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पीस कमेटी की बैठक में गए मुस्लिम बुजुर्ग, पथराव के लिए आए जवान: रिपोर्ट में दावा- डासना मंदिर पर हमले की रची गई थी साजिश, बीजेपी MLA बोले- यह हिंदू आस्था पर प्रहार

4 अक्टूबर 2024 की रात इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने गाजियाबाद के डासना मंदिर को घेर लिया था। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट में इसके पीछे बड़ी साजिश का दावा किया गया है। बताया गया है कि मुस्लिम बुजुर्गों को पीस कमेटी की बैठक में भेजा गया। दूसरी ओर मुस्लिम जवानों को डासना मंदिर की तरफ भेज दिया गया।

मंदिर पर हमले के पीछे साजिश की आशंका लोनी से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने भी जताई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने इसे हिंदू आस्था पर प्रहार बताया है।

नन्द किशोर गुर्जर ने सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को लिखे पत्र में कहा कि 4 अक्टूबर 2024 को जुमे के दिन मुस्लिम भीड़ ने मंदिर पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे देश में हिन्दू समाज के भीतर आक्रोश फैल गया है। उन्होंने इसे हिन्दुओं के नरसंहार की तैयारी करार दिया और आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे बाहरी तत्वों की मिलीभगत है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों, खासकर कॉन्ग्रेस, सपा और AIMIM से जुड़े स्लीपर सेल ने इस हिंसा को उकसाया।

जुमे की दिन हुई इस घटना को हिन्दुओं के नरसंहार की तैयारी बताया है। इस मंदिर पर पहले भी हमले की कोशिश हो चुकी है। आगे उनका दावा है कि घटना के बाद पूरे देश का हिन्दू समाज आक्रोशित है। हिंसा में बाहरी लोगों की मिलीभगत बताते हुए भाजपा MLA ने इसके पीछे विपक्षी पार्टियों की साजिश बताया है। उनका दावा है कि कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी और ओवैसी की AIMIM पार्टी से जुड़े स्लीपर सेल ने इस हिंसा को हवा दी है।

अपने पत्र में उन्होंने सीएम योगी को डासना मंदिर का पौराणिक महत्व बताते हुए कहा कि यहाँ भगवान परशुराम और पांडवों ने तपस्या की थी। यहाँ 4 अक्टूबर को मुस्लिम भीड़ जमा हो कर आपत्तिजनक नारे लगाती यही और पथराव करते हुए हमले की कोशिश करती है। बीजेपी विधायक के मुताबिक पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ मंदिर और उसमें मौजूद मूर्तियों को खंडित होने से बचाया बल्कि अंदर मौजूद कई श्रद्धालुओं के जीवन की भी रक्षा की।

भाजपा विधायक ने पत्र में आगे लिखा कि डासना मंदिर पर हमले के बाद जिन लाखों हिन्दुओं की आस्था पर चोट पहुँची है वो महापंचायत की बात कह रहे हैं। अंत में उन्होंने हमलावरों को चिन्हित करते हुए उनकी सम्पत्तियों को कुर्क करने और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि “सर तन से जुदा” के नारे लगाने वाले लोग प्रदेश में दंगे भड़काने की साजिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी दलों पर भारत में तालिबानी शासन लागू करने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

जिस BJP को पानी पी-पीकर कोसती थी संचिता राय, उसकी ही केंद्र सरकार में नौकरी लगाने के नाम पर ठगे ₹2 करोड़: केरल की स्कूल में टीचर है वामपंथी छात्र संगठन की नेताइन

केरल में एक वामपंथी युवा नेत्री ने नौकरी के नाम पर ₹2 करोड़ की ठगी कर ली। उसने लोगों को केंद्र सरकार में नौकरी दिलाने के नाम पर यह ठगी की। भाजपा-RSS के विरुद्ध बयान देकर ख्याति पाई वामपंथी नेता ने इसी कड़ी में एक महिला को भी ठगा। पीड़िता ने अब वामपंथी नेत्री के विरुद्ध FIR दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड में DYFI (CPM का छात्र संगठन) की एक छात्र नेत्री संचिता राय ने यह ठगी की। शिक्षक के तौर पार काम करने वाली संचिता ने एक निशमिता शेट्टी नाम की महिला से ₹15 लाख लिए और केंद्र सरकार के CPCRI में नौकरी लगवाने का वादा किया।

