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कर्नाटक दंगे में 10 FIR, 50 गिरफ्तार और 94 की तलाश: इंस्पेक्टर निलंबित, कट्टरपंथी मुस्लिमों ने मस्जिद के पास गणपति विसर्जन यात्रा पर किया था हमला

कर्नाटक के मांड्या जिले के नागमंगला कस्बे में 11 सितंबर 2024 को गणपति विसर्जन के दौरान पथराव के मामले में पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को 10 प्राथमिकी दर्ज की है। घटना में शामिल अब तक 56 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 90 अन्य की तलाश की जा रही है। वहीं, शिक्षण संस्थानों में छुट्टी कर दी गई है।

इस बीच दंगों के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में शुक्रवार (13 सितंबर) को एक पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया। पुलिस इंस्पेक्टर अशोक कुमार पिछले साल भी गणेश चतुर्थी के दौरान इसी तरह की दंगे की घटना के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने में विफल रहे थे। इस बार भी अशोक कुमार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहे थे।

मांड्या के एसपी मल्लिकार्जुन बालादंडी ने कहा कि मांड्या के बदरीकोप्पलु गाँव में मस्जिद के पास का स्थान संवेदनशील क्षेत्र है। वहाँ और अधिक सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिंसा और दंगे के लिए 150 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। BNSS की धारा 16, 109, 115, 118, 121, 132, 189, 190 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस इलाके की सीसीटीवी फुटेज जुटाकर आरोपितों की पहचान कर रही है और उनके बारे में जानकारी जुटा रही है। इस तरह शुक्रवार को भी पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए 52 आरोपितों को गुरुवार (12 सितंबर) की शाम को अदालत में पेश किया गया। मंड्या जिला अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

सबूत जुटाने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने गुरुवार को घटनास्थल का दौरा किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। पुलिस विभाग ने 14 सितंबर तक कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं, अगले आदेश तक स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए नागमंगला शहर में फ्लैग मार्च किया और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।

इस घटना को लेकर कर्नाटक भाजपा ने एक समिति गठित की है। पाँच सदस्यीय इस समिति के बारे में जानकारी देते हुए प्रदेश भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “नागमंगला में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने नेताओं की एक तथ्यान्वेषी टीम गठित की है और एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।”

दरअसल, बदरीकोप्पलु गाँव के युवक कस्बे में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस जैसे ही एक मस्जिद के पास सड़क पार करने लगा, तभी मैसूर रोड पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों से तीखी बहस शुरू कर दी। इस विवाद को देखते हुए उपद्रवियों ने जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके अलावा लोगों को हथियार भी दिखाए गए।

इस हमले में कुछ पुलिसकर्मी सहित कई लोग भी घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की और सामान में आग लगा दी। रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 25 दुकानों में लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इसके अलावा, कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

बता दें कि कर्नाटक के मांड्या से पहले भी गणपति विसर्जन के दौरान हिंसा की घटनाएँ घटीं। गुजरात के सूरत में भी पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने पथराव किया था। इसके अलावा लखनऊ में भी इस्लामी भीड़ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए पंडाल पर अटैक किया था। वहीं, वडोदरा में भी गणेश पंडाल का विरोध करते हुए मुस्लिमों ने अपने घर के बाहर अरबी झंडे लगा लिए थे। इसके अलावा कच्छ में भी भगवान गणेश की प्रतिमा पर हमला हुआ था। भरूच में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर मजहबी झंडे लगाने को लेकर बवाल हुआ था।

पैरालंपिक खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया-TOPS को क्यों समर्पित किए सभी 29 मेडल, क्यों PM मोदी का मतलब बताया ‘परम मित्र’: जानिए सब कुछ

हाल ही में सम्पन्न हुए पैरालंपिक खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। भारतीय खिलाड़ियों ने इन खेलों में 29 मेडल जीते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (12 सितम्बर, 2024) को देश के पैरालंपिक खिलाड़ियों से मुलाक़ात की और उनकी राय जानी। उन्होंने उनका उत्साह वर्धन भी किया। इस दौरान खिलाड़ियों ने कहा कि मोदी सरकार के समर्थन के कारण मेडल की संख्या में बढ़ोतरी आई है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों ने पीएम मोदी को अपना परम मित्र बताया।

पीएम मोदी से मिलने पहुँचे पैरालंपिक सिल्वर मेडल विजेता शरद कुमार ने कहा, “यह मेरा दूसरा मेडल है, मैं तीन बार पैरालंपिक खेल चुका हूँ। मैं एक खिलाड़ी के तौर पर यह कहूँगा कि मुझे अपना दल देख कर गर्व महसूस होता है। हमें अब मजबूत टीम माना जा सकता है। जाने से पहले आप सबसे बात करते हैं और आप वापस आकर बात करते हैं इससे हमें बल मिलता है। लोगों ने पैरा खेलों को उस तरह नहीं अपनाया जिस तरह आपने अपनाया है।”

