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4 आतंकियों की फाँसी हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदली: नरेंद्र मोदी की पटना रैली में किए थे सीरियल ब्लास्ट, धमाकों में 8 लोगों की गई थी जान

साल 2013 में पटना के गाँधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में हुए सीरियल ब्लास्ट के 4 दोषियों को पटना हाईकोर्ट ने फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। निचली अदालत ने 4 को फाँसी की सजा और 2 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालाँकि, पटना हाई कोर्ट ने सभी 6 दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है।

सजा को बदलते हुए कोर्ट ने कहा कि इनकी उम्र कम है और इन्हें भी जीने का अधिकार है। इसलिए फाँसी की सजा नहीं दी गई। NIA की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर मनोज कुमार सिंह ने कहा, “ये बहुत अच्छा फैसला है। कोर्ट ने आरोपियों की उम्र को देखते हुए फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदला है। सभी आरोपितों की उम्र कम है। हम लोगों ने घटना की गंभीरता को लेकर दलील दी थी।”

जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ फैसले के बाद नुमान अंसारी, मोहम्मद मजीबुल्ला, हैदर अली और इम्तियाज आलम को अब फाँसी नहीं होगी। वहीं, उमैर सिद्दकी और अजहरुद्दीन कुरैशी को निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास को यथावत रखा है। बचाव पक्ष के वकील इमरान गनी ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में 27 अक्टूबर 2013 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 9 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इनमें से चार लोगों को फाँसी की सजा दी गई थी और बाकियों को उम्रकैद। पटना हाई कोर्ट द्वारा फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के बाद अब आरोपितों को 30 साल जेल में बिताना होगा।

जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन गाँधी मैदान में पीएम मोदी की रैली थी। उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ जनसभा में भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। इसी दौरान पहला धमाका पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 10 के सुलभ शौचालय के पास हुआ था। इसके बाद गाँधी मैदान और उसके आस-पास 6 जगहों पर बम धमाके हुए।

इन बम धमाकों में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 89 लोग घायल हुए थे। धमाके के बाद पटना के गाँधी मैदान थाने में मामला दर्ज कराया गया था। तब बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से NIA जाँच की बात कही थी। इसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया था।

साल 2014 में NIA ने आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 187 लोगों ने कोर्ट में गवाही दी थी। पटना की निचली अदालत ने द्वारा फाँसी की सजा सुनाने के बाद आरोपितों ने इसके खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अपील की थी। आखिरकार इनकी फाँसी को उम्रकैद में बदल दिया गया।

जिस शिमला में इंच-इंच जगह का मोल, वहाँ 200 बीघा जमीन पर वक्फ बोर्ड का कब्जा: हिन्दू जागरण मंच का दावा, अवैध मस्जिद को बचाने में जुटी है कॉन्ग्रेस सरकार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों में अवैध मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है। हिन्दू संगठन अवैध मस्जिद को गिराने की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं, हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार उन पर लाठियाँ बरसा रही है। अब हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर भी नए खुलासे हो रहे हैं।

प्रदेश की राजधानी शिमला में जहाँ एक तरफ जमीन की किल्लत बढ़ती जा रही है, वहीं वक्फ बोर्ड शिमला में वन विभाग और राजस्व विभाग के बाद जमीनों का तीसरा सबसे बड़ा मालिक बना हुआ है। सरकारी सत्यापन में बताया गया है कि वक्फ बोर्ड के पास शिमला के भीतर 70 बीघा जमीन है।

वक्फ के पास कहाँ-कहाँ जमीनें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड के पास राजधानी शिमला में ही लगभग 70 बीघे जमीन है। यह जानकारी सरकारी सत्यापन से सामने आई है। वक्फ बोर्ड के पास शिमला के लक्कड़ बाजार, संजौली, छोटा शिमला और बालूगंज जैसे इलाकों में बड़ी जमीनें हैं। बताया गया है कि शिमला के टूटीकंडी में ही बोर्ड के पास लगभग 46 बीघे जमीन है। गौरतलब है कि यह वही इलाका है जहाँ शिमला का अंतरराज्यीय बस टर्मिनल है। इस इलाके में जमीन की इतनी समस्या है कि यहाँ सरकारी बसों को सड़क पर खड़ा करना पड़ता है।

इसके अलावा वक्फ बोर्ड के पास शिमला के लक्कड़ बाजार में 7.41 बीघे जमीन है। ताराहाल इलाके में भी वक्फ बोर्ड के पास 6 बीघे से अधिक जमीन है। इसके अलावा उस संजौली में भी वक्फ बोर्ड के पास बड़ी जमीनें हैं जहाँ पर वर्तमान में मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है। शिमला के बम्लोई, छोटा शिमला, बालूगंज और लोअर बाजार इलाके में मिला कर वक्फ के पास 10 बीघा से अधिक जमीन है। यह भी सामने आया है कि वक्फ की इन जमीनों पर कई जगह लोगों ने निर्माण भी कर लिए हैं।

