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दिल्ली में लैंड करते ही मालदीव के राष्ट्रपति ने टेके घुटने, कहा- ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे भारत को हो खतरा: कर्ज के लिए चीन से दूर हुए मुइज्जू

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू वर्तमान में भारत की अधिकारिक यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। मोहम्मद मुइज्जू का राष्ट्रपति आवास में सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को आधिकारिक स्वागत हुआ। यहाँ उनकी अगवानी राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की।

चीन सरपरस्त माने जाने वाले मुइज्जू ने इस दौरान भारत की चिंताओं को कम करने का प्रयास किया है। मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत को खतरा पैदा होता हो। रविवार (6 अक्टूबर, 2024) को भारत पहुँचे मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय मीडिया के साथ बातचीत की।

चीन की घुसपैठ के चलते भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से एक इंटरव्यू में कहा, “मालदीव कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचे। भारत, मालदीव का एक अहम साझेदार और मित्र देश है, और हमारे संबंध सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम कई सेक्टर में दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहे हैं लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा ना हो। मालदीव भारत के साथ अपने पुराने और महत्वपूर्ण रिश्ते को आगे प्राथमिकता से बढ़ाता रहेगा और हमें यह भी विश्वास है कि मालदीव के दूसरे देशों के साथ भारत की सुरक्षा चिंताओं को ना बढ़ाएँ।”

भारतीय सैनिकों के मालदीव से वापस भेजे जाने को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि उनका यह फैसला मालदीव की जनता की माँग थी और उन्होंने उसका पालन किया है। उन्होंने कहा कि उनके इस कदम को लोकतंत्र होने के नाते भारत और इसकी जनता समझेगी।

मोहम्मद मुइज्जू का यह भारत दौरा कई मायनों में अहम है। मालदीव वर्तमान में गहरे आर्थिक संकट में है और उसे नए कर्जे की जरूरत है। इसके अलावा उसे अपने पुराने कर्जे चुकाने के लिए अधिक समय भी चाहिए होगा। मोहम्मद मुइज्जू की पीएम मोदी से मुलाक़ात में इन मुद्दों के सबसे प्राथमिकता पर रहने के कयास हैं।

मुइज्जू राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही भारत विरोधी रवैया अपनाते रहे हैं। उन्होंने मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया था और इसे राष्ट्रपति चुनाव का केंद्र बिंदु बना लिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मालदीव में राहत बचाव के काम में लगे भारतीय सैनिकों के भी वापस जाने को कहा था।

मोहम्मद मुइज्जू की कैबिनेट के मंत्रियों ने भारत प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अशोभनीय टिप्पणियाँ भी की थी। मालदीव सरकार से जुड़े लोगों ने भारत को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक कैम्पेन चलाया था। इसके बाद भारतीयों ने मालदीव ना जाने को लेकर अभियान चलाया था।

मोहम्मद मुइज्जू ने स्वयं भी अपनी पहली यात्रा भारत ना करके चीन जाना पसंद किया था। उनके भी कुछ ऐसे बयान सामने आए थे जिनसे भारत से रिश्तों में कटुता झलक रही थी। मोहम्मद मुइज्जू के इस रवैये के चलते भारत और मालदीव के रिश्ते काफी निचले स्तर पर चले गए थे।

मालदीव अब जब आर्थिक संकट में फंस गया है तो मुइज्जू वापस भारत से मदद माँगने आए हैं। वह भारत से आर्थिक पैकेज चाहते हैं और साथ ही भारत द्वारा दिए गए पुराने कर्जों को चुकाने के लिए भी अधिक समय की माँग करेंगे। मालदीव को पता लग गया है कि यदि भारत उसकी मदद नहीं करता है तो वह बड़ी समस्या में फंस जाएगा।

AI का इस्तेमाल, प्रयागराज महाकुंभ क्षेत्र का होगा विस्तार: श्रद्धालुओं को इस बार 1 किमी से अधिक नहीं चलना पड़ेगा पैदल, बोले CM योगी- स्वच्छता-सुरक्षा-सुविधा पर विशेष ध्यान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह महाकुंभ स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होगा। महाकुंभ का आयोजन 14 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के साथ साधु-संतों का भी आगमन होगा।

सीएम योगी ने इस मेले को दिव्य और भव्य बनाने के लिए जोर देते हुए कहा कि 2019 में आयोजित कुंभ की सफलता ने एक मानक स्थापित किया था, और इस बार इससे भी बेहतर महाकुंभ आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाकुंध के ‘लोगो’, वेबसाइट और मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया।

महाकुंभ की तैयारियों पर विशेष ध्यान

सीएम योगी ने रविवार (6 अक्टूबर 2024) को हुई बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी तैयारियाँ 10 दिसंबर 2024 तक पूरी कर ली जाएँ। उन्होंने कहा कि महाकुंभ 2025 का आयोजन 4000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होगा, जबकि 2019 में यह 3200 हेक्टेयर में हुआ था। मेला क्षेत्र में 7000 से अधिक बसों की व्यवस्था की जाएगी और डेढ़ लाख से अधिक शौचालय बनाए जाएँगे। स्वच्छता के लिए 10,000 सफाईकर्मियों की तैनाती होगी, ताकि मेले में स्वच्छता बनी रहे। सीएम ने कहा कि कोई भी श्रद्धालु 1 किलोमीटर से अधिक पैदल नहीं चलेगा, सिवाय 6 विशेष स्नान पर्वों के।

महाकुंभ में कुल 6 प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाएँगे। ये प्रमुख स्नान पर्व इस प्रकार हैं:

  1. मकर संक्रांति : 14 जनवरी 2025
  2. पौष पूर्णिमा : 25 जनवरी 2025
  3. मौनी अमावस्या : 29 जनवरी 2025
  4. बसंत पंचमी : 3 फरवरी 2025
  5. माघी पूर्णिमा : 12 फरवरी 2025
  6. महाशिवरात्रि : 26 फरवरी 2025

भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में वीवीआईपी कॉरिडोर बनाएँ, लेकिन विशेष स्नान पर्वों पर कोई वीआईपी मूवमेंट न हो। उन्होंने फायर सर्विस, हेल्प डेस्क, पार्किंग, और सीसीटीवी की व्यवस्था को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एंटी ड्रोन सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल भी सुरक्षा के लिए किया जाएगा।

अविरल और निर्मल गंगा-यमुना

सीएम योगी ने गंगा-यमुना को अविरल और निर्मल बनाने पर जोर दिया। बिजनौर से बलिया तक जीरो डिस्चार्ज सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कोई भी ठोस या तरल कचरा गंगा या यमुना में न गिरे। उन्होंने कहा कि नालों को टेप किया जाएगा और शोधित जल ही गंगा में छोड़ा जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाकुंभ में प्लास्टिक का इस्तेमाल न हो। पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए महाकुंभ 2025 का आयोजन किया जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज में सनातन भावनाओं का सम्मान को देखते हुए मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक रहेगी।

