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पाकिस्तान में नाबालिग हिन्दू लड़की का अधेड़ उम्र के मुस्लिम शख्स से निकाह: मदरसे के बाहर धर्मांतरण रुकवाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे परिजन, मौलवी ने बाहर से भगाया

पाकिस्तान से एक और हिंदू नाबालिग लड़की के अपहरण, धर्मांतरण और जबरन धर्मांतरण की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि जब पीड़िता के परिजन घटना की जानकारी होने पर मदरसे में धर्मांतरण रुकवाने पहुँचे तो उन्हें अंदर भी नहीं जाने दिया। घटना 12 सितंबर 2024 की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला पाकिस्तान के सिंध प्रान्त का है। यहाँ के हुंगुरु गाँव से बुधवार (11 सितंबर) को 16 साल की एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया गया था। पीड़िता के परिजनों की कहीं प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो वो अपनी तरफ से खोजबीन में जुट गए। इसी दौरान उनको पता चला कि उनकी बेटी का निकाह आनन-फानन में दोगुनी उम्र के मुस्लिम व्यक्ति के साथ कर दिया गया है।

परिजनों को यह भी पता चला कि गुरुवार (12 सितंबर) को पीड़िता को एक मदरसे के अंदर इस्लाम कबूल करवाया जाएगा। लड़की के परिजनों ने जैसे-तैसे मदरसे का पता लगाया और वहाँ अपनी बेटी को बचाने पहुँचे, लेकिन मदरसे के बाहर पहुँचने के बाद भी वो इस्लामी कट्टरपंथियों से जीत नहीं पाए। मदरसे के बाहर लड़की की माँ और पिता मिन्नत करते रह गए पर उन्हें उनकी बेटी से मिलवाया तक नहीं गया। मौलवी ने पीड़िता के घर वालों को भगा दिया। इसी के साथ लड़की को इस्लाम कबूल करवा दिया गया।

पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद संगठन के प्रमुख शिवा फकीर काची ने आरोप लगाया है कि वहाँ हिन्दू लड़कियों के साथ ऐसी गंभीर घटनाएँ अब आम बात जैसी हो गईं हैं। उन्होंने हिन्दुओं को गरीब बताया जिसकी वजह से उनकी महिलाओं को कट्टरपंथी टारगेट करते हैं। बताते चलें कि बुधवार (11 सितंबर) को हैदराबाद के एक सेशन कोर्ट ने एक हिन्दू लड़की को उसके परिवार के साथ फिर से मिलाने का आदेश दिया था। पीड़िता का 2023 में हैदराबाद से अपहरण कर लिया गया था। बाद में लड़की को इस्लाम कबूल कराया गया था और फिर एक उम्रदराज मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करवा दिया गया था।

24 घंटे में 3 आतंकी ढेर, 2 जवान बलिदान: PM मोदी की डोडा में पहली रैली से पहले जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और बारामूला में मुठभेड़

जम्मू-कश्मीर के डोडा में होने जा रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक रैली से पहले वहाँ आतंकियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ जारी है। इस क्रम में सुरक्षा जवानों ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया है जबकि 2 हमारे जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। बलिदानियों के नाम नायब सूबेदार विपिन कुमार और सिपाही अरविंद सिंह हैं।

ये मुठभेड़ बारामूला और किश्तवाड़ में हुई है। आतंकियों को पकड़ने के लिए दोनों जगहों पर सेना और पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया। बारामूला के टापर इलाके में 11 बजे मुठभेड़ शुरू हुई थी, जिसके बाद आज सुबह खबर आई कि तीन आतंकियों को मार दिया गया है।

वहीं किश्तवाड़ के नैदघाम गाँव में 13 सितंबर को मुठभेड़ हुई थी। यहाँ सेना को जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों के होने की खुफिया सूचना मिली थी। सेना ने पुलिस के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया और दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हुई। इस दौरान नायब सूबेदार विपिन कुमार और सिपाही अरविंद सिंह घायल हुए। इलाज के लिए इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वहाँ दोनों जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

