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सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन का केस अब सुप्रीम कोर्ट खुद देखेगा, हाई कोर्ट के आदेश पर रोक: तमिलनाडु पुलिस ने बटालियन भेज आश्रम की ली थी तलाशी

सुप्रीम कोर्ट से सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन को राहत मिली है। ईशा फाउंडेशन की जाँच वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। जिस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया था, उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने गुरुवार (3 सितम्बर, 2024) को इस मामले में सुनवाई की। यह याचिका ईशा फाउंडेशन की तरफ से दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि अब ईशा फाउंडेशन के कोयम्बटूर आश्रम पर कोई भी पुलिस कार्रवाई ना की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने जिस याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है, वह उसकी सुनवाई अब खुद करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ ही मद्रास हाई कोर्ट के निर्णय पर भी रोक लगा दी है। उसने कहा है कि मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले को सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होना होगा।

ईशा फाउंडेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उस पर इस सप्ताह दो दिन हुई पुलिस जाँच के बाद आया है। ईशा फाउंडेशन की जाँच का आदेश मद्रास हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए दी थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसकी दो बेटियों को ईशा फाउंडेशन ने बंधक बना रखा है और उन्हें बाहर नहीं आने देता।

यह आरोप लगाया कि अंदर ऐसा खाना-पीना और दवाइयाँ दी जाती हैं जिनके कारण लोगों की बाकी क्षमताएँ कम हो जाती हैं। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि उनकी दोनों बेटियों का आश्रम आने से पहले अच्छा करियर था और जीवन था। लेकिन आश्रम में जाने के बाद उनका करियर ठप हो गया और उन्हें संत बनने की तरफ धकेला गया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सद्गुरु जग्गी का आश्रम लोगों को अपना सामान्य जीवन छोड़ कर साधु बनने के लिए ब्रेनवाश करता है। यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान लोगों को उनके परिवार से नहीं मिलने दिया जाता और उनका बाहरी दुनिया से सम्पर्क काट दिया जाता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने इस दौरान कहा था, ”हम जानना चाहते हैं कि आखिर एक व्यक्ति जिसने अपनी बेटी की शादी कर दी और उसका जीवन अच्छी तरह से स्थापित कर दिया, वह दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और एकांत में जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित क्यों कर रहा है?”

मद्रास हाई कोर्ट ने इसके बादआधार पर प्रशासन को आदेश दिया था कि वह ईशा फाउंडेशन के आश्रम के भीतर जाँच करे और इसकी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखे। हाई कोर्ट ने इसी के साथ ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध पहले दर्ज किए गए मामलों की जानकारी भी माँगी थी। इसी के बाद आश्रम के भीतर पुलिस पहुँची थी।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में वह दोनों महिलाएँ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए पेश हुईं, जिनके पिता ने जबरदस्ती संत बनाए जाने और बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं से CJI चंद्रचूड़ ने इस दौरान बात भी की। महिलाओं से बात करने के बाद उन्होंने यह आदेश पारित किया।

कोर्ट ने कहा, “न्यायालय ने दोनों महिलाओं से बातचीत की है। बातचीत के दौरान, दोनों ने बताया कि वह 24 और 27 वर्ष की आयु में आश्रम में आईं थी। उन्होंने कहा कि वे स्वेच्छा से रह रही हैं और वे आश्रम से बाहर आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “पुलिस की मौजूदगी के बारे में दोनों का कहना है कि वह कल रात परिसर से चली गई, वह 2 दिन से वहीं मौजूद थी। दोनों का कहना है कि उनकी माँ ने करीब 8 साल पहले भी ऐसी ही याचिका दायर की थी, जिसमें पिता भी पेश हुए थे।” सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब ईशा फाउंडेशन के विरुद्ध हो रही कार्रवाई रुक गई है।

इंतजार करते-करते माता-पिता, पत्नी-पुत्र सबकी हो गई मौत… 56 साल बाद घर आया बलिदानी जवान का शव: पौत्र ने दी मुखाग्नि, मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे परिजन

देश के लिए बलिदान होने वाले हर सैनिक के परिवार को अंतिम दर्शन के लिए शव का इंतजार होता है, लेकिन ये इंतजार हर बार पूरा हो जरूरी नहीं। कई दफा बलिदानी के परिवार को उनके शव की अंत्येष्टि करने का मौका भी नहीं मिलता। धीरे-धीरे उम्मीद टूट जाती है।

आईएएफ में तैनात मलखान सिंह के परिवार को भी यही लगा था जब 56 साल पहले 1968 में एक प्लेन क्रैश के बाद मलखान का कहीं कोई पता नहीं चला। 56 सालों में सबका इंतजार खत्म था, किसी ने सोचा भी नहीं था कि उस हादसे के 5 दशक बाद शव ससम्मान घर आएगा और उन्हें अंतिम संस्कार का मौका मिलेगा।

कुछ दिन पहले 30 सितंबर को ग्लेशियर में 56 साल बाद जब भारतीय वायुसेना के जवान मलखान सिंह का शव खोजा गया तो इसकी सूचना परिवार तक पहुँची। लोग समझ ही नहीं पाए कि वो इस खबर को सुन कैसी प्रतिक्रिया दें। उनकी एक पीढ़ी खत्म हो चुकी थी। पोते-पोती थे जिन्होंने सिर्फ मलखान सिंह की लोगों से कहानियाँ सुनी थीं।

