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प्रियंका गाँधी गुंडों को संरक्षण देती हैं, लोगों को लड़वा के 5 साल के लिए चली जाती हैं: कॉन्ग्रेस MLA

कॉन्ग्रेस महासचिव पूर्वी उत्‍तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी वाड्रा पर उनके ही पार्टी के विधायक का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रियंका गाँधी वाड्रा पर कॉन्ग्रेस विधायक राकेश सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह यहाँ आती हैं और लोगों को लड़वाकर दिल्ली चली जाती हैं, इसके बाद पाँच साल तक यहाँ के लोग आपस में लड़ते रहते हैं।

अपराधियों को संरक्षण देती है प्रियंका गाँधी’

राकेश सिंह ने आगे कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी बहुत दिन से अपराधियों को संरक्षण दे रही हैं। रायबरेली के हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस विधायक ने दावा किया कि उनके पास इसकी जानकारी भी है। प्रियंका गाँधी द्वारा ही यह साजिश रची जा रही है, जिसका परिणाम आने वाले समय में और खराब होगा। बता दें कि हरचंदपुर विधानसभा सीट सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के अंतर्गत आती है।

MLA राकेश सिंह ने अपने दोनों भाई दिनेश सिंह और अवधेश सिंह का बचाव करते हुए कहा, “मेरे भाई पर प्रियंका गाँधी वाड्रा गलत आरोप लगा रही हैं। प्रियंका गाँधी को लगता है कि यहाँ पर दबाव बनाकर काम करेंगी।” दरअसल, लोकसभा चुनाव में दिनेश सिंह बीजेपी की तरफ से रायबरेली में सोनिया गाँधी को चुनौती दे रहे हैं। कभी कॉन्ग्रेस में सोनिया-प्रियंका के खास रहे दिनेश सिंह के खिलाफ आज पूरी पार्टी हमलावर है।

प्रियंका गाँधी एक घंटे के लिए आएँगी, लोगों को लड़वा के 5 साल के लिए चली जाएँगी

मंगलवार को हुई हिंसा में घायल जिला पंचायत सदस्यों और कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह से मिलने प्रियंका गाँधी आज रायबरेली पहुँची थी। लेकिन इस दौरान उनकी ही पार्टी के हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राकेश सिंह ने कहा, “प्रियंका गाँधी बहुत दिनों से अपराधियों को संरक्षण दे रही हैं। वह इसी तरह चुनाव में एक घंटे के लिए आएँगी और फिर जिले के लोगों को लड़वा के पाँच साल के लिए चली जाएँगी। मैं विधिक रूप से कॉन्ग्रेस का विधायक हूँ, लेकिन अगर वे (प्रियंका) मेरे भाइयों पर बाहर से गुंडा बुलवाकर हमला कराना चाहे या फिर कार्रवाई कराएँ तो ये भी गलत है।”

इस दौरान MLA राकेश सिंह ने कहा कि पार्टी और पद अस्थाई होता है, लेकिन भाई स्थाई होता है। ऐसे में अगर भाई के साथ गलत कार्रवाई होगी, तो वो भाई के साथ ही खड़े रहेंगे।

गुवाहाटी में ग्रेनेड धमाका, 1 की मौत, 7 घायल, उल्फा आतंकियों ने ली ज़िम्मेदारी

गुवाहाटी की जू रोड पर अभी कुछ देर पहले (बुधवार 15 मई की रात) ग्रेनेड धमाके की खबरें आ रहीं हैं। धमाका जू रोड स्थित एक शॉपिंग मॉल के बाहर हुआ है। हमले में हालाँकि अभी तक किसी की मृत्यु की खबर नहीं है पर आठ लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पुलिस और सुरक्षाबलों ने मौके पर पहुँच कर इलाके को घेर लिया है। ऑल इंडिया रेडियो के अनुसार आतंकी संगठन उल्फा ने हमले की जिम्मेदारी ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि सात लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना की सूचना पाकर मौके पर पुलिस और सुरक्षाबल पहुँच गए हैं और जाँच की जा रही है।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस हमले की निंदा की है। मीडिया के अनुसार, ग्रेनेड से हुए विस्फोट के कारण कई लोग सड़क पर ही गिर पड़े। खून से लथपथ लोगों को स्थानीय लोगों द्वारा तुरंत उपचार के लिए गोवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि हमलावर ग्रेनेड फेंकने के बाद वहाँ से फरार हो गए हैं।

मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुःख जताया है।

स्वरा भास्कर से ‘आएगा तो मोदी ही’ कहने वाले युवक ने माँगी माफ़ी, मारा केजरी-टर्न

कुछ दिन पहले ही कम्युनिस्ट चुनाव प्रचारक स्वरा भास्कर को दिल्ली एयरपोर्ट पर ‘आएगा तो मोदी ही’ कहकर ट्रोल करने वाले वी राँझा नाम के युवक सोशल मीडिया पर खूब छाए रहे। स्वरा भास्कर के साथ बनाया गया उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ है। लेकिन, आज वो ट्विटर पर स्वरा से माफ़ी माँगते हुए देखे गए हैं।

इस वायरल वीडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समर्थकों द्वारा बड़े स्तर पर शेयर किया गया, जबकि विरोधियों के बीच इस वीडियो को लेकर मायूसी छाई रही। स्वरा भास्कर ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्टीकरण दिया था कि वो सेल्फी लेने वालों के साथ कोई भेदभाव नहीं करती हैं। हालाँकि, उनका दर्द आखिर में छलक ही गया और उन्होंने लिखा कि ये ‘भक्तों’ के गंदे तरीके हैं।

इस प्रकरण से आहत स्वरा भास्कर के जख्मों पर बरनोल लगाने के लिए इसी युवक वी राँझा ने आज एक नया वीडियो शेयर करते हुए स्वरा भास्कर से माफ़ी माँगी है, लेकिन इसमें आखिर में उन्होंने अरविन्द केजरीवाल की तरह ही यू-टर्न ले लिया है।

आज ट्विटर पर जारी किए इस वीडियो में पंजाबी गायक वी राँझा कह रहे हैं, “स्वरा भास्कर मैम, मैंने ‘आएगा तो मोदी ही’ कहा जो बिलकुल भी गलत नहीं है क्योंकि ये बात तो सबको पता ही है। अगर आपको उससे 1% भी दिक्कत थी, तो आप उस वीडियो को वहीं पर डिलीट करवा देते। खैर, जो भी है सारी बात साइड में कर देते हैं। मैं भी एक इंसान ही हूँ और हिन्दुस्तानी होने के नाते आपसे सॉरी बोलता हूँ। पर एक बात है, आएगा तो मोदी ही। जय हिन्द।”

इस वीडियो के बाद ये देखना बाकी है कि स्वरा भास्कर इसके बाद किस तरह की प्रतिक्रिया देती है। आएगा तो मोदी ही सुनकर उनका फिर से गुस्सा होना तो स्वाभाविक है लेकिन क्या वो हँसी-मजाक के इस माहौल का समर्थन करती हैं या फिर हर दूसरे मोदी विरोधी की तरह ही अपनी परिचित शैली में ही नाराजगी दर्ज करती है।

बता दें कि 8 मई 2019 को, एक छोटी सी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें एक व्यक्ति अभिनेत्री से ट्रोल हो चुकी स्वरा भास्कर के साथ एक सेल्फी ले रहा था। क्लिप में, सेल्फी लेते हुए, मुस्करा कर स्वरा भास्कर से कहता है, “पर मैम, आएगा तो मोदी ही”।

