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मस्जिद के सामने गणपति विसर्जन जुलूस पर हमला: कर्नाटक के मांड्या में इस्लामी कट्टरपंथियों ने फेंके पत्थर, तलवार दिखा लगाई आग

कर्नाटक के मांड्या जिले के नागमंगला कस्बे से गणपति विसर्जन के दौरान पथराव की घटना सामने आई है। 11 सितंबर 2024 की रात हुई इस पत्थरबाजी के बाद इलाके में तनाव फैल गया। दो पक्ष आमने-सामने आ गए। झड़प हुई, दुकानों और वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस ने हालात संभालने के लिए इलाके में कुछ प्रतिबंध लगाए। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी। अब पूरा क्षेत्र हाई अलर्ट पर है।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, घटना तब हुई जब बदरीकोप्पलु गाँव के युवक कस्बे में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस जैसे ही एक दरगाह/मस्जिद(रिपोर्टों में कहीं दरगाह बताया जा रहा है कहीं पर मस्जिद) के पास पहुँचकर सड़क पार करने वाला था, तभी मैसूर रोड पर जुलूस निकालने को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इस विवाद को देखते हुए उपद्रवियों ने जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके अलावा लोगों को हथियार भी दिखाए गए।

पुलिस ने घटना की सूचना होते ही भीड़ को इधर-उधर किया। हालाँकि विसर्जन के बीच भड़की इस तरह की हिंसा को देखते हुए जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस थाने के सामने गणेश मूर्ति रख दी और न्याय की माँग करने लगे। इस बीच कुछ जगह दुकानों को जलाने और टायर फूँककर आक्रोश दिखाने भी खबरें मीडिया में आई हैं।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में मांड्या के एसपी मल्लिकार्जुन बालडंडी ने बताया- मस्जिद के सामने जुलूस के पहुँचने के बाद बहस हुई। पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया। जरूरत पड़ने पर लाठीचार्ज की। कुछ लोग थाने के सामने आ गए और विरोध करने लगे। सड़क पर खड़ी 4-5 बाइकों में आग भी लगाई गई। अब स्थिति नियंत्रण में हैं। इलाके में दमकल गाड़ियाँ और पुलिसकर्मी तैनात हैं।

वहीं केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस राज्य में एक समुदाय के तुष्टिकरण के कारण ये सब हुआ। उन्होंने इस घटना को शांति और व्यवस्था के विरुद्ध हुई घटना बताया।

उन्होंने कहा कि जब गणपति विसर्जन के समय लोग आराम से जुलूस निकाल रहे थे तो पत्थर और चप्पल पहनने की जरूरत क्या थी। क्या जरूरत थी पेट्रोल बम फोड़ने की, तलवार दिखाने की। वहीं भाजपा नेता सीटी रवि ने इस मामले को पत्थर आतंकवाद का नाम दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का इलाज को सिर्फ यूपी सरकार वाले अंदाज में होना चाहिए।

बता दें कि कर्नाटक के मांड्या से पहले भी गणपति विसर्जन के दौरान हिंसा की घटनाएँ घटी। गुजरात के सूरत में भी पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने पथराव किया था। इसके अलावा लखनऊ में भी इस्लामी भीड़ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए पंडाल पर अटैक किया था। वहीं वडोदरा में भी गणेश पंडाल का विरोध करते हुए मुस्लिमों ने अपने घर के बाहर अरबी झंडे लगा लिए थे। इसके अलावा कच्छ में भी भगवान गणेश की प्रतिमा पर हमला हुआ था। वहीं भरूच में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर मजहबी झंडे लगाने को लेकर बवाल हुआ था।

एक पैर नाबालिग लड़की की जाँघ पर रखा, दूसरा प्राइवेट पार्ट पर… जूते दिखाने के बहाने ले गया था दुकानदार उमर कुरैशी, देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक हिन्दू छात्रा से छेड़खानी के बाद साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया है। यहाँ शनिवार (7 सितंबर 2024) को शहर में जूते खरीदने गई एक नाबालिग लड़की से मुस्लिम दुकानदार ने ही छेड़खानी की। आरोपित का नाम उमर कुरैशी है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। पुलिस ने उमर को गिरफ्तार कर लिया है।

उमर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अवैध वेंडरों के सत्यापन का अभियान छेड़ दिया है। अब तक 92 संदिग्ध वेंडरों को हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना देहरादून के पलटन बाजार की है। शनिवार (7 सितंबर) को यहाँ एक नाबालिग लड़की अपने लिए जूते खरीदने गई थी। बाजार में वह 24 वर्षीय दुकानदार उमर की शॉप पर पहुँची।

आरोप है कि उमर पीड़िता को जूते दिखाते हुए छेड़खानी करने लगा। पीड़िता वहाँ से लौट आई और अपने घरवालों को पूरी बात बताई। पीड़िता के साथ उसके परिजन थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने उमर के खिलाफ पुलिस में तहरीर देकर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर उमर को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है।

उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। उमर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में उसने अपना पता उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में थानाक्षेत्र कीरतपुर के गाँव बुडगेरा बताया है। इस बीच मामले की जानकारी हिन्दू संगठन के सदस्यों को हुई। उन्होंने आरोपित पर कठोर कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हिन्दू संगठनों के मुताबिक, पीड़िता दुकान में गई तो उसने 300 रुपए का सामान खरीदा। इसके बाद उमर ने नाबालिग को ऊपरी फ्लोर पर भेज दिया। ऊपर उमर ने पीड़िता को ऊँचे स्टूल पर बिठाया और खुद नीचे बैठ गया। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता का एक पैर अपनी जाँघ और दूसरा अपने प्राइवेट पार्ट पर रख दिया। फिर उसने पीड़िता की जाँघ पर हाथ फेरकर पूछा, “बताओ सैंडिल कैसी लग रही है।”

उमर कुरैशी की इस हरकत से पीड़िता टेंशन में आ गई। उसने खुद को बचाने के लिए स्टील का ग्लास हाथ में उठा लिया और उमर कुरैशी को मारकर भाग गई। हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उमर कुरैशी के समर्थन में खड़े भी हुए थे। आरोप लगाया गया कि देहरादून की मस्जिद पर मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा होकर मारने-काटने को तैयार हो गए थे।

इस घटना के विरोध में हुए प्रदर्शन में महिलाएँ भी शामिल थीं। उन्होंने सम्मान के लिए जान देने तक का एलान कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने विरोध के दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘हिन्दू एकता जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। पलटन बाजार के हिन्दू दुकानदारों ने भी इस घटना के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं। इस घटना के बाद पुलिस ने मुस्तैदी बढ़ा दी है।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर जिले में अवैध वेंडरों की पहचान का सघन अभियान छेड़ा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 92 अवैध वेंडरों को हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। बाजार में सुरक्षा के मद्देनजर महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है।

‘सब घर जाओ, हम इसे दुआ सिखाएँगे’: मदरसे में दीनी तालीम लेने गई नाबालिग छात्रा से रेप… गोरखपुर पुलिस ने मौलवी रहमत अली को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में सोमवार (9 सितंबर 2024) को मदरसे में एक नाबालिग छात्रा से रेप की घटना सामने आई है। पीड़िता मदरसे में दीनी तालीम लेने जाती थी। रेप का आरोप मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी रहमत अली पर लगा है। आरोपित ने बच्ची को पढ़ने में तेज करने की दुआ सिखाने का झाँसा दिया था। ग्रामीणों ने मौलवी को पकड़ कर पहले धुना फिर पुलिस के हवाले किया।

यह घटना गोरखपुर के थाना क्षेत्र उरुवा की है। यहाँ की रहने वाली 12 वर्षीया पीड़िता की माँ ने सोमवार (9 सितंबर 2024) को पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सरकारी स्कूल के बगल में स्थित मदरसे में मजहबी तालीम लेने जाती थी। घटना के दिन रोजाना की तरह पीड़िता सुबह 8 बजे पढ़ने गई थी। लगभग 9:30 तक सभी बच्चों की छुट्टी कर दी गई।

छुट्टी के बाद मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी रहमत अली ने सारे बच्चों को घर भेज दिया और पीड़िता को वहीं रोक लिया। काफी देर तक जब बच्ची घर लौटकर नहीं आई तो पीड़िता अपनी बेटी को खोजने मदरसा में गई। वहाँ पर मौलवी बच्ची के साथ रेप करता दिखाई दिया। बच्ची की माँ को देखकर मौलवी बच्ची को छोड़कर अलग हो गया।

थाने में तहरीर देकर पीड़िता की माँ ने आरोपित मौलवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना के बाद पीड़िता डरी सहमी है। आरोपित मौलवी रहमत अली के अब्बा का नाम जुमराती है। वह मूल रूप से UP के ही संतकबीरनगर जिले का रहने वाला है। लगभग 50 वर्षीय रहमत अली शादीशुदा बताया जा रहा है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने रहमत अली को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (2) (F) और 65 (1) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गोरखपुर जिले के पुलिस अधीक्षक दक्षिणी ने बताया कि आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवा कर अदालत में बयान दर्ज करवाए गए हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जिस मदरसे की यह घटना है, वह गाँव के सरकारी स्कूल के एकदम पास ही बना हुआ है। मदरसे को एक निर्माणाधीन मकान में चलाया जा रहा है। बच्ची इसी मदरसे में जाती थी।

