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‘भारत माता की जय’ की गूंज, देश-विरोधी खालिस्तानी समर्थकों पर पड़ा कंटाप है!

देश जहाँ 26 जनवरी को अपना 70वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा था, वहीं दूसरी तरफ इसी महापर्व को अमेरिका में मना रहे भारतीयों को कुछ खालिस्तानी समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल, कुछ भारतीय 26 जनवरी को तिरंगे की परेड निकालकर गणतंत्र दिवस मना रहे थे, तभी खलिस्तानी समर्थकों ने परेड का विरोध किया और परेड को बंद करवाने में जुट गए।

वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर सिख फॉर जस्टिस के करीब 15-20 लोगों ने इस परेड का विरोध किया। लेकिन भारतीय ध्वज लहराते हुए उत्साही भारतीयों के आगे वो बिल्कुल भी टिक नहीं पाए। रिपोर्ट की मानें तो खालिस्तानी समर्थक समूह ने योजना बनाई थी कि विरोध के दौरान वे भारतीय झंडे को जलाएँगे। बताया जा रहा है कि ज्यादातर प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी थे।

तिरंगे को जलाने की दी गई धमकी

भारतीयों से परेड रोकने को कहते हुए खालिस्तान समर्थकों ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वॉशिंगटन में तिरंगा लहराया गया तो वह उसे जला देंगे।” समर्थकों ने कहा कि वह किसी भी हालत में यहां गणतंत्र दिवस कार्यक्रम नहीं होने देंगे।

भारतीय तिरंगा लेकर जब सड़कों पर उतरकर परेड कर रहे थे, तभी खालिस्तान समर्थकों ने उनका विरोध करते हुए परेड को बीच में ही रोक दिया। लेकिन सच्चे भारतीयों के सामने आखिर में खालिस्तान समर्थकों को हार माननी पड़ी। तमाम विरोध की बाद स्थानीय भारतीय आगे बढ़ते रहे और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते रहे।

झंडे को जलाने की बात का किया दावा

इस पूरे प्रकरण के बाद सिख फॉर जस्टिस ग्रुप की वेबसाइट ने दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने अमेरिका में भारतीय दूतावास के सामने भारतीय झंडा जलाते हुए अपना विरोध व्यक्त किया है। लेकिन अगर वहाँ की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सिख फॉर जस्टिस ग्रुप का यह दावा पूरी तरह से झूठा है। उनका विरोध बिल्कुल ही सफल नहीं हो पाया।

देश-विरोधी ताकतों को शायद यह अंदाज़ा न होगा कि जितनी नफ़रत उनके दिलों में हिन्दुस्तान को लेकर है, उससे कहीं ज्यादा प्यार हम भारतीय अपनी भारत माँ से करते हैं। बुराई न पहले कभी जीती है, न आगे कभी जीत पाएगी।

पद्म पुरस्कार: गुमनाम लेकिन महान लोगों के नाम से… अवॉर्ड ख़ुद हुआ सम्मानित!

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। सरकार ने इन पुरस्कारों के तहत 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण जबकि 94 लोगों को पद्मश्री पुरस्कारों के लिए चयनित किया है। इस साल पद्म पुरस्कारों के घोषणा की सबसे अच्छी बात यह है कि देश भर के जिन लोगों को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया, उनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो गुमनाम हैं।

इस साल पद्म पुरस्कार के लिए चुने गए ज्यादातर लोग मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे। सरकार ने देश के इन महान लोगों को पद्म पुरस्कार देकर एक तरह से उनके जज्बे को सलाम किया है। आइए ऐसे ही कुछ महान लोगों के बारे में जानते हैं –

जमुना टुडू झारखंड की ‘लेडी टार्जन’

जमुना टुडू जमशेदपुर के चाकुलिया की रहने वाली हैं। जमुना को जंगल माफ़ियाओं से लड़कर अपना जंगल बचान के लिए 2013 में ‘फिलिप्स ब्रेवरी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। जमुना टुडू अपने क्षेत्र के जंगलों की हिफ़ाज़त के लिए अपने साथियों के साथ सुबह ही कुल्हाड़ी हाथ में लिए निकल जाती हैं, इसके बाद शाम को ही वापस घर लौटती हैं।

इस बीच यदि कोई माफ़िया जंगल में लकड़ी काटने के लिए आता है तो उसको टार्जन लेडी की चुनौती का सामना करना पड़ता है। कई बार जमुना माफ़ियाओं से लड़ते हुए ज़ख़्मी होकर घर लौटी हैं। यही वजह है कि सरकार ने जमुना के हिम्मत और हौसले को देखते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम

देश भर के चुनिंदा लोगों को दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय पुरस्कार की लिस्ट में हजारीबाग के बुलु इमाम का भी नाम है। 76 साल के बुलु ने सोहराय व कोहबर कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम किया है। बुलु देश-विदेश में 50 से अधिक प्रदर्शनी लगा चुके हैं। बुलु इमाम को इससे पहले गाँधी शांति पुरस्कार भी दिया चुका है।