प्रयागराज में कई बड़े स्थायी निर्माण कार्य जारी

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रयागराज में कई स्थायी निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनमें स्टील ब्रिज, वीवीआईपी कॉरिडोर, और पुलिस स्टेशन प्रमुख हैं। कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, और अयोध्या से प्रयागराज आने के लिए स्टील ब्रिज को दिसंबर के पहले सप्ताह तक तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा नए जीआरपी थानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है ताकि रेलवे और यूपी पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

सीएम योगी ने की संतों के साथ बैठक

मुख्यमंत्री योगी ने साधु-संतों और अखाड़ों के साथ भी बैठक की और उनकी अपेक्षाओं को ध्यान में रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ सनातनियों का सबसे बड़ा मेला है और इसके आयोजन में संत समाज का विशेष योगदान होगा। उन्होंने संतों से अनुरोध किया कि वे महाकुंभ के दौरान नकारात्मक बातों से बचें और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। सीएम ने 2019 के कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि इस आयोजन ने वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई थी। इस बार फिर से प्रयागराज के इस भव्य आयोजन को वैश्विक स्तर तक पहुँचाने में सभी का सकारात्मक योगदान होगा।

लेटे हनुमान जी के कॉरिडोर का निर्माण जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ 2025 के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। नए होमस्टे कार्यक्रम से स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलेगा और इसके तहत धाबों, होटलों और रेस्तरांओं को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। महाकुंभ के मुख्य स्नान पर्वों के लिए शाही स्नान के नाम बदलने का सुझाव भी दिया गया, जो गुलामी के प्रतीक माने जाते हैं। इसके अलावा, सीएम ने कहा कि सरकार यूपी के 700 से अधिक मंदिरों का पुनरुद्धार कर रही है और लेटे हुए हनुमान जी के कॉरिडोर का भी निर्माण किया जा रहा है।

गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तैयारियाँ युद्धस्तर पर चल रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि यह आयोजन 2019 के कुंभ से भी अधिक भव्य, दिव्य, स्वच्छ और सुव्यवस्थित हो। सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पहले पूरा करने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए सरकार कड़ी मेहनत कर रही है। सीएम योगी ने कहा कि यह महाकुंभ भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इंस्टाग्राम पर अंकित तिवारी ने हिंदू धर्म का लगाया स्टेट्स, शाहिद ने जान से मारने की दी धमकी: अनस ने साथियों संग पीटा, हसनैन ने माफी मँगवा Video वायरल की

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में धार्मिक स्टेट्स लगाने पर एक हिन्दू छात्र की पिटाई की गई है। इसके साथ ही उसे जान से मारने की भी धमकी दी गई है। पिटाई का आरोप शाहिद कुरैशी, अयान अहमद, हसनैन और एक अन्य व्यक्ति पर लगा है। छात्र की माँ की तहरीर पर पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला सुल्तानपुर जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है। यहाँ बुधवार को अंकित तिवारी की माँ ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया है कि उनका बेटा MGSI कॉलेज का छात्र है। एक दिन अंकित ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर हिन्दू धर्म का स्टेट्स लगा दिया। इस बात से उसके कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्र भड़क उठे। इनमें से अधिकांश मुस्लिम छात्र हैं।

आरोप है कि शाहिद, हसनैन और अयान अहमद ने कॉलेज में अंकित को पकड़ा और जान से मार डालने की धमकी देने लगे। हमलावरों से घिरा अंकित जैसे-तैसे जान बच कर वहाँ से भागा। 30 सितंबर 2024 को उसे कॉलेज में अनस ने अपने साथी सूजल भारती के साथ मिलकर पकड़ लिया। इन्होंने सबसे पहले अंकित को पीटा और माफ़ी माँगते हुए उसकी एक वीडियो बनाई।

आरोपितों ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया गया। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गया। इस बीच आरोपितों द्वारा शिकायत करने पर अंकित की माँ को भी जान से मार डालने की धमकी दी गई। पीड़ित की माँ ने आरोपितों को ‘धार्मिक उन्मादी ग्रुप’ कहकर सम्बोधित किया है। शिकायत में इस गिरोह पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 352, 351 (2), 351 (3) और 3 (5) के तहत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। पुलिस ने रविवार (6 अक्टूबर) को बताया कि वह मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

माता-पिता के सामने हिंदू बच्चों के कटवाए अंग, धर्मांतरण से इनकार तो सूली पर लटका जिंदा जलवाया… जिस फ्रांसिस जेवियर को ‘संत’ कहते हैं ईसाई, उसने गोवा में बंद कराए थे 300+ मंदिर

गोवा में ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार के लिए ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर का नाम सबसे अधिक कुख्यात है। ईसाई समुदाय के लोग उन्हें ‘गोवा का संरक्षक’ मानते हैं। हालाँकि ऐसा कहते समय उन्हें ये याद नहीं रहता है कि जिस गोवा की वो बात करते हैं वहाँ की 60% आबादी अब भी हिंदुओं की है। वो हिंदू जिन्हें मिटाने के लिए ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने क्या किया ये कोई सोच भी नहीं सकता।

आगे बढ़ने से पहले गोवा के बारे में आधिकारिक साइट पर क्या लिखा है ये जान लेते हैं। गोवा सरकार की साइट के अनुसार, ये बात एकदम साफ है कि गोवा की संस्कृति में धर्मांतरण ने आघात किया था। गोवा में पुर्तगाली शासन के दौरान यहाँ बड़े स्तर पर लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया गया था। इसी सबको देख ईसाई समुदाय के लोग ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर में अपनी अटूट श्रद्धा दिखाने लगे।

बताया जाता है कि पुर्तगाली शासन से पहले छोटे से गोवा में सैंकड़ों मंदिर थे। हालाँकि 1542 में पुर्तगाली काफिले के साथ जब ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर भारत आए तो उन्होंने केवल ईसाई धर्म को फैलाना शुरू नहीं किया बल्कि कुछ ही सालों में 350+ से ज्यादा हिंदू मंदिर बंद करवा दिए। इस बीच कई मंदिर को तो जमींदोज भी किया गया।

‘सेंट’ जेवियर के काल में हिंदुओं पर हर हथकंडे आजमाते हुए उन्हें क्रिश्चियन बनाने की कोशिश हुई। लेकिन जब प्रयास विफल हुए और ‘सेंट’ जेवियर ने देखा कि सनातन को मिटाना इतना आसान काम नहीं है, अगर वो सड़कों पर हिंदू मंदिर बंद कराएँगे तो हिंदू घर में ही मंदिर बना लेंगे… ऐसी स्थिति में उन्होंने हिंसा और लोगों को भ्रमित करने का रास्ता अपनाया।

