Home Blog Page 612

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले फैजान ने थाने पहुँच लगाए भारत माता के जयकारे, तिरंगे को 21 बार दी सलामी: कहा- गलती कबूल करता हूँ, देखिए Video

‘पाकिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए रील बनाने वाला फैजल निसार उर्फ फैजान का मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को भारत माता के जयकारे लगाता वीडियो सामने आया है। इसमें वह जबलपुर के पुलिस स्टेशन में पहुँचकर तिरंगे को सलामी देता भी दिख रहा है।

पिछले दिनों मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ₹50 हजार के निजी मुचलके पर उसे जमानत देते हुए तिरंगे को सलामी देने और भारत माता के जयकारे लगाने की शर्त लगाई थी। इसके अनुसार उसे हर महीने के पहले और चौथे मंगलवार को थाने पहुँच 21 बार तिरंगे को सलामी देनी है और ‘भारत माता की जय’ भी कहना है। यह शर्त तब तक लागू रहेगी जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।

इसी शर्त का पालन करने के लिए 22 अक्टूबर को फैजान पहली बार थाने पहुँचा। उसने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारत माता की जय। मैं अपनी गलती कबूल करता हूँ। मैं हाईकोर्ट के आदेश का पालन करूँगा। मैं फिर से ऐसी गलती नहीं करूँगा।”

थाना प्रभारी मनीष राज भदौरिया ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “तय शर्तों के अनुसार यह पहला मंगलवार था, इसलिए फैजान थाने आया था। शर्त के अनुसार उसने 21 बार राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया। शर्तों के अनुसार उसे हर महीने के पहले और आखिरी मंगलवार को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच यहाँ आना होगा।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान जिंदाबाद वाला वीडियो वायरल होने के बाद फैजान को गिरफ्तार किया गया था। पहले उसने इसे फर्जी मामला बताते हुए जमानत की गुहार लगाई थी। लेकिन सुनवाई के दौरान उसका झूठ पकड़ा गया। इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल ने उसे सर्शत जमानत देते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य उसके मन उस देश के प्रति सम्मान जगाना है जहाँ वो पैदा हुआ और रह रहा है।

बता दें कि इस मामले में 17 मई 2024 को भोपाल के मिसरौद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जाँच के बाद ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई थी। इस दौरान वीडियो क्लिप को आधार बनाया गया जिसमें आरोपित स्पष्ट रूप से नारेबाजी कर रहा था। जाँच में पुलिस ने पाया कि आरोपित पर पहले से 14 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

अस्पताल के नीचे बंकर, बंकर में ₹4000 करोड़ का खजाना… इजरायल ने खोज निकाला हिजबुल्लाह के सोना-कैश का ठिकाना, आतंकी फंडिंग करने वाले बैंक पर बमबारी

इजरायल सुरक्षाबलों ने हिजबुल्लाह की आतंकी गतिविधियों को फंडिंग करने वाले एक बैंक पर बमबारी की है। इस बैंक की कई शाखाओं पर लेबनान के भीतर बमबारी हुई है। इजरायल ने यह खुलासा भी किया है कि हिजबुल्लाह ने एक अस्पताल के नीचे सोना और करोड़ों डॉलर छुपा रखे हैं।

इजरायल ने सोमवार (21 अक्टूबर, 2024) को बेरूत के भीतर अल कर्द अल हसन नाम के एक वित्तीय संसथान की शाखाओं पर बमबारी की। यह एक इस्लामी बैंकिंग संस्थान है, यानी यह ब्याज पर काम नहीं करता। इस संस्थान पर आरोप है कि इसके जरिए हिजबुल्लाह अपनी वित्तीय गतिविधियाँ चलाता है।

इस संस्थान को अमेरिका ने 2007 में बैन कर दिया था। हिजबुल्लाह लेबनान के लोगों को यह संस्थान उपयोग करने के लिए बढ़ावा देता रहा है। एक बार जब इस बैंक का सर्वर हैक हुआ था तब इसमें खाता रखने वालों का नाम खुलासा हुआ था। इसमें हिजबुल्लाह के लोगों के नाम भी थे।

हिजबुल्लाह के पूर्व मुखिया नसरुल्लाह ने इस संस्थान में हिजबुल्लाह समर्थकों से अपना एक-एक पैसा इसमें जमा कर दें। यह हिजबुल्लाह की फर्जी कम्पनियों को चलाने में भी मदद करता है। इजरायल ने हिजबुल्लाह की आर्थिक रूप से कमर तोड़ने को बेरूत में इसकी शाखाओं को निशाना बनाया। बेरूत में इस संस्थान की 15 शाखाएँ हैं।

दूसरी तरफ इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) के प्रवक्ता डैनिएल हगारी ने भी इसको लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि लेबनान के लोगों का पैसा लेकर हिजबुल्लाह अपनी आतंकी गतिविधियाँ चला रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान से आया पैसा और लेबनान के लोगों को पैसा हिजबुल्लाह को फंड किया जा रहा है।

इजरायल ने खुलासा किया कि ‘4400 यूनिट’ हिजबुल्लाह की वित्तीय गतिविधियाँ चलाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान से पैसा और सोना हिजबुल्लाह के लिए आता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लेबनान से हिजबुल्लाह डॉलर चुराता है, इस कारण से लेबनान की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई है।