उनके अलावा सबसे छोटा भाई था जिनकी आँख में ये खबर सुनते ही आंसू आ गए। उन्होंने बस यही कहा किसी को यकीन ही नहीं था ऐसा हो सकता है। ये शव कुछ साल पहले मिल गया होता तो शायद उनकी पत्नी और बेटे उनका अंतिम संस्कार कर पाते।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पोते गौतम और मनीष, जो मजदूरी करके अपना परिवार पालते हैं, उन्होंने कहा, “दादा को देखा तो नहीं है, लेकिन उन्हें दादा पर गर्व है। इस बात का संतोष है कि देश की खातिर दादा बलिदानी हुए और उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान से परिवार के लोग कर पाएँगे।”

शहीद मलखान सिंह का जन्म 18 जनवरी 1945 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के थाना नानौता क्षेत्र के फतेहपुर गाँव में हुआ था। जिस समय वह बलिदान हुए तब उनकी उम्र मात्र 23 साल थी। हादसे के बाद से ही उनका कोई पता नहीं चल पाया था। बाद में उनकी गर्भवती पत्नी की शादी मलखान सिंह के छोटे भाई चंद्रपाल सिंह से करवा दी गई थी। परिवार उनकी राह देखता रहा। आखिर तक मलखान सिंह को मृतक नहीं माना गया और परिवारजन उनका इंतजार करते रहे। कुछ समय बाद माता-पिता का देहांत हो गया, फिर पत्नी का, भाइयों का और फिर बेटे और बेटी का भी। अब उनके परिवार में सिर्फ छोटे भाई और पोते-पोती बचे हैं जिनकी मौजूद में उनका अंतिम संस्कार विधि विधान से हुआ।

56 साल पहले हुई दुर्घटना

बता दें कि साल 1968 में इंडियन एयर फोर्स का AN-12 विमान क्रैश हो गया था। दुर्घटना 7 फरवरी 1968 को हुई थी। उस दिन भारतीय सैनिकों को लेह ले जाने के लिए सेना का विमान उड़ा लेकिन ये रोहतांग दर्रे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में तब 102 सैनिक सवार थे। लगातार भारतीय सेना तभी से बलिदानी सैनिकों के शव खोजने का प्रयास कर रही थी।

बाद में 2003 में वाजपेई सरकार के कार्यकाल में सेना ने यहाँ पर सर्च अभियान शुरू किया था, जिसके बाद भारतीय सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने सालों तक कई सर्च ऑपरेशन चलाए। डोगरा स्काउट्स ने 2005, 2006, 2013 और 2019 में शवों की छानबीन जारी रखी।

अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना स्थल की कठोर परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण भू-भाग के कारण 2019 तक केवल 5 शव बरामद किए गए थे और अब 30 सितंबर को 4 बलिदानियों का शव मिला है जिनमें एक मलखान सिंह का भी है। बताया जा रहा है कि बर्फ में रहने के कारण शव को नुकसान नहीं हुआ था। उनके शव के साथ केरल के थॉमस चेरियन का शव भी मिला है। वो भी उस समय मात्र 22 साल के थे। उनके परिवार ने भी सेना के प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

मृतसंग्रहणम्, ध्वजारोहणम्, स्नपनम्, चक्रस्नानम्… जानिए क्या है ब्रह्मोत्सवम्, क्या हैं इसके विधान: तिरुपति मंदिर में महाउत्सव की तैयारियाँ संपन्न, प्रतिदिन बनेंगे 72 लाख मोदकम्

तिरुपति मंदिर के प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी वाले घी को लेकर उठे विवाद के बीच वेंकटेश्वर मंदिर अब ब्रह्मोत्सव की तैयारी कर रहा है। यह त्योहार नौ दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन लगभग एक लाख भक्तों के आने की उम्मीद है। यह विशाल उत्सव 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इससे पहले मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को मंदिर शुद्धिकरण का पारंपरिक अनुष्ठान किया गया।

मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के कार्यकारी अधिकारी जे श्यामला राव ने बताया कि यह अनुष्ठान ‘कोइल अलवर तिरुमंजनम’ के नाम से मशहूर है। यह अनुष्ठान सभी प्रमुख त्योहारों से पहले साल में चार बार किया जाता है। ये त्योहार हैं तेलुगु उगादी, अनिवरा अस्थानम, वैकुंठ एकादशी और ब्रह्मोत्सवम।

अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर, मूर्तियों और पूजा के बर्तनों को साफ किया जाता है। मंदिर की दीवारों, छतों और खंभों पर ‘परिमलम’ नामक एक विशेष सुगंधित मिश्रण लगाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया सुबह 6 बजे से 10 बजे के बीच होती है। इस दौरान मुख्य देवता को सफेद आवरण से ढक दिया जाता है और सफाई पूरा होने के बाद इसे हटा जाता है। बाद में देवता को विशेष पूजा और नैवेद्यम अर्पित किए जाते हैं।

बताते चलें कि मंदिर में लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घी में जानवरों की चर्बी मिले होने की बात सामने आने के बाद TTD ने घी रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकों और भंडारण क्षेत्र में शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया था। ये अनुष्ठान लड्डू और अन्य प्रसाद तैयार करने और रखने वाली जगह के साथ-साथ रसोई और प्रसाद रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बर्तन के लिए किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि ‘पोटू’ के नाम से प्रसिद्ध रसोई में प्रतिदिन 65,000-80,000 तीर्थयात्रियों के लिए लगभग 3.5 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं। अब ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन कम से कम 8 लाख लड्डू बनाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि ब्रह्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन लगभग एक लाख होने की उम्मीद है।