बंगाल में हिंसा पर चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान, रुक जाएगा सारा प्रचार, बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल सुर्खियों में है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग सख्त है। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान ज़बरदस्त हिंसा को देखते हुए चुनाव रैली और सभाओं पर चुनाव आयोग की तरफ से रोक लगा दी गई है। चुनाव आयोग की तरफ से जारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई है। यह फैसला 16 मई अर्थात कल से प्रभावी होगा।

चुनाव आयोग को ऐसा निर्णय लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हो रही जमकर हिंसा के मद्देनज़र लेना पड़ा। राज्य में चुनाव प्रचार पर 16 तारीख को ही रोक लग जाएगी। वैसे नियमानुसार प्रचार 17 तारीख को शाम 5 बजे समाप्त होता, लेकिन अब ये 16 मई को रात 10 बजे ही हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल के 9 संसदीय क्षेत्रों- दम दम, बारासात, बसीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, जाधवपुर, डायमंड हार्बर, दक्षिण और उत्तरी कोलकाता में कोई भी चुनाव प्रचार कल रात 10 के बाद नहीं होगा। 

यह पहली बार है जब चुनाव प्रचार को एक दिन पहले समाप्त करने का निर्णय चुनाव आयोग को लेना पड़ा। चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा, “यह संभवत: पहली बार है जब ईसीआई ने अनुच्छेद 324 को इस तरीके से लागू किया है, लेकिन यह अराजकता और हिंसा की पुनरावृत्ति के मामलों में अंतिम बार नहीं समझा जाए, क्योंकि यह शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव प्रक्रिया के संचालन को प्रभावित करता है।”

साथ ही, पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी आयोग ने कड़ा रुख लेते हुए प्रधान सचिव, गृह और एडीजी सीआईडी राजीव कुमार को उनके पद से हटा दिया है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के हर चरण में हिंसा की खबरें लगातार आ रही थीं। कल अमित शाह की रैली के दौरान भी बंगाल में ज़बरदस्त हिंसा और आगज़नी का माहौल दिखा। ममता बनर्जी खुद बीजेपी को धमकी देतीं नज़र आईं।

विद्यासागर की प्रतिमा के साथ की गई बर्बरता पर भी आयोग को गहरा दुख जताया है। उम्मीद है कि राज्य प्रशासन द्वारा ऐसा करने वालों का पता लगाया जाएगा। 

एडिटर्स गिल्ड की चुप्पी: लाख गाली खा लें, लेकिन चाटेंगे उन्हीं के… तलवे

पत्रकारिता के समुदाय विशेष की एक मजदूर यूनियन है- नाम है एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इण्डिया। इसके अध्यक्ष हैं शेखर गुप्ता। शेखर गुप्ता ‘राजीव गाँधी जवान थे, बाल-बच्चों वाले थे, देश के सबसे महत्वपूर्ण जंगी जहाजों को टैक्सी बना भी लिया तो क्या?’ जैसे तर्क देते हैं, और ‘हिन्दू प्रतिमाओं से मुस्लिम बेचैन हो जाते हैं’ जैसी बातें छापने वाला प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द प्रिंट’ चलाते हैं।

उनकी एडिटर्स गिल्ड म्याँमार में पत्रकारिता के नाम पर हस्तक्षेप कर रहे रॉयटर्स के विदेशी पत्रकारों को जेल भेजे जाने की निंदा करती है, पत्रकारों से सोशल मीडिया पर आम आदमी के सवाल पूछ लेने और खरी-खोटी सुना दिए जाने पर, क्विंट के ऊपर पड़ने वाले आयकर विभाग के छापे पर चिंता प्रकट करती है। लेकिन जब देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर एक पत्रकार से बदतमीजी से बात करते हैं, उसे ‘आई विल किल यू’ कहते हैं, उसका माइक झटक देते हैं, कैमरे पर ‘फ़क ऑफ़’ बोलते हैं तो एडिटर्स गिल्ड को साँप सूँघ जाता है। इसलिए कि ‘दुधारू गाय की लात सहनी पड़ती है।’

