Home Blog Page 628

मुस्लिम लड़की ने मुस्लिम लड़के से करवाई दोस्ती… फिर कॉलेज के सभी मुस्लिम लड़कों ने जबरन बनाए संबंध: रूस से लौटा ‘इंजीनियर’, एक हिंदू लड़की से लव जिहाद ने बनाया महंत यति नरसिंहानंद

डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद के खिलाफ शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को भारत के कई हिस्सों में मुस्लिम भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किया। मुस्लिम भीड़ यति नरसिंहानंद को गुस्ताख़ बताते हुए अपने पैगंबर के अपमान का आरोप लगा रही थी। यति नरसिंहानंद इससे पहले भी कई बार अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। मुस्लिम बहुल इलाके में मौजूद पौराणिक डासना मंदिर का महंत बनने से पहले यति नरसिंहानंद की पहचान इंजीनियर दीपक त्यागी के तौर पर हुआ करती थी। आइए जानते हैं कि कैसे एक इंजीनियर रहे दीपक ने भगवा धारण करके अपने जीवन को पूरी तरह से बदला।

रूस में पढ़ाई, लंदन में नौकरी

वर्तमान में महामंडलेश्वर की पदवी प्राप्त महंत यति नरसिंहानन्द की उम्र लगभग 55 वर्ष है। उनके पिता रक्षा मंत्रालय में नौकरी करते थे। रिटायरमेन्ट के बाद वो कॉन्ग्रेस से जुड़ गए थे। उन्होंने अपने बेटे दीपक की शुरूआती शिक्षा-दीक्षा मेरठ से करवाई। हालाँकि वो मूलतः बुलंदशहर के निवासी थे। बाद में उच्च शिक्षा के लिए दीपक त्यागी रूस गए। यहाँ वो मॉस्को सहित अन्य कई शहरों में रहे। रूस में उन्होंने ‘मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल मशीन बिल्डिंग’ से मास्टर्स की डिग्री ली।

उन्होंने बतौर इंजीनियर लम्बे समय तक कार्य किया। तब दीपक त्यागी को लंदन तक से नौकरी के ऑफर मिले। उन्होंने यहाँ मार्केटिंग टीम का भी नेतृत्व किया। यति नरसिंहानंद का यह भी दावा है कि वो इजरायल की भी यात्रा कर चुके हैं और साथ ही उन्हें 1992 में ‘ऑल यूरोप ओलम्पियाड’ में गणित से विजेता घोषित किया गया था। कई अलग-अलग देशों में रहते हुए लगभग 10 वर्षों के बाद साल 1997 में दीपक त्यागी भारत लौट आए।

राजनीति से रहा जुड़ाव

दीपक त्यागी (वर्तमान में यति नरसिंहानन्द) जब भारत लौटे तो उस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में में समाजवादी पार्टी का बोलबाला हुआ करता था, तब यूपी के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव माने जाते थे। दीपक त्यागी को एक बार समाजवादी पार्टी में यूथ विंग का अध्यक्ष पद ऑफर हुआ तो उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दौरान दीपक त्यागी के बहुत से मुस्लिम दोस्त भी बने। दीपक त्यागी के पूर्वज भी समाजवादी विचारधारा वाले थे।

भाजपा नेता के भाषणों से जगी हिंदुत्व में आस्था

यति नरसिंहानन्द ने कई बार खुले मंचों से भाजपा नेता बी एल शर्मा प्रेम (अब दिवंगत) को अपना गुरु बताया है। वो बताते हैं कि समाजवादी पार्टी का पदाधिकारी रहने के दौरान उनको कई बार बी एल शर्मा ‘प्रेम’ (बैकुंठ लाल शर्मा) के भाषण सुनने को मिला। उनके द्वारा रखे गए तथ्य और दिए जाने वाले सबूतों से दीपक त्यागी का झुकाव धीरे-धीर उनकी तरफ होने लगा। हालाँकि इसके बावजूद वो समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे।

लव जिहाद की एक घटना ने बना दिया नरसिंहानंद

दीपक त्यागी के यति नरसिंहानंद बनने के पीछे लव जिहाद की एक घटना ने बहुत अहम रोल अदा किया। वह घटना शम्भू दयाल कॉलेज में पढ़ने वाली त्यागी समाज की एक लड़की से जुड़ी है जिसने तब रो-रो कर उनको (यति नरसिंहानंद) अपनी पीड़ा बताई थी। पीड़िता ने उन्हें बताया था कि एक मुस्लिम सहेली ने उसकी जान-पहचान अपने मजहब के लड़के से करवा दी थी। दोस्ती के ही दौरान मुस्लिम युवक ने पीड़िता के साथ अपने कुछ फोटो और वीडियो बना डाले थे। इसी फोटो व वीडियो को दिखाकर पीड़िता को कई मुस्लिम युवकों से संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया था।

