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कोलकाता में खत्म नहीं हुआ प्रदर्शन, डॉक्टरों को CM ममता बनर्जी पर भरोसा नहीं: TMC विधायक ने कहा- आंदोलन की आड़ में रात को शराब पीने जाती हैं महिलाएँ

पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में 40 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पीड़िता को इंसाफ नहीं मिल पाया है। एक तरफ मृतिका के पिता ने इस मामले में ये कहकर और मामले को गहरा दिया है कि अपराध में और लोग भी शामिल हैं। तो वहीं दूसरी ओर अन्य जूनियर डॉक्टर भी सरकार से दो बार वार्ता करने के बावजूद प्रदर्शन खत्म करने का नाम नहीं ले रहे। उनका कहना है कि वो लोग बैठक में हुई बातचीत से नाखुश हैं।

मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बैठक में जो भी आश्वासन दिए गए थे, वो उन्हें लिखित में नहीं मिले। जब उन्होंने ये मुद्दा उठाया तब बाद में उन्हें जो संक्षिप्त बिंदु भेजे गए उसमें हस्ताक्षर नहीं था।

जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों के साथ ये बैठक राज्य सचिवालय में हुई। बैठक के बाद जब डॉक्टरों ने अपनी नाराजगी जाहिर की तो बैठक के मिनट जिसमें हस्ताक्षर नहीं हुए थे उन्हें सरकार द्वारा जारी किया गया।

जूनियर डॉक्टर ने मीडिया को बताया कि जब हम बैठक के लिए गए तो चीफ सेक्रेट्री हमारी हर माँग को मान गए लेकिन जैसे ही मीटिंग पूरी हुई और हमने उस बैठक में हुई बातचीत के मिनट माँगे, तो उसमें कुछ भी नहीं लिखा था। उन्होंने हमें कहा कि वो उसे मेल करेंगे, लेकिन मेल भी नहीं आया है।

बताया जा रहा है कि डॉक्टरों और मुख्य सचिव के बीच हुई बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने मुख्य स्वास्थ्य सचिव के विरुद्ध जाँच कमेटी गठित करने की माँग की है। इसके अलावा रात में महिला पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाने की माँग, विभागों में पैनिक बटन इंस्टाल करने की माँग और फौरन कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की माँग की गई है।

इससे पहले उन्होंने कोलकाता पुलिस कमीश्नर विनीत गोयल के ट्रांसफर की बात की थी। राज्य सरकार ने उस माँग को मानते हुए विनीत गोयल का ट्रांसफर किया और उनकी जगह मनोज कुमार वर्मा को नियुक्त किया गया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी हटा दिया।

गौरतलब है कि एक तरफ इस मामले में ढीला रवैया दिखाने को लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस लगातार बदनाम हो रही है वहीं अब पार्टी के एक विधायक का विवादित बयान सामने आया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक स्वप्न देबनाथ ने कहा कि महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के नाम पर रात को शराब पीने जाती हैं।

देबनाथ ने प्रदर्शन पर बैठी लड़कियों के माता-पिता से भी सवाल किया कि उन्हें अपनी बेटियों से पूछना चाहिए कि वे रात में कहाँ जाती हैं। अगर रात में उनके साथ कुछ हो जाएगा तो इसके जिम्मेदार भी कौन होगा। देबनाथ ने इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वो टीवी पर देखते हैं कि जो लोग आरजी कर मामले में विरोध करते हैं वो अगले दिन छुट्टी पर चले जाते हैं। बाजार में दुर्गा पूजा के लिए व्यस्त हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के सबसे प्रमुख चेहरे को इस बीच अपनी बीवी के लिए महंगी साड़ी खरीदने जाते देखा है।

‘मोसाद’ का नाम सुन जिनकी पैंट हो जाती है गीली, अब उनको फाड़ रहा ‘यूनिट 8200’: पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के बाद दुनियाभर में चर्चे, जानिए इसके बारे में सब कुछ

इस्लामी आतंकी संगठन के प्रभाव वाले देश लेबनान में बीते तीन दिनों से लगातार धमाके हो रहे हैं। सबसे पहले यह धमाके हिजबुल्लाह आतंकियों पेजर डिवाइस में हुए। इसके बाद इन धमाकों का सिलसिला वॉकी-टॉकी से होते हुए सोलर पैनल और दफ्तरों में लगने वाली बायोमीट्रिक मशीनों तक पहुँच गया। लेबनान में हो रहे इन धमाकों के पीछे क्या कारण है, यह अभी तक साफ़ नहीं हो पाया है।

