उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा हिन्दू महिलाओं की पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है। वायरल हो रहे एक वीडियो में अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति को एक लड़की के बाल पकड़ कर घसीटते देखा जा सकता है। हमलावरों में मुस्लिम औरतें भी शामिल हैं। आरोपितों के नाम रहीम और उसकी बीवी, नफीस, इलियास और करीम का बेटा राजू आदि हैं। पुलिस ने कुल 7 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज के जाँच शुरू कर दी है। अब तक 3 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना बुधवार (4 अगस्त 2024) की है।
यह घटना प्रतापगढ़ जिले के थानाक्षेत्र जेठवारा की है। यहाँ के गाँव सरायबाबू की रहने वाली पुष्पा दुबे ने बुधवार को पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने बताया कि बुधवार को वो अपनी भतीजी के साथ सुबह लगभग 6 बजे शौच के लिए गाँव के सार्वजानिक शौचालय गईं थीं। तभी वहाँ पहले से मौजूद रहीम की बीवी व उनकी 2 बेटियों ने पीड़िता पर हमला कर दिया। हमले की वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है। इस हमले से बचने के लिए पीड़िता ने लोगों से मदद की गुहार लगाई।
सराय बाबू, सदर थाना जेठवारा में 4/9/24 मुसलमानों के द्वारा दुबे परिवार को मारा पीटा गया महिला से अभद्रता की गई उसी मामले में को लेकर सवर्ण आर्मी टीम प्रतापगढ़ पीड़ित परिवार से मुलाकात किया और विश्वासदिलायागया संगठन आपकेसदैव साथ हैं प्रशासन उचित कार्रवाई करें@dmpratapgarh@dgpuppic.twitter.com/NNnYlTPXdp
— Thakur Shivam Singh(Arunendra Singh) (@thakurshivam97) September 5, 2024
पुष्पा देवी के मुताबिक उनकी गुहार सुन कर रहीम की तरफ से कुछ लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया। इन लोगों में खुद रहीम, नफीस और उसका भाई राजू, और इलियास शामिल थे। इनके हाथों में लाठी-डंडे भी थे। इन सभी ने मिल कर पुष्पा देवी और उनकी भतीजी की बेरहमी से पिटाई की। पिटाई के दौरान पीड़िताओं के बाल पकड़ कर भी घसीटे गए, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में हमलावरों के पास लाठियाँ भी देखी जा सकती हैं।
दि0-04.09.24 को PS जेठवारा क्षेत्रान्तर्गत सरायबाबू में दो पक्षों के महिलाओं के मध्य सार्वजनिक शौचालय के इस्तेमाल को लेकर मारपीट/कहासुनी के प्रकरण में थाना जेठवारा पुलिस द्वारा तत्समय अभियोग पंजीकृत कर 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया,
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे बताया है कि अपनी जान बचाने के लिए वो जैसे-तैसे खुद को छुड़ा कर घर की तरफ भागीं। हमलावर भी उनके पीछे-पीछे घर तक पहुँच गए। यहाँ आरोपितों ने पीड़िता के पूरे परिवार को गंदी-गंदी गालियाँ दीं। इसके बाद धमकाते हुए उन्होंने कहा, “कहीं शिकायत की तो सबको जान से मार दूँगा। पुलिस को 50 हजार से एक लाख में खरीद लूँगा। तुम मेरा कुछ नहीं कर पाओगे।”
शिकायतकर्ता ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी है। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए कुल 7 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
नामजद आरोपितों में रहीम, रहीम की बीवी और 2 बेटियाँ, इलियास, नफीस और उसका भाई राजू शामिल हैं। अब तक 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 115 (2), 352 और 351 (3) के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।
झारखंड के कई हिस्सों में लव जिहाद और फिर लैंड जिहाद के कारण जनसंख्या में भारी उलट-फेर हो गया है। इसको लेकर भाजपा नेता लगातार आवाज उठाते रहे हैं। झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशियों की लगातार घुसपैठ और स्थानीय जनजातीय महिला से शादी के बाद उनकी जमीनों पर कब्जा के मामलों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी हैं। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है।
इस मामले में एक मुस्लिम व्यक्ति ने स्थानीय जनजातीय महिला को झाँसे में लेकर उसे धर्मांतरण कराया और फिर उससे निकाह कर लिया। बाद में उस मुस्लिम व्यक्ति ने महिला को धोखा दे दिया और उसकी जमीनों कब्जा कर लिया। इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला शिवानी मरांडी का है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिवानी मरांडी संथाल परगना अंतर्गत शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के कर्माटाँड़ गाँव की रहने वाली है। शिवानी का आरोप है कि साल 2013 में मोहम्मद नसीम अंसारी ने उसे अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। कुछ समय के बाद नसीम अंसारी उसे लेकर पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट चला गया। वहाँ उसका धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया और शबनम परवीन नाम रख दिया।
धर्मांतरण के बाद मोहम्मद नसीम अंसारी ने उससे निकाह कर लिया। इन 11 सालों में शिवानी मरांडी उर्फ शबनम परवीन को मोहम्मद अंसारी से चार पैदा हुए। इनमें से दो बच्चों की मौत हो गई। फिलहाल दो बच्चे जीवित हैं। इस बीच नसीम अंसारी ने किसी और महिला से भी अपने संबंध बना लिए। शिवानी को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने इस रिश्ते का विरोध किया।
शिवानी के विरोध करने पर नसीम भड़क गया और उसके साथ शिवानी के साथ मारपीट और उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। शिवानी मरांडी ने इसको लेकर गाँव की पंचायत में कई बार शिकायत की। पंचायत में नसीम अपने गुनाह को स्वीकार भी किया, लेकिन उसने शिवानी का उत्पीड़न बंद नहीं किया। रोज-रोज की प्रताड़ना से शिवानी तंग आ गई।
आखिरकार उसने दुमका जिले के एसपी और डीआईजी से भी न्याय की गुहार लगाई। इसके बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिवानी मरांडी ने बताया कि नसीम ने उसे उसके बच्चों के साथ उसे घर से निकाल दिया। शिवानी का यह भी आरोप है कि उसने अपनी मेहनत से तीन कट्ठा जमीन खरीदी थी। उसे भी नसीम ने जबरन अपने नाम पर करवा लिया।
झारखंड में हजारों हैं शिवानी मरांडी
यह कहानी सिर्फ शिवानी मरांडी की नहीं, बल्कि ऐसी सैकड़ों जनजातीय महिलाएँ हैं। झारखंड में यह एक बड़ी सामाजिक समस्या बन चुका है। झारखंड के विभिन्न इलाकों, खासकर साहिबगंज और संथाल परगना में जनजातीय युवतियों से मुस्लिम लड़के प्रेम के नाम पर दुष्कर्म और हत्या कर रहे हैं। उनकी जमीनों हो हड़पने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं।
मुस्लिम समुदाय के अनेक युवक शादीशुदा होने के बावजूद जनजातीय युवतियों को प्रेमजाल में फँसाकर निकाह कर रहे हैं और ST के रिजर्व सीट पर बीवी को चुनाव लड़वा रहे हैं। गोड्डा से भाजपा सांसद ने कहा था कि झारखंड में 100 महिलाएँ जनजातीय कोटे से चुनाव लड़ती हैं, लेकिन उनके पति मुस्लिम हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि इनमें से कई मुस्लिम प्रतिबंधित PFI से जुड़े हैं।
