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महंत अवैद्यनाथ: एक संत, एक योद्धा और एक समाज सुधारक, जिन्होंने राम मंदिर के लिए बिगुल फूँका और योगी आदित्यनाथ जैसे व्यक्तित्व को निखारा

सन 1919 में एक साधारण परिवार में जन्मे महंत अवैद्यनाथ को पहले ‘कृपाल सिंह बिष्ट’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ वह गोरखनाथ मठ के महंत बने और अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ से विरासत में मिले बड़े कर्तव्यों को सफलतापूर्वक निभाया। महंत दिग्विजयनाथ न केवल एक धार्मिक नेता थे, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और हिंदू पुनर्जागरण के एक प्रमुख नेता भी थे।

महंत अवैद्यनाथ ने इस महान धरोहर को न केवल सँभालना था, बल्कि उसे और आगे ले जाकर समाज और धर्म के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना था। महंत अवैद्यनाथ का जीवन केवल आध्यात्मिकता और समाज सेवा तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा, जहाँ उन्होंने अपने धार्मिक आदर्शों को बेहद मजबूती के साथ लागू किया, जिसे आज एक आदर्श के रूप में माना जाता है।

वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे और बाद में गोरखपुर से सांसद भी सदस्य बने। सन 1962  में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के मनीराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से हिन्‍दू महासभा की ओर से चुनाव में भाग लिया था। सन 1969 में जब वे मठ का महंत बनकर उसका कार्यभार सँभाला तो उन्होंने इसे केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रखा।

महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व में मठ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। इससे मठ केवल एक आध्यात्मिक स्थान ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का एक प्रमुख केंद्र बन गया। सन 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में करीब 1,500 दलितों ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।

इस घटना के बाद महंत अवैद्यनाथ ने सामाजिक समरसता और दलित उत्थान के लिए सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। उनके नेतृत्व में 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन हुआ, लेकिन उसी साल 31 अक्टूबर को इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद यह मामला कुछ दिनों के लिए रोक दिया गया।

ठीक एक साल बाद 1 नवंबर 1985 को द्वितीय धर्म संसद में समिति ने सरकार को अल्टीमेटम दिया गया कि 8 मार्च 1986 तक राम मंदिर के ताले खुलवा दे नहीं तो सरकार लाखों संतों के क्रोध का सामना करने को तैयार रहे। महंत अवैद्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद् और फैजाबाद के एक युवा वकील के मिले-जुले प्रयास से यह आंदोलन कोर्ट का आदेश लाने में सफल रहा।

इस आदेश में कहा गया कि 1 फरवरी 1986 को श्रीराम जन्मभूमि के ताले खोले जाएँ। उस वक़्त उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह थे और उनकी महंत अवैद्यनाथ में गहरी आस्था थी। परिणामस्वरूप ये लोग प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर इतना दबाव बनाने में सफल रहे कि वह इस फैसले में सहयोग करें। आगे चलकर राजीव गाँधी उनके आगे झुके भी।

एक बार फिर से 22 सितंबर 1989 को दिल्ली के वोट क्लब में विशाल हिंदू सम्मेलन में महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखने की तिथि निश्चित कर दी गई। 9 और 10 नवंबर 1989 को वैदिक विधि विधान से आधारशिला का समारोह शुरू हुआ और महंत अवैद्यनाथ के कहने पर अनुसूचित जाति से आने वाले कामेश्वर चौपाल से आधारशिला रखवाई गई। 

दरअसल, गोरक्षपीठ जाति-पाँति और ऊँच-नीच जैसे भेदभाव को नहीं मानता है। इसलिए राम मंदिर की आधारशिला रखने के लिए SC समाज के व्यक्ति को चुना गया। इस बीच दिसंबर 1989 में राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के नए प्रधानमंत्री बने। उन्होंने महंत अवैद्यनाथ से मामले को सुलझाने के लिए कुछ महीनों का समय माँगा।

सरकार की लापरवाही को देखते हुए महंथ अवैद्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर देशभर में जनजागरण अभियान शुरू कर दिया। वहीं, दूसरी ओर अजय सिंह बिष्ट कोटद्वार में बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे और  एबीवीपी के साथ जुड़कर सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते रहते थे। पुनर्जागरण के दौर को लेकर नियति ने भी बहुत कुछ तय कर रखा था।

इसी जनजागरण में दौरान महंत अवैद्यनाथ को अपना शिष्य, गोरखपीठ के भविष्य का पीठाधीश्वर और देश के सबसे बड़े सूबे को उसका सबसे लंबे समय तक रहने वाला मुख्यमंत्री मिलने वाला था। नियति ने इन्हीं के मुख्यमंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण होना तय कर दिया था। इसके अलावा भी बहुत कुछ अभी होना बाकी था। 

पहली बार 1990 में अजय सिंह बिष्ट का साक्षात्कार महंत अवैद्यनाथ से हुआ। उनसे वो अत्यंत प्रभावित हुए। महंत अवैद्यनाथ की अध्यक्षता वाली श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन समिति ने घोषणा की कि 30 अक्टूबर को अयोध्या में कारसेवा के तहत मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। उस समय उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को सांप्रदायिक करार दिया था।

इस तरह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत अवैद्यनाथ कर रहे थे। उनके साथ साधु-संतों के 970 से अधिक संगठन और तमाम सांस्कृतिक संगठन एवं राजनीतिक दल भी काम कर रहे थे। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा निकालने की घोषणा कर दी।

इसके विपरीत मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कानून व्यवस्था की आड़ में यह घोषणा की, “मेरे मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।” 23 अक्टूबर को लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा बिहार के समस्तीपुर में रोक कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। 26 अक्टूबर को दिल्ली से अयोध्या जाते समय महंत अवैद्यनाथ को बीच रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इन सबके बावजूद 30 अक्टूबर को अयोध्या में लाखों कारसेवक प्रवेश कर गए, जिससे बौखलाई उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने कारसेवकों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। महंत अवैद्यनाथ से प्रभावित अजय सिंह बिष्ट भी इस कारसेवा में शामिल हुए थे। कारसेवकों पर हमले के ठीक एक साल बाद महंत अवैद्यनाथ ने एक घोषणा की।