क्या होता है ब्रह्मोत्सव

ब्रह्मोत्सवम नौ दिनों तक चलने वाला एक उत्सव है। हर साल तिरुमाला तिरुपति श्री वेंकटेश्वर मंदिर में मनाया जाने वाले इस त्यौहार का नाम भगवान ब्रह्मा के नाम पर पड़ा है। कहा जाता है कि उन्होंने ने ही तिरुपति मंदिर में इस त्यौहार की शुरुआत की थी। इसलिए इसे ब्रह्मोत्सवम या ब्रह्मा का उत्सव कहा जाता है। इसे तिरुमाला के सभी त्यौहारों में सबसे पवित्र माना जाता है।

किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा ने पुष्करिणी नदी के पवित्र तट पर तिरुमाला तिरुपति मंदिर में श्री बालाजी की पूजा की थी और मानव जाति की रक्षा के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया था। इस त्यौहार के दौरान बालाजी के नाम से प्रसिद्ध भगवान श्री वेंकटेश्वर की प्रतिमा को को विभिन्न रथों में सवार करके सड़कों पर घुमाया जाता है। इस दौरान लाखों लोग उनका आशीर्वाद लेने आते हैं।

ब्रह्मोत्सव उत्सव के दौरान श्रद्धालु गहन एवं दिव्य आनंद का अनुभव करते हैं। इसे वे ‘वैकुंठ अनुभव’ कहते हैं। ब्रह्मोत्सव के शुरू होने से पहले भगवान श्री वेंकटेश्वर के मंदिर की धार्मिक ग्रंथों में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार सफाई की जाती है। मंदिर परिसर और उसके आस-पास के क्षेत्र को फूलों और आम के पत्तों से सजाया जाता है। इस प्रक्रिया को आलय शुद्धि और अलंकारम (सजावट) कहा जाता है।

ब्रह्मोत्सव के पहले दिन से एक दिन पहले मृतसंग्रहणम (मिट्टी इकट्ठा करने की प्रक्रिया) की जाती है। मंदिर के अधिकारी विश्वक्सेन, अनंत, सुदर्शन और गरुड़ जैसे देवताओं से प्रार्थना करते हैं। वे धरती माता से भी प्रार्थना करते हैं और थोड़ी मात्रा में मिट्टी इकट्ठा करते हैं, जिसके साथ अंकुरार्पण अनुष्ठान किया जाता है। इसमें मिट्टी को एक कमरे में फैलाया जाता है और उसमें नौ प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। यह समृद्धि, उर्वरता और प्रचुरता का प्रतीक है।

ध्वजारोहणम से ब्रह्मोत्सव की आधिकारिक शुरुआत होती है। यह मंदिर परिसर के अंदर नादिमी पाडी कविली के पास ध्वजा स्तम्भ पर फहराया जाता है। मंदिर के अधिकारी पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रों के बीच गरुड़ की तस्वीर वाला ध्वज फहराते हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मा, इंद्र, यम, अग्नि, कुबेर और वायुदेव जैसे देवताओं तथा वसिष्ठ और विश्वामित्र जैसे ऋषियों को आमंत्रित करने के लिए गरुण देवलोक जाते हैं।

भगवान को अलग-अलग वाहनों पर तिरुमाला की सड़कों पर जुलूस के रूप में ले जाया जाता है। प्रत्येक वाहन का अपना महत्व है, और वह अपने तरीके से भगवान का संदेश देता है। ब्रह्मोत्सव के दौरान भगवान को शोभायात्रा में घुमाने के बाद मुख्य मंदिर में उनका दरबार लगाया जाता है। इसके बाद भगवान को स्नपनम की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसे उत्सवनंतर स्नपनम भी कहा जाता है।

स्नपनम के तहत भगवान को हर्बल पानी से स्नान कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे शोभायात्रा के दौरान भगवान को होने वाली थकान और तनाव से राहत मिलती है। इसके बाद मंदिर के पुजारी भगवान को नैवेद्यम चढ़ाते हैं। फिर चूर्णाभिषेकम प्रक्रिया में भगवान और उनकी पत्नियों को चंदन के चूर्ण से अभिषेक करने के बाद स्नान कराया जाता है।

यह ब्रह्मोत्सव के नौवें दिन की सुबह किया जाता है। इसके बाद भगवान को तिरुमाला की सड़कों पर जुलूस के रूप में ले जाया जाता है। मंदिर के पुजारी भगवान के लिए इस्तेमाल किए गए चंदन के चूर्ण को भक्तों में वितरित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि चंदन के चूर्ण में व्यक्ति के मार्ग से आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति होती है।

चक्रस्नानम अनुष्ठान यज्ञ के बाद स्नान अनुष्ठान के समान है। ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन की सुबह भगवान, उनकी पत्नियाँ और श्री सुदर्शनचक्र को स्वामी पुष्करिणी में स्नान कराया जाता है। भक्त श्री सुदर्शनचक्र के साथ स्वामी पुष्करिणी में भी स्नान कर सकते हैं। इसे बहुत पवित्र अनुष्ठान माना जाता है और भक्त इस अनुष्ठान में धर्म, जाति या पंथ से परे भाग लेते हैं।

ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन ऋषियों और देवताओं को देवलोक में विदा करने की रस्म को देवतोद्वासनाम कहा जाता है। यह दैनिक अर्चना के बाद किया जाता है। उत्सव के आयोजन के लिए भगवान ब्रह्मा की प्रशंसा की जाती है और मंदिर के पुजारी और अधिकारी उनका सम्मान करते हैं। ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन की शाम को ध्वज को नीचे उतार दिया जाता है।

दिल्ली में क्यों लगी 163, कालकाजी मंदिर के पुजारी को क्यों जाना पड़ा सुप्रीम कोर्ट: BNSS की उस धारा के बारे में जानिए सब कुछ जो रामलीला में बन रहा था अड़ंगा

दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पुजारी ने सुप्रीम कोर्ट में रामलीला आयोजन में लगने वाले अड़ंगे को लेकर याचिका डाली है। पुजारी ने कहा है कि उनके इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत रोक लगाई है, इसके कारण रामलीला का आयोजन नहीं हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में केंद्र सरकार ने बताया है कि उसने यह आदेश वापस ले लिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मानस नमन सेवा समिति के सचिव और कालकाजी मंदिर के पुजारी सुनील ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के समक्ष डाली है। पुजारी सुनील ने कहा है कि उनकी समिति दिल्ली के चिराग इलाके में प्रति वर्ष रामलीला का आयोजन करती है।

उन्होंने कहा है कि इस बार दिल्ली पुलिस ने 30 सितम्बर, 2023 से लेकर 5 अक्टूबर तक दिल्ली के भीतर धरना प्रदर्शन समेत ऐसे सभी आयोजनों पर रोक लगाई है। इसी के अंतर्गत 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इसी कारण रामलीला आयोजित करने में भी समस्या आने वाली है।

याचिका में कहा गया कि दशहरा और नवरात्रि आने वाले हैं और दिल्ली पुलिस की रोक ऐसे त्योहारों और धार्मिक समारोहों पर बंधन लगाएगी। याचिका में माँग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में दिल्ली पुलिस के आदेश पर अपना निर्णय सुनाए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस का आदेश दिल्लीवासियों के मन में डर भर रहा है। यह भी कहा गया कि इससे दिल्ली में रहने वाले लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को लेकर चिंतित हैं। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि वह जिम्मेदारी से बच रही है।

इस मामले में गुरुवार (5 अक्टूबर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस उसके अंतर्गत आती है और उसने यह आदेश वापस ले लिया है। कोर्ट को इस विषय में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी है।

गौरतलब है कि 30 सितम्बर, 2024 को दिल्ली पुलिस ने एक आदेश पारित करते हुए राजधानी के नई दिल्ली, उत्तर और मध्य जिले के भीतर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वक्फ बिल, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव और बाकी स्थितियों के कारण दिल्ली का माहौल संवेदनशील है।

क्या है BNSS की धारा 163?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धरा 163 के तहत जिला मजिस्ट्रेट या फिर राज्य सरकार आगामी खतरे को भाँपते हुए सामान्य गतिविधियों पर रोक लगा सकती है। इसके अंतर्गत लोगों को एक जगह इकट्ठा होने, उनके धरना प्रदर्शन में भाग लेने या ऐसी अन्य गतिविधि से रोका जा सकता है। यदि कोई इस व्यवस्था का उल्लंघन करता है तो पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है। पुरानी व्यवस्था में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत यह धारा 144 कही जाती थी। नई व्यवस्था के तहत यह BNSS की धारा 163 बनाई गई है।

प्यार का दिखावा, धोखे से शादी, फिर धर्मांतरण… मुस्लिम करते हैं हिंदू महिलाओं को टारगेट: लव जिहाद का पूरा गेम अदालत ने समझाया, विस्तार से पढ़िए आदेश

बीते दिनों बरेली में लव जिहाद के एक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का जो फैसला आया वो अब हर जगह चर्चा में है। कोर्ट ने ‘आनंद’ बनकर हिंदू महिला के साथ रेप और उसे गर्भवती करने वाले मोहम्मद आलिम को सजा सुनाते हुए देश में चल रहे धर्मांतरण के खेल से लेकर विदेशी साजिश तक पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की।

कोर्ट ने माना कि केस की सुनवाई और सारे गवाहों की दलील के बाद साफ है कि मोहम्मद आलिम का प्रकरण लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण का मामला है। इसके बाद कोर्ट के आदेश में लव जिहाद की परिभाषा बताते हुए कहा गया–

-लव जिहाद में मुस्लिम पुरूष हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं। वो पहले उनसे प्यार का दिखावा करते हैं, उनसे धोखे से शादी करते हैं, फिर धर्मांतरण का दबाव बनाते हैं… जैसा कि मोहम्मद आलिम ने किया।

-कोर्ट ने कहा- लव जिहाद का उद्देश्य हिंदुस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश है जिसमें एक मजहब के अराजक तत्व जनसांख्यिकी युद्ध के जरिए वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं।

-आसान शब्दों में कहें तो लव जिहाद मुस्लिम पुरुषों पर गैर मुस्लिम समुदायों से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम धर्म में परिवर्तित करना है। इस दौरान प्रेम का ढोंग करके उन्हें फँसाया जाता हैं।