वहीं सिल्वर मेडल जीतने वाले योगेश कठूरिया ने कहा, “मैं अपना अनुभव साझा करना चाहता हूँ। मुझे बताना है कि आपकी वजह से लगातार हमारा प्रदर्शन सुधरा है, आपने को खेलो इंडिया उअर TOPS जैसी स्कीम चालू की हैं, आपकी वजह से हम 29 मेडल लाए हैं। बाकी लोगन के लिए पीएम का मतलब प्राइम मिनिस्टर होता है हमारे लिए परम मित्र होता है।”

खेलो इंडिया और TOPS से मिली बड़ी सफलता

दरअसल, मोदी सरकार की जिन योजनाओं की खिलाड़ी तारीफ़ कर रहे हैं, उनके कारण हर प्रतिभा को आगे आने का मौक़ा मिला है। इसके अलावा शुरुआत से ही किस प्रकार खेलों को लेकर खिलाडियों को तैयार किया जा सकता है, उस दिशा में भी काम हुआ है। खिलाड़ियों ने इस दौरान खेलो इंडिया स्कीम का नाम भी लिया। खेलो इंडिया स्कीम को मोदी सरकार ने 2017 में चालू की थी। इस योजना के जरिए सरकार स्कूल स्तर से लेकर आगे तक खिलाड़ियों को मौके देती है।

खेलो इंडिया के लिए मोदी सरकार ने बड़ा बजट भी दिया है। मोदी सरकार ने 2020-24 के बीच खेलो इंडिया के तहत लगभग ₹2700 करोड़ दिए हैं। खेलो इंडिया सेंटर भी स्थापित किए गए हैं, इनमें खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं। खेलो इंडिया गेम्स का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें पहचानी जाने वाली प्रतिभाओं को आगे अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया जाता है।

वहीं खिलाड़ियों ने TOPS स्कीम का नाम भी लिया है। इसका पूरा नाम टार्गेटिंग ओलंपिक पोडियम है। इसे केंद्र सरकार ने 2014 में चालू किया था। इसके तहत ओलम्पिक की तैयारी करने वाले खिलाड़ियों को ₹50,000 महीना स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अलावा उनकी विदेशों में ट्रेनिंग का खर्चा भी सरकार उठाती है। इस स्कीम के कारण ओलंपिक और कॉमनवेल्थ खेलों में बड़ी संख्या में मेडल आए हैं। इसका एक उदाहरण नीरज चोपड़ा हैं।

पैरालंपिक को भी सरकार ने दिया बड़ा बजट

एक रिपोर्ट बताती है कि पेरिस में हुए पैरालंपिक खेलों के लिए भारत सरकार ने 2021-24 के बीच ₹74 करोड़ खर्च किए हैं। टोक्यो पैरालंपिक खेलों के लिए केंद्र सरकार ने ₹26 करोड़ खर्च किए थे, यानी इस बार के खेलों के लिए सरकार ने बजट में लगभग 2.8 गुने की बढ़ोतरी कर दी। केंद्र सरकार ने पैरालंपिक खिलाड़ियों को भी वही सुविधाएँ दी हैं जो उसने सामान्य ओलम्पिक खिलाड़ियों को दी। इसका असर पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन पर साफ़ तौर पर दिखा है।

मोदी सरकार के प्रोत्साहन के चलते पैरालंपिक खेलों में भारत में आने वाले मेडल की सँख्या 29 गुने बढ़ी है। वर्ष 2012 के लंदन पैरालंपिक खेलों में भारत को केवल 1 मेडल मिला था थे। वहीं 2024 में यह संख्या 29 हो गई। भारत ने उन खेलों में भी मेडल जीते हैं, जिनमे वह पहले अंतिम मुकाबले तक नहीं पहुँच पाता था। भारत ने 2024 पैरालंपिक खेलों में तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेलों में मेडल जीते हैं। इन 29 मेडल में से भारत ने 7 गोल्ड जीते हैं।

सरवर चिश्ती ने ‘वक्फ बिल’ पर मुस्लिमों को भड़काया, कहा- सो क्यों रहे हो मियाँ, सड़कों पर उतरना पड़ेगा: ‘शाकाहारी लंगर’ वाले अजमेर दरगाह में आखिर पक क्या रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अजमेर दरगाह ने ‘शाकाहारी लंगर‘ का ऐलान किया है। इसी दरगाह के अंजुमन कमेटी का सदस्य सरवर चिश्ती है जो वक्फ बिल पर मुस्लिमों को भड़का रहा है। उसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए मुस्लिम समुदाय को उकसा रहा है। यह वीडियो बुधवार (11 सितंबर 2024) को सामने आया था।

वीडियो में चिश्ती कहता है, “यह शर्म की बात है कि हमारी इज्जत खतरे में है। हमारे घरों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं, भीड़ हमें मार रही है, मस्जिदों, दरगाहों और मजारों को तोड़ा जा रहा है।” चिश्ती ने सरकार द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लाने पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुसलमानों को इस बिल के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

