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‘अंबानी का ‘एंटीलिया’ वक्फ का, PM मोदी का आदमी मुझसे मिलने आया’: जाकिर नाइक ने पाकिस्तानी यूट्यूबर के पॉडकॉस्ट में जमकर बोला झूठ, समझे कैसे सारे दावे मनगढ़ंत

जाकिर नाइक, जो एक समय मजहबी उपदेशक के रूप में जाना जाता था, अब भारत में भगौड़ा घोषित हो चुका है और मलेशिया में शरण लेकर भारत के खिलाफ विवादास्पद बयानबाजी कर रहा है। इस लेख में हम पाकिस्तानी यूट्यूबर के साथ जाकिर नाइक के हालिया पॉडकास्ट में किए गए दावों का विश्लेषण करेंगे, जहाँ उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का दावा किया, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर टिप्पणी की, और भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर अपनी राय दी। हालाँकि, जाकिर नाइक के अधिकतर दावे तथ्यहीन और झूठे साबित होते हैं। आइए, इस लेख में उसके बयानों की सच्चाई पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

मोदी से मुलाकात का दावा: सच्चाई या झूठ?

जाकिर नाइक ने पॉडकास्ट में सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद दावा यह किया कि 2019 में, अनुच्छेद 370 हटाने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक प्रतिनिधि को मलेशिया भेजा था। इस प्रतिनिधि ने जाकिर नाइक से मुलाकात की और भारत आने का निमंत्रण दिया। नाइक के अनुसार, यह मुलाकात इसलिए हुई थी क्योंकि भारत सरकार और जाकिर नाइक के बीच रिश्ते सुधारने की बात हो रही थी।

लेकिन यहाँ सवाल उठता है कि अगर जाकिर नाइक का दावा सच होता, तो भारत सरकार उसे भगौड़ा घोषित क्यों करती? जाकिर नाइक के खिलाफ भारत में आतंकी संगठनों से संबंध रखने, युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ धकेलने और नफरत फैलाने के गंभीर आरोप हैं। उसकी गतिविधियों को देखते हुए भारत सरकार ने उसे कानूनन अपराधी माना है। इस संदर्भ में पीएम मोदी द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का दावा पूरी तरह झूठ प्रतीत होता है।

नाइक ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी के प्रतिनिधि ने उसे अनुच्छेद 370 पर सरकार का समर्थन करने के लिए कहा था। उसने कहा कि वह कश्मीरियों की आजादी का समर्थन करता है और अनुच्छेद 370 को हटाना संविधान के खिलाफ है। यह बयान जाकिर नाइक की भारत विरोधी सोच को स्पष्ट करता है, जहाँ वह देश की एकता और अखंडता को चुनौती दे रहा है। अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, और इस पर किसी प्रकार का विवाद पैदा करना राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का हिस्सा है।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर दावे: झूठ और सच्चाई का मिश्रण

जाकिर नाइक ने वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों पर भी लंबी चर्चा की। उसने कहा कि वक्फ बोर्ड के पास भारत में तीसरी सबसे बड़ी मिल्कियत है, जिसमें रक्षा और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन आती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वक्फ बोर्ड के पास बड़ी मात्रा में जमीन है, जो मुस्लिम समाज के लिए उपयोगी है। लेकिन नाइक ने इसके पीछे छिपे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया।

उसने दावा किया कि सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है और इसके लिए वक्फ कानून में बदलाव की कोशिश कर रही है। यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है। भारतीय संविधान हर धर्म के अधिकारों की रक्षा करता है और सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। जाकिर नाइक ने केवल अपने झूठे एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मुस्लिम समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश की है।

जाकिर नाइक ने कहा, “कुछ मुस्लिमों ने वक्फ के फायदे उठाए, उसे बहाना बनाकर मोदी सरकार वक्फ कानून में बदलाव करना चाहती है, ताकि वो इसे हड़प सके। आपको शायद पता नहीं होगा, दुनिया का सबसे महंगा घर मुकेश अंबानी का मुंबई में है। दुनिया में सबसे महंगा घर, जो 27 मंजिला घर है। छत पर हेलीपैड है। उसकी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड की है। किसी मुसलमान ने ही गड़बड़ की होगी, जो जमीन उसके पास है। उस पर केस हुआ था। केस होने की वजह से वो अपने घर में घुस भी नहीं सकता था, लेकिन कानून की वजह से कुछ नहीं कर सकते।”

नाइक ने साफ दावा किया कि मुकेश अंबानी का 27 मंजिला घर, जो दुनिया का सबसे महंगा घर माना जाता है, वक्फ की जमीन पर बना है। यह दावा भी पूरी तरह से झूठा और सनसनीखेज है। जाकिर नाइक ने बिना किसी प्रमाण के इस तरह के बयान देकर केवल विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। वक्फ की संपत्तियों का मुस्लिम समाज के लिए धार्मिक और सामाजिक महत्व है, लेकिन उसे बिना किसी आधार के अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों से जोड़कर नाइक ने केवल मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने का प्रयास किया।

भारत में मुस्लिमों की स्थिति: सच्चाई पर भ्रम का पर्दा

जाकिर नाइक ने अपने पॉडकास्ट में भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर भी चर्चा की। उसने कहा कि भारत मुस्लिमों के लिए सबसे अच्छा देश है, जो सही है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त हैं। मुस्लिमों के लिए यहाँ पर्सनल लॉ बोर्ड, वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाएँ हैं, जो उनके धार्मिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करती हैं।