पहले भी एडिटर्स गिल्ड का व्यवहार दोहरा

एडिटर्स गिल्ड ऐसे ही दोहरे चाल-चरित्र के लिए बदनाम है। #MeToo मूवमेंट के समय में एमजे अकबर, जो कि अब पत्रकार थे भी नहीं, नेता बन चुके थे, के खिलाफ निशाना साधा लेकिन विनोद दुआ के मामले पर सन्नाटा बाँधे रहे। इसलिए कि एमजे अकबर अब भाजपा सरकार के मंत्री थे, जबकि विनोद दुआ हर रोज भाजपा के खिलाफ जहर उगलते हैं।

जैसा कि हमने बताया, अपने दोहरे व्यवहार पर सोशल मीडिया में उठते हर सवाल को ‘अब्यूसिव बिहेवियर विद् जर्नलिस्ट्स’ के लेबल के साथ यह हौआ बना देते हैं। और जब अर्णब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी के संवाददाताओं को तृणमूल के कार्यकर्ता असल में मारते-पीटते हैं, तो यह गैंग मुँह पर उँगली रख लेता है।  

ANI की सम्पादिका स्मिता प्रकाश ने नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया तो राहुल गाँधी ने उनपर सस्ते हमले करने शुरू कर दिए। उस समय एडिटर्स गिल्ड ने बयान तो जारी किया लेकिन साफ़ पता चल रहा था कि यह कॉन्ग्रेस नहीं, भाजपा के खिलाफ था। एक वाक्य में स्मिता प्रकाश पर राहुल गाँधी के हमले को ‘नोट’ भर करने वाला उनका बयान पूरी तरह भाजपा को घेरने के लिए था। और-तो-और, ‘अपने लोगों’ की सोशल मीडिया आलोचना न सह पाने वाला यह गैंग स्मिता प्रकाश को ‘प्रवचन’ देता है कि पत्रकारों को आलोचना से परे होने का गुमान नहीं पालना चाहिए।

यह बयान आया भी अरुण जेटली के ललकारने के बाद ही था।

पी चिदंबरम ने भी जिस बुरी तरह शेखर गुप्ता के ही द प्रिंट की ज्योति मल्होत्रा को झिड़का, वैसा अगर किसी भाजपाई ने किया होता तो अब तक मोमबत्तियाँ निकल आईं होतीं, और इंडिया गेट पर मार्च शुरू हो गया होता। लेकिन चूँकि चिदंबरम ‘माई-बाप’ थे तो एडिटर्स गिल्ड को भी अस्थमा हो गया, आवाज नहीं निकली।

मीडिया को हेडलाइन मैटीरियल न मिले तो लोकतंत्र रुक नहीं जाता: नरेंद्र मोदी

एडिटर्स गिल्ड और पत्रकारों के इसी चरित्रहीन चरित्र के सबसे बड़े भुक्तभोगियों में एक भारत के प्रधानमंत्री पद पर बैठा है। इसी गिल्ड के लोगों ने 12 साल उसे हर तरीके से खून का प्यासा दरिंदा दिखाने की कोशिश की। फिर जब हार गए और वह पीएम बन इनकी छाती पर मूँग दलने आ ही गया तो पहले दिन से उसके कार्यकाल को असफल घोषित कर बदनाम करने की कोशिश की- केवल इसलिए कि मलाई कटनी बंद हो गई, अवैध रूप से, लीक होकर आ रहीं खबरों से हेडलाइन मिलनी बंद हो गई। इसीलिए जब उस व्यक्ति को अपनी बात कहने, अपनी भड़ास निकालने का मौका मिला तो उसने भी बता दिया कि मीडिया को हेडलाइन मैटीरियल न मिले तो लोकतंत्र रुक नहीं जाता।