फ़िलिपो सैसेटी, एक इतालवी यात्री और व्यापारी जो 1578 से 1588 तक भारत में थे, उन्होंने गोवा में स्थिति देख कहा था कि तब हिंदुओं पर उनके पवित्र ग्रंथों और उनके धर्म का पालन करने के लिए आरोप लगाए जाते थे। हिंदू मंदिरों को नष्ट किया जाता था, और लोगों को इतना परेशान किया जाता था कि वे बड़ी संख्या में शहर छोड़कर चले जाएँ। अगर किसी ने बात सुनने से इनकार किया या अपने पूर्वजों के देवों की पूजा की तो उन्हें कारावास, यातना और मौत की सज़ा दी जा सकती थी।

‘सेंट’ जेवियर पर मौजूदा लेख बताते हैं कि उन्हें हिंदू से इतनी घृणा थी कि वह उन्हें विधर्मी, काफिर तक कहकर संबोधित करते थे। वहीं ब्राह्मणों से उन्हें इतनी दिक्कत थी कि उन्हें वो ‘धोखेबाज और झूठा’ बताकर पेश करते थे ताकि समाज का विश्वास उनपर से उठ जाए। इसके अलावा वो ईसाई धर्म में लोगों को लाने के लिए ईसाई धर्म की खूबियों के अलावा ये बताते थे कि कैसे हिंदू और उनके देवी-देवता बुरे होते हैं।

फोटो साभार: [https://baroqueart.museumwnf.org/database_item.php?id=object;BAR;pt;Mus11_A;15;en&cp]

फ्रांसिस के बारे में कहा जाता है कि उनके होते हुए गोवा में इतनी तेजी से धर्मांतरण की रफ्तार बढ़ी थी कि वो कई बार पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बनवा देते थे। फिर हिंदू बच्चों को मंदिर में ले जाते थे और उनसे देवी-देवताओं को गाली देने को कहते थे, मूर्तियाँ तोड़ने, उनपर थूकने और उन्हें रौंदने के लिए कहते थे। साथ ही उन कलाकारों को भी धमकी दी जाती थी जो मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे।

अब ‘सेंट’ जेवियर का काल बीते कई सदी हो चुकी हैं। आज ईसाई समुदाय जो हमें उनके बारे में बताता है हम उसी को जानते हैं लेकिन अगर लोगों की सुनी सुनाई बातों से हटकर खुद समझना चाहते हैं कि ‘सेंट’ जेवियर हिंदुओं के लिए सोच क्या रखते थे तो एक पत्र में लिखी बात पढ़िए जो उन्होंने 1545 में कोचीन से लिखी थी, इसमें उन्होंने लिखा था,

“जब सभी लोग बपतिस्मा ले लेते हैं, तो मैं उनके झूठे देवताओं के सभी मंदिरों को नष्ट करने और सभी मूर्तियों को टुकड़े-टुकड़े करने का आदेश देता हूँ। मैं आपको यह नहीं बता सकता कि यह सब होते हुए देखकर मुझे कितनी खुशी हो रही है, उन लोगों द्वारा मूर्तियों को नष्ट होते हुए देखना जो हाल ही में उनकी पूजा करते थे। मैं सभी शहरों और गाँवों में ईसाई धर्म के सिद्धांतों को स्थानीय भाषा में लिखकर छोड़ता हूँ और साथ ही यह भी बताता हूँ कि सुबह और शाम के स्कूलों में इसे किस तरह पढ़ाया जाना चाहिए।”

‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने गोवा पर जब पूरा कब्जा किया तो गैर इसाइयों के लिए स्थिति और बद्तर हो गई क्योंकि तब सत्ता ईसाई पादरियों के हाथ आ गई और हिंदू विरोधी कानून बनने शरू हुए। धर्मांतरण के लिए नृशंस यातनाएँ दी जाने लगी। हिंदू माता पिता के सामने बच्चों के अंग काटे जाने लगे। वहीं जो धर्मांतरण के लिए नहीं मानता था उसे सूली पर लटकाकर जलाना शुरू कर दिया गया।

इस तरह जेवियर के काल में धर्मांतरण को अंजाम दिया गया और आगे चल कर जब इतिहासकारों ने इस सच्चाई को लिखना चाहा तो उन्हें भी असहनीय यातनाएँ दी गईं। गोवा में एक ‘हाथकाटरो’ खंभ भी है। बताया जाता है कि ये हिंदुओं पर पुर्तगाली शासकों के बर्बरता का जीवंत साक्ष्य है। ईसाइयों द्वारा हिंदुओं को इससे बाँधकर उनके अंगों को तोड़ा जाता था।

कई हिंदू मानते हैं कि ये खंबा जिसपर पर खड़ा कर हिंदुओं को इतनी यातनाएँ दी जाती थीं वो स्तंभ श्री सप्तकोटेश्वर मंदिर का अवशेष है जो कदंब वंश के शासनकाल के दौरान अस्तित्व में था और बाद में इसे पुर्तगालियों ने ध्वस्त कर दिया था और बाद में इसका प्रयोग हिंदुओं को यातना देने के लिए होने लगा।

आज ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर के नाम पर भारत में न जाने कितने शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक स्थल और स्वास्थ्य केंद्र हैं। ईसाई ‘सेंट’ जेवियर को अपना प्रतिष्ठित पादरी मानते हैं। उनके अपमान को अपना अपमान समझते हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि मौजूदा लेख और जानकारियाँ उनके बारे में यही बताती हैं कि उन्होंने ईसाई धर्म के प्रसार के लिए हिंदुओं को या गैर इसाइयों को प्रताड़ित किया। अगर आज भी लोग ‘सेंट’ जेवियर के दिखाए रास्ते को सबसे अच्छा बताते हैं तो क्या ये माना जाना चाहिए वो भी हिंदू विरोधी हैं जिन्हें कोई आपत्ति नहीं है जेवियर काल में हिंदुओं क साथ क्या हुआ।

जानकारी के लिए बता दें कि ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ‘सोसायटी ऑफ जीसस’ से जुड़े थे। इन्हीं सोसायटी ऑफ़ जीसस वालों को ‘जेसुइट्स’ कहा जाता है। कहते हैं कि जेसुइट्स ने एक समय में 20000 से ज्यादा लोगों को अपना गुलाम बनाया हुआ था और उनसे खेत समेत अन्य मेहनत के काम कराए जाते थे।

RG Kar अस्पताल के 10 डॉक्टर-59 स्टाफ सस्पेंड, रेप-मर्डर के बाद बनी जाँच कमेटी का आदेश: यौन शोषण-धमकी-वसूली के आरोपों पर शुरू हुई कार्रवाई