लेकिन जाकिर नाइक ने इस सच्चाई का इस्तेमाल भी अपने झूठ को छिपाने के लिए किया। उसने कहा कि अगर मोदी सरकार वक्फ कानून में बदलाव करती है, तो इससे मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर खतरा मंडराएगा। यह बयान एक भय पैदा करने की रणनीति है, ताकि मुस्लिम समाज सरकार के खिलाफ खड़ा हो सके।

भारतीय संविधान ने सभी धार्मिक संस्थाओं को समान अधिकार दिए हैं और सरकार के किसी भी कदम का उद्देश्य समाज की भलाई और देश की एकता को बनाए रखना है। जाकिर नाइक ने जानबूझकर ऐसे बयान दिए ताकि वह मुस्लिम समाज को भड़काकर सरकार के खिलाफ खड़ा कर सके।

जाकिर नाइक एक मजहबी नेता या एक कट्टरपंथी?

जाकिर नाइक ने अपने पॉडकास्ट में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वह निर्दोष है और भारत सरकार ने उसके खिलाफ गलत आरोप लगाए हैं। उसने यह दावा किया कि वह इस्लाम के प्रचार के लिए काम कर रहा है और उसका मकसद शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है।

जाकिर नाइक के भाषण और उपदेशों ने कई युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ धकेला है। उसके उपदेशों से प्रभावित होकर कई युवाओं ने आतंकवादी संगठनों में शामिल होने का प्रयास किया है। नाइक के भाषणों में नफरत और विवादास्पद बातें होती हैं, जो समाज में धार्मिक तनाव को बढ़ावा देती हैं। उसने अपने बयानों से न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में इस्लाम और अन्य धर्मों के बीच दूरी बढ़ाने का काम किया है।

भारत में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें आतंकी संगठनों से संबंध रखने और नफरत फैलाने के आरोप शामिल हैं। यह कहना कि जाकिर नाइक निर्दोष है, एक भ्रामक बयान है। उसके भाषणों और कार्यों से स्पष्ट है कि वह एक कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने वाला व्यक्ति है, जो समाज में नफरत और विभाजन की राजनीति करता है।

वक्फ बोर्ड का विवाद: सरकार का उद्देश्य या जाकिर नाइक की साजिश?

जाकिर नाइक ने वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों पर किए गए बदलावों के बारे में कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है। उसने कहा कि अगर वक्फ कानून में बदलाव होता है, तो इससे मुस्लिम समाज की हजारों मस्जिदें और कब्रिस्तान हाथ से निकल जाएँगी। इसके इतर बहुत सारी जमीनों पर वक्फ बोर्ड ने फर्जी तरीके से कब्जा किया हुआ है।

यह बयान न केवल तथ्यहीन है, बल्कि जाकिर नाइक द्वारा फैलाया गया एक और झूठ है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण भारतीय संविधान द्वारा सुरक्षित है और सरकार के किसी भी कदम का उद्देश्य समाज के हित में होता है। जाकिर नाइक ने इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम समाज में एक गलत संदेश फैलाया है, ताकि वह अपने आप को एक नेता के रूप में प्रस्तुत कर सके और समाज को गुमराह कर सके।

वास्तव में, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण करने के लिए कुछ बदलावों की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार उन संपत्तियों को हड़पना चाहती है। जाकिर नाइक ने इस मुद्दे को केवल विवादास्पद बनाने के लिए अपने पॉडकास्ट में पेश किया है, ताकि वह सरकार के खिलाफ एक नई साजिश रच सके।

जाकिर नाइक एक भ्रम फैलाने वाला व्यक्ति

जाकिर नाइक के अधिकांश दावे झूठे और भ्रम फैलाने वाले हैं। उसने अपने पॉडकास्ट में मोदी सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाए, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर झूठे दावे किए और मुस्लिम समाज को गुमराह करने की कोशिश की। उसकी असलियत एक कट्टरपंथी और समाज में विभाजन की राजनीति करने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आई है।

जाकिर नाइक का उद्देश्य केवल समाज में धार्मिक उन्माद और नफरत फैलाना है। उसने अपने भाषणों से कई युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला है और आतंकवादी संगठनों से संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है। ऐसे व्यक्ति को मजहबी विद्वान के रूप में प्रस्तुत करना समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक है।

झूठ और सच्चाई का पर्दाफाश

जाकिर नाइक के पॉडकास्ट में किए गए दावे अधिकतर मनगढ़ंत और झूठे हैं। उसने मोदी सरकार द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का झूठा दावा किया, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर गलत जानकारी दी और मुस्लिम समाज में डर फैलाने का प्रयास किया। जाकिर नाइक का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक विभाजन पैदा करना और अपने कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देना है।

भारत जैसे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश में हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त हैं, और सरकार का उद्देश्य समाज की भलाई और देश की एकता को बनाए रखना है। जाकिर नाइक जैसे लोगों को बेनकाब करना और उनके झूठ का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी है।

धारावी में अवैध मस्जिद गिराने पहुँची BMC की टीम पर मुस्लिम भीड़ का हमला: पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़, तनाव के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के धारावी इलाके में मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर तनाव फैल गया है। अवैध निर्माण की सूचना पर बृहन्नमुंबई नगर निगम (BMC) तोड़फोड़ करने पहुँची। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। निगम की गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई है। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

दुनिया के सबसे बड़े स्लम इलाके धारावी में 90 फीट रोड पर 25 साल पुरानी एक मस्जिद है, जिसका नाम महबूब-ए-सुभानिया मस्जिद है। आरोप है कि इसमें अवैध निर्माण किया गया है। इसको गिराने के लिए BMC ने नोटिस दिया था। हालाँकि, इस नोटिस का जबाव ना ही किसी मस्जिद कमिटी की ओर से दी गई और ना ही किसी मुस्लिम संगठन ने दिया।

