाने के लिए दोनों दलों के बीच सक्रियता से मध्यस्थता की थी।

पैनल इस बात पर चर्चा कर रहा था कि क्या एग्जिट पोल (2019), जो नरेंद्र मोदी के लिए एक शानदार जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं, सही हैं और क्या वह रिकॉर्ड जीत के लिए तैयार हैं? बरखा ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अगर एक्जिट पोल के आँकड़ें सही साबित हुए, तो यह कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘अस्तित्व पर संकट’ साबित हो सकता है। बरखा कॉन्ग्रेस के पैनलिस्ट शमा मोहम्मद से बात कर रही थीं जिसमें कॉन्ग्रेस द्वारा तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) की जीत का ज़िक्र किया और कहा कि वो बहुत कम अंतर से जीते हुए राज्य थे।

शमा मोहम्मद ने कॉन्ग्रेस का बचाव करने की कोशिश करते हुए कहा कि 2014 तक, “बरखा और कुछ अन्य” को छोड़कर कोई भी ‘मीडिया’ नहीं था। वह कहती हैं, ”विपक्ष द्वारा हमसे पूछताछ की गई। हमसे नीतिगत पक्षाघात के लिए पूछताछ की गई। भ्रष्टाचार के आरोपों के ख़िलाफ़ हमसे पूछताछ की गई। निर्भया के लिए हमसे पूछताछ की गई। हमारे पास कठुआ एक मुद्दा था जो निर्भया के लगभग बराबर था। क्या कुछ लोगों के अलावा किसी ने सवाल किया? उन्होंने (मोदी) इसके ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं कहा। हमसे पूछा गया कि मनमोहन सिंह चुप क्यों थे? शीला दीक्षित चुप क्यों थी? श्रीमती गाँधी ने हवाई अड्डे पर निर्भया की अगवानी की। कठुआ के लिए क्या किया गया?”

कॉन्ग्रेस के पैनलिस्ट यह भूल गए कि 2014 में, कॉन्ग्रेस सत्ता पक्ष थी, न कि विपक्ष। इसलिए, नीतिगत पक्षाघात और भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सवाल ‘विपक्ष’ पर नहीं, बल्कि वास्तव में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए थे। इसके बाद शमा मोहम्मद क्रूर बलात्कार के मामलों का राजनीतिकरण करती हैं और वो दोनों मामलों की तुलना करने से भी नहीं चूकतीं।

शमा मोहम्मद ने उत्तर भारतीय राज्यों में कॉन्ग्रेस के ख़राब प्रदर्शन की वजह दक्षिण भारत के लोगों की तरह शिक्षित नहीं होना बताया था। इससे यह बात साफ़ है कि वो उत्तर भारत के लोगों को दक्षिण भारत के लोगों से कमतर समझती हैंं।

36 दलों के नेताओं ने दिल्ली पहुँच BJP का किया समर्थन, ₹100 लाख करोड़ निवेश का लिया संकल्प

मतगणना से ठीक पहले राजग के सभी घटक दलों ने एक मंच पर आकर शक्ति प्रदर्शन किया है। इन दलों में उत्तर-पूर्व के वो दल भी शामिल हैं, जिन्होंने राजग के समर्थन से मोर्चा (नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) बनाया हुआ है। राजधानी दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सहयोगी दलों के लिए होटल अशोक में डिनर का आयोजन किया, जिसमें 36 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शिरकत की। 3 अन्य पार्टियों ने पत्र भेज कर समर्थन जताया। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सम्मिलित हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा की गई और सभी दलों ने राजग सरकार की योजनाओं को लेकर संतुष्टि जताई। एग्जिट पोल्स में राजग को बहुमत मिलता दिख रहा है।

पहले कहा जा रहा था कि इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल नहीं होंगे लेकिन भाजपा ने शिवसेना, जदयू और अकाली दल, तीनों बड़े घटक दलों के अध्यक्षों की मौजूदगी से यह जताने की कोशिश की कि राजग में सब कोई साथ हैं। नीतीश कुमार, उद्धव ठाकरे और प्रकाश सिंह बादल की मौजूदगी से भाजपा को आत्मबल मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजग गठबंधन भारत की विविधता का प्रतीक है और उसका सम्मिलित अजेंडा भारत का विकास है। पीएम ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए राष्ट्र के विकास की बात कही। राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक में चर्चा की गई बातों की जानकारी दी।