इसी साल जुलाई में पाकुड़ के तारानगर में बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से हिंदुओं को अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर होना पड़ा था। वहीं, महेशपुर थाना इलाके में आने वाले गायबधान में जनजातीय लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिए उनकी ही जमीनों से बेदखल कर रहे हैं। गायबधान का ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था, जिसमें बांग्लादेशी इस्लामी घुसपैठिए जनजातीय लोगों को धमका रहे थे।
हालात ये हैं कि जामताड़ा जिले में एक जमीन पर मुस्लिमों ने अपना मालिकाना हक जताते हुए वहाँ पर कब्रिस्तान बना दिया है। ‘पुरातन पतित’ नाम की जगह को जनजातीय लोग अपनी धार्मिक जमीन बता रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग इसे अपना कब्रिस्तान घोषित कर दिया है। मुस्लिम पक्ष द्वारा यहाँ पर एक शव को भी दफना देने से इस साल जुलाई में तनाव फैल गया था।
झारखंड में डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा गंभीर हो गया है कि इस साल अगस्त में झारखंड हाई कोर्ट को दुमका, पाकुड़, जामताड़ा, देवघर, साहेबगंज और गोड्डा ज़िलों के DM को निर्देश जारी करना पड़ा। इन जिलों के जिलाधिकारियों से हाई कोर्ट ने कहा कि वो अदालत को बताएँ कि इन जिलों में कितने घुसपैठिए रह रहे हैं।
इस मामले के संबंध में एक वकील ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने बताया था कि संथाल परगना क्षेत्र में मूलनिवासी आबादी का प्रतिशत ‘काफी कम’ हुआ है। साल 1951 में 44.67% की जनजातीय आबादी साल 2011 में घटकर 28.11% रह गई। वहीं, मुस्लिम आबादी ‘कई गुना बढ़कर’ 1951 में 9.44% से साल 2011 में बढ़कर 22.73% हो गई।
भाजपा सांसद ने संसद में उठाया था मुद्दा
बता दें कि 25 जुलाई 2024 को गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ये मामला संसद में भी उठा चुके हैं। उन्होंने संथाल परगना में एनआरसी लागू कराने की भी माँग की थी। सांसद निशिकांत दुबे ने कहा प्रत्येक जगह 15-17 प्रतिशत वोटर ही बढ़ता है, पर हमारे यहाँ 123 फीसद प्रतिशत बढ़ी है। मेरे लोकसभा क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्र में लगभग 267 बूथों पर मुसलमानों की आबादी 117 प्रतिशत बढ़ गई है।
दुबे ने कहा, “झारखंड में 25 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहाँ की आबादी 123 प्रतिशत आबादी बढ़ी है, यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पाकुड़ जिले में तारानगर इलाके में दंगा हो गया। इस दंगे की वजह यह है कि बंगाल की पुलिस और मालदा, मुर्शिदाबाद से लोग आकर हमारे लोगों को भगा रहे हैं। हिंदू गाँव का गाँव खाली हो रहा है।”
मध्य प्रदेश में भी ऐसे ही हालात
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर में भी ऐसे ही हालात हैं। वहाँ कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्होंने यही काम किया है। काली तराई गाँव का सलीम सहरिया जनजातीय की गुड्डी नाम की महिला को अपने साथ रखता है। सलीम उसके नाम पर जनजातीय लोगों की जमीनें खरीदता है। इसी तरह दांतरधा पंचायत में पप्पू पठान ने जनजातीय महिला फूला बाई को अपनी दूसरी पत्नी बनाकर रखा है। पप्पू ने फूला बाई को जिला पंचायत का चुनाव में उम्मीदवार बनाया था।
बता दें कि PFI के खिलाफ की गई कार्रवाई में श्योपुर से भी कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए PFI के संदिग्धों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि श्योपुर में भी संगठन के कार्यकर्ता सक्रिय हैं। PFI के संदिग्धों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है। तना ही नहीं, श्योपुर के पास राजस्थान के कोटा में उनकी ट्रेनिंग कैंप का भी पता चला था। इन इलाकों में जमातों का आयोजन होते रहता है और विदेशी भी आते रहते हैं।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर से लव जिहाद का चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है। यहाँ फरदीन नाम के मुस्लिम युवक ने नाबालिग हिंदू लड़की को अपनी जाल में फंसाने के लिए अपनी बहन का इस्तेमाल किया और उसे बहकाने की कोशिश की, लेकिन जब पीड़ित लड़की नहीं मानी तो फरदीन ने अपने साथियों के साथ उसे अगवा कर लिया।
नाबालिग पर उसने धर्म परिवर्तन का दबाव डाला, इसके बाद भी जब लड़की अड़ी रही, तो उसे घर के पास फेंककर चले गए। इस मामले में पुलिस ने बीएनएस की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपित फरदीन और उसके साथियों रिहान, सुल्तान और मोहम्मद आफताब को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला बिजनौर के धामपुर थाना इलाके का है। जहाँ नाबालिग हिंदू लड़की अपनी नानी के घर रहकर छोटी सी दुकान चलाती है। दुकान के पास ही फरदीन नाम का युवक रहता है। वो अपनी बहन के जरिए नाबालिक लड़की पर डोरे डालने की कोशिश करता रहता था। लेकिन 18 अगस्त 2024 को फरदीन अपने साथियों के साथ नाबालिग लड़की को उठा ले गया।
आरोप है कि इस दौरान नाबालिग के ऊपर धर्म परिवर्तन कर जबरन निकाह करने का दबाव भी बनाया गया। लड़की जब इसके लिए तैयार नहीं हुई, तो उसे मारा-पीटा गया और छेड़छाड़ की गई और फिर उसे जान से मारने की धमकी देकर नशे की हालत में दुकान के पास छोड़ दिया।
लड़की को होश आने पर उसने अपने परिजनों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद परिजन लड़की को लेकर धामपुर थाने पहुँचे। हालाँकि पुलिस ने जाँच की बात कही, लेकिन जब हिंदू संगठनों ने दबाव बनाया, तब जाकर पुलिस की नींद खुली और 5 सितंबर 2024 को मुख्य आरोपित फरदीन को गिरफ्तार कर लिया।
बिजनौर की धामपुर पुलिस ने जाँच के बाद रिहान नाम के दूसरे आरोपित को गिरफ्तार किया और फिर सुल्तान और आफताब को भी गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपितों की संख्या 5 है।
#BijnorPolice थाना धामपुर पर पंजीकृत मु0अ0सं0 425/24 धारा 74/351(3) बीएनएस व धारा 7/8 पॉक्सो अधिनियम में वांछित 03 अभियुक्तों की गिरफ्तारी व स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही वैधानिक कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी धामपुर जनपद बिजनौर की बाइट ।#UPPolicepic.twitter.com/fDxmO9nJb4
इस मामले में धामपुर सीओ सर्वम सिंह ने बताया कि परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर एक आरोपित फरदीन 5 सितंबर को ही गिरफ्तार कर लिया था और बाकी के तीन आरोपितों को 6 सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि नाबालिग ने कोर्ट में 161 के तहत दिए बयान में सिर्फ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पूरे मामले की जाँच के बाद अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद एक बार फिर से विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है। चुनावों की तारीख तय हो चुकी है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं। इस बीच भाजपा ने जम्मू-कश्मीर चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। इस संकल्प पत्र में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार, भग्नावेश मंदिरों का पुनर्निमाण को प्राथमिकता दी है।
पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (6 सितंबर 2024) को कहा कि अनुच्छेद 370 इतिहास बन चुका है और ये कभी लौटकर नहीं आ सकता है, क्योंकि यही वो विचारधारा थी जो युवाओं के हाथों में पत्थर थमाती थी। उन्होंने कहा कि अन्य राजनीतिक दल तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त रहे और वे अलगाववाद के लिए जिम्मेदार हैं।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त 2019 अनुच्छेद 370 खत्म करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है। उसके बाद से वहाँ विधानसभा के चुनाव नहीं हुए हैं। अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद यह राज्य का पहला विधानसभा चुनाव है। गृहमंत्री शाह ने कहा, “मैंने पहले ही कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। इस पर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।”
अमित शाह ने यह भी कहा कि आर्टिकल 370 की छाया में जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद पनपा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक के बाद एक सरकारें अलगाववादियों के आगे झुकती रहीं। पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि बातचीत और बम धमाके एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने साफ कह दिया भारत अब पाकिस्तान से बातचीत के पक्ष में नहीं है।
भाजपा के संकल्प पत्र की प्रमुख बातें
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में जम्मू-कश्मीर को ‘पुरानी सभ्यता’ की ओर लौटने की बात कही है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर को ‘टेररिस्ट हॉटस्पॉट’ से ‘टूरिस्ट स्पॉट’ बनाने की घोषणा की है। पार्टी ने ‘ऋषि कश्यप तीर्थ पुनरुत्थान अभियान’ के तहत हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण की बात कही है।
इसके साथ ही खंडहर बन चुके 100 मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। संकल्प पत्र में आगे कहा गया है कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से शंकराचार्य मंदिर (ज्येष्ठेश्वर मंदिर), रघुनाथ मंदिर और मार्तंड मंदिर सहित अन्य मौजूदा मंदिरों का और अधिक विकास किया जाएगा।
भाजपा ने जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत प्रकृति सुरक्षित रखने का भी वचन दिया है। इस संभाग में धार्मिक सर्किट बनाने का वादा किया गया है। इसके साथ ही वैष्णो देवी तीर्थस्थल, रघुनाथ मंदिर, पीर खो गुफा मंदिर, शिवखोरी और मचैल माता मंदिर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
दीपावली, लोहड़ी महाशिवरात्रि, बसंत पंचमी जैसे लोकप्रिय हिंदू त्योहारों के अलावा स्थानीय पर्व-त्योहारों के आयोजन में सहायता प्रदान करने की बात कही गई है। इनमें सांबा में आठ दिवसीय रथ खड़ा मेला, कार्तिक पूर्णिमा से पहले पंजभीखम (भीष्म पंचक) के रूप में तुलसी पूजा की पाँच दिवसीय उत्सव आदि प्रमुख हैं।
भाजपा ने कहा कि सत्ता में आने के बाद वह बूढ़ा अमरनाथ, माता वैष्णो देवी, शारदा देवी पीठ, मचैल माता पीठ, नांगली साहिब पूंछ गुरुद्वारा सहित विभिन्न मंदिरों, गुरुद्वारों, दरगाहों तक पर्यटक विकास परिपथ बनाए जाएँगे। इसी तरह गंगा आरती की तर्ज पर तवी नदी पर तवी आरती और कश्मीर में झेलम तट पर वितस्ता आरती की शुरुआत करने की घोषणा की है।
पार्टी ने राज्य में सत्ता में आने पर विस्थापितों के लिए ‘टीकानाथ टपलू विस्थापित समाज पुनर्वास योजना’ शुरू करने की बात कही है। इस योजना के माध्यम से कश्मीरी पंडितों, पश्चिमी कश्मीर के शरणार्थियों, वाल्मीकि, गोरखाओं सहित अन्य विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी और उनके पुनर्वास में तेजी लाने की बात कही गई है।
इसके साथ जम्मू संभाग के विस्थापित लोगों को भी वे सभी उचित लाभ, सुरक्षा और संरक्षण देने की बात कही है, जो कश्मीरी विस्थापितों को मिलती हैं। संकल्प पत्र में आतंकवाद और अलगाववाद का पूर्ण सफाया करने की बात कही गई है। आतंकवाद पीड़ितों को जल्दी न्याय दिलाने का भी वादा किया गया है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में अवैध रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी बस्तियों से निपटने के लिए सख्त अभियान चलाने का वादा किया गया है। भाजपा ने राज्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जनगणना कराने की बात भी कही है, ताकि समावेशी विकास के लिए उचित निर्णय लिया जा सके तथा कमजोर समुदायों पर केंद्रित लक्ष्य किया जा सके।
इस तरह अपने घोषणा पत्र में भाजपा ने कुल 25 संकल्प लिए हैं, जो सत्ता में आने के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इनमें विधवा पेंशन में बढ़ोत्तरी से लेकर मेडिकल एवं कॉलेजों के निर्माण, सड़क का विस्तार, मेट्रो का परिचालन शुरू करने की बात, MSME स्थापना और हर्बल हब, आईटी हब आदि बनाने की बात कही गई है।
केरल की सांस्कृतिक राजधानी कोच्चि से महज 10 किमी दूर स्थित त्रिपुनिथुरा में शुक्रवार (6 सितंबर 2024) को भव्य ‘अठचमायम‘ परेड के साथ ही ओणम पर्व के 10 दिनी महात्योहार का आगाज हो गया। अब से अगले 10 दिनों तक केरल में हर तरफ सनातन संस्कृति की धूम रहेगी। मूलत: ओणम का त्योहार नई फसलों से जुड़ा है, लेकिन सांस्कृतिक और पौराणिक रूप से ओणम का विशेष महत्व है। भारत दर्शन में ओणम के हर पहलू से आपको अवगत करा रहा है ऑपइंडिया…
ओणम दक्षिण भारत के केरल राज्य का सबसे प्रमुख और भव्य त्योहार है, जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। यह मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने (पहला माह, इसी से कैलेंडर की शुरुआत) में मनाया जाता है, जो अगस्त-सितंबर के समय आता है। ओणम का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है। यह त्योहार राजा महाबली (जिन्हें राजा बली भी कहा जाता है) की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है, जिन्हें उनकी महानता और धर्मपरायणता के लिए आज भी याद किया जाता है।
ओणम की पौराणिक कथा
ओणम पर्व मनाने का आधार राजा महाबली की पौराणिक कथा है। उनके शासनकाल को सुनहरे युग के रूप में याद किया जाता है, जब सभी लोग समान थे और देश में अन्न, धन और शांति की भरमार थी। राज्य में कोई भी भूखा या गरीब नहीं था। उनकी महानता से देवता चिंतित हो गए, क्योंकि वह उनके स्थान को चुनौती दे रहे थे। इसलिए, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और एक ब्राह्मण बालक के रूप में राजा महाबली से भिक्षा माँगी। उन्होंने राजा से तीन पग भूमि का दान माँगा, जिसे राजा ने खुशी-खुशी स्वीकार किया।
वामन अवतार में भगवान विष्णु ने अपनी दिव्य शक्ति से दो पगों में धरती और आकाश नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा ने अपनी स्वयं को प्रस्तुत कर दिया। भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति और त्याग को देखकर उन्हें वरदान दिया कि वह साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने वापस आ सकते हैं। यही दिन ओणम के रूप में मनाया जाता है।
अठचमायम से ओणम महोत्सव की शुरुआत