-अदालत ने कहा कि लव जिहाद के लिए बड़ी मात्रा में पैसा चाहिए होता है इसलिए लव जिहाद में विदेशी फंडिंग से इंकार भी नहीं हो सकता।

-कोर्ट ने कहा जबरदस्ती, लालच देकर या झूठ बोलकर धर्मांतरण कराने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। चाहे किसी भी धर्म का व्यक्ति हो, उसे अवैध-धर्मांतरण का अधिकार प्राप्त नहीं है।

-यदि बलपूर्वक, झूठ बोलकर, धोखाधड़ी करके या जबरदस्ती या लालच देकर किसी को अवैध रूप से धर्मांतरित करवाया जाता है, तो निश्चित रूप से उत्तर-प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए, चाहे वह व्यक्ति कोई भी क्यों न हो।

-लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण किसी अन्य बड़े उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कराया जाता है। यदि समय रहते भारत सरकार के द्वारा लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देश को भुगतने होंगे।

–भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने के लिए हिंदू लड़कियों को प्रेम में फँसाकर उनका अवैध धर्मांतरण करने का अपराध एक विरोधी गिरोह द्वारा बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है।

-कोर्ट के आदेश में कहा गया कि गैर मुस्लिमों के कमजोर वर्ग के लोगों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा ओबीसी आदि समुदाय के लोगों, महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाया जाता है। उनका ब्रेन वॉश करके तथा उनके धर्म की बुराई करके, देवी-देवताओं के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी करके तथा मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर व विभिन्न प्रकार के लालच जैसे विवाह, नौकरी आदि का प्रलोभन देकर उनका अवैध धर्मान्तरण कराया जा रहा है।

-कोर्ट ने कहा कि अवैध धर्मांतरण के प्रकरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। अवैध धर्मांतरण देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता के लिए खतरा है। भारत का संविधान भले ही सभी लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार एवं संरक्षण देता है लेकिन अगर इसकी आड़ में दूसरे धर्मों के अस्तित्व को लालच देकर, असमायक दबाव या अन्य माध्यमों का प्रयोग करके दुष्प्रभावित किया जाएगा तो निश्तिक रूप से अन्य सभी धर्मों के संरक्षण का हनन होगा।

₹5600 करोड़ की कोकीन तस्करी का सरगना तुषार गोयल 2003 से कॉन्ग्रेस सदस्य, RTI सेल का रह चुका है चेयरमैन: रिपोर्ट में दावा- पहले करवाता था देह व्यापार

दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी में 5600 करोड़ रुपए की कोकीन की एक बड़ी खेप को पकड़ा है। इस ड्रग सिंडिकेट का सरगना तुषार गोयल है। तुषार गोयल कॉन्ग्रेस का नेता है और वह साल 2022 में दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस की RTI सेल का चेयरमैन रह चुका है। उसने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका जिक्र किया है।

सरगना तुषार गोयल के कई कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ फोटो भी सामने आए हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में हुआ है। खुद तुषार गोयल ने स्पेशल सेल की पूछताछ में इसका खुलासा किया है कि वह 2022 में कॉन्ग्रेस दिल्ली का RTI सेल प्रमुख था। उसने बताया कि वह साल 2002 में यूथ कॉन्ग्रेस का सदस्य बना था।

पुलिस तुषार गोयल के बैकग्राउंड को खंगाल रही है। कहा जा रहा है कि 40 वर्षीय तुषार गोयल ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता है। उसके पिता दिल्ली में तुषार पब्लिकेशन और ट्यूलिप पब्लिकेशन के मालिक हैं। तुषार ने साल 2008 में शादी की और उसके बाद देह व्यापार का काम शुरू कर दिया और सेक्स रैकेट चलाने लगा।

इसी दौरान तुषार गोयल की मुलाकात दुबई के एक गिरोह से हुई। तभी से वह देह व्यापार के साथ-साथ ड्रग्स के धंधे में जुड़ गया और ड्रग्स की तस्करी करने लगा। दिल्ली पुलिस को अगस्त में इसकी भनक लगी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस पिछले दो महीने से उस पर और उसके गिरोह पर नजर रख रही है। आखिरकार उसे दबोच लिया गया। 

तुषार गोयल द्वारा डाला गया RTI (साभार: आजतक)

तुषार गोयल का साथी हिमांशु पहले बाउंसर था। वहीं, तुषार का ड्राइवर औरंगजेब सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। चौथा आरोपित भरत जैन ही मुंबई से 15 किलोग्राम कोकीन दिल्ली लाया था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से पहले 15 किलोग्राम कोकिन बरामद की थी। इसके बाद उनकी निशानदेही पर महिपालपुर के गोदाम में छापा मारकर बाकी की ड्रग्स जब्त की गई।

दरअसल, दिल्ली के महिपालपुर में 550 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी और हिमांशु कुमार शामिल है। लगभग 5600 करोड़ रुपए की कोकीन के तार दुबई से जुड़े हैं। सप्लायर के तौर पर दुबई के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग्स मुंबई के बंदरगाह तक पहुँचा और वहाँ से इसे दिल्ली लाया गया था। इसे महिपालपुर के गोदाम में रखा गया था। कोकीन के साथ-साथ वहाँ से 40 किलोग्राम गाँजा भी बरामद किया गया है। कहा जा रहा है कि इन ड्रग्स से 50 लाख डोज बनाई जा सकती हैं। इस खेप को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहुँचाया जाना था।

जनाना गेट से घुसे, बाथरूम में लोड किए हथियार, फिर बाहर निकल 7 लोगों की कर दी हत्या: कौन कहते हैं मस्जिद से नहीं आते आतंकी, क्या इजरायल करेगा ‘समतल’?

