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‘कभी हमारे गुलाम थे काफिर, आज मुस्लिमों का ही हो रहा शोषण’: जम्मू-कश्मीर में चुनाव से बौखलाया आतंकी संगठन ISIS, जिहाद के लिए उकसाया

कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS की आईएस-के (IS-K) ने अपनी पत्रिका ‘वॉइस ऑफ खुरासान’ के हालिया अंक में जम्मू-कश्मीर को लेकर खूब जहर उगला है। कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव होता देख बौखलाए इस आतंकी संगठन ने मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की है। उसने हुए लिखा है कि कश्मीर काफिरों (इस्लाम में गैर-मुस्लिमों के लिए अपमानजनक संबोधन) के कब्जे में है। इसके लिए जिहाद (इस्लामी जंग) का वक्त आ गया है।

पत्रिका में ‘कश्मीर: द पैराडाइज अंडर दि कंट्रोल ऑफ इनफिडेल्स (कश्मीर: काफिरों के नियंत्रण में जन्नत)’ शीर्षक में लिखा गया है कि एक समय था जब इस इस्लाम ने दुनिया पर राज किया और भारत से लेकर अंदलूसिया (स्पेन) तक किसी काफिर ने मुस्लिमों का अपमान करने की हिम्मत नहीं की। उस समय अल्लाह की धरती पर अल्लाह की शरीयत का शासन था।

पत्रिका में उसने लिखा है, “एक समय की बात है, जब काफिर इस गर्वीली उम्माह को जजिया देते थे और इसके हर हुक्म का पालन करते थे। एक समय की बात है, जब उम्माह के पास अरब प्रायद्वीप से आए नौजवान एक ईमान वाली बहन की पवित्रता की रक्षा के लिए भारत में राजाओं को इतनी कड़ी सज़ा देते थे कि उनके दर्द की छाप कई पीढ़ियों तक बनी रही।”

लोगों को भड़काते हुए ISIS ने अपनी पत्रिका में लिखा है कि एक समय इस्लाम के एक हाथ में तलवार और दूसरे में कुरान था, जो पूरब और पश्चिम के काफिरों में डर पैदा करता था। जब से उम्माह ने जिहादी हथियारों की जगह खिलौनों की ओर रुख किया और कुरान की जगह पश्चिमी संस्कृति और कानूनों को अपनाया है, तब से काफिरों ने इसकी शान को दिन-ब-दिन खत्म कर दिया है।

कश्मीर का जिक्र करते हुए इस ऑनलाइन पत्रिका में लिखा गया है, “इस्लामी उम्माह के खंडित अस्तित्व का एक हिस्सा ‘कश्मीर’ है। यह जन्नत जैसी भूमि है, जिस पर दशकों से काफ़िर हिंदुओं, राष्ट्रवादी मिलिशिया और खुफिया एजेंसियों के हितों के लिए काम करने वाले तथाकथित जिहादी संगठनों द्वारा अत्याचार किया गया है।”

इराक में अल्पसंख्यक यजिदी समुदाय के लोगों के विनाश के लिए कुख्यात ISIS ने कश्मीर को अब उत्पीड़न और उजाड़ का प्रतीक बताया है। उसने लिखा है कि कश्मीर पूर्वी तुर्किस्तान की तरह इस्लाम के लोगों के लिए जेल बन गई है, जहाँ पहचान, सभ्यता और संस्कृति खतरे में है। जिस कश्मीर को कभी धरती का ‘जन्नत’ कहा जाता था, वह अब हिंदू बहुदेववादियों द्वारा शासित है।

इतिहास में इस्लामी आक्रांताओं द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप में किए गए विनाश पर गौरव करते हुए इस आतंकी साहित्य में कहा गया है कि कश्मीर कभी मुस्लिमों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप पर इस्लाम का किला था। आज उनके लिए यह कैदखाना बन गई है। एक समय था जब मुस्लिमों के घोड़े कश्मीर की धरती से होकर भारत के विशाल भूभाग को शरीयत के शासन के अधीन लाने के लिए गुजरते थे।

अपनी प्रोपेगेंडा के जरिए आम मुस्लिमों को उकसाने का प्रयास करते हुए IS-K ने अपनी मैगजीन में कहा कि भारत से आए मुश्रिकों की सेनाएँ इस्लाम और उसके दीनी रीति-रिवाजों को रौंद रही हैं। आज कश्मीर का हर शहर और गाँव गुलामी और उत्पीड़न से कराह रहा है। हर घर से मुस्लिमों की चीखें निकल रही हैं। हिंदू मुश्रिकों और खासतौर पर ‘भारतीय जनता पार्टी’ के हाथों मुस्लिमों का रोज खून बहाया जा रहा है।

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद घाटी में लौटे अमन-चैन से तिलमिलाए इस आतंकी संगठन में लोगों के सामने झूठ परोसते हुए लिखा है कि कश्मीर में वहाँ के मुस्लिमों को किसी न किसी बहाने जेलों में डाला जा रहा है। उनका अपहरण किया जाता है। मुस्लिम बहनों की इज्जत को तार-तार किया जाता है। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

कश्मीर विधानसभा के लिए वहाँ हुए पहले चरण के मतदान में स्थानीय लोगों की शानदार भागीदारी से यह आतंकी संगठन तिलमिला गया है। इसलिए तरह-तरह के झूठ दुनिया के लोगों के सामने परोसने की कोशिश कर रहा है, ताकि मुस्लिमों पर अत्याचार के नाम पर इस्लामी आतंकवाद की आग में अधिक से अधिक नौजवानों को झोंका जा सके।

उसने कहा है कि उइगरों के बाद कश्मीरी मुसलमान इस्लामी उम्माह का वह हिस्सा हैं, जो सबसे ज़्यादा नरसंहार झेल रहा है। उनका दीन-ईमान खतरे में है। झूठ फैलाते हुए उसने लिखा है, “हिंदू मुश्रिकों की इच्छा यही है कि कश्मीरी मुसलमान अल्लाह की इबादत वैसे ही करें, जैसा वे करते हैं और इसके बजाय ‘राम राम और भगवान भगवान’ (नवजुबिल्लाह) का जाप करें।”

उसने कश्मीर के लोगों को चीनी के उइगर समुदाय के मुस्लिमों से की है, जिनका खात्मा चीन द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उसने आशंका व्यक्त करते हुए लिखा है, “कल कश्मीर पर एक रणजीत सिंह, एक गुलाब सिंह और एक अमृत सिंह ने अत्याचार किया था, लेकिन आज कश्मीर के हर शहर पर भारतीय मुश्रिकों से अलग एक रणजीत सिंह का शासन है, जो सभी कश्मीरी मुसलमानों की प्रतिष्ठा और सम्मान को नष्ट करने के लिए अथक काम में लगे हुए हैं।”

इतिहास के मुस्लिम आक्रमणकारियों को महिमामंडित करते हुए इस आतंकी पत्रिका में लिखा है, “एक समय हिंदू और सिख मुश्रिकों ने इस भूमि पर पैर रखने की हिम्मत नहीं की थी। उन्हें इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन अब यह क्षेत्र हिंदू और सिख मुश्रिकों के लिए एक आश्रय स्थल है। वहाँ के मुस्लिमों को इनसे अनुमति लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।”

प्रोपगेंडा फैलाते हुए इसमें आगे लिखा गया है कि कश्मीर का क्षेत्र, जो कभी मुस्लिमों का बहुमत था, अब अधिकांश शहरी और प्रभावशाली क्षेत्रों में हिंदू और सिख मुश्रिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इस भूमि पर कभी उनका शासन था, अब मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। उनके घर, जमीन और यहाँ तक ​​कि मस्जिदें भी भारतीय मुश्रिकों को दी जा रही हैं और मुस्लिमों को जबरन बेदखल किया जा रहा है।