हिन्दू संगठनों ने बताया- 200 बीघे पर कब्जा

जहाँ सरकारी सत्यापन में बताया गया है कि शिमला में वक्फ बोर्ड के पास 70 बीघा जमीन है तो वहीं हिमाचल के ही हिन्दू जागरण मंच ने कहा है कि यह जमीन असल में 200 बीघा से ज्यादा है। इसके लिए उन्होंने रिकॉर्ड भी दिया है। हिन्दू जागरण मंच के कमल गौतम के अनुसार, वक्फ बोर्ड के पास शिमला के भीतर लगभग 215 बीघा जमीन है।

कमल गौतम ने ऑपइंडिया को बताया कि सबसे ज्यादा जमीन उसी संजौली में है जहाँ पर वर्तमान में अवैध मस्जिद स्थित है। ऑपइंडिया से कमल गौतम ने बताया कि यहाँ वक्फ बोर्ड के पास 156 बीघा जमीन है। इसके अलावा उन्होंने वक्फ के कब्जे वाली जमीन की माप टूटी कंडी इलाके में वही बताई है जो सरकारी सत्यापन में निकल कर आई है।

वक्फ के पास मौजूद इस जमीन की कीमत करोड़ों-अरबों में है और यह सारी जमीन उस इलाके में स्थित है जो शिमला के रिहायशी और महंगे इलाके माने जाते हैं। ऑपइंडिया के पास मौजूद जमीन के रिकॉर्ड के अनुसार, वक्फ बोर्ड के पास जितनी भी जमीनें हैं, उनमें से अधिकांश पर कब्रिस्तान अंकित है। कुछ पर मकान और मस्जिद भी अंकित है।

जमीन कब्जाने का भी हो रहा प्रयास

वक्फ बोर्ड के पास जो जमीनें अभी मौजूद हैं, उसके अलावा नई जमीन लेने का भी प्रयास हो रहा है। यह दावा कमल गौतम ने किया है। कमला गौतम ने बताया कि वर्तमान में कई जगह प्रदेश में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कई लोग निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कब्जा जानबूझ कर करवाया जा रहा है।

कमल गौतम का आरोप है कि जब इस जमीन पर कब्जा हो जाता है तो नई जमीन की माँग की जाती है। इस तरह से लगातार जमीन वक्फ बोर्ड के पास जा रही है। यह भी आरोप है कि उन गाँवों में भी कब्जे के लिए जमीन माँगी जा रही है जहाँ मात्र एक मुस्लिम परिवार रहता है। कई जगह हिन्दू परिवारों ने इसका विरोध किया है।

संजौली का विवाद गहराया

शिमला की संजौली मस्जिद से चालू हुआ विवाद अब लगातार बढ़ता जा रहा है। संजौली में बनी अवैध मस्जिद को गिराने की माँग लगातार बढती जा रही है। स्थानीय लोगों और हिन्दू संगठनों ने संजौली में बुधवार (11 सितम्बर, 2024) को जोरदार प्रदर्शन किया है। अवैध मस्जिद गिराने की माँग करने वाले हिन्दुओं पर हिमाचल प्रदेश की पुलिस ने डंडे बरसाए हैं।

यहाँ प्रदर्शन करने वाले लोगों पर पानी की बौछार भी की गई। प्रशासन ने पहले से ही यहाँ बैरिकेड लगा दिए थे। इसके बाद जब हिन्दू यहाँ पहुँचे तो उन पर लाठियाँ चली, इस लाठीचार्ज में कई लोगों को चोटें भी आईं। हालाँकि, हिन्दू अब भी सड़कों पर डटे हुए हैं।

कैसे चालू हुआ पूरा विवाद

संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई।

इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए। इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे।

इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

इस लड़ाई झगड़े की घटना के बाद यह मस्जिद विवादों के केंद्र में आ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

तबसे ही इस मस्जिद को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध होने की बात हिमाचल सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कही थी। स्थानीय लोगों को हिन्दू संगठनों की माँग है कि इस अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और सरकार इसमें ढिलाई ना बरते। हालाँकि, सुक्खू सरकार बता रही है यह मामला अभी कोर्ट में है।

महादेव मंदिर का पुजारी ‘शिवमनाथ’, पहचान-पत्र चेक किया तो निकला सनव्वर हुसैन: मोबाइल में मिली तस्वीरों में नमाजी टोपी पहने और मजार पर इबादत करता दिखा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मंगलवार (10 सितंबर 2024) को एक मंदिर में पुजारी बन कर रहे रहे एक मुस्लिम युवक को पकड़ा गया है। युवक का नाम सनव्वर हुसैन है जो एक शिव मंदिर में पिछले 6 माह से रह रहा था। वह पहले भी कई मंदिरों में पुजारी रह चुका है। सनव्वर खुद को रामपुर जिले के निवासी बता रहा है। हालाँकि उसके आधार कार्ड पर उत्तराखंड के उधमसिंह नगर का पता छपा हुआ है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बिजनौर जिले के थाना क्षेत्र शेरकोट की है। यहाँ के गाँव तिपरजोत में एक शिव मंदिर है जो स्थानीय लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। शिवरात्रि को यहाँ काफी भीड़ होती है। लगभग 6 माह पहले इस मंदिर में सेवादार बन कर एक युवक आया जो कुछ ही दिनों में यहाँ का पुजारी बन गया। वह मंदिर में ही रह कर पूजा-पाठ करने लगा। यहाँ वो खुद को पुजारी ‘शिवमनाथ’ बताता था। हालाँकि उसकी हरकतों से ग्रामीणों को संदेह हुआ।

