जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकी यासीन मलिक, जिसे भारत के खिलाफ साजिश रचने और जंग छेड़ने का दोषी पाया गया था, ने अब कोर्ट में नया दावा किया है कि उसने 1994 से ‘गाँधीवादी तरीका’ अपना लिया था। एक ऐसा इस्लामिक कट्टरपंथी, जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी आतंकवाद और मासूमों की हत्याओं में बिताई हो, अब सजा से बचने के लिए इस तरह के दावे कर रहा है।
हाल ही में दाखिल किए गए एक एफिडेविट में यासीन मलिक ने अपने आतंकी ऑर्गनाइजेशन पर लगे बैन को हटाने की माँग की है। उसने खुद को गाँधीवादी बताया है। उसने कहा कि उसने 30 साल पहले ‘सशस्त्र संघर्ष’ (यानी आतंकवाद) छोड़ दिया था और अब ‘संयुक्त स्वतंत्र कश्मीर’ के लिए गाँधीवादी तरीके से लड़ाई लड़ने का फैसला किया। लेकिन ये दावा सिर्फ उसकी सजा से बचने की कोशिश है, क्योंकि उसका खौफनाक अतीत साफ दिखाता है कि उसकी असली मंशा क्या रही है।
हालाँकि, UAPA ट्रिब्यूनल ने JKLF-यासीन पर लगे बैन को 5 साल और बढ़ा दिया है। मलिक ने अपने एफिडेविट में ये भी कहा कि केंद्र सरकार के बड़े अफसर और नेता उससे कश्मीर मसले का शांतिपूर्ण समाधान ढूँढने के लिए बात करते रहे हैं। लेकिन उसका ये दावा भी शक के घेरे में आता है, क्योंकि उसकी हरकतें बार-बार कश्मीर में हिंसा और दहशत फैलाने वाली रही हैं।
मोदी सरकार ने यासीन मलिक के फर्जी और गुमराह करने वाले दावों की पोल खोल दी। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कैसे यासीन मलिक ने 2008 से 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फंडिंग करके माहौल खराब किया। सरकार ने UAPA ट्रिब्यूनल को बताया कि मलिक ने अपने नए ‘शांतिप्रिय’ चेहरे का इस्तेमाल करके हिंसक अभियान के लिए पैसे जुटाए। JKLF-यासीन ने अपनी राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ जारी रखीं और 2008, 2010 और 2016 के दंगों में उसकी बड़ी भूमिका रही।
यासीन मलिक की आतंकी जिंदगी और गुनाहों की लंबी लिस्ट
मई 2022 में, स्पेशल NIA कोर्ट ने यासीन मलिक को जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग गतिविधियों के लिए उम्रकैद की सजा दी थी। कोर्ट ने उसे UAPA के तहत दोषी माना। मलिक ने खुद केस में गुनाह कबूल किया था और माना था कि वो जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग एक्टिविटीज से जुड़ा हुआ था। NIA ने मलिक के लिए मौत की सजा की डिमांड की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे दो उम्रकैद और पाँच 10-10 साल की सजा सुनाई। हालाँकि, ये सारी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।
मलिक पर 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के किडनैपिंग का और 1990 की शुरुआत में 5 IAF कर्मियों की हत्या का भी आरोप है। इसके अलावा, मलिक पर जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या का आरोप है, जिन्होंने JKLF आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही, मलिक पर श्रीनगर में दूरदर्शन केंद्र के पूर्व डायरेक्टर लस्सा काउ की हत्या में भी शामिल होने का इल्जाम है।
यासीन मलिक का ‘गांधीवादी तरीका’ सिर्फ दिखावा है। उसकी आतंकी गतिविधियाँ और हिंसक हरकतें उसकी असली सच्चाई बताती हैं।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। भड़काऊ नारे लगाने वाले मुस्लिमों को हिरासत में लिए जाने पर मुस्लिम भीड़ आक्रामक हो गई और जम कर पथराव किया। पुलिस ने पथराव और दंगा करने वाले 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।
दूसरी तरफ गाजियाबाद के डासना में भी मुस्लिम भीड़ ने एक मंदिर को घेर लिया और भड़काऊ नारे लगाए। मुस्लिमों ने यह भड़काऊ नारे और पत्थरबाजी हिन्दू संत यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक बयान विरोध में लगाए हैं। मुस्लिमों का आरोप है कि संत नरसिंहानंद ने इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया है।
हाल ही में हिन्दू संत यति नरसिंहानंद ने एक कार्यक्रम के दौरान पुतले जलाने की बात कही थी। इसी दौरान उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद ने पैगम्बर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की है। मुस्लिमों ने यति नरसिंहानंद के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बवाल किए।
इसी कड़ी में बुलंदशहर के सिकन्द्राबाद थाना क्षेत्र में भी मुस्लिमों ने जुमे की नमाज के बाद हंगामा किया। इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने ‘सर तन से जुदा’ वाले नारे लगाए। सिकन्द्राबाद पुलिस नारे लगाने वाले कुछ अराजक तत्वों को पकड़ कर थाने ले गई।
Bulandshahr Breaking:
बुलंदशहर के सिकंदराबाद में यति नरसिंहानंद सरस्वती के बयान के बाद बवाल।
जुम्मे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यति नरसिंहानंद सरस्वती के पोस्टर फाड़ किया हंगामा।
पुलिस द्वारा पकड़े गए आधा दर्जन लोगों को न छोड़ने पर एक संप्रदाय के लोगों ने किया… pic.twitter.com/9X2MYsR6vT
इसके बाद शुक्रवार शाम को ही गद्दीवाडा इलाके में मुस्लिमों ने पुलिस पर हमला कर दिया गया और पथराव हुआ। मुस्लिम सड़कों पर हंगामा करते रहे। भीड़ को सड़क पर हंगामा काटते हुए वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। बुलंदशहर पुलिस ने इसके बाद मोर्चा संभाल लिया और दंगाइयों को खदेड़ दिया।
जिले के SSP ने बताया है कि पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ दो मामले दर्ज कर लिए हैं और 8 लोगों को भी गिरफ्तार किया है। SSP ने बताया है कि मामले किसी के इस पथराव में घायल होने की सूचना नहीं है और पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति नियंत्रण में है।