पत्रिका में कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान स्थित अन्य इस्लामी आतंकी संगठन जैसे कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा के साथ-साथ पाकिस्तान पर निशाना साधा गया है और उन्हें कश्मीर मुद्दे का व्यापारी बताया गया है। इसमें ‘अल-वाला वल-बारा’ सिद्धांत के तहत भारतीय सेनाओं पर हमले के लिए उकसाया गया है। इसके साथ ही मुस्लिम युवाओं से आतंकवाद की आग में कूदने के लिए आह्वान किया गया है।

इसमें मुस्लिमों को उकसाते हुए कहा गया है, “उठो और अपने ईमान, सम्मान और दीन की रक्षा करो और इस पवित्र पथ पर अपने प्राण और धन का बलिदान दो! मुजफ्फरनगर, श्रीनगर, लद्दाख और कश्मीर के हर शहर की गलियों को मूर्तिपूजकों और देशद्रोहियों के खून से रंग दो! उन्हें ऐसी सजा दो कि आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें याद रखें! कश्मीर को भारतीय सैनिकों का कब्रगाह बना दो।”

इस पत्रिका में गजवातुल-हिंद (भारत पर आक्रमण) को लेकर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है, “अबू हुरैरा ने बताया कि अल्लाह के रसूल ने कहा- मेरी उम्मत के कुछ लोग भारत पर आक्रमण करेंगे और अल्लाह उन्हें इसमें विजय दिलाएगा और वे भारतीय राजाओं को जंजीरों में जकड़ देंगे। फिर वे अश-शाम लौट आएँगे और वहाँ उन्हें ‘ईसा इब्न मरियम’ मिलेंगे।”

इस आतंकी साहित्य ने आगे लिखा है, “हज़रत अबू हुरैरा ने रिवायत की है: ‘अल्लाह के रसूल ने हमसे भारत पर आक्रमण का वादा किया था। अगर मुझे इसमें भाग लेने का अवसर मिला तो मैं अपनी जान और धन इसमें खर्च करूँगा। अगर मैं मारा गया तो मुझे सबसे अच्छे शहीदों में गिना जाएगा और अगर मैं वापस लौट आया तो मैं जहन्नुम की आग से आज़ाद हो जाऊँगा।”

आतंकी संगठन ने विभिन्न स्रोतों का हवाला देते हुए आम लोगों को जिहाद और आतंकवाद के लिए उकसाया है। उसका कहना है कि ‘अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते।’ दरअसल, कश्मीर में अपनी जमीन तलाश रहे इस इस्लामी संगठन ने शांति से अपनी जीवन-यापन करने की कोशिश करने वाले कश्मीरी मुस्लिमों को उकसाने का भरपूर प्रयास किया है। जम्मू-कश्मीर में चुनाव की प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है और लोग आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

इन सब कारणों से इस्लामी आतंकी संगठन घबराए हुए हैं। यही कारण है कि आम लोगों के सामने गलत तथ्य प्रस्तुत करके उन्हें गुमराह करने की कोशिश किया जा रहा है। हालाँकि, अधिकांश लोग समझ चुके हैं कि शांति ही जीवन जीने का असली तरीका है और वे इस सिद्धांत को धीरे-धीरे अपने जीवन में उतारने लगे हैं। इस कारण कश्मीर में दशकों के आतंकवाद के बाद अद्वितीय शांति लौट रही है।

हूर से मिले 879 हिजबुल्लाह आतंकी, संगठन के दस्तावेजों से खुलासा: रिपोर्ट में दावा- मोसाद ने ही फर्जी कंपनी बना थमाए वे पेजर-वायरलेस जिनमें हुए धमाके

लेबनान के भीतर लगातार हो रहे धमाकों के चलते हिजबुल्लाह के 800 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। यह खुलासा हिजबुल्लाह के एक खुफिया दस्तावेज से हुआ है। मारे जाने वालों में लेबनान ही नहीं बल्कि ईरान और यमन जैसे देशों के नागरिक शामिल हैं। लेबनान में यह धमाके पेजर, वॉकी-टॉकी और कई अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में हुए हैं। लेबनान में देशव्यापी हमले का आरोप इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर लग रहा है। बताया जा रहा है कि उसने ही हिजबुल्लाह को एक दिन में इतना बड़ा नुकसान पहुँचाया।

हिजबुल्लाह के खुफिया दस्तावेज से पता चला कि इन धमाकों में 879 लोग मारे गए। इन मरने वालों में 131 ईरानी और ​​79 यमनी थे। मरने वालों में 291 वरिष्ठ अधिकारी भी थे। हिजबुल्लाह के पेजरों में यह धमाके कैसे हुए, इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी दी जा रही है।

शुरुआत में कहा गया कि यह पेजर और वॉकी-टॉकी गरम होने के कारण फटे और इनमें इसके लिए एक मैसेज भेजा गया था। वहीं दूसरी तरफ बताया गया कि इन पेजर में 3 ग्राम विस्फोटक छुपाया गया था जिसे एक सिग्नल के द्वारा फोड़ा गया। यह भी बताया गया कि इजरायल ने इन पेजर और वॉकी टॉकी से हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही इनमें गड़बड़ी कर दी थी।

पेजर और वॉकी टॉकी के मामले में मोसाद ने कैसे हिजबुल्लाह को मूर्ख बना दिया और उसका बड़ा नुकसान किया, इसको लेकर अब अमेरिकी अखबार द न्यू यॉर्क टाइम्स (NYT) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। उसकी रिपोर्ट में दावा है कि मोसाद ने हिजबुल्लाह द्वारा खरीदे जाने वाले पेजर के लिए संभवतः एक फर्जी कम्पनी ही खड़ी कर ली और उनके निर्माण के समय उसमे विस्फोटक छुपाए। जब यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँच गए तो उसने धमाका कर दिया।

मोसाद की कंपनी का क्या है मामला?

मंगलवार को जिन पेजरों में विस्फोट हुआ, वे ताइवान की कंपनी गोल्ड अपोलो के हैं। विस्फोट के बाद कंपनी के पेजर मॉडल AR-924 की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कुछ महीने पहले बड़ी संख्या में पेजर खरीदे थे। हालाँकि, गोल्ड अपोलो ने पेजर बनाने की बात से इनकार करते हुए कहा कि यह पेजर हंगरी की कंपनी BAC कंसल्टिंग ने लाइसेंस के तहत बनाए थे।

गोल्ड अपोलो के संस्थापक और CEO सू चिंग-कुआंग ने कहा “उन उपकरणों में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे हमने बनाया था या उन्हें निर्यात किया था।” सू ने कहा कि BAC द्वारा बनाए गए पेजर गोल्ड अपोलो द्वारा बनाए जाने वाले पेजरों से बिल्कुल अलग हैं और कंपनी को केवल ब्रांड नाम का ही लाइसेंस दिया गया है।

NYT की रिपोर्ट में कहा गया है कि बुडापेस्ट में BAC के मुख्यालय से पता चलता है कि यह मोसाद द्वारा स्थापित फर्जी कंपनी के अलावा कुछ नहीं है। NYT ने इजरायली अधिकारियों के हवाले बताया कि मोसाद ने BAC में पेजर बनाने में शामिल लोगों की असली पहचान छिपाने के लिए कम से कम दो और फर्जी कंपनियाँ भी बनाईं।

हंगरी के रिकॉर्ड बताते हैं कि BAC को मई 2022 में एक कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसके लिंक्डइन पेज के अनुसार, यह दूरसंचार, पर्यावरण, विकास और जैसे मामले में सेवाएँ देती है। रिपोर्ट के अनुसार, BAC सामान्य तौर पर काम करती थी, उन्होंने हिजबुल्लाह के अलावा कई ग्राहकों को कई एकदम साधारण पेजर की आपूर्ति भी की।

