शुक्रवार (मई 10, 2019 ) को कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा दक्षिण मुंबई स्थित मुंबादेवी मंदिर दर्शन करने पहुँचे। यहाँ से निकलते वक्त उन्हें मोदी समर्थकों का सामना करना पड़ा। उनको देखकर लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए। वाड्रा ने इस दौरान पत्रकारों से भी बातचीत की लेकिन इस बीच राजनैतिक मुद्दों को दूर रखा। उन्होंने राजनीति से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया।
रॉबर्ट वाड्रा के मुम्बादेवी मंदिर के दर्शन के दौरान लोगों ने लगाए “मोदी-मोदी” के नारे. देखिये @mustafashk की रिपोर्ट. #ReporterDiary
नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार मंदिर में वाड्रा दोपहर के करीब 12 बजे दर्शन के लिए पहुँचे थे। उनके पहुँचते ही उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। इस दौरान उन्होंने मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा की और मंदिर के गर्भ गृह की परिक्रमा की। दर्शन के उपरांत पत्रकारों ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री और उनके ससुर राजीव गाँधी पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा। इस पर वाड्रा जवाब देते हुए कहा कि मंदिर में राजनीतिक बातें नहीं की जानी चाहिए, वो मंदिर में मुंबा देवी दर्शन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, “यहाँ की जो महत्ता है, वह महसूस की जा सकती है। दर्शन करके बहुत अच्छा लग रहा है। अच्छा समय आने वाला है। जल्द ही पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आऊँगा।”
बता दें मुंबा देवी को मुंबई की इष्टदेवी माना जाता है। इन्हीं के नाम पर शहर का नाम भी पड़ा है। खबरों के मुताबिक वाड्रा के मंदिर पहुँचते ही वहाँ मीडियाकर्मियों को देख काफ़ी भीड़ जमी हो गई थी। वाड्रा जैसे ही बाहर निकले तो लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस मौक़े पर पहुँची और वाड्रा के जाने के लिए रास्ता खाली कराया। जब लोगों से नारेबाजी की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें एक बार फिर से देश में मोदी सरकार ही चाहिए इसलिए उन्होंने नारेबाजी की। कुछ मीडिया खबरें के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा को मंदिर में VIP दर्शन कराए जाने से लोगों को दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा।
रॉबर्ट जब मंदिर से बहार निकल रहे थे तो मौजूद भीड़ ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए.https://t.co/lVPqzdGgFt
भीड़ से यह भी पूछा गया कि क्या वे भाजपा के कार्यकर्ता हैं तो भीड़ ने बताया कि वे सभी भाजपा के समर्थक हैं उन लोगों ने खुद नारेबाजी की, उनसे किसी ने भी नारे लगाने को नहीं कहा था। इस घटना पर कॉन्ग्रेस के एक नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के समय राजनीतिक विरोध समझ आता है लेकिन अगर कोई मंदिर में दर्शन करने जाता है तो वहाँ पर इस तरह की नारेबाजी अशोभीय हैं।
लोकसभा चुनाव जारी हैं और ऐसे में सभी राजनेता और मतदाताओं के बीच तमाम चिंता के बीच एक सबसे बड़ी चिंता का कारण मणिशंकर अय्यर बने रहे। सवाल ये था कि भाजपा के स्टार प्रचारक आखिर मणिशंक्कर अय्यर हैं कहाँ? क्या राहुल गाँधी ही निभाएँगे कॉन्ग्रेस को हारने की जिम्मेदारी? लेकिन आज एक बड़ा खुलासा देखने को मिला है, जिसके बाद भाजपा मुख्यालय में ख़ुशी की लहार देखने को मिली है।
गौरतलब है कि हर दूसरे दिन अनाप-शनाप बयान देकर कॉन्ग्रेस पार्टी की फिजा में चार चाँद लगाने वाले मणिशंकर अय्यर इस लोकसभा चुनाव के दौरान कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ मनचले युवा ये निंदनीय दावा करते हुए भी पाए गए कि मणिशंकर अय्यर बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारे गए थे, जो कि एकदम निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण उम्मीद थी और इसकी जितनी ज्यादा निंदा की जाए कम ही है।
मणिशंकर अय्यर की गैरमौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया था: सूत्र
मणिशंक्कर अय्यर की गैरमौजूदगी के कारण भाजपा समेत कॉन्ग्रेस के तमाम विरोधी दलों में यह चिंता छा गई थी कि ऐसे में, जबकि मणिशंक्कर अय्यर कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में गायब है, तो अब कॉन्ग्रेस में रहते हुए ही कॉन्ग्रेस की कब्र आखिर कौन खोदेगा? हालाँकि, भाजपा के प्रमुख राष्ट्रीय प्रचारक राहुल गाँधी अभी भी कॉन्ग्रेस में भाजपा स्लीपर सेल के रूप में अध्यक्ष पद पर कायम हैं।
लेकिन ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने Faking News नामक वेबसाइट की ख़बरों का फैक्ट चेक कर के जीवनयापन कर प्रासंगिक बने रहने वाले फैक्ट चेकर्स के एक सचल दस्ते की मदद से एक ऐसे व्यक्ति पर निगाह रखने का ठेका दिया, जो अचानक से नजर आकर आजकल कॉन्ग्रेस की कब्र खोदने के लिए दिन-रात मेहनत करता नजर आ रहा था।
संदेहास्पद लग रहे इस व्यक्ति ने कभी सिख दंगों को ‘हुआ तो हुआ’ बताया, तो कभी मिडल क्लास को स्वार्थी बताया और यह भी बयान देते हुए देखा गया कि मोबाइल और कम्प्यूटर राजीव गाँधी ही अपने कन्धों पर ढोकर भारत लाए थे। इस से पहले कि ये व्यक्ति कहता कि जिन देशों में राजीव गाँधी ने जन्म नहीं लिया, वो आज भी मोबाइल और कंप्यूटर की एक झलक के लिए जूझ रहे हैं, ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल ने उसे धर लिया और उसके कारनामों का पर्दाफाश कर डाला। इसके लिए हमने ट्विटर के एक मनचले नागरिक @Atheist_Krishna की भी मदद ली।
यह व्यक्ति ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल के रडार में अपनी हरकतों की वजह से ही आया है। हमारे सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया कि यह व्यक्ति सुबह से शाम तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच ही रहकर उन्हीं के साथ घूम रहा है, लेकिन काम भाजपा का ही कर रहा है और अपनी ऊल-जुलूल हरकतों के कारण रोजाना चर्चा में बना है। इसी वजह से इस सज्जन पर हमारे सूत्रों को संदेह हुआ कि कहीं यही सज्जन तो मणिशंकर अय्यर नहीं!