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित आरजी कर अस्पताल फिर से विवादों में घिरा हुआ है। पहले इस अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे देश, खासकर बंगाल में विरोध-प्रदर्शन की आग भड़काई थी। अब इस अस्पताल से एक और गंभीर खबर आई है, जिसमें 10 डॉक्टरों समेत कुल 59 स्टाफ को निष्कासित किया गया है। इनमें डॉक्टर, इंटर्न और हाउस स्टाफ शामिल हैं।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जाँच कर रही कमेटी ने 10 डॉक्टरों समेत 59 स्टाफ को या तो पूरी तौर पर या अस्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया है। निष्कासित किए गए लोगों पर यौन दुर्व्यवहार, धमकी देने और जबरन पैसा वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग पूर्व आरजी कर प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी थे, जिनके कार्यकाल में जूनियर डॉक्टर के साथ बर्बर बलात्कार और हत्या का मामला हुआ था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन व्यक्तियों पर आरोप है कि वे दूसरे छात्रों को धमकाते थे कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो परीक्षा में फेल करवा देंगे या हॉस्टल से निकालने की धमकी देंगे। इसके अलावा, जूनियर स्टाफ को जबरन एक खास राजनीतिक पार्टी से जुड़ने के लिए मजबूर करना, यौन दुर्व्यवहार में शामिल होना, जबरन पैसा वसूलना, झूठी एफआईआर दर्ज करवाना और शारीरिक हिंसा में शामिल होने के भी आरोप हैं।

निष्कासित किए गए लोगों में से एक अशोक पांडे नाम का हाउस स्टाफ भी शामिल है, जो पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का करीबी बताया जा रहा है। संदीप घोष को पहले ही वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था।

निष्कासित डॉक्टरों में – सौरभ पाल, आशीष पांडे (जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया), अभिषेक सेन, आयुष्री थापा, निरंजन बागची, शरीफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं। निष्काषित लोगों को अगले 72 घंटों में हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है। इन आरोपितों के नामों को राज्य मेडिकल काउंसिल को भी भेजा जाएगा, जिससे उनके रजिस्ट्रेशन की जाँच और रद्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इन व्यक्तियों पर जूनियर स्टाफ को देर रात नशा और शराब खरीदने के लिए मजबूर करने और लड़कों के कॉमन रूम में अश्लील हरकतें करने के लिए बाध्य करने का भी आरोप है। इसके अलावा, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर शारीरिक हिंसा के आरोप भी लगाए गए हैं।

संस्थान की आंतरिक जांच समिति द्वारा की गई जाँच के बाद, इन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, जिन लोगों पर महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के “ठोस सबूत” पाए गए हैं, उन्हें आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया है।

इसी बीच, एक अन्य घटनाक्रम में रेप-मर्डर केस के बाद सुरक्षा जैसी माँगों को लेकर अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार उनकी जायज़ माँगों को भी नहीं मान रही है, इसीलिए उन्होंने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया है।

पहले पीटकर दिया ‘तीन तलाक’, फिर कहा ‘हलाला’ कराकर लौटो: बाइक और 2 लाख रुपए माँग रहा था शौहर इरफान, दहेज के लिए प्रताड़ना में ससुराल वाले भी देते थे साथ

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अवैध करार दिए गए तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला ने अपने ससुराल वालों पर दहेज माँगने, तीन तलाक देने और फिर हलाला का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को शौहर इरफ़ान, जेठ सद्दाम, सास जन्न्तुन, देवर इरशाद और ननद शमा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

फतेहपुर जिले के जहानाबाद थाने में शुक्रवार को पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसका निकाह 27 जून 2023 को इरशाद से हुआ था। निकाह में पीड़िता के ससुराल वालों को अच्छा दहेज़ मिला था। इसके बावजूद पीड़िता को बार-बार दहेज़ लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। पीड़िता की जेठ सद्दाम, सास जन्न्तुन, देवर इरशाद और ननद शमा मिलकर उसे प्रताड़ित करते।

ये लोग पीड़िता से 2 लाख रुपए और बाइक की डिमांड कर रहे थे। जब पीड़िता इनकार करती थी तो उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर टॉर्चर किया जाता था। 22 जुलाई 2024 को पीड़िता के ससुराल वालों ने उसे बेरहमी से पीटा। पीड़िता द्वारा रहम की भीख का भी कोई असर नहीं पड़ा। पिटाई के बाद पीड़िता के शौहर ने उसे तीन तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया।

आखिरकार पीड़िता अपने मायके पहुँची और परिजनों को सारी बात बताई। जब लड़की के घरवालों ने उसके ससुराल वालों से मिन्नत की तो उनके सामने दहेज़ देने और फिर हलाला करवाने की शर्त रखी गई। पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया और पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A, 323 और 504 के साथ तीन तलाक अधिनियम व दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। FIR में इरफ़ान, सद्दाम, जन्न्तुन, इरशाद और शमा को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

भोपाल की बंद फैक्ट्री में बनाते थे मेफेड्रोन, NCB-गुजरात ATS की रेड में ₹1800 करोड़ की ड्रग्स मिली: अमृतसर में पकड़ाई कोकीन की खेप से मिला था सुराग

भोपाल से ड्रग्स की एक बड़ी खेप बरामद की गई है, जिसकी कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह छापा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त कार्रवाई का नतीजा है। इस ऑपरेशन में भोपाल के पास स्थित बगरोदा इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री पर छापेमारी की गई, जहाँ बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग्स बनाई जा रही थी। इस फैक्ट्री से ड्रग्स बनाने के उपकरण और कच्चे माल भी जब्त किए गए हैं।

फैक्ट्री से 1800 करोड़ की ड्रग्स जब्त

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NCB और ATS ने इस ऑपरेशन में 1800 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बरामद की। यह छापा भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में एक फैक्ट्री पर मारा गया। इस दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों की पहचान सान्याल प्रकाश बाने और अमित चतुर्वेदी के रूप में हुई है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि ये लोग पिछले 6-7 महीनों से इस फैक्ट्री में ड्रग्स बना रहे थे।

आरोपित पहले भी हुआ था गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपित सान्याल प्रकाश बाने पहले भी 2017 में मुंबई पुलिस द्वारा ड्रग्स मामले में पकड़ा जा चुका है। पाँच साल जेल में रहने के बाद रिहा होने पर उसने अपने साथी अमित चतुर्वेदी के साथ मिलकर फिर से ड्रग्स का अवैध धंधा शुरू कर दिया। दोनों ने भोपाल के बागरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एक शेड किराए पर लेकर मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री लगाई थी। यह फैक्ट्री हर दिन लगभग 25 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बनाने की क्षमता रखती थी।

पंजाब में भी ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद

इस ऑपरेशन से कुछ दिन पहले ही पंजाब के अमृतसर में 10 करोड़ रुपये की कोकीन भी बरामद की गई थी। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की थी। पुलिस ने अमृतसर के नेपाल गाँव से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी में छिपाकर रखी गई कोकीन की खेप को जब्त किया। पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि यह खेप दुबई और यूके से भेजी जा रही थी। अमृतसर की इस कार्रवाई में आरोपित जितेंद्र उर्फ जस्सी की गिरफ्तारी हुई थी, जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने यह बड़ी बरामदगी की थी।