थाना सिकन्द्राबाद क्षेत्रान्तर्गत गद्दीवाड़ा में हुए पथराव व गिरफ्तारी के सम्बन्ध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बुलन्दशहर की बाइट। pic.twitter.com/gbcfQ79T92
यति नरसिंहानंद सरस्वती के बयान के बाद गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के बाहर भी मुस्लिम भीड़ ने बवाल किया है। शुक्रवार रात को मुस्लिमों का एक बड़ा हुजूम गाजियाबाद के डासना इलाके में स्थित इस मंदिर के बाहर इकट्ठा होकर बवाल काटने लगा। मंदिर के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
क्लिपकटुआ पंचरपुत्र द्वारा यति नरसिंहानंद जी को लेकर उकसाने के बाद सैकड़ों मुसलमान डासना देवी मंदिर पर हिंसक रूप से आक्रमण करने के लिए एकत्र हो गए। @Uppolice की तत्परता ने उसे टाल दिया।
मंदिर और यति जी को मेरा समर्थन सदैव ही रहेगा। आतंकियों की भीड़ को उचित उत्तर मिलना चाहिए। pic.twitter.com/6YuQ0AsQ4l
पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लाठी चार्ज किया और हंगामा करने वाले मुस्लिमों को खदेड़ दिया। गाजियाबाद कमिश्नरेट के ग्रामीण इलाके के DCP ने बताया है कि अभी स्थित शांतिपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने बताया है कि दंगाइयों को रोकने के लिए मंदिर के आसपास और भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उन्होंने लोगों से अफवाह ना फैलाने की अपील की है।
दिनांक 04.10.2024 को डासना मंदिर पर कुछ लडको द्वारा मंदिर के बाहर हल्ला किया जा रहा था जिनको पुलिस बल द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए खदेड़ दिया गया था । मंदिर परिसर के आस-पास पूर्णतः शान्ति बनी हुई है । वहाँ पर और अधिक पुलिस बल लगा दिया गया है ।(1/2)@Uppolicepic.twitter.com/ubk92VFUAR
— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) October 4, 2024
यति नरसिंहानंद के बयान को लेकर महाराष्ट्र के अमरावती में भी दंगा हुआ है। यहाँ प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक यूनिट SDPI के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने यहाँ भी मुस्लिम दंगाइयों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया।
बुलंदशहर चलती कार गैंगरेप और हत्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (04 अक्टूबर) को तीनों दोषियों की फाँसी की सजा को घटाकर 25 साल की सजा कर दी। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस नहीं माना और दोषियों की पुनर्वास और सुधार की संभावना पर जोर दिया। यह घटना जनवरी 2018 की है, जब बुलंदशहर जिले में 17 साल की आरुषि (बदला हुआ नाम) का अपहरण कर चलती कार में गैंगरेप कर उसकी हत्या कर दी गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदली फाँसी की सजा
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए दोषियों को फाँसी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने तीनों दोषियों – जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और इजराइल उर्फ मेलानी – को 25 साल की कैद की सजा सुनाई, जिसमें कोई माफी नहीं होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2 जनवरी 2018 की शाम को दोषियों ने पीड़िता को उसके साइकिल से लौटते वक्त देखा और उसे मौज-मस्ती के इरादे से अगवा कर लिया। वे उसे अपनी कार में खींचकर ले गए और चलती कार में उसके साथ एक-एक करके बलात्कार किया। जब पीड़िता चिल्लाने लगी, तो उन्होंने उसका गला दुपट्टे से घोंटकर हत्या कर दी और उसका शव एक नहर में फेंक दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान, बुलंदशहर की पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने मार्च 2021 में तीनों दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि इस घटना से समाज में भय का माहौल पैदा हुआ है और लोगों, विशेष रूप से अभिभावकों, में अपनी बेटियों को स्कूल भेजने को लेकर चिंता पैदा हो गई है। दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 364 (अपहरण), 376D (गैंगरेप), 302/34 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने) और 404 (संपत्ति छीनने) तथा पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।
हाईकोर्ट की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई
पॉक्सो कोर्ट में फाँसी की सजा पाए तीनों दोषियों ने फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले की फिर से समीक्षा की और पाया कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने कोई ऐसे विशेष कारण नहीं बताए थे, जिनके आधार पर केवल फाँसी की सजा दी जानी चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा कि दोषियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी थी। इसके अलावा, दोषियों की उम्र लगभग 24 साल थी, और उनमें से एक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ थीं। इन परिस्थितियों के मद्देनज़र, कोर्ट ने कहा कि दोषियों का सुधार और पुनर्वास संभव है, इसलिए फाँसी की जगह 25 साल की कैद की सजा उचित होगी।
सुप्रीम कोर्ट के नवास उर्फ मुलानवास केस का संदर्भ
