लोकसभा चुनाव का परिणाम कल (मई 23, 2019) को आने वाला है। एग्जिट पोल के हिसाब से बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। ऐसे में विपक्ष के कई नेताओं के खून खराबे के बयान के मद्देनज़र, और गृह मंत्रालय के आन्तरिक रिपोर्ट के आधार पर, राज्यों के DGP और मुख्य सचिव को कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।
गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आदेश में राज्यों को कहा गया कि वे मतगणना के दौरान स्ट्रॉग रूम और मतगणना के स्थानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय करें। लोकसभा चुनाव के मतों की गणना 23 मई को सुबह 8 बजे से होगी।
Ministry of Home Affairs alerts the State Chief Secretaries & DsGP regarding possibility of eruption of violence in different parts of the country in connection with the counting of votes tomorrow. MHA asks States and UTs to maintain law & order, peace & public tranquility. pic.twitter.com/0rZ9TNsC2b
गृह मंत्रालय का अलर्ट ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “वोट की रक्षा के लिए जरूरत पड़े तो हथियार भी उठाना चाहिए।” केंद्रीय मंत्री और बिहार में बीजेपी के सहयोगी राम विलास पासवान ने कुशवाहा की चेतावनी पर जैसे को तैसा वाली जवाबी कार्यवाही की बात कही है।
States/UTs were further asked to take adequate measures for the security of strong rooms and venues of counting of votes. This is in the wake of calls given and statements made in various quarters for inciting violence and causing disruption on the day of counting of votes. https://t.co/1A8T5cCgoO
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले पाँच साल तक देश में शांतिपूर्ण माहौल के मद्देनज़र, इस समय एग्जिट पोल से विपक्ष में उपजी हताशा को ध्यान में रखकर, किसी तरह की हिंसा को रोकने के लिए, पहले से ही सावधानी बरतने की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है।
लोकतंत्र के त्यौहार का आखिरी चरण यानी, काउंटिंग और नतीजे आने में 24 घंटे से भी कम समय बाकी है। यदि एग्जिट पोल की मानें तो कॉन्ग्रेस मुक्त भारत जैसे नारे देने वाले नरेंद्र मोदी इस लक्ष्य में लगभग सफल होते दिख रहे हैं। लेकिन, देश को कॉन्ग्रेस मुक्त करने में जो भूमिका खुद कॉन्ग्रेस ने निभाई है, उसका मूल्य भाजपा शायद ही कभी अदा कर पाएगी।
हालात ये हैं कि आज के समय में इस देश में विपक्ष का योगदान मात्र मजाक परोसने तक सीमित हो चुका है। साधारण शब्दों में कहें तो विपक्ष यानी, कॉन्ग्रेस यानी भरपूर हास्य और मनोरंजन का पर्याय बन कर रह गई है।
अगर हम याद करें तो एक ओर जहाँ भाजपा लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिर्फ और सिर्फ जनता के मुद्दों को प्रमुख मानती रही वहीं, दूसरी ओर विपक्ष अपनी सारी ऊर्जा मोदी घृणा में व्यर्थ करती नजर आई। आखिरकार नतीजा ये निकला कि मोदी एक महामानव के रूप में स्थापित हो गए और विपक्ष मात्र एक ट्रोल और हास्य का विषय बनकर सिमटता ही चला गया।
यूट्यूब पर अपने व्यूअर्स की संख्या पर स्खलित हो रहे निष्पक्ष पत्रकारों के मुखिया से लेकर विपक्ष के मुखिया अगर इतने नालायक, निकम्मे, निठल्ले और एक नंबर के लपड़झंडू साबित हो रहे हैं तो इसके पीछे मात्र उनकी दिन-रात की मेहनत ही है। दिन-रात संस्थाओं को कोसना, सुई से लेकर सब्बल तक में मोदी और अम्बानी करना, मोदी की विदेश यात्राओं से लेकर उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स की ताक-झाँक करना, इन चार-पाँच सालों में इन सबके पास इतना वक़्त ही कहाँ बचता था कि वो वास्तविक मुद्दों को तलाश पाते।