गर्भवती नक्सली को जंगल में छोड़कर भाग गए साथी आतंकी, पुलिस ने दिखाया मानवीय चेहरा

छत्तीसगढ़ के कांकेर में एक लाख की इनामी महिला नक्सली ने अपने 5 दिन के बच्चे के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। महिला नक्सली अपने एक साथी नक्सली से गर्भवती हुई थी। गश्त के दौरान सुरक्षा बलों को महिला नक्सली मिली थी, जो गर्भवती होने के कारण चलने में असमर्थ थी। इस कारण उसके साथी नक्सली उसे वहीं जंगल में अकेला छोड़कर चले गए थे।

नक्सली आतंकी प्रसव से पहले ही इस महिला को आलपरस गाँव में छोड़कर चले गए थे। नक्सलियों ने जहाँ उसे मरने के लिए छोड़ दिया, वहीं पुलिस ने मानवीय चेहरा दिखाते हुए उस महिला नक्सली को अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में जच्चा-बच्चा दोनों का इलाज जारी है। फिलहाल दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर कोयलीबेड़ा के आलपरस के जंगलों में मंगलवार (मई 14, 2019) को जिला पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में जवानों ने 8 लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली उप कमांडर फूलो बाई उर्फ महरी को गिरफ्तार किया था। डीआरजी और पुलिस के जवान नक्सलियों की सूचना पर वहाँ सर्चिंग के लिए पहुँचे थे। अचानक नक्सलियों ने वहाँ फायरिंग कर दी, जवाबी कार्रवाई में नक्सली वहाँ से भाग निकले।

इसके बाद डीआरजी के जवान बुधवार (मई 15, 2019) को आलपरस के जंगलों की ओर गश्त पर निकले थे। इसी दौरान उन्हें जंगल में महिला नक्सली अपने 5 दिन के बच्चे के साथ मिली। पूछताछ में उसने बताया कि उसे बच्चे के प्रसव से पहले ही नक्सली वहाँ छोड़कर गए थे, इसके बाद से महिला वहीं पर थी। उसे इस हालत में देख पुलिस के जवान उसे लेकर कैंप लौटे और महिला और उसके बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

फख्र है: पाक की F-16 मार गिराने वाली अभिनंदन की यूनिट अब कहलाएगी ‘फाल्कन स्लेयर्स’

भारतीय वायुसेना की श्रीनगर स्थित 51वीं स्क्वॉड्रन की यूनिट, जिसमें पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराने वाले विंग कमांडर अभिनंदन भी हैं उसे अब फाल्कन स्लेयर्स (Falcon Slayers – फाल्कन का वध करने वाली स्क्वॉड्रन) के नाम से जाना जाएगा। अभी तक इस यूनिट को सोर्ड आर्म्स (Sword Arms) के नाम से जाना जाता था। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद इसी यूनिट के जाँबाज विंग कमांडर अभिनंदन ने भारतीय विमान मिग-16 बायसन जेट से पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराया था।

एफ-16 मतलब फाल्कन

इस लड़ाई में अभिनंदन पाकिस्तानी क्षेत्र में चले गए थे। वायुसेना ने यह नाम एफ-16 के नाम पर रखा है। एफ-16 को फाल्कन के नाम से भी जाना जाता है। विगत 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायुसेना के हमले को नाकाम करने के वक्त विंग कमांडर अभिनंदन इसी 51वीं स्क्वॉड्रन में तैनात थे और अभिनंदन ने इसे मार गिराया था। इसलिए इसे फाल्कन स्लेयर्स यानि फाल्कन का वध करने वाली स्क्वॉड्रन नाम दिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने इन खास बैज को बड़ी मात्रा में बनाने का ऑर्डर दे दिया है। इस बिल्ले पर ‘एमराम डॉजर्स’ (AMRAAM Dodgers) भी लिखा है। पाकिस्तान के एफ-16 विमान एमराम मिसाइल से लैस होते हैं।

‘एमराम डॉजर्स’