ओणम की शुरुआत अठचमायम से होती है, जो एक भव्य परेड के रूप में त्रिपुनिथुरा में आयोजित की जाती है। यह परेड केरल के विभिन्न लोक कलाओं का प्रदर्शन करती है, जिसमें कथकली, थेय्यम, पुलिकली, और कोल्कली जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल होते हैं। यह जुलूस राजा महाबली की प्रतीकात्मक वापसी का स्वागत करता है और ओणम के दस दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। अठचमायम के दौरान हर समुदाय के लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जिससे यह सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक बन जाता है।
ओणम का 10 दिनों का महा उत्सव
ओणम के 10 दिनों में हर दिन का अपना विशिष्ट महत्व होता है। इन दिनों में घरों में फूलों की रंगोली (पुक्कलम) सजाई जाती है, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, और पारंपरिक खेल खेले जाते हैं। हर दिन एक खास गतिविधि से जुड़ा होता है, जो ओणम को और भी विशेष बनाता है।
अथम: यह ओणम का पहला दिन होता है, जो अठचमायम परेड के साथ शुरू होता है। इस दिन से घरों में “पुक्कलम” (फूलों की सजावट) की शुरुआत होती है।
चिथिरा: दूसरे दिन पुक्कलम की सजावट और बढ़ाई जाती है। इस दिन घरों की साफ-सफाई भी की जाती है।
चोधी: इस दिन नए कपड़े और आभूषण खरीदे जाते हैं। ओणम के लिए तैयारियां इस दिन तेज हो जाती हैं।
विशाखम: यह दिन बाजारों में खरीदारी और ओणसद्या (विशेष भोज) की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है।
अनिजम: इस दिन नौका दौड़ (वल्लम काली) का आयोजन किया जाता है, जिसमें केरल की पारंपरिक नावों की दौड़ होती है।
थ्रीक्केटा: इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों को उपहार देते हैं और ओणम की शुभकामनाएं भेजते हैं।
मूलम: इस दिन विभिन्न मंदिरों में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होती है।
पूर्म: इस दिन उत्सव की तैयारियाँ अपने चरम पर होती हैं। विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियाँ जारी रहती हैं।
उथ्रादम: इसे ओणम का ‘छोटा ओणम’ कहा जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और ओणसद्या की तैयारी करते हैं।
थिरुवोणम: यह ओणम का मुख्य दिन है। इस दिन राजा महाबली की वापसी का स्वागत करने के लिए परिवार के लोग एक साथ बैठकर ओणसद्या का आनंद लेते हैं। इस भोज में केले के पत्तों पर 26 से अधिक व्यंजन परोसे जाते हैं, जैसे अवियल, सांभर, पायसम, और केले के पत्ते पर परोसे गए अन्य स्वादिष्ट पकवान। पुक्कलम को इस दिन सबसे सुंदर रूप दिया जाता है।
ओणम का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
ओणम का सबसे प्रमुख आकर्षण ओणसद्या है, जो एक पारंपरिक भोज होता है। इस भोज में 26 से अधिक प्रकार के व्यंजन परोसे जाते हैं। ओणसद्या को केले के पत्ते पर परोसा जाता है और इसमें चावल, सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, किचड़ी, पायसम जैसे स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होते हैं। इस भोज को परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर खाते हैं, जो आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक होता है।
ओणम का सांस्कृतिक महत्व भी अत्यधिक है। यह त्योहार केरल की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को जीवंत रखता है। इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें कथकली, पुलिकली (टाइगर डांस), वल्लम काली (नौका दौड़), और अन्य पारंपरिक नृत्य शामिल होते हैं। पुलिकली विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें लोग बाघ की तरह सज-धज कर नृत्य करते हैं। यह नृत्य ओणम के अवसर पर केरल के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाता है।
ओणम न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह केरल की सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव भी है। यह त्योहार समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाता है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म के हों। ओणम के अवसर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथकली, पुलिकली, और थेय्यम जैसे पारंपरिक नृत्य प्रमुख होते हैं। ये कला रूप केरल की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और अगली पीढ़ी को इसे संचारित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
फोटो साभार: keralakaumudi
ओणम का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह त्योहार सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का प्रतीक है। इस दौरान लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, उपहार देते हैं, और भोज में हिस्सा लेते हैं। यह त्योहार समाज में आपसी प्रेम और सद्भावना का संदेश फैलाता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से भी ओणम का महत्व अधिक है। इस दौरान भगवान विष्णु और राजा महाबली की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि ओणम के दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।
ओणम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ओणम का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस त्योहार का उत्सव त्रावणकोर और कोच्चि के महाराजाओं के समय से होता आ रहा है। पहले यह उत्सव केवल शाही परिवारों तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह समाज के हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण बन गया। इस त्योहार को राज्य की समृद्धि और कृषि उत्पादन से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि यह फसल कटाई के मौसम का प्रतीक है।
ओणम केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह केरल की सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है। इस महाउत्सव के दौरान केरल के लोग अपने पारंपरिक मूल्यों को संजोते हैं और उन्हें अगली पीढ़ी को संचारित करते हैं। यह पर्व सामाजिक समरसता, समानता, और भाईचारे का संदेश देता है। ओणम के 10 दिनों में केरल का हर कोना रंगीन और उत्सवमय हो जाता है।
राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की हत्या करने में इस्लामी आतंकियों की मदद करने के आरोपित जावेद को जमानत मिल गई है। इस हत्याकांड से जुड़े दूसरे आरोपित को जमानत मिलने पर कन्हैया लाल के बेटे ने यश तेली ने दुख जताया है और कहा है कि इस मामले से संबंधित जाँच में कहीं ना कहीं कमी रह गई है।
दरअसल, राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस प्रवीर भंडारी की पीठ ने जावेद को 5 सितंबर को जमानत दे दी। जावेद ने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में जावेद ने कहा था कि उसके खिलाफ मामले में पक्का सबूत नहीं है। इससे पहले एक और आरोपित फरहाद मोहम्मद को भी पिछले साल जमानत मिल चुकी है।
यश तेली ने कहा, “जब भी मेरी कोर्ट में पेशी हुई, यही सुना कि जावेद ने ही मेरे पिताजी के बारे में सूचना दी थी कि वह दुकान पर मौजूद हैं। ये सब भी मुझे NIA की टीम द्वारा ही पता चला है। जिस तरह से उसकी जमानत हुई है, उससे मुझे लग रहा है कि उसकी जमानत नहीं होनी चाहिए थी। वह भी इस केस में बराबर का भागीदार रहा है।”