मुज़फ्फरपुर वाली किसान चाची

मुज़फ्फरपुर के राजकुमारी देवी की शादी महज़ 13 साल में हो गई। बचपन से अपने ही परिवार की बंदिशों में पलने-बढ़ने और शादी के बाद ससुराल में दहलीज़ से बाहर पैर रखना भी उनके लिए गुनाह माना जाता था। लेकिन परिवार की माली हालत ने राजकुमारी को घर से निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। घर और बाहर के लोगों की ताना सुनना राजकुमारी के लिए आम हो गया था। इन सबके बावजूद अपने मज़बूत इरादे की ताक़त पर राजकुमारी घर में अचार व मोरब्बा तैयार करती थीं और साइकिल से तैयार माल को बाजार में ले जाकर बेचती थीं। आज वही राजकुमारी गाँव की दर्जनों महिलाओं को रोज़गार दे रही हैं। वर्तमान समय में राजकुमारी देवी 16 तरह के प्रोडक्ट को तैयार करती हैं। सरकार ने राजकुमारी देवी के हिम्मत व हौसला के लिए इस पुरस्कार में उनका भी नाम जोड़ दिया है।

ओमेश कुमार भारती भी लिस्ट में

पेशे से डॉक्टर ओमेश पिछले 17 सालों से एंटी रैबीज़ वैक्सीन पर काम कर रहे थे। कुत्तों के काटने पर लोगों के इलाज को सस्ता बनाने के लिए डॉ भारती इस प्रयास में लगे हुए थे। डॉ भारती के इस रिसर्च के महत्व को समझते हुए ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ ने 2018 में उनके शोध को मान्यता दे दी। कभी 35,000 रुपए में रैबीज़ का इलाज डॉ भारती के शोध के बाद महज़ 350 रुपए में संभव हो पाया है। भारत सरकार ने डॉ भारती के रिसर्च के महत्व को समझते हुए उन्हें पद्म पुरस्कार की लिस्ट में शामिल किया है।

‘प्रियंका गाँधी को मानसिक बीमारी, हिंसक होकर लोगों को पीटती है’

बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गाँधी की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “उसको एक बीमारी है, जो सार्वजनिक जीवन में अनुकूल और उपयुक्त नहीं है। उसको ‘बाइपोलैरिटी’ कहते हैं। यानी उसकी हिंसावादी चरित्र दिखाई पड़ती है, लोगों को पीटती है। पब्लिक को पता होना चाहिए कि कब संतुलन खो बैठेगी, किसी को पता नहीं।”

बात दें कि बीते दिनों प्रियंका गाँधी को आगामी 2019 के आम चुनाव में कॉन्ग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश पूर्व का प्रभारी बनाया गया है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि प्रियंका 4 फरवरी को कुंभ मेले में गंगा में डुबकी लगाने के बाद अपने राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत कर सकती हैं।

₹5,650 करोड़ से चीन पर नज़र: हिंद महासागर में ड्रैगन को घेरने की तैयारी

हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में अपने सैन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले 10 वर्षों के लिए ₹5,650 करोड़ लागत की योजना को अंतरिम रूप दे दिया है। इसके ज़रिए अब अतिरिक्त युद्धपोत, विमान, ड्रोन, मिसाइल बैट्री और पैदल सैनिकों की तैनाती की राह सुलभ हो जाएगी। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को रोकने के लिए इस योजना को अमल में लाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर रक्षा मंत्रालय में बड़े स्तर पर चर्चा की गई थी। आपको बता दें कि अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) हमारे देश की एकमात्र कमांड है, जिसके दायरे में ऑपरेशनल कमांडर के अंतर्गत आर्मी, नौसेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल आते हैं।

जानकारी के मुताबिक़, इस योजना की समीक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता वाली डिफेंस प्लानिंग कमिटी ने भी की थी, जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल हुए थे। इसके अलावा 2027 तक भारतीय सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए एक व्यापक योजना पर भी काम चल जा रहा है।

सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए इस योजना के तहत क़रीब ₹5,370 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। फ़िलहाल, 108 माउंटेन ब्रिगेड का विकास करने के साथ नई वायु रक्षा प्रणाली, सिग्नल्स, इंजीनियर, आपूर्ति और अन्य ईकाइयों के अलावा वहाँ पहले से मौजूद तीन बटालियन (दो पैदल सेना और एक प्रादेशिक सेना) को जोड़ने के लिए एक नई पैदल बटालियन भी शामिल की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के 572-द्वीप समूह के दौरे से संकेत मिलता है कि कुछ योजनाएँ पिछले 30 दिनों के पहले से ही चल रही थीं। उदाहरण के लिए, पोर्ट ब्लेयर और कार निकोबार में दो मौजूदा प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा, शिबपुर में नौसेना के हवाई स्टेशनों पर रनवे (गुरुवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा द्वारा आईएनएस कोहासा के नेतृत्व में) पहले से चालू थे।

उत्तर में कैम्पबेल बे (INS बाज़), दक्षिण में बड़े विमानों द्वारा परिचालन में मदद करने के लिए 10,000 फ़ीट तक बढ़ाया जाएगा। 10 साल के बुनियादी ढाँचे के विकास के तहत कामोर्टा द्वीप पर 10,000 फ़ुट का एक और रनवे भी बनाया जाएगा। बता दें कि भारत ने सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू जेट, लंबी दूरी तक समुद्री गश्त के लिए पोसिडोन-8I विमान और हेरॉन-2 निग़रानी जैसे ड्रोन द्वीपसमूह में पहले से ही तैनात किए हुए हैं।

