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2014: 222 हमले, 2024: 15 हमले… मोदी राज में आतंकवाद की टूटी कमर, जम्मू-कश्मीर में जवान हों या आम आदमी जानमाल का नुकसान 90% तक कम, आर्टिकल 370 हटाने से बदली तस्वीर

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष कर रहे सुरक्षा बलों को पिछले 10 वर्षों में बड़ी सफलता मिली है। आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में होने वाले आतंकी हमलों में काफी गिरावट आई है। सुरक्षा बलों को भी साल 2014 के मुकाबले इस साल काफी कम नुकसान हुआ है। इस बदलाव के पीछे स्थानीय लोग आर्टिकल 370 हटना और कई क्षेत्रों में विकास कार्य होना बता रहे हैं। हालाँकि जम्मू क्षेत्र में वोटिंग प्रतिशत में साल 2010 के मुकाबले इस बार गिरावट दर्ज की गई है।

TOI के मुताबिक, साल 2024 में 27 सितंबर तक जम्मू क्षेत्र में आतंकी 15 हमलों को अंजाम दे पाए हैं। इन हमलों में 11 आम नागरिक मारे गए। हमलों के बाद सुरक्षा बलों की आतंकियों से मुठभेड़ भी हुई। इन मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों के 17 जवानों को वीरगति मिली है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में जम्मू क्षेत्र में 10 आतंकी भी ढेर किए गए हैं। अमूमन जम्मू के मुकाबले अधिक अशाँत रहने वाले कश्मीर क्षेत्र में आतंकवाद के आँकड़े जम्मू के मुकाबले पिछले 1 दशक में काफी कम हैं।

कश्मीर जोन की बात करें, तो कश्मीर में इस साल अब तक कुल 8 आतंकी हमले हुए हैं। इन हमलों में सुरक्षा बलों के 4 जवानों को वीरगति मिली है। आतंकियों द्वारा मारे गए आम नागरिकों की संख्या 5 है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में कश्मीर क्षेत्र में कुल 35 आतंकी ढेर हुए हैं। जम्मू और कश्मीर मिला कर इस साल अब तक कुल 23 आतंकी हमले हुए हैं। इन आतंकी हमलों में सुरक्षा बलों के कुल 25 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। मारे गए आम नागरिकों की तादाद 16 बताई गई है।

क्या थे 2014 के आँकड़े

बताते चलें कि 10 साल पहले 2014 में हालात बदतर थे। तब जम्मू और कश्मीर मिला कर 222 आतंकी हमले हुए थे। इन हमलों में सुरक्षा बलों के 47 जवान बलिदान हुए थे। इसी दौरान 29 आम नागरिकों की भी जान चली गई थी। तब सुरक्षा बलों से हुई मुठभेड़ों के बाद कुल 110 आतंकी ढेर हुए थे। इस बदलाव के पीछे की वजह स्थानीय लोगों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटना और विकास कार्यों में तेजी आने को बताया है।

किसी के लिए ‘परोपकारी’, किसी के लिए ‘करिश्माई’: जो नसरल्लाह मरा वह आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह का सरगना था, पर ‘सम्मानित’ बता मातम मना रहा है मीडिया

इस्लामी आतंकियों के मरने पर मार्मिक एंगल ढूँढकर उनके लिए संवेदना बटोरना मीडिया के लिए कोई नया काम नहीं है। वामपंथी मीडिया की आदत है कि आतंकी कितना ही बड़ा क्यों न हो, मगर वो उसके आतंक को धो-पोंछने में कोई कसर नहीं छोड़ते। हाल में मीडिया का ये चरित्र तब देखने को मिला जब इजरायल ने हिज्बुल्लाह चीफ नसरल्लाह को मौत के घाट उतारा।

अमेरिका से लेकर सीरिया तक में लोग इस कार्रवाई पर खुश हुए लेकिन वामपंथी मीडिया में मातम पसर गया। जैसे ही खबर आई कि इजरायल ने हसन नसरल्लाह का आतंक दुनिया से खत्म कर दिया है उसके बाद मीडिया पोर्टलों में उसके कुकर्मों का ब्योरा छपने की होड़ लग गई। धीरे-धीरे वैसे ये काम कई समाचार साइटों ने किया लेकिन न्यूयॉर्क पोस्ट, द गार्जियन, बीबीसी ने दो कदम उठकर ये ऐसा प्रोपगेंडा फैलाया कि पढ़ने में लगे नरसल्ला कितना भला आदमी था, जिसने हमेशा मुस्लिमों के साथ यहूदियों और ईसाइयों का अच्छा चाहा।

NYT का प्रोपगेंडा

पहले बात करते हैं न्यूयॉर्क टाइम्स की। नीचे दिए स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि कैसे न्यूयॉर्क टाइम्स ने हिज्बुल्लाह चीफ को महान दिखाने के लिए बताया कि वो हमेशा से मुस्लिमों, यहूदियों और ईसाइयों के लिए समान फिलीस्तीन की कामना करता था। NYT ने आगे उसके लिए संवेदना बटोरने का काम किया।

अपने आर्टिकल में NYT ने नसरल्ला को एक शक्तिशाली ‘वक्ता’ बताया। साथ ही ये दिखाया कि कैसे वो शिया मुसलमानों में प्रिय था और हिज्बुल्लाह संगठन को खड़ा करके लेबनान में अपनी सामाजिक सेवाएँ देता था। इसके अलावा अपने आर्टिकल में नसरल्लाह की छवि एक ऐसे नेता के तौर पर दिखाई गई जिसकी प्रतिष्ठा मिडल ईस्ट के देशों तक फैली हुई थी।