मोदी सरकार के दौरान असहिष्णुता से लेकर फर्जी बेरोजगारी का नैरेटिव तैयार करने में, पहले कॉन्ग्रेस और आखिर में महागठबंधन की गोदी में जाकर बैठे ट्रोलाचार्य रवीश कुमार से लेकर नाकाम कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी तक, सबका लक्ष्य नरेंद्र मोदी ही नजर आए। विधानसभा चुनावों में जब-जब कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी की जीत हुई, तब-तब लोकतंत्र की जीत बताई गई। निष्पक्ष पत्रकार रवीश कुमार का वश चलता तो 3 राज्यों, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भाजपा की हार पर अपने प्राइम टाइम शो के दौरान ही मारे ख़ुशी के दर्शकों को 2-4 बंदरगुलाटी मार कर दिखा देते। ज्यूँ-त्यूँ, बड़ी मुश्किलों से वो खुद को निष्पक्ष दिखा पाए।
यही हाल मीडिया और विपक्ष का तब था जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की प्रत्याशित जीत हुई। रवीश कुमार का अपनी कुटिल और धूर्त मुस्कान के साथ पहला सवाल अपने प्राइम टाइम में यही था, “क्या ये नरेंद्र मोदी की हार है? क्या मोदी अपनी हार स्वीकार करने के लिए आएँगे?”
ये कुछ उदाहरण तब के हैं, जब भाजपा या ये कहें कि मोदी सरकार के दौरान भाजपा की हार हुई। इसी बीच यदा-कदा, जब भाजपा ने विधानसभा चुनाव और उपचुनाव जीते, तब तुरंत मीडिया चैनल्स से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच शोक सभाएँ और विलाप देखने को मिले।
ग़दर : एक EVM कथा
हक़ीक़त यही है कि भाजपा की जीत के बाद विपक्ष ने अपनी हार कभी स्वीकार नहीं की। जनादेश से मिली हुई हार को स्वीकार ना करते हुए विपक्ष हमेशा EVM की गड़बड़ियों और आसमानी मुद्दों को जिम्मेदार ठहरा कर जनता के जनादेश का तिरस्कार ही करता नजर आया। मोदी सरकार की नीतियों से लाभ ले रहे लोग जब मतदान करने जा रहे थे, उस वक़्त कॉन्ग्रेस सस्ते कॉमेडियंस को तलाशकर मोदी पर भद्दे, घटिया और निम्नस्तरीय चुटकुलों द्वारा जनता का मन जीतने का प्रयास करते नजर आए। सत्तापरस्त कॉन्ग्रेस की छटपटाहट और व्याकुलता मात्र इन 5 सालों में ही बेनक़ाब होकर बाहर आई है।
कॉन्ग्रेस जनादेश को EVM से छेड़छाड़ बताकर लगातार जनादेश का अपमान करती नजर आई। विपक्ष ने मोदी सरकार की छवि ख़राब करने के लिए डिक्शनरी के उन पन्नों के मुहावरों को भुनाने का प्रयास किया, जिन पर कॉन्ग्रेस के राज्य में दीमक लग चुके थे। नतीजा ये रहा कि नालायक विपक्ष द्वारा तैयार किए गए फासिस्ट, भक्त, दलित पर अत्याचार, अल्पसंख्यकों में डर का माहौल, EVM हैक, बिकी हुई मीडिया, कट्टर हिन्दू जैसे नैरेटिव नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के बजाए उन्हें महामानव बनाते चले गए। इससे यही साबित हुआ कि जनता समझ चुकी है कि कॉन्ग्रेस मुद्दों की कमी से जूझ रही है और ये नैरेटिव ही उसके पास होने वाली दुर्गति से बचने का एकमात्र तरीका बाकी रह गया है।
इस निठल्ले विपक्ष की ही मेहरबानी है कि एग्जिट पोल के बाद सबसे ज्यादा व्यंग्य और हास्य ही लोगों को पसंद आ रहे हैं और उन्हीं व्यंग्य के माध्यम से की जाने वाली भविष्यवाणियाँ सच साबित होती जा रही हैं। यह दुर्भाग्य है कि विपक्ष द्वारा असहिष्णुता, सेक्युलर, लोकतंत्र, सुप्रीम कोर्ट आदि नामों को मजाक का एक जरिया बनाकर रख दिया है। कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट्स की मानें तो राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जो भाजपा की हार थी, वो हार भी अब भाजपा की साजिश साबित की जाने लगी है। इन सभी उदाहरणों को इकठ्ठा करते हुए आप सोचिए कि मोदी को आखिर इतना ताकतववार अगर विपक्ष ने नहीं तो फिर किसने बनाया है?