इसी बीच, अपने सर पर सफ़ेद बालों का कटोरा लेकर घूमने वाले इस सज्जन के बारे में एक यह भी भ्रामक अफवाह सोशल मीडिया पर देखने को मिली कि यह तो अल्बर्ट आइन्स्टाइन है। लेकिन एक सोशल मीडिया यूजर ने इस तथ्य का Fact Check करते हुए भंडाफोड़ कर के बताया, “नहीं, सर पर सफेद बालों का टोकरा लेकर घूमने वाला हर आदमी नहीं होता है आइन्स्टाइन।” साथ ही उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा, “अलास! दैट डजन्ट हैपन।”
काश कि सफेद बालों का टोकरा लेकर घूमने वाला हर आदमी आइन्स्टाइन होता!
मणिशंक्कर जैसे काम करने वाले इस सज्जन की जानकारी इकठ्ठा करने पर हमें मालूम हुआ कि ये सेम पित्रोदा नहीं बल्कि सेम पित्रोदा की शक्ल में घूम रहे मणिशंकर अय्यर ही हैं। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब समाज में घृणा और नफरत फैलाने वाले यह उम्मीद लगा रहे थे कि मणिशंकर अय्यर बालाकोट एयरस्ट्राइक में ‘मसूद अजहर’ के साथ ही ‘निकल लिए’ हैं।
लेकिन, मणिशंकर अय्यर को सुरक्षित, स्वस्थ और कॉन्ग्रेस के बीच में देखकर भाजपा मुख्यालय में एक बार फिर ख़ुशी की लहर देखने को मिली है। मशहूर निष्पक्ष पत्थरकार सागरिका घोष ने बताया कि इसके बाद भाजपा कार्यालय में लोग एक दूसरे से ख़ुशी से बात कर रहे हैं, गले लगा रहे हैं, हवाओं में मोहब्बत के गीत घुल रहे हैं। हालाँकि, चिंता कि बात अब यह है कि जब ये व्यक्ति मणिशंक्कर अय्यर है, तो फिर भाजपा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस के वोट काटने के लिए सेम पित्रोदा को मतदाताओं के सामने क्यों नहीं ला रही है?
Incredible! Delhi feels like one big happy family this morning. Strangers smiling at each other, morning walkers hugging. Hope it lasts 🙂
देश में डेमोक्रेसी यानि लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहरुआ बनीं ममता बनर्जी के राज में फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की आजादी) कितनी सुरक्षित है। इसकी शर्मनाक नजीर एक बार फिर देखने को मिल रही है। ममता बनर्जी का फोटोशॉप ‘कार्टून’ बनाने के ‘जुर्म’ में बंगाल भाजयुमो की महिला कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को उठा कर जेल में ठूँस दिया गया है। सोशल मीडिया पर इसके विरुद्ध भाजपा के युवा नेता तेजस्वी सूर्या समेत कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रियंका शर्मा हावड़ा में भाजयुमो की संयोजिका हैं।
प्रियंका चोपड़ा की तस्वीर पर चिपकाया ममता का चेहरा, ‘हिंसा’ की FIR
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा पिछले दिनों हॉलीवुड के प्रतिष्ठित कार्यक्रम मेट गाला में बिखरे बालों वाले लुक लिए सामने आईं थीं। जिसको कई लोगों ने हास्यास्पद मानते हुए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। उसी पर प्रियंका शर्मा ने फोटोशॉप इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा ममता बनर्जी का चेहरा प्रियंका के चेहरे पर चिपका दिया।
देखने से साफ पता चलता है कि यह मात्र विनोद के लिए किया गया है। पर इतना सा हँसी-मजाक ममता बनर्जी को इतना चुभा कि प्रियंका शर्मा को गिरफ्तार कर हावड़ा की अदालत में पेश कर ही उन्होंने दम लिया। शिकायतकर्ता ने इसे ममता बनर्जी के लिए अपमानजनक होने के साथ-साथ ‘हिंसात्मक’ भी अपनी पुलिस शिकायत में बताया है।
A complaint was made against a woman who had allegedly shared a morphed picture of Mamata Banerjee in Howrah. The woman is named Priyanka Sharma and is apparently the convenor of BJYM in Howrah district. She was arrested and produced in Howrah Court. pic.twitter.com/b2HxruoqFF
इस निर्णय की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की जा रही है। भाजपा के नेताओं से लेकर सामान्य लोगों तक सभी की ओर से इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अपने प्लैकार्ड से वामपंथी-छद्म-लिबरलों को आईना दिखाने और मिर्च सुँघाने वाले मधुर ने पोस्ट किया:
भाजपा से आधिकारिक तौर पर जुड़े कई लोगों ने भी इसपर आपत्ति दर्ज कराई। सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, TEDx स्पीकर और भाजपा के स्वयंसेवक विकास पांडे ने मीडिया के सन्नाटे को भी आड़े हाथों लिया। लोगों से इस फोटोशॉप तस्वीर को प्रोफाइल पिक्चर लगाने और #ISupportPriyankaSharma को ट्रेंड कराने की अपील की।
भाजपा के युवा नेता और बंगलुरु के लोकसभा प्रत्याशी तेजस्वी सूर्या ने इस मामले की तुलना कॉन्ग्रेस के श्रीवत्स द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोटोशॉप से हिटलर दिखाने और भाजपा के इसपर क़ानूनी कार्रवाई न करने से की। साथ ही श्रीवत्स को अब इस घटना का विरोध करने के लिए ललकारा।
Case 1- BJYM’s Priyanka Sharma puts up photoshop picture of Mamata Di & is now in jail. But Mamata is not fascist
Case 2- Cong’s @srivatsayb tweets photoshop picture of PM Modi. Modi rightly does not prosecute him. But Modi is fascist