हालाँकि, शक की सुई पूरी तरह से इजरायल की खुफिया एजेंसियों की तरफ जा रही है। बताया जा रहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने लेबनान के भीतर फटने वाली मशीनों में विस्फोटक भरे हुए थे। इस काम को इजरायल की किस किस एजेंसी ने किया यह साफ़ नहीं है लेकिन इस बीच इजरायली सेना की 8200 यूनिट की चर्चा हो रही है।

क्या है इजरायल की यूनिट 8200?

जिस यूनिट 8200 पर बात हो रही है, वह इजरायल की सेना का हिस्सा है। यह इजरायली सेना के इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के अंतर्गत आती है। इसके अलावा दो और यूनिट इसके अंतर्गत काम करती है। यूनिट 8200 का मुख्य फोकस तकनीक होती है। यह खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और उस पर एक्शन लेने के तकनीकी एंगल पर काम करती है।

इजरायल की यह यूनिट उसकी मुख्य खुफिया एजेंसी मोसाद से इतर है। मोसाद जहाँ देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी है और उसके ऑपरेशन विदेशों में भी चलते हैं, वहीं उसके मुकाबले यूनिट 8200 छोटी टीम है और इसका मुख्य फोकस तकनीक पर रहता है।

यूनिट 8200 मात्र खुफिया जानकारी इकट्ठा ही नहीं करती बल्कि वह टूल्स भी बनाती हैं जो इसमें काम आते हैं। इसके अलावा यह साइबर युद्ध और टेलीकम्यूनिकेशन जैसी तकनीकों में भी माहिर है। हमेशा पर्दे के पीछे रह काम करने वाली यह एजेंसी सामान्य फोन की बातचीत से लेकर जटिल कम्प्यूटर वाली तकनीकों को हैक करने में सक्षम मानी जाती है।

लेबनान हमले के मामले में यूनिट 8200 का नाम इसलिए आया है क्योंकि ऐसी तकनीकी क्षमता इसी के पास है। बताया जा रहा है कि लेबनान में हुए धमाकों की प्लानिंग में यह ख़ुफ़िया एजेंसी शुरूआती दिनों से जुड़ी हुई थी। कथित तौर पर इसका काम इन पेजरों और बाकी मशीनों में विस्फोटक को रखना था।

लेबनान में हुए धमाकों में हिजबुल्लाह को बड़ा नुकसान हुआ है, उसने इन धमाकों की पूरी जिम्मेदारी इजरायल पर ही डाली है। हालाँकि, इजरायल और उसकी सेना ने इन धमाकों के बारे में अभी चुप्पी साध रखी है, उसने इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

टेक एक्सपर्ट होते हैं भर्ती

चर्चाओं में बनी इजरायल की यह यूनिट 8200 बड़ी संख्या में टेक एक्सपर्ट भर्ती करती है। यह यूनिट मेधावी युवाओं को भर्ती करती है जो साइबर या कम्प्यूटर की फील्ड के विद्वान होते हैं। इसके अलावा गणित जैसे विषयों के विशेषज्ञ भी भर्ती किए जाते हैं। उन लोगों को टीम में जगह दी जाती है जो इजरायल की बड़ी आईटी कम्पनियों में ऊँचे पदों पर रहे होते हैं।

इनका काम नई तकनीकों की खोज करना और दुश्मनों की तकनीकों को काटने वाले टूल खोना तथा लीक से हटकर सोचना होता है। इसके कई पुराने सदस्य बताते हैं कि यह यूनिट एक स्टार्टअप की तरह काम करती है और। हालाँकि, इसके सैनिक जमीन पर लड़ने के लिए भी भेजे जा सकते हैं।

इस यूनिट में करने वाले लगातार दुश्मनों के फोन, कम्प्यूटर समेत बाकी डिवाइस से जानकारी इकट्ठा करने के लिए काम करते हैं। इसके अलावा दुश्मन देशों की साइबर तकनीक को मात देना भी इनके एजेंडे में शामिल होता है। इस यूनिट का हाथ कई बड़े साइबरअटैक में बताया जाता है।

