Home Blog Page 627

गोंडा में दुर्गा पूजा पर कट्टर मुस्लिमों का हमला: असलम, सुलतान, मुन्ना ने चलाए पत्थर, देवी-देवताओं को कहे अपशब्द – बच्चों को भी पीटा, एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में मुस्लिमों ने एक दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने पूजा पंडाल में शामिल हिन्दुओं पर पथराव किया और देवी-देवताओं को अपशब्द कहे। उन्होंने बच्चों तक को लाठियाँ लेकर दौड़ाया। पुलिस ने पथराव की घटना के बाद मामला दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोंडा के मसकनवा बाजार इलाके में बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्ति स्थापित करने के बाद देवी की आँखों पर से पट्टी हटाई गई थी। इस मूर्ति की स्थापना बीते कई सालों से की जाती है। इस मौके पर यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू इकट्ठा थे।

पूजा अर्चना के बाद कुछ हिन्दू बच्चे इस पंडाल के बाहर पटाखे फोड़ने लगे। पटाखों की आवाज सुन कर पास में रहने वाले मुस्लिम भड़क गए। मुस्लिम परिवार के लोग बाहर निकल कर हिन्दुओं को गालियाँ देने लगे और हमलावर हो गए। उन्होंने पहले हिन्दुओं पर पथराव किया और फिर लाठी डंडों से हमला कर दिया।

इस हमले में मुन्ना, सुल्तान और असलम तथा बाकी लोगों के मुस्लिम परिवार शामिल थे। मुस्लिमों की इस पत्थरबाजी में लगभग 10-12 हिन्दू गंभीर रूप से घायल हो गए। मुस्लिमों को जब हिन्दुओं ने शांत करने की कोशिश की तो वह और उग्र हो गए तथा आसपास से बाकी मुस्लिमों को भी बुलाया।

इसके बाद इस विषय में पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर गोंडा के डीएम और एसपी समेत भारी संख्या में पुलिस बल पहुँचा और मुस्लिमों का हमला रोका। इस पथराव में बच्चे भी घायल हुए हैं। घायल हुए लोगों का इलाज जारी है।

हिन्दुओं ने मुस्लिमों के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई है। इस हमले में पुलिस 12 मुस्लिमों को आरोपित बनाया है। कुछ अवैध लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है। हमला करने वाले मुस्लिमों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। मामले की अभी जाँच चल रही है।

दिल्ली की महिला CM क्यों नहीं रह पा रही हैं अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ में? AAP की राजनीति में हमेशा छीछालेदर क्यों?

दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास को लेकर मामला गर्माया हुआ है। 9 अक्तूबर को स्थिति ऐसी आ गई कि पीडब्लूडी (पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट/लोक निर्माण विभाग) को आवास ही सील करना पड़ा। अब इसमें न अरविंद केजरीवाल रह रहे हैं और न वर्तमान सीएम आतिशी। आवास को आवंटित करने का अधिकार पीडब्लूडी पर है। वहीं फैसला लेंगे कि ये किसे दिया जाएगा।

कहा जा रहा है जब अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देने के बाद बंगला छोड़ा तो उन्होंने इसकी चाबी पीडब्लूडी को दी ही नहीं, जो तस्वीर सामने आई थी वो मात्र दिखावा थी। वहीं इसके बाद सीएम आतिशी इसमें सामान रखने लगीं। इसी को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए और मामला प्रकाश में आया। अब सीएम आतिशी की ओर कहना है कि उनका सामान एलजी ने आवास से बाहर फिंकवा दिया है जबकि एलजी का इस संबंध में कहीं कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

केजरीवाल के बाद बंगले में शिफ्ट हुईं सीएम आतिशी

मालूम हो कि 17 सितंबर को अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और 21 सितंबर को आतिशी ने सीएम पद की शपथ ली थी। इसके बाद 4 अक्तूबर को खबर आई कि ‘ईमानदारी की मूरत’ केजरीवाल ने खुद ही सीएम आवास (6 फ्लैगस्टॉफ रोड बंगला) खाली कर दिया है और फिरोजशाह कोटला स्थित AAP सांसद अशोक मित्तल के आवास पर शिफ्ट हो गए हैं।

सुनीता केजरीवाल की बाकायदा चाबी सौंपते फोटो भी दिखाई गई जिसे देख कई AAP समर्थक भावुक हुए। सबने अपने अंदाज में अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी और निष्ठा की तारीफ की। लेकिन, इसके बाद पीडब्लूडी द्वारा लिखे गए पत्र से पता चला कि सुनीता केजरीवाल ने ये चाबी पीडब्लूडी को दी ही नहीं। फोटो खिंचाते टाइम जो चाबी सौंपी गई थी वो भी बाद में वापस ले ली गई।

पीडब्लूडी को चाबी देना क्यों जरूरी

दरअसल, जब भी कोई अधिकारी या नेता सरकारी आवास को खाली करता है तो बंगले की चाबी पीडब्लूडी को दी जाती है। इसके बाद पीडब्लूडी उसे कब्जे में लेकर उसकी इंवेंट्री बनाता है और उसके बाद घर किसी को आवंटित होता है। इस मामले में चाबी पीडब्लूडी तक पहुँची ही नहीं। सीधे 7 अक्तूबर को सीएम आतिशी बंगले में शिफ्ट हो गईं और अपना सामान वहाँ रखवा दिया।

इसके बाद पहले विजिलेंस विभाग ने केजरीवाल के स्पेशल सेक्रेट्री समेत तीन अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस भेजा। सवाल हुए कि सीएम आवास की चाबियाँ पीडब्लूडी को क्यों नहीं सौंपी गईं। वहीं जब अन्य दलों को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने भी सवाल खड़े किए। भाजपा ने भी पूछा कि आखिर शीशमहल में ऐसा क्या है जो चाबियाँ देकर वापस ले ली गई। विवाद बढ़ा तो पीडब्लूडी ने इस पर एक्शन लेते हुए 9 अक्तूबर को बंगला सील कर दिया।