एसोसिएटिड प्रेस के लिए करिश्माई था नसरल्लाह

न्यू यॉर्क टाइम्स के बाद ‘द एसोसिएटिड प्रेस’ ने भी ऐसा ही किया। उन्होंने तो अपनी हेडलाइन से ही नसरल्लाह को इस तरह पेश किया जैसे वो आतंकी संगठन को चलाने वाला सरगना न होकर मानवता को बचाने वाला मसीह हो। शीर्षक में उसके लिए Charismatic and shrewd जैसे शब्द प्रयोग किए गए।

आगे उसके जीवन से जुड़े किस्सा बताए गए। लेख के भीतर उसे चतुर रणनीतिकार बताकर उसकी वाहवाही की। इतना ही नहीं ये भी बताया गया कि कैसे लेबनानी उसे सम्मान देते थे। उसके पास सैयद की उपाधि थी और वो एक प्रखर वक्ता भी था

जब लोगों ने इन विशेषणों को नसरल्ला के लिए देखा तो वो भड़क गए। AP की मंशा पर सवाल उठने शुरू हुए, लेकिन तब उन्होंने बिन कोई सफाई दिए चुपचाप आर्टिकल की हेडलाइन बदल दी। हेडलाइन में लिखा गया- लंबे समय से हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह कौन हैं? (Who is longtime Hezbollah leader Hassan Nasrallah?)

बीबीसी ने नसरल्लाह को दिखाया आंदोलनकारी और परोपकारी

न्यू यॉर्क पोस्ट और एपी की तरह बीबीसी गुजराती ने भी नसरल्लाह के लिए लिखा कि वो मिडल ईस्ट का सबसे प्रसिद्ध और सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक था। अपने लेख में बीबीसी ने दिखाया कि नसरल्लाह इतना प्रभावशाली आदमी था कि उसके ईरान से घनिष्ठ संबंध थे, जिसने हिजबुल्लाह को आज की राजनीतिक और सैन्य शक्ति में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस समूह का वो सम्मानित व्यक्ति था।

इसी तरह अपने लेख में एक आतंकी संगठन के लिए बीबीसी ने बातें इतनी बढ़ा-चढ़ा कर लिखीं कि पता ही नहीं चला कि हिज्बुल्लाह एक आतंकी संगठन है। ऐसा लगता है कि जैसे ये कितनी बड़ी सेना है जो अपने देश की रक्षा के लिए बनाई गई। हकीकत जबकि ये है कि इजरायल के विरुद्ध लड़ने के लिए हिज्बुल्लाह संगठन का जन्म हुआ था ताकि उत्तरी सीमा से इजरायल कमजोर रहे।

बीबीसी ने अपने लेख में नसरल्लाह के नेतृत्व में खड़े किए गए हिज्बुल्लाह को मानवतावादी दिखाने के लिए ये तक बताया कि हिज्बुल्लाह की सेना आधिकारिक लेबनानी सेना से भी अधिक शक्तिशाली हैं। इसका लेबनानी राजनीति में इतना प्रभाव है कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा प्रदान करने में सबसे आगे हैं।

यूरो न्यूज के लिए हसन नसरल्लाह इस्लामी नेता

इसी तरह यूरो न्यूज की हेडलाइन देखिए। यूरो न्यूज ने घोषित आतंकी हसन नसरल्लाह को इस्लामी नेता लिखा है और ऐसे दिखाया है जैसे इजरायल आतंकी संगठन है जिसका विरोध वो दशकों से करता आया है।

जबकि, सच्चाई तो ये है कि हिज्बुल्लाह का अस्तित्व ही इजरायल के विनाश के लिए हुआ था। 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजरायल पर हमला बोला था उसके अगले ही दिन हिज्बुल्लाह ने भी हमला किया था। क्या इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक्शन भी न ले।

आतंकियों से संवेदना वामपंथी मीडिया का पुराना धंधा

कुल मिलाकर ऐसे तमाम मीडिया संस्थान हैं जिन्होंने 28 सितंबर को हसन नसरल्लाह की मौत के बाद उसके आतंकी बैकग्राउंड को पूरी तरह ढाँकने का काम किया और उसे एक आतंकी संगठन का सरगना न दिखाकर एक परोपकारी इस्लामी नेता दिखाने की कोशिश की। उसके बचपन के हालातों को खबरों के तौर पर मुख्य रूप से ऐसे चलाया गया जैसे गरीबी के हालातों से निकलकर उसने मानवता को बढ़ावा देने में उसने कितना बड़ा योगदान दिया हो।

हकीकत जबकि ये है कि आतंकी संगठन का सरगना नसरल्लाह के ऊपर न जाने कितनी आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने का आरोप है। वहइजरायलियों पर किए जाने वाले अत्याचार का वो पुरजोर समर्थन करता था। उसके संगठन हिज्बुल्लाह में इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकी थे न कि समाजसेवी। आतंकी संगठन को खड़े रखना एक सामान्य समाज के लिए सम्मानजनक काम नहीं है जो मीडिया अपने लेखों में बता रहा है कि वो सम्मानित व्यक्ति था।

हिज्बुल्लाह- एक आतंकी संगठन

मालूम हो कि हिज्बुल्लाह को अमेरिका, यूरोपीय संघ, इजराइल समेत 60 से ज्यादा देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा था, लेकिन फिर भी उसके लिए संवेदना वामपंथी मीडिया में बराबर है। ठीक उसी तरह जैसे कभी बगदादी के लिए थी, हमास के चीफ के लिए थी, लादेन के लिए थी…।