इसके अलावा डॉर्नियर-228 गश्ती विमान और MI-17V5 हेलीकॉप्टर भी जल्द ही ANC पर तैनात किए जाएँगे। हालाँकि 2001 में इसे स्थापित किए जाने के बाद ANC को लगातार सेना, नौसेना और वायु सेना और आंतरिक राजनीतिक-नौकरशाही की बेरुख़ी के अलावा फंड की कमी और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी की कमी की वजह से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

इस प्रकार, एक मज़बूत ANC, जो संपूर्ण सैन्य बल और बुनियादी ढाँचे से लैस हो, प्रभावी रूप से इंडियन ओसियन रिजन (IOR) में चीन की कूटनीतिक चाल का मुक़ाबला करने के लिए एक अहम रोल अदा कर सकता है। भारत की ओर से चीन के क्षेत्र में नौसेना का विस्तार, जिसमें परमाणु पनडुब्बी भी शामिल हैं, को समय के साथ-साथ और भी बढ़ाया जाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में नज़र बनाए रखने के लिए और ज़रुरी होने पर हस्तक्षेप करने के लिए ANC में अपनी सैन्य चौकियों को गंभीरता से लेना होगा।

‘नारी शक्ति’: साल 2018 का हिन्दी शब्द, ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल

26 जनवरी को जब राजपथ पर ‘नारी शक्ति’ का प्रदर्शन हो रहा था, उसी वक़्त जयपुर में भी इस पर चर्चा चल रही थी। चर्चा इसलिए क्योंकि साहित्य महोत्सव में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को साल 2018 का हिन्दी शब्द चुनना था। और पैनल ने आख़िरकार ‘नारी शक्ति’ शब्द पर मुहर लगा दी।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ़, जयपुर साहित्य उत्सव) में ऑक्सफोर्ड ने अपने बयान में कहा, “मार्च 2018 में अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर भारत सरकार द्वारा जब नारी शक्ति पुरस्कार के तहत महिलाओं की असाधारण उपलब्धियों को पहचाना और सराहा गया, तब से इस शब्द के प्रयोग में जबरदस्त उछाल आया है।” साथ ही ट्रिपल तलाक, सबरीमाला मंदिर विवाद, MeToo आंदोलन जैसे महिला सशक्तीकरण के मुद्दे भी इस शब्द को चुनने का आधार बने।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में ‘हिंदी वर्ड ऑफ दि ईयर’ का दर्जा ऐसे शब्द को दिया जाता है, जो पूरे साल काफी ध्यान आकर्षित करता है। इसके साथ ही लोकाचार, भाव और चिंता को भी प्रतिबिंबित करता हो। ऑक्सफोर्ड के अनुसार ‘नारी शक्ति’ शब्द संस्कृत से लिया गया है और इन दिनों अपने हिसाब से जीवन जी रहीं महिलाओं के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि “आधार” को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने साल 2017 का हिन्दी शब्द चुना था।

राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक भारत का न्यूक्लियर ट्रायड

न्यूक्लियर अस्त्र दो प्रकार के होते हैं- स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन (SNW) और टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन (TNW)। स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन किसी नगर की बड़ी जनसंख्या पर आक्रमण करने के लिए होते हैं। विश्व इतिहास में SNW का प्रयोग प्रथम और अंतिम बार अमेरिका ने जापान के विरुद्ध 1945 में किया था। जापान पर अमेरिका के परमाणु हमले के बाद से ही अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में निशस्त्रीकरण की बहस चालू हुई। कहा गया कि ग़ैर ज़िम्मेदार (अमेरिकी बुद्धिजीवियों की शब्दावली में गरीब) देश परमाणु अस्त्र बनाने की क्षमता विकसित न करें और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमीर देश अपने नाभिकीय हथियारों का ज़खीरा नष्ट करें।

चिर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका और रूस ने अपने कितने SNW नष्ट किये इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है अलबत्ता इन देशों की आपसी खींचतान ने सामरिक जगत में एक नए प्रकार के अस्त्र को जन्म दिया। इसे टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन (TNW) कहा गया। इन अस्त्रों को विकसित करने के पीछे तर्क यह दिया गया कि चूँकि SNW से होने वाला विनाश बड़ा होता है इसलिए कम तीव्रता वाले छोटे TNW बनाए जाएँ जिनका प्रयोग युद्धकाल में जनता पर नहीं बल्कि शत्रु देश की सेना पर किया जाए। शीत युद्ध के समय इस प्रकार के हथियार अमेरिका और रूस द्वारा बड़ी मात्रा में विकसित किए गए और कहा जाता है कि शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात उन्हें नष्ट भी कर दिया गया।

अमेरिका और रूस ने भले ही अपने TNW नष्ट कर दिए हैं किंतु उनसे प्रेरणा लेते हुए पाकिस्तान ने ढेर सारे TNW विकसित किए गए हैं। किसी देश के द्वारा टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन विकसित करना यह दिखाता है कि वह युद्ध में परमाणु हथियार का प्रयोग पहले करने को आतुर है। भारत की 1998 में घोषित न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन में कहा गया कि हम युद्धकाल में न्यूक्लियर वेपन का प्रयोग पहले नहीं करेंगे। जब हम पर न्यूक्लियर हथियार से हमला किया जाएगा तब हम उसका मुँहतोड़ जवाब देंगे। पहले हमला न करने की नीति के चलते ही हमने टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन विकसित नहीं किए।