जबरदस्त है यूनिट 8200 का ट्रैक रिकॉर्ड

इजरायल की इस यूनिट के नाम कई कारनामे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बर्बाद करने में इस यूनिट की बड़ी भूमिका मानी जाती है। बताया जाता है कि इसने Struxnet नाम का एक वायरस बनाया था। इस वायरस के जरिए इस यूनिट ने ईरान के परमाणु संयत्रों पर हमला किया।

यह वायरस परमाणु संयत्रों में लगे सेंट्रीफ्यूज को अंदर से ही जला देता था। इसकी जानकारी लम्बे समय तक ईरान को नहीं हो पाई। सेंट्रीफ्यूज किसी भी परमाणु प्रोग्राम का प्रमुख हिस्सा होते हैं क्योंकि जरिए ही परमाणु पदार्थों जैसे यूरेनियम को विस्फोटक स्तर पर लाया जाता है।

इसके अलावा इस 8200 यूनिट ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से ऑस्ट्रेलिया जा रहे एक विमान को ISIS से हाइजैक होने से बचाया था। बताया गया था कि इस विमान पर ISIS हमला करता उससे पहले ही ऑस्ट्रेलिया की पुलिस को यह सूचना 8200 यूनिट ने दे दी और यह घटना टल गई।

लेबनान में अफरातफरी का माहौल

जहाँ एक ओर इजरायल इस हमले को लेकर शांत है, वहीं लेबनान के भीतर अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। लेबनान के भीतर अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में हुए धमाकों ने हिजबुल्लाह की चूलें हिला दी हैं। हिजबुल्लाह के सारे संचार माध्यम तबाह हो गए हैं। हिजबुल्लाह इसे खुद ही बड़ी चूक मान रहा है।

लेबनान में पेजरों में हुए धमाकों के बाद जिन लोगों की मौत हुई थी, उनके जनाजों में भी धमाके हो गए। यह धमाके वायरलेस में हुए। धमाके कैसे किए गए, इसमें क्या तकनीक उपयोग में लाई गई, इसका कुछ साफ पता अभी भी नहीं लग सका है। हिजबुल्लाह ने इजरायल से बदला लेने की बात कही है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा… सिर तन से जुदा’: UP के सिद्धार्थ नगर में खुलेआम ईद के मौके पर लगे नारे, जुलूस में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर से ईद-मिलाद-उन-नबी के मौके पर खुलेआम जुलूस में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगते सुनाई पड़े। सामने आई वीडियो में इस जुलूस में महिलाओं और बच्चों की अच्छी खासी संख्या देखी जा सकती है।

वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल किया जा रहा है कि आखिर कब तक ईशनिंदा के नाम पर की जा रही हत्याओं को जायज बताया जाता रहेगा। धीरे-धीरे अब तो ये नारे त्योहारों का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।

जुलूस की वीडियो क्लिप स्वराज की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने एक्स पर शेयर की है। उन्होंने वीडियो को शेयर कर सवाल पूछे। वहीं वीडियो के नीचे सिद्धार्थनगर पुलिस का जवाब भी आया। उन्होंने बताया कि इस घटना के संबंध में डुमरियागंज पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत हो गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सिद्धार्थनगर में गणेश विसर्जन के दौरान पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। कुछ अराजक तत्वों ने विसर्जन के दौरान पत्थरबाजी की थी। मामला शोहरतगढ़ से सामने आया था।

अब ईद के मौके पर सिद्धार्थ नगर से ऐसी भड़काऊ नारेबाजी की वीडियो प्रकाश में आई है। इसके अलावा मुरादाबाद में बारावफात जुलूस में भी विवादित नारेबाजी सामने आई। घटना की सूचना होने पर बजरंग दल के लोगों ने पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन किया। पुलिस ने इस मामले में भी केस दर्ज करके उचित कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

जगन सरकार में हुई तिरुपति मंदिर के प्रसाद से छेड़छाड़, लड्डू में मिलाई जाती थी जानवर की चर्बी: CM चंद्रबाबू नायडू के दावे के बाद YSRCP पर उठे सवाल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टी YSRCP पर निशाना साधते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसे सुन सब हैरान हैं। सीएम नायडू ने दावा किया है कि पहले की जगन सरकार में तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था।