महंत अवैद्यनाथ ने 30 अक्टूबर 1991 को कारसेवकों को श्रद्धांजलि देते हुए घोषणा की कि श्रीराम मंदिर का निर्माण किसी के दया से नहीं, बल्कि हिंदुओं के शौर्य से होगा। 23 जुलाई 1992 को जब सुप्रीम  कोर्ट ने विवादित स्थल पर किसी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी तो उसी दिन महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव से जाकर मिला।

प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने महंत अवैद्यनाथ से 3 महीने तक रुकने का आग्रह किया। हालाँकि, समय बीत जाने पर सरकारी लापरवाही को देखते हुए 30 अक्टूबर की पाँचवीं धर्म संसद में 6 दिसंबर को कारसेवा का दिन तय हुआ। 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों व साधु संतों के मौजूदगी में विवादित ढाँचा गिरा दिया गया। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में चलने लगा था।

इधर 1994 में अजय सिंह बिष्ट गोरखपीठ के उत्तराधिकारी घोषित किए जा चुके थे और वे अब योगी आदित्यनाथ बन चुके थे। सन 1998 में बड़े महंत जी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया और योगी आदित्यनाथ जी, जिन्हें लोग वहाँ प्यार से ‘छोटका बाबा’ कहते थे उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया। महंत अवैद्यनाथ की एक और महान उपलब्धि उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ को तैयार करना थी।

उन्होंने योगी आदित्यनाथ को न केवल धार्मिक, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए भी तैयार किया। आज योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अपने गुरु के आदर्शों पर चलकर प्रदेश और देश की सेवा कर रहे हैं। बड़े महंत जी (अवैद्यनाथ जी) पूर्ण रूप से धार्मिक-सामाजिक और मंदिर के कार्यों में अपने आपको लगा दिया। उनके जीवन के आख़िरी इच्छा राम मंदिर को देखना था।

इसी आस में महंत अवैद्यनाथ ने 12 सितंबर 2014 को अपना नश्वर शरीर त्याग दिया। महंत अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी आदित्यनाथ गोरखपीठ के पीठाधीश्वर बने। फिर 19 मार्च 2017 को वे देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिनों के बाद योगी आदित्यनाथ अयोध्या भगवान राम का दर्शन करने गए।

आखिरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ। महंत अवैद्यनाथ का जीवन धर्म, सेवा और नेतृत्व का प्रतीक था। उन्होंने गोरखनाथ मठ की परंपराओं को न केवल सँजोया, बल्कि उन्हें समाज की भलाई के लिए उपयोग किया। उनका जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी सेवाओं तक फैला हुआ था।

हिंदुओं पर लाठीचार्ज के विरोध में शिमला बंद, इमाम ने माना मस्जिद ‘अवैध’: कहा- कोर्ट का आदेश हो तो तोड़ देंगे, बचाव में जुटी है कॉन्ग्रेस सरकार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला गुरुवार (12 सितम्बर, 2024) को ठहर गई। शिमला के व्यापार मंडल ने सुक्खू सरकार के हिन्दुओं पर दमन के विरोध में बाजार बंद रखे। पर्यटकों और आम जनता की आवाजाही से गुलजार रहने वाला शिमला एक दम शांत पड़ा है। शहर भर के व्यपारियों ने यह फैसला अवैध मस्जिद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हिन्दुओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लिया। वहीं प्रदर्शनकारी हिन्दू DC और SP के दफ्तर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने लगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिमला में गुरुवार को किसी भी दुकान का शटर नहीं उठा। शिमला के सभी प्रमुख छोटे बड़े बाजार बंद रहे। यह बंदी सुबह से लेकर दोपहर 1 बजे तक की गई। इस दौरान ना केवल दुकानें बंद रहीं बल्कि शिमला का व्यापार मंडल भी सड़कों पर उतर आया। शिमला के व्यपारियों ने बुधवार को हिन्दुओं पर चली पुलिस की लाठियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

व्यापारी बोले- एसपी को हटाओ

व्यापार मंडल ने एक रैली निकाल कर हिन्दुओं के विरुद्ध हुई पुलिसिया कार्रवाई पर अपना रोष जताया। शहर भर के व्यापारियों ने इस दौरान सुक्खू सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की। इसी के साथ व्यापारी हिन्दू प्रदर्शनकारी शिमला के DC और SP के दफ्तर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया।

व्यापरियों ने माँग की कि शिमला के SP को हटाया जाए। वहीं अब सामने आया कि बुधवार को हुई पुलिसिया कार्रवाई में 12 लोग घायल हुए हैं। कई लोगों को हल्की चोटें आई। सभी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस बीच संजौली इलाके में तनाव बना हुआ है।

गौरलतब है कि शिमला के संजौली में बनी अवैध मस्जिद पर कार्रवाई की माँग करते हुए बुधवार को शिमला के हिन्दुओं ने एक प्रदर्शन का आयोजन किया था। यह प्रदर्शन संजौली इलाके में ही होना था। हालाँकि, सुक्खू सरकार ने इसको रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए।

इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं रुके तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ चला दी और पानी की बौछार मारी। इसमें कई लोग घायल हुए। संजौली की अवैध मस्जिद मामले में अब इस बीच नया मोड़ भी आ गया है। इसको गिराने के पक्ष में मुस्लिम वर्ग ही आ गया है।

मस्जिद कमिटी ने कहा- तोड़ तो अवैध निर्माण

मस्जिद के अवैध निर्माण पर हिन्दुओं के बढ़ते दबाव को देखकर संजौली मस्जिद कमिटी ने खुद ही इसे गिराने का प्रस्ताव दिया है। गुरुवार को मस्जिद कमिटी ने नगर निगम के अधिकारियों से मुलाक़ात की है। कमिटी ने कहा कि वह कोर्ट का आदेश आने पर मस्जिद में अवैध रूप से किया गया निर्माण तोड़ देंगे।

मस्जिद कमिटी ने कहा है कि वह कोर्ट का फैसला आने तक इसकी तीन मंजिलों को सील कर देंगे। इस मामले में अगली सुनवाई अक्टूबर में है। कमिटी ने यह मान लिया है कि मस्जिद में अवैध निर्माण हुआ है। उसके प्रतिनिधियों ने कहा है कि यह अवैध निर्माण बाहर से आने वाले मुस्लिमों के कारण हुआ है।