विपक्ष के अनुसार मोदी जब और जो चाहें वैसा कर सकते हैं। मेरा मानना है कि “मोदी है तो मुमकिन है” जैसे चुनावी नारे भी भाजपा को चुपके से कॉन्ग्रेस ने ही उपलब्ध कराए हैं। विपक्ष को जब इतना विश्वास मोदी में है ही तो शायद यह सही समय है जब उन्हें नरेंद्र मोदी के सामने घुटने टेक कर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। साथ ही, यह कहना चाहिए कि प्रभु हम भी आपकी शरण में हैं आप ही सर्वशक्तिमान हैं… और टंटा ही ख़तम!
कुछ भविष्यवाणियाँ जो, या तो सच साबित हो चुकी हैं या फिर सच साबित होने के कगार पर हैं
एग्जिट पोल के बाद से विपक्ष ने एक तरह से अपनी हार स्वीकार कर ली है और हार का ठीकरा फोड़ने के लिए व बीजेपी की संभावित जीत को, मतदाताओं के मत को, धता बता कर EVM का राग अलापना शुरू कर दिया है।
इसमें मीडिया गिरोह के कुछ पत्रकार भी ऐसे राजनीतिक पार्टियों के झूठ में सुर मिला रहे हैं। जबकि इन्हें ठीक से पता है कि इनका यह आरोप बोगस और झूठ के पुलिंदे के सिवा कुछ नहीं है।
खैर अब राजदीप जैसे कुछ उनके गिरोह के पत्रकार भी यह खुलकर स्वीकार करने लगे हैं कि इन नेताओं की अपील निराधार है। साथ ही, राजदीप ने आजतक के ही यूट्यूब चैनल दिल्ली तक को दिए एक शॉर्ट इंटरव्यू में कहा भी कि नेताओं को ऐसे झूठे आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए कि इस तरह से अपनी राजनीति के लिए ये जनता के मन में संदेह के बीज बो रहे हैं। जबकि पिछले चुनावों में जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इन पार्टियों के नेताओं ने जीत दर्ज की तो EVM ठीक थी। और अब जब जनता द्वारा नकारे जाने के आसार नज़र आ रहे हैं। तो वही EVM खराबी के राग फिर से छेड़ा जाने लगा।
जबकि चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि जो EVM दिखाई दे रहे है वो रिज़र्व EVM है, जिनका मतगणना में इस्तेमाल नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है कि यह सब नया है सबको पता है पर चूँकि EVM हैंकिंग वाला नैरेटिव काम नहीं किया तो नए नैरेटिव कि EVM बदला जा रहा है, को जान बूझकर हवा दे रहे हैं।
हालाँकि, राजदीप ने यह भी जोड़ा कि चुनाव आयोग को कम से कम 50 % तक VVPAT मिलान की अनुमति दे देनी चाहिए। ताकि जो संदेह पैदा किया जा रहा है वह ख़त्म हो सके। जबकि इस माँग को सुप्रीम कोर्ट भी ख़ारिज कर चुका है।
एक दूसरे वीडियो में राजदीप अपने बनारस के ग्राउंड रिपोर्टिंग के आधार पर बनारस के मोदी काल के परिवर्तन पर बात कर रहे हैं। उन्हें साफ कहते सुना जा सकता है बनारस में काफी परिवर्तन आया है, चौड़ी सड़कें, घाटों की साफ-सफाई से लेकर कई मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने बनारस से मोदी के वॉकओवर की घोषणा कर दी।
राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी इच्छित नतीजे न आने के बाद क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की धमकी दी है। सीताराम येचुरी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ काम कर रहा है। दरअसल, चुनाव आयोग ने मतगणना की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से मना कर दिया। चुनाव आयोग द्वारा विपक्ष की माँगों को खारिज़ करते हुए मतगणना प्रक्रिया में बदलाव से इनकार करने के बाद वामपंथी नेता सीताराम येचुरी भड़क उठे और उन्होंने ट्वीट कर लिखा:
“यह चुनाव शुरू होने से पहले वीवीपैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के ख़िलाफ़ है। अगर चुनाव की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया इतने लम्बे समय तक खींची गई, तो चुनाव आयोग पहले सैम्पल को टेस्ट करने से इनकार क्यों कर रहा है? वीवीपैट और ईवीएम पर्चियों का मिलान मतगणना शुरू होने से पहले की जानी चाहिए। ट्रेंड्स जारी हो जाने के बाद ये प्रकिया निष्फल हो जाएगी। इसके कारण प्रभावित उम्मीदवार विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके कारण क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।”
Integrity of EVMs by matching with sample VVPATs has to be done at the start of the counting. Doing so after the trends are declared makes it infructuous and is likely to lead to protests and a possible law and order situation from the affected candidates. https://t.co/Aj3zN2wFUT
सीताराम येचुरी की पार्टी सीपीएम ने भी चुनाव आयोग के निर्णय पर निराशा जताई है। बता दें कि विपक्ष की माँगों को सुप्रीम कोर्ट भी ठुकरा चुका है। वीवीपैट को लेकर एक एनजीओ द्वारा दाखिल किए गए पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे लोकतंत्र का मज़ाक बना रहे हैं। अदालत ने पहले कहा था कि प्रति विधानसभा पाँच पोलिंग बूथों के ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों के साथ मिलान किया जाएगा। बाद में एनजीओ द्वारा दाखिल की गई याचिका को कोर्ट ने अनैतिक करार दिया। अदालत का मानना था कि जब उन्होंने फ़ैसला दे ही दिया, फिर इस तरह के पीआईएल दाखिल करने का औचित्य ही क्या है?
विपक्ष के नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल बना कर चुनाव आयोग से मुलाक़ात की थी। इच्छित परिणाम न आने पर रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी ख़ूनख़राबे की धमकी दी है। उपेंद्र कुशवाहा की इस धमकी पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि जैसे को तैसा (Tit For Tat) जवाब दिया जाएगा। लोजपा सुप्रीमो पासवान ने कहा कि राजग के लोग भी तैयार हैं। ऐसा उन्होंने राजग के घटक दलों की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए कहा।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 22 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले में गिरफ़्तार एक कथित रक्षा एजेंट सुषेन मोहन गुप्ता के ख़िलाफ़ दिल्ली की अदालत में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया है।
ख़बर के अनुसार, एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष श्री गुप्ता के ख़िलाफ़ पूरक आरोप पत्र दायर किया। उन्हें ED ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया था।
Agusta Westland Money laundering case: Sushen Mohan Gupta has also moved a bail application in the court. Court seeks reply of Enforcement Directorate. Hearing to be held tomorrow. https://t.co/lhvZmaWv5q
ED ने कहा था कि इस मामले में श्री गुप्ता की भूमिका राजीव सक्सेना द्वारा किए गए ख़ुलासे के आधार पर सामने आई थी, जिसे UAE से निकाले जाने और नई दिल्ली में एजेंसी द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बाद इस मामले में अपनी सहमति दे दी थी।
ऐसा संदेह है कि श्री गुप्ता के पास अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलिकॉप्टरों की ख़रीद के लिए 3,600 करोड़ रुपए के सौदे के भुगतान का विवरण मौजूद है।
देश में इस समय भाजपा और मोदी की ‘लहर’ किस कदर चल रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कॉन्ग्रेस के द्वारा कराया गया एग्जिट पोल भी कह रहा है, “आएगा तो मोदी ही!” और इतने के बावजूद राहुल गाँधी एग्जिट पोल्स को फर्जी बता कर अपने समर्थकों को अंतिम ढाँढ़स बँधा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के प्रिय कार्यकर्ताओं ,
अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण हैं। सतर्क और चौकन्ना रहें। डरे नहीं। आप सत्य के लिए लड़ रहे हैं । फर्जी एग्जिट पोल के दुष्प्रचार से निराश न हो। खुद पर और कांग्रेस पार्टी पर विश्वास रखें, आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
कॉन्ग्रेस का खुद का एग्जिट पोल भाजपा-नीत एनडीए को 272 के बहुमत के आँकड़े के करीब 230 के आस-पास सीटें दे रहा है। भाजपा को भी 200 के करीब सीटें मिलने की उम्मीद है। इसके उलट पूरा यूपीए मिल कर भी इस सर्वे में 200 का आँकड़ा नहीं छू पा रहा है। कॉन्ग्रेस खुद 140 पर सिमटती हुई नजर आ रही है।
सारे एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में
19 मई को अंतिम चरण का मतदान ख़त्म होने के बाद जारी हुए सारे-के-सारे एग्जिट पोल भाजपा की ही सरकारें अनुमानित कर रहे हैं। अधिकाँश में एनडीए खुद ही बहुमत के आँकड़े को आराम से पार कर 300 के करीब भी पहुँच ही रहा है। इस बीच निराश और हताश विपक्ष ने निर्वाचन आयोग और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से लेकर हिंसा की धमकी तक की प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने राजनीतिक ‘प्रवचन’ में शालीनता की सारी हदें पार करते हुए अपनी एक अलग पहचान बना ली है। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने में अब 24 घंटे से भी कम का समय रह गया है। लेकिन, AAP पार्टी के नेता अपनी हताशा के चरम पर जा पहुँचे हैं।
AAP के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने आज रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर की। इसमें अर्नब EVM हैकिंग को लेकर विपक्षी दलों पर तंज कसते नज़र आए।
इस पर, आरजेडी सांसद ने चुटकी लेते हुए लिखा कि आगरा के पागलखाने में सीमित जगह है। इस पर संजय सिंह ने जवाबी टिप्पणी करते हुए लिखा, “फिर कुछ भी करिए सर अंडमान ही लेते जाइए या हिंद महासागर में छोड़ आइए।” आपकी जानकारी के लिए यहाँ बता दें कि अंडमान सेलुलर जेल के लिए प्रसिद्ध है और हिंद महासागर शब्द का इस्तेमाल डूब जाने के लिए किया गया है।
फिर कुछ भी करिये सर अंडमान ही लेते जाइये या हिंद महासागर में छोड़ आइये।
संजय सिंह अक्सर न्यायपालिका के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करते रहते हैं। हाल ही में AAP को बड़ा झटका तब लगा था, जब सुप्रीम कोर्ट ने AAP के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, क्योंकि शीर्ष अदालत ने पाया कि संजय सिंह द्वारा न्यायपालिका के ख़िलाफ़ दिए गए उनके पहले के बयान अपमानजनक थे।
दिल्ली में सत्ता के बँटवारे के फ़ैसले के बाद संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए, सिंह ने हिन्दी में ट्वीट किया था, “क्या सुप्रीम कोर्ट मोदी जी के हितों के ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं सुनाता? केंद्र सरकार ने राफ़ेल (सौदा) में भ्रष्टाचार पर अदालत में झूठ बोला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट चुप था। क्या सुप्रीम कोर्ट ने CBI पर कोई फ़ैसला दिया था या वो मजाक था? दिल्ली के करोड़ों लोगों की भावनाओं के साथ खेला गया। क्या यह सुप्रीम कोर्ट या तहसील का स्थानीय न्यायालय है?” एक अलग ट्वीट में उन्होंने पूछा था कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गरिमा खो दी है?
