Home Blog Page 680

सपा MLA जाहिद बेग के घर में पंखे से लटकी मिली नाबालिग लड़की, 7 साल से कर रही थी काम: UP के भदोही की घटना, पूछताछ में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के भदोही के समाजवादी पार्टी विधायक जाहिद बेग के घर से एक नाबालिग लड़की की लाश बरामद हुई है। नाजिया MLA जाहिद के यहाँ नौकरानी थी और पिछले 7 वर्षों से उनके घर पर काम करती थी। नाजिया की लाश विधायक जाहिद बेग के घर में एक कमरे से बरामद हुई है, वह फांसी पर लटकी हुई थी।

जानकारी के अनुसार, सोमवार (9 सितम्बर, 2024) को सुबह विधायक के परिवार को घर की दूसरी मंजिल पर नाजिया का शव पंखे से लटकता मिला। इसके बाद इस मामले में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने पहुँच कर शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

बताया गया कि नाजिया 17 साल की थी और विधायक के यहाँ पिछले 7 साल से काम कर रही थी। वह घर में नौकरानी थी। उसे ऊपर का स्टोर रूम रहने के लिए मिला हुआ था। जब वह सोमवार को काम करने के लिए नहीं आई तो दूसरी नौकरानी को उसे बुलाने भेजा गया। दूसरी नौकरानी ने पंखे से उसे लटकता पाया।

नाजिया के घर वाले दूसरी जगह पर कांशीराम आवास में रहते हैं। MLA जाहिद बेग के घरवालों ने बताया कि रविवार को नाजिया खानापीना खाने के बाद अपने कमरे में रात 10 बजे गई और इसके बाद ही यह घटना हो गई। मामले में अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इन्तजार किया जा रहा है।

पुलिस ने लोगों से पूछताछ के अलावा घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम को भेज कर सबूत भी इकट्ठा किए हैं। यह साफ़ नहीं हो सका है कि नाजिया की फांसी का कारण क्या था। पुलिस ने नाजिया के घरवालों से भी पूछताछ की। नाजिया के पिता इमरान ने बताया कि उन्होंने 7 महीने पहले नाजिया का फोन छीन लिया था। नाजिया इसके बाद नाराज थी।

पुलिस ने कमरे से नाजिया से उसका फोन भी जब्त किया है। इस मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचे हैं। पुलिस ने बताया कि सूचना के बाद टीम ने शव को कब्जे में लिया था, उसकी मौत के सभी बिन्दुओं पर जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि फांसी के कारणों का पता नहीं चला है।

इस माँ ने ‘बेटी बचाया भी-बेटी पढ़ाया भी’ पर अब नहीं मनाएगी दुर्गा पूजा, क्योंकि बंगाल में पहले उसकी बेटी के जिस्म को नोंचा फिर मार डाला

लिंग अनुपात में लगातार गिरावट को देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा तो काफी बाद में दिया, उससे पहले ही इस माँ ने बेटी को बचाया भी और उसे पढ़ाया भी। पढ़कर उसकी बेटी डॉक्टर बनी। लेकिन एक दिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक अस्पताल में ही उसकी बेटी का पहले रेप हुआ और फिर हत्या कर दी गई।

इस मामले में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी TMC सरकार और कोलकाता पुलिस के रवैए ने पीड़िता की माँ को घनघोर अंधकार में धकेल दिया है। उन्हें यह कहने को मजबूर कर दिया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनकी बेटी के लिए न्याय माँगने के आंदोलन का उसी तरह गला घोंटना चाहती हैं, जैसे उनकी बेटी का गला घोंट दिया गया था।

इस माँ की बेटी के साथ कोलकाता के आरजी कर मेडिकल अस्पताल में बर्बरता हुई। बेटी के शव के लिए घंटों इंतजार कराया गया। जल्दबाजी में अंतिम संस्कार के लिए दबाव डाला गया। कथित तौर पर कहा गया कि उनकी बेटी ने सुसाइड किया है। कोलकाता पुलिस ने तब ‘घूस’ देने की कोशिश की, जब घर में बेटी का शव पड़ा था।

अब इस माँ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘झूठी’ बताया है। उन्होंने कहा है, “मुख्यमंत्री झूठ बोल रही हैं। हमें पैसा ऑफर किया गया था। मेरी बेटी अब नहीं लौटेगी, क्या मैं उसके नाम पर झूठ बोलूँगी? मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपको मुआवजा मिलेगा और आप अपनी बेटी की याद में कुछ बनवा सकती हैं। मैंने तब कहा था कि जब मेरी बेटी को न्याय मिल जाएगा, मैं आपके दफ्तर आकर मुआवजा ले जाऊँगी।”

दरअसल, पिछले दिनों मृतक डॉक्टर के पिता ने कोलकाता पुलिस की ओर से रिश्वत की पेशकश का खुलासा किया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने इसे खारिज करते हुए पीड़ित परिवार से पैसों की पेशकश का सबूत देने को कहा था। मुख्यमंत्री ने इस मामले में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को खत्म कर, प्रदर्शनकारियों से आने वाले दुर्गापूजा की तैयारियों में जुटने की अपील भी की है।

मृतका की माँ ने इसे ‘अमानवीय’ बताते हुए कहा है, “यदि देश के लोग त्योहार मनाने के लिए जाना चाहते हैं तो वे जा सकते। लेकिन उन्होंने मेरी बेटी को अपने परिवार का सदस्य माना है। यदि वे त्योहार के लिए जाना चाहें तो मुझे कुछ नहीं कहना। मेरे घर में भी दुर्गा पूजा होती थी, मेरी बेटी खुद ही करती थी। लेकिन अब मेरे घर में कभी भी दुर्गा पूजा नहीं मनाई जाएगी। मेरे कमरे की लाइट बंद है। मैं लोगों से कैसे कहूँ कि वे त्योहार मनाने के लिए चले जाएँ?”