हंगरी के अनुसार, यह कम्पनी बिचौलिए का काम करती है और हंगरी में इसका कोई कारखाना नहीं है। हंगरी के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ज़ोल्टन कोवाक्स ने एक्स पर पोस्ट किया कि लेबनान में फटने वाले हिजबुल्लाह के पेजर हंगरी में कभी बने ही नहीं।

उन्होंने बताया कि हंगरी जाँच में सभी अंतर्राष्ट्रीय साझेदार एजेंसियों और संगठनों के साथ सहयोग कर रहा हैं। BAC की CEO क्रिस्टियाना बार्सोनी-आर्किडियाकोनो ने भी कहा कि कंपनी ने पेजर नहीं बनाए और वह इनकी सप्लाई के मामले में केवल एक कड़ी का काम कर रही थी।

अभी यह साफ़ नहीं है कि पेजर कहाँ बनाए गए थे, लेकिन यह जरूर मालूम हो गया है BAC को मोसाद के बनाए गड़बड़ पेजर मिले और उसने यह पेजर लेबनान में हिजबुल्लाह को बेच भी दिए। BAC ने 2022 में पेजर की आपूर्ति शुरू की थी, लेकिन हिजबुल्लाह के सरगना हसन नसरल्लाह द्वारा अपने आतंकियों से मोबाइल फोन का उपयोग न करने और बातचीत के लिए पुरानी तकनीक वाले पेजर का उपयोग करने के लिए कहने के बाद इसमें तेजी आई, हिजबुल्लाह का मानना था कि पेजर को हैक नहीं किया जा सकता है।

नसरल्लाह के आदेश को उन रिपोर्टों से और मजबूती मिली, जिनमें कहा गया था कि इजरायल ने दुनिया में कहीं भी किसी भी सेलफोन को ट्रैक करने की तकनीक विकसित कर ली है और वह उस फोन का कैमरा और माइक्रोफोन तक एक्सेस कर सकते हैं।

हिजबुल्लाह और उसके आतंकियों के बीच यह बात फैल गई कि अब कोई भी मोबाइल सुरक्षित नहीं है, यहाँ तक कि एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप भी ट्रैक किए जा सकते हैं। इसके बाद हिजबुल्लाह ने फोन छोड़ पेजर पर आने को कहा। हिजबुल्लाह यहीं गच्चा खा गया और उसे मोसाद वाले पेजर मिले।

BAC को यह आर्डर हिजबुल्लाह से आसानी से मिल भी गया था। इसके दो कारण हो सकते हैं, एक तो कोई आतंकी संगठन को सप्लाई करना नहीं चाहेगा और दूसरा इस बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा भी नहीं है। कोई भी विस्फोटक बनाने में पाँच चीजे- एक कंटेनर, एक बैटरी, एक ट्रिगरिंग डिवाइस, एक डेटोनेटर और एक विस्फोटक चार्ज की ज़रूरत होती है। पेजर या ज़्यादातर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सिर्फ़ पहले 3 घटक होते हैं, इसलिए BAC को सिर्फ़ विस्फोटक और डेटोनेटर जोड़ने की ज़रूरत थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेजर में बैटरी के साथ मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक रखा गय था। इनमें संभवतः 3 से 5 ग्राम PETN या RDX, रखी गई थी। हिज़्बुल्लाह ने लगभग 5000 पेजर खरीदे थे। उन्हें उन्हें लगभग 5 महीने पहले लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों को दिया गया था। फटने से पहले तक, डिवाइस ठीक से काम कर रहे थे, और इनमें छिपे हुए विस्फोटकों का पता नहीं चला था।

इसके बाद मोसाद ने फैसला किया कि अब ऑपरेशन को अंजाम देने का समय आ गया है। हमले वाले दिन हज़ारों पेजर दोपहर में बीप हुए और उन्हने अरबी में एक संदेश प्राप्त हुआ जो हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व द्वारा भेजे गए मैसेज जैसा था। इसके बाद पेजर इकट्ठे गरम होकर फट गए।

पेजर ही नहीं वॉकी टॉकी भी फटे

पेजरों के फटने के एक ही दिन बाद, हिजबुल्लाह जो वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करता था, उनमें भी हजारों विस्फोट हुए। इसमें 25 लोग मारे गए और 1000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। फटने वाले इन वॉकी-टॉकी की तस्वीरें दिखाती हैं कि इनमें से कुछ जापानी रेडियो निर्माता आईकॉम द्वारा बनाए गए थे। हालाँकि, इस कंपनी ने कहा कि उसने एक दशक पहले इस टाइप के मॉडल को बनाना बंद कर दिया था। आईकॉम ने कहा कि वह फिर भी मामले की जाँच कर रही है।

आईकॉम ने ने गुरुवार को बताया कि उसने अक्टूबर 2014 तक अपने आईसी-वी82 टू-वे रेडियो को मध्य पूर्व समेत कई देशों में निर्यात किया था। इसके बाद उसने इस मॉडल को बनाना बंद कर दिया। कंपनी अब डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली बैटरी तक नहीं बनाती। कंपनी ने आगे कहा कि वे यह नहीं बता सकते कि यह उनके हैं भी या नहीं।

अभी यह साफ़ नहीं है कि रेडियो में गड़बड़ी कैसे की गई। यह सामने आया है कि हिजबुल्लाह ने उन्हें सिर्फ पाँच महीने पहले खरीदा था। ऐसे में इस बात की आशंका है कि उनमें भी पेजरों की तरह लेबनान भेजे जाने से पहले गड़बड़ी की गई। यह पता नहीं है कि रेडियो की आपूर्ति बीएसी ने की थी या किसी कंपनी ने। चूंकि इस डिवाइस का उत्पादन एक दशक पहले बंद हो गया था, इसलिए यह संभावना नहीं है कि कहीं यह हजारों की संख्या में पड़े हों।

इस बात की जरूर संभावना है कि पुराने डिवाइस की कॉपी मोसाद द्वारा BAC या किसी और फर्जी कंपनी के माध्यम से हिजबुल्लाह को बेचने के लिए बनाई गई थीं। मोसाद ने यह कॉपी बनाने के दौरान ही उनमें विस्फोटक लगा दिए होंगे और उसके बाद यह हिजबुल्लाह के पास पहुँचे।

टीचर कासिम रेहान ने पहले देखा पोर्न, फिर 3 साल की बच्ची से किया रेप: डाउनलोड कर रखे थे 100+ गंदे वीडियो, भोपाल का स्कूल सील-मान्यता भी होगी रद्द

भोपाल के रेडक्लिफ स्कूल में कासिम रेहान नाम के कंप्यूटर टीचर ने 3 साल की बच्ची के साथ रेप किया, उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि कासिम रेहान के फोन में 100 से ज्यादा पॉर्न क्लिप्स की डाउलोडिंग के सबूत मिले हैं, ये क्लिप्स छोटे बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े थे। इस बीच, प्रशासन ने रेडक्लिफ स्कूल को सील कर दिया है और मान्यता रद्द किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले का मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संज्ञान लिया था और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित कंप्यूटर टीचर कासिम रेहान के मोबाइल डाटा हिस्ट्री में 100 से अधिक पॉर्न क्लिप्स डाउनलोड किए जाने के सबूत मिले हैं। अधिकतर का जुड़ाव बच्चियों के यौन उत्पीड़न से है। पुलिस ने कासिम रेहान के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