भारत ने पहले हमला न करने की नीति के साथ ही यह भी घोषणा की कि हम नाभिकीय अस्त्रों के प्रयोग में ‘credible minimum deterrence’ का पालन करेंगे। अर्थात हम पर इस बात के लिए विश्वास किया जा सकता है कि हम परमाणु हथियार का प्रयोग करना नहीं चाहते इसीलिए परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी क्षमता में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि कोई और देश हम पर परमाणु हमला करने से पहले सौ बार सोचे। इसी नीति पर चलते हुए भारत ने टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन ले जाने लायक डिलीवरी सिस्टम विकसित किए लेकिन TNW नहीं बनाए।

‘डेटरेन्स’ या निवारक का अर्थ यह हुआ कि हमने शत्रु देश को हम पर हमला करने से पूर्व ही अपने परमाणु अस्त्र की शक्ति दिखा कर रोक दिया। इसे सुनिश्चित करने के लिए हमने स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन और इन्हें ले जाने लायक डिलीवरी सिस्टम विकसित किए। किसी भी देश की सशस्त्र सेना के तीन मुख्य अंग होते हैं: जल, थल और नभ। इन तीन माध्यमों से नाभिकीय अस्त्र प्रक्षेपित करने की क्षमता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हर स्थाई सदस्य देश ने विकसित की है। “जल थल और नभ से परमाणु हथियार दागने की क्षमता को हम न्यूक्लियर ट्रायड विकसित कर लेने की संज्ञा देते हैं।”

भारत ने भी 1983 में प्रारंभ किए गए Integrated Guided Missile Development Program के अंतर्गत 26 दिसंबर 2016 को अग्नि-5 मिसाइल का पाँचवी बार सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। अग्नि-5 पाँच हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक न्यूक्लियर वेपन ले जा सकने वाली Intermediate Range Ballistic Missile है। जनवरी 2017 में हमने कम दूरी की IRBM अग्नि-4 का भी परीक्षण किया था। यह धरातल से धरातल पर मार करने वाली मिसाइलें हैं। अग्नि की क्षमता IRBM से आगे बढ़कर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक मार करने वाली ICBM तक की है।

भारत ने अग्नि के विकास में Multiple Independently targetable Re-entry Vehicle तकनीक तक की महारत हासिल कर ली है। MIRV का अर्थ यह है कि एक बार लॉन्च होने पर मिसाइल कई अलग लक्ष्यों को एक साथ भेद कर समूल नष्ट कर सकती है। पूर्व डीआरडीओ अध्यक्ष वी के सारस्वत के अनुसार अग्नि शृंखला की मिसाइलें भविष्य में एंटी सैटेलाइट हथियार के रूप में भी विकसित की जा रही हैं। अग्नि के अतिरिक्त भारत के पास कम और मध्यम दूरी की पृथ्वी, धनुष और निर्भय सब सोनिक क्रूज़ मिसाइलें भी हैं। धनुष युद्धपोत से धरातल पर 350 किमी तक मार कर सकती है। प्रहार मिसाइल 150 किमी तक की टैक्टिकल रेंज में स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वेपन ले जा सकने में सक्षम है।

चूँकि भारत ने पहले न्यूक्लियर वेपन प्रयोग न करने की नीति अपनाई है इसलिए हमने अपने मिसाइल लॉन्चर को Launch on Warning अथवा Launch through Attack क्षमता पर नहीं रखा है। एलर्ट का स्तर इंटेलिजेंस से प्राप्त सूचनाओं पर निर्भर होता है। हमें पाकिस्तान या उससे दूर के लक्ष्य (600-2000 किमी तक) को भेदने के लिए 8 से 13 मिनट का समय लगेगा।

वायुसेना की बात करें तो भारतीय वायुसेना के पास न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम जगुआर, मिराज-2000 और सुखोई-30 MKI युद्धक विमान हैं। फ्रांस से हाल ही में खरीदे गए राफेल विमान भी परमाणु बम गिराने में सक्षम हैं।

भारतीय नौसेना ने समुद्र से परमाणु अस्त्र प्रक्षेपित करने वाली सबमरीन का निर्माण भी किया है। नवंबर 5, 2018 को भारत की प्रथम स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिहंत ने समुद्र में गश्त लगाई थी। इसे Ship Submersible Ballistic Nuclear (SSBN) सबमरीन कहा जाता है। जल के भीतर होने से अरिहंत शत्रु की नज़र से लगभग ओझल ही रहेगी जिसके कारण भारतीय नौसेना को रणनीतिक लाभ होगा। अरिहंत 6000 टन की 367 फिट लंबी पनडुब्बी है जो K-15 बैलिस्टिक मिसाइल से लैस की जा सकती है। इस मिसाइल की रेंज 750 किमी तक मार करने की है। K शृंखला की इन मिसाइलों का नाम K से प्रारंभ होता है जो डॉ अब्दुल कलाम के नाम का द्योतक है। हालाँकि अभी यह रेंज कम है लेकिन डीआरडीओ Submarine Launched Ballistic Missile (SLBM) विकसित करने और इसे अरिहंत पर तैनात करने की ओर अग्रसर है जिसकी रेंज 5000 किमी तक बढ़ाई जा सकती है। भारत अब MTCR का सदस्य भी बन चुका है इसलिए रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइलों की तकनीक दूसरे देश को देने और अत्याधुनिक हथियारों की तकनीक किसी से लेने में भी अब कोई अड़चन नहीं आएगी।

CBI और ED का जालः मेहुल चोकसी को वेस्ट इंडीज से लाने के लिए जहाज तैयार!