पीड़ित माँ का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री इस आंदोलन को दबाना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी उसी तरह आंदोलन का गला घोंटना चाहती हैं, जैसे मेरी बेटी का गला घोंटा गया। सबूत नष्ट कर दिए गए। न्याय मिलने तक हम सड़क पर ही रहेंगे।”

अब अजमेर में ट्रेन पलटाने की साजिश, पटरी पर मिले 70-70 किलो के सीमेंट ब्लॉक… कानपुर में रेल के डिब्बों को फूँकने का था प्लान, ट्रैक पर पेट्रोल का छिड़काव

देश में ट्रेनों को निशाना बनाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के बाद अब राजस्थान के अजमेर में एक ट्रेन को पलटाने की कोशिश की गई है। इसके लिए ट्रेन पटरी पर सीमेंट के ब्लॉक रखे गए। हालाँकि सावधानी के कारण हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, अजमेर के मांगलियावास इलाके से गुजरने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की पटरी पर रविवार (8 सितम्बर, 2024) की रात को दो सीमेंट के ब्लॉक रखे गए। यह दोंनो सीमेंट ब्लॉक 70 किलो वजनी थे। बताया गया कि यहाँ से गुजरने वाली एक मालगाड़ी इससे टकरा गई।

इस हादसे में कोई नुकसान नहीं हुआ। मालगाड़ी का इंजन सीमेंट ब्लॉक को तोड़ते हुए आगे निकला। इसके बाद DFCCIL के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी गई। जब कर्मचारी यहाँ जाँच के लिए पहुँचे तो उन्हें पटरी पर दो ब्लॉक मिले। पहला ब्लॉक मालगाड़ी से टकरा कर टूट गया था जबकि दूसरा ब्लॉक कुछ दूर पर रखा हुआ था।

DFCCIL के कर्मचारियों ने इस मामले में अजमेर के मांगलियावास थाने में FIR दर्ज करवाई है। पुलिस और रेलवे की टीम इस मामले की अब जाँच कर रहे हैं। राजस्थान में इससे पहले पाली में भी सीमेंट ब्लॉक रख कर ही ट्रेन पलटाने की साजिश रची गई थी। यहाँ लगातार दो दिन वन्दे भारत वाले रूट पर सीमेंट ब्लॉक रखे गए थे।

कानपुर में ट्रेन जलाने की थी साजिश

कानपुर में रेलवे पटरी पर सिलेंडर रख कर कालिंदी एक्सप्रेस को रविवार पलटाने की साजिश रची गई थी। इस मामले में अब नया खुलासा हुआ है। जाँच में पटरी के पास से कई और सामान मिले हैं, इनसे पता चला है कि यहाँ पूरी ट्रेन को जलाने की साजिश थी।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ रेल पटरी के पास जहाँ सिलेंडर मिला है वहीं पर एक कांच की बोतल भी मिली है। यह पटरी से सटा कर रखी गई थी, इसमें पेट्रोल भरा हुआ था। यहीं पर एक झोले में बारूद रखी गई थी। प्लान था की ट्रेन जब सिलेंडर से टकराएगी तो धमाका होगा और फिर पेट्रोल में आग लगेगी।

यह आग पीछे के डिब्बों तक फ़ैलाने के लिए पटरी पर पेट्रोल भी छिड़का गया था। यह आग तेज हो इसके लिए बारूद का इंतजाम भी था। कुल मिलाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारने की साजिश इस धमाके के जरिए की गई थी। इस मामले की जाँच अब ATS और IB के हाथों में है।

घटनास्थल पर ATS की टीम भी पहुँची है। बताया गया है कि इस घटना को 4-5 लोगों ने अंजाम दिया है। आसपास के गाँवों में भी जाँच चल रही है। इसके अलावा घटना स्थल से जिस मिठाई की दुकान का झोला मिला है, उसकी CCTV फुटेज भी निकलवाई गई है। यह कन्नौज की एक दुकान है। इसमें दो संदिग्ध दिखे हैं।

जाँच एजेंसियों की टीमें आसपास के इलाके में पड़ताल कर रही हैं। हालाँकि, अभी इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला है। ऐसे में और भी समस्या हो रही है। यह भी बताया गया है कि जहाँ सिलेंडर रखा गया, वहाँ आसपास कोई आबादी नहीं है और भागने के कई रास्ते हैं, ऐसे में साजिश करने वाले हाइवे से निकल गए होंगे।

कानपुर और अजमेर के अलावा अलीगढ़ में इससे पहले ट्रेन पलटाने की साजिश रची गई थी। यहाँ पटरी पर मोटरसाइकिल का पहिया रखा गया था। कानपुर में भी साबरमती एक्सप्रेस के रास्ते में लोहे का भारी टुकड़ा रखा गया था। इसके अलावा और भी कई हिस्सों में ऐसी ही साजिश सामने आई है।

यह घटनाएँ तब सामने आ रही हैं जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने भारत में स्लीपर सेल से ट्रेनों को निशाना बनाने को कहा है। गोरी ने कहा है कि भारत में ट्रेनों को प्रेशर कुकर बम और बाकी तरीकों से निशाना बनाया जाए। उसने बाकी इन्फ्रा को भी निशाने पर लेने की बात कही है।

जिस दिन अयोध्या में विराजमान हो रहे थे रामलला, उसी दिन उड़ने वाला था BJP का ऑफिस: NIA ने किया उस आतंकी साजिश का खुलासा जो रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट से पहले होना था

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट से पता चला है कि कैफे में ब्लास्ट करने वाले आतंकी भाजपा दफ्तर पर भी हमले का प्रयास कर चुके थे। यह हमला बेंगलुरु में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन होना था।

NIA ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी एक प्रेस रिलीज के जरिए दी है। NIA ने इस मामले में 4 लोगों को आरोपित बनाया है। इन आतंकियों के नाम मुस्सविर हुसैन शाजिब, अब्दुल मतीन अहमद ताहा, माज मुनीर अहमद और मुजम्मिल शरीफ हैं। NIA ने इनके ऊपर UAPA और IPC की कई धाराएँ लगाई हैं।