इजरायल के जाफा में बुधवार (2 अक्टूबर, 2024) को हुए आतंकी हमले में एक मस्जिद का इस्तेमाल इस्लामी आतंकियों ने किया। यह खुलासा हमले की जाँच के बाद हुआ है। हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी, इनमें से 6 लोगों की पहचान भी सामने आई है। हमले में जिस मस्जिद का इस्तेमाल हुआ, उसे गिराने की बात इजरायल के सुरक्षा मंत्री ने की है। वहीं इजरायल की नेत्री ने कहा है कि ने मस्जिद गिराए जाने से इजरायल में रहने वाले अरबियों में खौफ भरेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला करने वाले दोनों आतंकियों का नाम मुहम्मद मसक और अहमद हिमौनी था। यह दोनों फिलिस्तीनी थे और वेस्ट बैंक के रहने वाले थे। यह दोनों आतंकी हमास से जुड़े हुए थे। दोनों इजरायल में बिना किसी परमिट के घुसे थे और उन्होंने इसके बाद एक मेट्रो स्टेशन पर हमला किया।

इसी हमले की जाँच में सामने आया है कि यह दोनों आतंकी हमला करने से पहले जाफा की एक अल नुझा मस्जिद में घुसे थे। यह आतंकी महिलाओं वाले गेट से घुसे थे। यहाँ दोनों ने बाथरूम के भीतर अपने हथियार रखे थे। उन्होंने यहाँ मौजूद लोगों को धमकाया और कहा कि जो भी मस्जिद छोड़ के गया उसको भी मार दिया जाएगा। इसके बाद दोनों इस मस्जिद से बाहर निकले और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे।

मस्जिद का आतंकी हमले में इस्तेमाल होने का खुलासा तब हुआ जब यहाँ इजरायल के सुरक्षा मंत्री बेन ग्वीर पहुँचे। उन्होंने कहा कि अगर यह बात सामने आई है कि आतंकियों ने मस्जिद का इस्तेमाल किया तो इसे तुरंत ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बयान मस्जिद के बाहर ही दिया।

इजरायल की एक नेता मेराव बेन अरी ने कहा कि मंत्री के इस बयान के कारण यहाँ रहने वाले अरबियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। हालाँकि, मंत्री ने मेराव बेन अरी पर नस्लभेदी राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यह कहीं और करनी चाहिए।

मस्जिद के सहारे हमला करने वाले दोनों इस्लामी आतंकियों को सुरक्षाबलों ने बुधवार को ही मार गिराया था। इस हमले के पीड़ितों में 4 महिलाएँ। मारे गए लोगों में एक ग्रीक नागरिक भी था। यह हमला उस दौरान हुआ जब ईरान भी इजरायल के ऊपर मिसाइलों से हमला कर रहा था।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2024 से ही चालू इजरायल-हमास का संघर्ष अब और गहरा हो गया है। हाल ही में इजरायल ने ईरान समर्थित इस्लामी आतंकी समूह हिजबुल्लाह के प्रमुख नसरुल्लाह को मार गिराया था। इसके बाद ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं। हालाँकि, इन हमलों में कोई बड़ा नुकसान होने की सूचना नहीं है।

12 दिन के भीतर नासिर ने 2 बार बरेली को दहलाया, इस बार 2 बच्चों समेत 5 की गई जान: अवैध तरीके से बनाए जा रहे पटाखों में ब्लास्ट से कई घर जमींदोज

उत्तर प्रदेश के बरेली में अवैध पटाखा फैक्टरी में बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को जोरदार धमाका होने से पाँच घर जमींदोज हो गए। मलबे में दबने और झुलसने से महिला और उसके दो बेटों समेत पाँच की मौत हो गई है। इनमें से एक महिला की पहचान नहीं हो सकी है। हादसे में पाँच लोग घायल भी हुए हैं। वहीं, एक व्यक्ति लापता है। माना जा रहा है कि वह मलबे में दबा हो सकता है।

यह घटना बरेली के सिरौली थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गाँव की है। यहाँ आबादी के बीच एक अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। सिरौली के मोहल्ला कौवा टोला निवासी दो भाई नाजिम और नासिर शाह कल्याणपुर के रहमान शाह के घर में बगैर लाइसेंस के पटाखा फैक्टरी चलवा रहे थे। घटना के बाद स्थानीय बचाव दलों के साथ राज्य आपदा बचाव दल (एसडीआरएफ) बचाव कार्य में जुटा रहा।

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक, इस फैक्ट्री में पटाखे बनाने के साथ ही यहाँ उनका भंडारण किया जाता था। जिस रहमान शाह के घर में यह पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, उसका नाजिम दामाद है। बुधवार की शाम चार बजे हुई इस घटना से रहमान समेत उसके पड़ोसी मोहम्मद अहमद उर्फ पप्पू शाह, इसरार, रुखसार व बाबू शाह के घर भरभरा कर गिर गए हैं।