27 फरवरी को जब पाकिस्तान के एफ-16 विमानों की भारत के बायसन और सुखोई फाइटर जेट्स से डॉग-फाइट हुई थी तो पाकिस्तान ने (एफ-16 द्वारा) एमराम मिसाइल से वार किया था। लेकिन, बायसन और सुखोई विमानों ने एमराम मिसाइल को ‘डॉज’ यानी चकमा दे दिया था, जिससे अमेरिका में बनी एडवांस मिसाइल, एमराम का वार खाली चला गया था। यही वजह है कि 51वीं स्क्वॉड्रन के पायलटों के लिए जो नया बैज आया है‌, उस पर फाल्कन स्लेयर्स के साथ-साथ ‘एमराम डॉजर्स’ भी लिखा है।

भावुक रॉबर्ट वाड्रा ने जताई अच्छे दिनों पर चिंता, कहा PM मोदी ने मेरी और मम्मी की सुरक्षा आधी कर दी

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी के जीजा, प्रियंका गाँधी के पति, रॉबर्ट वाड्रा ने पीएम मोदी पर एक भावुक फेसबुक पोस्ट के जरिए बेहद शायराना तरीके से हमला किया है। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा है कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते। यही बात हमारे प्रधानमंत्री पर भी लागू होनी चाहिए जो आए दिन दूसरों पर महत्वपूर्ण होने का तंज कसते रहते हैं, क्या यही अच्छे दिन हैं जो उनके भाई स्वयं अपने आप को एस्कॉर्ट गाड़ी दिलाने के लिए धरने पर बैठे हैं?

सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने इसके आगे भावुक होकर लिखा है, “मेरी सुरक्षा आधी कर दी गई, जबकि मुझे हर तरफ से खतरा बताया जाता था। मुझे वह समय भी याद है जब मेरी माँ की सुरक्षा में दिए गए 2 सुरक्षाकर्मी भी बिल्कुल हटा लिए गए, जबकि उनके घर के बाहर लोगों का तांता लगा रहता है, जो किसी न किसी कारणवश मिलना चाहते हैं। इसमें किसी भी प्रकार के लोग हो सकते हैं, लेकिन हमने सम्मानपूर्वक सरकार के इस फैसले को माना।”

राहुल गाँधी की बहन प्रियंका वाड्रा गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी के भाई इस बात पर धरने पर बैठे हैं कि उन्हें एस्कॉर्ट गाड़ी चाहिए, यह कितना उचित है? क्या यह नामदार हैं या कामदार? प्रधानमंत्री जी इन्हीं अच्छे दिनों की चर्चा किया करते थे? क्या आज प्रधानमंत्री जी नहीं कहेंगे बहुत हुआ?

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक के जरिए यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी के मंगलवार को पुलिस द्वारा एस्कार्ट मुहैया नहीं कराए जाने से नाराज होकर जयपुर के बगरू थाने के बाहर धरने पर बैठने की खबर आने के बाद की। हालाँकि, लगभग एक घंटे बाद समझाने पर वह अपनी यात्रा पर आगे रवाना हो गए।

‘मस्जिद बन्दर’ = बंदरों की मस्जिद: मोदी का मजाक उड़ाने वाली गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी की समझ

गालीबाज ट्रोल कहें या नौटंकीबाज पत्रकार, स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री मोदी का एक एडिटेड वीडियो शेयर कर मजाक उड़ाने की कोशिश की। इस क्लिप में मोदी का गुजरात के द्वारका में बंदरगाहों के विकास पर दिया गया भाषण है।

हिंदी में दिए गए भाषण में, मोदी को कहते हुए सुना जा सकता है, “जब से भारत सरकार में हमें काम करने का अवसर मिला, हमने गुजरात के बंदरों के विकास पर भी इतना ही ध्यान दिया है… और जिसके कारण हम बंदरों का विकास करना चाहते हैं… लेकिन हम बन्दर आधारित विकास करना भी चाहते हैं… हम वो इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहते हैं जो कि बंदरों को रोड से जोड़े, रेल से जोड़े, हवाई पट्टी से जोड़े।”