NIA ने बताया है कि शाजिब ने ही रामेश्वरम कैफे में बम रखा था वहीं अब्दुल ताहा ने उसकी सहायता की थी। यह दोनों कर्नाटक के ही शिवमोगा के रहने वाले हैं। यह दोनों 2020 में अल हिन्द मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद से फरार थे। इन दोनों को पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया था।

यह दोनों आतंकी फर्जी सिम, फर्जी खाते और नकली पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। यह इन्हें डार्क वेब से मिलती थी। इसके अलावा यह अपने आंतकी मिशन को अंजाम देने के लिए क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल करते थे। यह करेंसी इन्हें इनके हैंडलर देते थे।

दोनों इस क्रिप्टोकरेंसी को टेलीग्राम के जरिए सामान्य पैसे में बदलते थे और फिर इसके जरिए आतंकी साजिश को अंजाम देते थे। 1 मार्च, 2024 को रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट से पहले इन दोनों ने 22 जनवरी, 2024 को बेंगलुरु के भाजपा कार्यालय को उड़ाने की साजिश भी रची थी।

इन दोनों का प्लान था कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन भाजपा कार्यालय को उड़ा दिया जाए। यह काम एक IED हमले से होने था। हालाँकि, दोनों इसमें कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद इन्होने रामेश्वरम कैफे पर हमले की प्लानिंग की और यहाँ बम ब्लास्ट किया।

NIA ने बताया कि यह दोंनो इस्लामी आतंकी संतन ISIS के सदस्य हैं और यह सीरिया भी जाना चाहते थे। यह दोनों कई मुस्लिमों को आतंकी संगठन में भर्ती करने का काम कर रहे थे। इनके अलावा जो 2 मुस्लिम युवक इस मामले में आरोपित हैं, उन्हें इन दोनों ने ही आतंक में शामिल किया था।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के प्रसिद्ध रामेश्वरम कैफे में एक बम धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हो गए थे। इस मामले की जाँच कुछ समय बाद NIA के पास आ गई थी। NIA ने इसकी कड़ियाँ जोड़ते हुए हमलावरों को पहचनाने में सफलता हासिल की थी।

NIA की यह तलाश कई दिन तक जारी रही थी। इसके बाद 12 अप्रैल, 2024 को पश्चिम बंगाल के दीघा से पकड़ा था। यहाँ दोनों फर्जी पहचान के आधार पर रह रहे थे। इससे पहले यह फर्जी पहचान के लिए हिन्दू नामों तक का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हें गिरफ्तार करने के बाद एजेंसी ने पूरे मामले का खुलासा किया था और अब चार्जशीट दाखिल की है।

टैक्सी चलाने नेपाल गया अमजद, ‘अजय’ बन कर हिन्दू लड़की को उठा लाया: रेप के लिए भाई चंगेज को सौंपा, मौलाना ने अरबी में कुछ पढ़ कर बना दिया मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक नेपाली लड़की से ‘लव जिहाद’ की घटना सामने आई है। यहाँ नेपाल के धनघड़ी जिले की रहने वाली हिन्दू लड़की ने अमजद खाँ पर नाम बदल कर खुद से निकाह करने और बाद में प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। अमजद के साथ उसकी अम्मी और भाई सहित कुल 5 लोग नामजद किए गए हैं। सोमवार (9 सितंबर, 2024) को दर्ज इस FIR में चंगेज खाँ भी नामजद है। चंगेज खाँ वही युवक है जिसने इसी माह हिन्दू महिला से छेड़खानी के मुद्दे पर भारतीय ‘बजरंग दल’ से विवाद किया था।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। यहाँ 9 सितंबर (सोमवार) को नेपाल के धनघड़ी की रहने वाली एक हिन्दू महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि साल 2013 में वह नेपाल के ही धनघड़ी में जॉब करती थी। तब पीलीभीत का अमजद टैक्सी चलाया करता था और अक्सर गाड़ी ले कर नेपाल आता-जाता रहता था। यही अमजद पीड़िता से पहली बार मिला जिसने अपना नाम अजय बताया। अमजद ने पीड़िता से मोबाइल नंबर शेयर कर लिया और धीरे-धीरे उसे अपने प्यार के जाल में फँसा लिया।

कुछ दिनों की बातचीत के बाद अमजद ने पीड़िता को भारत में बेहतर नौकरी दिलाने का वादा किया और अपने साथ ले आया। भारत में उसने पीड़िता को पीलीभीत के ही कलीमनगर इलाके में अपने जीजा वाहिद खान के यहाँ रखा। यहाँ आरोपित पीड़िता से निकाह का दबाव बना कर छेड़खानी करने लगा। पीड़िता के विरोध के बाद वह पीछे हटा। इसी रात जब पीड़िता सो रही थी तब अजय अचानक उसके बिस्तर पर आ गया। उसने पीड़िता के मुँह पर तमंचा सटा दिया और रेप किया। रेप के बाद उसने कहीं भी बताने पर पीड़िता को मार डालने की धमकी दी।

जब पीड़िता ने इसकी शिकायत अमजद की बहन से की तो उसने हँस कर जवाब दिया, “तुम हो ही इतनी सुंदर। वो बेचारा खुद को कहाँ तक रोके ?” इसके बाद अजय ने पीड़िता से कई बार बलात्कार किया। पीड़िता जब खुद को नेपाल भेजने की बात करती थी तो उसको मार डालने की धमकी मिलती थी। भारत में कोई सहारा न होने की वजह से पीड़िता सब कुछ सहन करती रही। कुछ दिनों तक अपने जीजा के यहाँ रखने के बाद अमजद पीड़िता को पीलीभीत के बीसलपुर स्थित अपनी खाला के घर ले गया।

यहाँ अमजद की अम्मी कैसर जहाँ और बहन सोनम पीड़िता से मिलने आए। इनको अमजद का भाई नफीस अपने साथ लाया था। यहाँ इन सबने मिल कर पीड़िता को 2 ऑप्शन दिए। पहला अमजद से निकाह करना या दूसरा मौत को गले लगाना। पीड़िता से यह भी कहा गया कि वो निकाह के बाद हिंदू तौर तरीकों से जी सकती है। अब तक पीड़िता को पता चल गया था कि अमजद हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम है। कोई विकल्प न होने की वजह से पीड़िता ने अपनी जान बचाने के लिए निकाह की हामी भर दी।