राजग की बैठक में कई संकल्प लिए गए, जिसे भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘संकल्प पत्र‘ के रूप में जारी किया गया। संकल्प पत्र में कहा गया कि विपक्षी दलों के शासनकाल के दौरान आतंकी हमले और इनकी पुनरावृत्ति इतिहास बन कर रह गई है। मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने वाले निर्णय को लेकर भी राजग गठबंधन ने ख़ुद की पीठ थपथपाई। संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष द्वारा हमले किए जाने को लेकर चिंता जताई गई। गठबंधन ने पश्चिम बंगाल और केरल हुई राजनीतिक हिंसा की निंदा की। इस संकल्प पत्र में कहा गया है:

“आने वाले वर्षों में, हमने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 100 लाख करोड़ रुपए की पूंजी निवेश की योजना बनाई है, जिसमें 25 लाख करोड़ रुपए खेती और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समर्पित होंगे। हम चाहते हैं कि भारत तेजी से विकास के लिए आधुनिक और पर्याप्त बुनियादी ढाँचे के साथ दुनिया में सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन जाए। इन क़दमों के साथ भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।”

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर राजग को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता है तो ओडिशा में बीजद, आंध्र में आईएसआर और तेलंगाना में टीआरएस जैसी पार्टियाँ भाजपा को अपना समर्थन दे सकती हैं। फोनी तूफ़ान के बाद हुए राहत कार्यों की समीक्षा के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पीएम मोदी के बीचा अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली थी। तेलंगना के मुख्यमंत्री केसीआर ने अभी तक कॉन्ग्रेस को समर्थन नहीं दिया है और वह तीसरे मोर्चे की ही वकालत करते रहे हैं। आंध्र में बड़ी ताक़त बन कर उभरे जगन मोहन रेड्डी द्वारा शरद पवार का फोन कॉल न उठाया जाना भी चर्चा का विषय है।

‘Tit For Tat’ होगा, एकदम तैयार हैं: कुशवाहा के ख़ून बहाने की धमकी पर बोले रामविलास पासवान

लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बिगड़े बोल पर प्रतिक्रया देते हुए कहा, “जैसे को तैसा।” रामविलास पासवान और राजनाथ सिंह राजग के 36 घटक दलों की बैठक बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर ने जब केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री रामविलास पासवान से ‘विपक्ष द्वारा हिंसा फैलाने की साज़िशों’ को लेकर सवाल पूछा तो रामविलास पासवान ने कहा कि वे भी तैयार हैं। पासवान ने फिर मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि राजग के नेता भी मिठाई और फूल लेकर जीत की ख़ुशी मनाने के लिए तैयार बैठे हैं। जब रामविलास पासवान ये बातें बोल रहे थे, तब केंद्र गृह मंत्री राजनाथ सिंह उनका हाथ थामे खड़े थे।

बता दें कि रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार (मई 22, 2019) को धमकी भरे अंदाज़ में कहा था कि लोगों में इस समय आक्रोश है और ऐसे में अगर ‘रिजल्ट लूटने’ की घटना हुई तो सड़कों पर खून बहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से हथियार उठाने के लिए तैयार रहने को भी कहा है। साथ में उन्होंने कहा था कि अगर ऐसी कोई हिंसा होती है तो उसके लिए बिहार और केंद्र की सरकार जिम्मेदार होंगे। राजग की बैठक के बाद विपक्षी नेताओं की तरफ़ से आ रहे ऐसे ही बयानों को लेकर दोनों केंद्रीय मंत्रियों (रामविलास पासवान और राजनाथ सिंह) से सवाल पूछे गए।