सब जाओ, हम इसे दुआ सिखाएँगे

एक स्थानीय पत्रकार का दावा है कि निर्माणाधीन इमारत अंदर ही अंदर मस्जिद की शक्ल ले रही है। दावा किया गया है कि इस इमारत से अजान भी दी जाती है। इसी रिपोर्ट में एक बच्चे ने कहा कि मौलवी ने अन्य छात्रों से कहा, “तुम लोग जाओ, हम इसको दुआ सिखाएँगे।” सरकारी स्कूल से कुछ बच्चे मदरसे की तरफ गए तब मौलवी की करतूत का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि पीड़िता की उम्र लगभग 12 साल है। उसकी एक बहन भी इसी मदरसे में पढ़ती है, लेकिन मौलवी ने उसको भी घर भेज दिया था। इसी मदरसे के एक अन्य छात्र के मुताबिक, बच्ची पढ़ने में कमजोर थी इसलिए मौलवी ने उसे दुआ पढ़ कर तेज कर देने का झाँसा दिया था।

रेप से पहले मौलवी रहमत अली ने बच्चों को नमाज़ पढ़ना और दुआ करना सिखाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची की चीखें सबसे पहले सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने सुनी थी। आरोपित मौलवी को लोगों ने पकड़ कर पहले धुना और फिर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है।

कालिंदी एक्सप्रेस को बेपटरी करने के आरोप में हिस्ट्रीशीटर शाहरुख खान गिरफ्तार, ISIS कनेक्शन का शक: इस ट्रेन में 2019 में हो चुका है धमाका, हमले का दिया गया था ‘पैगाम’

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश के मामले में शाहरुख खान नाम के एक हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया है। जब उसे गिरफ्तार किया गया तो वह घटनास्थल से कुछ दूर चला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के बाद छह संदिग्धों को छोड़ दिया गया और मुख्य संदिग्ध शाहरुख खान को पकड़ लिया गया।

अब तक की जाँच में उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रेन को पलटने की साजिश में आतंकवादियों के शामिल होने के कई सबूत मिले हैं। कई सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई जाँच में पता चला है कि ट्रेन पलटने की साजिश रचने वाला आरोपित शाहरुख खान एक कट्टरपंथी है। उसके खूंखार आतंकी संगठन ISIS के खुरासान मॉड्यूल से संदिग्ध संबंध हैं।

बता दें कि 9 सितंबर 2024 को कानपुर में अनवरगंज-कासगंज रूट पर चल रही कालिंदी एक्सप्रेस (14117) एक बड़ी दुर्घटना से बच गई थी। पटरी पर गैस सिलिंडर देखकर लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर गाड़ी रोक दी थी। इससे एक बड़ा हादसा टल गया था। सिलेंडर से टकराने के बाद सिलिंडर में तेज धमाका हुआ था।

लोको पायलट ने बताया था कि उसे पटरी पर कोई संदिग्ध चीज दिखी थी, लेकिन जब तक वह ब्रेक लगाए तब उससे टक्कर हो गई और धमाके की आवाज हुई। मौके पर पहुँची पुलिस को जाँच में यहाँ से LPG सिलेंडर मिला। इसके आसपास एक पेट्रोल की बोतल और माचिस भी मिली। मौके पर से एक झोला भी मिला, बताया गया है कि इसमें बारूद थी।

ट्रेनों को पटरी उतारने की कई कोशिशें

पुलिस ने बताया है कि सिलेंडर को ट्रेन की पटरी पर ही रखा गया था जो हादसे के दौरान रगड़ खा गया। बीते कुछ समय में कई ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें जानबूझ कर ट्रेन की पटरी पर ऐसे सामान रखे गए जिनसे ट्रेन पलट सकती थी। इससे पहले 17 अगस्त, 2024 को कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के साथ भी दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।

इसके अलावा, अलीगढ़ में पटरी पर एक मोटरसाइकिल का पहिया रखा गया था। इस मामले में अफसान नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। यह सभी मामले तब सामने आए हैं जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी भारत में ट्रेन और बाकी इन्फ्रा को निशाने पर लेने की बात कर रहा है। पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने यह काम स्लीपर सेल से करने को कहा था।

सामने आए वीडियो में आतंकी गोरी ने कहा था कि ED आतंक की कमर तोड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए उसने देश भर में इन्फ्रा पर हमला करने को कहा था। वीडियो में गोरी बता रहा है कि कैसे ट्रेनों में अलग-अलग तरीके से धमाके किए जा सकते हैं। वह इसके लिए प्रेशर कुकर जैसी चीजों से बम बनाने का भी आईडिया दे रहा है। वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की शह पर काम कर रहा था।

साल 2019 में कालिंदी एक्सप्रेस में हुआ था विस्फोट

इससे पहले 21 फ़रवरी 2019 को कानपुर-भिवानी कालिंदी एक्सप्रेस बम विस्फोट हुआ था। इसमें किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं आई थी। विस्फोट की जाँच करते समय सुरक्षा एजेंसियों को जैश-ए-मोहम्मद के संचालक द्वारा लिखा गया एक पत्र मिला था। पत्र में RDX के प्रयोग से रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की साज़िश का विवरण था।

