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राम मंदिर को उड़ाने और CM योगी की हत्या की धमकी: बिहार के भागलपुर से मकसूद अंसारी गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी से था संपर्क

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार के भागलपुर से मोहम्मद मकसूद को गिरफ्तार किया है। मकसूद ने इस साल 14 जून को राम मंदिर को उड़ाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके पुलिस ने बड़ी खंजरपुर में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करके उसे यूपी ले आई।

जिस समय पुलिस ने मोहम्मद मकसूद अंसारी को गिरफ्तार किया, उस समय वह अपने बहन के ससुराल से आ रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल नम्बर ट्रेस करके पुलिस ने उसे भागलपुर के गुरहट्टा चौक से दबोच लिया। वहीं, कुछ रिपोर्ट में उसकी गिरफ्तारी भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र के बड़ी खंजरपुर स्थित मस्जिद गली स्थित उसके घर से गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।

पिछले कुछ दिनों से पुलिस उसके घर पर पहुँचकर उसकी माँ से पूछताछ कर रही थी। हालाँकि, उसका सुराग नहीं मिल पा रहा था। मोहम्मद मकसूद के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से भी जुड़े होने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद किया है। इनमें से एक मोबाइल वह भी है, जिसके फेसबुक से धमकी दी गई थी।

यह बात भी सामने आई है कि मकसूद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आमिर के संपर्क में था। उसका देश विरोधी पोस्ट भी मकसूद शेयर किया करता था। इतना ही नहीं, साइबर ठगी में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है। संगठन के नाम पर भी लाखों रुपए इकट्ठा करने और नए लड़कों की संगठन में भर्ती को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। बरामद मोबाइल से आमिर से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

मकसूद की अम्मी का कहना है कि वह कैंसर की मरीज है और उसका बेटा उसकी देखभाल करता था। उसने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उसकी अम्मी का कहना है कि उसके बेटे का फोन कुछ दिन उसके साला के पास था। उसके साले ने उस फोन से क्या किया, क्या नहीं किया, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस उसके संभावित साथियों की भी तलाश कर रही है।

उसकी अम्मी ने यह भी कहा कि मकसूद अंसारी अपनी नौकरी के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसने नौकरी के लिए चंडीगढ़ में आवेदन भी दिया था। वहाँ से उसका वीजा बनाने की बात हो रही थी। वीजा बन जाने के बाद वह विदेश जाने वाला था। उसकी अम्मी का कहना है कि मकसूद के विदेश जाने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि हुसैनाबाद के सकरुल्ला चक में रहने वाले 26 साल के मोहम्मद मकसूद अंसारी के साला अमन का मोबाइल खराब हो गया था। उसने बताया कि अमन ने इस दौरान उसके मोबाइल से क्या किया उसे इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस इस मामले में उसके साले अमन की संलिप्ता की भी जाँच कर रही है।

बता दें कि इस साल 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का उद्घाटन हुआ था। इसके बाद 14 जून 2024 को राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गयी थी। इसके साथ ही सीएम योगी को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी भरे मैसेज मिलने के बाद यूपी पुलिस सहित देश की सुरक्षा एजेंसी अलर्ट हो गई थीं। इस धमकी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आया था।

ऑडियो मैसेज सामने आने के बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाना में केस दर्ज किया गया था। यूपी पुलिस को उस मोबाइल के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि यह मोबाइल किसी मकसूद अंसारी नाम के शख्स का है और वह बिहार के भागलपुर जिले का रहने वाला है। फिलहाल इस मामले में पुलिस खुलकर कुछ भी बताने से परहेज कर रही है।

अवैध इबादतगाह नहीं बर्दाश्त, अतिक्रमण हटाओ: हिमाचल प्रदेश में शिमला से कुल्लू तक हिंदुओं का प्रदर्शन, सड़क पर किया हनुमान चालीसा पाठ