संजौली मजिस्द के इमाम शहजाद ने कहा है कि हमने मस्जिद का निर्माण हटाने और उसे सील करने का आवेदन दिया है। इमाम शहजाद ने यह भी कहा कि वह किसी प्रेशर में यह काम नहीं कर रहे हैं बल्कि इस भाईचारे को बचाना चाहते हैं। नगर निगम के आयुक्त भूपेन्द्र अत्री ने कहा है कि वह इस आवेदन पर अब विचार करेंगे।

CM सुक्खू के सलाहकार ने कहा- प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ता

जहाँ एक ओर संजौली मस्जिद की कमिटी ने मान लिया है कि यहाँ अवैध निर्माण हुआ है, वहीं सुक्खू सरकार हिन्दू प्रदर्शनकारियों को भाजपा का कार्यकर्ता बताने में जुटी है। CM सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रदर्शनकारियों को भाजपा कार्यकर्ता बता है। नरेश चौहान ने कहा, “मैं सबको निजी तौर पर जानता हूँ, यह सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं और चुनाव भी लड़ चुके हैं। ये लोग राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दे को उठाना चाहते हैं। यह मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम का नहीं है।”

कहाँ से चालू हुआ विवाद

राजधानी शिमला में बनी संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई।

इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए।इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे।

इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

इस लड़ाई झगड़े की घटना के बाद यह मस्जिद विवादों के केंद्र में आ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

तबसे ही इस मस्जिद को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध होने की बात हिमाचल सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कही थी। स्थानीय लोगों को हिन्दू संगठनों की माँग है कि इस अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और सरकार इसमें ढिलाई ना बरते। हालाँकि, सुक्खू सरकार बता रही है यह मामला अभी कोर्ट में है।

PM की इफ्तार पार्टी में CJI का जाना ‘सेकुलरिज्म’, मुख्य न्यायाधीश की गणेश पूजा में प्रधानमंत्री का होना ‘लोकतंत्र पर खतरा’: इतना दोगलापन कहाँ से लाते हो लिब्रांडुओं

गणेश चतुर्थी के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ के घर पहुँचे। इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी ने प्रधानमंधी का स्वागत किया। बाद में सबने हाथ में थाल लेकर गणेश भगवान की पूजा-अर्चना की… ये दृश्य सामान्य हिंदू के लिए अभिभूत करने वाला था लेकिन लिबरलों के लिए ये किसी जख्म से कम नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो को देखने के बाद लिबरल बिलबिलाए हुए हैं। उनके लिए स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संविधान सब खतरे में आ गया है। कहा जा रहा है कि अब सीजेआई और प्रधानमंत्री के बीच के रिश्ते खुलकर दिखने लगे हैं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि उन्हें अदालत से न्याय मिल सकेगा या नहीं।

रोना रोने वालों में पहला नाम आरफा खानुम शेरवानी का है। उन्हें सीजेआई के घर में पीएम मोदी को आरती करता देख इतना दुख हुआ कि उन्होंने अपने पोस्ट पर लिखा- “इंसान जालिमों की हिमायत में जाएगा। ये हाल है तो कौन अदालत जाएगा।”

उनके हिसाब से यहाँ ‘इंसान’ सीजेआई हैं और ‘जालिम’ पीएम मोदी हैं। अगर पीएम मोदी ही सीजेआई से अच्छे संबंध रखेंगे तो फिर आखिर उन लोगों की कौन सुनेगा।

इसी तरह अगला नाम नेहा सिंह राठौड़ का है। आरती की घंटी की तुलना खतरे की घंटी से करते हुए नेहा राठौड़ कहती हैं- “जज साहब के घर गणपति पूजा की आरती में लोकतंत्र के लिए ख़तरे की घंटी बज रही है।”

आगे वकील इंदिरा जयसिंह इस वीडियो को देखने के बाद कहती हैं कि मुख्य न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन को लेकर समझौता किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को इसकी निंदा करनी चाहिए।

इस तरह अशोक धावले सीजेआई के घर पीएम मोदी को पूजा करते हुए देख कहते हैं अब न्यायाधीश चंद्रचूड़ को उनकी रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा में पोस्ट मिलेगी, वो राज्यपाल बनेंगे या फिर अडानी बोर्ड के डायरेक्टर या हो सकता है अगले कानून मंत्री ही बन जाएँ।

प्रशांत भूषण इस वीडियो को देख कहते हैं- हैरानी है कि मुख्य न्यायाधीश ने मोदी को अपने आवास पर प्राइवेट मीटिंग के लिए आने दिया। बहुत बुरा संदेश जाएगा कि जिस न्यायपालिका का काम मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है वह सरकार के दायरे में काम करे। प्रशांत भूषण बताते हैं कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दूरी होनी चाहिए।

लिबरल पत्रकार और लिबरल वकीलों के बाद कुछ राजनेता भी हैं जिन्हें पीएम मोदी द्वारा सीजेआई के घर जाने पर आपत्ति हो रही है। शिवसेना के संजय राउत कहते हैं कि उनकी पार्टी का मामला कोर्ट में हैं जिसमें दूसरी पार्टी केंद्र सरकार हैं ऐसे में वो कैसे सोचें कि उन्हें न्याय मिलेगा। इसी तरह पूर्व कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी भी अपने ट्वीट में इस मुद्दे को उठाती हैं पूछती हैं कि क्या जो महाराष्ट्र का मामला कोर्ट में है उसमें फैसला आ जाएगा या चुनाव आने तक उसे टाला जाता रहेगा।

पूजा-पाठ से है समस्या, इफ्तार पार्टी से नहीं

ध्यान रहे अलग-अलग प्रोफेशन से आने वाले लिबरलों की ये सारी आशंका, ये सारा डर सिर्फ पीएम मोदी के सीजेआई के घर पहुँच जाने के कारण है। दिलचस्प बात ये है कि इसी लिबरल जमात को इफ्तार पार्टी से समस्या नहीं है।