निश्मिता ने अपना सोना गिरवीं रख और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर संचिता को दिया था। निश्मिता ने गूगल पे और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से उसे मई, 2024 से अगस्त, 2024 के बीच ₹15.05 लाख दिए। हालाँकि, निश्मिता को इसके बाद कोई नौकरी नहीं दी गई। जब निश्मिता ने अपना पैसा वापस माँगा तो इससे भी संचिता ने इनकार कर दिया।

पीड़िता निश्मिता ने बताया है कि वह एक अन्य महिला के माध्यम से संचिता के सम्पर्क में आई थी। इसके बाद संचिता ने उससे वादा किया वह उन्हें भी नौकरी दिला देगी। हालाँकि, यह वादा झूठा निकला। निश्मिता ने बताया कि संचिता काफी अमीर है।

निश्मिता ने इसके बाद कासरगोड पुलिस के पास इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई। कासरगोड पुलिस ने संचिता के विरुद्ध ठगी समेत अन्य कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया है कि संचिता ने कुल ₹2 करोड़ की ठगी कई लोगों से नौकरी के नाम पर की है।

संचिता ने एक और व्यक्ति को शिक्षक बनाने के नाम पर ठगी की है। पुलिस ने खुलासा किया है कि संचिता ने इस ₹2 करोड़ की ठगी में से ₹72 लाख कर्नाटक में किसी को ट्रांसफर भी किए हैं। संचिता और उसके पिता को CPM के कार्यक्रमों में बोलने के लिए बुलाया जाता है।

संचिता वर्तमान में कासरगोड के ही एक स्कूल में शिक्षक है। DYFI ने कहा है कि संचिता को 10 दिन पहले जिले की कमिटी से निकाल दिया था क्योंकि वह कोझिकोड चली गई हैं। DYFI ने कहा है कि उसे इन शिकायतों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।

मुस्लिम लड़की ने मंत्री से मिलाया हाथ, मौलवी ने बताया- हराम, ज़िना, शरीयत का उल्लंघन: केरल हाई कोर्ट ने फटकारा, कहा- अपनी मजहबी मान्यता दूसरों पर न थोपे

केरल हाई कोर्ट ने मौलवी अब्दुल नौशाद को राहत नहीं दी। उसके खिलाफ केरल पुलिस की कार्यवाही पर से रोक लगाने से इनकार कर दिया। मौलवी अब्दुल नौशाद ने मुस्लिम लड़की के एक मंत्री से हाथ मिलाने पर उसे हराम, ज़िना (व्याभिचार) और शरियत का उल्लंघन बताया था। इस मामले में लड़की के परिजनों ने अब्दुल नौशाद पर केस किया था और अब केरल हाई कोर्ट ने नौशाद को राहत देने से इनकार कर दिया।

केरल हाई कोर्ट ने मौलवी नौशाद को फटकारते हुए कहा है कि वो अपनी मजहबी मान्यताएँ दूसरों पर नहीं थोप सकता है। गौरतलब है कि ये घटना 2016 में केरल के मार्कज़ लॉ कॉलेज में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान हुई थी। इस सत्र में कानून की छात्रा लड़की पुरस्कार लेते समय मंच पर जाकर उस समय केरल के वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस इसाक से हाथ मिलाया। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अब्दुल नौशाद ने हाथ मिलाने की इस घटना को इस्लामी कानून का उल्लंघन बताया। नौशाद ने दावा किया कि इस्लाम में गैर-महरम (अजनबी) मर्द और औरत के बीच शारीरिक संपर्क हराम माना जाता है और यह शरियत कानून के खिलाफ है। नौशाद ने पोस्ट के जरिए लड़की पर ज़िना (व्याभिचार) के आरोप लगाए थे।