इजरायल ने एक और बड़ा खुलासा इस दौरान किया। डेनियल हगारी ने बताया, “आज मैं वह सूचना सार्वजनिक कर रहा हूँ जहाँ पर हमने बमबारी नहीं की। यह हिजबुल्लाह के पूर्व मुखिया नसरुल्लाह का बंकर है। यह बंकर अल सालेह अस्पताल के ठीक नीचे स्थित है। इसके नीचे बड़ी सुरंग बनाई है और इसमें घुसने और निकलने के रास्ते भी पास की इमारतों में हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “यह एक बड़ा बंकर है, यहाँ बेडरूम हैं और लम्बे समय तक लड़ने और छुपने की भी व्यवस्था है। यहाँ करोड़ों डॉलर नगद में रखे हुए हैं और सोना भी रखा हुआ है। यह पैसा और सोना अब भी रखा हुआ है। हम लेबनान की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने माँग करते हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल आतंक के लिए ना हो।” हगारी ने बताया है कि हिजबुल्लाह ने यहाँ 500 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4200 करोड़) छुपाए हैं।

गौरलतब है कि इजरायल लगातार लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है। उसने हाल ही में हिजबुल्लाह के मुखिया नसरुल्लाह और उसके उत्तराधिकारी को मार गिराया था। इजरायल गाजा में भी आतंकियों को ठिकाने लगा रहा है।

‘मंदिर में घंटी बजने से हमें दिक्कत होगी’: रिपोर्ट में दावा- अब उन्नाव के गाँव में मुस्लिम महिलाओं ने काटा बवाल, पुलिस बोली- भड़काऊ बयान का पता नहीं, नजर बनी हुई है

उन्नाव के बीघापुर कोतवाली क्षेत्र में मंदिर की छत ढालने वाले विवाद में नया घटनाक्रम सामने आया है। अब रानीपुर गाँव में मंदिर की छत ढलाई के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। मुस्लिम बाहुल्य वाले गाँव रानीपुर में 130 घर मुस्लिमों के हैं और हिंदुओं के बामुश्किल 30 घर, ऐसे में बहुसंख्यक मुस्लिम वर्ग की महिलाओं ने मंदिर निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा है कि ‘मंदिर की घंटियों से उन्हें परेशानी होगी,’ इसलिए वो मंदिर नहीं बनने देंगे। वहीं, जिस परिवार ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था, वो दबाव की वजह से उन्नाव से लखनऊ चला गया है।

समाचार पत्र दैनिक जागरण ने फॉलोअप रिपोर्ट में ये जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि रानीपुर गाँव की मुस्लिम महिलाओं ने मंदिर निर्माण का खुलेआम विरोध करते हुए भड़काऊँ बयानबाजी भी की है। भड़काऊ बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो रहे हैं। मंदिर का विरोध करने वाली मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि मंदिर की घंटी बजने से उन्हें दिक्कत होगी।

इस बीच, मंदिर निर्माण का संकल्प लेने वाला परिवार उत्पीड़न से परेशान होकर पयालन को मजबूर हो गया है और वो राजधानी लखनऊ शिफ्ट हो गया है। हालाँकि ये पलायन स्थाई है या अस्थाई, इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है।

वहीं, इस पूरे मामले में प्रशासन का रवैया पहले की तरह ही डिफेंसिव है। प्रशासन मामले को शांत कराने की कोशिश कर रहा है। एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी का बयान भी आया है। उन्होंने जमीन को लेकर किसी समस्या की बात से इन्कार किया है। एसडीएम ने बताया कि विवादित जमीन पैमाइश में आबादी की जमीन निकली है। चबूतरा आबादी की जमीन पर है, तो कोई समस्या नहीं है। हालाँकि मंदिर की छत न ढलने देने को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है।

इस विवाद में दैनिक जागरण ने एएसपी अखिलेश सिंह का भी पक्ष छापा है। एएसपी ने बताया कि मंदिर की छत ढालने को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई है। यदि अनुमति मांगी जाती है तो मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकेगा। भड़काऊ बयान देने से जुड़ी जानकारियाँ पुलिस के पास नहीं है। पूरे मामले पर पुलिस की नजर है।

डिनायल मोड में क्यों है प्रशासन?

ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से पुलिस और प्रशासन मामले को दबाते दिख रहे हैं। बीघापुर कोतवाली के SHO ने ऑपइंडिया से बातचीत में किसी तनाव से ही इनकार कर दिया था, लेकिन हमने जब सीओ के बयान को लेकर मामले को उठाया, तो उन्होंने स्वीकार किया था कि मामला 7-8 अक्टूबर 2024 का है। 32 लोगों की पाबंदी की गई है, जिसमें 26 मुस्लिम और 6 हिंदू है।

हालाँकि उन्नाव पुलिस ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट के जबाव में बताया कि ये मामला 15 दिन पुराना है। मामला पुलिस के संज्ञान में है।

ये पूरा घटनाक्रम बताता है कि पुलिस और प्रशासन कैसे मामले को जान-बूझकर अनदेखा कर रहे हैं। एसडीएम बयान देते हैं कि मंदिर निर्माण के लिए अनुमति माँगने ही कोई नहीं आया, लेकिन जमीन की पैमाइश की बात करते हैं। अगर शिकायत ही नहीं हुई, तो पैमाइश कैसी? वहीं, एएसपी कहते हैं कि मंदिर निर्माण की अनुमति माँगी गई, तो अनुमति मिलने के बाद मंदिर का निर्माण कोई रोक नहीं पाएगा।