हिमाचल प्रदेश के संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शिमला में हिन्दुओं के प्रदर्शन के बाद अब इसी राज्य के कुल्लु में भी धरना दिया गया है। इस दौरान सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी पूरी मस्जिद को ही अतिक्रमण बतापर इस पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसी के साथ इस मस्जिद के खिलाफ सुन्नी, पाँवटा साहिब, हमीरपुर और बिलासपुर में भी प्रदर्शन हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार की सुबह ही कुल्लू में हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य सड़क पर उत्तर आए। उन्होंने शिमला में प्रदर्शनकारी हिन्दुओं के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारी हिन्दुओं का आरोप है कि संजौली की पूरी मस्जिद ही अतिक्रमण कर के बनाई गई है। उन्होंने माँग की है कि पूरी मस्जिद को ही हटाया जाए। धरने की सूचना पर फ़ौरन ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुँचा।

इस बीच हिन्दू संगठन के लोग हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। हालाँकि अंत में धरना बिना किसी विवाद के शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी अपने X हैंडल पर शेयर की है। उन्होंने दावा है कि न सिर्फ शिमला और कुल्लू बल्कि सुन्नी, बिलासपुर, हमीरपुर और पांवटा साहिब में भी अवैध मस्जिदों के विरुद्ध हिन्दू प्रदर्शन कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश की अवैध इबादतगाहों के खिलाफ सामूहिक एकजुटता दिखाते हुए व्यापारी वर्ग ने भी इन प्रदर्शनकारियों के पक्ष में आवाज उठाई है। प्रदेश के कई हिस्सों में सांकेतिक रूप से बाजारों को 3 घंटों के लिए बंद रखा गया। इस बंद का सबसे ज्यादा असर सुन्नी कस्बे में देखने को मिला है। यहाँ बाजार पूरी तरह से बंद हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस और वहाँ के मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

चूमा, दुलराया, गोद में उठाया… PM आवास में ‘दीपज्योति’ का स्वागत देख लोग हुए गदगद, बोले- कोई ऐसे ही नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास में नए सदस्य का स्वागत हुआ है। ये मेहमान कोई और नहीं बल्कि एक बछिया है जिसका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दीपज्योति’रखा है। प्रधानमंत्री ने इसकी एक वीडियो साझा की है और उसमें उस बछिया को दुलराते हुए भी दिखे।

वीडियो को शेयर करते गुए उन्होंने लिखा, “हमारे शास्त्रों में कहा गया है – गाव: सर्वसुख प्रदा:’। लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास परिवार में एक नए सदस्य का शुभ आगमन हुआ है। प्रधानमंत्री आवास में प्रिय गौ माता ने एक नव वत्सा को जन्म दिया है, जिसके मस्तक पर ज्योति का चिह्न है। इसलिए, मैंने इसका नाम ‘दीपज्योति’ रखा है।”

वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस बछिया को चूमते हुए, उसे सहलाते हुए, उसे गोद में बैठाकर बाग में घूमते हुए दिखे। उन्होंने मंदिर के सामने उसे फूल पहनाकर उसका स्वागत किया और मस्तक पर बने ज्योति चिह्न पर हाथ घुमाया।

उनकी वीडियो देखने के बाद नेटीजन्स इसपर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कहा जा रहा है- एक ही दिल है पीएम मोदी उसे कितनी बार जीतेंगे। कोई उन्हें हिंदू हृदय सम्राट कह रहा है तो कोई सच्चा सनातनी।

दूसरी पार्टियों के नेताओं से तुलना करते हुए कहा जा रहा है कि ऐसे ही कोई नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता।

एक यूजर ने कहा, “गौ माता द्वारा जन्मे ‘दीपज्योति’ नव वत्सा का स्वागत कर, आप एक बार फिर भारतीय संस्कृति और परंपरा की गहराई को प्रकट कर रहे हैं। यह कदम हमारे सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।”

एक ने लिखा, वीआईपी लोग अपने घरों में कुत्ते को रखना अपनी शान समझते थे अब ये नया भारत है अब गाय माता को रखना अपनी शान समझते हैं।

बेल पर रिहा हुए CM केजरीवाल पत्नी संग पहुँचे हनुमान मंदिर: पटाखे फोड़कर जश्न मनाने वाले समर्थकों पर केस दर्ज, कोर्ट ने कहा था- गिरफ्तारी बिलकुल जायज थी

दिल्ली के शराब घोटाले में जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। उनके साथ पत्नी सुनीता केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह भी थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रिहाई का जश्न भी मनाया।