इस मामले में अब्दुल नौशाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 119 (किसी महिला की गरिमा को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुँचाने) के तहत मामला दर्ज किया गया था। नौशाद ने कोर्ट से यह अनुरोध किया कि उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाए, लेकिन कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मजहबी विश्वास व्यक्तिगत होते हैं और उन्हें दूसरों पर थोपने का अधिकार किसी को नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा, “मजहबी मान्यताएँ व्यक्तिगत होती हैं। किसी व्यक्ति पर मजहबी विश्वासों को थोपने की कोई जरूरत नहीं, खासकर इस्लाम में। हर नागरिक को यह स्वतंत्रता है कि वह अपने मजहबी विश्वासों का पालन करे या न करे। भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 कहता है कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए सभी व्यक्तियों को अपने धर्म की स्वतंत्रता है और वे अपनी मजहबी मान्यताओं को मानने और उनका प्रचार करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी मजहबी मान्यता को किसी अन्य व्यक्ति पर थोपने की कोशिश नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा, “धर्म का प्रचार करना यह नहीं है कि मजहबी प्रथाओं को दूसरों पर थोपा जाए। भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 किसी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं देते कि वह अपनी मजहबी मान्यता को दूसरे पर थोपे।”

कोर्ट ने कुरान के कुछ आयतों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का बहुत महत्व है। कोर्ट ने कहा, “इस्लाम में गैर-महरम पुरुष और महिला के बीच शारीरिक संपर्क जैसे हाथ मिलाना हराम माना जा सकता है, लेकिन यह व्यक्तिगत आस्था और चुनाव पर निर्भर है। कुरान की सूरह अल-बक़रह (2:256) में कहा गया है, ‘धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं है’। इसके अलावा, सूरह अल-काफिरून (109:6) में भी कहा गया है, ‘तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और मेरे लिए मेरा धर्म’।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज और संविधान, दोनों का यह कर्तव्य है कि वे इस प्रकार के मामलों में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें। कोर्ट ने कहा, “एक बहादुर मुस्लिम लड़की ने अपने मजहबी विश्वास की स्वतंत्रता का दावा किया है। ऐसी स्थिति में हमारा संविधान उसकी रक्षा करेगा। इसके अलावा, यह समाज का भी दायित्व है कि वह उसका समर्थन करे।”

नौशाद ने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लड़की पर शरियत कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था, जिससे लड़की और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची। लड़की ने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नौशाद पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने कहा कि अब्दुल नौशाद ने न तो अपने बयानों का खंडन किया और न ही इस मामले में कोई ठोस तर्क पेश किया। इसके चलते कोर्ट ने नौशाद की याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत को इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “कोई भी मजहबी विश्वास संविधान से ऊपर नहीं है। संविधान सर्वोच्च है।” इस टिप्पणी ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार किसी भी मजहबी कानून या मान्यता से ऊपर हैं। कोर्ट ने कहा कि लड़की को अपनी मजहबी स्वतंत्रता का अधिकार है और कोई भी उस पर मजहबी दबाव नहीं डाल सकता। ऐसे में, केरल हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि नौशाद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी, और मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।

9 नवंबर को उत्तराखंड का स्थापना दिवस, इसी दिन UCC लागू करने का ऐलान कर सकती है BJP सरकार: नियम-कानूनों का 500 पन्नों का मसौदा तैयार

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) जल्द ही लागू हो सकती है। राज्य के स्थापना दिवस (9 नवम्बर) को ही UCC लागू करने पर काम चल रहा है। UCC लागू करने के लिए बनाई गई कमिटी की भी सभी बैठकें पूरी हो चुकी हैं और इस पर अंतिम मुहर भी लग गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, UCC लागू करने और इसके नियम बनाने के लिए बनाए गए पैनल ने सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को इसके अंतिम प्रारूप पर मुहर लगा दी। कमिटी द्वारा दिया गया यह अंतिम प्रारूप अब प्रिंट रूप में लाया जाएगा। कमिटी के मुखिया का कहना है कि इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी जाएगी।

UCC लागू करने की तैयारियों को पूरा करने के बाद इसे जल्द लागू किया जा सकता है। CM पुष्कर सिंह धामी पहले भी कह चुके हैं कि इसे 9 नवम्बर, 2024 को लागू करने का विचार है क्योंकि इस दिन राज्य का 25वाँ स्थापना दिवस होगा। उत्तराखंड की स्थापना 9 नवम्बर, 2000 को हुई थी। इसे उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिलों को अलग करके बनाया गया था।