ज्ञात हो कि राजधानी दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सहयोगी दलों के लिए होटल अशोक में डिनर का आयोजन किया, जिसमें 36 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शिरकत की। 3 अन्य पार्टियों ने पत्र भेज कर समर्थन जताया। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा की गई और सभी दलों ने राजग सरकार की योजनाओं को लेकर संतुष्टि जताई।

रामविलास पासवान बिहार में भाजपा के अहम सहयोगी हैं। राज्य में भाजपा ने चुनाव से पहले नीतीश कुमार की जदयू और पासवान की लोजपा के साथ सीटों का समझौता सफलतापूर्वक पूरा किया। उपेंद्र कुशवाहा ने 4 वर्ष सरकार में शामिल होकर अंत में राजग से किनारा कर लिया। वह अभी बिहार में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं। पाँच पार्टियों की इस गठबंधन में कॉन्ग्रेस, राजद, वीआईपी, हम (HAM) और रालोसपा शामिल हैं। एग्जिट पोल में राजग एक बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है, जबकि महागठबंधन चारों खाने चित हो जाएगा।

‘माँ’ की लाश, बगल में 1 साल की बच्ची और 4 दिन की ‘जंग’: चमत्कार है गुड़िया का बचना

बागपत के अस्पताल में भर्ती एक साल की गुड़िया का जीवन किसी वरदान से कम नहीं। बच्ची के सिर पर पट्टी बँधी है। वो पिछले चार दिनों से भूख-प्यास की जंग जीतकर अस्पताल तक लाई गई। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, इस बच्ची को अस्पताल में लाए हुए चार दिन हो गए हैं। इसकी माँ कौन है, नहीं पता। यह बच्ची खुद कौन है, नहीं पता। कहानी बहुत मार्मिक है इस बच्ची की।

उत्तर प्रदेश के बागपत के एक खेत में एक महिला की लाश मिली। लाश चार दिन पुरानी, सड़ी-गली। लाश के पास ही यह एक साल की बच्ची चार दिनों तक भूख-प्यास से लड़ती रही। इस बीच दो दिनों की बारिश भी झेली, बादलों की गर्जना भी। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि मृतका शायद इस बच्ची की माँ है। पुलिस के अनुसार, बच्ची और माँ पर किसी नुकीली चीज से हमला किया गया था।

ख़बर के अनुसार, जब मृतका का शरीर सड़ने-गलने लगा, बारिश थम गई लेकिन भूख-प्यास हावी हुआ तो यह बच्ची रेंगते हुए, माँ का मोह छोड़ते हुए खेत से बाहर एक मंदिर के पास जा पहुँची। यहाँ कुछ भक्तों की नज़र इस बच्ची पर गई। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी और बच्ची को अस्पताल तक पहुँचाया।

फ़िलहाल, बच्ची और माँ की पहचान का ख़ुलासा नहीं हो सका है, इसलिए अस्पताल के कर्मचारियों ने इस मासूम बच्ची को ‘गुड़िया’ नाम दे दिया। बड़ौत पुलिस स्टेशन की महिला कॉन्स्टेबल, रेखा नागर को इस बच्ची की देखभाल का ज़िम्मा सौंपा गया है।

रेखा नागर ने बताया, “मैं सुबह लगभग 10 बजे आती हूँ और रात को 9 बजे तक जाती हूँ। गुड़िया एक बहादुर और प्यारी बच्ची है। वह बच गई है और हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह बेहतर हो जाएगी। गुड़िया को पहले दिन लाने के बाद से उसकी स्थिति में सुधार हुआ है।” रेखा नागर खुद भी माँ हैं। उनका एक 5 साल का बच्चा भी है।

बागपत के आस्था मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि गुड़िया के माथे के बाएँ हिस्से में किसी नुकीली चीज से चोट के कारण घाव हो गया था। आस्था अस्पताल के डॉक्टर अजय गर्ग ने कहा, “हमने एक सीटी स्कैन किया और पाया कि बच्ची की सिर की हड्डी की संरचना को भी नुकसान पहुँचा है। यह एक प्रकार की चोट है, जिसे देखकर लगता है कि उसके सिर पर चोट की गई हो। सिर के घाव में संक्रमण के कारण, हम उसमें टाँके नहीं लगा सके। लेकिन, हमे उम्मीद है कि चोट जल्द ठीक हो जाएगी।”