इस मुठभेड़ के दौरान एक वीडियो भी सामने आई है। ये वीडियो बारमूला में मारे गए आतंकी की है। ड्रोन फुटेज में वो गोली लगने के बाद जमीन पर तड़पता दिख रहा है। इससे पहले कठुआ में दो आतंकियों को मौत के घाट उतारकर उनके पास से हथियार बरामद किए गए थे। 11 सितंबर को उधमपुर में भी 3 आतंकियों कोको मारा गया था।

‘दो कौड़ी का आदमी… 10 वोट नहीं ले पाया’ : लाइव शो में आनंद रंगनाथन ने लगाई ‘पत्रकार’ आशुतोष को फटकार, बोले- चिल्लाओ मत, मैं तुम्हारा पिता नहीं

‘टाइम्स नाउ नवभारत चैनल’ पर एक लाइव डिबेट के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राजनेता आशुतोष और लेखक आनंद रंगनाथन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर चर्चा के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे बहस एक अलग दिशा में चली गई।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच डिबेट का मुख्य मुद्दा अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने से संबंधित था। दोनों पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे थे। इस बीच, बहस का विषय अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गणेश उत्सव के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के घर पूजा करने जाने पर आ गया।

लेखक आनंद रंगनाथन ने आशुतोष की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पत्रकार के तौर पर वह जहाँ चाहें, जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आनंद रंगनाथन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर पत्रकार के रूप में आशुतोष स्वतंत्र हैं, तो यह नियम अन्य लोगों, खासकर चीफ जस्टिस पर भी लागू होना चाहिए।

इस दौरान बीजेपी की प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने आशुतोष से जुड़ा एक प्रसंग सामने रखा, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आँखों से देखा था, जब आप आम आदमी पार्टी में रहते हुए कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे।” दरअसल, आशुतोष ने दावा किया था कि वो अभी भी पत्रकार हैं। उन्होंने कहा ये भी कहा कि वो राजनीति भले छोड़ चुके हैं, लेकिन दलबदलू नहीं हैं। उनके इस दावे पर राधिका खेड़ा ने उन्हें एक्सपोज कर दिया, जिसके बाद वो चिल्लाने लगे। इस पूरी बहस को 3 मिनट के बाद देखा जा सकता है।

बहस के दौरान आशुतोष को आनंद रंगनाथन के लहजे और व्यक्तिगत टिप्पणी पर आपत्ति हुई, जिससे बहस और अधिक गर्म हो गई। आनंद रंगनाथन ने आशुतोष से कहा, “चिल्लाना बंद करो, मैं तुम्हारा पिता नहीं हूँ।” इस टिप्पणी के बाद आशुतोष नाराज हो गए और स्टूडियो में ही आनंद रंगनाथन की ओर बढ़ गए। इस बीच, रंगनाथन ने आशुतोष को बुरी तरह से झिड़क दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘दो कौड़ी का आदमी’ और ’10 वोट भी नहीं ला पाया’ जैसे तमगों के साथ संबोधित किया।

यही नहीं, जब आशुतोष ने हाथापाई की कोशिश की, तो रंगनाथन ने उन्हें ऐसा करके देखने के लिए भी ललकार दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘फर्जी जर्नलिस्ट’ कहकर भी एक्सपोज किया। इसके बाद आशुतोष ने माफी की माँग की, हालाँकि किसी भी पक्ष ने माफी नहीं माँगी।

स्थिति को बिगड़ते देख, शो को होस्ट कर रहीं सीनियर एंकर नाविका कुमार को बीच-बचाव करना पड़ा। उन्होंने दोनों को शांत करने की कोशिश की और स्थिति को संभाला।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच की इस तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस बहस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