कमिटी के मुखिया शत्रुघन सिंह ने बताया कि कई दौर की बैठकों के बाद उन्होंने UCC के नियम-कानून को अंतिम रूप दे दिया है। इन नियम-कानून को बनाने के लिए लगभग 130 बैठकें हुई हैं। CM धामी को इन नियम-क़ानून वाली लगभग 500 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

कमिटी ने बताया है कि UCC लागू होने के बाद 6 महीने का समय राज्य में लोगों को अपनी शादी पंजीकृत करवाने के लिए दिया जाएगा। यह सुविधा CSC पर भी मौजूद होगी। इसके अलावा राज्य में वसीयत जैसी सुविधाएँ एप के जरिए दी जाएँगी। UCC के भीतर बहुविवाह पर भी रोक लगाई गई है और लिव इन रिलेशनशिप के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

कमिटी के एक सदस्य ने बताया है कि जब राज्य में शादियों और लिव इन जैसे रजिस्ट्रेशन हो जाएँगे तो जनसंख्या को लेकर एक आँकड़ा भी सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे नीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी और पता भी चलेगा कि किसे इन नीतियों का लाभ दिया जाए।

UCC को फरवरी,2024 में विधानसभा में पेश किया गया था और यह बहुमत से पास हो गया था। इसके बाद मार्च, 2024 में इसको राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। तब से इसे लागू करने के नियमों और कानूनों पर काम चल रहा था। अब यह अंतिम रूप पाने के बाद CM धामी के पास जाएगा और सरकार के फैसले के बाद राज्य में लागू होगा।

यदि 9 नवम्बर, 2024 को उत्तराखंड में UCC लागू हो जाता है तो यह ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा। भाजपा शासित अन्य राज्य भी UCC लाने पर विचार कर रहे हैं।

इस्लाम में नहीं होता बच्चों का यौन शोषण, सवाल करना ही गलत: पाकिस्तान में पश्तून महिला पर भड़का जाकिर नाइक; पहले अनाथ लड़कियों को ‘बेटी’ बोलने पर हुआ था नाराज

इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का पिछले दिनों पाकिस्तान में एक कार्यक्रम हुआ था। अब उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में जाकिर से एक खैबर पख्तूनख्वा की लड़की पीडोफिलिया को लेकर सवाल कर रही है। हालाँकि, नाइक उस लड़की का जवाब देने की बजाय उस पर भड़कते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो अब सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है।

वीडियो में पश्तून लड़की को अपना परिचय देने के बाद कहते सुना जा सकता है कि वो जहाँ पर रहती है वो बहुत इस्लामी सोसायटी है। औरतें भी इस्लामी नियम के हिसाब से रहती हैं और पुरुष भी। हर कोई जुमे पर मजहबी उपदेश सुनता है। बावजूद इसके वहाँ नशीली दवाओं की लत, बच्चों का यौन शोषण और व्यभिचार बढ़ गया है। लड़की पूछती है कि सब जानते हुए आखिर कोई उलेमा इस मामले पर कुछ क्यों नहीं बोलता। हमारा समाज फिर भी क्यों नीचे जा रहा है।

जाकिर नाइक इस सवाल को सुनने के बाद पहले लड़की पर तंज कसता है कि उसका सवाल ही सही नहीं। उसमें तकरार है क्योंकि उसके मुताबिक जो समाज इस्लामिक है वहा बच्चों का यौन शोषण हो ही नहीं सका। जाकिर कहता है,

“आपने कहा कि आपका समाज इस्लामिक है और आपके समाज में यौन शोषण हैं तो फिर ये विरोधाभास है। इस्लामिक माहौल में कोई बाल यौन शोषण नहीं हो सकता। इस्लाम में पीडोफिलिया (बच्चों से यौन संबंध) को गलत माना गया है। इसलिए यदि कोई मुसलमान है तो फिर वह पीडोफिलिया नहीं कर सकता है और यदि ऐसा करता है तो वह मुसलमान नहीं हो सकता। आपके सवाल का या तो पहला भाग गलत है या दूसरा हिस्सा…।”