मकान के मलबे में दबने से रहमान की 44 वर्षीय बहू तबस्सुम और पड़ोसी रुखसार की 28 वर्षीय बीवी रुखसाना की मौत हो गई। इस बीच तबस्सुम के दो बेटे हसन (4) व शहजान (5) कहीं नजर नहीं आए तो मलबे को हटाया गया। मलबे में दोनों बच्चों की लाशें मिलीं। मलबे से एक अज्ञात महिला का भी शव मिला है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि यह अज्ञात महिला कौन है।

रहमान के दामाद नाजिम का अभी भी पता नहीं चल सका है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, मलबों को हटाने का काम जारी है। धमाका इतना जोरदार था कि पाँच मकान जमींदोज होने के अलावा आसपास के कई घरों और धर्मस्थलों में दरारें आ गई हैं। कई घरों की खिड़कियों में लगे शीशे टूटकर बिखर गए। 

एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार, 27 सितंबर 2024 से जिले में विस्फोटक लाइसेंस धारकों का सत्यापन अभियान शुरू किया गया है। इस सूची में लाइसेंस धारक नासिर शाह का भी नाम था। आरोपितों ने विस्फोटक सामग्री ससुराल में छिपा दी थी। इस मामले में एसएसपी अनुराग आर्य ने दारोगा देशराज सिंह व नाहर सिंह, सिपाही अजय व सुरेंद्र को निलंबित कर दिया है। 

कहा जा रहा है कि बुधवार की शाम को रहमान शाह ने चाय बनाने को कहा तो फातिमा प्रथम तल पर रसोई में गई। वहाँ अचानक सिलेंडर फट गया। लपटें जैसे ही तीसरी मंजिल के कमरे में रखे पटाखों एवं बारूद तक पहुँचीं, तेज धमाके होने लगे। देखते ही देखते आसपास के मकान भरभराकर गिर गए। लोगों का कहना है कि धमाके के दौरान ईंटें 70 फीट तक उछल रही थीं।

सिरौली के नासिर के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस था, मगर वह आबादी के बीच मकान में ही यह काम करने लगा। 21 सितंबर को उसकी छत पर पटाखों के ढेर में आग लग गई थी। उस मामले में FIR दर्ज करके उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। उसके बाद वह भाई की ससुराल में आकर पटाखे बनाने लगा। पिछले 10 दिनों में दूसरी घटना की जाँच कराई जा रही। हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।

बातें सूफीवाद की, काम भारत में घुसपैठियों को बसाना: पाकिस्तान के ‘सिद्दीकी परिवार’ को ‘शर्मा जी’ की पहचान देने के पीछे मेहदी फाउंडेशन, इसके बारे में जानिए सब कुछ

बीते दिनों बेंगलुरु से पाकिस्तान के राशिद अली सिद्दीकी का परिवार गिरफ्तार हुआ था। छानबीन में पता चला था कि राशिद का परिवार फर्जी हिंदू नाम के साथ भारत में रह रहा था और उन्हें 10 साल पहले यहाँ भारत में लाने के पीछे एक ‘सूफी’ मेहदी फाउंडेशन का हाथ था। इसी संस्था ने उनके लिए फर्जी डॉक्यूमेंट, फर्जी पहचान पत्र आदि की व्यवस्था की थी। इतना ही नहीं, यही संस्था राशिद अली सिद्दीकी के परिवार के रहने-खाने का खर्चा भी उठाती थी। बदले में राशिद आलरा टीवी पर आकर संस्था के विचार को प्रमोट करते थे।

हमने इस खबर के सामने आने के बाद इस संस्था से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान सामने आया कि पहले मेहदी फाउंडेशन आरजीएस इंटरनेशनल नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1983 में सूफी बाबा गौहर अली शाह की पाँचवी पीढ़ी के वंशज लेखक रा रियाज गौहर शाही ने यूनुस अलगोहर के साथ मिलकर की थी। बाद में एमएफआई की आधिकारिक तौर पर स्थापना हुई और यूनुस अलगोहर इसके अध्यक्ष बन गए।

सामान्य तौर पर यूनुस अलगोहर अपनी बातों में मजहबी सद्भाव और शांति का प्रचार करते हैं और मजहबी कट्टरता के खिलाफ वकालत करते हैं। वहीं वेबसाइट के होमपेज पर भी मेहदी फाउंडेशन की जो जानकारी लिखी है उसमें भी ‘ईश्वरीय प्रेम और सार्वभौमिक शांति’ के प्रचार की बात लिखी है। वेबसाइट में गौहर शाही की छवि के साथ कई धर्मों के प्रतीक भी हैं।

संगठन दावा करता है कि वह नफऱत के बीच प्रेम की लौ जलाने का काम करते हैं और अपने अनुयायियों को सिखाते हैं कि वो सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर रहें। संगठन ये भी कहता है कि वो किसी एक मजहब से नहीं जुड़े, लेकिन ये संगठन मुसलमानों को कट्टरपंथ से दूर करने के लिए जिस सूफीवाद को बढ़ावा देता है उसका इतिहास भारत में काला रहा है।

जानकारी के मुताबिक मेहदी फाउंडेशन की स्थापना सबसे पहले लंदन में हुई थी जहाँ इसका मुख्यालय भी है और अब यह कनाडा, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत, ग्रीस, थाईलैंड, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में भी अपने केंद्र खोल चुका है। इसके अलावा, mehdifoundation.com नाम से एक और वेबसाइट है जो हिंदी और उर्दू सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। यह भी संगठन द्वारा बताए गए समान विचारों को बढ़ावा देती है।