बंगला हुआ सील

जानकारी के मुताबिक, PWD के अधिकारी 9 अक्तूबर 2024 की सुबह 11-11:30 बजे सीएम आवास आए थे जहाँ उन्हें आवास की चाबियाँ सीएम आतिशी के पास मिलीं, जब सवाल हुए तो पता चला कि आतिशी पर सिर्फ चाबियाँ हैं, बंगले से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज नहीं। ऐसे में उनसे चाबियाँ ले ली गईं और आवास सील कर दिया गया।

इसके बाद सीएम आतिशी ने एलजी पर इल्जाम लगाया कि उन्होंने भाजपा के कहने पर उनको सीएम आवास से बाहर करवाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम आवास किसी बड़े भाजपा नेता को देने की तैयारी हो रही है। वो बंगले को हथियाना चाहते हैं। इसी प्रकार आप नेता संजय सिंह ने भी कहा कि भाजपा ये आवास कब्जाना चाहती है इसलिए ये सब हुआ है।

क्या ‘शीशमहल’ है मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास

सच्चाई जबकि ये है कि जिस ‘शीशमहल’ बंगले पर ताला लगा है वो कोई आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास नहीं है। इसके मालिक पीडब्लूडी हैं। उन्हें ही अधिकार है कि वो इसे किसे आवंटित करेंगे। वहीं सीएम आतिशी को पहले से 17एबी मथुरा रोड का आवास मिला हुआ है। ऐसे में उन्हें दो आवास कैसे मिल सकते हैं। जानकारी ये भी हो कि दिल्ली में मुख्यमंत्री के लिए कोई आधिकारिक आवास नहीं है। अरविंद केजरीवाल से पहले सीएम रहीं शीला दीक्षित पहले एबी-17 मथुरा रोड और दूसरे कार्यकाल में 3 मोतीलाल नेहरू मार्ग वाला बंगला में रही थीं। वहीं 1993 में मदनलाल खुराना को 33 शामनाथ मार्ग मिला था और साहिब सिंह वर्मा 9 शामनाथ मार्ग मिला था।

हनुमान पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे, राम जी ने पहली बार पढ़वाया था: सरकारी टीचर जियाउद्दीन ने क्लास में कहा- वे मूर्ख थे, गंगा भी देवी नहीं

बिहार के बेगूसराय में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने हिंदुओं के आराध्य भगवान राम और हनुमान जी को मुस्लिम बताया है। क्लास में पढ़ाते समय जियाउद्दीन ने बच्चों से कहा कि ‘भगवान राम और उनके भक्त हनुमान पहले मुसलमान थे। वे नमाज पढ़ा करते थे।’ इतना ही नहीं, उसने हनुमान जी को मूर्ख और माँ गंगा को शक्तिहीन बताया। इसकी जानकारी लोगों को मिली तो उन्होंने हंगामा कर दिया। वहीं, बेगूसराय से भाजपा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शिक्षक पर कार्रवाई की बात कही है।

मोहम्मद जियाउद्दीन बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में स्थित हरिपुर कादराबाद के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक है। मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) को वह 7वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहा था। सामान्य ज्ञान और व्याकरण की कक्षा के दौरान उसने यह आपत्तिजनक बातें कही। शिक्षक जियाउद्दीन ने कहा, हनुमान जी पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे। रामजी ने उन्हें पहली बार नमाज पढ़वाया था।”

इतना ही नहीं, ईटीवी के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 से इस स्कूल में पदस्थापित शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने क्लास में बच्चों को पढ़ाते वक्त माँ गंगा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। गंगा नदी की शक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए उसने बच्चों से कहा, “गंगा नदी देवी का रूप नहीं है। अगर ऐसा होता तो लोग गंगा नदी में डूब क्यों जाते… मर क्यों जाते…?” 

स्कूल के विद्यार्थी जब घर गए तो उन्होंने परिजनों और गाँव वालों को इस बात की जानकारी दी। इसके बाद गाँव वाले एकजुट होकर उसी दिन शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन के घर गए थे। कहा जा रहा है कि लोगों के गुस्से को देखते हुए शिक्षक ने माफी माँग ली। हालाँकि, लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ। अगले दिन बुधवार को जब स्कूल खुला तो छात्रों के परिजन स्कूल पहुँच गए और विद्यार्थियों से पूछताछ की।

साहिबा परवीन नाम की छात्रा ने कहा, “टीचर ने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के पहले ऐसे भगवान हैं, जिन्होंने नमाज पढ़ी थी। उनको रामजी ने नमाज पढ़वाया था। हनुमान जी मुसलमान हैं।” वहीं, मानव कुमार नाम के छात्र ने कहा, “जियाउद्दीन सर ने क्लास में हनुमान जी मुस्लिम थे। हनुमान जी पढ़ने-लिखने में मूर्ख थे। मूर्खता के कारण ही वो पर्वत उठा लाए थे। उन्हें राम जी ने पहली बार नमाज पढ़ाया था।”

अन्य विद्यार्थियों ने भी यही बातें दोहराईं। इतनी बातें सुनकर परिजनों के साथ-साथ स्कूल के अन्य शिक्षक भी सन्न रह गए। उन्होंने मोहम्मद जियाउद्दीनसे नाराजगी जाहिर जाहिर की। विद्यार्थियों के मुँह से इतना सुनते ही परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और हंगामा करते हुए शिक्षक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। परिजनों की नाराजगी को देखते हुए मोहम्मद जियाउद्दीन ने एक बार फिर माफी माँगी।

शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने कहा, “मैंने गलती से ऐसी बातें बच्चों को पढ़ा दी। मुझसे गलती हो गई, माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसा नहीं होगा।” जियाउद्दीन ने परिजनों से कहा कि वह उसने ‘मुसल्लम ईमान’ की बात छात्रों को बताई। जब परिजनों ने उससे पूछा कि बच्चों को उसने क्या पढ़ाया था तो इस सवाल के वह जवाब में चुप्पी साधे रहा। इसके बाद परिजनों के गुस्सा और बढ़ गया।

परिजनों ने शिक्षक जियाउद्दीन को निलंबित कर उस पर एफआईआर दर्ज करने की माँग पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने की जानकारी जब अधिकारियों को हुई तो बीडीओ अभिषेक राज और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निर्मला कुमारी स्कूल पहुँचे और जाँच की। बीडीओ ने कहा कि शिक्षक ने परिजनों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। हालाँकि, जाँच के दौरान शिक्षक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

इस घटना के बाद बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के महान भक्त हैं। इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्होंने धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जिला प्रशासन से शिक्षक पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की है।

गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने बयान का वीडियो जारी करते हुए कहा, “बछवाड़ा प्रखंड के हरपुर, कादराबाद (बेगूसराय) के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक जियाउद्दीन द्वारा भगवान राम और हनुमान जी को मुसलमान बताने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। जियाउद्दीन ने इसे स्वीकारा और मुस्लिम छात्राओं समेत अन्य ने पुष्टि की। समाज में विद्वेष फैलाने वाले ऐसे शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

अवैध संजौली मस्जिद गिराने पर पलटे मुस्लिम, पहले की तोड़ने की बात, अब हाई कोर्ट जाने का किया ऐलान: मंडी की अवैध मस्जिद भी नहीं तोड़ी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अवैध रूप से बनाई गई संजौली मस्जिद को लेकर मुस्लिम अपनी ही बातों से पीछे हट रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के बाद पहले मुस्लिमों ने इस मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने का प्रस्ताव दिया था लेकिन अब मुस्लिम संगठन इसको लेकर कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। शिमला के अलावा मंडी की मस्जिद को मुस्लिमों ने ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी गिराना चालू नहीं किया है। हिन्दुओं ने इसको लेकर अल्टीमेटम दिया है।

शिमला की संजौली मस्जिद को लेकर सितम्बर माह में काफी बवाल हुआ था। स्थानीय हिन्दुओं ने इसको गिराए जाने की माँग की थी। तब मस्जिद कमिटी ने नगर निगम कार्यालय में स्वयं आवेदन देकर माँग की थी कि मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ दिया जाए। मस्जिद कमिटी ने कहा था कि बाहरी लोगों ने आकर इस मस्जिद में अवैध रूप से निर्माण किया है और इसको गिराने जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा था कि भाईचारे के चलते हम यह मस्जिद गिराना चाहते हैं।

मस्जिद कमिटी के इस आवेदन पर 5 अक्टूबर, 2024 को नगर निगम ने तोड़ने की अनुमति दी थी। इसको लेकर शिमला के नगर निगम आयुक्त ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। उन्होंने मस्जिद की तीन मंजिलों को गिराने जाने की अनुमति दी थी। इसको लेकर लिखित आदेश भी मस्जिद कमिटी को जल्द ही भेज दिया जाएगा।

मस्जिद तोड़ने का आदेश जारी होने के बाद ऑल हिमाचल मुस्लिम्स ऑर्गनाइजेशन ने हाई कोर्ट जाने की बात कहना चालू कर दी है। बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को शिमला में हुई इस संगठन की बैठक में फैसला लिया गया है कि यह संगठन मस्जिद गिराने के आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट का रुख करेगा।

मुस्लिम संगठन ने कहा है कि वह हर मुसलमान की मजहबी आजादी के लिए लड़ेंगे और नगर निगम के फैसले को हाई कोर्ट में घसीटेंगे। संगठन ने यह भी कहा है कि नगर निगम का फैसला तथ्यों से परे है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ संजौली मस्जिद कमिटी ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है। संजौली मस्जिद कमिटी ने कहा है कि वह नगर निगम के फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने मुस्लिम संगठन के फैसले से किनारा किया है और कहा कि वह उनका निजी फैसला है।

मस्जिद कमिटी के मुखिया लतीफ़ ने कहा है आदेश की कॉपी उन्हें जितनी जल्दी मिलेगी, वह उतनी जल्दी मस्जिद के अविअध हिस्से को गिराना चालू कर देंगे। उन्होंने मुस्लिम संगठन पर लोगों को भड़काने का भी आरोप लगाया है।

मंडी मस्जिद पर हिन्दू संगठनों ने दिया अल्टीमेटम

शिमला के अलवा हिमाचल प्रदेश के मंडी में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को लेकर भी हिन्दू संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है। मंडी की जेल रोड पर बनी मस्जिद के निर्माण को नगर निगम ने सितम्बर माह में अवैध करार दिया था। नगर निगम ने मस्जिद गिराने को लेकर नोटिस भी जारी किया था। नगर निगम ने मस्जिद का बिजली और पानी का कनेक्शन भी काट दिया था।

इसके तहत 12 अक्टूबर, 2024 तक मस्जिद का अवैध हिस्सा तोड़ा जाना था। हालाँकि, मुस्लिमों ने अभी भी इस मस्जिद को तोड़ने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। इससे गुस्साए हिन्दुओं ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता तो वह नगर निगम कार्यालय का घेराव करेंगे।

बेटा-बेटी-भतीजा-बीवी… यूपी उपचुनाव में परिवार के भीतर सिमटा सपा का PDA

समाजवादी पार्टी ने यूपी विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में कुल 6 नामों की घोषणा की गई है। सपा ने इन 6 में से 5 सीटों पर उम्मीदवार उतारने में परिवार से आगे नहीं देखा है। हालाँकि, उसने इसे नाम PDA(पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नाम दिया है।

