Home Blog Page 626

अवैध मस्जिद के बाद अब शिमला में ‘गाय’ पर विवाद: हिंदू संगठनों का दावा- कश्मीर के रईस और रिजवान ने गोमांस पकाकर खाया, पुलिस बता रही ‘अचार’

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अवैध मस्जिदों का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ था कि अब होटल में गोमांस परोसे जाने के आरोप से माहौल और गर्म हो गया है। हिंदू संगठनों ने कुछ मुस्लिम युवकों पर यह आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। शुरुआती जाँच में पुलिस का कहना है कि होटल में गोमांस नहीं मिला है। लेकिन हिंदू संगठन इसे आरोपितों को बचाने की साजिश बता रहे हैं।

यह विवाद 5 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ जब हिंदू संगठन के पदाधिकारी कमल गौतम ने अपने फेसबुक पर 2 वीडियो शेयर किए। उन्होंने दावा किया कि शिमला के ‘होम स्टे राज विला’ होटल में नवरात्रि के दौरान गोमांस पकाकर खाया गया है। आरोप मुस्लिम समुदाय के रईस खान और रिज़वान नाम के व्यक्तियों पर लगाया गया, जो कश्मीर के निवासी बताए जा रहे हैं।

कमल गौतम का दावा है कि जब होटल के हिंदू कर्मचारियों को इस घटना का पता चला, तो वहाँ विवाद खड़ा हो गया और आरोपितों से हाथापाई भी हुई। होटल संचालक ने मुस्लिम कर्मचारियों को गोशाला ले जाकर माफी माँगने का दिखावा किया और बाद में उन्हें होटल से भगा दिया। हालाँकि, हिंदू स्टाफ ने कार्रवाई की माँग जारी रखी।

कमल गौतम ने आगे कहा कि हिंदू स्टाफ ने अपनी नौकरी की परवाह किए बिना धर्म का साथ दिया। पुलिस ने शिकायत मिलने पर हिंदुओं से सबूत माँगे। कमल गौतम ने कहा कि सबूत जुटाना पुलिस का काम है और हिमाचल प्रदेश में इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। वीडियो में एक व्यक्ति को डिब्बे में कुछ ले जाते हुए और दूसरे वीडियो में एक व्यक्ति को गाय का पैर पकड़कर माफी माँगने के लिए कहा जाता दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमल गौतम ने जिस होटल ‘होम स्टे राज विला’ का जिक्र किया है वो शिमला के ओल्ड बस स्टेशन के पास है। यह सदर थानाक्षेत्र में पड़ता है जिसके एक हिन्दू कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग होटल में गोमांस लाकर खाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर सदर थाने के SHO इंस्पेक्टर धरम सिंह नेगी का बयान भी सामने आया है। थानेदार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद वो खुद जाँच के लिए होटल गए। शुरुआती जाँच में डिब्बे में अचार लाने की बात सामने आई है। थाना प्रभारी का दावा है कि उनकी जाँच में कहीं भी गोमांस नहीं मिला है। हालाँकि मौके से अचार भी नहीं पाया गया है। पुलिस का कहना है कि तनावपूर्ण माहौल में ऐसी बातें हालात को बिगाड़ने की साजिश भी हो सकती है।

हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पुलिस की इस थ्योरी को नकार दिया है। कमल गौतम का कहना है कि जिस होटल की यह घटना है उसे रईस नाम का व्यक्ति पिछले 4 वर्षों से विजय के साथ पार्टनरशिप में चला रहा था। कमल गौतम ने सवाल किया कि अगर दोनों मुस्लिम कर्मचारी बेगुनाह थे तो उनको भगाया क्यों गया। साथ ही पुलिस डिब्बे में जिस अचार का दावा कर रही है वो कहीं क्यों नहीं मिला ? बकौल कमल गौतम उनसे बातचीत के दौरान होटल संचालक ने गलती होना कबूला था और सजा के तौर पर मुस्लिम स्टाफ को नौकरी से निकाल देने की बात कही थी।

अपने ही घर में फाँसी लगाकर झूल गई अनामिका, क्योंकि मोहम्मद कासिव कर रहा था परेशान: इस्लाम कबूलने-निकाह करने का डाल रहा था दबाव, UP के संभल की घटना

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मुस्लिम युवक द्वारा निकाह का दबाव बनाने से परेशान एक हिन्दू लड़की ने आत्महत्या कर ली। अनामिका नाम की मृतक लड़की पॉलिटेक्निक की छात्रा थी और उस पर इस्लाम कबूल करने का भी दबाव डाला जा रहा था। इस मामले में आरोपी का नाम मोहम्मद कासिव है, जिसके खिलाफ 6 अक्टूबर 2024 को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने मोहम्मद कासिव को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना संभल के गुन्नौर थाना क्षेत्र की है। यहाँ के मासूम अली इलाके में रहने वाली एक महिला ने रविवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में महिला ने बताया कि वह अपनी बेटी और पति के साथ रहती थी। मोहल्ले में रहने वाला मोहम्मद कासिव उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहा था। वह उस पर इस्लाम कबूल करने और निकाह करने का दबाव डालता था।