बता दें कि गाँव में एक शिव मंदिर है, जो 70 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर के चबूतरे पर हिंदू परिवार अपने धार्मिक कार्य जैसे मुंडन, छेदन और शादी-विवाह संपन्न करते हैं। मंदिर के चबूतरे पर चारों ओर दीवारें और खंभे खड़े हैं, लेकिन छत डालने का कार्य अभी लंबित है, क्योंकि गाँव के निहाल, अनीस खान, असगर खान, शोएब, सलीम, यूनुस, अच्छे, रईस जैसे बहुसंख्यक इस्लामी कट्टरपंथियों को ये पसंद नहीं है। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है मंदिर से सिर्फ 100 मीटर दूर मस्जिद है। मंदिर बन जाने से उनकी नमाज में दिक्कत आएगी।

खैर, ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि मंदिर बनता है या इस्लामी कट्टरपंथी अपनी एकजुटता के दम पर मंदिर निर्माण को रोक देता है। फिलहाल, यहाँ सबसे पहले जरूरत है उत्पीड़ित परिवार की सुरक्षा की, जिसे पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

बहराइच में BJP MLA सुरेश्वर सिंह और उनके बेटे पर फूटा पब्लिक का गुस्सा: राम गोपाल मिश्रा की हत्या के बाद उग्र थी भीड़, 8 पर FIR

बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में बीजेपी विधायक सुरेश्वर सिंह को लोगों का तीखा विरोध झेलना पड़ा, जब वो मृतक राम गोपाल मिश्रा के शव को मोर्चरी की ओर ले जाते समय प्रसाशनिक अधिकारियों के साथ खड़े दिखे। अब इस मामले में विधायक ने 7 नामजद और सैकड़ों अज्ञात लोगों (भीड़) के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है।

यह घटना तब हुई, जब अगले दिन बहराइच मेडिकल कॉलेज के गेट पर राम गोपाल मिश्रा के शव के साथ भीड़ प्रदर्शन कर रही थी। सुरेश्वर सिंह ने कहा कि हिंसा में मारे गए राम गोपाल मिश्रा के शव को मोर्चरी की ओर ले जाते समय उन पर हमला हुआ। विधायक सुरेश्वर सिंह के अनुसार, वह शव के पास पहुँचने के बाद जिलाधिकारी से बातचीत कर रहे थे कि तभी कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया।

आरोपितों में अर्पित श्रीवास्तव, अनुज सिंह रैकवार, शुभम मिश्रा, मनीष चंद्र शुक्ला, कुशमेन्द्र चौधरी, पंडुरीक पांडेय, सुधांशु सिंह राणा और सैकड़ों लोगों की भीड़ को शामिल किया गया है। सुरेश्वर सिंह ने शिकायत में कहा है कि उनके खिलाफ नारेबाजी के साथ गाली-गलौज की और मारपीट की कोशिश की गई। विधायक ने आरोप लगाया कि भीड़ ने उनके बेटे अखंड प्रताप सिंह पर भी हमला किया, लेकिन वह किसी तरह बच निकले।

मामले की शुरुआत रामगोपाल मिश्रा की मौत से हुई थी, जिसके बाद लोग आक्रोशित होकर मेडिकल कॉलेज के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति तब बिगड़ी जब शव को मठरी गाँव ले जाने के दौरान कुछ उपद्रवियों ने भीड़ को भड़काया और पथराव शुरू कर दिया। सुरेश्वर सिंह का दावा है कि उन पर और उनके बेटे पर जानलेवा हमला करने की भी कोशिश की गई, जिसमें कई उपद्रवी शामिल थे। विधायक ने इस घटना की पूरी रिपोर्ट दर्ज कराई है और यह माँग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित भाजपा नेता अर्पित श्रीवास्तव ने इन आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा कि विधायक ने राजनीतिक फायदे के लिए यह मामला दर्ज कराया है और उनके बेटे ने ही भीड़ के साथ गाली-गलौज की, जिसके चलते विवाद बढ़ा। अर्पित ने कहा, “विधायक सुरेश्वर सिंह ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। विधायक का बेटा गोलू लोगों को गाली दे रहा था। जिसका लोगों ने विरोध किया था। फायरिंग की बात भी गलत है।”

फिलहाल, पुलिस ने इस पूरे मामले की जाँच शुरू कर दी है और एफआईआर में दर्ज आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘पीएम मोदी 10 साल से मूर्ख…’: मुस्लिम शिक्षिका सुल्ताना खातून ने ट्रांसलेशन के बहाने बच्चों के मन में भरी नफरत, गुस्से में बिहार के अभिभावक

बिहार के गोपालगंज जिले में एक स्कूल में मुस्लिम महिला शिक्षिका सुल्ताना खातून द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें पढ़ाने का मामला सामने आया है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। शिक्षिका पर आरोप है कि वह अंग्रेजी अनुवाद सिखाने के नाम पर बच्चों के कोमल मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति नफरत भर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना जिले के भोरे प्रखंड के डीह जैतपुरा स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 5 अक्टूबर को हुई, जब शिक्षिका सुल्ताना खातून ने बच्चों को एक अंग्रेजी अनुवाद के लिए वाक्य दिया जिसमें लिखा था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 वर्षों से लोगों को मूर्ख बना रहे हैं।”