उन्होंने ये खुलासा एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के दौरान किया। उनके दावे को सुन सब हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और भगवान वेंकटेश्वर को आंध्र प्रदेश के लोगों की सबसे बड़ी धरोहर है। एनडीए सरकार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने भोजन की गुणवत्ता खराब कर दी है। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के लड्डू के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल की।

उन्होंने बताया कि YSRCP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान, एक निजी ठेकेदार को घी की आपूर्ति का ठेका दिया था। बाद में लड्डू की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिलीं। पता चला कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हो रहा था उसमें जानवर की चर्बी थी। लड्डू की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब एनडीए सरकार ने 29 अगस्त को कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को घी देने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। जिसके बाद अब मंदिर में शुद्ध घी प्रयोग होता है।

बता दें कि तिरुपति मंदिर में भगवान के प्रसाद के लिए हर दिन लगभग 10 हजार किलो घी उपयोग होता है जिससे करीबन 3 लाख लड्डू बनते हैं। हर श्रद्धालु के लिए इस प्रसाद के बहुत मायने हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता से हुए खिलवाड़ में खुलासे के बाद अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा हो रही हैं। पूर्व की जगन सरकार लगातार सवालों के घेरे में हैं। वहीं सीएम नायडू के बयान को YSRC द्वारा खारिज कर दिया गया है। उन्होंने इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

मालूम हो कि जगन मोहन रेड्डी को सरकार पर एक तरफ जहाँ हिंदुओं की भावना आहत करने का आरोप लगा है तो वहीं दूसरी ओर उनपर ईसाई धर्म के प्रचार के आरोप लगते रहे हैं।

पेंटर बाबूराम को पीटा, मुकेश का पलटा ठेला: प्रशासन ने रोका था बारावफात का जुलूस तो गरीब हिंदुओं पर फूटा मुस्लिमों का गुस्सा, मंदिर में भी तोड़फोड़

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फल और सब्ज़ी बेचकर गुजारा करने वाले गरीब हिन्दुओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों पर कलावा पहने हिंदू ठेले वालों की पिटाई करने का आरोप लगा है। एक अन्य घटना में एक हिन्दू युवक की पिटाई भी की गई है। इसके साथ ही एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है।

बरेली पुलिस ने इस सभी मामलों में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन दोनों घटनाओं के पीछे हमलावरों ने हिन्दू संगठनों द्वारा मुस्लिमों के बारावफात के जुलूस को रोकने से उठा गुस्सा बताया है। जुलूस उसी जगह रोका गया था, जहाँ इसी साल मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा नई परम्परा बताते हुए काँवड़ यात्रा रोकी गई थी।

पेंटर को बेरहमी से पीटा

पहला मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र बारादरी का है। यहाँ विशाल ने मंगलवार (17 सितंबर) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि मंगलवार को रंगाई-पुताई का काम करने वाले उनके बहनोई बाबूराम कहीं जा रहे थे। इसी दौरान मुनीर और शाहनवाज ने 15-20 लोगों के साथ मिलकर बाबूराम को रोक लिया। प्याज-लहसुन का ठेला लगाने वाला एक अन्य व्यक्ति बाबूराम को देख कर भड़क उठा।

प्याज बेच रहे व्यक्ति ने बाकियों को उकसा कर कहा, “यही है जिसने हम लोगों के अंजुमनों को निकलने नहीं दिया था।” इतना सुनकर आसपास के लोग भड़क उठे। मुनीर, शाहनवाज ने अपने 15-20 साथियों के साथ मिलकर बाबूराम पर हमला बोल दिया और उन्हें लात-घूँसों से बेरहमी से पीटा। आसपास के लोग बीच-बचाव में जुटे तो आरोपित धमकी देते हुए वहाँ से भाग निकले।

जाते-जाते हमलावरों ने धमकी देते हुए कहा, “अगर दोबारा इधर दिखे तो जान से मार देंगे।” पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने हमलावरों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (1), 115 (2), 352, 351 (2) और 351 (3) के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुसंवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। फ़िलहाल हालत शांतिपूर्ण है।