अगर देश का प्रधानमंत्री इफ्तार पार्टी का आयोजन कराए और देश के बड़े बड़े नेता उसमें शामिल होने जाएँ… तब इन्हें डर नहीं सताता कि सेकुलर देश में इस तरह देश के प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित इफ्तार से देश की बहुसंख्यक आबादी को कैसा चलेगा।

इफ्तार पार्टी की बात कोई काल्पनिक नहीं है। साल 2009 में प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह द्वारा उनके घर पर इफ्तार पार्टी होस्ट की गई थी और उस समय उनकी मेहमानों में एक चेहरा तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन का भी था।

आज लोकतंत्र को खतरे में बताकर चिल्लाने वालों को शायद तब सब कुछ सही लगा हो। तब उन्हें ये डर न सताया हो कि आखिर जब सीजेआई ही प्रधानमंत्री के घर आकर उनसे हँस-हँस कर बात कर रही हैं तो फिर इंसाफ कौन करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

इनका ये डर आज सिर्फ इसलिए है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ हैं और वो हिंदू धर्म को मानने वाले सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के घर जाकर पूजा कर रहे हैं। लिबरलों के हिसाब से तो शायद सीजेआई का धर्म हिंदू है तो उन्हें मन से नास्तिक होना चाहिए, क्योंकि अगर वो अपने धर्म का पालन करेंगे तो इस जमात को हमेशा यही लगेगा कि जो शख्स पूजा पाठ करता है वो कैसे न्याय कर पाएगा! लेकिन वही व्यक्ति बैठकर घर में इफ्तार पार्टी कर दे तो उसकी विश्वसनीयता इनकी नजरों में दुगनी बढ़ जाएगी, उसमें न्याय की क्षमता आ जाएगी, उसके सेकुलरिज्म के कसीदे पढ़ें जाएँगे।

लिबरलों का ये हाल तब है जब उनके ऊपर खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए दबाव है। सोचिए, अगर वो ये दिखावा करना छोड़ दें तो इनके ट्वीट में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच के संबंध पर बात नहीं होगी बल्कि ये खुलेआम हर हिंदू त्योहार का विरोध करते दिखेंगे।

संविधान देता है धर्म मानने और धर्म का आचरण करने की आजादी

आज जिस लोकतंत्र और संविधान को खतरे में बताकर ये लोग सीजेआई के घर होती पूजा और उसमें शामिल हुए पीएम का विरोध कर रहे हैं वहीं संविधान देश के नागरिकों को अनुच्छेद 25 के तहत अपने-अपने धर्म को मानने की आजादी देता है। वहीं अनुच्छेद 25 (1) में उल्लिखित है कि लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा

अब ये जमात ये तो नहीं कह सकती न कि देश का पीएम बनने से और सीजेआई बनने से देश की नागरिकता छिन जाती है… सच तो यही है कि जो अधिकार एक नागरिक के होते हैं वही अधिकार पीएम मोदी और सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के पास भी हैं। ऐसे में अगर ये दोनों लोग अपने इन अधिकारों से वाकिफ हैं और इन्हें अपने धर्म का आचरण करने में समस्या नहीं है तो जाहिर है वो लोग इस तरह कार्यक्रमों में आ जा सकते हैं। और अगर लिबरलों के हिसाब से जवाब नहीं होना चाहिए, तो फिर उन्हें आपत्ति का आधार इफ्तार पार्टियों और सम्मेलनों को बनाना चाहिए जहाँ पहुँचकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के लोग मिलते भी हैं और उनके बीच हँस-हँसकर बात भी होती है।

PM मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले भारी मात्रा में हथियार बरामद, AK47 और गोला-बारूद से लेकर IED तक शामिल: 2 आतंकी भी ढेर

जम्मू-कश्मीर में पीएम मोदी की यात्रा से पहले सुरक्षा बलों ने कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान से सटे नियंत्रण रेखा के पास हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया है। दरअसल, विशिष्ट खुफिया जानकारी मिलने के बाद श्रीनगर स्थित भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स ने सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान शुरू किया। इनमें एके-47 और गोला-बारूद शामिल हैं।

हथियारों का यह जखीरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से कुछ दिन पहले ही बरामद हुए हैं। दरअसल, पीएम मोदी आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने जा रहे हैं। पीएम मोदी इस केंद्रशासित प्रदेश में 14 सितंबर और उसके बाद 19 सितंबर को चुनाव प्रचार करने के लिए पहुँचेंगे।

इस अभियान को लेकर चिनार कॉर्प्स ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) ने लिखा, “विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर आज कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान चलाया गया। बताए गए क्षेत्र में तलाशी के दौरान हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों का एक बहुत बड़ा जखीरा बरामद हुआ है।

बरामद जखीरों के बारे में जानकारी देते हुए सेना ने आगे बताया, “इनमें AK 47, हैंड ग्रेनेड, RPG राउंड, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के लिए सामग्री और अन्य युद्ध-जैसे सामान शामिल हैं। मौजूदा सुरक्षा स्थिति और महत्वपूर्ण आगामी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह बरामदगी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी ताकत है।”

इस बीच, भारतीय सेना ने कहा कि बुधवार (11 सितंबर 2024) को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। सोशल मीडिया साइट X पर एक पोस्ट में भारतीय सेना के राइजिंग स्टार कॉर्प्स ने कहा, “राइजिंग स्टार कॉर्प्स के जवानों द्वारा खंडारा कठुआ में चल रहे ऑपरेशन में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। ऑपरेशन जारी है।”

बुधवार को ही बीएसएफ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तान की ओर से बिना उकसावे के की गई गोलीबारी में उसका एक जवान घायल हो गया। भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा करने वाली बीएसएफ ने एक बयान में कहा कि सुबह करीब 2:35 बजे बिना उकसावे की गोलीबारी का उसके जवानों ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना पहली बार जबरन बनाया शारीरिक संबंध, फिर भी रद्द कर दी रेप की FIR: जानिए गोवा के संगीतकार को क्यों मिली राहत?