भोपाल पुलिस को रखा गया दूर

गुजरात ATS और NCB द्वारा की गई इस रेड में भोपाल पुलिस को दूर रखा गया था। यह छापा अचानक मारा गया और स्थानीय पुलिस को इस बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। गुजरात से आए अधिकारी बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों में पहुँचे और उन्होंने फैक्ट्री में छापा मारा। फैक्ट्री के अंदर से ड्रग्स बनाने के उपकरण और कच्चे माल के साथ ही तैयार ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद की गई।

इस बड़ी कामयाबी पर गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने ट्वीट कर ATS और NCB की तारीफ की। उन्होंने कहा, “ड्रग्स के खिलाफ हमारी जंग में यह एक बड़ी जीत है। भोपाल में की गई इस कार्रवाई से ड्रग्स के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूती मिली है। एनसीबी और एटीएस की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है।”

उन्होंने इस ऑपरेशन को सुरक्षा और समाज के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मंत्री ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इसी तरह प्रतिबद्ध रहेंगी ताकि ड्रग्स का कारोबार खत्म हो सके और देश को सुरक्षित बनाया जा सके।

ड्रग्स का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

इस घटना से यह साफ हो गया है कि ड्रग्स का कारोबार केवल देश के कुछ हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। दुबई और यूके से लेकर भारत के विभिन्न शहरों तक ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। इसके लिए अपराधी नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें फैक्ट्रियों का इस्तेमाल करना, गाड़ियों में छिपाकर तस्करी करना और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना शामिल है।

NCB और ATS इस मामले की आगे जाँच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस ड्रग्स की सप्लाई कहाँ-कहाँ की जा रही थी और इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ की जा रही है, और जल्द ही और भी गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट की कैंटीन में शाकाहार Vs मांसाहार: SCBA ने ‘गलत परंपरा’ का हवाला दे नवरात्रि मेन्यू बंद करवाया, विरोध में वकीलों ने ही खोला मोर्चा, कहा- भावनाएँ आहत हुई

नवरात्र के दौरान सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में मांसाहारी भोजन परोसने के निर्णय के खिलाफ वकीलों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCORA) को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि बार के सदस्यों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना यह निर्णय लिया गया है।

अधिवक्ता रजत नायर द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि यह निर्णय बार की ‘बहुलतावादी परंपराओं’ के अनुरूप नहीं था। यह असहिष्णुता और ‘एक दूसरे के प्रति सम्मान की कमी’ को दर्शाता है। इस विरोध का सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले कम-से-कम 133 वकीलों ने समर्थन किया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट कैंटीन के उस फैसले पर चिंता जताई थी जिसमें नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि के त्योहार के दौरान मेनू को केवल नवरात्रि के खाने तक सीमित रखने का फैसला किया था। इसको लेकर उन्होंने विरोध किया था और कहा था कि इससे गलत परंपरा की शुरुआत होगी। विरोध के बाद शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को फैसला वापस ले लिया गया।

नायर ने इस फैसले को वापस लेने के खिलाफ लिखे पत्र में कहा कि मांसाहारी भोजन की सेवा फिर से शुरू करने का फैसला SCBA के पदाधिकारियों के निर्देश पर लिया गया। नायर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट को नवरात्रि के दौरान केवल गुरुवार और शुक्रवार को काम करना था। इसलिए मुख्य कैंटीन से इन दो दिनों के लिए नवरात्रि भोजन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

पत्र में कहा गया है, “मैं आपको पत्र लिखकर एससीबीए और एससीओआरए द्वारा नवरात्रि उत्सव के दौरान मांसाहारी खाद्य पदार्थों और प्याज/लहसुन युक्त खाद्य पदार्थों की सेवा के संबंध में हमारे बार के कुछ सम्मानित सदस्यों द्वारा लिखे गए दिनांक 3.10.2024 के पत्र के अनुसरण में की गई एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ औपचारिक रूप से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहता हूँ।”

उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट परिसर में संचालित 6-7 कैंटीनों में से किसी एक को दो दिनों के लिए बार के सदस्यों को नवरात्रि का भोजन परोसने की अनुमति दी जाती तो कोई अपूरणीय क्षति या नुकसान नहीं होता। यह तब और भी अधिक होता जब अन्य कैंटीन पहले से ही अपने मेनू सूची में मांसाहारी भोजन और प्याज, लहसुन आदि युक्त भोजन परोस रहे थे।”

नायर ने आगे कहा, “हालाँकि, एससीबीए/एससीओआरए के पदाधिकारियों द्वारा बार के शेष सदस्यों से परामर्श किए बिना या उनकी भावनाओं पर विचार किए बिना एकतरफा कार्रवाई करने के उपरोक्त कृत्य ने मुझे इस संबंध में आधिकारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आपको पत्र लिखने के लिए बाध्य किया है, ताकि भविष्य में ऐसी असंगत घटनाएँ न हों।”

नदी पार कर भारत में घुसा बांग्लादेश का नवाब, रंगीला खातून से निकाह कर बिहार के अररिया में बस गया: पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते गिरफ्तार, आधार-वोटर कार्ड बन चुका था

बिहार के अररिया जिले में एक बांग्लादेशी नागरिक की गिरफ्तारी से इलाके में हलचल मच गई है। आरोपी नवाब (24 वर्ष), जो बांग्लादेश के चापा नवाबगंज जिले का निवासी है, ने तीन साल से अररिया के रामपुर कोदरकट्टी पंचायत के मरंगी टोला वार्ड 11 में अपनी पहचान छिपाकर एक स्थानीय महिला से निकाह कर लिया था और एक बच्ची का अब्बू भी बन चुका था।

अवैध दस्तावेज और फर्जी पहचान का खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाब ने बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत की सीमा पार की थी और यहाँ आकर आधार कार्ड, वोटर आईडी, और यहाँ तक कि भारतीय पासपोर्ट बनाने की कोशिश भी की थी।

उसकी पहचान तब खुली जब पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान स्थानीय मुखिया पम्मी देवी के पति राजेश सिंह ने उसके दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई। वोटर आईडी में पिता की जगह पत्नी रंगीला खातून का नाम दर्ज होने से शक गहराया और कड़ाई से पूछताछ के बाद नवाब ने स्वीकार किया कि वह बांग्लादेश का नागरिक है और अवैध रूप से भारत में रह रहा है। नवाब के फर्जी दस्तावेज और अवैध गतिविधियों के खुलासे के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया

भारत में घुसपैठ आसान, महज 1000 रुपए में पार की सीमा

पूछताछ में नवाब ने यह खुलासा किया कि वह बांग्लादेश से करीब 500 से 1000 रुपये देकर नदी पार कर भारत आया था। सीमा पार करने के बाद वह सबसे पहले बिहार के कटिहार जिले के सेमापुर में अपनी मौसी के घर पर रुका। वहाँ कुछ दिन रहने के बाद उसने अररिया के रामपुर कोदरकट्टी पंचायत के मरंगी टोला वार्ड 11 में आकर एक स्थानीय महिला से निकाह कर लिया।