इस पत्र में शताब्दी एक्सप्रेस और दिल्ली-कानपुर मार्ग पर बने एक पुल पर हमला करने के बारे में भी लिखा था। कालिंदी एक्सप्रेस ने शाम 5:30 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन से भिवानी, हरियाणा की ओर यात्रा निकली थी। ट्रेन कानपुर से 40 किलोमीटर दूर बर्राजपुर स्टेशन पर शाम करीब 6:40 बजे पहुँची। बम धमाका सामान्य डिब्बे के टॉयलेट में हुआ था।

पत्र के मुताबिक कानपुर से 30 किमी दूर 27 फरवरी को एक पुल पर एक विस्फोट होना निर्धारित किया गया था। फिर, डेढ़ किलो RDX का उपयोग करके कानपुर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर हमला किया जाना था। हमले से एक दिन पहले विस्फोटकों को दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल पर सौंप दिया जाना था। पत्र के ऊपरी भाग पर 786 और शब्द “पैगाम” लिखा था।

सूरत, कच्छ और भरूच… गुजरात के कई इलाकों में गणेश उत्सव पर मज़हबी उन्माद: कहीं बच्चों को किया आगे, कहीं मदरसों में ट्रेनिंग, कहीं पुलिसकर्मियों की हत्या की साजिश

गणेश चतुर्थी पर गुजरात के 3 अलग-अलग शहरों से साम्प्रदायिक तनाव की खबरें आईं हैं। यहाँ सूरत और कच्छ जिलों में पंडालों पर पत्थरबाजी की गई है। इन हमलों में मूर्तियों को नुकसान पहुँचा है। भरूच जिले में भी दोनों समुदायों के बीच तनातनी की खबर है। यहाँ हिन्दुओं के घरों पर इस्लामी झंडा लगाया गया है। पुलिस ने इन सभी मामलों में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक दर्जनों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

पहला मामला सूरत जिले का है। यहाँ के वरियाली बाजार में एक गणेश पंडाल पर पत्थरबाजी हुई है। बताया जा रहा है कि इस पथराव में मुस्लिम समुदाय के नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। पंडाल में पानी के पाउच भी फेंके गए थे। हमलावर रिक्शे में आए थे जिन्होंने पंडाल पर पथराव किया। इस हरकत के बाद क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया। हजारों हिन्दू सकड़ों पर आ गए। हालात काबू करने के लिए पुलिस बल पहुँचा। आरोप है कि मुस्लिम बहुल इलाकों से पुलिस और हिन्दुओं पर पत्थरबाजी की गई थी।

हमले के लिए नाबालिगों का गिरोह

इस हमले का मास्टरमाइंड भी मुस्लिम समुदाय का एक नाबालिग बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि गणेश प्रतिमाओं पर पत्थर और पानी फेंकने की ट्रेनिंग उसे एक मदरसे में 3 महीने से मिल रही थी। उसने अपने साथ 6 अन्य नाबालिगों को इकट्ठा कर के गिरोह बनाया था। इस गिरोह ने 10 प्रतिमाओं पर पत्थरबाजी की साजिश रची। पहले टारगेट के तौर पर ‘वरियाली च राजा’ की गणेश प्रतिमा को चुना गया था।

पहले इस साजिश को शनिवार (7 सितंबर) को अंजाम देने की कोशिश हुई। हालाँकि उस दिन मौका नहीं मिला तो अगले दिन रविवार को यह हरकत की गई। नाबालिगों के इस गिरोह ने 6 सितंबर को ही सैदयपुरा में एक गणेश पंडाल पर पानी के पाउच फेंके थे जिसे श्रद्धालुओं ने नजरअंदाज कर दिया था। हालाँकि पुलिस उन रिक्शों के मालिकों और चालकों की भी भूमिका जाँच रही है जिसमें बैठ कर ये आरोपित घटना को अंजाम दे रहे थे। वह मदरसा भी पुलिस की रडार पर है जहाँ नाबालिग को पथराव की ट्रेनिंग दी गई थी।

लगाए गए अल्लाह हु अकबर के नारे

अब तक की जाँच में इस हमले के पीछे किसी सगीर का नाम सामने आया है। पथराव से पहले सगीर के साथ मौजूद नाबालिग मुस्लिम बच्चों को मस्जिदों से खाने-पीने का सामान दिया गया था। पथराव के समय नाबालिग आरोपित ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगा रहे थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के अब तक कुल 27 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में कई नाबालिग भी हैं जिनकी उम्र 12 से 13 साल के बीच बताई जा रही है।

