‘माँ’ की लाश, बगल में 1 साल की बच्ची और 4 दिन की ‘जंग’: चमत्कार है गुड़िया का बचना

1 साल की बच्ची। बगल में माँ की लाश। 4 दिनों तक न माँ का दूध न पानी ही नसीब। लेकिन जीवटता ऐसी कि 'चमत्कार' को आना पड़ा इस बच्ची की जान बचाने।

बागपत के अस्पताल में भर्ती एक साल की गुड़िया का जीवन किसी वरदान से कम नहीं। बच्ची के सिर पर पट्टी बँधी है। वो पिछले चार दिनों से भूख-प्यास की जंग जीतकर अस्पताल तक लाई गई। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, इस बच्ची को अस्पताल में लाए हुए चार दिन हो गए हैं। इसकी माँ कौन है, नहीं पता। यह बच्ची खुद कौन है, नहीं पता। कहानी बहुत मार्मिक है इस बच्ची की।

उत्तर प्रदेश के बागपत के एक खेत में एक महिला की लाश मिली। लाश चार दिन पुरानी, सड़ी-गली। लाश के पास ही यह एक साल की बच्ची चार दिनों तक भूख-प्यास से लड़ती रही। इस बीच दो दिनों की बारिश भी झेली, बादलों की गर्जना भी। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि मृतका शायद इस बच्ची की माँ है। पुलिस के अनुसार, बच्ची और माँ पर किसी नुकीली चीज से हमला किया गया था।

ख़बर के अनुसार, जब मृतका का शरीर सड़ने-गलने लगा, बारिश थम गई लेकिन भूख-प्यास हावी हुआ तो यह बच्ची रेंगते हुए, माँ का मोह छोड़ते हुए खेत से बाहर एक मंदिर के पास जा पहुँची। यहाँ कुछ भक्तों की नज़र इस बच्ची पर गई। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी और बच्ची को अस्पताल तक पहुँचाया।

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फ़िलहाल, बच्ची और माँ की पहचान का ख़ुलासा नहीं हो सका है, इसलिए अस्पताल के कर्मचारियों ने इस मासूम बच्ची को ‘गुड़िया’ नाम दे दिया। बड़ौत पुलिस स्टेशन की महिला कॉन्स्टेबल, रेखा नागर को इस बच्ची की देखभाल का ज़िम्मा सौंपा गया है।

रेखा नागर ने बताया, “मैं सुबह लगभग 10 बजे आती हूँ और रात को 9 बजे तक जाती हूँ। गुड़िया एक बहादुर और प्यारी बच्ची है। वह बच गई है और हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह बेहतर हो जाएगी। गुड़िया को पहले दिन लाने के बाद से उसकी स्थिति में सुधार हुआ है।” रेखा नागर खुद भी माँ हैं। उनका एक 5 साल का बच्चा भी है।

बागपत के आस्था मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि गुड़िया के माथे के बाएँ हिस्से में किसी नुकीली चीज से चोट के कारण घाव हो गया था। आस्था अस्पताल के डॉक्टर अजय गर्ग ने कहा, “हमने एक सीटी स्कैन किया और पाया कि बच्ची की सिर की हड्डी की संरचना को भी नुकसान पहुँचा है। यह एक प्रकार की चोट है, जिसे देखकर लगता है कि उसके सिर पर चोट की गई हो। सिर के घाव में संक्रमण के कारण, हम उसमें टाँके नहीं लगा सके। लेकिन, हमे उम्मीद है कि चोट जल्द ठीक हो जाएगी।”

इसके अलावा डॉक्टरों ने यह बताया कि बच्ची के शरीर में कीड़ों की वजह से संक्रमण हो गया था। नर्सों के अनुसार, वह भर्ती होने के बाद कई घंटों तक बेहोश रही और जागने के तुरंत बाद वह दूध और पानी की पूरी बोतल पी गई। इससे पता चलता है कि वो बहुत भूखी-प्यासी थी। डॉक्टरों ने बच्ची के घाव को ठीक करने के बाद एंटीबायटिक दवाओं का इस्तेमाल करके फैले संक्रमण का इलाज करने की योजना बनाई है, क्योंकि कीड़ों की वजह से गुड़िया को काफी नुकसान पहुँचा है।

कई लोग इस मासूम बच्ची को गोद लेना चाहते हैं। इसके लिए वो बाल कल्याण आयोग से भी संपर्क कर रहे हैं।

पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मृतका और बच्ची की पहचान का ख़ुलासा अब तक नहीं हो सका है। पुलिस ने अपनी कोशिशों में 25 गाँवों में पूछताछ की और ग्राम प्रधानों को महिला की तस्वीर भी दिखाई बावजूद इसके उन्हें कोई क़ामयाबी नहीं मिल सकी। दिल्ली से दो व्यक्ति एक बच्चे के बारे में पूछ रहे थे, लेकिन गुड़िया उनके बताए विवरण से मेल नहीं खाती है। महिला की हत्या की जाँच करने वाले अधिकारी धर्मेंद्र संधू ने बताया कि स्थानीय मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुपों पर बच्ची के संबंध में संदेश भेजे गए हैं। ताकी जल्द से जल्द इनकी पहचान उजागर हो सके।

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