पलट दिया गया गरीब हिन्दू का ठेला

वहीं, बरेली जिले का दूसरा मामला भी बारादरी थाना क्षेत्र से ही है। यहाँ विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने अपने X हैंडल पर आरोप लगाया है कि मुस्लिम युवकों ने ठेला लगाने वाले एक गरीब हिन्दू को पीटकर भगा दिया है। हिमांशु के मुताबिक, एजाजनगर क्षेत्र में हाथ में कलावा देखकर एक हिंदू युवक को पीटा गया है। बरेली पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है।

ऑपइंडिया ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मंगलवार (17 सितंबर) को मुकेश राठौड़ नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में मुकेश ने बताया है कि मंगलवार को उन्होंने साईं स्कूल के पास ठेला लगा रखा था। उसी दौरान गली के पास 40-50 की तादाद में आई भीड़ ने नारेबाजी करते हुए उस पर हमला कर दिया।

हमलावरों ने मुकेश के ठेले पर रखे तमाम सामान को उठाकर फेंक दिया। इसके साथ ही पीड़ित की पिटाई भी की। ऑपइंडिया के पास इससे संबंधित FIR की कॉपी मौजूद है। शिकायत में मुकेश ने बताया कि हमलावरों ने उनसे कहा, “अगर हमारा बारावफात का जुलूस निकलने दिया होता तो ये सब न होता।” जब लोगों की भीड़ जुटने लगी तो हमलावर वहाँ से भाग निकले।

मुकेश ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 131, 324 (4), 324 (5), 115 (2), 351 (2), 351 (3) और 196 के तहत FIR दर्ज की है। आरोपितों की पहचान व तलाश के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़

इसी बरेली के बारादरी क्षेत्र में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है। यहाँ के एरा रेडियोज इलाके में एक शिव मंदिर है। हिन्दू संगठन के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात 20 से 25 की संख्या में उपद्रवी मंदिर के आसपास जमा हुए थे। वो यहाँ खुराफात कर रहे थे।

लोगों का कहना है कि उन्हीं उपद्रवियों ने मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है। गुंबद और अन्य धार्मिक प्रतीकों को तोड़कर उसे फिर से जोड़ने का प्रयास किया गया। अगली सुबह जब हिन्दुओं को इस हरकत की सूचना मिली तो आक्रोशित हो गए। उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने ऐसी हरकतों को आए दिन की करतूत बताते हुए इस केस में पुलिस कार्रवाई को नजीर बनाने की माँग की है।

जहाँ रोकी गई थी काँवड़ यात्रा, वहीं रोका गया बारावफात का जुलूस

बताते चलें कि बरेली के बारादरी इलाके में रविवार (15 सितंबर) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बारावफात का जुलूस निकाला था। यह जुलूस उस मार्ग से गुजर रहा था, जहाँ इसी साल हिन्दुओं की काँवड़ यात्रा को मुस्लिम समुदाय ने नई परम्परा बताते हुए रोक दिया था। आखिरकार लंबी नोक-झोंक के बाद प्रशासन ने उस मार्ग पर यात्रा की अनुमति नहीं दी और बारावफात जुलूस का रुट बदल दिया।

पेजर वालों को दफनाने गए, दूसरे ब्लास्ट में उड़ गए… लेबनान में अब वॉकी-टॉकी में धड़ाधड़ विस्फोट, इजरायल के हमले में फिर कई हिज़्बुल्लाह वालों की मौत

इजरायल ने मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को लेबनान में रह रहे हिज़्बुल्लाह के सदस्यों के पेजर में विस्फोट किया, जिस कारण 4000 से अधिक लोग घायल हो गए और एक दर्जन की मौत हो गई। लेबनान की सरकार ने बताया है कि इस ब्लास्ट में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि हजारों वॉकी-टॉकी में ये ब्लास्ट हुआ है। हिज़्बुल्लाह के आतंकी फोन छोड़ कर पेजर और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल संचार के लिए करते थे, लेकिन अब इन्हीं में ब्लास्ट हो रहे थे।

हिज़्बुल्लाह के सूत्रों ने पुष्टि की है कि समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले वॉकी-टॉकीज को निशाना बनाया जा रहा है। विस्फोट बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के साथ-साथ दक्षिण लेबनान के नबातिया, टायर और सैदा शहरों में भी हुए। ये घटनाएँ उस हमले के एक दिन बाद आई हैं, जब हिज़्बुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर्स में विस्फोट हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी और 4000 से अधिक घायल हो गए थे।