ईवीएम की महिमा अपरम्पार है। ईवीएम महान है। ईवीएम आज किसी भी समयकाल में सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसे लेकर तरह-तरह के दावे हो रहे हैं। इन दावों को सुन कर लगता है कि जैसे ये मशीन न होकर कोई किसी रोबोट रूपी देवता का अवतार हो। जैसे भवान विष्णु ने राम के रूप में धरती पर क़दम रखा था और उनके विश्वस्त शेषनाग ने लक्षमण के नाम से अवतरित होकर उनके छोटे भाई का किरदार अदा किया था, ठीक वैसे ही मोदी और ईवीएम का भी कोई रिश्ता है। हो सकता है मोदी भी किसी ऐसे देवता के अवतार हों, जिनके विश्वस्त और वफ़ादार ने ईवीएम का रूप लेकर धरा पर क़दम रखा हो। मोदी और ईवीएम के रिश्ते समझने के लिए विपक्षी नेताओं के दावों, बयानों और डर को समझना पड़ेगा। मोदी न तो वैज्ञानिक हैं और न ही कोई तकनीकी विशेषज्ञ, फिर भी ईवीएम उनके इशारों पर नाचता है।
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार अभी देश के सबसे वरिष्ठ, अनुभवी और माहिर नेताओं में से एक रहे हैं। अगर वो कुछ कहते हैं तो ध्यान से सुना जाना चाहिए। पिछले पॉंच दशकों से भी अधिक समय से देश की चुनावी राजनीति में सक्रिय पवार ने बारामती में वोट गिराने के बाद एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि एक्सपेरिमेंट के तौर पर हैदराबाद में ‘कुछ लोगों’ ने उनके सामने एक ईवीएम रखा और वोट डालने को कहा। जब उन्होंने अपनी पार्टी का बटन दबाया तो वोट भाजपा को चला गया। अब ‘कुछ लोगों’ ने पवार के सामने ‘क्या’ पेश किया था, ये तो वो ही लोग जानें, लेकिन एक बात तो साफ़ है कि पवार को दक्षिण मुंबई संसदीय क्षेत्र में ऐसी कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा होगा।
पवार ने साउथ मुंबई लोकसभा क्षेत्र में मतदान किया। यहाँ न तो एनसीपी के प्रत्याशी खड़े हैं और न ही भाजपा के। इस सीट पर लड़ाई शिवसेना के अरविन्द गणपत सावंत और कॉन्ग्रेस के मिलिंद देवड़ा में है। पवार को निश्चिन्त रहना चाहिए क्योंकि साउथ मुंबई में उनका वोट भाजपा को जा ही नहीं सकता है। आगे बढ़ते हैं। कभी वाईफाई से ईवीएम हैक करने की बात कही गई, तो कभी ब्लूटूथ से ईवीएम को नियंत्रित करने की अफवाह उड़ी। क्या अगर कोई व्यक्ति अपने ब्लूटूथ डिवाइस का नाम ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ रख लेना तो यह माना जाए कि वह यहाँ दिल्ली के साकेत में अपने चार बाई चार के कमरे में बैठे-बैठे अमेरिका के राष्ट्रपति को अपनी उँगलियों पर नचा रहा है?
अगर नियंत्रण करने की ही बात है तो उसके लिए वाईफाई और ब्लूटूथ की ज़रूरत नहीं होती। सोनिया और मनमोहन को ही उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है। ऐसी हैकिंग आज तक नहीं देखी गई। कुछ दिनों बाद हो सकता है कि विपक्ष को ये भी लगने लगे कि मोदी तंत्र साधना कर के ईवीएम को हैक कर रहे हैं। इधर मोदी ने केदारनाथ की गुफा से ध्यान लगाया और उधर ईवीएम के सारे वोट भाजपा को ट्रांसफर। खटैक! तो फिर ऐसे हालात में विपक्ष को क्या करना चाहिए? उपाय क्या है? जब आरोप फ़िल्मी लग रहे हैं तो उपाय भी फ़िल्मी ही होना चाहिए। कहते हैं मंत्र-तंत्र में हर समस्या का समाधान है। क्या पता मोदी ने ईवीएम के भीतर कोई पिशाच छोड़ दिया हो?