नाइक ने आगे कहा, “बताइए कि कौन सी इस्लामिक किताब बाल यौन शोषण समर्थन करती है। मैं तो यह कहूँगा कि आपको ये कहना चाहिए कि आपका समाज इसे इस्लामिक मानता है, तब मैं आपकी बात समझूँगा। अभी जो आप कह रही हैं, उसे मैं ठीक नहीं मानता हूँ। आप गलत हैं और माँग करता हूँ कि अपनी टिप्पणी के लिए माफी माँगे।” आगे जाकिर ने कहा कि कितनी अजीब बात हैं लोग इस्लाम पर तोहमत लगा देते हैं लेकिन माफी नहीं माँगते हैं।

अनाथ लड़कियों को बेटी कहने पर भड़का नाइक

गौरतलब है कि इससे पहले जाकिर नाइक को पाकिस्तान स्वीट होम नाम के एनजीओ की ओर से एक कार्यक्रम में बुलाया गया था। इस कार्यक्रम में उसे अनाथ लड़कियों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत करना था, लेकिन जैसे ही लड़कियों को मंच पर सम्मान के लिए बुलाया गया, वह वहाँ से नाराज होकर चला गया।

बाद में सामने आया कि लड़कियों को बेटी बुलाए जाने पर आपत्ति थी। ब्रिटेन में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इम्तियाज महमूद ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पाकिस्तान में जाकिर नाइक एक अनाथालय में था। जब छोटी अनाथ लड़कियों को शील्ड लेने के लिए मंच पर बुलाया गया तो वह शील्ड दिए बिना ही मंच से चला गया।”

फूट गया ‘इंडिया आउट’ का बुलबुला, भारतीयों से राष्ट्रपति मुइज्जू ने लगाई मालदीव आने की गुहार: PM मोदी ने ₹3300 करोड़ का दिया ‘सहारा’

भारत मालदीव को 400 मिलियन डॉलर (₹3300 करोड़) से अधिक की आर्थिक सहायता देगा। इस सहायता का ऐलान मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नई दिल्ली में पीएम मोदी के साथ बैठक के बाद हुआ है। भारत सैन्य सहयोग समेत अन्य कई क्षेत्रों में भी मालदीव को मदद करेगा।

नई दिल्ली में पीएम मोदी और मोहम्मद मुइज्जू की बैठक के बाद कई क्षेत्रों में सहयोग पर बात बनी है। भारत ने मालदीव को आर्थिक संकट से उबारने के लिए भारत ने उसे 400 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया है और साथ ही 3000 करोड़ से अधिक की क्रेडिट लाइन भी दी है। इससे मालदीव जब चाहे, भारत से खरीददारी कर सकता है।

भारत पुराने कर्जों की वसूली की तारीख भी आगे बढ़ाई गई है। मालदीव के लिए यह आर्थिक मदद काफी आवश्यक थी क्योंकि उसके पास विदेशी मुद्रा लगभग 45 दिनों के लिए बची थी। यदि भारत से सहायता ना मिलती तो मालदीव का हाल ही श्रीलंका जैसा हो सकता था।

भारत ने आर्थिक मदद के साथ ही मालदीव के सुरक्षाबलों (MNDF) को राडार जैसे उपकरण देने पर हामी भरी है। भारत मालदीव कोस्ट गार्ड के एक जहाज की मरम्मत भी करेगा। मालदीव के लोगों को कोई समस्या ना हो, इसलिए भारत अददु शहर के भीतर एक वाणिज्यिक दूतावास भी खोलेगा।

दोनों देश अब UPI भुगतान सिस्टम से भी जुड़ गए हैं। साथ ही Rupay कार्ड को भी मालदीव में लॉन्च कर दिया गया है। मालदीव से भारत ने मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चालू करने का फैसला लिया है। दोनों देशों ने आगे इन्फ्रा क्षेत्र में भी काम करने का फैसला लिया है।

मालदीव को कई क्षेत्रों में दी गई मदद से राष्ट्रपति मुइज्जू से काफी प्रसन्न हैं। उन्होंने पीएम मोदी और भारत के लोगों का इसके लिए धन्यवाद किया है। मुइज्जू ने कहा है कि भारत और मालदीव के रिश्ते सदियों पुराने हैं और यह बात इतिहास से साबित होता है।

मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि भारत, मालदीव के लिए महत्वपूर्ण पर्यटक स्रोत है और वह मालदीव में और अधिक भारतीय पर्यटकों को अपने देश में स्वागत करना चाहते हैं। गौरतलब है कि मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद रिश्तों में आई कड़वाहट के कारण भारतीयों का मालदीव जाना कम हो गया था।