बता दें कि आशुतोष कभी टीवी इंडस्ट्री के शीर्ष पत्रकारों में शामिल रहे थे। शुरुआत में उन्हें बहुजन राजनीति के जनक माने जाने वाले मान्यवर कांशीराम से मिले थप्पड़ ने खूब चर्चा दिलाई थी। वो कई बार टीवी डिबेट में बुरी तरह से रो भी चुके हैं। आशुतोष ने बाद में राजनीति ज्वॉइन कर ली थी और लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें बुरी तरह से हार मिली थी। चुनाव के दौरान आशुतोष अपना नाम आशुतोष गुप्ता लिखते थे। फिलहाल वो एक स्वतंत्र न्यूज पोर्टल से जुड़कर काम कर रहे हैं और टीवी चैनलों पर आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस का पक्ष लेकर बोलते सुने जाते हैं।

100+ दिन से अंतरिक्ष में फँसीं सुनीता विलियम्स, बोइंग विमान लौटने के बाद पहली बार की प्रेस कॉन्फ्रेंस: बताया- स्पेस में रहकर करेंगी US के चुनावों में मतदान

नासा के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इस समय अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं और वे फरवरी 2024 तक वहीं रहेंगे। इस बीच, अमेरिका में नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। हालाँकि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर भले ही अंतरिक्ष में हों, फिर भी वो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग में हिस्सा लेंगे और अपना वोट डालेंगे। नासा के एक विशेष प्रणाली के माध्यम से ये अंतरिक्ष यात्री अपने वोट अंतरिक्ष से ही डाल सकेंगे।

अंतरिक्ष में रहकर अमेरिकी चुनाव के लिए मतदान

नासा के अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) साल 1997 से ही अपने वोट डालते आ रहे हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक बैलट्स भेजे जाते हैं, जिन्हें अंतरिक्ष यात्री भरकर वापस धरती पर भेजते हैं। यह प्रक्रिया काफी सरल है। पहले, बैलट्स को ISS तक भेजा जाता है, जहां अंतरिक्ष यात्री उसे भरते हैं। इसके बाद, भरे हुए बैलट्स को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धरती पर वापस भेजा जाता है, जहाँ इन्हें संबंधित काउंटी क्लर्क द्वारा प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा के लिए बैलट्स को एन्क्रिप्ट किया जाता है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का वोटिंग अनुभव

हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बुच विलमोर ने बताया, “मैंने आज अपना बैलट माँगा है। हमें यह कुछ हफ्तों में मिल जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसमें हम सभी नागरिकों के रूप में शामिल होते हैं। हम इसके लिए उत्साहित हैं।”

बता दें कि साल 1997 में टेक्सास के कानून द्वारा यह व्यवस्था की गई थी कि नासा के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में रहते हुए भी अपने वोट डाल सकें। डेविड वुल्फ पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री थे जिन्होंने मीर स्पेस स्टेशन से वोट डाला था।

स्पेस सेंटर में फंसे हैं दोनों अंतरिक्ष यात्री

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर दोनों ही नासा के अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और दोनों ने हमेशा अंतरिक्ष को अपना ‘खुशहाल स्थान’ बताया है। हालाँकि, हाल ही में उन्होंने स्वीकार किया कि बीते कुछ महीनों में उनके लिए समय कठिन रहा है। बोइंग के स्टारलाइनर यान में आई तकनीकी समस्याओं के कारण वे ISS में फंसे हुए हैं। एक हफ्ते का परीक्षण मिशन कई महीनों तक खिंच गया और वे अगले साल फरवरी तक अंतरिक्ष में रहेंगे।

विलमोर ने बताया, “पिछले तीन महीनों का सफर कठिन रहा है। हमने हर कदम पर अपने यान की समस्याओं का आकलन किया है। यह कभी-कभी काफी मुश्किल हो जाता था।” सुनीता विलियम्स ने कहा कि उन्हें ISS पर रहने में कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि उनका पहले से ही यहाँ रहने का अनुभव है।