— Chowkidar Tejasvi Surya (@Tejasvi_Surya) May 10, 2019
पहले भी ममता लोगों को कार्टून के लिए जेल भेज चुकीं हैं
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी लोगों को कार्टून बनाने के लिए जेल भेज रहीं हैं। इससे पहले भी वह जादवपुर विश्विद्यालय के रसायनशास्त्र प्रोफ़ेसर अम्बिकेश महापात्रा को अपना कार्टून फॉरवर्ड करने के आरोप में जेल भेज चुकीं हैं। उस मामले में अदालत ने प्रोफ़ेसर साहब की गिरफ़्तारी गलत बताते हुए उन्हें ₹75,000 के मुआवजे का आदेश ममता सरकार को दिया था। इसके अलावा 2017 में इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून पोस्ट करने के जुर्म में सौरव सरकार नामक किशोर को भी ममता ने गिरफ्तार करा दिया था।
सेना के राजनीतिकरण की बहस थमी नहीं थी कि गोदी मीडिया के बीच सेना के ससुरालीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा होने लगी है। एक बात बेहद चौंकाने वाली है कि कि अपने कन्धों पर ढोकर इस देश में कम्प्यूटर लाने के बाद देश में सेना के ससुरालीकरण जैसे कारनामे भी राजीव गाँधी ही लेकर आए थे, वो भी आजादी के बाद पहली बार, लेकिन गोदी मीडिया ने यह तथ्य किस वजह से छुपाकर रखा? जिस तरह से महात्मा गाँधी की दांडी यात्रा ऐतिहासिक थी, उसी तरह से कॉन्ग्रेस के इन तीन बड़े नामों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किए गए कारनामे भी किसी यात्रा से कम नहीं हैं।
वर्ष 2019 की शुरुआत में ही फरवरी माह में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद से देश की दिशा और दशा में अचानक से एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। मीडिया से लेकर राजनेताओं की स्वर और तथ्य, सुबह होने से लेकर शाम होने के बीच 10 बार बदलते देखे जाने लगे। गोदी मीडिया के कुछ नेहरूवादी सिपाहियों ने जब आतंकवाद के कारण पर बात करने से बेहतर बलिदानी शहीदों को दिए जाने वाले ‘दर्जे’ की चर्चा छेड़ डाली थी। मोदी सरकार पर प्राइम टाइम के दौरान ‘कहाँ गया 56 इंच?’ जैसे शब्दों से उकसाने वाले सवाल पूछे जाते रहे, लेकिन जब पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की बात सामने आई, तब यही गोदी मीडिया ‘आपको ऐसा करना शोभा नहीं देता है’ वाले मोड में आ गई। इसके रातोंरात एक जुमला गोदी मीडिया के शब्दकार ने रचा, वो था ‘सेना का राजनीतिकरण।’
जो नेहरूवादी सभ्यता के विचारक आज तक जवाहरलाल नेहरू के नाम लिए बिना अन्न तक ग्रहण नहीं करते, वो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते देखे जाने लगे हैं कि एयर स्ट्राइक का श्रेय नरेंद्र मोदी को नहीं लेना चाहिए या उन्हें इसका जिक्र तक नहीं करना चाहिए। ये वही विचारक हैं, जो नोटबंदी के दौरान बैंक कर्मचारियों द्वारा की गई अव्यवस्था, नीतियों के गलत इस्तेमाल से लेकर गाँव के शौचालयों में पानी ना होने जैसी अव्यवस्था तक के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते हैं।
लेकिन सेना के राजनीतिकरण को लेकर जब नरेंद्र मोदी ने इन नेहरूवादी विचारकों को चिंतित देखा, तो उन्होंने उनकी चिंता को जायज ठहराते हुए उनके रिसर्च कार्य के लिए और भी ‘कच्चा माल’ उपलब्ध करवाया, जिससे कि ये विचारक अपनी रिसर्च और थीसिस को आगे बढ़ाकर गौरवान्वित महसूस कर सकें। अचानक नरेंद्र मोदी ने राजीव गाँधी द्वारा ससुराल के साथ सैर की घटना याद दिलाकर बाजारों से ‘बरनोल’ की सप्लाई को तेज कर दिया।
मोदी तो बस रास्ते से जा रहे थे, भेलपूरी खा रहे थे
नरेंद्र मोदी तो बस रस्ते से जा रहे थे, भेलपूरी खा रहे थे। लेकिन, जब उन्हें निष्पक्ष मीडिया ने सेना और संसाधनों के राजनीतिकरण की याद दिलाई, तो उन्होंने सेना के ससुरालीकरण का जिक्र छेड़कर हाल ही के कुछ वर्षों में निष्पक्ष बनी गोदी मीडिया को याद दिलाया कि साल 1987-88 में वो लोग इतने निष्पक्ष नहीं थे, ना ही यह जिम्मेदार मीडिया ‘राजनीतिकरण’ जैसे शब्दों से अवगत थी।
मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण और राजनीतिकरण: महज 3 शब्दों में गाँधी परिवार सिमट चुका है
1- मिस्ट्रेसीकरण
कुछ दिन पहले ही सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बताया कि किस तरह से उनके ससुर, जेडी कपाड़िया, जो कि 1950 के दशक में रक्षा सचिव थे, का तबादला सिर्फ इस वजह से करवा दिया गया क्योंकि उन्होंने देश के बाँधों (Dam) को ही तीर्थ बताने वाले जवाहरलाल नेहरू के ‘यूरोपीय महिला मित्र’ (European mistress) को एयरफोर्स के विमान का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। स्वामी ने कहा कि इस घटना के बाद उनके ससुर का तबादला कर दिया गया था और अगले रक्षा सचिव ने ऐसा करने की अनुमति दे दी थी।
एक दूसरे प्रसंग में, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सबसे पहले ऐसी शाही परंपरा की शुरुआत करते हुए INS देल्ही (INS Delhi) का इस्तेमाल अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए किया था। उसकी अब जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनसे भी यह बात साफ पता चलती है कि नेहरू ने उस आईएनएस देल्ही का इस्तेमाल किया था, जो 1933 में नौसेना के लिए बनाया गया एक हल्का क्रूजर था। इसे ब्रिटिश राज में एचएमएस अकिलिस के नाम से जाना जाता था। 1950 में अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए इसी वॉरशिप का इस्तेमाल नेहरू ने किया था।