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने हाल ही में एक संगीतकार के खिलाफ दायर बलात्कार के मामले को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि उसके साथ पहली बार यौन क्रियाकलाप के दौरान पीड़िता की सहमति नहीं थी, लेकिन बाद में यौन संबंध उसकी सहमति से हुए। कोर्ट ने इसे शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना नहीं माना। इसके बाद उसने दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस की पीठ ने सामग्री की समीक्षा के बाद यह निर्णय दिया। कोर्ट ने पाया कि 32 वर्षीय नामी संगीतकार और 38 साल शिकायतकर्ता महिला के बीच संबंध सहमति से बने थे और ये संंबंध शादी के वादे पर आधारित नहीं थे, जैसा कि शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया है।

FIR को रद्द करते हुए खंडपीठ ने कहा, “हम पाते हैं कि भले ही शिकायत में लगाए गए आरोप और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को उनके अंकित मूल्य पर लिया जाए, लेकिन धारा 164 के तहत बयान से जो पता चलता है वह यह है कि 08.01.2024 को शिकायतकर्ता याचिकाकर्ता के साथ रात के खाने के लिए बाहर गई थी और चूंकि देर हो चुकी थी, इसलिए शिकायतकर्ता याचिकाकर्ता के फ्लैट में रुकी थी।”

कोर्ट ने आगे कहा, “आधी रात को याचिकाकर्ता (संगीतकार) ने शिकायतकर्ता (महिला) के बेडरूम में गया और उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। शिकायतकर्ता ने रोते हुए उससे पूछा कि उसने यह कृत्य क्यों किया, जबकि उसने उसे बताया कि वह उसके साथ अपनी पत्नी की तरह व्यवहार करता है और उसने उससे शादी करने का वादा किया था।”

हाई कोर्ट की पीठ ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए आगे कहा, “अगले दिन दोपहर के भोजन के बाद, याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को घर छोड़ दिया। आरोपों से यह देखा गया है कि अभियोक्ता ने यौन संबंध के लिए सहमति नहीं दी थी। इस प्रकार कोई सहमति या शादी का वादा नहीं था।” इसके बावजूद कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच यौन संबंध आपसी सहमति से बने।

न्यायालय ने पाया कि पहला सामना गैर-सहमति से हुआ था, लेकिन बाद की यौन गतिविधि सहमति से हुई थी, क्योंकि शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से संबंध जारी रखा था। कोर्ट ने कहा, “शिकायतकर्ता के पास उस कृत्य से जुड़े परिणामों को समझने के लिए पर्याप्त ज्ञान और परिपक्वता थी, जिसके लिए वह सहमति दे रही थी। शिकायतकर्ता अपने संबंधों से जुड़ी जटिलताओं को समझने में सक्षम थी।”

कोर्ट ने कहा, “शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से याचिकाकर्ता के साथ शिकायत में और धारा 164 के बयानों में उल्लिखित स्थानों पर गई थी, जिसकी आयु 32 वर्ष थी। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने उसे आश्वासन दिया था कि वह उससे शादी करेगा। पहले अवसर पर, शिकायतकर्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। उसके बाद शिकायतकर्ता ने कई अवसरों पर स्वेच्छा से याचिकाकर्ता के साथ निकटता में रही, जिसके परिणामस्वरूप सहमति से शारीरिक संबंध बने।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता संगीतकार के साथ विभिन्न जगहों पर गई। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य आईपीसी की धारा 90 के तहत बलात्कार के आरोप के लिए मानदंड पूरे नहीं करते हैं। इसके बाद कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि साक्ष्य बलात्कार के दावे का समर्थन नहीं करते हैं और इस प्रकार एफआईआर और आरोपपत्र को रद्द कर दिया।

दरअसल, महिला ने संगीतकार पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए 25 जनवरी 2024 को पणजी की महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। दर्ज शिकायत के अनुसार, दोनों की मुलाकात पणजी स्थित आइनॉक्स में अक्टूबर में म्यूजिक फेस्ट में हुई थी। बाद में सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम के ज़रिए दोनों के बीच बातचीत होने लगी थी।

शिकायत के अनुसार, 7 जनवरी को संगीतकार ने महिला की दादी के सामने उससे शादी करने की अपनी मंशा जाहिर की। हालाँकि, महिला की दादी ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बावजूद संगीतकार ने दादी से वादा किया कि वह महिला को प्यार करता है और उसे खुश रहेगा। उसने कहा कि अगर उसका परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं होता है, तब भी वह शादी करेगा।

इसके अगले दिन यानी 8 जनवरी को संगीतकार महिला को डिनर पर ले गया। काफी देर होने के कारण उसने महिला को रात में अपने फ्लैट में ही रहने के लिए कहा। महिला जब ठहर गई तो संगीतकार ने आधी रात को उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। जब शिकायतकर्ता परेशान हुई तो संगीतकार ने उसे आश्वासन दिया कि वह उससे शादी करेगा।

इसके बाद महिला और संगीतकार ने आपसी सहमति से महिला के रिश्तेदारों के घर, होटल आदि सहित विभिन्न जगहों पर कुल सात बार शारीरिक संबंध बनाए। हालाँकि, 19 जनवरी के बाद से महिला से दूरी बनानी शुरू कर दी। उसने महिला से कहा कि उसकी माँ इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दे रही है। इसलिए वह उससे शादी नहीं कर सकता। इस बीच महिला को पता चला कि वह गर्भवती है। आखिरकार उसने संगीतकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया।

70+ वाले बुजुर्गों को मिलेगा ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज, आयुष्मान का दायरा मोदी सरकार ने बढ़ाया: जानिए कैसे बनेगा कार्ड, कैसे मिलेगा फायदा

मोदी सरकार ने देश के 70 वर्ष या उससे अधिक सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना का अतिरिक्त लाभ देने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार अब हर आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों (70+) को आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख का अतिरिक्त बीमा देगी। केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में इस फैसले को मंजूरी मिल गई है। इससे देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों को फायदा होने की आशा जताई गई है। इस योजना का दायरा बढ़ाए जाने से उन परिवारों पर से भी इलाज के खर्चे का बोझ हटेगा जिनमें 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल हैं।

क्या है मोदी सरकार का फैसला?

