प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। यहाँ उन्होंने यवतमल में कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। पीएम ने एक बार फ़िर पुलवामा में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गुनहगारों को उनके किए की सज़ा दी जाएगी। “मैं जानता हूँ कि हम सभी किस गहरी वेदना से गुज़र रहे हैं। पुलवामा में जो हुआ, उसको लेकर आपके आक्रोश को मैं समझ रहा हूँ।”
पीएम मोदी ने कहा, “जिन परिवारों ने अपने लाल को खोया है, उनकी पीड़ा मैं अनुभव कर सकता हूँ। इन शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। आतंकी हमसे जितना मर्ज़ी छिप लें, लेकिन उन्हें सज़ा मिलनी तय है। उन्होंने कहा कि सैनिकों में और विशेषकर CRPF में जो ग़ुस्सा है, वो भी देश समझ रहा है। इसलिए सुरक्षाबलों को खूली छूट दी गई है।”
पीएम ने कई परियोजनाओं का किया शिलान्यास
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ ग़रीबों से जुड़ी, सड़कों से जुड़ी, रेलवे से जुड़ी, रोज़गार से जुड़ी हई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यवतमाल के साढ़े 14 हज़ार से अधिक ग़रीब परिवारों ने आज अपने नए घर में प्रवेश किया है। केंद्र सरकार ने 2022 तक हर बेघर को पक्का घर देने का लक्ष्य रखा है और सरकार तेज़ी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने बातया कि अब तक देश के गाँव और शहरों में 1.5 करोड़ ग़रीबों के घर बनाए जा चुके हैं।
पीएम ने यहाँ सड़क से जुड़े करीब ₹500 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया। इसके अलावा पुणे- अजनी-पुणे हमसफर एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। ये ट्रेन दौंड, मनमाड, भुसावल और बडनेरा होते हुए जाएगी। इससे इन सभी जगहों के लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है।
भीख का कटोरा लेकर घूमने वालापाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ क़ाफ़िले पर (14 फ़रवरी 2019) हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जमकर हमला बोला था। पीएम ने कहा था कि आतंकवाद को जारी रखने वाला पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उसके लिए रोज़मर्रा का ख़र्चा तक चलाना मुश्किल हो गया है, वह दुनिया में भीख का कटोरा लेकर घूम रहा है। दुनिया जान रही है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषण करता है, यही कारण है कि तमाम देश उसे अलग-थलग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर सरकार की तरफ से आज (शनिवार) को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। यह बैठक संसद की लाइब्रेरी में आयोजित की गई। इस बैठक में कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता शरद पवार सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
इस बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रस्ताव पास किया गया। इस दौरान गृहमंत्री ने हमले के बाद सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की विपक्ष को जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों को फ्री हैंड दे दिया गया है।
The resolution passed at the all-party meeting: We strongly condemn the dastardly terror act of 14th February at Pulwama in J&K in which lives of 40 brave jawans of CRPF were lost. pic.twitter.com/0OjGkgS6He
देश की सुरक्षा में लगे जवान मुँहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस दौरान पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि जो लोग सीमा पार के इशारे पर चलते हैं, हम ऐसे आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए एकजुट हैं।
सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की। सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों को इसके लिए आमंत्रण भेजा गया था। सर्वदलीय बैठक से पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर पर बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में गृह सचिव राजीव गौबा सहित इंटेलीजेंस ब्यूरो(आईबी) के बड़े अधिकारी भी बैठक में शामिल रहे। इस बैठक में 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले की अब तक की जाँच पर चर्चा की गई ।
इस सर्वदलीय बैठक में गृहमंत्री के अलावा सचिव राजीव गौबा, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर, जेपी यादव, के रंगराजन (सीपीएम), नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, चन्दू माजरा, के वेणुगोपाल, जितेंद्र रेड्डी, राम मोहन राय, नरेश गुजराल, डेरेक ओ ब्रायन, सुदीप बंदोपाध्याय, शरद पवार, आनंद शर्मा, आप सांसद संजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, उपेंद्र कुशवाहा मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया के तमाम देश भारत के साथ खड़े हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बॉल्टन ने कहा है, “भारत को आत्मरक्षा करने का पूरा अधिकार है। हम इस मुश्किल में भारत के साथ खड़े हैं।” आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान और जैश-ए-मोहम्मद को जवाब देने के लिए अब तैयारी की जा रही है।