उत्तर प्रदेश में आगामी दिनों में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। जल्द ही इनकी तारीख घोषित की जाएगी। समाजवादी पार्टी ने इनमें मैनपुरी की करहल, कानपुर की सीसामऊ, प्रयागराज की फूलपुर, अयोध्या की मिल्कीपुर, अम्बेडकरनगर की कटेहरी और मिर्जापुर की मंझवा सीट से उम्मीदवारों की घोषणा की है।

मैनपुरी की करहल सीट से समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के भतीजे तेजप्रताप यादव को टिकट दिया है। करहल सीट अखिलेश यादव के सांसद बनने के कारण खाली हुई है। वहीं कानपुर की सीसामऊ सीट सपा के इरफ़ान सोलंकी को सजा होने के कारण खाली हुई थी। इस सीट से सपा ने इरफ़ान की पत्नी नसीम सोलंकी को टिकट दिया है।

इसके अलावा अयोध्या की मिल्कीपुर से अजीत प्रसाद को टिकट दिया गया है। मिल्कीपुर की सीट यहाँ के विधायक रहे अवधेश प्रसाद के सांसद बनने के कारण खाली हुई है। यहाँ से भी सपा ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत को इस सीट से चुना है। अम्बेडकरनगर की कटेहरी सीट से शोभावती वर्मा को उतारा गया है, वह सांसद लालजी वर्मा की पत्नी हैं।

मिर्जापुर की मंझवा सीट से उतारी गई ज्योति बिंद पूर्व सांसद रमेश बिंद की बेटी हैं। फूलपुर सीट पर मुज्ज्त्फा सिद्दीकी को टिकट मिला है जो कि पूर्व विधायक हैं। समाजवादी पार्टी ने अभी गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर की मीरापुर, मुरादाबाद की कुन्दरकी और अलीगढ़ की खैर सीट पर पत्ते नहीं खोले हैं।

समाजवादी पार्टी ने इस टिकट बँटवारे को PDA का नाम दिया है लेकिन ज्यादातर टिकट उसी परिवार के भीतर दिए गए हैं जिनके कारण सीट खाली हुई है। हालाँकि, पार्टी ने दावा किया है कि उसने सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश की है।

समाजवादी पार्टी के इस टिकट बँटवारे के बाद कॉन्ग्रेस ने निराशा जाहिर की है। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि इस टिकट बँटवारे में उनसे कोई राय नहीं ली गई जबकि दोनों पार्टियों ने मिल कर लोकसभा चुनाव लड़ा था। कॉन्ग्रेस ने इस चुनाव में भी गठबंधन की उम्मीद जताई है।

इस बीच कॉन्ग्रेस खुद भी दबाव में है। हरियाणा विधानसभा में AAP और समाजवादी पार्टी को तवज्जो ना देना अब उसके लिए गले की फांस बन रहा है। इन पार्टियों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने अगर उन्हें महत्व दिया होता तो उसकी शायद हार ना होती।

मुस्लिमों में इतनी जाति… पर कॉन्ग्रेस का मुँह सिल जाता है: PM मोदी का ‘वोट बैंक’ की राजनीति पर प्रहार, कहा- हिंदू जितना बँटेगा उनका उतना होगा फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (9 अक्टूबर 2024) को महाराष्ट्र में 7600 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस देश को बाँटने की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों में भी जातियाँ होती हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता उनकी बातें नहीं करते हैं। वहीं, हिंदुओं की बात आते ही कॉन्ग्रेस उनकी चर्चा जाति से शुरू करती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस मुस्लिमों के मन में भय पैदा कर रही है। वह लोगों में डर पैदा करती रही है। अपने वोट बैंक की खातिर वह देश का सांप्रदायिककरण कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस का फॉर्मूला साफ है कि मुस्लिमों को डराते रहो, उनको भय दिखाओ, उनको वोट बैंक में कन्वर्ट करो और वोट बैंक को मजबूत करो।

कॉन्ग्रेस पर हिंदुओं को जातियों में बाँटने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस की नीति हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने की है। वो जानती है हिंदू जितना बँटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। कॉन्ग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है, ताकि वो उस पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकती रहे। भारत में जहाँ भी चुनाव होता है, वहाँ कॉन्ग्रेस यही फॉर्मूला अपनाती है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के एक भी नेता ने आज तक नहीं कहा कि हमारे मुस्लिम भाई-बहनों में कितनी जातियाँ होती हैं। मुस्लिम जातियों की बात आते ही कॉन्ग्रेसी नेता मुँह पर ताला लगाकर बैठ जाते हैं, लेकिन जब भी हिंदू समाज की बात आती है तो कॉन्ग्रेस उनकी चर्चा जाति से ही शुरू करती है।” उन्होंने कहा कि हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने सारे हथकंडे अपनाए, लेकिन वह असफल रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस भारत के ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की परंपरा का दमन कर रही है। वह सनातन परंपरा का दमन कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वो एक गैर-जिम्मेदार दल है। वो अभी भी देश को बाँटने के लिए नए-नए नैरेटिव गढ़ रही है। कॉन्ग्रेस समाज को बाँटने का फॉर्मूला लाती रहती है।

नरेंद्र मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस नफरत फैलाने की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनने वाली है। यह गाँधीजी ने आजादी के बाद ही समझ लिया था। इसीलिए गाँधीजी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस को खत्म कर देना चाहिए। कॉन्ग्रेस खुद खत्म नहीं हुई, लेकिन आज देश को खत्म करने पर तुली हुई है। इसलिए हमें सावधान रहना है, सतर्क रहना है।”