मोदी सरकार ने बुधवार (11 सितम्बर, 2024) को हुई कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का दायरा बढ़ाने को मंजूरी दी है। मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि अब 70 या उससे अधिक आयु वाले देश के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को वह इस योजना के ₹5 लाख का अतिरिक्त बीमा कवर प्रदान करेगी। इससे लगभग 4.5 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। मोदी सरकार ने इन लाभार्थियों के चयन के लिए कोई शर्तें नहीं लगाई हैं।

मोदी सरकार के इस कदम के अंतर्गत सभी आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को इसका लाभ दिया जाएगा। इस योजना में किसी भी आय वर्ग के लोगों को बाहर नहीं किया गया है। मोदी सरकार इस योजना का लाभ पहले से चल रही आयुष्मान योजना के तहत ही देगी। सरकार ने बताया है कि इसके लिए वह ₹3437 करोड़ का खर्च उठाएगी। उसने कहा है कि यदि यह अधिक लोग इसके तहत योजना का लाभ उठाते हैं तो वह बढ़ा हुआ खर्च भी वहन करेगी। राज्यों को भी इसका एक हिस्सा वहन करना होगा।

कैसे काम करेगी यह योजना?

इस योजना के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय इन 70+ से आयुवर्ग के लोगों को एक नया आयुष्मान कार्ड जारी करेगा। योजना के तहत ₹5 लाख का लाभ अकेले कार्डधारक उठा सकेगा। अभी तक आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा एक परिवार को दिया जाता है। परिवार के सभी सदस्य इसके लाभार्थी बन सकते हैं। यानी किसी परिवार में यदि 5 सदस्य हैं तो उन्हें कुल 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा प्रतिवर्ष मिलेगा। अभी तक यही व्यवस्था परिवार के वरिष्ठ नागरिकों पर लागू थी।

अब वरिष्ठ नागरिकों का कार्ड अलग हो जाने से उनको अलग ₹5 लाख का बीमा मिलेगा। इसके साथ ही 70 वर्ष से कम आयु वाले परिवार के बाकी सदस्यों का ₹5 लाख का संयुक्त स्वास्थ्य बीमा जारी रहेगा। यह भी बताया गया है कि यदि कसी परिवार में 2 ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जिनकी आयु 70 वर्ष से अधिक है तो उनके बीच यह ₹5 लाख का बीमा साझा कर दिया जाएगा। सामान्य तौर पर भारतीय परिवारों में इलाज पर खर्च सदस्यों की उम्र के साथ बढ़ता है, ऐसे में यह योजना काफी प्रभावी सिद्ध होगी।

सरकार ने और क्या बताया?

मोदी सरकार ने बताया कि नई आयुष्मान योजना का लाभ उन 70+ आयु वाले लोगों को भी मिलेगा जो पहले से किसी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभ ले रहे हैं। यानी इसका लाभ CGHS (केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना) और ECHS (भूतपूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना) जैसी योजनाओं में आने वाले लोग भी ले सकते हैं। हालाँकि, इस नई आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें दोनों में से किसी एक का चुनाव करना पड़ेगा। इसके अलावा राज्य की बीमा योजना और निजी बीमा योजना लेने वाले लोग भी इसका लाभ ले सकेंगे।

क्या है आयुष्मान योजना?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में आयुष्मान योजना का ऐलान किया था। इसके तहत वर्तमान में देश के 12 करोड़ से अधिक परिवारों को ₹5 लाख के वार्षिक स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जा रहा है। यह योजना भारत के लगभग 40% परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक लगभग 35 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस योजना में 17,000 से अधिक सरकार जबकि 13,000 से अधिक निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं।

इस योजना के चालू होने के बाद से अब तक 7.37 करोड़ लोगों ने इसका लाभ उठाया है। सरकार ने इस इलाज के भुगतान पर ₹90,000 करोड़ से अधिक की राशि अब तक खर्च की है। इस योजना के चलते उन परिवारों को बड़ा लाभ हुआ है, जिनकी आय का एक बड़ा हिस्सा किसी बीमारी या चोट के इलाज में लग रहा था। कैंसर जैसी गंभीर और महँगे इलाज वाली बीमारियों में भी यह योजना काम आ रही है और लोगों की जेब पर असर नहीं पड़ रहा है।

मॉर्च्युरी से शव निकालकर करते थे संभोग, कंकाल तक बेचते थे: कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हो रहे कुकर्मों का CBI को मिला सबूत, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल को लेकर चल रही जाँच में केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) को कुछ अहम सबूत मिले हैं। ये सबूत अस्पताल में हो रहे घोटाले और अवैध गतिविधियों से जुड़े हैं। बंगाली मीडिया खबरों में सीबीआई सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अस्पताल के मॉर्च्युरी में शवों के साथ सेक्स करके वीडियो बनाने का कारोबार चल रहा था। इतना ही नहीं साल 2021 में 60 से 70 शव अस्पताल से गायब होने की बात भी सामने आई है।

बता दें कि पिछले दिनों महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या घटना के बाद ये अस्पताल चर्चा में आया और इससे जुड़ी अनियमतताओं का खुलासा होने लगा। केस के आरोपित संजय रॉय को लेकर भी पता चला कि उसके पास अस्पताल की मॉर्च्युरी में रात में जाने की अनुमति थी जबकि मॉर्च्युरी 7:30 से 8 बजे के करीब बंद हो जाती है। रात में किसी शव का पोस्टमार्टम नहीं होता। अगर कोई शव आता भी है तो उसे पीछे दरवाजे से लाया जाता है।

मॉर्च्युरी में पोर्नोग्राफी

अब इस मामले की जाँच में जुटे अधिकारियों का यही मानना है कि मॉर्च्युरी के कोल्ड चैंबर से लाशें निकाली जाती थीं और फिर उनके साथ अश्लीलता होती थी और वीडियो बनाई जाती थी।

सूत्रों के हवाले से ही ये पता चलता है कि अधिकारियों को संजय के मोबाइल फोन पर आरजी कर अस्पताल के मुर्दाघर में रिकॉर्ड किए गए वीडियो मिले हैं। इन फोटो और वीडियो में वह और अन्य लोग मुर्दाघर के अंदर शवों के साथ संभोग करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मुर्दाघर में 40 से ज़्यादा कोल्ड चैंबर हैं। आशंका है कि ये चैंबर रात में खोले जाते थे और मुर्दाघर के अंदर की लाइट दिन-रात जलती रहती थी। इसके बाद यहाँ संजय रॉय समेत कई लोगों को प्रवेश दिया जाता था।