नवाब ने अपने भारतीय पहचान के लिए फर्जी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाए, जिसमें उसने अपने ससुर को अपना अब्बा दिखाया और बीवी का नाम मतदाता पहचान पत्र में दर्ज करा लिया। उसकी योजना पासपोर्ट बनवाकर बांग्लादेश वापस जाने की थी, ताकि वह कानूनी रूप से भारत और बांग्लादेश के बीच आ-जा सके। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान ही उसकी असलियत सामने आई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

मुखिया की सतर्कता से खुला राज

नवाब की सच्चाई सामने आने के पीछे मुख्य भूमिका मुखिया पम्मी देवी और उनके पति की थी, जिन्होंने उसकी पहचान पर शक जताते हुए उसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने जाँच कर नवाब को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ और उनकी अवैध गतिविधियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की जाँच शुरू कर दी है।

ईसाई बताते हैं जिसे फ्रांसिस जेवियर का अवशेष, बौद्धों के लिए वे आचार्य राहुल थेरो: जानिए क्या है विवाद, क्यों हो रही गोवा के चर्च में रखे शव के DNA टेस्ट की माँग

गोवा के नेता सुभाष वेलिंगकर द्वारा ईसाई संत फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों के डीएनए परीक्षण कराने की माँग करने के बाद पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शन को देखते हुए गोवा पुलिस ने शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को कहा कि वेलिंगकर फरार हैं और उन्हें खोजने के लिए छापेमारी की जा रही है। विवाद की पीछे की वजह जानने से पहले आइए जानते हैं कि मामला क्यक है।

गोवा के ईसाई समुदाय का आरोप है कि वेलिंगकर द्वारा फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों के डीएनए परीक्षण कराने की माँग करके उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई गई है। इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि इस तरह का बयान देकर सांप्रदायिक सद्भाव को भी नुकसान पहुँचाई गई है। पूर्व RSS नेता वेलिंगकर के खिलाफ गोवा भर में कम से कम आधा दर्जन शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक क्रूज सिल्वा की शिकायत के आधार पर शुक्रवार (4 अक्टूबर) की रात उत्तरी गोवा के बिचोलिम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई। वेलिंगकर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

एफआईआर के अनुसार, वेलिंगकर ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से सेंट फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ अपमानजनक भाषण दिया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार (4 अक्टूबर) की रात पुलिस की एक टीम वेलिंगकर के घर गई थी, लेकिन वे वहाँ नहीं मिले। बता दें कि वेलिंगकर को साल 2016 में आरएसएस ने संगठन से निकाल दिया था।

वेलिंगकर की गिरफ्तारी की माँग को लेकर शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को राज्य के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। मडगाँव में 300 से अधिक लोग पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए। विरोध करने वाले लोगों में कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

वहीं, शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को प्रदर्शनकारियों ने मडगाँव, अंजुना और ओल्ड गोवा में सड़कें जाम कीं। प्रदर्शनकारियों ने गोवा पुलिस को चेतावनी दी कि अगर आरोपित वेलिंगकर की जल्दी गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे जुआरी पुल को जाम कर देंगे। प्रदर्शन को देखते हुए गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने लोगों से शांति बनाए रखने और सड़कें जाम नहीं करने की अपील की। ​​

प्रमोद सावंत ने कहा, “फादर बोलमैक्स के खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई थी, वैसी ही कार्रवाई वेलिंगकर के खिलाफ भी की जाएगी।” दक्षिण गोवा के चिकालिम स्थित सेंट फ्रांसिस जेवियर चर्च के पादरी फादर बोलमैक्स परेरा पर पिछले साल छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में अपमानजनक टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने को लेकर एक मामला दर्ज किया गया था।

गोवा के संरक्षक फ्रांसिस जेवियर नहीं, परशुराम हैं: वेलिंगकर

इस सप्ताह की शुरुआत में सुभाष वेलिंगकर ने गोवा के संरक्षक कहे जाने वाले सेंट फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों की डीएनए जाँच की माँग की थी। उन्होंने कहा कि सेंट जेवियर को ‘गोएंचो साईब’ (गोवा का संरक्षक) नहीं कहा जा सकता। इससे पहले साल 2022 में भी उन्होंने ऐसा ही बयान दिया था। उस वक्त भी उनके बयान का विरोध हुआ था।

साल 2022 में वेलिंगकर ने कहा था कि सेंट फ्रांसिस जेवियर को ‘गोएंचो साईब’ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि ‘द गोवा फाइल्स’ नामक एक अभियान शुरू किया जाएगा, ताकि जागरूकता पैदा की जा सके। सुभाष वेलिंगकर का कहना है कि गोएंचो साईब सेंट फ्रांसिस जेवियर नहीं, बल्कि हिंदुओं के पौराणिक भगवान परशुराम ‘गोएंचो साईब’ हैं।

बता दें कि सेंट फ्रांसिस जेवियर स्पेनिश जेशूइट मिशनरी थे। वे 1542 में गोवा पहुँचे थे। उस समय गोवा पुर्तगाल का उपनिवेश था। साल 1552 में चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के तट पर स्थित सैन्सियन द्वीप पर उनकी मृत्यु हो गई थी। उनका अवशेष पुराने गोवा में ‘बेसिलिका ऑफ़ बॉम जीसस’ में रखे हैं। उनके अवशेषों की प्रदर्शनी 21 नवंबर 2024 से 5 जनवरी 2025 तक गोवा में आयोजित की जाएगी।

वेलिंगकर ने भी थाने में दी है शिकायत

वेलिंगकर ने गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) को ओल्ड गोवा पुलिस स्टेशन में कुछ एक्टिविस्ट ग्रुप के खिलाफ शिकायत दी। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा, “मैंने हाल ही में गोवा इंक्विजिशन के बारे में एक बयान दिया, जो गोवा के इतिहास का एक दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय है। यह पुर्तगाली शासन के दौरान हुआ था, जबकि इतिहास ईसाई धर्म के प्रसार में सेंट फ्रांसिस जेवियर के योगदान की बात करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह समझना महत्वपूर्ण है कि गोवा इंक्विजिशन ने कई गैर-ईसाइयों के लिए आतंक का शासन बनाया। मैं नफरत और आतंक फैलाने वाले इनक्विजिशन की कार्रवाइयों और संतत्व की सच्ची भावना के बीच तुलना करता हूँ। मेरा मानना ​​है कि इतिहास को फिर से देखने, अतीत की कार्रवाइयों की जांच करने और संतत्व के सही अर्थ पर विचार करने का समय आ गया है।”

वेलिंगकर ने आगे कहा, “इंक्विजिशन के दौरान या किसी अन्य ऐतिहासिक अवधि में नफरत या उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाले कार्यों को पवित्र नहीं माना जा सकता। यह बयान किसी धर्म को बदनाम करने के लिए नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक घटनाओं को उजागर करने के लिए दिया गया है, जिन्होंने अनगिनत गोवावासियों के अनुभवों को आकार दिया।”