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवास उर्फ मुलानवास मामले का हवाला देते हुए कहा कि ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केसों में ही फाँसी की सजा दी जा सकती है, और ऐसे मामलों में भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई असाधारण परिस्थिति हो, जिससे सजा को उलटा न जा सके। अदालत ने इस मामले में कहा कि निचली अदालत ने इस तरह की कोई असाधारण स्थिति का उल्लेख नहीं किया था, जो केवल फाँसी की सजा को उचित ठहरा सके।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जनवरी 2018 की घटना से जुड़ा है, जब बुलंदशहर जिले में 17 साल की पीड़िता आरुषि (बदला हुआ नाम) का अपहरण कर उसके साथ चलती कार में गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस वीभत्स घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। 4 जनवरी 2018 को पीड़िता का शव एक नहर में पाया गया था। परिजनों ने इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को नामजद करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी। आरोप था कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने घटना के बाद बरामद किए गए सबूतों को कोर्ट में पेश नहीं किया, जबकि वे सबूत केस के लिए महत्वपूर्ण थे। कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस ने जाँच में तेजी लाई और तीनों आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए।
पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी फाँसी की सजा
मार्च 2021 में बुलंदशहर की पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यह अपराध इतना गंभीर और वीभत्स था कि इससे समाज में भय का वातावरण बना और लोग अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। फाँसी की सजा सुनाए जाने के बाद, पीड़िता की माँ ने कहा था कि वे तीनों दोषियों को फाँसी पर लटकते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने इस घटना को अपनी बेटी और पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुखद और अपमानजनक बताया था।
हालाँकि, अब हाईकोर्ट ने फाँसी की सजा को बदलकर 25 साल की कैद की सजा दी है, यह निर्णय दोषियों के पुनर्वास की संभावना और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए लिया गया। कोर्ट ने कहा कि दोषियों की उम्र, उनका आपराधिक रिकॉर्ड न होना और उनके परिवार की जिम्मेदारी जैसे बिंदु इस मामले में सजा को कम करने के लिए पर्याप्त थे। इस फैसले के बाद, एक बार फिर यह चर्चा का विषय बन गया है कि किस प्रकार के मामलों में फाँसी की सजा दी जानी चाहिए और किस आधार पर इसे कम किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने बड़े ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद सियासी बवाल भी मच गया है। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में लगभग 5,600 करोड़ रुपये मूल्य की कोकीन और हाइड्रोपोनिक मारिजुआना बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तुषार गोयल को गिरफ्तार किया, जो कॉन्ग्रेस का पूर्व नेता हैं। इस खुलासे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर कड़ा हमला बोला और युवाओं के भविष्य को अँधकार की ओर ढकेलने का आरोप लगाया।
गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर बोला तीखा हमला
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “जब मोदी सरकार ‘नशामुक्त भारत’ के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, तब कॉन्ग्रेस के एक प्रमुख नेता का इस 5,600 करोड़ की ड्रग्स खेप में शामिल होना बेहद खतरनाक और शर्मनाक है।” शाह ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस युवाओं को ड्रग्स की अंधेरी दुनिया में धकेल रही है, जबकि मोदी सरकार उन्हें खेल, शिक्षा और इनोवेशन की ओर ले जा रही है।
शाह ने कॉन्ग्रेस के नेताओं पर अपने राजनीतिक रसूख का उपयोग कर युवाओं को ड्रग्स के दलदल में झोंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार, ड्रग्स के कारोबारियों का राजनीतिक पद या कद देखे बिना, ड्रग्स के पूरे तंत्र का विनाश कर ‘नशामुक्त भारत’ बनाने के लिए संकल्पित है।”
एक ओर जहाँ मोदी सरकार 'नशामुक्त भारत' के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, वहीं उत्तर भारत से पकड़ी गई ड्रग्स की ₹5,600 करोड़ की खेप में कांग्रेस के एक प्रमुख व्यक्ति की संलिप्तता बेहद खतरनाक और शर्मनाक है।
कांग्रेस के शासन में ड्रग्स से पंजाब, हरियाणा और समग्र उत्तर भारत…
इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। पार्टी के अनुसार, तुषार गोयल से उनका कोई संबंध नहीं है। भारतीय युवा कॉन्ग्रेस (IYC) के अनुसार, तुषार को अक्टूबर 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते संगठन से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि तुषार गोयल ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर खुद को दिल्ली प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के RTI सेल का चेयरमैन बताया था।
दुबई में बैठा वीरेंद्र बसोया और ड्रग्स का इंटरनेशनल कनेक्शन
इस ड्रग्स रैकेट के मास्टरमाइंड के तौर पर वीरेंद्र बसोया का नाम सामने आया है, जो वर्तमान में दुबई में रह रहा है। वीरेंद्र बसोया पहले भी भारत में ड्रग्स के कई मामलों में संलिप्त रहा है। पिछले साल पुणे पुलिस द्वारा पकड़ी गई 3,000 करोड़ रुपये की म्याऊँ म्याऊँ ड्रग्स खेप में भी बसोया का नाम सामने आया था। इस केस में भी बसोया की संलिप्तता की पुष्टि की गई है।
बसोया ने तुषार गोयल को अपने ड्रग्स नेटवर्क से जोड़ा था, और उसने कोकीन की खेप की डिलीवरी के बदले तुषार को हर कन्साइनमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये देने की डील की थी। दुबई से बसोया ने UK में रहने वाले जितेन्द्र गिल को भारत भेजा था, जो तुषार से मिलने दिल्ली आया था। दिल्ली पुलिस ने जितेन्द्र गिल को भी इस मामले में अमृतसर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। जितेन्द्र गिल पिछले 17 सालों से UK में रह रहा है और उसके पास UK का ग्रीन कार्ड है।
