पुलवामा हमले में 44 जवानों के बलिदान का बदला लेना सेना ने शुरू कर दिया है। पुलवामा हमले के बाद देश की आम जनता में जो गुस्सा है वही गुस्सा देश के सुरक्षाबलों में भी है। सोमवार (फ़रवरी 18,2019) को ही जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर गाजी राशिद उर्फ़ कामरान को ढेर कर दिया गया। और अब घाटी मे जैश के बिखरे हुए 60 एक्टिव आतंकियों का ख़ात्मा करने की बारी है।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने अपने आतंकियों का जाल बिछाया हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस समय पूरी घाटी में मौजूद 60 आतंकी अलग-अलग जिलों में फैले हुए हैं। इनमें से 35 आतंकी पाकिस्तानी हैं, जो कि घाटी में तबाही मचाने को पूरी तरह से तैयार हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि घाटी में आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं। इतना ही नहीं सरहद के पार पाकिस्तान की सेना भी इन आतंकियों को भारतीय सेना के कोप से बचाने में जुट गई है। बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना भी अलर्ट पर है, पाकिस्तानी सेना ने उस पार स्थित आतंकी ठिकानों और आतंकियों को भी लॉन्च पैड से शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज ही सीआरपीएफ के डीजी आर.आर. भटनागर गृह मंत्रालय में गृह सचिव को पुलवामा हमले की पूरी जानकारी देंगे। इसके अलावा सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी आज रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात करेंगे और जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर रिपोर्ट देंगे।
ज्ञात हो कि 14 दिसंबर को भारत ने अपने 44 जवानों को एक आत्मघाती आतंकी हमले में खोया था, जिसके बाद से ही सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकियों के ख़ात्मे के लिए ऑपरेशन तेज कर दिया है। आज सोमवार को पुलवामा में एक मुठभेड़ में सेना ने जैश ए मोहम्मद के गाजी समेत दो आतंकियों को ढेर कर दिया। इस एनकाउंटर में 4 जवान भी बलिदान हो गए हैं।
‘मी टू (Me Too)’ के अंतर्गत यौन शोषण के आरोपों में फँसे विनोद दुआ की बेटी मल्लिका दुआ ने फिर से बेहूदा और विवादित बयान दिया है। मल्लिका दुआ ने पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त सीआरपीएफ के जवानों का अपमान करते हुए कहा कि लोग रोज़ मरते हैं। अपने-आप को स्टैंडअप कॉमेडियन के तौर पर पेश करने वाली मल्लिका दुआ अक़्सर विवादित बयानों और उलूल-जलूल हरकतों के कारण सुर्ख़ियों में छाई रहती हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो में मल्लिका दुआ ने बेशर्मीपूर्वक कहा:
“ये बातें सिर्फ मुझसे नहीं कही जा रही हैं। इस बारे में लोग प्रोटेस्ट करते नजर आ रहे हैं। मैं यहाँ पूछना चाहती हूँ कि हर रोज़ लोग भुखमरी, बेराजगारी, डिप्रेशन जैसी कई वजहों से मरते हैं। ऐसा सिर्फ हमारे देश में नहीं होता, पूरी दुनिया में लोग मरते हैं। तब क्या आप अपनी ज़िंदगी रोक देते हैं? क्या सिर्फ़ शोक मनाना ही हमारा काम है? ऐसे में तो हर रोज हमें शोक मनाने की जरूरत है। ये क्या नॉनसेंस बातें लगा रखी हैं। सब पूरी बकवास है।”
मल्लिका दुआ यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने भारतीय जवानों के बलिदान पर गुस्साए लोगों को धमकी देते हुए कहा:
“जो लोग फेसबुक पर ये लिख रहे हैं कि जंग छेड़ेंगे हम, उनकी औकात ही क्या है। तुम तो फोन करके एक पिज्जा नहीं ऑर्डर कर सकते हो तुम क्या जंग करोगे। हर मुस्लिम को ये कहना बंद करो कि वो पाकिस्तान जाए, अगर यही सोच है तो मुस्लिम तो दुनिया के अलग-अलग देशों में भी हैं।”
Mallika Dua ( yes, yes, defender & daughter of alleged molester Vinod Dua ) says so many people die daily due to hunger, depression etc etc.