कुछ समय पहले महिला ने अपनी बेटी का एडमिशन बदायूँ जिले के अलापुर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में करवाया। लेकिन, कासिव वहाँ भी जाकर उसे परेशान करने लगा। परेशान होकर लड़की ने अपनी माँ से यह बात बताई। लेकिन, बस्ती में हिंदू कम होने के कारण माँ ने किसी और को इस बारे में नहीं बताया और घर में भी यह बात छिपा ली।

कासिव ने 30 सितंबर 2024 को एक बार फिर लड़की को कॉलेज से लौटते वक्त परेशान किया। लड़की ने यह घटना अपनी मौसी को बताई, जो बदायूँ में रहती हैं। मौसी ने लड़की को भरोसा दिलाया कि 6 अक्टूबर को वे पुलिस में शिकायत करेंगी। लेकिन शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को ही लड़की ने धर्म परिवर्तन के दबाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उसने अपने कमरे में फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस को उसका शव पंखे से लटका मिला।

मृतका की माँ ने कासिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में खुद को हिंदू बताते हुए मुस्लिमों से खतरे की आशंका जताई है। पुलिस ने कासिव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब इस मामले की जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

लड़की की मौसी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पहले उसकी दोस्ती कासिव से थी, लेकिन जब वह निकाह का दबाव डालने लगा, तब लड़की ने कहा, “मैं हिंदू हूँ और तुम मुस्लिम, हमारा कोई मेल नहीं है।” इसके बावजूद कासिव ने लड़की पर इस्लाम कबूल कर निकाह करने का दबाव बनाए रखा। साथ ही, उसे अश्लील वीडियो वायरल करने की भी धमकियाँ दी जा रही थीं।

भाई के इश्क में डूबी थी शाइस्ता, निकाह से रोका तो घर के 13 लोगों को जहर देकर मार डाला: कभी इसी तरह शबनम ने अपने ही घर के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला था

पाकिस्तान की पुलिस ने 13 लोगों की हत्या करने वाली एक युवती को गिरफ्तार किया है। युवती ने अपने अम्मी-अब्बू समेत 13 परिजनों को खाने में जहर खिला कर मार दिया। वह अपने चचेरे भाई से निकाह करना चाहती थी, जिसके लिए उसका परिवार राजी नहीं था। इसी बात से गुस्सा होकर उसने यह कदम उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर जिले का है। खैरपुर की पुलिस ने कहा है कि उसने यहाँ अगस्त में 13 लोगों की हत्या का मामला सुलझा लिया है। उसने इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले हत्यारों को भी गिरफ्तार करने की बात कही है।

पुलिस ने इस हत्या के मामले में एक युवती और उसके चचेरे भाई को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि 18 साल की शाइस्ता बरोही ने ही अपने अम्मी-अब्बू और बाकी 11 परिजनों की हत्या की है। इस काम में उसके चचेरे भाई अमीरबक्श बरोही ने भी उसकी मदद की।

मीडिया को पुलिस ने बताया कि शाइस्ता का निकाह किसी और रिश्तेदार से तय कर दिया गया था और उसकी सगाई भी हो चुकी थी। शाइस्ता ने इस निकाह का विरोध किया था। वह अमीरबक्श से निकाह करना चाहती थी, इस बात के लिए घरवाले राजी नहीं थे।

जब उनके परिवार ने दोनों के रिश्ते का विरोध किया तो उन्होंने इस हत्याकांड की साजिश रची। युवती ने अपने अम्मी-अब्बू, अपनी पाँच बहनों और 3 भाइयों को मारने के लिए दावत के दौरान खाने में जहर मिला दिया। जहर वाला खाना खाने से इन 10 लोगों की मौत हो गई। इन 10 लोगों के साथ 3 और रिश्तेदार मारे गए, जिसमें एक भी बच्चा शामिल था।

यह जहरीला खाना खाने वालों की मौत एक-एक करके हुई। बीमार पड़ने के बाद लोग मरते गए। इस कारण से पहले लोगों को लगा कि यह मामला खाने से हुई बीमारी का है। हालाँकि, पुलिस ने जब दूसरे एंगल से जाँच चालू की तो यह सच निकल कर आया।

पुलिस ने उस खाने की भी जाँच करवाई थी, जिसके कारण लोगों की मौत हुई। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि इस खाने में जहर पाया गया है। पुलिस का शक तब गहराया जब शाइस्ता के अलावा बाकी सभी सदस्यों की मौत हो गई लेकिन वह एकदम स्वस्थ रही। शाइस्ता अपने प्रेमी अमीरबखश के साथ भाग निकली थी।