भूल-भुलैया फ़िल्म में ‘छोटा पंडित’ ने महल में भूत को कंट्रोल करने के लिए एक कमरे को विशेष मन्त्रों द्वारा सील करने की कोशिश की थी। विपक्षी नेताओं को भी कोई ऐसा ही तांत्रिक हायर करना चाहिए, छोटा पंडित की तरह। चुनाव आयोग से माँग की जानी चाहिए कि ईवीएम को मतदान के तुरंत बाद लाल चुनरी में लपेट कर उसे विशेष लॉकेट और पवित्र धागों का प्रयोग कर के सील करना चाहिए, ताकि मोदी द्वारा हायर किए गए भूत-पिशाच वोटों की हेराफेरी न कर सकें। या फिर विज्ञान में विश्वास रखने वाले विपक्ष के नेता भूल-भुलैया के अक्षय कुमार की तरह विदेश से किसी मनोचिकित्सक को बुलाना चाहिए, जो ईवीएम में से इन गड़बड़ियों को दूर कर सके।
चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर अगर आपको विश्वास नहीं है तो कुछ लीक से हटकर उपाय करने पड़ेंगे। अगर ईवीएम सेक्युलर है और वामपंथियों को मंत्र-तंत्रों में विश्वास नहीं है तो अजमेर शरीफ दरगाह से ताबीज़ लाकर उसे बाँधा जा सकता है। चुनाव आयोग को एक ज्ञापन दिया जाना चाहिए कि प्रत्येक ईवीएम को प्रयोग किए जाने से पहले जामा मस्जिद के इमाम और देवबंद के मुफ़्ती से सभी मशीनों का प्रमाणीकरण कराना चाहिए, इससे मतगणना के समय किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ कर सम्बंधित फतवा जारी किया जा सकता है। अधिक सेक्युलर वामपंथी यह माँग कर सकते हैं कि चुनाव से पहले मतदानकर्मियों द्वारा ईवीएम लेकर चर्च में ‘वैसा वाला’ पागलपन किया जाए, जिसके वीडिओज़ अक्सर वायरल होते रहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन्हें बार-बार निराश किया जा रहा है। ‘सबसे बड़े दलित नेता’ उदित राज ने तो सुप्रीम कोर्ट को ही खरी-खोटी सुनाई है। चुनाव आयोग तो भला कई दिनों से इनकी गालियाँ खा रहा है। जिस चुनाव आयोग की विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा होती है, उसी चुनाव आयोग की अपने ही देश में हर मिनट आलोचना हो रही है, आरोप लगाए जा रहे हैं और अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा लाख समझाने के बावजूद विधानसभा में खिलौनों को हैक कर ईवीएम को हैक करने का दावा करने वाले नेता अड़े हुए हैं। फिर उपाय ही क्या बचता है? नकाबपोश सूजा ईवीएम को लेकर अजीबोगरीब दावे कर ईवीएम एक्सपर्ट बन बैठा है।
अगर इतनी गंभीर और तथ्यपरक बातें उन्हें समझ नहीं आ रही हैं तो इसका सीधा अर्थ है कि विपक्षी नेताओं को लगता है कि कुछ अजीब हुआ है। हो सकता है उन्होंने ‘तिरंगा’ फ़िल्म देख रखी हो। गैंडास्वामी की मिसाइलों का फ्यूज निकाल कर राजकुमार ने दुश्मन के इरादों को तबाह कर दिया था। कहीं मोदी भी कुछ ऐसा ही तो नहीं कर रहे? कहीं वो मतदान के बाद डायरेक्ट ईवीएम के सारे फ्यूज ही तो नहीं निकाल लेते हैं, तिरंगा वाले राजकुमार की तरह। या फिर ऐसे विपक्षी नेता, जिन्हें वीवीपैट पर भी विश्वास नहीं है और वो अलग ही लेवल पर पहुँच चुके हैं, उनके लिए आयोग को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