इसके अलावा डॉक्टरों ने यह बताया कि बच्ची के शरीर में कीड़ों की वजह से संक्रमण हो गया था। नर्सों के अनुसार, वह भर्ती होने के बाद कई घंटों तक बेहोश रही और जागने के तुरंत बाद वह दूध और पानी की पूरी बोतल पी गई। इससे पता चलता है कि वो बहुत भूखी-प्यासी थी। डॉक्टरों ने बच्ची के घाव को ठीक करने के बाद एंटीबायटिक दवाओं का इस्तेमाल करके फैले संक्रमण का इलाज करने की योजना बनाई है, क्योंकि कीड़ों की वजह से गुड़िया को काफी नुकसान पहुँचा है।

कई लोग इस मासूम बच्ची को गोद लेना चाहते हैं। इसके लिए वो बाल कल्याण आयोग से भी संपर्क कर रहे हैं।

पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मृतका और बच्ची की पहचान का ख़ुलासा अब तक नहीं हो सका है। पुलिस ने अपनी कोशिशों में 25 गाँवों में पूछताछ की और ग्राम प्रधानों को महिला की तस्वीर भी दिखाई बावजूद इसके उन्हें कोई क़ामयाबी नहीं मिल सकी। दिल्ली से दो व्यक्ति एक बच्चे के बारे में पूछ रहे थे, लेकिन गुड़िया उनके बताए विवरण से मेल नहीं खाती है। महिला की हत्या की जाँच करने वाले अधिकारी धर्मेंद्र संधू ने बताया कि स्थानीय मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुपों पर बच्ची के संबंध में संदेश भेजे गए हैं। ताकी जल्द से जल्द इनकी पहचान उजागर हो सके।

पंजाब के 5 मंत्रियों ने सिद्धू पर बोला हमला, आलाकमान ले सकता है कड़ा फैसला

पंजाब की सभी सीटों पर रविवार (मई 19, 2019) को लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के तहत मतदान हुआ। सिद्धू द्वारा सीधा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधना उन्हें भारी पड़ सकता है क्योंकि पार्टी की पंजाब प्रभारी आशा कुमारी ने प्रदेश कॉन्ग्रेस से सिद्धू को लेकर रिपोर्ट माँगी है। कहा जा रहा है कि अधिकतर नेता मुख्यमंत्री अमरिंदर के साथ हैं। गुरदासपुर से सनी देवल के ख़िलाफ़ कड़े चुनावी युद्ध में फँसे प्रदेश अध्यक्ष बलराम जाखड़ चुनावी प्रक्रिया से फ्री होते ही रिपोर्ट तैयार करेंगे। बता दें कि कम्प्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू पर महत्वाकांक्षी होने और उनको अपदस्थ कर के ख़ुद मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखने का आरोप लगाया था।

पंजाब कॉन्ग्रेस के दो शीर्ष नेताओं के इस झगड़े में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद इस सम्बन्ध में हाईकमान आगे की कार्रवाई कर सकता है। पंजाब के ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने नवजोत सिंह सिद्धू से दो टूक कहा है कि अगर वह कैप्टन के अंतर्गत कार्य करने में असमर्थ हैं तो उन्हें मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू अगर कैप्टन को नेता नहीं मानते तो इस्तीफा दें। बाजवा ने कहा कि सिद्धू को जब पता ही नहीं है कि जहाज का कप्तान कौन है, तो उन्हें मंत्रिमंडल से निकाल बाहर किया जाए।