बच्ची पर नजर रख रहा था कासिम

आरोपित कासिम रेहान ने पूछताछ में बताया है कि फोन में पॉर्न क्लिप देखा करता था। उसने पॉर्न क्लिप देखने के दौरान ही ध्यान दिया कि बच्ची वॉशरूम की तरफ आ जा रही है और वो तुरंत उसके पीछे चला गया और बच्ची का उसने उत्पीड़न किया। कासिम ने बताया कि वो 4-5 दिनों से बच्ची पर नजर रख रहा था। उसने यौन उत्पीड़न के बाद बच्ची को धमकाया भी था कि वो किसी से कुछ न कहे। इसके लिए उसने बच्ची को चॉकलेट का लालच भी दिया था।

एसआईटी ने दर्ज किया पीड़ित का बयान

इस मामले में एसपीपी-महिला सुरक्षा और एसआईटी की हेड निधि सक्सेना ने कहा, “गुरुवार (19 सितंबर 2024) को बच्ची और उसके माता-पिता का बयान दर्ज किया गया है। बच्ची को काउंसिलिंग दी जा रही है। इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा रहा है।”

स्कूल हुआ सील, मान्यत होगी रद्द

भोपाल के जिस स्कूल में रेप कांड हुआ है, उसे सील कर दिया गया है। टीटी नगर की एसडीएम कहा है कि स्कूल की मान्यता भी रद्द की जाएगी, इसके लिए कार्रवाई का जा रही है। इस बीच, स्कूल के बाहर पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। टीटी नगर के एसीपी चंद्र शेखर पांडेय ने कहा कि स्कूल को सील कर दिया गया है।

इस मामले की जाँच के लिए भोपाल के कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने एसआईटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की जाँच कर रही है। इस एसआईटी में टीटीनगर की एसडीएम डॉ अर्चना शर्मा, महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुनील सोलंकी, जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार और शिक्षा केंद्र के जिला समन्वयक ओम प्रकाश शर्मा शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोपाल के कमलानगर थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली साढ़े 3 साल की पीड़िता सोमवार (16 सितंबर 2024) को अपने घर पहुँची। पीड़िता की माँ को बेटी की तबीयत ठीक नहीं लगी। उसने जाँच की तो उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिखा। जब माँ ने बेटी से इसकी वजह पूछी तो असलियत सामने आई। बच्ची ने टीचर कासिम रेहान की करतूत बताई।

कासिम रेहान स्कूल में आईटी का टीचर है। इसके बाद बच्ची के माता-पिता स्कूल पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रिंसिपल व मैनेजमेंट सहित अन्य स्टाफ से कासिम की करतूत बताई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि उनकी शिकायत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही कासिम के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

जिस IAMC के लश्कर जैसे आतंकी संगठन से लिंक, वह अमेरिका के हिंदुओं को बता रहा ‘असहिष्णु-इस्लामोफोबिक’: 950 लोगों के सर्वे से चलाया प्रोपेगेंडा

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) ने एक बार फिर से हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को बढ़ाने वाला काम किया है। वॉशिंगटन स्थित इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने हिंदू अमेरिकियों को बदनाम करने की कोशिश में एक सर्वे प्रकाशित किया है, जिसका उद्देश हिंदू अमेरिकियों को ‘जातिवादी’, ‘असहिष्णु’ और ‘इस्लामोफोबिक’ बताना है। IAMC वाशिंगटन स्थित एक इस्लामवादी समूह है, जिसका अतीत आतंकवादी संगठनों से जुड़ा रहा है।

इस रिपोर्ट में हम IAMC के सर्वेक्षण (पीडीएफ) के पीछे की सच्चाई को उजागर करेंगे और इसके प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

IAMC का सर्वेक्षण

IAMC ने भारतीय मूल के मुसलमानों पर एक सर्वेक्षण किया, जिसमें केवल 950 लोगों का चयन किया गया। यह संख्या बहुत कम है, जो कि कुल 2.41 लाख भारतीय मूल के मुसलमानों का केवल 0.003% है।

IAMC सर्वेक्षण रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

IAMC का यह सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि कैसे हिंदू राष्ट्रवाद का उभार भारतीय मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव का कारण बना है। हालाँकि वो पहले भी ऐसी भ्रामक रिपोर्ट्स प्रकाशित करता रहा है।

IAMC ने दावा किया, ‘अधिकांश उत्तरदाताओं ने पिछले दशक में हिंदू मित्रों या सामाजिक संपर्कों से भेदभाव का अनुभव किया।’ हालाँकि, इस रिपोर्ट में कोई ठोस उदाहरण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह केवल सांकेतिक और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है, जो वास्तविकता को दर्शाने में असफल है।

IAMC के सर्वेक्षण में व्यक्त की गई धारणाएँ भ्रामक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरदाताओं ने सामाजिक और व्यावसायिक सेटिंग में भेदभाव का अनुभव किया। लेकिन जब हम इस दावे की गहराई में जाते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि IAMC ने सिर्फ भावना को ‘सत्य’ के रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए, उत्तरदाताओं ने सोशल मीडिया पर उत्पीड़न की घटनाओं का उल्लेख किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये उत्पीड़न हिंदू अमेरिकियों द्वारा थे या अन्य किसी धार्मिक पृष्ठभूमि से संबंधित थे।

सर्वेक्षण में कई प्रश्न ऐसे थे जो भारतीय राजनीति को अमेरिका में मुसलमानों के अनुभवों से जोड़ते थे। उदाहरण के लिए, IAMC ने पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों को अमेरिकी सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक या कम आरामदायक महसूस होता है। यह प्रश्न पूर्वाग्रह से भरा हुआ है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है।

समुदायों के बीच झगड़े को बढ़ावा देना

IAMC ने अपने सर्वेक्षण में दावा किया है कि 94% उत्तरदाताओं ने कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरा है। यह दावा पूरी तरह से संदिग्ध है। IAMC ने जानबूझकर ईसाई समुदाय का समर्थन पाने की कोशिश की है, जिससे हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाया जा सके। यह स्पष्ट है कि IAMC का उद्देश्य मुसलमानों को एकजुट करना और हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देना है। सर्वेक्षण का उद्देश्य यह दिखाना था कि हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है।

इस सर्वेक्षण में कई प्रश्न ऐसे थे जो अमेरिकी सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में मुसलमानों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते थे। उदाहरण के लिए, IAMC ने पूछा कि क्या 2014 में नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों को अमेरिकी सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक या कम आरामदायक महसूस होता है। यह प्रश्न पूरी तरह से पक्षपाती और पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, क्योंकि यह एक देश की राजनीति को दूसरे देश की सांस्कृतिक धाराओं के साथ जोड़ने का प्रयास करता है।

इस सर्वेक्षण में IAMC ने कई व्यक्तिगत धारणाओं को ‘सत्य’ के रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए, उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये उत्पीड़न हिंदू अमेरिकियों द्वारा थे या अन्य धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों द्वारा।

आईएएमसी ने आरोप लगाया, “डिजिटल प्लेटफॉर्म भेदभाव के केंद्र बन गए हैं, 48% उत्तरदाताओं ने फेसबुक, व्हाट्सएप और लिंक्डइन सहित सोशल मीडिया पर उत्पीड़न की रिपोर्ट की है। उत्तरदाताओं ने इन अनुभवों को भावनात्मक रूप से थका देने वाला बताया, जिससे अलगाव और शत्रुता की भावना बढ़ती है।”