1983 में हिज्बुल्लाह ने बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर हमला कराया था। उस समय करीबन 49 लोगों की मौत हुई थी और 30 से ज्यादा घायल थे। इसके बाद उसी साल इस संगठन ने बेरूत में फिर हमला किया जिसमें 240 अमेरिकियों की जान गई।

1989 में इस संगठन ने बैंगकॉक में सऊदी अरब के सेक्रेट्री को मौत के घाट उतारने का काम किया। 1992 में ब्यूनोस (Buenos) के इजरायली दूतावास पर पर बमबारी की जिसमें 29 लोग मरे और 240 से ज्यादा लोग घायल हुए। 2 साल बाद ब्यूनोस में ही यहूदियों के सेंटर पर बम विस्फोट किए गए जिसमें 85 की मौत हुई और 300 से ज्यादा घायल हुए।

जिस हिज्बुल्लाह को मात्र एक इस्लामी संगठन बनाकर मीडिया दिखा रहा है वो हकीकत में आतंकी संगठन है जिसके बारे में मीडिया को खुलकर बताना आना चाहिए। इस्लामी प्रोपगेंडे से पत्रकारिता सालों से त्रस्त रही है। इजरायल जब खुलकर अपने देश के नागरिकों को बचाने के लिए डटकर आतंकियों को सामना कर रहा है तो क्या ये मीडिया का फर्ज नहीं है वो भी अपने पाठकों को… जिनसे उनका अस्तित्व है उन्हें सच दिखाने के लिए खड़े हों न कि लीपा-पोती के लिए।

अपनी बिगड़ी तबीयत पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आए मल्लिकार्जुन खड़गे, अमित शाह ने कर दिया उपचार: कहा- यह PM मोदी से कॉन्ग्रेस की नफरत और डर का प्रदर्शन

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जम्मू-कश्मीर की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखी टिप्पणी की थी, जिसपर गृह मंत्री अमित शाह कड़ा जवाब दिया है। खड़गे का बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक मोदी सत्ता में हैं, वह मरेंगे नहीं, ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इस बयान पर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे के शब्दों को ‘अपमानजनक’ करार दिया।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (जो पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर खड़गे के बयान की आलोचना करते हुए लिखा, “कल (29 सितंबर 2024) कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने अपने भाषण में खुद, अपने नेताओं और अपनी पार्टी को शर्मिंदा कर दिया। अपनी कड़वाहट दिखाते हुए, उन्होंने बिना किसी वजह के प्रधानमंत्री मोदी को अपने निजी स्वास्थ्य के मामले में घसीटते हुए कहा कि वह तभी मरेंगे जब मोदी सत्ता से हटेंगे। यह दिखाता है कि इन कॉन्ग्रेस नेताओं के दिलों में मोदी जी के लिए कितनी नफरत और डर भरा हुआ है, वे हर समय उनके बारे में सोचते रहते हैं।”

‘PM मोदी आपके दीर्घायु की प्रार्थना करते हैं’

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार किसी के स्वास्थ्य के मुद्दे पर राजनीति नहीं करती। उन्होंने खड़गे के स्वास्थ्य को लेकर कहा, “जहाँ तक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के स्वास्थ्य की बात है, पीएम मोदी प्रार्थना करते हैं, मैं भी प्रार्थना करता हूँ कि खड़गे दीर्घायु हों और स्वस्थ रहें।” शाह ने यह भी कहा कि खड़गे को 2047 तक विकसित भारत का निर्माण होते देखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह स्वस्थ रहें।

उम्र का हवाला देते हुए कही थी बड़ी बात

29 सितंबर को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जम्मू-कश्मीर के बिलावर में एक रैली के दौरान आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते वक्त भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था, “हम कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लड़ेंगे। मैं 83 साल का हूँ, लेकिन जब तक प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में हैं और भाजपा देश पर शासन कर रही है, मैं न तो चैन से बैठूँगा और न ही मरूँगा।” यह बयान उस समय दिया गया जब खड़गे शहीद जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे और वह खुद भी इस दौरान भावुक हो गए थे। कुछ पल के लिए उन्हें असहजता महसूस हुई, लेकिन उन्होंने जल्दी ही खुद को संभाल लिया और अपने भाषण को जारी रखा।

प्रधानमंत्री ने फोन पूछी थी खड़गे की तबियत

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खड़गे को फोन कर उनका स्वास्थ्य जाना था। खड़गे की तबीयत जम्मू-कश्मीर के बिलावर में आयोजित चुनावी सभा के दौरान अचानक बिगड़ गई थी। इस दौरान पीएम मोदी ने खड़गे के स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताई और उनसे फोन पर बातचीत की।

यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। एक ओर खड़गे का बयान, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर तीखे हमले किए, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री का उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताना, दोनों ही घटनाओं ने मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी। अमित शाह ने भी खड़गे के बयान का जवाब देकर यह साफ कर दिया कि भाजपा इस प्रकार के व्यक्तिगत हमलों को गंभीरता से लेती है।

स्कूल में छात्राओं को दिखाए अश्लील वीडियो, 50 साल का लईक अहमद टोंक से गिरफ्तार: कानपुर की कोचिंग के बाथरूम में छात्रा के साथ अश्लील हरकत करने वाला साहिल सिद्दीकी भी अरेस्ट