यश ने आगे कहा, “जावेद को भी सजा मिलनी चाहिए थी। उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी। हो इसका है कि इस चेन में जो अपराधी पकड़े गए हैं उनकी भी जमानत आगे हो जाए। धीरे-धीरे हो ही रहा है। पहले एक छूटा और अब दूसरा छूटा है। आगे तीसरा, चौथा, पाँचवाँ…. और हो सकता है कि रियाज भी छूट जाए। हमें इसकी उम्मीद नहीं थी अपराधी इतनी जल्दी छूट जाएँगे।”
जाँच को लेकर यश ने कहा कि जो टीम इस पर काम कर रही थी, उसका इसमें कमी रही होगी। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि टीम उसे गिल्टी साबित नहीं कर पाई या उसके कॉल की लोकेशन नहीं ट्रेस कर पाई जो भी था आरोपित को इसमें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए थी और जमानत नहीं होनी चाहिए थी।” इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
Udaipur, Rajasthan: After Javed, another accused in the Taliban-style murder case in Udaipur, was granted bail, Kanhaiya Lal's son, Yash Teli, says, "I had heard for a long time that Javed's bail was granted. Whenever my court hearings took place, Javed's name was mentioned. I… pic.twitter.com/GnWThdBYVX
कन्हैया लाल हत्याकांड के मामले में अभी तक मुकदमा चल ही रहा है। इस मामले में साजिशकर्ताओं और हत्यारों को सजा नहीं सुनाई गई है। इस कारण से कन्हैया लाल का परिवार निराश हो चुका है। कन्हैया लाल के बड़े बेटे यश साहू ने प्रण लिया था कि वह तब तक अपने पिता के हत्यारों की अस्थियाँ विसर्जित नहीं करेंगे जब तक हत्यारों को फाँसी ना हो जाए।
इसके अलावा यश साहू ने नंगे पैर रहने और साथ ही केश ना कटवाने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब तक कन्हैया लाल का परिवार न्याय की राह तक रहा है, उनके बेटे नंगे पैर चल रहे हैं और अस्थियाँ गंगाजी में जाने की राह तक रही हैं। लेकिन इस बीच जावेद को जमानत मिल रही है।
गौरतलब है कि 28 जून, 2022 को उदयपुर में दर्जी की दुकान करने वाले कन्हैया लाल तेली की गौस मुहम्मद और रियाज ने हत्या कर दी थी। इस मामले में NIA को जाँच सौंपी गई थी। कन्हैया लाल तेली की हत्या के मामले में मुख्य आरोपितों के अलावा उनके मददगारों को भी गिरफ्तार किया था।
इस मामले में NIA की चार्जशीट में जावेद के रोल के बारे में बताया गया था। NIA चार्जशीट में बताया गया था कि 19 साल के जावेद को कन्हैया लाल की हत्या की साजिश में शामिल किया गया था। जावेद का काम कन्हैया लाल की गतिवधियों पर नजर रखना था।
जावेद कन्हैया लाल की दुकान के पास ही एक चूड़ी की दुकान पर काम करता था। उसने कातिलों को कन्हैया लाल द्वारा दुकान पर की जा रही पूरी दिनचर्या की जानकारी लगातार अपडेट की। आरोप है कि जावेद की जानकारी के आधार पर ही दोनों हत्यारे आगे बढ़े।
सुहैल अंसारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इंस्टाग्राम पर अपनी प्रोफाइल में वो खुद को ‘अंतरराष्ट्रीय योग शिक्षक’ बताता है। लेकिन सुहैल अंसारी योग के नाम पर अश्लील वीडियो पोस्ट करने के लिए बदनाम हैं।
सुहैल अंसारी अपनी महिला शिष्याओं, जो अधिकतर हिंदू होती हैं, को योग आसन सिखाने के बहाने गलत तरीके से फिल्माने के लिए बदनाम हो चुका है, जिसमें वो बार-बार महिलाओं को तरीके से दिखाता है। इन वीडियो और आपत्तिजनक थंबेल के माध्यम से वो योग जैसी प्राचीन विद्या को बदनाम करता रहता है। इन वीडियो में योग आसनों का प्रदर्शन किया गया है, लेकिन थंबनेल्स और वीडियो के भीतर की आपत्तिजनक सामग्री ने लोगों को आक्रोशित कर दिया है।
वीडियो और थंबनेल्स में महिलाओं के योग करते हुए दिखाए जाने के तरीके पर कई सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्ट्स ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे महिलाओं की छवि को ठेस पहुँचाई जा रही है, और यह समाज में गलत संदेश देता है।
सुहैल अंसारी यानी कथित ‘अंतरराष्ट्रीय योग शिक्षक’ इस साल मार्च महीने में जाँच के घेरे में आया था, जब उसके अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
घटिया प्रचार स्ट्रेटजी के दम पर उसके इंस्टाग्राम पर 1.44 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हो चुके हैं। इस बीच, सुहैल अंसारी पर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री सहित हिंदू नेताओं की नाराजगी भी बढ़ी थी और पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सुहैल अंसारी को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। सुहैल पर लव-जिहाद को बढ़ावा देने के भी आरोप हैं।
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) March 30, 2024
धीरेंद्र शास्त्री ने सुहैल पर चार हिंदू महिलाओं की मुस्लिमों से निकाह कराने का भी आरोप लगाया था। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “सुहैल नाम का एक योग शिक्षक है जो युवा लड़कियों को फंसाता है और उनका निकाह मुस्लिम पुरुषों के साथ करवाता है। 4 हिंदू बेटियाँ पहले ही इसका शिकार हो चुकी हैं।” वायरल हुए उस वीडियो में शास्त्री ने कहा था, “जब भारत में ऐसी चीजें होती हैं, तो मेरा खून खौल उठता है।”
— ADV. ASHUTOSH J. DUBEY ?? (@AdvAshutoshBJP) March 31, 2024
सोशल मीडिया पर हंगामा मचने के बाद सुहैल अंसारी ने एक ‘माफीनामा वीडियो’ पोस्ट किया और खुद को सुधारे की कसम खाई।
सुहैल ने कहा, “मेरा इरादा किसी की भावनाओं या भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। अगर मैंने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो मैं तहे दिल से माफ़ी माँगता हूँ। अगर मेरे किसी वीडियो ने आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई है, तो मुझे इंस्टाग्राम पर मैसेज करें और मैं उन वीडियो को हटा दूँगा।”
हालाँकि वो सुधरा तो कतई नहीं है। ऑपइंडिया की टीम ने उसके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर नज़र डाली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी थी, तो सामने आ गया कि वो सुधरने की जगह फिर से वही घटिया हथकंडे अपना रहा है और हिंदू महिलाओं को गलत तरीके से फिल्माकर कर वीडियो बना रहा है।
सुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट सुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
हालाँकि ये सच है कि उसने कुछ समय तक खुद के सुधरने का दिखावा किया था, लेकिन अब सुहैल अंसारी फिर से योग के नाम पर ‘अश्लील वीडियो’ अपलोड करना शुरू कर चुका है। ऑपइंडिया को अकेले अगस्त में कम से कम ऐसे 6 घटिया पोस्ट मिले।
सुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉटसुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
सुहैल अंसारी अपने अश्लील वीडियो को ‘एडवांस योग ट्रेनिंग’ का नाम देकर किसी भी विवाद से बचने की कोशिश कर रहा है।
सुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉटसुहैल अंसारी के हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
ऑपइंडिया ने पाया कि उनके कई ‘योग प्रशिक्षण वीडियो’ कैप्शन और इमोजी से भरे हुए हैं, जो यौन इशारे करते हैं। उनके एक छात्र की नंगी नाभि वाले थंबनेल का कैप्शन था, “इस जगह को देखो।” एक और हाइपरसेक्सुअल इंस्टाग्राम पोस्ट का कैप्शन था, “क्या तुम मुझे भूल गए?”