ऐसे नेताओं को ईवीएम का नट-बोल्ट खोलने के लिए पेचकस और पिलास दे देना चाहिए ताकि वे वोट देने के बाद ईवीएम को खोलें और अंदर झाँक कर देख सकें कि आख़िर उनका वोट गया कहाँ, किस पार्टी को गया। ये नेता वोट देने के बाद ईवीएम को खोलेंगे, झाँक कर देख लेंगे कि उनका वोट इच्छित पार्टी को गया है या नहीं और फिर उसे वापस पेचकस से कस सकते हैं। नेताओं को लगता है कि ईवीएम के भीतर तार हैं और वो तार सीधे मोदी से जुड़े हुए हैं। कहावत सच्चाई का रूप ले रही है। छोटा पंडित वाला उपाय किया जाए, मजार से ताबीजें लाई जाए या फिर ये तिरंगा वाला मामला है, ये तो समय विपक्षी नेताओं को ही तय करना चाहिए।
कभी सपा के जंगलराज में भागीदार के रूप में बदनाम रही यूपी की पुलिस ने अपराधियों में आज कैसा खौफ बैठा दिया है, इसकी एक बानगी अभी-अभी सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में एक बिजनेसमैन के बच्चे को अगवा करने वाले अपराधी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में आने के डर से खुद को गोली मार ली है। अपराधी उस बिजनेसमैन का ही पूर्व ड्राइवर बताया जा रहा है।
So, a businessman’s child was kidnapped for Rs 3 crore ransom by his ex driver in Prayagraj. However, seeing @Uppolice, the kidnapper shot himself dead.
ट्वीट करने वाले राज शेखर झा टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार हैं। उनके अनुसार बिजनेसमैन से ₹3 करोड़ की फिरौती माँगी गई थी। उन्होंने पुलिस को इत्तला कर दी, और पुलिस ने उस किडनैपर को ढूँढ़ निकाला। बच्चे को उसके परिवार के पास सुरक्षित पहुँचा दिया गया है।
गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ के प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद से यूपी की कानून व्यवस्था में काफी सुधार आया है। पुलिस के 63 दुर्दांत अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराने और 650 को घायल करने के बाद लगभग 10,000 ने अपनी जमानत रद्द करा कर जेल लौटने में ही भलाई समझी।
हमने एग्जिट पोल के दिन ही बताया था कि कैसे आसन्न हार के डर से नेताओं से ज्यादा पत्रकारिता के समुदाय विशेष के मुँह से झाग निकलना शुरू हो गया है। और अब जबकि मतदान का परिणाम घोषित होने में बमुश्किल एक दिन बचा है, तो इनकी हालत और गंभीर होती जा रही है। झूठा नैरेटिव बनाना तो इनकी फितरत ही है, लेकिन अब यह आँकड़े भी अनर्गल बनाने पर उतारू हो गए हैं। सबा नकवी ने 20 लाख EVM मशीनें गायब होने का दावा करते हुए शेयर किया:
आज गणित भूले हैं, कल क्या भाषा भी भूल कर अब्बा-जब्बा-डब्बा करेंगे ये लोग?
यह रिपोर्ट ‘जनता का रिपोर्टर’ नामक प्रोपेगैंडा ब्लॉग की है, जिस पर अकसर आम आदमी पार्टी का अघोषित मुखपत्र होने के आरोप लगते हैं। अब बाकी सब चीज़ें छोड़ कर खाली 20 लाख के दावे को देखें। 1 EVM में 2,000 वोट रिकॉर्ड करने की क्षमता होती है। यानी 20 लाख EVM निर्वाचन आयोग के पास होने का अर्थ हुआ 20,00,000 X 2,000 यानी कि 400 करोड़ वोट!
अब जरा सबा नकवी बताएँगी कि निर्वाचन आयोग कुल 90 करोड़ की वोटिंग आबादी, जिसमें से एक-तिहाई कभी भी वोट डालने नहीं निकले (अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत 67 प्रतिशत के आसपास है), में भला क्यों कुल वोटरों की संख्या के साढ़े चार गुना EVM का इंतजाम करेगा। मोदी विरोध में यह लोग दिमाग से इतने पैदल हो चुके हैं कि प्राइमरी स्कूल स्तर की गणित भी सर के ऊपर से उड़ रही है। पत्रकारिता के समुदाय विशेष को सच में हिमालय जाकर अपनी मानसिक स्थिति का इलाज कराना चाहिए।