आखिरकार BMC ने इसे गिराने की घोषणा की थी। इसकी जानकारी मिलते ही मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार (20 सितंबर 2024) की रात से ही सड़कों पर बैठ गए और पूरे रास्ते को जाम कर दिया। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि यह मस्जिद बहुत पुरानी है। इसलिए इसे नहीं तोड़ा जाना चाहिए।

हालाँकि, BMC की गाड़ियाँ जब अवैध निर्माण को तोड़ने पहुँचीं तो मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों पर पथराव कर दिया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी भी की। इस पथराव में कितने लोग घायल हुए हैं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, पुलिस अधिकारी मुस्लिमों को पथराव नहीं करने और ट्रैफिक नहीं रोकने का आग्रह किया है।

कहा जा रहा है कि ये सारा हंगामा एक चिट्ठी के सामने आने के बाद हुआ। धारावी इलाके में आई चिट्ठी में लिखा गया है कि ‘मस्जिद गिराने के लिए बीएमसी की टीम पुलिस के साथ 21 सितंबर को सुबह 9 बजे आने वाली है। इसलिए आप सभी लोगों से गुजारिश है कि मस्जिद की हिफाजत के लिए ज्यादा से ज्यादा तादाद में जमा हों।’ इसके बाद भारी संख्या में लोग धारावी में जमा हो गए।

वहीं, मस्जिद पर कार्रवाई को रुकवाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीएमसी की डिमोलीशन की नोटिस को लेकर मुलाकात की और लोगों की भावनाओं से अवगत कराया।

5 आधार कार्ड, कई इंस्टा ID और हिन्दू नाम: बरेली में कुछ यूँ नौशाद और आमान ने फँसा रखी थी 30+ गैर मुस्लिम लड़कियाँ, गिरफ्तारी के बाद सच उगला

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 2 मुस्लिम युवकों द्वारा सामूहिक लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ नौशाद और आमान पर लगभग 30 हिन्दू महिलाओं से नाम बदल कर चैट करने का खुलासा हुआ है। ये दोनों इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म पर हिन्दू नाम से ID बनाते थे। इसके बाद महिलाओं की अश्लील वीडियो बनाकर उनके साथ ब्लैकमेलिंग की जाती थी। आरोपितों ने फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखे हैं। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र की है। गुरुवार (19 सितंबर 2024) को कर्मचारी नगर इलाके में 2 लड़कियाँ सड़क पर 2 लड़कों से गुस्से में बात कर रहीं थीं। शोरगुल सुनकर आसपास के लोग जमा हुए। लोगों को देख कर लड़कियाँ चुपचाप वहाँ से चली गईं पर दोनों लड़कों को लोगों ने पकड़ लिया। जब दोनों से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने सतीश और राहुल बताया। उनकी बातों पर लोगों को शक हुआ तो उन्होंने पुलिस बुला कर दोनों को उनके हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि पुलिस के आगे ही राहुल और सतीश बने दोनों आरोपितों ने सच उगलना शुरू कर दिया। एक ने अपना नाम नौशाद जबकि दूसरे ने खुद को आमान बताया। पुलिस ने इन दोनों के खातों की पड़ताल की तो कई गंभीर खुलासे हुए। इन दोनों के पास 5 आधार कार्ड बरामद हुए। ये आधार कार्ड अलग-अलग हिन्दू और मुस्लिम नामों से बने हुए थे। इन पर फोटो भी अलग-अलग लगी हुई थी। इन दोनों के मोबाइल फोन खंगाले गए तो कई फर्जी सोशल प्रोफाइलों का भी खुलासा हुआ।

दोनों आरोपित मूलतः बरेली के ही रहने वाले हैं। नौशाद और आमान ने इंस्टाग्राम पर 6 अलग-अलग प्रोफ़ाइल बना रखी थी। आधार कार्ड की ही तरह ये प्रोफ़ाइल हिन्दू और मुस्लिम दोनों नाम से थीं। इन दोनों ने इस प्रोफाइलों से कई लड़कियों और महिलाओं से अश्लील चैटिंग भी की थी। इन महिलाओं से वीडियो कॉल कर के उनके अश्लील वीडियो भी बनाए गए थे। पुलिस ने पाया कि ये दोनों आरोपित आपत्तिजनक वीडियो बना कर लड़किओं को ब्लैकमेल भी करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपितों ने राहुल, सुरेश और सतीश नाम से सोशल मीडिया हैंडल बना रखे थे। ये आरोपित लगभग 30 लड़कियों के सम्पर्क में थे जिसमें अधिकतर गैर-मुस्लिम थीं। वीडियो कॉल की रिकार्डिंग कर के ब्लैकमेलिंग के बाद ये दोनों लड़कियों से पैसों की उगाही करते थे। अपनी बदनामी के डर से पीड़िताएँ पुलिस और अपने घर में शिकायत भी नहीं करती थीं। अब पुलिस ने आमान और नौशाद की कॉल डिटेल भी निकलवाई है।

माना जा रहा है कि आगे कुछ अन्य पीड़िताओं का भी खुलासा हो सकता है। पुलिस ने दोनों आरोपितों के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। नौशाद और आमान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 339, 340, 336 (3 के साथ IT एक्ट की धारा 66-D के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके पास से कुल 8 फर्जी आधार कार्ड और 2 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