सरवर चिश्ती ने कहा, “हम मुसलमानों से कह रहे हैं कि क्यूआर कोड को स्कैन करें और इस विधेयक को खारिज करने की मुहिम में शामिल हों। 10 सितंबर तक सिर्फ 40 लाख मुसलमानों ने क्यूआर कोड स्कैन किया है।”

चिश्ती ने मुस्लिम समुदाय से अपील की, “तुम सो क्यों रहे हो, मियाँ? तुम्हें जल्दी सड़कों पर उतरना पड़ेगा। तुमने पहले ही बहुत देर कर दी है, बेवजह अन्याय सहन कर रहे हो।” अजमेर दरगाह के खादीम ने लोगों को भड़काते हुए यह भी कहा कि जो व्यक्ति अन्याय सहन करता है, वह एक क्रूर व्यक्ति से भी बदतर होता है।

चिश्ती ने आगे कहा, “आप एक लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं, कम से कम अपने अधिकारों का उपयोग करो। आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे?” उन्होंने मुसलमानों से कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैंने पहले भी यह बात कही है और फिर से दिल से कहना चाहता हूँ – किसी को अपना नेता मानो। मैं असदुद्दीन ओवैसी को देखता हूँ, जो बहादुरी से मुसलमानों के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं।”

वीडियो में चिश्ती मौलाना तौकीर रजा और सज्जाद नोमानी जैसे कट्टर इस्लामिक उपदेशकों का समर्थन करता नजर आया, जिन पर भगवा लव ट्रैप साजिश का प्रचार करने का आरोप है।

बता दें कि ये वीडियो उसी दिन का है, जिस दिन अजमेर दरगाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शाकाहारी लंगर लगाने की घोषणा की गई थी। अजमेर शरीफ के सैयद अफशां चिश्ती ने बुधवार को कहा था कि शाही देग में सालों से शाकाहारी भोजन तैयार होता आया है और आने वाली 17 सितंबर को इसमें 4,000 किलो शाकाहारी भोजन तैयार होगा, जिसमें शुद्ध चावल और इसके साथ ही घी, मेवे आदि डाले जाएँगे। बाद में इसे गरीबों को बाँटा जाएगा।

पहले भी विवादों में रहता है सरवर चिश्ची, लड़कियों को बताया था चीज

बता दें कि अजमेर 92 नाम की फिल्म, जिसमें सरवर चिश्ती और अजमेर दरगाह के खादिम के परिवार के लोगों की कारगुजारी बताई गई थी। अजमेर 92 फिल्म अजमेर ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े ब्लैकमेलिंग-रेप कांड पर आधारित थी, जिसमें इसका परिवार भी शामिल था। उस फिल्म के ट्रेलर के सामने आने के बाद सरवर चिश्ती ने लड़कियों को ‘चीज’ बताया था और कहा था कि बड़े-बड़े फिसल जाते हैं।

सरवर चिश्ती ने कहा था, ‘लड़की चीज ही ऐसी होती है… बड़े से बड़ा फिसल जाता है।’ इस मामले को हिंदुओं से जोड़ते हुए कहा था, “आदमी पैसों से करप्ट नहीं हो सकता, मूल्यों से करप्ट नहीं हो सकता। लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। वो थी ना… नाम क्या था… जो पेड़ के नीचे बैठे थे, विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं।” चिश्ती ने आगे कहा था, “अच्छा… जितने भी बाबा लोग जेल में हैं, ये सिर्फ वो हैं जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।”

‘अजमेर 92’ 90 के दशक में 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल कर रेप करने की घटना पर बनी है। देश के इस सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल के मास्टरमाइंड दरगाह के खादिम परिवारों से जुड़े थे। युवक कॉन्ग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर थे।

विवादित बयानों के लिए कुख्यात है सरवर चिश्ती

सरवर चिश्ती वही शख्स है, जिसने नूपुर शर्मा मामले में लोगों को भड़काने का काम किया था। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।”

चिश्ती पर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

कर्नाटक में PFI के मंच से भाषण देते हुए सरवर चिश्ती ने नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी। तब नरेंद्र मोदी को PM उम्मीदवार बनाने की अटकलें लग रही थीं। उस समय सरवर चिश्ती ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो कोई ताज्जुब नहीं होगा कि सभी मुसलमान आतंकवादी बन जाएँ।” चिश्ती के इस बयान के बाद कर्नाटक में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि, उस मामले का क्या हुआ, किसी को ज्ञात नहीं है।

सरवर का बेटा आदिल चिश्ती ने हिंदू-देवताओं का मजाक बनाते हुए 23 जून 2022 को कहा था, “333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है, लेकिन 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

क्या राहुल गाँधी बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे? यही है वह सवाल जिस पर कॉन्ग्रेसियों ने इंडिया टुडे के पत्रकार को अमेरिका में धमकाया, पीड़ित ने बताया- गला पकड़ा, फोन छीना