शिकायत में आगे बताया गया है कि निकाह के दौरान पीड़िता को बिना पढ़ने का मौक़ा दिए कई कागजातों पर दस्तखत करवाए गए। कोर्ट मैरिज के बाद अमजद पीड़िता को फिर से अपने जीजा के घर कलीमनगर ले गया। यहाँ रात को पीड़िता के कमरे में अमजद के बजाय लगभग 35 वर्षीय एक युवक घुसा जो कोर्ट मैरिज के दौरान लगातार मौजूद था। पीड़िता चिल्लाने लगी तो लोग बाहर से आए। उन्होंने बताया कि 35 वर्षीय युवक का नाम फ़िरोज़ खान है। तब पीड़िता को पता चला कि अमजद के बदले धोखे से उसका निकाह फ़िरोज़ से करवा दिया गया है।

यहीं पर पीड़िता को पता चला कि फ़िरोज़ अमजद का बड़ा भाई है। 4 बच्चों के अब्बा फ़िरोज़ की पहली बीवी मर चुकी है। यह सुन कर पीड़िता बहुत रोई पर उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। कुछ दिनों के बाद फ़िरोज़ पीड़िता को ले कर बरेली गया। बरेली में कुछ मौलाना भी आए थे। इन मौलानाओं ने पीड़िता का नाम पूछ कर अरबी भाषा में कुछ कहा। यहीं पर पीड़िता को बताया गया कि उसे इस्लाम कबूल करवा के उसका नाम महरून निशा कर दिया गया है। पीड़िता को गाय का मांस आदि खाने के लिए कहा गया।

बकौल पीड़िता, जब उसने इन बातों का विरोध किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। पीटने वालों में फ़िरोज़ का मामला रंगीला भी शामिल था। पीड़िता ने तमाम यातनाओं को सहते हुए 2 बच्चों को जन्म दिया। इस बीच नशे का आदी फ़िरोज़ उसे लगातार मारता-पीटता रहा। मौक़ा देख कर फ़िरोज़ के भाई चंगेज खाँ और अमजद भी पीड़िता से बलात्कार करते रहे। चंगेज खान तो पीड़िता को नहाते हुए बाथरूम में भी झाँका करता था। आरोप है कि वह आए दिन नाबालिग उम्र की हिन्दू और सिख लड़कियों को घर भी लाता था।

शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि आए दिन कई मौलाना चंगेज से मिलने आते थे। वो उसके लिए कोई न कोई नया गिफ्ट ले कर आया करते थे। कुछ दिनों के बाद पीड़िता के जमा किए गए पैसों पर चंगेज और उसके अन्य परिजनों ने कब्ज़ा कर लिया। साल 2022 में पीड़िता पर चंगेज और उसके भाई अमजद ने तलवार से हमला किया। जैसे-तैसे इस हमले से पीड़िता ने खुद को बचाया और नेपाल चली गई। अब पीड़िता ने आरोपितों को सजा दिलाने का मन बनाया और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने इस मामले में चंगेज खान, अमजद खान, फ़िरोज़ खान, रंगीला और चंगेज की अम्मी को नामजद करते हुए केस दर्ज कर लिया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 352, 351 (3), 115 (2), और 76 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। भारतीय बजरंग दल ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई की माँग की है।

नाबालिग लड़की को जीप में बिठाया, यूपी से लेकर उत्तराखंड तक किया बलात्कार: कॉन्ग्रेस समर्थक साजिद पाशा का अस्पताल सील, इनाम भी घोषित

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक नाबालिग लड़की से अपहरण और रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप साजिद पाशा और मुदस्सिर पर लगा है जो जिले के एक नामी अस्पताल का संचालक है। शुक्रवार (31 अगस्त, 2024) पीड़िता का अपहरण कोचिंग कराने के बहाने किया गया था। 5 दिनों बाद लड़की को थार गाड़ी से बरामद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में मुदस्सिर को गिरफ्तार कर लिया है जबकि फरार साजिद पर 25 हजार का इनामी घोषित किया गया है। साजिद पाशा के अस्पताल को सील कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना रामपुर के स्वार थाना क्षेत्र की है। यहाँ का रहने वाला साजिद पाशा ग्रीन सिटी नाम का अस्पताल चलाता है। साजिद पर आरोप है कि उसने 31 अगस्त को कक्षा 11 की एक नाबालिग छात्रा को कोचिंग के बहाने अपने पास बुलवाया था। यहाँ उसने थोड़ी दूर पर और छात्राएँ होने का झाँसा दे कर पीड़िता को विश्वास में लिया और अपनी थार गाड़ी में बिठा लिया। हालाँकि, आगे कोई भी छात्रा नहीं थी और आरोपित ने पीड़िता का अपहरण कर लिया।

बताया जा रहा है कि साजिद पाशा यहाँ से पीड़िता को अपने साथ ले कर उत्तराखंड के रामनगर स्थित एक रिजॉर्ट ने ले गया था। यहाँ बंधक बना कर पीड़िता से 3 दिनों तक रेप किया। इसके बाद पीड़िता को हल्द्वानी और रुद्रपुर ले जा कर बलात्कार किया गया। पीड़िता के मुताबिक उसे रिवाल्वर दिखा कर चुप रहने के लिए धमकाया जाता था। होटल और रिसॉर्ट के कमरे फर्जी पहचान पत्र पर बुक किए जाते थे। साजिद के पास पुलिस की फर्जी ID होने की भी बात सामने आ रही है।