उसकी तलाश करके पुलिस ने हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान शाइस्ता ने यह राज खोला कि उसने ही खाने में जहर मिलाया था। यह जहर अमीरबख्श ने लाकर दिया था और शाइस्ता ने रोटियों के आटे में इसे मिला दिया। इसे खाने के बाद 13 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

इस तरह का एक मामला पहले भारत में भी सामने आ चुका है। अमरोहा की रहने वाले शबनम ने 2008 में इस वारदात को अंजाम दिया था। उसने अपने प्रेमी के साथ मिल कर अपने ही परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काट कर बेरहमी से हत्या कर दी थी। उसने अपने माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को मार डाला था।

केरल के सोना तस्करों की ‘पहचान’ सत्ताधारी विधायक ने बताई, कहा- ज्यादातर मुस्लिम, जारी हो फतवा: बताया- हज से लौटते समय कुरान में गोल्ड छिपाकर लाया था मौलवी

केरल के गोल्ड स्मगलिंग मामले में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में हंगामा खड़ा कर रहा है। मामला तब और गर्म हो गया जब सत्ताधारी पार्टी के नेता और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के विधायक के. टी. जलील ने मुस्लिम समुदाय पर गोल्ड स्मगलिंग में अधिक शामिल होने का आरोप लगाया। उनके इस बयान ने केरल की सियासत में हड़कंप मचा दिया है, खासकर मलप्पुरम जिले के संबंध में दिए गए उनके बयान को लेकर। क्या है ये पूरा विवाद, आइए आपको समझाते हैं।

दरअसल, केरल में सोना तस्करी का मामला तब और उछल गया जब LDF विधायक के. टी. जलील ने मुस्लिम समुदाय पर सोने की अधिक तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया और मजहबी नेताओं से सोना तस्करी के खिलाफ फतवा जारी करने की माँग की। जलील का बयान कोझिकोड हवाई अड्डे से पकड़े गए तस्करों के संदर्भ में आया, जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से थे। जलील ने एक मौलवी पर सोना तस्करी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह हज यात्रा से लौटते समय कुरान में छिपाकर सोना लाया था, हालाँकि उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

केरल में गोल्ड स्मगलिंग की घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं, खासकर मलप्पुरम जिले के कोझिकोड हवाई अड्डे से। राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पहले ही इस मुद्दे पर बात कर चुके हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “आँकड़े बताते हैं कि मलप्पुरम जिले से भारी मात्रा में सोना और हवाला पैसे आ रहे हैं।” मुख्यमंत्री के इस बयान ने पहले ही विपक्ष को हमलावर बना दिया था। अब जलील के बयान ने इस आग में और घी डाल दिया है।

जलील ने अपने बयान में कहा कि “कोझिकोड एयरपोर्ट पर पकड़े जाने वाले अधिकतर लोग मुस्लिम होते हैं।” जलील ने यहाँ तक कहा कि मुस्लिम मजहबी नेताओं को लोगों को सोना तस्करी और हवाला लेन-देन से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम लीग के नेताओं से अपील की कि वे सोना तस्करी के खिलाफ फतवा जारी करें, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह काम मजहब के खिलाफ है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दी तीखी प्रतिक्रिया

जलील के इस बयान ने खासकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और कॉन्ग्रेस को नाराज कर दिया। IUML के महासचिव पी. एम. ए. सलाम ने कहा कि जलील पूरे समुदाय को अपराधी बता रहे हैं, जो निंदनीय और खतरनाक है। उन्होंने माँग की कि जलील तुरंत अपने बयान के लिए माफी माँगें। IUML के अन्य नेताओं ने भी जलील पर हमला बोला, और कहा कि जलील ने केवल अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इस तरह के बयान दिए हैं।

IUML के नेता सलाम ने कहा, “यह बयान समुदाय को बदनाम करने की साजिश है। यहाँ तक कि बीजेपी नेताओं ने भी ऐसा आरोप नहीं लगाया है।” वहीं कॉन्ग्रेस नेता वी. टी. बलराम ने जलील के बयान को “बेतुका” बताया और कहा कि अपराधों का मुकाबला फतवे के जरिए नहीं, बल्कि कानूनन किया जाना चाहिए।

जलील की सफाई से संतुष्ट नहीं हुए लोग

बयान को लेकर हुए विवाद के बाद जलील ने सफाई पेश की। केटी जलील ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो इस्लाम के खिलाफ हो। उनका मकसद केवल यह था कि मजहबी नेता लोगों को जागरूक करें कि सोना तस्करी और हवाला लेन-देन मजहब के खिलाफ हैं। “मैंने सिर्फ इतना कहा है कि अधिकतर लोग जो पकड़े जा रहे हैं, वे मुस्लिम हैं।”