मंदिर पहुँचकर सुनीता केजरीवाल ने भगवान हनुमान को जल चढ़ाया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल राजघाट जाकर महात्मा गाँधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि शराब नीति केस में जमानत मिलने के बाद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने भी इसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की पूजा की थी। अंतरिम जमानत के बाद 2 जून को सरेंडर करने से पहले भी केजरीवाल ने यहाँ दर्शन किए थे।

जेल से बाहर आने पर केजरीवाल ने 13 सितंबर को कहा था, “आज मैं जेल से बाहर आ गया हूँ। मेरे हौसले 100 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। मैं सच्चा था… मैं सही था, इसलिए भगवान ने मेरा साथ दिया। ऊपर वाले ने मुझे रास्ता दिखाया। ऐसे ही भगवान रास्ता दिखाता रहे। ये राष्ट्र विरोधी ताकतें, जो देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, मैं इनके खिलाफ ऐसे ही लडूँ।”

बुधवार (11 सितंबर 2024) को अरविंद केजरीवाल के 177 दिन बाद जेल से बाहर आने पर तिहाड़ के बाहर AAP कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की थी। इसको लेकर दिल्ली के सिविल लाइंस थाने में अज्ञात के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। दरअसल, दिल्ली में प्रदूषण के चलते 1 जनवरी 2025 तक पटाखे जलाने पर बैन है।

केजरीवाल के बाहर आने पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ऐसे जश्न मनाया, जैसे उन्हें शराब घोटाले से बरी कर दिया गया हो। अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में आरोपमुक्त नहीं हुए हैं, बल्कि जमानत पर बाहर आए हैं। ये बात AAP कार्यकर्ता नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें जमानत पर कुछ निश्चित शर्तों के साथ दी गई है।

इन शर्तों के तहत केजरीवाल दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं करना है। ना ही इस केस को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करनी है। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय में जाने की भी अनुमति नहीं दी गई है। इसके साथ ही वे वह सरकारी फाइलों पर दस्तखत भी नहीं करेंगे।

अरविंद केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट के सामने हर सुनवाई पर मौजूद होना होगा, जब तक कि उन्हें पेशी से छूट न मिले। इसके अलावा, उन्हें जमानत पर बाहर रहने के दौरान केस से जुड़े गवाहों से संपर्क नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई है। अरविंद केजरीवाल को 10-10 लाख रुपए के दो मुचलके भरने पर जमानत मिली है।

जमानत की याचिका पर सुनवाई करते समय भी जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी कानून सम्मत थी। इसमें कोई प्रक्रियागत अनियमितता नहीं हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई ने गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के निर्देशों का पालन किया था।

‘काम पर लौट जाइए, कार्रवाई नहीं करूँगी’ : कोलकाता में धरने पर बैठे डॉक्टरों से CM ममता बनर्जी अचानक मिलने पहुँचीं, प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब एक महीने से जारी हड़ताल के बीच शनिवार (14 सितंबर 2024) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डॉक्टरों के धरना स्थल पर अचानक पहुँचीं और डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की भावुक अपील की। बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ जब अस्पताल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की रेप कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सीबीआई जाँच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है।

ममता बनर्जी की भावुक अपील

कोलकाता में डॉक्टरों के धरना स्थल पर पहुँचने के बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की भावुक अपील की। जैसे ही ममता वहाँ पहुँचीं, नाराज डॉक्टरों ने नारेबाजी शुरू कर दी, लेकिन ममता ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कल पूरी रात बारिश हो रही थी, आप लोग सो नहीं पाए, यह देखकर मुझे भी कष्ट हुआ। मैं आपसे अपील करने आई हूँ कि अब इस कष्ट को और न सहें।”

ममता ने आगे कहा, “मैं आपके डिमांड पर विचार करूँगी और चर्चा करूंगी। दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। मैंने सीबीआई से अनुरोध किया है कि तीन महीने में दोषी को सजा मिले।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा और अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सही करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