पंजाब नैशनल बैंक में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाले भगोड़े आर्थिक अपराधी मेहुल चोकसी की देश वापसी के लिए सीबीआई और ईडी के अधिकारी वेस्टइंडीज जा सकते हैं। रिपोर्ट की मानें तो इस मिशन को पूरा करने के लिए एयर इंडिया के एक लॉन्ग-रेंज बोईंग विमान की मदद ली जा रही है। मेहुल चोकसी और जतिन मेहता जैसे भगोड़े आर्थिक अपराधी कैरेबियाई देशों की पेड नागरिकता का फायदा लेकर वहाँ के नागरिक बन गए हैं।

मेहता के पास सेंट किट्स ऐंड नेविस की नागरिकता है, जबकि चोकसी ने हाल ही में एंटीगुआ ऐंड बारबुडा की नागरिकता ली है। बता दें कि ये द्वीप 132 देशों में वीजा फ्री यात्रा की सुविधा प्रदान करते हैं। यहाँ भारत के आर्थिक अपराधियों द्वारा पैसे देकर नागरिकता लेने का चलन काफी पुराना है।

कैरेबियाई देश से उठाया जा सकता है चोकसी को

रिपोर्ट की मानें तो इन दोनों भगोड़े अपराधियों के किसी निश्चित ठिकाने का पता नहीं चल पाया है लेकिन चोकसी को कैरेबियाई देश जबकि नीरव मोदी को यूरोप से उठाया जा सकता है। इन द्वीपों के साथ भारत का प्रत्यर्पण समझौता नहीं है, जिसके चलते ये देश भगोड़े आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगार बन गया है। बता दें कि चोकसी पीएनबी में 13,700 करोड़ रुपए के घोटाले में आरोपित है।

चोकसी ने अपनी भारतीय कंपनियों – ‘गीतांजलि जेम्स’, ‘गिल इंडिया’ और ‘नक्षत्र’ के बढ़े हुए आयात संबंधी दस्तावेज़ प्रस्तुत करके पीएनबी बैंक को धोखा दिया है। जबकि विनसम डायमंड कंपनी के मालिक जतिन मेहता पर 3,969 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड करने का आरोप है।

आसानी से मिल जाती है पेड नागरिकता

डोमिनिसिया और सेंट लुसिया में महज 1 लाख डॉलर में ही नागरिकता और पासपोर्ट दे दिया जाता है। जबकि अगर पत्नी की भी नागरिकता चाहिए हो तो इसके लिए 1.65 लाख डॉलर का भुगतान करना होता है। वहीं, ग्रेनाडा इसी तरह का पासपोर्ट दो लाख डॉलर में देता है।

एवरेस्ट पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला ने कहा मोदी सरकार को थैंक्यू!

गणतंत्र दिवस के मौके पर सम्मानित किए जाने वाले लोगों में एक नाम बछेंद्री पाल का भी है। जिन्हें सरकार द्वारा पद्म भूषण देने की घोषणा की गई।

बछेंद्री पाल का इस सम्मान पर कहना है कि यह पद्म भूषण का मिलना उनके लिए बेहद हैरान करने वाला है। उन्होंने मोदी सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी अवार्ड के लिए आवेदन नहीं किया था। उन्होंने इस अवार्ड को अपने माता-पिता को सादर समर्पित किया।

बता दें कि सरकार द्वारा जारी की गई पद्म पुरस्कारों की सूची में उन नागरिकों का नाम शामिल है जिन्होंने देश में तमाम क्षेत्रों में अपना अहम योगदान दिया है।

पद्म पुरस्कारों की सूची में भारतीय खिलाड़ियों का नाम भी शामिल है। इसी सूची में दिग्गज पर्वतरोही बछेंद्री पाल का नाम भी है। बछेंद्री पाल पहली भारतीय महिला है जिन्होंने 1984 में माउंट एवरेस्ट की ऊँचाईयों को छुआ वहीं विश्व में उनका नम्बर पाँचवाँ है।

24 मई 1954 को जन्मी बछेंद्री इस समय 64 वर्ष की हैं। वर्तमान में वे टाटा स्टील में कार्यरत हैं। यहाँ वह चुने हुए कर्मचारियों को रोमाँचक अभियानों का प्रशिक्षण देती हैं।

आपको बता दें कि बछेंद्री को अपने जीवन में सर्वप्रथम पर्वतरोहण का मौका 12 साल की उम्र में मिला था। उस समय उन्होंने अपने स्कूल के साथियों के साथ 400 मीटर की चढ़ाई की थी। 1984 में जब भारत का चौथा एवरेस्ट अभियान शुरू हुआ तो बछेंद्री उस टीम का हिस्सा थी।

इस टीम में 7 महिलाओं के साथ 11 पुरूष थे। एक तरफ जहाँ 23 मई 1984 में दोपहर 1:07 मिनट पर 29,028 फुट की ऊँचाई पर इस टीम ने एवरेस्ट पर भारत का झंडा फहराया था, वहीं इस चढ़ाई के साथ एवरेस्ट पर भारतीय महिला के रूप में सागरमाथे पर पहला कदम रखने वाली बछेंद्री पहली भारतीय महिला बन गई थीं।