मल्लिका दुआ के इस बयान पर सोशल मीडिया में उन्हें लोगों ने जमकर लताड़ा। एक ट्विटर यूजर ने कहा कि वह मल्लिका दुआ के बयानों से बिलकुल सहमत हैं। उन्होंने मल्लिका को याद दिलाया कि कैसे उन्होंने ‘मी टू’ को लेकर अच्छा-ख़ासा हंगामा मचाया था लेकिन जब उनके पिता विनोद दुआ पर यौन शोषण के आरोप लगे, तब वो ख़ामोश हो गई थीं। यूजर ने कहा, “सही बात है, लोग असली ज़िन्दगी में कुछ नहीं कर सकते। मल्लिका ने भी कुछ नहीं किया था जब उनके पिता यौन शोषण के आरोपों में घिरे थे।“
I agree with @MallikaDua that one can only show anger through keyboard and can’t do anything in real. Like she did show a lot of anger for #MeToo accused only till her father also got accused, then she couldn’t do anything in real. ?
एक यूजर ने मल्लिका दुआ को यही सलाह आतंकियों को देने को कहा।
मल्लिका दुआ ने हर आतंकवादी के घरवालों को यही उपदेश देना चाहिए. यह भी बताना चाहिए कि जनाजे के साथ भीड़ भी बेकार है. लोग तो रोज ही मरते हैं! https://t.co/sFowpDtCoz
— Major Ramesh Upadhyay (Retired) (@MajorUpadhyay) February 18, 2019
एक अन्य यूजर ने मल्लिका दुआ के बयान को उनके पिता पर लगे यौन शोषण के आरोपों से जोड़ते हुए उन्हें आइना दिखाया। ज्ञात हो कि विनोद दुआ पर लगे आरोपों पर मल्लिका दुआ ने कहा था कि वह अपने पिता के साथ खड़ी हैं।
Mallika Dua, I can understand you are suffering from acute depression.The words uttered by you signify extreme mental retardness.Get yourself checked…You might become chronic and then finally Mental Asylum
ट्विटर पर एक यूजर ने मल्लिका दुआ को किसी अच्छे अस्पताल में दिखाने की सलाह देते हुए कहा कि वह दिन पर दिन मानसिक रूप से विक्षिप्त होती जा रही हैं। मल्लिका दुआ ने एक कॉमेडी शो के दौरान अक्षय कुमार द्वारा मज़ाक में कही गई बात पर हंगामा खड़ा कर दिया था। उस दौरान उनके पिता विनोद दुआ भी अक्षय पर हमलावर हो उठे थे।
पुलवामा में गुरुवार को आत्मघाती हमले में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के दो जवान संजय राजपूत और नितिन राठौर हमेशा के लिए अपने घर, परिवार, शहर, जिले सबको अलविदा कह गए।
संजय राजपूत का परिवार जिले के मलकापुर के लखानी प्लॉट में रहता है। 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी उन्होंने देश के लिए अपनी सेवा को पाँच वर्ष के लिए आगे बढ़वाया था। उन्हें क्या मालूम था उनका यह फ़ैसला उन्हें हमेशा के लिए परिवार से दूर कर देगा।
संजय के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 13 और 10 साल है। उनके परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। जिसमें से एक भाई को पहले ही परिवार एक्सिडेंट में खो चुका है।
इस हमले के कुछ देर पहले ही संजय ने अपने बड़े भाई राजेश से फोन पर बात की थी। राजेश ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि यह उनकी भाई से आखिरी बातचीत है।
राजेश ने बताया कि संजय श्रीनगर में 115 वीं बटालियन के साथ अपनी नई पोस्टिंग के लिए 11 फरवरी को नागपुर से कश्मीर गए थे। राजेश ने संजय को गुरुवार को सुबह करीब 9.30 बजे फोन किया, तब संजय ने उन्हें बताया कि वह अपनी नई पोस्टिंग में शामिल होने के लिए सुबह 3.30 बजे जम्मू से रवाना हुए हैं।
देश के नाम हुए बलिदान नितिन और संजय के लिए प्रभादेवी सिद्धीविनायक मंदिर ट्रस्ट ने परिवार को 51 लाख रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट की तरह पुणे के मेरी टैक्निकल इंस्टिटयूट ने भी परिवारों को 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया।
महाराष्ट्र सरकार ने भी वीर जवानों के परिवार को 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है। साथ ही सरकार परिवार के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी उठाएगी।