दलितों-पिछड़ों के नाम पर कटी जमीन की रसीद, दावा वक्फ बोर्ड कर रहा: मधुबनी में अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण पर बवाल, BJP विधायक ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे

बिहार के मधुबनी में दलित-पिछड़ों के नाम वाली जमीन पर अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय बनाने की मंजूरी के बाद बवाल हो गया है। सैकड़ों की संख्या में निकलकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए। लोगों का कहना है कि जिस जमीन पर अल्पसंख्यक विद्यालय बनाने की मंजूरी दी गई है, उस जमीन की रसीद यहाँ के लोगों के नाम कटी है।

मामला मधुबनी के बिस्फी प्रखंड क्षेत्र के उसौथू गाँव से जुड़ा है। इस गाँव के साथ-साथ आसपास के लोग उसौथू डीह में धरने पर बैठ गए हैं। बता दें कि 17 सितंबर 2024 को प्रशासन ने यहाँ की जमीन पर लगी हुई फसल को जोतकर हटा दिया था। जिलाधिकारी के आदेश पर अल्पसंख्यक विभाग ने लगभग 5 एकड़ जमीन को ‘अतिक्रमण मुक्त’ कराकर इस दावा करने वाले वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था।

इस जमीन पर सरकार अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का निर्माण करवा रही है। इसकी शुरुआत दो दिन पहले ही की गई है। हालाँकि, लोगों ने अल्पसंख्यक विद्यालय के निर्माण कार्य को बंद करवा दिया है। लोगों के विरोध को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी वहाँ से लौट गया है। इसकी सूचना मिलने पर बिहार सरकार के भूमि एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल भी सक्रिय हो गए।

जायसवाल ने स्थानीय भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल से बात की और उनसे कहा कि वे इस संबंध में विभाग को एक आवेदन विभाग को दें। आगे का काम विभाग करेगा। धरना पर बैठे लोगों का कहना है कि जिस जमीन को सरकार ने अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय के आवंटित किया है, उस जमीन की रसीद उन लोगों के नाम से कटी है। ऐसे में उस जमीन पर आवासीय विद्यालय कैसे बनाया जा सकता है।

वक्फ बोर्ड इस जमीन पर अपना दावा करता है। वहीं, कुछ लोग इस जमीन को बिहार सरकार की तो कुछ लोग भारत सरकार का कहते हैं। यह जमीन लगभग 5 एकड़ की है। यहाँ बनने वाले आवासीय अल्पसंख्यक विद्यालय की लागत 60 करोड़ रुपए है। बचौल ने कहा कि जमीन वक्फ बोर्ड की है या बिहार सरकार या भारत सरकार की या दलित-पिछड़ों की, सबसे पहले इसकी जाँच होनी चाहिए।

धरने का नेतृत्व कर रहे स्थानीय भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि इस हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय बनाने से सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार यहाँ केन्द्रीय विद्यालय बनवाना चाह रही है। इसके लिए जिला प्रशासन को राशि भी आवंटित की जा चुकी है, लेकिन पिछले सात सालों से जमीन नहीं मिलने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस जगह पर अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय की जगह केंद्रीय विद्यालय का निर्माण होना चाहिए। इससे हर समाज के बच्चे पढ़ाई कर सकेंगे। इस जमीन पर अल्पसंख्यक विद्यालय के निर्माण का विरोध जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 17 सितंबर को जिन लोगों की फसल प्रशासन ने जोतकर बर्बाद की है, उन्हें इसका मुआवजा दिया जाए।

गुजरात के सूरत में ट्रेन को पलटने की थी साजिश, ट्रैक पर लगी मिली फिश प्लेट: केस दर्ज, लाइनमैन की सतर्कता से हादसा टला

गुजरात के सूरत में ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रचने का खुलासा हुआ है। घटना 20-21 सितंबर रात की है। किम रेलवे स्टेशन के पास जाँच में फिश प्लेट और चाबियाँ बरामद हुई हैं।

मामले में पश्चिमी रेलवे के वडोदरा डिवीजन ने कहा कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने यूपी लाइन से कुछ फिश प्लेट और चाबियाँ खोलकर उसी ट्रैक पर रख दीं थी, जिसके कारण ट्रेन की आवाजाही रुक गई और बाद में जाँच के बाद ट्रेनों को चलाया गया।

सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि ये फिशप्लेट और नट जाबूझकर ट्रैक पर दूर तक लगाए गए हैं। वीडियो बनाने वाला शख्स भी इस बात को खुद कहता है कि ट्रेन में अवरोध पैदा करने के लिए ये कब्जे और नट आगे तक लगाए गए हैं।

वहीं मामले को लेकर डिप्टी एसपी आरआर सरवैया ने बताया- वडोदरा के किम स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक से फिश प्लेट और चाबियाँ हटा दी गईं, उसके कारण करीब 20 मिनट तक ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा। जीआरपी, आरपीएफ और एलसीबी ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

उन्होंने बताया कि इन फिश प्लेट्स की जानकारी किम के पास गश्त कर रहे रेलवे लाइनमैन ने दी थी। बाद में मरम्मत के बाद ट्रैक पर ट्रेन सेवा शुरू कर दी गई… पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में जगह-जगह से ट्रेनों को डीरेल करने की साजिश सामने आई है। कभी रेलवे ट्रैक पर लोहा फेंक दिया जाता है तो कभी बोरी। इससे पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर में अराजक तत्वों ने रेल की पटरी पर 6 मीटर लंबा लोहा रख दिया था।

