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जिसके पिता-चाचा को इस्लामी आतंकियों ने गोलियों से भूना, उसने किश्तवाड़ में खिलाया ‘कमल’: जीत के बाद बोलीं शगुन परिहार- हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो

शगुन परिहार के चाचा अनिल परिहार जम्मू कश्मीर में भाजपा के बड़े नेता था। उनके पास राज्य में भाजपा के सचिव पद की जिम्मेदारी थी। वो अपने राजनीतिक करियर में आगे बढ़ ही रहे थे कि इस्लामी कट्टरपंथियों की नजर में वो खटकने लगे और साल 2018 में अनिल परिहार के साथ उनके भाई व शगुन परिहार के पिता को मौत के घाट उतार दिया गया।

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार शगुन परिहार ने जोरदार जीत दर्ज की है। शगुन परिहार जम्मू कश्मीर की किश्तवाड़ सीट से उम्मीदवार से चुनाव लड़ रहीं थी। शगुन परिहार के पिता और चाचा की इस्लामी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को आए नतीजों में शगुन परिहार को 29053 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवार सज्जाद अहमद किचलू को 28532 वोट ही मिले। शगुन परिहार ने इस तरह 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया।

चुनाव जीतने के बाद शगुन परिहार ने मडिया से बात भी की है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं यहाँ सुरक्षा का मुद्दा सुलझाऊँगी, क्योंकि हमने बहुत से जवानों को और अपने लोगों को खोया है। मैंने अपने पिता को खोया है। किसी ने यहाँ अपने बेटे, किसी ने अपने भाई को खोया है। मेरी कोशिश रहेगी कि यहाँ के हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो।”

शगुन परिहार मात्र 29 वर्ष की हैं और उन्हें पार्टी ने पहली बार किश्तवाड़ से मौक़ा दिया था। शगुन परिहार ने टिकट मिलने के बाद कहा था, “वह काला दिन आज भी मेरी आँखों में बसा है, जिस दिन मेरा घर वीरान कर दिया गया। मेरे परिवार ने अपने खून का कतरा-कतरा किश्तवाड़ के लिए दे दिया, यह चुनाव उनके लिए है।”

शगुन परिहार के चाचा अनिल परिहार जम्मू कश्मीर में भाजपा के बड़े नेता था। उनके पास राज्य में भाजपा के सचिव पद की जिम्मेदारी थी। वो अपने राजनीतिक करियर में आगे बढ़ ही रहे थे कि इस्लामी कट्टरपंथियों की नजर में वो खटकने लगे और साल 2018 में अनिल परिहार के साथ उनके भाई व शगुन परिहार के पिता को मौत के घाट उतार दिया गया।

कैसे हुई थी अनिल परिहार और अजीत परिहार की हत्या

नवंबर 2018 की बात है। बीजेपी की राज्य इकाई के सचिव अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार किश्तवाड़ में अपनी दुकान से लौट रहे थे कि इसी दौरान उन पर करीब से गोलीबारी हुई। बाद में पता चला कि हमलावर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी थे जो उस रात रास्ते में खड़े होकर सिर्फ दोनों भाइयों के लौटने का इंतजार कर रहे थे।

इस घटना के बाद किश्तवाड़ा में हालात ऐसे हो गए थे कि कर्फ्यू लगाना पड़ा था और इंटरनेट बंद करने पड़े थे। पड़ताल के बाद इस मामले में तीन आतंकी गिरफ्तार हुए थे। अनिल परिहार अनुच्छेद 370 हटाए जाने के प्रबल समर्थन थे और इस्लामी आतंकवाद का जम कर विरोध करते थे, इसीलिए उनकी हत्या आतंकियों ने कर दी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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