तब पीड़िता ने दीपक त्यागी को यह भी बताया कि उसके मुस्लिम साथी ने उसको न सिर्फ अपने दोस्तों बल्कि कई नेताओं और यहाँ तक कि प्रिंसिपल तक के आगे परोसा था। लड़की ने दीपक त्यागी पर भी आरोप लगाया कि उनको चुप रहने के लिए कुछ न कुछ लालच दिया गया होगा। यहीं से दीपक त्यागी के मन को आघात लगा और वो हिंदुत्व की तरफ झुकते चले गए। उनको बी एल शर्मा प्रेम के दावों का सबूत जैसा मिल गया और वो दीपक त्यागी से यति नरसिंहानंद बन गए।

हिन्दुओं को जोड़ने के लिए चलाया ‘अजगर’ अभियान

जिस समय दीपक त्यागी ने खुद को यति नरसिंहानंद के रूप में ढाला तब उन्होंने हिंदू समाज को तोड़ने के लिए राजनैतिक लोगों द्वारा की जा रही साजिशों को समझना शुरू किया। उन्होंने पाया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में हिंदू धर्म की 4 जातियों के बीच लड़ाने की सबसे अधिक साजिश होती है। ये जातियाँ यादव, जाट, गुर्जर और राजपूत थीं। आरोप है कि तब अलग-अलग जातियों के अपने-अपने नेता थे जो एक दूसरे के खिलाफ वैमन्सयता फैला कर मुस्लिम वोट बैंक को साधते थे।

यति नरसिंहानंद ने इन चारों जातियों को जोड़ने के लिए एक अभियान चलाया था जिसका नाम उन्होंने ‘अजगर’ दिया था। अजगर एक शॉर्ट फॉर्म था जिसका पूरा नाम अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत था। यति नरसिंहानंद ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अजगर सभाएँ करवाईं। इन सभाओं में सभी जातियों को एक दूसरे का पूरक बनने और हिंदुत्व के लिए खड़े होने का संकल्प दिलवाया जाता था। इन्हीं सभाओं में यति नरसिंहानंद मुस्लिमों को देश और हिंदू धर्म के लिए खतरा बताते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की वकालत करते थे।

डासना मंदिर को चुना स्थाई ठिकाना

अपने एक इंटरव्यू में यति नरसिंहानंद ने ऑपइंडिया को बताया था कि हिन्दुओं को जागृत करने के लिए उनको एक स्थाई ठिकाने की जरूरत थी। आखिरकार उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाके डासना में मौजूद शक्तिपीठ देवी मंदिर को चुना। वहाँ जाने से पहले ही उनको पता चला था कि उनसे पहले भी कई संतों और महंतों की मंदिर में हत्या की जा चुकी थी। मंदिर में डकैती डालकर कई बार लूट भी हो चुकी थी।

यति नरसिंहानंद बताते हैं कि दशकों पहले ही उस मंदिर पर मुस्लिम आबादी कब्ज़ा करने की कगार पर थी लेकिन उन्होंने ऐसा न होने देने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ वो डासना मंदिर के पुजारी बन गए और बाद में महंत। ताजा घटनाक्रम से पहले भी उन पर मंदिर में कई बार हमले की कोशिश की जा चुकी है। हालाँकि उन्होंने किसी डर या दबाव में मंदिर छोड़ने से साफ इंकार कर दिया।

घर में ‘दरबार’ लगाता है मौलवी शान अहमद, हिंदू महिलाओं को मुस्लिम बना करवाता है खिदमत: पुलिस के पास पहुँची पीड़िता, बताया- शैतान का डर दिखा करवाता है धर्मांतरण

उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जिले के बरेसर थाना क्षेत्र में मौलवी शान अहमद पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें धर्म परिवर्तन, अश्लील हरकतें और जान से मारने की धमकियाँ शामिल हैं। यह मामला तब सामने आया जब बलिया के नरही थाना क्षेत्र की एक महिला ने मौलवी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि मौलवी ने झाड़-फूंक और शैतानी ताकत से मुक्ति दिलाने का झाँसा देकर न केवल उसके साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश की, बल्कि उसे इस्लाम कबूल करने के लिए भी मजबूर किया।

धर्म परिवर्तन और अश्लील हरकतों का आरोप

पीड़िता का कहना है कि उसके ससुराल पक्ष के लोग मौलवी शान अहमद के दरबार में विश्वास रखते थे। ससुरालियों ने मौलवी को अपने घर बुलाकर कहा कि उनके परिवार में परेशानियाँ हैं और उसकी बहू पर शैतानी ताकतों का साया है। मौलवी ने परिवार को यह विश्वास दिलाया कि महिला के शैतान के प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए उसे मौलवी के दरबार में लाना जरूरी है। इसके बाद मार्च 2024 में महिला को उसके पति ने मौलवी के पास ले जाया।

महिला के अनुसार, मौलवी ने झाड़-फूँक करने के नाम पर उसे अपने किले जैसे मकान में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकतें कीं और जब उसने इसका विरोध किया तो मौलवी ने उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। मौलवी ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपशब्द कहे और उसे इस्लामी रीतियों को अपनाने के लिए कहा। महिला का आरोप है कि जब उसने मौलवी की बातों को मानने से इंकार किया, तो मौलवी ने जान से मारने की धमकी दी।