हमारी टीम ने वीडियो में घटिया कैप्शन के बगल में ‘ओम प्रतीक’ भी देखा। हालाँकि अभी तक ये साफ नहीं है कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है या नहीं।
यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
उत्तर प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा मुठभेड़ के दौरान लुटेरे मंगेश यादव के मारे जाने से राजनीतिक विवाद गरमा गया है। मंगेश यादव 28 अगस्त 2024 को सुल्तानपुर में भरत जी सर्राफ की ‘ओम ऑर्नामेंट्स’ नामक ज्वेलरी शॉप में हुई हाई-प्रोफाइल चोरी में शामिल था। इसमें 1.5 करोड़ रुपए से अधिक के कीमती सामान चोरी हुए थे।
मंगेश यादव एक वांछित अपराधी था, जिसके सिर पर एक लाख रुपए का इनाम था। उसके खिलाफ लूट और चोरी के कई मामले दर्ज थे। 5 सितंबर 2024 को सुल्तानपुर के देहात कोतवाली के अंतर्गत मिशिरपुर पुरैना में STF के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया। पुलिस का कहना है कि उसने आत्मरक्षा में ये कार्रवाई की है। वहीं, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने इसमें भी जाति खोज लिया है।
समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने X पर एक लंबे पोस्ट में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के सुल्तानपुर डकैती में शामिल लोगों से संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि इन कथित संबंधों के कारण ही डकैती के दो दिन बाद रायबरेली में एक अन्य मामले में मुख्य आरोपित विपिन सिंह को अदालत में समर्पण के लिए मजबूर किया गया।
जातीय कार्ड खेलने के लिए कुख्यात राजनीतिक के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोपों में इजाफा करते हुए आगे कहा कि सुल्तानपुर डकैती कांड के मुख्य आरोपित को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया गया और अन्य गैर-यादव आरोपियों को सिर्फ दिखावे के लिए पैर में गोली मारी गई, जबकि मंगेश यादव को उसकी जाति के कारण मार दिया गया।
एनकाउंटर में मारे गए लुटेरे के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “जब मुख्य आरोपित ने आत्मसमर्पण कर दिया है तो लूटा गया सारा माल वापस किया जाना चाहिए और सरकार को अलग से मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि ऐसी घटनाओं से होने वाले मानसिक आघात से उबरने में काफी समय लगता है। इससे व्यापार में नुकसान होता है, जिसकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए।”
योगी सरकार पर फर्जी एनकाउंटर के अपने आरोपों को दोहराते हुए अखिलेश ने कहा, “नक़ली एनकाउंटर रक्षक को भक्षक बना देते हैं। समाधान नक़ली एनकाउंटर नहीं, असली क़ानून-व्यवस्था है। भाजपा राज अपराधियों का अमृतकाल है। जब तक जनता का दबाव व आक्रोश चरम सीमा पर नहीं पहुँच जाता है, तब तक लूट में हिस्सेदारी का काम चलता रहता है और जब लगता है जनता घेर लेगी तो नक़ली एनकाउंटर का ऊपरी मरहम लगाने का दिखावा होता है। जनता सब समझती है कि कैसे कुछ लोगों को बचाया जाता है और कैसे लोगों को फँसाया जाता है। घोर निंदनीय!”
लगता है सुल्तानपुर की डकैती में शामिल लोगों से सत्ता पक्ष का गहरा संपर्क था, इसीलिए तो नक़ली एनकाउंटर से पहले ‘मुख्य आरोपी’ से संपर्क साधकर सरेंडर करा दिया गया और अन्य सपक्षीय लोगों के पैरों पर सिर्फ़ दिखावटी गोली मारी गयी और ‘जात’ देखकर जान ली गयी।
यह भी बताया गया है कि लाल बिहारी यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मृतक डाकू मंगेश यादव के घर पहुँचा और अपनी संवेदना व्यक्त की। ऐसा लगता है कि यह अखिलेश यादव की यादव समुदाय के एकमात्र नेता के रूप में स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है, भले ही इसके लिए किसी अपराधी का पक्ष ही क्यों ना लेना पड़े।
हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि समाजवादी पार्टी ने किसी अपराधी का पक्ष लिया है। हाल ही में अयोध्या दुष्कर्म मामले में अखिलेश यादव ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने वाले आरोपितों का डीएनए टेस्ट कराने की माँग की थी। अयोध्या प्रशासन ने नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपित उनकी पार्टी के नेता मोईद खान की बेकरी को ध्वस्त कर दिया था।
पिछले साल उमेश पाल हत्याकांड के में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और उसके साथी गुलाम मुहम्मद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। उस समय भी अखिलेश यादव ने मारे गए अपराधियों के बचाव में उतरकर मुठभेड़ को फर्जी बताया था। यह तब हुआ, जब घटना के सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर दिखा था कि दोनों अपराधी उमेश पाल का पीछा कर रहे थे।
सीसीटीवी फुटेज में असद अहमद और उसके साथी गुलाम मुहम्मद को उमेश पाल पर पिस्तौल से हमला करते हुए साफ देखा गया था। इसके बावजूद अखिलेश यादव उनका बचाव करते रहे। इससे अखिलेश यादव ने मृतक गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया है। उसकी मौत पर सपा विधायक महेंद्रनाथ यादव श्रद्धांजलि देने भी पहुँचे थे।
भाजपा ने समाजवादी पार्टी को अपराधियों का समर्थक बताया है। सपा नेताओं द्वारा लूटेरे मंगेश यादव के घर जाने पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, समाजवादी पार्टी अपराधियों का समर्थन करने में किस हद तक जाएगी? अब समाजवादी पार्टी अपराधियों के घर संवेदना जताने जाती है। पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के घर संवेदना जताने जाते हैं और अब मंगेश यादव…।”
Lucknow: BJP spokesperson Rakesh Tripathi on Samajwadi Party leaders visiting Gangster Mangesh Yadav's house, says, "To what extent will the Samajwadi Party go in supporting criminals? Now, the Samajwadi Party visits the homes of criminals to offer condolences? First, SP chief… pic.twitter.com/HjU0BI00FQ
लूट की यह घटना सुल्तानपुर जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र के ठठेरी बाजार में हुई थी। बाजार में भरत जी सर्राफ ओम ऑर्नामेंट्स नाम से ज्वैलरी शॉप चलाते हैं। 28 अगस्त 2024 की सुबह लगभग 10 बजे भारत और उनके बेटे ने अपनी ज्वैलरी की दुकान खोली और काम करने लगे। दुकान पर रोज की तरह लोग आए हुए थे। दोपहर करीब 12 बजे दुकान में दो ग्राहक बैठे हुए थे।
इसी बीच एक आरोपित ने अपने चेहरे पर रूमाल बाँधकर दुकान में और और भरत एवं उनके बेटे पर बंदूक तान दी। दुकान में बैठे पिता-पुत्र और दोनों ग्राहक हैरान रह गए। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, गिरोह का एक और सदस्य हेलमेट पहने और काला बैग लेकर आता दिखाई दिया। इसके बाद तीन और बदमाश दुकान में घुसे और लूटपाट की।
दुकान मालिक ने विरोध किया तो एक लुटेरे ने उसके सिर पर बंदूक तान दी, जबकि बाकी दो लुटेरों ने दुकान के अंदर मौजूद दो ग्राहकों पर पिस्तौल तान दी। इस बीच तीन अन्य लुटेरों ने दुकान से कीमती सामान समेट लिया। घटना की सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि लुटेरे मिनटों में 1 करोड़ 40 लाख रुपए के जेवरात लूटकर बाइक से फरार हो गए।
दिनदहाड़े सोना-चांदी लेकर फरार हुए बदमाश
उत्तर प्रदेश: सुल्तानपुर में सर्राफ ठठेरी बाजार में कुछ बदमाश दिनदहाड़े 5 करोड़ के सोना और चांदी लेकर फरार हो गए. पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.#Uttarpradesh | #CCTV | #Sultanpurpic.twitter.com/511N5Vumvr
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना में कुल 12 लुटेरे शामिल थे, जो 3 टीमों में बँटे हुए थे। पहली टीम में पुष्पेंद्र, त्रिभुवन और सचिन शामिल थे, जिन्होंने लूट की योजना बनाई थी। इनमें से त्रिभुवन ने एक बोलेरो कार का भी इंतजाम किया था। लूट के बाद बदमाश इसी बोलेरो में जेवर लेकर रायबरेली भाग गए थे।