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान मोहम्मद मुइज्जू ने पीएम मोदी को मालदीव आने का न्योता दिया है। मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव भारत का सच्चा दोस्त बना रहेगा और साथ ही इस इलाके में शांति और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। मुइज्जू के यह बदले सुर उनके भारत के प्रति रवैये में आए परिवर्तन को दिखा रहे हैं।

मोहम्मद मुइज्जू का राष्ट्रपति आवास में सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को आधिकारिक स्वागत किया गया था। चीन सरपरस्त माने जाने वाले मुइज्जू ने इस दौरान भारत की चिंताओं को कम करने का प्रयास भी किया है। मुइज्जू ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा है कि मालदीव ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत को खतरा पैदा होता हो।

मुइज्जू राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही भारत विरोधी रवैया अपनाते रहे हैं। उन्होंने मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया था और इसे राष्ट्रपति चुनाव का केंद्र बिंदु बना लिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मालदीव में राहत बचाव के काम में लगे भारतीय सैनिकों के भी वापस जाने को कहा था।

मोहम्मद मुइज्जू की कैबिनेट के मंत्रियों ने भारत प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अशोभनीय टिप्पणियाँ भी की थी। मालदीव सरकार से जुड़े लोगों ने भारत को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक कैम्पेन चलाया था। इसके बाद भारतीयों ने मालदीव ना जाने को लेकर अभियान चलाया था।

अब्बास, अल्ताफ, शाहरुख… यही हैं वे दरिंदे जिन्होंने दोस्त के साथ बैठी नाबालिग हिंदू लड़की का किया गैंगरेप: वडोदरा पुलिस ने एनकाउंटर के बाद 5 को दबोचा, SIT करेगी जाँच

गुजरात के वडोदरा में 16 वर्षीया नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने वाले 5 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी 5 आरोपित मुस्लिम समुदाय से हैं, जो कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं। इनके नाम मुन्ना अब्बास, अल्ताफ बंजारा और शाहरुख़ इस्माइल हैं। घटना के समय पीड़िता एक सड़क पर अपने दोस्त के साथ बैठी थी, तभी आरोपितों ने वहाँ पहुँच कर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना पर वडोदरा पुलिस कमिश्नर और आईजी रेंज ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि घटना में शामिल तीन मुख्य आरोपितों सहित उनके 2 अन्य दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी मुठभेड़ के बाद हुई है। इस पूरे मामले की जाँच के लिए SIT का भी गठन किया जाएगा।

DSP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गठित होने जा रही इस SIT की निगरानी पुलिस के उच्चाधिकारी करेंगे। पुलिस ने आगे बताया कि SIT को निर्देश दिए गए हैं कि वो जल्द से जल्द जाँच पूरी कर के चार्जशीट दाखिल करें। आरोपितों को अदालत से भी जल्द सजा दिलाने के प्रयास किए जाएँगे। बताते चलें कि मूलतः UP निवासी शाहरुख़ इस्माइल, मुन्ना अब्बास और अल्ताफ बंजारा फ़िलहाल वडोदरा के तंदलजा में रहते हैं। तंदलजा मुस्लिम बहुल इलाका कहा जाता है। यह जगह घटनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर है।

क्या थी पूरी घटना

यह घटना पिछले शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) की है। तब कक्षा 11 में पढ़ने वाली 16 वर्षीया हिन्दू लड़की अपने हमउम्र के दोस्त के साथ भायली-बील रोड पर बैठी थी। तभी उधर से शराब के नशे में धुत 5 लोग गुजरे। उन्होंने दोनों नाबालिगों को परेशान करना शुरू कर दिया। कुछ देर की छेड़खानी के बाद 2 आरोपित वहाँ से चले गए। 2 दोस्तों के जाने के बावजूद मुन्ना अब्बास, अल्ताफ बंजारा और शाहरुख इस्माइल वहीं रुके रहे और छेड़खानी जारी रखी।