जम्मू-कश्मीर और हरियाणा चुनावों के नतीजों को लेकर पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस का पूरा इकोसिस्टम, अर्बन नक्सल का पूरा गिरोह जनता को गुमराह करने में जुटा था, लेकिन उसकी सारी साजिशें ध्वस्त हो गईं। इन्होंने दलितों के बीच झूठ फैलाने की कोशिश की, लेकिन दलित समाज ने इनके खतरनाक इरादों को भाँप लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के दलितों को एहसास हो गया कि कॉन्ग्रेस उनका आरक्षण छीनकर अपने वोट बैंक को बाँटना चाहती है। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने किसानों को भड़काया, लेकिन किसानों को पता है कि उन्हें फसलों पर MSP किसने दी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा से दलितों एवं किसानों के कल्याण के लिए काम किया है।

महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी पीएम मोदी ने जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा, “मेरा पक्का विश्वास है कि समाज को तोड़ने की आज जो कोशिश हो रही है, ऐसी हर साजिश को महाराष्ट्र के लोग नाकाम करके रहेंगे। महाराष्ट्र के लोगों को देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर बीजेपी महायुति के लिए मतदान करना है।”

बता दें कि प्रधानमंत्री इन विकास परियोजनाओं में महाराष्ट्र को 10 मेडिकल कॉलेज, नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार का काम, शिर्डी एयरपोर्ट के लिए एक टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दो अहम प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था।

हरियाणा ने कॉन्ग्रेस को आत्ममंथन का दिया सबक, पर हारते ही वह अपना ही गुह मथने लगी: चुनाव आयोग-EVM नहीं, आपकी नीयत ही टट्टी है राहुल गाँधी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार पर राहुल गाँधी ने एक दिन बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। राहुल गाँधी ने पहली प्रतिक्रिया में ही अपने पुराने प्रोपेगेंडा को हवा दे दी है। यह वही प्रोपेगेंडा जो कॉन्ग्रेस हर हार के बाद आगे बढ़ाती रहती है। राहुल गाँधी ने अपनी प्रतिक्रिया में जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन को बधाई दी और लोकतंत्र की जीत बताया लेकिन हरियाणा में उन्होंने हार को स्वीकार करने के बजाय चुनाव प्रक्रिया पर ही प्रश्न उठा दिए।

राहुल गाँधी ने बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को अपने ट्वीट में लिखा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों का तहे दिल से शुक्रिया – प्रदेश में INDIA की जीत संविधान की जीत है, लोकतांत्रिक स्वाभिमान की जीत है। हम हरियाणा के अप्रत्याशित नतीजे का विश्लेषण कर रहे हैं। अनेक विधानसभा क्षेत्रों से आ रही शिकायतों से चुनाव आयोग को अवगत कराएँगे।”

राहुल गाँधी के इस ट्वीट से साफ़ होता है कि वह जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस गठबंधन की जीत को तो लोकतंत्र बचाने का प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं लेकिन हरियाणा की हार को पचा नहीं पा रहे। इस ट्वीट में उन्होंने शिकायतों का जिक्र भाजपा की जीत पर प्रश्न उठाने के लिए किया।

हरियाणा के नतीजे आने से पहले सभी एग्जिट पोल और चुनावी पंडित बता रहे थे कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आ सकती है। नतीजों के दिन हरियाणा में सुबह कुछ समय रुझानों में कॉन्ग्रेस आगे चल भी रही थी। इस समय कॉन्ग्रेस प्रवक्ता और नेता जश्न के मूड में थे। इस दौरान ना ही राहुल गाँधी और ना ही बाकी कॉन्ग्रेस नेता EVM पर अथवा चुनावी पर प्रश्न प्रक्रिया उठा रहे थे।

कुछ कॉन्ग्रेस प्रवक्ता बता रहे थे कि भाजपा 20 सीट भी नहीं पार करेगी जबकि कुछ अति उत्साही प्रवक्ता प्रधानमंत्री मोदी को ही जलेबी भेजने को लेकर अट्टाहास कर रहे थे।

जब चुनाव नतीजे के रुझानों में कुछ देर के बाद भाजपा आगे होने लगी और कॉन्ग्रेस को लगा कि उनसे जनता का मूड भाँपने में गलती हो गई है तो उन्होंने अपनी पुरानी ट्रिक लगाना चालू कर दी। सबसे पहले कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने प्रलाप चालू किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग वोटों की गिनती बताने में देरी कर रहा है।

जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग कि वेबसाइट पर वोटों की गिनती की जानकारी धीमे अपडेट किया जा रहा है। जयराम रमेश ने इसको लेकर एक ज्ञापन भी चुनाव आयोग को दिया। चुनाव आयोग ने जयराम रमेश के इस दावे को हवा हवाई बताया और इसका जवाब भी दिया।

चुनाव आयोग ने कहा, “नतीजों के अपडेट में देरी के आपके बेबुनियाद आरोप को पुष्ट करने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है। आपके ज्ञापन में हरियाणा या जम्मू-कश्मीर के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में देरी के बारे में कोई तथ्य भी नहीं है।” जयराम रमेश इस जवाब के बाद भी नहीं माने और आरोप जारी रखे।

चुनाव आयोग के जवाब के बाद राहुल गाँधी ने जब इन चुनावों को लेकर बात की तो उन्होंने भी यही राग दोहराया और हरियाणा में हार स्वीकार करने के बजाय गड़बड़ियों की बात की। कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में EVM में गड़बड़ी का रोना एक बार फिर रोया। कॉन्ग्रेस ने वोटिंग में इस्तेमाल हुई बैट्री को लेकर प्रश्न उठाए।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने दावा किया जहाँ उनकी हार हुई वहाँ EVM की बैट्री 99% थी। उन्होंने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाया। हालाँकि, सच यह है कि EVM मशीन में 8 वोल्ट की बैट्री लगी होती है। यह बैट्री पूरे एक चुनाव तक चल जाती है, कई बार उसके बाद यह बची रहती है।