राजस्थान और उत्तर प्रदेश से 2 अलग-अलग ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें टीचरों ने अपनी ही छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें की हैं। राजस्थान के टोंक में 50 वर्षीय शिक्षक लईक अहमद कुरैशी ने अपनी छात्रा को अश्लील वीडियो दिखाए। UP के कानपुर में भी टीचर साहिल सिद्दीकी ने भी कोचिंग में पढ़ने वाली छात्रा से अश्लील हरकतें की हैं। दोनों आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पहला मामला राजस्थान के टोंक से है। यहाँ के थानाक्षेत्र निवाई में एक सरकारी स्कूल है। इसी स्कूल में 50 वर्षीय लईक अहमद कुरैशी बतौर अध्यापक 16 वर्षों से कार्यरत है। आरोप है कि शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को लईक अहमद ने अपने मोबाइल पर नाबालिग छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाई। इसी दौरान उसने छात्राओं से छेड़खानी भी की। छात्राओं ने घर आ कर परिजनों को इसकी जानकारी दी, तो परिजन भड़क उठे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्राओं के परिजनों ने पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने एक पीड़िता के अभिभावक से तहरीर ले कर जाँच शुरू की और फिर आरोपित शिक्षक लईक अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया। ग्रामीणों और पीड़िताओं के परिजनों ने लईक अहमद को बर्खास्त करने की माँग उठाई है। मामले में प्रशासन ने जाँच कर जरूरी कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

साहिल सिद्दीकी की छात्राओं से अश्लील हरकत

राजस्थान की ही तरह, उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से भी एक शर्मनाक मामला सामने आया है। काकादेव क्षेत्र स्थित आई एन्ड आई कोचिंग सेंटर में बायोलॉजी के लेक्चरर साहिल सिद्दीकी पर गंभीर आरोप लगे हैं। कोचिंग संचालक आशीष श्रीवास्तव ने 28 सितंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बताया कि 26 सितंबर को उन्हें कोचिंग में एक बंद लिफाफा मिला। जब उन्होंने लिफाफा खोला तो उसमें एक पेन ड्राइव थी, जिसमें कोचिंग के अंदर का एक वीडियो था। वीडियो में बॉयोलॉजी साहिल सिद्दीकी टॉयलेट में एक छात्रा के साथ अश्लील हरकतें कर रहा था।

वीडियो के मुताबिक, साहिल सिद्दीकी लगभग 10 मिनट तक छात्रा के साथ टॉयलेट में रहा और बाहर आने के बाद उसने उसे जबरन गले लगाया और किस किया। यह घटना कोचिंग के अंदर हुई, जिससे कोचिंग संचालक और छात्र-छात्राओं के माता-पिता गहरे सदमे में हैं। आशीष ने पुलिस को तहरीर दे कर साहिल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस तहरीर पर केस दर्ज कर के साहिल अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरू में जब साहिल अंसारी के खिलाफ आरोप लगे तो वो सारा ठीकरा कोचिंग संचालक आशीष पर फोड़ने लगा। 97 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर काम करने का दावा करते हुए वह इसे पैसों का आपसी विवाद साबित करना चाहा। हालाँकि जब उसका वीडियो सामने तो साहिल खामोश हो गया। वीडियो में साहिल छात्रा के साथ टॉयलेट में लगभग 10 मिनट तक अंदर ही रहा। टॉयलेट से निकल कर वह छात्र के गले पर किस करता है।

इस मामले में भी पीड़िता नाबालिग बताई जा रही है। आरोप है कि साहिल सिद्दीकी हिंदू छात्राओं को विशेष रूप से निशाना बना रहा था। आशीष श्रीवास्तव ने यह भी माँग की है कि साहिल के फंडिंग सोर्स और उसके पीछे की मंशा की भी जाँच की जाए। फिलहाल पुलिस साहिल सिद्दीकी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई कर रही है। फ़िलहाल पुलिस ने साहिल अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राँची में काली मंदिर के पास मिला प्रतिबंधित मांस, स्थानीय हिंदू भड़के: CCTV फुटेज में सब रिकॉर्ड, 3 जगह से मीट से भरे बोरे बरामद

झारखंड की राजधानी राँची में एक बार फिर धार्मिक उबाल पैदा हो गया जब काली मंदिर के सामने प्रतिबंधित मांस मिलने की खबर आई। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। रविवार को काली मंदिर के सामने और राँची के दो अन्य स्थानों पर मांस के टुकड़े बिखरे पाए गए, जिसने लोगों के गुस्से को भड़काने का काम किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती – CCTV फुटेज में साफ दिखा कि ये मांस ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर ले जाया जा रहा था और बोरे गिरते समय किसी ने देखा भी नहीं!

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार (29 सितंबर 2024) राँची में एचबी रोड, थड़पखना में सुबह 11.15 बजे एक बोरी में प्रतिबंधित मांस मिला, जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पाया। लोगों ने लालपुर-अलबर्ट एक्का चौक रोड को जाम कर दिया। वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्गा पूजा समिति और बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था।

स्थानीय लोगों ने माँग की कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। मंदिर के पास मांस मिलने की घटना के कारण धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जब यह हंगामा जारी था, तभी राँची के दो और स्थानों – चडरी सरनास्थल रोड और काली मंदिर रोड पर भी मांस के टुकड़े पाए गए। लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन स्थानों से मांस को हटा लिया ताकि स्थिति और बिगड़ने न पाए। पर सवाल उठता है कि यह मांस यहाँ पहुँचा कैसे? और आखिरकार इसके पीछे कौन लोग हैं?

ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर माँस की तस्करी? कितना बड़ा नेटवर्क?