वीरेंद्र बसोया का कनेक्शन केवल भारत तक सीमित नहीं है। वह दुबई में रहकर इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट चलाता है, जिसके तार UK, मुंबई और अन्य देशों से जुड़े हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर बसोया के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, ताकि उसे दुबई में गिरफ्तार किया जा सके। इसके अलावा, बसोया के डी-कंपनी से संबंधों की भी जाँच हो रही है।
इस ड्रग्स रैकेट में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें तुषार गोयल के अलावा हिमांशु कुमार, औरंगजेब सिद्दीकी, भरत कुमार जैन, और जितेन्द्र गिल शामिल हैं। यह ड्रग्स सिंडिकेट पैन-इंडिया स्तर पर फैला हुआ था, और इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मेट्रो शहरों में कोकीन की आपूर्ति करना था।
इस ड्रग्स मामले में कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी ने इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस पर सीधा हमला बोला है। इस बड़े ड्रग्स रैकेट से जुड़े तमाम पहलू अभी भी खुल रहे हैं। कॉन्ग्रेस का इससे जुड़े होने का आरोप जहाँ सियासी बवाल मचा रहा है, वहीं पुलिस की जांच में इंटरनेशनल लिंक और डी-कंपनी से संभावित संबंध सामने आ रहे हैं।
इन्स्टाग्राम इन्फ्लुएंसर अदनान शेख की बहन ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अदनान की बहन ने एक इंटरव्यू के दौरान कई बातों का खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया है कि मारपीट के कारण अदनान को जेल भी जाना पड़ा था। इफ्फत ने यह भी आरोप लगाया है कि अदनान ने एक लड़की का धर्मान्तरण करवाया है।
इफ्फत ने एक इंटरव्यू के दौरान अदनान के ऊपर कई खुलासे हुए। इफ्फत ने कहा कि उनके साथ उनका घर पे आना जाना अदनान ने बंद कर रखा है। इफ्फत ने आरोप लगाया कि जब वह अपने बीमा माँ-बाप से मिलने गईं तो अदनान ने उनके ऊपर हमला कर दिया और उनके ससुर को भी मारा पीटा।
इफ्फत ने कहा कि उन्होंने इस घटना के बाद FIR करवाई थी और अदनान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदनान को बाद में बेल मिल गई थी। इफ्फत ने दावा किया कि उनके साथ पहले भी कई बार अदनान मारपीट कर चुका है, लेकिन तब उन्होंने इसके विषय में कोई आवाज नहीं उठाई।
इंटरव्यू के दौरान इफ्फत ने बताया कि अदनान शेख ने हाल ही में जिस आयशा शेख से शादी की है, वह असल में एक हिन्दू लड़की है। इफ्फत ने बताया कि वह पहले इंडिगो एयरलाइन्स में काम करती थी। इफ्फत ने कहा कि उसका पहले नाम रिद्धि जाधव था और बाद में उसका धर्मान्तरण करवाके नाम आयशा शेख रखा गया है।
इफ्फत ने यह भी दावा किया कि आयशा उर्फ़ रिद्धि के अदनान से पहले और भी लड़कों से संबंध रह चुके हैं और उनके दिए हुए गिफ्ट वह अब भी रखती है। इफ्फत ने कहा कि अदनान ने अपने निकाह में किसी को आयशा की फोटो नहीं लेने दी ताकि उसे कोई पहचान ना पाए।
इंटरव्यू में इफ्फत ने कुछ फोटो भी दिखाए जिसमें चोट के नुकसान दिखते हैं। इफ्फत ने कहा कि 2022 में लोखंडवाला में रहने के दौरान अदनान ने उनके साथ मारपीट की थी। इफ्फत ने बताया कि मैच खेलने जाने के कारण अदनान ने उन्हें बुरी तरीके से पीटा था। इफ्फत ने आरोप लगाया कि इस मामले में उनका छोटा भाई अब्दुल भी शामिल था।
इफ्फत ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान अदनान ने उनके निजी अंगों पर मारा। इफ्फत का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इन आरोपों पर अदनान ने कहा कि उन्होंने इफ्फत को एक लड़के से शादी के लिए मना किया था इसलिए यह सब आरोप लग रहे हैं।
गौरतलब है कि अदनान शेख एक इन्फ्लुएंसर है जिसके इन्स्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोवर हैं। वह कई गानों की वीडियो में भी काम कर चुका है। वह बिग बॉस में भी आ चुका है। वह हाल ही में निकाह के कारण चर्चा में आया था, इस बीच उसकी बहन ने उस पर यह आरोप जड़ दिए हैं।
गुजरात के गिर सोमनाथ में अवैध मस्जिदों और दरगाहों पर बुलडोजर की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया है। कोर्ट ने कहा कि अगर उसके आदेश की अवमानना हुई है तो दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही गिराए गए ढाँचों को दोबारा बनवाने का आदेश दिया जाएगा। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह बात अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पास बने 10 अवैध मस्जिदों, 5 दरगाहों, कुछ कब्रों और 45 मुस्लिमों के घरों पर प्रशासन ने 28 सितंबर 2024 को बुलडोजर चला दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है।
प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ समस्त पाटनी मुस्लिम जमात ने याचिका दाखिल की है। उसने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 सितंबर 2024 के आदेश के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई करने की माँग की थी। इस दौरान मुस्लिम धार्मिक और आवासीय स्थलों को ज्यों का त्यों रखने की माँग खारिज कर दी गई। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब माँगा है।
दरअसल, हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थानों में एक सोमनाथ मंदिर से सिर्फ 340 मीटर की दूरी पर 57 एकड़ के क्षेत्र में मुस्लिमों के मजहबी स्थल और घर बने हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। वहीं, मुस्लिम जमात के वकील संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आदेश के बावजूद गुजरात में अधिकारियों ने बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया।