इंडियन एक्सप्रेस को चुनाव आयोग से जुड़े लोगों ने बताया है कि इस 8 वोल्ट की बैट्री में जब 7.4 वोल्ट की क्षमता रहेगी तब यह 99% चार्ज ही दिखाएगी। इसके बाद यह अपने आप नीचे जाना शुरू कर देगी। ऐसे में कॉन्ग्रेस का EVM में गड़बड़ी का दावा फिर से धराशायी हो जाता है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कॉन्ग्रेस ने अपनी सुविधा के हिसाब से चुनाव प्रक्रिया और EVM को कठघरे खड़ा किया हो। इससे पहले लोकसभा चुनाव में जब भाजपा बहुमत के आँकड़े से नीचे रह गई और कॉन्ग्रेस समेत बाकी पार्टियों की सीटों में इजाफा हुआ तब उन्होंने EVM पर प्रश्न नहीं उठाए। तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में जीतने पर भी EVM सही रही।

जब कॉन्ग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्य हारी तो उसने चुनाव प्रक्रिया और EVM पर सवाल उठाने चालू कर दिए। EVM पर सवाल उठाना कॉन्ग्रेस की खीझ को दर्शाता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट तक EVM को क्लीनचिट दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा था कि वह मात्र इसलिए EVM पर रोक नहीं लगाएँगे क्योंकि किसी को इस पर संदेह है।

कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं को यह समझने की जरूरत है कि जब चुनाव होता है तो उसका परिणाम दो ही तरीके का हो सकता है। या तो आपकी पार्टी जीतती है या फिर हार जाती है। जीतने पर आपकी जिम्मेदारी है कि आप सरकार का गठन करें और जनता से किए गए वादे निभाएँ।

हारने पर आपको अपनी समीक्षा करनी होती है और साथ ही सरकार को सकारात्मक तरीके से सहयोग दें और जनता के मुद्दों को उठाएँ। कॉन्ग्रेस के मामले में इसका ठीक उल्टा है। वह जीत के बाद अति उत्साहित हो जाते हैं जबकि हार के बाद अपनी समीक्षा के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने लगते हैं।

कॉन्ग्रेस 2014 के बाद यह नहीं समझ पा रही कि यदि वह EVM या चुनावी प्रक्रिया पर प्रश्न उठाएगी तो जनता उसको समर्थन नहीं करने वाली। जनता को भी पता है कि भारतीय चुनावी प्रक्रिया बहुत मजबूत है और यहाँ गड़बड़ियों की आशंका नहीं है। कॉन्ग्रेस यह बात जितनी जल्द समझ कर अपने संगठन और विचारधारा को ठीक करके काम करेगी, उतना अच्छा होगा।

कॉन्ग्रेस MLA विनय कुलकर्णी पर रेप का केस, पीड़िता बोली- नंगा होकर करते थे वीडियो कॉल, गुंडों को भेजकर धमकाते थे: कर्नाटक का मामला

कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं कॉन्ग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी पर 34 साल की एक महिला ने रेप, अपहरण और जान से मारने का आरोप लगाया है। इस मामले में धारवाड़ से विधायक कुलकर्णी के खिलाफ संजय नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में कुलकर्णी के सहयोगी अर्जुन को सह आरोपित बनाया गया है।

जिस महिला ने रेप का आरोप लगाया है, वह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताती है। महिला ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि वह साल 2022 की शुरुआत में बेंगलुरु में कुलकर्णी से उनके घर पर मिली थी। कुलकर्णी ने आपसी पहचान के जरिए उसका संपर्क माँगा था। इसके बाद कुलकर्णी उसे देर रात को कॉल करने लगे थे।

महिला का आरोप है कि रात में कॉल करने के बाद विनय कुलकर्णी थोड़ी देर नॉर्मल बातें करते और उसके बाद सेक्सुअल बातें करने लगते थे। इतना नही नहीं, कॉन्ग्रेस विधायक नंगा होकर महिला को वीडियो कॉल करता था और उससे मिलने के उस पर दबाव डालता था। जब महिला ने महिला ने मिलने से मना कर दिया तो कुलकर्णी ने अपने गुंडों को धमकाने के लिए भेजा।

महिला का आरोप है कि वह डरकर महिला विधायक से बात करने के लिए तैयार हो गई। इस साल मार्च या अप्रैल में विधायक ने उसे फोन किया और बेलगावी के सर्किट हाउस में मिलने के लिए बुलाया। महिला कोई जरूरी काम जानकर विधायक से मिलने गई। वहाँ रूम में विधायक ने महिला को गलत तरीके से छुआ। कमरे में कोई आ गया तो कुलकर्णी ने उसे छोड़ दिया।

इसी तरह 24 अगस्त 2022 को कुलकर्णी ने महिला को बेंगलुरु स्थिति अपने आवास पर बुलाया। उस समय महिला तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलने के लिए बेंगलुरु में ही थी। इस दौरान विनय कुलकर्णी उसे कार से पिक करने आए और अपने साथ कैंपागौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के नजदीक एक सुनसान जगह पर ले गए और वहाँ रेप किया।

इस दौरान कुलकर्णी ने उसका ख्याल रखने की बात कही और किसी के सामने अपना मुँह नहीं खोलने की धमकी दी। सितंबर 2022 में कुलकर्णी ने महिला द्वारा उनके बीच बातचीत का ऑडियो क्लिप लीक करने का आरोप लगाकर गाली-गलौच की। जब महिला ने कुलकर्णी के सहयोगी अर्जुन से संपर्क किया तो उसने कहा कि वह उसके साथ बेंगलुरु चले। वह सब कुछ ठीक कर देगा।