मंगलवार (10 सितंबर, 2024) को उन्होंने सनव्वर से आधार कार्ड माँगा। बताया जा रहा है कि माँगे जाने के बावजूद सनव्वर ग्रामीणों को अपना पहचान पत्र देने में आनाकानी करने लगा। काफी दबाव बनाने एक बाद उसने अपना पहचान पत्र लोगों को दिखाया। आधार कार्ड से उसकी मुस्लिम होने की पोल खुली। उसके अब्बा का नाम अफसर अली है। इसी में उसका पता उत्तराखंड के उधमसिंह नगर का दर्ज था। हालाँकि सनव्वर हुसैन ने खुद को रामपुर जिले का निवासी बताया।

लोगों ने सनव्वर का मोबाइल चेक किया तो और भी खुलासे सामने आए। सनव्वर के मोबाइल में उसकी कई तस्वीरें इस्लामी वेशभूषा में हैं। एक तस्वीर में वह सिर पर नमाज़ी टोपी रख कर किसी मजार के पास खड़ा दिख रहा है। उसके हाथ इबादत के लिए उठे दिख रहे हैं। और अधिक पड़ताल में पता चला कि सनव्वर इस से पहले बिजनौर जिले के ही नागरपुर खड़कसेन और नगीना क्षेत्र के कई मंदिरों में पुजारी बन समय बिता चुका है। इन मंदिरों में उसे महराज बोला जाता था।

अपनी सफाई में सनव्वर हुसैन ने दावा किया कि वह साल 2018 में ही घर वापसी कर के हिन्दू बन चुका है। ग्रामीणों ने इस मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सनव्वर हुसैन को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक अब तक उसका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। सनव्वर अपनी घर वापसी के संबंध में कोई पक्के सबूत नहीं दे पाया है। उसके घर वालों को भी सूचना पहुँचा दी गई है। फ़िलहाल मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘अल्लाह हू अअकबर’ के नारे लगाते हुए भीड़ ने गणेश पंडाल पर किया हमला, कहा- बंद करो पूजापाठ, वर्ना बुरा अंजाम होगा: लखनऊ की घटना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गणेश पंडाल पर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पत्थरबाजी करके भगवान की मूर्ति के पास रखे कलश को तोड़ दिया। हमले के दौरान ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारे भी लगाए गए। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने थाने पर प्रदर्शन करके कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने केस दर्ज करके संदेह के आधार पर दो नाबालिगों को पकड़ा है।

मामला लखनऊ के थाना क्षेत्र चिनहट की है। यहाँ मंगलवार (10 सितंबर 2024) को गंगा विहार कॉलोनी की छोटी मस्जिद के पास रहने वाली किरण चौरसिया ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में किरण ने बताया कि हर बार की तरह इस साल भी उन्होंने अपने घर पर शनिवार (7 सितंबर 2024) को भगवान गणेश की मूर्ति विधि-विधान से स्थापित किया था।

अगले दिन से ही 20-25 की तादाद में मुस्लिम भीड़ उन्हें परेशान करने लगी। इस भीड़ में नाबालिग और युवा भी शामिल बताए जा रहे है। किरण के मुताबिक, वो हर दिन शाम 7 से 7:30 के बीच आरती करती हैं। आरती के बीच मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारों के साथ कई अन्य उत्तेजक नारे लगाते हुए गणेश पंडाल के सामने से गुजरने लगी।

भीड़ में शामिल लोग आरती कर रहे हिंदुओं को धमकी भी देते थे। भीड़ के द्वारा हर दिन पूजा-पाठ में बाधा डालने का प्रयास किया जाता था। महिला द्वारा दी गई शिकायत में आगे बताया गया है कि मंगलवार (10 सितंबर) की शाम 7:30 बजे वह कुछ बच्चियों के साथ पंडाल में आरती कर रही थी। इसी दौरान रोज की तरह मुस्लिम युवकों की भीड़ वहाँ पहुँच गई।

भीड़ इस बार हमलावर हो गई और पंडाल में रखी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश हुई। उन लोगों ने पूजा पंडाल पर पत्थरबाजी भी की। इस हमले में भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ मौजूद कलश टूट गया। हमले से वहाँ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। कुछ देर तक हंगामा करने के बाद मुस्लिम भीड़ हिन्दू परिवार को दोबारा पूजा-पाठ करने पर जान से मारने की धमकी देते चली गई।

इसके बाद पीड़िता ने थाने में जाकर शिकायत दी कहा कि उसकी धार्मिक भावनाएँ आहात की गई हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना की जानकारी मिलते ही श्रद्धालु व हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने थाने पर पहुँच कर हंगामा किया।

मामले की जानकारी मिलते ही तमाम सीनियर अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपितों को चिन्हित करके उनकी धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पंडाल के पास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। DCP शशांक सिंह के मुताबिक, मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