उसके बाद, जब 59 वर्ष की आयु में एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में और साथ ही उनकी याद में पुष्पांजलि देने के लिए भेजा। लेडी माउंटबेटन की बेटी लेडी पामेला हिक्स का कहना है, “1960 में उनकी मृत्यु पर, एडविना को उनकी इच्छा के अनुसार समुद्र में दफनाया गया था। जब उनका शोक संतप्त परिवार घटनास्थल पर माल्यार्पण के बाद हट गया, तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और पंडितजी के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर गया।”
2 – ससुरालीकरण
नेहरूवादी सभ्यता को जीवित रखते हुए लक्षद्वीप पर हॉलिडे मनाने के लिए इंदिरा गाँधी के बेटे और जवाहरलाल नेहरू के नाती यानी, मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा के ससुर, राजीव गाँधी के साथ इटली से उनके ससुराल वाले भी आए थे। इनके अलावा, मेहमानों की सूची में राजीव गाँधी के साथ, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका और उनके चार दोस्त, सोनिया गाँधी की माँ, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही तब के सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और उनके बच्चे, अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी और पूर्व मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी भी मौजूद थे। छुट्टी का स्थान बंगारम था, जो लक्षद्वीप द्वीपसमूह में एक छोटा निर्जन द्वीप है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 24 जनवरी 1988 को एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें बताया गया कि जब राजीव गाँधी अपने परिजन, दोस्त और विदेशी मेहमानों के साथ जब छुट्टियाँ बीता रहे थे, उस दौरान आईएनएस विराट में उनके निजी सचिव और तत्कालीन सरकार में प्रभावी शख्सियत वी जॉर्ज भी मौजूद थे। वी जॉर्ज के अलावा मणिशंकर अय्यर, सरला ग्रेवाल, एम जैकब और अन्य लोग शामिल थे।
लेकिन उस समय ‘1 सवाल पूछने के शौक़ीन’ नेहरुवियन सभ्यता वाले निष्पक्ष पत्रकारों को क्या मालूम था कि उन्हें भविष्य में इन सभी बातों के लिए लज्जित होना पड़ेगा। इस तरह, यह सेना और देश के संसाधनों के ससुरालीकरण की दूसरी ‘शाही’ घटना थी। यह भी जानना आवश्यक है कि ससुराल के साथ यह शाही हॉलिडे जिस ‘कार’ द्वारा आयोजित किया गया, वह आईएनएस विराट उस समय भारतीय नौसेना का एकमात्र वाहक युद्धपोत हुआ करता था। इसे राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी द्वारा सारा लाव-लश्कर सिर्फ ससुरालीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया क्योंकि यह आईएनएस विराट तो कई नेहरूवादियों के अनुसार, देश के पहले परिवार द्वारा इस्तेमाल किया गया था। कायदे से जवाहरलाल नेहरू ने इस चलन की शुरुआत की थी। राजीव ने तो इस ‘पुश्तैनी’ परंपरा को बस आगे बढ़ाने का काम किया था।
3 – राजनीतिकरण
मिस्ट्रेसीकरण, ससुरालीकरण के बाद राजनीतिकरण इस तीसरी पीढ़ी का विशेषण है। शाही परिवार में पैदा होने के बावजूद भी नौसेना के संसाधनों का प्रयोग ना कर पाने का मलाल कहीं न कहीं राहुल गाँधी को जरूर होगा। राहुल गाँधी इस मामले में सबसे दुर्भाग्यशाली साबित हुए हैं। पहला तो इस वजह से कि वो सेना का ससुरालीकरण चाह कर भी फिलहाल नहीं कर सकते, दूसरा ये कि अब मीडिया ‘निष्पक्ष’ हो चुका है। यह मीडिया इतना निष्पक्ष होता जा रहा है कि जिन पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता की जमीन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्बन्ध ‘2002’ से जोड़-जोड़कर बनाई थी, वही आजकल ये कहते सुने जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी का इसमें कोई योगदान नहीं था। कुछ निष्पक्ष पत्रकार बस ‘1 सवाल’ पूछने के चक्कर में इतने बदहवास हालात में यहाँ-वहाँ दौड़ रहे हैं कि वो आज महागठबंधन के फोटोग्राफर बनकर निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं।
हालाँकि, ‘चौकीदार चोर है’ जैसे जुमलों को चुनावी गर्मी में गलती से निकले शब्द बताकर हर दिन माफ़ी माँगने वाले कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी फिलहाल नौसेना और सेना के संसाधनों का तो इस्तेमाल अपने पूर्वजों की तरह नहीं कर पा रहा है। लेकिन, इसके पास राजनीतिकरण जैसा शब्द अभी भी मौजूद था। सेना के राजनीतिकरण जैसे जुमलों को भुनाने के चक्कर में कॉन्ग्रेस के इस पारम्परिक अध्यक्ष राहुल गाँधी ने नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक की फजीहत करवा डाली है। जो मीडिया और क्रांतिजीव 5 साल तक मोदी की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा करते रहे, उन्हें नेहरू से लेकर राजीव गाँधी के भ्रमणों से रूबरू होना चाहिए, ताकि वो उसकी समीक्षा कर के बता सकें कि मिस्ट्रेसीकरण और ससुरालीकरण उनकी किसी विदेश नीति का हिस्सा थे?