आतंकवाद के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया एक साथ खड़ी है। एनएसए जॉन बॉल्टन ने बीते शुक्रवार सुबह जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से फोन पर बात करते हुए शोक जताया था।
बता दें कि, हमले के बाद से अमेरिका ही नहीं दुनिया के कई अन्य बड़े देश भी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खड़े हैं। कल (15 फरवरी 2019) को इसी मामले में दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में जी-20 देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें जर्मनी, हंगरी, इटली, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, रूस, इज़राइल, ऑस्ट्रेलिया, जापान सहित कई अन्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अमेरिका ने की हमले की कड़ी निंदा
पुलवामा में शहीद हुए जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पैलाडिनो ने कहा कि अमेरिका इस घटना की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है, और साथ ही यह भी कहा कि मैं सभी देशों से अपील करता हूँ कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करें।
बता दें कि, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने हमले के बाद कहा था कि पाकिस्तान से अपील है कि वह अपनी ज़मीन से आतंकी गतिविधियाँ चलाने वाले सभी आतंकी समूहों को समर्थन देना और उन्हें सुरक्षित पनाह देने बंद करे।
‘पाकिस्तान को चुकानी पड़ेगी बड़ी क़ीमत’
पुलवामा हमले की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कड़े स्वर में कहा कि पाकिस्तान सिर्फ़ आतंकियों को पनाह देकर उन्हें पोषित करता है। पुलवामा में आतंकियों ने जो कायरता दिखाई है उसका अंजाम उन्हें भुगतना पड़ेगा, इनसे पूरा हिसाब लिया जाएगा।
पीएम ने कहा कि सुरक्षा बलों को आगे की कार्रवाई, समय, स्थान और योजना तय करने की पूरी इजाज़त दी गई है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, “हर नुक़सान का हिसाब पाकिस्तान को देना पड़ेगा, उसे इसके लिए बड़ी क़ीमत चुकानी होगी।”
ओसामा एक अच्छा पिता था, बुरहान वनी का बाप हेडमास्टर था, अफ़ज़ल गुरू का बेटा बारहवीं में इतने नंबर लाया, अहमद डार को आर्मी वाले ने पीटा था, आर्मी के लोगों के कारण आतंकी बनते हैं… ऐसे हेडलाइन आपको पत्रकारिता के समुदाय विशेष से लगातार मिलते रहेंगे। हमेशा इनकी लाइन यही रहती है कि जिसने इतनी जानें ले लीं, वो कितना अच्छा आदमी था, और उसकी बुराई की ज़िम्मेदारी भी पीड़ितों पर ही है।
ये यहीं तक नहीं रुकता, क्योंकि ये वो लोग हैं जो पाकिस्तान का अजेंडा भारत में चलाते हैं जिसे पाकिस्तान अपने बचाव में इस्तेमाल करता है। देखा जाए तो इस तरह की बातें, ऐसे मौक़ों पर करना यह बताता है कि ये लोग उन आतंकियों की विचारधारा के लिए मस्जिद के ऊपर लगे लाउडस्पीकर हैं जो इसे एम्प्लिफाय करते हैं। इनके लेखों से यही निकल कर आता है जैसे कि जवानों की नृशंस हत्या के पीछे उन्हीं का हाथ था, और आतंकियों का नहीं।
ऐसी घटनाओं के बाद भी ‘दूसरा एंगल’ तलाश लेना, या हमेशा ही ऐसे ही एंगल तलाशने की कोशिश करना बताता है कि इनकी संवेदना कहाँ है। अपने हेडलाइन में बलिदान के लिए ‘मरे’, आतंकियों के लिए ‘लोकल यूथ’, पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए ‘ब्लेम’ और ‘अक्यूज’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो पता चलता है कि आपको पाकिस्तानी तथा आतंकी विचारधारा भी बेचनी है, और अपने आप को भारतीयता का मुखौटा भी पहनना है।
इनमें से कुछ तो आदत से लाचार और लगातार एक ही तरह की बेहूदगी करने वाले लोग हैं। चाहे वो बरखा दत्त का ‘हेडमास्टर बाप’ हो, क्विंट का ‘अच्छा पिता ओसामा’ हो, या स्क्रॉल का ‘मौलवी बनने की चाह रखने वाला’ पुलवामा आतंकी अहमद डार हो, ये लोग हमेशा बताने में रहते हैं कि ऐसे घातक आतंकवादी कितने अच्छे और सुशील लोग थे।
Indian paper ‘The Quint’ had in one of its stories accepted the truth that Kulbhushan Jadhav was a spy and that some RAW officials had reservations about his appointment. ~Foreign Office Spokesperson Dr. Muhammad Faisal pic.twitter.com/EBPqLwGwvP
ऐसी ही मानसिक विक्षिप्तता का परिचय कोर्ट से कई बार डाँट सुन चुके वकील प्रशांत भूषण ने लिखा कि आर्मी ने कभी अहमद डार को किसी कारण से पीटा था, इसलिए वो आतंकी बन गया। साथ ही, भूषण ने यह भी लिखा कि इसी तरह की हरकतों के कारण लोग आतंकी बन जाते हैं। ये अपने आप में एक अलग लेवल की नग्नता है। अगर आर्मी वाले ने उसे पीटा भी हो, तो क्या राह चलते उसे बिना कारण के पीट दिया? क्या प्रशांत भूषण ने ये पता करने की कोशिश की कि क्या अहमद डार आर्मी पर पत्थर चला रहा था, या उनके काम में बाधा पहुँचा रहा था, या राष्ट्रविरोधी आंदोलन में साथ दे रहा था? इस पर चुप्पी है क्योंकि ट्वीट में 280 कैरेक्टर ही होते हैं, और प्रशांत भूषण जैसे वकील तो तो साँस लेने के भी पैसे माँग लेते हैं!