जलील ने कहा कि उन्होंने पूरे समुदाय पर आरोप नहीं लगाया है, बल्कि उन्होंने सिर्फ यह बताया कि सोना तस्करी में शामिल अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय से हैं। उनका कहना था कि “समुदाय को यह समझना होगा कि यह गतिविधियाँ मजहब के खिलाफ हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सिर्फ जागरूकता फैलाने के लिए मजहबी नेताओं से फतवे की माँग की है, और यह माँग इस्लामोफोबिया नहीं है।

इस पूरे विवाद में बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने भी जलील पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जलील का बयान संविधान का अपमान है।” मुरलीधरन ने कहा कि देश में अपराधों के खिलाफ कानून बने हुए हैं, और इन कानूनों का आधार संविधान है, न कि कोई मजहबी कानून। उन्होंने यह भी कहा कि जलील का बयान संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और उन्हें इस मामले में सोच-समझकर बोलना चाहिए।

वहीं, बीजेपी के अलावा कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी इस विवाद पर टिप्पणी की। कॉन्ग्रेस नेता शफी परम्बिल ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है, और यहां किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को फतवे के जरिए नहीं बल्कि कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जलील का बयान समाज में एक गलत संदेश दे रहा है और यह देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के खिलाफ है।

गोल्ड स्मगलिंग में आ चुका है जलील का नाम, NIA ने की थी पूछताछ

यह पहली बार नहीं है कि जलील विवादों में घिरे हैं। 2020 में जब वह उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब भी उन पर कस्टम विभाग ने एक मामले में पूछताछ की थी, जिसमें यूएई के वाणिज्य दूतावास के माध्यम से तस्करी का आरोप लगा था। उन पर कस्टम्स द्वारा सोने की तस्करी का मामला भी दर्ज किया गया था। उस समय भी जलील को ‘व्यक्ति विशेष’ के रूप में संदिग्ध माना गया था, और उन्हें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

केरल में सोना तस्करी का मामला एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, खासकर मलप्पुरम जिले के संदर्भ में। जलील के बयान ने इस पूरे मामले ने केरल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है, और यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है।

क्या बिहार में ईसाई धर्मांतरण पर सवाल उठाना है गुनाह, क्या दुर्दांत अपराधी है मिथुन मिश्रा जो हथकड़ी में जकड़ा: सुशासन पर बाढ़ ही नहीं, पत्रकार की गिरफ्तारी भी धब्बा

बिहार के मुजफ्फरपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों को भड़काने के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन 8 लोगों में एक नाम यूट्यूबर मिथुन मिश्रा का भी है। आरोप है कि उन्होंने भीड़ को इस प्रकार उकसाया कि भीड़ पुलिस फोर्स पर हमला कर बैठी। अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग मिथुन की गिरफ्तारी की तस्वीरें देख कई तरह के सवाल उठा रहे हैं।

ये सवाल क्या है इससे पहले जान लेते हैं मिथुन मिश्रा आखिर हैं कौन और करते क्या हैं।

कौन हैं ‘बिहार वाला न्यूज’ के मिथुन मिश्रा

सोशल मीडिया पर सर्च करने पर आपको मिथुन मिश्रा की कई वीडियोज मिल जाएँगी। उनके अकॉउंट खंगालने पर पता चलता है कि वो बिहार वाला न्यूज पर रिपोर्टिंग करते हैं। उनके फॉलोवर्स भले एक्स पर ज्यादा नहीं है लेकिन उनकी रिपोर्टों पर रीच अच्छी-खासी आती है।

मिथुन की वीडियोज देखने के बाद पता चलता है कि वो बिहार के हालातों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं और जस की तस स्थिति अपने दर्शकों को बताते हैं। यूट्यूबर पर उनके 66 हजार के करीब सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं फेसबुक पर 76 हजार फॉलोवर्स हैं

हालिया दिनों में उन्होंने बिहार में आई बाढ़ को लेकर रिपोर्टिंग की थी। इस रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने बताया था कि किस तरह बागमती नदी का पानी बढ़ते हुए इतना हो गया कि लोगों के घर टूट रहे हैं। लोग बेघर हो रहे हैं। अपनी वीडियोज में मनीष ने जाकर पीड़ितों से बात की थी जिसमें प्रभावित लोग अपना दर्द बाँटते दिखे थे।

पुलिस ने मिथुन मिश्रा को किया गिरफ्तार

इसके बाद शुक्रवार को गोपालपुर चौक पर बाढ़ राहत के लिए करीबन चार घंटे तक लोग प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान बाढ़ पीड़ितों की पुलिस से भिड़ंत हुई। दोनों ओर से दर्जनों लोग चोटिल हुए। चूँकि इस खबर को उस समय यूट्यूबर मिथुन मिश्रा अपने अंदाज में रिकॉर्ड कर रहे थे। अब पुलिस का दावा है कि मिथुन ने वहाँ उस भीड़ को उकसाया था जिसने पुलिस पर हमला किया।