डॉक्टरों की हड़ताल के बीच ममता बनर्जी ने उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं यूपी पुलिस नहीं हूँ, मैं कोई कार्रवाई नहीं करूँगी। हमें आप लोगों की जरूरत है। पेशेंट्स की मौत हो रही है, इसलिए आप काम पर लौटें। मैं कोई अंतिम चेतावनी नहीं दे रही, बल्कि अंतिम प्रयास कर रही हूँ।” ममता ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया कि वे सिविक वालंटियर्स, जो अस्पताल की रोगी कल्याण समितियों का हिस्सा हैं, को हटा रही हैं। उन्होंने कहा, “जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी, चाहे वह मेरा दोस्त हो या दुश्मन।”

हड़ताल की शुरुआत और डॉक्टरों पर हमला

यह घटना तब शुरू हुई जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ रेप और हत्या का मामला सामने आया। अस्पताल के डॉक्टर न्याय की माँग कर रहे हैं और तभी से हड़ताल पर बैठे हैं। इस घटना के बाद अस्पताल में तनाव और बढ़ गया और डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई के हाथों सौंपा गया और अब सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि डॉक्टरों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़े, खासकर जब यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है।

ममता ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले यहाँ आई हूँ, ताकि आपको किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। मैं चाहती हूँ कि आप लोग काम पर लौटें और मैं आपकी सभी माँगों पर विचार करूँगी।”

डॉक्टरों की हड़ताल और ममता बनर्जी के धरना स्थल पर पहुँचने से यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर सख्ती से कार्रवाई करेंगी और दोषियों को सजा दिलवाएँगी। लेकिन, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं और टीएमसी का दावा है कि यह पूरी घटना ममता सरकार को बदनाम करने की एक साजिश हो सकती है।

₹42 करोड़ में बना हाटकेश्वर ब्रिज, ₹52 करोड़ तोड़ने में लगे? : ‘गुजरात मॉडल’ का मजाक उड़ाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बोला झूठ, गृह राज्यमंत्री ने सच्चाई बताई

अहमदाबाद का हाटकेश्वर ब्रिज एक बार फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस पुल को लेकर हाल ही में मीडिया चैनलों और कॉन्ग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में इस ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, और अब इसे तोड़ने में 52 करोड़ रुपये की लागत बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के तौर पर पेश किया, लेकिन सच्चाई कुछ और है।

कॉन्ग्रेस का आरोप और मीडिया रिपोर्ट

न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज को बनाने में 42 करोड़ रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब इसे गिराने में 52 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। कॉन्ग्रेस ने इसे सोशल मीडिया पर उठाया और एक इन्फोग्राफिक जारी कर ‘गुजरात मॉडल’ पर तंज कसा। कॉन्ग्रेस ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार और गुजरात सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया।

कॉन्ग्रेस के इस आरोप के बाद, वामपंथी पारिस्थितिकी तंत्र और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई सवाल उठाए गए।

गृह राज्य मंत्री ने किया ‘फैक्ट चेक’

कॉन्ग्रेस और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद, गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का दावा भ्रामक है। सांघवी ने स्पष्ट किया कि 52 करोड़ रुपये सिर्फ पुल को तोड़ने की नहीं, बल्कि इसे तोड़कर फिर से बनाने की कुल लागत है। उन्होंने आगे बताया कि पुराने पुल को बनाने वाले ठेकेदार से इस खर्च की वसूली की जाएगी।

सांघवी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, “झूठा गिरोह कॉन्ग्रेस दावा कर रही है कि वह अहमदाबाद में हाटकेश्वर ब्रिज को तोड़ने के लिए ₹52 करोड़ खर्च करने जा रही है। यह भ्रामक है।” उन्होंने आगे कहा, “तथ्य यह है कि पुराने पुल को ध्वस्त करने और नए पुल के निर्माण की कुल लागत ₹52 करोड़ है।”

गृह राज्य मंत्री ने मीडिया चैनल ‘आजतक’ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “एक जिम्मेदार और अग्रणी समाचार चैनल के रूप में, आपको प्रकाशन से पहले तथ्यों की जाँच करनी चाहिए।”

सांघवी ने बताया कि इस 52 करोड़ की लागत में नया पुल बनाने का खर्च भी शामिल है, न कि सिर्फ तोड़ने का खर्च। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुल के निर्माण में आने वाली लागत पुराने ठेकेदार से वसूल की जाएगी, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