इस क्लिप में, इतना तो तय है कि मोदी ‘पोर्ट’ के विकास के बारे में बात कर रहे हैं। ‘पोर्ट’ जिसे हिंदी में ‘बंदरगाह’ और गुजराती में ‘बन्दर’ कहते हैं। वीडियो की सच्चाई यह है कि मोदी ने भले ही भाषण हिंदी में दिया पर पोर्ट के लिए उन्होंने स्थानीय गुजराती शब्द ‘बंदर’ का प्रयोग किया। वैसे बंदरगाह उर्दू शब्द है पर हिंदी में खूब प्रचलित है, यही स्थिति गुजरात में बन्दर की है। जानकारी के लिए बता दूँ, सबसे बड़े कोस्टलाइन एरिया वाले राज्य गुजरात में द्वारका को सबसे प्राचीन बंदरगाहों में से एक के रूप में जाना जाता है। चूँकि, मोदी गुजरात के द्वारका में बोल रहे हैं और यह शब्द वहाँ के लोगों अजूबा नहीं है। अपनी ट्रोलिंग क्षमता का परिचय देते हुए स्वाति चतुर्वेदी ने बिना समझे या यूँ कहिए दिमाग से पैदल होकर बिना सन्दर्भ जाने मोदी विरोध की पीड़ा में ‘बन्दर’ को ‘मंकी’ समझ ट्विटर पर ज्ञान देने लगी कि देखो कैसे मोदी ‘बंदरों’ (मंकी) के विकास की बात कर रहा है।

चतुर्वेदी के इस कारनामे के गुज़राती लोग मजे ले रहे हैं, क्योंकि हम गुजराती चुटकलों से आहत नहीं होते। लेकिन चतुर्वेदी का इंटेंशन यहाँ जोक शेयर करने का नहीं है। इरादा साफ़ है, तो कई ट्विटर यूजर ने चतुर्वेदी का ‘ज्ञान-रंजन’ किया कि यहाँ बन्दर का मतलब पोर्ट है न कि मंकी लेकिन स्वाति तो ठहरीं ट्रोल।

और ट्रोल स्वाति अगर एक बार बकवास कर ले ‘तो फिर वो अपने आप की भी नहीं सुनतीं’, सुन लें तो कहीं लोग समझदार न समझ बैठें! तो गलत साबित होने के बाद भी अपने बकवास कमेंट को सही साबित करने में लगी रहीं।

यहाँ तक कि लोगों को ही मोदी की ‘गलती’ को डिफेंड करने से रोकती रहीं। जबकि मामला यहाँ उल्टा है।

ऐसा जड़ दिमाग देखकर लगता है कि क्या ट्रोल स्वाति ने कभी भी महात्मा गाँधी के जन्म स्थान पोरबंदर के बारे में नहीं सुना। ‘बांद्रा’ मुंबई जो ‘बन्दर’ अर्थात पोर्ट से ही बना है। तब तो ट्रोल स्वाति के लिए मुंबई के ‘मस्जिद बन्दर’ का क्या मतलब हुआ? एक ऐसा मस्जिद जो बंदरों के लिए डेडिकेटेड है?

कुल मिलाकर, गालीबाज ट्रोल ने इस एडिटेड वीडियो से एक बार फिर अपनी बकलोली का परिचय दिया है। और यह भी कि अभी फेक न्यूज़ का धंधा थोड़ा मंदा चल रहा है तो ऐसे एडिटेड वीडियो पर अपनी बकलोली को डिफेंड करके अपनी काल्पनिक ‘निष्पक्ष’ पत्रकारिता का परिचय दिया है। वैसे आज भी कई खोजी पत्रकार लगे हैं कि ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी जैसी हाई लेवल की बकलोली की क्षमता आखिर आती कहाँ से है?