महिला ने शिकायत में यह भी बताया कि जब उसने मौलवी की अश्लील हरकतों का विरोध किया, तो मौलवी ने धमकी दी कि अगर उसने इस्लाम कबूल नहीं किया, तो वह उसके पूरे परिवार को खत्म कर देगा। मौलवी का कहना था कि उसके पास शैतानी ताकतें हैं, जिनके जरिए वह किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुँचा सकता है। इस धमकी के कारण महिला भयभीत हो गई और किसी तरह अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग निकली।

धर्म परिवर्तन के और भी मामले

महिला का यह भी आरोप है कि मौलवी शान अहमद ने करीब 10-12 हिंदू लड़कियों और महिलाओं को मुस्लिम बनाकर अपनी खिदमत करवाता था। इन महिलाओं को आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर बनाकर, मौलवी उन्हें इस्लामी रीतियों को अपनाने के लिए मजबूर करता है। झाड़-फूँक और शैतानी ताकतों के नाम पर वह महिलाओं को अपने कब्जे में रखता और उनके साथ अनैतिक कार्य करता है।

महिला की शिकायत के आधार पर गाज़ीपुर पुलिस ने मौलवी के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने कहा कि मामले की गहन जाँच की जा रही है और मौलवी के खिलाफ सभी सबूतों को एकत्रित किया जा रहा है। फिलहाल मौलवी फरार है, लेकिन पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

पुलिस ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है, खासकर उस समय जब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि मामले की जाँच निष्पक्ष और त्वरित रूप से हो ताकि दोषी को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।

17000 फीट की ऊँचाई पर 17 किमी पैदल चले ‘डोगरा स्काउट्स’ के जवान, ग्लेशियर में खुदाई… जानिए UP के मलखान सिंह से लेकर केरल के थॉमस चेरियन का शव 56 साल बाद कैसे आया घर

56 साल बाद भारतीय वायुसेना के 4 बलिदानियों का शव उनके घर लौटा तो उनका ससम्मान अंतिम संस्कार हो पाया। इन बलिदानियों में एक नाम केरल के थॉमस चेरियन का भी था। 22 साल के चेरियन 1968 में हुए विमान हादसे के बाद गायब हुए थे। उसके बाद उनके परिवार को उनकी किसी भी तरह की सूचना का इंतजार था, लेकिन ये इंतजार 56 साल बाद खत्म हुआ।

भारतीय सेना के डोगरा स्काउट्स ने 30 सितंबर को सियाचिन ग्लेशियर से जब बलिदानियों के शव निकाले तो उसमें यूपी के सिपाही मलखान सिंह, सिपाही नारायण सिंह और मुंशी के शव के साथ थॉमस चेरियन का भी शव था। बाद में इन सबकी पहचान करके इन्हें इनके गृह नगर पहुँचाया गया और इनके परिजनों ने अपने मुताबिक शरीर का अंतिम संस्कार कर एक संतुष्टि जाहिर की। लेकिन, बलिदानियों को ये सम्मान दिलाने के लिए डोगरा स्काउट्स ने कितना संघर्ष किया इससे लोग अंजान हैं।

आइए जानते हैं किस तरह बलिदानियों का शव पहुंचाने के लिए काम किया गया

भारतीय वायुसेना के बलिदानियों के पार्थिव शरीर को उनके अपनों तक पहुँचाने के लिए डोगरा स्काउट्स के जवानों ने कड़ाके की ठंड में मेहनत की।

ऑन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना के विमान का दुर्घटनास्थल ग्लेशियर से घिरे पर्वतमाला पर 14500 से 17000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इस जगह तक पहुँचने में बहुत के रास्ते में तमाम दरारे आती है लेकिन डोगरा स्काउट्स ने योजना बनाकर इस खोज को सार्थक किया। उन्होंने रेको रडार तकनीक का प्रयोग किया जो 20 मीटर गहराई तक बर्फ में दबी धातु और वस्तुओं को पता लगाने में सक्षम होती है। इसके अलावा इलाके का मैप ड्रोन से खींची गई तस्वीरों से बनाया गया।

अधिकारी बताते हैं कि जब उन्होंने सब योजना के तहत काम शुरू किया तो मैन्युअल खुदाई के दौरान रडार सिग्नल मिले जिसके परिणामस्वरूप विमान का मलबा मिलने लगा। इसके बाद आगे अभियान जारी रखा गया तो अवशेष बरामद हुए। इसके बाद जवानों ने दुर्गम इलाकों को पार किया और 17 किलोमीटर तक पैदल चलकर शव वाहन की मदद से, फिर हवाई मार्ग से गृहनगर लेकर गए।

इन पार्थिव शरीरों को ढूँढने के मामले पर कर्नल पलरिया ने कहा कि वह दशकों से खोए सैनियों को ढूँढने के लिए अपना अभियान चला रहे हैं। इस योजना को इसलिए बनाया गया है ताकि बलिदान सैनिकों को वह सैन्य सम्मान मिले जिसके वे हकदार हैं।