भारत की सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ एक नया इतिहास रचने की दिशा में अग्रसर है। दुर्भाग्य इस बात का है कि जिस ट्रेन को लेकर पूरी केंद्र सरकार उम्मीद लगाए बैठी है, उसी को लेकर कुछ लोग अफ़वाहें फैला रहे हैं। बेवजह ही इस ट्रेन को टारगेट करके ख़ामियों का जामा पहनाने की कोशिश की जा रही है।
नामी हिन्दी अख़बार नवभारत टाइम्स भी अफ़वाह फैलाने से अछूता नहीं रहा। अख़बार ने 18 फरवरी को अपने पाठकों के समक्ष दो अलग-अलग एडिशन में अलग-अलग ख़बर परोसी। नवभारत टाइम्स ने गाज़ियाबाद के एडिशन में पेज-16 यानी आख़िरी पन्ने पर ‘वंदे भारत को रास्ते भर लगे झटके’ हेडिंग के नीचे एक ख़बर लिखी – ‘ट्रेन से कटकर युवक ने दी जान।’ ख़बर के मुताबिक एक शख़्स ने तब ख़ुदकुशी कर ली जब ट्रेन वाराणसी से दिल्ली आ रही थी।
नवभारत टाइम्स का गाज़ियाबाद एडिशन
वहीं दूसरी तरफ नवभारत टाइम्स अपने दिल्ली एडिशन के उसी पेज-16 पर उसी हेडिंग के नीचे इसी ख़बर को लिखता है – सही फैक्ट के साथ। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि इस ख़बर में एक लाइन और दिखती है और वो ये कि ख़ुदकुशी का यह हादसा पिछले महीने ट्रायल के दौरान हुआ था।
नवभारत टाइम्स का दिल्ली एडिशन
ये बिल्कुल ज़रूरी नहीं कि इन ख़बरों को पढ़ने वाला पाठक दोनों एडिशन को पढ़े। क्योंकि दोनों क्षेत्र अलग-अलग हैं। दिल्ली वाले दिल्ली एडिशन पढ़ेंगे और गाज़ियाबाद वाले गाज़ियाबाद एडिशन। लेकिन इस ख़बर को पढ़ने वालों पर इसका असर अलग-अलग तरीके से होगा। गाज़ियाबाद वाले पाठक इस हादसे को बीते कल (17 फरवरी) का समझेंगे, जो ग़लत संदेश के रूप में अपना प्रभाव छोड़ जाएगा।
सोशल मीडिया के ज़माने में मीडिया कुछ भी बोल-लिख-दिखा दे और ग़लतफ़हमी पैदा कर दे यह अब संभव नहीं। कुछ ऐसे भी पाठक होते हैं जो ख़बरों को गंभीरता से पढ़ते हैं और उटपटांग लगने पर अपनी प्रतिक्रिया भी दर्ज करते हैं। ऐसे ही एक ट्विटर यूज़र अनुज गुप्ता की नज़र नवभारत टाइम्स की इन दोनों ख़बरों पर अटक गई और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया ट्वीट के माध्यम से दर्ज कर दी।
Two editions of Navbharat times – One published a month old news as today’s news to show delay in Vande Bharat express. A new low in journalism. pic.twitter.com/taJzvbLPz1
अब यह तो किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं कि इतने बड़े मीडिया हाउस से भूल हो। और अगर मान भी लिया जाए कि यह भूल ही है, तो भी इसकी माफ़ी हो ही नहीं सकती। क्योंकि इसकी ठोस वजह यह है कि यह कोई छोटा-मोटा अख़बार नहीं है बल्कि इसकी पहुँच देश-दुनिया भर में है।
इस अख़बार को पढ़ने वालों की सँख्या लाखों में है। इन बड़े मीडिया हाउस पर लोग भरोसा करते हैं, अख़बार में इनके द्वारा परोसी गई विषय सामग्री पर पाठक आँख मूंदकर भरोसा करते हैं। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि नवभारत टाइम्स जैसे नामी अख़बार की यह ग़लती किसी अपराध से कम नहीं और यह कृत्य उसके पाठकों के साथ एक धोखा भी है।
पुलवामा में गुरुवार को आत्मघाती हमले में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के नितिन राठौर हमेशा के लिए अपने घर, परिवार को अलविदा कह गए। अपने घर के अकेले कमाने वाले नितिन राठौर बुलढाणा जिले के लोणार तालुका चोरपांगरा गाँव के रहने वाले थे। घर में नितिन की पत्नी वंदना, बेटा जीवन, बेटी जीविका माँ सावित्री बाई, पिता शिवाजी, भाई प्रवीण समेत दो बहनें हैं।
मात्र 23 की उम्र में साल 2006 में नितिन सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। राठौर के छोटे भाई प्रवीण ने बताया कि आधी रात में इस ख़बर के मिलने के बाद से ही उनका पूरा परिवार बिखर गया है। प्रवीण ने बताया कि वो अपने माता-पिता के साथ खेती में मदद करता है। खेती के अलावा उन्हें सिर्फ़ नितिन का ही सहारा था जो अब नहीं रहा।
नितिन की पत्नी वंदना ने बताया कि एक हफ्ते पहले ही वो सब साथ में भोजन कर रहे थे और खूब खुश थे। इस खबर को मिलने के बाद हिम्मत दिखाते हुए वीर की पत्नी ने कहा कि वो अपने बेटे को भी सेना को समर्पित करेंगी क्योंकि यह उनके पति (नितिन) का सपना था।