राहुल गाँधी ने भारत के लोकतंत्र पर उठाए सवाल, सीरिया-इराक से की तुलना: अमेरिका में भारत विरोधी पत्रकार और उस महिला से भी मिले जिसके पति का इस्लामी संगठन से जुड़ाव

वॉशिंगटन डीसी में मंगलवार (10 सितंबर, 2024) को ‘नेशनल प्रेस क्लब’ में भारत के विपक्षी नेता राहुल गाँधी ने भारतीय लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी की स्थिति और देश की आर्थिक प्रगति पर सवाल उठाए। शुरुआत में ही उन्होंने दावा किया, “मुझे लगता है कि 2014 में भारत की राजनीति बहुत नाटकीय रूप से बदल गई। हमने एक ऐसे राजनीतिक दौर में प्रवेश किया जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा। ये आक्रामक और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की नींव पर हमला करने वाला है।”

अपनी लक्जरियस राजनीतिक पदयात्रा (‘भारत जोड़ो यात्रा’) का महिमामंडन करने के अपने प्रयास में, राहुल गाँधी ने आरोप लगाया, “मीडिया को दबाया गया, संस्थानों पर नियंत्रण कर लिया गया, एजेंसियाँ विपक्ष पर हमला कर रही थीं, राज्य सरकारें गिराई जा रही थीं, और हमें लगा कि लोगों तक सीधे पहुँचने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।”

गाँधी परिवार के ‘शहज़ादे’ ने अमेरिका में अपने मीडिया इंटरैक्शन का उपयोग घरेलू राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया। उन्होंने न केवल घरेलू राजनीतिक मामलों को उछाला बल्कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) को भी बदनाम किया।

उन्होंने बेशर्मी से कहा, “भारत में कॉन्ग्रेस और हमारे सहयोगियों के बीच और भाजपा और आरएसएस के बीच एक वैचारिक युद्ध चल रहा है। भारत के दो बिल्कुल अलग दृष्टिकोण हैं। हम एक बहुलतावादी दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं, एक ऐसा दृष्टिकोण जहाँ हर किसी को फलने-फूलने का अधिकार है, सभी कल्पनाएँ स्वतंत्र रूप से घूम सकती हैं, एक ऐसा भारत जहाँ आपको इस आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाता कि आप किस धर्म में विश्वास करते हैं या आप किस समुदाय से आते हैं या आप कौन सी भाषा बोलते हैं, इसके विपरीत एक बहुत ही कठोर केंद्रीकृत दृष्टिकोण है।”

राहुल गाँधी ने राजनीतिक रूप से प्रेरित जातिगत जनगणना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हम आरक्षण को 50% से अधिक बढ़ाएँगे।”

राहुल गाँधी ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेला, भारत की तुलना सीरिया और इराक से की

उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध के शिकार के रूप में कॉन्ग्रेस पार्टी को भी पेश किया जब उसके खाते ₹135 करोड़ का टैक्स न चुकाने पर फ्रीज कर दिए गए।

उन्होंने कहा, “हमने अपना बैंक खाता फ्रीज होने के बावजूद चुनाव लड़ा। अब, मुझे नहीं पता, मुझे नहीं पता कि कोई ऐसा लोकतंत्र है जहाँ ऐसा हुआ हो। शायद, आप जानते हैं, इस तरह की चीज़ें सीरिया या इराक में हुआ करती थीं।” राहुल गाँधी ने भारत और असफल इस्लामी मुल्कों के बीच झूठी समानता स्थापित की।

अपने मीडिया इंटरैक्शन के दौरान, राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया, “तो भारतीय लोकतंत्र पर हमला हुआ है, इसे बहुत बुरी तरह कमजोर किया गया है, और अब यह वापस लड़ रहा है।” गाँधी युवराज तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर हैं।

गाँधी परिवार के युवराज की विवादास्पद बांग्लादेशी ‘पत्रकार’ से मुलाकात

सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में राहुल गाँधी को भारत विरोधी, बांग्लादेशी ‘पत्रकार’ मुश्फिकुल फजल अंसारी के साथ बातचीत करते देखा गया।

मार्च में सुर्खियों में आए अंसारी ने अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर के साथ एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान (जो कि भारत का आंतरिक मामला है) दिल्ली शराब नीति मामले में AAP नेता अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था।

मुश्फिकुल फजल अंसारी ने UN के प्रवक्ता के समक्ष भी यही मुद्दा उठाया था। ‘जस्ट न्यूज बीडी’ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने उन्हें डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया है। मुश्फिकुल को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध (CTTC) विभाग द्वारा वांछित घोषित किया गया था और मामले में उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया था।

उसी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मुश्फिकुल एक वेब पोर्टल चलाता था जिसे 2015 में बांग्लादेश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। उस पर कई बार सरकार के खिलाफ गलत सूचना फैलाने का आरोप लगा है। मुश्फिकुल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का समर्थक है, जो भारत के उत्तर-पूर्व में विद्रोह का समर्थन करने के लिए जानी जाती है। यूएन मिशन ने उनके पत्रकार के रूप में कार्यक्रमों में भाग लेने पर आपत्ति जताई थी।

बीएनपी ने हंटर बिडेन को अपने लॉबीस्ट के रूप में काम पर रखने का प्रयास किया और इसके संस्थापक शेख उबेद के माध्यम से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-ए-इस्लामी (JeI) से संबंध हैं