हेगड़े ने कहा कि 1903 में बनी दरगाहों, कब्रों और घरों को लेकर जो नोटिस दिया गया था, उसमें भी बुलडोजर एक्शन का जिक्र नहीं था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। अदालत की परमिशन के बिना कोई एक्शन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संपत्तियाँ किसी अपवाद के तहत नहीं आती हैं।
वहीं, गुजरात के अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्रवाई का बचाव किया। तुषार मेहता ने कहा कि ये संरचनाएँ समुद्र से सटी हुई थीं और सोमनाथ मंदिर से करीब 340 मीटर दूर थीं। उन्होंने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन 17 सितंबर के आदेश के तहत अपवाद है। सरकारी जमीन पर कब्जा था, जो साल 2003 से चल रहा है और इस पर 2023 से कार्रवाई जारी है।
इससे पहले, उत्तर प्रदेश सहित देश राज्यों में अवैध निर्माणों पर चल रही बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना 1 अक्टूबर 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई और विश्वनाथन की बेंच ने कहा था कि फैसला आने तक देशभर में बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी।
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि अवैध अतिक्रमणों को हटाने पर कोई रोक नहीं होगी। सड़क हो, रेल लाइन हो, मंदिर हो या फिर दरगाह, अवैध अतिक्रमण हटाया ही जाएगा। बेंच ने कहा था कि अदालत के लिए जनता की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की तारीख अभी तय नहीं की है।
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर अवैध प्रवासियों और मजहबी पहचान छिपाकर भारत में रहने वालों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रामलीला के मंच पर हिंदू पहचान लेकर काम कर रहे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो दूसरी ओर कर्नाटक में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों के एक ग्रुप को भी गिरफ्तार किया गया जो हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे थे।
गाजियाबाद में गलत पहचान बताकर रामलीला, हिंदू नामों से आधार कार्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में पुलिस ने तीन मुस्लिमों वजीर खान, राहुल (जिसका असली नाम सामने नहीं आया), और नानक को देवी मंदिर में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किया। इन तीनों पर आरोप है कि ये अपनी असल पहचान छिपाकर रामलीला में हिंदू पात्रों का अभिनय कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब तीनों आरोपित गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ महंत नरसिंहा नंद गिरी ने धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। पुलिस ने इनके पास से हिंदू नाम और पहचान के आधार कार्ड बरामद किए, जो इनके वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते थे।
पुलिस जाँच के दौरान इन युवकों ने बताया कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से रामलीला मंचन से जुड़ा हुआ है। ये लोग रामलीला में कैकई, मंथरा जैसे किरदार निभाते हैं और ढोलक बजाने तथा नृत्य का भी कार्य करते हैं। गिरफ्तार युवकों का दावा है कि वे मथुरा के रहने वाले हैं और रामलीला मंचन करना उनकी आजीविका का हिस्सा है। हालाँकि, पुलिस ने यह साफ किया कि मामले की जाँच जारी है और तब तक कुछ ठोस कहा नहीं जा सकता।
डासना देवी मंदिर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हमेशा पुलिस बल तैनात रहता है, खासकर महंत नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। महंत का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों के मंदिर में प्रवेश को रोकने के पीछे उनका धार्मिक और सुरक्षा से जुड़ा कारण है।
कर्नाटक में हिंदू पहचान के साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक
दूसरी घटना कर्नाटक के पीन्या इलाके की है, जहाँ तीन और पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सैयद तारिक और उसकी पत्नी अनीला शामिल हैं, जबकि उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह परिवार पिछले आठ साल से भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहा था और हिंदू नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था। तारिक अपने यूट्यूब चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था, जबकि उसकी पत्नी घरेलू महिला है। इन लोगों के पास से पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बरामद किए हैं, जो सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे।
इस परिवार के बारे में जानकारी तब मिली जब पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पाकिस्तानी नागरिकों ने इनके बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने शंकर शर्मा के नाम से रह रहे राशिद अली सिद्दिकी को भी हाल ही में गिरफ्तार किया था, जो अपनी बांग्लादेशी पत्नी और ससुरालवालों के साथ फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था। राशिद का मामला भी तारिक से जुड़ा हुआ पाया गया है। अकेले कर्नाटक में ही कुल 11 पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों को फर्जी हिंदू पहचान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चला है कि यह परिवार पहले कोच्चि में रह रहा था और चार साल पहले बेंगलुरु आया था। तारिक को हर महीने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के माध्यम से मिलती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी तकरीरें करनी थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन अवैध पाकिस्तानी नागरिकों को पैसा कैसे और कहाँ से मिल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