हालाँकि उस समय लोको पायलट की सूझबूझ के कारण हादसा टल गया। इससे पहले इसी तरह फर्रुखाबाद में हुआ था। वहाँ भी ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए एक लकडी को रख दिया था।

तिरुपति प्रसाद की पवित्रता हुई बहाल, TTD ने बयान जारी कर दिया आश्वासन: ‘जानवर की चर्बी’ वाले विवाद पर Amul ने कहा- हमने कभी नहीं की वहाँ घी सप्लाई

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की शुद्धता बहाल होने की पुष्टि की गई है। टीटीडी ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि अब लड्डू प्रसादम का घी बिना किसी गड़बड़ी के है और उसकी शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान तब आया, जब तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

शुद्धता पर टीटीडी का बयान

टीटीडी ने कहा है कि प्रसादम की शुद्धता को फिर से स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घी आपूर्ति और उसके इस्तेमाल में पूरी सावधानी बरती जाती है, ताकि प्रसाद की पवित्रता और भक्तों की आस्था बनी रहे। बता दें कि पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाया जा रहा था कि लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता घट गई है। घी अशुद्ध था और उसमें जानवरों की चर्बियाँ पाई गई थी।

अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने कहा है कि अब प्रसाद पूरी तरह से पवित्र और बेदाग है। तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) करता है। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) रात को सोशल मीडिया पर साझा किए पोस्ट में टीटीडी ने लिखा कि ‘श्रीवारी लड्डू की दिव्यता और पवित्रता अब बेदाग है। टीटीडी सभी श्रद्धालुओं की संतुष्टि के लिए लड्डू प्रसादम की पवित्रता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

घी आपूर्तिकर्ताओं पर विशेष ध्यान

टीटीडी ने यह भी कहा कि प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर जाँच प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसमें शामिल आपूर्तिकर्ताओं की छानबीन की जाती है और घी की हर खेप का परीक्षण किया जाता है। टीटीडी ने यह भी कहा कि भक्तों की आस्था और प्रसादम की शुद्धता बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

प्रसादम की शुद्धता पर टीटीडी के इस आश्वासन के बाद भक्तों में राहत महसूस हुई है। सोशल मीडिया पर भी टीटीडी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। कई भक्तों ने कहा कि लड्डू प्रसादम के साथ उनकी आस्था जुड़ी हुई है और टीटीडी द्वारा उठाए गए कदमों ने उनकी आस्था को और मजबूत किया है। अमूल के बयान के बाद भक्तों में फैली गलतफहमी भी दूर हो गई है।

विवाद और अफवाहों के बीच अमूल की सफाई

विवाद के बीच, एक और बड़ा नाम उभरा—अमूल। सोशल मीडिया पर अफवाहों के चलते दावा किया गया कि तिरुमाला मंदिर के लिए घी की आपूर्ति अमूल द्वारा की जाती है। हालाँकि, अमूल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से स्पष्ट किया कि उसने कभी तिरुमाला मंदिर के लिए घी सप्लाई नहीं किया है। अमूल के इस बयान ने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमूल का घी प्रसादम की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। अमूल ने यह साफ किया कि उनका घी प्रसादम में शामिल नहीं है, और इससे जुड़ी सभी बातें झूठी हैं।

लड्डू प्रसादम की महत्ता

तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम की पवित्रता और महत्ता हर भक्त के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रसादम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आर्थिक महत्त्व भी है। टीटीडी द्वारा प्रति वर्ष लाखों लड्डू तैयार किए जाते हैं, जिन्हें भक्तगण अपने साथ घर ले जाते हैं। इस लड्डू की शुद्धता पर उठे सवाल ने मंदिर प्रशासन और भक्तों के बीच हलचल मचा दी थी।

अहमद को रीना की चिट्ठी- तुम कैसे हो… तुम्हारी याद आती है: कक्षा 3 की क्लास में हो रही पढ़ाई, NCERT सिलेबस की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँचा बच्ची का पिता

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एनसीईआरटी की तीसरी कक्षा की पर्यावरण की पुस्तक पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के के बीच संवाद को लेकर लव जिहाद का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब एक स्थानीय निवासी, डॉ. राघव पाठक, ने पुलिस को शिकायत देकर किताब पर गंभीर आपत्ति जताई।

विवाद की वजह: तीसरी कक्षा की पुस्तक में संवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. राघव पाठक ने अपनी बेटी की किताब में छपे एक पाठ पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह आपत्ति तीसरी कक्षा की एनसीईआरटी पर्यावरण की पुस्तक के 17वें पेज पर प्रकाशित ‘चिट्ठी आई है’ नामक पाठ पर है। पाठ में रीमा नाम की हिंदू लड़की, अहमद नाम के मुस्लिम लड़के को एक चिट्ठी लिखती है, जिसमें वह उसे छुट्टियों में अगरतला आने का निमंत्रण देती है और पत्र के अंत में लिखती है, “तुम्हारी रीना।”

पाठक ने आरोप लगाया है कि यह पाठ सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देता है और छोटी उम्र के बच्चों के मन में धार्मिक आधार पर प्रेम संबंधों के प्रति आकर्षण पैदा कर सकता है। उनकी आपत्ति का आधार यह है कि एक हिंदू लड़की को एक मुस्लिम लड़के को पत्र लिखाते समय एक ऐसा नामांकित संबंध दिखाया गया है, जो भविष्य में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है।