1968 में हुआ विमान क्रैश

बता दें कि साल 1968 में इंडियन एयर फोर्स का AN-12 विमान क्रैश हो गया था। दुर्घटना 7 फरवरी 1968 को हुई थी। उस दिन भारतीय सैनिकों को लेह ले जाने के लिए सेना का विमान उड़ा लेकिन ये रोहतांग दर्रे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में तब 102 सैनिक सवार थे। लगातार भारतीय सेना तभी से बलिदानी सैनिकों के शव खोजने का प्रयास कर रही थी।

बाद में 2003 में वाजपेई सरकार के कार्यकाल में सेना ने यहाँ पर सर्च अभियान शुरू किया था, जिसके बाद भारतीय सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने सालों तक कई सर्च ऑपरेशन चलाए। डोगरा स्काउट्स ने 2005, 2006, 2013 और 2019 में शवों की छानबीन जारी रखी।

उत्तर प्रदेश में रेलवे को निशाना बनाने की साजिश: साबरमती एक्सप्रेस के सामने फेंकी साइकिल, पातालकोट एक्सप्रेस के इंजन में फँसी ट्रैक पर रखी लोहे की छड़

उत्तर प्रदेश में हाल ही में रेलवे को निशाना बनाकर की जा रही घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकस कर दिया है। रेलवे ट्रैक पर जानबूझकर सरिया, लकड़ी, सिलेंडर, साइकिल फेंकने जैसी घटनाएँ गहरी साजिश का संकेत दे रही हैं। ललितपुर से लेकर संत कबीर नगर और कानपुर से लेकर मध्य प्रदेश तक ऐसी कई वारदातें सामने आ चुकी हैं। ताजे मामले में ट्रेन के सामने साइकिल फेंककर नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई है, तो एक अन्य मामले में ट्रेन के सामने सरिया रख दिया गया।

संतकबीर नगर: साबरमती एक्सप्रेस को बनाया निशाना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतकबीर नगर में एक साइकिल साबरमती एक्सप्रेस के सामने फेंकी गई, जिससे ट्रेन का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को तुरंत रोका, लेकिन इंजन में साइकिल फँस गई। रेल पुलिस के अनुसार शनिवार की सुबह करीब 6:30 बजे सुबह गोरखपुर से लखनऊ की ओर जा रही साबरमती एक्सप्रेस खलीलाबाद के पुराना आरटीओ कार्यालय के पास से गुजर रही थी। इस दौरान अज्ञात व्यक्ति ट्रेन के आगे साइकिल फेंककर भाग निकला। ट्रेन में फंसी साइकिल देख चालक ने सात सौ मीटर आगे जाकर ट्रेन रोक कर क्षतिग्रस्त हुई साइकिल निकाली। इसके बाद ट्रेन आगे रवाना हुई।

एसपी सत्यजीत गुप्ता सहित कोतवाली के साथ कई थानों के एसएचओ मौके पर पहुँचे। साथ ही जीआरपी के एसओ, सीओ, आरपीएफ के अधिकारी घटना स्थल के आस पास साइकिल फेंकने वाले की तलाश कर रहे हैं। हालाँकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना रेलवे की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है। यह घटना स्पष्ट करती है कि रेलवे के सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिस ने इसे बच्चों की शरारत मानकर जाँच की, लेकिन इससे बड़ी साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

ललितपुर: लोहे की छड़ से पातालकोट एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश

ललितपुर में पातालकोट एक्सप्रेस के साथ भी एक गंभीर घटना घटी, जब ट्रैक पर रखी गई लोहे की छड़ ट्रेन के इंजन में फंस गई। ट्रेन संख्‍या 14624 पातालकोट एक्‍सप्रेस के इंजन में लोहे की सरिया फंस गई. जिससे चिंगारी निकलने लगी। गेटमैन की सूचना पर ट्रेन के लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बड़ी दुर्घटना होने से बचा लिया। पुलिस की जाँच में पता चला कि युवक सत्यम यादव ने रेलवे की कंस्ट्रक्शन साइट से छड़ चुराई थी और भागते समय ट्रेन के डर से इसे ट्रैक पर छोड़ दिया। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा में चूक को उजागर किया है और यह संकेत देती है कि ऐसी घटनाएँ सुरक्षा के बड़े खतरे का हिस्सा हो सकती हैं।

वारदातों के पीछे का मकसद क्या?

रेलवे को निशाना बनाकर की जा रही इन घटनाओं का मकसद केवल शरारत नहीं हो सकता। यह घटनाएँ आतंकी साजिशों का हिस्सा भी हो सकती हैं, जिनका मकसद भारत को बड़ा नुकसान पहुँचाना हो सकता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि वे इन वारदातों के पीछे के असली मकसद को समझें और इसके अनुसार कार्रवाई करें।

अमरावती से हरिद्वार तक ‘सिर तन से जुदा’ गैंग का उपद्रव, कहीं पुलिस पर हमला-कहीं भगवाधारी का फूँका पुतला: बोले बीजेपी MLA- डासना मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानन्द को गुस्ताख़ करार देते हुए मुस्लिम भीड़ ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को देश के कई हिस्सों में हिंसा की। इसमें UP के बुलंदशहर और गाजियाबाद, महाराष्ट्र का अमरावती और उत्तराखंड का हरिद्वार शामिल हैं। अमरावती में भीड़ द्वारा थाने पर किए गए हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। कई सरकारी वाहनों को तोड़ डाला गया है।

अमरवती में कई पुलिसकर्मी घायल

जुमे की नमाज़ के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र का अमरावती रहा। यहाँ के नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन पर शुक्रवार रात लगभग 8:30 पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पहुँचे। इन्होंने यति नरसिंहानंद के खिलाफ शिकायती पत्र देकर केस दर्ज करने की माँग शुरू कर दी। पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर ली।

अभी पुलिस जरूरी कार्रवाई कर ही रही थी कि हजारों की तादाद में पहुँची मुस्लिम भीड़ ने थाने को घेर लिया और उन्मादी नारे लगाने लगी। पुलिसकर्मी भीड़ को समझाने की कोशिश ही कर रहे थे कि अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव के चलते कुल 21 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त फ़ोर्स को बुलाया गया।

फोर्स के आने तक हमलावर भीड़ ने पुलिस के 10 वाहनों को तोड़ डाला। बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इस मामले में पुलिस ने 1200 उपद्रवियों पर केस दर्ज कर लिया है। कुछ हमलावरों को भी चिन्हित किया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 302 और 197 के तहत कार्रवाई की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से हमलावरों की पहचान की जा रही है। अब तक 26 हमलावरों को चिन्हित कर लिया गया है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है।

हरिद्वार में अल्लाह हु अकबर के नारे

मज़हबी उन्माद की लम्बी श्रृंखला की चपेट में उत्तराखंड का हरिद्वार भी आया। यहाँ दिन में यति नरसिंहानंद पर एक्शन की माँग की आड़ में जुटी मुस्लिम भीड़ ने भगवा वस्त्र का पुतला बनाया और इस पुतले को आग के हवाले करद दिया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। इसी के साथ रात में एक अन्य मुस्लिम भीड़ ने चौराहे पर जुटकर नारेबाजी की।

इस नारेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ जैसे भड़काऊ नारे के साथ-साथ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगा रही है। यह नारेबाजी पुलिस के सामने ही की गई है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी भीड़ की ओर से लौटते दिख रहे हैं।

सहारनपुर में भी पुलिस चौकी पर हमले का प्रयास

गुस्ताखी की आड़ में हो रहे सिलसिलेवार उपद्रवों की लिस्ट में अब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का नाम भी जुड़ गया है। यहाँ के कोतवाली देहात क्षेत्र में शेखपुर कदीम पुलिस चौकी पर 6 अक्टूबर (रविवार) को एक मुस्लिम भीड़ यति नरसिंहानंद के खिलाफ ज्ञापन देने पहुँची थी। पुलिस इस ज्ञापन पर कार्रवाई कर ही रही थी कि अचानक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने हिंसा करनी शुरू कर दी। भीड़ द्वारा नारेबाजी की गई और पुलिस चौकी पर उपद्रव का प्रयास हुआ।

भीड़ की हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने फ़ौरन ही बल प्रयोग कर के हिंसक हो चुकी भीड़ को तितर-बितर किया। सहारनपुर जिले के पुलिस अधीक्षक नगर ने बताया कि केस दर्ज कर के जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कुछ हमलावरों को चिन्हित भी कर लिया गया है जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। फ़िलहाल मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं।

मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

उधर, गाजियाबाद में डासना मंदिर पर उन्मादी भीड़ के हमले के बाद आसपास के लोगों में आक्रोश पनप रहा है। शनिवार (5 अक्टूबर) को लोनी से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर मंदिर पहुँचे। उन्होंने हमलावरों का एनकाउंटर करने की माँग की। भाजपा MLA ने कहा कि बेहतर होता कि हमले के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बजाय गोलियाँ बरसातीं।

नंद किशोर के मुताबिक, नरसिंहानंद का बयान दुनिया भर में में हो रहे हिन्दुओं के साथ इस्लामी अत्याचारों की वजह से आया है। मंदिर घेरने को उन्होंने सनातन और हिन्दुओं की आस्था पर हमला बताया। विधायक का दावा है कि हमले में अधिकतर लोग बाहरी थे। नंदकिशोर ने कहा, “यहाँ का मुसलमान तो भगवान राम को मानने वाला है। ये बेचारे को बलत्कार से बचने के लिए मुस्लिम बन गए।”

9 साल की हिंदू बच्ची से 55 साल के निसार कुरैशी ने किया बलात्कार, मोहल्ले में फल बेचता था: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 55 साल के निसार कुरैशी पर 9 साल की एक हिन्दू बच्ची से बलात्कार करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके निसार कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। आरोपित निसार मोहल्ले में ठेला लगाकर फल बेचा करता था। घटना गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) की है।

जिले के ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी बाजार में 9 साल की बच्ची अपने परिवार के साथ रहती है। बच्ची बेहद गरीब परिवार की है, जिसका पिता रिक्शा चलाकर परिजनों का भरण-पोषण करता है। बच्ची के पिता ने 3 अक्टूबर को थाने में तहरीर देकर बताया कि उसकी बेटी रोते हुए आई तो उसने इसकी वजह पूछा। तब बच्ची ने बताया कि निसार कुरैशी ने उसके साथ रेप किया है।

निसार बच्ची को एक सरकारी स्कूल के पीछे ले जाकर उसके साथ रेप किया। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है। रेप के कारण तबीयत बिगड़ने के बाद पीड़ित बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वहीं, बच्ची की काउंसिलिंग करवाई गई। कहा जा रहा है कि निसार ने पीड़िता के साथ पहले भी छेड़खानी की थी।

पुलिस ने निसार कुरैशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5 (ड)/6 के तहत FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। निसार कुरैशी को जैसे ही जानकारी मिली कि उसके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है तो वह फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोचने के लिए टीम गठित कर दिया।

आरोपित मोहम्मद निसार कुरैशी की गिरफ्तारी के लिए टीम ने छापेमारी शुरू कर दी। आखिरकार शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को निसार कुरैशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी एक नहर के पास से हुई। वह कहीं भागने की फिराक में लगा हुआ था। पुलिस ने आरोपित को जेल भेज दिया है। मामले में पुलिस द्वारा जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

‘हम ड्यूटी पर जाएँगे, लेकिन कुछ भी नहीं खाएँगे’: बंगाल में जूनियर डॉक्टरों ने शुरू किया आमरण अनशन, कहा- ममता बनर्जी की सरकार ने पूरा नहीं किया वादा

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जूनियर डॉक्टर्स की ओर से शुरू किए गए आमरण अनशन ने एक बार फिर से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और उसकी हत्या के खिलाफ जूनियर डॉक्टर्स न्याय की माँग कर रहे हैं। यह मामला अब राज्य सरकार के लिए सिरदर्द बन चुका है, क्योंकि डॉक्टर्स का गुस्सा शाँत होने का नाम नहीं ले रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर्स का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी माँगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। डॉक्टरों ने 21 सितंबर को 42 दिनों के लंबे विरोध प्रदर्शन को समाप्त किया था, जब सरकार ने उनकी माँगों पर बातचीत करने का वादा किया था। इसके बाद डॉक्टर्स ने अपनी ड्यूटी पर लौटने का निर्णय लिया, लेकिन शनिवार (05 अक्टूबर 2024) शाम को उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया।

उनकी माँगें हैं—आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की घटना पर त्वरित न्याय हो, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाया जाए, सभी अस्पतालों में सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएँ, और चिकित्सा संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो। उनकी सबसे महत्वपूर्ण माँग यह है कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में केंद्रीयकृत रेफरल प्रणाली लागू की जाए, ताकि अस्पतालों में बेड और इलाज की सुविधाओं की उपलब्धता पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित हो सके।

डेडलाइन खत्म, अनशन शुरू

शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को धर्मतला स्थित डोरीना क्रॉसिंग पर धरने पर बैठे डॉक्टर्स ने राज्य सरकार को अपनी माँगें पूरी करने के लिए 24 घंटे की डेडलाइन दी थी, लेकिन जब सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो उन्होंने शनिवार (05 अक्टूबर 2024) की शाम को अनशन शुरू कर दिया।

जूनियर डॉक्टर्स की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हमने सरकार को 24 घंटे का समय दिया था, लेकिन हमारी माँगें पूरी नहीं की गईं। अब तक छह डॉक्टर्स ने आमरण अनशन शुरू किया है। हम ड्यूटी पर जाएँगे, लेकिन कुछ भी नहीं खाएँगे। अगर किसी डॉक्टर की तबियत बिगड़ती है, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।”

अनशन पर बैठीं डॉक्टर सायंतनी घोष हाजरा ने कहा, “जब तक हमारी मानवीय माँगों को पूरा नहीं किया जाता, हम यहाँ से नहीं हटेंगे। ‘अभया’ के साथ जो हुआ, वह किसी के साथ भी हो सकता था। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि अब और ‘अभया’ न हों। हम भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर हम देख रहे हैं कि एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और हत्या हो गई… 9 अगस्त के बाद भी कई मामले सामने आए हैं, फिर भी सिर्फ हम छह लोग यहाँ अनशन पर बैठे हैं, जबकि बाकी डॉक्टर्स नवरात्रि के दौरान अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।”

जूनियर डॉक्टर्स का यह बयान राज्य सरकार के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वे अस्पतालों में मौजूदा बुनियादी सुविधाओं की कमी, जैसे सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति, ऑन-कॉल रूम की हालत और सुरक्षा की घोर लापरवाही पर भी रोष जता रहे हैं।

डॉक्टरों का यह भी आरोप है कि कोलकाता पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और उन्हें धरनास्थल पर मंच लगाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस का दावा था कि यह इलाका ट्रैफिक के लिए अहम है, जिससे ट्रैफिक में दिक्कत हो सकती है। जिसके बाद डॉक्टरों ने पुलिस पर अपने अधिकारों का हनन करने का भी आरोप लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई थी फटकार

आरजी कर अस्पताल में हुई इस घटना के बाद देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की सुस्त प्रगति पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 15 अक्टूबर तक अस्पतालों में सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया तो सरकार को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, “पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में सुरक्षा के उपाय बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक सिर्फ 22% सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आखिर क्यों 50% से अधिक काम किसी भी क्षेत्र में पूरा नहीं हुआ है?” सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं, जैसे सीसीटीवी कैमरे, ड्यूटी रूम और शौचालय, को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले, कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा, एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती का आदेश भी दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। अब यह मामला CBI की जांच के दायरे में है, जो डॉक्टर के साथ हुई इस भयावह घटना की पूरी सच्चाई को उजागर करेगी।

डॉक्टरों की लंबी लड़ाई जारी

डॉक्टर्स के संघर्ष का यह सिलसिला तभी शुरू हुआ जब 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की खबर ने पूरे देश को हिला दिया था। जूनियर डॉक्टरों ने इसे अपनी सुरक्षा के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में लिया और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि अगर समय पर सुरक्षा उपाय होते, तो यह घटना रोकी जा सकती थी।

डॉक्टरों की हड़ताल और आमरण अनशन के बाद से राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य सरकार विफल रही है।

नहर में मिली जिस 10 साल की बच्ची की लाश, उसके हाथ-पाँव सब टूटे थे: पीड़ित परिजनों का दावा- शिकायत लिखने को भी तैयार नहीं थी बंगाल पुलिस

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के कुलतली में बच्ची से रेप और हत्या की घटना के मामले परिजनों ने हैरान करने वाला दावा किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस उनकी बिटिया के गायब होने की शिकायत ही नहीं लिख रही थी। वो मामले को अनदेखा करने की कोशिश कर रहे थे। वहीं जब बेटी मिली तो उसके हाथ-पाँव टूटे हुए थे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पीड़िता की चाची ने बताया, “बच्ची ट्यूशन से आते समय लापता हो गई थीं। उसके पिता ने उसे हर जगह ढूँढने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। वह पुलिस के पास गए। पुलिस ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। उसके बाद उन्हें जयनगर थाने जाने को कहा गया। जब बच्ची मिली तो उसके शरीर पर कई चोटें थीं, उसके हाथ-पैर टूटे हुए थे।”

बता दें कि दक्षिण 24 परगना में इस घटना के बाद से काफी बवाल मचा हुआ है। स्थानीय लोगों में खासी नाराजगी है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने आक्रोशित भीड़ को शांत करवाकर कानून व्यवस्था को नियंत्रित कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इस घटना पर बरुईपुर एसपी पलाश चंद्र का भी बयान आया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई से अवगत कराते हुए कहा है कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर बहुत गंभीर है और मामले की जाँच की जा रही है।

वहीं राज्य में विपक्षी दल ममता सरकार को पहले आरजी कर मामला और अब नाबालिग लड़की की हत्या मामले में घेर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि इस मामले में लड़की के साथ बलात्कार हुआ था और सीएम बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए। वहीं बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि समय पर कार्रवाई न किए जाने के कारण बलात्कार के मामलों में वृद्धि हुई है।

बच्ची की हत्या और रेप

गौरतलब है कि दक्षिण 24 परगना के कृपाखाली गाँव में शुक्रवार (4 अक्टूबर, 2024) को 10 वर्षीय बच्ची गायब हो गई थी। बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी जिसके बाद वह वापस नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने FIR भी दर्ज करवाई थी। बच्ची की लाश शनिवार (5 अक्टूबर, 2024) को सुबह नहर के पास बरामद हुई थी। उसकी लाश पर चोट के कई निशान थे। नाबालिग का शव बरामद होने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध किया तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं और इस तरह उन्हे शांत कराया गया। इस मामले में पुलिस ने मुस्तकीन सरदार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है मुस्तकीन से अभी पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि उसने कत्ल की बात को स्वीकार कर लिया है, लेकिन रेप की बात से इनकार कर रहा है। अब पुलिस आगे अपनी जाँच के आधार पर कार्रवाई करेगी।

गाजा की मस्जिद में छिपे बैठे थे हमास के आतंकी, इजरायल ने हवाई हमले से कर दिया ‘समतल’: बेरूत में हिजबुल्लाह के कई ठिकाने भी तबाह

इस्लामी आतंकियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई में आक्रामकता बढ़ गई है। उसने गाजा पट्टी में आतंकी संगठन हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारी बमबारी की है। इस कार्रवाई में हमास के कम से कम 21 आतंकी मारे गए हैं। कहा जा रहा है कि ये आतंकी एक मस्जिद में छिपे हुए थे। हमले में मस्जिद सहित अन्य इमारतें भी नेस्तनाबूद हुई हैं।

इज़रायली सेना का कहना है कि युद्धक विमानों ने कुछ समय पहले ही आतंकियों पर सटीक निशाना साधा था। दरअसल, मध्य गाजा पट्टी के डेर अल-बलाह में इब्न रुश्द स्कूल के परिसर में हमास का कमांड सेंटर मौजूद था और इसमें ये आतंकी मौजूद थे। अल-बलाह में हमास के दूसरे नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया, जो शुहादा अल-अक्सा मस्जिद कहलाता है।

इजरायली सेना का कहना है कि हमास द्वारा कमांड सेंटर का इस्तेमाल IDF बलों और इज़रायल के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जाता था। IDF का कहना है कि हमले में नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सटीक हथियारों का उपयोग और पुष्ट खुफिया जानकारी सहित कई उपाय किए गए थे।

वहीं, लेबनान की राजधानी बेरूत के उपनगरों में इजरायल की सेना ने भी बमबारी की है। इस्लामी मीडिया हाउस अल जजीरा की के अनुसार, कार्रवाई की वजह से बेरूत में बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए हैं और आग की लपटें आसमान तक पहुँच रही हैं। लेबनान के समाचार चैनलों के मुताबिक, इजरायल ने बेरूत में रात भर 30 से अधिक हमले किए।

बेरूत का दक्षिणी इलाका आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। यह इजरायली सेना के विशेष निशाने पर है। इजरायली सेना IDF ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने बेरूत में हिजबुल्लाह के कई हथियार गोदामों और अन्य बुनियादी ढाँचे पर हमले किए। उसने कहा कि इस हमले को लेकर उसने इलाके के नागरिकों को पहले ही चेतावनी दे दी थी।

उधर, हिजबुल्लाह के चीफ नसरल्लाह के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले हाशेम सफीद्दीन के भी मारे जाने की बात कही जा रही है। अल जज़ीरा ने लेबनान एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया कि हिज़्बुल्लाह ने अपने कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष हाशेम सफ़ीद्दीन से संपर्क खो दिया है।

नदीमर्ग के अर्धनारीश्वर मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापित, 20 साल बाद कश्मीरी पंडितों ने की पूजा-अर्चना: प्रशासन ने बताया नए युग की शुरुआत, सुविधाओं का होगा विकास

कश्मीर घाटी के शोपियाँ जिले में नदीमर्ग गाँव के अर्धनारीश्वर मंदिर में 20 साल के लंबे अंतराल के बाद कश्मीरी पंडितों ने पूजा-अर्चना की। शनिवार (05 अक्टूबर 2024) को हुई इस पूजा के दौरान मंदिर में मूर्ति स्थापना भी की गई। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक घटना है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस मौके पर दूर-दराज के इलाकों से भी लोग आए और पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया।

शोपियाँ के उपायुक्त (डीसी) मोहम्मद शाहिद सलीम डार ने खुद अर्धनारीश्वर मंदिर का दौरा किया। उन्होंने इस मौके को एक नए युग की शुरुआत बताया, जो शांति और समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम है। डीसी ने मंदिर परिसर में पूजा करने आए श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। इसमें सामुदायिक भवन या यात्रा भवन की स्थापना की माँग प्रमुख रही। इस पर डीसी ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, ताकि भविष्य में भी श्रद्धालुओं को उचित सुविधाएँ मिल सकें।

पूजा के दौरान, जिला प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ अन्य आवश्यक सेवाओं का भी खास ध्यान रखा। स्थानीय अधिकारियों और अन्य विभागों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि सभी श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएँ मिलें और किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो।

इस पूजा आयोजन के दौरान डीसी मोहम्मद शाहिद सलीम डार ने नदीमर्ग गाँव में उन घरों का भी दौरा किया जो कश्मीरी पंडितों के हैं और लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस बात की ओर संकेत करता है कि प्रशासन इस समुदाय के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए गंभीर है। इन घरों के दौरे से प्रशासनिक अधिकारियों ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

20 साल बाद लौटी परंपरा

यह पूजा आयोजन इसलिए खास है क्योंकि नदीमर्ग के अर्धनारीश्वर मंदिर में पिछले 20 सालों से कोई धार्मिक क्रियाकलाप नहीं हुआ था। घाटी में आतंकवाद और तनाव के कारण कश्मीरी पंडितों का इस क्षेत्र से पलायन हुआ, और उनके मंदिर वीरान हो गए थे। लेकिन अब, इस आयोजन ने यह साबित किया है कि धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है और पंडित समुदाय अपने सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों को पुनः प्राप्त कर रहा है।

कश्मीरी पंडितों का इस तरह से अपने मंदिरों में लौटना और पूजा करना घाटी में नए उम्मीदों और संभावनाओं को जन्म देता है। यह केवल धार्मिक क्रियाकलाप नहीं है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विरासत की पुनर्प्राप्ति है, जो दशकों से खोई हुई थी।