कर्नाटक पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि राज्य में और कितने पाकिस्तानी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में भी चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसी प्रकार फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई लोग हो सकते हैं जो अवैध रूप से रह रहे हों और अपनी मजहबी और राष्ट्रीय पहचान छिपाकर काम कर रहे हों।
सावधान करने वाली हैं दोनों घटनाएँ
इन दोनों घटनाओं में एक चीज समान है: आरोपितों द्वारा अपनी मजहबी पहचान को छिपाना। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपित मुस्लिम युवक हिंदू नामों के साथ रामलीला में काम कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कर्नाटक में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों ही मामलों में मजहबी पहचान को छिपाकर अवैध कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया गया।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह खामनेई ने कहा है कि सभी मुस्लिम मुल्कों का इजरायल दुश्मन है। आयोत्ल्लाह खामनेई ने ईरान के इजरायल पर मिसाइल हमले को सही ठहराया है। खामनेई ने यह सभी बातें जुमे की नमाज अदा करने के बाद कही हैं।
तेहरान में जुमे की नमाज अदा करने के बाद शुक्रवार (4 अक्टूबर, 2024) को खामनेई ने अपना संबोधन दिया। खामनेई ने ऐसा संबोधन पाँच साल के बाद दिया है। खामनेई ने इस दौरान हिजबुल्लाह के आतंकियों के मारे जाने और इजरायल पर हमले को लेकर बातें कहीं।
खामनेई ने कहा कि इजरायल के ऊपर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का ईरान का कदम वैध और एकदम सही था क्योंकि हर देश को अपने ऊपर हुए हमले का जवाब देने का अधिकार है। खामनेई ने इसी दौरान कहा कि इजरायल सभी मुस्लिम मुल्कों का दुश्मन है।
खामनेई ने कहा कि मुस्लिम मुल्कों को अफगानिस्तान से लेकर यमन और ईरान से लेकर गाजा तथा लेबनान तक अपनी सुरक्षा के लिए कमर कसनी पड़ेगी। उन्होंने कहा है कि इजरायल लोगों की हत्या करके अपने जीतने का केवल झूठा दावा कर रहा है।
खामनेई ने अपने संबोधन अमेरिका पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इजरायल को बचा रहा है ताकि वह इस इलाके के संसाधनों पर अपना कब्जा जमा सके। खामनेई ने कहा कि इस इलाके में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रही मुहिम शांत नहीं होगी।
अपने संबोधन में खामनेई ने कहा कि ईरान ने इजरायल को माकूल जवाब दे दिया है और आगे ना ही वह युद्ध को बढ़ावा देंगे और ना ही पीछे हटेंगे। खामनेई ने अपने लड़ाकों को खूनखराबे से ना डरने की सलाह दी है। खामनेई के इस बयान से संकेत मिले हैं कि ईरान अब युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहेगा।
ईरान के मुखिया का यह बयान उसके इशारे पर चलने वाले आतंकी समूह हिजबुल्लाह के सरगना नसरल्लाह को इजरायल द्वारा मार गिराए जाने के बाद सामने आया है। इजरायल ने इसके बाद भी लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह पर बड़ी कार्रवाईयाँ की हैं।
इस बीच ईरान को अपनी ही सेना की जाँच करनी पड़ गई है। ईरान को शक है कि उसकी सेना के कुछ अधिकारीयों ने मोसाद को ख़ुफ़िया जानकारी दी है। ईरान की यह जाँच नसरल्लाह की मौत के बाद और तेज हुई है। ईरान के शक की सुई सबसे पहले विदेश आने-जाने वाले अधिकारीयों पर पड़ी है।
बताया गया है कि ईरान ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है और उसने पूछताछ कर रहा है। मोसाद का नेटवर्क तोड़ने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ हिजबुल्लाह भी सही समय पर हमले की सूचना ना मिलने पर बौखलाया हुआ है।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 से ही इजरायल इस्लामी आतंकी समूह हमास से जंग में लगा हुआ है। हमास को हिजबुल्लाह और ईरान जैसे देश खाद-पानी दे रहे हैं। इजरायल ने हाल ही में हिजबुल्लाह के लोगों के पास रखे जाने वाले पेजरों में भी धमाका किया था।
देश के युवाओं के भविष्य को सँवारने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नई स्कीम लॉन्च कर दी है। इस योजना का नाम पीएम इंटर्नशिप योजना है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को प्रतिमाह 5000 रुपए और साल में एक बार एकमुश्त 6000 रुपए मिलेंगे। यह योजना करियर शुरू करने वाले युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई 2024 को अपने बजट भाषण में इस योजना की घोषणा की थी। सरकार ने 3 अक्टूबर को 800 करोड़ रुपए के बजट के साथ पायलट आधार पर इस योजना की शुरुआत की। इसके लिए मंत्रालय ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस योजना के जरिए अगले 5 साल में एक करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए सरकार ने देश की प्रमुख 500 कंपनियों में ट्रेनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के सूत्रों के मुताबिक, महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और एलेम्बिक फार्मा सहित 111 कॉरपोरेट्स ने पोर्टल के लॉन्च होने के कुछ ही घंटों के भीतर साइन अप कर लिया है। इन कंपनियों के द्वारा 1077 विद्यार्थियों को इंटर्नशिप की पेशकश की गई है।
योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में 21 से 24 साल की उम्र के 1,25,000 युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य रखा गया है। पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए कई क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि जहाँ तक संभव हो सकेगा, उम्मीदवार को उसके जिले या फिर उसके सबसे नजदीकी क्षेत्र में इंटर्नशिप दी जाएगी।