अहमदाबाद के खोखरा इलाके में स्थित इस हाटकेश्वर ब्रिज का निर्माण 2017 में किया गया था और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया था। हालाँकि, केवल पाँच साल बाद, वर्ष 2022 में पुल में संरचनात्मक खामियाँ पाई गईं, जिससे इसे बंद कर दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया कि पुल को पूरी तरह से गिराकर नए सिरे से बनाया जाना चाहिए।

मार्च 2024 में अहमदाबाद मिरर ने रिपोर्ट दी थी कि अहमदाबाद नगर निगम ने पुल को ध्वस्त करने और उसके स्थान पर एक नया चार-लेन पुल बनाने के लिए निविदा जारी की है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 51.70 करोड़ रुपये बताई गई थी।

पुल को दोबारा बनाने की योजना

गौरतलब है कि इस 52 करोड़ रुपये की लागत में सिर्फ पुल को गिराने का खर्च नहीं है, बल्कि इसे दोबारा बनाने का खर्च भी शामिल है। अहमदाबाद नगर निगम ने इसके लिए एक निविदा जारी की है, जिसमें पुल को गिराकर नए सिरे से एक चार-लेन पुल का निर्माण किया जाएगा। इससे यह साफ हो जाता है कि कॉन्ग्रेस और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा जो दावे किए जा रहे थे, वे तथ्यात्मक रूप से गलत थे। पुल की कुल लागत में निर्माण और विध्वंस दोनों शामिल हैं, और यह खर्च जनता के करों पर नहीं बल्कि पुराने ठेकेदार से वसूला जाएगा।

अहमदाबाद के हाटकेश्वर ब्रिज का मुद्दा भले ही राजनीतिक हो गया हो, लेकिन तथ्य यह है कि 52 करोड़ रुपये की लागत केवल पुल को गिराने पर खर्च नहीं की जा रही है। इसमें नए पुल का निर्माण भी शामिल है, और यह रकम ठेकेदार से वसूली जाएगी। इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष ने इसे ‘गुजरात मॉडल’ की विफलता के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से साफ है कि कॉन्ग्रेस का दावा पूरी तरह से गलत है।

यह समाचार मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘विपक्षी आए तो दोबारा लाएँगे अनुच्छेद 370’ : जम्मू-कश्मीर चुनाव से पहले डोडा में PM मोदी ने किया आगाह, जनता से बोले- महाराजा हरि सिंह के अपमान मत भूलिए

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर 2024) को डोडा में एक जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद के दमन के लिए भाजपा को प्रतिबद्ध बताया। PM मोदी ने विपक्षी दलों पर न सिर्फ आतंकवाद, बल्कि अलगाववाद को भी बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस दौरान उन्होंने धारा 370 को हटाना अपनी सरकार बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

अपने चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डोडा में उमड़ी भीड़ को देखकर काफी उत्साहित थे। उन्होंने सभा में लोगों की उपस्थिति को उन्होंने जनता का भाजपा के लिए आशीर्वाद बताया है। भाजपा द्वारा कश्मीर में अभूतपूर्व विकास करने का दावा करते हुए PM मोदी ने कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर के कई हिस्से पूरे देश से रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएँगे। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई गाँवों तक नल का जल और बिजली आदि पहुँच जाएगा।

धारा 370 की याद दिलाते हुए PM मोदी ने कहा कि इसकी वजह से राज्य में आतंकवाद का बोलबाला हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी, हड़ताल और तमाम चरमपंथी हरकतों को कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बढ़ावा दिया। हिन्दू समाज की जातियों को मिलने वाले आरक्षण को भी हड़प लिया जाता था। PM मोदी ने लोगों से पूछा कि क्या वो फिर से पुराने आतंकवाद का दौर लाना चाहते हैं? इस पर जनसमूह ने एक स्वर में ‘नहीं’ का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य में जमीन कब्जा करने वाले गिरोहों को बढ़ावा दिया गया। छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए यहाँ के लोगों को तरसाया गया। सरकारी नौकरियों में सिर्फ उन्हीं लोगों की भर्तीय की गई, जो कॉन्ग्रेस, NC और महबूबा मुफ्ती के तीन खानदानों को दी गई। इन लोगों ने आतंकवाद को पाला-पासा ताकि उनकी अरबों-खरबों की संपत्ति बरकरार रखें। पीएम ने कहा कि विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को वापस लाना चाहते हैं।