लगातार 5 दिनों तक बलात्कार करने के बाद साजिद पीड़िता को रामपुर ले आया। पुलिस का बढ़ता दबाव देखते हुए साजिद ने पीड़िता को अपने पार्टनर मुदस्सिर सौंप दिया और खुद फरार हो गया। पुलिस ने पीड़िता को मुदस्सिर की गाड़ी से बरामद कर लिया। मुदस्सिर को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। गिरफ्तारी के समय मुदस्सिर पीड़िता को बरेली ले कर जा रहा था। जैसे-तैसे पीड़िता अपने पिता को लोकेशन भेजने में सफल रही।

बरामदगी के बाद पीड़िता ने अपने साथ हुए अत्याचार के बारे में पुलिस को बताया। पीड़िता के पिता ने योगी आदित्यनाथ से फरार चल रहे साजिद पाशा पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने साजिद को खनन माफिया बताया जिसके साथ प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी चलते हैं। अस्पताल के साथ उसका प्रॉपर्टी डीलिंग का भी धंधा है। साजिद 2 बीवियों का शौहर है। उसकी एक बीवी पिछला विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी है।

सोशल मीडिया पर साजिद पाशा खुद को कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थक बताता है। साजिद पाशा के अस्पताल को सील कर दिया गया है। रामपुर के पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्रा ने बताया कि एक आरोपित को गिरफ्तार कर के फरार चल रहे दूसरे की तलाश जारी है। साजिद पर 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया गया है।

जिस हिन्दू की भरी अदालत में उखाड़ ली गई थी शिखा, उसका मोहिनी तोमर ने दिया था साथ: हैदर-सलमान को जाना पड़ा था जेल, अब हो गई महिला वकील की हत्या

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में रविवार (3 सितंबर, 2024) को मोहिनी तोमर नाम की महिला वकील की हत्या कर दी गई है। संदिग्ध हालातों में उनकी लाश एक नहर से बरामद हुई है। महिला वकील के पति ने पुलिस में FIR दर्ज कर के मुस्तफा कामिल, असद मुस्तफा, हैदर मुस्तफा, सलमान, मुनाजिर रफी के साथ केशव मिश्रा को नामजद आरोपित बनाया है। इन सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। FIR में हत्या के कारणों में एक यह भी बताया गया है कि मोहिनी तोमर ने वकील मुस्तफा कामिल के बेटों की जमानत अर्जी का विरोध किया था। ऑपइंडिया ने इन आरोपों की जमीनी पड़ताल की।

जमानत विरोध पर मिली थी अंजाम भुगतने की धमकी

गुरुवार (5 सितंबर, 2024) को दर्ज अपनी FIR में मोहिनी तोमर के पति ब्रजतेंद्र सिंह ने बताया है कि हत्या से 20-25 दिन पहले उनकी पत्नी काफी परेशान रहती थी। जब ब्रजतेंद्र सिंह इसकी वजह पूछी तो मोहिनी तोमर ने बताया कि उन्होंने मुस्तफा कामिल के बेटों की जमानत का विरोध किया था। इसी वजह से आरोपितों द्वारा पीड़िता को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी जा रहीं थीं। तब पीड़िता ने अपने पति से आशंका जताई थी कि उनके साथ कभी भी कोई गंभीर घटना घट सकती है।

हिन्दू युवक को बेरहमी से पीटा था कोर्ट में

जिस मामले में मोहिनी तोमर को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी जा रहीं थी वो घटना मंगलवार (30 जुलाई, 2024) की है। तब कोतवाली नगर में शिवशंकर नाम के एक युवक ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में शिवशंकर ने बताया था कि 30 जुलाई को वो कुछ काम से कासगंज की जिला अदालत गए थे। तभी वकील कामिल मुस्तफा के 2 बेटे हैदर और सलमान वहाँ आ धमके। इनके साथ वकीलों की ड्रेस में 10-15 लोग और थे। इन सभी ने मिल कर शिव शंकर को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी।

जब शिव शंकर ने इसका विरोध किया तो हैदर और सलमान ने साथ आए साथियों सहित उनकी पिटाई शुरू कर दी। ये सभी हमलावर पीड़ित को पीटते हुए CJM कोर्ट तक ले गए। इस पिटाई से शिव शंकर की टी शर्ट फट गई। सीने और गर्दन पर कई वार किए जाने से शिवशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि अगर अदालत में मौजूद पुलिसकर्मी न पहुँचते तो कामिल मुस्तफा के दोनों बेटे अपने साथियों के साथ मिल कर उनकी हत्या कर देते। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

नोच ली थी शिवशंकर की शिखा भी

पीड़ित ने अपनी शिकायत में आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की थी। ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने शिवशंकर की शिखा तक नोच डाली थी और उन्हें सार्वजनिक तौर पर बुरी तरह से अपमानित भी किया था। तब पुलिस ने इस शिकायत पर हैदर, सलमान को नामजद करते हुए 10-15 अज्ञात अधिवक्ताओं पर FIR दर्ज कर ली थी। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 115 (2), 352 और 351 (3) के तहत केस दर्ज कर लिया था।

मोहिनी तोमर ने उठाया था शिव शंकर को न्याय दिलाने का बीड़ा

ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, शिवशंकर को पीटने के बाद आरोपित निश्चिन्त थे कि उनके खिलाफ कोर्ट में कोई वकील खड़ा नहीं होगा। इस बाबत अदालत में दबदबा रखने वाला सीनियर एडवोकेट कामिल मुस्तफा ने अपने दोनों नामजद बेटों को बचाने के प्रयास भी शुरू कर दिए थे। तब महिला वकील मोहिनी तोमर ने खुल कर शिवशंकर का साथ दिया था। बताया जाता है कि मोहिनी के प्रयास कामिल मुस्तफा के दाँव-पेंच पर भारी पड़े थे।

शिवशंकर की पिटाई के बाद कासगंज कोतवाली में 31 जुलाई 2024 को दर्ज FIR नंबर 507/2024 में तब एडवोकेट कामिल मुस्तफा के बेटे सलमान और हैदर को जेल जाना पड़ा था। जिला अदालत में इन दोनों आरोपितों की जमानत का विरोध वकील मोहिनी तोमर ने किया था। मोहिनी के पति का आरोप है कि इसी वजह से न सिर्फ कामिल मुस्तफा बल्कि उनके बेटे भी अंदर ही अंदर खुन्नस खा रहे थे।

