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कॉन्ग्रेस विधायक को अपने साथ ले गई ED: जनजातीय समाज के फंड में घोटाले का मामला, महर्षि वाल्मीकि निगम के कर्मचारी की आत्महत्या से खुला मामला

बी नागेन्द्र ने जून माह में सिद्दारमैया सरकार से मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था। वह सिद्दारमैया सरकार में अनुसूचित जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने यह इस्तीफ़ा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति कल्याण विकास निगम (KMVSTDC) में करोड़ों की गड़बड़ी में नाम सामने आने के बाद दिया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (12 जुलाई, 2024) को कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक बी नागेन्द्र को हिरासत में लिया है। उन्हें उनके घर पर दो दिन तक चली छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया है। नागेन्द्र को कर्नाटक के वाल्मीकि निगम में करोड़ों के अवैध ट्रांसफर घोटाला मामले में हिरासत में लिया गया है।

ED इससे पहले 10 जुलाई, 2024 को उनके घर पहुँची थी और छापेमारी कर रही थी। दो दिन चली इस छापेमारी के बाद कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार के पूर्व मंत्री नागेन्द्र को ED अपने साथ ले गई। ED ने कर्नाटक में इस दौरान और जगह छापेमारी भी की। ED ने एक और कॉन्ग्रेस विधायक बसानागौड़ा दद्दल के घर पर भी तलाशी ली।

बी नागेन्द्र ने जून माह में सिद्दारमैया सरकार से मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था। वह सिद्दारमैया सरकार में अनुसूचित जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने यह इस्तीफ़ा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति कल्याण विकास निगम (KMVSTDC) में करोड़ों की गड़बड़ी में नाम सामने आने के बाद दिया था।

बी नागेन्द्र जी जिस महर्षि वाल्मीकि फंड घोटाले में हिरासत में लिए गए हैं, उसकी जाँच CBI, ED और राज्य सरकार की SIT कर रही है। यह पूरा मामला लगभग ₹88 करोड़ सरकारी धन के दुरुपयोग और उसके अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने से जुड़ा हुआ है।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई है।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। भाजपा ने इस मामले में बी नागेन्द्र का इस्तीफा मांगा था। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले की जाँच CBI को हस्तांतरित करने की माँग भी हुई थी। अब इस घोटाले में बी नागेन्द्र की भूमिका की जाँच हो रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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