दूसरे ग्रुप में विपिन सिंह, विनय शुक्ला, अजय यादव, अरविंद यादव, विवेक सिंह और दुर्गेश सिंह शामिल थे। ये लूट की वारदातों को अंजाम देने वाले अपराधियों को मदद मुहैया कराते थे। तीसरे ग्रुप में फुरकान, अनुज प्रताप, अरबाज, मंगेश यादव और अंकित यादव शामिल थे, जिन्होंने दिनदहाड़े दुकान में लूटपाट की थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया कि मंगेश यादव अपराध के मुख्य संदिग्धों में से एक था और वह एक बड़े गिरोह का सदस्य था। इस गिरोह के कई अन्य सदस्यों को पहले ही पकड़ा जा चुका था, लेकिन मंगेश यादव की कथित तौर पर पुलिस पर गोली चलाने के बाद हुई कार्रवाई में गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस ने बताया कि आरोपित लुटेरे 5 थे, लेकिन आगे की जाँच में 12 लोगों के शामिल होने का पता चला। नतीजतन, यूपी पुलिस ने 12 आरोपियों के सिर पर 1-1 लाख रुपए का इनाम रखा और उनकी तलाश शुरू कर दी। इस गैंग के सदस्य विपिन सिंह ने रायबरेली में आत्मसमर्पण कर दिया था।
गैंग के अन्य सदस्य सचिन, पुष्पेंद्र और त्रिभुवन उर्फ लाला हरिजन को मंगलवार (3 सितंबर) को नगर कोतवाली के गोड़वा गाँव में एनकाउंटर में गिरफ्तार करके इलाज के बाद जेल भेज दिया गया। गुरुवार (5 सितंबर) को जौनपुर जिले के अंगरौरा निवासी मंगेश यादव ने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में यूपी एसटीएफ के दरोगा धर्मेंद्र शाही ने यादव को गोली मार दी।
पुलिस ने बदमाशों के पास से करीब 15 किलोग्राम चाँदी के जेवर, 38.5 हजार रुपए नकद, चोरी की एक बाइक, 3 अवैध तमंचे, 3 कारतूस और 6 खोखे बरामद किए हैं। अखिलेश यादव के जाति आधारित फर्जी मुठभेड़ के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी एसटीएफ के सीओ धर्मेंद्र शाही ने कहा, “मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। हर किसी की अपनी राय होती है।”
मंगेश यादव पर लूट और चोरी के 8 मामले
मृतक लूटेरे मंगेश यादव पर चोरी और लूट के करीब 8 मुकदमे दर्ज हैं। साल 2021 में जिले के करौंदीकला थाने में मंगेश यादव के खिलाफ चोरी और बरामदगी का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 2022 तक उसके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज थे। साल 2023 में करौंदीकला थाने में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।
इसके बाद साल 2024 में उसके खिलाफ जौनपुर में बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। चोरी की गई बाइक का इस्तेमाल सुल्तानपुर में आभूषण लूट में किया गया था। 28 अगस्त 2024 को उसका नाम सुल्तानपुर में सर्राफा लूटकांड में आया था। गुरुवार (5 सितंबर) की सुबह पुलिस मुठभेड़ में वह मारा गया और इस तरह उसके चार साल के आपराधिक जीवन का अंत हो गया।
इस तरह सुल्तानपुर लूट कांड के आरोपित मांगेश यादव मारा गया है, तीन अन्य आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। विपिन सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि फुरकान, अनुज, अरबाज, विनय शुक्ला, अंकित यादव, अजय यादव, अरविंद यादव, विवेक और दुर्गेश अभी भी फरार हैं।
(इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय ने लिखा है। आप इस लिंक पर क्लिक करके इसे पढ़ सकते हैं।)
केरल हाई कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की सजा घटा कर 20 साल कर दी है जिसे अपनी ही बेटी का रेप करने के कारण निचली अदालत ने मरते दम तक कैद की सजा सुनाई थी। वह 2 साल तक अपनी नाबालिग बेटी का रेप करने का दोषी पाया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि उसे अपनी बेटी की रक्षा करनी चाहिए थी लेकिन वह खुद ही रेप करने लगा, ऐसे में वह दया का पात्र नहीं है।
केरल हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति पी.बी.सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति सी.प्रतीप कुमार की एक बेंच ने यह सजा सुनाई है। बेटी के रेप के दोषी अब्बा ने हाई कोर्ट में निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील दायर की थी। कोर्ट ने उसे को POCSO और बलात्कार के मामले में दोषी पाया था।
हाई कोर्ट ने बेटी का बलात्कार करने वाले इस दोषी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई। अब्बा अपनी बेटी के बयानों में अंतर का सहारा लेकर कोर्ट से बचना चाह रहा था। कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी और कहा कि कोई भी बच्चा सामान्य तौर पर अपने अब्बा के विरुद्ध ऐसे आरोप नहीं लगाएगा।
कोर्ट ने कहा, “आरोपित कोई और नहीं बल्कि नाबालिग पीड़िता का पिता है, जिसे उसकी इस तरह के यौन उत्पीड़न से उसकी रक्षा करनी चाहिए। इसके बावजूद, उसने दो साल से अधिक समय तक अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार बलात्कार/यौन उत्पीड़न किया। ऐसी परिस्थिति में, वह किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है।”
कोर्ट ने कहा, “इस मामले में सभी तथ्यों पर विचार करते हुए, हम मानते हैं कि पीड़ित पक्ष और आरोपित दोनों के लिए न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा पर्याप्त होगी।” कोर्ट ने यह मानने से भी इनकार किया कि पीड़ित बच्ची के बयानों में अंतर है।
अपनी ही बेटी से रेप का यह मामला केरल के कन्नूर का है। यहाँ एक बच्ची की माँ ने 2017 में आरोप लगाया था कि उसका शौहर उनकी 14 वर्षीय बेटी का कई मौकों पर रेप किया। उसने इस संबंध में पुलिस को बयान भी दिया था। उसने बताया कि 2017 में जब एक दिन वह घर पर नहीं थी तो उसका अब्बा उसे बेडरूम में ले गया और उसका रेप किया।
इसके बाद उसने कई बार अपनी बेटी को हवस का शिकार बनाया। एक दिन बच्ची की अम्मी जब घर आई तो दोनों को नग्न देखा। इसके बाद वह अपनी बेटी को लेकर शौहर घर से लेकर अपने भाई के घर चली गई। बच्ची ने यहाँ एक नए स्कूल में दाखिल लिया और इसी दौरान उसने एक दिन काउन्सलिंग के दौरान यह खुलासा एक टीचर से किया।
उन्होंने यह बात बाल हेल्पलाइन तक पहुँचाई। इसके बाद इस मामले में FIR दर्ज की गई। मामले में निचली अदालत ने बच्ची के अब्बा को दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसके ऊपर कोर्ट ने ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया था। बच्ची के अब्बा ने इस मामले के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था और राहत माँगी थी। हाई कोर्ट ने उसकी दलीलें नहीं मानी। हालाँकि, उसने सजा को आजीवन कारावास से बदल कर उम्रकैद में कर दिया।
विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के राजनीति में एंट्री को लेकर लंबे समय से लग रही अटकलें आज (6 सितंबर 2024) सच साबित हो गईं। दोनों पूर्व खिलाड़ियों ने कॉन्ग्रेस का हाथ आखिरकार आज थाम ही लिया है। ये दोनों कोई पहले खिलाड़ी नहीं है जिन्होंने खेल करियर के बाद राजनीति में कदम रखा हो।
पहले भी खिलाड़ी राजनीति में आते रहे हैं, अलग-अलग पार्टियाँ ज्वाइन करके राजनीति करते रहे हैं, अपना एक दूसरे से विरोध जताते रहे हैं… लेकिन इन दोनों की कॉन्ग्रेस में एंट्री पर बात करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इन्होंने यहाँ तक आने के लिए जो ‘राजनैतिक पैंतरेबाजी’ की है उससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
Delhi: Bajrang Punia and Vinesh Phogat present on the stage with Congress general secretary KC Venugopal, party leader Pawan Khera, Haryana Congress chief Udai Bhan and AICC in-charge of Haryana, Deepak Babaria.