नितिन की मौत की ख़बर सुनने के बाद गाँव के लोगों ने अपने घरों में खाना नहीं बनाया। लोगों में एक तरफ जहाँ गुस्सा था, वहीं सरकार को पाकिस्तान के ख़िलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँगें भी शामिल थी।
नितिन के बचपन के दोस्त राजू राठौर ने नितिन को याद को याद करते हुए बताया कि वह काफ़ी मेहनती था। राजू ने नितिन के साथ स्नातक तक पढ़ाई की थी। सिर्फ 13 साल की उम्र से ही वो सेना में शामिल होना चाहते थे। इतना ही नहीं नितिन को कॉलेज में कई दफा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी घोषित किया जा चुका था।
देश के नाम बलिदान हुए नितिन के लिए प्रभादेवी सिद्धीविनायक मंदिर ट्रस्ट ने परिवार को 51 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। इसके अलावा मंदिर के ट्रस्ट की तरह पुणे के मेरी टैक्निकल इंस्टिटयूट ने भी परिवार को 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया।
महाराष्ट्र सरकार ने भी परिवार को 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है। साथ ही सरकार परिवार के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी उठाएगी।
नितिन के इस तरह से चले जाने के बाद इंटरनेट पर कुछ दिनों पहले बनाई गई उनकी एक वीडियो खूब शेयर हुई। इस वीडियो में वो काफ़ी भावुक होते नज़र आ रहे हैं। लोगों ने अलग-अलग गानों के साथ इसे शेयर किया है।
पुलवामा में आतंकियों के कायरतापूर्ण हमले में पंजाब के 4 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जिसमे से एक नाम कुलविंदर सिंह का भी है। रूपनगर ज़िला स्थित नूरपुर बेदी क्षेत्र के राउली गाँव निवासी कुलविंदर के वीरगति को प्राप्त हो जाने की ख़बर सुनते ही उनके पिता सन्न रह गए। पेशे से ट्रक ड्राइवर दर्शन सिंह यह मानाने को तैयार ही नहीं थे कि उन्होंने अपने जवान बेटे को सदा के लिए खो दिया है। बूढ़े दर्शन सिंह ने हमले वाले दिन से ही अपने बेटे की वर्दी पहन रखी थी। उनके इस जोश को देख कर अन्य लोग भी अभिभूत थे।
Met the family of Shaheed Kulwinder Singh in Ropar. Have announced a ₹10K monthly pension for the bereaved parents. Village school & main road will be named after the martyr as well. I stand by the families of the bravehearts who made the supreme sacrifice in #Pulwama. pic.twitter.com/0a43q4vxhr
मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने रोपड़ जाकर कुलविंदर के परिजनों से मुलाक़ात की। कुलविंदर के वीरगति को प्राप्त होने के बाद अब उनके माता-पिता अकेले रह गए हैं। कुलविंदर उनके इकलौती संतान थे। सीएम ने शोक-संतप्त माता-पिता के लिए ₹12 लाख की अनुग्रह राशि के अलावा आजीवन प्रतिमाह ₹10,000 के पेंशन की घोषणा की। साथ ही, सीएम ने स्थानीय विद्यालय का नाम कुलविंदर के नाम पर रखने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कुलविंदर के गाँव से आनंदपुर साहिब जाने वाली सड़क का नामकरण भी उन्ही की याद में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के सामने उमड़ पड़ा शोक-संतप्त माता-पिता का दर्द
बेटे की वर्दी पहले कुलविंदर के वृद्ध पिता ने तिरंगे के साथ-साथ अपने बेटे की तस्वीर भी सीने से चिपका रखी थी। नम आँखों के साथ चिता को मुखाग्नि देने के बाद उन्होंने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई करने की भी माँग की। कुलविंदर की मंगेतर भी अपने ससुराल आई और भारत माता के वीर सपूत की अंतिम यात्रा में शामिल हुई। उन्होंने वीरगति को प्राप्त अपने मंगेतर के पार्थिव शरीर को सैल्यूट ठोक शत्-शत् नमन किया।
कुलविंदर सिंह की मंगेतर का रो-रो कर बुरा हाल था
कुलविंदर की मंगनी गाँव लोदीपुर वासी अमनदीप कौर से लगभग ढाई साल पहले हुई थी। आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। कुलविंदर के पार्थिव शरीर को देख अमनदीप कौर कई बार बेहोश हुईं। दो लोगों ने सहारा देकर उसे गुरुद्वारा साहिब से घर तक पहुँचाया। अंतिम संस्कार के बाद अमनदीप कौर ससुराल पहुँची तो अपने होने वाले ससुर दर्शन सिंह के गले लग कर काफी देर तक रोती रहीं।