26 जनवरी स्पेशल: भारतीय शहीदों की याद में हमेशा प्रज्वलित रहे ‘अमर जवान ज्योति’ की लौ

आज देश में जहाँ एक तरफ गणतंत्र मनाए जाने की धूम है, तो वहीं दूसरी तरफ सैनिकों का बलिदान भी यादगार है। भारतीय सैनिकों के बलिदान को देश की मिट्टी भला कैसे भूल सकती है। सेना के जाबाज़ जवानों और उनके जज़्बों के आगे देश का हर नागरिक हमेशा से ही नतमस्तक रहा है। दिन-रात देश की चौकसी में जुटे ये प्रहरी जैसे थकना ही ना जानते हों। नई दिल्ली के इंडिया गेट पर 24 घंटे और सातों दिन लगातार प्रज्वलित लौ ‘अमर जवान ज्योति’ उनके इसी जज़्बे और बलिदान को सलाम करती है।

अमर जवान ज्योति एक भारतीय स्मारक है जिसे 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में प्रज्वलित किया गया। 3 दिसम्बर से 16 दिसम्बर 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान अर्थात आज के बंग्लादेश में मुक्ति सेना की मदद करते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को घुटने टेकने पर मज़बूर कर दिया। बांग्लादेश को पाकिस्तान से आज़ाद कराने के मुहीम में हज़ारों भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आधिकारिक रूप से अमर जवान ज्योति स्मारक का उद्घाटन किया था। 1972 के बाद से प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर (गणतंत्र दिवस की परेड से पहले) देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, आर्मी चीफ़ के साथ वायु, जल एवं थल सेना प्रमुख़ एवं अन्य मुख्य अतिथि अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

राजपथ पर स्थित इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति वर्ष 1972 से लगातार प्रज्वलित है। इसका आसन संगमरमर का बना हुआ है जिस पर स्वर्ण अक्षरों से ‘अमर जवान’ अंकित है। स्मारक के ऊपर L1A1 आत्म-लोडिंग राइफ़ल भी लगी हुई है, जिसके बैरल पर सैनिक का हेलमेट लटका हुआ है।

अमर जवान ज्योति की प्रज्वलित लौ के पास तटस्थ मुद्रा में खड़े जवान की ज़िम्मेदारी होती है कि वो उस प्रज्वलित लौ का ध्यान रखे और उसे बुझने ना दे। साल 2006 तक अमर जवान ज्योति को जलाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब सीएनजी का इस्तेमाल होता है। कस्तूरबा गाँधी मार्ग से इंडिया गेट तक क़रीब 500 मीटर लंबी गैस पाइप लाइन बिछी है। स्थापित चार में से एक मशाल साल भर प्रज्ज्वलित रहती है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही चारों मशालों को प्रज्जवलित किया जाता है।

शहीदों की याद में प्रज्वलित इस लौ को ‘अजर अमर’ भी कहा जाता है। भारतीय सेना के बलिदान की भरपाई तो कभी नहीं की जा सकती। लेकिन हाँ इतना ज़रूर है कि देश का हर नागरिक उनके बलिदान से सदैव वाक़िफ़ रहेगा और नतमस्तक भी।

ऑल्ट न्यूज़ वाला प्रतीक सिन्हा: दोमुँहापन, नंगई और बेहूदगी का पर्याय

एक साइट है ऑल्ट न्यूज़, मसीहाई की हद तक अपने आप को मानवता की धरोहर बताता है। नैतिकता और प्राइवेसी पर ज्ञान इनके साइट पर इतना ज़्यादा है मानो इन्हें देख लें तो दस-पाँच जनम के पाप धुल जाएँ। इसके यीशु मसीह हैं प्रतीक सिन्हा, जिनकी आजकल, और पिछली हरकतों से उन्हें बहुत ज़्यादा सम्मान दिया जाए तो भी एक ही शब्द निकल कर आता है: चिरकुट!

‘चिरकुट’ शब्द इसलिए क्योंकि प्रतीक सिन्हा का यही काम है, चिरकुटई। ज्ञान देने में तो इस लम्पट की साइट, प्राइवेसी पॉलिसी से लेकर, प्राइवेसी पर कवर किए गए तथाकथित ‘एक्सपोज़े’ तक, उस ऊँचे स्तर पर ख़ुद को रख देती है, जहाँ आज की दुनिया में पहुँचना असंभव लगता है। यही कारण है कि हमने इसके दोमुँहेपन पर इसी की साइट पर, किसी ‘फ़ॉल्ट न्यूज़’ वाली रॉकेट साइंस और रीवर्स इमेज मैनिपुलेशन, सॉफ़्टवेयर के इस्तेमाल या क्लासिफाइड स्पेस साइंस का प्रयोग किए बग़ैर ही थोड़ा स्क्रीनशॉट और हाइपरलिंक बेस्ड ‘शोध’ किया। 