साल 2023 की शुरुआत में 18 जनवरी को जब विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया समेत 30 पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने बैठे थे तो पूरा देश इनके साथ खड़ा था। सबके लिए प्रदर्शनस्थल पर बैठे प्रदर्शनकारी वो खिलाड़ी थे जिन्होंने समय-समय पर देश का नाम रौशन किया। उस समय इन्होंने यौन उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी।
18 जनवरी को ये प्रदर्शन शुरू हुआ था और 19 जनवरी को ही केंद्र सरकार में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस पर संज्ञान लेते हुए खिलाड़ियों को मिलने बुला लिया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वो इस मामले में कार्रवाई करेंगे लेकिन खिलाड़ियों ने उस समय किसी की नहीं सुनी और धरना चालू रखा। 21 जनवरी तक जब ये लोग जिद्द पर अड़े रहे तो फिर खेल मंत्री ने फिर इन्हें बुलवाया। इनसे बातचीत की। इन्हें समझाया और एक समिति का गठन हुआ।
21 जनवरी जब प्रदर्शन खत्म हुआ तो ऐसा नहीं था कि सरकार वादे को भूल गई हो… 23 जनवरी को ही खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) और उसके अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के धरने के बाद मैरी कॉम के नेतृत्व में एक ओवरसाइट समिति बनाई। इस समिति को कुश्ती महासंघ के कामकाज को देखने की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही ऐलान किया कि WFI के अध्यक्ष अपने पद पर काम नहीं करेंगे।
अप्रैल में इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी, वहीं मीडिया ने अपनी खबरों में बताया कि बृजभूषण शरण सिंह निर्दोष पाए गए हैं। पहलवानों ने इन खबरों को नकारते हुए दोबारा अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया और किसी की कोई बात नहीं सुनी। उन्होंने अपने समर्थकों को बताया कि बृजभूषण सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई इसलिए वो ऐसा कर रहे हैं जबकि उस समय तक बृजभूषण शरण सिंह को उनके पद से हटाया जा चुका था।
21 अप्रैल फिर प्रदर्शन शुरू हुआ। पहलवानों ने बताया कि ये प्रदर्शन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और वो लोग सिर्फ और सिर्फ खिलाड़ियों के हक की लड़ाई को लड़ रहे हैं। हालाँकि देखते ही देखते इसमें खाप नेता, किसान नेता और राजनीतिक पार्टियों की शिरकत होने लगी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई नेताओं और खाप नेताओं ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से मुलाकात की और अपना समर्थन दिया। 29 अप्रैल को बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई लेकिन पहलवान प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन करते रहे। बताया जाने लगा कि वो लोग जंतर-मंतर पर बैठ प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन दिल्ली पुलिस उनकी बुनियादी जरूरत जैसे खाना-पानी पर रोक लगा रही है। 28 मई को खबर आई कि अब प्रदर्शनकारी संसद भवन की तरफ जाएँगे।
देश ने चूँकि साल 2021 में किसान प्रदर्शन के वक्त 26 जनवरी को लाल किले की तरफ प्रदर्शनकारियों की हिंसा देखी थी इसलिए संसद भवन की बात आने पर उन्हें रोका गया। इस दौरान पहलवानों और पुलिस के बीच हाथापाई भी हुई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनका सामान जंतर-मंतर से हटा दिया। 2 दिन बाद विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया ने एक नया पैंतरा आजमाया। ये पैंतरा अपने मेडल हरिद्वार में प्रवाहित करने का था। बाद में मेडल प्रवाहित नहीं किए गए पर ये हल्ला हर जगह हुआ कि पहलवान कितने ज्यादा आहत हैं कि वो अपनी कमाई को बहाने जा रहे थे।
कई राजनैतिक हस्तियों ने इस पूरे प्रदर्शन की आड़ में अपनी राजनीति खेली, बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों को लाकर सीधे मोदी सरकार से जोड़ दिया गया। तमाम तरह के लांछन लगाए गए, उनपर सवाल उठाए गए, मगर बावजूद इसके केंद्र सरकार खिलाड़ियों के लिए, इनके बेहतर प्रदर्शन के लिए, इन्हें सुविधाएँ मुहैया कराने पर काम करती रही। ट्रेनिंग से लेकर खेल के बजट तक में कोई कसर नहीं छोड़ी गई कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाने से पहले इन्हें कोई कमी हो।
पीटी उषा खुद इनसे मिलने प्रदर्शनस्थल एक बार गईं लेकिन वहाँ पहलवानों के समर्थकों ने उनके साथ बदसलूकी की। पीटी उषा के साथ हुई अभद्रता कोई अकेला मामला नहीं था। प्रदर्शनकारियों ने इस मुद्दे का इतना राजनीतिकरण कर दिया था कि 2021 के हालात देखने के बावजूद कहा गया कि दिल्ली में सारे ट्रैक्टर लेकर आ जाओ। इसके अलावा जिस प्रदर्शन को पहलवान प्रदर्शनकारी गैर-राजनीतिक बताते रहे थे वहाँ ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे नारे लगाए जा रहे थे। पुलिस ने खुद कहा था कि उन्होंने पहलवानों को 38 दिन सारी सुविधा दी, फिर भी उस जगह को अखाड़ा बनाकर खेला जाता रहा।
यौन उत्पीड़न प्रदर्शन के नाम पर 2023 से लेकर अब तक आगे क्या-क्या हुआ ये हर मीडिया में हैं और ये सवाल भी कि क्या ये सब राजनीति के लिए हो रहा है? आज विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने कॉन्ग्रेस में शामिल होकर उन सवालों का जवाब जरूर दे दिया है, लेकिन राजनीति में करियर शुरू करने के लिए उन्होंने जो रास्ता अपनाया है उसके कारण भविष्य में खेल-खिलाड़ियों की साख पर गंभीर सवाल पैदा हो सकता है।
राजनीति में आना या न आना खिलाड़ी की अपनी इच्छा होती है। पहले भी तमाम खिलाड़ी राजनीति में आते रहे हैं और भविष्य में भी आएँगे। उनमें से शायद कोई विधायक बने, कोई सांसद बने, कोई मंत्री बने या संभव है कोई प्रधानमंत्री भी बन जाए… लेकिन इन लोगों ने जिस तरह से एक यौन शोषण के मामले को आधार बनाकर अपनी राजनीति खेली है उसने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या देश की आम जनता इस तरह उठाए गए मुद्दों पर आगे विश्वास कर पाएगी। अगर कल को किसी खिलाड़ी के साथ खेल क्षेत्र में कुछ भी गलत होता है और वो सामने आकर अपनी बात रखता है तो क्या कोई बिन सबूत के यकीन कर पाएगा कि ये कोई राजनीति नहीं थी, लोग तो उस खिलाड़ी जो वास्तविक में पीड़ित होगा उसे भी शक की निगाह से देखेंगे, उसमें राजनीति खोजेंगे, उस पर सवाल खड़े करेंगे।