PM मोदी ने कॉन्ग्रेस को सबसे बेईमान पार्टी और गाँधी परिवार को शाही खानदान बताते हुए सबसे भ्रष्ट परिवार बताया। नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने लोगों को कॉन्ग्रेस से सतर्क रहने के लिए कहा। पीएम ने कहा कि ये लोग जम्मू-कश्मीर को भी सत्ता में आए तो बर्बाद कर देंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह एवं अन्य राजाओं को लेकर कैसी-कैसी टिप्पणियाँ की हैं, वो भी आपने सुनी है। ये सिर्फ महाराजा का नहीं, बल्कि डोगरा (क्षत्रियों) का अपमान है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग ये अपमान कभी भूला नहीं सकेंगे और चुनवों में इसका बदला जरूर लेंगे।

पीएम मोदी ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा प्रदेश का चहुँमुखी विकास करेगी। उन्होंने राहुल गाँधी को को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि कई लोग ऐसे भी हैं, जो नफरत की दुकान के आगे मोहब्बत का बोर्ड लगा कर घूम रहे हैं। अमेरिका में हुई भारतीय पत्रकार की पिटाई का भी जिक्र मोदी ने अपने सम्बोधन में किया है।

बेटी पैदा होने पर भड़का नेवी में काम करने वाला तस्लीम मोहम्मद, बीवी को डाक से भेजा तीन तलाक: मुंबई में केस दर्ज, भाई-बहन-अब्बा सब केस में नामजद

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ मर्चेंट नेवी में काम करने वाले एक शख्स ने अपनी बीवी को डाक से तीन तलाक भेजा। ये डाक 2 बार अलग-अलग तारीखों पर भेजे गए। आरोपित का नाम तस्लीम मोहम्मद है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। आरोपित शौहर के साथ इस केस में उसका अब्बा, भाई, बहन और बहनोई भी नामजद किए गए हैं। तलाक की वजह बेटा न पैदा होना और दहेज़ का लालच बताया गया है।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के थानाक्षेत्र वकोला का है। यहाँ रहने वाली एक 30 वर्षीया मुस्लिम महिला ने अपने ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि साल 2018 में पीड़िता का निकाह तस्लीम मोहम्मद से हुआ था, तब तस्लीम पढ़ाई करता था। उस समय पीड़िता के अब्बा ने दहेज़ में 5 लाख रुपए दिए थे। इस बीच जनवरी 2021 में तस्लीम मोहम्मद को मर्चेंट नेवी में नौकरी मिल गई और वह 9 माह के लिए अपनी शिप पर चला गया।

आरोप है कि तस्लीम मोहम्मद के पानी के जहाज पर जाते ही ससुराल के बाकी सदस्यों ने पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सबसे पहले घर छोटा होने का बहाना बताकर पीड़िता को उसके मायके भेज दिया गया। इस बीच पीड़िता गर्भवती हुई और एक बेटी को जन्म दिया। बेटी पैदा हने के बाद तस्लीम के घर वालों ने पीड़िता को और ज्यादा तंग करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि आरोपित बेटा चाहते थे। इस बीच नवंबर 2023 को पीड़िता की सास की मौत हो गई।

शिकायत में आगे बताया गया है कि सास की मौत की जानकारी मिलते ही पीड़िता अपनी ससुराल पहुँची, तब पीड़िता की ननद ने उसे घर के अंदर घुसने भी नहीं दिया। कुछ दिनों बाद दिसंबर 2023 में तस्लीम मोहम्मद छुट्टी पर घर आया। उसने भी अपने घर के बाकी सदस्यों जैसी हरकत की और जनवरी 2024 को पीड़िता को तीन तलाक का नोटिस भेज दिया। जब पीड़िता ने यह नोटिस लेने से इंकार कर दिया तो उसके शौहर की तरफ से 17 फरवरी को दूसरा और 21 मार्च को तीसरी बार तलाक का नोटिस भेजा गया।