इसके बाद अर्जुन के कहे के अनुसार महिला विनय कुलकर्णी से बेंगलुरु में मिली। वहाँ विधायक ने उसके साथ मारपीट की। महिला का कहना है कि इसके बाद विधायक ने उसका ख्याल रखने की बात की और विधायक उसे लेकर धर्मस्थल लेकर गए और वहाँ फिर से उसके साथ रेप की। इधर, विधायक ने महिला और पावर टीवी के एमडी राकेश शेट्टी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

PR कंपनी ने दिया आदेश, ‘द हिंदू’ ने केरल CM के इंटरव्यू में खुद से घुसेड़ दी लाइन: वामपंथी अखबार ने कबूली कारस्तानी, नीरा राडिया टेप से पहली बार बेपर्दा हुआ था ‘नेक्सस’

कॉन्ग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम का प्रोपेगेंडा बढ़ाने वाले हिन्दू विरोधी अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र द हिन्दू ने एक हालिया इंटरव्यू को लेकर माफ़ी माँगी है। द हिन्दू ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का हाल ही में इंटरव्यू किया था, इसी को लेकर एक माफीनामा जारी किया गया है। द हिन्दू को इस इंटरव्यू का ऑफर एक पीआर एजेंसी काईजेन ने दिया था। इस इंटरव्यू के बाद केरल के भीतर बवाल चालू हो गया और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए।

द हिन्दू ने इस इंटरव्यू के लिए जारी किए एक माफीनामे में लिखा, “30 सितंबर के अंक में प्रकाशित केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के इंटरव्यू में पीआर एजेंसी के कहने पर कुछ लाइनों को जोड़ा गया था। इस इंटरव्यू की व्यवस्था पीआर एजेंसी ने ही की थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था, और हम रिपोर्टर की ओर से निर्णय की इस गंभीर त्रुटि और इस मामले में संपादकीय गड़बड़ी लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं।”

द हिन्दू ने बताया कि यह इंटरव्यू 29 सितंबर को सुबह 9 बजे नई दिल्ली के केरल हाउस में पीआर एजेंसी के दो लोगों की मौजूदगी में हुआ था। माफीनामे में लिखा गया, “इंटरव्यू लगभग 30 मिनट तक चला। इसके बाद, पीआर के लोगों में से एक ने मलप्पुरम में सोने की तस्करी और हवाला लेनदेन और उसके आतंक में उपयोग किए जाने की जानकारी को इंटरव्यू में शामिल करने को कहा था।” अखबार ने कहा कि पिनराई विजयन ने यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले कही थी।

क्यों द हिन्दू ने माँगी माफी

रिपोर्ट के अनुसार, विजयन ने द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि CPM पर RSS के साथ मिलने के आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि उनकी सरकार में पुलिस ने पिछले पांच वर्षों में सोने की तस्करी और हवाला धन के संबंध में पुलिस ने कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्षों के दौरान, पुलिस ने मलप्पुरम में करोड़ों का हवाला का पैसा जब्त किया।

इस घटनाक्रम के पहले नीलांबुर के विधायक पी वी अनवर द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सोने की तस्करी और अवैध रूप से धन संचय करने सहित आरोप लगाए थे। उन्होंने विजयन के साथ भारी मतभेद के बाद वामपंथी गठबंधन छोड़ दिया था।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री के कर्मचारियों के RSS नेताओं से मिलने के दावों पर CM विजयन ने कहा, “वामपंथी, खासकर CPM ने RSS और बाकी हिंदुत्ववादी ताकतों का कड़ा विरोध किया है। हमारे कई साथियों ने उनके खिलाफ बोलने के कारण अपनी जान गँवाई है। कोई भी इस झूठ पर विश्वास नहीं कर सकता। हमें ऐसे आरोपों के पीछे के कारणों को समझना चाहिए। केरल की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक समुदायों का है।”

विजयन ने यह भी बताया कि ये लोग पहले कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के साथ थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यक अब LDF का समर्थन करते हैं। यह UDF द्वारा जानबूझकर भ्रम पैदा करने की कोशिश का हिस्सा है, क्योंकि उन्हें पता है कि इससे चुनावों में हम पर असर पड़ेगा। हम पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं कि RSSके प्रति हमारा रुख नरम है।”

मुख्यमंत्री विजयन ने इसके बाद कहा, “केरल सरकार मुस्लिम कट्टरपंथियों के विरुद्ध काम कर रही है, ये ताकतें यह बताने की कोशिश कर रही हैं कि हम मुसलमानों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, पिछले 5 सालों में मलप्पुरम में पुलिस ने ₹123 करोड़ का 150 किलोग्राम सोना और हवाला का पैसा जब्त किया गया। यह पैसा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए केरल पहुँचता है। जहां तक ​​अनवर का सवाल है, हमने उनके दावों की जांच के लिए पहले ही एक SIT गठित कर दी है।”

इंटरव्यू पर विवाद, प्रदर्शन भी

विजयन के इस बयान के बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई। उन्हें इसके लिए सफाई भी जारी करनी पड़ी। कई संगठनों ने कहा कि उन्होंने मलप्पुरम जिले का अपमान किया है। वामपंथी गुटों ने भी इसको लेकर प्रदर्शन किया। मुस्लिम लीग, केरल मुस्लिम जमात, केरल सुन्नी छात्र संघ (SKSF) और सुन्नी युवजन संघम (SYS) समेत अन्य समूहों ने भी मुख्यमंत्री की आलोचना की।

इसके बाद मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) विपक्षी UDF दलों की ने सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री विजयन से मलप्पुरम और कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के कथित आरएसएस से जुड़े होने के बारे में दिए गए बयानों को लेकर इस्तीफा देने की माँग की। 3 अक्टूबर को, विजयन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कह दिया कि ना उन्होंने या ना ही उनके कार्यालय ने राष्ट्रीय मीडिया के साथ संपर्क करने के लिए एक पीआर एजेंसी को काम पर रखा था।