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छिन लेते है। इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ अमेरिका में ऐसा हुआ था।

राहुल गाँधी की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के चेयरमैन सैम पित्रोदा से बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर सवाल किया तो वहाँ बैठे कॉन्ग्रेस समर्थक लोगों ने पत्रकार का मोबाइल फोन लिया और फुटेज को डिलीट करने के लिए धमकाने लगे।

कहा जा रहा है कि ऐसा करने वालों में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार भी शामिल थे। एक X यूजर अंकुर सिंह ने इसको लेकर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, “अलंकार ने इंटरव्यू रोक दिया। रिकॉर्डिंग डिलीट करने को कहा। पत्रकार ने मना कर दिया तो अलंकार ने उनका आईफोन छीन लिया और उनकी गर्दन पकड़ी। इसके बाद फोन को जबरन अनलॉक करके रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने इस पूरे वाकये को बताया है। उन्होंने लिखा है कि वे 7 सितंबर 2024 को भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की बहुप्रतीक्षित यात्रा को कवर करने के लिए अमेरिका के डलास स्थित टेक्सास गए थे। यहाँ राहुल गाँधी आने वाले थे और भारतीय प्रवासियों, छात्रों, प्रेस और कैपिटल हिल के नेताओं के साथ मुलाकात करने वाले थे।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे। कमरे में मौजूद एक व्यक्ति ने चिल्लाकर कहा कि यह सवाल ‘विवादास्पद’ है। वहाँ मौजूद अन्य लोगों भी उस व्यक्ति के हाँ में हाँ मिलाई।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। हालाँकि, रोहित के जिस सवाल को लेकर यह बवाल किया गया, उस सवाल को उनके ही एक मित्र ने राहुल गाँधी से पूछ लिया और कॉन्ग्रेस ने इसे अपने X हैंडल पर इसे पोस्ट भी किया।

कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ 1984 के सिख दंगों में आरोप तय, पुल बंगश में सिखों पर हमले के लिए उकसाया: कोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत

कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को टाइटलर के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप तय किए। विशेष न्यायाधीश राकेश सियाल ने यह निर्देश दिया कि टाइटलर को अब इन आरोपों का सामना अदालत में करना होगा, क्योंकि उन्होंने इन अपराधों के लिए खुद को निर्दोष बताया है। अदालत का यह आदेश सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले के संबंध में आया है।

प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान

अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार को जगदीश टाइटलर के खिलाफ हत्या और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, लेकिन जगदीश ने आरोपों से इनकार कर दिया। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश राकेश सियाल ने निर्देश दिया कि टाइटलर द्वारा अपराध के लिए दोषी न होने की बात स्वीकार करने के बाद उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। उन पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत है।

इससे पहले, 30 अगस्त को अदालत ने कहा था कि टाइटलर के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इस मामले में एक गवाह ने आरोप लगाया था कि 1 नवंबर, 1984 को टाइटलर ने गुरुद्वारा पुल बंगश के पास एक सफेद एम्बेसडर कार से उतरकर भीड़ को उकसाया। गवाह के अनुसार, टाइटलर ने भीड़ से कहा, “सिखों को मारो, उन्होंने हमारी माँ को मार डाला है”, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। इस उकसावे का परिणाम तीन लोगों की हत्या के रूप में सामने आया।

कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त

अदालत ने टाइटलर के खिलाफ हत्या, गैरकानूनी सभा, दंगा, विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, घर में अतिक्रमण और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के तहत आरोप तय किए हैं। इन सभी आरोपों के तहत अब टाइटलर को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जहां उन पर मुकदमा चलेगा।

1984 के सिख दंगों में भूमिका

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद पूरे देश में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे, जिसमें दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। इन दंगों में हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी और सैकड़ों गुरुद्वारों और घरों को लूटा व जलाया गया था। कॉन्ग्रेस के कई नेताओं पर इन दंगों में शामिल होने और भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे, जिनमें से एक प्रमुख नाम जगदीश टाइटलर का भी है।

जगदीश टाइटलर कौन हैं?

जगदीश टाइटलर कॉन्ग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं। उनका राजनीतिक करियर कई दशकों का है और वे दिल्ली में कई बार सांसद रह चुके हैं। टाइटलर का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद से विवादों में रहा है, जब उन पर आरोप लगे कि उन्होंने दंगों के दौरान सिख समुदाय के खिलाफ भीड़ को उकसाया।

टाइटलर का जन्म 11 जनवरी, 1944 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में प्राप्त की और भारतीय राजनीति में कॉन्ग्रेस के टिकट पर प्रवेश किया। 1980 के दशक में, टाइटलर दिल्ली की राजनीति में उभरे और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। हालाँकि सिख दंगों से जुड़ी विवादित घटनाओं के कारण उनका राजनीतिक करियर कई बार प्रभावित हुआ है। उनके खिलाफ आरोपों के चलते कॉन्ग्रेस ने भी कई बार उन्हें जिम्मेदार पदों से हटाया है।