मामले की जाँच में बड़ा खुलासा हुआ जब पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले। राँची के एसपी (ग्रामीण) सुमित अग्रवाल के मुताबिक, CCTV फुटेज में साफ दिखा कि सुबह 11:02 बजे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली वहाँ से गुजरी थी, जिसमें से एक बोरी गिर गई थी। उस बोरी में प्रतिबंधित मांस भरा हुआ था। ये मांस सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग स्थानों पर मिला है, जिससे यह शक और गहरा हो गया है कि राँची में मांस की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

तीन जगहों पर माँस के टुकड़े बोरियों में भरे पाए गए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली का पता नहीं चल पाया है। हैरानी की बात है कि पुलिस-प्रशासन सिर्फ लोगों के हंगामे को शांत करने में लगा रहा, और तथ्यों के सामने आने के बावजूद उस पर ध्यान नहीं दिया गया। बड़ा सवाल ये है कि उस ट्रैक्टर का क्या हुआ? उस पर लदे हुए अन्य बोरों में क्या था? अगर ये सबकुछ प्रतिबंधित मांस ही था, तो वो कहाँ से आया था और कहाँ गया? आखिर इसका पता पुलिस कब लगाएगी?

राँची जैसे शहर में खुलेआम और बेखौफ होकर प्रतिबंधित मांस की तस्करी की जा रही है और इतना बड़ा पुलिस-प्रशासन और खुफिया तंत्र क्या कर रहा है? बहरहाल, इस पूरे मामले में हंगामे और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। हालात को शांत करने के लिए पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की जाँच तेज कर दी जाएगी और दोषियों को 48 घंटों के भीतर गिरफ्तार किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस ने सभी संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।

इजरायल ने हिज्बुल्लाह के बाद हूती आतंकियों पर गिराए बम, कई हताहत: पाकिस्तान में नसरल्लाह की मौत पर शोक मनाते मुस्लिम आपस में लड़े

इजरायल ने हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह का काम तमाम करने के बाद अब यमन में हूती आतंकियों पर निशाना साधा है। इस दौरान उन्होंने इजरायली एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों से यमन के बंदरगाह शहर होदेइदाह में स्थित हूती आतंकियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए।

इस संबंध में इजरायली डिफेंस फोर्स ने ट्वीट जारी किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने इजरायली मिलिट्री इंटेलिजेंस डायरेक्टर के निर्देश पर एयरफोर्स ने रविवार (29 सितंबर 2024) को बड़े पैमाने पर ऑपरेशन में लड़ाकू विमानों से यमन के रास इस्सार और होदेइदाह में स्थित हूती विद्रोहियों के इलाके में हमला किया।

सेना के बयान के अनुसार, “आईडीएफ ने बिजली संयंत्रों और एक बंदरगाह पर हमला किया, जिसका इस्तेमाल तेल आयात करने के लिए किया जाता है।” इजरायली सेना का कहना है कि वह अपन देश के नागरिकों के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी दुश्मन पर इसी तरह कार्रवाई करेंगे और उनके खात्मे के लिए ऐसे ही प्रतिबद्ध रहेंगे। चाहे वो कितना ही दूर क्यों न बैठा हो।

आईडीएफ के अनुसार, हूती आतंकियों पर हमला हाल में इजरायल पर हुए हमले के बदले किया गया है। इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह को मौत के घाट उतारा था। हूती आतंकियों पर हुए हमले में भी चार के मारे जाने की खबर है। वहीं 29 घायल बताए जा रहे हैं।

हूतियों पर हमले ऐसे समय में सामने आए हैं जब उन्होंने फिलीस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के चक्कर में हमले किए और इन हमलों को और तेज तब किया जब नसरल्लाह को मौत के घाट उतारा गया। हूती आतंकी अकेले नसरल्लाह की मौत पर रोना नहीं रो रहे थे। पाकिस्तान में भी इस्लामी कट्टरपंथी इसका शोक मना रहे हैं।

पाकिस्तान में भी इस्लामी कट्टरपंथी मना रहे नसरल्लाह की मौत का गम

सामने आई जानकारी के अनुसार नसरल्लाह के मारे जाने के खिलाफ पाकिस्तान के कराची में जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली। अधिकारियों ने बताया कि हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या का विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों उग्र हो गए और हिंसा शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया जाने लगा, उनसे झड़प हुई। आखिर में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

कहीं गोमांस खाने का दबाव, तो कहीं इस्लाम कबूलने की धमकी; UP, MP और उत्तराखंड में लव जिहाद के 3 केस… देहरादून में 2 बच्चों की तलाकशुदा माँ बनी शिकार

देश के 3 अलग-अलग प्रदेशों से लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में शादाब, उत्तराखंड में शहज़ाद और उत्तर प्रदेश में अरशद के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। मध्य प्रदेश में हरदा की जनजातीय समुदाय की लड़की को इस्लाम कबूल करवाने की साजिश रची गई। उत्तराखंड में देहरादून की तलाकशुदा महिला की माँ ने अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगाई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की पीड़िता को गोमांस खिलाने का प्रयास हुआ। अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पहला मामला मध्य प्रदेश के हरदा जिले से है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को जनजातीय वर्ग की एक लड़की अपने परिजनों के साथ जिले के हंडिया थाने पहुँची। यहाँ पीड़िता ने तहरीर देते हुए बताया कि 2 साल पहले वह सीहोर जिले के शादाब नाम के युवक के झाँसे में आ गई थी। शादाब ने प्यार का नाटक करते हुए पीड़िता का 2 वर्षों तक यौन शोषण किया।

विरोध करने पर वह निकाह करने का वादा करते हुए पीड़िता को चुप करवा देता था। इस साल 29 मई को जब पीड़िता घर पर अकेली थी तो शादाब वहाँ आया था। उसने पीड़िता से कहा कि वो इस्लाम कबूल करने के बाद ही उस से निकाह करेगा। उसने लड़की को अपनी बेगम बनाने का वादा किया। 23 अगस्त को एक बार फिर से शादाब ने पीड़िता को बुला कर शारीरिक संबंध बनाए।