विलमोर ने यह भी बताया कि बोइंग को अपने यान में कुछ सुधार करने होंगे, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि बोइंग और पूरी टीम इसे सफलतापूर्वक पूरा करेगी। उन्होंने कहा, “जब आप स्पेसक्राफ्ट के साथ ऐसे नए काम करते हैं जो पहले कभी नहीं किए गए, तो कुछ नई चुनौतियाँ जरूर सामने आती हैं।”

नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर भले ही अंतरिक्ष में फंसे हों, लेकिन वे अमेरिकी लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाने के लिए तैयार हैं। नासा की यह विशेष वोटिंग प्रणाली उन्हें यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि वे अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन कर सकें, चाहे वे धरती पर हों या अंतरिक्ष में।

गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 5 जून से अंतरिक्ष में हैं। अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर पिछले 3 महीने से ज्यादा समय से स्पेस में फंसे हुए हैं। वहीं, दूसरी तरफ जिस स्पेसक्राफ्ट स्टारलाइनर में वो दोनों इंटरनेशनल स्पेश स्टेशन गए थे, वह अब उन दोनों के बिना वापस आ चुका है।

फलों के जूस में पेशाब मिलाकर बेचता था ‘सलमान’, नाबालिग बेटे सहित हुआ गिरफ्तार: दुकान में मिली मूत्र से भरी बोतल, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से फलों के जूस में पेशाब मिलाकर बेचने का मामला सामने आया है। यहाँ स्थानीय लोगों की शिकायत पर पुलिस ने एक जूस की दुकान पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान कंटेनर में इंसानी मूत्र मिला। पुलिस ने सबूत मिलने के बाद सलमान (बदला हुआ नाम) और उसके 15 साल के नाबालिग बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना शुक्रवार (13 सितंबर 2024) की है।

यह मामला गाजियाबाद कमिश्नरेट के ग्रामीण क्षेत्र का है। यहाँ के थाना लोनी बॉर्डर पर शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में कई लोगों ने सामूहिक तौर पर बताया कि इंद्रापुरी इलाके के A ब्लॉक में फलों का जूस बेचने वाले की एक दुकान है। दुकान का नाम ख़ुशी जूस पॉर्लर है। इस दुकान पर मुस्लिम समुदाय के बाप-बेटे जूस बेचते हैं। आरोप है कि शुक्रवार की ही शाम लगभग 4 बजे किसी ने इन दोनों को जूस में इंसान का पेशाब मिलाते हुए देखा था।

कुछ ही देर में यह बात फ़ैल गई और तमाम लोग ख़ुशी जूस पॉर्लर की तरफ निकल पड़े। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें कुछ लोगों को जूस की दुकान के अंदर देखा जा सकता है। ये सभी दोनों आरोपितों पर गुस्सा दिखा रहे हैं। कुछ ही देर में मामले की जानकारी पुलिस को मिली। पुलिस फ़ौरन ही मौके पर पहुँची और लोगों का गुस्सा शांत करवाया। इसके बाद दुकान की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ख़ुशी जूस पॉर्लर पर इंसानी पेशाब से भरी एक दूसरी बोतल भी बरामद हुई।

गाजियाबाद पुलिस ने दोनों आरोपितों पर नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 272, 274 और 275 के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक ख़ुशी जूस पॉर्लर जिस इंद्रापुरी इलाके में था वहाँ हिन्दुओं की अच्छी तादाद है। कई बार लोग व्रत आदि में भी यहीं से जूस खरीद कर पीते थे।

नोट: खबर में नाबालिग आरोपित की पहचान छिपाने के लिए उसके अब्बा का नाम बदला गया है।

राहुल गाँधी के कार्यक्रम में पत्रकार के साथ हो गई मारपीट, सैम पित्रौदा- ‘हमें कुछ नहीं पता’ कहकर निकले: बोले- पहले हमसे बात करते, फिर पब्लिक को बताते