पुलिस ने इस मामले में 21 लोगों को नामजद कर लिया है। वहीं 180 अज्ञात आरोपितो की पहचान हो रही है। मिथुन की गिरफ्तारी पर थाना प्रभारी औराई, मुज़फ्फरनगर के मुताबिक,

“मिथुन मिश्रा के खिलाफ हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं। उसी ने भीड़ को भड़काया जिसमें हमारी पुलिस फ़ोर्स के कई स्टाफ घायल हुए हैं। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। कुछ के सिर तक फट गए हैं। हमने काफी समझाने की कोशिश की लेकिन भीड़ नहीं मानी। मिथुन मिश्रा पर हमने समुचित धाराओं में कार्रवाई की है। कुल 8 लोग गिरफ्तार हुए हैं जिसमें एक मिथुन मिश्रा भी शामिल है। इन सभी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेजा जा रहा है।”

ईसाई धर्मांतरण की खोली थी पोल

बता दें कि भले ही मिथुन मिश्रा की गिरफ्तारी के पीछे बाढ़ का मामला प्रमुख बताया जा रहा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर सवाल ये भी उठ रहे हैं कि कहीं मिथुन को इसलिए तो नहीं फँसा दिया गया क्योंकि उन्होंने पिछले दिनों ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ रिपोर्टिंग करके पोल खोली थी।

सोशल मीडिया पर उनकी वीडियोज की क्लिप वायरल है जहाँ वो धर्मांतरण गिरोह को हड़काते दिख रहे हैं। उनकी इस रिपोर्टिंग को कुछ ही दिन बीते हैं कि अब ये गिरफ्तारी की बात सामने आ गई। ऐसे में कहा जा रहा है कि मिथुन की गिरफ्तारी का मुख्य कारण ईसाई मिशनरियों द्वारा हिंदुओं के धर्मांतरण की रिपोर्टिंग हैं।

मिथुन के हाथ में हथकड़ी देख लोग आगबबूला… क्या कानून के मुताबिक ये सही है?

मिथुन की गिरफ्तारी के बाद कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिसमें उन्हें हथकड़ी पहनाकर बिठाए दिखाया गया है। ऐसे में लोग बिहार पुलिस को टैग करते हुए ये भी कह रहे हैं कि मिथुन मिश्रा कोई दुर्दांत अपराधी नहीं बल्कि पत्रकार हैं लेकिन बिहार पुलिस के द्वारा लोकतंत्र की जन्मभूमि पर एक सम्मानित पत्रकार के सम्मान एवं प्रतिष्ठा को हथकड़ी लगा कर कुचल दिया गया है। मानवाधिकार आयोग को टैग करके कहा जा रहा है कि मिथुन मिश्रा के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।

मिथुन के हाथ में लगी हथकड़ी पर सवाल इसलिए ही उठ रहा है कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एक दफा (सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन (1978) 4 SSC 409) के केस में साफ कहा था कि पुलिस किसी व्यक्ति को हथकड़ी नहीं लगा सकती और अगर वह ऐसा करती है तो यह पूरी तरह से अवैधानिक होगा और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 का उल्लंघन होगा। अनुच्छेद 21 किसी भी व्यक्ति को दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।

इसके अलावा अंजनी कुमार सिन्हा बनाम स्टेट ऑफ बिहार 1992 केस में बताया गया था हथकड़ी लगाना पकड़े गए आरोपित के चरित्र पर निर्भर करता है। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर आरोपित द्वारा कस्टडी से भागने या लोक शांति को भंग करने की आशंका तो तो वैसे हालात में उसे पुलिस द्वारा हथकड़ी लगाई जा सकती है। कुछ अन्य मामलों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस किसी को हथकड़ी लगाना चाहती है तो उसे तर्कसंगत वजह बताते हुए संबंधित अदालत न्यायालय से पहले अनुमति लेनी होगी।

क्यों यूट्यूबर्स हो रहे गिरफ्तार

यही वजह है कि मिथुन के हाथ में लगी हथकड़ी को देख लोग गुस्सा हो रहे हैं। उनकी तुलना बिहार के मनीष कश्यप से की जा रही है। कहा जा रहा है कि जैसी लड़ाई मनीष कश्यप ने अकेले लड़ी थी वैसी ही लड़ाई मिथुन को भी लड़नी पड़ रही है। मनीष के साथ भी कोई नहीं आया था और मिथुन के साथ भी कोई नहीं दिख रहा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बिहार में यूट्यूब चैनल बनाकर रिपोर्टिंग करने वाले यूट्यूबर्स की गिरफ्तारी की घटना काफी चर्चा में रही है। पिछले साल मनीष कश्यप के साथ ऐसा हुआ था और अब मिथुन मिश्रा के साथ हुआ है। बिहार की स्थिति जानने-समझने वाले मानते हैं कि इस तरह इन यूट्यूबर्स को टारगेट इसलिए किया जाता है क्योंकि ये बिन किसी दबाव में आए निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं और जनता की आवाज उठाते हैं। ऐसे में ये प्रशासन को अपने लिए खतरा लगते हैं और हमेशा निशाने पर रहते हैं। पहले भी कई आवाज इस प्रकार शांत कराई जा चुकी हैं। इनमें रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे यूट्यूबर्स के नाम थे। ऑपइंडिया पत्रकार अजीत झा ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट की थी। आप इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

न्यूड वीडियो, पैसों का गबन या आधिपत्य की लड़ाई… पटना के इस्कॉन मंदिर में विवाद क्यों?

