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पंजाब के गाँवों में UP-बिहार के श्रमिकों को प्रवेश की अनुमति नहीं, खुद जा रहे कनाडा या बन रहे ईसाई: एक ऐसी त्रासदी जिस पर कम होती है चर्चा

पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बढ़ता भेदभाव और स्थानीय लोगों द्वारा धर्मांतरण या विदेश जाने की होड़ एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल प्रवासी मजदूरों के जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि समाज में भी असंतुलन पैदा हो रहा है।

पंजाब में प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी मजदूरों को गाँवों में काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ, स्थानीय लोग ईसाई धर्म अपना रहे हैं या विदेशों, विशेषकर कनाडा में बसने का रास्ता तलाश रहे हैं। यह पंजाब की एक अनकही त्रासदी है, जिस पर बहुत कम लोग बात करना चाहते हैं।

प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बढ़ता भेदभाव

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने तीन साल पहले उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूरों को अपमानजनक अर्थ में “भैया” कहा था। हालाँकि तीखे विरोध के बाद उन्हें माफी माँगनी पड़ी। लेकिन लगाई आग अब पंजाब के अंदर धधकने लगी है। ऐसा ही एक मामला आया है मोहाली से, जहाँ एक गाँव से प्रवासी मजदूरों को भगाया जा रहाहै। यही नहीं, कई गाँवों में प्रवासी मजदूरों के लिए 11 ‘प्रतिबंधों’ वाले बोर्ड लगाए गए हैं।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के मोहाली जिले के साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर के अंतर्गत आने वाले जंदपुर गाँव में प्रवासी मजदूरों को घर किराए पर लेने की अनुमति नहीं है। गाँव में उनके लिए 11 तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें रात 9 बजे के बाद बाहर जाने पर प्रतिबंध, धूम्रपान और तंबाकू चबाने पर पाबंदी, और उनके कपड़ों को लेकर सख्त नियम शामिल हैं। गाँव के गुरुद्वारा कमेटी ने यह फैसला लिया कि प्रवासी मजदूर अब गाँवों में नहीं रह सकते।

मामले की शुरुआत और कानूनी दखल

इस साल अगस्त में मुंडो संगतियान गाँव से प्रवासी मजदूरों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। जब मजदूरों को काम से निकालकर गाँव से बाहर कर दिया गया, तो यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुँचा। वैभव वत्स नामक एक व्यक्ति ने प्रवासी मजदूरों को अवैध रूप से निकालने के खिलाफ याचिका दायर की, जिससे यह मामला कानूनी चर्चा में आ गया।

स्थानीय लोगों का क्या है कहना?

गाँव के लोग आरोप लगाते हैं कि प्रवासी मजदूर गांव में गंदगी फैलाते हैं और सड़कों पर अर्धनग्न होकर घूमते हैं, जिससे महिलाओं को असुविधा होती है। उनका यह भी कहना है कि प्रवासियों के आने से अपराध दर में वृद्धि हुई है। पंचायत सदस्य चरणजीत सिंह ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूर कई स्थानीय नाबालिग लड़कियों को भगाकर ले गए हैं।

प्रवासी मजदूरों की दिक्कतें

दूसरी तरफ, प्रवासी मजदूरों का कहना है कि वे अपनी मेहनत से पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्हें यहां सम्मान नहीं मिलता। मजदूरों को “भैया” कहकर अपमानित किया जाता है और उनके सांवले रंग के कारण उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। कई प्रवासी मजदूर अब पंजाब छोड़ने का मन बना चुके हैं क्योंकि उन्हें यहां असुरक्षित महसूस हो रहा है।

धर्मांतरण और विदेश जाने की होड़

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, जंदपुर गाँव में कई बैनर लगे हैं, जिनमें कनाडा, अमेरिका और पोलैंड जैसे देशों के वीज़ा की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम के ‘पैगंबर’ बजिंदर सिंह की प्रशंसा वाले बोर्ड भी लगे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि उनके आशीर्वाद से तुरंत वीज़ा मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक धर्मांतरण लॉबी काम कर रही है, जो युवाओं को ईसाई धर्म अपनाने और विदेश जाने के लिए प्रेरित करती है।

पुलिस की कार्रवाई और नए नियम

प्रवासी मजदूरों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें किराए पर जगह देने वाले मकान मालिकों को डस्टबिन उपलब्ध कराने होंगे और एक कमरे में दो से अधिक मजदूर नहीं रह सकते। मजदूरों पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल होने पर मकान मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

पंजाब में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बढ़ता भेदभाव और स्थानीय लोगों द्वारा धर्मांतरण या विदेश जाने की होड़ एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल प्रवासी मजदूरों के जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि समाज में भी असंतुलन पैदा हो रहा है। यह जरूरी है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और समाज के सभी वर्गों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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