इनकी साइट पर जाकर अगर आप अंग्रेज़ी में ‘प्राइवेसी’ (privacy) लिखकर सर्च करेंगे तो कई लिंक आते हैं। इसमें से एक लिंक ‘प्राइवेसी पॉलिसी‘ का है, जो कि आपको प्रतीक सिन्हा की ज्ञानगंगा ऑल्ट न्यूज़ के उस पन्ने पर ले जाता है जहाँ वो बातें लिखी हुई हैं, जिनमें प्रतीक सिन्हा को स्वयं ही कोई विश्वास नहीं।

वहाँ लिखा है कि ‘हमारे लिए हमारे विज़िटर्स की प्राइवेसी अत्यंत महत्वपूर्ण है’। आगे वो टिपिकल बातें लिखी हैं जो रहती हर जगह पर, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। थोड़ी दूर नीचे आपको ये भी लिखा मिलेगा कि वो ऐसी कोई जानकारी इकट्ठी नहीं करते जो किसी की निजी पहचान को बाहर लाता हो। यानी, ऑल्ट न्यूज़ (प्रतीक सिन्हा जिसका संस्थापक है) प्राइवेसी और पर्सनल इन्फ़ॉर्मेशन को लेकर बेहद सजग और गम्भीर है। शायद, ये लम्पट जानता है कि किसी की निजी बातें कहीं और चली जाएँ तो वो घातक हो सकती हैं। 

प्राइवेसी पॉलिसी का स्क्रीनशॉट

प्रतीक सिन्हा इन ख़तरों को जानता तो है, लेकिन मानता नहीं। साइट पर लिखना और ज्ञान देना एक बात है, लेकिन उसकी हाल की हरकतों, या कहें कि घटिया हरकतों से लगता नहीं कि उसे इसका तनिक भी भान है कि प्राइवेसी के मायने क्या हैं, और किसी की निजी जानकारी बाहर ला दी जाए तो वो किस तरह से उसे मानसिक और भावनात्मक यातनाओं से रूबरू कर सकती है। ताज़ा उदाहरण स्क्विंट नियॉन नाम के एक ट्विटर यूज़र का है, जिसकी निजी जानकारी को प्रतीक सिन्हा ने ‘फ़ैक्ट चेक’ के नाम पर सार्वजनिक कर दी। 

फिर आप ग़ौर से पढ़ेंगे तो आप समझ जाएँगे कि प्रतीक सिन्हा के लिए कुछ लोगों के नाम, पता और पर्सनल डीटेल्स सार्वजनिक करने में थोड़ी भी शर्म क्यों नहीं आई: वहाँ लिखा है ‘आवर विज़िटर्स’। ये लोग तो ख़ैर ‘आवर विजिटर्स’ में आते भी नहीं, इनकी प्राइवेसी पर प्रतीक सिन्हा को घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता! 

ये दोगलापन है। और हाँ, दोगलापन गाली नहीं है, दोगलापन एटीट्यूड है, जहाँ आप लिखते कुछ हैं, करते कुछ और। दोगलापन इसलिए क्योंकि जिस ‘प्राइवेसी’ के सर्च में प्राइवेसी पॉलिसी आई, उसी में एक हेडलाइन दिखी जहाँ लिखा था कि ‘क्या पीएम मोदी का ऐप निजी जानकारियों को थर्ड पार्टी के साथ, आपकी सहमति के बिना, शेयर करता है? हाँ’। अंग्रेज़ी में चूँकि बड़े अक्षरों के प्रयोग से आप अपनी बात कहने के लिए ‘यस’ को ‘YES’ लिखते हैं, तो पता चलता है कि आप महज़ हेडलाइन नहीं बना रहे, अपने विचार भी इम्फ़ैटिकली (ज़ोर देकर) रख रहे हैं। मैं भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ कि किसी भी ऐप को मेरी जानकारी, मेरी सहमति के बिना, किसी को भी देना बिलकुल गलत है। 

पर्सनल डेटा को लेकर प्रतीक सिन्हा की चिंतनीय लेख

एक और ख़बर है जो सिन्हा ने ही तैयार की है जिसमें नरेन्द्र मोदी ऐप द्वारा ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ पर यू-टर्न मारने की बात कही गई है। वहाँ भी यही तर्क दिया गया है कि इस ऐप के द्वारा किसी थर्ड पार्टी को ऐप उपयोगकर्ताओं की जानकारी भेजी जा रही है। ये सिर्फ़ आर्टिकल नहीं है, ये एक स्टैंड लेने जैसा है, और जो सही है, कि किसी भी ऐप द्वारा किसी की भी निजी बातें, कहीं भी, बिना उसकी सहमति से नहीं भेजी जानी चाहिए। फिर, स्टैंड लेकर प्रतीक सिन्हा ये भूल गए कि ट्विटर पर किसी की सारी निजी बातें बता देना भी ‘सहमति के बिना’ डेटा शेयर करने जैसा ही है। 

नरेन्द्र मोदी ऐप पर प्रतीक सिन्हा द्वारा ‘प्राइवेसी’ को लेकर उठाए गए सवाल

फिर प्रतीक सिन्हा ने क्या सोचकर इन लोगों की निजी जानकारी ट्विटर पर सार्वजनिक कर दी? ‘थर्ड पार्टी’ को ऐप की जानकारी जाने पर पूरा आर्टिकल लिखा, और स्वयं ही उससे भी घातक काम किया कि उस नवयुवक को गालियाँ, जान से मारने की धमकी और उसके परिवार को हिंसक बातें कही जा रही हैं! अबे, थोड़ी कन्सिसटेन्सी तो रख लो अपनी बातों में! ऑनलाइन जिहादियों को किसी की जानकारी दे दी क्योंकि उसके विचार तुमसे नहीं मिलते?