कॉन्ग्रेस की प्रत्येक इच्छा को नरेंद्र मोदी स्वयं साकार करने पर तुले हुए हैं। कॉन्ग्रेस हर सम्भव प्रयास करती रही कि ‘भूतों’ के नाम पर 2019 का लोकसभा चुनाव जीत सके। इसके लिए कभी किसी की नाक बीच में लाइ गई, कभी साड़ी का इस्तेमाल किया गया, तो कभी किसी की नीतियों का हवाला दिया जाता रहा। मोदी ने इन सभी घटनाओं को एक ही बार में लपेटकर एक नई कहावत रच ली है, ‘सौ नामदार की, एक चौकीदार की’।
स्टैंड-अप कॉमेडियन से ‘नफरती चिंटू’ बने उसके बाद राजनीतिक प्रोपेगेंडा का बीड़ा उठाए कुणाल कामरा ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया था। जिसमें इंटरव्यू की आड़ में अरविंद केजरीवाल को पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ दिल खोलकर भड़ास निकालते हुए देखा जा सकता है। इस इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के लिए अपनी सरकार की उपलब्धियों (यदि कोई हो) के बारे में कम और छद्म नफ़रत, मॉब लिंचिंग के साथ ही मोदी और शाह को सत्ता से हटाने की जरूरत है, इस पर ज़्यादा बात की है लेकिन क्यों? इस पर फिर से वही हिटलर वाला पुराना राग अलापा गया है।
वैसे इस इंटरव्यू में कुछ नया नहीं है, चुनावी माहौल में केजरीवाल की छवि को पहुँचे ठेस ‘कि उन्होंने लगभग मना ही कर दिया जी’ को संभालने की कोशिश की गई है। तथ्य कुछ ज़्यादा है नहीं बस नैरेटिव बिल्डिंग के लिए कुछ सेलेक्टिव वीडिओ क्लिप का उपयोग करते हुए वह सब साबित करने की कोशिश की गई है, जिसका इन्हें ठीक-ठीक पता है कि ऐसा नहीं होने वाला जैसे इसी इंटरव्यू में कैसे कहा जा रहा है, “अगर 2019 में मोदी लोकसभा चुनाव जीत गया तो फिर कभी चुनाव नहीं होने देगा।”
कभी स्वघोषित ‘मिथ्यावादी’ ईमानदार के जब अधिकांश दावे खोखले साबित हुए, कॉन्ग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ हज़ारो पन्ने के सबूत हवा हो गए। AAP के ‘हिटलर’ आज दूसरे को हिटलर के नाम पर डराते हुए, ये भूल जाते हैं कि उनका हर रंग पब्लिक के सामने है कि कैसे उन्होंने अपनी ही पार्टी के लगभग सभी संस्थापकों को बाहर का रास्ता दिखाया, कैसे जिस कॉन्ग्रेस के खिलाफ सबूत लहराकर, दिल्ली की जनता से झूठ बोलकर सत्ता हासिल किया, उसी को ठेंगा दिखाते हुए उसी कॉन्ग्रेस की गोद में झूलने के लिए तैयार हो गए। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के मसीहा बने फिरने वाले केजरीवाल अन्ना हज़ारे के सिद्धांतों को खाँस-खाँस कर उड़ा देने के बाद महागठबंधन के मंच पर उन्ही भ्रष्टाचारी आरोपितों को बाँहों का हार पहनाते नज़र आए।
और आज केजरीवाल के जब सारे दावों की पोल खुल चुकी है। उनके 70 दावों में से 67 हवा-हवाई साबित हो चुके हैं अर्थात बुरी तरह विफल हैं। लेकिन, उसके ज़िम्मेदार तो वह है नहीं क्योंकि मोदी ने उन्हें काम ही नहीं करने दिया और देश में कहीं भी, किसी भी राज्य में कोई आपराधिक घटना घटी तो उसका ज़िम्मेदार राज्य सरकार नहीं बल्कि मोदी ही है। जब सारी ज़िम्मेदारी मोदी की, तो सत्ता की बागडोर ऐसे गैर ज़िम्मेदार नेताओं को क्यों सौप दे देश की जनता जो ना ना करते हुए भी सिर्फ सत्ता की मलाई खाना ही चाहते हैं।
केजरीवाल को 5 सालों तक मोदी ने काम करने नहीं दिया और अब वह तभी काम करेंगे जब दिल्ली पूर्ण राज्य हो जाएगी तो जिस शिला दीक्षित के खिलाफ ये बोरे में सबूत लेकर घूम रहे थे। जिनके ऊपर गैर ज़िम्मेदारी का आरोप मढ़ते रहे, क्या तब दिल्ली पूर्ण राज्य थी? आज जब केजरीवाल की एक मात्र तथाकथित उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार नहीं बल्कि कुछ बिल्डिंगे बनाने का दावा है, उसका भी भांडा फूट चुका है। तो केजरीवाल का नया शिगूफा तैयार है कि अब दिल्ली में तभी कोई काम होगा जब दिल्ली पूर्ण राज्य होगी। ‘नौटंकीबाज’ केजरीवाल को ये अच्छी तरह से मालूम है कि ऐसा निकट भविष्य में नहीं होने वाला, इस मामले में भारत की तुलना विदेश से करना भी बेमानी है। यह बात भी पता है उन्हें फिर भी ऐसे में केजरीवाल ने जानबूझकर दिल्ली के विकास के मुद्दे को दिवास्वप्न बना कर छोड़ दिया है। और दूसरे पर मनगढंत आरोप लगाते फिर रहे हैं।
खैर, इसी इंटरव्यू में किस तरह से अपने बच्चों की कसम खाने वाले केजरीवाल पीएम मोदी और अमित शाह की तुलना एक ‘कैंसरग्रस्त ट्यूमर’ से करते हैं जिससे देश को बचाने के लिए, उन्हें सत्ता से हटाने की आवश्यकता है। यहाँ वह भूल जाते हैं कि देश उनकी इस नौटंकी और धूर्तता को ठीक से समझ रहा है फिर भी जब उनसे पूछा गया कि मोदी नहीं तो कौन जिसे आप प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं? क्या राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं? इस पर कुछ दिन पहले ही कॉन्ग्रेस के आगे नाक रगड़ने वाले यूटर्न के महारथी केजरीवाल ने जवाब दिया, “मैंने एक उपमा सुनी है जब आपको ट्यूमर का पता चलता है, तो आप यह नहीं कहते हैं कि ट्यूमर नहीं, तो कौन? मोदी और शाह को हटाने की जरूरत है। फिर हम देखेंगे कि कौन पीएम बनता है।” शायद केजरीवाल अभी भी खुद को प्रधानमंत्री की रेस में मान रहे हैं!