गणेश प्रतिमा पर ये नाबालिग हमला कर के भाग रहे थे कि श्रद्धालुओं ने इन्हे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। नाराज हिन्दू थाने पर जमा हो कर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसी दौरान मुस्लिम भीड़ पत्थरबाजों के समर्थन में आ गई। दोनों पक्षों में भिड़ंत जैसे हालत बन गए। पुलिस ने हालात संभालने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।पुलिस हालात को संभाल ही रही थी कि मुस्लिम भीड़ ने उन पर भी पत्थरबाजी शुरू कर दी। यह पथराव एक मस्जिद के पास बने 4 घरों से हुआ था।

पुलिस वालों तक की हत्या की साजिश

हमलावर भीड़ की पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में DCP भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि मस्जिद के पास मौजूद घरों पर पूरी तैयारी के साथ पत्थर रखे गए थे। जब पुलिस ने पत्थरबाजों को पकड़ने के लिए कॉम्बिंग शुरू की तो मुस्लिमों के 27 घरों में एक साथ अँधेरा कर दिया गया। बताया जा रहा है कि पत्थरबाजों को भी सोची-समझी साजिश के तहत भगा दिया गया था। जिस सैयदपुरा क्षेत्र से पत्थरबाजी की गई थी उधर बुलडोजरों को भेजा गया है। सैयदपुरा के कुछ मुस्लिम नेताओं से भी पुलिस ने पूछताछ की है।

पुलिस की जाँच में यह भी पता चला है कि नाबालिग हमलावरों को ट्रेनिंग दी गई थी कि वो पुलिस वालों के सिर पर वार करेंगे तो उनकी मौत हो जाएगी। इस मामले में पुलिस ने 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। पहला केस गणेश प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश करने वाले नाबालिगों पर दर्ज हुआ है। वहीं दूसरी FIR पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ दर्ज हुई है। यह FIR हत्या के प्रयास, बलवा, तोड़फोड़ और अन्य धाराओं में दर्ज हुई है।

सूरत की इस घटना में अब तक कुल 26 आरोपितों के नाम सामने आए हैं। इसमें से कईयों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपित की 2 दिनों की कस्टडी रिमांड भी कोर्ट ने मंजूर कर दी है। घटना में सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय से हैं। जिस पंडाल को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया था वहाँ गुजरात के गृह राजयमंत्री हर्ष संघवी भी पहुँचे। यहाँ उन्होंने गणपति की आरती की और एलान किया था कि धरती पर सूरज की पहली किरण पड़ने से पहले आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गुजरात पुलिस ने गृह राजयमंत्री के इस संकल्प को पूरा भी किया था।

कच्छ में भी गणेश पंडाल पर पथराव

सूरत की ही तरह कच्छ में भी गणेश पंडाल पर पत्थरबाजी की गई है। यहाँ भी पथराव के लिए मुस्लिम समुदाय के नाबालिग लड़कों का इस्तेमाल किया गया है। इस पथराव से भगवान गणेश की मूर्ति टूट गई। पंडाल के पास ही एक हिन्दू मंदिर पर हरे रंग का इस्लामिक झंडा भी लगा दिया गया था। इस घटना के बाद हालत तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने केस दर्ज कर के 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना कच्छ के नखत्राणा के कोटा क्षेत्र की है। यहाँ के गाँव जारोदर में हिन्दू समुदाय के लोगों ने पंडाल में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है। 10 सितंबर 2024 (मंगलवार) को शेयर किए गए वीडियो में आरोप लगाया गया है कि इस पंडाल पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी की है। इस पत्थरबाजी से गणेश प्रतिमा की नाक टूट गई है। हमलावरों ने पंडाल के ही पास एक हिन्दू मंदिर में इस्लामिक झंडा भी गाड़ दिया। इस घटना के बाद आसपास तनाव फ़ैल गया।

लोगों ने पुलिस पर भी कार्रवाई में ढिलाई करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के अब तक 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपितों के नाम मौलाना गुलाम हुसैन जाफर, आसिफ सुमरा पढियार, साहिल रमजान और हनीफ जुसन हैं। गिरफ्तार हुए 3 अन्य आरोपित नाबालिग हैं। कच्छ-पूर्व जिला के पुलिस प्रमुख सागर बागमार ने मीडिया से बताया कि अब गांव में शांति है और मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

भरूच में भी साम्प्रदायिक तनाव

गणेश चतुर्थी के पर्व पर कट्टरपंथियों ने गुजरात के ही भरूच जिले में भी हंगामा किया है। यहां मज़हबी झंडा लगाने के मामले को ले कर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष आमने-सामने आ गए। इस घटना की वजह से शहर में तनाव फ़ैल गया। घटना 10 सितंबर (मंगलवार) की है। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को संभाला। प्रभावित इलाकों में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