पिछले दिनों में आपको अधिकांश मीडिया हाउस जवानों के परिवारों से मिल कर, उनकी कहानियाँ दिखा रहा है कि अकारण हुए इस बलिदान से कितने लोग आहत हैं। लोगों तक ऐसे हृदयविदारक कहानियाँ लाई जा रहीं हैं जिसे सुनकर हमारे शरीर में सिहरन होने लगती है। टीवी पर एंकर तक अपने आप को इस भावुक क्षण में रोक नहीं पातीं, उनके आँसू छलक जाते हैं। जवानों के परिवारों के लोग बता रहे हैं कि किसी की शादी होने वाली थी, कोई फोन पर बात कर रहा था जब धमाका हुआ, किसी ने कहा था कि छुट्टी पर आते ही वो घर बनवाएगा…
ये वो लोग हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से उतने सक्षम नहीं हैं, उनके लिए घर का चिराग़ एक ही था। ग़ौरतलब यह भी है कि यही क्विंट, स्क्रॉल, एनडीटीवी और भूषण अपनी ज़रूरत के हिसाब से दलितों, वंचितों और पिछड़ों की बात करते हुए रुआँसे हो जाते हैं, और ये वही लोग हैं जिन्हें उसी सामाजिक स्तर के लोगों के बलिदान पर यह याद आता है कि जिस आतंकी ने 44 लोगों की जान ले ली, उसके पास एक ज़ायज कारण था!
आप कहने को स्वतंत्र हैं कि पत्रकार ने वही लिखा जो उसके माँ-बाप ने कहा। लेकिन, ऐसी बातें छापना यह नहीं बताता कि आप उस आतंकी की विचारधारा को हवा दे रहे हैं? आप कहीं न कहीं जस्टिफाय करने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर किसी स्कूली बच्चे को कोई पीटे, डाँटे, मुर्गा बना दे, तो वो तीन सौ किलो विस्फोटक लेकर सेना की गाड़ियों से टकरा दे?
या, आपको लगता है कि ख़बर पढ़ने वाले इतने मूर्ख हैं कि उन्हें लगेगा कि ये महज़ रिपोर्टिंग है? ये रिपोर्टिंग छोड़कर सब कुछ है। ये बताता है कि पत्रकारिता में संवेदनहीनता का चरम स्तर क्या है। जैसे कि संसद पर हुए हमले की बात सुनकर राजदीप जैसों की बाँछें खिल जाती हैं। जैसे कि बुरहान वनी जैसे आतंकियों के परिवार की कहानी बताकर बरखा दत्त दुनिया को यह बताना चाहती हैं कि उसका बाप हेडमास्टर था, और उसके आतंकी बनने के पीछे भारत सरकार की ट्रेनिंग शामिल थी!
चौबीसों घंटे टीवी और मीडिया साइट्स के दौर में हिट्स और क्लिक्स के लिए पत्रकार हमेशा नया एंगल ढूँढते रहते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन नया एंगल पाने की चाहत में विशुद्ध नीचता पर उतर आना और देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने वाली शक्तियों को ‘मानवता का पक्षधर’ बताने की कोशिश आखिर क्या कहती है?
राष्ट्रवाद को ज़हर बताने तक की कोशिश करने वाले आखिर अपनी लाइन कब खींचेंगे? क्या कुछ न्यूनतम स्तर है राष्ट्रवादी होने का? या देश की चिंता करना, उसके जवानों के बलिदान पर आहत महसूस करना, देश के समर्थन में नारे लगाना अपराध है, और कथित तौर पर आर्मी द्वारा बच्चे को डाँटने पर, मामूली सजा देने पर आरडीएक्स से भरी गाड़ी लेकर 40 जवानों की हत्या करना उचित कार्य?