जगदीश टाइटलर के खिलाफ अदालत का यह आदेश न केवल सिख दंगों से जुड़े मामले को फिर से सुर्खियों में लाता है, बल्कि देश की न्यायिक प्रणाली में विश्वास को भी प्रबल करता है। हालाँकि, टाइटलर ने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन अब उन्हें अदालत में मुकदमे का सामना करना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले का कानूनी परिणाम क्या होता है, और क्या यह फैसला सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम साबित होगा।

झारखंड के 6 जिलों में 13%, 2 जिलों में 35% बढ़े मुस्लिम: घुसपैठ-धर्मांतरण से बदल रही डेमोग्राफी, पूर्व CM बोले- राज्य में 7% घटे हिंदू

झारखंड के संथाल परगना में हो रहा डेमोग्राफिक बदलाव इस समय राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हाल में केंद्र सरकार ने इलाके में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव से संबंधित हाई कोर्ट में एक जवाब दाखिल किया जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए।

केंद्र द्वारा दिए गए जवाब से पता चला कि कैसे संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा व जामताड़ा समेत 6 जिलों से 16 फीसदी (44% से 28%) जनजातीय समुदाय के लोग घटे हैं जबकि मुस्लिमों की आबादी में 13% की वृद्धि हुई है और दो जिले- साहिबगंज और पाकुड़ में तो इनकी संख्या 35% बढ़ी है।

कैसे उठा डेमोग्राफी बदलाव का मामला

राज्य में होते इस बदलाव के पीछे पलायन, घुसपैठ और धर्मांतरण को कारण माना जा रहा है। वहीं इसका समाधान सिर्फ और सिर्फ एनआरसी को कहा जा रहा है। पहले इस मामले में सोमा उरांव द्वारा जनहित याचिका के जरिए जनजातीय समुदाय के लोगों के धर्म परिवर्तन का मामला उठाया गया था। वहीं बाद में दानियाल दानिश ने जनहित के जरिए बांग्लादेशी घुसपैठियों के घुसने का मुद्दा उठाया था। इन लोगों की चिंता संथाल परगना में हो रहा डेमोग्राफिक बदलाव था। प्रार्थियों ने ये भी बताया था कि कैसे घुसपैठियों को प्रवेश देने के लिए इलाकों में सिंडिकेट काम कर रहा है जो उन्हें आधार कार्ड बनाकर देता है।

इस गंभीर मसले के कोर्ट में पहुँचने के बाद छह जिलों के डिप्टी कमीशनर ने कोर्ट को बताया था कि उनके क्षेत्रों में घुसपैठ समस्या नहीं है। हालाँकि कोर्ट ने उन्हें आगाह कर दिया था कि अगर ये जानकारी झूठ निकली तो वो उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस चलाएँगे।

केंद्र का कहना है कि राज्य में घुसने वाले घुसपैठियों के खिलाफ संविधान के तहत कार्रवाई के अधिकार राज्य सरकार को दिए गए हैं। इसके लिए एक समिति राज्य सरकार के पास है। अगर राज्य को भी इस बाबत सहायता चाहिए तो केंद्र देने को तैयार है।

पूर्व CM ने जनता को किया आगाह

गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई कोर्ट में अब 17 सितंबर को होगी, लेकिन उससे पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को जनता के समक्ष उठाया है। उन्होंने 12 सितंबर को जामताड़ा के यज्ञ मैदान में जनआक्रोश रैली की। उन्होंने समझाया कि कैसे इस डेमोग्राफी बदलाव से सरकारी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए आरक्षित सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। अगर क्षेत्र में आबादी कम होगी तो लोकसभा, विधानसभा, सरकारी नौकरी हर जगह आबादी कम होगी।

उन्होंने बताया कि 1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर, 88% से 81% पर पहुँच गई है। उन्होंने आँकड़े देकर समझाया कि झारखंड में जनजातीय, हिंदू की आबादी घट रही है और उसी अनुपात में मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है।

पंजाब के गाँवों में UP-बिहार के श्रमिकों को प्रवेश की अनुमति नहीं, खुद जा रहे कनाडा या बन रहे ईसाई: एक ऐसी त्रासदी जिस पर कम होती है चर्चा

पंजाब में प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी मजदूरों को गाँवों में काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ, स्थानीय लोग ईसाई धर्म अपना रहे हैं या विदेशों, विशेषकर कनाडा में बसने का रास्ता तलाश रहे हैं। यह पंजाब की एक अनकही त्रासदी है, जिस पर बहुत कम लोग बात करना चाहते हैं।