यह मामला तब सामने आया जब स्कूल से घर लौटे बच्चों ने अभिभावकों को बताया कि शिक्षिका ने उनसे ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 वर्षों से लोगों को मूर्ख बना रहे हैं’ वाक्य का अंग्रेजी में अनुवाद करने को कहा। बच्चों के मासूम मन को इस तरह की राजनीतिक और आपत्तिजनक बातें पढ़ाकर गुमराह करने की कोशिश ने अभिभावकों को चिंतित कर दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक शिकायत लेकर स्कूल और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास पहुँचे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा देना, जिसमें प्रधानमंत्री के प्रति नफरत भरी जा रही हो, पूरी तरह गलत है। उन्होंने शिक्षिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

स्कूल के हेडमास्टर रमेश सिंह ने बताया कि शिक्षिका सुल्ताना खातून अंग्रेजी पढ़ाती हैं और उनके खिलाफ पहले भी बच्चों और अभिभावकों से शिकायतें मिल चुकी थीं कि वह छात्रों को राजनीतिक और विवादित बातें पढ़ा रही थीं। हेडमास्टर ने उन्हें पहले समझाया भी था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यह विवादित वाक्य पढ़ाया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी यह बात जोर देकर कही कि ऐसा पहली बार नहीं है जब इस शिक्षिका ने बच्चों को इस तरह की आपत्तिजनक बातें पढ़ाई हों। अभिभावकों का आरोप है कि सुल्ताना खातून ने पहले भी राजनीतिक मुद्दों पर बच्चों को प्रभावित करने की कोशिश की है। उनके अनुसार, बच्चों के मन में जानबूझकर प्रधानमंत्री के प्रति नफरत और गलतफहमी फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

यह मामला सामने आने के बाद से स्थानीय लोग गुस्से में हैं। वे इस बात से नाराज हैं कि बच्चों को राजनीति में घसीटकर उनके मासूम मन को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षिका को तुरंत हटाने की माँग की है और कहा है कि बच्चों को सही और नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडे के तहत किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नफरत सिखाई जानी चाहिए।

ये पूरा मामला और भी संवेदनशील इसलिए बन गया है क्योंकि यह विद्यालय बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के विधानसभा क्षेत्र में आता है। लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र के शिक्षा मंत्री स्वयं हों, वहाँ इस तरह की घटना गंभीर चिंता का विषय है। बच्चों को राजनीति से दूर रखते हुए सही दिशा में मार्गदर्शन मिलना चाहिए, लेकिन यहां प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने कहा, “प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी बातें सिखाना पूरी तरह अनुचित है। बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह खेलना गलत है, और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) लखींद्र दास ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिक्षिका सुल्ताना खातून से स्पष्टीकरण माँगा। बीईओ ने कहा, “प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की अभद्र टिप्पणी एक लोक सेवक को शोभा नहीं देती। शिक्षिका से जवाब माँगा गया है और उचित कार्रवाई की जाएगी।” बहरहाल, शिक्षिका सुल्ताना खातून से जवाब तलब किया गया है। हालाँकि इस पूरे मामले में अभी तक शिक्षिका सुल्ताना खातून की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है और शिक्षा विभाग की जाँच रिपोर्ट का इंतजार है।

इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा के प्रति लोगों की सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि स्कूलों में बच्चों को क्या सिखाया जा रहा है? बच्चों के मासूम मन में इस तरह की नफरत और गलतफहमियाँ डालना न केवल उनके भविष्य के लिए खतरा है, बल्कि समाज के लिए भी हानिकारक है।

कारगिल आसानी से पहुँच पाएगी सेना, घंटों का सफर मिनटों में होगा… जानें जिस Z-Morh प्रोजेक्ट में काम कर रहे वर्करों को आतंकियों ने बनाया निशाना, वो ‘सुरंग’ विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में आतंकियों ने जिस जेड मोड़ सुरंग (Z-morh Tunnel) में काम कर रहे वर्करों की हत्या करके दहशत फैलाने का काम किया है, मालूम हो कि वो जेड मोड़ सुरंग केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजना है। इस सुरंग के बन जाने से न केवल वहाँ की जनता को फायदा मिलेगा बल्कि देश की सुरक्षा दृष्टि से भी ये सुरंग बहुत काम आएगी, शायद इसलिए आतंकियों को ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने इसमें जुटे वर्करों में डर भरने के लिए ये हरकत की।

जेड मोड़ सुरंग की जरूरत क्यों

जानकारी के मुताबिक, जेड-मोड़ सुरंग एक 6.4 किलोमीटर लंबी सुरंग है जो सोनमार्ग हेल्थ रिसॉर्ट को मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के कंगन शहर से जोड़ती है। यह सुरंग दो लेन वाली है और इसका निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है। बता दें कि इस परियोजना का उद्देश्य श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर स्थित सोनमार्ग क्षेत्र में साल भर सुगम यातायात सुनिश्चित करना है। बताया जा रहा है कि यहाँ क्षेत्र की ऊँचाई 8,500 फीट से अधिक है और सड़के पहाड़ियों पर है। ऐसे में जब भूस्खलन और बर्फबारी घाटी में होती है तो रास्ते बंद हो जाते हैं। अगर ये निर्माण पूरा होता है तो आवागमन आसान हो जाएगा। लोग अभी जिस सफर को घंटों में पूरा करते हैं वो मिनटों में निपटेगा।

इसके अलावा इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ये भी है कि ये श्रीनगर और कारगिल के बीच बिना रुकावट यात्रा को सुनिश्चित करेगा और सेना के जवानों को लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों तक पहुँचा देगा। प्रदेश के विकास के नजरिए से इस सुरंग का निर्माण बहुत जरूरी है। खास बात ये है कि इस प्रोजेक्ट में इंटेलिजेंट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली और आपातकालीन स्थिति के लिए एस्केप टनल जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। ये सुविधाएँ यातायात को बेहतर तरीके से नियंत्रित करेंगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