फ़िलहाल महिला अधिवक्ता की हत्या के आरोप में कासगंज पुलिस ने मुस्ताफा कामिल, उनके बेटे हैदर मुस्तफा, असद मुस्तफा और सलमान मुस्तफा सहित सभी 6 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। कासगंज की पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के मुताबिक मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

तकनीकी खराबी बता कर कपिल सिब्बल ने सौंपी सिर्फ 27 मिनट की वीडियो फुटेज, CBI ने पूछा – हमसे क्यों छिपा रहे? RG Kar पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश – सुनिश्चित करें डॉक्टरों की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (9 सितंबर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की घटना पर सुनवाई हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने इस दौरान प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को काम पर वापस लौटने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंगलवार शाम 5 बजे तक अगर वो काम पर लौट जाते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। पश्चिम बंगाल सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया कि ट्रांसफर वगैरह जैसी कोई कार्रवाई इस स्थिति में नहीं की जाएगी।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने TMC सरकार को निर्देश दिया कि अस्पतालों में कामकाज के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल तैयार किया जाए। निर्देश दिया गया कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए जाएँ, ताकि उनके मन में आत्मविश्वास का संचार हो। अलग ड्यूटी रूम, स्वच्छ शौचालय और CCTV कैमरे लगाने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से भी सुरक्षा की व्यवस्था करने को कहा। इस दौरान मुख्य सचिव ने बताया कि RG Kar सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में सुविधाएँ दिए जाने के लिए फंड्स जारी कर दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने इस दौरान डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि हड़ताल की वजह से 23 मरीजों की मौत हुई है और 6 लाख मरीजों को इलाज से वंचित होना पड़ा है। राज्य सरकार की दलील थी कि इस हड़ताल की वजह से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों को धमकियाँ मिल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों से कहा कि वो काम पर लौटें, हर जिले के डीएम-एसपी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ ने कहा कि विरोध ड्यूटी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बलात्कार-हत्या के मामले का स्वतः संज्ञान लेने के बाद सुनवाई कर रही है। कपिल सिब्बल का कहना है कि CCTV फुटेज में कुछ खराबी थी, इस कारण मात्र 27 मिनट का क्लिप ही सुप्रीम कोर्ट को दिया गया। इस दौरान CBI के वकील ने कहा कि उनसे फुटेज क्यों छिपाई जा रही है? कपिल सिब्बल ने सील किए गए लिफाफे में इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया, इस पर CBI भड़क गई।

10 साल में हिंदू बढ़े 12%, मुस्लिम बढ़ गए 25%… ऐसे ही नहीं अवैध मस्जिद-मदरसों से उबला हिमाचल प्रदेश, लव-लैंड जिहाद से भी हो रहा डेमोग्राफी चेंज

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अवैध रूप से बनाई गई संजौली मस्जिद को तोड़ने की माँग इन दिनों जोर पकड़ रही है। प्रदेश के हिन्दू सड़कों पर उतरे हुए हैं और राज्य में बन रहे अवैध ढांचों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनकी इस माँग का समर्थन कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी किया है। हिमाचल प्रदेश में अब डेमोग्राफी में बदलाव का खतरा भी स्थानीय लोगों को लगने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में तेजी से अवैध घुसपैठ हो रही है।

हिमाचल प्रदेश में डेमोग्राफी में बदलाव के साथ ही मस्जिद-मदरसों की संख्या में भी बढ़त देखी गई है। कई जगह इनका निर्माण अवैध रूप से हुआ है। प्रादेशिक स्तर पर हिन्दू हितों के लिए काम करने वालों का कहना है कि इस पूरे खेल में राज्य का वक्फ बोर्ड भी शामिल है। उनका कहना है कि राज्य में डेमोग्राफी बदलाव की कोशिशों में तेजी पिछले 3-4 साल से तेजी आई है।

10 साल में 25% बढ़ी मुस्लिम आबादी

हिमाचल प्रदेश हिन्दू बहुसंख्यक आबादी वाला राज्य है। यहाँ 90% से अधिक जनसंख्या हिन्दू धर्म को मानने वालों की है। लेकिन हिन्दू आबादी की वृद्धि दर राज्य की मुस्लिम आबादी से कहीं कम है। हिमाचल प्रदेश की जनगणना के आँकड़े से पता चलता है कि वर्ष 2001 से 2011 के बीच राज्य में मुस्लिम आबादी 25% की गति से बढ़ी। हिमाचल प्रदेश की मुस्लिम आबादी 2001 में 1.19 लाख थी। यह 2011 में बढ़ कर 1.49 लाख पहुँच गई। इसमें इस दौरान 25.6% की वृद्धि हुई। वहीं इस दौरान हिन्दू आबादी की वृद्धि दर केवल 12% रही।

यदि इसी वृद्धि दर को ही माना जाए तो इस समय हिमाचल प्रदेश में मुस्लिम आबादी लगभग 1.9 लाख हो गई होगी। इस संख्या में वह लोग शामिल नहीं हैं जो बाहर से आकर हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं या फिर जनसंख्या में गिने नहीं गए। हिन्दू जागरण मंच (HJM) के महामंत्री कमल गौतम का कहना है कि राज्य कुछ वर्षों पहले जिन इलाकों में 100 बाहरी मुस्लिम रह रहे थे वहाँ अब उनकी संख्या बढ़ कर चार गुनी हो गई है। उन्होंने डेमोग्राफी में बदलाव को बड़ी चिंता बताया है।

मस्जिद-मदरसों की संख्या तेजी से बढ़ी

हिमाचल प्रदेश में मात्र मुस्लिम आबादी और बाहरी घुसपैठ ही एक समस्या नहीं है। राज्य में मस्जिद-मदरसे भी तेजी से बढ़े हैं। हिन्दू जागरण मंच ने एक रिपोर्ट में बताया है कि राज्य कोरोना काल से पहले 393 मस्जिदें थी। लेकिन कोरोना के बाद इनकी संख्या 520 हो गई। बताया गया कि सिरमौर जिले में सबसे अधिक 130 मस्जिदें बन गई हैं। इसके अलावा चंबा में 87 और ऊना में 52 मस्जिदें हैं। प्रदेश में मदरसों की संख्या भी 35 है।