प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बढ़ता भेदभाव

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने तीन साल पहले उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूरों को अपमानजनक अर्थ में “भैया” कहा था। हालाँकि तीखे विरोध के बाद उन्हें माफी माँगनी पड़ी। लेकिन लगाई आग अब पंजाब के अंदर धधकने लगी है। ऐसा ही एक मामला आया है मोहाली से, जहाँ एक गाँव से प्रवासी मजदूरों को भगाया जा रहाहै। यही नहीं, कई गाँवों में प्रवासी मजदूरों के लिए 11 ‘प्रतिबंधों’ वाले बोर्ड लगाए गए हैं।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के मोहाली जिले के साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर के अंतर्गत आने वाले जंदपुर गाँव में प्रवासी मजदूरों को घर किराए पर लेने की अनुमति नहीं है। गाँव में उनके लिए 11 तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें रात 9 बजे के बाद बाहर जाने पर प्रतिबंध, धूम्रपान और तंबाकू चबाने पर पाबंदी, और उनके कपड़ों को लेकर सख्त नियम शामिल हैं। गाँव के गुरुद्वारा कमेटी ने यह फैसला लिया कि प्रवासी मजदूर अब गाँवों में नहीं रह सकते।

मामले की शुरुआत और कानूनी दखल

इस साल अगस्त में मुंडो संगतियान गाँव से प्रवासी मजदूरों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। जब मजदूरों को काम से निकालकर गाँव से बाहर कर दिया गया, तो यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुँचा। वैभव वत्स नामक एक व्यक्ति ने प्रवासी मजदूरों को अवैध रूप से निकालने के खिलाफ याचिका दायर की, जिससे यह मामला कानूनी चर्चा में आ गया।

स्थानीय लोगों का क्या है कहना?

गाँव के लोग आरोप लगाते हैं कि प्रवासी मजदूर गांव में गंदगी फैलाते हैं और सड़कों पर अर्धनग्न होकर घूमते हैं, जिससे महिलाओं को असुविधा होती है। उनका यह भी कहना है कि प्रवासियों के आने से अपराध दर में वृद्धि हुई है। पंचायत सदस्य चरणजीत सिंह ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूर कई स्थानीय नाबालिग लड़कियों को भगाकर ले गए हैं।

प्रवासी मजदूरों की दिक्कतें

दूसरी तरफ, प्रवासी मजदूरों का कहना है कि वे अपनी मेहनत से पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्हें यहां सम्मान नहीं मिलता। मजदूरों को “भैया” कहकर अपमानित किया जाता है और उनके सांवले रंग के कारण उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। कई प्रवासी मजदूर अब पंजाब छोड़ने का मन बना चुके हैं क्योंकि उन्हें यहां असुरक्षित महसूस हो रहा है।

धर्मांतरण और विदेश जाने की होड़

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, जंदपुर गाँव में कई बैनर लगे हैं, जिनमें कनाडा, अमेरिका और पोलैंड जैसे देशों के वीज़ा की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम के ‘पैगंबर’ बजिंदर सिंह की प्रशंसा वाले बोर्ड भी लगे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि उनके आशीर्वाद से तुरंत वीज़ा मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक धर्मांतरण लॉबी काम कर रही है, जो युवाओं को ईसाई धर्म अपनाने और विदेश जाने के लिए प्रेरित करती है।

पुलिस की कार्रवाई और नए नियम

प्रवासी मजदूरों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें किराए पर जगह देने वाले मकान मालिकों को डस्टबिन उपलब्ध कराने होंगे और एक कमरे में दो से अधिक मजदूर नहीं रह सकते। मजदूरों पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल होने पर मकान मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बढ़ता भेदभाव और स्थानीय लोगों द्वारा धर्मांतरण या विदेश जाने की होड़ एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल प्रवासी मजदूरों के जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि समाज में भी असंतुलन पैदा हो रहा है। यह जरूरी है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और समाज के सभी वर्गों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

सड़क पर उतरे हिंदू तो जागा मंडी प्रशासन, नगर निगम ने अवैध मस्जिद गिराने का दिया आदेश: PWD की जमीन पर कब्जा, बिना अनुमति बना ली 2 मंजिल

शिमला के संजौली में मस्जिद के अवैध निर्माण के विरुद्ध प्रदर्शन के बाद अब हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग शहरों में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों की जानकारी सामने आने लगी है। इसी कड़ी में मंडी में बनी अवैध मस्जिद के विरोध में भी हिन्दू समाज उतर आया है। हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने शिमला के बाद मंडी में भी हिन्दुओं के प्रदर्शन पर वाटर कैनन चलाए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना कोई अनुमति लिए ही मंडी के जेल रोड पर यह मस्जिद बना दी गई। इसके लिए अवैध रूप से लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन भी कब्जा कर ली गई। इसके अलावा इस मस्जिद में तेजी से दो अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण भी हो गया।