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस को फिर से अध्यक्ष बने सैम पित्रोदा ‘हुआ तो हुआ’ बयान को लेकर चर्चा में रहे थे। अब उनके कार्यक्रम में राहुल गाँधी और सैम पित्रोदा से सवाल पूछने पर इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ मारपीट की गई है, तो वो ये कह कर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं कि मारपीट के बारे में ‘मुझे नहीं पता’। सैम पित्रोदा ने कहा कि पत्रकार को मारपीट के मामले को सार्वजनिक करने से पहले ‘मुझसे’ बात करनी चाहिए थी।

बता दें कि इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने सैम पित्रोदा से यह सवाल किया कि क्या राहुल गाँधी अमेरिका में बांग्लादेशी हिंदुओं पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाएँगे, तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। इसके बाद उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उनसे इंटरव्यू डिलीट करने के लिए कहा गया। रोहित शर्मा का दावा है कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट भी की गई।

इंडिया टुडे टीवी से विशेष बातचीत में सैम पित्रोदा ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि वह उस समय जल्दी में थे और उन्हें कहीं और जाना था, इसलिए वह रोहित शर्मा से मिलकर निकल गए। पित्रोदा ने कहा, “मुझे इस घटना की जानकारी नहीं है। मैं वहाँ मौजूद नहीं था। अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो मैं इसकी जाँच करूँगा।”

पित्रोदा ने प्रेस की स्वतंत्रता का दिखावा करते हुए कहा कि रोहित को मामले को सार्वजनिक करने से पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी। पित्रोदा ने कहा, “मैं किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि रोहित शर्मा पहले मुझसे बात करते, बजाय इसके कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मामला उठाया।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छीन लेते है। इस पूरी घटना में खुद राहुल गाँधी का निजी सचिव अलंकार भी शामिल था।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। अब सैम पित्रोदा कह रहे हैं कि वो प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। वो भी इस तरह कि पत्रकार को पहले सैम पित्रोदा से बताना चाहिए था कि वो इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर रखे भी या न? सैम को सीधे-सीधे बताना चाहिए कि उनका जो इंटरव्यू रोहित शर्मा ने रिकॉर्ड किया, वो कहाँ है?

अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर अब कहलाएगा ‘श्री विजयपुरम’, मोदी सरकार ने बदला नाम: चोल साम्राज्य का इस जगह से रहा है गहरा नाता

केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को इसकी जानकारी दी। पोर्ट ब्लेयर का चोल साम्राज्य से गहरा नाता रहा है। इसके साथ ही यह वीर सावरकर सहित कई स्वतंत्रता सेनाओं से जुड़ा है।

नाम बदलने की जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि देश को गुलामी के सभी प्रतीकों से मुक्ति दिलाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से प्रेरित होकर आज गृह मंत्रालय ने पोर्ट ब्लेयर का नाम ‘श्री विजयपुरम’ करने का निर्णय लिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे लिखा, “श्री विजयपुरम नाम हमारे स्वाधीनता के संघर्ष और इसमें अंडमान और निकोबार के योगदान को दर्शाता है। इस द्वीप का हमारे देश की स्वाधीनता और इतिहास में अद्वितीय स्थान रहा है। चोल साम्राज्य में नौसेना अड्डे की भूमिका निभाने वाला यह द्वीप आज देश की सुरक्षा और विकास को गति देने के लिए तैयार है।”

अपनी पोस्ट में अमित शाह ने सुभाषचंद्र बोस और विनायक दामोदर सावरकर को भी याद किया। उन्होंने आगे कहा, “यह द्वीप नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा सबसे पहले तिरंगा फहराने से लेकर सेलुलर जेल में वीर सावरकर व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के द्वारा माँ भारती की स्वाधीनता के लिए संघर्ष का स्थान भी है।”