ये सारे खुलासे संजय रॉय की गिरफ्तारी के बाद हुए। 9 अगस्त की घटना के बाद जब संजय रॉय को हिरासत में लिया गया तो उसके फोन की जाँच से पता चला कि उसे पोर्नोग्राफी का बहुत शौक था। उसके फोन से कई पोर्न वीडियोज बरामद हुए। इसमें शवों के साथ संभोग आदि के वीडियो भी थे। छानबीन में पता चला कि ये तो अस्पताल के मॉर्च्युरी में बनाई गई वीडियो ही हैं। आनंद बाजार पत्रिका ने इस संबंध में बताया कि अस्पताल में पोर्नोग्राफी का रैकेट चल रहा था। अधिकारी इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि इन वीडियोज को बनाने के बाद विदेशों में बेचा जाता होगा।

कंकाल बेचे जाते थे

अस्पताल में शवों के साथ हो रही घटिया हरकत के अलावा जाँच अधिकारियों को मॉर्च्युपी से कुछ अन्य अनियमतताओं के सबूत भी मिले हैं। पता चला है कि न केवल शव के साथ अश्लीलता की जाती थी बल्कि शवों से कंकाल निकालकर उन्हें बेचने का काम भी होता था।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मुर्दाघर के कोल्ड चैंबर, रजिस्टर बुक और पिछले कुछ महीनों के सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड इकट्ठा कर लिया है। सीबीआई ने रजिस्टर में गड़बड़ी के बारे में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रबीर चक्रवर्ती से स्पष्टीकरण माँगा है। हालाँकि, एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और बाद में किसी संदेश पर रिस्पांड करना बंद कर दिया।

जाँच अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस पूरे सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल है। अभी तक संदीप घोष को लेकर कहा जा रहा है कि अगर कोई अनियमतताओं के विरुद्ध आवाज उठाता था तो संदीप मौखिक रूप से निर्देश देकर उसका ट्रांसफर करवा देते थे। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मॉर्च्युरी में शाम को शराब की बोतलें लाई जाती थीं। कोई कुछ कहता था तो उसका तबादला कर दिया जाता था या धमकाया जाता था।

आर जी कर अस्पताल पर पहले भी लगा पोर्न शूट करने का आरोप

उल्लेखनीय है कि आर जी कर अस्पताल को लेकर ऐसे गंभीर आरोप पहली बार सामने नहीं हैं। संयोग से 23 साल पहले भी ऐसी खबरें इस अस्पताल को लेकर सामने आई थीं। 2001 में एक चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र सौमित्र बिस्वास की रहस्यमयी ढंग से मौत हुई थी। पुलिस ने उसे आत्महत्या करार दिया था। हालाँकि जब कानूनी लड़ाई लड़ी गई तो पता चला की छात्र की हत्या शव के साथ सेक्स करने वाले गिरोह का खुलासा करने के कारण की गई थी।

इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी की लेकिन कोई खुलासे नहीं हुए। माँ ने कहा कि बेटे की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उसे इन गतिविधियों के बारे में पता चल गया था। वहीं सहकर्मियों के अनुसार, सौमित्र को पता चल गया था कि हॉस्टल के एक से अधिक कमरों में अश्लील तस्वीरें और वीडियो शूट करने के काम होते हैं। वो इस संबंध में खुलासा करता उससे पहले ही उसे मार दिया गया।

शूटिंग के लिए हॉस्टल में वेश्याएँ बुलाई जाती थीं, जब कोई वेश्या नहीं मिलती थी तो अस्पताल के शवों के साथ ऐसा होता था। छात्रों के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों के बारे में सेमिनार रूम, हॉस्टल के कमरे सब इस्तेमाल होते थे। इस गिरोह ने सौमित्र की गर्लफ्रेंड की तस्वीर का भी इस्तेमाल किया था इसलिए उसने इनका विरोध किया। यही वजह थी कि उसे मौत के घाट उतार दिया गया।

अस्पताल में भर्ती थी 11 साल की बच्ची, चेकअप के बहाने चैंबर में ले जाकर डॉक्टर दिलशाद हुसैन ने की गंदी हरकत: चीखते हुए बाहर निकली, आगरा की घटना

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती 11 साल की बच्ची का एक जूनियर डॉक्टर ने यौन शोषण किया। आरोपित डॉक्टर दिलशाद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मेडिकल कॉलेज ने भी उसे सस्पेंड कर दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार डॉक्टर दिलशाद हुसैन पर बच्ची को इलाज के बहाने अपने चैंबर में ले जाकर गंदी हरकत करने का आरोप है। कथित तौर पर उसने बच्ची के कपड़ों में हाथ डालकर उसके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ फेरा और अश्लील हरकत की। बच्ची चीखते हुए उसके चैंबर से भागी और बाहर अपनी माँ से लिपट गई।

इसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। परिजनों के हंगामे के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने डॉक्टर दिलशाद हुसैन को सस्पेंड कर मामले की जाँच के लिए कमेटी का गठन किया है। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि थाना एमएम गेट पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना 10 सितंबर 2024 के रात की है। आगरा के शाहगंज क्षेत्र की पीड़ित बच्ची का बाल रोग विभाग में इलाज चल रहा था। 6 सितंबर को उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार होने के बाद 9 सितंबर को बाल रोग विभाग के जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। डॉक्टर दिलशाद हुसैन पर 10 सितंबर की देर रात चेकअप के बहाने उसका यौन शोषण करने का आरोप है।

आरोप है कि शुरुआत में इस मामले को दबाने की कोशिश की गई। पीड़ित परिवार को लालच दिए गए। हंगामे के बाद आरोपित डॉक्टर पुलिस के आने से पहले ही वार्ड से निकल गया। पीड़ित परिवार के साथ जब हिंदू संगठन के लोग खड़े हुए तो केस दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की गई।

जूनियर डॉक्टर दिलशाद हुसैन के खिलाफ दुराचार और पॉक्सो की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वह बरेली का रहने वाला है और पीजी प्रथम वर्ष का छात्र है। पीड़िता का मेडिकल करवाकर पुलिस कोर्ट में बयान दर्ज कराने वाली है।