पिनराई विजयन ने कहा कि पीआर एजेंसी के व्यक्ति को वह नहीं जानते। विजयन ने कहा कि जब रिपोर्ट प्रकाशित हुई, तो उसमें ऐसे बयान शामिल थे जो मैंने कभी नहीं दिए। विजयन ने दावा किया कि वह बयान कहाँ से आए, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

राडिया टेप ने खोला था पत्रकार-पीआर नेक्सस

पिनराई विजयन के इंटरव्यू पर विवाद और उसमें पीआर एजेंसी के शामिल होने को लेकर हुआ हंगामा कोई नई बात नहीं है। इससे पहले राडिया टेप मामले में भारत ने पीआर एजेंट और पत्रकार तथा नेता आपस में कैसे नेक्सस बनाते हैं, इसका पर्दाफाश हुआ है।

2010 में सामने आए राडिया टेप विवाद में जब एक कॉर्पोरेट लॉबिस्ट, नीरा राडिया की राजनेताओं, पत्रकारों, उद्योगपतियों और नौकरशाहों समेत कई हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के साथ बातचीत को इनकम टैक्स विभाग ने रिकॉर्ड किया था। यह बातचीत टैक्स चोरी की जाँच के लिए रिकॉर्ड हुई थी।

इन टेपों से पता चला था कि नीरा राडिया टाटा समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कम्पनियों के लिए भारत सरकार में मंत्री पदों के वितरण को प्रभावित कर रहीं थी। नीरा राडिया ने कोशिश 2009 में यूपीए-2 सरकार के गठन के दौरान की थी। राडिया की कुछ पत्रकारों ने सहायता की थी।

राडिया टेप में अब प्रोपेगेंडा पोर्टल एमके वेणु, बरखा दत्त समेत कई पत्रकारों का नाम आया था। इस टेप के सामने आने के बाद काफी बवाल हुआ था। इस टेप ने तब की कॉन्ग्रेस सरकार और देश के कॉर्पोरेट के बीच के रिश्ते को भी जगजाहिर कर दिया था।

इसलिए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि विजयन ने अपने लिए एक पीआर एजेंसी को काम पर रखा हो। हालाँकि, इस विवाद के बाद पिनराई विजयन बैकफुट पर हैं। इस मामले में अब केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने भी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजने की तैयारी की है। उन्होंने पूछा था कि आखिर किसके खिलाफ मलप्पुरम में कार्रवाई हुई थी और क्या कार्रवाई हुई।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में रुकमा राठौड़ द्वारा लिखा गया है। इसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कॉन्ग्रेस के हारते ही शुरू हो गई दिल्ली को ब्लॉक करने की साजिश, बरेली के जहरीले मौलाना ने खोला ‘टूलकिट’: तौकीर रजा ने कहा- देशभर से मुस्लिम पहुँचे रामलीला मैदान

इस्लामी संगठन इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के प्रमुख और बरेली के रहने वाले मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर धमकी दी है। उसने कहा है कि मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयान के विरोध में दिल्ली मार्च किया जाएगा और देश को जाम किया जाएगा। इसके पहले वो इस्लामी धर्मांतरण कराने और देश विरोधी भड़काऊ बयान दे चुका है।

हरियाणा चुनाव में कॉन्ग्रेस के हारते ही काउंसिल के 24वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में तौकीर रजा ने अपना एजेंडा खोल दिया। उसने कहा कि यति नरसिंहानंद जैसे लोग पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी कर रहे हैं। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कोई धरना या फिर ज्ञापन नहीं होगा। अब दशहरा होने के बाद दिल्ली जाकर रामलीला मैदान में घेराव करके प्रदर्शन किया जाएगा।

मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन बरेली के आसपास के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कोने-कोने से लोग आएँगे। मौलाना तौकीर ने कहा, “इस समय देश के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है। नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले आजाद घूम रहे हैं। हमारे नौजवानों के साथ मॉब लिंचिंग हो रही है। दाढ़ी वाले को ट्रेन के अंदर पीटने की घटना हो रही है।”

अपनी उत्तेजक एवं कट्टरपंथी बयानों के लिए कुख्यात मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया। उसने कहा कि देश के वजीरे आजम समुदाय विशेष (मुस्लिम) के साथ पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि महापुरुषों की शान में गुस्ताखी करते हैं।

इतना ही नहीं, बरेली दंगे के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर ने इस्लाम छोड़कर दूसरे धर्म में शादी करने वाली मुस्लिम लड़कियों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “मजहब छोड़कर दूसरे धर्म के लोगों के साथ शादी करने वाली लड़कियों की इस्लाम में कोई जरूरत नहीं है। ऐसे कमजोर लोगों की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। अच्छा रहा कि वे खुद ही इस्लाम को छोड़कर चली गईं।”

इससे पहले इस मौलाना ने कहा था, “हम 20 करोड़ हैं या 30 करोड़…मैं नहीं जानता, लेकिन हम में से सिर्फ 1 प्रतिशत ही घरों से बाहर निकल आएँ और दिल्ली कूच कर दें और ऐलान करें कि जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे। हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है। अगर जो पैमाना छलक गया तो नतीजे बहुत खराब हो सकते हैं।”

बता दें कि कुछ दिन पहले तौकीर रजा ने कुछ हिंदू लड़कियों का सार्वजनिक तौर पर इस्लाम में धर्मांतरण कराने का ऐलान किया था। इसके साथ ही उनका निकाह मुस्लिम युवकों से कराने की बात भी कही थी। इसको लेकर बड़े पैमाने पर बवाल हुआ था। तौकीर रजा ने कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है।

मौलाना ने कहा था कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी है। तौकीर ने कहा था इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े। हालाँकि, हिंदुओं के विरोध के बाद प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। इतना ही नहीं, प्रशासन ने भी कहा था कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा।