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जिन रामगोपाल को मुस्लिमों ने मारा, उनकी 2 महीने पहले ही हुई थी शादी, परिवार बेहद गरीब: हत्या आरोपित का नेपाल के मदरसे से कनेक्शन

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को माँ दुर्गा के मूर्ति विसर्जन जुलूस में एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई। इस जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव किया। इस हत्या का आरोप अब्दुल हमीद, सरफराज, फहीम और साहिर खान आदि पर लगा है। मृतक का नाम रामगोपाल मिश्रा है। रामगोपाल मिश्रा की महज 2 माह पहले ही शादी हुई थी। कातिलों का नेपाल से भी कनेक्शन सामने आया है। ऑपइंडिया ने इस दंगे से जुड़ी कुछ अन्य जमीनी जानकारियाँ जुटाईं हैं, साथ ही चश्मदीदों से बातचीत भी की है।

वृद्ध पिता बेसुध, पत्नी 2 माह में विधवा

इस घटना को लेकर ऑपइंडिया ने रामगोपाल के भाई हरिमिलन मिश्रा से बात की। हरिमिलन ने बताया कि वह कुल 3 भाई थे जिसमें अब रामगोपाल दुनिया में नहीं है। रामगोपाल की उम्र मात्र 22 साल थी। वह रामगाँव थानाक्षेत्र के रेहुआ मंसर गाँव में रहते थे। रामगोपाल के पिता कैलाशनाथ 75 वर्ष के हो चुके हैं। बेटे की मौत के बाद उनकी भी तबियत काफी खराब हो गई है। परिजन और अन्य रिश्तेदार जैसे-तैसे उनको संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

रामगोपाल 3 भाइयों में सबसे छोटे थे। वो और उनके घर के अन्य पुरुष मेहनत-मजदूरी के साथ खेती-बाड़ी कर के गुजर-बसर करते थे। महज 2 महीने पहले ही रामगोपाल की शादी पास के ही गाँव से धूमधाम से हुई थी। शादी के मात्र 2 माह बाद विधवा हो चुकीं रामगोपाल की पत्नी को ऑपइंडिया को मिले एक वीडियो में अपने पति के शव से लिपट कर रोते देखा जा सकता है। हरिमिलन ने बताया कि पति की हत्या की बात सुन कर रामगोपाल की पत्नी बेसुध हो चुकी हैं।

लाठी न चलाती पुलिस को जिन्दा होता मेरा भाई

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान हरिमिलन मिश्रा पोस्टमार्टम हाउस में थे। तब कड़ी सुरक्षा के बीच रामगोपाल का पोस्टमार्टम चल रहा था। अपने परिवार की हालात बेहद दयनीय बताते हुए हरिमिलन ने अपील की है कि सरकार उनकी मदद करे। साथ ही उन्होंने हमलावरों पर कठोर कार्रवाई की माँग की है। अभी तक रामगोपाल के परिजनों को कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी असंतोष जताया है।

घटना का जिक्र करते हुए हरिमिलन ने बताया कि माँ दुर्गा के जुलूस पर पहले अब्दुल हमीद के घर से पत्थर फेंके गए थे। इन पत्थरों से एक देवी प्रतिमा का हाथ टूट गया था और मूर्ति खंडित हो गई थी। जिसके बाद श्रद्धालु आक्रोशित हो उठे थे। इसी दौरान पुलिस ने हिन्दुओं पर ही लाठीचार्ज कर दिया जिस से हंगामा मच गया और लोग इधर उधर भागने लगे। आरोप है कि पत्थर बरसाने वाली मुस्लिम भीड़ ने इसी अफरातफरी का फायदा उठा कर रामगोपाल को घर में खींच लिया और बेरहमी से मार डाला।

हरिमिलन का कहना है कि अगर पुलिस हिन्दुओं पर लाठी ना चलाती तो सभी श्रद्धालु एकजुट रहते और उनका भाई जिन्दा रहता। फ़िलहाल मिश्रा परिवार को यह नहीं पता कि उनके परिवार का भविष्य कैसा होगा। उन्होंने हमलावरों के साथ गलत समय निर्णय लेने वाले पुलिस बल की भी जाँच करवा कर कार्रवाई किए जाने की माँग की है।

पहला हमला मुस्लिमों की तरफ से

जिस विसर्जन जुलूस में रामगोपाल की हत्या हुई उसी में शामिल होने का दावा करने वाले ललित से ऑपइंडिया ने बता की। ललित ने हमें बताया कि महराजगंज के जिस जगह पर हमला हुआ वो मुस्लिम बहुल इलाका है। ललित का दावा है कि अबीर और गुलाल का बहाना ले कर सड़क पर खड़े कुछ मुस्लिम युवकों ने विवाद शुरू किया। आरोप है कि इस समय तक पुलिस चुप रही जिसकी वजह से अब्दुल हमीद के घर से पत्थरबाजी भी शुरू हो गई।

ललित ने उस वीडियो के विषय में भी जानकारी दी, जो सोशल मीडिया पर रामगोपाल मिश्रा का बता कर वायरल किया जा रहा है और जिसमें वह कथित तौर पर हरा झंडा उखाड़ कर भगवा झंडा लगाते दिखते हैं। ललित ने बताया कि माता दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूटा देख कर श्रद्धालुओं में गुस्सा था।

यह गुस्सा पुलिस द्वारा एकतरफा कार्रवाई किए जाने के आरोप से और अधिक भड़क गया था। रामगोपाल मिश्रा का शव अब्दुल हमीद के घर के अंदर मिला था। उनको अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। कुछ अन्य श्रद्धालु भी घायल हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

ऑपइंडिया को मिले वीडियो में हिन्दू संगठनों को मृतक का शव ले कर नारेबाजी करते देखा जा सकता है। वो ‘पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। रामगोपाल के भाई हरिमिलन ने बताया कि हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ भी नारेबाजी कर रही थी। इसी नारेबाजी के साथ मारो-मारो का शोर भी सुनाई दे रहा था।

कातिल का नेपाल कनेक्शन

ऑपइंडिया को रामगोपाल की हत्या करने वाले मुस्लिमों के विषय में और भी जानकारी मिली है। पता चला है कि इस हमले के लिए अब्दुल हमीद का घर लाँच पैड के तौर पर हुआ था। अब्दुल हमीद खुद इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस हमले में उसके 2 बेटे सरफराज और फहीम भी नामजद हैं। नाम ना छापने की शर्त पर ऑपइंडिया को एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अब्दुल हमीद का एक बेटा नेपाल में रहता है।

उसकी नेपाल में भारत विरोधी तत्वों से साठगांठ का भी दावा किया गया है। नेपाल के बाँके जिले में फुलटेकरा के पास एक मदरसे में उसका आना-जाना भी बताया जा रहा है। आरोप है कि इस मदरसे में भारत और हिन्दू विरोधी गतिविधियाँ संचालित होती हैं। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि रामगोपाल की हत्या के बाद अब्दुल हमीद का परिवार भारत की सीमा पार कर के नेपाल भाग गया है।

रामगोपाल की हत्या के बाद गुस्साए लोग आरोपितों का एनकाउंटर करने और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे हैं। मृतक के परिजनों को भी आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की अपील की जा रही है। पुलिस प्रशासन हालत लोगों को समझाने का प्रयास कर रहा है।

दीवाली से पहले दिल्ली में पटाखे बैन, AAP सरकार करेगी कार्रवाई: पंजाब में लगातार जल रही पराली, अब तक 800+ मामले

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने दीवाली से पहले पटाखों पर पूर्णतया बैन लगा दिया है। AAP सरकार ने यह निर्णय दिल्ली में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए लिया है। लेकिन दूसरी तरफ पंजाब की AAP सरकार पंजाब के भीतर पराली का जलना नहीं रोक पा रही है। पंजाब में जलने वाली पराली दिल्ली के वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) ने सोमवार (14 अक्टूबर, 2024) को एक आदेश जारी करके पटाखों की खरीद-बिक्री और बनाए जाने समेत उनके फोड़े जाने पर प्रतिबंध लगाया है। यह प्रतिबंध 1 जनवरी, 2024 तक जारी रहेगा। इस बीच पटाखे पाए जाने पर जुर्माना और कार्रवाई की जाएगी।

DPCC ने दिल्ली पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करने के आदेश भी दिए हैं। हालाँकि, दीवाली के पटाखे जलने से पहले ही दिल्ली की हवा खराब होना चालू हो चुकी है। सोमवार (14 अक्टूबर, 2024) को दिल्ली के आनंद विहार का AQI 302 के स्तर पर था जो कि अत्यंत खतरनाक है।

दिल्ली की AAP सरकार जहाँ एक ओर राजधानी में पटाखे बैन करके प्रदूषण रोक रही हैं वहीं पंजाब के भीतर पराली जलने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया अहि कि पंजाब के भीतर अब तक 800 से अधिक पराली जलने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं जबकि धान की कटाई अभी पूरी तरीके से चालू भी नहीं हुई है।

पंजाब के तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और संगरूर से सबसे अधिक पराली जलने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। पंजाब में भी AAP सरकार है लेकिन वह इसे नहीं रोक पा रही है। 2023 में भी देश में पराली जलने के सर्वाधिक मामले पंजाब से ही सामने आए थे। 2023 में पराली प्रदूषण के मामलों में पंजाब का 93% से अधिक का योगदान था।

2023 में पंजाब में पराली जलाने की 36663 घटनाएँ हुई थीं। हरियाणा में इसी दौरान पराली जलाने की मात्र 2303 घटनाएँ ही हुईं थी। पंजाब में इसी दौरान कुछ शहरों का AQI भी खराब हो गया है।

बहराइच में हत्या, हावड़ा में आगजनी, गोंडा में पथराव, गढ़वा में रोका रास्ता… इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर दुर्गा पूजा: 10 घटनाएँ, जो मीडिया में आई

इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्गा पूजा और हिन्दुओं को निशाना बनाया है। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने कहीं पंडाल पर पथराव किया गया तो कहीं मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर हमला हुआ, जुलूस के रास्तों को लेकर भी विवाद हुआ। बहराइच में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और असम तक पथराव और हिंसा हुई है। यह हिंसा हिन्दुओं के त्योहार नवरात्र के साथ ही चालू हो गई थी। ऑपइंडिया इन्हीं घटनाओं का संकलन एक साथ कर रहा है।

बहराइच में हिंसा, हिन्दू युवक की हत्या

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में मुस्लिम पक्ष द्वारा विसर्जन जुलूस में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियाँ बरसाई गईं। जिस मकान से गोलियाँ चलाई गईं हैं, वह सलमान का है। गोली लगने से 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की मौत हो गई है।

रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में मुस्लिम समुदाय के 6 लोग नामजद किए गए हैं। हिंदू युवक की हत्या के बाद जिले के कई हिस्सों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई है। थोड़े समय के लिए प्रतिमाओं का विसर्जन भी रुका रहा। CM योगी आदित्यनाथ ने मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

हावड़ा के श्यामगंज में हिंसा

हावड़ा के श्यामगंज में रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को एक मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू पंडालों पर हमला किया। मुस्लिम भीड़ ने दुर्गा पूजा पंडालों को नष्ट करना चालू कर दिया। उन्होंने मूर्तियों को आग लगा दी और कई पंडालों को तबाह किया। यह मुस्लिम भीड़ उस घाट पर भी पहुँची जहाँ देवी मूर्तियों का विसर्जन होना था। यहाँ इस भीड़ ने पथराव किया। आगजनी की भी सूचना आ रही है। बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।

कौशाम्बी में विसर्जन यात्रा पर हमला

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस पर हमला हुआ। इस हमले में जुलूस में शामिल महिला श्रद्धालुओं को भी निशाना बनाया गया। हमले के दौरान तलवारें लहराई गईं और पत्थरबाजी हुई। घटना में कई श्रद्धालुओं को चोटें आने की खबर है। शनिवार (12 अक्टूबर, 2024) को हुए इस हमले का आरोप मुस्लिम समुदाय के लगभग 1 दर्जन लोगों पर लगा है जिसमें ख़ातूनें भी शामिल हैं। माँ दुर्गा की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया और एक महिला से दुष्कर्म की भी कोशिश हुई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

बलरामपुर में दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला

उत्तर प्रदेश के ही बलरामपुर में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पंडाल में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। 

महिलाओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना दुर्गा पूजा के शांतिपूर्ण उत्सव में बाधा डालने का एक स्पष्ट उदाहरण है। हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान पथराव

गोंडा के मसकनवा बाजार इलाके में बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्ति स्थापित करने के बाद देवी की आँखों पर से पट्टी हटाई गई थी। इस मूर्ति की स्थापना बीते कई सालों से की जाती है। इस मौके पर यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू इकट्ठा थे।

पूजा अर्चना के बाद कुछ हिन्दू बच्चे इस पंडाल के बाहर पटाखे फोड़ने लगे। पटाखों की आवाज सुन कर पास में रहने वाले मुस्लिम भड़क गए। मुस्लिम परिवार के लोग बाहर निकल कर हिन्दुओं को गालियाँ देने लगे और हमलावर हो गए। उन्होंने पहले हिन्दुओं पर पथराव किया और फिर लाठी डंडों से हमला कर दिया।

इस हमले में मुन्ना, सुल्तान और असलम तथा बाकी लोगों के मुस्लिम परिवार शामिल थे। मुस्लिमों की इस पत्थरबाजी में लगभग 10-12 हिन्दू गंभीर रूप से घायल हो गए। मुस्लिमों को जब हिन्दुओं ने शांत करने की कोशिश की तो वह और उग्र हो गए तथा आसपास से बाकी मुस्लिमों को भी बुलाया।

कोलकाता में माइक की आवाज पर विवाद

कोलकाता में एक दुर्गा पूजा पंडाल में मुस्लिमों ने माइक की आवाज को लेकर विवाद खड़ा किया। अजान के दौरान माइक की आवाज को बंद करने की माँग करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा समारोह को बाधित किया। आयोजकों ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

शिकायत में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की सुबह न्यू बंगाल स्पोर्टिंग क्लब द्वारा जब अष्टमी और नवमी के अनुष्ठान किए जा रहा था, तब आज दोपहर 1.13 बजे लगभग 50-60 उपद्रवी लोग आए और उन्होंने पूजा को रोकने को कहा और पूजा को भंग करने का प्रयास किया। उन्होंने धमकी दी कि अगर पूजा नहीं रोकी गई तो वो मां दुर्गा की प्रतिमा को तोड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने धक्का-मुक्की की और हमारी महिला सदस्यों के खिलाफ गलत शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

कुशीनगर में दुर्गा मूर्ति पर पथराव

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक और गंभीर घटना सामने आई, जब दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मूर्ति पर पथराव किया। इस घटना में 10 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए आरोपितों को गिरफ्तार किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। हिंदू समुदाय ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

करीमगंज में मजहबी हिंसा

असम के करीमगंज में दुर्गा पूजा के दौरान मजहबी हिंसा भड़क उठी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर पथराव किया, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया और स्थिति को काबू में लाया। पुलिस ने इस मामले में सहाबुल अहमद (21 साल), अब्दुल अहद (18 साल) और एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया है।

गढ़वा में पत्थरबाजी

झारखंड के गढ़वा में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन जुलूस को मुस्लिम समुदाय द्वारा रोके जाने पर मजहबी तनाव फैल गया। यहाँ 2 अलग-अलग घटनाओं में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिन्दू पक्ष जिस रास्ते से जुलूस निकालना चाह रहा था, उस पर मुस्लिम समुदाय ने ऐतराज जताया। यहाँ रविवार (13 अक्टूबर) को हिन्दू समुदाय के लोग हर वर्ष की तरह प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए निकले थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने प्रतिबंधित रास्ता बताकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद यात्रा पर पथराव भी हुआ।

त्रिपुरा में दुर्गा पूजा से पहले ही हिंसा

रविवार (9 अक्टूबर, 2024) को त्रिपुरा में मजहबी हिंसा हुई। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला किया। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। हमलावरों ने हिंसा रोकने पहुँची पुलिस को भी निशाना बनाया। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए हैं। यहाँ रविवार को दुर्गापूजा के लिए हिन्दू समुदाय के कुछ लोग सड़क पर चंदा माँग रहे थे।

इसी दौरान एक मुस्लिम ड्राइवर से उनकी बहस हो गई, जो बाद में बड़े विवाद में बदल गई। थोड़ी देर में ड्राइवर के समर्थन में आसपास के इलाकों से इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। उन्होंने न केवल चंदा माँग रहे हिन्दुओं पर हमला किया, बल्कि आसपास के निवासियों पर भी हमला कर दिया।

यह जानकारी उन्हीं घटनाओं की है, जो मीडिया में सामने आई हैं या जिनकी जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ को देखते हुए कहा जा सकता है कि कई घटनाएँ संभवतः बाकी शोर शराबे में दब गई होंगी।

 

अब्दुल+मुस्लिम गैंग ने रामगोपाल मिश्रा को तलवारों से काटा, गोली मारी: माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान बहराइच में हत्या, CM योगी के सख्त आदेश

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार (13 अक्टूवर 2024) को हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में मुस्लिम पक्ष द्वारा विसर्जन जुलूस में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियाँ बरसाई गईं। जिस मकान से गोलियाँ चलाई गईं हैं, वह सलमान का है। गोली लगने से 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की मौत हो गई है।

रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में मुस्लिम समुदाय के 6 लोग नामजद किए गए हैं। हिंदू युवक की हत्या के बाद जिले के कई हिस्सों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई है। थोड़े समय के लिए प्रतिमाओं का विसर्जन भी रुका रहा। CM योगी आदित्यनाथ ने मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

यह घटना बहराइच जिले के थानाक्षेत्र हरदी की है। रविवार को यहाँ हरिमिलन मिश्रा ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में हरिमिलन ने बताया कि घटना के दिन उनका भाई रामगोपाल मूर्ति विसर्जन देखने महराजगंज बाजार गया था। इसी जगह अब्दुल हमीद, सरफराज, फहीम और साहिर खान सहित 4 अन्य अज्ञात लोग बैठे थे। इन सभी ने रामगोपाल को घर के अंदर खींच लिया। यहाँ रामगोपाल को तलवारों से काटा गया और बाद में गोली मार दी गई।

इस हमले की वजह से रामगोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपितों को उन्होंने खुद, उनके भाई राजन और एक अन्य युवक किशन ने पहचाना है। हरिमिलन मिश्रा ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस मामले में अब्दुल हमीद, सरफराज, फहीम, साहिर खान, ननकऊ और मारूफ अली को नामजद करते हुए 4 अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

इन आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190 और 103 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। बहराइच की पुलिस अधीक्षक IPS वृंदा शुक्ला ने बताया कि जिस घर से गोली चलाई गई है, उसके मालिक का नाम सलमान है। इस घटना में फिलहाल 16 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

हत्या के बाद आगजनी और तोड़फोड़

रामगोपाल मिश्रा की हत्या की खबर मिलते ही जिले में साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की गई है। पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया है। मृतक का शव लेकर लोगों ने जाम लगाया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।

बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने बताया कि घटना के बाद उत्पात करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऑपइंडिया के पास पुलिस द्वारा बल प्रयोग के वीडियो मौजूद हैं।

पुलिस की मौजूदगी में हुई हत्या?

रामगोपाल मिश्रा की हत्या जिस जुलूस में हुई, उसके साथ पुलिस बल चल रहा था। जिस महराजगंज इलाके में यह विवाद हुआ, वह मुस्लिम बहुल बताया जाता है। हिंसा का वह वीडियो भी ऑपइंडिया के पास है, जिसमें पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश कर रही है।

एक अन्य वीडियो में अन्य श्रद्धालु रामगोपाल का शव लेकर अस्पताल भागते दिखाई दे रहे है। विसर्जन जुलूस में शामिल एक बुजुर्ग ने बताया कि पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं हैं। फ़िलहाल हरदी के SHO और महसी चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है।

CM योगी की तरफ से सख्त एक्शन के आदेश

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान आया है। उन्होंने उपद्रवियों से सख्ती से निबटने के निर्देश दिए हैं। हिंसा के बाद तनाव को देखते हुए प्रतिमाओं का विसर्जन कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी धर्मगुरुओं से बातचीत कर के प्रतिमाओं का विसर्जन सकुशल सम्पन्न करवाएँ। बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने भी बताया कि कुछ समय के व्यवधान के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन सही सलामत सम्पन्न करवाया गया।

शोएब ने शुभम बन किया हिन्दू महिला को मैसेज-कॉल, इस्लाम कबूलने का दबाव: हिन्दू संगठनों ने दम भर मारा, ऋषिकेश पुलिस को सौंपा

उत्तराखंड के ऋषिकेश में शोएब नाम के युवक ने शुभम बन कर एक हिन्दू महिला से बातचीत करने की कोशिश की। उसने महिला पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला। महिला ने इस पर प्रश्न उठाए तो उसने धमकी दी और इसके अंजाम भुगतने को कहने लगा। हिन्दू महिला ने इसकी शिकायत अपने पति से की, जिसके बाद शोएब को हिन्दू संगठनों ने शोएब को पकड़ कर पीट दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषिकेश के एक व्यापारी विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी शहर के ही एक जिम में जाते हैं। यहाँ पर शोएब नाम का एक युवक भी आता है। शोएब ने लगभग 20 दिन पूर्व व्यापारी विशाल अग्रवाल की पत्नी को अपना नाम शुभम बताया और बातचीत करने लगा।

शोएब ने विशाल की पत्नी का नम्बर भी कहीं से तलाश लिया और फर्जी आईडी से उनको मैसेज करने लगा। वह मैसेज में लगातार उलटी सीधी बातें करता था। इसके बाद जब महिला ने शोएब को मना किया तो वह अश्लीलता पर उतर आया। उसने बदतमीजी करना चालू कर दिया। शोएब ने महिला के साथ जिम में भी छेड़खानी की।

शोएब ने महिला पर धर्मांतरण कर इस्लाम अपनाने को कहा। ना मानने पर उसने अंजाम भुगतने की धमकी भी दी। परेशान होकर महिला ने यह जानकारी अपने पति विशाल अग्रवाल को दी। इसके बाद यह मामला स्थानीय हिन्दू संगठनों के पास पहुँचा।

हिन्दू संगठनों ने एक दिन शोएब को दबोच लिया और उसकी धुनाई कर दी। इसके बाद उसका ऋषिकेश में जुलूस भी निकाला गया। उसको पीटते हुए हिन्दू संगठनों के लोग ऋषिकेश कोतवाली तक ले गए। जाँच में पता चला कि शोएब ऋषिकेश का ही रहने वाला और मंडी में काम करता है।

शोएब के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने शिकायत भी दर्ज करवाई है। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं और आगे अगर ऐसा हुआ तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस ने उसके खिलाफ छेड़छाड़ और धमकाने का मामला दर्ज किया है।

गढ़वा में कट्टरपंथियों ने रोकी माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा, बवाल के बाद झारखंड पुलिस ने दागी गोलियाँ और आँसू गैस के गोले: हिंदुओं ने लगाया मुस्लिमों की तरफदारी का आरोप

झारखंड के गढ़वा में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन जुलूस को मुस्लिम समुदाय द्वारा रोके जाने पर सांप्रदायिक तनाव फैल गया। यहाँ 2 अलग-अलग घटनाओं में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिन्दू पक्ष जिस रास्ते से जुलूस निकालना चाह रहा था, उस पर मुस्लिम समुदाय ने ऐतराज जताया। नाराज हिन्दुओं ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। वहीं, मतगढ़ी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई है।

पहला मामला गढ़वा के मतगढ़ी का है। यहाँ रविवार (13 अक्टूबर) को हिन्दू समुदाय के लोग हर वर्ष की तरह प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए निकले थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने प्रतिबंधित रास्ता बताकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। वाद-विवाद के बीच हालात बिगड़ गए और पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस ने मामले को सँभालने की कोशिश की।

आखिरकार, पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया और आँसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान पुलिस ने फायरिंग भी की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हिन्दू पक्ष ने पुलिस पर मुस्लिमों की तरफदारी का आरोप लगाया। इसको लेकर पुलिस और हिन्दू संगठनों में झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि जिस रास्ते से विसर्जन यात्रा निकाली जा रही है, वहाँ पहले भी विवाद हो चुका है।

हालाँकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी पुरानी परम्परा बताते हुए यात्रा ले जाने पर आमादा थे। इस हिंसक झड़प के दौरान एक व्यक्ति के पैर में गोली भी लगने की बात कही जा रही है। इस घटना में कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए हैं। वहीं, कई श्रद्धालुओं को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। हालात को देखते हुए इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। प्रतिमा विसर्जन नहीं होने से तनाव और बढ़ गया है।

लखना गाँव में भी रास्ते में रुकावट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूसरा मामला गढ़वा जिले के ही लखना गाँव का है। यहाँ हिन्दू समुदाय ने हर वर्ष की भाँति इस बार भी दुर्गा पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया था। आयोजन के बाद शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को श्रद्धालु प्रतिमा को विसर्जन करने जा रहे थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विसर्जन जुलूस को रोक दिया। उनका कहना था कि उस रास्ते से विसर्जन यात्रा नहीं निकाली जा सकती है।

इस बात को लेकर दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की भीड़ जुटते देखकर मौके पर पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारी पहुँचे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से लम्बी वार्ता की जो देर रात तक चली। हालाँकि, इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला। घंटों प्रतिमा रास्ते में ही रुकी रही। इससे श्रद्धालु आक्रोशित हो गए। उन्होंने प्रशासन पर ढिलाई का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।

घटनास्थल पर पहुँचे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने मुस्लिम पक्ष पर जोर-जबरदस्ती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस मार्ग पर प्रतिमा का विसर्जन रोका गया है, उसको पक्की सड़क के तौर पर सरकार ने अपने पैसों से बनवाया है। बीजेपी MLA का यह भी दावा है कि इस मार्ग पर हर साल माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन होता रहा है।

बकौल तिवारी, उसी राह पर जब ताजिया निकलता है तो हिन्दू मुस्लिमों को शर्बत पिलाते हैं। तिवारी ने सरकार की एकतरफा धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि जिस इलाके में मुस्लिम पक्ष ने माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा रोकी है, वहीं पर एक हिन्दू ने कब्रिस्तान के लिए अपनी जमीन दान कर दी थी।

झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा, “पुलिस विसर्जन रोककर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों पर कारवाई करने की बजाय सिर्फ चिरौरी कर रही है।”

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के DGP से कहा कि वो प्रतिमा विसर्जन रोकने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें, अन्यथा सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ सकता है। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की आपसी बातचीत के बाद मामले का समाधान निकाल लिया गया है। पुलिस ने यह भी कहा कि विवाद की स्थिति कुछ बाहरी लोगों द्वारा पैदा की गई थी, जिस पर कार्रवाई की जाएगी।

घुसपैठ कर हरियाणा में बसे ही नहीं हैं रोहिंग्या मुस्लिम, चला रहे मदरसे भी: मौलवी बोले- हम ब्लैक में म्यांमार से आए, भारत में मेहमान बनकर रह रहे

हरियाणा के मुस्लिम बहुत मेवात क्षेत्र के नूहं में बाहर से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों की एक बड़ी आबादी अवैध रूप से रह रही है। ये सभी म्यामांर से अवैध रूप से भारत में आए और यहाँ से नूहं में स्थापित हो गए। इन अवैध घुसपैठियों के रहने वाले अस्थायी आवास बनाया गया है। ये सभी साल 2016 में ही भारत आ गए थे और तभी से यहाँ रह रहे हैं। इनमें रहने के साथ-साथ मदरसा भी संचालित किया जा रहा है।

दरअसल, ऑर्गनाइजर ने हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान इन अवैध घुसपैठियों से बात की थी। इसका वीडियो अब जारी किया गया है। ऑर्गेनाइजर की ओर से पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने यहाँ मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना और यहाँ पढ़ने वाले बच्चों से बात की। यहाँ पढ़ाने वाले यूनुस ने कहा कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं। हालाँकि, उनकी जुबानी ये संख्या है, लेकिन वास्तविक संख्या कितनी है, ये किसी को नहीं पता।

ये वही क्षेत्र है, जहाँ से हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरन कॉन्ग्रेस नेता मामन खान से रिकॉर्ड जीत हासिल की है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में उन्हें एकतरफा मत मिले। चुनाव प्रचार के दौरान मामन यहाँ के हिंदुओं को धमकाते हुए कहा था कि जिन लोगों ने मुस्लिमों के खिलाफ अन्याय किया है, उन्हें कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मेवात छोड़ना पड़ेगा। मामन का नाम 2023 के मेवात दंगों में आया था।

नूहं के नांगली गाँव में पत्रकार पहुँचे। यहाँ बाँस आदि से छप्पर के रूप में एक अस्थायी ढाँचा बनाया गया है, जिस पर लिखा है ‘मदरसा इस्लामिया दारूल उलूम इल्यासिया’। ये ढाँचा एक बड़े भूभाग पर बनाया गया है। इसमें नमाजी टोपी पहने हुए बहुत सारे बच्चे और किशोर दिखाई देते हैं। इसमें जियाउर रहमान नाम के एक व्यक्ति है, जो खुद को मौलवी बताता है।

रहमान कहता है कि वह नहूँ में रहता है कि मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए वह गाँव में आता है। रहमान खुद भी म्यामांर (बर्मा) का रहने वाला है। रहमान ने बताया कि साल 2016 से यह मदरसा चल रहा है। यहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे म्यामांर के ही है। मदरसे में ही बच्चों को खाना भी मिलता है। रात में रहते भी हैं। उसने बताया कि यहाँ कभी रेड नहीं पड़ी और ना ही किसी ने पूछा कि वे कहाँ के रहने वाले हैं।

रहमान ने बताया कि उसे भारत में किसी तरह का खतरा नहीं है, क्योंकि वह यहाँ मेहमान के हिसाब से रह रहा है। बर्मा से आया और व्यक्ति मोहम्मद यूनुस नाम का मिला। उसने बताया कि वह बच्चों को अरबी और अंग्रेजी पढ़ाता है। यूनुस ने बताया कि यहाँ रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी लगभग 400 है। यूनुस ने बताया कि भारत में आने के लिए उन सबों के पास कुछ भी नहीं है।

यूनुस ने कहा, “ना हमारे पास पासपोर्ट है, ना वीजा है। हम कैसे-कैसे करके यहाँ आ गए, यह बहुत मुश्किल काम है। हम ब्लैक में आ गए।” ब्लैक से संभवत: यहाँ पैसे देकर अवैध तरीके से घुसपैठ करने से संबंधित है। यूनुस ने बताया कि वह बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए भारत में घुसा। उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ लोग उसे मिले, जिन्होंने उसे बॉर्डर पार कराया और वहाँ से वह बंगाल में रहने लगा।

यूनुस ने बताया कि बॉर्डर पार कराने वालों ने कुछ लोगों से पैसा भी लिया और कुछ लोगों को बिना पैसे का ही बॉर्डर पार करा दिया। यूनुस ने बताया कि वह उसके साथ अधिकांश लोग म्यामांर में लड़ाई शुरू होने के बाद 2016 में भारत में आए। उसका कहना है कि कुछ लोग तो भारत में साल 2012 में ही आ गए थे और तभी वे यहाँ रह रहे हैं। यूनुस का दावा है कि उसके पास UN का रिफ्यूजी कार्ड है।

हालाँकि, जब पत्रकारों ने उससे रिफ्यूजी कार्ड दिखाने के लिए कहा तो वह बोला कि वह घर पर है और घर कहीं और है। यूनुस ने बताया कि इलाके में कुछ भी होता है तो उसे खबर कर दिया जाता है कि घर से बाहर नहीं निकलना है। यूनुस ने बताया कि म्यामांर से भागे हुए रोहिंग्या हैदाराबाद, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में रह रहे हैं।

इस मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से जब पूछा गया कि वे पढ़ाई करके क्या करेंगे तो 99 प्रतिशत ने कहा कि वे हाफिज बनेंगे और अल्लाह की सेवा करेंगे। इन बच्चों को जाकिर नाईक के बारे में अच्छे से पता है। लगभग 12 साल के एक बच्चे ने कहा कि जाकिर नाईक इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि वह लोगों को दीन (इस्लाम) के रास्ते पर लाता है। यानी लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण कराता है।

किशोर ने कहा कि जो अल्लाह को नहीं मानता है कि वह दोजख की आग में जलेगा। एक छोटे से बच्चे ने कलमा पढ़ कर सुनाया और कहा कि इसका मतलब है कि अल्लाह के सिवा और कोई भगवान नहीं है। यही बात एक किशोर ने भी कहा है। हालाँकि, बच्चे हर शब्द बोलने से पहले अपने मौलवी या हाफिज की तरफ देख रहे थे। जाहिर है कि वो काफी सोचकर बोल रहे थे।

दरअसल, इस मदरसे में पढ़ाने वाले यूनुस ने दावा किया कि रोहिंग्या मुस्लिम UN के रिफ्यूजी कार्ड पर भारत में आकर रह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वह कह रहा है कि बांग्लादेश सीमा के जरिए पैसे देकर कुछ लोगों की सहायता से भारत में घुसा था। इस तरह की विरोधाभासी बातें संदेह पैदा करती है। अगर यूनुस स्वयं स्वीकार करता है कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं तो वास्तविक संख्या कितनी होगी, इसकी सही जानकारी शायद ही किसी को होगी।

पंचायत के लिए डासना मंदिर जा रहे हिन्दुओं पर लाठीचार्ज; गाजियाबाद पुलिस का कड़ा पहरा: भाजपा MLA ने कमिश्नर को बताया तानाशाह

गाजियाबाद के डासना मंदिर में हिन्दू संगठनों ने रविवार (13 अक्टूबर 2024) को महापंचायत बुलाई गई थी। इस पंचायत का आयोजन महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद के समर्थन में किया गया था। भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर समेत कई साधु-संतों ने इस पंचायत को समर्थन दिया था। पुलिस ने इस ऐलान को देखते हुए निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। अब इस आयोजन को हर हाल में पूरा करने में जुटे हिन्दू संगठनों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और भीड़ को मंदिर तक पहुँचने से पहले ही रोक दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंचायत में शामिल होने के लिए गाजियाबाद की ही लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर अपने कई साथियों के साथ डासना मंदिर की तरफ जा रहे थे। रास्ते में उन्हें पुलिस ने रोका, तो उनके समर्थक बहस करने लगे। कुछ ही देर में यह बहस नोकझोक में बदल गई। विधायक के समर्थक पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को तोड़ कर मंदिर की तरफ जाना चाह रहे थे। हालाँकि पुलिस उनको किसी भी रूप में आगे नहीं बढ़ने दे रही थी।

लाठीचार्ज का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भीड़ का दबाव बढ़ता देख कर थोड़ी ही देर बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज के बाद भीड़ तितर-बितर हुई। लाठीचार्ज से नाराज हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हाइवे पर जाम लगाने की कोशिश की। इस बीच डासना मंदिर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर मंदिर के चारों तरफ से बैरिकेड लगा दिए गए।

भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को तानाशाह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों लोगों को रास्ते में ही रोक दिया गया। कई लोगों के नजरबंद होने का दावा करते हुए नन्द किशोर गुर्जर ने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के कपड़े तक फाड़े गए हैं। बकौल नंदकिशोर गुर्जर मंदिर पर हमला कर के कई लोगों की हत्याओं की साजिश रचने वालों के बजाय पुलिस सिर्फ हिन्दुओं पर जोर दिखा रही है।

नन्द किशोर गुर्जर ने कहा कि पंचायत का फैसला साफ है कि पहले तो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को बाहर किया जाए। दूसरी माँग के तौर पर उन्होंने डासना मंदिर पर हमला करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई माँगी। तीसरी और अंतिम माँग के तौर पर उन्होंने कहा कि मंदिरों पर हमला करने वालों, खाने-पीने की चीजों में थूक और मूत्र मिला कर जेहाद करने वालों का केस फ़ास्टट्रैक कोर्ट में चला कर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए। इस दौरान उन्होंने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर की गिरफ्तारी की भी माँग की।

मंदिर के मुख्य द्वारा पर तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा किसी संत को माँ की गाली देने का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने इस वीडियो की जाँच व आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कुछ लोग पुलिस की हिरासत में भी बताए जा रहे हैं।

कबाड़ का काम करने गया पुणे, अब मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या में धराया: कूरियर से शूटर्स को मिले हथियार-पैसे, लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे ने फेसबुक पोस्ट से ली जिम्मेदारी

मुंबई के एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। बांद्रा (ईस्ट) में 12 अक्टूबर को हुई इस हत्या के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों की पहचान कर ली है, और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हत्या को अंजाम देने वाले अपराधियों का संबंध कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से है, जो पहले भी कई गंभीर अपराधों में शामिल रहा है। बिश्नोई गैंग से जुड़े व्यक्ति ने फेसबुक पर हत्याओं की जिम्मेदारी ली है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में जिन तीन आरोपितों की पहचान हुई है, उनमें से एक हरियाणा का रहने वाला गुरमैल सिंह है। तो बाकी के दोनों उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले धर्मराज कश्यप और शिवा गौतम। शिवा गौतम अभी फरार है।

दोनों अपराधी पुणे में कबाड़ का काम करते थे। इन अपराधियों का संबंध सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से बताया जा रहा है, जिन्होंने 50 हजार रुपए लेकर सिद्दीकी की हत्या की। बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी हाई-प्रोफाइल हत्याओं और अंडरवर्ल्ड गतिविधियों में आ चुका है। खासकर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की हत्या की साजिश में इस गैंग का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन

पुलिस की जाँच में खुलासा हुआ है कि बाबा सिद्दीकी की हत्या का पूरा षड्यंत्र लॉरेंस बिश्नोई गैंग के इशारे पर रचा गया था। आरोपितों ने सिद्दीकी की हत्या से पहले इस गिरोह से जुड़े कई लोगों से संपर्क किया था और हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए बिश्नोई गैंग से ही हथियार और अन्य संसाधन प्राप्त किए। बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी मुंबई में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों के कारण चर्चाओं में रहा है, और इस हत्या से यह साफ हो गया है कि यह गैंग राजनीतिक हत्याओं में भी लिप्त हो सकता है।

आरोपितों ने दो महीने तक सिद्दीकी की दिनचर्या पर नजर रखी और उनकी हत्या के लिए सही समय और स्थान का चुनाव किया। उन्होंने बांद्रा में उनके घर के आसपास बार-बार आकर उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी। 12 अक्टूबर की रात, जब सिद्दीकी अपने घर के पास टहल रहे थे, तब आरोपियों ने हमला किया। खास बात यह है कि हमले को दीपावली के पटाखों की आवाज के बीच अंजाम दिया गया, ताकि गोलियों की आवाज सुनाई न दे।

धर्मराज और शिवा ने हत्या के लिए आवश्यक हथियारों को कुछ दिन पहले ही हासिल कर लिया था। इन हथियारों का इंतजाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने किया था। आरोपितों को इस हत्या के लिए पहले ही एडवांस में मोटी रकम दी गई थी, ताकि वे इसे सफलतापूर्वक अंजाम दे सकें। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पिस्तौल के साथ-साथ बमों का भी इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि वे हमले को बड़ी आसानी से अंजाम दे सकें।

गोलियों की बरसात में हुई हत्या

हमले के दौरान आरोपितों ने बाबा सिद्दीकी पर 6 राउंड गोलियाँ चलाईं, जिनमें से तीन गोलियाँ सीधे सिद्दीकी को लगीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पटाखों की आवाज में गोलियों की आवाज दब गई, जिसके कारण आसपास के लोग तुरंत कुछ समझ नहीं पाए।

हत्या के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपितों की पहचान की। यूपी पुलिस की मदद से धर्मराज कश्यप और शिवा गौतम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उन्होंने हत्या की पूरी योजना को कबूल किया और बताया कि यह पूरी साजिश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के इशारे पर रची गई थी। इस बारे में बिश्नोई गैंग से जुड़ा एक फेसबुक पोस्ट भी सामने आया है। हालाँकि पोस्ट जिसके नाम से किया गया, वो फरार बताया जा रहा है। इस पोस्ट में काफी कुछ कहा गया है।