सामाजिक और पेशेवर स्तर पर भेदभाव का दुष्प्रचार

IAMC ने यह भी कहा कि 70% उत्तरदाताओं ने पेशेवर सेटिंग में भेदभाव का अनुभव किया। लेकिन इसमें भी कोई ठोस प्रमाण नहीं है। नौकरी से निकाले जाने या पदोन्नति न मिलने के मामलों में IAMC ने हिंदू प्रबंधन को दोषी ठहराने का प्रयास किया। यह एक अत्यधिक सामान्यीकरण है, क्योंकि कार्यक्षेत्र में कई कारक होते हैं, जैसे कि नौकरी के प्रदर्शन, अन्य बेहतर उम्मीदवारों की उपलब्धता, आदि।

IAMC का सर्वेक्षण सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने का काम करता है। यह संगठन जानबूझकर ईसाई समुदाय का समर्थन पाने की कोशिश कर रहा है ताकि हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाया जा सके। इससे समुदायों के बीच घृणा बढ़ सकती है।

एजेंडा के तहत हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश

IAMC ने अपनी ‘सर्वेक्षण रिपोर्ट’ में बड़े पैमाने पर कुछ खास शब्दों का जमकर इस्तेमाल किया है, जिसमें हिंदू राष्ट्रवाद (64 बार), भारत (35 बार), हिंदुत्व (16 बार), भाजपा (8 बार), आरएसएस (5 बार) जैसे शब्द हैं। ये शब्द 24 पन्नों की रिपोर्ट में बहुत बार आए। इसके साथ बी इसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और यह कैसे “संभावित रूप से अपने मुस्लिम नागरिकों को वंचित करने” की एक चाल है, के बारे में भी व्यापक झूठे दावे किए गए हैं। हालाँकि इस सर्वे में दिलचस्प बात ये निकलकर आई कि भारत में उत्पन्न ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ का रोना रोने वाले मुस्लिमों में से 92% ने आस्था (अर्थात इस्लाम) को ‘बहुत महत्वपूर्ण’ बताया।

इस सर्वे में शामिल एक व्यक्ति ने IAMC को बताया कि हिंदू राष्ट्रवाद ने उसे और उसके परिवार को प्रभावित किया है, लेकिन उसने इस बारे में विस्तार से बताने की ज़हमत नहीं उठाई। दूसरे ने दावा किया कि उसने कथित “बीजेपी सरकार द्वारा फैलाए गए इस्लामोफोबिया और नफ़रत” के कारण अच्छे और पुराने दोस्तों को खो दिया।

वैसे, सिस्को से जुड़े ऐसे ही मामले में सारे आरोप खारिज हो चुके हैं, जिसमें जातिगत भेदभाव के आरोप लगे थे।

IAMC का उद्देश्य और आतंकवाद से जुड़ाव

IAMC एक इस्लामिक संगठन है, जो भारतीय मूल के मुसलमानों के अधिकारों की बात करता है। लेकिन इसके दावे और गतिविधियाँ संदिग्ध हैं। यह संगठन आतंकवादी समूहों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, सिमी और जमात-ए-इस्लामी से जुड़ा हुआ है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के अपने संस्थापक शेख उबैद के माध्यम से लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के साथ संबंध हैं।

IAMC की गतिविधियाँ अक्सर भारत और भारतीय हिंदुओं के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने पर केंद्रित होती हैं। इसकी गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से इस्लामवादी एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।

IAMC ने अन्य अमेरिकी समूहों के साथ मिलकर भारत को यूएससीआईआरएफ (अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर USA का आयोग) की काली सूची में डलवाने के लिए अभियान चलाया था और काफी धन भी खर्च किया था, लेकिन वो बुरी तरह से फेल रहा था। IAMC पर इस्लामिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और फर्जी खबरें फैलाने का भी आरोप है, जिसकी वजह से साल 2021 में इस पर UAPA के तहत कार्रवाई भी की गई थी।

IAMC का यह नया सर्वेक्षण भी हिंदू अमेरिकियों को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित प्रयास है। इसके परिणाम और दावे संदेहास्पद हैं और सच्चाई से बहुत दूर हैं। भारतीय मूल के मुसलमानों के अनुभवों को इस तरह से प्रस्तुत किया गया है कि यह हिंदू अमेरिकियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा दे सके। इस प्रकार के भ्रामक सर्वेक्षणों से हमें सावधान रहना चाहिए और वास्तविकता को समझने के लिए तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

मूल लेख अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

तिरुपति के बीफ वाले लड्डू के बाद ‘सनातन धर्म रक्षा बोर्ड’ की माँग ने पकड़ा जोर, आंध्र प्रदेश के डिप्टी CM पवन कल्याण ने भी किया समर्थन: कहा- एकजुट हो हिंदू

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद की पवित्रता के साथ हुई छेड़छाड़ का मामला अब पूरे देश में चर्चा का कारण है। हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने पर हर कोई चाहता है कि मामले में अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। इस क्रम में मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण को टैग करके न्याय माँगा जा रहा है।

सीएम नायडू ने कल ही इस मामले में बता दिया था कि सरकार के संज्ञान में मामला आने के बाद मंदिर में शुद्ध घी की व्यवस्था की गई है। वहीं डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने इस मामले में ट्वीट पर लिखा- “पिछली सरकार के कार्यकाल दौरान, तिरुपति बालाजी प्रसाद में पशु मेद (मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ़ वसा) मिलाए जाने की बात के संज्ञान में आने से हम सभी अत्यंत विक्षुब्ध हैं। तत्कालीन वाईसीपी (YCP) सरकार द्वारा गठित टीटीडी (TTD) बोर्ड को कई सवालों के जवाब देने होंगे! इस सन्दर्भ में हमारी सरकार हर संभव सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह समूचा प्रकरण मंदिरों के अपमान, भूमि संबंधी मुद्दों और अन्य धार्मिक प्रथाओं से जुड़े कई मुद्दों पर चिंतनीय प्रकाश डालता है। अब समय आ गया है कि पूरे भारत में मंदिरों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अविलंब ‘सनातन धर्म रक्षा बोर्ड’ का गठन किया जाए।”

उन्होंने कहा, “सभी नीति निर्माताओं, धार्मिक प्रमुखों, न्यायपालिका, आम नागरिकों, मीडिया और अपने-अपने क्षेत्रों के अन्य सभी दिग्गजों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर एक सार्थक बहस होनी चाहिए। मेरा मानना है कि हम सभी को किसी भी रूप में ‘सनातन धर्म’ के अपमान को रोकने के लिए अविलंब एक साथ आना चाहिए।”

बता दें कि तिरुपति के प्रसाद में हुई गड़बड़ी को लेकर तिरुमाला मंदिर के पूर्व पुजारी रमना दीक्षितुलु ने भी राय रखी है। उन्होंने कहा, “प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गाय के घी में बहुत सारी अशुद्धियाँ थीं और यह घटिया क्वालिटी का था। मैंने कई साल पहले इस पर ध्यान दिया था। मैंने इसे संबंधित अधिकारियों और ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के सामने रखा था। लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।”

पूर्व पुजारी बोले- “पहले ये मेरे लिए अकेले की लड़ाई थी, लेकिन अब, नई सरकार ने सत्ता संभाली है और उसने सारी अशुद्धियाँ साफ करने का वादा किया है। उन्होंने पहले ही सरकारी डेयरियों से शुद्ध गाय का घी खरीद लिया है और वे अब शुद्ध घी से खाद्य सामग्री तैयार कर रहे हैं। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इस तरह के महान पाप मंदिर में न दोहराए जाएँ, जो एक पवित्र मंदिर है जिसमें करोड़ों भक्तों की गहरी आस्था और भक्ति है।”

हरियाणा में वही ‘रेवड़ी मॉडल’ लेकर आई कॉन्ग्रेस, जिसने कर्नाटक-हिमाचल की अर्थव्यवस्था को किया तबाह: कब आर्थिक प्रबंधन सीखेंगे राजनीतिक दल?