दरअसल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ प्राचीन चोल साम्राज्य से भी जुड़ा है। चोल साम्राज्य का यहाँ एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा हुआ करता था। इस अड्डे से सैन्य संचालन के साथ-साथ समुद्री व्यापार मार्ग के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था। चोल राजाओं ने यहाँ से अपने बड़े-बड़े नौसैनिक चलाए थे।

इस द्वीप की भौगोलिक एवं रणनीतिक स्थिति के कारण यह आज भी भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह आज भी भारतीय सेना और नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा, हाल के वर्षों में यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी तेजी से उभरा है। ऐसे में इसका महत्वपूर्ण योगदान बन जाता है।

बता दें कि साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अंडमान निकोबार के दौरे पर गए थे तो उन्होंने यहाँ के तीन द्वीपों के नाम बदलने की घोषणा की थी। उन्होंने हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप, नील द्वीप को इसी नाम से और रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र द्वीप कर दिया था।

हरियाणा के सरकारी स्कूल में हिन्दू लड़कियों को पहनाया हिजाब, भड़के ग्रामीणों ने किया विरोध: प्रिंसिपल ने माँगी माफी, बोलीं- ईद का था कार्यक्रम

हरियाणा के एक सरकारी स्कूल में हिन्दू लड़कियों को हिजाब पहनाया गया। इसके बाद उनसे कार्यक्रम भी करवाया गया। हिन्दू लड़कियों को हिजाब उनके शिक्षकों ने ही पहनाया। जब यह जानकारी ग्रामीणों तक पहुँची तो उन्होंने इस बात का विरोध किया। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में प्रदर्शन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोनीपत के बड़ौली गाँव के राजकीय स्कूल में यह घटना हुई। यहाँ के सरकारी स्कूल की कुछ फोटो वायरल हुई जिसमें हिन्दू लडकियाँ हिजाब और बुर्का जैसी ड्रेस पहने हुए थीं। इसमें लडकियाँ नमाज पढ़ने की मुद्रा भी बनाए हुए थीं। कुछ लडकियाँ गले मिलते हुए दिखाई दी।

यह कार्यक्रम बुधवार (11 सितम्बर, 2024) का बताया गया। इन फोटो के वायरल होने के बाद आसपास के ग्रामीण और हिन्दू संगठनों के लोग इस स्कूल में पहुँच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लड़कियों पर एक धर्म थोपा गया और हिन्दू धर्म का अपमान किया गया। यह भी आरोप लगाया कि छात्राओं को इस्लाम की तरफ धकेला जा रहा है।

हँगामा बढ़ते देख स्कूल की प्रिंसिपल ने इस मामले में पर सफाई दी। स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि 11 सितम्बर को ईद के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम सर्वधर्म मिलन समारोह था। प्रिंसिपल ने दावा किया कि इस दौरान एक नाटक की प्रस्तुति हुई थी, इसके लिए लड़कियों को हिजाब पहनाया गया था।

प्रिंसिपल की इस सफाई का ग्रामीणों पर कोई असर नहीं पड़ा। वह लगातार विरोध करते रहे। प्रिंसिपल ने इसके बाद इस मामले में माफ़ी माँगने और आगे ऐसा कोई और कार्यक्रम ना करवाने की बात कही। वहीं हिन्दू संगठन इस बात पर अड़े रहे कि स्कूल के स्टाफ का तबादला कर दिया जाए।

इस मामले में प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल से रिपोर्ट तलब की है। वहीं प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच शांति करवा दी है। जिस गाँव में यह स्कूल है और वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल का है, इसलिए यह मामला और हाई प्रोफाइल हो गया।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब स्कूलों के भीतर हिन्दू बच्चों को इस्लामी लिबास पहनाए गए हों। इसे पहले उत्तरखंड के रुड़की में छोटी बच्चियों को इस्लामी कपड़े पहनाने का एक मामला सामने आया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश के गुना में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी।