इज़राइल ने इन ताज़ा विस्फोटों पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। रिपोर्टों में कहा गया कि ये विस्फोट छोटे पैमाने पर थे, लेकिन पिछले दिन हुए हमलों से मेल खाते हैं। लेबनान की राज्य-नियंत्रित नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) ने दावा किया कि देश के पूर्वी हिस्से बेक़ा क्षेत्र में हुए ताज़ा विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।एक विस्फोट उस समय हुआ जब हिज़्बुल्लाह द्वारा आयोजित एक अंतिम संस्कार में शामिल एक सदस्य के शरीर पर धमाका हुआ, जिससे वह ज़मीन पर गिर गया और आसपास की भीड़ भागने लगी।

माना जा रहा है कि मोसाद ने महीनों पहले हिज़्बुल्लाह द्वारा आयात किए गए हज़ारों पेजर्स में विस्फोटक लगाए थे, जो बाद में फट गए। पिछले अक्टूबर से उत्तरी इज़राइल पर 8,000 से अधिक रॉकेट दागे जा चुके हैं और इसके जवाब में इज़राइली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले, टैंक और तोपखाने से जवाबी कार्रवाई की है। हिज़्बुल्लाह लगातार इजरायल पर रॉकेट हमले करता रहता है। हिज़्बुल्लाह इस्लामी आतंकी संगठन है, जो फिलिस्तीन स्थित हमास की तरह ही हमले करता रहता है।

पार्क में अपने बच्चों संग टहल रही महिला को साथ चलने के लिए कहने लगा जावेद, मना किया तो ब्लेड से कर दिया ताबड़तोड़ वार: लोगों ने पकड़ धुना, फिर पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (17 सितंबर 2024) को छेड़खानी का विरोध करने पर जावेद नाम के व्यक्ति ने एक महिला को ब्लेड मार कर घायल कर दिया। एक पार्क में 2 बच्चों के साथ घूम रही थी। महिला की चीख सुनकर आसपास के लोगों ने आरोपित जावेद को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने जावेद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली के कोतवाली थाना क्षेत्र की है। यहाँ के पार्क में बारादरी इलाके की रहने वाली महिला घूमने-टहलने के लिए अक्सर आया-जाया करती थी। मंगलवार (17 सितंबर) की सुबह लगभग 11 बजे महिला पार्क में अपने 2 बच्चों के साथ घूमने आई थी। इसी दौरान जावेद वहाँ आया और पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दी और महिला पर साथ चलने का दबाव बनाने लगा।

पीड़िता ने जावेद की बात को अनसुना कर दिया और दूसरी तरफ चली गई। महिला के इनकार करने पर जावेद भड़क गया। उसने अपने पास छिपाकर रखी ब्लेड से पीड़िता पर वार करना शुरू कर दिया। हमलावर जावेद ने ब्लेड से पीड़िता का गला काटने की कोशिश की। हालाँकि, महिला खुद को बचाने में सफल रही। घायल पीड़िता चीखने लगी। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए।

उन्होंने जावेद को पकड़ कर धुन दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इपुलिस मौके पर पहुँचकर जावेद को हिरासत में ले लिया। पीड़िता से तहरीर लेकर आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर ली। इंस्पेक्टर कोतवाली ने बताया कि जावेद और पीड़िता पहले से परिचित रहे हैं। दोनों एक ही समुदाय के हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


जब आई मुश्किल परिस्थिति तो हनुमान चालीसा और ‘ॐ नमः शिवाय’ ने दिया साथ: साथ बैठे गौतम गंभीर और विराट कोहली, याद किए मैदान में हुए आध्यात्मिक अनुभव

BCCI ने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर और पूर्व कप्तान विराट कोहली के बीच चर्चा का एक वीडियो BCCI ने अपनी वेबसाइट पर जारी किया है। इस दौरान इन दोनों ने अपने आध्यात्मिक अनुभव को लेकर भी बात की। IPL के दौरान इन दोनों के बीच हुई बहस के बाद फैंस को इन दोनों को साथ देख कर ख़ुशी हुई है। गौतम गंभीर उस समय ‘लखनऊ सुपर जायंट्स’ के कोच थे, वहीं विराट कोहली RCB के कप्तान रहे हैं और अभी भी टीम के साथ हैं।