इस दौरान उसने फिर से धर्मान्तरण वाली बात दोहराई। साथ ही किसी को बताने पर पीड़िता को कत्ल करने की भी धमकी मिली। आखिरकार पीड़िता ने अपने घरवालों को सारी बात बता दी। शुक्रवार को 19 वर्षीया पीड़िता और उसके घर वाले हंडिया थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने मुनव्वर के बेटे शादाब के खिलाफ नामजद तहरीर दी। तहरीर में शादाब के एक अन्य नाम सलमान का भी जिक्र है।

पुलिस ने शादाब के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 64 (2) (ड) और 351 (3) के साथ-साथ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अमित भावसर ने मीडिया से बताया कि मामले में जाँच एवं अन्य कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

देहरादून में शहज़ाद के खिलाफ शिकायत

लव जिहाद का दूसरा मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से है। यहाँ शहज़ाद पर नाम बदल कर 2 बच्चों की माँ व तलाकशुदा महिला को प्यार के जाल में फँसाने का आरोप लगा है। महिला की माँ ने गुरुवार (26 सितंबर 2024) को थाना रायपुर पुलिस को तहरीर दी है और शहज़ाद पर कार्रवाई की माँग की। तहरीर में उसने कहा है कि उसकी 30 वर्षीया बेटी तलाकशुदा व 2 बेटियों की माँ है।

फिलहाल वह अपने मायके में दोनों बेटियों के साथ रह रही है। लॉकडाउन में महिला को शहज़ाद नाम का युवक मोनू चौधरी बनकर मिला था। मोनू चौधरी बना शहज़ाद मूलतः दिल्ली का निवासी है। कुछ ही दिनों की बातचीत में शहज़ाद ने पीड़िता को अपने जाल में फँसा लिया। मोनू बने शहज़ाद के मुस्लिम होने की पोल खुल जाने के बावजूद महिला उसी से निकाह पर अड़ गई।

पी़ड़ित महिला की माँ ने अपनी बेटी को लेकर आगे बताया कि जब उसने बेटी को रोका तो वह नाराज होकर घर से निकल गई और शहज़ाद के साथ रहने वाली। शहजाद के साथ जाते-जाते वह अपने मायके से बाइक भी उठा ले गई। महिला ने अपनी दोनों बेटियों को भी मायके में छोड़ दिया है। महिला की माँ ने आरोप लगाया है कि शहज़ाद ने उसकी बेटी का ब्रेनवॉश किया है।

महिला का कहना है कि उसने अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर डाली कि उसकी बेटी शहज़ाद से दूर रहे, लेकिन वह नाकाम रही। अपनी शिकायत में पीड़िता की माँ ने पुलिस से बेटी को खोजने व शहज़ाद के खिलाफ कड़ी करवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। फिलहाल पुलिस इस मामले में भी जाँच व जरूरी कार्रवाई में जुटी हुई है।

लखनऊ में अरशद ने हिन्दू लड़की को गोमांस खाने पर मजबूर किया

लव जिहाद का तीसरा मामला UP की राजधानी लखनऊ का है। यहाँ के थाना मदेयगंज में 27 सितंबर 2024 (शुक्रवार) को एक हिन्दू महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि डेढ़ साल पहले अपनी सहेली के जन्मदिन पार्टी में में उसकी मुलाकात अरशद नाम के युवक से हुई थी। यहीं से दोनों का परिचय हुआ तो पहले बातचीत और बाद में प्यार में बदल गया।

पीड़िता के मुताबिक, थोड़े ही समय में अरशद ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए। अरशद द्वारा बनाए गए कई बार के शारीरिक संबंधों की वजह से वह 2 बार गर्भवती हुई। तब अरशद ने दोनों बार उसका गर्भपात करवा दिया। जब लड़की ने अरशद पर शादी का दबाव बनाया तो उसने पहले इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि अरशद ने उस पर गोमांस खाने का भी दबाव बनाया। जब उसने अरशद के अब्बा से बेटे की करतूत बताई तो वह मदद करने के बजाय उसे ही खामोश रहने के लिए कहा। साथ ही उसने कहा कि यदि वह ऐसा नहीं करेगी तो वह उसे मार डालेगा। धमकाने वालों में अरशद का रिश्तेदार राशिद भी शामिल है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 89 और 351 (2) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन के विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हिन्दू महासभा ने अरशद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया है। फ़िलहाल पुलिस पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की जाँच सहित अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है।

जो बिहार इस बार था सूखा, वहाँ नेपाल के सैलाब से जल प्रलय का खतरा: कोसी ने 56 तो गंडक ने 21 साल बाद देखा इतना पानी, रेलवे ट्रैक से लेकर एयरपोर्ट तक डूबे

बिहार में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद वहाँ के कई जिलों में बाढ़ आ गई है। इसके कारण लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। रेलवे लाइन और बस डिपो से लेकर एयरपोर्ट तक में पानी भर गया है। कोसी, गंडक और गंगा नदी उफान पर है। इधर कोसी में 56 साल बाद और गंडक में 21 साल बाद इतना पानी देखने को मिल रहा है। नेपाल में भारी बारिश के कारण बिहार डूब रहा है।