नूरपुर बेदी Ropar (Pb)में आतंकवाद के खिलाफ उतरे सैकड़ो लोग लोग शहीद कुलविंदर सिंह अमर रहे के नारे गूंजे … pic.twitter.com/bpXNyJsDk0
क़रीब दो किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में हज़ारों लोग शामिल हुए। स्थानीय विधायक अमरजीत सिंह संदोआ ने भी उन्हें कन्धा दिया। कुलविंदर के गाँव के 14 जवान भारतीय सेना में सेवारत हैं, वहीं रिटायर्ड सैनिकों ने 40 शहीदों के ख़ून का बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर में आर्मी को खुली छूट देने की अपील की है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, कुलविंदर के पिता दर्शन सिंह ने कहा:
“अब सरकारों को कुछ सोचना चाहिए। हमारे जैसे परिवारों का आख़िरकार क्या बनेगा। फौजी भर्ती तो कर लिए जाते है, बंदूक भी थमा दी जाती है। लेकिन गोली चलाने वाले हाथ बांध दिए जाते हैं, जबकि उन पर डंडे बरसाने वालों का कुछ नहीं किया जाता। खैर अब से तिरंगा ही मेरा कुलविंदर है तथा आज से पहले में शायद ड्राइवर कहलाता था। अब मुझे इस बात का फ़ख़्र होगा कि मैं शहीद का पिता हूँ।”
क्रिकेट और फुटबॉल के शौक़ीन कुलविंदर धार्मिक भी थे और जब भी गाँव आते थे तो गुरुद्वारा साहिब में सुबह-शाम पाठ किया करते थे। पंजाब पुलिस से भी उन्हें नौकरी का ऑफर आया था, लेकिन उन्होंने सीआरपीएफ को प्राथमिकता दी। उनके बलिदान पर पूरे पंजाब को गर्व है लेकिन साथ ही पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग भी की जा रही है।
पुलवामा आतंकी हमले में मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित खुड़ावाल के अश्वनी कुमार काछी भी वीरगति को प्राप्त गए। सेना की गाड़ी से शहीद अश्विनी के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव लाया गया, जहाँ पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उपस्थित रहे। अंतिम यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शहीद की अर्थी को कन्धा दिया। अश्विनी के अंतिम दर्शन के लिए हज़ारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। राज्य सरकार के कई मंत्री भी इस दौरान वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अश्वनी के परिजनों से मुलाक़ात कर उन्हें सांत्वना दी।
अमर शहीद अश्विनी को कंधा देते वक़्त मन भाव से भर गया। आप जैसे वीरों की वजह से ही भारत माता पूरी तरह सुरक्षित है।
दिल से एक संकल्प उठा, “अश्विनी, आप का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इन आतंकियों किसी भी क़ीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।” pic.twitter.com/OYWfCRTr9o
अश्वनी कुमार काछी परिवार के सबसे छोटे बेटे थे। चार भाइयों में सबसे छोटे अश्वनी की पहली पोस्टिंग साल 2017 में श्रीनगर में हुई थी। उनके बुज़ुर्ग पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु पर गर्व है लेकिन यक़ीन नहीं होता कि वो अब इस दुनिया में नहीं है। उन्होंने सरकार से ‘ख़ून के बदले ख़ून’ की माँग की। अश्वनी की माँ ने भी सरकार से बदला लेने की माँग की। उनके बड़े भाई भी अश्वनी की याद में ग़मगीन हैं, लेकिन साथ ही उन्हें अपने भाई के बलिदान पर फ़ख़्र भी है।
शहीद अश्विनी की अंतिम यात्रा (फोटो साभार: विनय असती)
अश्वनी कुमार घर के एकमात्र कमाऊ पूत थे। उनके पिता ने मज़दूरी कर बेटों को पढ़ाया- लिखाया। कॉलेज के समय से ही एनसीसी में रहे अश्वनी काफ़ी पहले से ही सीआरपीएफ में भर्ती होना चाहते थे। इसी वर्ष उनकी शादी भी तय होने वाली थी। साल के आख़िर में वह लम्बी छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। अश्वनी की माँ अपने पाँचों बच्चों के भरण-पोषण के लिए बीड़ी बनाने का कार्य किया करती थी। जब अश्विनी की नौकरी लगी, तब उन्होंने अपनी माँ से बीड़ी बनाने वाला कार्य छुड़वा दिया था।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने शहीद के परिजनों को ₹1 करोड़, एक आवास और परिवार के सदस्य को शासकीय नौकरी देने की घोषणा की है। परिवार वालों के अनुसार अश्वनी अक़्सर कहा करते थे कि वो तिरंगे में लिपट कर आना चाहते हैं। स्वर्गीय अश्वनी चार भाई व एक बहन हैं। उनके पिता ने कहा कि उनकी कामना है की गाँव का हर युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें।
