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बांग्लादेश में जेशोरेश्वरी शक्तिपीठ से माँ काली का मुकुट चोरी, पीएम मोदी ने किया था गिफ्ट: इसी जगह गिरी थी माँ सती की हथेली

बांग्लादेश के सतखीरा जिले के श्यामनगर में स्थित हिन्दू शक्तिपीठ जशोरेश्वरी काली मंदिर में बड़ी चोरी हुई है। इस शक्तिपीठ में स्थापित माँ काली की मूर्ति पर सुशोभित किया गया चाँदी का मुकुट चोरी कर लिया गया। यह मुकुट भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंदिर को भेंट में दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को हुई। मंदिर के पुजारी दिलीप मुखर्जी ने बताया कि उन्ह्होने दिन की पूजा 2 बजे समाप्त करके मंदिर के पट बंद कर दिए थे। इसके बाद जब मंदिर की साफ़ सफाई करने वाले यहाँ पहुँचे तो उन्हें देवी के सर से मुकुट गायब मिला।

उन्होंने यह सूचना पुलिस को दी। पुलिस अब मामले में CCTV फुटेज की जाँच कर चोर को पकड़ने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, अभी तक किसी कि भी पहचान नहीं हो पाई है। मुकुट चोरी की घटना दुर्गा पूजा के बीच हुई है, जिसके कारण स्थानीय हिन्दू समाज में रोष है।

चोरी किया गया मुकुट वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान भेंट के रूप में दिया था। उन्होंने स्वयं ही यह मुकुट माँ काली को पहनाया था। यह मुकुट चाँदी का बना हुआ था और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। यह तब से ही माँ काली को पहनाया जा रहा था।

सतखीरा में स्थित प्रसिद्ध जशोरेश्वरी काली मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक सुगंधा शक्तिपीठ है। बताया जाता है यहाँ देवी सती की हथेलियाँ गिरी थीं। इसके बाद एक ब्राह्मण ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था। यह मंदिर लगभग 1000-1200 साल पुराना बताया जाता है। इसका जीर्णोद्धार 400 साल पहले फिर करवाया गया था।

2021 में बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले ही जशोरेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था । बांग्लादेश के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि वे प्राचीन जशोरेश्वरी काली मंदिर में देवी काली की पूजा करने के लिए काफी उत्साहित हैं।

जशोरेश्वेरी मंदिर के आसपास हर साल एक मेला लगता है। पीएम मोदी ने अपने दौरे में ऐलान किया था यहाँ इस मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक मल्टीपरपस हॉल का निर्माण भारत सरकार की तरफ से करवाया जाएगा।

अल्पसंख्यक हैं मिजोरम में हिंदू, फिर भी हरि मंदिर को बचाने में जुटे: असम राइफल्स के जाने के बाद राज्य सरकार के कब्जे में होगा मंदिर

पूर्वोत्तर भारत के ईसाई बहुल राज्य मिजोरम में हिन्दू अपना एक मंदिर सरकारी नियंत्रण में जाने से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक है। मिजोरम की राजधानी आइजोल में स्थित असम राइफल्स हरि मंदिर, गोरखा हिंदुओं और ब्रू रियांगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है और श्रद्धा का बड़ा केंद्र है।

मिजोरम की आबादी का बेहद छोटा हिस्सा हिन्दू समुदाय इस बात से चिंतित है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का प्रशासन मिजोरम सरकार के हाथों में चला जाएगा। हरि मंदिर (जिसे महादेव ट्रान के नाम से भी जाना जाता है) पहले बेथलहम में असम राइफल्स परिसर में स्थित था। यह यहाँ पिछले 70 वर्ष से स्थित है। असम राइफल्स आइजोल के इस हिंदू मंदिर का रखरखाव करता आया है। इस हरि मंदिर में दुर्गा पूजा, दिवाली और जन्माष्टमी जैसे त्यौहार भी मनाए जाते हैं और यह शादियों और कीर्तन जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र भी है।

30 सितंबर, 2024 को मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष ने आइजोल स्थित द्वितीय असम राइफल्स के कमांडेंट को पत्र लिखकर हरि मंदिर के भविष्य के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी। अपने पत्र में मनकुमार जैशी ने लिखा, “हरी मंदिर असम राइफल्स के सुरक्षाकर्मियों के परिवारों और वंशजों लिए गहरा भावनात्मक महत्व रखता है, उन्होंने हमारे देश की सेवा की है। ये पवित्र भूमि हमारे देश की अखंडता की रक्षा के लिए उनके बलिदान, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

उन्होंने कहा, “यह हमारी विनम्र अपील है कि इस मंदिर को संरक्षित किया जाए और असम राइफल्स के सैनिकों के वंशजों के साथ-साथ बाकी हिंदू समुदाय को भी इसमें पूजा -अर्चना दी जाए।” मंदिर को लेकर यह चिंताएँ असम राइफल्स के अपने बेस को हटा कर शहर से बाहर ले जाने के कारण उठी हैं।

केंद्र-राज्य में लम्बे समय से चल रही बात

असम राइफल्स बटालियन को आइजोल शहर के बीच से 15 किलोमीटर पूर्व में ज़ोखावसांग में एक जगह पर ले जाने के लिए 2023 से ही बातचीत हो रही है। मिजोरम सरकार ने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया था कि असम राइफल्स को एक नए स्थान पर भेजा जाए।

जुलाई, 2024 की एक PTI रिपोर्ट में कहा गया है कि असम राइफल्स को यहाँ से हटा कर दूसरी जगह भेजने के लिए केंद्र और मिजोरम के बीच एक समझौता (MOU) को मंजूरी दी जानी थी। अभी MOU को लेकर क्या स्थिति, यह नहीं पता है। हालाँकि, यह साफ़ है कि गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद मिजोरम सरकार आइजोल के असम राइफल्स परिसर को अपने अधीन ले लेगी।

चूंकि यह ऐतिहासिक हरि मंदिर असम राइफल्स के परिसर में स्थित है, इसलिए स्थानीय हिंदुओं को डर है कि मंदिर को चलाने, प्रशासन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी मिजोरम सरकार के हाथों में आगे चली जाएगी।

स्थानीय गोरखा हिन्दुओं को मंदिर देने की माँग

मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष मनकुमार जैशी ने 2nd असम राइफल्स के कमांडेंट से आग्रह किया है कि वे इस मामले को राज्य सरकार के सामने उठाएँ और मंदिर का संचालन गोरखा हिन्दुओं को दिलवाएँ। सितंबर 2024 में लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, “हम आपसे हरि मंदिर को आइजोल के स्थानीय गोरखा समुदाय को देने पर विचार करने की माँग करते हैं ताकि हमें अपनी धार्मिक जरूरतों के लिए एक जगह बची रहे।”

मनकुमार जैशी ने अपने पत्र में आगे कहा कि जिस तरह असम राइफल्स का चर्च, स्थानीय चर्च को दिया गया है, उसी तरह मंदिर को भी स्थानीय हिन्दुओं के हाथ में दिया जाए। ऑपइंडिया ने मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष से फोन पर बात की और उन्होंने इन चिंताओं के बारे में हमें बताया।

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि मिजोरम सरकार कैंटीन स्क्वायर क्षेत्र का विस्तार करने और सड़कों को चौड़ा करने पर विचार कर रही है। इसके दायरे में मंदिर आने से स्थानीय हिंदुओं के सांस्कृतिक केंद्र असम राइफल्स हरि मंदिर का भविष्य अब खतरे में है।

सोशल मीडिया पर चला अभियान

इस मंदिर को बचाने की माँग अब सोशल मीडिया पर चल रही है। एक एक्स यूजर ने लिखा, “मंदिर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र हैं। असम राइफल्स के मंदिर को हटाने से हमारे समुदाय की पहचान ही खत्म हो जाएगी।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “हम आगे की पीढ़ियों के लिए असम राइफल्स मंदिर को बचाने में एकजुट हैं। आइए इसको बचाने के लिए अपनी आवाज़ उठाएँ।”

एक और यूजर ने लिखा “असम राइफल्स मंदिर दशकों से शांति और प्रार्थना का स्थल रहा है। जो मंदिर इतने सारे लोगों के लिए इतना मायने रखता है, उसे क्यों नष्ट किया जाए?”

मिजोरम में हिन्दुओं का उत्पीड़न

2001 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, मिजोरम ईसाइयों की आबादी 7.7 लाख है जबकि इसकी तुलना में केवल 31,562 हिंदू यहाँ रहते हैं। राज्य के हिन्दुओं में मुख्य रूप से गोरखा और ब्रू रेहंग शामिल हैं। ब्रू रेहंग को 1997 में मिज़ो लोगों के अत्याचार का सामना करना पड़ा था। ब्रू रहंग इस कारण भाग कर त्रिपुरा चले गए थे। 2018 में त्रिपुरा और मिजोरम के बीच हुए एक समझौते के बाद ही ब्रू आबादी यहाँ लौट पाई थी।

मिजोरम के भीतर मंदिर पर हमले के भी कई मामले सामने आए हैं। ऑपइंडिया को आइजोल के असम राइफल्स हरि मंदिर के बाहर एक बड़ी प्लेट मिली, जिसमें लिखा है कि इस मंदिर को उपद्रवियों ने नष्ट कर दिया था। इस मंदिर का दोबारा से निर्माण करवाया गया था। आज जैसा यह मंदिर दिखता है, उसका निर्माण ब्रिगेडियर श्री राम सिंह द्वारा करवाया गया था और अगस्त 1993 में असम राइफल्स की पहली बटालियन के कमांडेंट द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था।

मिजोरम में हिंदू प्रथाओं के खिलाफ हमेशा ही एक शत्रुता की भावना बनी रही है। अगर किसी प्रमुख नेता को हिंदुओं से जुड़ा हुआ देखा जाता है, तो उसे बदनाम किया जाता है। 2011 में, मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने कोलकाता में दुर्गा पूजा और दशहरा के हिंदू त्योहारों में भाग लेने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री लाल थनहवला पर हमला किया था।

MNF के उपाध्यक्ष आर त्लांगमिंगथांगा ने कहा था, “हम लाल थनहवला के समारोह में भाग लेने की कड़ी निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह गॉड से माफ़ी मांगेंगे।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने ‘ईसाई धर्म त्याग दिया’ और हिंदू अनुष्ठानों में भाग लेकर ‘अपने गॉड को धोखा दिया’।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। आप इसे यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

नाबालिग लड़कियों को बहलाकर शारीरिक संबंध बनाता था अशरद आलम, NCPCR की शिकायत के बाद सीवान पुलिस ने 6 लड़कियाँ छुड़ाईं, चलाता है ऑर्केस्ट्रा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने गुरुवार (10 अक्टूबर) बिहार में अरशद आलम द्वारा संचालित ‘ऑर्केस्ट्रा’ में छह लड़कियों के शोषण के मामले में हुई कार्रवाई की जानकारी दी। कानूनगो ने कहा कि एनसीपीसीआर के निर्देश पर सीवान पुलिस ने उस स्थान पर छापेमारी की और आरोपित को दबोचते हुए लड़कियों को बचा लिया है।

प्रियांक कानूनगो ने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए इसकी जानकारी दी। इस मामले में मिशन मुक्ति फाउंडेशन नाम के एक एनजीओ ने इन नाबालिग लड़कियों सहित अन्य नाबालिगों के शोषण के बारे में एनसीपीसीआर से शिकायत की थी। इसके बाद NCPCR की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने कहा, “अरशद आलम बिहार में आर्केस्ट्रा चलाता है, जहाँ मिशन मुक्ति फाउंडेशन द्वारा नाबालिग लड़कियों के शोषण की शिकायत की गई थी। एनसीपीसीआर के निर्देश के बाद आज तड़के सिवान पुलिस ने छापामार कार्रवाई कर के 6 लड़कियों को रेस्क्यू किया है।”

आरोपित अरशद आलम का एक वीडियो डालते हुए उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा, “अरशद का बयान सुन लीजिए। ‘लव’ के नाम पर नाबालिग लड़की को ग्रूम करके शोषण करना इनका अपराध करने का तरीक़ा है। वीडियो जनजागरण के उद्देश्य से पोस्ट किया है, ताकि समाज जाग सके और बेटियाँ बचाई जा सकें।”

इस वीडियो में बताया गया है कि कैसे उसने ‘प्यार’ के नाम पर एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर उसका शोषण किया। आरोपित अरशद बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है। उसने बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर उसका शोषण करना शुरू कर दिया। वीडियो में उसने कहा कि वह ‘प्रेम विवाह’ कर लिया है और अब निकाह करेगा।

ध्यान देने वाली बात ये है कि अरशद आलम के बयान से लगता है कि वह नाबालिग लड़कियों को फँसाता था और उनके साथ ‘प्रेम विवाह’ का दावा करता था। इसके बाद वह नाबालिग को ‘निकाह’ के लिए अपने अम्मी-अब्बू के पास ले जाने की बात कहता होगा। इस तरह वह नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था।

अरशद के बयान से लगता है कि जिसे वह ‘प्रेम विवाह’ कहता है, वह जरूर नाबालिग के साथ यौन संबंध स्थापित करने से होगा। वह संभवत: नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके साथ यौन संबंध बनाने के बाद ‘निकाह’ के लिए उसका अपहरण कर लेता था। अगर नाबालिग गैर-मुस्लिम है तो यह इस्लाम में धर्मांतरण भी करेगा।

बिहार में ईसाई धर्मांतरण की ग्राउंड रिपोर्ट, YouTube ने डिलीट किया वीडियो: क्या फेसबुक भी उड़ा देगा, बिग टेक कंपनियों की वामपंथी पॉलिसी कब तक?

सोशल मीडिया पर वामपंथियों का दबदबा कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ सालों में कई ऐसे मामले सामने आए जब बड़ी टेक कंपनियों में बैठे वामपंथी अपनी विचारधारा के अनुरूप कंटेंट को बढ़ाने और सेंसर करने का काम करते रहे। उन्होंने कभी किसी हिंदूवादी आवाज को दबाने के लिए उसकी ऑडियंस के बीच रीच कम कर दी तो कभी उनके वीडियो को हटा दिया तो कभी उसका चैनल ही उड़ा दिया।

सवाल करने पर जवाब सिर्फ ये दिया गया कि ‘कंटेट’ कम्युनिटी गाइडलाइन्स के विरुद्ध है।

दिलचस्प बात ये है कि इन बड़ी टेक कंपनियों की कम्युनिटी गाइडलाइन सिर्फ तभी आहत होती है जब कोई हिंदुओं की बात करे। ताजा उदाहरण ऑपइंडिया पर प्रकाशित एक वीडियो से जुड़ा है। य़े वीडियो 4 साल पहले यूट्यूब पर डाली गई थी। इस वीडियो में ऑपइंडिया के डिप्टी एडिटर अजीत झा ने बिहार के सुदूर ग्रामों में हो रहे ईसाई धर्मांतरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट्स में बताया था कि कैसे मधुबनी इलाके में एनजीओ के नाम पर ईसाई मिशनरियाँ अपना घिनौना खेल खेलती हैं और हिंदू धर्म के खिलाफ घृणित बातें करते हुए ईसाई धर्म में आने के लिए कहती है। ऑपइंडिया पर उनकी ये कवरेज दो भागों में अपलोड की गई थी। एक 30 अक्टूबर 2020 को और दूसरी 31 अक्टूबर 2020 को।

वीडियो- यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर हर जगह थी। लेकिन अचानक अब देखा गया है कि यूट्यूब पर से उस वीडियो को हटा दिया गया है जो हमने 31 अक्टूबर 2020 को डाली थी और जिसमें ईसाई मिशनरियों के घिनौने खेल के साथ उस पादरी का चेहरा भी साफ तौर पर दिखाया गया था जो ग्रामीणों को भड़काता था।

ये कार्रवाई मास रिपोर्टिंग के कारण हुई है या किसी और टेक्निकल कारण ये तो साफ नहीं हैं लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि अजीत झा की इतनी रिपोर्टों में अगर इस रिपोर्ट को निशाना बनाया गया है तो कारण सिर्फ और सिर्फ ‘ईसाई धर्मांतरण का मुद्दा’ ही नजर आता है। इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं।

अब भले ही ईसाई धर्मांतरण की पोल खोलने वाली वीडियो यूट्यूब पर मौजूद नहीं है लेकिन आप अगर इसे देखना चाहते हैं तो ये फेसबुक पर फिलहाल मौजूद है। हमने रिपोर्ट में उसका लिंक जोड़ा है। अगर भविष्य में फेसबुक भी एक ग्राउंड रिपोर्ट को डिलीट करता तो हम इसे आप तक पहुँचाने के लिए कोई और तरीका जरूर खोजेंगे।

आप इस वीडियो देखिए और समझिए कि कैसे गरीब, लाचार लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें धर्मांतरित किया जाता होगा। उन्हें हिंदू धर्म से घृणा करवाई जाती होगी और धर्म परिवर्तन को सही बताया जाता होगा।

मालूम हो कि पहली बार नहीं है कि किसी मामले को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के वामपंथी रवैये पर सवाल खड़ा किया जा रहा हो। इनका प्रभाव फेसबुक पोस्ट से लेकर इंस्टा की रीच तक पर आप देख सकते हैं।

जहाँ हिंदू को काफिर कहकर मारने की बात करने वाली रील मिलियन तक पहुँचती है और फिर भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं हिंदूवादी पोस्ट को कम्युनिटी गाइडलाइन के विरुद्ध कहकर खारिज कर दिया जाता है।

जहाँ फेक न्यूज फैलाने वाले पोस्टों पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन अगर कोई उस फेक न्यूज की पोल खोल दे तो उस पोस्ट को हाइड कर दिया जाता है। तमाम यूट्यूबर्स और अन्य सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर इन समस्याओं से रोज जूझते हैं। सबका इलाज सिर्फ इन टेक कंपनियों को मेल करना नहीं हो सकता।

ये भी पता हो कि ये वामपंथी लॉबी सिर्फ हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ अपनी सक्रियता नहीं दिखाती बल्कि इन्हें दक्षिणपंथी विचार वाले लोगों से समस्या है। 2020 में इन कंपनियों पर आरोप भी लगे थे कि ये चुनावों के वक्त सोशल मीडिया यूजर्स को मैनिपुलेट करने का काम कर रही थीं।

इनकी विश्वसनीयता किस आधार पर आँकी जाए ये कहना मुश्किल है लेकिन ये जरूर है कि आप अगर यूट्यूब, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को देखेंगे तो पाएँगे कि काम की वीडियोज से ज्यादा वो वीडियो आपके सामने होंगी जिनसे या तो आपके विचारों शून्य हो जाएँ या फिर वैसे हों जैसे वो चाहते हैं। आपके फीड में किसी वामपंथी का प्रोपगेंडा 3 मिलियन से 30 मिलियन तक पहुँचता दिखाई देगा लेकिन अगर कोई हिंदू वादी आवाज उठा ले, धर्मांतरण के खिलाफ बोल दे तो उसका वही होगा जो इस टेक कंपनी में बैठे लोग चाहते हैं। संभव है कभी उसे 30 हजार व्यूज के लिए मशक्कत करना पड़े तो कभी 3 हजार का।

नाबालिग लड़की का अब्बास, आफताब, शाहरुख ने रेप किया, पुलिस ने 14 दिन की रिमांड माँगी… जज MM सैयद ने दी सिर्फ 2 दिन की रिमांड

वडोदरा गैंगरेप मामले में पांचों आरोपितों की रिमांड गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को पूरी हो गई है। इसके बाद उन्हें फिर से पेश किया जाएगा। इन पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद वडोदरा पुलिस ने मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को सभी को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की रिमांड माँगी थी।

इस मामले की सुनवाई करने वाले जज एम. एम. सैयद ने पुलिस को मात्र 2 दिन की रिमांड दी। पांचों आरोपितों में मुन्ना अब्बास बंजारा, मुमताज उर्फ ​​आफताब बंजारा, शाहरुख बंजारा मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया था।

इनके अन्य दो साथी भी घटना से पहले साथ थे, यह बाद में भाग गए थे। इनकी पहचान अजमल सत्तार और सैफ अली मेहंदी हसन के रूप में हुई है। इन सभी आरोपितों को जज के सामने पेश किए जाने पर जब जज ने पूछा कि क्या उन्हें पुलिस से कोई शिकायत है, जिसका सभी ने खंडन किया।

लेकिन फिर जब बहस चल रही थी, तो मुन्ना ने जज के सामने कहा, ‘जज साहब… मुझे जेल जाना है। मुझे मार देंगे साहब…’ चिल्लाया। इसके बाद कोर्ट रूम वकीलों की तालियों से गूँज उठा और ‘गुजरात पुलिस जिंदाबाद’ के नारे भी लगे।

इन पाँचों को कोई वकील भी नहीं मिला। चूंकि आरोपितों की तरफ से कोई वकील कोर्ट में पेश नहीं हुआ, इसलिए जिला विधिक सहायता समिति ने उन्हें एक वकील मुहैया कराया। जिसने रिमांड का विरोध किया और पुलिस के खिलाफ तर्क दिया कि वे जिस गाड़ी को जब्त करने के लिए कह रहे हैं वह पहले ही जब्त किया जा चुका है।

पुलिस ने कोर्ट में आरोपितों की 14 दिन की रिमांड माँगी थी, क्योंकि मामला गंभीर और संवेदनशील है और इसमें पर्याप्त जाँच की जरूरत है। पुलिस ने कहा कि अपराध के समय आरोपितों द्वारा पहने गए कपड़ों को जब्त किया जाना है और पीड़ित का मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई बाइक को भी जब्त किया जाना है।

पुलिस ने कह कि आरोपितों का मेडिकल परीक्षण लंबित है और अपराध के बाद उन्होंने कहाँ शरण ली, उनका यूपी में कोई आपराधिक इतिहास है या नहीं या अपराध के समय वे नशे में थे या नहीं, इसकी भी जाँच की जानी है। हालाँकि, इन दलीलों के बावजूद जज MM सैयद ने आरोपितों की सिर्फ 2 दिन की रिमांड मंजूर की।

इस मामले में माँग की जा रही है कि यह मुकदमा एक महिला अदालत के कोर्ट में चलाया जाए। वडोदरा के एडवोकेट विराज ठक्कर ने लिखित माँग में कहा कि पाँचों आरोपितों की 14 दिन की रिमांड माँगी गई थी, लेकिन कोर्ट ने 2 दिन की रिमांड मंजूर की है। वकीलों के एक संगठन ने कहा कि पीड़िता नाबालिग है और वह महिला जज के समक्ष अपनी पीड़ा बता सकेगी।

ब्रिटिश राजकुमारी से जिस मुस्लिम का था संबंध, उसके अब्बा ने 100+ लड़कियों का किया रेप/यौन शोषण, वर्जिन लड़कियों को खोजने के लिए होती थी टीम

ब्रिटिश फैशन स्टोर हैरड्स के पूर्व मालिक मोहम्मद अल फायेद पर लगभग 100 महिलाओं ने रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। मोहम्मद अल फायेद की 2023 में 94 साल की आयु में मौत हो गई थी। इन महिलाओं ने ब्रिटिश समाचार संस्था BBC को बताया है कि उनके साथ हैरड्स में काम करने के दौरान यह यौन शोषण हुआ। कुछ महिलाओं ने बताया है कि उनको फर्जी नौकरी का झांसा देकर मोहम्मद अल फायेद ने उनका बर्बरता से रेप किया। महिलाओं ने अपनी कहानियाँ भी सुनाई हैं।

क्या है पूरा मामला

मिस्र में पैदा हुआ मोहम्मद अल फायेद एक ब्रिटिश अरबपति कारोबारी था। मोहम्मद अल फायेद लंदन के लक्ज़री स्टोर हैरड्स का मालिक था। यह स्टोर विश्वप्रसिद्ध है और इसमें दुनिया भर के अरबपति खरीददारी के लिए आते हैं। इसी हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं का यौन उत्पीड़न मोहम्मद अल फायेद ने किया।

हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं के साथ यौन शोषण और रेप की बात का खुलासा हाल ही में BBC ने किया। BBC ने सितम्बर माह में प्रसारित एक डॉक्यूमेंट्री में बताया था कि हैरड्स के पूर्व मालिक मोहम्मद अल फायेद ने दर्जनों महिलाओं के साथ रेप और यौन शोषण किया। BBC ने इसके लिए हैरड्स की पूर्व कर्मचारियों से बात की।

मोहम्मद अल फायेद हैरड्स के स्टोर पर लगातार आता-जाता था और यहाँ काम करने वाली लड़कियों और महिलाओं पर नजर रखता था। उसे जो भी महिला पसंद आती थी, उसे वह अपने साथ ले जाता था और बलपूर्वक उनका रेप करता था। इन महिलाओं का रेप वह हैरड्स के स्टोर, अपने लंदन के बंगले और विदेशों में ले जाकर करता था।

BBC को महिलाओं ने बताया कि उसकी यह कारस्तानी सबको पता थी लेकिन कोई इस बारे में बोल नहीं पाता था। BBC ने पाया है कि यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। फायेद से जुड़े बाकी लोगों ने भी बताया है कि बूढा होने के बावजूद फायेद को युवा लड़कियों में काफी रुचि थी।

फायेद महिलाओं का रेप करने के पहले उनका मेडिकल चेकअप तक करवाता था। हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं को फायेद डरा धमका कर रखता था। यहाँ महिलाओं को आपस में बात नहीं करने दी जाती थी। उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग होती थी। हैरड्स के पूरे स्टोर में जगह-जगह कैमरे लगाए गए थे।

फायेद के खिलाफ उसकी मौत से पहले भी कई बार यौन शोषण के आरोप सामने आए थे। हालाँकि, इनको कोई ख़ास तवज्जो मीडिया में नहीं मिली। जब फायेद को लगा कि उसके यह अपराध दुनिया के सामने आ जाएँगे तो उसने पीड़िताओं के साथ धन-बल के शेयर समझौता कर लिया।

महिलाओं ने बताई आपबीती

मोहम्मद फायेद के लिए काम करने वाली महिलाओं ने अपनी रेप और यौन शोषण की आपबीती सुनाई है। एक 58 वर्षीय महिला मार्गरेट (नाम बदला हुआ) ने भी फायेद के अत्याचारों के विषय में BBC को जानकारी दी है। महिला ने बताया कि 1985 में जब वह 19 साल की थी तब उसने एक नौकरी का विज्ञापन देख कर आवेदन दिया था।

मारग्रेट ने बताया कि इस आवेदन में अपनी जानकारी और एक फोटो देने की माँग की गई थी। यह नौकरी बच्चों की देखरेख करने वाली महिला के लिए थी। मार्गरेट ने बताया कि उसके इंटरव्यू में यह भी पूछा गया कि क्या उसका कोई पहले बॉयफ्रेंड रहा है।(ताकि फायेद उसकी यौन जिन्दगी के बारे में जान सके)

मार्गरेट को नौकरी देने के बाद उसे फायेद ने अपने आलीशान बंगले में बुलाया। मार्गरेट को एक बड़ी गाड़ी में यहाँ लाया गया था। इसके बाद उन्हें एक अँधेरे से कमरे में बैठा दिया गया। यहाँ से उसे फायेद ने बुलाया और हर बार उसके साथ रेप किया। उसे बच्चों से मिलने तक नहीं दिया गया।

मार्गरेट ने बताया कि एक दिन उसके कमरे में आकर मोहम्मद अल फायेद सुबह सुबह आ गया और उसका काफी देर तक रेप किया। उसके साथ अप्राकृतिक यौन समबन्ध भी बनाए गए। फायेद ने उसे पाँच दिन तक बंधक बनाए रखा और उसे पैसों का भी लालच दिया। उसे धमकी भी दी गई। BBC को और कई ऐसी महिलाओं की कहानी पता चली है।

एक अन्य महिला ने बताया कि मोहम्मद अल फायेद जब दुबई में रहता था तब उसने महिला का यौन शोषण किया था। फायेद उसे लगातार नौकरी का प्रलोभन देता था। महिला एक बैंक में काम करती थी जहाँ वह आता जाता था। उसने महिला को कई बार अपने साथ हमबिस्तर होने का ऑफर दिया।

BBC को लगभग 100 ऐसी महिलाएँ अब तक मिली हैं जिन्होंने अपनी आपबीती और फायेद की करतूतें सुनाई हैं। बड़ी संख्या में महिलाएँ BBC की डॉक्यूमेंट्री के बाद सामने आई हैं। फायेद के कारनामों को तब के हैरड्स प्रशासन ने छुपाया, यह आरोप भी BBC ने लगाया है।

कौन था मोहम्मद अल फायेद

मोहम्मद अल फायेद मिस्र में पैदा हुआ था। यहाँ वह काफी गरीब था लेकिन एक करोडपति की बहन से निकाह के बाद उसके पास दौलत आ गई। इसके बाद उसने काफी पैसा अरब देशों से बनाया। वह 1970 आते-आते बहुचर्चित कारोबारी था। वह 1970 के दशक में मिस्र से ब्रिटेन आ गया था।

यहाँ उसने 1985 में हैरड्स को खरीदा, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ गई। वह ब्रिटेन के राजपरिवार के साथ ही अन्य बड़ी हस्तियों के साथ दिखता था। वह टीवी शो में भी आता-जाता रहता था। मोहम्मद अल फायेद सबसे अधिक चर्चा में 1990 के दशक में आया था।

मोहम्मद अल फायेद के बेटे डोडी अल फायेद को ब्रिटिश राजपरिवार की पूर्व बहू डायना के साथ लगातार देखा जाता था। दोनों की साथ में होने की काफी तस्वीरें वायरल हुई थीं। यह भी अफवाह उड़ी थी कि डोडी, डायना से शादी करने वाला है।

1999 में डोडी और डायना की एक साथ एक गाड़ी में बैठे हुए पेरिस में एक सुरंग के भीतर मौत हो गई थी। उनकी मौत इस सुरंग के भीतर उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट होने के कारण हुई थी। इसके बाद यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना था। मोहम्मद अल फायेद ने 2010 में वह हैरड्स स्टोर बेच दिया था जहाँ पर यह रेप घटनाएँ हुई। उसकी 2023 में मौत हो गई थी।

हैरड्स के वर्तमान मालिकों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए पीड़िताओं से सम्पर्क करना चालू कर दिया है। हैरड्स ने बताया है कि उसके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। हैरड्स अब दूसरे मालिकों के हाथों में है। हैरड्स ने कहा है कि वह फायेद की कारस्तानियों की कड़ी निंदा करता है।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग बड़ी समस्या

ब्रिटेन के भीतर ग्रूमिंग एक बड़ी समस्या बनी हुई है। ब्रिटेन के अधिकांश शहरों में मुस्लिम गैंग युवा और नाबालिग लड़कियों को इस दलदल में धकेलते हैं। दावा है कि इस गैंग से जुड़े मुस्लिमों ने अब तक ब्रिटेन में 5 लाख से अधिक गैर मुस्लिम लड़कियों से रेप किया है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इस गैंग को हर हाल में खत्म करने का भरोसा देते हुए इसके खिलाफ टास्क फ़ोर्स के गठन की जानकारी दी थी। ब्रिटेन में इसके खिलाफ बोलने में भी लोग डरते हैं क्योंकि आरोपितों के मुस्लिम होने पर उन्हें ‘इस्लामोफोबिक’ करार दे दिया जाता है।

दशहरे में जहाँ भगवान राम की जीत का उत्सव मना रहे करोड़ों हिंदू, वहीं Al Jazeera छाप रहा ‘विवादित मंदिर’

दुनिया भर में इस्लामी प्रोपेगेंडा चलाने वाले क़तर के सरकारी फंड से चलने वाला आतंकवादी समर्थक मीडिया नेटवर्क अल जजीरा भारत और हिंदुओं को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। इसके लिए चाहे मीडिया की संपादकीय नीतियों की तिलांजलि ही क्यों ना देनी पड़े। भारत में अभी त्योहारों का मौसम है। ऐसे में उसने नौ महीने पहले लिखे गए एक व्यंग्यात्मक लेख को आधार बनाकर भारत और हिंदुओं को निशाना बनाने की कोशिश की है।

दरअसल, इस साल जनवरी में अंग्रेजी व्यंग्यात्मक लेख पर आधारित अमेरिका पर अंग्रेजी वेबसाइट The Onion पर आधारित एक मलयालम में ‘द सावला वड़ा’ (The Savala Vada) का सोशल मीडिया हैंडल 2023 में बनाया गया था। इस हैंडल को केरल के दो अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के चलाते थे, जिस पर राष्ट्रवादी सरकार की नीतियों की आलोचना की जाती थी।

जनवरी में सावला वड़ा हैंडल ने अयोध्या के रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर एक व्यंग्य पोस्ट किया था। इसका कैप्शन था, ‘राम मंदिर के नीचे भारतीय संविधान के अवशेष: एएसआई सर्वेक्षण’। इस हैंडल ने भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय और एक सरकारी विभाग ASI का मजाक उड़ाया था। आगे भी यह हैंडल समय-समय पर हिंदुओं और यहूदी तथा भारत एवं इजरायल का मजाक उड़ाता रहा।

हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण बात अल जजीरा द्वारा 9 माह पुराने इस कंटेंट पर स्टोरी करना है। यह कंटेंट अयोध्या में राम मंदिर पर आधारित था। इस समय देश और दुनिया भर के हिंदू नवरात्रि का पर्व मना रहे हैं। कहा जाता है कि नवरात्रि के अंतिम दिन यानी दशहरा को भगवान राम ने अत्याचारी रावण का वध किया था। ऐसे में अल जजीरा ने उस हैंडल के बहाने हिंदुओं और पर्व एवं त्योहार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

अल जजीरा ने अपने लेख में अयोध्या के मंदिर को ‘विवादित मंदिर’ बताकर भारत की धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक तरह से खारिज कर दिया है, क्योंकि राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बना है। द सावाल वड़ा का सहारा लेकर अल जजीरा ने अपने लेख में लिखा, “हिंदू राष्ट्रवादी नेता (पीएम मोदी) पर 16वीं शताब्दी की मस्जिद के खंडहर पर बने मंदिर में धार्मिक समारोह का नेतृत्व करके भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान को कथित रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया गया था।”

एक इस्लामी मुल्क, जहाँ गैर-मुस्लिमों को अपने हिसाब से धर्म एवं दिनचर्या का पालन करने का अधिकार नहीं है… जहाँ बादशाह के नाम पर इस्लामी तानाशाही चलती है, उस मुल्क का एक मीडिया हाउस भारत की धर्मनिरपेक्षता एवं संविधान की बात अपने लेख में कर रहा है। यह हास्यास्पद एवं वैचारिक दोगलापन के अलावा कुछ नहीं है।

अल जजीरा ने एक सरकारी संस्था ASI को, जिसने अयोध्या मामले में कोर्ट के समक्ष सारे तथ्य रखे, उस पर सवाल उठा रहा है। उसने लिखा है कि सरकार संचालित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हिंदू समूहों के दावे का समर्थन किया। अल जजीरा जैसे कट्टरपंथी सोच वाले मीडिया में बैठे लोग इस बात अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि लोकतंत्र एवं स्वायत्तता क्या होती है।

द सावला वड़ा हैंडल चलाने वाले अल्पसंख्यक के हवाले से अल जजीरा ने लिखा कि ‘जे’ नाम का यह लड़का कभी सामने नहीं आया, क्योंकि दक्षिणपंथियों द्वारा उसकी हत्या कर दिए जाने का खतरा था। अल जजीरा का यह भी एक बड़ा प्रोपगेंडा है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहाँ विमर्श की प्राचीन परंपरा रही है, वहाँ कुरान में लिखी बातों को सार्वजनिक रूप से कह देने वाले व्यक्ति का समर्थन करने पर किसी की गला काट दी जाती है, वहाँ वह एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को डरा हुआ बताकर नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा है।

इसी अल जजीरा ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिमों द्वारा की गई हत्याओं की कभी आलोचना नहीं की। शायद यह कतर की इस्लामी विचारधारा एवं उसकी कट्टरपंथी नीतियों के अनुरूप शरिया कानून के तहत जायज था। यही अल जजीरा का दोगलापन है। अल जजीरा ने तो यहाँ तक लिख दिया कि उस हैंडल कोे चलाने वाले अनाम लड़के ने यह भी उससे कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को असहमति व्यक्त करना कठिन है।

जिस तरह से 9 महीने पुराने कंटेंट पर अल जजीरा ने हिंदुओं के त्योहार के दौरान भगवान राम और अयोध्या मंदिर के साथ-साथ सरकार एवं यहाँ की निष्पक्ष न्यायपालिका पर सोच पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है, वह उसकी सोच में कट्टरता को दर्शाती है। अल जजीरा फिलिस्तीन में आतंकी संगठन हमास का खुलकर समर्थन करता है। यहाँ तक कि उसका एक पत्रकार पार्ट टाइम आतंकी के रूप में काम करते हुए हाल में मारा गया है।

ऐसे में अल जजीरा की विश्वसनीयता इस्लामी मुल्क के बाहर संदिग्ध है। यह संगठन कतर के आमिर द्वारा फंडेंड है, जो दुनिया भर में आतंकियों के समर्थन में माहौल बनाता है और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को ही खलनायक बनाने की कोशिश करता है। समय-समय पर वह गैर-मुस्लिमों का मजाक उड़ाने से भी बाज नहीं आता है, जो कि उसके इस लेख से साफ झलकता है।

बहन नहीं… हिंदू लड़की को होटल लेकर गया था अकरम, पिटाई हुई तो इस्लामियों ने फैलाया झूठ: ‘पैगंबर मोहम्मद के अपमान’ पर UP पुलिस ने खोली पोल

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम युवक को पीटे जाने का वीडियो वायरल हुआ तो इस्लामी कट्टरपंथी तुरंत एक्टिव हो गए। फौरन हिंदूवादी संगठनों और भीड़ को इस घटना का दोषी ठहरा दिया गया। दावा किया गया कि वीडियो गाजियाबाद का है जहाँ एक मुस्लिम लड़के ने पैगंबर मोहम्मद के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई थी इसलिए भीड़ उसे मार रही है।

मुस्लिम मिरर जैसे हैंडल्स से कहा गया कि चूँकि मुस्लिम युवक पैगंबर मोहम्मद के अपमान किए जाने का विरोध कर रहा था इसलिए भीड़ ने उसे मारा।

कई मुस्लिम पत्रकार भी इस लिस्ट में जुड़े जिन्होंने फर्जी कहानी फैलाई। वसीम अकरम त्यागी ने तो कहा कि युवक को मजहब संबंधी गालियाँ भी दी गईं और युवक के साथ उसकी बहन थी उसको भी पीटा गया।

AIMIM समर्थक शरीक कुरैशी ने तो बिन सच्चाई जानें घटना के लिए हिंदुओं को दोषी ठहरा दिया। अपने पोस्ट में उसने साफ लिखा- “इतनी नफ़रत किसने भरी? मोटरसाइकिल सवार भाई-बहन पर 8-10 हिंदुत्व गुंडों ने हमला किया और उन्हें पीटा। यहाँ तक कि मासूम लड़की पर भी हमला किया गया। उन पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के अपमान का विरोध किया था!!”

अब इस वीडियो की हकीकत क्या है इसे जानते हैं-

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे दावे झूठे हैं। न तो ये वीडियो गाजियाबाद की है। न ही भीड़ मुस्लिम युवक को इसलिए पीट रही है क्योंकि उसने पैगंबर मोहम्मद के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई, न ही वीडियो में उसकी कोई बहन है।

असलियत ये है कि ये वीडियो 28 सितंबर को हापुड़ जिले के धौलाना पुलिस स्टेशन की है और पिटने वाले लड़के का नाम अकरम है। आरोप है कि अकरम एक हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर होटल के कमरे में ले गया था। जब लड़की के भाइयों को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने उसे पकड़कर खूब पीटा, जिसकी वीडियो सामने है।

इस संबंध में हापुड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल का भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि इस मामले में हिंदू लड़की ने अकरम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और कहा था कि अकरम ने उसे अपने जाल में फँसाया और उसका यौन शोषण किया। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर शिकायत भी दर्ज की थी।

अब इस मामले को जिस तरह सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है उसे लेकर भी हापुड़ पुलिस कहती है इस मामले में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस उन लोगों पर एफआईआर करेगी जो गलत जानकारी फैलाएँगे।

आतंकियों के समर्थक ‘पत्रकार’ वाजिद खान को पुलिस ने दबोचा: बांग्लादेश की तरह भारत में भी ‘तख्त गिराने’ का देखता है सपना, नरसिंहानंद की हत्या के लिए उकसाता है

राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया पर हिंदूफोबिक कंटेंट डालने वाले इस्लामी आतंकवाद समर्थक वाजिद खान को हिरासत में ले लिया है। पुलिस फिलहाल उसके कंटेंट और उसके संपर्कों की जाँच कर रही है। पुलिस पता लगा रही है कि वाजिद का किसी आतंकी नेटवर्क या देशद्रोही तत्वों के साथ संपर्क तो नहीं है। वह सोशल मीडिया पर हिंदू और यहूदी घृणा से पोस्ट किया करता था और कट्टरपंथी इस्लाम का समर्थन करता था।

वाजिद खान राजस्थान के अजमेर जिले के गवाना के कायड़ रोड का रहने वाला है। उसने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर खुद को पत्रकार बता रखा है। इसके साथ ही अपने बायो में ‘अल जजीरा अंग्रेजी’ लिख रहा है। हालाँकि, वह अल जजीरा में काम करता है या नहीं या वहाँ अपने लेख छपवाता है या नहीं, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

मुस्लिम मुल्क कतर का सरकार समर्थक मीडिया हाउस अल जजीरा अपने हिंदूफोबिक कंटेंट और इस्लाम परस्ती के साथ-साथ आतंकवादियों के पक्ष में वैश्विक स्तर पर नैरेटिव तैयार करने के लिए कुख्यात है। वाजिद खान यहाँ काम करने का दावा करता है। वाजिद खान कुछ दिन पहले आतंकवादी समूह द्वारा निर्दोष यहूदी नागरिकों पर क्रूर हमले की पहली वर्षगाँठ मनाने के लिए कई ट्वीट पोस्ट किया था।

हमास के प्रति हमदर्दी और यहूदियों से घृणा

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला करके यहूदियों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था। इस साल 7 अक्टूबर को इसके एक साल पूरे हुए। इस दौरान वाजिद खान ने अपने X हैंडल पर लिखा, “7 अक्टूबर की यादगार तस्वीरें।” इसके साथ ही उसने एक तस्वीर भी पोस्ट की थी।