देशां में देश हरियाणा, जित दूध-दही का खाना! इस वाक्य से देश भर में प्रसिद्ध राज्य हरियाणा में दूध-दही के साथ ही रेवड़ियों की आमद भी हो गई है। यह रेवड़ियाँ खाई तो नहीं जा सकतीं लेकिन बाँटी जरूर जा सकती हैं। हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा और कॉन्ग्रेस ने कमर कस ली है और अपने-अपने पत्ते भी खोल दिए हैं। इस बार की चुनावी लड़ाई में हर अनुमान में मजबूत दिखने वाली कॉन्ग्रेस ने हरियाणा की जनता से कई ‘गारंटी’ वादे कर दिए हैं।

कॉन्ग्रेस यही प्रयोग हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में कर चुकी है और उसे चुनावी फ्रंट पर सफलता भी मिली थी। लेकिन चुनावों के कुछ ही महीने के बाद जहाँ कर्नाटक में विकास के सब काम रोक कर गारंटी का ही भरण पोषण करने में राज्य की अर्थव्यवस्था हांफने लगी तो वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो खुद ही आर्थिक बदहाली का रोना रो दिया। लेकिन कॉन्ग्रेस इसके बाद भी नहीं सुधरी, उसने वैसा ही घोषणा पत्र एक बार फिर हरियाणा के लिए तैयार कर दिया है।

क्या हैं हरियाणा के लिए कॉन्ग्रेस के वादे

कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में हर वर्ग को लुभाने के लिए बड़े-बड़े सपने दिखाए हैं। कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में सरकार बनने पर पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा उसने कहा है कि वह हर परिवार को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देगी। इसके अलावा उसने कहा है कि वह ₹25 लाख तक की इलाज योजना भी लाएगी। हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने नकद फायदे देने की बात भी दोहराई है। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि वह हर महिला को ₹2000 देगी। उसने वृद्धावस्था पेंशन को भी ₹6000 करने का वादा किया है। गरीबों को जमीन भी कॉन्ग्रेस देगी।

सब जान कर भी अनजान बन रही कॉन्ग्रेस

हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने जो वादे किए हैं, उनका अर्थव्यवस्था पर क्या फर्क होगा इस बात से कॉन्ग्रेस अनजान नहीं है। वह ऐसे ही वादे और राज्यों में करके भूल चुकी है या फिर इनकी वजह से राज्य आर्थिक कंगाली के दौर में आ गए हैं। सबसे पहले पुरानी पेंशन का मुद्दा ही उठा लिया जाए तो इसे कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में लागू किया है। इसकी वजह से राज्य की कर्ज लेने की क्षमता घट गई है और सितम्बर में हाल यह हो गया कि सुक्खू सरकार समय से कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं दे पाई।

वहीं अगर मुफ्त बिजली का वादा देखा जाए तो इसमें भी कॉन्ग्रेस हिमाचल में फेल हो गई। उसने यहाँ भी 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाई। इसके उलट उसने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दिए जाने वाली योजना भी बंद कर दी। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने भी मुफ्त बिजली योजना चालू की, इसका परिणाम यह है कि पंजाब आज देश में सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में से एक है। इसके बाद बात आती है मुफ्त इलाज योजना की। हिमाचल में ही कॉन्ग्रेस सरकार ने हिमकेयर नाम की ऐसी ही एक योजना पर ग्रहण लगा दिया।

अगर महिलाओं को ₹1500 या ₹2000/महीना देने की बात की जाए तो इस वादे को भी हिमाचल में पूरा नहीं किया गया। कर्नाटक में इस वादे समेत मुफ्त बिजली के लिए बाकी सारे विकास काम रोक दिए गए। इसके बाद मुद्दा आता है फ्री जमीन देने का। 2014 से पहले हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। उस दौरान भी यही योजना चलाई गई थी जिसमें गरीबों को आवासीय भूखंड दिए गए थे। इस योजना में एक जगह एक ही परिवार को 129 भूखंड दे दिए गए थे। इसके अलावा भूपिंदर हुड्डा की सरकार के जाने का एक बड़ा कारण जमीन घोटाले ही थे।

पहले भी रेवड़ी कर चुकी हैं नुकसान

कॉन्ग्रेस ने इससे पहले हिमाचल और कर्नाटक में ऐसे ही वादे किए। दोनों जगह उसे सफलता मिली। कर्नाटक में उसने आते ही पाँच गारंटियों को लागू करने की कवायद चालू कर दी। लेकिन उसके इस चुनावी वादे का बोझ राज्य के दलितों और जनजातियों पर आ गया। कॉन्ग्रेस सरकार ने 2023-24 और 2024-25 में दलितों के लिए दिए जाने वाले विकास फंड में से पैसा अपनी गारंटी पूरी करने को निकाल लिया। 2024-25 में उसने दलितों-जनजातियों पर खर्च होने वाले ₹14000 करोड़ गारंटियों की तरफ मोड़ दिए।

हरियाणा में बड़े बड़े वादे करने वाली कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में अपनी इन्हीं गारंटियो को पूरा करने के चक्कर में साफ़ कह दिया था कि अब विधायक कोई विकास कार्य ना माँगे। इसके लिए फंड ना होने की बात कही गई थी। कर्नाटक में गारंटियों का खर्चा 2024-25 में ₹50000 करोड़ के पार पहुँच गया है। वहीं हिमाचल में आधे से अधिक गारंटियाँ लागू ही नहीं हुई और जो हुईं भी उनके कारण राज्य का भट्ठा बैठ गया और वह आर्थिक संकट में है। अब हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार तनख्वाह ना लेकर इसे ठीक करना चाहती है।

हरियाणा को इन रेवड़ियों से क्या नुकसान

हरियाणा में यदि कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आती है और इन वादों को पूरा करती है तो इसका राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में हरियाणा देश में आर्थिक तौर पर मजबूत राज्यों में से एक है। हरियाणा का राजकोषीय घाटा अभी 3% से कम है। यह सीमा के भीतर है। हरियाणा का कर्ज भी अभी विशेष अधिक नहीं है। लेकिन अगर राज्य यह सभी योजनाएँ लागू करता है तो उसे एक मोटी धनराशि इस पर खर्चनी होगी जिससे राज्य का हिसाब-किताब बिगड़ेगा।

रेवड़ी-रेवड़ी में है अंतर

कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए चुनावी वादों की आलोचना पर सवाल उठता है कि बाकी पार्टियाँ भी यही कर रही हैं। लोग प्रश्न पूछते हैं कि केंद्र सरकार भी कई जगह सब्सिडी देती है और कई मामलों में नकद लाभ भी देती है। इसके लिए हमें यह समझने की जरूरत है कि असल में मदद की जरूरत किसे है। भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है और सरकार को अवश्य कमजोर तबके की मदद करनी चाहिए। लेकिन यदि यह व्यवस्थित ढंग से उन लोगों को की जाए जो सही में इसके जरूरतमंद हैं, तब इसका सही फायदा है।

मोदी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में लक्ष्य आधारित सब्सिडी पर जोर दिया है। इसके तहत उन्हीं तबकों को मदद मिलती है, जो इसके जरूरतमंद हैं। इसका उदाहरण किसान सम्मान निधि है। इसके तहत केवल छोटे किसान ही इसका लाभ पाते हैं। इससे अर्थव्यवस्था पर बोझ भी कम होता है और अपात्र लोग भी बाहर हो जाते हैं।