हालाँकि पीड़िता ने इसमें से एक भी नोटिस रिसीव नहीं किया, तब तस्लीम मोहम्मद ने तलाक की यही नोटिस पीड़िता को व्हाट्सएप कर दिया। पीड़िता तलाक के पक्ष में नहीं बताई जा रहीं है। उसने ससुराल में रहने की इच्छा जताई और काउंसिलिंग की माँग की। लेकिन, इन प्रयासों का तस्लीम और उसके घर वालों पर कोई असर नहीं पड़ा। आखिरकार मजबूर हो कर पीड़िता ने अपनी ससुराल पक्ष के कुल 7 आरोपितों के खिलाफ थाने में तहरीर दी।

इस शिकायत पर पुलिस ने तीन तलाक अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। FIR में पीड़िता के शौहर तस्लीम मोहम्मद, ससुर इलियास खान, ननद आफरीन और परमीन, ननद का शौहर बिलाल, देवर इमरान और गुफरान को नामजद किया गया है। इन सभी पर साल 2018 से 2024 के बीच पीड़िता को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने, दहेज़ माँगने और तीन तलाक देने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

MBBS में एडमिशन के लिए अभ्यार्थी बन गए अल्पसंख्यक, फर्जी प्रमाण-पत्र भी बनवाया: जाँच के बाद 20 कैंडिडेट्स का नामांकन रद्द

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कोटे से MBBS में एडमिशन लेने के लिए नियम विरुद्ध धर्मांतरण करने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों ने हिंदू से बौद्ध धर्म अपना लिया और उसका सर्टिफिकेट बनवाकर मेरठ के सुभारती यूनिवर्सिटी में जमा करवा है। ऐसे 20 मामले सामने आए हैं। इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद सर्टिफिकेट को रद्द करके जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

दरअसल, गुरुवार (12 सितंबर 2024) को उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन डाला। इसमें कहा गया है कि फर्जी अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इन लोगों के नामांकन रद्द किए जाएँगे। इस घटना के बाद चार छात्रों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।

इन अभ्यर्थियों ने बौद्ध धर्म अपनाने के लिए उत्तर प्रदेश के विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन एक्ट 2021 का पालन नहीं किया। इसके सेक्शन 8 और 9 में लिखा है कि अपना धर्म परिवर्तन करने की इच्छा वाले व्यक्ति को कम-से-कम 60 दिन पहले अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट के सामने लिखित में घोषणा करनी होगी। उन्हें बताना होगा कि वह बिना किसी बल, प्रताड़ना या प्रलोभन के अपना धर्म स्वेच्छा से परिवर्तित करना चाहता है।

जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र लगाए थे, उनमें यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, बिजनौर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर के अलावा दिल्ली और महाराष्ट्र के भी अभ्यर्थी शामिल हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों ने मैनेजमेंट कोटा के तहत अल्पसंख्यक सीटों पर नामांकन के लिए यूनिवर्सिटी को 40 लाख से लेकर 50 लाख रुपए तक दिए थे।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में MBBS में नामांकन की काउंसिलिंग चल रही है। इसी दौरान किसी इन प्रमाण पत्रों के संंबंध में किसी ने यूपी चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक किंजल सिंह से इसकी शिकायत कर दी। किंजल सिंह ने जाँच कराई तो शिकायत पाई गई। उन्होंने पाया कि सुभारती मेडिकल यूनिवर्सिटी में हिंदुओं ने अल्पसंख्यक कोटे से नामांकन लिया है।

अपने व्हाट्सऐप मैसेज में शिकायतकर्ता ने लिखा था, “उत्तर प्रदेश में मेडिकल के छात्रों की काउंसिलिंग में अल्पसंख्यक दर्जे के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है। मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय में बौद्ध अल्पसंख्यक के नाम पर ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क के अलावा लाखों रुपए लेकर सामान्य उम्मीदवारों को सीट दी जा रही है। इसमें कौर और मित्तल सरनेम वाले उम्मीदवारों को अल्पसंख्यक कोटे से एडमिशन दिए जा रहे हैं। 40 से 50 लाख रुपए डोनेशन लिए गए हैं।”

चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह ने सभी अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट मँगवाकर जाँच कराए तो पता चला कि सभी सर्टिफिकेट हाल ही में जारी किए गए हैं। जिन उम्मीदवारों ने बौद्ध धर्म का सर्टिफिकेट लगाए हैं, वे सभी हिंदू हैं और संपन्न परिवारों से हैं। ये सर्टिफिकेट मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और हापुड़ जिले से जारी किए गए थे। कुछ उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट दूसरे जिलों से जारी किए थे।

महानिदेशक किंजल सिंह ने इन जिले के डीएम को सर्टिफिकेट की जाँच के लिए आदेश किया। आदेश की एक कॉपी अल्पसंख्यक विभाग के डायरेक्टर को भी भेजी गई है। आदेश के बाद सभी जिलों के डीएम ने माना है कि सर्टिफिकेट गलत तरीके से जारी किए गए हैं। इनमें नियमों का पालन नहीं किया गया। वाराणसी को छोड़कर सभी डीएम ने इन प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दे दिया है।

दरअसल, वाराणसी के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी छुट्‌टी पर हैं। इसलिए वहाँ से जारी किया गया एक सर्टिफिकेट कैंसिल नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी सर्टिफिकेट डीएम, एसडीएम और अल्पसंख्यक अधिकारी के यहाँ से जारी हुए हैं। अब इसकी भी जाँच की जाएगी कि ये सर्टिफिकेट जारी कैसे हुए।

बता दें कि मेरठ स्थित सुभारती यूनिर्वर्सिटी एक बौद्ध अल्पसंख्यक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। अल्पसंख्यक कोटे को लेकर सुभारती यूनिवर्सिटी और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच सुप्रीम कोर्ट में केस भी चला। कोर्ट ने सुभारती विश्वविद्यालय को 50% अल्पसंख्यक कोटे की सीट भरने का आदेश दिया। इसी तहत यह नामांकन हो रहा था। सुभारती विश्वविद्यालय में MBBS की 200 सीट हैं, जिनमें से 100 सीटें अल्पसंख्यक कोटे के लिए है।

छत्तीसगढ़ में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव, कॉन्ग्रेस नेता के भाई समेत 5 आरोपित गिरफ्तार: पीएम मोदी करने वाले थे वर्चुअल उद्घाटन, ट्रायल रन के दौरान तोड़फोड़

छत्तीसगढ़ के महासमुंद में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की एक गंभीर घटना सामने आई है। इस पथराव में ट्रेन के तीन कोचों के शीशे टूट गए। यह ट्रेन ट्रायल रन पर थी, और इस घटना ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें प्रमुख आरोपित शिवकुमार बघेल भी शामिल है, जो कॉन्ग्रेस नेता ताम्रध्वज बघेल का भाई है। ताम्रध्वज बघेल खल्लारी विधानसभा क्षेत्र का यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा था। महासमुंद के बागबाहरा रेलवे स्टेशन के पास कुछ असामाजिक तत्वों ने ट्रेन पर पथराव किया। इस हमले में ट्रेन के तीन कोच C2-10, C4-1, और C9-78 के शीशे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 सितंबर को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन इस घटना ने ट्रायल रन को प्रभावित किया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपितों में शिवकुमार बघेल, जो कॉन्ग्रेस नेता ताम्रध्वज बघेल का भाई है, प्रमुख आरोपित के रूप में सामने आया है। अन्य आरोपितों के नाम देवेंद्र कुमार, जीतू पांडे, सोनवानी और अर्जुन यादव हैं। सभी आरोपित बागबाहरा के निवासी हैं और उन पर रेलवे एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

RPF (रेलवे सुरक्षा बल) के अधिकारी परवीन सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा था, जब यह हमला हुआ। सुबह करीब 9 बजे कुछ असामाजिक तत्वों ने बागबाहरा के पास चलती ट्रेन पर पथराव किया। सुरक्षा बलों ने तुरंत सूचना दी और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पीएम मोदी दिखाने वाले थे हरी झंडी

वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे भारत की सबसे उन्नत ट्रेनों में से एक माना जाता है, हाई-स्पीड ट्रेन है। यह ट्रेन यात्रियों को तेज गति, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करती है। यह ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है और देश के विभिन्न हिस्सों में इसका परिचालन तेजी से बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 सितंबर को इस ट्रेन को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन इस घटना से ट्रायल रन में बाधा आ गई। वंदे भारत ट्रेन से देश के रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।