यह घटना भरूच जिले के गोकुलनगर क्षेत्र की है। यहाँ मिश्रित आबादी है। गणेश चतुर्थी के पर्व के मौके हिन्दू समुदाय के लोग अपने धार्मिक झंडे लगा रहे थे। इसी दौरान मुस्लिम पक्ष के लोगों ने अपनी आने वाली ईद की बात कह कर अपने इस्लामी झंडे और तोरण लगाने शुरू कर दिए। हिन्दुओं ने अपने घरों के पास तोरण न लगाने की अपील की लेकिन इसका मुस्लिम पक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा और तोरण लगाना जारी रहा। इसी बात पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

बताया जा रहा है कि थोड़ी देर की बहस के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। विवाद में 2 लोग घायल हो गए हैं। इस विवाद की सूचना मिलते ही फ़ौरन ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को देखते ही उपद्रवी छिपने लगे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इलाके में फ़ोर्स लगा दी गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के पूरे मामले की जाँच भी शुरू कर दी है। एसपी मयूरसिह के मुताबिक CCTV फुटेज व अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

पहले रोटियों पर थूका, फिर चुपड़ा उसमें बलगम: बागपत के गुलज़ार ढाबे का कारीगर सद्दाम हुसैन गिरफ्तार, मालिक एहसान भी नामजद

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक ढाबे पर रोटी बना रहे सद्दाम हुसैन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कारीगर सद्दाम को तंदूरी रोटियों पर थूकते देखा जा सकता है। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया है। सद्दाम के साथ होटल मालिक एहसान को भी नामजद किया गया है। यह घटना सोमवार (9 सितंबर 2024) की बताई जा रही है।

मामला बागपत जिले के कोतवाली शहर की है। यहाँ मंगलवार (10 सितंबर 2024) को थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार ने अपने थाने में एक तहरीर दी। इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर एक होटल का वायरल वीडियो मिला। जाँच में यह होटल बागपत के दिल्ली रोड स्थित गुलजार होटल का निकला। इस वीडियो में तंदूर के पास खड़ा कारीगर रोटियों पर 2 थूकता दिखा।

पुलिस का आरोप है कि कारीगर ने रोटियों पर बलगम भी लगाया। हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार के मुताबिक, कारीगर की इस हरकत से संक्रामक बीमारियाँ फैलने का खतरा है। पुलिस ने फ़ौरन होटल के मालिक गुलजार से बात की। गुलजार ने बताया कि उन्होंने अपना ढाबा फूंस वाली मस्जिद के पास रहने वाले एहसान को दे रखा है।

एहसान द्वारा चलाए जा रहे ढाबे में रोटी बनाने के लिए सद्दाम हुसैन नियुक्त था। सद्दाम हुसैन उत्तर प्रदेश के बागपत शहर में काजियान मस्जिद के पास रहता है। उसकी हरकत निंदनीय बताते हुए हेड कॉन्स्टेबल धीरज कुमार ने उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 271, 272 और 274 के तहत दर्ज हुई है।

इस FIR में होटल मालिक एहसान को भी नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी मौजूद है। बुधवार (11 सितंबर 2024) को पुलिस ने बताया कि आरोपित सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

विदेश से करोड़ों की फंडिंग, निशाने पर गरीब-दिव्यांग एवं महिलाएँ: देश भर में धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले मौलाना कलीम और मौलाना उमर सहित 12 को उम्रकैद

देश में अवैध धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाले वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम सहित 12 आरोपितों को उम्रकैद की सजा मिली है। इसके अलावा, चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। यह सजा लखनऊ स्थित NIA की कोर्ट ने सुनाई है। कोर्ट ने इन सभी को कल दोषी करार दिया था और सजा का ऐलान बुधवार (11 सितंबर 2024) को किया।

कोर्ट ने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को मौलाना उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी सहित 16 आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं, इदरीस कुरैशी नाम के आरोपित को हाई कोर्ट से स्टे मिल गया था। NIA-ATS कोर्ट ने इन्हें धारा 417, 120B, 153A, 153B, 295A, 121A, 123 और अवैध धर्मांतरण की धारा 3, 4, और 5 के तहत दोषी पाया है।

इन धाराओं में दोषियों को 10 साल से लेकर अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। NIA-ATS कोर्ट ने मौलाना उमर और मौलाना कलीम समेत 12 दोषियों को अधिकतम सजा उम्रकैद की सुनाई है। वहीं, जिन चार दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है, उनके नाम हैं – राहुल भोला, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मोहम्मद सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ।

ये सभी दोषी उत्तर प्रदेश एवं अन्य जगहों पर धर्मांतरण का रैकेट चलाते थे। ये लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करते थे। ये दोषी लोगों को उनके मूल धर्म के बारे में भ्रम, नफरत और भय पैदा करके उनका ब्रेनवॉश करते थे। इसके बाद उन्हें इस्लाम की खूबियाँ बताते थे और मुस्लिम बनाते थे। इन सबको राज्य के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया था।