दूसरी पार्टियाँ भी हैं दोषी

ऐसा नहीं है कि हरियाणा में केवल कॉन्ग्रेस ने ही ऐसे वादे किए हैं। वर्तमान में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने भी कुछ-कुछ यही वादे अपने मेनिफेस्टो में शामिल किए हैं। नॉनस्टॉप हरियाणा संकल्प पत्र नाम से जारी किए गए मेनिफेस्टो में भाजपा ने भी महिलाओं को ₹2100/महीने, हर छात्रा को स्कूटी समेत कई लुभावने वादे किए हैं।

ऐसे में भाजपा भी राज्य की आर्थिकी को लेकर पूरी तरह गंभीर है, यह बात नहीं कही जा सकती। लेकिन मुद्दा यह है कि भाजपा के पास कोई और रास्ता भी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आपका मुख्य विपक्षी दल ऐसे वादे करके जनता को लुभा रहा हो, तो आप एकदम विपरीत राह नहीं पकड़ सकते। भले ही आप ₹100 के सामने ₹75 का वादा करें, लेकिन शून्य पर तो नहीं जा सकते।

रेवड़ी वाली इस बीमारी का इलाज केवल दो रास्तों से हो सकता है। पहला यह कि चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट इस बात को जरूरी कर दे कि पार्टियाँ वादे करने के साथ ही उन्हें पूरा कैसे करेंगी, इस बात का ब्यौरा दें या फिर सभी राजनीतिक दलों में एक आपसी सहमति बने। पहला रास्ता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मुश्किल है और दूसरा असंभव लगता है। हरियाणा की अर्थव्यवस्था आगे किस हाल में होगी, यह वहाँ का वोटर तय करने जा रहा है। कोई भी पार्टी जीते, रेवड़ी प्रथा अर्थव्यवस्था के लिए कभी ठीक नहीं कही जा सकती।

मनी लॉन्ड्रिंग-टेरर फंडिंग से मोदी सरकार की लड़ाई का मुरीद हुआ FATF, कहा- ED-NIA के काम शानदार: बताया इस्लामी हो या वामपंथी आतंकवाद, सबसे भारत को खतरा

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की सराहना की गई है, खासकर एनआईए और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के कामों को शानदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने और जटिल वित्तीय जाँचों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस्लामिक आतंकवाद, जैसे कि ISIL और अल-कायदा, के साथ ही वामपंथी उग्रवाद को भी भारत के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। FATF ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेजी लाने और गैर-लाभकारी संगठनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए और कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है।

इस्लामी आतंकवाद बड़ा खतरा

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में इस्लामी आतंकवाद को भारत के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से गंभीर रूप से प्रभावित है, खासकर जम्मू-कश्मीर और इसके आसपास सक्रिय ISIL (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और लेवांत) और अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठनों से। ये संगठन लगातार भारत की सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद से निपटने के प्रयासों की प्रशंसा की गई है, खासकर आतंकवादी नेटवर्क को बाधित करने और रोकने के लिए। भारत ने जटिल वित्तीय जाँचों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिससे आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर रोक लगाने में मदद मिली है। हालाँकि, FATF ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत को आतंकवादियों के वित्तीय मामलों की सुनवाई और अभियोजन में तेजी लानी चाहिए। आतंकवादी वित्तपोषण के मामलों में दोषसिद्धि और सख्त दंड सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

रिपोर्ट में गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी ध्यान आकर्षित किया गया है। इस्लामी आतंकवादी समूह अक्सर इन संगठनों के जरिए वित्तपोषण प्राप्त करते हैं। FATF ने सुझाव दिया है कि भारत को जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर इस सेक्टर में जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके।

लेफ्ट विंग टेररिज्म: भारत की चुनौती

इस रिपोर्ट में FATF ने कहा है कि भारत के सामने उभरते हुए आतंकवाद के विभिन्न आयामों में से एक प्रमुख खतरा लेफ्ट विंग आतंकवाद (वामपंथी उग्रवाद) है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है। रिपोर्ट में खासतौर पर लेफ्ट विंग समूहों का जिक्र किया गया है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले माओवादी या नक्सलवादी समूह, मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सक्रिय हैं। इन समूहों का मुख्य उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गिराकर एक वैकल्पिक कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना करना है। लेफ्ट विंग आतंकवाद का सबसे प्रमुख और चिंताजनक पहलू यह है कि यह न केवल सुरक्षा बलों के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि आम नागरिकों और विकासात्मक परियोजनाओं को भी निशाना बना रहा है। इन उग्रवादी समूहों का मुख्य वित्तपोषण अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, और हथियारों के अवैध व्यापार से होता है।

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि लेफ्ट विंग समूह भारत सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उन्हें उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे हैं। यह समूह न केवल हिंसा का सहारा ले रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं, जिसके चलते इनके खिलाफ लड़ाई और भी कठिन हो जाती है।

FATF की रिपोर्ट में लेफ्ट विंग समूहों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि माओवादी और नक्सलवादी समूह न केवल आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। इन समूहों की मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों पर भी निगरानी की गई है और FATF ने इस पर चिंता जताई है कि ये समूह किस तरह से अपने वित्तपोषण को छिपाने के लिए जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘समाधान’ योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना और उग्रवादियों का आत्मसमर्पण कराना है। इसके तहत प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है ताकि माओवादी हिंसा से निपटा जा सके।

विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण करके वहाँ के नागरिकों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने न केवल सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस किया है ताकि वे उग्रवादियों का सामना कर सकें। साथ ही, भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ाया है ताकि आतंकवादी वित्तपोषण पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

लेफ्ट विंग आतंकवाद भारत के सामने एक गंभीर समस्या है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास दोनों को बाधित कर रहा है। FATF की रिपोर्ट में इस खतरे को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है, जिसमें माओवादी और नक्सलवादी समूहों की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खतरनाक बताया गया है। भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

FATF की सिफारिशों का पालन करते हुए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला वित्तपोषण पूरी तरह से बंद हो सके। साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज करना भी जरूरी है, ताकि वहां के लोग उग्रवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ सकें। भारत के लिए लेफ्ट विंग टेररिज्म को खत्म करना न केवल आंतरिक सुरक्षा का सवाल है, बल्कि यह देश के विकास और समृद्धि के लिए भी जरूरी है।

FATF क्या है?

FATF (Financial Action Task Force) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 1989 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए प्रभावी नीतियों का निर्माण करना है। FATF की रिपोर्टें और सिफारिशें दुनियाभर के देशों को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। FATF की रिपोर्टें समय-समय पर जारी की जाती हैं, जिनमें विभिन्न देशों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का मूल्यांकन किया जाता है। यह संगठन विशेष रूप से यह देखता है कि कौन-कौन से देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में सक्षम हैं और किस हद तक वे इन गतिविधियों को काबू करने में सफल हुए हैं।

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद विरोधी कदमों की तारीफ की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कानून बनाए हैं और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की है। विशेष रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए भारत ने विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं। भारत के एनआईए (National Investigation Agency) और ईडी (Enforcement Directorate) जैसे एजेंसियों ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखी है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई और फैसलों में देरी हो रही है। FATF ने भारत से इस प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया है ताकि आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण को पूरी तरह से बंद किया जा सके।

‘100 करोड़ लोगों ने खाया बीफ वाला लड्डू, मजा आ गया’: तिरुपति के प्रसाद पर कॉन्ग्रेस समर्थक ने हिंदुओं का उड़ाया मजाक, कहा- अब दूसरे की प्लेट में मत झाँकना

तिरुपति मंदिर के पवित्र प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी मिली होने की बात सामने आने के बाद कथिततौर पर कॉन्ग्रेस समर्थक व सोशल मीडिया के पोस्टों से जाहिर होते हिंदू विरोधी, पीयूष मानुष ने हिंदुओं का मजाक उड़ाया है। पीयूष ने अपनी वीडियो में कहा कि 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे, क्या उन्हें बीफ पसंद आया।