‘लव जिहाद’ का डर और सांस्कृतिक चिंता

डॉ. राघव पाठक ने खजुराहो के एसडीओपी (उप पुलिस अधीक्षक) सुनील शर्मा को इस मामले में एक लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह किताब लव जिहाद के प्रति बच्चों के मन में आकर्षण पैदा कर सकती है। पाठक ने कहा, “मेरी बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। जब मैंने उसकी किताब में यह संवाद देखा, तो मुझे घोर आपत्ति हुई। एक हिंदू लड़की कैसे किसी मुस्लिम लड़के को पत्र लिख सकती है, और खुद को उसकी रीना बता सकती है? यह सीधे तौर पर सांस्कृतिक और धार्मिक विभाजन पैदा करने वाला है।”

उन्होंने इस पर जोर दिया कि सरकार जहाँ लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बना रही है, वहीं एनसीईआरटी की किताबें इस तरह के संवाद दिखाकर बच्चों के मन में गलत धारणाएँ पैदा कर रही हैं। उन्होंने माँग की कि किताब के इस पाठ को हटाया जाए या पात्रों के नाम बदल दिए जाएँ ताकि बच्चों के मन में धर्म-परिवर्तन जैसे विचार न पनपे।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच

एसडीओपी सुनील शर्मा ने बताया कि उन्हें डॉ. राघव पाठक की शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें उन्होंने एनसीईआरटी की किताब पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। यह मामला पाठ्य पुस्तक से संबंधित होने के कारण इसे उच्चाधिकारियों को भेजा गया है, ताकि उनकी सलाह पर उचित कार्रवाई की जा सके।

शर्मा ने आगे कहा कि चूँकि यह मामला राज्य स्तर पर प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों से जुड़ा है, इसलिए इसे राज्य सरकार को भी सूचित किया जाना चाहिए। पाठक को सलाह दी गई है कि वे राज्य सरकार को भी इस विषय पर लिखें, ताकि इस मामले में उचित जाँच और समाधान हो सके। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।

पाठ्य पुस्तक में सुधार की माँग

डॉ. पाठक ने यह भी कहा कि वह एक जिम्मेदार नागरिक और पिता के नाते इस मामले को आगे तक ले जाएँगे। उन्होंने माँग की है कि जिस संवाद में हिंदू लड़की रीना और मुस्लिम लड़के अहमद के बीच संवाद दिखाया गया है, उसे पूरी तरह से बदला जाए। उन्होंने कहा, “यह छोटी बात नहीं है। यह एक सोची-समझी साजिश है, जो बच्चों के कोमल मन में सांप्रदायिकता और धार्मिक परिवर्तन के बीज बो रही है।”

पाठक ने कहा कि यदि इस मामले में कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह की घटनाएं समाज में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती हैं और बच्चों के मन में गलत विचार उत्पन्न कर सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन करना चाहिए।

इस मामले पर केवल पाठक ही नहीं, बल्कि कई हिंदूवादी संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एनसीईआरटी जैसी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में इस प्रकार के संवाद बच्चों के मन में धार्मिक ध्रुवीकरण को जन्म दे सकते हैं।

सांस्कृतिक चिंताओं पर गंभीरता से विचार आवश्यक

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में उठाए गए इस मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि शिक्षा के माध्यम से दी जा रही जानकारी को बेहद सावधानीपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए। जबकि सरकार और पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई कर रही है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विषय पर राज्य सरकार और एनसीईआरटी क्या निर्णय लेती है। इस प्रकार के विवाद एक बार फिर इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षा में घालमेल करने वाली ऐसी कोई भी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो बच्चों के कोमल मन को प्रदूषित कर सके।

अब फैक्टचेक नहीं कर सकती केंद्र सरकार: जानिए क्या है IT संशोधन नियम 2023 जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने बताया ‘असंवैधानिक’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम 2023 के नियम 3 को रद्द कर दिया। यह धारा केंद्र सरकार को सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सरकार के खिलाफ झूठी या फर्जी खबरों की पहचान करने के लिए तथ्य-जाँच इकाइयों (Fact Check Unit) के गठन का अधिकार देता है।

इस साल जनवरी में एक खंडपीठ द्वारा विभाजित फैसला देने के बाद यह मामला उनके पास भेजे जाने के बाद टाईब्रेकर न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर ने आज अपनी राय दी है। एकल पीठ न्यायाधीश ने यह फैसला पढ़ते हुए कहा, “मेरा मानना ​​है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है।”

आईटी संशोधन नियम 2023 के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021, जिसे आईटी नियम 2021 भी कहा जाता है, में संशोधन किया गया था। इस नियम के खिलाफ कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। इनमें एक याचिका स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।

इस नियम के तहत सरकार को फैक्ट चेक यूनिट बनाने के अधिकार को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह संशोधन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(ए)(जी) (कोई भी पेशा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) का भी उल्लंघन करता है।

इस मामले में 31 जनवरी 2024 को न्यायमूर्ति जीएस पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले ने इस मामले पर विभाजित फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति पटेल ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया और नियम 3 को खारिज कर दिया। इसमें यूजर की सामग्री की सेंसरशिप की आशंका और सामग्री की सटीकता की जिम्मेदारी रचनाकारों से बिचौलियों पर स्थानांतरित होने की चिंताओं का हवाला दिया गया था।

जस्टिस पटेल ने अनुच्छेद 14 से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अन्य संस्थाओं की तुलना में केंद्र सरकार से संबंधित सूचना को ‘उच्च मूल्य’ का पहचान प्रदान करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके विपरीत, जस्टिस गोखले ने संशोधित नियमों की वैधता को बरकरार रखा था और कहा था कि इसमें दुर्भावनापूर्ण इरादे से गलत सूचना को लक्षित करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा किया गया है।

