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RG Kar अस्पताल के 10 डॉक्टर-59 स्टाफ सस्पेंड, रेप-मर्डर के बाद बनी जाँच कमेटी का आदेश: यौन शोषण-धमकी-वसूली के आरोपों पर शुरू हुई कार्रवाई

आरोपितों पर जूनियर स्टाफ को देर रात नशा और शराब खरीदने के लिए मजबूर करने और लड़कों के कॉमन रूम में अश्लील हरकतें करने के लिए मजबूर करने का भी आरोप है।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित आरजी कर अस्पताल फिर से विवादों में घिरा हुआ है। पहले इस अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे देश, खासकर बंगाल में विरोध-प्रदर्शन की आग भड़काई थी। अब इस अस्पताल से एक और गंभीर खबर आई है, जिसमें 10 डॉक्टरों समेत कुल 59 स्टाफ को निष्कासित किया गया है। इनमें डॉक्टर, इंटर्न और हाउस स्टाफ शामिल हैं।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जाँच कर रही कमेटी ने 10 डॉक्टरों समेत 59 स्टाफ को या तो पूरी तौर पर या अस्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया है। निष्कासित किए गए लोगों पर यौन दुर्व्यवहार, धमकी देने और जबरन पैसा वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग पूर्व आरजी कर प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी थे, जिनके कार्यकाल में जूनियर डॉक्टर के साथ बर्बर बलात्कार और हत्या का मामला हुआ था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन व्यक्तियों पर आरोप है कि वे दूसरे छात्रों को धमकाते थे कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो परीक्षा में फेल करवा देंगे या हॉस्टल से निकालने की धमकी देंगे। इसके अलावा, जूनियर स्टाफ को जबरन एक खास राजनीतिक पार्टी से जुड़ने के लिए मजबूर करना, यौन दुर्व्यवहार में शामिल होना, जबरन पैसा वसूलना, झूठी एफआईआर दर्ज करवाना और शारीरिक हिंसा में शामिल होने के भी आरोप हैं।

निष्कासित किए गए लोगों में से एक अशोक पांडे नाम का हाउस स्टाफ भी शामिल है, जो पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का करीबी बताया जा रहा है। संदीप घोष को पहले ही वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था।

निष्कासित डॉक्टरों में – सौरभ पाल, आशीष पांडे (जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया), अभिषेक सेन, आयुष्री थापा, निरंजन बागची, शरीफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं। निष्काषित लोगों को अगले 72 घंटों में हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है। इन आरोपितों के नामों को राज्य मेडिकल काउंसिल को भी भेजा जाएगा, जिससे उनके रजिस्ट्रेशन की जाँच और रद्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इन व्यक्तियों पर जूनियर स्टाफ को देर रात नशा और शराब खरीदने के लिए मजबूर करने और लड़कों के कॉमन रूम में अश्लील हरकतें करने के लिए बाध्य करने का भी आरोप है। इसके अलावा, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर शारीरिक हिंसा के आरोप भी लगाए गए हैं।

संस्थान की आंतरिक जांच समिति द्वारा की गई जाँच के बाद, इन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, जिन लोगों पर महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के “ठोस सबूत” पाए गए हैं, उन्हें आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया है।

इसी बीच, एक अन्य घटनाक्रम में रेप-मर्डर केस के बाद सुरक्षा जैसी माँगों को लेकर अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार उनकी जायज़ माँगों को भी नहीं मान रही है, इसीलिए उन्होंने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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