शहीद के परिजनों को ढ़ांढस बँधाते नेतागण
वीरगति को प्राप्त अश्वनी का पार्थिव शरीर हवाईमार्ग से प्रयागराज तक लाया गया और वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा उसके पैतृक ग्राम खुड़ावल तक लाया गया। उनके कोच खड़ग सिंह पटेल ने कहा कि मेरे शिष्य ने देश के लिए जान दी है, मैं उसे सलाम करता हूँ। इस बीच गर्व से भरे बुजुर्ग माता-पिता ने वीर सपूत अश्वनी के सिर पर तिलक लगाकर माला पहनाई। उनके बड़े भाई ने शहीद को मुखाग्नि दी।
पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए CRPF जवानों में एक नाम बिहार की राजधानी पटना स्थित मसौढ़ी के रहने वाले संजय कुमार सिन्हा का भी है। आतंकियों की इस कायरतापूर्ण कार्रवाई में बिहार के दो बहादुरों ने मातृभूमि की बलि-बेदी पर अपनी जान न्योछावर कर दी। संजय कुमार सिन्हा का पार्थिव शरीर शनिवार (फरवरी 16, 2019) दोपहर पटना एयरपोर्ट से मसौढ़ी पहुँचा, जहाँ उनके अंतिम दर्शन के लिए भरी मात्रा में लोग मौजूद रहे। फतुहा में मोक्षदायिनी गंगा तट पर स्थित त्रिवेणी घात पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी इस दौरान वहाँ उपस्थित थे।
माँ राजमणि देवी, पिता महेंद्र सिंह, पत्नी बेबी देवी, पुत्री रूबी कुमारी, टुन्नी कुमारी व पुत्र ओमप्रकाश समेत अन्य परिजनों ने शहीद संजय के अंतिम दर्शन किए। केंद्रीय मंत्रियों रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। बीते आठ फ़रवरी को ही जवान संजय छुट्टी बिताकर ड्यूटी के लिये वापस आए थे। उन्हें अपनी बड़ी बेटी रूबी की शादी की फ़िक्र सता रही थी। वापस ड्यूटी पर जाते वक़्त उन्होंने घरवालों से दोबारा आने का वादा किया था। जब उनकी मृत्यु का समाचार आया, तब उनकी पत्नी बबीता भोजन कर रही थी। यह दुःखद सूचना मिलते ही थाली उनके हाथों से गिर पड़ी और वह दहाड़ मार कर रोने लगी।
पटना स्थित जय प्रकाश नारायण हवाई अड्डा पर पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीद हुए बिहार निवासी सी0आर0पी0एफ0 के हवलदार संजय कुमार सिन्हा जी एवं शहीद सिपाही रतन कुमार ठाकुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए।https://t.co/Nx8E9uIVulpic.twitter.com/uxgO4dmPvl
संजय ने कहा था कि वह घर लौटते ही बेटी के लिए लड़का देखने जाएँगे। घरवाले भी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन जब उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिली, पूरा परिवार ही स्तब्ध रह गया और गाँव में मातम पसर गया। संजय की इच्छा थी कि उनका बेटा एक अच्छा डॉक्टर बने। बेटा सोनू मेडिकल की तैयारी भी कर रहा है। उनकी दोनों बेटियाँ स्नातक हैं। गाँववालों में आतंकियों के इस हरक़त पर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक कर के आतंकियों का सफ़ाया करना चाहिए।
जब संजय की अंतिम यात्रा शुरू हुई तब पटना एयरपोर्ट से निकले सेना के वाहन के क़ाफ़िले पर सड़क के दोनों ओर खड़े होकर लोगों ने फूल बरसाये. लोगों ने शहीद संजय अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाये। तिरंगा लिये लोगों ने उनके क़ाफ़िले पर जगह-जगह पुष्पों की वर्षा की और हाथ जोड़ कर श्रद्धांजलि दी। इस से पहले मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने पटना में बिहार के दोनों वीरगति को प्राप्त जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ सलामी देने के लिए सीआरपीएफ, एसएसबी और बिहार पुलिस के जवान उपस्थित थे। बिहार सरकार व सुरक्षा बलों के कई अधिकारियों ने नम आँखों के साथ शहीद के अंतिम दर्शन किए।
संजय कुमार सिन्हा के आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने जुटे लोग (फोटो साभार: रोहित राज)