इस पोस्ट में एक हथियारबंद आतंकवादी एक इजरायली सैनिक को टैंक के ऊपर पकड़े हुए है। वाजिद खान ने इस तस्वीर को विजय वाले इमोजी के साथ पोस्ट करके इसके जरिए इस्लामी आतंकवादियों का महिमामंडन किया था। उसने यह भी कहा कि यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है, जो फिलिस्तीन से इजरायल की भारी हार की याद दिलाता है।

उसने एक दो अलग-अलग पोस्ट में लिखा था, “7 अक्टूबर की शुभकामनाएँ। 7 अक्टूबर को फिलिस्तीनियों ने इजरायल का सुपर पावर होने का घमंड तोड़ दिया था।” एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इसराइल पर हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, उसका ताकतवर बनने वाला भ्रम टूट गया है।” उसने इजरायल पर हमला करने वाले हमास के चीफ याह्या सिनवार ‘गाजा का शेर’ बताया।

हिंदुओं से नफरत और जिहादियों से वाजिद खान का प्यार

वाजिद खान न केवल यहूदियों के प्रति, बल्कि हिंदू समुदाय के प्रति भी नफरत से भरा हुआ है। दोनों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए वह मौत की धमकी देने से भी नहीं चूकता है। वह मुस्लिमों के आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ खड़े हिंदुओं से घृणा करता है। यह यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने वाली सबसे मुखर आवाज़ों में से एक था।

वाजिद खान ने 4 अक्टूबर को नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को मौत की धमकी दी और कहा था, “कल अति (उनके नाम का मजाक उड़ाते हुए) नरसिंहानंद ने नबी ए करीम की शान में ग़ुस्ताखी की थी .. लेकिन कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई। और अब उस मलूँन के चेले भी नबी ए करीम और हज़रत अली की शान में ग़ुस्ताखीं कर रहे है … इनका इलाज एक ही है वो है हज़रत अली की ज़ुल्फ़िकार !!”

जुल्फिकार मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के दामाद अली इब्न अबी तालिब की तलवार का नाम है। वाजिद खान इस पोस्ट के जरिए कहना था कि हिंदू संत नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को वही मौत के घाट उतारा दिया जाएगा, जो मुस्लिम खलीफाओं और शासकों के शासनकाल के दौरान इस्लाम को अस्वीकार करने वालों को भुगतना पड़ा था।

एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इज़राइल के धर्मगुरु मूर्ति पूजा के बारे में क्या धारणा रखते हैं यह उन्हीं से खुद सुन लीजिए। इनके मुताबिक़ यहूदियों की किताब तल्मूड के अनुसार जो लोग मूर्ति पूजा करते हैं उन्हें इस दुनिया में जीने का अधिकार नहीं है। दुनियाभर के वह 6 बिलियन लोग बोझ है, जो मूर्ति पूजा कर पाखंड कर रहे है, अकाल ही उन्हें अब ख़त्म करना चाहता है, मूर्ख 21 वी सदी में भी पत्थर कलेंडर और पाखंड को पूज रहे हैं! इस वीडियो में इस यहूदी धर्मगुरु ने भारत का भी नाम लिया है।”

बांग्लादेश में जब शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था, तब इसने कट्टरपंथी बातें लिखी थीं। 5 अगस्त 2024 को उसने बांग्लादेश में इस्लामी झंडा की तस्वीर डालते हुए लिखा था, “सब ताज उछाले जाएँगे, सब तख्त गिराए जाएँगे। बस नाम रहेगा अल्लाह का! Islamic Movement.” यह कट्टर इस्लामी मोहम्मद फैज की कविता का अंश है। वह इस नज्म के माध्यम से भारत में भी तख्ता पलट का सपना देख रहा है।

किसी महिला को सबके सामने ‘वेश्या’ बताना नहीं है अपराध (धारा 509): केरल हाई कोर्ट ने दूसरी धारा का दिया तर्क

केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी महिला को दूसरों के सामने ‘वेश्या’ कहना भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत अपराध नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अपराध तब होता जब यह बात महिला के सामने कही गई होती। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला को लोगों से वेश्या बताना दूसरी धारा के अंतर्गत अपराध भले माना जा सकता है।

केरल हाई कोर्ट में 30 सितम्बर, 2024 को हुई एक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी जस्टिस बदरुद्दीन ने की। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि धारा 509 के तहत इसको अपराध तब माना जाता जब यह शब्द महिला के सामने कहा गया होता और उसकी निजता का उल्लंघन किया गया होता।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह दोनों ही शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती थी। ऐसे में कोर्ट ने इसे धारा 509 के तहत अपराध मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला को बाकी लोगों से वेश्या बताना दूसरी धाराओं के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “यहाँ अपराध होने के लिए जरूरी पहला शर्त नहीं बनती क्योंकि महिला को आरोपित ने सीधे तौर पर अपशब्द कहे हों। ना महिला ने ऐसा सुना या देखा है। महिला का आरोप है कि आरोपित ने फ्लैट के निवासियों और पास के दुकानदारों से ऐसा कहा था। महिला को इस संबंध में कोई भी सीधी जानकारी नहीं है।”

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 2021 में केरल के कोच्चि में दर्ज किए गए एक मामले में सुनवाई करते हुए की है। यहाँ एर्नाकुलम इलाके की एक सोसायटी में रहने वाली एक महिला समीरा ने इसी सोसायटी में रहने वाले राहुल जॉर्ज, एनसन आइजे और द्य्विन कुरुविल्ला पर आरोप लगाया था कि इन तीनों ने सोसायटी और आसपास के इलाके में महिला के विषय में अपशब्द बोले।

महिला का आरोप था कि इन तीनों ने आसपास के लोगों से उसे वेश्या बताया। इसी को लेकर उसने शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला की शिकायत के आधार पर तीनों के विरुद्ध धारा 509 (किसी महिला की लज्जा भंग करने के लिए अपशब्द कहना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद आरोपितों ने यह FIR रद्द करवाने के लिए केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सही माना और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को रद्द कर दिया।