हालात को देखते हुए सरकार और NDRF की टीमें अलर्ट हो गई हैं। बिहार सरकार ने बताया कि नेपाल में भारी वर्षा के कारण रविवार (29 सितंबर 2024) की सुबह 5 बजे कोसी बैराज वीरपुर (नेपाल) से 6,61,295 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह साल 1968 के बाद सबसे अधिक पानी छोड़ गया है। राज्य के सीमांचल क्षेत्र के लगभग 13 जिले जलमग्न होने के कगार पर पहुँच चुके हैं। बाढ़ पर नजर बनाए रखने के लिए पटना में वॉर रूम स्थापित किया गया है।

सोशल मीडिया पर बिहार में आई बाढ़ के कई खौफनाक वीडियो देखने को देखने को मिल रहे हैं। गाँवों में पानी भरा हुआ है। घर-मकान भरभरा कर गिर रहे हैं। लोगों को अब 2008 जैसी बाढ़ की आशंका सताने लगी है। उस समय कुशहा बाँध टूट गया था। दो-तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे बाँध टूट गया था। इस बार नेपाल में लगातार बारिश के बाद कोसी बराज से 6.5 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा चुका है।

इस समय बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सीतामढ़ी, सुपौल और पश्चिमी चंपारण के इलाके में देखने को मिल रहा है। अररिया में भी बारिश और बाढ़ के कारण पानी रेलवे ट्रैक पर आ गया है। जोगबनी स्टेशन की पटरियाँ पानी में डूब गई हैं। जो जिले प्रभावित हुए हैं उनमें इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, खगड़िया, भागलपुर शामिल हैं।

बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने 45 जूनियर इंजीनियर, 25 सहायक इंजीनियर, 17 कार्यपालक अभियंता और 3 अधीक्षण अभियंता को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है। ये अधिकारी तटबंधों की स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए चौकसी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में इन पर विशेष नजर है।

‘गोली का जवाब गोली से, गोले का जवाब गोले से’: पाकिस्तान में सरकार को मुख्यमंत्री ही दे रहे धमकी, जानिए खैबर-पख्तूनख्वा में क्यों उठी बगावत की चिंगारी?

पाकिस्तान में उठापटक तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने हाल ही में पाकिस्तान में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की। उनका कहना था कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना इस आंदोलन के देश में कोई सुधार संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अब सरकार की ओर से होने वाले किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। अगर गोली चलाई गई, तो उसका जवाब गोली से दिया जाएगा, अगर किसी ने लाठी चलाई, तो लाठी से जवाब मिलेगा, और अगर गोले दागे गए, तो उसका जवाब भी गोले से ही दिया जाएगा।”

गंडापुर ने कहा कि अब अगर कोई चलाएगा तो उसके ऊपर गोली चलाई जाएगी। अगर तुम एक गोली मारोगे तो हम तो हम 10 गोली चलाएँगे। यह बयान तब आया जब गंडापुर रावलपिंडी में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर रोक दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलपिंडी में PTI के समर्थक अपने नेता इमरान खान के आह्वान पर सड़कों पर उतरे थे। यह प्रदर्शन तब हुआ जब पार्टी के कई बड़े नेता देश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान कर रहे थे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था सरकार की नीतियों का विरोध करना और PTI के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना। हालाँकि, इस प्रदर्शन में हिंसा भड़क उठी और PTI समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हो गईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी और लाठीचार्ज का सामना किया।

अली अमीन गंडापुर, जो कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे, उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर कई घंटों तक रोका गया। प्रशासन ने PTI के विरोध को रोकने के लिए कई जगहों पर कंटेनर लगा दिए थे और सड़कों को बंद कर दिया था। इससे गंडापुर का काफिला भी कई घंटे तक इंटरचेंज पर फँसा रहा। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संदेश भेजा कि उन्हें प्रदर्शन खत्म करना होगा और वापस लौटना होगा।

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “हम अपने संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमें हमारा अधिकार देने को तैयार नहीं है। जब हम वापस लौटेंगे, तो अपने साथ सभी संसाधन लाकर फिर से संघर्ष करेंगे।” उनके इस बयान से साफ था कि वह इस संघर्ष को और अधिक तीव्रता से जारी रखने के लिए तैयार हैं।

गंडापुर ने एक वीडियो संदेश में दावा किया कि पुलिस ने उनके समर्थकों पर सीधे फायरिंग की और आंसँ गैस के गोले दागे। उनके मुताबिक, हर तीन किलोमीटर पर पंजाब पुलिस गोलियाँ और गोले दाग रही थी। इस दौरान तीन PTI कार्यकर्ताओं को गोली लगी और 50 से अधिक लोग घायल हुए। यह एक गंभीर आरोप था, जिसने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।

गंडापुर ने यह भी दावा किया कि PTI कार्यकर्ताओं ने कुछ पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया था, लेकिन उनके आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया। इस बयान के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे कोई धमकी नहीं मानते, बल्कि इसे एक “अंतिम चेतावनी” के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका संदेश था कि अगर सरकार और संस्थाएं जनता की आवाज नहीं सुन सकतीं, तो उन्हें पीछे हट जाना चाहिए और राजनीतिक निर्णयों को राजनीतिक नेताओं के हाथों में छोड़ देना चाहिए।

हालाँकि, जब गंडापुर ने प्रदर्शन को स्थगित करने का ऐलान किया, तो PTI के समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। बुरहान इंटरचेंज पर प्रदर्शनकारियों ने गंडापुर के खिलाफ नारेबाजी की और उनके वाहन को घेर लिया। उन्होंने गंडापुर से इस्तीफा देने की मांग की, क्योंकि वे प्रदर्शन खत्म करने के उनके फैसले से सहमत नहीं थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें संघर्ष जारी रखना चाहिए था।