इस दौरान राहुल गाँधी ने आईएएमसी की वकालत निदेशक सरिता पांडे से मुलाकात की

जून 2023 में सरिता पांडे ने वाशिंगटन में राहुल गाँधी से मुलाकात की थी और उन्हें उनकी माँ सोनिया गाँधी का एक चित्र भेंट किया था। उन्होंने उस समय ट्वीट किया था – “जब मैंने उन्हें चित्र सौंपा, तो मैंने कहा, “एक माँ से दूसरी माँ को,” और उन्होंने कहा कि वह इसे उन्हें देंगे। मुझे उम्मीद है कि वह ऐसा करेंगे”।

गौरतलब है कि सरिता पांडे अजीत साही की पत्नी हैं, जो इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)’ के एडवोकेसी डायरेक्टर हैं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) के अनुसार, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के संबंध बैन इस्लामिक आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े हैं।

इसके अलावा, आईएएमसी के संबंध लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-ए-इस्लामी (JeI) से भी उसके संस्थापक शेख उबैद के माध्यम से जुड़े हैं। आईएएमसी एक जमात-ए-इस्लामी समर्थित लॉबिंग संगठन है, जो खुद को अधिकारों की वकालत करने वाला समूह बताता है।

इससे पहले, यह कथित तौर पर यूएसए में विभिन्न समूहों के साथ मिलकर काम कर चुका है और यहाँ तक कि भारत को USCIRF (संयुक्त राज्य अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग) द्वारा ब्लैकलिस्ट कराने के लिए उन्हें पैसे भी दिए। आईएएमसी को भारत में इस्लामी कारणों को आगे बढ़ाने के लिए फर्जी खबरें और गलत सूचनाएँ फैलाने का भी दोषी पाया गया है। इसे 2021 में यूएपीए के तहत भी लिया गया था।

सरिता पांडे के पति अजीत साही को 2021 में विवादास्पद हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) द्वारा ‘स्वामी अग्निवेश मेमोरियल अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था। इस संगठन ने ‘ग्लोबल हिंदुत्व को खत्म करो’ सम्मेलन का समर्थन भी किया था।

2019 में, ‘हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स’ की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने भी भारतीय मुसलमानों में एनआरसी को लेकर डर और घबराहट पैदा करने की कोशिश की थी। संयोग से, राहुल गाँधी ने अपनी 2023 की यूएस यात्रा के दौरान उनसे भी मुलाकात की थी। वह ‘विमेन फॉर अफगान विमेन’ नामक संगठन की सह-संस्थापक भी हैं, जो जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसायटी फाउंडेशन (OSF)/ओपन सोसायटी इंस्टीट्यूट (OSI) द्वारा वित्त पोषित है।

अब्बा फौज से रिटायर, भाई वायुसेना में, खुद ‘मेजर हर्षित चौधरी’ बन घूमता था शहबाज अली: वंदे भारत से चोरी केस में गिरफ्तारी के बाद खुला राज

गुजरात की अहमदाबाद रेलवे पुलिस ने वंदे भारत ट्रेन में चोरी करने वाले शहबाज अली नाम के एक चोर को गिरफ्तार किया है। उसने हर्षित चौधरी नाम से अपना पहचान पत्र बनवा रखा था और खुद को आर्मी में मेजर बताता था। उसके पास से सेना का एक आई कार्ड एवं अन्य कागजात भी बरामद हुए हैं। फर्जी कागजातों से शहबाज़ ट्रेन और हवाई यात्राएँ करता था। उसके अब्बू सेना के रिटायर्ड हैं, जबकि उसका भाई एयरफोर्स में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात में कुछ दिन पहले वन्दे भारत ट्रेन से एक सूटकेस चोरी हुआ था। इस घटना की शिकायत अहमदाबाद रेलवे पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने जाँच के दौरान CCTV फुटेज खँगाले। इस दौरान एक युवक चोरी हुए सूटकेस के साथ नजर आया। इस युवक की पड़ताल रेलवे रिजर्वेशन से करवाई गई। सीट बुकिंग में इस्तेमाल दस्तावेजों के आधार पर युवक की पहचान राजस्थान के हर्षित चौधरी के तौर पर हुई।

आखिरकार 5 सितंबर 2024 को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आरोपित को अहमदाबाद लाकर पूछताछ की गई। पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार आरोपित हर्षित चौधरी नहीं, बल्कि शहबाज़ मुश्ताक अली खान है। उसने हर्षित चौधरी के नाम का फर्जी आधार कार्ड बनवा रखा था। शहबाज़ न सिर्फ खुद को हिन्दू, बल्कि भारतीय सेना में मेजर बताया करता था।

तलाशी के दौरान उसके पास से एक आई कार्ड भी बरामद हुआ। इस आई कार्ड में भी शहबाज़ ने अपनी फोटो लगाकर खुद को हर्षित चौधरी बता रखा था। फर्जी कागजात बरामद होने के बाद पुलिस ने शहबाज़ से आगे की पूछताछ शुरू की। उसने बताया कि वह मूलतः उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का रहने वाला है। अलीगढ़ में वह मौलाना आज़ाद नगर में रहता है।