होटल के कमरे का दरवाज़ा तोड़ बंगाल पुलिस ने BJP नेता को किया गिरफ़्तार, TMC ने बताया ‘बाहरी’

बंगाल का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। जैसा कि हमनें रिपोर्ट किया था, तेजिंदर बग्गा सहित कई भाजपा नेताओं को तृणमूल सरकार ने रातोंरात उठवा लिया। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा चूँकि हिरासत में थे, गिरफ़्तारी कैसे की गई और किन मामलों के तहत ये कार्रवाई हुई? तेजिंदर बग्गा के लिए ट्विटर पर एक बड़ा अभियान चला, जिसमें ‘फ्री तेजिंदर बग्गा’ हैशटैग के माध्यम से ममता सरकार पर निशाना साधा गया। बग्गा ने रिहा होते ही कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि बंगाल पुलिस ने रात को होटल के कमरे का दरवाज़ा तोड़ कर उन्हें गिरफ़्तार किया। साथ ही बग्गा ने टूटे दरवाज़े की फोटो क्लिक कर ट्विटर पर शेयर किया। यह कार्रवाई रात के 2 बजे की गई।

तेजिंदर बग्गा ने पश्चिम बंगाल में ताज़ा हालात की तुलना आपातकाल से की है। वो चुनाव प्रचार करने और अमित शाह के रोड शो में हिस्सा लेने कोलकाता गए थे लेकिन उन्हें रात में उठा लिया गया। बग्गा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से लेकर हर जगह ऐसी तस्वीर ढूँढी गई, जहाँ उनके किसी प्रकार की हिंसा में शामिल होने के कोई सबूत मिले लेकिन बंगाल पुलिस को अंततः निराशा हाथ लगी। उधर तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बग्गा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी को भी जुलूस निकालने की इजाजत है लेकिन इसमें बाहरी लोग शामिल थे। तेजिंदर बग्गा को बाहरी बताते हुए उन्होंने पूछा कि आख़िर यह व्यक्ति है कौन?

राज्यसभा सांसद डेरेक ने पूछा कि क्या बग्गा वही व्यक्ति नहीं है, जिसनें दिल्ली में किसी को थप्पड़ मारा था? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ‘बाहरी गुंडे’ बुलाकर माहौल ख़राब कर रही है। डेरेक के बयानों का जवाब देते हुए बग्गा ने कहा कि उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने डेरेक को चुनौती दी कि वे साबित कर दें कि मैं हिंसा भड़कने वाली जगह के 500 मीटर के भी दायरे में था। उन्होंने अपनी बात ग़लत साबित होने पर राजनीति से संन्यास लेने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर डेरेक साबित नहीं कर पाते हैं तो क्या वह राजनीति छोड़ देंगे?

इस सभी प्रकरण के बीच आज बारासात में योगी आदित्यनाथ की भी रैली हुई, जिसमें उन्होंने कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस जिन्हें समर्थन कर रही है, वही लोग मूर्ति पूजा को नहीं मानते हैं। तृणमूल के गुंडे ही मूर्ति को तोड़ रहे हैं, इन्होंने ही ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ा। ये लोग जय श्री राम के नारे पर भी रोक लगा रहे हैं, ये दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा करने से दिक्कत है। मैंने यूपी में पूजा का समय नहीं बदला लेकिन मोहर्रम-ताजिया के जुलूस का समय बदलवा दिया था।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने पर बोल रहे थे। तृणमूल और भाजपा एक-दूसरे पर मूर्ति क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगा रही है।

डेरेक ओ ब्रायन ने अपनी नेत्री ममता बनर्जी द्वारा कही गई बातों का समर्थन करते हुए दावा किया कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान भाजपा के समर्थन में कार्य कर रहे हैं।