बाजवा सिद्धू पर निशाना साधने वाले पंजाब कैबिनेट के पाँचवें मंत्री हैं। उनसे पहले पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्मा मोहिंद्रा ने राज्य के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पर निशाना साधते हु पार्टी हाईकमान से उन पर कार्रवाई करने की माँग की थी। मंत्री मोहिंद्रा ने सिद्धू पर पीठ में छुरा घोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह बेवक़्त बयान देते जा रहे हैं। उन्होंने सिद्धू के बारे में कहा कि वो सिर्फ़ 2 सालों से ही कॉन्ग्रेस में हैं और अपना नियम झाड़ते हुए अपना अजेंडा लागू करना चाह रहे हैं। मोहिंद्रा के अलावा ख़ुद कैप्टेन और पंजाब मंत्रिमंडल के उनके अन्य साथी भी सिद्धू की आलोचना कर चुके हैं।

ये सब विवाद तभी से चला आ रहा है जब पंजाब के पर्यटन मंत्री सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर उनका टिकट काटने के आरोप लगाया था। बाद में सिद्धू ने अपनी पत्नी के बयान का समर्थन किया था। नवजोत सिंह सिद्धू पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था, “सिद्धू मेरी जगह सीएम बनना चाहते हैं। सिद्धू कॉन्ग्रेस की छवि बिगाड़ रहे हैं, पार्टी को उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए। अगर वह असली कॉन्ग्रेसी होते तो वह अपनी शिकायतों के लिए पंजाब चुनाव का वक्त नहीं चुनते।

अभी हाल ही में आवाज़ जाने के ख़तरों के कारण सिद्धू अस्पताल में भर्ती थे जब 70 से अधिक चुनावी सभाओं को सम्बोधित करने के कारण उनकी स्वर तंत्रिका को नुकसान हुआ था। बाजवा ने सिद्धू की आलोचना करते हुए आगे कहा, “अगर वो सच में कॉन्ग्रेसी होते तो उन्होंने अपनी शिकायतों को सार्वजनिक करने का बेहतर समय चुना होता। उन्होंने पंजाब में मतदान से ठीक पहले ये बातें कही। ये सिर्फ़ उनका नहीं बल्कि पूरे कॉन्ग्रेस का चुनाव है। कॉन्ग्रेस अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करती।” पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी सिद्धू को ‘कॉन्ग्रेस की संस्कृति’ समझने की सलाह दी।

बंगाल में चुनाव बाद भी हिंसा का दौर जारी, BJP ने राज्यपाल से मिल की सेना तैनात करने की माँग

लोकसभा चुनाव के अंतर्गत सातों चरण के चुनाव ख़त्म होने के बावजूद पश्चिम बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। सातवें चरण के मतदान के दिन हुई कई हिंसक वारदातों के बाद अभी भी वहाँ राजनीतिक हिंसा का दौर थमता नहीं दिख रहा है। रविवार (मई 19, 2019) को भाटपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदान हुआ। इसके अंतर्गत आने वाले कांकिनारा में रेल सेवा को बाधित किया गया। यहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद सियालदह डिवीजन में रेल सेवा बाधित किए जाने के बाद यात्रियों में अफरातफरी का माहौल रहा। इतना ही नहीं, कांकिनारा रेलवे स्टेशन परिसर में क्रूड बम भी फेंके गए।

सबसे बड़ी बात तो यह कि पहले से ही प्रशासन को अलर्ट पर रखे जाने के बावजूद हिंसा की ये वारदातें हुईं। इसके अलावा विधाननगर विधानसभा के अंतर्गत सॉल्टलेक और दक्षिण 24 परगना जिले में भी तृणमूल और भाजपा समर्थक आपस में भिड़े। इस संघर्ष में भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के घायल होने की सूचना है। इसके अलावा रविवार को भी भाजपा के 4 पोलिंग एजेंटों पर हमला किया गया था। शराब के नशे में धुत हमलावरों ने घर में घुस कर बेख़ौफ़ तोड़फोड़ मचाया और धारदार हथियारों से हमला भी किया। इस घटना के पीछे पीड़ितों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस का हाथ बताया है।

एक अन्य घटना बासंती स्थित चड़विद्या में घटी। यहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने बबलू नामक भाजपा कार्यकर्ता को निशाना बनाया। हमले में बबलू बाल-बाल बच गए। पड़ोसियों के पहुँचने के बाद हमलावर बाइक छोड़ भाग खड़े हुए। भाजपा कार्यकर्ता बबलू का अस्पताल में इलाज चल रहा है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से राज्य में सेना तैनात करने की माँग की। इस मुलाक़ात के बाद घोष ने कहा:

“तृणमूल कॉन्ग्रेस ने जिस तरह से अपने गुंडों को खुला छोड़ रखा है, उससे तो लगता है कि वे बंगाल में अराजकता का माहौल बनाना चाहते हैं। यदि ऐसी स्थिति जारी रही तो केंद्र को स्थिति नियंत्रित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। यदि ज़रूरत पड़े तो भाटपारा में सेना बुलाई जाए। पुलिस तो तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं के रूप में कार्य कर रही है। इस मामले पर राज्यपाल ने हमारी माँगों को सुना है और इन्हें देखने का भरोसा भी दिया है। न केवल भाटपारा बल्कि उत्तर बंगाल के कई हिस्सों में तृणमूल कॉन्ग्रेस हमारे खिलाफ हिंसा कर रही है।”

उधर तृणमूल के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने चुनाव आयोग से पूछा है कि क्या केंद्रीय बलों को राज्य में एक सप्ताह अतिरिक्त रखने का निर्णय आपातकाल लगाने के लिए लिया गया है? राज्यसभा सांसद डेरेक ने कहा कि बंगाल के लिए विशेष नियम बनाए जा रहे हैं और यह उनके लिए स्वीकार्य नहीं है। भाजपा द्वारा कई मतदान केंद्रों पर दुबारा मतदान कराने की माँगों के बीच डेरेक ने केंद्रीय बलों के वेश में भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं के होने की बात दुहराई। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ममता सरकार भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह का एनकाउंटर करवा सकती है। उन्होंने कहा कि सिंह की जान को ख़तरा है और उन्हें कुछ भी नुकसान होता है तो इसकी ज़िम्मेदार बंगाल की मुख्यमंत्री ख़ुद होंगी।

RISAT-2B: आतंकियों पर नजर के लिए तीसरी आँख, ISRO की बड़ी कामयाबी

खुफिया निगरानी, कृषि, वन और आपदा प्रबंधन में सहयोग जैसे क्षेत्रों के लिए इसरो ने सुबह साढ़े पाँच बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से RISAT-2B लॉन्च किया। हर तरह के मौसम में काम करने की क्षमता वाले रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह को प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी46 के जरिए भेजा गया। RISAT-2B को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित किया गया।

RISAT-2B उपग्रह का भार 615 किलोग्राम है। इस उपग्रह की खूबी है – सिंथेटिक अपर्चर रडार (synthetic aperture radar) – जिसके कारण यह किसी भी मौसम में काम करता रहेगा, निगरानी रखता रहेगा। RISAT-2B में पूर्णतः स्वदेशी विक्रम प्रोसेसर लगा हुआ है।

RISAT-2B अपने प्रक्षेपण के 15वें मिनट के बाद 555 किलोमीटर के सर्कुलर ऑर्बिट में 37 डिग्री के झुकाव पर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। यह उपग्रह अगले 5 साल तक के लिए काम करेगा।

पीएसएलवी की बात करें तो यह इस प्रक्षेपण यान का 48वाँ मिशन था। साल 2019 में इसरो द्वारा यह तीसरा प्रक्षेपण है। अभी तक 350 उपग्रहों के जरिए PSLV प्रक्षेपण यानों से 50 टन का पेलोड अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजा जा चुका है – जो एक रिकॉर्ड है।

इसरो के प्रमुख के शिवन ने RISAT-2B के सफल प्रक्षेपण पर खुशी जताई। उन्होंने इसे ‘बहुत बहुत महत्वपूर्ण’ बताया। आपको बता दें कि प्रक्षेपण से पहले उन्होंने तिरूपति के प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना भी की। RISAT-2B के बाद, इसरो चंद्रयान-2 पर काम करेगा, जिसका 9 से 16 जुलाई के बीच प्रक्षेपण का कार्यक्रम है।