पूछताछ में उसने बताया कि इन फर्जी पहचान पत्रों पर उसने 3 बार घरेलू उड़ान से और इतनी ही बार ट्रेन से यात्रा कर चुका है। फर्जी कागजात बनाने के पीछे शहबाज़ ने लोगों पर रुतबा झाड़ने की मंशा बताया है। फिलहाल जाँच एजेंसियाँ इसकी पड़ताल कर रही हैं। शादीशुदा शाहबाज़ अली 2 बच्चों का अब्बा है। पुलिस को पता चला कि शहबाज़ के अब्बा मुश्ताक अली खान सेना से रिटायर्ड हैं।

वहीं, शाहबाज़ का एक भाई भारतीय वायुसेना में है। उसका एक अन्य भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। आरोपित शहबाज को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। पुलिस की जाँच इस बिंदु पर भी हो रही है कि सेना के अधिकारी का आई कार्ड शहबाज़ ने सिर्फ धौंस जमाने के लिए बनवाया था या इसके पीछे उसकी कोई और मंशा थी।

शिमला में हिंदुओं पर बरसी लाठियाँ: अवैध मस्जिद को बचाने के लिए दमन पर उतरी हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार, खुद के मंत्री ने भी निर्माण पर उठाए थे सवाल

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पुलिस ने अवैध मस्जिद पर कार्रवाई की माँग कर रहे हिन्दू प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया। शिमला के संजौली में हो रहे इस प्रदर्शन में पुलिस पानी की बौछारें चला रही है। इससे पहले हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने संजौली इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया था ताकि हिन्दू प्रदर्शन ना कर पाएँ।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (11 सितम्बर, 2022) को हिन्दू संगठनों सहित बड़ी संख्या में हिन्दू शिमला के संजौली में प्रदर्शन करने जा रहे थे। उन्होंने यहाँ प्रदर्शन का ऐलान पहले ही कर दिया था। हिन्दुओं ने इस प्रदर्शन का आह्वान संजौली में अवैध रूप से बनी पाँच मंजिला मस्जिद को गिराने के लिए किया है।

इस प्रदर्शन को देखते हुए सुक्खू सरकार ने पहले ही संजौली इलाके में पुलिस का बंदोबस्त कर दिया था। यहाँ पर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती भी की गई थी। इसके अलावा प्रदर्शनकारी आगे ना बढ़ पाएँ, इसके लिए बड़ी संख्या में बैरिकेड लगाए गए थे। वाटर कैनन भी लगाए गए थे ताकि हिन्दू प्रदर्शनकारी रोके जा सकें।

बुधवार को बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए हिन्दू जब संजौली बाजार की तरफ बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए हर हथकंडा अपनाया। प्रदर्शन से पहले ही हिन्दू जागरण मंच के पूर्व महामंत्री कमल गौतम को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारी अवैध निर्माण तोड़ने की माँग पर अड़े रहे और नारेबाजी करते रहे।

जब निहत्थे प्रदर्शनकारी संजौली के पास पहुँचे तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाना चालू कर दिया। बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने हिन्दुओं पर लाठियाँ बरसाई। इस लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन से पानी की बौछार मारना चालू कर दिया। लाठीचार्ज में कई हिन्दुओं के घायल होने की भी सूचना है।

इस प्रदर्शन में लगातार अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के नारे लग रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सुक्खू सरकार संजौली मस्जिद विवाद उठने के लगभग एक सप्ताह बाद भी इसका समाधान नहीं ढूंढ पाई है। संजौली में बनी इस मस्जिद को लेकर विरोध और बढ़ता जा रहा है।

राजधानी शिमला में बनी संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई।

इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए।इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे।

इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

इस लड़ाई झगड़े की घटना के बाद यह मस्जिद विवादों के केंद्र में आ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

तबसे ही इस मस्जिद को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध होने की बात हिमाचल सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कही थी। स्थानीय लोगों को हिन्दू संगठनों की माँग है कि इस अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और सरकार इसमें ढिलाई ना बरते। हालाँकि, सुक्खू सरकार बता रही है यह मामला अभी कोर्ट में है।

RG कर रेप-मर्डर केस: पीड़ित पिता ने CM ममता बनर्जी की भूमिका पर उठाए सवाल, काम पर नहीं लौटे डॉक्टर; कहा- पहले पुलिस कमिश्नर एवं स्वास्थ्य सचिव बर्खास्त हों

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर की रेप के बाद बर्बर हत्या को लेकर आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बंगाल सरकार के खिलाफ़ वहाँ के जूनियर डॉक्टर अभी भी प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच ममता बनर्जी की सरकार ने ईमेल भेजकर इन डॉक्टरों को चर्चा के लिए बुलाया है। हालाँकि, डॉक्टरों ने इनकार कर दिया।

प्रदर्शनकारी डॉक्टर मंगलवार (10 सितंबर 2024) को स्वास्थ्य सचिवालय तक मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शहर के पुलिस प्रमुख के तत्काल इस्तीफ़े की माँग करते हुए वहाँ डेरा डाल दिया है। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट को भेजे गए ईमेल में सरकार ने डॉक्टरों से चर्चा के लिए आने और महीने भर से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए कहा है।