कुछ ही देर बाद तीनों में से एक ने पीड़िता के नाबालिग दोस्त को पकड़ लिया और 2 ने नाबालिग से बलात्कार किया। इस वारदात के बाद दोनों पीड़ित बच्चे अपने घर पहुँचे और गैंगरेप की जानकारी परिजनों को दो। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने फ़ौरन घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच की। केस दर्ज कर के आरोपितों को चिन्हित किया गया और उनकी गिरफ्तारी हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

‘मेहदी फाउंडेशन’ से जुड़ा है UP का परवेज अहमद, पाकिस्तानी मुस्लिमों को ‘हिंदू पहचान’ देकर भारत में बसाता है: खुद की बीवी भी सीमा पार की

बीते दिनों बेंगलुरु से एक पाकिस्तान परिवार गिरफ्तार हुआ था जो यहाँ हिंदू पहचान के साथ रह रहा था। अब पुलिस ने उसी परिवार की मदद करने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान परवेज अहमद के तौर पर हुई है। जाँच अधिकारी परवेज की पड़ताल कर रहे हैं।

शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि परवेज ने भारत में कम से कम पाँच पाकिस्तानी परिवारों को बसाया है जो हिंदू नाम की आड़ लेकर भारत में रह रहे हैं। इनमें से 2 को तो पिछले हफ्ते ही बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है। वहीं बाकी जिनकी मदद परवेज ने की वो मुंबई और दिल्ली में बसे हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार उसने 22 लोगो की भारत में अवैध रूप से घुसने में मदद की।

अब पुलिस ये छानबीन कर रही है कि क्या इन परिवारों का कोई आपराधिक बैकग्राउंड है या नहीं। अगर नहीं, तो फिर उन्हें वापस उनके मुल्क भेजने की प्रक्रिया की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर को जिगानी पुलिस ने रफीक सिद्दीकी के पाकिस्तानी परिवार को गिरफ्तार किया था जो 2018 से बेंगलुरु में रह रहे थे। इन्होंने अपनी पहचान छिपाकर यहाँ ‘शर्मा’ नाम से पहचान दिखाई हुई थी। जाँच में सामने आया था कि इनमें से रफीक सिद्दीकी मेहदी फाउंडेशन का सदस्य था। उसी मेहदी फाउडेशन से परवेज भी जुड़ा था जिसने उसकी मदद की।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि परवेज का जुड़ाव इस संस्था से 2007 में हुआ था जब इसके 63 सदस्य भारत आए और नई दिल्ली में अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों में एक महिला भी थी जिसने बाद में परवेज से शादी कर ली। शादी के बाद महिला भारत में ही रही जबकि बाकी लोगों को शर्णार्थी की पहचान मिली और वो यूरोपीय देशों में बसाए गए।

अब परवेज की बीवी दिल्ली में रहती है और दिल्ली विशेष शाखा को रिपोर्ट करती है। इस क्रम में परवेज का आना जाना दिल्ली होता है। उसके मुताबिक उसने भारत में उन्हीं लोगों को बसवाया जो मजबूर हो गए थे और उनके पास कोई विकल्प नहीं था।

अतीक हो या मुख्तार, इंजीनियर रशीद हो या शरजील इमाम… क्यों हर बार छलक जाता है पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ‘उम्माह’?

एक पत्रकार हैं राजदीप सरदेसाई। उनकी पहचान है कि वह इंडिया टुडे टीवी चैनल के सलाहकार संपादक और एंकर हैं। उनकी दूसरी पहचान है कि वह तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के पति हैं। किताबें लिख चुके हैं, खुद को क्रिकेट का बड़ा फैन बताते हैं। इन सबके इतर भी राजदीप सरदेसाई की एक पहचान है। यह पहचान है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जो देश या समाज के लिए खतरनाक है, राजदीप सरदेसाई का परम मित्र होता है। उनके दोस्तों की फेहरिस्त में अतीक अहमद, इंजीनियर रशीद और उमर खालिद जैसे लोग शामिल हैं।

वह इस मित्रता का गाना लाइव टीवी पर गाते हैं। समाज या देश के लिए खतरा बनने वाले किसी भी ऐसे आदमी से मित्रता रखने का आधार उसका राजदीप से गर्मजोशी से मिलना या फिर खाना खिलाना होता है। खाना खिलने वाला कितना बड़ा अपराधी या देश विरोधी और उसके विषय में असल तथ्य क्या हैं, इस बात से राजदीप को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि तथ्यों का फर्क यदि राजदीप सरदेसाई पर पड़ता तो हाल ही में वह उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर आधी-अधूरी जानकारी साझा करके देश की न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न नहीं खड़ा करते।