मंडी की इस मस्जिद में हुए अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश शुक्रवार (13 सितम्बर, 2024) को मंडी नगर निगम ने दिया है। इस मामले में कई बार सुनवाई हो चुकी है। मंडी नगर निगम ने कहा है कि मस्जिद की ऊपरी दो मंजिल गिरा दी जाएँ। नगर निगम के आयुक्त ने यह निर्णय दिया है। उन्होंने कब्जे की बात को सही माना है।

नगर निगम ने पाया है कि इस मस्जिद पर अतिरिक्त दो मंजिल बनाने के लिए कोई अनुमति नहीं थी। इसका नक्शा भी नहीं पास करवाया गया था। साथ ही यहाँ पर निर्माण के लिए PWD की मंजूरी भी नहीं ली गई थी। मस्जिद की चारदीवारी भी अवैध रूप से बनाई गई थी।

संजौली में बनाई गई अवैध मस्जिद के विवाद के उठने के बाद स्थानीय लोगों ने मंडी की इस मस्जिद का भी मुद्दा उठाया। इस मस्जिद के विरोध में शुक्रवार (13 सितम्बर, 2024) को स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में प्रदर्शन भी किया। उन्होंने रोकने के लिए सुक्खू सरकार ने पानी की बौछारें भी चलाई। पुलिस प्रशासन ने यहाँ धारा 163 लगा रखी थी।

पुलिस की कार्रवाई के कारण कुछ लोगों की तबियत बिगड़ने की भी सूचना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मस्जिद का एक हिस्सा अवैध बताया जा रहा है जबकि पूरी मस्जिद ही अवैध है। वह इस पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं नगर निगम ने इसी दौरान फैसला देते हुए मस्जिद सीज करने की बात कही है।

नगर निगम ने मस्जिद कमिटी को गिराने की कार्रवाई के विरुद्ध 30 दिन का समय अपनी आपत्ति दर्ज करवाने के लिए भी दिया है। नगर निगम का फैसला आने से पहले ही मंडी में मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद का एक हिस्सा तोड़ दिया। यह कार्रवाई गुरुवार को हुई। मस्जिद की चारदीवारी समेत शौचालय भी तोड़ दिए गए।

मस्जिद कमिटी ने माना कि उन्होंने इसकी दीवार PWD की जमीन पर बनाई थी और इसीलिए अब इसे तोड़ रहे हैं। मस्जिद के आसपास भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। मंडी के डीसी ने लोगों से अपील की है कि वह शान्ति बनाएँ रखें।

गौरतलब है कि इससे पहले राजधानी शिमला के संजौली इलाके में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को लेकर हिन्दुओं का प्रदर्शन हुआ था। इस पर सुक्खू सरकार ने लाठियाँ भी बरसाईं थी। हालाँकि, यह मस्जिद तोड़ने का प्रस्ताव कमिटी ने स्वयं दे दिया था। उन्होंने माना था कि मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से हुआ है।

अमेरिका ने चीनी कंपनियों सहित 5 संस्थाओं और 1 व्यक्ति पर लगाया प्रतिबंध: पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल के विकास में कर रहे थे मदद

पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के खिलाफ अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। उसने पाकिस्तान के इस कार्यक्रम में मदद एवं उपकरणों की आपूर्ति करने वाली पाँच कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों में चीन की भी कई कंपनियाँ हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने एक व्यक्ति पर भी प्रतिबंध लगाया है, जो मिसाइलों के प्रसार में संलिप्त रहा है।

गुरुवार (12 सितंबर 2024) को इसकी घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ उनका सख्त रवैया बरकरार है। मंत्रालय के आदेश में विशेष तौर पर बीजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेशन फॉर मशीन बिल्डिंग इंडस्ट्री (RIAMB) को नामित किया गया है। यह कंपनी सामूहिक विनाश के हथियार और उनके वितरण का काम करती है।

RIAMB ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय विकास परिसर (NDC) के साथ काम किया है। NDC के बारे में अमेरिका का मानना है कि वह पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और उत्पादन में शामिल है। मैथ्यू मिलर ने कहा कि RIAMB ने पाकिस्तान की मिसाइल शाहीन-3 और अबाबील प्रणालियों से जुड़े उपकरणों में पाकिस्तान की मदद की है।

इस कंपनी ने पाकिस्तानी मिसाइल कार्यक्रम के लिए रॉकेट मोटर्स के परीक्षण हेतु उपकरण खरीदने में उसकी मदद की। मैथ्यू मिलर ने आगे कहा, “ये प्रतिबंध इसलिए लगाए जा रहे हैं, क्योंकि इन संस्थाओं और व्यक्तियों ने जानबूझकर मिसाइल टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर किया, जिन पर रोक लगी है।”

इसके साथ ही चीन की हुबेई हुआचांगडा इंटेलिजेंट इक्विपमेंट कंपनी, यूनिवर्सल एंटरप्राइज और शीआन लोंगडे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित इनोवेटिव इक्विपमेंट पर भी बैन लगाया है। इस प्रतिबंध में एक चीनी नागरिक को भी शामिल किया गया है, इस व्यक्ति पर आरोप है कि उसने चीन को उपकरण पहुँचाने में मदद की है।  