सुभाष वेलिंगकर ने अपने बयान के पीछे बौद्ध समुदाय के लोगों की माँगों का भी तर्क दिया। उन्होंने कहा, “मेरे बयान लिखित इतिहास की बात करते हैं, न कि मेरे व्यक्तिगत विचारों की। श्रीलंका और विश्व भर के बौद्ध धर्मावलंबियों के बीच सेंट फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों की पहचान सत्यापित करने के लिए डीएनए जाँ की माँग जोर पकड़ रही है।”

क्या है बौद्ध समुदाय के लोगों की माँग

श्रीलंका सहित दुनिया भर के बौद्ध गोवा के सेंट फ्रांसिस जेवियर की रखे गए अवशेषों की जाँच की माँग करते रहते हैं। उनका कहना है कि जिन अवशेषों को फ्रांसिस जेवियर का बताया जाता है, वह बौद्ध आचार्य राहुल थेरो के अवशेष हैं। साल 2014 में श्रीलंका के एक्विस्ट समूह ने भारत के मोदी सरकार और श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम महिंदा राजपक्षे को संबोधित एक खुला पत्र लिखा गया था।

दिसंबर 2014 को अपने पिटिशन में बौद्ध समुदाय के लोगों ने कहा था, “हम हस्ताक्षरकर्ता भारत और श्रीलंका तथा शेष विश्व के चिंतित और सही सोच वाले नागरिकों के रूप में आपसे अनुरोध करते हैं कि भारत के गोवा में एक चर्च में काँच के ताबूत में रखे एक शव के अवशेषों की वास्तविक पहचान के संबंध में लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने में कृपया हस्तक्षेप करें।”

इसमें कहा गया था, “श्रीलंका में विशेष रूप से बौद्ध लोगों के बीच यह व्यापक मान्यता है कि विचाराधीन शव श्रीलंका के एक अत्यंत सम्मानित साहित्यिक दिग्गज और विद्वान भिक्षु आचार्य वेन. थोटागामुवे श्री राहुला थेरो (1409-91) का है, जबकि कैथोलिकों को विश्वास दिलाया गया है कि यह फ्रांसिस जेवियर का शव है, जो एक विवादास्पद ईसाई जेसुइट मिशनरी था और उस पर कुख्यात गोवा इंक्विजिशन शुरू करके मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगा था।”

पिटिशन में आगे कहा गया था, “हमारा मानना ​​है कि दोनों परिवारों के वंशजों का डीएनए परीक्षण या रक्त का नमूना की जाँच सदियों से चली आ रही बहसों और सिद्धांतों को संतोषजनक ढंग से समाप्त कर देगा। हमारी माँग है कि गोवा में पड़े शव को फ्रांस को लौटा दिया जाए और विवादास्पद अवशेषों को अब गोवा में न रखा जाए क्योंकि न तो गोवा और न ही भारत विदेशी देशों का उपनिवेश है।”

पिटिशन में कहा गया है कि गोवा को भारत ने 1961 में आजाद कराया था। वास्तव में गोवा इंक्विजिशन (पहली बार फ्रांसिस जेवियर द्वारा प्रस्तावित) के कोंकणी ईसाई पीड़ितों के वंशजों ने एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है और भारत सरकार से भी अपील की है। इस संबंध में ऐतिहासिक डेटा और तथ्यात्मक तर्क के आधार लेख के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसलिए इसकी जाँच कराई जाए।

फ्रांसिस जेवियर के शव को लेकर श्रीलंकाई पत्रकार डब्ल्यू टीजेएस कविरत्ने ने फरवरी 2014 में एक लेख भी लिखा था। इस लेख में उन्होंने दावा किया था कि बौद्ध भिक्षुओं और श्रीलंकाई भक्तों के एक वर्ग का कहना है कि सेंट फ्रांसिस जेवियर के अवशेष 15वीं शताब्दी के बौद्ध भिक्षु श्री राहुला थेरो के हैं। हालाँकि, उन्होंने यह कहा था कि लोगों की इन विचारों की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण जरूरी है।

ईसाइयों ने किया था जेवियर के अवशेषों की प्रदर्शनी का विरोध

साल 2014 में पहली बार गोवा के ईसाई समुदाय के लोगों ने फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर विरोध किया गया था। जेवियर को एक संत और चमत्कारी व्यक्ति बताया जाता है। यह सार्वजनिक प्रदर्शनी पिछले 500 वर्षों में पहली प्रदर्शन होने वाला था। इसके लिए 22 नवंबर 2014 से 4 जनवरी 2015 तक गोवा तक समय प्रस्तावित किया गया था।

उस समय ईसाई समुदाय के एक वर्ग ने फ्रांसिस जेवियर के अत्याचारों के कोंकणी ईसाई पीड़ित नामक एक समूह बनाया था। उन्होंने इस प्रदर्शनी के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी थी कि वे जेवियर के अत्याचारों के पीड़ितों के वंशज हैं। उनकी माँग थी कि जेवियर के शव को उनके गृह देश फ्रांस वापस भेजा दिया जाए। इस माँग को लेकर उन्होंने राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया था।

खुद को पीड़ितों के वंशज मानने वाले लोगों का कहना था कि गोवा में पुर्तगाली शासन समाप्त हुए 53 साल हो चुके हैं। इसलिए, भारत में जेवियर के शव को संरक्षित रखना भारत का अपमान है और इसे जल्द से जल्द पुर्तगाल भेजा जाना चाहिए। पीड़ितों ने गोवा सरकार और केंद्र सरकार से याचिका दायर करने की भी योजना बनाई थी।

भारत के बौद्ध संगठन भी DNA जाँच के पक्ष में

फ्रांसिस जेवियर और बौद्ध प्रबुद्ध राहुल थेरो के अवशेषों को लेकर जो विवाद जन्मा है, इसको लेकर भारत के बौद्ध समुदाय के लोग एवं संगठन भी DNA परीक्षण कराए जाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि जिस बात को लेकर विवाद हो जाए, उसका वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण करके समाधान निकालना ही शांति के पक्ष में है।

बिहार के बोधगया स्थित बौद्ध धर्म के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक महाबोधि मंदिर के प्रबंधन समिति के सदस्य धम्मा धीरू उर्फ प्रेमा फंते ने इस संबंध में ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि भारत के बौद्ध समुदाय के लोग भी चाहते हैं कि गोवा में संरक्षित कथित फ्रांसिस जेवियर के अवशेषों का परीक्षण कराया जाए।

प्रेमा भंते ने कहा कि राहुल थेरो बौद्ध धर्म के एक महान संत थे और उनके अवशेषों को लेकर जाँच की माँग की जा रही है तो इसे की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के बौद्ध समुदाय के संगठन के बीच इसको लेकर राय-मशविरा किया जाएगा और इस संबंध में जरूरत पड़ी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