राजदीप ने सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को एक ट्वीट किया। यह ट्वीट लाइवलॉ वेबसाइट की एक खबर पर आधारित था जो बताती थी कि शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका की सुनवाई स्थगित हो गई है। लाइवलॉ की रिपोर्ट में भी संपादकीय लापरवाही थी। हालाँकि, यह जान बूझ कर की गई थी, ऐसा लगता है। दरअसल, इन दोनों इस्लामी कट्टरपंथियों की जमानत याचिका पर सुनवाई इसलिए टली क्योंकि जस्टिस नवीन चावला नहीं बैठे। यह जानकारी लाइवलॉ ने दी।

लेकिन राजदीप ने जस्टिस नवीन चावला के उन ‘व्यक्तिगत कारणों’ को नहीं बताया, जिसके कारण अदालत नहीं बैठी। यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि जिनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टलने से राजदीप सरदेसाई इतने आहत हुए हैं उन्हीं लोगों को दिल्ली की एक अन्य अदालत ने दिल्ली दंगों की सुनवाई में अनावश्यक/जानबूझकर देरी के लिए चेताया।

दिल्ली की एक अदालत ने 4 अक्टूबर को शरजील इमाम, उमर खालिद और बाकी आरोपितों के दिल्ली दंगा मामले में बार-बार स्थगन माँगने को लेकर खूब खरी खोटी सुनाई। कोर्ट ने उन्हें चेताया कि अगर ये कारनामे आगे फिर हुए तो इसके परिणाम इनको भुगतने होंगे। ऑपइंडिया ने पाया कि उमर खालिद के मामले में 14 बार कोर्ट की कार्रवाई स्थगित हुई। इसमें से 7 बार खुद ही उमर खालिद ने ऐसा करवाया।

राजदीप सरदेसाई के एजेंडे में यह बातें फिट नहीं बैठती थीं। उन्होंने यह किनारे लगा दी। राजदीप को किसी के मुस्लिम होने पर इतना प्रेम उमड़ता है कि वह यह तक नहीं देखते कि वह व्यक्ति भारत विरोधी बातें करता आया है। उन्होंने हाल ही में इंडिया टुडे पर लाइव शो के दौरान बताया कि सांसद इंजीनियर रशीद उनके दोस्त हैं। यह वही इंजीनियर रशीद हैं जिन पर आतंकी फंडिंग का मुकदमा चल रहा है और वह जमानत पर बाहर हैं।

राजदीप सरदेसाई से जब पूछा गया कि आखिर ऐसा आदमी उनका दोस्त कैसे हो सकता है तो उन्होंने जवाब दिया कि इंजीनियर रशीद उनसे गर्मजोशी से मिले थे इसलिए दोस्त हैं। इस पर उनके साथी एंकर राहुल कँवल ने कहा कि अगर कोई भी उनसे कहा कि जो भी उन्हें खिला-पिला देगा वह दोस्त हो जाएगा क्या। हालाँकि, यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मुस्लिम नाम सुनते ही राजदीप सरदेसाई ने समाज और देश के लिए खतरा बनने वाले व्यक्ति की प्रशंसा करने लगे हों।

इससे पहले राजदीप सरदेसाई उतर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी को लेकर भी कसीदे पढ़ चुके हैं। उन्होंने एक लाइव शो के दौरान बताया था कि अतीक अहमद ने एक बार उन्हें काफी बढ़िया खाना खिलाया था और स्वागत सत्कार किया था। यही बात उन्होंने मुख़्तार को लेकर कही थी।

इस बात को उन्होंने उस दौरान बताया था जब अतीक के बेटों ने बीच बाजार प्रयागराज में एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। यानी कुल मिलाकर बात यह है कि अगर कोई गर्मजोशी से राजदीप मिल ले तो वह उसके दोस्त होते हैं बशर्ते मिलने वाला मुस्लिम हो। भले ही उस गर्मजोशी वाले आदमी ने किसी की हत्या की हो या फिर उसने कोई देश विरोधी काम कर रखा हो।

मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।