ये वीडियो का स्क्रीनशॉट है।
या देश की जनता को झूठ बोलकर, बरगलाकर महामिलावटी ठगों की पूरी फौज को सत्ता पर आसीन करवाने का सपना पाले बैठे हैं। नीचे वीडिओ में बात करते हुए केजरीवाल की कुटिल मुस्कान और धूर्तता का नज़ारा लिया जा सकता है। कैसे इस वीडिओ में मोदी के अक्षय कुमार को दिए इंटरव्यू का भी वह हिस्सा उपयोग किया गया है जब अक्षय मोदी से कुछ लाइट मूड के सवाल कर रहे हैं। खैर ऐसा बहुत ही आसानी से ये पूरा गिरोह करता है, झूठ बनाता है या सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर अपने हिसाब से ट्वीस्ट करता है और जब वह फेक न्यूज़ फैलने लगती है तो धीरे से किनारे हो लेता है। और जैसे ही कुछ भी इनके खिलाफ आता है तो बेशक चार लोग ही शेयर किए हों फैक्ट चेक की कैंची लेकर ये उसे वायरल बता कर उसकी आड़ में सभी को ‘भक्त’ या ‘बेवकूफ’ साबित करने में लग जाता है।
इसी इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा, “भाजपा ने देश में मॉब लिंचिंग को सामान्य किया है और मुस्लिम, ऐसे गुंडों के प्राथमिक लक्ष्य होते हैं।” कामरा ने क्विंट से एक तथ्यात्मक रूप से गलत रिपोर्ट का उपयोग करते हुए दावा किया है कि देश में केवल मुस्लिम ही मवेशी हिंसक घटनाओं के शिकार हुए हैं। यहाँ बड़ी चालाकी से उन हिंदू पीड़ितों की आसानी से अनदेखी की जा रही है, जिनकी पशु तस्करी का विरोध करने के कारण जान ले ली गई या उन पर जानलेवा हमला किया गया।
मोदी से नफ़रत में झूठ परोसने के महारथी ऐसे प्रोपेगेंडा यूट्यूबर कामरा ने अपनी बात के साक्ष्य के रूप में 2014 से पहले के पुराने वीडियो साझा किए हैं, जब कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में थी, फिर भी ऐसी घटनाओं के लिए वह पार्टी ज़िम्मेदार थोड़ी न है, जिसका पिछले 70 साल के शासन में लगभग हर छोटे-बड़े दंगों हाथ रहा हो। लेकिन ऐसे अनेक तथ्यों को छुपाकर इस तरह से ऐसी घटनाओं को प्रेजेंट किया गया है जिससे पीएम मोदी और भाजपा की छवि ख़राब हो। और जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो।
बड़ी चालाकी से वे सारे तथ्य छिपा लिए गए हैं कि ऐसी आपराधिक घटनाओं में शामिल अपराधियों के साथ क्या हुआ? क्या वे खुले आम घूम रहे हैं या आज वे सलाखों के पीछे हैं। जबकि, कानून अपने तरीके से ऐसे अपराधियों से निपट रहा है।
वैसे सोशल मीडिया पर ‘नफरती चिंटू’ कुणाल के प्रोपेगेंडा की ठीक से बधिया उखेड़ी गई है। कई ट्वीट के माध्यम से कई ट्विटर यूजर ने एक के बाद एक क्लिप साझा किया है कि किस तरह से मात्र यह दिखाने के लिए कि मोदी सरकार के तहत गौ रक्षक सशक्त हो गए हैं, और उन्हें राज्य का संरक्षण मिला हुआ है, अपने इस झूठ को साबित करने के लिए कामरा ने कई क्लिप का उपयोग किया है जिसे 2013 में पहले ही अपलोड किया जा चुका है। लेकिन, मोदी के विरोध में और कुछ नहीं मिल रहा है तो छवि ख़राब करने के लिए उसी 2013 के वीडिओ क्लिप का ऐसे प्रयोग किया गया है, जैसे ये घटनाएँ मोदी के समय में हुई हैं।
Kunal Kamra did a propaganda interview to promote Kejriwal and for it used videos from Congress rule (before 2014) to show mob lynching under Modi govt.
— Chowkidar Ankur Singh (@iAnkurSingh) May 9, 2019
Kunal Kamra did a propaganda interview to promote Kejriwal and for it used videos from Congress rule (before 2014) to show mob lynching under Modi govt.
— Chowkidar Ankur Singh (@iAnkurSingh) May 9, 2019
2013 का ही एक और क्लिप साझा की गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अराजकता, तोड़फोड़ और आगजनी में लिप्त होने के लिए गौ रक्षकों को अधिकार दिया गया है।
Kunal Kamra did a propaganda interview to promote Kejriwal and for it used videos from Congress rule (before 2014) to show mob lynching under Modi govt.
— Chowkidar Ankur Singh (@iAnkurSingh) May 9, 2019
2014 से पहले के कई वीडियो का उपयोग करके, जब पीएम मोदी सत्ता में नहीं थे, कामरा जैसे ‘नफरती चिंटू’ ने देश में मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और झूठ के प्रसार का ही काम किया है। ऐसा ये पूरा गिरोह अक्सर करता रहता है। इसमें कुछ नया नहीं है। यह इस पूरे गिरोह का पुराना आजमाया हुआ हथकंडा है। हाल ही में, बीएसई ने बेशरम कामरा के खिलाफ उनके ब्रांड के दुरुपयोग के लिए एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। कामरा ने टिकर रीडिंग पर ‘मोदी को वोट मत दो’ के साथ बीएसई भवन की एक एडिटेड इमेज अपलोड की थी।
जिसका भी इस पूरे गिरोह ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर समर्थन किया। वहीं कानून बनने के बाद भी कि गौ-हत्या गैर कानूनी है और ऐसे में अगर किसी की धार्मिक भावनाएँ आहत होने पर वह बेकाबू हो जाए तो इस पूरे गिरोह के लिए वह मोदी का आदमी हो जाता है। बिना एक पल गवाए ये पूरा गिरोह उस पर न जाने कितने मनगढंत आरोप मढ़ देता है, लेकिन वह गौ-तस्कर या गौ-हत्या करने वाला मुस्लिम इनके लिए मासूम और बेचारा हो जाता है।
खैर, न यह पहली बार है और न आखिरी, इस पूरे गिरोह का काम ही है कि इस देश की संस्कृति, परम्परा, यहाँ की मान्यताएँ, संस्कार सभी मजाक बनाओं। खुद ‘नफ़रती चिंटू’ बन नफरत फैलाओ और दूसरे को अंग्रेजी में कहो कि ‘तुम हेट्रेड फैला रहे हो।’ बिना किसी सबूत के अंट-शंट आरोप लगाओ, कोई सवाल कर ले तो उसे साम्प्रदायिक, अराजक, नारीविरोधी या जो मन में आए घोषित कर दो, खुद पक्षकार बन कर निष्पक्षता का चोला ओढ़े रहो और जब कोई सवाल करे या इनके झूठ की बत्ती बनाकर इनके सही जगह डाल दे तो उसे भक्त-भक्त चिल्लाओ, फेक न्यूज़ खुद फैलाओं और अंत में उसी का फैक्ट चेक कर आरोप आईटी सेल पर मढ़ दो।
करो जितना मन करे उतना नाटक करो लेकिन ध्यान रहे, अब और ज़्यादा दिन तक इस पूरे गिरोह के झूठ का महल टिकने वाला नहीं। अब देश की जनता उतनी भी मूर्ख नहीं जितना ये गिरोह उसे समझता आया है। अब वही इनकी ‘मूर्ख’ और ‘भक्त’ जनता इस पूरे गिरोह को तुरंत ही खदेड़ कर बताती है कि तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है अब और नहीं।
इनकी ये छटफटाहट दिया बुझने से पहले का है। अब इनकी कोई भी मक्कारी कलाकारी के नाम से नहीं बिकने वाली, बाकी जनता है सब जानती है, देश, सेना और यहाँ के परम्पराओं और संस्कृति का मजाक उड़ाने वालों को ठीक से पहचानती है।
दक्षिण असम के हैलाकांडी जिले में हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया है। 3 पुलिस कॉन्स्टेबलों सहित 15 लोग घायल हो गए हैं और कई निजी सम्पत्तियों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। खबर लिखे जाने तक किसी की भी मृत्यु की सूचना नहीं है।
पहले से दी गई थी धमकी, 144 लागू
विभिन्न ख़बरों के अनुसार कस्बे में साम्प्रदायिक तनाव की आशंका दो दिन पहले से ही थी जब बुधवार को नमाज पढ़ने आए नमाजियों के वाहन अज्ञात शरारती तत्वों ने तोड़ दिए थे। नाराज लोगों ने स्थानीय थाने में इसकी तहरीर दी थी। साथ ही यह धमकी भी दी थी कि अगर कार्रवाई न हुई तो अगली नमाज वे सड़क पर ही पढ़ेंगे। हैलाकांडी के पुलिस चीफ के हवाले से स्क्रॉल ने यह दावा किया है कि हिंसा की शुरुआत अज्ञात लोगों द्वारा सड़क पर नमाज पढ़ने से रोके जाने के बाद हुई।
उसके बाद दोनों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। परिस्थिति पर काबू करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। इसके अलावा भीड़ पर खाली कारतूसों से निशाना लगाकर भी उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की गई। थोड़ी ही देर में जिलाधीश कीर्ति जल्ली ने 144 लागू करने का आदेश जारी कर दिया। पर आउटलुक पत्रिका के अनुसार, फ़ोन पर बात करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि चिंता की कोई बात नहीं है और परिस्थिति पुलिस और प्रशासन के नियंत्रण में है।
क्या मंदिर का रास्ता रोक कर रहे थे नमाज?
इस बीच ट्विटर पर मामले का ऐसा एंगल भी कथित तौर पर सामने आया है जिसे मीडिया रिपोर्ट करने से बचता प्रतीत हो रहा है। पत्रकार अनिंद्य बनर्जी ने ट्वीट कर यह दावा किया है कि हिंसा तब भड़की जब नमाज मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर पढ़ी गई- यानि मंदिर का रास्ता रोक दिया गया। उन्होंने घटना का वीडियो होने का भी दावा किया और जोड़ा कि वह जानबूझकर वीडियो अभी (तनाव के माहौल में) जारी नहीं कर रहे हैं।
Alert: Communal clashes break out in Assam injuring 15. Clashes broke out after Friday prayers were allegedly held in a road that leads to a temple. Curfew imposed. Uneasy calm in the area.
कुछ ही देर पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ पाकिस्तानी वायुसीमा से किसी हवाई जहाज को उत्तर गुजरात की हिंदुस्तानी सीमा में अनधिकृत रूप से आता देखकर सकते में आ गईं। आनन-फानन में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने जहाज को घेर कर जबरन लैंडिंग कराई। पता चला कि हवाई जहाज जॉर्जिया का मालवाहक एंटोनोव-12 है और वह कराची से दिल्ली ही आ रहा था पर रास्ता भटक कर गुजरात पहुँच गया।
Government sources to ANI: Indian Air Force fighter jets force an Antonov AN-12 heavy cargo plane coming from Pakistani Air space to land at Jaipur airport. Questioning of pilots on. More details awaited. pic.twitter.com/YSZZPF9u1D
हवाई जहाज को वायुसेना ने जयपुर के निकट हवाईअड्डे पर उतरवाया है और पायलटों से गहन पूछताछ जारी है। उत्तर गुजरात की जिस जगह पर इस जहाज ने भारतीय सीमा में अनधिकृत प्रवेश किया था, उसकी जानकारी फ़िलहाल गुप्त ही रखी जा रही है। एएन-12 (एंटोनोव-12) श्रृंखला का यह मालवाहक जहाज कराची से दिल्ली के लिए ही चला था। पर किन परिस्थितियों में यह दिल्ली से इतना दूर उत्तर गुजरात के पास वायुसेना के रक्षक जहाजों को मिला, यह पता चलना अभी बाकी है।
IAF statement just in on its fighters intercepting a Georgian An-12 aircraft after it entered Indian airspace. The jets forced it to land in Jaipur. pic.twitter.com/r8r77UxP0K
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राजकिशोर सिंह के प्रचार वाहन से ₹24 लाख बरामद हुए हैं। हालाँकि, वाहन चेकिंग और बरामदगी के दौरान कॉन्ग्रेस प्रत्याशी गाड़ी में मौजूद नहीं थे। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इसकी जाँच-पड़ताल में जुट गई है। इस दौरान पुलिस की टीम ने दो आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है।
Police has seized Rs 24 lakh in cash from a car in Basti; two people arrested. pic.twitter.com/oSl7pKyjif
बस्ती के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने बताया कि नगर कोतवाली इलाके के साेनू पार चौराहे के पास गुरुवार (मई 9, 2019) को क्षेत्रवार सचल दस्ते (एफएसटी) चेकिंग कर रही थी। तभी वहाँ पर एक स्कॉर्पियो पहुँची। पुलिस और एफएसटी की टीम ने जब उस स्कॉर्पियो को चेक किया, तो उसमें से ₹24 लाख कैश व भारी मात्रा में प्रचार सामग्री बरामद हुई। जब उनसे कैश के बारे में पूछताछ की गई तो गाड़ी में मौजूद लोग कैश से संबंधित कोई भी कागजात नहीं दिखा पाए। जिसके बाद टीम ने स्कॉर्पियो में सवार दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कैश को सील कर दिया है साथ ही कार को भी जब्त कर लिया गया। आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल वोटरों की खरीद-फरोख्त के लिए किया जाने वाला था। इस सिलसिले में आईपीसी की धारा 171 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
वहीं, राजकिशोर सिंह का कहना है कि यह भाजपा की साजिश है और जाँच के बाद पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा। गौरतलब है कि राजकिशोर सिंह समाजवादी पार्टी के शासनकाल में मंत्री थे। उन्होंने हाल ही में सपा को छोड़कर कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया। कॉन्ग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बस्ती से प्रत्याशी बनाया है। यहाँ उनका मुकाबला भाजपा के सांसद हरीश द्विवेदी व गठबंधन के बसपा के प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी से है।
राजस्थान के अलवर में पति के सामने दलित महिला से गैंगरेप के बाद रेप का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। अलवर की पुलिस को गुरुवार (मई 9, 2019) को एक अन्य दलित महिला से सामूहिक बलात्कार की शिकायत मिली। यहाँ कठूमर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डिलीवरी रूम में सरकारी एम्बुलेंस के ड्राइवर ने 40 वर्षीय दलित महिला के साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया। जानकारी के मुताबिक, रेप की यह वारदात 7 मई के रात की है और महिला ने दो दिन बाद यानी गुरुवार (मई 9, 2019) को कठूमर थाने में यह मामला दर्ज कराया।
अलवर में एक और रेप, एंबुलेंस ड्राइवर ने अस्पताल के डिलीवरी रूम में की दरिंदगी– News18 हिंदी https://t.co/8fsmbahavz
जानकारी के मुताबिक, दलित महिला 5 मई को अपनी गर्भवती बहू को लेकर कठूमर सामुदायिक अस्पताल पहुँची थी। यहाँ डिलीवरी के बाद छुट्टी नहीं मिलने से अस्पताल में रुकी हुई थी। रेप पीड़िता ने बताया कि मंगलवार (मई 7, 2019) की रात एम्बुलेंस के ड्राइवर ने डिलीवरी से जुड़े जरूरी कागजों की बात कही और अपने साथ डिलीवरी रूम ले गया। वहाँ उसके मुँह में कपड़ा ठूँसकर उसके साथ रेप किया।
जब पीड़िता ने शोर मचाया तो उन लोगों ने महिला को थप्पड़ मारे और धमकी दी कि अगर उसने किसी को भी बताया तो वो बहू की डिलीवरी केस को खराब कर देंगे और साथ ही नवजात पोते को भी मार देंगे। जिससे डरी-सहमी पीड़िता बहू को अस्पताल से छुट्टी करवा कर घर ले आई और समाज के डर से चुप रही। लेकिन फिर उसने दो दिन बाद हिम्मत दिखाई और पुलिस थाने में जाकर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अब मामले की जाँच कर रही है।
गौरतलब है कि 26 अप्रैल को राजस्थान के अलवर जिले के थानागाजी इलाके में 5 युवकों ने पति के सामने ही पत्नी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप को अंजाम दिया और साथ ही दलित जाति की पीड़ित युवती का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दोपहर 3 बजे तालवृक्ष की तरफ जा रही थी, तभी थानागाजी-अलवर बाइपास रोड पर उनकी बाइक के सामने 5 युवकों ने अपनी मोटरसाइकिलें लगा दीं। इसके बाद वे महिला एवं उसके पति को रेत के टीलों की तरफ ले गए। वहाँ उन्होंने पति के साथ मारपीट की और दंपति को बंधक बना लिया। फिर दलित महिला के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के एक बयान ने एक बार फिर से सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। आज उन्होंने बताया कि राज्य की वर्तमान कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार से कॉन्ग्रेसी खेमा कुछ नाख़ुश नज़र आ रहा है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लगभग 20 विधायक ऐसे हैं जो परेशान हैं और कभी भी कोई फ़ैसला ले सकते हैं, बस थोड़ा इंतज़ार कीजिए।
Former Karnataka CM & BJP leader BS Yeddyurappa: More than 20 Congress MLAs are not happy with the present government, they might take any decision at any time. Let us wait and see. pic.twitter.com/KLtPDfNCmv
पिछले काफी दिनों से यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि राज्य में मौजूदा कॉन्ग्रेस सरकार लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। बता दें कि कर्नाटक में जेडीएस-कॉन्ग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी पहले भी बीजेपी पर सरकार गिराने की साज़िश रचने का आरोप लगा चुके हैं।
येदियुरप्पा ने विश्वास जताते हुए कहा कि राज्य की ‘चिनचोली और कुंडगोल’ की विधानसभा सीटों पर बीजेपी जीत हासिल करेगी और इसके लिए वोटिंग 19 मई को होनी है। येदियुरप्पा ने हाल ही में महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार (मैसूर) पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “राज्य में क़ानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। किसी को इसकी चिंता नहीं है, और न ही सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है।”
वारदात के एक दिन बाद पीड़िता की टिप्पणी आई थी जिसमें उसने बताया था कि उसके प्रेमी को चार पुरुषों ने बुरी तरह पीटा था। जब लड़के ने विरोध किया, तो उसे एक पत्थर से मारा गया। फ़िलहाल, पुलिस ने इस मामले को दर्ज कर लिया है और चारों आरोपियों की तलाश में जुट गई है।