आतंकी हमला

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल के गगनगीर इलाके में रविवार को आतंकी हमला हुआ था। इस दौरान आतंकियों ने वर्करों के कैंप पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थी। हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी। इन 7 लोगों में 6 सुरंग में काम करने वाले लोग और 1 डॉक्टर शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों की गोली का शिकार होने वालों में मध्य प्रदेश से आए अनिल शुक्ला, बिहार के फहीम, नासिर, मोहम्मद हारिफ, कलीम, पंजाब के गुरमीत और जम्मू कश्मीर के रहने वाले शशि अब्रोल और डॉ शहनवाज शामिल थे।

वामपंथी मास्टरनी ने अपने लाल-सलाम कामरेडों सहित कई लोगों से ठगे करोड़ों रुपए: इंटरव्यू लेटर, सोना गिरवी रखने की कहानी से फँसाती थी जाल में

केरल के कासरगोड की एक वामपंथी नेत्री संचिता राय ने कई लोगों से करोड़ों की ठगी की। यह ठगी नौकरी देने के नाम पर की गई। नौकरी के नाम पर ठगे जाने वाले लोग नेत्री के दोस्त-रिश्तेदार और परिचित ही हैं। इस ठगी के लिए इंटरव्यू के फर्जी पोस्टकार्ड और सोना गिरवी रखने की फर्जी बातें तक की गईं। लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाली यह नेत्री शिक्षक भी थी।

फर्जी इंटरव्यू का लेटर

केस 1: संचिता ने जिन लोगों से नौकरी के नाम पर पैसे लिए, उन्हें इंटरव्यू के फर्जी लेटर भी भेजे। उसने यह लेटर खुद लिखे थे लेकिन दावा किया कि यह दिल्ली से आए हैं। ऐसे ही एक मामले में 22 फरवरी, 2024 को रामिसाथ के नाम के एक व्यक्ति के पास लेटर आया। इसमें केन्द्रीय विद्यालय के लिए इंटरव्यू की बात लिखी थी। इस व्यक्ति ने भी संचिता को नौकरी के लिए ₹5 लाख दिए थे। हालाँकि, मामला तब बिगड़ा जब उन्होंने पाया कि इस पत्र में इंटरव्यू के लिए लिखी तारीख पहले ही निकल चुकी थी।

जब संचिता को यह बात रामिसथ ने बताई तो उसने वादा किया कि वह दोबारा इंटरव्यू करवाएगी। संचिता ने कहा कि इस इंटरव्यू में दिल्ली से पत्र भेजने में गड़बड़ी हुई है। हालाँकि, दूसरा इंटरव्यू कभी करवाया ही नहीं गया और रामिसाथ के ₹5 लाख डूब गए।

केस 2: कुछ ऐसा ही मामला अक्षय के साथ हुआ। कासरगोड के ही रहने वाले अक्षय को 23 फरवरी, 2024 को इंटरव्यू का एक लेटर मिला। इसमें केंद्र सरकार के CPCRI में क्लर्क की नौकरी इंटरव्यू की तारीख 22 फरवरी लिखी हुई थी जो पहले ही निकल चुकी थी। ऊपर से इस इंटरव्यू की जगह भी कर्नाटक हुबली में बताई गई थी। अक्षय ने भी संचिता को इस गड़बड़ी की जानकारी दी तो उसने फिर वही बहाना बना दिया। संचिता ने अक्षय से भी दूसरे इंटरव्यू का वादा किया लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं हुआ।

जिससे लिए ₹15 लाख, उसको लेटर तक ना भेजा

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, संचिता ने इस ठगी का शिकार कई लोगों को बनाया। ऐसी ही एक पीड़िता अमिता ने संचिता को केंद्र सरकार के विभाग CPCRI में नौकरी के नाम पर ₹15 लाख दिए थे। यह नौकरी केन्द्रीय विद्यालय की बताई गई थी। अमिता को इस संबंध में कोई इंटरव्यू का लेटर नहीं मिला। इस बीच संचिता उन्हें बताती रही कि यह दिल्ली से भेजा जा चुका है। हालाँकि, यह झूठ था। अमिता ने इसके बाद लेटर को लेकर डाक विभाग में शिकायत भी दर्ज करवाई। यहाँ तक कि मामला डाक मंत्रालय तक आया।

जाँच के बाद पता चला कि कभी कोई लेटर भेजा नहीं गया। इससे संचिता की पोल खुल गई। संचिता पर इसके बाद भी उन्होंने शक नहीं किया। अमिता को संचिता लम्बे समय से जानती थी। वह दोनों साथ में पढ़ी भी हुई थी। इसके अलावा संचिता का अमिता के परिवार से भी अच्छा परिचय था। इसके बाद भी संचिता ने उनसे ठगी की। अमिता को बाद में इस विषय में सच्चाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने भी FIR करवाई।

सोना गिरवी रखने की फर्जी बातें

संचिता ने लोगों को अत्यधिक दयालुता दिखा कर भी ठगा। उसने अपनी परिचित नादिया फातिमा को भी केंद्रीय विद्यालय में नौकरी का ऑफर दिया। संचिता ने बताया कि अगर नादिया को यह नौकरी मिली तो उसकी जिन्दगी बदल जाएगी। नादिया ने इस बात को लेकर मना कर दिया क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे।