ITI छात्रा मेहनाज ने प्रेमी सोनू का सिर करवाया कलम, फिर झोले में भरकर ले गई साथ: धड़ को नंगा कर फेंका, भाई सद्दाम और रिजवान सहित गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में छात्रा मेहनाज ने अपने भाई सद्दाम और उसके दोस्त रिजवान के साथ मिलकर अपने प्रेमी सोनू की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, हत्या प्रेमिका मेहनाज ने सोनू का सिर धड़ से अलग करवाकर अपने साथ झोले में भरकर ले गई थी और उसे फेंक कर आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने सिर के अवशेष बरामद करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

रामपुर की ITI की छात्रा मेहनाज ने पुलिस को बताया कि सोनू उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था। इसके बाद उसने यह बात अपने भाई सद्दाम को बताई और उसकी हत्या की योजना बना ली। मेहनाज ने कहा, “उसका गला काटा, सिर धड़ से अलग किया और शरीर से कपड़े उतार दिए, ताकि उसकी पहचान न हो सके। उसका सिर मुरादाबाद से 2 किलोमीटर दूर सैफानी के डंपिंग ग्राउंड में पड़ा है।”

दरअसल, रामपुर के थाना सैफनी क्षेत्र में बैरूआ पुल के पास एक जंगल है। बुधवार (11 सितंबर) को यहाँ गन्ने के एक खेत में अज्ञात युवक की लाश मिली। धड़ पर सिर नहीं था। इसके साथ ही शव पर कपड़े भी नहीं थे। लोगों ने शव देखा तो इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुँच कर पुलिस धड़ को जब्त कर लिया और आसपास के इलाकों में सिर की तलाश करती है।

शव की शिनाख्त के लिए उसे मोर्चरी में रखवा दिया गया। इसके साथ ही आसपास के थानों में सूचना भेज दी गई कि कहीं कोई लड़का गुमशुदा तो नहीं। 12 सितंबर को सैफानी पुलिस को जानकारी मिली कि मुरादाबाद जिले के थाना बिलारी के गढी रुस्तमनगर सहसपुर गाँव का सोनू पुत्र साबिर 9 सितंबर से लापता है। पुलिस ने साबिर को बुलाकर शव दिखाया तो उसने उसकी पहचान अपने बेटे सोनू के रूप में की।

इसके बाद पुलिस ने साबिर से सोनू का मोबाइल नंबर लेकर उसका कॉल डिटेल निकाला तो 22 साल की मेहनाज के बारे में पुलिस को जानकारी मिली। पुलिस को पता चला कि थाना सैफानी के मजरा कस्बा की रहने वाली मेहनाज पुत्री इस्माइल ने अंतिम बार सोनू को फोन किया था। पुलिस ने सोनू के पिता से मेहनाज के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा अक्सर बताता था कि मेहनाज उसकी दोस्त है।

सोनू के अब्बू ने यह भी बताया कि बीच में दोनों की बातचीत बंद हो गई थी। इसके बाद सोनू के अब्बू साबिर ने शक जाहिर करते हुए मेहनाज और उसके घरवालों को नामजद करते हुए थाने में FIR लिखवा दी। इसके बाद पुलिस ने मेहनाज और उसके भाई सद्दाम को हिरासत में ले लिया। शुरुआत ना-नुकूर के बाद दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

सद्दाम ने बताया कि वह अपनी बहन को परेशान देखकर उससे पूछा तो मेहनाज बोली कि सोनू की हत्या कर दो। मेहनाज का कहना है कि सोनू के पास उसके कुछ फोटो थे और वह उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उससे बुलाता रहता था। इसके कारण वह अपने प्रेमी सोनू से पीछा छुड़ाना चाहती थी और उसने यह बात सद्दाम को बताई।

पूछताछ में सद्दाम ने बताया है कि उसकी बहन मेहनाज ने सोनू को फोन करके बुलाया और गन्ने के खेत के पास ले गई। वहाँ पर उसका दोस्त रिजवान और उसकी बहन मेहनाज ने कपड़े से सोनू के पैर बाँध दिए। इसके बाद सद्दाम ने सोनू की गर्दन धड़ से अलग कर दिया। उसकी पहचान छुपाने के लिए उसके कपड़ों को भी दिया और शव गन्ने के खेत में फेंक दिया।