अमेरिका ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने से संचालित क्यों ना हो रही हो। वहीं, चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों का विरोध किया है। हालाँकि, इस संबंध में अभी पाकिस्तान की ओर से कोई बयान नहीं आया है।”

अमेरिका स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने इन प्रतिबंधों पर कहा, “चीन इस तरह की एकतरफा प्रतिबंधों का दृढ़ता से विरोध करता है। इस तरह के प्रतिबंध का अंतरराष्ट्रीय कानून या यूएस सुरक्षा परिषद के प्राधिकरण में कोई आधार नहीं है। बीजिंग हमेशा चीनी कंपनियों और लोगों के हितों की दृढ़ता से रक्षा करेगा।”

इसके पहले भी अमेरिका ने पाकिस्तान की मिसाइल कार्यक्रम में मदद देने वाली चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया था। इन संस्थाओं ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी चीजों की सप्लाई की थी। जिन संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया गया था, उनमें बेलारूस का मिन्स्क व्हील ट्रैक्टर प्लांट शामिल है। इस कंपनी पर आरोप है कि उसने मिसाइल प्रोग्राम के लिए विशेष वाहन चेसिस की आपूर्ति की है। 

यह प्रतिबंध 2005 के कार्यकारी आदेश पर आधारित हैं, जो सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया था। बता दें कि घातक हथियारों के प्रसार से संबंधित एमटीसीआर भारत सहित 35 सदस्यों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है, जो परमाणु हथियारों की वितरण प्रणाली को सीमित करके उनके प्रसार को रोकने के लिए काम करता है।

अमृतपाल के रिश्तेदारों के 14 ठिकानों पर NIA ने मारा छापा, जेल में बंद है खालिस्तान समर्थक सांसद: दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स एजेंसी ने किए जब्त

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) की सुबह खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह के रिश्तेदरों के घरों में रेड डाली। यह रेड अमृतसर, गुरुदासपुर, मोंगा, जालंधर सहित पंजाब 14 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। अमृतपाल अलगाववादी खालिस्तानी संगठन ‘वारिस पंजाब दी’ का सुप्रीमो भी है और फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ की जेल में बंद है।

NIA की टीम अमृतसर के रईया में फेरोमन रोड पर स्थित अमृतपाल सिंह के चाचा प्रगट सिंह के घर भी पहुँची। टीम ने प्रगट सिंह की पत्नी को हिरासत में लिया है। उन्हें ब्यास थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। प्रगट सिंह के चाचा फर्नीचर का काम करते हैं। दूसरी रेड अमृतसर में सठियाला के पास बुटाला गाँव में अमृतपाल के जीजा के घर हुई।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके जीजा के जीजा के घर में दबिश दी गई। मोगा में हल्का बाघापुराना के कस्बा स्मालसर में कविश्री मक्खन सिंह मुसाफिर के घर भी सुबह 6 बजे NIA की टीम पहुँची और छानबीन की। इसके अलावा, पंजाब के गुरदासपुर के हरगोबिंदपुरा में छापेमारी के दौरान टीम ने कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान को कब्जे में लिया है।

NIA ने ये रेड कनाडा में खालिस्तान समर्थकों के भारतीय उच्चायोग पर 23 मार्च 2023 को किए गए हमले को लेकर की। अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद कनाडा, अमेरिका और UK के भारतीय उच्चायोगों के बाहर खालिस्तानियों ने प्रदर्शन किया था। कनाडा में दूतावास के बाहर तिरंगे का अपमान और तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद जून महीने में NIA ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू की थी।

बता दें कि अमृतपाल सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जेल में रहते हुए पंजाब के खंडूर साहिब सीट से निर्दलीय जीत हासिल की है। जीतने के बाद उसे भारी सुरक्षा के बीच सांसद के रूप में शपथ ली थी। अमृतपाल सिंह को लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए पैरोल दी थी। इसके बाद उसे फिर से असम के डिब्रूगगढ़ जेल में भेज गया है।

अमृतपाल के खिलाफ पंजाब के अलग-अलग थानों में 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। असम के डिब्रूगढ़ में भी उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। दरअसल, डिब्रूगढ़ जेल स्थित उसके सेल से कुछ आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद हुए थे। इसके बाद असम में उसके खिलाफ यह आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।

अमृतपाल के खिलाफ दर्ज मामलों में 19 मार्च 2023 को पंजाब के अजनाला पुलिस स्टेशन पर किया गया हमला भी शामिल है। थाने पर उसके समर्थकों ने अवैध हथियार लेकर गैर-कानूनी ढंग से घुसकर हमला किया था। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अमृतपाल और उसके साथियों पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने, पुलिसकर्मियों पर हमला, धमकाने, भड़काऊ बयान देने आदि से संबंधित मामले हैं।