बांग्लादेश की टीम टेस्ट सीरीज खेलने के लिए भारत आई हुई है। ताज़ा चर्चा के दौरान दोनों ने बताया कि कैसे उन्हें आध्यात्मिक मदद मिली। गौतम गंभीर ने बताया कि कैसे विराट कोहली 2014 में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हर गेंद का सामना करने से पहले ‘ॐ नमः शिवाय’ जप रहे थे। इसी टेस्ट सीरीज में तब कप्तान रहे MS धोनी ने संन्यास का ऐलान किया था। विराट कोहली ने उस सीरीज में 86.50 की औसत से 692 रन मारे थे, जिनमें 4 शतक थे।

गौतम गंभीर ने याद किया कि विराट कोहली ने बताया था कि वो हर गेंद से पहले ‘ॐ नमः शिवाय’ जपते थे और इसके बाद उन्हें खेलने में सुविधा होती थी। गौतम गंभीर ने याद किया कि जब वो न्यूजीलैंड के नेपियर में खेल रहे थे तब भी ऐसा ही था। न्यूजीलैंड की जीत को टालने के लिए तब गौतम गंभीर ने 436 गेंदों में 137 रनों की पारी खेली थी। गौतम गंभीर ने कहा कि क्या वो ढाई दिन बल्लेबाजी कर सकते थे, उन्हें लगता है कि वो दोबारा ऐसा नहीं कर सकते थे।

गौतम गंभीर ने बताया कि इन ढाई दिनों में जो एक चीज उन्होंने की वो है लगातार हनुमान चालीसा सुनना। उन्होंने बताया कि VVS लक्ष्मण ने बताया था कि वो सिर्फ बल्लेबाजी के समय सिर हिलाते थे, कुछ भी बोलते नहीं थे। बकौल गौतम गंभीर, वापस लौट कर वो सिर्फ हनुमान चालीसा सुनते थे और फिर मैदान में आकर अपने ज़ोन में चले जाते थे। गौतम गंभीर की वो पारी 10 घंटे और 43 मिनट चली थी। उन्होंने भारत को हार से बचा कर मैच ड्रॉ करवाया था।

यदि गणेश पूजा में हानिकारक तो ईद में भी लाउडस्पीकर खतरनाक: बॉम्बे हाई कोर्ट की दो टूक, कहा- ध्वनि प्रदूषण से जुड़ा आदेश मजहबी आयोजनों पर भी लागू

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (18 सितंबर 2024) को कहा कि यदि गणेश उत्सव के दौरान स्वीकार्य ध्वनि सीमा से अधिक लाउडस्पीकर बजाना हानिकारक है तो यह ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान भी इस स्तर पर लाउडस्पीकर बजाना हानिकारक है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की दो न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

इन जनहित याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूसों के दौरान ‘डीजे’, ‘डांस’ और ‘लेजर लाइट्स’ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। उन्होंने बॉम्ब हाई कोर्ट के पीठ से आग्रह किया था कि वह नगर निकायों और पुलिस को निर्देश जारी बेहद ऊँची आवाज के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के उपयोग की अनुमति ना दे।

याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ना तो मुस्लिमों की दीनी किताब कुरान में ही और न ही हदीस में ही इस उत्सव के लिए डीजे सिस्टम और लेजर लाइट के उपयोग के लिए का गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ओवैस पेचकर ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अपने पहले के आदेश में ईद को भी शामिल करें।

कार्यवाही के दौरान पीठ ने पिछले महीने गणेश उत्सव से पहले पारित अपने पहले के आदेश का हवाला दिया। अपने पहले के आदेश में पीठ ने त्योहारों के दौरान मान्य सीमा से अधिक शोर करने वाले ध्वनि प्रणालियों और लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया था। बता दें कि स्वीकार्य सीमा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत दी गई है।

ओवैस पेचकर की बात पर पीठ ने कहा कि आदेश में ‘सार्वजनिक उत्सवों’ का उल्लेख किया गया था। याचिकाओं का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा, “यदि यह गणेश चतुर्थी के लिए हानिकारक है तो यह ईद के लिए भी हानिकारक है।” इस बीच लेजर लाइट के इस्तेमाल और इसके कथित नुकसान के बारे में दो जजों की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से अपने दावे के समर्थन में वैज्ञानिक सबूत पेश करने को कहा।

पीठ ने यह साबित करने के लिए शोध कार्य की माँग की कि ऐसी लाइटों का इंसानों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। बॉम्बे हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, “आपने अपना शोध क्यों नहीं किया? जब तक यह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो जाता कि इससे मनुष्यों को नुकसान होता है, हम ऐसे मुद्दे पर कैसे निर्णय ले सकते हैं?”