फेसबुक पोस्ट ‘शुबू लोंकर महाराष्ट्र’ नाम के अकाउंट से किया गया है। बिश्नोई गैंग ने फेसबुक पोस्ट में कहा, “सलमान खान हम ये जंग चाहते नहीं थे, पर तुमने हमारे भाई (लॉरेंस बिश्नोई) का नुकसान करवाया। आज जो बाबा सिद्दीकी की शराफत के पुल बाँधे जा रहे हैं, वो एक टाइम में दाऊद के साथ मकोका एक्ट में था। इसके मरने का कारण दाऊद को बॉलीवुड, राजनीती, प्रॉपर्टी डीलिंग से जोड़ना था।” इनके अलावा अनुज थापन का नाम भी पोस्ट में है, जिसने सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग की थी, और पुलिस कस्टडी में उसकी मौत हो गई थी। गैंग का कहना है कि यह मौत उसका बदला है।

फोटो साभार:आजतक

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आ चुका है। सलमान खान की हत्या की साजिश से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े कनेक्शन तक, इस गैंग ने मुंबई के आपराधिक जगत में एक गहरी पैठ बना ली है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन लोग शामिल थे, और क्या इसके पीछे कोई और बड़ा कारण था। बाबा सिद्दीकी की हत्या इस बात की तसदीक करती है कि यह गैंग अब राजनीतिक हत्याओं में भी शामिल हो गया है।

जिसे दिग्विजय सिंह ने कहा ‘शांति का मसीहा’, उसे ‘घटिया-घिनौना-बीमार’ कह रहीं सुप्रिया श्रीनेत: जाकिर नाइक के पुराने फैन रहे हैं कॉन्ग्रेसी

शनिवार (12 अक्टूबर) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस्लामिक कट्टरपंथी और नफरत फैलाने वाले उपदेशक ज़ाकिर नाइक की महिलाओं पर की गई यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणी को लेकर कड़ी आलोचना की।

सुप्रिया ने ट्वीट किया, “इतनी घटिया घिनौनी सोच, बीमार असल में यह खुद हैं।” उन्होंने ज़ाकिर नाइक की उस ताजा टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें नाइक ने महिलाओं, खासकर एंकरों को लेकर अपमानजनक बातें कही थीं।

यह जानना जरूरी है कि कॉन्ग्रेस में शामिल होने से पहले सुप्रिया श्रीनेत ने 17 साल तक बतौर पत्रकार काम किया था, और उन्होंने ईटी नाउ पर न्यूज एंकर के तौर पर भी सेवाएँ दी थीं।

सुप्रिया श्रीनेत के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हाल ही में पाकिस्तान में एक इंटरव्यू के दौरान ज़ाकिर नाइक ने महिलाओं को उन प्रोफेशन्स से दूर रहने की सलाह दी थी, जहां उन्हें कैमरे के सामने आना पड़ता है। नाइक का कहना था कि ऐसा करने से महिलाएँ पुरुषों की वासना का शिकार बनती हैं। इस्लामिक प्रचारक ने कहा, “अगर कोई मर्द महिला एंकर को देख कर वासना महसूस नहीं करता, तो वह मेडिकल रूप से ठीक नहीं है।”

ज़ाकिर नाइक ने यह भी कहा, “अगर आप 20 मिनट तक किसी लड़की को देखकर वासना महसूस नहीं करते, तो आप स्वस्थ नहीं हैं,” और इस दौरान उन्होंने क़ुरान की आयतों का हवाला दिया।

हाल ही में ज़ाकिर नाइक को पाकिस्तान में तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी, जब उसने स्वतंत्र और अविवाहित महिलाओं को ‘बाज़ारू औरत’ कहा था।

सुप्रिया श्रीनेत की ज़ाकिर नाइक पर की गई आलोचना को कॉन्ग्रेस की आधिकारिक राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, भले ही वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। यह ज्यादा से ज्यादा उनकी व्यक्तिगत राय है, क्योंकि नाइक ने उनके पुराने प्रोफेशन (धंधे) को खास तौर पर निशाना बनाया था।

किसी भी अन्य कॉन्ग्रेस नेता ने ज़ाकिर नाइक के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है, भले ही उसकी यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणियाँ जगजाहिर हों। असल में, पार्टी ने कभी औपचारिक रूप से इस नफरत फैलाने वाले इस्लामी कट्टरपंथी की आलोचना नहीं की।

इसके उलट, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ज़ाकिर नाइक को ‘शांति का मसीहा’ कहकर उसकी तारीफ की थी।

उन्होंने कहा था, “अस्सलाम वालेकुम। मैंने डॉ. ज़ाकिर नाइक के बारे में बहुत सुना था। अंततः मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। मैं खुश हूँ कि वह दुनिया भर में शांति का संदेश फैला रहे हैं।”

दिग्विजय सिंह ने 2012 में अपने भाषण में कहा था, “डॉ. ज़ाकिर नाइक ने सभी धर्मों की किताबें पढ़ी हैं। अब यह जरूरी है कि आपका शांति का संदेश भारत के हर कोने में पहुँचे।”

कॉन्ग्रेस, ज़ाकिर नाइक और एक छिपा हुआ रिश्ता

हालाँकि उस समय ज़ाकिर नाइक को भगोड़ा घोषित नहीं किया गया था, लेकिन उसके हिंदू धर्म पर हमला करने वाले और कट्टर इस्लामिक भाषण ऑनलाइन उपलब्ध थे।

इसके बावजूद, मुस्लिम तुष्टिकरण के लंबे इतिहास वाली कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह को ज़ाकिर नाइक की तारीफ करने से कोई हिचक नहीं हुई।

यह जानकर कई लोग चौंक सकते हैं कि ज़ाकिर नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) के बीच गहरे संबंध हैं। IRF ने दो बार RGCT को 50 लाख और 25 लाख रुपये का दान दिया है। और RGCT के ट्रस्टी कोई और नहीं बल्कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी हैं।