ये बेहूदगी है कि उनके परिवार का भी बच्चा मर गया। शर्म आनी चाहिए ऐसे माँ और बाप को जो इस कुकृत्य को किसी भी तरीके से सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। कम से कम इतनी हया तो रहनी चाहिए कि सीधा कह दो कि तुम और तुम्हारा परिवार भारत के ख़िलाफ़ है, न कि यह कि उसे आर्मी वाले ने एक दिन पीटा था तो उसने ऐसा कर दिया! ये किस तरह की परवरिश है?
क्या एक बलात्कारी का पिता और ये मीडिया वाले उसके पक्ष में यह कह कर खड़े हो जाएँगे कि उसे उस लड़की ने ठुकरा दिया था? क्या लड़की पर एसिड फेंकने वाले के माँ-बाप यह कह देंगे कि उनके बेटे के गुलाब को लड़की ने फेंक दिया था? बलात्कारी एक फ़्रस्ट्रेटेड व्यक्ति था, और उसके हेडमास्टर बाप ने कहा है कि उसे भी उसके बेटे से अलग रहने का गम है क्योंकि वो जेल में है? क्या ये भी ख़बर का नया एंगल है?
ऐसी हर बेहयाई के केन्द्र में ये यूजूअल सस्पैक्ट्स आते हैं, भारतीय पत्रकारिता के समुदाय विशेष, गिद्धों का गिरोह जिसे जवानों के बलिदान की चिंता नहीं, उन्हें नया और अलग एंगल चाहिए कि बाकी लोग जवानों के परिवार से मिल रहे हैं, हम आतंकियों के घरवालों से मिल लेते हैं! उसके बाद क्या? उसके बाद यह कहना कि दोनों के माँ-बाप एक ही तरह के दुःख से गुजर रहे हैं?
ऐसे संवेदनहीन रिपोर्ट और इस तरह की सोच बताती है कि ये लोग सिर्फ पत्रकारिता नहीं कर रहे, ये आतंकियों की विचारधारा के लिए मल्टीप्लायर हैं, ये उनकी बातों को, उनके जिहादी विचारों को सूक्ष्म स्तर पर, सहज तरीके से वैसे लोगों तक पहुँचाते हैं जो इन्हें पढ़ने के बाद धीरे-धीरे अपने देश की उसी सेना पर सवाल करने लगते हैं जिनकी वजह से जिहाद का ज़हर उनकी सोसायटी और शहर तक नहीं पहुँचा है।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले पर सारा देश दु:ख के दौर से गुज़र रहा है। देश और दुनिया में इस आतंकी हमले की घोर निंदा हो रही है। खेल और फ़िल्म जगत भी पाकिस्तान की इस कायराना हरक़त के ख़िलाफ़ है और इस हमले की कड़ी निंदा कर रहे हैं। बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने हमले की निंदा करते हुए सेक्युलर लोगों पर तंज कसा है।
सोनू निगम ने इस तरह की हरक़तों के बाद होने वाली बयानबाज़ी और अतीत की कुछ बातों को याद करते हुए तीखे स्वर में बिना नाम लिए पर निशाना साधा। विपक्ष के नेताओं के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए उन्होंने एक वीडियो जारी किया है जो बहुत तेज़ी से वायरल भी हो रहा है।
1 मिनट 31 मिनट के अपने वीडियो में उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सुना है कि आप लोग काफी बवाल मचा रहे हैं और बड़ा दुख व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि कुछ सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए हैं। 44 हों या 440 लोग मारे गए, सीरआरपीएफ के जवानों की शहादत पर आप क्यों अफसोस मना रहे हैं। आप तो भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसी सोच रखने वाले सेक्युलर लोग हैं। इसमें दु:ख मनाने वाली क्या बात हैं।
इसके आगे सोनू ने कहा कि सीआरपीएफ के जवानों की शहादत पर दु:ख मनाने का काम आरएसएस, बीजेपी, राष्ट्रवादी और हिंदुत्ववादी संस्थाओं पर छोड़ दीजिए। आप (विपक्ष) तो वो कीजिए जो यहाँ पर सेक्युलर लोग करते हैं। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे.. अफजल हम शर्मिंदा हैं’ बोलिए।