हालाँकि, डॉक्टरों ने यह कहते हुए सरकार से चर्चा करने से इनकार कर दिया कि यह ईमेल स्वास्थ्य सचिव की ओर से आया है। उनका तर्क है कि स्वास्थ्य सचिव उन अधिकारियों में से एक हैं, जो प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से इस्तीफा माँग रहे थे। डॉक्टरों ने कहा, “यह ईमेल स्वास्थ्य सचिव की ओर से आया है और यह हमारे लिए अपमानजनक है।”

उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि एक छोटे प्रतिनिधिमंडल को बुलाना अपमानजनक है। हम स्वस्थ भवन के पास हैं। हमें ईमेल भेजने की क्या जरूरत थी? वह हमसे मिलने आ सकते थे… हमारी पाँच माँगें हैं और हम चाहते हैं कि ये माँगें पूरी की जाएँ।” इससे पहले आज जब डॉक्टर स्वास्थ्य सचिवालय पहुँचे थे, तो उन्हें वार्ता के लिए बुलाया गया था। हालाँकि, उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि उनकी माँगें तुरंत पूरी की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को मानने से इनकार करते हुए डॉक्टरों ने 10 सितंबर को स्वास्थ्य भवन तक मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता भी पहुँचे थे। पीड़िता की माँ ने कहा, “मेरे हजारों बच्चे सड़कों पर हैं। इसलिए मैं घर पर नहीं रह सकती थी। मुख्यमंत्री ने त्योहार में शामिल होने के लिए कहा था। अब यही मेरा त्योहार है।”

प्रदर्शन में शामिल मृतक डॉक्टर के पिता ने कहा, “हम इस मामले में सीएम (ममता बनर्जी) की भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं… उन्होंने कोई काम नहीं किया…मेरी बेटी के साथ जो घटना हुई, हम शुरू से ही यह कह रहे हैं कि इसमें विभाग का एक व्यक्ति शामिल है… हमें लगता है कि इस साल कोई भी दुर्गा पूजा नहीं मनाएगा… अगर कोई मनाएगा भी तो खुशी से नहीं मनाएगा…क्योंकि बंगाल और देश के सभी लोग मेरी बेटी को अपनी बेटी मानते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों से मंगलवार (10 सितंबर 2024) की शाम 5 बजे तक काम पर लौटने के आदेश दिए हैं। इसके जवाब में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया था और सरकार को शाम 5 बजे तक अपनी माँगें पूरी करने के लिए समय सीमा दी थी और फिर स्वास्थ्य सचिवालय की ओर मार्च किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर डॉक्टर तय समय पर काम पर नहीं लौटे तो वह राज्य को कार्रवाई की मंजूरी दे देगा।

डॉक्टरों की पाँच माँगों में शहर के पुलिस प्रमुख विनीत गोयल, राज्य के स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य सेवा निदेशक सहित कई लोगों का इस्तीफा शामिल है। शाम 5 बजे के बाद उन्होंने सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी की सरकार ने कहा कि पिछले महीने समय पर इलाज न मिलने के कारण 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

‘जब तक भाजपा है, आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता’: अमित शाह ने राहुल गाँधी को घेरा, कहा- भारत विरोधी लोगों के साथ खड़े होना कॉन्ग्रेस की आदत

केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राहुल गाँधी के आरक्षण खत्म करने वाले बयान पर हमला बोला है। उन्होंने साफ़ कर दिया है कि जब तब भाजपा है तब देश में आरक्षण को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने राहुल गाँधी पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “देशविरोधी बातें करना और देश को तोड़ने वाली ताकतों के साथ खड़े होना राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी की आदत सी बन गई है। चाहे जम्मू-कश्मीर में JKNC के देशविरोधी और आरक्षण विरोधी एजेंडे का समर्थन करना हो, या फिर विदेशी मंचों पर भारत विरोधी बातें करनी हो, राहुल गाँधी ने देश की सुरक्षा और भावना को हमेशा आहत किया है। भाषा से भाषा, क्षेत्र से क्षेत्र और धर्म से धर्म में भेदभाव लाने की बात करना राहुल गाँधी की विभाजनकारी सोच को दर्शाता है।”

इसके बाद गृह मंत्री शाह ने राहुल गाँधी के आरक्षण खत्म करने वाले बयान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “राहुल गाँधी ने देश से आरक्षण को समाप्त करने की बात कह कर कॉन्ग्रेस का आरक्षण विरोधी चेहरा एक बार फिर से देश के सामने लाने का काम किया है। मन में पड़े विचार और सोच किसी न किसी माध्यम से बाहर आ ही जाते हैं। मैं राहुल गाँधी को बताना चाहता हूँ कि जब तक भाजपा है, आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता और देश की एकता के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता।”