कब और कहाँ करें आवेदन
आवेदन की प्रक्रिया pminternship.mca.gov.in पर शुरू होगी। उम्मीदवार 12 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक पोर्टल के माध्यम से इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके जरूरी अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद उनके नाम को पोर्टल पर रजिस्टर्ड कंपनियों के साथ शेयर किया जाएगा।
इसके बाद कंपनियाँ 27 अक्टूबर से 7 नवंबर 2024 के बीच अभ्यर्थियों का अपना चयन करेंगी। उम्मीदवारों के पास कंपनियों द्वारा ऑफर किए गए इंटर्नशिप को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प होगा। वे 8 से 15 नवंबर तक इस प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेंगे। अगर कोई उम्मीदवार प्रस्ताव अस्वीकार करता है तो उसे दो और प्रस्ताव मिल सकते हैं। इसके बाद इंटर्नशिप 2 दिसंबर से शुरू होगी।
इंटर्नशिप के लिए योग्यता
इंटर्नशिप के लिए 21 से 24 साल के ऐसे युवा आवेदन कर सकेंगे, जिनकी पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से कम है। उम्मीदवार के माता-पिता या वह खुद सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। निजी क्षेत्र में काम करने वालों के बच्चे इसके पात्र हैं। आवेदन के लिए कुछ अन्य मानदंडों में आवेदक को भारतीय नागरिक होने चाहिए, बेरोजगार होने चाहिए और पूर्णकालिक शिक्षा में नहीं होने चाहिए।
हालाँकि, ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राएँ इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विकलांग लोगों के लिए केंद्र की आरक्षण नीति इस योजना पर भी लागू होगी।
कौन इस योजना के पात्र नहीं होंगे
ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने IIT, IIM, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU), IISER, NID, IIIT आदि से डिग्री ली है, वे इसमें आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिनके पास CA, CMA, CS, MBBS, BDS, MBA या अन्य कोई मास्टर्स डिग्री या इससे ऊपर की डिग्री होगी, वे भी इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। सरकारी कर्मचारियों के बच्चे या पति/पत्नी इस योजना के पात्र नहीं होंगे।
जो उम्मीदवार केंद्र या राज्य सरकारों या अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से संबंधित किसी भी योजना में कोई भी स्किल, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप या स्टूडेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा रह चुके हैं, वे भी इस योजना के पात्र नहीं होंगे। जिन लोगों ने नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम या नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत अप्रेंटिसशिप की है या ट्रेनिंग ले रहे हों, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे।
कैसे करें आवेदन
योग्यताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार आवेदन करने के लिए सबसे पहले pminternship.mca.gov.in पोर्टल पर जाएँ। इस पोर्टल पर मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स का एक सेक्शन होगा। उन्हें इस सेक्शन को क्लिक करना होगा। इसके बाद इसमें उम्मीदवार को ‘PM Internship‘ का विकल्प चुनना होगा।
विकल्प चुनने के बाद उसमें उन्हें अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, शिक्षा आदि जरूरी विवरण को भरना होगा। सारे विवरण को भरने के बाद उसे सब्मिट पर दबाना होगा। इससे उनका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेेशन कराने के बाद एक कन्फर्मेशन ईमेल या मैसेज आएगा। इसके बाद सेलेक्शन का स्टेटस चल जाएगा।
हर महीने मिलेंगे 5000 रुपए और बीमा
इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को देश की शीर्ष 500 कंपनियों अपने यहाँ मौका देगी। इस योजना के तहत इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को 5,000 रुपए तक का मासिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, इंटर्नशिप करने वालों को साल में एक बार 6000 रुपए की एकमुश्त वित्तीय सहायता सरकार द्वारा दी जाएगी।
इंटर्शनशिप करने वाले युवा को 5000 रुपए के मासिक भत्ते में 10 प्रतिशत यानी 500 रुपए कंपनियाँ अपने CSR फंड से देंगी। वहीं, बाकी के 4500 रुपए सरकार की तरफ से दी जाएगी। इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने यानी एक साल की होगी।
इतना ही नहीं, इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना‘ और ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत बीमा कवर भी दिया जाएगा। इसके लिए प्रीमियम का भुगतान सरकार करेगी। इसके अलावा, कंपनियाँ चयनित उम्मीदवार को अतिरिक्त दुर्घटना बीमा उपलब्ध करा सकती हैं।
बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार का पतन हुआ और प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। इस घटनाक्रम से बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं के दमन और अत्याचार की घटनाएँ सामने आ रही हैं, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में बांग्लादेश को चला रही कट्टरपंथियों की कार्यवाहक सरकार आँखें मूंदे बैठी है और हिंदुओं के उत्पीड़न के मामलों को दबाने में लगी हुई है।
बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा की ताजी घटनाओं में, 28 सितंबर और 1 अक्टूबर को बांग्लादेश के राजशाही डिवीजन के पबना जिले के सुजानगर उपजिला में स्थित ऋषिपारा बरवारी पूजा मंडप और मानिकदी पालपारा बरवारी पूजा मंडप में दुर्गा और अन्य हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ऋषिपारा मंडप में 4 मूर्तियाँ और मानिकदी मंडप में 5 मूर्तियाँ तोड़ी गईं।