उधर एक अन्य ख़बर के मुताबिक़, संजय की पत्नी को अब तक मुआवज़े वाला चेक नहीं दिया जा सका है। उनके नाम में तकनीकी त्रुटि हो जाने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। डीएम रवि कुमार ने कहा कि उनके परिजनों से शपथपत्र माँगा गया है, जिसके मिलते ही उन्हें मुआवज़े का चेक सौंप दिया जाएगा। सरकारी घोषणानुसार हुतात्मा संजय की पत्नी को कुल ₹36 लाख का चेक दिया जायेगा। इनमें से ₹11 लाख बतौर मुआवज़ा व ₹25 लाख शहीद की बेटियों की शादी और संतानों की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएँगे।
बेबटेक इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी (आइटी), कोलकाता के प्रबंधक सौरभ कश्यप भी शहीद के घर पहुँचे व परिजनों को ढांढ़स बँधाया। उन्होंने संजय की बड़ी पुत्री रूबी को ₹1 लाख का चेक दिया। उनके बेटे ओम प्रकाश की मेडिकल की पढ़ाई में मदद करने का आश्वासन देते हुए सौरभ ने तीनो भाई-बहनों को अपनी कम्पनी में नौकरी देने की भी पेशकश की। वे मोहल्ले के युवकों को दौड़ने के लिए प्रेरित करते थे ताकि वे सेना अथवा अर्द्धसैनिक बल में शामिल हो सकें। पड़ोसी बताते हैं कि छुट्टी में आते थे तो सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। ग्रामीणों ने उनकी आदमकद प्रतिमा की भी माँग की है।
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए माँ भारती के अमर सपूत तथा मेरे संसदीय क्षेत्र के मसौढ़ी निवासी अमर शहीद संजय कुमार सिन्हा जी के परिजनों से मिलकर शोक की इस कठिन घड़ी में अपनी संवेदना व्यक्त किया।
स्वर्गीय संजय के दोस्तों के अनुसार, वह सिर्फ़ एक अच्छे जवान ही नहीं बल्कि एक अच्छे विचार वाले व्यक्ति भी थे। जब भी गाँव आते तो दोस्तों से ज़रूर मिलते थे। जिस वक़्त संजय के शहीद होने की सूचना मिली, उनकी माँ घर पर नहीं थी। सूचना मिलते ही जब वो घर पहुँची तो माहौल मातम में बदल गया। संजय के पिता को इस बात का मलाल है कि वह बेटी की शादी पूरी नहीं कर सके। उनका वादा अधूरा रह गया। संजय के पिता ने सरकार से इस हमले का बदला लेने की भी अपील की।
हिमाचल प्रदेश स्थित कांगड़ा के सीआरपीएफ जवान तिलक राज 14 फ़रवरी को पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। जिस दिन उन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर किए, उसी दिन उनकी चौथी मैरिज एनिवर्सरी भी थी। यही कारण है कि उनकी पत्नी सावित्री देवी अपने वीरगति को प्राप्त पति के पार्थिव शरीर के पास दुल्हन वाले कपड़ों में बैठी थी। उनके दूसरे बेटे का जन्म हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है। उनके एक बेटा 3 वर्ष का है। तिलक के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की वीरगति पर गर्व है लेकिन पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए।
निशब्द ? ? दुल्हन के जोड़े में सावित्री ने शहीद पति तिलक राज को अंतिम विदाई दी। माहौल बेहद गमगीन हो गया। पति की पार्थिव देह देख कर सावित्री बेसुध हो गई। जय हिंद ….?? ?? ?? pic.twitter.com/t5juqWxebc
जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा तिलक के परिजनों से मिलने पहुँचे, तब सावित्री ने उनसे कहा- ‘साहब, मुझे भी सीआरपीएफ की नौकरी दे दो।‘ एक माह से भी कम उम्र के बच्चे को अपनी गोद में लेकर बैठी सावित्री की आवाज़ में गज़ब की दृढ़ता थी। उस से पहले जब उन्हें उनके पति की वीरगति पाने की सूचना मिली, तो वो एकदम से बेसुध हो गई। 22 दिन का बच्चा माँ के दूध के लिए रोता रहा। रिश्तेदार माँ व बच्चा- दोनों को ही चुप कराने में व्यस्त थे।
बहुत कम लोगों को पता है कि तिलक राज एक अच्छे गायक भी थे। उनके एक वीडियो को 12 लाख से भी अधिक बार देखा गया है। लोकगीतों के शौकीन तिलक जब भी घर आते, उनका समय गाने लिखने व संगीत बनाने में ही जाता था। इसके अलावा वह एक अच्छे कबड्डी खिलाड़ी भी थे। हिमाचल की लोकगीतों को आवाज़ देने वाले तिलक ने कई हिट गानों का निर्माण किया था। उनके रूप में भारत ने एक वीर जवान ही नहीं बल्कि हिमाचल ने एक लोकगायक को भी खो दिया।
तिलक परिवार ने माँग की है कि बड़े होने पर उनके बेटे को सरकारी नौकरी दी जाए। वहीं डलहौजी पब्लिक स्कूल ने फ़ैसला लिया है कि तिलक राज के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई वहाँ होती है तो सारा ख़र्च स्कूल ही वहन करेगा। स्कूल ने कहा कि अगर परिजन चाहते हैं तो बच्चों को पूरे सम्मान के साथ विद्यालय में दाख़िल किया जाएगा और उनके हॉस्टल का ख़र्च भी स्कूल ही वहन करेगा।
तिलक राज के परिवार में कुल पाँच लोग भारतीय सुरक्षा बलों में सेवाएँ दे रहे हैं। चचेरे भाइयों में सबसे बड़े शहीद तिलक साल 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनके बाद में उनके अन्य भाई भी सेना और अर्धसेना बल में चले गए। तिलक के भाई तेज सिंह भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में हैं। राकेश कुमार, रविंद्र कुमार और केवल आईटीबीपी में सेवाएँ दे रहे हैं। इसके अलावा शहीद तिलक का साला भी सीआरपीएफ में है।
तिलक राज की एक सेल्फी जो अब एक अमर याद बन कर रह गई है
तिलक राज के गाँव पहुँचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गाँव के स्कूल का नाम का नाम तिलक राज की याद में रखने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने स्कूल को अपग्रेड कर उनका दर्जा मिडिल स्कूल से है स्कूल कर दिया। मुख्यमंत्री ने परिजनों को ₹20 लाख की सहायता देने की भी घोषणा की।
कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के वीर सपूत शहीद तिलक राज जी ने वीरगति प्राप्त की ।
आज उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके परिजनों से मिलकर उनको ढांढस बंधाया।
तिलक राज के बलिदान पर पूरे हिमाचल प्रदेश में शोक की लहार है और लोग सरकार से बदले की माँग कर रहे हैं। उनके अंतिम संस्कार में ‘अमर जवान’ से लेकर ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ तक कई नारे लगे।
पुलवामा आतंकी हमले में जान गँवा बैठे नौजवानों में एक नाम देवरिया के सीआरपीएफ जवान विजय कुमार मौर्य का भी है। विजय के इस हमले में शिकार होने के बाद उनके कई रिश्ते ताउम्र सिसकियाँ भरने के लिए पीछे छूट गए।
इस हमले में सिर्फ़ देश की सेना का एक जवान ही नहीं बलिदान हुआ बल्कि बुजुर्ग पिता ने विजय के रूप में अपने घर के सबसे होनहार बेटे को गवा दिया। उस पत्नी का सुहाग भी उजड़ गया जिसके पास विजय की तीन साल की मासूम बच्ची है, जो अभी अपने पिता को ढंग से जान भी नहीं पाई थी। इसके अलावा दो भतीजियों की आस भी टूट गई, जिनकी जिम्मेदारी उनके पिता की मौत के बाद विजय ने ही उठाई हुई थी।
विजय भटनी ब्लॉक के गाँव छपिया जयदेव के रहने वाले थे। उनके घर की माली हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। घर की स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने बैंक से दस लाख रुपयों का ऋण भी लिया था। लोन के पैसों से विजय ने गोरखपुर में जमीन खरीदी और फिर बाक़ी के बचे पैसों से अपने गाँव के घर को दुरूस्त कराया था।
परिवार में एक तरफ जहाँ विजय की मौत का गम पसरा हुआ है वहीं उन्हें इस बात की भी चिंता है कि वो दस लाख रुपए का ऋण परिवार कैसे चुकाएगा।
विजय के पिता रमायन गाँव में आज भी बटाई ली हुई ज़मीन पर खेती करते हैं। अपने तीन भाइयों व एक बहन के बीच में विजय सबसे छोटे थे। विजय के सबसे बड़े भाई अशोक गुजरात में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वहीं दूसरे नंबर का भाई हरिओम 2008 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे, लेकिन चार साल पहले उनका भी देहांत हो गया था।
भाई की मृत्यु के बाद हरिओम की पत्नी और दो बेटियों की जिम्मेदारी विजय पर ही आ गई थी। साल 2014 में शादी के बंधन में बँधे विजय की एक 3 साल की बिटिया आराध्या है।
घर के सिर्फ़ एक सदस्य के इस अकारण हुई मौत से सबकी उम्मीदों ने दम तोड़ दिया है। सवाल बहुत है लेकिन जवाब बस इतना कि अब बिगड़ी चीज़ों को सुधारने के लिए विजय दोबारा लौट कर नहीं आएगा।