ये गिरोह उन लोगों को अपना टारगेट बनाते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होते थे। इसके अलावा महिलाएँ भी इनके निशाने पर होती थीं। इनके रैकेट को चलाने के लिए इन्हें खाड़ी सहित दुनिया भर से पैसे आते थे। बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराते थे। धर्मांतरण करने के बाद उन पर दबाव बनाया जाता था कि वो और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराएँ।

यह गिरोह इस बात का भी ख्याल रखता था कि धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बने लोग फिर से अपने धर्म में वापसी ना कर लें। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें देश के अलग-अलग मस्जिदों एवं मदरसों में रखा जाता था। जो इस्लाम छोड़ने की कोशिश करते, उन्हें धमकी भी दी जाती थी।

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित फुलत गाँव का कहने वाला कलीम सिद्दीकी पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली है। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामी स्कॉलर बन गया और इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगा।

कलीम सिद्दीकी दिल्ली के शाहीन बाग में 18 साल से अपना ठिकाना बना रखा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 22 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 562 दिनों तक जेल में रहने के बाद अप्रैल 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जमानत के दौरान उस पर कई तरह की पाबंदियाँ भी लगाई गई थीं।

‘जेल में 90% लोग हमारे ही हैं, अंदर ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे’: RJD विधायक मुहम्मद इज़हार असफ़ी ने खुलेआम सरकारी शिक्षक को धमकाया, सामने आया Video

बिहार के किशनगंज स्थित कोचाधामन से ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) के विधायक मुहम्मद इज़हार असफ़ी एक शिक्षक को धमकी देते हुए वीडियो वायरल हुआ है। इसमें शिक्षक को वो जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग एक बाद फिर से राजद के गुंडाराज को याद कर रहे हैं। बता दें कि लालू यादव और राबड़ी देवी के मुख्यमंत्रित्व काल में रंगदारी, अपहरण, हत्या और बलात्कार आम बात हुआ करते थे। एक बार फिर लोग उस दौर को याद कर रहे हैं।

वीडियो में राजद विधायक कह रहे हैं, “तुम समझते हो कि केस होगा तो जेल जाएँगे तो 2 दिन में बेल हो जाएगा। इसी 2 दिन में जेल के अंदर ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे। पता है न, 90% लोग जेल में हमारा ही आदमी है। इसमें चोर है, बदमाश है, छिनरा है, लुच्चा है। तुम्हें बाहर में कुछ नहीं होगा तो जेल में ही तुम्हारी दुर्गति करवा देंगे।” इस दौरान राजद विधायक समर्थकों से घिरे हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही वहाँ कुछ नाबालिग बच्चे भी हैं। इन सबके सामने धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बता दें कि किशनगंज बिहार के सीमांचल में आता है जहाँ की सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं और बांग्लादेश की सीमा भी यहाँ से बहुत अधिक दूर नहीं है। जिसे धमकी दी जा रही है, वो एक सरकारी शिक्षक है। हालाँकि, बताया जा रहा है कि ये वीडियो 31 जुलाई, 2024 का है जो अब वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि अपग्रेड हाई स्कूल अहमदनगर मोधो में शिक्षक ने एक लड़के की पिटाई कर दी थी, जिस पर भड़कते हुए विधायक ने शिक्षक को ही धमकी दे डाली।

किशनगंज एक मुस्लिम बहुल जिला है। राजद विधायक इसी मामले में समझौता कराने के लिए स्कूल पहुँचे हुए थे। खास बात ये है कि उनके बेटे विधायक के पुत्र इम्तियाज असफी ने खुद ही सोशल मीडिया के माध्यम से इस वीडियो को वायरल करवाया है। पिछले कुछ दिनों से पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव लगातार बढ़ते अपराध का आरोप लगा कर नीतीश सरकार पर हमला बोल रहे हैं, ऐसे में उनकी ही पार्टी की नेता की गुंडागर्दी को लेकर वो घिर रहे हैं।

रास्ते पर आया मालदीव: PM मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले 2 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति मोइज्जू के भारत आने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले मालदीव के दो मंत्रियों से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यालय ने मंगलवार (10 सितंबर 2024) को घोषणा की कि राष्ट्रपति बहुत जल्द भारत की यात्रा कर सकते हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। तिथि को अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि मालदीव के जिन दो जूनियर मंत्रियों ने पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया गया था। अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। मोहम्मद मोइज्जू को भारत विरोधी रूख के लिए जाना जाता है। वे चीन के ज्यादा करीब हैं। हालाँकि, हाल के दिनों में दोनों के बीच रिश्तों में नरमी आई है। इसके बाद इसे और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार शपथ ग्रहण करने के दौरान इस साल जून में हुए समारोह में मोहम्मद मोइज्जू भी शामिल हुए थे। इसके बाद पिछले महीने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर माले का दौरा किया था। इस दौरान मोहम्मद मोइज्जू की उपस्थिति में जयशंकर ने कई परियोजनाओं की शुरुआत की थी। इनमें से कुछ परियोजनाएँ भारत द्वारा दी गई वित्तीय मदद से शुरू हुई हैं।

चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू ने पिछले साल राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद मालदीव से भारतीय सैन्यकर्मियों को तत्काल वापस बुलाने की माँग की थी। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी। हालाँकि, भारत द्वारा सैन्यकर्मियों के स्थान पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के असैन्य कर्मचारियों को नियुक्त करने के बाद से हालात सुधरे हैं।

मालदीव के राष्ट्रपति के कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता राष्ट्रपति कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हीना वलीद ने मुइज्जू की यात्रा की घोषणा उस दिन की, जिस दिन पीएम मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी करने के कारण निलंबित किए गए दो जूनियर मंत्रियों इस्तीफा दे दिया। दरअसल, पीएम मोदी ने लक्षद्वीप को पर्यटन स्थल के रूप में प्रमोट किया था। इसके बाद मालदीव के मंत्रियों ने उन पर छींटाकशी की थी।

मइज्जू के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जोकर’, ‘आतंकवादी’ और ‘इज़राइल की कठपुतली’ तक कह दिया था। उनका कहना था कि मालदीव के पर्यटन के समानांतर लक्षद्वीप को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया। तब मोइज्जू ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था। अब इन मंत्रियों ने व्यक्तिगत कारण बताकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

मालदीव स्थित भारतीय उच्चायोग ने तीन मंत्रियों मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महजूम मजीद की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इस घटना को लेकर मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अपने मंत्रियों की इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सरकार विदेशी नेताओं के खिलाफ ‘अपमानजनक टिप्पणियों‘ से अवगत है और वह उन्हें बर्दाश्त नहीं करेगी।

हीना ने कहा कि यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्ष इस पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो तारीख दोनों देशों के नेताओं के लिए सुविधाजनक होगा, उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति बहुत जल्द भारत आने वाले हैं। ऐसी यात्राएँ दोनों देशों के नेताओं की अधिकतम सुविधा के समय के लिए निर्धारित की जाती हैं। इस बारे में चर्चा चल रही है।”

4 आतंकियों की फाँसी हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदली: नरेंद्र मोदी की पटना रैली में किए थे सीरियल ब्लास्ट, धमाकों में 8 लोगों की गई थी जान

साल 2013 में पटना के गाँधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में हुए सीरियल ब्लास्ट के 4 दोषियों को पटना हाईकोर्ट ने फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। निचली अदालत ने 4 को फाँसी की सजा और 2 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालाँकि, पटना हाई कोर्ट ने सभी 6 दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है।

सजा को बदलते हुए कोर्ट ने कहा कि इनकी उम्र कम है और इन्हें भी जीने का अधिकार है। इसलिए फाँसी की सजा नहीं दी गई। NIA की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर मनोज कुमार सिंह ने कहा, “ये बहुत अच्छा फैसला है। कोर्ट ने आरोपियों की उम्र को देखते हुए फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदला है। सभी आरोपितों की उम्र कम है। हम लोगों ने घटना की गंभीरता को लेकर दलील दी थी।”

जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ फैसले के बाद नुमान अंसारी, मोहम्मद मजीबुल्ला, हैदर अली और इम्तियाज आलम को अब फाँसी नहीं होगी। वहीं, उमैर सिद्दकी और अजहरुद्दीन कुरैशी को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास को यथावत रखा है। बचाव पक्ष के वकील इमरान गनी ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में 27 अक्टूबर 2013 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 9 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इनमें से चार लोगों को फाँसी की सजा दी गई थी और बाकियों को उम्रकैद। पटना हाई कोर्ट द्वारा फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के बाद अब आरोपितों को 30 साल जेल में बिताना होगा।

जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन गाँधी मैदान में पीएम मोदी की रैली थी। उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ जनसभा में भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। इसी दौरान पहला धमाका पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 10 के सुलभ शौचालय के पास हुआ था। इसके बाद गाँधी मैदान और उसके आस-पास 6 जगहों पर बम धमाके हुए।

इन बम धमाकों में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 89 लोग घायल हुए थे। धमाके के बाद पटना के गाँधी मैदान थाने में मामला दर्ज कराया गया था। तब बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से NIA जाँच की बात कही थी। इसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया था।

साल 2014 में NIA ने आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 187 लोगों ने कोर्ट में गवाही दी थी। पटना की निचली अदालत ने द्वारा फाँसी की सजा सुनाने के बाद आरोपितों ने इसके खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अपील की थी। आखिरकार इनकी फाँसी को उम्रकैद में बदल दिया गया।