पबना में मानिरगी पालपारा बारवारी पूजामंडप में विखंडित मूर्तियाँ
इन हमलों की वजह से स्थानीय हिंदुओं में भय का माहौल है। उन्होंने बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की माँग की है। हैरानी की बात है कि घटनाओं के घटने के समय लाख बुलावे के बावजूद कोई सुरक्षाबल नहीं पहुँचा, बल्कि बाद में पुलिस ही नहीं रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और सेना के अधिकारियों ने भी घटनास्थलों का दौरा किया और इतिश्री कर ली।
बता दें कि इस साल दुर्गापूजा का त्योहार 9 अक्टूबर से शुरू होने वाला है, जिसमें अकेले सुजानगर उपजिला में ही 51 मंदिरों में मनाया जाना है, लेकिन हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं से उनमें डर का माहौल है।
मानिकदी पालपारा पूजा मंडप के अध्यक्ष बिजन पाल ने बताया कि 1 अक्टूबर की रात जब वह मंदिर से गए थे, तब मूर्तियाँ सही सलामत थीं, लेकिन अगले दिन जब लौटे तो उन्होंने पाया कि मूर्तियों के सिर काट दिए गए थे।
पबना में मूर्तियों की तोड़फोड़ के मामलों को दबाने की कोशिश
बिजन पाल ने यह भी बताया कि क्षतिग्रस्त मूर्तियों की मरम्मत की कोशिश की जा रही है। सुजानगर उपजिला के कार्यकारी अधिकारी (UNO) मोहम्मद रशेदुज्जमान ने इस घटना को ‘अलग-थलग घटना’ बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “यह एक अलग घटना है। हम दोषियों की तलाश कर रहे हैं ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। साथ ही हर मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति भी बनाई गई है।”
सुजानगर उपजिला पूजा उत्सव परिषद के अध्यक्ष सुभोध कुमार नोटो ने हिंदू मंदिरों पर हुए इन लगातार दो हमलों पर चिंता जताई है।
किशोरगंज में भी तोड़ी गईं मूर्तियाँ
इस बीत, गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) को ढाका डिवीजन के किशोरगंज में गोपीनाथ जीउर अखाड़ा दुर्गा पूजा मंडप में 7 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डाली गईं। यह घटना तब हुई जब मंदिर की सुरक्षा में तैनात गार्ड सो रहे थे।
इस्लामी कट्टरपंथियों ने दीवार फाँदकर मूर्तियों के सिर तोड़ दिए। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने स्थल का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। इस तोड़फोड़ के विरोध में हिंदू समुदाय के लोगों ने उसी दिन एक विरोध मार्च निकाला, जो कई सड़कों से होते हुए जिला आयुक्त कार्यालय के सामने आकर खत्म हुआ।
जिला आयुक्त फौजिया खान और पुलिस अधीक्षक मोहम्मद हसन चौधरी ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। गोपीनाथ जीउर अखाड़ा दुर्गा पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष लिटन सरकार ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई और कहा, “यहाँ पहले भी दुर्गा पूजा का आयोजन होता रहा है, लेकिन पहले कभी इस तरह की तोड़फोड़ नहीं हुई। जो लोग इस घटना के पीछे हैं, उनका मकसद सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना है। उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”
जिला पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष नारायण दत्ता प्रदीप ने भी कहा, “इस तोड़फोड़ से हिंदू समुदाय बहुत दुखी है। अब हर कोई डर के माहौल में है। अगर इस तरह की घटनाएँ जारी रहती हैं, तो हम अपने धार्मिक त्योहार कैसे मना पाएँगे?”
पुलिस अधीक्षक ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि सुरक्षा एजेंसियाँ अपराधियों को पकड़ने के लिए पूरी सक्रियता से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “हम इस मामले में सख्त कदम उठा रहे हैं। दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और हम उम्मीद करते हैं कि दुर्गा पूजा सुरक्षित और धूमधाम से मनाई जा सकेगी।”
गोपीनाथ जिउर अखाड़ा दुर्गा पूजा मंडप में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया गया
जिला आयुक्त फौजिया खान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई, जिसमें पुलिस, सेना और RAB के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में हिंदू नेताओं ने दोषियों की गिरफ्तारी की माँग दोहराई।
बता दें कि साल 2024 में किशोरगंज के 13 उपजिलों में कुल 363 दुर्गा पूजा मंडप बनाए जाने की योजना है। हाल की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी पूजा मंडपों की सुरक्षा को और बढ़ा दिया है ताकि उत्सव शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से मनाया जा सके।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मामले बढ़े
बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा के मामले हमले से सामने आते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हो चुके हैं, विशेषकर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद।
चटगाँव में एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में उसकी मॉब लिंचिंग के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरे थाने को ही घेरा लिया और आर्मी की गाड़ियों तक में आग लगा दी थी।
ओपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदू लड़के उत्सव मंडल को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में लगभग मार डाला था।
यह भी खुलासा हुआ था कि मुस्लिम छात्रों ने 60 से अधिक हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है।
हाल ही में, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
6 सितंबर को चटगांव के कादम मुबारक इलाके में गणेश उत्सव के दौरान हिंदू भक्तों की एक शोभायात्रा पर भी हमला हुआ था।