बिहार की राजधानी पटना में स्थित इस्कॉन मंदिर के भीतर मारपीट हुई। पीड़ित गुट ने आरोप लगाया कि उन्हें मीटिंग के बहाने बुलाया गया और बाद में लाठी डंडों से उनकी पिटाई की गई। इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें मारपीट होती दिख रही है। यह मारपीट सड़क पर तक आ गई। पुलिस ने कहा है कि यह मंदिर का आपसी प्रशासनिक और बाकी मामलों को लेकर विवाद हुआ है जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (6 अक्टूबर, 2024) रात को पटना का इस्कॉन मंदिर अखाड़े में तब्दील हो गया। यहाँ इस्कॉन के कुछ ब्रह्मचारियों पर हमला करते हुए कुछ लोगों को देखा गया। यह मारपीट सड़क पर तक आ गई। इस मारपीट में कई लोगों को चोटें भी आईं।

इस दौरान पुजारियों के अलावा कुछ बाउंसर भी दिखे जो मारपीट में शामिल थे। इस मारपीट के बाद पुलिस भी मौके पर पहुँची स्थिति को नियंत्रण में करके और घायलों को अस्पताल पहुँचाया। पुलिस ने यहाँ लोगों के बयान भी लिए और आगे अपनी जाँच चालू कर दी।

इस मारपीट में इस्कॉन पटना के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास और उनके बाउंसरों के शामिल होने की बात कही गई। आरोप लगाया गया कि मीटिंग के बहाने बुलाकर इस्कॉन मंदिर के दूसरे पदाधिकारियों को पीटा गया। हमला करने के पीछे गबन और दुराचार का खुलासा होने की बात कही गई है।

पीड़ित पक्ष का दावा- गड़बड़ी खोलने पर पीटा

भागलपुर इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष गिरधारी दास ने आरोप लगाया है कि पटना इस्कॉन के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास गबन और गड़बड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें एक व्यक्ति एक महिला के साथ दिखता है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया कि यह कृष्ण कृपा दास है जो एक महिला के साथ दुराचार में शामिल हैं।

गिरधारी दास ने कहा कि यह वीडियो किसी होटल का है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया कि पटना मंदिर में महिला के साथ छेड़खानी के अलावा यहाँ रहने वाले ब्रह्मचारियों को भी परेशान किया जा रहा है। उनको प्रसाद नहीं दिया जाता है, इसके अलावा उनके साथ भी मारपीट होती है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया है कि कृष्ण कृपा दास पैसों के गबन में भी शामिल हैं।

उन्होंने इस बात की शिकायत इस्कॉन के उच्चाधिकारियों से की थी। गिरधारी दास ने कहा कि उन्होंने कोलकाता में जब यह शिकायत भेजी तो सुलह समझौते के लिए उन्हें पटना बुलाया गया। इसी के बाद कृष्ण कृपा दास के बाउंसरों ने उनके साथ उनके ब्रह्मचारियों पर हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं।

कृष्ण कृपा दास- वीडियो पुराना, मामला हिस्सेदारी का

मारपीट के वीडियो सामने के बाद कृष्ण कृपा दास ने इस घटना पर कहा कि गिरधारी दास पटना मंदिर में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं इसलिए विवाद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गिरधारी दास को विवाद के बाद भागलपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन वह अब भी पटना में हिस्सेदारी चाहते हैं।

कृष्ण कृपा दास के वीडियो को लेकर इस्कॉन पटना के PRO ने कहा कि यह सात साल पुराना है। उन्होंने मारपीट की बात भी नकारी है। उनका कहना है कि मंदिर के भीतर मारपीट की बात झूठी है। मामले में कृष्ण कृपा दास की तरफ से पुलिस में भी शिकायत दी गई है। गिरधारी दास ने भी पुलिस में शिकायत दी है।

पुलिस ने क्या बताया

इस्कॉन मंदिर में मारपीट की सूचना के बाद यहाँ पटना पुलिस की टीम भी पहुँच गई। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचा कर मामले की जाँच चालू की है। पटना SDPO कृष्ण मुरारी ने बताया कि इस्कॉन मंदिर में प्रबन्धन के नियंत्रण समेत बाकी कारणों से मारपीट हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए।

पुलिस ने बताया कि अब वह साक्ष्य इकट्ठा करके जाँच करेंगे। उन्होंने बताया कि जो लोग घायल हुए हैं, उनका मेडिकल करवाया गया है और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है। उन्होंने ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया है।