एमएफआई यूट्यूब पर करीब 1.5 मिलियन सब्सक्राइबर और फेसबुक पर 96 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ अलरा टीवी नाम से एक चैनल भी चलाता है। खास बात यह है कि इस चैनल ने राशिद अली सिद्दीकी को प्रचारक के तौर पर नियुक्त किया है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ तो यह संगठन धर्मनिरपेक्ष होने और चरमपंथ के खिलाफ होने का दावा करता है, लेकिन दूसरी तरफ हिंदुओं का नरसंहार करने वाले टीपू सुल्तान का प्रसंशक है। 2019 में इनके अकॉउंट से डाली गई तस्वीर में टीपू का नाम देखा जा सकता है।

बता दें कि मेहदी संगठन को अपने विचारों के कारण मुस्लिम देशों (पाकिस्तान, बाग्लादेश) में भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इसे लेकर गौहर शाही और यूनुस अलगोहर पर कई बार हमले भी हुए। इनमें गौहर शाही तो अपने विवादित दावों के कारण जाने जाते हैं। जैसे 1997 में उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात ईसा मसीह से हो चुकी है। इसके अलावा वह खुद को मसीहा, मेहदी और कल्कि का अवतार बताते हैं। वहीं मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) अमजद गौहर, जो हैं तो एक पाकिस्तानी नागरिक हैं लेकिन उनके ऊपर 12 बार ईशनिंदा का आरोप लगा है। वह वर्तमान में ब्रिटेन में शरण माँग रहे हैं। वहीं यूनुस अलगोहर पर भी 2013 में बेईमानी के आरोप लग चुके हैं

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है फाउंडेशन की हरकत

उल्लेखनीय है कि मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल भले ही सूफीवाद और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने की बात करता है लेकिन ये सच्चाई नजरअंदाज नहीं की जा सकती कि इस संगठन ने पाकिस्तानी परिवार को अवैध रूप से भारत में घुसाया, उनके लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए और घुसपैठ को छिपाया… ये सारी प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से हमारे भारत के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसके अलावा ये संगठन संगठन समन्वयकारी होने का दावा करता है, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं है कि उन्होंने पाकिस्तान से आए हिंदुओं का समर्थन किया है, जो वास्तविक असहिष्णुता का शिकार हैं और दशकों से जातीय सफाया किया जा रहा है।

नोट: ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

नवरात्रि मेले में सभी दुकानदारों को बोर्ड पर लिखना होगा अपना नाम, नगर निगम के आदेश पर भड़के रतलाम के काजी: कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

मध्य प्रदेश के रतलाम में नगर निगम ने नवरात्रि मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों को दुकान पर अपना असली नाम लिखने के निर्देश दिए हैं। जिले के व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे बिजनेस में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे तुगलकी फरमान बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मुस्लिम पक्ष का नेतृत्व शहर काजी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानों पर अपने असली नाम लिखने का निर्णय रतलाम नगर निगम की राजस्व समिति ने लिया है। इस समिति के दिलीप गाँधी ने बुधवार (2 सितंबर 2024) को बताया कि दूसरे प्रदेशों से कई व्यापारी चूड़ी-बिंदी बेचने आते हैं। इन बाहरी दुकानदारों को मेले में कोई असुविधा न हो इसके लिए नवरात्रि मेले में दुकानदारों को उनके असली नाम लिखकर व्यापार करने की हिदायत दी गई है।

इसी के साथ 12 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में लगने वाली दुकानों के आबंटन में भी आधार कार्ड देखे जाएँगे, जिससे कोई दुकान किसी बिचौलिए को न मिल पाए। नगर निगम के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष लामबंद हो गया है। मुस्ल्मि पक्ष की तरफ से रतलाम के शहर क़ाज़ी सैयद आसिफ ने बयान जारी किया है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले जैसा ही बताया।

नगर निगम के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन बताते हुए आसिफ ने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। बकौल शहर क़ाज़ी, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आदेश की कॉपी मँगवाई गई है। आसिफ ने कहा कि कॉपी आने के बाद नगर निगम के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। यह मुकदमा एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन फॉर सिविल राइट्स के बैनर तले की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष ने अपने विरोध की जानकारी जिलाधिकारी को भी दे दी है। शहर काजी ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर बोर्ड लगाने के फरमान की वजह से ‘लॉ एन्ड ऑर्डर’ प्रभावित हुआ तो उसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। रतलाम के कई व्यापारियों ने नगर निगम द्वारा जारी बोर्ड पर प्रोप्राइटर का नाम लिखने के फैसले का समर्थन किया है।

कानपुर से जूता-चप्पल बेचने आए दुकानदार नसीम ने इसे एक अच्छा फैसला बताया है। नसीम का कहना है कि इस से धंधे में पारदर्शिता बढ़ेगी। बताते चलें कि हर नवरात्रि पर रतलाम के कालिका माता मंदिर में 9 दिनों का गरबा रास होता है। तब यहाँ 3 से 12 अक्टूबर तक लगने वाले मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं। आने वाले इन लोगों में श्रद्धालु और दुकानदार दोनों शामिल हैं।