कैसे बेहूदा आदमी हो यार? ‘कन्सेन्ट’ शब्द सुना है कभी, उसका मतलब समझते हो? बिना पूछे किसी की जानकारी सार्वजनिक करना असंवैधानिक है, फ़ैक्ट चेकिंग के यीशु मसीह! ‘राइट टू प्राइवेसी’ और ‘विदाउट कन्सेंट’ जानकारी बाहर करने का परिणाम देखो नीचे। लेकिन क्यों, तुम्हें तो मजा आ रहा होगा क्योंकि कहीं न कहीं तुम्हारी मंशा भी यही थी!

ट्विटर यूज़र @squintneon को मिली धमकियों के स्क्रीनशॉट्स

‘पर्सनल’ और ‘पब्लिक’ शब्द पर ही पत्रकार राहुल कँवल द्वारा राहुल गाँधी की निजी तस्वीरें अपने फ़ेसबुक पेज पर शेयर करने के ऊपर एक पूरा आर्टिकल है जिसमें हेडलाइन से लेकर अंतिम पैराग्राफ़ तक कई ऐसी बातें हैं जो प्रतीक सिन्हा पढ़ ले तो उसे अपने ‘ऑल्ट न्यूज़ स्टाफ़’ पर गर्व होगा, और अपने बारे में ‘डाउनराइट पैथेटिक’ भी फ़ील कर पाएँगे। 

पर्सनल और पब्लिक बातों को ऑल्ट न्यूज़ का स्टाफ़ तो सीरियसली लेता दिखता है, प्रतीक सिन्हा नहीं

इसी आर्टिकल में प्राइवेसी के हनन पर पक्ष लेते हुए लिखने वाले ने पूछा है कि ‘आख़िर राहुल कँवल ने राहुल गाँधी की पर्सनल पिक्चर्स अपने फ़ेसबुक पर क्यों पोस्ट कीं? क्या मोटिव है उनका?’ सही सवाल है। इसी स्टाफ़ को अपने मालिक से यही सवाल पूछना चाहिए कि स्क्विंट नियॉन (@squintneon) की पर्सनल जानकारी अपने ट्विटर पर पोस्ट करने के पीछे क्या मोटिव है?

बिलकुल सही सवाल, आख़िर मोटिव क्या होता है ऐसी बातों को सार्वजनिक करने के पीछे?

इस आर्टिकल को लिखने वाला स्टाफ़ सिर्फ़ एक स्टाफ़ नहीं, जज़्बाती स्टाफ़ लगता है क्योंकि लिखते-लिखते वो अंतिम पैराग्राफ़ में यहाँ तक लिख गया, ‘किसी दूसरे ने किसी का फोटो पोस्ट किया और आपने इसी कारण कर दिया तो ये एक बिलकुल बेकार हरकत है’। उसने ‘डाउनराइट पैथेटिक’ लिखा है, जिसे सुनकर मुझे अब प्रतीक सिन्हा का ही चेहरा याद आता है।

प्रतीक सिन्हा का कुकर्म भी ‘डाउनराइट पैथेटिक’ की ही श्रेणी में आता है

राहुल गाँधी एक पब्लिक फ़िगर हैं, फिर भी मेरी सहमति है कि बिना सहमति के किसी की भी निजी तस्वीरों या जानकारियों को सार्वजनिक करना गलत है। स्क्विंट नियॉन एक कम उम्र का लड़का है, जो न तो पब्लिक फ़िगर है, न ही उसके पास इतनी शक्ति या सामर्थ्य है कि वो अपने ऊपर आने वाले ख़तरे से बचाव कर सके। ऐसे वल्नरेवल इन्सान की प्रोफ़ाइल से जुड़ी गोपनीय बातें सार्वजनिक करने के पीछे प्रतीक सिन्हा का क्या उद्देश्य है?

क्या प्रतीक सिन्हा ने यह मूर्खतापूर्ण कार्य बदले की भावना में आकर नहीं किया? क्या उसकी विचारधारा के ख़िलाफ़ जाने वालों के नाम सार्वजनिक करने के पीछे दुर्भावना नहीं? क्या वो अपने पास के संसाधनों का प्रयोग किसी की तरफ घृणा और हिंसा के पूरे इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा घोषित तरीक़ों को मोड़ने के लिए नहीं कर रहा है? एक नवयुवक की जानकारी पब्लिक किस बात पर? तुम होते कौन हो ये करने वाले? स्वयंभू फ़ैक्ट चेकर जिसके नाम तमाम फ़ेक न्यूज़ फैलाने की बातें हर जगह उपलब्ध हैं?

अच्छी बात है कि ऑल्ट न्यूज़ में ऐसे जज़्बाती स्टाफ़ भी हैं। यूँ तो मालिक ही अपनी हरकतों से एक बेग़ैरत इन्सान मालूम पड़ता है पर क्या पता एक-दो अच्छे स्टाफ़ की संगति में थोड़ा सुधार आ ही जाए। वैसे प्रतीक सिन्हा के कुकर्मों की शृंखला से यह संभावना तो लगती नहीं कि इसमें सुधार की गुंजाइश है, फिर भी उम्मीद पर दुनिया क़ायम है।