संचिता ने इसके बाद नादिया को बताया कि वह अपने गहने गिरवी रख कर उसके लिए पैसे का इंतजाम करेगी। संचिता ने ऐसा करने की ₹1 लाख की एक रसीद भी भेजी। इसके बाद नादिया ने भी लगबग ₹1.5 लाख भेजे। हालाँकि नादिया को भी नौकरी नहीं मिली।

इसके अलावा संचिता ने किसी से ₹1 कर्नाटक सरकार में लाख तो किसी से ₹13 लाख भारतीय स्टेट बैंक में सरकार में नौकरी के नाम पर लिए। जिन लोगों से ठगी हुई, उनमें उसके साथी कम्युनिस्ट नेता भी थे। उसने अपने साथ पढ़ने वाले कम से कम 40 लोगों से ठगी करने की कोशिश की। उसके झाँसे में 7-8 लोग आ भी गए।

खुद ही लिखे थे पत्र

संचिता ने जिन लोगों को ठगा था जब उन्होंने इस बारे में खोजबीन की तो पता चला कि यह सब एक फर्जीवाडा था और वह ठगे जा चुके हैं। इसके बाद इन लोगों ने वह इंटरव्यू लेटर देखे जो कथित तौर पर दिल्ली से भेजे गए थे। इनको ध्यान से देखने पर पता चला कि यह सभी संचिता ने खुद लिखे थे और यह कासरगोड से भेजे गए थे ना कि दिल्ली से। उन्होंने इस बारे में और जाँच की तो उन्हें CCTV फुटेज भी मिला। इसके बाद जब इन्होने संचिता से पैसे माँगे तो वह बहाने बनाने लगी। उसने खुद को भी पीड़ित बताया।

8 FIR हुईं, अब भी गिरफ्तारी नहीं

संचिता के खिलाफ अब तक 8 अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज करवाई जा चुकी हैं। सबमें यही कहानी है कि संचिता ने उसने नौकरी का वादा किया और लाखों रूपए लिए। इसके बाद नौकरी को लेकर कभी वादा नहीं पूरा हुआ। इस बीच संचिता का कहना है कि वह स्वयं ठगी गई है और उसे चंद्रशेखर नाम के एक आदमी ने ठगा है। पुलिस इस मामले में की जाँच कर रही है। उसका कहना है कि उसे अब तक ₹2 करोड़ की ठगी का पता चला है।

संचिता वर्तमान में कासरगोड के ही एक स्कूल में शिक्षक है। वामपंथी छात्र संगठन DYFI ने संचिता के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के बाद उसे निकाल दिया था। DYFI ने इसके अलावा और कोई कार्रवाई नहीं की है। वामपंथी नेताओं को इसमें भाजपा की साजिश लग रही है। दूसरी तरफ पुलिस ने भी अभी संचिता को पूछताछ तक के लिए नहीं बुलाया है। पुलिस का कहना है कि संचिता कोर्ट से अग्रिम जमानत माँग रही है और ऐसे में जब उस पर फैसला हो जाएगा तो वह उससे पूछताछ करेंगे।

संचिता और उसके पिता कासरगोड में भाजपा और RSS की आलोचना करने के लिए विख्यात हैं। उन्हें वामपंथी कार्यक्रमों में इसी काम के लिए बुलाया जाता है। संचिता का यह घोटाला खुलने के बाद वह खुद को भी पीड़ित बता कर बचने का प्रयास कर रही है।

LAC पर भारत-चीन के बीच बनी सहमति, पेट्रोलिंग फिर से होगी बहाल: ब्रिक्स बैठक से पहले महत्वपूर्ण बदलाव, जानिए विदेश मंत्रालय ने क्या बताया

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इस नई सहमति के तहत दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में देपसांग और डेमचोक जैसे संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग फिर से शुरू करने और सैनिकों को पीछे हटाने (डिसइंगेजमेंट) पर सहमति जताई है। इस समझौते का उद्देश्य 2020 से जारी सीमा विवाद और तनाव को कम करना है, जब दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने थे।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को इस घटनाक्रम की जानकारी दी और कहा कि पिछले कई हफ्तों से भारत और चीन के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर चर्चा हो रही थी, जिसके परिणामस्वरूप यह सहमति बनी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में जो सहमति बनी है, उसके तहत दोनों देशों के बीच LAC पर पेट्रोलिंग की व्यवस्था को फिर से स्थापित किया जाएगा। देपसांग और डेमचोक जैसे संवेदनशील इलाकों में पहले से ही पेट्रोलिंग शुरू हो चुकी है, और जल्द ही दोनों पक्ष अपने सैनिकों को पीछे हटाना शुरू करेंगे। इसे सैन्य भाषा में डिसइंगेजमेंट कहा जाता है, जिसका मतलब है कि दोनों देशों के सैनिक विवादित क्षेत्रों से पीछे हट जाएँगे और स्थिति सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए जाएँगे।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “पिछले कई हफ्तों से भारत और चीन के बीच चल रही चर्चाओं के परिणामस्वरूप पेट्रोलिंग को लेकर एक समझौता हुआ है। यह समझौता दोनों देशों के सैनिकों की वापसी और स्थिति के समाधान की दिशा में अहम कदम है।”