अपने वीडियो के अंत में उन्होंने कहा कि हमें वंदे मातरम के संबोधन के लिए भी विपक्ष को मना किया और कहा कि आप लोग लाल सलाम कहा करें।
बता दें कि सोनू निगम पहले भी अपनी बेबाकी के लिए सामने आ चुके हैं। इससे पहले वो तब विवादों में आए थे जब उन्होंने मस्ज़िद में लाउडस्पीकर पर तेज़ आवाज़ में अज़ान का विरोध किया था। इसके बाद उन पर सिर मुंडवाने की बात कही गई तो सोनू निगम ने अपना सिर मुंडवा लिया था।
फ़िल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस आत्मघाती हमले पर पाकिस्तान की इस हरक़त पर ग़ुस्सा जताते हुए कहा, “पाकिस्तान ने न सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला किया है, उसने हमारी खुलेआम धमकियों और हमलों से हमारी गरिमा को भी तार-तार किया है। हमारी ख़ामोशी को ग़लत समझा गया, हमें इसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी होगी। आज भारत का ख़ून बह रहा है। हमारे जवानों को मार दिया गया।” इसके साथ ही कंगना ने यह भी कहा, “अब जो भी शांति और अहिंसा की बात करेगा उस पर कालिख पोत कर, गधे पर बैठा कर चौराहे पर खड़ा कर देना चाहिए ताकि जो भी आए थप्पड़ मार कर जाए।”
हाल ही में, अभिनेत्री शबाना आज़मी ने घोषणा की थी कि इस तरह के हमलों के मद्देनज़र भारत और पाकिस्तान के कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं हो सकते। उन्होंने कराची कला परिषद द्वारा एक निमंत्रण को अस्वीकार करने की घोषणा की थी।
शबाना आज़मी के ट्वीट
हालाँकि, कंगना ने शबाना आज़मी की इस घोषणा से हैरान थीं। उन्होंने शबाना और जावेद अख़्तर पर भी तंज कसा और सेलिब्रिटी युगल द्वारा टुकडे-टुकडे गिरोह को दिए गए समर्थन को याद दिलाया और कहा, “शबाना आज़मी जैसे लोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर रोक लगाते हैं, ये वे लोग हैं जो भारत तेरे टुकडे होंगे गिरोह को बढ़ावा देते हैं।
जब उरी हमलों के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को प्रतिबंधित कर दिया गया था, तो उन्होंने पहले कराची में जाकर एक कार्यक्रम का आयोजन क्यों किया? और अब वो मुँह छिपाने की कोशिश कर रहे हैं? फिल्म उद्योग ऐसे राष्ट्र-विरोधी लोगों से भरा है, जो कई मायनों में दुश्मनों की नैतिकता को बढ़ाते हैं, लेकिन अभी निर्णायक कार्यों पर ध्यान देने का समय है। पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाना लक्ष्य नहीं है बल्कि पाकिस्तान का विनाश हो।”
बता दें कि कंगना रनौत ने अपनी हालिया फ़िल्म मणिकर्णिका की सफलता पर आयोजित एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया जिससे वो शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी हो सकें।
महाराष्ट्र में शुक्रवार (फरवरी 15, 2019) को पुणे पुलिस ने एक जूनियर टिकट कलेक्टर को गिरफ़्तार किया है। उपेन्द्र बहादुर सिंह नाम के टी.सी. पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी की।
उपेन्द्र द्वारा ये हरक़त उस दौरान की गई जब लोग पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए इकठ्ठा हुए थे। जहाँ एक तरफ पुलवामा हमले पर लोगों का ग़ुस्सा अपने चरम पर है वहीं पाकिस्तान के समर्थन में उठ रही ये आवाज़ें भारत में आस्तीन का साँप हैं।
Maharashtra: Pune Rural Police has arrested a Jr Ticket Collector, Kr Upendra Bahadur Singh, for allegedly raising pro-Pakistan slogans during an event to pay tribute to CRPF jawans who lost their lives in #PulwamaAttack. He has been booked u/s 153(B) of IPC&is in police custody.