हिन्दू जागरण मंच का आरोप है कि उन जगह पर मस्जिदें बनाई जा रही हैं जहाँ कोई भी मुस्लिम नहीं रहता। इसके अलावा उनका निर्माण भी अनुमति के हो रहा है। संजौली की मस्जिद को लेकर हुआ विवाद इसी कारण है। यह मस्जिद असल में काफी छोटी थी और यहाँ मात्र दो मंजिल थी। लेकिन बिना अनुमति के यहाँ भी पाँच मंजिल मस्जिद खड़ी कर दी गई। यहाँ नगर निगम की नोटिस के बाद भी काम नहीं रोका गया। इसी तरह शिमला के कसुम्पटी में भी चोरी छुपे मस्जिद का निर्माण चल रहा था।

सिर्फ शिमला ही नहीं बल्कि मंडी में भी अवैध मस्जिद के निर्माण की बात सामने आई है। मंडी में PWD की जमीन पर मस्जिद का ढाँचा खड़ा कर दिया गया। यहाँ भी बिना नक्शा बनवाए ही काम किया गया।

हिन्दू जागरण मंच का कहना है कि पहले किसी व्यक्ति की जमीन खरीदी जाती है और उस पर एक ढाँचा खड़ा किया जाता है, इसके बाद आसपास की जमीन कब्जा ली जाती है। हिन्दू जागरण मंच ने यह भी बताया कि मस्जिदों को बाहर तिरपाल और टेंट से घेर कर अंदर चुपके से काम होता रहता है। मंडी में 2023 में एक अस्थायी मस्जिद को गिराया भी गया था।

अपराध भी बढ़ रहा

हिमाचल प्रदेश देश के सबसे शांत राज्यों में एक है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहाँ भी ऐसे अपराध सामने आए हैं जिनमें बाहर से आने वाले मुस्लिम शामिल रहे हैं। हाल ही में बकरीद के दौरान सोलन में दुकान करने वाले जावेद नाम के एक युवक ने अपने स्टेटस पर कथित तौर पर गोकशी का फोटो लगाया। इसके बाद माहौल बिगड़ गया। यह युवक उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। इससे पहले वर्ष 2023 में चंबा में मनोहर नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई।

मनोहर का अपराध इतना था कि वह एक मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था। उसकी लाश के तक टुकड़े टुकड़े कर दिए गए। यह मुद्दा हिमाचल में लम्बे समय तक छाया रहा। हिन्दू जागरण मंच का आरोप है कि इस मामले में ढिलाई बरती गई। इससे पहले 2022 में एक हिन्दू नाबालिग बच्ची प्राची की हत्या एक आसिफ नाम के एक युवक ने कर दी थी। आसिफ इस घर में अखबार बाँटने जाता था। इसके अलावा बाहर से आने वाले लोग यहाँ चेन स्नेंचिंग जैसे छोटे-मोटे अपराधों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

राज्य में घुसपैठ

लव जिहाद के मामले भी आए सामने

हिमाचल प्रदेश में लव जिहाद के मामले भी सामने आने लगे हैं। सितम्बर, 2023 में हिमाचल प्रदेश के मंडी से एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया था। मंडी में जम्मू कश्मीर के एक युवक ने खुद को सेना का जवान बताया और अपना नाम सोनू बताया। वह जिस किराए के घर में रहता था, वहीं की रहने वाली एक लड़की को उसने अपनी हिन्दू पहचान बता कर फंसा लिया और फिर उसको अगवा करके जम्मू लेकर चला गया। लड़की को बाद में पता चला कि सोनू असल में अयाज है। इसके बाद लड़की किसी तरह वापस अपने घर पहुँच सकी।

उसने वापस आकर अपनी आपबीती बताई। अगस्त, 2023 में ही हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से एक लड़की को एक युवक भगा कर राजस्थान लेकर गया। हरनोटा गाँव के लोगों ने बताया था कि इस वारदात में मुस्लिम युवक शामिल था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उनके इलाके में मुस्लिम युवक लगातार ऐसी ही वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

क्या चंदन गुप्ता की वकील थीं मोहिनी तोमर, क्या मुनाजिर की जमानत का विरोध करने पर हुई हत्या? तिरंगा यात्रा में जिस हिंदू को मार डाला, उनके भाई ने दिया हर सवाल का जवाब

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में मंगलवार (3 सितंबर 2024) को एक महिला वकील मोहिनी तोमर की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का आरोप एडवोकेट मुस्तफा कामिल, असद, हैदर, सलमान, मुनाजिर और केशव मिश्रा पर लगा था। अब तक इस मामले में 4 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं जबकि 2 अन्य फरार हैं।

आरोपितों में से एक नाम ‘मुनाजिर रफी’ का भी है। साल 2018 में ये मुनाजिर चंदन गुप्ता हत्याकांड में भी आरोपित था। उस समय उसकी बेल याचिका का विरोध मोहिनी तोमर ने किया था। अब चूँकि उसी मुनाजिर का नाम मोहिनी तोमर हत्याकांड में आया है इसलिए हमने इस संबंध में चंदन गुप्ता के परिजनों से बात करते हुए जमीनी पड़ताल की और जाना कि आखिर मुनाजिर का कैसे चंदन गुप्ता केस में संबंध था और कैसे मोहिनी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