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाओं से अदालतों को उनकी दलीलों पर प्रभावी निर्देश देने में मदद मिलनी चाहिए, क्योंकि उनके पास सभी मुद्दों पर विषय वस्तु विशेषज्ञता नहीं है। पीठ ने कहा, “यही समस्या है। जनहित याचिका दायर करने से पहले आपको बुनियादी शोध करना चाहिए। आपको प्रभावी निर्देश देने में अदालत की सहायता करनी चाहिए। हम विशेषज्ञ नहीं हैं। हम लेजर का ‘एल’ नहीं जानते।”

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

संयोग से इसी प्रकार की एक याचिका पर 17 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों, समारोहों और त्योहारों के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में लाइट लेजर बीम और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नियमित करने की माँग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ में CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा शामिल थे।

याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 अप्रैल के आदेश को चुनौती देने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने धार्मिक जुलूसों और अन्य समारोहों के दौरान स्वीकार्य सीमा से ज़्यादा लेज़र बीम और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल के खिलाफ़ जनहित याचिका का निपटारा कर दिया था।

कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले में कोई ठोस निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें पीड़ित व्यक्तियों द्वारा अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ध्वनि प्रणालियों और लाउडस्पीकरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए, जो तब स्वीकार्य ध्वनि सीमाओं पर स्थापित नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

मस्जिद के आगे जुटी मुस्लिम भीड़ ने रोका गणेश विसर्जन का जुलूस, श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे और पाइपों से हमला: कहा – बंद करो DJ

गुजरात के खेड़ा जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ गणेश विसर्जन के जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया है। यह हमला तब हुआ जब जुलूस एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था। हमलावरों की तादाद 150 से 200 के बीच बताई जा रही है जिनके हाथों में लाठी-डंडे और पाइप थीं। इस हमले के लिए DJ का बहाना बनाया गया। घटना मंगलवार (17 सितंबर, 2024) की है। पुलिस ने जैसे तैसे हालत को संभाला। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना खेड़ा जिले के गाँवों इलाके की है। मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को यहाँ हिन्दू समुदाय के लोगों ने गणेश विसर्जन का जुलूस निकाला था। इस जुलूस में सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे। श्रद्धालुओं में युवाओं के साथ वृद्ध और बच्चे भी शामिल थे। जुलूस में एक DJ भी था जिसमें धार्मिक गाने बज रहे थे। बताया जा रहा है कि जब श्रद्धालु बाजार में मौजूद जामा मस्जिद के पास पहुँचे तो कुछ मुस्लिमों ने उनका रास्ता रोक लिया।

मुस्लिमों की एक भीड़ ने श्रद्धालुओं से DJ बंद करने को कहा। जब हिन्दुओं ने ऐसा करने से मना किया तो दोनों पक्षों में तनातनी होने लगी। कुछ ही देर में मुस्लिम पक्ष की तरफ से भीड़ जमा हो गई। इस भीड़ में 150 से 200 लोग बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन सभी के पास लाठी-डंडे, लोहे की पाइप और अन्य हथियार भी थे। इस भीड़ ने श्रद्धालुओं पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें भी आईं हैं जिनका इलाज करवाया गया है।

इस बीच विवाद की सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए हालात को नियंत्रण में लिया। स्थानीय विधायक कल्पेश परमार भी घटनास्थल पर गए। उन्होंने लोगों से शाँति बनाए रखने की अपील की। हिन्दू संगठनों ने इस हमले के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठानी शुरू कर दी। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी हमलावर मुस्लिम समुदाय से बताए जा रहे है।

पुलिस अधीक्षक खेड़ा राजेश गढ़िया के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि केस दर्ज कर के जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ अन्य हमलावरों को भी चिह्नित किया जा रहा है।