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण सहमति

यह सहमति ऐसे समय में आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस में 22-23 अक्टूबर को होने वाले 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। इस सम्मेलन से इतर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाएँ भी जताई जा रही हैं। विक्रम मिस्री ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बैठक को लेकर अब भी समय और अन्य व्यस्तताओं के अनुरूप काम किया जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच LAC को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हालाँकि, 2020 में यह तनाव तब और बढ़ गया जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। 15-16 जून 2020 को हुई इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक बलिदान हो गए थे और कई चीनी सैनिक भी मारे गए थे। यह घटना दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक थी, जिसने भारत-चीन संबंधों में गहरा असर डाला। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए थे और कई महीनों तक तनाव की स्थिति बनी रही।

करवा चौथ के व्रत से बिगड़ेंगे हॉर्मोन, रोजे रखने के फायदे ही फायदे: इस ‘पत्रकारिता’ की पुड़िया बना अपने स्थान विशेष में डाल लो इंडियन एक्सप्रेस वालो

हिंदुओं के त्योहारों को बदनाम करने के कुत्सित प्रयास हर वामपंथी मीडिया का पसंदीदा काम है। अभी कल करवा चौथ बीता है। ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस पर एक जानकारी से ओत-प्रोत लेख छपा। इस लेख में बताया गया कि कैसे महिलाओं के व्रत रखने पर सारा असर उनके शरीर पर पड़ता है। दिलचस्प बात ये है कि यही इंडियन एक्सप्रेस मार्च में अपनी साइट पर ये बता रहा था कि कैसे रमजान में किए जाने व्रत किसी को वेट लॉस, बीपी और कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल में मदद कर सकते हैं।

दिलचस्प बात ये है कि ये दोनों ही लेख 2024 में पब्लिश हुए हैं। करवा चौथ का लेख कल यानी 20 अक्तूबर को प्रकाशित किया गया और रमजान पर ज्ञान 11 मार्च को दिया गया। करवा चौथ वाले लेख में बताया गया कि लंबे व्रत से महिलाओं के हॉरमोन पर फर्क पड़ सकता है और मासिक धर्म आने में भी देरी हो सकती है।

करवा चौथ पर इंडियन एक्सप्रेस की हेडलाइन

इसके अलावा ज्यादा देर फास्ट रखने से तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन उत्पन्न हो सकते हैं और शुगर कम हो सकता है, बीपी गिर सकता है। साथ ही एनर्जी में कमी के साथ मूड स्विंग आदि भी हो सकते हैं और तो और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

करवा चौथ पर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित कंटेंट

करवा चौथ में क्योंकि रात में चाँद को अर्घ्य देने के बाद पानी पीने की परंपरा है इसलिए इंडियन एक्सप्रेस ने डॉक्टर के हवाले से ये भी बताया कि कैसे महिलाओं को पूरे दिन पानी पिए पीन नहीं रहना चाहिए। प्रोटीन युक्त डाइट लेनी चाहिए ताकि न स्ट्रेस और न तनाव हो।

करवा चौथ पर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित कंटेंट

आप सोच रहे होंगे इंडियन एक्प्रेस ने जो बातें कहीं वो गलत कहाँ हैं? स्वास्थ्य के हिसाब से तो सब तार्किक बातें लिखीं है। बिलकुल तार्किक हो सकती हैं इन सवालों के लिए कि अगर कोई व्यक्ति भूखा रहे तो उससे उसके शरीर पर क्या असर होता है? मगर, यहाँ विवाद ये नहीं है कि उन्होंने महिलाओं के भूखे पेट रहने के तमाम नुकसान बताए। यहाँ मुद्दा ये है कि जो इंडियन एक्सप्रेस एक तरफ करवा चौथ की फास्टिंग को स्त्रियों के लिए नुकसानदायक बता रहा है वही इंडियन एक्प्रेस रमजान की फास्टिंग के अनगिनत फायदे बता चुका है।

रमजान पर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित हेडलाइन

ऊपर जैसे देखा कि करवा चौथ वाले लेख में तो सीधे ऐसे दिखाया कि व्रत रखने के नुकसान इतने हैं कि अगर महिलाएँ इसे रखेंगी तो बीमार होना तय है मगर वहीं रमजान पर ये समाचार पोर्टल बताता है कि कैसे फास्टिंग के दौरान होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। जैसे सहरी में जमकर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फल, सब्जी खा लेने चाहिए ताकि बॉडी में किसी चीज की कमी न हो, इसी तरह जरूरत भर पानी भी पीना चाहिए ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो जाए। इस रिपोर्ट में तो ये भी बताया गया है कि रोजा रखते समय कसरत भी हो सकती है या नहीं। इसके साथ ये भी बताया है कि कैसे उन लोगों को फायदा होता है जिनका वजन कम होता है जिनके लिए मोटापा बड़ी समस्या है।

रमजान पर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित कंटेंट

आप समझ सकते हैं कि दोनों लेखों में कैसे ‘नजरिए’ का फर्क पता चलता है। करवा चौथ से पहले छपे लेख में साफ तौर पर सिर्फ नकारात्मक पहलू बताए गए। अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे समझाया गया कि अगर शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहना है तो व्रत न करना बेहतर है। वहीं दूसरी ओर रमजान के रोजों के समय ये बताया गया कि कैसे रोजाधारियों को इसका फायदा होगा। और जो नुकसान भी होंगे उनसे के लिए क्या किया जा सकता है। यानी अगर कोई ये सोचे भी कि उसका स्वास्थ्य इतने समय तक रोजे रखने से न जाने ठीक रहे या नहीं तो इंडियन एक्सप्रेस का ये लेख उनके लिए हर समाधान दे रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की हिपोक्रेसी
इंडियन एक्सप्रेस की हिपोक्रेसी