जस्टिस गोखले ने यह भी कहा कि किसी नियम को केवल संभावित दुरुपयोग की चिंताओं के आधार पर उसे अमान्य नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने इसकी भी पुष्टि की कि यदि X, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे कोई मध्यस्थ की कार्रवाई उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है तो याचिकाकर्ता और यूजर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने मामले पर टाई-ब्रेकिंग राय देने के लिए न्यायमूर्ति चंदुरकर को नियुक्त किया। इसके बाद एकल पीठ न्यायाधीश चंदुरकर ने यह फैसला पढ़ते हुए कहा, “मेरा मानना ​​है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है।” इस तरह दो न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ताओं का वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई और अरविंद दातार ने प्रतिनिधित्व किया। इन अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि फैक्ट चेकिंग यूनिट का उद्देश्य उन चर्चाओं पर पूर्ण सेंसरशिप लगाना है, जिन्हें सरकार दबाना चाहती है। उन्होंने नागरिकों को सूचित रखने के अपने घोषित उद्देश्य को पूरा करने के लिए फैक्ट चेंकिंग यूनिट के लिए प्रावधानों की कमी की ओर भी इशारा किया।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि फैक्ट चेकिंग यूनिट आलोचना या व्यंग्य को रोकने का प्रयास नहीं करते हैं, बल्कि केवल सरकार से संबंधित सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि विवादित नियम केवल आधिकारिक सरकारी फाइलों में पाई जाने वाली जानकारी पर लागू होता है।

नियम 3 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले दावों के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव केवल फर्जी और झूठी खबरों से संबंधित होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी को भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के बारे में सतर्क रहना चाहिए।

इस पर याचिकाकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि सटीक जानकारी का अधिकार नागरिकों का है, राज्य का नहीं। इसकी साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सरकार पहले से ही यह घोषित कर सकती है कि क्या सच है या झूठ। उन्होंने मध्यस्थों को सुरक्षा से वंचित करने की सरकार की क्षमता पर भी सवाल उठाया। नियम 3 ऑनलाइन और प्रिंट से संबंधित कंटेंट को लेकर है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने 6 अप्रैल 2023 को सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सरकार से संबंधित झूठे या भ्रामक सामग्री की जाँच के लिए फैक्ट चेक यूनिट बनाने का फैसला लिया था। इसके तहत एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म को अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहचान करने के बाद या तो सामग्री को हटाना था या एक अस्वीकरण जोड़ना था। 

बेटे की सरकार में तिरुपति की रसोई में ‘बीफ की घुसपैठ’, कॉन्ग्रेस पिता के शासन में इसी मंदिर में क्रॉस वाले स्तंभ पर हुआ विवाद: तब YSR, अब जगनमोहन कर रहे इनकार

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू में पशुओं की चर्बी और मछली का तेल पाए जाने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाने वाली यह मिलावट पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के राज में होने का आरोप लगाया गया है। लड्डू में पशु चर्बी और मछली का तेल मिलाए जाने की बात की पुष्टि लैब रिपोर्ट से भी हो गई है। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी और उनके समय में तिरुपति मंदिर का प्रशासन करने वाले तिरुपति देवस्थानम बोर्ड से जुड़े लोग घेरे में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इस बीच इन सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने ऐसी किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “लड्डुओं के घी के लिए टेंडर प्रक्रिया हर छह महीने में होती है, और मानदंड कई दशकों से नहीं बदले हैं। टेंडर डालने वालों को NBL प्रमाणपत्र और गुणवत्ता का प्रमाणपत्र देना होता है। TTD घी से नमूने लेकर प्रमाणित होने वालों को ही टेंडर देता है। TDP धार्मिक मामले का राजनीतिकरण कर रही है। हमने अपने शासनकाल में 18 बार कई चीजों को अस्वीकार किया था।”

जगन अब कुछ भी कहें, यह मामला थमता नहीं दिख रहा है। इससे पहले भी तिरुपति मंदिर के बारे में हुए विवादों ने हिन्दुओं को झकझोर कर रख दिया था। तब इस हिन्दू मंदिर में ईसाई परम्परा घुसाने का आरोप लगाया गया था। जब यह आरोप लगा था तब जगन मोहन रेड्डी के पिता YS राजशेखर रेड्डी राज्य के मुखिया थे।

यह विवाद 2007 में हुआ था। तब भाजपा समेत हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया था कि TTD ने मंदिर के एक उत्सव के लिए जिन स्तम्भ का ऑर्डर दिया है, वह ईसाइयों के लिए पवित्र क्रॉस जैसे दिखते हैं। 2007 में होने वाले वार्षिक ब्रम्होत्सव के लिए TTD ने 250 स्तम्भ बनाने का ऑर्डर दिया था।

यह ऑर्डर बेंगलुरु की एक कम्पनी का को दिया गया था। यह स्तम्भ महोत्सव के दौरान सौन्दर्य के काम में लगाए जाने थे। इनका निर्माण प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से होना था और इन पर नक्काशी की की जानी थी। हालाँकि, जब इन स्तम्भों का एक नमूना बन कर तिरुपति पहुँचा तो लोगों के कान खड़े हो गए।

भाजपा समेत कई हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि इनकी बनावट ईसाई क्रॉस जैसी लगती है। हिन्दुओं ने कथित तौर पर क्रॉस जैसे दिखने वाले स्तम्भ को तोड़ भी दिया था। हालाँकि, TTD में YSR की सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी इस डिजाइन का बचाव करते रहे थे।