PTI नेता आज़म स्वाती ने इस स्थिति में हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को शांत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय PTI के अध्यक्ष इमरान खान के निर्देशों पर लिया गया है और हमें उनके आदेश का पालन करना होगा। स्वाती के हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारियों को शांत किया गया और अंततः प्रदर्शन खत्म हो गया।

इससे पहले, पंजाब सरकार ने रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी थी, जिससे किसी भी प्रकार की राजनीतिक रैली, धरना या विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद PTI ने प्रदर्शन करने का फैसला किया था, जो बाद में हिंसक रूप में बदल गया। पुलिस ने शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और शहर को “हाई अलर्ट” पर रखा गया था। रावलपिंडी के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस के प्रवक्ता ने साफ कर दिया था कि शहर में किसी भी अवैध जनसभा की अनुमति नहीं दी जाएगी और अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान PTI के कुछ प्रमुख नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया। PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान और सलमान अकरम राजा को रावलपिंडी के पास सेक्टर H-13 में हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। गोहर और सलमान ने बाद में बताया कि पुलिस ने उन्हें रावलपिंडी जाने से मना कर दिया था और वापस लौटने का निर्देश दिया था।

PTI ने पहले रावलपिंडी के लियाकत बाग में एक बड़ी जनसभा करने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इमरान खान के निर्देश पर इसे प्रदर्शन में बदल दिया गया। PTI ने लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी बेंच से रैली के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) माँगने की अर्जी भी वापस ले ली थी।

गंडापुर के नेतृत्व में यह आंदोलन सरकार के खिलाफ PTI के संघर्ष का एक हिस्सा है, जो लंबे समय से जारी है। PTI के समर्थकों का मानना है कि उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और इस आंदोलन का उद्देश्य इन अधिकारों को पुनः प्राप्त करना है।

अली अमीन गंडापुर के नेतृत्व में PTI का यह नया आंदोलन पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई और प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन के कड़े कदमों के कारण उन्हें अपने समर्थकों को वापस बुलाना पड़ा। इसके बावजूद, गंडापुर और PTI के अन्य नेता इस संघर्ष को जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

टी राजा सिंह के घर की रेकी करते पकड़े गए शेख इस्माइल और मोहम्मद खाजा, तस्वीरें/वीडियो भेज रहे थे मुंबई: इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं BJP विधायक

हैदराबाद की गोशामहल विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक टी राजा सिंह के घर की रेकी किए जाने का मामला सामने आया है। रेकी 4 संदिग्धों द्वारा की जा रही थी। स्थानीय लोगों ने रेकी कर रहे 2 लोगों को पकड़ लिया जबकि बाकी संदिग्ध फरार हो गए। पकड़े गए संदिग्धों के नाम मोहम्मद खाजा और शेख इस्माइल हैं। ये संदिग्ध राजा सिंह के घर के फोटो और वीडियो बना कर मुंबई में किसी को भेज रहे थे। इनके मोबाइल से भी राजा सिंह की तस्वीरें मिली हैं। घटना 27-28 सितंबर रात की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा MLA ने बताया कि पुलिस दोनों संदिग्धों की जाँच कर रही है।

राजा सिंह द्वारा ऑपइंडिया से साझा किए गए एक वीडियो संदेश के मुताबिक 27 सितंबर की रात लगभग डेढ़ से 2 बजे के बीच उनके घर के आसपास 4 संदिग्ध घूमते दिखे। कुछ स्थानीय युवाओं को शक हुआ तो उन्होंने इन चारों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान 2 लोगों को दौड़ा कर पकड़ लिया गया जबकि 2 अन्य फरार होने में कामयाब रहे। पकड़े गए दोनों संदिग्धों का फ़ोन चेक किया गया तो उसमें राजा सिंह सहित उनके घर की फोटो और वीडियो मिलीं।

राजा सिंह का दावा है कि इन वीडियो और फोटो को मुंबई में किसी व्यक्ति के पास व्हाट्सएप के जरिए भेजा जा रहा था। एक तस्वीर पिस्टल और करतूत की भी है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए पहले व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद खाजा बताया। लगभग 24 वर्षीय मोहम्मद खाजा मूलतः कर्नाटक के बीदर जिले का निवासी है। वह 15 साल पहले हैदराबाद आया था। आने की वजह खाजा हैदराबाद में काम-धंधा की तलाश बताया है। हैदराबाद में वह अल्लापुर बोराबांदा में रह रहा था। खाजा के अब्बू का नाम नबी साब है।

वहीं पकड़े गए दूसरे संदिग्ध का नाम शेख इस्माइल है। वह मूलतः हैदराबाद के ही अल्लापुर बोराबांदा इलाके में रहता है। लगभग 30 वर्षीय शेख इस्माइल के अब्बा का नाम चाँद पाशा है। हैदराबाद में शेख इस्माइल ड्राइवर की नौकरी करता है। मामले की सूचना फ़ौरन ही स्थानीय मंगलहाट पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। राजा सिंह को अपने घर के आसपास हुई इस संदिग्ध हरकत का पता अगले दिन स्थानीय मीडिया चैनलों की खबरों को देख कर चला।

राजा सिंह आगे बताते हैं कि 29 सितंबर को उन्होंने पुलिस से पकड़े गए संदिग्धों के बारे में बात की। तब इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि दोनों से उच्चस्तरीय पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की भी टीमें शामिल हैं। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस ने राजा सिंह को आरोपितों के बारे में कोई भी सूचना नहीं दी है। राजा सिंह ने आगे बताया कि साल 2010 और 2011 में भी उनके घर की रेकी ISIS से जुड़े आतंकियों द्वारा की गई थी।