कौन हैं बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध संत राहुल थेरो

थोटागामुवे श्री राहुला थेरो श्रीलंका के साहित्य जगत में एक साहित्यिक दिग्गज थे। उन्होंने 1430 से 1440 की अवधि के दौरान बुद्धगज्जया, वुर्थमाला संदेसाया, परवी संदेसाया, सेलाहिनी संदेसाया, काव्यासेकराय, पंचिका प्रदीपया, बुद्दीपसदिनिया, गिरा संदेसाया, साकसकाडा और मावुलु संदेसाया जैसी प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाएँ लिखीं।

राहुल थेरो का जन्म 9 जून 1409 को राजा पराक्रमबाहु 6वें के शासनकाल में हुआ था। वे सन 1429 में भिक्षु बने। इसके बाद उन्हें वच्चिश्वर के नाम से जाना जाता था। राहुल थेरो 6 भाषाओं में पारंगत थे और एक प्रतिष्ठित लेखक, अनुभवी ज्योतिषी और आयुर्वेदिक चिकित्सा में पारंगत थे। इन तीनों क्षेत्रों से लेकर आध्यात्म तक में उन्होंने कई प्रसिद्ध पुस्तकें लिखी हैं।

वे राजा पराक्रमबाहु द्वारा संगराजा का पद पाने वाले पहले भिक्खु बने। वह राजा विजयबाहु प्रथम द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित शिक्षा संस्थान थोटागामुवे विजयबा पिरिवेना के मुख्य पदाधिकारी और प्रधानाचार्य भी थे। विजयबा पिरिवेना और रथपथ विहार, दोनों को 1580 ईस्वी में थोम डीसूजा ने नष्ट कर दिया था। इसके कुछ ग्रेनाइट स्तंभ ही बचे थे। मंदिर का पुनर्निर्माण 1765 में वेन. पल्लट्टारा थेरो द्वारा किया गया था।

श्री राहुला थेरो का 27 सितंबर 1491 को 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद गाँव के लोग विजयबा पिरिवेना पहुँचे और उनके शरीर (बढ़ते बालों और नाखूनों के साथ) को सुरक्षा के लिए एल्पिटिया के पास अंबाना इंदुरुगिरी गुफा में रख दिया। ऐसा कहा जाता है कि राहुला थेरो ने एक औषधि (सिद्धलोक रस) का सेवन किया था, जिससे उनका शरीर वर्ष 4230 तक अपरिवर्तित रहा था।

उनके शरीर के इस अपरिवर्तन की बात उनकी मृत्यु से पहले ताँबे की शीट पर एक श्लोक में उकेरा गया था। जब पुर्तगाली श्रीलंका पहुँचे तो उन्होंने उनके शरीर को अपने कब्जे में ले लिया और उसे गोवा भेज दिया। कहा जाता है कि राहुल थेरो के शरीर को गोवा ले जानेे का काम ईसाई मिशनरी फ्रांसिस जेवियर को सौंपा गया था। यात्रा के दौरान फ्रांसिस जेवियर की समुद्र में मृत्यु हो गई और राहुल थेरो के शरीर को फ्रांसिस जेवियर का बता दिया गया।

कौन थे सेंट फ्रांसिस जेवियर

इसाई मिशनरी धर्म प्रचारक सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर (Francis Xavier) पुर्तगाली काफिले के साथ वर्ष 1542 में भारत आया था। उसने भारत पहुँचकर ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। वह ‘सोसायटी ऑफ जीसस’ से जुड़ा था। इन्हीं सोसायटी ऑफ़ जीसस वालों को जेसुइट्स कहा जाता है।

सेंट फ्रांसिस जेवियर के आने के बाद 1559 तक गोवा में 350 से अधिक हिन्दू मंदिरों को बंद कर दिया गया था। इस दौरान हिन्दुओं के मूर्ति पूजा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। सारे प्रयास किए गए कि वह हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाईयत अपना लें। इसके बाद भी सेंट जेवियर ने देखा कि उसके हिन्दुओं के बलात धर्म परिवर्तन के प्रयास पूरी तरह से कामयाब नहीं हो रहे थे। 

उसे समय रहते यकीन होता गया कि सनातन धर्म की आस्था अक्षुण्ण है। यदि वह मंदिरों को नष्ट करता है तो लोग घरों में ही मंदिर बना लेते हैं। उसने देखा कि लोगों को धारदार हथियारों से काटने, उनके हाथ और गर्दन रेतने और असीम यातनाको देने के बाद भी फेनी (सस्ती शराब) और सनातन धर्म में से लोग सनातन धर्म को ही चुनते और मौत को गले लगा लेते।

निराश होकर जेवियर ने रोम के राजा को पत्र लिखा जिसमें उसने हिन्दुओं को एक अपवित्र जाति बताते हुए उन्हें झूठा और धोखेबाज लिखा उसने कहा कि उनकी मूर्तियाँ काली, बदसूरत और डरावनी होने के साथ ही तेल की गंध से सनी हुई होती हैं। इसके बाद हिन्दुओं पर यातनाओं का सबसे बुरा दौर आया। फ्रांसिस जेवियर ने गोवा का पूर्ण अधिग्रहण किया।

हिन्दुओं के दमन के लिए एक धार्मिक नीतियाँ बनाई और यीशु की कथित सत्ता में यकीन ना करने वाले ‘नॉन-बिलीवर्स’ को दंडित किया जाने लगा। इस घटना के बारे में लिखने वाले इतिहासकारों को भी सख्त यातनाएँ दी गईं। उन्हें या तो गर्म तेल में डालकर जलाया जाता या फिर जेल भेज दिया जाता। ऐसे ही कुछ लेखकों में फिलिपो ससेस्ती, चार्ल्स देलोन, क्लाउडियस बुकानन आदि के नाम शामिल थे।

इतिहास में पहली बार हिन्दू भागकर बड़े स्तर पर प्रवास करने को मजबूर हो गए। सेंट फ्रांसिस जेवियर ने मात्र भारत ही नहीं बल्कि मलय प्रायद्वीप, श्रीलंका, जापान और चीन तक में ईसाइयत का प्रचार करने गया था। उसकी चीन के द्वीप पर बुखार से मौत हो गई थी। बताते हैं कि उसने अपने जीवन में कम से कम 30,000 लोगों को ईसाई बनाया था।

सेंट फ्रांसिस जेवियर जिस सोसायटी ऑफ़ जीसस या ‘जेसुइट्स’ का हिस्सा था वह बड़े स्तर पर लोगों को गुलाम बनाते थे। जेसुइट्स ने अमेरिका में स्थानीय आदिवासियों को गुलाम बनाया था। उनके पास एक समय में 20,000 से अधिक गुलाम थे और उन्हें खेतों तथा अन्य कामों में लगाया जाता था। गुलामों को रखने, उन पर अत्याचार करने को कई बार सही भी बताया गया था। इसे ईसाईयत के विरुद्ध नहीं माना गया था।