साथियों संग पंडाल में घुस गया अरबाज, भगवा ध्वज को नाली में फेंका-भजन बंद करवा भोजपुरी गाना बजाने का डाला दबाव: महिला श्रद्धालुओं से बदसलूकी भी

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में दुर्गापूजा पंडाल में घुसकर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ द्वारा उपद्रव करने का मामला सामने आया है। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। साथ ही, उन्होंने पूजा के दौरान बज रहे भजन को बंद कर भोजपुरी गाने चलाने का दबाव बनाया। यह घटना शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को हुई। पुलिस ने केस दर्ज कर चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के हुसैनाबाद के पाँचूडीह गाँव की है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि हर साल की तरह इस साल भी वे मंदिर में शारदीय नवरात्रि का आयोजन कर रहे थे, जिसे असफल करने के लिए कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार ने साजिश रची।

शनिवार को ये चारों आरोपित दुर्गापूजा पंडाल में पहुँचे और भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। इसके बाद बिजली का खंभा तोड़ दिया और जनरेटर का तार खींचकर भजन बंद करवा दिया। इन लोगों ने भजन पर गंदी टिप्पणियाँ की और भोजपुरी गाने बजाने का दबाव बनाया। जब श्रद्धालुओं ने विरोध किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ताओं में राम सजीवन, राम प्यारे, रामसूरत वर्मा और हंसराज यादव के नाम शामिल हैं।

इन सभी ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए अरबाज़, कलीम, इमरान और मुख़्तार के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298, 324, 352 और 351 (3) के तहत कार्रवाई की है। रविवार (6 अक्टूबर) को चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है

दुर्गापूजा का चंदा माँग रहे लोगों से मुस्लिम ड्राइवर की हुई बहस, इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के घरों-दुकानों पर कर दिया हमला: त्रिपुरा में पत्थरबाजी में पुलिसकर्मी भी घायल

पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा में साम्प्रदायिक तनाव की खबर आई है। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला किया। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। हमलावरों ने हिंसा रोकने पहुँची पुलिस को भी निशाना बनाया। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए हैं। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह घटना रविवार (9 अक्टूबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उत्तरी त्रिपुरा जिले के कदमतला बाजार में हुई। यहाँ रविवार को दुर्गापूजा के लिए हिन्दू समुदाय के कुछ लोग सड़क पर चंदा माँग रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम ड्राइवर से उनकी बहस हो गई, जो बाद में बड़े विवाद में बदल गई। थोड़ी देर में ड्राइवर के समर्थन में आसपास के इलाकों से इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। उन्होंने न केवल चंदा माँग रहे हिन्दुओं पर हमला किया, बल्कि आसपास के निवासियों पर भी हमला कर दिया।

आरोप है कि इस दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, घरों में तोड़फोड़ की गई और दुकानों में लूटपाट भी की गई। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा, लेकिन जब पुलिस ने स्थिति को काबू करने की कोशिश की, तो हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हो गए। हिंसा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें फायरिंग की आवाजें सुनी जा सकती हैं। अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है और दो अन्य लोग घायल हुए हैं।

पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में निषेधाज्ञा (BNSS की धारा-163) लागू कर दी गई है, जिससे पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर रोक लगा दी गई है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उत्तरी त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि स्थिति अब काबू में है। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और जाँच चल रही है। हमलावरों की पहचान कर के उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

धमाके से दहला कराची का जिन्ना एयरपोर्ट, चीनी इंजीनियरों का काफिला बना निशाना: बलूच आर्मी की माजिद ब्रिगेड ने ली जिम्मेदारी, बीजिंग बता रहा ‘आतंकी हमला’

पाकिस्तान के कराची में बम धमाका हुआ है। ये धमाका जिन्ना एयरपोर्ट के पास 6 अक्टूबर 2024 को रात 11 बजे के करीब हुआ। धमाके में 2 चीनी नागरिकों के मौत की खबर है जबकि 1 चीनी नागरिक समेत 17 लोग घायल बताए जा रहे हैं। चीनी दूतावास ने इस हमले की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया विस्फोट सिंध प्रांत में बिजली परियोजना में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों के काफिले को निशाना बनाकर किया गया था। वहीं प्रांतीय गृह मंत्री जिया उल हसन ने दावा किया कि यह एक IED ब्लास्ट था। पुलिस अधिकारी ने शुरुआती जाँच के आधार पर बताया कि ये धमाका तेल टैंकर में हुआ था जिसके कारण मौके पर मौजूद कई वाहन चपेट में आ गए।

पाकिस्तानी एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस घटना के बाद जारी बयान में बताया कि एयरपोर्ट की इमारतें और संपत्ति सुरक्षित हैं। एयरपोर्ट पर उड़ानों का शेड्यूल सामान्य रूप से चल रहा है। पीएए के महानिदेशक ने बचाव कार्यों में पूर्ण सहयोग देने को कहा है।