पीयूष ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए हिंदुओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “क्या तुमको अच्छे लड्डू मिले?… इतने दिनों तक तुम दूसरों की प्लेट देखते रहे कि कहीं वो बीफ तो नहीं खा रहे, तुमने उनके टिफिन चेक किए, उनके रेफ्रिजरेटर भी चेक किए, उन्हें मार भी डाला। अब कम से कम 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे। उन्हें लड्डू मिले होंगे। क्या हुआ? अब तुमको बीफ अच्छा लगा? मजा आया? तुम्हारा काम हो गया। कम से कम अब दूसरे की प्लेट तो मत देखिए। जाओ अपना काम करो। पेरुमल ने खुद आपको अच्छे लड्डू दिए हैं।”

पीयूष की ये वीडियो ऐसे समय में सामने आई है जब हाल में प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर खुलासा किया और जाँच रिपोर्ट से पता चला कि उसमें मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ आदि है। इस जानकारी के सामने आते ही बवाल शुरू हो गया।

हिंदुओं ने सोशल मीडिया पर विरोध करते हुए कहना शुरू किया कि जो कोई भी इस घृणित पाप का भागीदार था उन्हें भगवान वेंकटेश्वर कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की गई। कहा गया कि ये मामला साफ तौर पर हिंदू घृणा से जुड़ा है। हिंदुओं की आस्था को जानबूझकर ठेस पहुँचाया गया है।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

गौरतलब है कि गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में लिखा था- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहू के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है।

पोर्न दिखाकर बच्चियों का यौन शोषण करता था मौलवी शब्बीर, शिकायत वापस लेने के लिए उसके समर्थकों ने किया हमला: रुद्रपुर की अवैध मस्जिद में नाबालिग से रेप के बाद हुआ था गिरफ्तार

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में पिछले माह मौलवी से जुड़ा घिनौना मामला सामने आया था, जिसमें रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव में मौलवी शब्बीर रजा हुसैन छोटी-छोटी बच्चियों को पॉर्न दिखाता था और उनका यौन शोषण करता था। करीब आधा दर्जन बच्चियों के साथ वो ऐसी हरकतें करता था, जिसकी शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन यूपी के पीलीभीत का रहने वाला है। अब पता चला रहा है कि मलसी गाँव में मौलवी की शिकायत करने वालों के खिलाफ मौलवी के समर्थकों ने हमला बोल दिया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई है, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव की मस्जिद में अवैध रूप से मदरसा चलाने वाले मौलवी शब्बीर रजा हुसैन की शिकायत करने वाले नबी हसन व अन्य लोग थे। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन पर 6 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद से वो जेल में है।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, मंगलवार (17 सितंबर 2024) की रात मौलवी के समर्थन में मोहम्मद खुर्शीद और अन्य लोगों ने काफी विवाद किया और मौलवी की शिकायत करने वालों पर हमला कर दिया। इस मामले में देर रात तक दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। घायलों में मोहम्मद यूनुस, शाहिद अहमद और कबीर अहमद का नाम है, जिन्हें रुद्रपुर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मोहम्मद खुर्शीद और उसके साथी चाहते थे कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन के खिलाफ की गई पुलिस शिकायत वापस ली जाए, लेकिन पीड़ित परिवारों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद खुर्शीद और उसके साथियों ने हमला कर दिया। इस दौरान 4-5 राउंड फायरिंग की भी बात सामने आई है।

एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ निहारिका तोमर समेत पुलिस के कई अधिकारियों ने अस्पताल पहुँचकर घायलों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और गाँव में पुलिस और पीएसी की टीम को तैनात कर दिया। पुलिस ने ही घायलों को रुद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि इस घटना में खुर्शीद पक्ष के लोग भी घायल हुए, लेकिन वो ईलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुँचे।

एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मलसी में विवाद हुआ था। इस दौरान फायरिंग भी हुई है, घटना में दोनों ही पक्ष के सात लोग घायल हुए हैं। दावा ये भी किया जा रहा है कि हमले की तैयारी पहले से थी, इसलिए खुर्शीद की तरफ से बाहर से भी लोग आए थे, जो हमले में शामिल हुए थे।

गौरतलब है कि 16 अगस्त 2024 को रुद्रपुर में हड़कंप मच गया था, जब मौलवी की करतूतें सामने आई थी। शुरुआत में पता चला था कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन ने 8 साल की बच्ची को पॉर्न दिखाकर गलत हरकत की है, लेकिन जाँच में पता चला कि उसने आधा दर्जन बच्चियों को अल्लाह का डर दिखाकर ऐसा काम किया था। मौलवी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन उसके समर्थक चाहते हैं कि उसके खिलाफ की गई शिकायतें वापस ली जाए, इसीलिए घटना के एक माह बाद मौलवी के समर्थकों ने पीड़ितों पर हमला कर दिया।

बदला लेने की धमकी दे रहा था हिजबुल्लाह, इजरायल ने लेबनान के आसमान से बरसा दी आफत: 1000 रॉकेट लॉन्चर किए नष्ट, पेजर- वाकी टॉकी ब्लास्ट के बाद नई तबाही

इजरायल ने लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह से जुड़े आतंकियों के पेजर और बाकी डिवाइस उड़ाने के बाद अब सीधा हमला बोला है। इजरायल ने लेबनान के भीतर हवाई हमले किए हैं और हिजबुल्लाह के हजारों रॉकेट तबाह कर दिए हैं। तिलमिलाए हिजबुल्लाह ने बदला लेने की बात कही है।

इजरायल ने गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को दक्षिणी लेबनान में यह हमले किए। इजरायल ने इस इलाके में हमले के लिए तैयार रखे गए हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया। इजरायल के इस हमले में हिजबुल्लाह के कम से कम 1000 रॉकेट तबाह हो गए।

हिजबुल्लाह पर हुए इस हमले ने उसकी इजरायल को निशाना बनाने की ताकत पर काफी असर डाला है। इजरायल ने जिन रॉकेट को निशाना बनाया है, उनको हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले के लिए एकदम तैयार रखा था। हिजबुल्लाह किसी भी समय उनको इजरायल के भीतर लॉन्च करने वाला था।

इजरायल ने यह कारनामा मात्र 20 मिनट में कर दिया। स्थानीय मीडिया ने बताया है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास और इजरायल के बीच चालू हुए युद्ध के बाद यह हिजबुल्लाह पर सबसे बड़ा हमला है। हिजबुल्लाह, हमास के समर्थन में लेबनान की तरफ से इजरायल पर रॉकेट छोड़ता रहा है।

हिजबुल्लाह पर हमले के बारे में इजरायली सेना ने बताया, “IDF वर्तमान में लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला कर रही है ताकि उसकि आतंकी क्षमताओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सके। दशकों से, हिज़्बुल्लाह ने घरों में हथियार छुपाए हैं, उनके नीचे सुरंगें खोदी हैं और आम जनता को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया है, इससे दक्षिणी लेबनान युद्ध के मैदान में बदल गया है। IDF इजरायल में सुरक्षा लाने के लिए काम कर रही है ताकि लोगों को उनके घरों में वापस लौटने में सक्षम बनाया जा सके।”

इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट तबाह करने के अलावा कई इमारतों पर भी हमला कर उन्हें तबाह कर दिया। यह हिजबुल्लाह के ठिकाने थे। हिजबुल्लाह को इससे बड़ा नुकसान पहुँचा है। इजरायल के यह हमले ऐसे समय में सामने आए हैं लेबनान के भीतर जगह-जगह हजारों धमाके हो रहे हैं।