पुलिस की निगरानी में उपेंद्र पर आईपीसी की धारा 153(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस हरक़त के तुरंत बाद ही आरोपित को उसकी नौकरी से भी निलंबित कर दिया गया।
बता दें पुलवामा हमले के बाद एक तरफ जहाँ पूरे देश में शोक का माहौल है, वहीं कुछ अराजक तत्व ऐसे भी हैं जो लगातार देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। कल एएमयू में पढ़ रहे कश्मीरी छात्र को भी ऐसी ही हरक़त के लिए निलंबित किया गया। साथ ही एनडीटीवी की डेप्यूटी एडिटर निधि सेठी को भी उनके संस्थान से फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण निलंबित किया गया।
इसके अलावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा में भी पुलवामा हमले के संबंध में एक युवक द्वारा सोशल मीडिया में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया। जिसके बाद अल्मोड़ा पुलिस ने युवक के मोबाईल को जब्त कर जाँच में जुट गई है। साथ ही पुलिस ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की।
पुलवामा आतंकी हमले में अधिकारियों ने शुक्रवार (फ़रवरी 15, 2019) को 7 संदिग्धों को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। पुलिस को संदेह है कि 14 फरवरी को जवानों पर हुए आतंकी हमले की योजना में इन युवकों का भी हाथ है।
ख़बरों के अनुसार, पुलवामा हमले की पूरी योजना पाकिस्तान के नागरिक कामरान ने बनाई थी। जैश-ए-मोहम्मद का यह सदस्य पुलवामा, अवंतीपुर और त्राल इलाके में सक्रिय है। इस पूरे हमले को अंजाम देने वाले फ़िदायीन आतंकी की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई है। साल 2018 में जैश में शामिल होने वाला आदिल, पुलवामा के काकापुर इलाक़े का ही रहने वाला था।
बताया जा रहा है कि दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके के मिदूरा में इस भयावह आतंकी हमले की योजना तैयार की गई थी और कामरान ही विस्फोटकों की व्यवस्था में मददगार भी बना।
पुलिस लगातार जैश के अन्य स्थानीय सक्रीय आतंकियों की तलाश में जुटी हुई है। हालाँकि, अब तक पता नहीं लग पाया है कि महज़ 22 साल के आदिल अहमद डार ने इतने बडे़ आतंकी हमले को कैसे अंजाम दिया। आदिल एक स्कूल ड्रॉपआउट था। जिस समय उसने पढ़ाई छोड़ी, उसकी उम्र महज़ 20 साल थी। आदिल, घटना स्थल से सिर्फ़ 10 किमी की दूरी पर रहता था।
पुलिस अब इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक का इंतज़ाम करने में आदिल की मदद किन-किन लोगों ने की और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम होने के बावजूद वो कैसे घटनास्थल तक विस्फोटक से लदी गाड़ी लेकर पहुँचा।
पुलवामा में CRPF के 40 से अधिक जवानों की शहादत के बाद सोशल मीडिया पर कुछ गिरी हुई मानसिकता के लोगों ने ज़हर फ़ैलाना शुरू कर दिया है। ये इतने घटिया लोग हैं कि इस समय में भी ऐसी बातें कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब देश के जवानों के बलिदान का मजाक उड़ाना नहीं होता। अपने ही देश में ऐसी विचारधारा के लोग हैं, तभी ऐसे लोग इस तरह बेख़ौफ़ ऐसी बातें करते हैं। जब बुद्धिजीवियों का एक हिस्सा इस बात पर डिबेट करने लगता है कि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे अभिव्यक्ति की आज़ादी हैं, तो ऐसे देशद्रोहियों को बल क्यों नहीं मिलेगा?
पिछले दो दिनों में यूनिवर्सिटी के छात्रों से लेकर, टीटी और आम नागरिकों तक ने जवानों के बलिदान का अपमान किया। लेकिन सोशल मीडिया पर ही कई नागरिकों ने आपत्ति जताते हुए उन्हें पुलिस के संज्ञान में लाया। पुलिस ने कई मामलों में एक्शन लिया। कुछ मामलों में ऐसे लोगों को उनकी कम्पनी ने नौकरी से भी निकाला। पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए फेसबुक और ट्विटर पर इनका संज्ञान लेते हुए कई लोगों को गिरफ़्तार किया है:
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र बसीम हिलाल ने 14 फरवरी को ट्वीट किया जिस पर यूनिवर्सिटी ने तुरंत एक्शन लिया
NDTV की पत्रकार निधि सेठी ने फेसबुक पेज पर शहीद जवानों का मजाक उड़ाया जिसके बाद चैनल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया
रेलवे में जूनियर टिकट कलेक्टर कुमार उपेंद्र बहादुर सिंह ने पाकिस्तान परस्त नारे लगाए जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया
कश्मीर के रियाज़ अहमद वानी को उसकी कंपनी ने जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में फेसबुक पोस्ट लिखने के लिए शो कॉज़ नोटिस जारी किया। वानी की पोस्ट का समर्थन करने वाले इक़बाल हुसैन से उसकी कंपनी ने जवाब तलब किया
राश बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी के छात्र कैसर रशीद को व्हाट्सप्प पर पुलवामा की घटना का मजाक उड़ाने के लिए निलंबित किया
उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले के निवासी मोहम्मद ओसामा को ट्विटर पर आपत्तिजनक ट्वीट के लिए गिरफ़्तार किया गया
गोपालगंज बिहार के अज़हर हाशमी को फेसबुक पर पुलवामा की घटना का शर्मनाक मजाक उड़ाने के लिए गिरफ्तार किया गया
पापरी बनर्जी ने भी पुलवामा के शहीदों का उड़ाया मजाक। असम पुलिस ने लिया संज्ञान
Thank you for bringing this to our notice. This is being looked into and appropriate action will be initiated. https://t.co/g0Iqo9k52U
अंग्रेज़ी में बनी “एनिमी एट द गेट्स”, सत्य घटनाओं पर बनी फिल्मों में से एक थी। सन 2001 में आई ये फिल्म, आज से करीब पचास साल पहले आई विलियम क्रैग की किताब पर आधारित थी। युद्ध पर बनी इस फिल्म में घटनाओं को बहुत सटीकता से दिखाया गया था ऐसा बिलकुल भी नहीं है। उदाहरण के तौर पर ये फिल्म स्टालिनग्राड की 1942-43 की लड़ाई पर आधारित है। फिल्म में जो रुसी राष्ट्रगान सुनाई देता है उसे 1944 में बनाया गया था।
ये लड़ाई इसलिए अनूठी थी क्योंकि हिटलर की नाज़ी सेना के हमले को ब्लिट्जक्रिग (Blitzkrieg) कहा जाता था। लड़ाई के इस तरीके में टैंक और मशीनों के जरिये सुरक्षा के लिए खड़ी पहली पंक्ति पर बहुत तेज हमला किया जाता था। हवाई मदद के ज़रिये पहली कतार को तोड़ दिया जाता था। पिछली पंक्तियाँ जो सिर्फ सुरक्षात्मक तैयारी में होती थीं, हमले के लिए तैयार नहीं होती, उन्हें चौंकाया जा सकता था। इसके इस्तेमाल से नाज़ी सेनाएं लगातार जीतती आ रही थीं।
स्टालिनग्राड की लड़ाई वो पहली लड़ाई थी जहाँ ब्लिट्जक्रिग काम नहीं आया। रुसी सेनाओं ने पहली बार नाजी सेनाओं की बढ़त को रोक दिया था। इसी युद्ध पर आधारित फिल्म में पूरे युद्ध पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस फिल्म की कहानी वसीली ज्यात्सेव नाम के एक स्नाइपर के इर्द गिर्द घूमती है। शुरूआती दृश्यों में ही उसकी निशानेबाजी को पहचाना जाता है। एक प्रचार-तंत्र का अधिकारी उसके निशाने के कारनामे देख लेता है।
इस मोर्चे पर जीतना रूसियों के लिए कितना महत्वपूर्ण था इसे दर्शाने के लिए थोड़ी ही देर बाद के एक दृश्य में एक बड़ा अधिकारी रूसियों से पूछता है कि आखिर हम जीत क्यों नहीं रहे? जो अफसर पीछे हटने की कोशिश कर रहा था उसे आत्महत्या करने को मजबूर करते दर्शाया जाता है। डरे हुए बाकी अधिकारी चुप थे तभी जिस प्रचार तंत्र के अधिकारी ने वसीली का निशाना देखा था वो बोल पड़ता है कि हमें जीतने के लिए हमारे नायक चाहिए!
जो मासूम ये तर्क देते पाए जाते हैं कि “हिंसा का इलाज हिंसा नहीं हो सकता”, वो क्यूट लोग अक्सर भूल जाते हैं कि हिटलर को रोकने के लिए हिंसा का ही इस्तेमाल करना पड़ा था। इदी अमीन हिंसा से ही रुका था। पोल पॉट को रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करना पड़ा था। हाल में ओसामा बिन लादेन जैसों को भी हिंसा से ही रोका गया था। नाज़ियों के भीतर डर पैदा करने के लिए भी वसीली नाम के इस स्नाइपर के कारनामे प्रकाशित कर सामने लाये जाते हैं।
हर सुबह अखबार दिखाना शुरू करते हैं कि आज वसीली ने इतने नाज़ी मार गिराए, कल उतने मारे थे। प्रचार तंत्र इतने पर ही नहीं रुकता। वो पूछना शुरू करता है कि वसीली ने तो आज इतने नाज़ी मारे हैं, तुमने कितने मारे? जहाँ पूरा शहर ही युद्ध का मैदान बना हुआ हो, सभी सैनिक ही हों, वहां इस सवाल का नतीजा क्या हुआ होगा ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। स्टालिनग्राड की लड़ाई वो पहली लड़ाई थी जहाँ नाज़ियों को हार का सामना करना पड़ा था।
बाकी लंबे समय से जिस एमएफएन स्टेटस की बात होती थी, मोदी ने तो उनके आर्थिक स्रोत सुखाने के लिए डब्ल्यूटीओ के नियमों के वाबजूद उस एमएफएन स्टेटस से पाकिस्तान को वंचित कर दिया है। आप बताइये, आपने उनसे आर्थिक लेन-देन बंद किया है क्या?
पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद वामपंथी लोगों द्वारा दी गई प्रतिक्रिया देश में विभाजन के बीज बोने का एक ठोस प्रयास प्रतीत होता है। जब पूरा देश सदमे की स्थिति में है और शहीदों के परिवार के साथ चट्टान के रूप में खड़ा है, तब इस तरह की घटिया प्रतिक्रिया वामपंथियों के असली चेहरे को हमारे सामने ला देता है।
दर्दनाक पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीदों की संख्या 40 के करीब होने के बाद सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों में लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। अधिकांश लोगों ने इस कायराने घटना में शहीद जवानों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और सुरक्षा में लगे जवानों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। लेकिन सोशल मीडिया पर एक खास तरह के वर्ग ने अपने घटिया स्तर की राजनीति के लिए सस्ती टिप्पणियों का सहारा लिया।
Could this be a conspiracy? The man can do anything.
कई उदारवादी मीडिया की स्तंभकार, TEDx स्पीकर और फेलो, संजुक्ता बसु के ने ट्वीट करके कहा कि आतंकवादी हमले प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रची गई साजिश हो सकती है क्योंकि ये आदमी कुछ भी कर सकता है।
बसु की ट्वीट में की गई टिप्पणियाँ भयानक हैं। बसु चाहती हैं कि लोग यह मानें कि भारतीय सशस्त्र बलों ने नरेंद्र मोदी के इशारे पर अपने ही सैनिकों की हत्या कर दी है। और सोचने वाली बात यह है कि बसु ने यह ट्वीट जैश-ए-मुहम्मद द्वारा हमले के लिए जिम्मेदारी का दावा करने के लंबे समय बाद पोस्ट किया है। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी के अंध-विरोध में बिना कुछ सोचे-समझे ही बसु ने लापरवाह और अपमानजनक टिप्पणी की है। बसु ने ऐसे समय में सशस्त्र बलों का अनादर किया है जब इस कायराने घटना के बाद वो गम में हैं।
I got this msg 2days back from a person in jammu Msg was sent at 2.43am saying urgent something bad is going to happen. He even asked me to convey this msg to higher authorities. But before i could understand this incident occurred. Now i am confused b/w coincidence or conspiracy pic.twitter.com/0XLBfzz5Ku
यही नहीं, कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा आतंकवादियों को शरण देने और पोषण करने पर पाकिस्तान को लगभग क्लीन चिट देने के कुछ घंटे बाद, एक अन्य कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने एक यह सवाल पूछने के अंदाज में प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अफवाह फैलाने की कोशिश की। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि क्या पुलवामा आतंकी हमला मोदी की साजिश थी?
CRPF jawans killed today in #KashmirTerrorAttack – All of them are from poor families and almost all of them are low caste, Dalit, tribal or Muslim. They are the ones who get killed in wars, not the ones who scream for war in TV studios. pic.twitter.com/y4PzRdqbzd
इसके बाद कुछ प्रतिष्ठित उदारवादी बुद्धिजीवी, जो विदेशों से बैठकर अपने देश में नफरत फैलाने के बारे में सोचते रहते हैं, ऐसे लोगों ने जाति के आधार पर हमारे सैनिकों की शहादत का भी राजनीतिकरण करने का प्रयास किया।
पाकिस्तानी मीडिया ने पहले प्रधानमंत्री मोदी को नीचा दिखाने के लिए अशोक स्वैन के ट्वीट का इस्तेमाल किया है। विदेश में बैठे स्वैन ने अपने ट्वीट में जोर देकर कहा था कि नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले पाकिस्तान के साथ सीमा टकराव में भारत को मजबूर करेंगे। पाकिस्तानी मीडिया ने तब उन ट्वीट्स को लाइक किया था और कहा था कि पाकिस्तान शांति चाहता है जबकि भारत सरकार संघर्ष चाहती है।
इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने ट्वीट करके कहा है कि पुलावामा की घटना में शहीद होने वाले जवानों में से एक भी ब्राह्मण नहीं है।
वास्तव में, देश के भीतर उस समय विभाजन के बीज बोने का ठोस प्रयास किया जा रहा है, जब पूरा देश सदमे की स्थिति में है और हमारे शहीदों के परिवार के पीछे चट्टान के रूप में खड़ा है।