अधिकारियों ने घटना की जाँच जारी करते हुए इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर लिए गए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रिपोर्ट बता रही हैं कि ये हमला इतना तेज था कि इसके विस्फोट की आवाज शहर के कई इलाकों तक सुनाई दी है।

सामने आए वीडियोज में खून से लथपथ लोग जमीनों पर पड़े रोते-चीखते दिख रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियोज में कारों से आग की लपटें और घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है। घटनास्थल पर भारी संख्या में सैन्यकर्मी तैनात हैं और इस इलाके को चारों ओर से घेरा गया है। इस हमले के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर कहना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान में कोई विदेशी सुरक्षित नहीं है।

चीन ने अपने बयान में विस्फोट को “आतंकवादी हमला” बताया है और कहा है कि चीन इसके बाद की स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम कर रहा है। चीन ने इस हमले की गहन जाँच किए जाने की माँग की है ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके और पाकिस्तान में चीनी नागरिकों से सुरक्षा संबंधी सावधानी बरतने को कहा है।

बता दें कि मीडिया खबरों के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिगेड ने ली है।

दिल्ली में लैंड करते ही मालदीव के राष्ट्रपति ने टेके घुटने, कहा- ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे भारत को हो खतरा: कर्ज के लिए चीन से दूर हुए मुइज्जू

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू वर्तमान में भारत की अधिकारिक यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। मोहम्मद मुइज्जू का राष्ट्रपति आवास में सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को आधिकारिक स्वागत हुआ। यहाँ उनकी अगवानी राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की।

चीन सरपरस्त माने जाने वाले मुइज्जू ने इस दौरान भारत की चिंताओं को कम करने का प्रयास किया है। मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत को खतरा पैदा होता हो। रविवार (6 अक्टूबर, 2024) को भारत पहुँचे मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय मीडिया के साथ बातचीत की।

चीन की घुसपैठ के चलते भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से एक इंटरव्यू में कहा, “मालदीव कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचे। भारत, मालदीव का एक अहम साझेदार और मित्र देश है, और हमारे संबंध सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम कई सेक्टर में दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहे हैं लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा ना हो। मालदीव भारत के साथ अपने पुराने और महत्वपूर्ण रिश्ते को आगे प्राथमिकता से बढ़ाता रहेगा और हमें यह भी विश्वास है कि मालदीव के दूसरे देशों के साथ भारत की सुरक्षा चिंताओं को ना बढ़ाएँ।”

भारतीय सैनिकों के मालदीव से वापस भेजे जाने को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि उनका यह फैसला मालदीव की जनता की माँग थी और उन्होंने उसका पालन किया है। उन्होंने कहा कि उनके इस कदम को लोकतंत्र होने के नाते भारत और इसकी जनता समझेगी।

मोहम्मद मुइज्जू का यह भारत दौरा कई मायनों में अहम है। मालदीव वर्तमान में गहरे आर्थिक संकट में है और उसे नए कर्जे की जरूरत है। इसके अलावा उसे अपने पुराने कर्जे चुकाने के लिए अधिक समय भी चाहिए होगा। मोहम्मद मुइज्जू की पीएम मोदी से मुलाक़ात में इन मुद्दों के सबसे प्राथमिकता पर रहने के कयास हैं।

मुइज्जू राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही भारत विरोधी रवैया अपनाते रहे हैं। उन्होंने मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया था और इसे राष्ट्रपति चुनाव का केंद्र बिंदु बना लिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मालदीव में राहत बचाव के काम में लगे भारतीय सैनिकों के भी वापस जाने को कहा था।

मोहम्मद मुइज्जू की कैबिनेट के मंत्रियों ने भारत प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अशोभनीय टिप्पणियाँ भी की थी। मालदीव सरकार से जुड़े लोगों ने भारत को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक कैम्पेन चलाया था। इसके बाद भारतीयों ने मालदीव ना जाने को लेकर अभियान चलाया था।

मोहम्मद मुइज्जू ने स्वयं भी अपनी पहली यात्रा भारत ना करके चीन जाना पसंद किया था। उनके भी कुछ ऐसे बयान सामने आए थे जिनसे भारत से रिश्तों में कटुता झलक रही थी। मोहम्मद मुइज्जू के इस रवैये के चलते भारत और मालदीव के रिश्ते काफी निचले स्तर पर चले गए थे।

मालदीव अब जब आर्थिक संकट में फंस गया है तो मुइज्जू वापस भारत से मदद माँगने आए हैं। वह भारत से आर्थिक पैकेज चाहते हैं और साथ ही भारत द्वारा दिए गए पुराने कर्जों को चुकाने के लिए भी अधिक समय की माँग करेंगे। मालदीव को पता लग गया है कि यदि भारत उसकी मदद नहीं करता है तो वह बड़ी समस्या में फंस जाएगा।