पहले बच्चों का रेप करते, फिर दूसरों से रेप करना सिखाते; विरोध करने पर 5 साल के बच्चों को भी दाग देते… इस्लाम के नाम पर ट्रेनिंग

इस्लामी तालीम के नाम पर बच्चों के यौन शोषण की घटना आए दिन सामने आती रहती है। लेकिन मलेशिया पुलिस ने इस्लाम के नाम पर चलने वाले ऐसे चैरिटी होम्स का खुलासा किया है, जहाँ बच्चों का पहले यौन शोषण होता था, फिर पीड़ितों को दूसरे बच्चों से रेप की ट्रेनिंग दी जाती थी।

ऐसे 20 चैरिटी होम्स पर पुलिस ने छापा मारा है। 400 से अधिक बच्चों को मुक्त कराया है। इनमें 201 लड़के और इतनी ही लड़कियाँ हैं। मौलवियों समेत 171 को गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार इन चैरिटी होम्स में रहने वाले बच्चों के साथ पहले बलात्कार किया जाता था। फिर उन्हें दूसरों बच्चों से बलात्कार करना सिखाया जाता था। विरोध करने पर 5 साल की उम्र तक के बच्चों को भी गर्म चीजों से दाग दिया जाता था।

छापेमारी की कार्रवाई चैरिटी होम्स में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं की शिकायत मिलने की बाद की गई है। पोर्ट डिक्सन में चल रहे चैरिटी होम्स को लेकर यह शिकायत 2 सितंबर 2024 को मिली थी। इसके बाद 11 सितंबर को दो अलग-अलग राज्यों में चल रहे 20 इस्लामी चैरिटी होम्स पर छापेमारी कर 402 बच्चों को मुक्त कराया गया।

इन चैरिटी होम्स का संचालन ग्लोबल इखवान सर्विसेज एंड बिजनेस (GISB) नाम की कंपनी करती है। यह मलेशियाई कंपनी एक इस्लामी व्यापारिक समूह है और सुपर मार्केट के बिजनेस से जुड़ी है। कई देशों में इनका कारोबार फैला है। इस कंपनी का एक प्रतिबंधित मजहबी संगठन से भी जुड़ाव बताया जाता है। जिन बच्चों को छापेमारी के बाद बचाया गया है वे इसी कंपनी के कर्मचारियों के बताए जा रहे हैं। इन्हें जन्म के तुरंत बाद यहाँ भेज दिया गया था।

हालाँकि जीआईएसबी ने यौन शोषण की खबरों को खारिज किया है। कहा है कि कंपनी किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं है और वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पुलिस के साथ सहयोग करेगी। जीआईएसबी का संबंध जिस इस्लामी संगठन से बताया जाता है, उसका नाम अल-अरकम है। इसे 1994 में मलेशिया की सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था।

जीआईएसबी ने भी इस संगठन से रिश्ते कबूल किए हैं। लेकिन अब वह खुद को इस्लामी रवायतों पर आधारित एक इस्लामी समूह बताता है। यह कंपनी पिछली बार ‘ओबेडिएंट वाइव्स क्लब’ की स्थापना के बाद विवादों में आई थी। इस क्लब की स्थापना का मकसद बीवियों को अपने शौहर के लिए यौन गुलाम की तरह रहने के लिए प्रोत्साहित करना था।

मलेशिया के शीर्ष पुलिस अधिकारी रजारूद्दीन हुसैन ने बताया है कि बचाए गए बच्चों की उम्र 1 से 17 साल के बीच है। गिरफ्तार लोगों में 66 पुरुष और 105 औरतें हैं। इनकी उम्र 17 से 64 साल के बीच है। उन्होंने बताया कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध और मानव तस्करी के कानूनों के तहत मामले की जाँच की जा रही है। हुसैन के अनुसार बच्चों का इस्तेमाल सहानुभूति और धन जुटाने के लिए भी यह संगठन करती थी। हमने पाया है कि मजहब के नाम पर बच्चों को गलत तालीम दी जा रही थी।

रोटी पर थूका, फिर तंदूर में उसे सेंका: फतेहपुर के ‘अपना दस्तरखान’ ढाबे के कारीगर की वीडियो वायरल, पुलिस ने आरोपित को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक ढाबे के अंदर खाने-पीने की चीजों पर थूकने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में रोटी बना रहे एक व्यक्ति को खाने पर झुकते देखा जा सकता है। मंगलवार (10 सितंबर 2024) को मिली तहरीर के बाद पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला सहारनपुर जिले के थानाक्षेत्र फतेहपुर का है। 10 सितंबर को यहाँ नीतीश नाम के व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में नीतीश ने बताया है कि कस्बा छुटमलपुर में ‘अपना दस्तरखान’ नाम से एक ढाबा है। नीतीश का आरोप है कि इस होटल के एक कर्मचारी द्वारा खाना बनाते समय रोटियों पर थूका जा रहा है। नीतीश ने अपनी शिकायत का आधार सोशल मीडिया से प्राप्त वीडियो को बताया। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस हरकत से समाज में वैमनस्यता फ़ैल रही है और धार्मिक भावनाएँ आहत हो रहीं हैं।

शिकायत में नीतीश ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। सहारनपुर पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (1) के तहत दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक सबूतों को जुटाते हुए मामले की जाँच की जा रही है। जिस वायरल वीडियो का जिक्र शिकायतकर्ता ने किया है उसमें ढाबे के बाहर रोटियाँ बन रहीं हैं। इन रोटियों को लाल रंग का शर्ट पहने एक व्यक्ति बना रहा है। खाना बनाते हुए वह व्यक्ति बार-बार रोटियों की तरफ झुक रहा है। दिन का समय है और होटल पर काफी भीड़भाड़ दिख रही है।

लगभग 52 सेकेंड के इस वीडियो को सड़क के दूसरी तरफ खड़े होकर बनाया गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। इस वीडियो में दिख रही हरकत पर नेटीजेंस ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर भी रोटियों को बनाने वाले पर कार्रवाई की माँग की जा रही है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसने रोटियों पर थूककर उन्हें सेंकने की बात को स्वीकार किया है।