मोहिनी तोमर के पति ने अपनी FIR में आरोप लगाया है कि मृतका ने साल 2018 के चंदन गुप्ता हत्याकांड में आरोपित मुनाजिर की जमानत का विरोध किया था। इस बावत चंदन गुप्ता के भाई विवेक ने बताया कि मोहिनी तोमर ने उनके भाई का केस लड़ने के लिए वकालतनाम लगाया था। हालाँकि मुकदमे को किसी और वकील ने लड़ा था। जब कासगंज कोर्ट में मुनाजिर की जमानत अर्जी पर बहस चल रही थी तब चंदन गुप्ता की तरफ से कई हिन्दू वकील खड़े हो गए थे। मुनाजिर का विरोध करने वाले इन वकीलों में मोहिनी तोमर भी शामिल थीं।

विवेक गुप्ता का कहना है कि मोहिनी तोमर सहित कई वकीलों के विरोध और पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों की ही वजह से तब मुनाजिर की जम्मानत अर्जी ख़ारिज हो गई थी। हालाँकि असद और कामिल जैसे तमाम मुस्लिम वकीलों ने मुनाजिर को जमानत दिलाने की हर सम्भव कोशिश की थी। 4 से 5 महीने जेल काटने के बाद मुनाजिर को हाईकोर्ट से जमानत मिल पाई थी। इसी बीच केस का ट्रायल लखनऊ की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया।

मुनाजिर को जेल भिजवाने में मोहिनी का था अहम रोल

विवेक ने हमें आगे बताया कि जब चंदन गुप्ता की हत्या में मुनाजिर रफी का नाम सामने आया था तब कचेहरी में वकीलों के 2 गुट बन गए थे। पहले गुट में अधिकतर मुस्लिम वकील थे जो मुनाजिर की नामजदगी को गलत बता रहे थे। वो प्रशासन पर इस नाम को हटाने का प्रयास भी कर रहे थे। कामिल और असद मुस्तफा भी इस गुट के सदस्य थे। वहीं दूसरा गुट हिन्दू वकीलों का था जो चाहता था कि मुनाजिर पर नियमानुसार एक्शन हो। हिन्दू गुट के वकीलों में मोहिनी तोमर प्रमुख थीं। आखिरकार जीत हिन्दू पक्ष के वकीलों की हुई और मुनाजिर को जेल भेज दिया गया।

भाई सहित मुनाजिर पर भी हिंसक भीड़ में शामिल होने का आरोप

मोहिनी तोमर के कत्ल वाली FIR में नामजद मुनाजिर रफ़ी पेशे से वकील है। वह कासगंज की कोर्ट में वकालत करता है। आरोप है कि 26 जनवरी 2018 को चंदन गुप्ता को जिस भीड़ ने घेर कर मारा था उसमें मुनाजिर अपने भाई आमिर रफी के साथ शामिल था। चंदन गुप्ता के भाई विवेक ने ऑपइंडिया को बताया कि मुनाजिर का नाम जाँच के दौरान आया था। वह न सिर्फ तिरंगा यात्रा को रोकने बल्कि जानलेवा हमला करने वाली भीड़ में भी शामिल था। दावा किया गया कि तब मुनाजिर रफ़ी के हाथों में हथियार भी देखे गए थे।

मुनाजिर की पैरवी कर रहे थे कामिल और असद

मोहिनी हत्याकांड में वकील मुनाजिर के साथ उसी के पेशे वाले कामिल और असद नामजद किए गए हैं। विवेक गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि इन तीनों में आपस में गहरा रिश्ता है। रिश्ते की जड़ में मुनाजिर, कामिल और असद का वकील और हम-मज़हब (मुस्लिम) होना बताया गया। विवेक गुप्ता का दावा है कि जब उनके भाई चंदन की हत्या के बाद मोहिनी तोमर सहित कई अन्य हिन्दू वकील मुनाजिर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे तो असद और कामिल विरोधी खेमे में खड़े थे।

विवेक का दावा है कि चंदन हत्याकांड में मुनाजिर का नाम आने के बाद उसके समर्थन में मुस्लिम वकीलों की लॉबी खड़ी करने में असद और कामिल का बहुत बड़ा रोल था। इतना ही नहीं, मुनाजिर को गिरफ्तारी से न बचा पाने एक बाद असद और कामिल उसकी पैरवी करने लखनऊ तक गए थे। बकौल विवेक गुप्ता असद और कामिल ने चंदन हत्याकांड में न सिर्फ वकील मुनाजिर की मदद की थी बल्कि अन्य कातिलों को भी मुस्लिम होने के नाते भरपूर सहयोग किया था।

हर पीड़ित हिन्दू की यथाशक्ति मदद करती थीं मोहिनी

विवेक गुप्ता ने हमसे बातचीत के दौरान खुल कर स्वीकार किया कि उनके भाई की हत्या के बाद मोहिनी तोमर लगातार उनके परिवार की मदद कर रहीं थीं। विवेक ने यह भी बताया कि मोहिनी तोमर सिर्फ उनकी नहीं बल्कि कहीं भी मुस्लिमों द्वारा प्रताड़ित हिन्दुओं की मदद करने के लिए खुद से आगे आ जाती थीं जिसकी वजह से वो कट्टरपंथियों के निशाने पर थीं।

हमें अब दबाव नहीं बल्कि जान का खतरा

15 अगस्त 2022 को ऑपइंडिया ने चंदन गुप्ता के पिता से बात की थी। तब उन्होंने बताया था कि उनके परिवार को मुस्लिमों की तरफ से केस वापसी का दबाव मिल रहा है। इस बावत चंदन गुप्ता के भाई ने बताया कि अब उनकी गवाही हो चुकी है। विवेक ने कहा कि गवाही होने से पहले केस वापसी के खूब दबाव मिले लेकिन अब उन्हें जान का खतरा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कासगंज का प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

बताते चलें कि 26 जनवरी 2018 को कासगंज के कुछ युवकों ने तिरंगा यात्रा निकाली थी। इस यात्रा का नेतृत्व चंदन गुप्ता कर रहा था। अचानक ही मुस्लिम भीड़ ने इस यात्रा पर हमला किया। हमले में चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी। इस मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया था और काफी दिनों तक कासगंज में कर्फ्यू जैसे हालत बने रहे। फ़िलहाल इस पूरे मामले का ट्रायल लखनऊ में चल रहा है।