अधिकारियों ने इस दौरान दावा किया था कि यह स्तम्भ मंदिर की डिजाइन से मिलते हुए बनाए गए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री YSR के ईसाई होने के कारण यह विरोध और तेज हो गया था। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि तिरुपति के आसपास लगातार ईसाई दखल बढ़ रहा है।

YSR 2004 से 2009 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और उनकी 2009 में एक विमान हादसे में मौत हो गई थी। उनके बेटे जगन ने इसके बाद उनकी राजनीति को आगे बढाते हुए अपनी पार्टी बनाई और 2019 में मुख्यमंत्री बने थे। उनके कायर्काल में भी तिरुपति में ईसाई को चेयरमैन बनाने का विवाद हुआ था।

‘इस्लाम कबूलो, हिंदू धर्म अच्छा नहीं’: 10वीं की छात्रा की शिकायत के बाद गिरफ्तार हुआ इजहार, बुर्का-कुरान देकर निकाह का बना रहा था दबाव; पीड़िता बोली- 5 साल से कर रहा परेशान

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में ग्रूमिंग जिहाद से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग हिंदू लड़की को पाँच साल तक प्रेमजाल में फंसाकर उसका ब्रेनवॉश करने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगा है। घटना मंझनपुर थाना क्षेत्र की है, जहाँ पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मुख्य आरोपित इजहार समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है।

दोस्ती से शुरू हुआ खेल, प्यार की आड़ में धर्मांतरण का षड्यंत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी, जो कक्षा 10 की छात्रा है, को इजहार नाम के युवक ने पिछले पाँच साल से अपने प्रेमजाल में फंसा रखा था। शुरुआत में यह मामला सिर्फ दोस्ती का था, लेकिन धीरे-धीरे इजहार ने नाबालिग पर मानसिक दबाव डालकर उसका ब्रेनवॉश किया और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया।

पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा, “इजहार मुझे पिछले चार-पाँच साल से परेशान कर रहा था। उसने मुझे बुर्का और कुरान दी और मुझसे निकाह करने की बात करता था। उसने मुझ पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव डाला, यह कहते हुए कि हिंदू धर्म अच्छा नहीं है।”

परिवार की चिंता और कार्रवाई

लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को कई बार इजहार के साथ देखा था, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि इजहार उनकी बेटी को धर्मांतरण के लिए मजबूर कर रहा है। कुछ दिन पहले जब पिता ने घर की अलमारी की जाँच की, तो उन्हें वहां से एक बुर्का और कुरान मिली, जो कि उनकी बेटी को इजहार ने दी थी। यह देखकर पिता ने तुरंत थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में पिता ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इजहार का विरोध किया, तो उसने गाली-गलौज की और कहा कि “मैं तुम्हारी बेटी को मुस्लिम बना चुका हूँ और जल्द ही उसे अपने साथ ले जाऊंगा, कोई रोक नहीं पाएगा।”

पुलिस का बयान और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और मुख्य आरोपित इजहार को गिरफ्तार कर लिया। कौशांबी के सीओ अभिषेक सिंह ने बताया, “मंझनपुर थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उनकी नाबालिग बेटी का ब्रेनवॉश कर उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। हमने मुख्य आरोपित इजहार समेत 5 लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है। इजहार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और मामले की जाँच चल रही है।”

पुलिस ने नाबालिग के पास से बुर्का और कुरान भी बरामद की है। अधिकारियों ने बताया कि इजहार ने अपनी योजना के तहत पीड़िता को मानसिक रूप से प्रभावित किया और उसका धर्मांतरण करने की कोशिश की। इस मामले में अन्य आरोपित भी जाँच के घेरे में हैं, और पुलिस इस साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जाँच कर रही है।

हिंदू संगठनों की नाराजगी और माँग

घटना के बाद जिले में हिंदू संगठनों का आक्रोश बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के जिला सहमंत्री वेद प्रकाश सत्यार्थी ने कहा, “जिले में एक मदरसे के जरिए धर्मांतरण की घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कट्टर इस्लामिक संगठन यहाँ हिंदू बहन-बेटियों को प्रेमजाल में फंसाकर उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं और धर्मांतरण कर निकाह के लिए मजबूर कर रहे हैं। हम पुलिस प्रशासन से माँग करते हैं कि इस मामले की गंभीरता से जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”

वेद प्रकाश सत्यार्थी ने आगे कहा कि कौशांबी में इस तरह की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। “यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया है। कई बार कट्टरपंथी संगठन प्रेमजाल में फंसाकर हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण करने की कोशिश करते हैं। प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।”

पीड़िता का भविष्य और परिवार की सुरक्षा पर सवाल

पीड़िता के पिता ने अपनी चिंता जताते हुए कहा कि इस घटना के बाद से उनका परिवार डरा हुआ है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपनी बेटी और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा, “हमारे परिवार पर बहुत बड़ा संकट आ गया है। हमारी बेटी का भविष्य खतरे में है, और हम नहीं चाहते कि उसे किसी भी तरह का नुकसान हो।” पुलिस ने फिलहाल मामले में पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई है और कहा है कि वह मामले की पूरी गहराई से जाँच करेंगे।

सीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि मामले की जाँच क्षेत्राधिकारी मंझनपुर द्वारा की जा रही है, और अन्य आरोपियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में है। पुलिस ने कहा है कि वे जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी करेंगे और इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

इस घटना ने कौशांबी के लोगों के बीच डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। वहीं, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद है, जबकि इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई की माँग तेजी से बढ़ रही है।