गृह मंत्री अमित शाह का राहुल गाँधी पर यह हमला अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में दिए गए बयान पर किया है। राहुल गाँधी से जब यह सवाल पूछा गया कि भारत में जातिगत आधार पर आरक्षण कब खत्म होगा तो उन्होंने कहा, ”हम आरक्षण खत्म करने की तब सोचेंगे जब भारत में निष्पक्षता होगी। अभी भारत में निष्पक्षता नहीं है। अभी कुछ ऊँची जातियों के लोग भी कहते हैं कि हमने आखिर क्या गलत किया है, हमें क्या सजा मिल रही है।”

गृह मंत्री अमित शाह से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती और केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राहुल गाँधी पर हमला बोला था। मायावती ने कॉन्ग्रेस को आरक्षण विरोधी बताते हुए पिछड़े वर्ग को इनसे सावधान रहने की सलाह दी थी। मायवती ने अंदेशा जताया था कि अगर केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार आ गई तो वह आरक्षण खत्म कर देगी। केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा था कि राहुल गाँधी के बयान से कॉन्ग्रेस की मानसिकता का पर्दाफाश हुआ है।

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी इस बयान के बाद से बैकफुट पर है। कॉन्ग्रेस पार्टी अब लगातार आरक्षण पर राहुल गाँधी का बचाव कर रही है। हालाँकि, दलित नेता लगातार कॉन्ग्रेस पर लगातार हमलावर हैं। कॉन्ग्रेस की सफाई भी काम नहीं आ रही है।

‘राहुल गाँधी की सभा में मौजूद थे कई खालिस्तानी’: कॉन्ग्रेस नेता के लिए SFJ का उमड़ा प्रेम, आतंकी पन्नू ने पगड़ी-कड़ा वाले बयान का किया समर्थन

खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू के संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने राहुल गाँधी का समर्थन किया है। SFJ ने राहुल गाँधी के सिखों पर दिए गए उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें राहुल ने कहा था कि भारत में सिखों को पगड़ी और कड़ा पहनने की लड़ाई है। SFJ ने यह भी दावा किया है कि राहुल गाँधी के साथ अमेरिका में कई खालिस्तान समर्थन मौजूद थे।

SFJ ने राहुल गाँधी के बयान का समर्थन करने वाला अपना एक पत्र जारी किया है। गुरवतपंत सिंह पन्नू द्वारा जारी किए गए इस पत्र में SFJ ने कहा, “वाशिंगटन डीसी में एक सभा को संबोधित करते हुए, जहाँ कई खालिस्तान समर्थक सिख भी मौजूद थे, राहुल गाँधी ने SFJ के खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह अभियान को उचित ठहराया है। उनका यह कहना ‘भारत में लड़ाई इस बात की है क्या एक सिख को पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति होगी, और क्या वह गुरुद्वारा जा सकेगा’ हमारी बात का समर्थन है।”

राहुल गाँधी SFJ
SFJ का बयान

SFJ ने आगे कहा, “भारत में सिखों के अस्तित्व पर खतरे वाला राहुल का बयान साहसी और बोल्ड है बल्कि 1947 से सिखों पर भारत में हुए अत्याचार की बात को मजबूत करता है। यह बयान तथ्यात्मक इतिहास पर आधारित है और सिखों के देश खालिस्तान बनाने के लिए पंजाब में स्वतंत्रता जनमत संग्रह पर SFJ के रवैये को सही ठहराता है।”

हमेशा भारत तोड़ने की बात करने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरवतपंत सिंह पन्नू का राहुल गाँधी के लिए यह प्रेम उनके हालिया बयान के बाद उमड़ा है। राहुल गाँधी ने अपने अमेरिका दौरे में वर्जीनिया में कहा था, “भारत में लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत दी जाएगी? क्या एक सिख को भारत में कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी या वह गुरुद्वारा जा सकेगा? लड़ाई इसी बात को लेकर है और यह सिर्फ सिखों के लिए नहीं है, यह सभी धर्मों के लिए है।”

देश को तोड़ने और भारत में सिखों को प्रताड़ित बताने वाले खालिस्तानी आतंकियों के लिए यह सुनहरा मौक़ा बन गया है। भारत के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी पार्टी के डी फैक्टो मुखिया का उनके भारत विरोधी एजेंडे को मजबूत करने में यह बयान एक संजीवनी की तरह काम आएगा। SFJ का राहुल को साहसी बताना इसी कड़ी का एक हिस्सा है। SFJ ने यह दावा भी किया है कि राहुल गाँधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खालिस्तानी शामिल थे। इससे राहुल के कार्यक्रमों की मंशा पर संशय पैदा होता है।

राहुल गाँधी के तथ्यों से परे इस बयान पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। भाजपा नेता RP सिंह ने उन्हें इस मामले को लेकर कोर्ट में घसीटने की चुनौती भी दी है। कई लोगों ने उन्हें याद दिलाया है कि भारत में सिखों के लिए सबसे अधिक खतरा तब पैदा हुआ था जब उनके पिता राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान सिखों का खुलेआम नरसंहार हुआ था।

राहुल गाँधी के इस बयान पर लोगों ने यह भी याद दिलाया कि राजीव गाँधी ने कहा था, “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती है।” उनका यह बयान हिंसा के समर्थन के रूप में देखा जाता है। कॉन्ग्रेस के ही कई नेताओं कमलनाथ, जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह पर सिख विरोधी दंगे भड़काने का आरोप है।