हैरानी की बात ये है कि इतना दोहरा रवैया तब दिखाया गया जब करवा चौथ एक दिन का त्योहार है और रोजे पूरे महीने रखे जाते हैं। अगर रोजे रखने वालों के लिए इंडियन एक्सप्रेस इतनी मेहनत करके अपनी रिपोर्ट कर सकता है तो फिर करवा चौथ पर इतने नकारात्मकता फैलाने की आवश्यकता क्या है। अगर इन लेखों को पढ़कर इंडियन एक्सप्रेस पर हिंदू त्योहारों से घृणा करने वाला न कहा जाए तो क्या कहा जाए।

मालूम हो कि करवा चौथ की परंपरा का खत्म करने का प्रयास अकेला इंडियन एक्सप्रेस नहीं करता। तमाम वामपंथी और तथाकथित फेमिनिस्ट पति-पत्नी के इस त्योहार का मजाक बनाते हर साल दिखते हैं। सैंकड़ों सालों से चली आ रही इस रीत ये टुच्ची मानसिकता के लोग इस त्योहार को फिल्मों से शुरू हुई परंपरा बताते हैं। वहीं कुछ इसे अनपढ़ महिलाओं का त्योहार कहकर खुश होते दिखते हैं।

न मदरसों की मान्यता रद्द होगी, न सरकारी स्कूलों में बच्चे होंगे ट्रांसफर: NCPCR के निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने किया था विरोध

उन मदरसों की मान्यता रद्द नहीं होगी जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 का पालन नहीं कर रहे। न ही गैर मान्यता प्राप्त मदरसों से गैर मुस्लिम छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा। इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। जमीयत-उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया है। केंद्र और राज्य सरकारों को NCPCR के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई नहीं करने को कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह अंतरिम आदेश एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। NCPCR के निर्देशों को चुनौती देते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया कि यह अल्पसंख्यकों के अनुच्छेद 30 के तहत शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

NCPCR ने सरकार को मदरसों को लेकर दिए थे ये निर्देश

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 7 जून 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि जो मदरसे RTE अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनकी मान्यता वापस ली जाए। इसके बाद 25 जून 2024 को NCPCR ने शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूद मदरसों का निरीक्षण किया जाए और जो मदरसे RTE के मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनकी मान्यता और UDISE कोड तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।

NCPCR ने यह भी सुझाव दिया कि मदरसों के लिए एक अलग श्रेणी का यूनिफ़ाइड डिस्ट्रिक्ट इंफ़ॉर्मेशन सिस्टम फ़ॉर एजुकेशन (UDISE) कोड बनाया जाए, ताकि मान्यता प्राप्त, गैर-मान्यता प्राप्त और अवैध मदरसों की जानकारी एकत्र की जा सके।

इसके बाद, 26 जून 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में सरकारी अनुदान प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों का विस्तृत जाँच-पड़ताल करें, जो गैर-मुस्लिम बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं, और सुनिश्चित करें कि सभी बच्चों को स्कूलों में तुरंत दाखिला दिया जाए। इसी प्रकार का निर्देश त्रिपुरा सरकार द्वारा 28 अगस्त 2024 को भी जारी किया गया था। 10 जुलाई 2024 को केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को NCPCR के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया।

इन निर्देशों को मजहबी अल्पसंख्यकों के शिक्षा देने के अधिकार (अनुच्छेद 30) के उल्लंघन के रूप में देखते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अनुच्छेद 30 भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उन्हें संचालित करने का अधिकार देता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने NCPCR के 7 जून 2024 और 25 जून 2024 के निर्देशों और उत्तर प्रदेश सरकार के 26 जून 2024 के आदेश और केंद्र सरकार के 10 जुलाई 2024 के निर्देशों पर रोक लगा दी। इसी तरह त्रिपुरा सरकार के 28 अगस्त 2024 के निर्देशों पर भी रोक लगाई गई।

इंदिरा जयसिंह ने जमीयत का रखा पक्ष

जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने इस मामले में मौखिक रूप से यह अनुरोध किया कि याचिका में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वे सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस याचिका में पक्षकार बनाएँ। इस रिट याचिका को अधिवक्ता फ़ुज़ैल अहमद अय्यूबी द्वारा दायर किया गया था। जमीयत उलमा-ए-हिंद बनाम राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और अन्य के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि फिलहाल NCPCR और विभिन्न राज्यों द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर किसी भी मदरसे के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। इस अधिनियम के तहत निजी और सरकारी स्कूलों को निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। NCPCR का यह निर्देश इसी अधिनियम के तहत उन मदरसों पर लागू होता है जो मान्यता प्राप्त हैं या जिनकी शिक्षा प्रणाली UDISE (Unified District Information System for Education) कोड से जुड़ी है।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि NCPCR और सरकार के इन आदेशों से मजहबी अल्पसंख्यकों के शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार के आदेश न केवल मजहबी अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करते हैं, बल्कि यह भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के भी विपरीत है, जो सभी नागरिकों को मजहबी स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार की गारंटी देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलों को सुना और यह अंतरिम आदेश पारित किया कि अगली सुनवाई तक कोई भी राज्य या केंद्र सरकार NCPCR के निर्देशों पर कार्रवाई नहीं करेगी। इस मामले में कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल उन मदरसों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी जो RTE अधिनियम का पालन नहीं कर रहे हैं।