इसके बाद सद्दाम ने सोनू का कटा हुआ सिर एवं उसकी चप्पल तथा मोबाइल मेहनाज को दे दी। तीनों उसे प्लास्टिक के थैले में रखकर सैफनी के डम्पिंग ग्राउण्ड में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। तीनों ने अपने भी कपड़ों को जला दिया। हालाँकि, सोनू की बाइक पुल के निकट छोड़ ही छोड़ दी। इसके बाद वे अपने घर आ गए।

इलाके में कुछ सौ मुस्लिम, लेकिन मस्जिद बन रही तीन मंजिल की: स्थानीय लोग बोले- सरकारी जमीन पर बनी है इमारत, शिमला-मंडी के बाद बिलासपुर में उठ रहे सवाल

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और मंडी में मस्जिदों के निर्माण के बाद अब राज्य भर से ही ऐसी मस्जिदों की खबरें आ रही हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में भी एक अवैध मस्जिद के निर्माण की बात सामने आई है। हिन्दू संगठन ने आरोप लगाया है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई जा रही है।

मस्जिद के अवैध निर्माण का आरोप बिलासपुर के घुमारवीं में लगाया गया है। हिन्दू जागरण मंच ने आरोप लगाया है कि घुमारवीं के बड्डू मुहल्ले में मस्जिद सरकारी जगह पर बनाई जा रही है, इसके लिए किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। नगर परिषद ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई है।

घुमारवीं में हिन्दू जागरण मंच पदाधिकारी विशाल नड्डा ने इस मामले में ऑपइंडिया से बताया कि इस मस्जिद का मौलवी सहारनपुर का रहने वाला है। वह यहाँ पर मजदूर लाकर इस मस्जिद का निर्माण करवा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर मस्जिद बन रही है, उसमें से संभवतः एक छोटा हिस्सा ही उनका खुद का है, बाक़ी जमीन सरकारी है।

विशाल नड्डा ने बताया कि घुमारवीं में मुस्लिम जनसंख्या काफी कम है लेकिन मस्जिद का निर्माण कहीं बड़ी आबादी के लिए हो रहा है। विशाल नड्डा ने ऑपइंडिया को बताया कि घुमारवीं में मुस्लिम जनसंख्या पाँच वर्ष पहले 917 थी जो अब बढ़ कर लगभग 1500 हो चुकी होगी। लेकिन मस्जिद तीन मंजिल की बन रही है।

जागरण की रिपोर्ट बताती है कि घुमारवीं नगर पालिका को इस मस्जिद के विषय में कोई जानकारी नहीं है। नगर पालिका परिषद के अधिकारियों का का कहना है कि यह इलाका पहले उनके अंतर्गत नहीं आता था इसलिए कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। नगर परिषद के अधिकारियों ने यह भी बताया कि मस्जिद निर्माण से सम्बन्धित कोई भी अनुमति नहीं ली गई है।

अब घुमारवीं मामले में हिन्दू जागरण मंच पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहा है। हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि वह इस मस्जिद पर कार्रवाई की माँग करेंगे। मंच ने यह भी कह कि पिछले कुछ सालों में उनके इलाके में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ी है।

गौरतलब है कि घुमारवीं से पहले शिमला के संजौली और मंडी के जेल रोड पर बनी अवैध मस्जिद को लेकर विवाद गहराया है। शिमला मस्जिद मामले में हिन्दू संगठनों के जबरदस्त विरोध के बाद मुस्लिम पक्ष ने माना है कि निर्माण अवैध है। वहीं मंडी में मस्जिद को गिराने का आदेश नगर निगम ने दिया है। इसको लेकर हिन्दुओं ने सड़कों पर प्रदर्शन भी किया है।